अपने अपने सच: भाग 2- पहचान बनाने के लिए क्या फैसला लिया स्वर्णा की मां ने?

अपनी बेटी से मैं अकसर कहने लगी थी, ‘आदमी पर नहीं, पैसों पर भरोसा करना बेटी. आदमी धोखा दे सकता है पर बैंक में जमा पैसा हमें कभी धोखा नहीं देता.’

पता नहीं क्यों मेरी बेटी दिनोदिन उद्दंड होती जा रही थी. उसे भी अपने बाप की तरह मेरे चरित्र पर संदेह होने लगा था. हो सकता है उस की यह सोच इसलिए बनी हो कि मेरी सास मुझे अकसर कुलच्छनी कहा करती थीं. जलीकटी सुनाने पर आतीं तो जबान पर काबू नहीं रहता था, ‘जवानी फट रही है इस औरत की. पता नहीं कहांकहां, किसकिस के बिस्तर पर पड़ी रहती है और यहां आ कर सतीसावित्री बनने का नाटक दिखाती है. मैं क्या अंधीबहरी हूं कि मुझे कुछ दिखाई और सुनाई नहीं देता?’

खूब कलह होती. उन से कहती कि लड़की पर क्या असर पड़ेगा जरा यह तो सोचें. पर वे कतई कुछ न सोचतीं. एकदम भड़क जातीं, ‘तेरी तरह वह भी शरीर का धंधा करेगी और क्या होगा? खानदान का नाम वह भी रोशन करेगी.’

ऐसे माहौल में न खुद मैं रहना चाहती थी, न अपनी बेटी को रखना चाहती थी. जितनी जल्दी हो सके मैं अपनी बेटी को ले कर किसी बड़े शहर में चली जाना चाहती थी, जहां अच्छे अस्पताल हों और मेरे अनुभव और कुशलता के अनुरूप जहां अच्छी तनख्वाह पर नौकरी मिल सके. लड़की का भी यह गंदा माहौल बदले और इस बुढि़या से नजात मिले.

दिल्ली के एक नामी अस्पताल में काम मिला तो मैं ने वहां जाने की तैयारी कर ली. लड़की ने सुना तो तुनकी, ‘आप चली जाएं, मैं यहीं दादी के पास रहूंगी.’

‘क्यों?’ मेरी भवें तनीं.

‘उस बड़े शहर में जहां हमारा कोई परिचित नहीं होगा…कोई मित्र, कोई सहेली नहीं…नया स्कूल होगा…नए लोग और नई बस्ती…वहां कैसे जा कर अपने को जमा पाऊंगी?’ पर मैं ने उस की एक न सुनी.

पति लोचन ने कहीं मेरे मन को बहुत गहरी ठेस पहुंचाई थी. अगर वे मुझे छोड़ कर मेरठ चले जाते तो शायद मेरे अंतर्मन को इतनी चोट न पहुंचती जितनी कि उन के किसी दूसरी औरत के साथ से पहुंची. मुझे वह सब अपनी औरत जाति का अपमान महसूस हुआ. मुझे लगा कि मेरे सौंदर्य, मेरे यौवन, मेरे बदन का यह घोर अपमान है. उन्हीं पर फिदा होने वाली लड़कियां नहीं हैं, मुझ में भी अभी बहुत कुछ ऐसा बचा है जिस के लिए जीभ लपलपाते तमाम लोग बढ़ आएंगे.

यहां इस छोटे से शहर में यह सब संभव नहीं था. एक तो सब हमें जानते थे. दूसरे, सब को हमारी सचाई का पता था. देह पाने के मतलब से भले कोई चोरीछिपे संपर्क बनाता पर दिल से चाहने वाला शायद ही कोई मिलता.

उस बड़े शहर में इस सब की असीम संभावनाएं थीं. सब अपरिचित होंगे. महल्ले में कोई किसी को न जानता है, न किसी की परवा करता है. यहां तो हर वक्त जासूसी नजरें आप का पीछा करती रहती हैं. वहां किसे फुरसत है आप को देखने की? ऐसे माहौल में बहुत आसानी से कोई मन का मीत मिल सकता था. पति लोचन मुझे ऐसा करने से रोक भी नहीं सकते थे.

फिर मैं अभी कुल 36-37 साल की हूं. यह उम्र सतीसाध्वी बनने की नहीं होती…खेलनेखाने की होती है, बशर्ते कोई मनमाफिक मिल जाए.

स्वर्णा : बेटी

शुरू में मां ने एक कमरे का मकान लिया, जिस में उस कमरे के अलावा मात्र एक रसोई व एक छोटा बरामदा और बाथरूम था. मुझे यह नया घर कतई पसंद नहीं आया. मेरी नाराजगी वैसी ही बनी रही. अकसर मां से कहती थी, ‘अपना पहले वाला घर कितना अच्छा था, मेरे लिए पढ़ने का अलग कमरा था और वहां जितनी बड़ी रसोई थी उतना बड़ा तो यहां का कमरा मिला है. मां, यहां कहां तो मैं अपनी पढ़ने की मेज लगाऊंगी, कहां अपनी किताबकापियां रखूंगी.’

मां गुस्से से बिफर उठतीं, ‘इस शहर में लोग हम से भी ज्यादा तकलीफ में रहते हैं. तुम ने अभी जिंदगी को ठीक से देखा कहां है?’

‘हम क्या पूरी जिंदगी तकलीफें उठाने के लिए पैदा हुए हैं?’ मैं मां से उलझती, ‘वहां जब आप नहीं होती थीं तो दादी घर में होती थीं और उन से मैं बातें कर लिया करती थी.’

‘बस कुछ दिनों की बात है,’ मां कहतीं, ‘फिर तेरा एक अच्छे स्कूल में दाखिला हो जाएगा. तेरा पूरा दिन वहां निकल जाएगा…हो सकता है, इस बीच हमें कोई अच्छा सा मकान भी मिल जाए…मैं लगातार कोशिश कर रही हूं…’

‘कहां से अच्छा मकान पा लोगी?’

‘वह सब तुम्हारी नहीं मेरी चिंता का विषय है. तुम सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना,’ मां मुझे चुप करा देतीं.

दिल्ली में अच्छे स्कूल में दाखिला आसान काम नहीं था. मां को न जाने किनकिन के आगे हाथ जोड़ने पड़े. पर उस दिन मैं मां को मान गई जिस दिन वे एक फार्म ले कर घर आईं और मुझ से उस पर हस्ताक्षर कराए.

फार्म पर स्कूल का नाम पढ़ कर मैं चकित हुई और बोली, ‘मां, फीस के इतने सारे पैसे कहां से आएंगे…’

‘कह दिया न, मेरी नजर व्यक्ति पर नहीं हमेशा उस के पैसे पर रहती है क्योंकि दुनिया का एकमात्र सच पैसा है. उसी से आदर मिलता है, उसी से सुविधाएं, उसी से हौसला. तुम्हें आम खाने से मतलब रखना चाहिए, पेड़ गिनने से नहीं,’ मां उत्साह से बोलीं.

मां ने स्कूल की महंगी ड्रेस ही नहीं बनवाई बल्कि दिनरात पहनने के लिए भी मुझे अच्छे कपड़े खरीद दिए और बोलीं, ‘मेरी बेटी फटेहाल रहे यह मुझे मंजूर नहीं है.’

मैं ने अनुभव किया कि मां से मिलने एक ढलती उम्र के सज्जन आया करते हैं. वे अकसर मां को अपनी गाड़ी में बैठा कर कहीं ले जाते हैं. मैं घर पर अकेली रहते हुए डरती रहती. पासपड़ोस से भी मेरा परिचय नहीं हुआ था. स्कूल में लड़के आएदिन की घटनाओं पर चर्चा करते पर मैं किसी से कुछ कहती नहीं थी.

मैं किसी लड़के या लड़की से कहूं तो तब जब कोई गहरा दोस्त बने या पक्की सहेली. अकेली ही पूरे स्कूल में घूमती रहती. पता नहीं, कैसे स्कूल में सब लड़कों को पता चल गया कि मेरी आर्थिक हालत अच्छी नहीं है. उस स्कूल में मैं ज्यादातर बच्चों के बीच एकदम अनफिट थी.

कई महीने बाद मेरी एक सहेली बनी लतिका. मेरी तरह ही वह भी अकेली, शर्मीली, चुपचाप रहने वाली थी. शायद हम दोनों के अकेलेपन ने ही हमें एकदूसरे से जोड़ दिया और कुछ ही दिनों में दो शरीर एक जान बन गए. लोग हमारी दोस्ती पर हंसते पर हमें इस की चिंता नहीं होती.

एक दिन लतिका मुझे अपने साथ लेकर घर गई. उस का बंगला देख कर मैं हैरान रह गई. इस दिल्ली में लोगों के पास इतनी जगह भी है? ऐसे शानदार बंगले भी हैं? इतना लंबाचौड़ा बगीचा, संगमरमर के चमचमाते फर्श. लतिका का अलग आलीशान कमरा, जिस में वह रहती व पढ़ती थी.

सबकुछ देख कर सहम सी गई…इतने बड़े घर की लड़की से दोस्ती कैसे निभेगी? कहां यह, कहां मैं. अपना छोटापन, अपनी असहायता मुझे एकदम दबोचने लगी.

बाथरूम जाने की जरूरत पड़ी तो लतिका के ही बाथरूम में गई और उस की साजसज्जा देख कर तो हैरत में पड़ गई. बाप रे, लतिका ऐसे भव्य बाथरूम में इतने सुखसाधनों के बीच रहती है?

‘तुम ने क्या सोच कर मुझ से दोस्ती की लतिका?’ उस दिन मैं ने उस से पूछा.

‘दोस्ती कुछ सोच कर नहीं की जाती, वैसे ही जैसे प्यार किसी से सोच कर नहीं किया जाता,’ वह हंस दी, ‘असल में मेरी मां बहुत बीमार रहती हैं. मैं उन से बहुत बातें नहीं कर पाती. इसलिए मैं स्कूल में अकेली रहती हूं क्योंकि अकेले रहना मेरी आदत बन गई है. वही आदत मैं ने तुम्हारी देखी तो हम लोग मित्र बन गए.’

‘क्या बीमारी है तुम्हारी मम्मी को?’ यह कह कर मैं लतिका के साथ ही उस की मां के कमरे में गई. वे सचमुच शांत लेटी हुई थीं. चेहरा एकदम पीला. मरी मछली की तरह बिस्तर पर पसरी हुई थीं. वहां पहुंची तो उन्होंने उठने की कोशिश की, फिर किसी तरह तकिए के सहारे बैठीं. मुझे अपने पास बैठाया. मेरे सिर पर हाथ फेरती रहीं, स्नेहासिक्त स्वर में कुछ सवाल पूछे तो मैं ने बिना लागलपेट के सचसच जवाब दे दिए.

वे मुसकराईं, ‘कोई बात नहीं. इस घर में तुम हमेशा आजा सकती हो. इसे अपना ही घर समझो. लतिका अब से तुम्हारी सहेली नहीं, सगी बहन की तरह रहेगी तुम्हारे साथ.’

सुन कर बहुत अच्छा लगा. लतिका भी मुसकराई. उस ने उठने का इशारा किया तो चुपचाप उठ कर उस के साथ उस कमरे से बाहर निकल आई.

लौबी में लगी लतिका के पापा की फोटो देख कर चकित हुई कि इतने सुंदरसुदर्शन व्यक्ति ने ऐसी बेकार थुलथुल औरत से शादी कैसे कर ली? क्या देखा होगा इस में? सोच तो गई पर लतिका से पूछा नहीं. सच तो यह है कि लतिका की मां मुझे कतई अच्छी नहीं लगी थीं.

शाम को लतिका के पापा आए तो आते ही पहले पत्नी के कमरे में गए. लतिका मुसकराई, ‘अब वे अपनी मुटल्लो से पूछेंगे, हाय हनी, कैसी हो? फिर उस के फूलेफूले गाल सहलाएंगे… दवा ली डार्लिंग…सांस लेने में तो कोई तकलीफ नहीं हो रही? उठ कर कुछ दूर चलफिर सकी हो या नहीं?’

सुन कर मैं भी मुसकरा दी, ‘आखिर तो वे पापा की पत्नी हैं और तुम्हारी मां. उन्हें उन की ऐसी परवा करनी भी चाहिए…’

‘हिस्स,’ लतिका हिकारत से बोली, ‘पापा को जो कारखाना मिला है वह वास्तव में मम्मी के पिताजी यानी मेरे नाना का है. वे तो अब इस दुनिया में हैं नहीं. यह ठाटबाट सब मम्मी के पैसों की देन है…इसलिए पापा उन की लल्लोचप्पो करते हैं.’

मैं क्या कहती? ये सब लतिका की मम्मी और उस के पापा के बीच की बातें थीं. मुझे कोई हक नहीं था उन के बीच बोलने का.

कुछ देर बाद पापा बाहर निकल आए और लौबी में आ कर अपनी बेटी लतिका से पूछा, ‘तुम्हारे साथ यह अप्सरा सी लड़की कौन है?’

उन के कहे शब्द मुझे बहुत गहरे तक झनझना गए. इतना अच्छा लगा कि मैं एकदम सुर्खलाल पड़ गई. दर्पण में जब खुद को देखती थी तो मुझे लगता तो था कि मैं बहुत सुंदर हूं…अपनी मां से भी कहीं ज्यादा सुंदर, पर मेरी तरफ कोई लड़का कभी ध्यान नहीं देता था, इसलिए यह सोचने लगी थी कि शायद मुझ में वह बात नहीं है, जो औरों में होती होगी…

आखिर औरों में कोई तो ऐसी खूबी होती होगी जिस कारण लड़कों की आंखें उन्हें ढूंढ़ती रहती हैं, दिखाई देते ही उन की आंखों में चमक पैदा हो जाती है. ऐसा कुछ उन की आंखों में मैं अपने लिए कतई नहीं पाती थी.

‘पापा, यह मेरी सहेली स्वर्णा है. मेरी क्लास में ही पढ़ती है. अब तक स्कूल में सिर्फ यही मुझे अपनी सच्ची दोस्त लगी है,’ लतिका उत्साह से बोली.

‘तो अपनी इस दोस्त को कुछ खिलायापिलाया या सिर्फ बातें ही करती रहीं?’ यह कहने के साथ ही लतिका ने महाराज को आवाज दी और मेज पर चायनाश्ता लगाने को कहा.

बाथरूम से फ्रैश हो कर जब वे बाहर आए. तब तक चायनाश्ता लग चुका था. उन के साथ मेज पर मैं बैठना नहीं चाहती थी. पर सहसा मुझे अमिताभ बच्चन द्वारा बोला गया वह संवाद याद हो आया जो कुछ दिनों पहले अखबारों में चर्चा का विषय बना था, ‘वे राजा हैं, हम रंक. राजा की मरजी है, वह जिस से चाहे दोस्ती रखे, जिस से न चाहे न रखे…हम रंकों को यह हक कहां है?’

नाश्ते में इतनी सारी चीजें मेज पर सजी देख कर मैं चकराई…ऐसी तमाम चीजें थीं जिन्हें मैं पहली बार देख रही थी. यहां तक कि उन्हें खाया कैसे जाएगा, यह भी मुझे मालूम नहीं था. जब पापा या लतिका खाने लगते तभी उन चीजों को लेती थी.

‘पापा प्लीज, देर हो गई है. आप मेरी दोस्त को उस के घर छोड़ देंगे? आप तो शाम को क्लब जाते ही हैं…उधर से ही क्लब निकल जाइएगा…’ लतिका ने पापा से अनुनय किया.

‘ओ.के. डियर. मैं तो अपनी बिटिया के हुक्म का गुलाम हूं…’ कहते हुए वे हंसते- हंसते कपड़े बदलने के लिए अपने कमरे में चले गए. जब मैं उन के साथ बाहर निकली और उन की गाड़ी की तरफ बढ़ी तो चकित रह गई. लतिका के पापा की बगल वाली सीट पर बैठी तो धंस गई.

रास्ते में लतिका के पापा ने मेरे बारे में सबकुछ पूछ लिया और मैं ने भी उन से कुछ छिपाया नहीं. यह सोच कर कि छिपाने से क्या लाभ. अभी वे मुझे ले कर कमरे तक पहुंचेंगे तो सब देखते ही समझ जाएंगे. तेज आदमी हैं. लाखोंकरोड़ों का कारोबार करते हैं. दुनिया की सारी ऊंच- नीच जानते होंगे.

पता नहीं कैसे लतिका के पापा की एक जांघ मेरी गोरीगुदाज जांघ से सट गई. सटते ही भीतर तमाम बिजलियां दौड़ने लगीं. जानबूझ कर मैं ने अपनेआप को सिकोड़ा नहीं क्योंकि तब मेरा मन मचल सा उठा था. मन हो रहा था, खुद को उन के और नजदीक कर लूं…उन से और सट जाऊं और इस अद्भुत छुअन का और सुख लूटूं…

Gum Hain Kisi Ke Pyaar Mein में होगीं ‘उड़ारियां’ फेम एक्ट्रेस की एंट्री

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ काफी दिनों से सुर्खियों में है. शो में जेनरेशन लीप आ गया है. अब शो में सवि और ईशान की प्रेम कहानी दर्शको को खूब पसंद आ रही है. बताया जा रहा है कि शो में जल्द ही नई एंट्री होन वाली है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ ‘उड़ारियां’ फेम एक्ट्रेस नंदिनी तिवारी की एंट्री होन जा रही है.

शो में ईशान की बहन का किरदार निभाएंगी नंदिनी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ‘गुम है किसी के प्यार में’ शो में एक्ट्रेस नंदिनी तिवारी ईशान यानी शक्ति अरोड़ा की बहन का किरदार निभाएंगी. बता दें, इस शो में नंदिनी नेगेटिव किरदार में होंगी. इस खबर के आने के बाद ‘गुम है किसी के प्यार में’ शो को लेकर दर्शकों की एक्साइटमेंट काफी बढ़ गई है. गौरतलब है कि अब तक ‘गुम है किसी के प्यार में’ में ईशान के परिवार को नहीं दिखाया गया है. ऐसे में नंदिनी तिवारी शो में विलेन का किरदार निभाते हुए सवि की जिंदगी में मुसीबतें खड़ी करती दिखाई देंगी.

इन शो में नजर आ चुकी है एक्ट्रेस

‘उड़ारियां’ फेम एक्ट्रेस नंदिनी तिवारी सीरियल ‘उड़ारियां’, मैडम सर’, ‘बालवीर रिटर्न्स’, ‘बड़े अच्छे लगते हैं 2’ और ‘नागिन सीजन 6’ जैसे शोज में भी नजर आ चुकी हैं. इन दिनों सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ सवि और भवानी काकू की तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है.

बीते एपिसोड में दिखाया गया कि सवि आगे पढ़ना चाहती है लेकिन भवानी इसके लिए राजी नहीं है. भवानी चाहती है कि सवि की जल्द से जल्द शादी हो जाए लेकिन सवि अपने करियर में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती है. शो में अभी तक सवि और ईशान की मुलाकात भी नहीं हुई है.

BB Ott 2: अब्दू रोजिक की धमाकेदार एंट्री, घर में आते ही पूजा भट्ट का उड़ाया मजाक

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान का फेमस कंट्रोवर्शियल शो ‘बिग बॉस ओटीटी 2’  इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. बिग बॉस ओटीटी 2 फैंस के बीच धमाल मचा रहा है. शो सिर्फ जियो सिनेमा पर स्ट्रीम हो रहा है, इसके बावजूद दर्शकों का शो के भर-भरकर प्यार मिल रहा है. अभी हाल ही में शो में एक डेयर टास्क हुआ था उस टास्क में आंकाक्षा पुरी और जद हदीद ने फ्रेच किस की थी.

जिसके चलते शो काफी सुर्खियों में है. ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में मशहूर तजाकिस्तानी सिंगर और बिग बॉस 16 कंटेस्टेंट अब्दु रोजिक (Abdu Rozik) ने धमाकेदार एंट्री मारी है. जानकारी के मुताबिक अब्दु रोजिक ने ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर बीबी हाउस में आए है. अब्दु के आने से शो में चार चांद लग गए है.

घरवालों ने अब्दु का किया स्वागत

बिग बॉस ओटीटी 2 में तजाकिस्तानी सिंगर और बिग बॉस 16 कंटेस्टेंट अब्दु रोजिक ने बीबी हाउस में धमाकेदार एंट्री की है. अब्दु के आ जाने से घर में रौनक आ गई है. सभी घर के कंटेस्टेंट्स अब्दु के साथ मस्ती करते नजर आ रहे है.

मनीषा के साथ मस्ती करते दिखे अब्दु रोजिक

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि अब्दु रोजिक और मनीषा रानी जमकर मस्ती करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में मनीषा अब्दु से कह रही हैं कि मेरे दिल में जो भी जाता है, वो बाहर निकल जाता है, लेकिन आप अंदर जाकर बस जाओगे. केवल इतना ही नहीं मनीषा अब्दु से कहती हैं कि जब भी आप मुझे मिस करो तो आप मुझे कॉल कर लेना.

पूजा भट्ट और फलक नाज की उड़ाई खिल्ली

‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में अब्दु रोजिक के आ जाने से घर में काफी रौनक आ गई है. ऐसे में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं. इन वीडियोज में अब्दु घरवालों के साथ मस्ती करते नजर आ रहे हैं. एक वीडियो में देखा जा सकता है कि जब अब्दु को जद हबीब और पूजा भट्ट मिलकर बता रहे हैं कि फलक नाज ने एक टास्क के दौरान ‘कच्चे प्याज’ खाए, इस पर अब्दु रोजिक कहते हैं, “ये तो कुछ भी नहीं है. मैंने अपने सीजन में कच्चे अंडे खाए थे.

औकात: भाग 3- जब तन्वी के सामने आई पति की असलियत

मगर तन्वी को उन का लार टपकाता, बात करने का लहजा बिलकुल पसंद नहीं

आया. उसे शराब और शराब पीने वालों से सख्त नफरत थी. वह एक मध्यवर्गीय ऐसे सिद्धांतवादी परिवार से थी जहां सोशल ड्रिंकिंग तक को बहुत बुरा समझ जाता था. उस ने बेहद सपाट स्वरों में उन महानुभाव से कह दिया, ‘‘सर, मैं ऐसी पार्टी ऐंजौय नहीं करती, न ही पीनापिलाना पसंद करती. सो मैं यहीं कोने में ठीक हूं. प्लीज कैरी औन ऐंड ऐंजौय द पार्टी.’’

फिर पति पर आंखें तरेरते हुए बोली, ‘‘अब बस भी करो पदम. कितना पीयोगे. एक के बाद एक पैग पीए जा रहे हो. फिर कल हैंगओवर होगा और फिर मुझे ही परेशान करोगे.’’

स्थिति की नजाकत देखते हुए उस वक्त

तो पदम चुप रहा, लेकिन घर लौट कर उस ने तन्वी को आड़े हाथों लिया, ‘‘तुम बौस से कायदे से बात नहीं कर सकती थी? उस ने तुम से जरा साथ बैठने के लिए ही तो कहा था. एकाध ड्रिंक ले लेती तो क्या गजब हो जाता? जानती भी हो, कितनी ऊंची पोस्ट पर हैं वे? वे मेरा इमीडिएट बौस हैं. उफ, मेरा सारा बनाबनाया इंप्रैशन बिगाड़ दिया.’’

‘‘मुझे तुम्हारे बौस का बात करने का लहजा कतई पसंद नहीं आया. उस की नजर और नीयत दोनों में ही मुझे खोट दिखा. बस इसलिए मैं ने उसे लिफ्ट नहीं दी.’’

‘‘आखिर तुम अपनेआप को समझती क्या हो? जन्नत की हूर? बड़ी आई लिफ्ट नहीं देने वाली. अरे वह मेरा सीनियर है, सीनियर. यह बात तुम्हारी समझ में क्यों नहीं आती मूर्ख औरत? उस के हाथ में मेरी कौन्फिडैंशियल रिपोर्ट है. कहीं मुझ से खुंदक खा कर वह बिगाड़ दी तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा. तुम कल मेरे साथ उस के घर चलोगी ताकि बिगड़ी बात बन जाए.’’

‘‘मैं उस लंपट इंसान के घर हरगिज नहीं जाऊंगी. मुझे उस की नजर ठीक नहीं लगी. हम औरतों की छठी इंद्रीय एक नजर में किसी की भी नीयत को भांप लेती है.’’

‘‘कोई लंपट नहीं हैं वे. अच्छेभले जैंटलमैन हैं. तुम्हें पता भी है, वे एक बेहद संभ्रांत परिवार

से हैं. वह आज तुम से साफसाफ नाराज हो कर गए हैं. तुम्हें कल मेरे साथ उन के यहां चलना

ही होगा.’’

पदम की इस जिद पर तन्वी ने उस वक्त

तो कुछ नहीं कहा, लेकिन अगले

दिन तन्वी के उस के साथ बौस के घर जाने के लिए मना करने पर उन दोनों में जम कर तूतू,

मैंमैं हुई.

‘‘औकात दो कौड़ी की और नखरे सौ मन के. तुम कहीं औफिसर होती तो न जाने क्या कहर ढाती. चुपचाप सीधेसीधे उन के घर जाने के लिए तैयार हो जाओ, नहीं तो तुम्हारा वह हश्र करूंगा कि जिंदगीभर याद रखोगी.’’

‘‘मैं कोई तुम्हारी बांदी नहीं जो तुम्हारी हर बात आंखें मूंद मान लूंगी, पदम. अफसर हो तो औफिस में. घर में तुम मेरे पति हो, जिस का फर्ज है कि वह हर हाल में अपनी वाइफ का मान बनाए रखे, लेकिन तुम्हें मेरे मानसम्मान से क्या लेनादेना? मैं ऐसे इंसान की लल्लोचप्पो हरगिज नहीं करूंगी, जिस की नजरों में खोट हो. तुम मेरा क्या हश्र करोगे, मैं अभी इसी वक्त तुम्हें और तुम्हारे घर को छोड़ कर जा रही हूं. कर लो जो करना है. मैं तुम जैसे इंसान को अपना पति मानने से इनकार करती हूं, जो अपनी पत्नी तक को उस की हैसियत के तराजू पर तोलता है,’’ कहते हुए आननफानन में उस ने अपना बैग पैक किया और मायके चली गई.

कानों में अनवरत पदम के अल्फाज गूंज

रहे थे, ‘‘औकात दो कौड़ी की और नखरे सौ

मन के. तुम औफिसर होती तो न जाने क्या

कहर ढाती.’’

पदम की नजरों में उस का कोई मोल न था. उसे वास्ता था तो महज हैसियत से. तो अब वह उसे अपनी हैसियत बना कर दिखाएगी. उस से बड़ा अफसर बन कर दिखाएगी. वह मन ही मन प्रण ले रही थी, कुछ भी हो जाए, अब उसे पदम से बड़ा पद हासिल करना ही है. पदम ने उसकी जूनियर पोस्ट को ले कर कितना बावेला मचाया. उस के चलते उसे कदमकदम पर प्रताडि़त किया. तो अब वह कड़ी मेहनत कर उस से बड़ा पद हासिल कर के ही दम लेगी. अब यही उस का मकसद होगा और अपना लक्ष्य पूरा करना उस

की जिंदगी का एकमात्र ध्येय. इस सोच ने उसे दिली सुकून पहुंचाया और वह बाजार जा कर अपने बैंक के डिपार्टमैंटल ऐग्जाम्स की किताबें खरीद लाई.

उस दिन के बात से तन्वी की जिंदगी बस नौकरी और डिपार्टमैंटल ऐग्जाम्स की तैयारी के इर्दगिर्द सिमट गई. नियत अवधि पर बैंक और डिपार्टमैंटल ऐग्जाम्स में अपनी परफौर्मैंस के दम पर प्रमोशन लेना उस का जनून बन गया.

वक्त अपनी चाल से आगे बढ़ता गया. आज तन्वी की जिंदगी की एक महत्त्वाकांक्षा पूरी हुई थी. आज वह पदम की भांति अकसर बन कर ट्रांसफर पर दूसरे शहर फ्लाइट से जा रही थी. प्लेन मंथर गति से आसमान में ऊपर चढ़ रहा था. उसी के साथ जेहन में पुरानी खट्टीमीठी यादों के पैराशूट खुलने लगे थे.

पदम उस का बचपन का साथी था. पदम का घर उस की कालोनी में ही था. दोनों ने एक ही स्कूल, कालेज से पढ़ाई की. पदम स्कूल के जमाने से उसे पसंद करता था. वक्त के साथ वह भी उसे चाहने लगी थी.

कालेज की पढ़ाई खत्म होने पर पदम ने एमबीए कर मैनेजर के पद पर एक बैंक जौइन किया और उस ने क्लर्क के पद पर एक दूसरा बैंक जौइन किया. बस तभी से दोनों की राहों में कांटे बिछने लगे.

जब से पदम औफिसर बना था, उसे यह बात शिद्दत से चुभ रही थी कि उस की भावी पत्नी उस से जूनियर पद पर है. वह इस बात को किसी तरह से स्वीकार नहीं कर पा रहा था और उस के मन का असंतोष यदाकदा उस की बातों से झलक पड़ता.

तन्वी को आज भी अच्छी तरह से याद है, उस दिन उन के कौमन फ्रैंड्स की एक गैटटुगैदर में किसी फ्रैंड ने उस से उन दोनों की पोस्ट पूछी, ‘‘सुना तुम दोनों को बैंक में बहुत ऊंची पोस्ट पर पोस्टिंग मिली.’’

पदम ने मुंह बनाते हुए उस पर कटाक्ष किया, ‘‘हम दोनों को नहीं, बस मुझे. इन मैडम को फैशन, बनाव, शृंगार और अपनी सहेलियों से फुरसत मिले, तब तो ये पढ़ने की जहमत उठाएं. अब बिना पढे़ तो क्लर्की से ज्यादा कुछ नहीं मिलने वाला. हमारी मैडम तो क्लर्क ही बन पाई हैं. मुझे अलबत्ता मैनेजर की पोस्ट पर अपौइंमैंट मिला है.’’

पदम के इस तंज पर तन्वी कट कर रह गई और कई दिनों तक बेहद आहत महसूस करती रही. पदम का उसे नीचा दिखाने का यह लहजा बेहद तकलीफदायक लगा. इसी के साथ उस

की उस पर रोब झड़ने की आदत भी उसे त्रस्त करती, लेकिन पदम के साथ पलीबढ़ी तन्वी

सोच नहीं पा रही थी कि वह इस सब से कैसे छुटकारा पाए.

दोनों के परिवारों में बेहद घनिष्ठता थी और उन की ओर से उन के संबंध की बाबत कोई ऐतराज नहीं था. दोनों ही परिवार उन की शादी को ले कर बहुत उत्साहित थे. दोनों के घरों में

उन दोनों की नौकरी लगने के बाद विवाह की योजना बनने लगी थी, लेकिन तन्वी की जब

से नौकरी लगी थी, वह पदम के साथ अपने

रिश्ते को ले कर कुछ असहज फील करने

लगी थी. जबतब अपनी क्लर्की को ले कर

सुनाए गए उस के ताने, उलाहने उसे बेहद असुरक्षित कर देते.

उन के संबंधों के ताबूत में आखिरी कील तब ठुकी जब सगाई से माहभर पहले एक दिन

पदम ने तन्वी के घर पर कई रिश्तेदारों की मौजूदगी में उस की कड़ी आलोचना की. उस के सहज और बिंदास स्वाभाव की जम कर बुराई करी. उस पर अनेक आक्षेप लगाए कि उस के बारबार चेताने पर भी उस ने बैंक में अफसरी की परीक्षा की पूरी मेहनत से तैयारी नहीं की और महज क्लर्क बन कर उसे शर्मिंदा कर दिया.

तन्वी के मातापिता को भावी दामाद के मुंह से अपनी बेटी की बुराई सहन नहीं हुई. घर के बड़ेबुजुर्गों ने इस बात का बहुत बुरा मनाया

और इस की चर्चा तन्वी से की. तन्वी पहले से

ही पदम की बात बात पर उस की उंगली करने की आदत से मन ही मन घुट रही थी. उस ने

भी उन्हें उस की बहानेबहाने पर ताने कसने

और धौंस जमाने की आदत के बारे में बताया. उस की बातें सुन कर मातापिता ने उसे सम?ाया कि जो लड़का शादी से पहले उस की बुराई करने से बाज नहीं आ रहा, वह उसे शादी के बाद कैसे खुश रखेगा?

तन्वी ने इस मुद्दे पर बहुत संजीदगी से सोचा और इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मातापिता सही कह रहे हैं और दिल पर पत्थर रख कर उन के कहे अनुसार उस से सारे संबंध तोड़ लिए.

कुछ समय बाद मातापिता ने एक सीए लड़के सजल को उस के लिए पसंद किया. तन्वी और सजल ने 5-6 माह डेटिंग की और तन्वी को पदम की अपेक्षा सजल हर माने में बेहतर लगा.  वह एक केयरिंग, सहृदय युवक था, जिस ने तन्वी को हमेशा अपने बराबर का दर्जा दिया.

नियत वक्त पर दोनों की सगाई हुई और शादी का दिन आ पहुंचा. उस दिन की याद कर गले में एक सुबकी उठी, और तभी  प्लेन में पायलट के उतरने की घोषणा के साथ वह वर्तमान में लौट आई.

अकसर बनने के बाद उस की जिंदगी मात्र

बैंक, अपने औफिशियल उत्तरदायित्यों के निर्वाह के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई. अकसर के तौर पर नियुक्ति के बाद पूरी बैंक शाखा की जिम्मेदारी उस के ऊपर आ गई. वह रोजाना औफिस के नियत वक्त से 2 घंटे पहले बैंक पहुंच जाती और अपनी सीट का काम करती. पूरा दिन कब व्यस्तता में गुजर जाता, उसे भान न होता. अपने नियत टार्गेट पूरा करना मानो उस की जिंदगी का मकसद बन गया था, जिस में वह सुबह से शाम तक जीजान से जुटी रहती.

तन्वी अपने मीठे, सहृदय और सहयोगी रवैए से अपनी शाखा के सभी छोटेबड़े कर्मचारियों को अपना मुरीद बना लिया. पूरा स्टाफ उस की बढ़ाई करते नहीं थकता, साथ ही वह अपनी बैंक के उपभोक्ताओं के लिए हर समय उपलब्ध रहती. अपने स्टाफ द्वारा उन्हें बेहतरीन सेवा प्रदान करवाती. जीजान से उन की शिकायतों का निबटारा करती. सो कुछ अपवादों को छोड़ कर शाखा में आने वाली जनता भी उस के और उस के बैंक के स्टाफ के कार्य से बहुत हद तक

संतुष्ट रहती.

बैंक की ओर से तन्वी को बड़ा क्वार्टर आवंटित हुआ, लेकिन अकेले सांयसांय करता घर उसे काटने को दौड़ता. जब भी अकेली होती, अतीत की काली छाया उस के संपूर्ण वजूद को घेर लेती और उस का दम घुटता. सुकून मिलता तो महज अपने काम में. सो वह सुबहसवेरे

ठीक आठ बजे अपनी शाखा में पहुंच जाती और रात के 9 बजे तक अपने काम में लगी रहती. अमूमन रात के 9 तक तनमन से क्लांत घर पहुंचती और खापी कर, कुछ देर अपनी मां,

पिता और बहनों से बात कर नींद के आगोश में चली जाती. उस का काम उस का जनून बन

गया था, जिस में व्यस्त रह कर उसे आत्मिक सुकून मिलता.

उधर पदम ने तन्वी से अलगाव के वर्षभर बाद ही उस से तलाक ले कर दूसरा विवाह किया, लेकिन उस की दूसरी पत्नी स्वभाव से उस की डुप्लिकेट थी, साथ ही वह बेहद ?ागड़ालू भी थी. इस वजह से आए दिन उन के बीच महाभारत मचा रहता, जिस की वजह से यह शादी भी मात्र 2 वर्षों तक चली और दूसरी पत्नी ने कोर्ट में उस के विरुद्ध एक भारी ऐलीमनी की मांग करते हुए तलाक का केस फाइल कर दिया.

इस सब का असर उस की नौकरी पर पड़ा और वह अपनी नौकरी में अपना बैस्ट न दे पाया, साथ ही उस का बड़बोलापन, रोब भरा व्यवहार, बेमानी, ऐंठ और अकड़ से उस का स्टाफ और उस की शाखा के उपभोक्ता उस से निरंतर असंतुष्ट रहते. उस के सीनियर भी इन्हीं सब वजहों से उस से कोई खास खुश न रहते. इस सब से उस की परफौर्मैंस अछूती न रही और उस की सफलता का ग्राफ निरंतर घटता गया.

साल दर साल यों ही गुजरते गए. आज

एक बार फिर तन्वी की जिंदगी का एक बेहद खास दिन था. पिछले माह ही तन्वी का प्रमोशन हुई थी और आज वह पदम से 2 पायदान ऊपर की अफसर बन उसी के बैंक की कालोनी में ठीक उस के सामने वाले क्वार्टर में रहने आ

रही थी.

पदम अपने ड्राइंगरूम में बैठा हुआ अखबार पढ़ रहा था कि तभी घर के सामने शोरगुल सुन कर उस ने अपनी खिड़की से बाहर ?ांका. किसी के घर के सामान से लदा ट्रक उस के क्वार्टर के ठीक सामने रुका था.

तभी उस ने देखा तन्वी अपनी शानदार चमचमाती गाड़ी से उतर रह थी. आत्मविश्वास

से भरी हुई वह सामान ढोने वाले मजदूरों को कड़क आवाज में निर्देश दे रही थी. बैंक के

कुछ जूनियर कर्मचारी उस के सामने हाथ बांधे खड़े थे.

तन्वी को यों इतने रोबदाब से कर्मचारियों के मध्य खड़ा देख पदम के सीने पर मानो मुक्का पड़ा. ?ाटपट चप्पलें पहन उस की अगवानी करने बाहर आ गया. आखिर वह उस की इमीडिएट बौस थी.

पूर्व पत्नी के नए अवतार को देख कर पदम दंग रह गया था. इतने बरसों बाद भी उस के चेहरे का नमकीन जादू बरकरार था. बस चेहरे पर तनिक संजीदा गांभीर्य आ गया था और सिर पर रुपहली चांदनी छिटक आई थी, जिस ने उस के संपूर्ण वजूद को एक गांभीर्य पूर्ण ठहराव प्रदान किया था.

उस दिन के बाद से एक ही कालोनी में रहते हुए अकसर उस का सामना उस से हो जाता. कभी वह शाम को कालोनी के कुछ बच्चों के साथ हंसते, चहकते बैडमिंटन खेलती नजर आती तो कभी टैनिस.

उस दिन तन्वी अचानक उस के घर आई, ‘‘पदम, अगले मंडे मेरी 2 किताबों का टाउन हौल में विमोचन है. तुम्हें जरूर आना है. याद रखना, अगले सप्ताह. आज मैं कुछ फ्रैंड्स के साथ मलयेशिया के ट्रिप पर जा रही हूं. संडे को लौटूंगी. फिर तुम्हें रिमाइंड करने का टाइम नहीं होगा. इसलिए भूलना मत.’’

‘‘किताबें? यह तुम ने लिखना कब से शुरू कर दिया? पहले तो कभी देखा नहीं कि तुम लिखती हो?’’

एक पल को उन की आंखें मिली थीं और उस पल में मानो समय थम सा गया था.

तभी उससे नजरें हटाते हुए तन्वी उस से बोली, ‘‘पिछले कुछ सालों से निरंतर लिख रही हूं. अब तो लिखना मेरी जिंदगी है. एक दिन भी न लिखूं तो अधूराअधूरा लगता है.’’

पदम अगले मंडे टाउन हौल पहुंचा. कैमरे की चमकती फ्लैश लाइटों के बीच अनेक मशहूर लेखकों और शहर की प्रमुख हस्तियों के बीच तन्वी की किताबों का विमोचन हुआ. आत्मगौरव के उन क्षणों में उस वक्त उस के मुसकराते चेहरे की अपूर्व दमक देखने लायक थी. हौल में अनवरत तालियां बज रही थीं.

अनायास मन में बरसों पहले उस की कलहकलेश और चिल्लाहट सुनती, भीगी आंखों वाली बेबस तन्वी और आज की भरपूर आत्मविश्वास से खिलीखिली प्रतिष्ठित लेखिका और वरिष्ठ अफसर तन्वी का चमकता चेहरा देख पदम के कानों में उस से कहे गए उस के ही अपने शब्द गूंजने लगे कि आखिर तुम्हारी औकात क्या है? आज उसे औकात के असली माने समझ आ गए थे.

Monsoon में स्किन की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए, ये 6 होम मेड टिप्स

Monsoon का मौसम भीषण गर्मी से राहत तो देता है लेकिन हमारी त्वचा के लिए कई चुनौतिया भी लेकर आता है. बढ़ी हुई उमस, बारिश के पानी के लगातार संपर्क में रहने और तापमान में बदलाव से त्वचा संबंधी विभिन्न समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे कई घरेलू उपचार हैं जो इन समस्याओं को प्राकृतिक रूप से कम करने में मदद कर सकते हैं. इस लेख में हम Monsoon के दौरान त्वचा की 10 समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए घरेलू उपचार बताएंगे.
याद रखें कि अच्छी त्वचा देखभाल के लिए दिनचर्या बनाए रखें, हाइड्रेटेड रहें और अपनी त्वचा को बरसात के पूरे मौसम में स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए बाहरी चीजों से बचाएं.

1. मुंहासे

Monsoon के दौरान अत्यधिक नमी रोम छिद्रों को बंद कर सकती है और मुंहासे निकलने का कारण बन सकती है. इससे निपटने के लिए दिन में दो बार अपने चेहरे को हल्के क्लींजर से साफ करें और गंदे हाथों से अपने चेहरे को छूने से बचें. प्राकृतिक एंटी बैक्टीरियल उपाय के रूप में नीम और हल्दी के पेस्ट का मिश्रण लगाएं.

2. फंगल इन्फेक्शन

नम वातावरण के कारण दाद और एथलीट फुट जैसे फंगल इन्फेक्शन अधिक आम हो जाते हैं. अपनी त्वचा को सूखा और साफ रखें, खासकर इन्फेक्शन की संभावना वाले जगहों में. प्राकृतिक रूप से फंगल इन्फेक्शन को शांत करने और उसका इलाज करने के लिए नारियल तेल और टी ट्री ऑयल का मिश्रण लगाएं.

3. खुजली

उमस और नमी एक्जिमा बढ़ा सकती है. त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए सौम्य, खुशबू रहित मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें. सूजन और खुजली को कम करने के लिए एलोवेरा जेल या कैमोमाइल टी का कंप्रेस लगाएं.

4. एलर्जी

मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और फफूंदी की वृद्धि से एलर्जी और त्वचा में जलन हो सकती है. अपने रहने के स्थान को साफ़ और हवादार रखें. त्वचा को शांत करने के लिए खीरे या गुलाब जल की ठंडी सिकाई जैसे प्राकृतिक उपचार का उपयोग करें.

5. बेरंग त्वचा

नमी और बारिश से त्वचा सुस्त और बेजान दिखाई दे सकती है. मृत कोशिकाओं को हटाने और उसकी चमक बढ़ाने के लिए अपनी त्वचा को नियमित रूप से एक्सफोलिएट करें. बेसन, दही और एक चुटकी हल्दी का उपयोग करके एक घरेलू स्क्रब तैयार करें. इसे अपनी त्वचा पर धीरे-धीरे मालिश करें और गुनगुने पानी से धो लें.

6. सूखे और फटे हुए होंठ

मानसून के मौसम में होंठ सूखने और फटने की समस्या हो सकती है. खूब सारा पानी पीकर हाइड्रेटेड रहें और मोम या नारियल तेल जैसे तत्वों से युक्त प्राकृतिक लिप बाम का उपयोग करें. अपने होठों को चाटने से बचें क्योंकि इससे रूखापन बढ़ सकता है.

Monsoon special: किचिन को मानसून फ्रेंडली बनाने के 6 टिप्स

मानसून पूरे देश में अपनी दस्तक दे चुका है. बारिश जब होती है तो पूरी फिज़ा में ठंडक घुल जाती है और मौसम बहुत सुहावना हो जाता है. सुहावने मौसम में चाट पकौड़ी, समोसा कचौड़ी खाने का भी अपना अलग ही मजा होता है परन्तु जिस किचिन में इतने टेस्टी खाद्य पदार्थ बनते हैं उस किचिन की चीजों को  इस मौसम में बारिश की नमी से बचाना काफी चुनौती भरा होता है क्योंकि बारिश की नमी से खाने पीने की अनेकों वस्तुएं नमीयुक्त होकर ख़राब हो जातीं हैं और फिर अक्सर वे खाने योग्य भी नहीं रहतीं परन्तु यदि बारिश आने से पूर्व ही अपनी किचिन को बारिश के लिए तैयार कर लिया जाये तो काफी आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है. आज हम आपको ऐसे ही टिप्स बता रहे हैं जिससे आप किचिन को नमी के प्रभाव से बचा जा सकता है-

  1. दाल चावल

दाल और चावल ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें प्रत्येक घर में लगभग हर रोज बनाया जाता है. बारिश की नमी से ये ख़राब हो जाते हैं और कई बार तो फफूंद तक लग जाती है इसलिए इन्हें नमी से बचाना चाहिए. दालों को एयरटाइट जार में भरकर पारे की एक गोली को सूती कपड़े में बांधकर डाल दें इससे ये काफी लम्बे समय तक खराब नहीं होंगी. पारे की गोलियों को किसी भी केमिस्ट की दुकान से आसानी से खरीदी जा सकतीं हैं.

चावल को किसी बड़ी परात में फैलाएं और 5 किलो चावल में 2 टेबल स्पून बोरिक पाउडर हथेली से अच्छी तरह रगडकर मिला दें. फिर इसे भी एयरटाइट जार में भरकर रख दें. बनाते समय 2-3 बार धोकर प्रयोग करें.

2. शकर, गुड और नमक

बारिश में शकर और गुड में बहुत जल्दी चीटियां हो जातीं हैं इनसे बचने के लिए शकर और गुड के डिब्बे में कुछ लौंग डाल दें लौंग की खुशबू से चीटियां भाग जातीं हैं.

नमक में चीटियां तो नहीं होतीं परन्तु सीलन आ जाती हैं नमी से इसे बचाने के लिए नमक में 1/4 टीस्पून चावल के दाने मिला दें, चावल के दाने नमक की सारी नमी को सोख लेंगें.

3. बिस्किट और नमकीन

बारिश के दिनों में बिस्किट का पैकेट खोलते ही उनमें नमी आ जाती है.इसलिए इन्हें खोलते ही एयरटाइट जार में भर दें साथ ही उतने ही बिस्किट डिब्बे में निकालें जितने एक बार में समाप्त हो जायें. यदि प्लेट में बिस्किट बच ही गये हैं तो उन्हें वापस डिब्बे में रखने के स्थान पर फ्रिज में रखें इससे बिस्किट नरम नहीं पड़ेंगे.

इसी प्रकार नमकीन तथा अन्य सभी स्नैक्स को भी एयरटाईट जार में भरकर रखें और जितना एक बार में समाप्त हो जाये उतना ही निकालें.

4. आटे

आजकल प्रत्येक घर में भांति भांति के आटे होते हैं इन्हें कीड़ों से बचाने के लिए इनमे 2-3 तेजपात के पत्ते डाल दें तेजपात के पत्ते की तेज सुगंध से कीड़े नहीं लगते कीड़ों की उत्पत्ति तभी होती है जब आटे में नमी होती है इसलिए आटे को एयर टाईट डिब्बे में भरकर रखें और यदि डिब्बा एयरटाईट नहीं है तो डिब्बे में प्लास्टिक लगा दें.

5. कॉफ़ी

बारिश के दिनों में कॉफ़ी में यदि जरा भी नमी प्रवेश कर जाती है तो वह पूरी ही जम जाती है इसलिए इन दिनों में कॉफ़ी की शीशी में 8-10 दाने चावल के डाल दें..चावल के दाने कॉफ़ी की पूरी नमी को सोख लेंगें. आप कॉफ़ी की शीशी को फ्रिज में भी रख सकतीं हैं.

6. डस्टर और गूंजे

इन दिनों में किचिन में सूती और जल्दी सूखने वाले कपड़ों का प्रयोग करें. आप चाहें तो घर के पुराने कपड़ों को काटकर भी प्रयोग कर सकतीं हैं. इन्हें साफ करने के लिए सप्ताह में एक बार गर्म पानी में 1 टीस्पून वेनेगर, 1 टीस्पून बेकिंग सोडा और 1 टीस्पून सर्फ डालकर 4-5 घंटे रखकर ब्रश से रगडकर साफ कर लें.

बालों को सॉफ्ट करने के लिए ट्राई करें ये 5 होम मेड सीरम

हर महिला चाहती है कि उसके बाल लम्बे और घने हो लेकिन उसके साथ साथ बाल काफी सॉफ्ट और सिल्की भी हों. क्योंकि अगर बाल ज्यादा चिपचिपे रहेंगे तो हर समय सिर में इरीटेशन रहेगी और अगर बाल ज्यादा ड्राई रहेंगे तो बहुत ज्यादा उलझेंगे जिससे बाल झड़ने का काफी ज्यादा रिस्क रहता है. इसलिए बालों को सॉफ्ट और स्मूद बनाने के लिए जरूरी है कि आप उनकी केयर अच्छे से करें। बहुत सी महिलाएं बालों में सीरम लगाना बहुत जरूरी मानती है. कुछ सीरम को आप घर पर ही बना सकती हैं. तो आइए जानते हैं बालों को सॉफ्ट और स्मूद बनाने के लिए यह सीरम जोकि घर पर बनाए जा सकते हैं, की रेमेडी.

  1. नारियल के तेल का सीरम 

नारियल और बादाम के तेल की बराबर मात्रा लें. इस तेल को अब थोड़ा सा गर्म कर लें और मिक्स कर लें. इसके बाद इस मिश्रण को आप बालों में लगाना शुरू कर दें और बालों की बीच की लंबाई में इसे अच्छे से लगाएं. इसे कुछ घंटों तक ऐसे ही रहने दें और उसके बाद सिर धो लें. नारियल का तेल बालों को मॉश्चराइज करता है और पोषण प्रदान करता है जिस वजह से बाल स्मूद और सॉफ्ट होते हैं.

2. एलो वेरा सीरम 

2 चम्मच फ्रेश एलो वेरा जेल में एक चम्मच जोजोबा ऑयल को मिक्स कर दें. थोड़े थोड़े गीले बालों में इस मिश्रण को अप्लाई कर लें. शुरुआत में इस मिश्रण को बालों की जड़ों में लगाना शुरू करें और उसके बाद नीचे तक लाएं. आधे घंटे तक इसे लगा रहने दें और उसके बाद सिर धोएं. एलो वेरा में हाइड्रेटिंग और सूदिंग गुण होते हैं जो बालों की सेहत के लिए लाभदायक होते हैं.

3. एवोकाडो सीरम 

एक एवोकाडो को अच्छे से मैश कर लें और उसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल डाल कर एक स्मूद पेस्ट बना लें. हल्के गीले बालों में इस मिश्रण को लगाना शुरू करें और जड़ों से लेकर बालों की लंबाई तक लगाएं. आधे घंटे तक इसे लगा रहने दें और उसके बाद बालों को धो लें. एवोकाडो में हेल्दी फैट और विटामिन होते हैं. इससे बालों को हाइड्रेशन और सॉफ्टनेस प्राप्त होती है.

4. दही और शहद का सीरम 

दो चम्मच प्लेन दही ले और उसके अंदर एक चम्मच शहद मिला दें. इस मिश्रण को अब बालों में लगाएं और बालों के एंड में इसका ज्यादा फोकस रखे. इसे 20 से 30 मिनट तक लगा रहने दें और इसके बाद अच्छे से बालों को धो लें. दही और शहद दोनों में ही मॉइश्चराइजिंग गुण होते हैं. यह बालों को सॉफ्ट करने में और उन्हें स्मूद बनाने में मदद करने में लाभदायक हैं.

5. ऑलिव ऑयल और अंडे का सीरम 

एक अंडे को अच्छे से फेंट लें और उसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल को मिक्स कर दें. इस मिश्रण को एक समान रूप से अपने सारे बालों में लगा दें. इसे आधे घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें. इसके बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें. यह सीरम बालों को मॉइश्चराइज करने में और उन्हें कंडीशन करने में मदद करता है जिसकी मदद से सॉफ्ट और मैनेजबल बाल पाना आसान होता है.

यह सब सीरम एकदम प्राकृतिक हैं और आपके बालों के लिए एकदम सुरक्षित और बहुत लाभदायक हैं इसलिए इनमें से कोई भी रेमेडी आप घर पर ही ट्राई कर सकती हैं और बालों पर अप्लाई कर सकती हैं.

अपने टिफिन के लिए बनाएं ये डिशेज

टिफिन चाहे बच्चों का हो या बड़ों का रोज रोज क्या रखा जाए ये हर सुबह की समस्या होती है. सुबह की भागमभाग में यूं भी नाश्ता ठीक से नहीं हो पाता इसलिए लंच का पौष्टिक होना आवश्यक होता है. यूं तो बाजार में अनेकों रेडी टू ईट फ़ूड आइटम्स की बाजार में भरमार है परन्तु बाजार में उपलब्ध फ़ूड आइटम्स में उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित करने के लिए जमकर प्रिजर्वेटिव डाला जाता है जो सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं.

इसके अतिरिक्त बाजार में मिलने वाले खाद्य वस्तुएं बजट फ्रेंडली और हाई जिनिक भी नहीं होतीं इसलिए जहां तक सम्भव हो हमें लंच के लिए घर पर बनी खाद्य वस्तुएं अधिक से अधिक बनानी चाहिए. आज हम आपको ऐसी ही कुछ रेसिपी बनाना बता रहे हैं जिन्हें आप कम समय में घर में उपलब्ध सामग्री से ही बड़ी आसानी से बना सकतीं हैं तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

  1. ओट्स चोको स्टिक

कितने लोगों के लिए 6
बनने में लगने वाला समय 10 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

  1. डार्क चॉकलेट बार 100 ग्राम
  2. मिल्क चॉकलेट बार 100 ग्राम
  3. शहद 1 टेबलस्पून
  4. कॉर्नफ्लेक्स 1/2 कप
  5. ओट्स 1/2 कप
  6. परमल 1/2 कप
  7. बारीक कटे बादाम और अखरोट 1/2 कप
  8. नारियल बुरादा 1 कप

विधि

कॉर्नफ्लेक्स और परमल को मिक्सी में हल्का सा चला लें. डार्क और मिल्क चॉकलेट बार को छोटा छोटा तोडकर एक बाउल में डालें. अब एक ऐसे भगोने या पैन में 1 लीटर पानी डालें जिसमें चॉकलेट वाला बाउल रखा जा सके. जब पानी गर्म होने लगे तो चॉकलेट का बाउल भगोने में रखकर चॉकलेट के पूरी तरह पिघलने तक चलायें.

बाउल को गैस से उतारकर पिघली चॉकलेट में परमल, कॉर्नफ्लेक्स, शहद, कटे बादाम, अखरोट और ओट्स डालकर अच्छी तरह मिलाकर सिल्वर फॉयल पर फैलाएं. चाकू से लम्बाई में निशान लगायें, फ्रिज में आधे घंटे के लिए सेट होने रखें और आधे घंटे बाद चाकू से स्टिक काटकर नारियल बुरादा में लपेटकर एयरटाईट डिब्बे में भरकर प्रयोग करें.

2. इंस्टेंट बिस्किट पिज्जा

कितने लोगों के लिए 8
बनने में लगने वाला समय 20 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

  1. मोनेको बिस्किट 8
  2. बारीक कटा प्याज 1
  3. बटर 1 टेबलस्पून
  4. बारीक कटी शिमला मिर्च 1
  5. बारीक कटा टमाटर 1
  6. उबले कॉर्न के दाने 1 टेबल स्पूनए
  7. चाट मसाला 1 टीस्पून
  8. लाल मिर्च पाउडर 1/4 टीस्पून
  9. मैगी मसाला 1/4 टीस्पून
  10. टोमेटो सौस 1 टेबलस्पून
  11. शेजवान चटनी 1 टीस्पून
  12. चीज क्यूब्स 2
  13. ओरेगेनो 1/4 टीस्पून

विधि

फ्लेट सर्फेस पर बिस्किट को रखकर बटर लगायें. अब एक बाउल में टोमेटो सौस, शेजवान चटनी और सारी सब्जियों को एक साथ मिला लें. बटर लगे बिस्किट पर 1-1 चम्मच तैयार सब्जी के मिश्रण को फैलायें. अब इन बिस्किट को एक चिकनाई लगी ट्रे में रखें और चीज ग्रेट करके चाट मसाला और लाल मिर्च बुरक दें. इन्हें 5 मिनट माइक्रोवेब में बेक करके सर्व करें. माइक्रोवेब न होने पर नानस्टिक पैन में एकदम धीमी आंच पर बेक करे.

3. वालनट लोलीपॉप

कितने लोगों के लिए 8
बनने में लगने वाला समय 20 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

  1. ब्रेड स्लाइस 4
  2. कोको पाउडर 2 टीस्पून
  3. कटे अखरोट 1 टेबलस्पून
  4. पिसी शकर 1 टीस्पून
  5. ताजी मलाई 1 टीस्पून
  6. नारियल बुरादा 1 टीस्पून
  7. घी 1/2 टीस्पून
  8. आइसक्रीम स्टिक 8

विधि

ब्रेड स्लाइस के किनारे काटकर मिक्सी में पीस लें. अब इसे एक बाउल में डालकर इसमें कटे वालनट, मलाई, पिसी शकर, कोको पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब हाथों में चिकनाई लगाकर एक टीस्पून मिश्रण को आइसक्रीम स्टिक में लम्बाई में लपेट लें. इसी तरह सारी आइसक्रीम स्टिक तैयार कर लेंए अब इन्हें नारियल बुरादा में लपेटकर बच्चों को दें.

मैं जिससे प्यार करती हूं वो पिछड़ी जाति का है, घरवालों को शादी के लिए कैसे मनाऊं?

सवाल:

मेरी उम्र 20 साल है और एक कंपनी में काम करती हूं. मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. वह भी मुझे बेहद चाहता है. मगर समस्या यह है कि मैं उच्च जाति की हूं और लड़का पिछड़ी जाति का. घर वाले इस रिश्ते के लिए शायद ही तैयार हों. कृपया उचित सलाह दें?

जवाब…

आज के समय में अंतर्जातीय विवाह आम हैं. समाज का बड़ा वर्ग अब संकीर्ण विचारधारा से बाहर निकल कर ऐसे रिश्तों को अपना रहा है. जातिप्रथा, ऊंचनीच आदि सब बेकार की बातें हैं. बेहतर होगा कि आप अपने घर में बातचीत चलाएं और मन की बात घर वालों को खुल कर बताएं. अगर वे नहीं मानते तो कोर्ट मैरिज कर सकती हैं. लड़के की उम्र अगर 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल हो तो उन्हें आपसी रजामंदी से शादी करने से कोई नहीं रोक सकता.

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सेक्स के दौरान हार्टअटैक, जानें क्या है सच्चाई…….

सेक्स के कारण दिल का धड़कना बंद हो जाए, यह दुर्लभ होता है. यूएसए टुडे की संवाददाता किम पेंटर का कहना है कि एक बड़ी शोध के अनुसार यह तथ्य सामने आया है कि सेक्स के दौरान या इसके बाद आमतौर पर हृदय गति रुकना बहुत कम अवसरों पर होता है और अगर ऐसा होता भी है तो यह आम तौर पर एक पुरुष के साथ ज्यादा होता है.

1 हजार महिलाओं में से किसी एक को तकलीफ…

शोध में बताया गया है कि एकाएक दिल की धड़कन रुकने के एक सौ मामलों में मात्र एक मामला सेक्स से जुड़ा होता है और एक हजार महिलाओं में से किसी एक को यह तकलीफ होती है. यह अध्ययन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की वैज्ञानिक बैठक के दौरान पेश किया गया था. इस अध्ययन को जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलाजी में प्रकाशित किया गया है.

सेक्स से संबंधित खतरा बहुत कम…

सीडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट, लॉस एंजिलिस के एक कार्डियोलाजिस्ट और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक सुमित चुघ का कहना है कि हृदय रोग से पीड़ित लोग इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि सेक्स खतरनाक हो सकता है, लेकिन आज हम कह सकते हैं कि इससे संबंधित खतरा बहुत कम है.

इन लोगों को ज्यादा खतरा…

एकाएक हृदयगति रुक जाने का कारण एक इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी है जिसके चलते दिल धड़कना बंद हो जाता है. इसके ज्यादातर शिकार मारे जाते हैं लेकिन यह हृदयाघात से अलग स्थिति है क्योंकि इसके अंतर्गत हृदय को रक्त प्रवाह का बहाव रुक जाता है. लेकिन जिन लोगों को पहले भी हृदयाघात हो चुका है या फिर उनको हृदय संबंधी तकलीफें होती हैं, उनको हृदय गति रुकने का खतरा ज्यादा होता है.

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