समझौता नहीं आजादी चुनें

तू नहीं तो कोई और सही, कोई और नहीं तो कोई और सही बहुत लंबी है यह जिंदगी, मिल जाएंगे हम को लाखों हसीं.

कुछ ऐसी ही कहानी रही है गुरुग्राम में रहने वाली अनीता की. अनीता एक पंजाबी परिवार की 22 साल की खूबसूरत, लंबी, गोरी लड़की थी जिसे कोई एक बार देख ले तो देखता रह जाए. वह जितनी आकर्षक थी उतनी ही चुलबुली भी. खूब बातें करती थी और नाजुक होने के बावजूद दबंग भी थी. बचपन से उसे अपने लिए इतनी तारीफें सुनने को मिली थीं कि उस के चेहरे से साफ ?ालकता था. उस के पिता बिजनैसमैन थे. घर में पैसों की कोई कमी नहीं थी. मगर एक हादसे में उस के पिता की मौत हो गई. उस वक्त अनीता 17 साल की थी और उस की बड़ी बहन 20 साल की.

पिता के जाने के बाद मां ने अनीता की बहन की शादी जल्दी करा दी ताकि जवान लड़की के साथ कुछ ऊंचनीच न हो जाए. फिर मां अनीता के लिए भी लड़का देखने लगी. पिता के बाद उन की हैसियत किसी बड़े घर में रिश्ते की तो थी नहीं सो मां ने एक साधारण परिवार में उस की शादी करा दी. लड़का प्राइवेट स्कूल में टीचर था. घर में आर्थिक तंगी थी. घर भी छोटा सा था जिस में ननद, देवर और सासससुर समेत कुल 6 प्राणी रहते थे. अनीता ने आगे पढ़ने की इच्छा जताई तो सास ने मना कर दिया.

प्रैगनैंसी सुखद नहीं रही

अनीता के लिए वहां 1-1 दिन काटना कठिन होने लगा. पति देखने में साधारण था. उसे गुस्सा बहुत जल्दी आता था. छोटीछोटी बात पर दोनों लड़ने लगते. पति मारपीट भी करता था. अंत में अनीता ने उस शादी से निकलना ही बेहतर सम?ा और क्व2 लाख ले कर आपसी सहमति से अलग हो गई.

अनीता ने जल्द ही दूसरी शादी कर ली. दूसरे पति की आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर थी. पैसों की कमी नहीं थी और घर में सदस्य भी कम थे. सिर्फ देवर और ससुर साथ रहते थे. अनीता उस घर में खुश थी. जल्द ही वह प्रैगनैंट भी हो गई. उस दौरान उस के चेहरे पर हमेशा मुसकान खिली रहती. मगर जल्द ही उस की मुसकान छिन गई जब उस का मिसकैरेज हो गया. कुछ समय बाद वह फिर से प्रैगनैंट हुई. मगर इस बार उस की कोख में एक स्पैशल चाइल्ड था जिसे पति के कहने पर उसे अबौर्ट कराना पड़ा. तीसरी बार की प्रैगनैंसी भी उस के लिए सुखद नहीं रही क्योंकि यह बच्चा भी मैंटली रिटार्डेड था.

मगर इस बार अनीता अड़ गई और बच्चे को जन्म दिया. उसे अपने बच्चे से बहुत प्यार था. मगर घर में और कोई उसे पसंद नहीं करता था. अनीता के पति ने उस से साफसाफ कह दिया कि वह बच्चे को ऐसे संस्थान में भेज दे जहां इस तरह के बच्चे रहते हैं. मगर अनीता की ममता ने यह बात स्वीकार नहीं की. पति द्वारा ज्यादा जोर दिए जाने और मानसिक रूप से टौर्चर किए जाने पर उस ने पति के बजाय बेटे को चुना और दूसरी बार फिर से तलाक ले कर अलग हो गई.

इस बार उसे पति से क्व3-4 लाख मिले जिन्हें उस ने बेटे के नाम जमा करा दिया. इतना कुछ सहने के बाद अब अनीता के चेहरे की चमक कम हो चुकी थी. वह थोड़ी परेशान भी रहने लगी थी, मगर उस ने हिम्मत नहीं हारी और एक बार फिर से शादी का फैसला लिया. लड़का उस की सहेली का परिचित था जो काफी अमीर और 2 बच्चों का पिता था. अनीता ने इस रिश्ते के लिए हामी भर दी.

तीसरे पति के साथ भी उस की ज्यादा समय तक निभ नहीं सकी. तीसरे पति की 2 संतानें पहले से थीं. दोनों बच्चे टीनएजर थे और वे अनीता के छोटे बच्चे को काफी परेशान करते थे. अनीता जब इस बात की शिकायत करती तो उस का पति बच्चे को स्पैशल चाइल्ड के स्कूल में भेजने की बात करने लगता. उस के बच्चे के साथ भेदभाव किया जाता. पति प्रौपर्टी डीलर था. घर में  पैसों की कमी नहीं थी. मगर उसे बच्चे पर रुपए खर्च करने से रोका जाता.

छोटीछोटी बातें खटकने लगीं

अनीता को इस तरह की छोटीछोटी बातें खटकने लगीं. एक बार ?ागड़ा शुरू हुआ तो फिर बढ़ता ही गया. बहुत जल्दी अनीता की सम?ा में आ गया कि वह इस शादी को और नहीं खींच सकती. वह अपने आत्मसम्मान और अपने बच्चे का अपमान नहीं देख पाई और अंत में भारी मन से तलाक लेने का फैसला कर लिया.

इस तलाक में अनीता को काफी रुपए मिले जिन्हें उस ने भविष्य के लिए जमा कर लिए. फिर गुरुग्राम की एक अच्छी सोसाइटी में एक किराए का 2 बीएचके फ्लैट ले कर अकेली अपने बेटे के साथ रहने लगी. इनकम के लिए उस ने फ्रीलांस ट्रांसलेटर का काम शुरू किया और अपने बल पर बच्चे का पालनपोषण करने लगी.

तलाक से गुजरने के बाद की मानसिक स्थिति

तलाक से गुजरने वाला शख्स क्या सहता है इस की कल्पना भी नहीं की जा सकती. अनीता के लिए भी वह दौर इतना मुश्किल रहा कि वह भावनात्मक रूप से काफी टूट गई थी. हर बार हालात ऐसे बने कि उसे अलग होने के इस कठिन और कड़वे अनुभव से गुजरने पर मजबूर होना पड़ा. डिवोर्स लेना किसी भी तरह से आसान नहीं होता है क्योंकि एक रिश्ते से प्यार, भावनाएं, यादें, जिम्मेदारियां, परिवार जैसी कई चीजें जुड़ी होती हैं.

हर बार अनीता के अंदर अजीब सी उथलपुथल मची रहती थी. उसे गुस्सा, उदासी और पछतावा सब एकसाथ महसूस होता. कई बार अपनी शादी को निभाने की कोशिश और उसे खत्म करने के फैसले के बीच वह खुद को फंसी हुई भी महसूस करती थी. तलाक के दौरान और उस के बाद कई दफा उसे डिप्रैशन भी महसूस हुआ. वह अंदर ही अंदर दिल के किसी कोने में अपनी शादी को बचाने की उम्मीद रखती पर वास्तव में ऐसा हो पाना संभव नहीं होता. उसे सम?ा आता गया कि वह चाहे कुछ भी कर ले लेकिन अपने रिश्ते को टूटने से नहीं बचा सकेगी. उसे पता था कि उस के पास चीजों को जाने देने के अलावा और कोई चारा नहीं है.

अपने फैसलों से खुश

अनीता ने अपने तीनों तलाक स्वीकार कर लिए थे. वह अब अपने अतीत के दर्दों को भुला कर जीवन के नए पहलू की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी और इस में सफल भी हो चुकी है. वह हर वक्त अपने दुखों के बारे में सोचने की जगह बच्चे के साथ अपनी जिंदगी को ऐंजौय करने लगी है. वह अब छोटीछोटी चीजों से हमेशा अपनेआप को खुश रखने की कोशिश करती है. उस ने प्रौपर्टी डीलिंग का बिजनैस भी शुरू कर लिया है और घर से ही काम करती है ताकि बेटे को पूरा समय दे सके. कुछ लोग उस के इस कदम को सही नहीं मानते. मगर वह अपने फैसलों से खुश है.

अगर कोई स्त्री तलाक लेती है तो लोग अकसर उसे ही दोषी करार देते हैं. वे कहने लगते हैं कि वह निभाना नहीं जानती होगी. जरूर उस का चक्कर चल रहा होगा या फिर वह बां?ा होगी. लोग यह नहीं सोच पाते कि समस्या पुरुष या उस के परिवार में भी हो सकती है. मुमकिन है कि उस के साथ अत्याचार हो रहा हो या फिर उस के बढ़ते कदमों को रोका जा रहा हो या वह वहां खुश नहीं हो. आखिर औरत हमेशा अपने आत्मसम्मान को दांव पर लगा कर रिश्ते निभाने की कोशिश क्यों करती रहे? एक बार तलाक तो फिर भी समाज द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है? मगर जब बात 2 या 3 तलाक की हो तब लोग औरतों को ही दोषी मान लेते हैं. उन के फैसले पर उंगली उठाई जाती है. श्वेता तिवारी का उदाहरण भी कुछ ऐसा ही है.

श्वेता तिवारी की 2 शादियां और तलाक

टीवी ऐक्ट्रैस श्वेता तिवारी ने भी 2 शादियां कीं, लेकिन दोनों ही शादियां उन के लिए जी का जंजाल बन गईं. पहली शादी राजा चौधरी से हुई जिस पर श्वेता ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए और तलाक ले लिया. राजा से इन्हें 1 बेटी पालक है. इस के बाद श्वेता ने अभिनव कोहली से दूसरी शादी की और बेटे रेयांश का जन्म हुआ. लेकिन यह शादी भी नहीं टिक पाई. अभिनव पर भी श्वेता ने घरेलू हिंसा, गालीगलौज के आरोप लगाए और अलग रहने लग गईं. मिडल क्लास फैमिली की होने की वजह से उन के परिवार ने हमेशा उन्हें शादी न तोड़ने की सलाह दी और कहा था कि एडजस्ट करो. लेकिन वे ऐसे रिश्ते में नहीं रहना चाहती थीं जिस में सम्मान न मिले.

2 शादियां टूटने के बाद लोग श्वेता को तीसरी शादी न करने की सलाह देते हैं. इस पर श्वेता का कहना है कि अगर आप 10 साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहें तो कोई सवाल नहीं करेगा. लेकिन आप 2 साल में शादी तोड़ दें तो लोग सवाल करेंगे कि तुम कितनी शादियां करोगी? कई लोग मु?ो यह भी सलाह देते हैं कि तुम तीसरी शादी मत कर लेना. मगर क्यों? यह मेरा डिसीजन है. मेरी लाइफ है. इंसान को दूसरी क्या 5वी शादी में भी दिक्कत हो तो उसे अलग हो जाना चाहिए.

सवाल यह उठता है कि हम भला दिक्कतों के साथ क्यों जीएं और ये नंबर्स हैं ही क्यों? आप कई अफेयर्स करें तो ठीक है फिर कई शादियां करने में दिक्कत क्यों? गलत व्यक्ति तो आप को दूसरी या तीसरी शादी में भी मिल सकता है. ऐसे में एक ही व्यक्ति के साथ बारबार समस्याओं का सामना करने से अच्छा है कोई दूसरी समस्या डिस्कवर करो. जहां भी समस्या आए तो छोड़ो और आगे बढ़ो.

क्यों न नई शुरुआत करें

दरअसल, जब औरत समझते के बजाय आजादी चुनती है तो पुरातनपंथी लोगों को बहुत कड़वा लगता है. वे औरत को दोष देने लगते हैं. मगर हकीकत में खुश रहने का हक सब को है. किसी अनहैप्पी मैरिज में बने रह कर परेशान रहने के बजाय क्या यह अच्छा नहीं कि स्त्री उस बंधन को तोड़ कर नई शुरुआत करे? तलाक के बाद जिंदगी खत्म नहीं हो जाती. वह दूसरी या तीसरी बार शादी क्यों नहीं कर सकती? उसे भी हक है कि वह अपने लिए बेहतर लाइफ पार्टनर की तलाश करे ताकि उस की जिंदगी की हर कमी पूरी हो सके. अगर ऐसा नहीं हो पाता और उसे बारबार तलाक लेना पड़ता है तो भी इस में गलत क्या है? आखिर दमघोटू माहौल में रह कर मैंटली, फिजिकली सिक होने से तो अच्छा है कि वह बेहतर औप्शन की तलाश करे. कम से कम उस के पास कोशिश करने का हक तो है ही.

अकसर लोगों को कहते सुना जाता है कि पतिपत्नी का रिश्ता तो 7 जन्मों का होता है. हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच जन्मजन्मांतरों का संबंध माना जाता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता. अग्नि के 7 फेरे ले कर और धु्रव तारे को साक्षी मान कर 2 तन और मन एक बंधन में बंध जाते हैं. हिंदू धर्म में तलाक और लिव इन रिलेशनशिप वगैरह सही नहीं माने जाते हैं. यह मान्यता दृढ़ होती है कि एक बार जिस व्यक्ति का किसी से विवाह हो जाता है तो मृत्युपर्यंत जारी रहता है और उस विवाह में पवित्रता होनी जरूरी होती है.

आंकड़े क्या कहते हैं

यही वजह है कि भारत में तलाक दर  लगभग 1.1त्न होने का अनुमान है जो पूरी

दुनिया में सब से कम है. दुनियाभर में अधिकांश तलाक महिलाओं द्वारा शुरू किए जाते हैं जबकि भारत में ज्यादातर पुरुष ही तलाक की पहल

करते हैं.

एक स्टडी भी कहती है कि दूसरी शादी में तलाक की दर पहली शादी की तुलना में 60त्न से अधिक होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर लोग तनाव में पुनर्विवाह का फैसला करते हैं जो उन्हें कभी भी खुश नहीं रहने देता है. ऐसे में अगर आप भी दूसरी शादी का विचार कर रहे हैं तो कुछ बातों पर पहले से विचार करें:

आप की मरजी या परिवार का प्रैशर

इस में कोई दोराय नहीं कि पार्टनर से अलग होने के बाद की जिंदगी किसी के लिए भी आसान नहीं होती. जिन चीजों की जिम्मेदारी पहले पतिपत्नी मिल कर उठाते थे अलग होने के बाद वह सब अकेले ही मैनेज करना पड़ता है. ऐसे में अगर आप खुद दूसरी शादी करना और पिछला सब भूल कर आगे बढ़ना चाहते हैं तो यह उचित है. लेकिन यदि केवल परिवार के प्रैशर में आ कर दूसरी शादी करने को तैयार होते हैं तो संभव है कि आप आगे चल कर एडजस्ट न कर पाएं. याद रखें परिवार या आप के दोस्त आप को दूसरी शादी के लिए मोटिवेट कर सकते हैं. लेकिन यह आप को खुद तय करना होता है कि आप अपनी लाइफ से क्या चाहते हैं.

पुरानी कड़वाहट साथ ले कर न जाएं

जब लोग पुनर्विवाह करते हैं तो अकसर पुराने रिश्ते की कड़वाहट और कुछ बातों को ले कर पूर्वाग्रह उन के दिलोदिमाग में कायम रहते हैं जो किसी भी नए रिश्ते को मजबूत बनने से रोकने के लिए काफी हैं. इसी तरह अगर आप अभी भी अपने एक्स की यादों से घिरे हुए हैं तो ये कभी आप को नए रिश्ते में बंधने नहीं देंगी. इसलिए खुद को थोड़ा समय दें.

दरअसल, जब हम किसी रिश्ते में अपना 100त्न देते हैं और अचानक से वह रिश्ता खत्म हो जाता है तो वहां कौन्फिडैंस, ऐक्सपैक्टेशंस और सोचनेसम?ाने की क्षमता न के बराबर रह जाती है. ऐसे में सब से जरूरी यही है कि कोई भी फैसला लेने से पहले खुद को थोड़ा समय दें. सोचसम?ा कर फैसला लें और फिर पूरी कोशिश करें कि यह रिश्ता सफल हो जाए.

सोचसमझ कर लें फैसला

दूसरी शादी में डर का होना लाजिम है. लेकिन आप को अपने पार्टनर से अपने विचारों और इच्छाओं को व्यक्त करना होगा. बताना  होगा कि जिंदगी से और लाइफपार्टनर से आप की क्या उम्मीदें हैं. बहुत से लोग अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं जिस की वजह से भी वे दूसरी शादी करने पर विचार करते हैं. हालांकि ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि बिना सही सोचविचार किए पुनर्विवाह से आप की परेशानी कम होने वाली नहीं है.

नए रिश्ते के लिए ईमानदारी

किसी भी नए रिश्ते में बंधने के लिए ईमानदारी का होना बेहद जरूरी है. अगर आप नए रिश्ते की शुरुआत करने की सोच रहे हैं तो खुद से सवाल करिए कि क्या आप वाकई में बच्चों की जिम्मेदारी से ले कर पार्टनर की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तैयार हैं? पिछले रिश्ते में कहां क्या गलती हुई, इसे जितना खुल कर आप अपने साथी से डिसकस करेंगे उतना ही आप अपने पार्टनर से जुड़ाव महसूस करेंगी.

किन हालात में महिलाओं के लिए तलाक ही अच्छा है

हमारे देश में लड़की और शादी को इस तरह से लिया जाता है जैसे लड़की का जन्म ही शादी करने के लिए हुआ हो. शादी के बंधन में बंध कर ही उस का जीवन सार्थक होता है और ऐसे में अगर वह तलाक ले ले तो यह उस की जिंदगी की एक बड़ी असफलता समझ जाता है. तलाकशुदा महिला को शादीशुदा जितना सम्मान नहीं मिलता. तलाक के बाद महिला मातापिता पर बोझ समझ जाती है. उस के नाम से डिवोर्सी का टैग जुड़ जाता है. तलाक के बाद अलग तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं इसलिए महिलाएं अपनी शादी को हर तरह से निभाने की कोशिश करती हैं. मगर किसी भी चीज की सीमा होती है. इन स्थितियों पर तलाक लेना ही बेहतर है:

दहेज की मांग की जा रही हो: अगर शादी के बाद भी आप को दहेज के लिए बातें सुनाई जाती हैं, रातदिन ताने दिए जाते हैं और आप को नीचा दिखाया जाता है तो ऐसे घर में रहना उचित नहीं. दहेज के लोभियों का क्या भरोसा कब वे हिंसक हो उठें और आप की जान पर बन आए. वैसे दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनी जुर्म हैं. फिर भी हमारे समाज में दहेज का लालच खत्म नहीं हुआ है. कई दफा दहेज के बिना शादी तो हो जाती है, लेकिन पैसों की मांग शादी के बाद होती है. लड़की पर दबाव बनाया जाता है कि वह अपने घर से पैसे लाए और जब ऐसा नहीं होता तो उस पर अत्याचार किए जाते हैं. शादी बचाने और मातापिता की इज्जत का खयाल कर लड़कियां सब सहती हैं. मगर याद रखें जिस घर में इंसान से ज्यादा पैसे को अहमियत दी जाए वहां आप सुरक्षित नहीं.

घरेलू हिंसा की जा रही हो: अगर शादी के बाद अगर आप के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा मसलन मारपीट, यौन शोषण या गालीगलौज की जा रही है तो आप को बिना समय गंवाए तलाक का फैसला ले लेना चाहिए. याद रखें शादी कर के पति पत्नी का मालिक नहीं हो जाता. किसी को यह हक नहीं कि आप पर हाथ उठाए. बहुत सी महिलाएं सालों मारपीट सहती हैं. मगर ऐसी जिंदगी का क्या फायदा? घुटघुट कर जीने और रोज मरने से अच्छा है अलग हो जाना.

बेइज्जती की जाती हो: शब्दों के तीर अकसर बहुत गहरे जख्म देते हैं. अगर घर में महिला के साथ दुर्व्यवहार हो रहा हो, पति खुद गलती मानने के बजाय हर बात के लिए पत्नी को ही दोषी ठहराए, उस की कीमत न समझे, उसे हलके में ले, उस के काम को अहमियत न दे, उस पर बारबार चिल्लाए, गाली दे, नीचा दिखाए तो इस रिश्ते को तोड़ देना ही बेहतर है. रोजरोज की मानसिक प्रताड़ना झेल कर कोई खुश नहीं रह सकता. बेहतर है कि अलग हो जाएं.

पति बेवफा हो: अगर किसी महिला को यह पता चलता है कि उस के पति का किसी और के साथ अफेयर है तो एक बार तो वह खुद को समझ कर पति से अपने प्यार की दुहाई देगी. ऐसे में अगर पति अपनी गलती मान कर उस औरत से मिलना छोड़ दे तो बात संभल जाती है. अकसर लड़के घर वालों के दबाव में आ कर शादी तो कर लेते हैं, लेकिन शादी के बाद भी वे अपने प्यार से अलग नहीं हो पाते. कई बार पति अपनी पत्नी से बोर हो कर भी बाहर खुशियां ढूंढ़ता है. ऐसे रिश्तों में बहुत कोफ्त होती है. बेवफाई रिश्तों के भरोसे को खत्म कर देती है और कोई भी रिश्ता बिना भरोसे के चल नहीं सकता. इसलिए महिला के लिए बेहतर यही होता है कि वह ऐसे रिश्ते से अलग हो जाए.

जब रिश्ते में केवल नकारात्मकता हो: अगर आप को पति के साथ नकारात्मकता महसूस होने लगे, आप दोनों हर बात पर झगड़ने लगें और पति का करीब आना भी आप को बरदाश्त न हो तो जाहिर है ऐसा रिश्ता अंदर से खोखला हो चुका होता है. अगर आप को लगता है कि आप के पास अपने साथी से जुड़ी नकारात्मक बातें सकारात्मक बातों की तुलना में ज्यादा हैं तो आप को तलाक की जरूरत है.

 ये 3 कारण बनते हैं कपल्स के बीच तलाक की मुख्य वजह

‘जर्नल औफ सैक्स ऐंड मैरिटल थेरैपी’ में प्रकाशित एक शोध में कपल्स के बीच तलाक की मुख्य वजहों को जानने की कोशिश की गई. इस के लिए 2371 लोगों को शामिल कर उन से कुछ सवाल पूछे गए और उस आधार पर तलाक के कारण बताए गए:

कम्युनिकेशन गैप: ज्यादातर कपल्स में तलाक का कारण कम्युनिकेशन गैप होता है. रिसर्च के अनुसार 44त्न रिलेशनशिप में डिवोर्स का कारण कम्युनिकेशन गैप होता है. दरअसल, बातचीत से ही रिश्तों में मधुरता आती है और मतभेद दूर किए जाते हैं. संवाद की कमी रिश्ते को खोखला कर देती है.

रिश्ते में इंटिमेसी की कमी: रिसर्च में शामिल लगभग 47त्न प्रतिभागियों का कहना था कि लो इंटिमेसी के चलते उन का तलाक हुआ है. इंटिमेसी की कमी सिर्फ उम्रदराज कपल्स में ही नहीं बल्कि युवाओं में भी होती है, जिस का कारण तलाक के रूप में दिख रहा है. इस के पीछे तनाव, खराब खानपान और अनियमित दिनचर्या जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं.

पार्टनर के लिए सम्मान, भरोसे या सहानुभूति का अभाव: शोध में शामिल करीब 34त्न महिलाओं ने अपने पति से इन 3 चीजों के अभाव का दावा किया, जिन के चलते उन में से कुछ महिलाओं ने अपने पति से तलाक ले लिया और कुछ ने दूसरी शादी कर ली.

दूसरी शादी करने से पहले खुद से पूछें कुछ सवाल: प्यार, सम्मान, मुसकान, भावनात्मक जुड़ाव, विश्वास और जीवन भर के साथ का इरादा एक शादीशुदा रिश्ते में इन बातों का होना बेहद जरूरी है. कुछ कपल्स जहां जिंदगी में आए हर उतारचढ़ाव को पार करते हुए आगे बढ़ते रहने का प्रयास करते हैं तो कइयों का साथ बीच में ही छूट जाता है. जब प्यार की डोर कमजोर होती है तो जिंदगी की मुश्किलें और गलतफहमियां बड़ी आसानी से रिश्ते में दरार ले आती हैं. इस तरह जब भी कोई रिश्ता टूटता है तो वे सपने भी टूट जाते हैं जिन्हें दोनों ने मिल कर संजोया था.

शादीशुदा रिश्ते के बिखर जाने के बाद जिम्मेदारियों का बो?ा न केवल एक इंसान पर आ जाता है बल्कि कठिन राहों में अकेले आगे बढ़ना भी मुश्किल लगने लगता है. ऐसे समय में ज्यादातर लोग दोबारा शादी करने का विचार करते हैं. मगर अकसर दूसरी या तीसरी शादी करने से पहले व्यक्ति के मन में थोड़ी असमंजस की स्थिति होती है क्योंकि उसे पता नहीं होता है कि इस शादी का परिणाम क्या होगा. उसे डर रहता है कि कहीं पहले की तरह यह रिश्ता भी दर्द की सौगात दे कर खत्म न हो जाए.

Monsoon Special: घर पर बनाएं प्याज कचौड़ी और राइस लौलीपौप

Monsoon सीजन चल रहा है. बरसात के मौसम में कचौड़ी और पकौड़े खाने का अलग स्वाद होता है. बारिश के मौसम में चटपटा खाने के मन बहुत करता है. Monsoon में घर पर बनाएं प्याज कचौड़ी और राइस लौलीपौप.

  1. प्याज कचौड़ी

सामग्री खोल की

1. 200 ग्राम मैदा
2. 50 मिलीलीटर रिफाइंड तेल
3. नमक स्वादानुसार.

सामग्री भरावन की

1. 1 बड़ा कप प्याज कटा
2. 4 उबले आलू
3. 1 छोटा चम्मच अदरक कटा
4. 1 छोटा चम्मच हरीमिर्च कटी
5. 1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती
6. 1 बड़ा चम्मच काजू टुकड़ा
7. 1 बड़ा चम्मच किशमिश
8. 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर
9. 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला
10. 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर
11. 1 छोटा चम्मच दरदरा धनिया
12. तलने के लिए रिफाइंड औयल
13. नमक स्वादानुसार

विधि

खोल की सामग्री को मिला कर आवश्यकतानुसार पानी मिला कर कड़ा गूंध लें. गीले कपड़े से ढक कर रख दें. आलुओं को छील कर मैश कर लें. भरावन की शेष सामग्री मिला लें. गुंधे मैदे को लचीला व मुलायम होने तक थोड़ा और मसलें. तैयार मैदे की लोइयां बनाएं. प्रत्येक लोई को हथेली पर फैला कर आवश्यकतानुसार भरावन भरें. दबा कर कचौरी का आकार दें. कड़ाही में तेल गरम कर के मंदी आंच पर सुनहरा होने तक तलें. इमली की चटनी के साथ सर्व करें.

2. राइस लौलीपौप

सामग्री

1. 2 कप उबले चावल
2. 1/2 कप आलू उबले व मैश
3. 2 बड़े चम्मच हरी शिमलामिर्च बारीक कटी
4. 1 छोटा चम्मच हरीमिर्च बारीक कटी
5. 2 बड़े चम्मच टमाटर बारीक कटा
6. 2 बड़े चम्मच धनियापत्ती बारीक कटी
7. 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर
8. 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
9. 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर
10. 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला
11. 1 छोटा चम्मच चाटमसाला
12. 1/2 छोटा चम्मच सौंफ कुटी हुई
13. तलने के लिए तेल स्टिक्स
14. नमक स्वादानुसार

विधि

तेल तथा आइसक्रीम स्टिक्स को छोड़ कर बाकी सारी सामग्री एक बाउल में डाल कर अच्छी तरह मिला लें. आधा 1/2 चम्मच तेल मिला कर आटे की तरह गूंध लें. किसी किनारे वाली ट्रे में चिकनाई लगाएं और इस में चावल के मिश्रण को फैला कर 1/2 घंटा फ्रिज में रखें. फिर चाकू से मिश्रण के टुकड़े काटें. पैन में तेल गरम कर के टुकड़ों को मध्यम आंच पर दोनों ओर से सुनहरा होने तक फ्राई करें. हर टुकड़े में आइसक्रीम स्टिक फंसा कर हरी चटनी और सौस के साथ गरमगरम परोसें.

अनजाने पल: भाग 1- क्यों सावित्री से दूर होना चाहता था आनंद

औटो चेन्नई के अडयार स्थित पुष्पा शौपिंग कौंप्लैक्स से गुजर रहा था कि तभी नीलिमा पर नजर पड़ी. 3-4 बरस के एक लड़के का हाथ थामे वह दुकान से निकल रही थी. मैं अपनी उत्सुकता रोक न पाई. मातृत्व मानो बांध तोड़ कर छलछलाने को बेताब हो गया था.

मैं ने औटो रुकवाया और उसे पैसे दे कर उतर गई. धीरेधीरे उस के पास पहुंची और आवाज दी, ‘‘नीलिमा.’’

वह एकाएक चौंक कर मुड़ी, फिर तेजी से मुझ से लिपट गई और फूटफूट कर रोने लगी. भय से सिमट कर वह लड़का भी रोने लगा. मेरे शरीर के निस्तब्ध तार नीलिमा के स्पर्श से झनझना उठे. रोमरोम में एक अजीब सा आनंद समाने लगा. इतने बरसों बाद जिसे पाया था, उसे अपने से अलग करने का मन ही नहीं हो रहा था.

काफी देर रोने के बाद जब उस ने आवाज सुनी, ‘दीदी, मुझे डर लग रहा है, पिताजी के पास चलो.’ तभी वह संभली. आंसू पोंछ कर मेरी ओर देखा और मुसकराई. फिर बोली, ‘‘मां, हम यहां मलर अस्पताल में हैं. पिताजी 5वीं मंजिल पर कमरा नंबर 18 में हैं. देर हो रही है, मैं जाती हूं. हो सके तो शाम को आ जाइएगा. यह मेरा भाई अभय है,’’ फिर अपने भैया के कंधे पर हाथ रख वह मेरी नजरों से ओझल हो गई.

नीलिमा का आकर्षण इतना था कि मैं यह भूल ही गई कि मुझे विकास से सवेरा होटल में मिलना है. मैं सोचने लगी कि कहां मुझ से नफरत करने वाली उस दिन की गोरीचिट्टी खूबसूरत नीलू और कहां आज की दुख और वेदना का बोझ ढोए बचपन में ही प्रौढ़ता लिए यह नीलिमा. मैं ने शौपिंग कौंप्लैक्स से विकास को सूचना भिजवाई कि 15 मिनट में मैं आ रही हूं और जल्दी से औटो ले कर चल पड़ी.

अनायास मेरी आंखों में आनंद का चेहरा घूम गया. मेरे मांबाप ने उस का लंबा कद, गोरा रंग, मस्तीभरी जवानी और आकर्षक व्यक्तित्व देख कर मेरा विवाह उस से तय किया था. मैं ने हिंदी साहित्य में एमफिल किया था और एक कालेज में पढ़ाती थी. आनंद बैंक में अफसर था. हम दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर के शादी की थी. शादी के तुरंत बाद उस का तबादला दिल्ली हो गया, इसलिए हम लोग वहां चले गए. शादी होते ही मैं ने नौकरी छोड़ दी थी, हालांकि आनंद को यह अच्छा नहीं लगा था. परंतु मैं तबादले के झमेलों में पड़ना नहीं चाहती थी.

दिल्ली जैसे महानगर में खर्चे तो बढ़ते ही जाते हैं, एक दिन आनंद ने ही बात छेड़ी, ‘सावित्री, सारा दिन घर में बैठे तुम्हें घुटन महसूस नहीं होती? मेरा दोस्त कह रहा था कि कालेज में हिंदी प्राध्यापक की जगह खाली है. कहो तो बात चलाऊं?’

मैं ने कहा, ‘वैसे मेरी नौकरी करने की अभी इच्छा नहीं है. घर पर भी तो बहुत सारे काम होते हैं. बुनाई, कढ़ाई आदि सीख रही हूं. ढंग से खाना बनाना भी तो अभी ही सीख रही हूं.’

आनंद को मेरी बात अच्छी नहीं लगी. उस ने कहा, ‘अभी तो हमारे बच्चे भी नहीं हैं. इतनी शिक्षा हासिल करने के बाद तुम्हारा इस तरह घर में बैठे रहना मुझे अच्छा नहीं लगता. फिर महंगाई भी कितनी है…तुम हाथ बंटाओगी तो हम घर के लिए कुछ चीजें खरीद सकेंगे.’ आनंद की बात उस समय मुझे भी अच्छी लगी. उसी ने दौड़धूप कर मुझे श्रीराम कालेज में नौकरी दिलाई.

दिन गुजरते गए. 8-9 वर्षों बाद ही नीलिमा का जन्म हुआ था. उस के जन्म के बाद से सबकुछ बदल गया. आनंद को बेटी से बहुत अधिक लगाव था. जब तक वह 5 साल की हुई, तब तक मेरी सास हमारे साथ रहीं. अकेली विधवा सास का हमें बहुत अधिक सहारा था. मेरी और पति की तनख्वाह से गृहस्थी की गाड़ी मौज से चल रही थी.

मैं ने पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लिया था. कालेज में प्रिंसिपल की जगह खाली होने वाली थी. मेरी पीएचडी के खत्म होने में 6 महीने बाकी थे, इसलिए पूर्व प्रिंसिपल ने मेरी सिफारिश की थी. मैं जीजान से पीएचडी की समाप्ति में लगी थी. अचानक मेरी सास गुजर गईं.

आनंद को मां की मृत्यु से ज्यादा बेटी का अकेलापन खटकने लगा. उस ने मां की तेरहवीं होते ही कहा, ‘मैं चाहता हूं कि तुम नौकरी छोड़ दो. जब नीलू बड़ी हो जाए तो फिर नौकरी कर लेना.’

मैं चौंकी. फिर स्थिति को संभालते हुए कहा, ‘ऐसा कैसे हो सकता है, हम ऐशोआराम की जिंदगी के आदी हो चुके हैं. मेरी तनख्वाह नहीं होगी तो दिल्ली जैसे शहर में तुम्हारे अकेले की तनख्वाह से गुजरबसर कैसे होगी?’

‘कम से कम पीएचडी छोड़ दो. देर से घर आओगी तो नीलिमा बहुत दुखी हो जाएगी. वह दिनभर अकेली कैसे रह पाएगी.’

‘उसे तुम क्यों नहीं संभाल लेते. 4 महीने में मेरी थीसिस पूरी हो जाएगी. फिर जल्दी ही मैं प्रिंसिपल का पद संभाल लूंगी. कालेज की तरफ से वहीं घर भी मिल जाएगा. फिर नीलू की परवरिश में कोई बाधा नहीं आएगी.’

आनंद उस समय खामोश रह गया. परंतु उस के मन में ज्वालामुखी ने धधकना आरंभ कर दिया. मैं ने नीलू को कालेज के पास शिशु सदन में छोड़ना शुरू कर दिया. मैं रोज सवेरे उसे छोड़ आती और शाम को आनंद उसे ले आता.

मुझे थीसिस का काम खत्म कर लौटने में रात को देर हो जाती. नीलिमा उदास रहने लगी थी. उस की खामोशी मुझे कभीकभी बहुत अखरती, परंतु मैं अपनी थीसिस अधूरी नहीं छोड़ सकती थी.

हम दोनों के बीच अकसर मनमुटाव होता. वह अकसर कहता, ‘मांबाप के रहते दिनभर बच्ची इस प्रकार अनाथों की तरह रहे, मुझे अच्छा नहीं लगता.’

मैं तपाक से उत्तर देती, ‘तो मैं क्या करूं? यह तो होता नहीं कि कोई उचित सुझाव दो, बस सदा कोसते ही रहते हो.’

बात जब बहुत बढ़ जाती तो वह कहता, ‘तुम अपनी थीसिस को अपनी बेटी की परवरिश से ज्यादा जरूरी समझती हो? कैसी मां हो?’

मैं कहती, ‘तुम मुझ से जलते हो. तुम्हारा अहं इस बात की इजाजत नहीं देता कि मैं तुम से ऊंचे पद पर पहुंचूं. तभी तुम मुझे ताने देते रहते हो. यह मत भूलो कि मुझे नौकरी पर जाने को मजबूर तुम ने ही किया था.’

नीलिमा ही सदा हम दोनों के आपसी झगड़ों में बीचबचाव करती. वह सदा एक ही बात कहती, ‘मैं ने तो कभी कोई शिकायत नहीं की. मुझे ले कर आप लोग क्यों लड़ते रहते हैं.’

वैसे नीलिमा चिड़चिड़ी सी रहती, बातबात पर जिद करती. ऊपर से आनंद उसे मेरे विरुद्ध हमेशा कुछ न कुछ कह कर भड़काता रहता. मुझे घर के माहौल में घुटन सी होने लगती. परंतु थीसिस अधूरी छोड़ने के लिए मैं कतई तैयार न थी. मेरी बच्ची मेरे जिगर का टुकड़ा थी, उस के रोने की आवाज मुझे परेशान कर देती.

Bigg Boss के मेकर्स पर भड़की आंकाक्षा पुरी, कहा- Kiss को किया प्रोमोट

सलमान खान का रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 जबसे शुरु हुआ है तभी से सुर्खियों में बना हुआ. बिग बॉस ओटीटी 2 को जनता से खूब प्यार मिल रहा है. शो को दर्शक काफी प्यार दे रहे है. बिग बॉस ओटीटी 2 के पिछले हफ्ते में  आंकाक्षा पुरी बेघर हो गई है. बिग बॉस के हाउस से निकालकर आंकाक्षा पुरी शो के मेकर्स पर अपनी भड़ास निकाल रही हैं. बिग बॉस ओटीटी 2 में जद और आंकाक्षा पुरी के किस के बाद काफी हंगामा मचा हुआ है. बिग बॉस के घर से निकालकर आंकाक्षा जद से लेकर शो के मेकर्स पर भड़ास निकाल रही है.

आंकाक्षा बोली- Kiss को प्रोमोट किया

किस वाले टास्क पर आंकाक्षा का कहना है कि बिग बॉस हर गलत बात पर टोकते है. अगर उन्हें किस पर ऑब्जेक्शन था तो टोका क्यों नही. इसके साथ ही इस सीन का थमनेल बनाकर शो का प्रोमोशन किया जा रहा है. वहीं जद के लिए आंकाक्षा ने कहा कि मैं किस को दौरान बस लिप टच कर रही था लेकिन जद ज्यादा इन्वॉल्व हो गए.

बिग बॉस ने क्यों नहीं टोका

बिग बॉस ओटीटी 2 से आंकाक्षा पुरी के निकालते ही शो के मेकर्स पर भड़की और उन्होंने कहा कि शो का डबल स्टैंडर्ड है. आंकाक्षा नें एक इंटरव्यू में कहा कि अगर 30 सेकेंड्स दिक्कत थी तो उन्होने बोला क्यों नहीं. वैसे तो माइक पर बहुत सारी चीजें बोलते है कि हिंदी बोलो, इंग्लिश में मत बोलो, माइक ठीक करो और यह भी बोल देते ये टास्क मत करो. ऐसा कुछ नहीं बोला उन्होंने.

प्रोमोशन को लेकर नाराज आंकाक्षा

आंकाक्षा पुरी बिग बॉस ओटीटी से बाहर आते ही  उन्होंने कहा कि मैने जियो एप पर देखा कि टीजर बने हुए है. उसकी थमनेल बनाकर एपिसोड में लगे हुए है. मेरा और जद का किस हॉटेस्ट किस ऐवर, इसी वजह से मुझे डबल स्टैंडर्ड समझ नहीं आ रहा. इतना ही नहीं आंकाक्षा के कमेंट्स पर दर्शक भी सहमत नजर आ रहे है. इस्टा पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा, सलमान और बिग बॉस को इतनी दिक्कत थी तो टास्क को तुरंत क्यो नहीं रोका.

Anupamaa: माया की मौत के बाद बरखा पार करेंगी सारी हदें

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में आए दिन शो के मेकर्स नए-नए ट्विस्ट लेकर आते है. टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में माया की मौत के बाद अनुपमा के अमेरिका जाने के प्लान पर पानी फिरने वाला है. जी हां, अनुपमा का अमेरिका जाने के सपने पर काले बादल मांडरते नजर आ रहे है. ऐसे में अनुपमा की जिंदगी में एक नई चुनौती आकर खड़ी हो गई है. एक बार फिरसे अनुपमा को अपने करियर और परिवार में से किसी एक को चुनना है. ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में दर्शको को देखने को मिलेगा कि माया अनुपमा को बचाने के चक्कर में खुद ही अपनी जान गंवा देती है.

नीचता की सारी हदें पार करेगी बरखा

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के मेकर्स शो में नए ट्विस्ट और टर्न्स लेकर आते ही रहते है. सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंद एपिसोड में दर्शकों को देखने को मिलेगा कि  अनुपमा को बचाने के चक्कर में माया की मौत हो जाती है. माया अस्पताल में दम तोड़ देती है.

‘अनुपमा’ के प्रोमो वीडियो में देखा जा सकता है कि परिवार के सभी लोग माया की शोक सभा में बैठे है. माया की अर्थी के सामने बैठकर भी बरखा अपनी घटिया चालें खेलने से बाज नहीं आती. वह कहेगी छोटी की किस्मत में मां का प्यार लिखा नहीं है. एक मां दुनिया छोड़कर चली गई वहीं दूसरी मां परिवार को छोडकर अमेरिका जा रही है. जब अनुपमा ये बातें सुनती है तो वह सोच में पड़ जाएगी. अनुज अपनी बेटी के लिए फ्रिकमंद हो जाएगा.

परिवार और करियर में किसे चुनेगी अनुपमा

सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंद एपिसोड में दर्शकों को देखने को मिलेगा कि  अनुपमा का एक्स पति वनराज शाह की वह अनुपमा से कहेगा कि वह लोगों की बातों पर ध्यान ना दें और अपने सपनों की उड़ान को रुकने ना दे. अनुपमा सबकी बातें सुन रही है और वह सोच में पड़ जाती है. आखिर अब फैसला अनुपमा को लेना है. परिवार और करियर के धर्मसंकट मे फंस गई अनुपमा.

नया पड़ाव: भाग 3- जब पत्नी को हुआ अपनी गलती का अहसास

कभीकभी मैं रोज के क्रम से ऊब कर कुछ मनोरंजन चाहती, छुट्टी वाले रोज राकेश को बच्चों के साथ कहीं पिकनिक पर चलने को कहती तो वे बगैर कुछ बोले विद्रूपता से हंस कर अकेले ही बाहर चले जाते. मैं उदासी से ऊब कर बच्चों से ही दिल बहला लेती.

इसी तरह दिन बीतते गए. पिंकी जब 3 साल की हो गई तो मैं ने उसे भी स्कूल में

डाल दिया. अब दोपहर का थोड़ा सा वक्त मुझे खाली मिल जाता था, पर मैं तब अपने पर ध्यान न दे कर बच्चों के कपड़े सीती, स्वैटर बुनती या फिर सो जाती.

शाम को बच्चे आते तो मैं फिर उन में रम जाती. गरम खाना बना कर देती. घर में मक्खन से घी बना कर पौष्टिक खाने का इंतजाम करती. उन्हें पढ़ाती और उस से वक्त बचता तो फटेउधड़े कपड़े ठीक करती.

अब तक मोबाइल भी चलाना सीख लिया था. मोबाइल पर बहनों, चचेरी बहनों, बूआ से खूब बातें करती क्योंकि वे सब या तो बच्चों की बातें करतीं या तीजत्योहार और पंडितों की. मुझे जैसी कसबाई लड़की को यही अच्छा लगता. पड़ोस में कोई भी खास संबंध नहीं बना क्योंकि हम लोग पिछड़ी जाति के माने जाते थे और पासपड़ोस के लोग ऊंची जातियों के थे जो घास नहीं डालते थे हमें.

राकेश रात को लौटते, थकेथके से, चुपचुप से. मैं समझती, काम की अधिकता इनसान को चुप रहना सिखा देती है. झटपट उन्हें गरम खाना परोस कर देती और एकाध बात का हांहूं में जवाब दे कर बिस्तर में घुस जाते. मैं जब तक सब कुछ समेट कर कमरे में आती, तब तक राकेश सो जाते.

बच्चे अपने पिता के आने पर सहम कर चुप हो जाते थे क्योंकि राकेश ने कभी उन्हें प्यार से पुचकार कर गोद में नहीं उठाया और न कोई लाड़प्यार किया. बच्चों को प्यार की कोई कमी महसूस न हो, इसलिए मैं उन्हें और भी ज्यादा प्यार करती, उन्हीं में रमी रहती.

राकेश के पिता भी ऐसे ही थे. हां राकेश ने शादी के शुरू के महीनों में बताया था कि शहर आने पर उसे पता चला कि मांबाप किस तरह बच्चों के दोस्त बन जाते हैं पर हमारे परिवारों में यह संभव नहीं था.

बच्चे धीरेधीरे बड़े होने लगे थे. मुझे एक दिन उड़तीउड़ती खबर मिली कि राकेश अपने दफ्तर की स्टैनोग्राफर के साथ शाम गुजारते हैं. सुन कर बहुत अटपटा सा लगा.

गृहस्थी चलाने में क्या सजसंवर कर औरत

प्रेमप्यार का नाटक कर सकती है भला? मुझे लगा, मर्द की इस विविधता की चाह तो मिटा पाना असंभव है. पत्नी आखिर पत्नी है और प्रेमिका प्रेमिका ही यही सोच कर मैं चुप्पी साध गई कि बात खुल जाने पर बच्चों पर हमारी बहस का बुरा प्रभाव पड़ेगा.

राकेश अकसर दफ्तर की तरफ से 3-4 दिनों के लिए टूर पर जाया करते थे. पर इस बात के पता चलने पर उन के दौरे पर जाने के बाद मन कहीं टिकता ही न था. क्या पता इस वक्त राकेश क्या कर रहे हों. यही सोचसोच कर मैं रातरातभर जागती रहती. 2-4 बार फोन आने पर वे हांहूं कर के बाद बंद कर देते. उन के  लौटने पर ही मन कुछ संयत होता.

दिन गुजरते रहे और मैं राकेश से दूर होती चली गई. रंजू और पिंकी दोनों अब जवान हो

गए थे. रंजू तो पिता से ज्यादा बात ही नहीं करता था. उन के आने पर चुपचाप अपने कमरे में खिसक जाता.

मगर एक दिन पिंकी ने पिता से पूछ ही लिया, ‘‘पिताजी, आप रात को इतनी देर से घर क्यों आते हैं? आखिर हमें भी तो आप थोड़ा वक्त दिया कीजिए. मेरी सब सहेलियों के पिता तो उन के साथ कैरम, बैडमिंटन बगैरा खेलते हैं.’’

तब राकेश झेंपते हुए बोले थे, ‘‘हां भई, अब तुम कहती हो तो जल्दी आ जाया करेंगे, अभी तक तुम्हारी मां ने तो हम से कभी कहा ही नहीं कि जल्दी आया करो. न तुम्हारी मां के पिता ने उन से कभी बात की होगी न मेरे पिता ने. अब जमाना बदल रहा है पर हम वहीं रह गए.’’

मैं तब कट कर रह गई. मगर उस दिन से राकेश शाम को जल्दी आने लगे थे. फिर भी बच्चों के सामने राकेश के सम्मुख मैं कम ही पड़ती थी. न जाने क्यों हीनता की भावना घर

कर गई थी मुझ में. राकेश की इधरउधर की ताक?ांक से भी मन कुछ चिढ़ सा गया था.

मौन गुस्सा दिखा कर राकेश को उन के व्यवहार की गलती बतातीबताती मैं उन से छिटकती

चली गई.

मेकअप किट के इस्तेमाल से मुझे पिंपल हो गए, क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 32 साल है. मेरे चेहरे पर बहुत पिंपल्स हैं.  मेकअप किट का प्रयोग करने के बाद मुझे भी पिंपल्स हो गए. क्या दूसरे की मेकअप किट प्रयोग करने से पिंपल्स होने का खतरा रहता है?

जवाब-

पिंपल्स हारमोन असंतुलन के कारण होते हैं. मेकअप किट का प्रयोग करने से इन के होने का खतरा नहीं रहता है. दूसरे की मेकअप किट प्रयोग करने से दूसरी तरह की परेशानियां हो सकती हैं. जैसे अगर किसी को फंगल इन्फैक्शन है और आप उस की मेकअप किट इस्तेमाल कर लेती हैं तो आप को भी फंगल इन्फैक्शन की परेशानी हो सकती है. इसलिए हमेशा यह कोशिश करें कि किसी और की मेकअप किट का प्रयोग कतई न करें.

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चेहरे पर आया एक छोटा सा पिंपल हमारा सारा मूड खराब कर देता है. चेहरे के पिंपल को जाने में करीब 4 से 5 दिन लगते हैं, और जब यह जाते हैं तो चहरे पर एक निशान छोड़ जाते हैं. क्‍या आपने कभी पिंपल को एक दिन में हटाने की सोची है? आप सोंच रही होंगी कि यह कैसे हो सकता है. लेकिन ऐसा आइस क्‍यूब के इस्‍तेमाल से मुमकिन है. चलिये जानते हैं फिर वो तरीके जिनसे यह संभव हो सकता है.

स्‍टेप 1: पहले अपने चेहरे को गरम पानी और फेस वाश से धो लें. पिंपल वाले चेहरे पर कभी भी स्‍क्रब का प्रयोग ना करें वरना पिंपल का पस पूरे चेहरे पर फैल जाएगा.

बरसात की काई: क्या हुआ जब दीपिका की शादीशुदा जिंदगी में लौटा प्रेमी संतोष?

Story in Hindi

Monsoon Special: बारिश में टाइफाइड से बचें

मानसून की सुहानी दस्तक कई बीमारियों की सौगात भी लाती है. टाइफाइड उनमें से एक है. अगर समय रहते पकड़ में आ जाए तो एंटीबायोटिक्स देने से ठीक हो जाता है. लेकिन टाइफाइड आमतौर पर समय पर पकड़ में नहीं आता. शुरू में तो मामूली बुखार लगता है जिसे अकसर अनदेखा कर देते हैं. कई बार पता ही नहीं चलता कि बच्चों को बुखार है, लेकिन यह बुखार अंदर ही अंदर पनप रहा होता है.

इसमें सालमोनेला बैक्टीरिया पानी या खाने के द्वारा हमारी आंत में जाते हैं जिससे आंत में अल्सर (जख्म) हो जाता है. यह अल्सर बुखार की वजह बनता है. यह बै‍क्टीरिया ज्यादातर पोल्ट्री प्रोडक्ट्‍स जैसे अंडे को खाने से शरीर में जाता है.

ज्यादातर मुर्गियों में सालमोनेला इंफेक्शन होता है. मुर्गी अंडे के ऊपर पॉटी कर देती है. अगर उस अंडे में दरार है, तो वह बै‍क्टीरिया अंडे के अंदर चला जाएगा. इस अंडे को अच्‍छी तरह से पकाए बगैर खा लेने से बै‍क्टीरिया शरीर के अंदर चले जाते हैं.

अगर इम्युन सिस्टम मजबूत नहीं है तो ये बै‍क्टीरिया आंतों के द्वारा खून में चले जाते हैं, तो वे शरीर के किसी भी अंग को संक्रमित कर सकते हैं. इसे टाइफाइड कहते हैं.

इसके लक्षणों में भूख न लगना, वजन कम होना, मांस‍पेशियां कमजोर होना, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलित होना, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन आदि शामिल हैं. जब मरीज के लिए उठना – बैठना तक कठिन हो जाता है, तब उसे अस्पताल लेकर आते हैं और कहते हैं कि मरीज लंबे समय से बुखार से पीड़ित है.

जांच : 1 तब टाइफी डॉट टेस्ट और ब्लड कल्चर किया जाता है जिससे 2-3 दिन के अंदर टाइफाइड होने की पुष्टि हो जाती है.

जांच : 2 एक अन्य विडाल टेस्ट भी है. अगर एक हफ्ते तक लगातार बुखार हो, तो यह उसको डायग्नोज करने के लिए है.

ट्रीटमेंट : इसमें शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलित करने से लेकर एंटीबायोटिक्स ट्रीटमेंट दिया जाता है.

सावधानी : मरीज को अंडा, चिकन, दूध-दही और पानी देने में सावधानी बरतें. मुर्गी के अंडे को ठीक से पकाकर खिलाएं. अगर दूध पॉइश्चराइज्ड नहीं है, तो उससे भी टाइफाइड हो जाता है. दूध और पानी को अच्छी तरह उबालकर दें.

इसमें हर मामले में सफाई का ध्यान रखा जाए, तो यह बीमारी नहीं होती. वहीं इस मौसम में बाहर का खाना न दें.

बचाव क्या हो

– टाइफाइड से बचाव के लिए बच्चों में 3 साल में एक बार टीका लगाना जरूरी होता है. यह टीका 2 साल की उम्र से लगाना शुरू किया जाता है. यह 2, 5 और 8 साल की उम्र में लगाया जाता है.

– टाइफाइड का वैक्सीन 65 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करता है. यह शत-प्रतिशत बचाव का तरीका नहीं है.

–  इसे लगाने से में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. जिसने टीका लगवाया है, अगर वह बीमार हो भी जाए, तो जल्दी ठीक हो जाता है.

साइड इफेक्ट : इस बीमारी से दूसरी दिक्कतें भी हो सकती हैं. यह दिल और दिमाग पर असर करती है.

क्या करें : टायफाइड से बचने के लिए अपने हाथ थोड़ी-थोड़ी देर में धोते रहें. ऐसा करने से आप इंफेकशन से दूर रह सकते हैं. खास तौर पर खाना बनाते समय, खाना खाते समय और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अपने हाथ धोएं. कच्चे फल और सब्जि‍यां खाने से बचें. ज्यादा गर्म खाद्य-पदार्थों का सेवन करें. संग्रहित खाद्य-पदार्थों से बचें. घर की चीज़ों को नियमित रूप से साफ करें. टाइफाइड के टीके भी टाइफाइड की रोकथाम में अच्छे साबित हुए हैं.

टाइफाइड पैदा करने वाले साल्मोनेला बैक्टीरिया को एंटीबॉयोटिक दवाओं से खत्म किया जाता है. हालांकि कुछ मामलों में लबे समय तक एंटीबॉयटिक दवाओं के इस्तेमाल से टाइफाइड के जीवाणु एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (रेजिस्टेंट) हो जाते हैं. इस स्थिति से बचने के लिए योग्य डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही चिकित्सा कराएं. टाइफाइड की स्थिति में रोगी के शरीर में पानी की कमी न होने पाए, इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तरल पदार्थ लेना चाहिए.

मानसून में इन 10 टिप्स की मदद से छोटे बच्चों को दें पूरी हाइजीन

भारी गर्मी के बाद बारिश का आनंद लेना सभी को पसंद आता है, लेकिन मानसून में बीमारियों का ख़तरा भी सबसे ज़्यादा होता है, क्योंकि इस समय आसपास जमा हुए पानी में मच्छर तेज़ी से पनपने लगते हैं, जो डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं. वहीं दूसरी ओर कपड़ों, दीवारों और हवा में मौजूद नमी के कारण बैक्टीरिया भी बढ़ने लगते है, ऐसे में इस मौसम में हाइजीन और मच्छरों से सुरक्षित रहना बहुत ज़रूरी होता है.

ख़ासकर छोटे बच्चों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनके बीमार होने की संभावना अधिक होती है. इसलिए आसपास के माहौल को हमेशा साफ़ रखना आवश्यक होता है, ताकि बच्चा मच्छरों से सुरक्षित रहे. हालाँकि ये करना आसान नहीं होता, लेकिन निरंतर प्रयास से थोड़ा कम किया जा सकता है.

इस बारें में माइलो एक्सपर्ट श्वेता गुप्ता कहती है कि मच्छरों को भगाने में कॉइल और स्प्रे जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करना इफेक्टिव हो सकता है, लेकिन इससे बच्चे को हेल्थ संबंधित समस्याएं होने की संभावनाएं बढ़ जाती है. इसलिए इस मानसून के मौसम में बच्चे का ध्यान रखने के लिए कुछ सुझाव निम्न है,

1. 2 माह से कम उम्र के बच्चे को मच्छरों और कीटों से सुरक्षा देने के लिए सिर्फ़ अच्छे कपड़ों और बेड नेट का ही इस्तेमाल करें.

2. हमेशा बच्चे को उठाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ़ कर लें. हाथों को कुछ समय के अंतराल में धोते रहें.बच्चों की इम्यूनिटी कमज़ोर होती है, जिस वजह सेवे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं. साथ ही बच्चे के हाथों को भी साफ़ रखें. असल में बच्चे जिस भी चीज़ को देखते हैं, उसे मुँह में डालने की कोशिश करते है, ऐसे में बच्चों के हाथों की सफाई भी मेडिकेटिड साबुन से करनी चाहिए, क्योंकि उनकी त्वचा बहुत ही नाज़ुक होती है.

3. बच्चे को कॉटन के ऐसे ढीले कपड़े पहनाएं, जो बच्चे के हाथों और पैरों को अच्छे से कवर करते हो, ताकि मच्छर बच्चे की त्वचा तक न पहुंच सके और बच्चे की त्वचा को हवा भी लगती रहें. ध्यान रखें कि बच्चे को कपड़े पहनाने से पहले उसका शरीर पूरी तरह से सूख चुका हो, क्योंकि अक्सर गीली त्वचा पर बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और त्वचा पर फंगल इंफेक्शन होने की संभावना होती है.

4. मच्छरों को दूर रखने में मॉस्किटो रेपलेंट बहुत ही इफेक्टिव तरीके़ से काम करता है. इसमें नैचुरल पदार्थ से बने रेपलेंटहोता है और ये आसानी से मच्छरों को दूर भगा सकता है, लेकिन इसका ज़्यादा उपयोग फफोले, मेमोरी लॉस और साँस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए बच्चे की सुरक्षा के लिए डीईईटी-फ्री और लेमनग्रास, सिट्रोनेला, नीलगिरी और लैवेंडर जैसी चीज़ों से बने रेपेलेंट का ही इस्तेमाल करें.

5. मॉस्किटो पैचेस मच्छरों को दूर रखने में इफेक्टिव तरीक़े से काम करता है. आप इसे बच्चे के कपड़ों, क्रिब, बेड और स्ट्रॉलर पर लगा सकते हैं.

6. अपने बच्चे के स्ट्रॉलर, कैरियर या क्रिब को मच्छरदानी से कवर कर दें, ताकि मच्छर आपके बच्चे तक न पहुंच सके. आप घर के अंदर और बाहर जाने पर भी मच्छरदानी का उपयोग कर सकते हैं. ऐसा करने से मच्छर आपके बच्चे की त्वचा तक नहीं पहुंच पाएंगे.

7. घर में साफ़-सफाई का विशेष तौर पर ध्यान रखें.एसी के पानी की ट्रे, प्लांट गमलों में पानी, आदि किसी जगह पर पानी जमा न होने दें. यहाँ तक कि वॉशरूम में बाल्टी में पानी भर कर न रखें. अगर कहीं से पानी लीक होता हो, तो उसका भी ध्यान रखें. दरअसल, जमे हुए पानी में मच्छर और कीड़ें तेज़ी से पनपते हैं.

8. भले ही आपका घर कितना ही साफ़ क्यों न हो, लेकिन आप अपने बच्चे को किसी भी चीज़ को मुँह में रखने से नहीं रोक सकते. इसलिए यह ज़रूरी है कि आपके बच्चे के संपर्क में आने वाली हर चीज़ साफ़ हो, ख़ासकर खिलौने. आप ठोस खिलौनों को साबुन की मदद से धो सकते हैं. वहीं, सॉफ्ट खिलौनों को वॉशिंग मशीन में धो सकते हैं.

9. बेबी वाइप्स के साथ उन साबुन का भी इस्तेमाल करें, जो आपके बच्चे की नाजु़क त्वचा के अनुकूल हो. न्यू बोर्न बेबी के लिए अल्कोहल-फ्री और पानी पर आधारित वाइप्स का ही उपयोग करें, क्योंकि इस तरह की वाइप्स बच्चे की त्वचा को ख़ासतौर पर पोषण देती है.

10. अगर आपके बच्चे को डेंगू हो जाता है, तो उसके लक्षणों पर नज़र रखें, ताकि उसे सही ट्रीटमेंट दिया जा सके. बुखार,उल्टी, सिरदर्द, मुँह का सूखापन, पेशाब में कमी, रैशेज और ग्रंथि में सूजन आना आदि कुछ आम लक्षण हैं. इन लक्षणों को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

इस छोटी उम्र में बच्चे अपना ख़्याल ख़ुद नहीं रख सकते हैं. बीमारियों से बचने के लिए उन्हें ख़ास केयर की ज़रूरत होती है. इसलिए इस मानसून में टिप्स को फॉलो कर, अपना और अपने परिवार का बेहतर तरीक़े से ख़्याल रख सकती है.

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