अशीष विद्यार्थी ने 60 की उम्र में की दूसरी शादी, पहली पत्नी का आया रिएक्शन

बॉलीवुड फिल्मों में विलेन के किरदार से लोगों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता अशीष विद्यार्थी को लेकर बड़ी खबर आई है. खबरों के मुताबिक अशीष विद्यार्थी ने गुपचुप तरीके से दूसरी शादी कर ली है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर

आशीष विद्यार्थी ने 60 साल की उम्र में दूसरी बार शादी की है. आपको बता दें, अभिनेता ने असम की रहने वाली रुपाली बरुआ (Rupali Barua) के साथ शादी के रिश्ते में बंध गए हैं.  आशीष विद्यार्थी और रुपाली बरुआ ने 25 मई को अपने करीबी लोगों की मौजूदगी में कोर्ट मैरिज की.  इन दोनों कपल की तस्वीर अब सोशल मीडिया पर सामने आई हैं. इन तस्वीरों को देखकर हर कोई हैरान रह गया है. जिसमें दूल्हा बने आशीष अपनी दुल्हनियां के साथ पोज दे रहे हैं.

पहली पत्नी ने दिया रिएक्शन

आशीष विद्यार्थी की पहली पत्नी ने राजोशी ने इंस्टाग्राम पर 4 घंटे के करीब दो पोस्ट शेयर की है. पहली स्टोरी में लिखा है, ‘सही व्यक्ति आपसे ये सवाल नहीं पूछेगा कि आप उनके लिए क्या मायने रखते हैं. वो ये कभी वहीं करेगा जिसके बारे में वो जानते हैं कि उससे आपको तकलीफ होगी. इसे याद रखें.’

वहीं दूसरी स्टोरी में लिखा है, ‘हो सकता है ज्यादा विचार करना और शक अभी आपके दिमाग से बाहर निकल गया हो. यह भी संभव है कि क्लैरिटी ने कन्फ्यूजन की जगह ले ली हो. हो सकता है कि शांति और धीरज आपकी जिंदगी को भर दे. आप काफी लंबे समय से मजबूत बने हुए हैं और अब वक्त आ गया है कि आपको आशीर्वाद मिले. क्योंकि आप ये डिजर्व करते हैं.’

आशीष और रुपाली ने अपनी शादी में किया डांस

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आशीष और रुपाली अपनी शादी को एन्जॉय करते हुए दोनों साथ में डांस कर रहे है.

Father’s day 2023: अकेले होने का दर्द- भाग 2

देर तक फोन की घंटी बजती रही और उधर से कोई उत्तर नहीं मिला. फिर मैं ने कई बार फोन किया और हर बार यही हाल रहा. मेरी घबराहट स्वाभाविक थी. तरहतरह के कुविचारों ने मन में डेरा डाल लिया. पड़ोस में रहने वाली कविता आंटी को फोन किया तो उन का भी यही उत्तर था कि घर पर शायद कोई नहीं है. मेरी आंखों मेें आंसू आ गए. पापा तो कभी कहीं जाते नहीं थे. मेरी हालत देख कर राहुल बोले, ‘‘तुम घबराओ नहीं. थोड़ी देर में फिर से फोन करना. नहीं तो कुछ और सोचते हैं.’’ ‘‘मेरा दिल बैठा जा रहा है राहुल,’’ मैं ने कहा. ‘‘थोड़ा धीरज रखो, मानसी,’’ कह कर राहुल मेज पर अखबार रख कर बोले, ‘‘हम इतनी दूर हैं कि चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे और पापा यहां आना नहीं चाहते, तुम वहां जा नहीं सकतीं…’’ ‘‘तो उन को ऐसी ही हालत में छोड़ दें,’’ मैं सुबक पड़ी, ‘‘जानते हो, पापा को कुछ भी नहीं आता है. बाजार से आते ही पर्स टेबल पर छोड़ देते हैं. अलमारी में भी चाबियां लगी छोड़ देते हैं. अभी पिछले दिनों उन्होंने नई महरी रखी है…कहीं उस ने तो कुछ…आजकल अकेले रह रहे वृद्ध इन वारदातों का ही निशाना बन रहे हैं.’’ इतने में फोन की घंटी बजी. पापा की आवाज सुनी तो थोड़ी राहत महसूस हुई, मैं ने कहा, ‘‘कहां चले गए थे आप पापा, मैं बहुत घबरा गई थी.’’ ‘‘तू इतनी चिंता क्यों करती है, बेटी. मैं एकदम ठीक हूं.

तेरी मम्मी आज के दिन अनाथाश्रम के बच्चों को वस्त्र दान करती थी सो उस का वह काम पूरा करने चला गया था.’’ ‘‘पापा, आप एक मोबाइल ले लो. कम से कम चिंता तो नहीं रहेगी न,’’ मैं ने सुझाव दिया. ‘‘इस उम्र में मोबाइल,’’ कहतेकहते पापा हंस पड़े, ‘‘तू मेरी चिंता छोड़ दे बस.’’ दिन बीतते गए. उन की जिंदगी उन के सिद्धांतों और समझौतों के बीच टिक कर रह गई. मैं लगातार पापा के संपर्क में बनी रही. मुझे इस बात का एहसास हो गया कि वह लगातार सेहत के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं. अंगरेजी दवाओं के वह खिलाफ थे इसलिए जो देसी दवाओं का ज्ञान मुझे मां से विरासत में मिला था मैं उन्हें बता देती. कभी उन को आराम आ जाता तो कभी वह चुप्पी साध लेते. एक दिन सुबह कविता आंटी ने फोन पर बताया कि पापा सीढि़यों से फिसल गए हैं. अभी पापा को वह अस्पताल छोड़ कर आई हैं. एक दिन वह डाक्टरों की देखरेख में ही रहेंगे. शायद फ्रैक्चर हो. ‘‘उन के साथ कोई है?’’ मैं ने चिंतित होते हुए पूछा.

‘‘आईसीयू में किसी की जरूरत नहीं होती. डाक्टर को वह जानते ही हैं,’’ कविता आंटी ने बेहद लापरवाह स्वर में कहा. कविता आंटी की बातें सुन कर मुझे दुख भी हुआ और बुरा भी लगा. इनसान इतना स्वार्थी कैसे हो सकता है. मेरा मन पापा से मिलने के लिए तड़पने लगा. राहुल ने मेरी मनोस्थिति भांपते हुए कहा, ‘‘मानसी, तुम इस तरह न अपने घर पर ध्यान दे सकोगी और न ही उन का.’’ ‘‘उन का मेरे सिवा और कोई करने वाला भी तो नहीं है. मैं ने कहीं पढ़ा था कि एक औरत की दुनिया में 2 ही मर्द सब से ज्यादा अहमियत रखते हैं. एक उस का पति जो उस की अस्मत की रक्षा करता है, दूसरा उस का पिता जो उस के वजूद का निर्माता होता है. तुम्हें तो मैं अपने से भी ज्यादा प्यार करती हूं, पर उन्हें क्या यों ही तिलतिल मरता छोड़ दूं?’’ ‘‘तो इस बार उन्हें किसी न किसी बहाने यहां ले आओ फिर सोचेंगे,’’ राहुल ने निर्देश दिया. मैं अगले ही दिन पापा के पास रवाना हो गई. अस्पताल में मैं ने उन्हें देखा तो विश्वास ही नहीं हुआ.

पापा की दयनीय स्थिति देख कर कलेजा मुंह को आ गया. वह सफेद चादर में लिपटे हुए दूसरी तरफ मुंह किए लेटे थे. डाक्टर से पता चला कि पापा हाई ब्लडपै्रैशर के मरीज हो गए हैं और उन का वजन भी घट कर अब आधा रह गया था. मैं उन के पास जा कर बैठ गई. पापा मुझे देखते ही बोले, ‘‘मानसी, तुझे किस ने बताया?’’ ‘‘पापा, तो क्या यह बात भी आप मुझ से छिपा कर रखना चाहते थे. मैं तो समझती थी कि आप ने धीरेधीरे खुद को संभाल लिया होगा…और यहां तो…’’ मेरा गला रुंध गया. बाकी के शब्द होंठों में ही फंस कर रह गए. ‘‘मैं सब बताता रहता तो तू मेरी चिंता करती…राहुल क्या सोचेगा?’’ ‘‘ठीक है पापा, मैं भी तब तक राहुल के पास नहीं जाऊंगी जब तक आप मेरे साथ नहीं चलेंगे. मेरा घर उजड़ता है तो उजड़े. मैं आप को यों अकेला छोड़ कर नहीं जा सकती.’’ ‘‘मानसी, यह क्या कह दिया तू ने,’’ कह कर वह थोड़ा उठने को हुए. तभी नर्स ने आ कर उन्हें फिर लिटा दिया. सीढि़यों से फिसलने के बाद पापा को चोट तो बहुत आई थी पर कोई फ्रैक्चर नहीं हुआ. मैं उन्हें अस्पताल से घर ले गई और बिस्तर पर लिटा दिया.

मेरी निगाहें घर के चारों तरफ दौड़ गईं. घर की हालत देख कर लगता ही नहीं था कि यहां कोई रहता है. बड़े बेढंगे तरीके से कपड़ों को समेट कर एक तरफ रखा हुआ था. पापा के बिस्तर की बदरंग चादर, सिंक में रखे हुए गंदे और चिकने बरतन, गैस पर अधपके खाने के टुकड़े और चींटियों की कतारें, समझ में नहीं आ रहा था काम कहां से शुरू करूं. आज मेरी समझ में आ रहा था कि सुचारु रूप से चल रहे इस घर में मम्मी का कितना सार्थक श्रम और निस्वार्थ समर्पण था. इस हालत में पापा को अकेले छोड़ कर जाना ठीक नहीं था. इसलिए मैं पापा को ले कर वापस अपने घर दिल्ली आ गई. 1-2 दिन मैं पूरे समय पापा के साथ ही रही. आफिस जाते हुए मुझे संकोच हो रहा था पर पापा मन की बात जान गए और निसंकोच मुझे आफिस जाने के लिए कह दिया. राहुल और मैं एक ही समय साथसाथ आफिस जाते थे. उस दिन शाम को हम लोग खाना खा रहे थे, तभी दरवाजे की घंटी बजी. मैं ने दरवाजा खोला, सामने मीरा आंटी खड़ी थीं.

ट्विटर पर ट्रेंड हुआ बायकॉट ‘अनुपमा’, लोगों ने किया जमकर ट्रोल

टीआरपी की लिस्ट में नंबर वन रहने वाला टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. ट्विटर ट्विटर पर ट्रेंड हुआ बायकॉट अनुपमा. शो में समर और डिंपल की शादी के समय अनुज और अनुपमा के बीच हाई वोल्टेज ड्रामा दिखाने के चक्कर में शो के मेकर्स से बहुत बड़ी गलती हो गयी है. मेकर्स ने शो में ऐसी-ऐसी चीजे दिखा दी है जिसकी वजह से दर्शक भड़क गए है.

भारतीय संस्कृति का उड़ाया जा रहा मजाक

ट्विटर यूजर्स का कहना है कि इस शो के जरिए भारतीय संस्कृति का मजाक उड़ाने का प्रयास हो रहा है. कई यूजर्स ने नाराजगी जाहिर की. एक ने तो इस मामले पर लंबा-चौड़ा पोस्ट भी लिख दिया है. अपने ट्वीट में यूजर ने लिखा, ‘अनुपमा शो भारतीय संस्कति और हिंदू धर्म का अपमान कर रहा है. शो में दिखाया जा रहा है अनुपमा जो अब किसी और की पत्नी है अपने एक्स हस्बैंड, वो शख्स जो अब किसी और का पति है के साथ बैठकर पूजा करती है. ऐले में वनराज की पत्नी काव्या देखती रहती है. वहीं समर और डिंपी से कोई भी तालुक न रखने वाली माया, अनुज के साथ पूजा में बैठ जाती है. घर के बड़े-बुजुर्ग इस ड्रामे को देखते हैं.’

यूजर्स ने मेकर्स को सुनाई खरी-खोटी

वहीं एक अन्य यूजर्स ने भी शो के मेकर्स को लताड़ लगाई है. उसने लिखा कि एक्स हस्बैंड और वाइफ पूजा कर रहे हैं. ऐसा कहां होता है. बच्चों के मौजूदा मां-बाप पूजा नहीं कर सकते क्या? रीति-रिवाजों की शो में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. इन पोस्ट के साथ ही दोनों ही यूजर्स ने बॉयकॉट अनुपमा हैशटैग का प्रयोग किया है. इनके पोस्ट को रिट्वीट कर के बॉयकॉट अनुपमा हैशटैग ट्रेंड कराया जा रहा है. वहीं कई लोग शो के सीन्स की तस्वीरें पोस्ट कर के शो को बॉयकॉट करने की मांग कर रहे है.

धन्यवाद भाग-1: जब प्यार के लिए वंदना ने तोड़ी मर्यादा

‘‘क्या बात है शालू सुस्त क्यों नजर आ रही हो?’’ औफिस से लौटते राजेश को मेरी उदासी पहचानने में 1 मिनट का समय भी नहीं लगा.

‘‘आज एक बुरी खबर सुनने को मिली है,’’ मेरी आंखों में आंसू भर आए.

‘‘कैसी बुरी खबर?’’ वे फौरन चिंता से भर उठे.

‘‘आप को मेरी सहेली वंदना याद है?’’

‘‘हां, याद है.’’

‘‘वह बहुत बीमार है. शायद ज्यादा दिन न जीए,’’ मैं ने उन्हें रुंधे गले से जानकारी दी.

‘‘वैरी सैड,’’ सिर्फ ये 2 शब्द बोल कर उन्होंने जब सतही सा अफसोस जताया और

जूतों के फीते खोलने में लग गए, तो मुझे गुस्सा आ गया.

‘‘आप इस बारे में और कुछ नहीं जानना चाहेंगे?’’ भावावेश के कारण मेरी आवाज कांप रही थी.

‘‘तुम बोलो मैं सुन रहा हूं.’’

‘‘लेकिन सुन कितने अजीब से ढंग से रहे हो. अरे, मैं उस वंदना की बात कर रही हूं जिस से आप शादी के बाद घंटों बतियाते थे, जो बिलकुल घर की सदस्य बन कर यहां सुबह से रात तक रहा करती थी. आज करीब 15 साल बाद मैं आप की उस लाडली साली की दुखभरी खबर सुना रही हूं और आप सिर्फ वेरी सैड कह रहे हो,’’ मैं गुस्से से फट पड़ी.

‘‘मैं और क्या कहूं शालू. जीनामरना तो इस दुनिया में चलता ही रहता है,’’ उन्होंने भावहीन से लहजे में जवाब दिया.

‘‘आप ऐसी दार्शनिकता किसी और मौके पर बघारना. मेरा मन वंदना से मिलने का कर रहा है. उस की इतने सालों से कोई खबर नहीं थी और आज मिली है तो कैसी बुरी खबर मिली है,’’ मेरा गला फिर से भर आया.

‘‘क्या करोगी उस से मिल कर?’’

‘‘यह आप कैसा अजीब सा सवाल पूछ रहे हो. अरे, वह मेरी सब से प्यारी सहेली है.’’

‘‘उस प्यारी सहेली ने पिछले 15 सालों में तुम्हें न कभी फोन किया, न चिट्ठी लिखी और न ही कभी मिलने आई.’’

‘‘इस कारण मेरे दिल में उस के लिए बसे प्यार और दोस्ती के भाव रत्तीभर कम नहीं हुए हैं.’’

‘‘मैं तो सिर्फ ये कहना चाह रहा हूं कि जो इंसान अब ज्यादा जीएगा ही नहीं, उस से मिल कर मन को दुखी करने का क्या फायदा है.’’

‘‘यह फायदेनुकसान की बात ही नहीं है. मेरा दिल उस से मिलना चाह रहा है और मैं जाऊंगी.’’

‘‘बच्चों के ऐग्जाम आने वाले…’’

‘‘ऐग्जाम अगले महीने हैं और आगामी सोम और मंगल को उन के स्कूल में छुट्टी है. हम शनिवार को निकलेंगे और मंगल तक लौट आएंगे.’’

‘‘लेकिन उन की देखभाल…’’

‘‘वे अपनी चाची के पास रहेंगे. मैं ने नीतू से मोबाइल पर बात कर ली है.’’

‘‘देखो, यों जिद…’’

‘‘प्लीज, राजेश मुझे वंदना से मिलना ही है.’’

मेरे आंसुओं के सामने उन्होंने हथियार डालते हुए कह दिया, ‘‘ओके. हम शनिवार की रात को निकलेंगे. मैं ट्रेन के टिकट बुक करा देता हूं,’’ कह वे मुझे ड्राइंगरूम में अकेला छोड़ कर कपड़े बदलने बैडरूम में चले गए.

मेरे दोनों बेटों का ट्यूशन से लौटने में अभी वक्त था. मैं थकीहारी सी आंखें मूंद कर वहीं बैठीबैठी वंदना की यादों में खो गई…

वरना मेरी बचपन की सहेली थी. हमारे घर आसपास ही थे इसलिए हम साथसाथ खेल और पढ़ कर बड़े हुए थे.

राजेश को मेरे लिए मेरे मम्मीपापा ने ढूंढ़ा था. मेरी सास बीमारी रहती थी और घर का सारा काम करने की जिम्मेदारी मुझे ही बड़ी जल्दी संभालनी पड़ी थी.

मैं ने बीएड में प्रवेश पाने के लिए परीक्षा शादी के पहले दे रखी थी. शादी के बाद मुझे परीक्षा में सफल हो जाने का समाचार मिला, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

वंदना ने मेरा साथ न दिया होता, तो मैं कभी बीएड न कर पाती. मुझे पूरे सालभर तक रोज कालेज जाने के अलावा घर लौट कर भी बहुत पढ़नालिखना पड़ता था.

वंदना रोज मेरे घर आ जाती. मेरा घर के कार्यों में ही नहीं बल्कि कालेज से मिले असाइनमैंट पूरे करने में भी हाथ बंटाती. मेरी सास उस की बहुत तारीफ करती. राजेश से वह जल्द ही खूब खुल गई थी और जीजासाली की नोक?ोंक के चलते हमारे घर का माहौल बड़ा खुशनुमा रहता.

मेरा बीएड का रिजल्ट बड़ा अच्छा रहा. इस खुशी के मौके पर मैं ने वंदना को बड़ा सुंदर और कीमती सूट उपहार में दिया.

मैं ने बीएड के बाद एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया. वंदना पहले की तरह रोज तो नहीं, पर सप्ताह में 2-3 बार तब भी हम से मिलने आ जाया करती थी. राजेश के साथ फोन पर किसी भी विजय पर लंबीलंबी चर्चा करती. वह तो शुक्र था कि इन दोनों के बीच फोन पर बातें मुफ्त में होती थीं क्योंकि राजेश ने एक खास स्कीम फोन कंपनी से ले रखी थी. वे ऐसा न करते, तो इन दोनों की गपशप का बिल हर महीने हजारों रुपए आता. उन दिनों मोबाइलों का रेट कुछ ज्यादा था. वह राजेश को लैंडलाइन पर नहीं, मोबाइल पर फोन करती थी.

मेरी शादी के करीब 2 साल बाद वंदना का रिश्ता उस की मम्मी ने तय किया. उस के पापा की हार्टअटैक से मौत हुए तब 6-7 साल का समय बीत चुका था.

लड़का अच्छा था, उस का घरबार भी ठीक था, पर उन दोनों की शादी तय करी गई तारीख से केवल 5 दिन पहले टूट गई.

वंदना और उस लड़के के बीच न जाने क्या घटा जो वह शादी नहीं हो सकी. दोनों तरफ के लोगों ने बहुत पूछा, पर शादी टूटने का सही कारण न वंदना ने किसी को बताया, न उस लड़के ने. वह इस विषय पर मेरे सामने भी चुप्पी साध लेती थी.

लोगों को तरहतरह की अफवाहें उड़ाने का मौका मिल गया. तब वंदना ने अपनी ननिहाल

के शहर मेरठ शिफ्ट करने का फैसला किया. अपनी शादी टूटने के करीब 3 महीने बाद वह अपनी मां के साथ मेरठ चली गई. फिर कानपुर शिफ्ट हो गई.

तब से उस के और हमारे बीच संपर्क खत्म होता गया. शुरूशुरू में 2-4 बार टैलीफोन पर बातें हुईं, पर मु?ो ऐेसे अवसरों पर साफ महसूस होता कि वह अनमनी हो कर ही मु?ा से बातें करती.

‘‘वंदना बदल गई है. उस के दिल पर शादी टूट जाने से गहरा जख्म लगा है. बहुत कटीकटी सी बोलती है फोन पर,’’ मैं उन दिनों राजेश से अकसर ऐसी शिकायत दुखी मन से किया करती, पर ये मु?ा पर ज्यादा ध्यान नहीं देते.

बच्चों में डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए किस तरह के बदलाव कर सकते हैं?

सवाल

मेरे बच्चे को डायबिटीज है. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए हम उस की दिनचर्या में किस तरह के बदलाव कर सकते हैं?

 जवाब

 अगर बच्चे को टाइप 2 डायबिटीज हो जाती है तो सब से पहले तो उसे पौष्टिक खाना खाने के लिए प्रोत्साहित करें. साथ ही ऐसे में सब से ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चा अपने वजन पर नियंत्रण रखे. इसलिए आप सुनिश्चित करें कि वह नियमित रूप से व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधियों को हमेशा बनाए रखे. अपनी दिनचर्या में इन सभी बदलावों से बच्चे को डायबिटीज प्रबंधन में बहुत मदद मिल सकती है.

सवाल

मेरा बच्चा मधुमेह की समस्या से कई सालों से ग्रस्त है. मुझे काफी चिंता होती है. डायबिटीज जैसी समस्या के साथ भी क्या वह एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है?

जवाब

बिलकुल यदि आप के बच्चे को टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज है तो एक सही डायबिटीज प्रबंधन के साथ वह सामान्य जीवन जी सकता है. उस के लिए आप को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा जैसेकि आप अपने बच्चे के ब्लड शुगर लैवल की नियमित निगरानी रखें, सही समय पर इंसुलिन का इंजैक्शन लगवाएं, समयसमय पर उस के हैल्थ कोच से मिलें, अनियमित ब्लड शुगर लैवल से निबटने और बच्चे के खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर नजर रखने की सभी बातों के संबंध में अपने साथसाथ उसे भी जागरूक करें.

जब बच्चों में टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज से निबटने की बात आती है तो ऐसे में डायबिटीज केयर करने वालों और मातापिता दोनों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाती है. मातापिता को एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए अपने बच्चों को उन की मौजूदा स्थिति के बारे में हमेशा जानकारी देनी चाहिए.

-डा. नवनीत अग्रवाल

चीफ क्लीनिकल औफिसरबीटओ.

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 व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

बड़े धोखे हैं इस राह में

औनलाइन फ्रौडों की गिनती बढ़ती जा रही है और अब लोगों का पैसा व व्यक्तिगत बातें सुरक्षित नहीं रह गई हैं. नोएडा में पुलिस ने एक गैंग को पकड़ा है जो बिग बाजार, वीमार्ट, बिग बास्केट आदि के नाम से सोशल मीडिया और एसएमएस के जरीए विज्ञापन भेज कर भारी छूट का लालच दे कर लोगों का पर्सनल बैंक अकाउंट हैक कर खाली कर देता था, कुछ के फोन से सारी बातें कौपी कर लेता था.

कालेज के सिंपल ग्रैजुएट भी इस तरह का काम आराम से करना सीख गए हैं और उन का टैक इंजीनियर होना जरूरी नहीं है. लोगों को लालच दिया जाता है कि आप का लोन सैंक्शन हो गया है, आप को इंश्योरैंस क्लेम मिल रहा है, आप को खासतौर पर 50% की छूट 5 घंटे के लिए दी जा रही है. जो अपने घर से बाहर कदम रखने से कतराते हैं, वे इन भुलावों में आ जाते हैं और धोखा खा जाते हैं. पुलिस में शिकायत करना आमतौर पर बेकार जाता है क्योंकि यदि अपराधी पकड़े भी जाएं तो सजा दिलवाने में महीनों लगेंगे और पैसा तो हरगिज वापस नहीं मिलेगा.

औनलाइन पर भरोसा सरकार ने जबरदस्ती दिलवाया है और इस के लिए देश को नोटबंदी की आग में धकेला था. आज भी सरकार नए नोट कम छाप रही है ताकि लोग जबरदस्ती औनलाइन खरीदारी करें. औनलाइन खरीदारी में चाहे कितनी सुविधा हो, यह नहीं भूलना चाहिए कि कोई भी सुविधा मुफ्त में नहीं मिलती. अब औनलाइन कौमर्स ने भारी छूट देना बंद कर दिया है. जो छूट इन कंपनियों की साइटों पर दिखती भी है वह भुलावा होती है क्योंकि उसी छूट पर फिजिकल बाजार में चीजें मिल रही हैं जहां आप चीज को ध्यान से देख भी सकते हैं, परख भी सकते हैं.

ई कौमर्स वाले अब इतने बड़े हो गए हैं कि उन के ओवर हैड फिजिकल स्टोरों के मालिकों के मुनाफे से ज्यादा हो गए हैं. सामान को उत्पादक से ले कर आप के घर तक पहुंचाना सस्ता काम नहीं है. सिर्फ कुछ छूट दिखा कर के आप सस्ता बढि़या माल पाएं या नहीं, आप अपने को हैकर्स के फंदे में जरूर डाल रहे हैं.

ई कौमर्स कंपनियों ने अब सस्ता मिलताजुलता सामान भी बनवाना शुरू कर दिया है. नामी कंपनियां भी अब अपने ब्रैंड के ई कौमर्स के लिए सस्ते प्रोडक्ट्स बनाती हैं क्योंकि वे जानती हैं कि ग्राहक इस्तेमाल करने के बाद शिकायत तो करने आएगा नहीं.

ई कौमर्स कंपनियों ने प्रोडक्ट्स रिव्यू भी ठेके पर करवाने शुरू कर दिए हैं ताकि जिस प्रोडक्ट को बिकवाना हो उस के अच्छे रिव्यू ज्यादा दिखें. जालसाजों के साथ क्रैडिट कंपनियों,

ई कौमर्स कंपनियों और फेक प्रोडक्ट कंपनियों ने एक जाल बुन डाला है जिस में अच्छेबुरे की पहचान करना मुश्किल हो गया है. एक क्रैडिट कार्ड कंपनी ने हाल ही में कहा कि बधाई हो, आप को 1,500 रुपए का बोनस. आप बारीकी से पढ़ोगे तो पता चलेगा कि 5-7 दिन में 1 लाख, 36 हजार की खरीद करेंगे तो यह पैसा मिलेगा.

नोएडा के शातिर तो थोड़े से पैसे का चूना लगा रहे थे, बड़ा पैसा तो बेकार की या घटिया चीजें खरीदने में लग रहा है. फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एसएमएस का इस्तेमाल कर के सैकड़ों लोग आम लोगों को लूट रहे हैं. इन से बचना है तो घर से निकलिए और बाजार तक जाइए और वही खरीदें जो चाहिए. ह्यूमन टच बनाए रखें तभी सहीगलत का पता चलेगा.

अर्ली डिटेक्शन है ओवेरियन कैंसर का इलाज

अधिकतर महिलाएं पहले परिवार की देखभाल के बाद स्वयं की देखभाल करती हैं इसका यह परिणाम होता है कि कई बार परिवार के सदस्यों की देखभाल की व्यस्तता में वह स्वयं की देखभाल करना ही बंद कर देती हैं. यही कारण है कि दुनियाभर में एडवांस स्टेज में कैंसर के निदान पर सुई महिलाओं की ओर इशारा करती है. यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, विशेष रूप से कैंसर के लिए, जिसे जल्दी पता चलने पर रोका जा सकता है या ठीक किया जा सकता है.

महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो उन्हें पुरुषों की तुलना में कुछ स्थितियों और बीमारियों के विकसित होने के हाई रिस्क में डालती हैं. इसलिए, महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है. इनमें से एक ओवेरियन कैंसर है, जहां शुरुआती पहचान से रोग का निदान और सफल उपचार की संभावना होती है. केरल के कार्किनोस हेल्थकेयर के स्त्री रोग ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ अश्वथी जी नाथ कहती है कि स्त्री रोग संबंधी कैंसर से पीड़ित महिलाओं में ओवेरियन कैंसर, मृत्यु का सबसे प्रमुख वजह होता है और ये महिलाओं में अक्सर मृत्यु का पांचवां सबसे बड़ा कारण है. भारत में ओवेरियन कैंसर के मरीज 2020 में 3,886 मिले, जो अनुमानित घटना के अनुसार 2025 में बढ़कर 49,644 होने की उम्मीद है, यह महत्वपूर्ण है कि ओवेरियन कैंसर का जल्द पता लगाया जाए.

कारण है क्या

इसके आगे डॉक्टर अश्वथी कहती है कि ओवेरियन कैंसर एक महिला के अंडाशय में उत्पन्न होता है. ओवरीज, अंडे और हार्मोन के उत्पादन के लिए जिम्मेदार होते हैं. अंडाशय के विभिन्न भागों में कैंसर कोशिकाएं विकसित हो सकती हैं, जिनमें सबसे आम प्रकार एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर है, जो अंडाशय की बाहरी परत में बनता है. हालांकि ओवेरियन कैंसर के सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से समझ में नहीं आए हैं. ऐसा माना जाता है कि यह आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों का मिलाजुला परिणाम है. कुछ ज्ञात रिस्क फैक्टर्स में 50 वर्ष से अधिक आयु वाले इसमें शामिल होते है. विशेष रूप से मेनोपॉज़ के बाद, ओवरी या स्तन कैंसर की फैमिली हिस्ट्री, आनुवांशिक परिवर्तन, मेनोपॉज़ के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का लंबे समय तक उपयोग और ऐसी महिलाएं जो कभी गर्भवती नहीं हुई हो या जिन्हें गर्भवती होने में कठिनाई हुई है आदि सभी शामिल हैं. जीवनशैली में परिवर्तन जैसे धूम्रपान, मोटापा, आहार, और पर्यावरणीय एजेंटों जैसे कीटनाशकों के संपर्क में आने से भी ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

लक्षण

  • पेट में सूजन
  • भोजन पेट जल्दी भरा हुआ महसूस होना
  • वजन का घटना
  • पेल्विक एरिया में बेचैनी
  • थकान
  • पीठ दर्द
  • कब्ज
  • बार-बार पेशाब आना आदि कई है.

डायग्नोसिस

ओवेरियन कैंसर के डायग्नोसिस की प्रक्रियां में शारीरिक परीक्षण एक कॉम्बिनेशन के तहत होता है. इमेजिंग परीक्षण, मसलन अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन और रक्त परीक्षण ये सभी इसमें शामिल होता हैं. इसके अलावा ट्यूमर मार्कर ( एक परीक्षण जो ऊतक, रक्त, मूत्र, या शरीर के अन्य तरल पदार्थों में ट्यूमर मार्कर नामक पदार्थों की मात्रा को मापता है) होते है, जो उपचार में सहायता करने के साथ-साथ कैंसर की पुनरावृत्ति न हो इसे भी डायग्नोस कर सकता है. यदि ये परीक्षण ओवेरियन कैंसर की संभावना का संकेत देते हैं, तो सीटी स्कैन में बीमारी की सीवियरनेस के आधार पर एक सर्जरी  या बायोप्सी की जाती है. एक बार डायग्नोसिस हो जाने के बाद, कैंसर की स्टेजिंग की जाती है. स्टेज I से लेकर स्टेज IV तक, जिसमें कैंसर दूर के अंगों तक फैलने की सम्भावना होती है. कैंसर के इलाज में उसका स्टेज सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे सही डायग्नोसिस के द्वारा ही उसे समझा जा सकता है.

क्या है इलाज

डॉ. अश्वथी कहती है कि ओवेरियन कैंसर का उपचार कैंसर के स्टेज और प्रकार के साथ-साथ रोगी के समग्र स्वास्थ्य कंडीशन पर निर्भर करता है. प्राथमिक उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी शामिल हैं. सर्जरी अक्सर पहला कदम होता है, जिसका लक्ष्य जितना संभव हो, उतना कैंसर को मरीज के शरीर से दूर करना होता है. कीमोथेरेपी का उपयोग कैंसर की शेष कोशिकाओं को मारने के लिए किया जाता है. टारगेटेड थेरेपी, एक नया उपचार विकल्प है, जो विशेष रूप से कैंसर कोशिकाओं को टारगेट करता है और कीमोथेरेपी की तुलना में इसके साइड इफ़ेक्ट कम हो सकते हैं. ये सही है कि इन उपचारों के शारीरिक और भावनात्मक साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं, जिनमें बालों का झड़ना, थकान, मतली और प्रजनन संबंधी समस्याएं शामिल हैं. इसके अलावा, उपचार की कॉस्ट कई परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ हो सकती है, जिससे उन्हें आवश्यक देखभाल मिलना मुश्किल हो जाता है. इस जर्नी से गुजरने वाली महिलाओं को उनकी हेल्थ केयर देने वाले और उनके प्रियजनों दोनों की ओर से सहयोग का होना बहुत आवशयक है.

अर्ली डिटेक्शन है जरुरी

डॉक्टर आगे कहती है कि ओवेरियन कैंसर के अर्ली डिटेक्शन के महत्व को इग्नोर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि जितनी जल्दी इस बीमारी का पता चलेगा, उतनी ही जल्दी इस ठीक करना आसान होता है. ये दुःख की बात है कि ओवेरियन कैंसर अधिकतर लास्ट स्टेज में डायग्नोस होता है. यह इसके लक्षणों के कारण होता है जैसे पेट फूलना, जल्दी भरा हुआ महसूस होना, पेट और पेल्विस में दर्द, और बार-बार पेशाब आने की समस्या जिसे अधिकतर इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम, यूरिन इन्फेक्शन आदि समझकर नज़रअंदाज कर दिया जाता है, जिससे समय रहते इसका पता लगाना संभव नहीं होता.

Summer special: पोस्ट वैडिंग मेकअप टिप्स

शादी के बाद यह बहुत जरूरी हो जाता है कि दुलहन हमेशा खूबसूरत लगे. उसे अपने पति के लिए या फिर आने वाले रिश्तेदारों के लिए तैयार दिखना जरूरी हो जाता है. दुलहन हर समय पार्लर भी नहीं जा सकती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि घर पर ही मेकअप कैसे करें कि आप खूबसूरत लगें.

दरअसल, हमेशा बहुत ज्यादा मेकअप की जरूरत नहीं होती है. मगर मेकअप की कुछ चीजों की हमेशा जरूरत होती है. ससुराल में दुलहन फटाफट कैसे मेकअप करे और खूबसूरत दिखे इस के लिए सौंदर्य विशेषज्ञा भारती तनेजा निम्न टिप्स बता रही हैं:

1. मेकअप करने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि खूबसूरत दिखने का पहला स्टैप है अपनी स्किन का खयाल रखना. स्किन हैल्दी होगी तो मेकअप ज्यादा अच्छा दिखेगा. मेकअप से पहले स्किन को अच्छी तरह प्रिपेयर करना जरूरी होता है.

2. रात में सोने से पहले हर हालत में फेस को साफ करें और फिर उस पर मौइस्चराइजिंग क्रीम या नरिशिंग क्रीम या फिर औयल लगा कर सोएं. आप की स्किन बहुत ड्राई है तो आप नरिशिंग क्रीम या औयल लगा सकती हैं और अगर औयली है तो नरिशिंग मौइस्चराइजर लगा सकती हैं.

3. सुबह में मेकअप लगाने से पहले स्किन को प्रिपेयर कीजिए. इस के लिए पहले स्किन को क्लीन कीजिए और उस के बाद उस पर टोनर स्प्रे कर लीजिए. टोनर को स्प्रे बौतल में भर कर हमेशा फ्रिज में रखें. जब भी आप अपनी स्किन को टोन करना चाहें तो उसे फ्रिज से निकालें और चेहरे पर स्प्रे कर लें. अब इसे अपनेआप सूखने दें ताकि चेहरा अच्छी तरह टोन हो जाए. फिर मौइस्चराइजिंग क्रीम लगा लें. ऐसी क्रीम लें जिस में एसपीएफ यानी सन प्रोटैक्शन फैक्टर मौजूद हो.

4. आप की मेकअप किट में कुछ चीजें ऐसी जरूर होनी चाहिए जो आप के पास हमेशा किट में मौजूद रहें. उदाहरण के लिए आप इस में गोल्ड औयल रखें.

5. मेकअप से पहले 2-3 बूंदें गोल्ड औयल हाथ में मलें और फिर इसे चेहरे पर अच्छी तरह लगाएं. 5-10 मिनट रुकें और फिर प्राइमर बेस के 2-3 बूंदें हाथों में लें और पूरे चेहरे पर लगा लें. आप का चेहरा मेकअप के लिए तैयार है.

6. जब आप पार्लर में मेकअप कराती हैं तो बहुत सी चीजें यूज होती हैं. यहां आप को बेस और फिर पाउडर लगाया जाता है. अगर घर में आप को आसानी से फटाफट मेकअप करना है तो आप टू वे केक खरीद लें. यह फाउंडेशन और पाउडर का एक मिक्स्चर होता है. इसे लगाने के बाद आप को पाउडर लगाने की जरूरत नहीं है. इस के अंदर एक स्पौंज होता है जिसे गीला कर के पानी निचोड़ लें और फिर चेहरे पर अच्छी तरह लगा लें. यह बहुत लंबे समय तक टिकेगा और आप को और कुछ करना भी नहीं पड़ेगा. इसे आप कुछ सैकंड्स में लगा कर ?ाट से तैयार हो सकते हैं.

7. अगर आप की आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स या दागधब्बे हैं तो आप को कंसीलर लगाने की जरूरत पड़ेगी. कंसीलर लगाने के बाद टू वे केक लगाएं.

8. वैसे तो आप की मेकअप किट में ब्लशर होगा, मगर जब आप के पास समय कम हो या ब्लशर नहीं है तो आप फटाफट इस काम के लिए अपनी लिपस्टिक का प्रयोग कर सकती हैं. आप जरा सी लिपस्टिक को उंगली और अंगूठे के बीच में ले कर मर्ज कर लें और फिर उसे ब्लशर की तरह प्रयोग में लाएं. यह लंबे समय तक टिकेगी और आप का अलग से ब्रश से ब्लशर लगाने का समय भी बच जाएगा.

9. बेहतर तो यह होगा कि शादी से पहले आप आईलैश ऐक्सटैंशन करा लें ताकि शादी के बाद आप को मसकारा लगाने की जरूरत न पड़े. शादी के बाद जरूरत होती है कि आप की आंखें करीब 1 महीने तक तो बेहद खूबसूरत दिखें ही. आईलैशेज आप की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं. अगर आईलैश ऐक्सटैंशन नहीं कराया है तो आप अपने पास मसकारा ऐसा रखें जो आप को वौल्यूम भी दे और आप की लैशेज को लैंथ भी दे. मसकारा को आईलैशेज के रूट से ले कर बाहर ले जाते हुए और कर्ल करते हुए लगाएं तो आप की लैशेज बहुत खूबसूरत हो जाएंगी.

10. अगर आप की आईलैशेज बहुत लाइट हैं तो उस समस्या के लिए एक बार मसकारा लगाने के बाद जो लूज पाउडर होता है उसे अपनी उंगलियों में ले लीजिए और फिर उसे लैशेज के ऊपरनीचे लगा लीजिए. फिर थोड़ी देर रुक कर मसकारा का डबल कोट कर लीजिए. फिर देखिए आप की आईलैशेज कितनी थिक, लौंग और खूबसूरत दिखेंगी.

11. आंखों के मेकअप का एक अहम हिस्सा आईशैडो भी होता है. ब्रश में बहुत थोड़ा सा आईशैडो ले कर अपनी आंखों में लगा कर मर्ज करें. आईब्रोज के ठीक नीचे हाइलाइटर लगाएं.

12. अगर आंखों को गहरा दिखाना चाहती हैं तो क्रीज लाइन के ऊपर डार्क या लाइट ब्राउन कलर का आईशैडो ले कर उस को स्मज कर दीजिए. आंखें बड़ी और खूबसूरत दिखाई देंगी.

13. आसानी से आईलाइनर लगाने के लिए आप आईलाइनर पैन खरीदें. इस से आप बहुत ही आसानी से आईलाइनर लगा पाएंगी. इस की निभ बहुत स्पौंजी होती है.

14. काजल खरीदते समय ध्यान रखें कि काजल स्मज पू्रफ होना चाहिए ताकि आप को बारबार इस के लिए मेहनत न करनी पड़े.

15. आप कुछ स्टीकर बिंदी भी खरीद लीजिए. यह आर्टिस्टिक बिंदी हर तरह की डिजाइन में मिलती है जिसे आप आसानी से लगा सकती हैं.

16. आंखों के बाद लिप मेकअप करें. लिपस्टिक लगाने के लिए पहले लिप पैंसिल से लिप को शेप दीजिए. अगर वह सही से काम नहीं कर रही है तो लिप पैंसिल के ऊपर जरा सी क्रीम लगा लें. तब यह बहुत स्मूथली चलने लगेगी. अब लिप लाइन बनाने के बाद ब्रश की सहायता से लिपस्टिक लगाएं. लिक्विड लिपस्टिक भी मिलती है जिसे आप ज्यादा आसानी से लगा सकती हैं. लिपस्टिक को देर तक टिकाने के लिए आप मैट लिपस्टिक लगा सकती हैं.

मेकअप देर तक टिकाने के लिए मेकअप सीलर का प्रयोग करें. इसे फेस पर स्प्रे करने से मेकअप देर तक टिका रहता है. इस से आप पूरा दिन खूबसूरत दिख सकती हैं. आखिर में अच्छा सा परफ्यूम लगाएं और खूबसूरत दिखें.

घर में फटाफट मेकअप के कुछ और टिप्स ऐंड ट्रिक्स

  •  चीकबोन को हाईलाइट करने के लिए ब्लशर अप्लाई करें. ब्लशर को चीकबोन से कान की तरफ ले जाते हुए अप्लाई करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि ब्लशर और लिपस्टिक के शेड्स एकजैसे हों.
  • यदि आप आई मेकअप को हाईलाइट करना चाहती हैं तो लिप मेकअप लाइट रखें यानी पिंक, पीच जैसे लाइट शेड की लिपस्टिक लगाएं. यदि आप आई मेकअप लाइट रख रही हैं तो रैड, औरेंज, मैरून जैसे ब्राइट कलर की लिपस्टिक लगाएं.
  • स्मोकी आई मेकअप करना चाहती हैं तो डार्क ग्रे आईशैडो आंखों की ऊपरी आईलिड पर लगा कर अच्छी तरह स्मज करें. ज्यादा स्मोकी लुक के लिए ग्रे आईशैडो के ऊपर ब्लैक आईशैडो लगाएं और दोनों को ब्लैंड करें.

पास में रखें ये हेयर स्टाइलिंग टूल्स

हमारे ओवरऔल लुक के लिए ड्रैस और ज्वैलरी के साथ हेयरस्टाइल भी काफी माने रखता है. खूबसूरती से संवारे गए बाल दुलहन को ज्यादा आकर्षक बनाते हैं. बालों को अलगअलग तरह से स्टाइल करने के लिए कई तरह के हेयर स्टाइलिंग टूल्स की आवश्यकता पड़ती है. चाहे बालों को कर्ली बनाना हो, स्ट्रेट करना हो या वेव्स लुक देना हो हेयर स्टाइलिंग टूल्स की मदद से आप घर पर ही अपने बालों को मनचाहा स्टाइलिश लुक दे सकती हैं.

हेयर स्ट्रेटनर

हेयर स्ट्रेटनर की मदद से आप अपने बालों को स्ट्रेट लुक तो दे ही सकती हैं, साथ ही वेव्स लुक के लिए भी हेयर स्ट्रेटनर काफी मददगार साबित होता है. बस आप को ध्यान यह रखना है कि कभी भी गीले बालों में इस का इस्तेमाल न करें. जब आप हेयर स्ट्रेटनर को बालों पर यूज करें तो उन्हें हमेशा टाइट रखें. यह आप के बालों को स्ट्रेट करने में मदद करेगा और उन्हें नैचुरल फिनिश देगा.

ब्लो ड्रायर

वैसे तो महिलाएं आमतौर पर इस का इस्तेमाल बाल सुखाने के लिए करती हैं, लेकिन आप इस का इस्तेमाल बालों को कई तरीके से स्टाइल करने के लिए कर सकती हैं. इस की मदद से आप अपने बालों को खूबसूरत शेप दे सकती हैं. आजकल मार्केट में हौट ऐंड कूल के कौंबिनेशन वाले हेयर ड्रायर आ रहे हैं. इस तरह के कूल हेयर ड्रायर में ईएचडी तकनीक होती है जो यह सुनिश्चित करती है कि आप के बालों पर सही तरीके से गरमी दी जाए जिस से इन्हें किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचे.

ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल हमेशा अपने बालों के रूट्स से शुरू करें और धीरेधीरे सिरों की ओर बढ़ें. सब से पहले राउंड ब्रश कर बालों के अंत तक रोल करें, साथ ही अपने ब्लो ड्रायर को उस एरिया पर फोकस कर के कई बार दोहराएं. रूट्स से एंड तक प्रत्येक स्ट्रैंड को अलग करते हुए अपनी उंगलियों का प्रयोग करें. इस से आप अपने बालों को अधिक वौल्यूम भी दे सकेंगी.

कर्लिंग आयरन

कर्लिंग आयरन की मदद से आप अपने बालों को कर्ल दे कर स्टाइल कर सकती हैं. इस में आप को अलगअलग साइज के टौंग भी मिलेंगे जिन की मदद से आप बालों में कई तरह के कर्ल लुक बना सकती हैं. इन्हें इस्तेमाल करना भी काफी आसान होता है. इस के लिए आप अपने बालों को छोटेछोटे सैक्शन में बांट लें और फिर रौड में लपेट कर थोड़ी देर रुकें और फिर छोड़ दें. बालों को कर्ल करने के लिए हेयर की मिड लैंथ से शुरू करें और बालों की रूट्स के बहुत करीब नहीं. इस की मदद से आप के बाल काफी बाउंसी कर्ल वाले लगेंगे.

ध्यान रखें कि इस का इस्तेमाल बालों की जड़ में न करें. इसे बालों में लगाने से पहले अच्छी तरह इस का टेंपरेचर चैक कर लें. अगर टेंपरेचर कम रहेगा तो आप के कर्ल जल्दी खुल जाएंगे वहीं अगर तापमान ज्यादा हो जाएगा तो बाल जलने का डर भी रहता है.

हेयर स्प्रे

अगर आप चाहती हैं कि आप ने जो हेयरस्टाइल बनाया है वह लंबे टाइम तक खराब न हो तो आप को हेयर स्प्रे का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. बिना इस के इस्तेमाल के कोई भी हेयरस्टाइल जल्दी खराब हो जाता है. लेकिन अगर आप बालों को स्टाइल करते समय हेयर स्प्रे का इस्तेमाल करती हैं तो आप के बाल काफी देर तक खराब नहीं होंगे और आप को बारबार परेशान नहीं होना होगा.

प्रोफैशनल ब्रैड्स टूल्स

बालों को अलगअलग डिजाइन में बनाने के लिए ब्रैड्स टूल्स का भी काफी बड़ा रोल होता है. इस में आप को ओवल हेयर पफ अप मेकर, डोनट मैजिक बन, सैट टौप्सी टेल, पोनीटेल होल्डर इत्यादि मिल जाएंगे.

सोने के वरक के पीछे छिपा भेड़िया (भाग-1)

सारिका ने कभी सोचा भी न था कि शादी के बाद उस की जिंदगी इतनी बदल जाएगी. शादी से पहले वह कितनी हंसमुख व मिलनसार थी. उस की न जाने कितनी सहेलियां थीं. किसी भी उत्सव, पार्टी वगैरह में उस के जाते ही जैसे जान आ जाती थी. उस के गीत, चुटकुले, कहकहे और खूबसूरती हरेक को उस के आसपास रहने को मजबूर कर देती थी.

लेकिन अब तो वह ऐसी पार्टियों में जाने से कतराती थी. पर समाज से कट कर भी तो नहीं रहा जा सकता, इसलिए जब कभी मजबूरी में जाती भी तो ऐसी कुछ बातें उस के कानों से टकरा ही जातीं, जो उसे विचलित कर देतीं. जैसे, ‘‘मोहितजी कितने अच्छे और हंसमुख हैं और उन की बीवी… नाक पर मक्खी तक नहीं बैठने देती, हर समय उस के तेवर चढ़े रहते हैं.’’

‘‘भई, खूबसूरत भी तो बहुत है. इसी का घमंड होगा,’’ कोई कहती.

‘‘अरे मोहितजी भी किसी से कम हैं क्या? जरा भी घमंड नहीं करते,’’ तुरंत कोई उन की तरफदारी के लिए खड़ा हो जाता.

‘‘मोहितजी किसी से भी हंसतेबोलते नजर आ जाएं तो ऐसे देखती है, जैसे अभी निगाहों से ही भस्म कर देगी और सामने वाले की भी ऐसी बेइज्जती कर देती है कि वह उसे देखता ही रह जाता है,’’ एक और आवाज सारिका की बुराई में उभरी.

‘‘सुना है मोहितजी ने कालेज के किसी मेले में उसे देखा था और फिर ऐसे फिदा हुए कि उस की तलाश में जमीनआसमान एक कर दिए और फिर उसे अपनी दुलहन बना कर ही माने. फिर उस की खूबसूरती के आगे ऐसे झुके कि आज तक सिर झुकाए हुए हैं. वे कहीं फिर से किसी की खूबसूरती के आगे न झुक जाएं, यही सोच कर सारिका सैलाब आने से पहले ही उसे रोक देती है,’’ ऐसी शोख बात पर हर कोई मुसकरा उठता और सारिका मन ही मन कट कर रह जाती.

‘‘बेचारे मोहितजी, कितने शरीफ हैं. हलकी सी मुसकराहट के साथ कितनी शराफत से बात करते हैं. कभी गलत निगाह से नहीं देखते और उन की बीवी… काश, वे मुझे पहले मिल जाते तो इतने शानदार इंसान को मैं अपना बना लेती.’’

‘‘अच्छा, तो अब कोशिश कर लो. तुम भी कम खूबसूरत नहीं हो.’’

‘‘अच्छा… उन की बीवी को देखा है? जान से ही मार डालेगी मुझ को…’’

‘‘हां भई, यह तो ठीक कहती हो तुम. फिर तो हम यही शुभकामनाएं दे सकते हैं कि तुम्हें भी ऐसा ही कोई इंसान मिल जाए.’’

‘‘हां भई, हमारी भी यही कामना है,’’ शरारत भरी आवाज आती.

सारिका धीरे से गरदन मोड़ कर उन की तरफ देखती. फिर मन ही मन उन से कहती, ‘उफ यह कैसी शुभकामनाएं दे रही हो नादान लड़कियों. तुम्हारा भला तो इसी में है कि तुम्हें मोहित जैसा इंसान न मिले.’

मोहित की तारीफ सुन कर सारिका का मुंह कड़वा हो जाता. दोस्त, पड़ोसियों व रिश्तेदारों सभी की यही राय थी कि मोहित अपने नाम के अनुसार हैं. सब को अपने हंसमुख, सरल स्वभाव से आकर्षित करने वाले और सारिका हद से ज्यादा घमंडी, शक्की और बुरा व्यवहार करने वाली महिला है. इस तरह की बातें सारिका के लिए नई नहीं थीं. उसे अकसर इसी तरह की बातें किसी न किसी रूप में सुनने को मिल ही जाती थीं. सब का यही सोचना था कि मोहित एक शरीफ, जिंदादिल इंसान हैं और अपने प्यार के हाथों मजबूर हो कर पत्नी से रिश्ता निभा रहे हैं, वरना सारिका जैसी पत्नी को तो तलाक दे देना चाहिए था. हरेक की हमदर्दी मोहित के साथ थी.

मोहित का बाहरी रूप सारी दुनिया के सामने बहुत प्रभावशाली था पर पत्नी होने के नाते सारिका अच्छी तरह जानती थी कि वे किस तरह के इंसान हैं. अगर बुराई, धोखा, मन के छल और हवस का इंसानी रूप दिया जा सकता तो उस की सूरत मोहित से अलग न होती. हां, यही सोच थी सारिका की अपने पति के बारे में. वह मोहित से नफरत करती थी फिर भी अपनी बेटी के कारण ही उस के साथ रहती थी, क्योंकि वह जानती थी कि मांबाप का अलगाव बच्चों के लिए बहुत दुखदायी होता है. इस से उन का सही विकास नहीं हो पाता. वह अपनी बेटी को सशक्त और सफल इंसान के रूप में देखना चाहती थी.

सारिका के मन में, बातों में कड़वाहट का कारण मोहित ही थे. पहले सारिका उन्हें बहुत अच्छा इंसान मानती थी. उसे याद था कि जब मोहित की तरफ से उस के लिए रिश्ता आया था, तो वह हैरान रह गई थी. उन के दोस्त की बीवी ने जब उस के प्रति मोहित की दीवानगी का बखान किया था तब सारिका ने हैरानी से आईने से पूछा था कि क्या मैं सच में इतनी सुंदर हूं?

मोहित अकेले रहते थे. अपना घर, शानदार नौकरी, कंपनी से मिली गाड़ी. उन के बारे में सारिका के पापा ने अच्छी तरह जानकारी लेने के बाद संतुष्ट हो कर रिश्ते के लिए हां कर दी थी.

और जब बरात सारिका के दरवाजे पर आई तो देखने वाले ‘वाह’ कर उठे. कामदार शेरवानी में मोहित चांद की तरह चमक रहे थे. महिलाओं और लड़कियों में मोहित की स्मार्टनैस के ही चर्चे थे. खूबसूरती में तो सारिका भी कम नहीं थी. इस लुभावनी जोड़ी पर से लोगों की आंखें नहीं हट रही थीं.

शादी के बाद सारिका ने जाना कि वाकई मोहित कमाल के इंसान हैं. वे देखने में तो खूबसूरत थे ही, उन की बातें भी बहुत खूबसूरत होती थीं. यों भी मोहित से पहले सारिका के मन में किसी और का खयाल नहीं आया था, इसलिए जल्दी ही मोहित के प्यार में रचबस कर वह खुद को दुनिया की सब से सुखी पत्नी समझने लगी थी.

घर में ज्यादा काम तो था नहीं. सफाई, बरतन, कपड़ों का काम नौकरानी ही कर जाती थी. मोहित ने तो कहा था कि खाना बनाने वाली भी रख लो, तुम्हें कोई काम करने की जरूरत नहीं, पर सारिका ने रसोई का काम खुद ही संभाल लिया था. मोहित का ध्यान रखना उसे अच्छा लगता था. इस से उस का समय भी आसानी से गुजर जाता, वरना घर में और था ही कौन?

मोहित के मातापिता में जल्दी ही अलगाव हो गया था. उस की मां उसे बचपन में ही पिता के हवाले कर कर किसी पूर्व प्रेमी के साथ चली गई थीं. फिर मोहित की देखभाल नौकरों के हवाले कर दी गई. पत्नी की बेवफाई के दुख ने उस के पिता को नशे का आदी बना दिया, जिस के चलते वे बहुत ही कम समय में दुनिया से चल बसे थे. पर सारिका जानती थी कि मोहित की परवरिश सही तरीके से न होने का प्रभाव उस की जिंदगी में उथलपुथल मचा देगा.

एक बार मोहित के रिश्ते की बहन मिलने आईं, तो सारिका को बहुत अच्छा लगा था. उस ने जोर डाल कर उन्हें रात के खाने तक रोक लिया था. दीदी की 12 साल की बेटी बहुत चुलबुली थी. सारे घर में चहकती फिर रही थी. घर में रौनक सी हो गई थी. मोहित भी दीदी से बातों में व्यस्त थे. फिर दीदी सारिका के पास रसोई में आ गईं और बेटी स्वीटी के कहने पर मोहित उसे छत पर ले गए. उन की हंसी की आवाजें रसोई तक आ रही थीं. कुछ देर बाद सारिका उन्हें बुलाने सीढि़यों पर चढ़ी तो देखा मोहित स्वीटी की कमर में हाथ डाले उस से सट कर खड़े थे. स्वीटी इधरउधर हाथ से इशारा कर के अपनी बात कहने में लगी थी, पर मोहित की आंखें भूखे भेडि़ए की तरह उसे देख रही थीं.

 

दूरी: भाग 1- जब बेटी ने किया पिता को अस्वीकार

‘क्यादिया है आप ने मुझे सिवा नफरत, घुटन, दर्द और तनहाई के? और हां, याद आया, एक बेनाम, थोपा हुआ रिश्ता भी तो दिया है आप ने. वह शख्स मेरा पिता नहीं, पर आप कहती हैं, उसे पिता कहूं…’’

आज पलक के सीने में भरा गुस्सा जैसे लावा बन कर फूट रहा था और मेघा चुपचाप बेटी का यह रौद्र रूप देख रही थी. उस की बातें मेघा के सीने में नश्तर की तरह चुभ रही थीं.

‘‘मेरी सहेलियां मु?ा पर हंसती हैं. हमेशा यही पूछती हैं, तुम्हारी मां ने अपने से

10-12 साल छोटे देवर से शादी कैसे कर ली? तुम्हें अजीब नहीं लगता? मैं चुप रह जाती हूं. क्या कहूं उन्हें? कैसा लगा था मु?ो, जिस शख्स को बचपन से चाचा कहती आई थी, वही अचानक मेरा बाप बन गया. मेरी मां का पति बन गया. लगता है जैसे रिश्ते भी बाजार में बिकने लगे हैं…’’ पलक गुस्से से बोले जा रही थी.

‘‘पलक, तमीज से बात करो, बहुत सुन लिया मैं ने,’’ मेघा ने अपने कान बंद करते

हुए कहा.

पर पलक पूरी जिरह के मूड में थी. बोली, ‘‘क्या सुना है आप ने? आप को तो लोगों की व्यंग्य भरी हंसी, उन के ताने कभी सुनाई ही नहीं देते… न ही अपनी बेटी के आंसू दिखते हैं. आप ने अपनी आंखें, अपने कान सब कुछ बंद कर रखा है. शर्म नहीं आई थी, आप को उस देवर से शादी करते, जिसे कभी हाथ पकड़ कर सड़क पार करना सिखाया था… जूतों के तसमे बांधने सिखाए थे? यह भी नहीं सोचा कि लोग

क्या कहेंगे?’’

‘‘लोगों के सोचने का मतलब यह तो नहीं कि हम जीना छोड़ दें. जब मैं घुटघुट कर आंसू बहाती थी, तो कौन आया था मुझे संभालने? किस ने की थी मेरी चिंता? बोलो आया था क्या तुम्हारा यह समाज जब एक विधवा औरत छोटे बच्चे के साथ अकेली रह गई थी? लाचार ससुर और बेबस सास के साथ, जो नहीं चाहते थे कि बहू उन के साथ रहे, क्योंकि उस की सूनी मांग उन्हें बेटे की मौत की पलपल याद दिलाती थी. ऐसे में कहां जाती वह, क्या करती? उस के अपने मांबाप की भी इतनी हैसियत नहीं थी कि पूरी उम्र विधवा बेटी और उस की बच्ची को साथ रख पाते. मैं इतनी ज्यादा पढ़ीलिखी भी नहीं थी कि तु?ो अपने बल पर पाल लेती. ऐसे में प्रकाश मेरे जीवन में रोशनी ले कर आया, मेरा हाथ थमा, मु?ो सहारा दिया तो भला मैं ने उस से शादी कर के क्या गलत किया, बोलो?’’

‘‘और मैं… मेरे बारे में सोचा आप ने? नहीं न? एक सौतेला बाप ला कर मेरे जीवन में ग्रहण लगा दिया… आप को सिर्फ अपना जीवन, अपनी जरूरत सम?ा में आई मेरा भविष्य नहीं. बहुत स्वार्थी औरत हैं आप…’’

इस बार जोरदार तमाचा पड़ा था पलक के गाल पर. वह तड़प उठी. मेघा ने चौंकते हुए सामने देखा. प्रकाश खड़ा था. उसे मेघा ने इतने क्रोध में कभी नहीं देखा था.

‘‘इस औरत को स्वार्थी कह रही हो, जिस ने अपनी हर सांस यह सोचते हुए ली कि पलक को कैसे खुश रखूं? उस के होंठों पर मुसकान कैसे सजाऊं? और एक पलक है कि मां के लिए अपनी जबां से 2 मीठे बोल नहीं बोल सकती…’’

प्रकाश के इस तरह बीच में आने पर पलक तिलमिला उठी. उस की आंखों में आंसू आ गए. चीखती हुई बोली, ‘‘न पापा न ममा… कोई नहीं है मेरा…’’ और फिर फफकफफक कर रो पड़ी.

मेघा ने बढ़ कर सीने से लगाना चाहा तो हाथों को ?ाटकती हुई वह अपने कमरे में घुस गई और फिर तुरंत ही कालेज चली गई.

प्रकाश ने मेघा के कंधे पर सांत्वना भरा हाथ

रखा और फिर खुद ही सिसक पड़ा, ‘‘क्या करूं मेघा… कुछ सम?ा में नहीं आता कि मैं सही हूं या गलत? अपनी सारी जिंदगी तुम्हारे और पलक के नाम कर दी फिर भी सुकून नहीं मिला. अपनी खुशियों और जरूरतों की परवाह न कर सिर्फ जिम्मेदारियां निभाईं पर कभी ऐसा नहीं लगा कि यह मेरा परिवार है. लगता है जैसे कुछ गलत कर दिया मैं ने.’’

‘‘घर में बेटी के तो बाहर रिश्तेदारों और दोस्तों के व्यंग्यबाणों ने मु?ो हमेशा छलनी किया. सिर्फ इस वजह से कि मैं तुम से प्यार करता हूं. मैं तुम्हें दुखी नहीं देख सकता. पर देखो न, मैं ही तुम्हारे इन आंसुओं का कारण भी बनता रहा हूं. क्या करूं मैं, कुछ सम?ा नहीं आता. मेरी जिंदगी मेरे लिए ही ऐसी अबू?ा पहेली बन गई है… जितना आगे बढ़ता हं, उतना ही उल?ाता जाता हूं.’’

मेघा धीरेधीरे प्रकाश का सिर सहला रही थी. फिर मेघा ने उसे सहारा दे कर बैठाया. दोनों काफी देर तक खामोश बैठे रहे… अनगिनत सवालों के जवाब ढूंढ़ रहे थे पर जवाब दोनों के ही पास नहीं थे. फिर मेघा ने कौफी बनाई. कौफी पी कर प्रकाश औफिस चला गया. मेघा दरवाजा बंद कर अपने कमरे में चली आई और पलक के बारे में सोचने लगी…

सचमुच कितनी शर्मिंदगी महसूस होती होगी किशोरवय पलक को जब रिश्तेदार उस के विवाहित चाचा के लिए रिश्ते ले कर आते और व्यंग्यभरी नजरों से मुसकराते हुए उस की तरफ देखते होंगे. उस वक्त खुद को कितना असुरक्षित, कितना असहज महसूस करती होगी वह.

मेघा को वह शाम याद आई जब वह किचन में काम कर रही थी और पड़ोस में रहने वाली सुधा बूआ आ कर उस की सास के कानों में कुछ खुसुरफुसुर करने लगी थीं. पहले तो मेघा ने ध्यान नहीं दिया, मगर फिर जब वह चाय ले कर बाहर आई तो देखा बूआ किसी लड़की की तसवीर दिखाते हुए कह रही थीं, ‘‘इस लड़की के साथ प्रकाश की जोड़ी खूब जमेगी. आखिर कितने दिनों तक अपनी मां की उम्र की पत्नी और उस की बच्ची का बो?ा उठाता फिरेगा… उस के भी तो हंसनेबोलने के दिन आने चाहिए… उस का भी तो दिल करता होगा किसी नईनवेली का घूंघट उठाने का,’’ बूआ बेधड़क कहे जा रही थीं.

तभी मम्मीजी ने मेघा को सामने खड़ा देख उन्हें इशारा किया तो वे तुरंत खामोश होती हुई फोटो छिपाने लगीं. मेघा सम?ा न सकी कि क्या प्रतिक्रिया दे. चुपचाप दूसरी तरफ देखने लगी तो देखा दरवाजे के पीछे पलक खड़ी सारी बातें सुन रही थी और उस की आंखें भर आई थीं. मेघा से नजरें मिलते ही उस की आंखों में वही सवाल दौड़ गया जो उस ने मेघा से पूछा था.

फिर उस शाम जब पलक के जन्मदिन पर मेघा ने एक

छोटी पार्टी रखी थी, उस ने अपनी कुछ सहेलियों को भी इनवाइट किया था जिन के बच्चे पलक के बराबर थे. केक काटने के बाद पलक सहेलियों को गिफ्ट खोल कर दिखा रही थी तो उर्वशी की बेटी ने पलक से पूछा, ‘‘तुम्हारी मम्मी ने तुम्हें क्या गिफ्ट दिया?’’

पलक कुछ कहती, उस से पहले ही उर्वशी ने व्यंग्य से कहा, ‘‘और क्या गिफ्ट चाहिए… मम्मी ने सौतेला बाप तो दे ही दिया है गिफ्ट में. जो स्मार्ट भी है और कम उम्र का भी. अधिक समय तक बेटी का खयाल रख सकेगा.’’

इतनी तीखी बात कह कर उस ने कुटिलता से मुसकराते हुए मेघा की तरफ देखा तो वह अंदर तक सहम गई. उस ने पलक की तरफ देखा. उस का चेहरा भी उतर गया था. वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई. मेघा ने उर्वशी से गुस्से में कहा, ‘‘यह क्या कहा तुम ने… थोड़ा भी नहीं सोचती हो कि बच्ची के आगे इस तरह की बातें नहीं कहते?’’

उर्वशी ने ढिठाई से मेघा को जवाब देते हुए कहा, ‘‘अरे यार, आज तू मुझे रोक रही है, कल दूसरे लोग कहेंगे… किसकिस का मुंह बंद करोगी? आखिर तू ने गलत ही तो किया है न? सौतेला बाप ही ढूंढ़ना था तो कम से कम हमउम्र तो ढूंढ़ती. भई मैं ने तो खरी बात कही है. अब तुझे बुरा लगे या अच्छा पर पलक को उम्र भर ऐसे ताने तो सुनने ही पड़ेंगे.’’ मेघा से फिर कुछ कहते नहीं बना.

उस रात पलक ने मेघा के प्यार से उठते हाथ को बुरी तरह झटक दिया था और मेघा के पास सोने के बजाय उठ कर दादी के पास चली गई थी. मेघा को लगा था जैसे आज उस की अपनी बेटी उस से दूर हो गई. वह मां को ही दुश्मन समझने लगी थी…

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