Father’s day 2023: ले बाबुल घर आपनो- भाग 2

मीरा भी उन जैसा पति पा कर गर्व से फूल उठी थी और मन ही मन उस ने अपने मातापिता की बुद्धि को सराहा भी था. कुछ समय तक तो सबकुछ ठीकठाक चलता रहा था, लेकिन बाद में मीरा महसूस करने लगी थी जैसे पिताजी ने, दामाद नहीं, गुलाम खरीदा हो. शंभुजी सोए हों, या उस से प्रेमालाप कर रहे हों, बस पिताजी का एक बुलावा आया नहीं कि वे उठ कर चल देते. ऐसे में मीरा प्यार से उन्हें समझाती और कहती, ‘पिताजी से कह क्यों नहीं देते कि वक्तबेवक्त न बुलाया करें.’

‘अरे भई, काम होता है, तभी तो बुलाते हैं, और काम कोई वक्त देख कर तो नहीं आता,’ शंभूजी भी प्यार से जवाब देते.

‘पहले भी तो वे स्वयं काम संभालते थे, अब क्यों नहीं संभालते?’ मीरा उखड़ जाती.

‘इसी लिए तो उन्होंने तुम जैसी पत्नी का मुझे पति बना दिया है, ताकि मैं उन का बोझ हलका करूं,’ शंभुजी हंस कर टाल देते.

‘फिर उन्हें बेटी देने की क्या जरूरत थी. बोझ हलका करने के लिए तुम्हें रुपयों से खरीदा भी जा सकता था. तुम नहीं बोल सकते तो मैं पिताजी से कहूंगी कि आप साथसाथ काम करने के लिए कोई दूसरा नौकर रख लीजिए,’ मीरा नाराज हो जाती.

‘तुम तो बहुत भावुक हो, मीरा. जितनी मेहनत और ईमानदारी से अपने घर का आदमी काम कर सकता है, कोई दूसरा करेगा क्या?’ वे तर्क देते.

‘यह क्यों नहीं कहते कि तुम बिक गए हो. तुम्हें पत्नी की नहीं, सिर्फ दौलत की जरूरत थी,’ और मीरा फफक कर रो पड़ी थी.

शंभुजी कितने ही प्यार से क्यों न समझाते लेकिन मीरा को यह कतई पसंद नहीं था कि वे घरदामाद बन कर रहें. वह हमेशा यही कहती थी, ‘घरदामाद तो पालतू कुत्ते की तरह होता है, जो टुकड़े खा कर दिनरात वफादारी करता है. तुम क्यों नहीं अलग मकान ले लेते. तुम जैसे भी रखोगे, मैं उसी तरह रहूंगी. तुम से कभी गिला नहीं करूंगी. मुझे यह तो एहसास रहेगा, मेरा अपना घर है, तुम मेरे हो. यहां तो हमेशा मुझे ऐसा लगता है जैसे हम पिताजी की दया पर पल रहे हैं और तुम भी सोचते होगे कि यदि मैं ने कहीं विद्रोह किया, तो पिताजी रोजी ही न छीन लें.’

‘न जाने तुम क्यों गलत ढंग से सोचने लगी हो? मैं ने तो कभी इस तरह सोचा भी नहीं. मीरा, तुम पहले भी तो इस घर में रहती थीं, तब तुम ऐसा क्यों नहीं सोचती थीं?’

‘तब मैं कुआंरी थी. कुआंरी लड़की हमेशा अपनी नई दुनिया बसाने के सपने देखती है. एक ऐसे पति का सपना, जो उसे घर देगा, उस के सुखदुख का भागीदार होगा, और वह उस के हर सुखदुख की चादर अपने ऊपर ओढ़ लेगी. बताओ, क्या दिया तुम ने मुझे अपनी ओर से? बाकी सब छोड़ भी दें तो प्यार और विश्वास भी तुम नहीं दे सके, जिस समय भी मेरे पास होते हो, तुम्हें यही खयाल रहता है कि पिताजी के कहे काम सब पूरे हो गए कि नहीं, कहीं वे यह न सोचें, शादी होते ही लापरवाह हो गया है.’

इसी तरह तकरार और प्यार में वर्ष छलांगें लगाते निकल रहे थे. मीरा की गोद में सीमा भी आ गई थी. सीमा को पा कर मीरा काफी हद तक सहज हो गई थी. उन्होंने सोचा था, ‘मीरा सीमा को पा कर तनाव से शायद मुक्त हो गई है.’ लेकिन यह उन की भूल थी.

सीमा जैसेजैसे बड़ी होती गई, मीरा की खामोशी बढ़ती गई. वह हमेशा देखती, सीमा की हर जरूरत पिताजी पूरी करते हैं, उस का भविष्य कैसे संवारना है, यह भी पिताजी सोचते हैं. बिलकुल उसी तरह, जिस तरह उन्होंने उस के लिए सोचा था.

शंभुजी ने तो एक दिन भी यह महसूस नहीं किया कि बाप का अपनी संतान के लिए क्या कर्तव्य होता है. मीरा की जरूरत पिताजी आ कर पूछते. शंभुजी को इस से कोई अंतर नहीं पड़ता था. बस, उन्हें यही संतोष था कि पिताजी के होते उन्हें चिंता करने की क्या आवश्यकता है, या पिताजी उन पर कितने प्रसन्न हैं, क्योंकि उन्होंने उन का व्यापार और बढ़ा दिया था. मीरा की हर बात चिकने घड़े पर पड़े पानी की तरह उन के ऊपर से फिसल जाती थी.

एक दिन बेहद गुस्से में मीरा ने कहा था, ‘इन सुखों की खातिर तुम ने अपनेआप को बेच दिया है. अपनी आजादी, अपने आदर्शों तक को दांव पर लगा दिया है.’

‘तुम सुखी रहो, इसी लिए तो यह सब किया है मैं ने, वरना मैं अकेला तो दो रोटी और दो कपड़ों में ही प्रसन्न था. यदि तुम्हारी खुशी के लिए स्वयं मुझे भी बिकना पड़ा तो भी मैं पीछे नहीं हटूंगा, मीरा,’ शंभुजी ने हंस कर बात टालनी चाही थी.

‘मेरा नाम ले कर झूठ मत बोलो. तुम जानते हो इस पैसे की दुनिया से मुझे कभी प्यार नहीं रहा जहां आदमी आजादी से अपनी कोई इच्छा ही पूरी न कर सके, जहां आगेपीछे नौकरों की फौज खड़ी हो. मैं खुली हवा में सांस लेना चाहती हूं. प्लीज, मुझे अलग ले जाओ, ताकि मैं अपना छोटा सा संसार बना सकूं, और सोच सकूं, यह घर मेरा है, जहां सुकून हो, जहां तुम हो, हमारी बच्ची हो, और मैं होऊं,’ और मीरा रो पड़ी थी.

‘ठीक है, मीरा. मैं वचन देता हूं, हम उसी तरह रहेंगे जैसे तुम चाहती हो. मैं पिताजी से जरूर बात करूंगा,’ उन्होंने मीरा को प्यार से थपथपा दिया था.

जब मीरा ने देखा कि यह तकरार भी चिकने घड़े की बूंद बन गई है तो वह हमेशा के लिए चुप हो गई थी. शायद उस ने ‘जो है, सो ठीक है,’ समझ कर ही संतोष कर लिया था.

दूसरे बच्चे के समय मीरा की तबीयत बहुत बिगड़ गई थी. डाक्टरों की भीड़ भी उसे नहीं बचा सकी थी. तब यही शंभुजी सीमा को छाती से लगा कर फूटफूट कर रो पड़े थे. उन्होंने मन ही मन मीरा से कितनी बार माफी मांगी थी और वादा किया था, ‘तुम्हारी सीमा की मैं हर इच्छा पूरी करूंगा. मैं स्वयं उस का खयाल रखूंगा, उसे मां बन कर पालूंगा.’

कितना स्नेह और ममत्व उन्होंने बेटी को दिया था. उस के उठने से ले कर सोने तक, हर बात का ध्यान वे खुद रखते थे. बाहर जाना भी कितना कम कर दिया था. लेकिन कभीकभी जब सीमा उन्हें टकटकी लगाए देखने लगती थी तो न जाने वे क्यों सिहर उठते थे. उन्हें महसूस होता था, ये निगाहें सीमा की नहीं, मीरा की हैं, जो उन से कुछ कहना चाह रही हैं, तो वे घबरा कर यह पूछ बैठते, ‘कुछ कहना है, बेटी?’

‘कुछ नहीं, पापा,’ जब सीमा कहती तो उन की सांस की गति ठीक होती.

समय के साथ सीमा बड़ी हुई. मीरा के मातापिता का साथ छूटा. सारा कारोबार फिर एक बार शंभुजी पर आ पड़ा. यह वही जिम्मेदारी थी जो किसी को दी नहीं जा सकती थी और फिर धीरेधीरे वे पहले की तरह व्यस्तता के बीच खोने लगे थे.

एक दिन जब वे काफी रात गए घर लौटे थे, तो यह देख कर हैरान हो गए थे कि जल्दी सो जाने वाली सीमा, आज बालकनी में खड़ी उन का इंतजार कर रही है. वे हैरानी से बोले थे, ‘सोई क्यों नहीं?’

‘आप जल्दी क्यों नहीं आते? अकेले मेरा मन नहीं लगता,’ सीमा गुस्से में थी.

‘मेरा बहुत काम होता है, इसी लिए देर हो जाती है. आज कोई पहली बार तो मैं देर से नहीं आया?’ उन्होंने प्यार से समझाया था.

‘इतनी रात तक किसी का काम नहीं होता. आप झूठ बोलते हैं. आप पार्टियों में जाते हैं, शराब पीते हैं, इसी लिए आप को देर हो जाती है.’

‘सीमा,’ वे नाराज हो गए थे.

‘डांटिए मत, मैं कालेज से देर से आऊंगी, तब आप को अच्छा लगेगा?’ वह भी सख्ती से बोली थी, ‘मैं कहे देती हूं, अब आप देर से आएंगे तो मैं खाना नहीं खाऊंगी.’ और वह पैर पटकती हुई चली गई थी.

वे हैरान से खड़े देखते रह गए थे. मीरा और सीमा में कितना साम्य है. वह अगर हवा का तेज झोंका थी तो यह सबकुछ हिला देने वाली तेज आंधी.

Father’s day 2023: अकेले होने का दर्द- भाग 1

वातावरण में औपचारिक रुदन का स्वर गहरा रहा था. पापा सफेद कुरतेपजामे और शाल में खड़े थे. सफेद रंग शांति का प्रतीक माना जाता है पर मेरे मन में सदा से ही इस रंग से चिढ़ सी थी. उस औरत ने समाज का क्या बिगाड़ा है जिस के पति के न होने पर उसे सारी उम्र सफेद वस्त्रों में लिपटी रहने के लिए बाध्य किया जाता है. मेरे और पापा के साथ हमारे कई और रिश्तेदार कतारबद्ध खड़े थे. धीरेधीरे सभी लोग सिर झुकाए हमारे सामने से चले गए और पंडाल मरघट जैसे सन्नाटे में तबदील हो गया. हमारे दूरपास के रिश्तेनाते वाले भी वहां से चले गए. सभी के सहानुभूति भरे शब्द उन के साथ ही चले गए.

कुछ अतिनिकट परिचितों के साथ हम अपने घर आ गए. पापा मूक एवं निरीह प्राणी की तरह आए और अपने कमरे में चले गए. बाकी बचे परिजनों के साथ मैं ड्राइंगरूम में बैठ गई. कुछ औपचारिक बातों के बाद मैं किचन से चाय बनवा कर ले आई. एक गिलास में चाय डाल कर मैं पापा के पास गई. वह बिस्तर पर लेटे हुए सामने दीवार पर टंगी मम्मी की तसवीर को देखे जा रहे थे. उन की आंखों में आंसू थे. ‘‘पापा, चाय,’’ मैं ने कहा. पापा ने मेरी तरफ देखा और पलकें झपका कर आंसू पोंछते हुए बोले, ‘‘थोड़ी देर के लिए मुझे अकेला छोड़ दो, मानसी.’’ उन की ऐसी हालत देख कर मेरे गले में रुकी हुई सिसकियां तेज हो गईं. मैं भी पापा को अपने मन की बात बता कर उन से अपना दुख बांटना चाहती थी, पर लगा था वह अपने ही दुख से उबर नहीं पा रहे हैं. किसे मालूम था कि मम्मी, पापा को यों अकेला छोड़ कर इस संसार से प्र्रस्थान कर जाएंगी. इस हादसे के बाद तो पापा एकदम संज्ञाशून्य हो कर रह गए. मैं ने अपनी छोटी बहन दीप्ति को अमेरिका में तत्काल समाचार दे दिया. पर समयाभाव के कारण मां के पार्थिव शरीर को वह कहां देख पाई थी. पापा इस दुख से उबरते भी कैसे. जिस के साथ उन्होंने जिंदगी के 40 वर्ष बिता दिए, मां का इस तरह बिना किसी बीमारी के मरना पापा कैसे भूल सकते थे. कई दिनों तक रोतेरोते क्रमश: रुदन तो समाप्त हो गया पर शोक शांत न हो सका. पापा की ऐसी हालत देख कर मैं ने धीरे से उन का दरवाजा बंद किया और वापस ड्राइंग- रूम में आ गई, जहां मेरे पति राहुल बैठे थे.

चाचाजी वहां बैठे हुए हलवाई, टैंट वाले, पंडितजी आदि का हिसाब करते जा रहे थे. मुझे देखते ही उन्होंने कहा, ‘‘आजकल छोटे से छोटे कार्य में भी इतना खर्च हो जाता है कि बस…’’ यह कहतेकहते उन्होंने राहुल को सारे बिल पकड़ा दिए. मैं ने राहुल को इशारे से सब का हिसाब चुकता करने को कहा. पापा अपने गम में इतने डूबे हुए थे कि उन से कुछ भी इस समय कहने का साहस मुझ में न था. ‘‘अच्छा, मानसी बिटिया, अब मैं चलता हूं. कोई काम हो तो बताना,’’ कहते हुए चाचाजी ने मुझे इस अंदाज से देखा कि मैं कोई दूसरा काम न कह दूं और उन के साथ ही कालोनी की 3-4 महिलाएं भी चल दीं. मुझे इस बात से बेहद दुख हुआ कि मम्मी इतने वर्षों से सदा सब के सुखदुख में हमें भी नजरअंदाज कर उन का साथ देती थीं, लेकिन आज सभी ने उन के गुजरने के साथ ही अपने कर्तव्यों से भी इतिश्री मान ली थी. शाम को खाने की मेज पर मैं ने राहुल से पूछा, ‘‘तुम्हारा क्या प्रोग्राम है अब?’’ ‘‘मैं तो रात को ही वापस जाना चाहता हूं. तुम साथ नहीं चल रही हो क्या?’’ राहुल ने पूछा. ‘‘पापा को ऐसी हालत में छोड़ कर कैसे चली जाऊं,’’ मैं ने रोंआसी हो कर कहा, ‘‘लगता है ऐसे ही समय के लिए लोग बेटे की कामना करते हैं.’’ ‘‘पापा को साथ क्यों नहीं ले चलतीं,’’ राहुल बोले, ‘‘थोड़ा उन के लिए भी चेंज हो जाएगा.’’ ‘‘नहीं बेटा,’’

तब तक पापा अपने कमरे से आ चुके थे, ‘‘तुम लोग चले जाओ, मैं यहीं ठीक हूं.’’ ‘‘पापा, आप को तो ठीक से खाना बनाना भी नहीं आता…मां होतीं तो…’’ और इतना कहतेकहते मैं रो पड़ी. ‘‘क्यों, महरी है न. तुम चिंता क्यों करती हो?’’ ‘‘पापा, वह तो 9 बजे आती है. आप की बेड टी, अखबार, दूध, नहाने के कपड़े, दवाइयां कुछ भी तो आप को नहीं मालूम…आज तक आप ने किया हो तो पता होता.’’ ‘‘उस ने मुझे इतना अपाहिज बना दिया था…पर अब क्या करूं? करना तो पडे़गा ही न…कुछ समझ में नहीं आएगा तो तुम से पूछ लूंगा,’’ कहतेकहते पापा ने मेरी तरफ देखा. उन का स्वर जरूरत से ज्यादा करुण था. ‘‘अब क्यों रुलाते हो, पापा,’’ कहते हुए मैं खाना छोड़ कर उन से लिपट गई. मेरे सिर पर स्नेहिल स्पर्श तक सीमित होते हुए पापा ने कहा, ‘‘उसी ने अभी तक सारे परिवार को एकसूत्र में बांध कर रखा था.

पंछी अपना नीड़ छोड़ कर उड़ चला और यह घोंसला भी एकदम वीराने सा हो गया…मैं क्या करूं,’’ कातरता झलक रही थी उन के स्वर में. ‘‘पापा, आप हिम्मत मत हारो, कुछ दिनों के लिए ही सही, हमारे साथ ही चलो न.’’ ‘‘नहीं बेटे, जब अकेले जी नहीं पाऊंगा तो कह दूंगा,’’ फिर एक लंबी सांस लेते हुए बोले, ‘‘अभी तो यहां बहुत काम हैं, तुम्हारी मम्मी का इंश्योरेंस, बैंक अकाउंट, उन के फिक्स्ड डिपोजिट सभी को तो देखना पड़ेगा न.’’ ‘‘जैसी आप की इच्छा, पापा,’’ कह कर राहुल अपने कमरे में चले गए. अगले दिन महरी को सबकुछ सिलसिलेवार समझा कर मैं थोड़ी आश्वस्त हो गई. 2 दिन बाद… मेरी सुबह की ट्रेन थी. जाने से एक रात पहले मैं पापा के पास जा कर बोली, ‘‘पापा, कल सुबह आप मुझे छोड़ने नहीं जाएंगे.

नहीं तो मैं जा नहीं पाऊंगी,’’ इतना कह मैं भरे कंठ से वहां से चली आई थी. सुबह जल्दीजल्दी उठी. तकिये के पास पापा के हाथ की लिखी चिट पड़ी थी, ‘जाने से पहले मुझे भी मत उठाना…मैं रह नहीं पाऊंगा. साथ ही 500 रुपए रखे हैं इन्हें स्वीकार कर लेना. वैसे भी यह सारे आडंबर तुम्हारी मां ही संभालती थी.’ मैं ही जानती हूं कि मैं ने वह घर कैसे छोड़ा था. मैं हर रोज पापा को फोन करती. उन का हाल जानती, फिर महरी को हिदायतें देती. मैं अपनी सीमाएं भी जानती थी और दायरे भी. राहुल को मेरी किसी बात का बुरा न लगे इसलिए पापा से आफिस से ही बात करती. कभीकभी वह छोटीछोटी चीजों को ले कर परेशान हो जाते थे. ऊपर से सामान्य बने रहने के बावजूद मैं भांप जाती कि वह दिल से इस सत्य को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. वह वहां रहने के लिए विवश थे. उन की दुनिया उन्हीं के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई थी. एक दिन सुबह मैं ने पापा को उन के जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया.

The Little Mermaid Film Review: द लिटिल मरमेड- दो असामान्य लोगों की प्रेम कहानी

  • रेटिगः पांच में से साढ़े तीन स्टार
  • निर्माताः डिज्नी
  • निर्देषकः रॉब मार्शल
  • कलाकारः हाले बेली, जोनाह हाउर किंग, मेलिसा मैक्कार्थी, जेवियर बार्डेन व अन्य.
  • अवधिः दो घंटे 15 मिनट

डेनिश लेखक हैंस क्रिश्चियन एंडरसन की अठारहवीं सदी में लिखे गए साहित्यिक मार्मिक क्लासिक उपन्यास ‘‘द लिटिल मरमेड’ पर ही डिज्नी ने 1989 में कुछ स्वतंत्रता लेते हुए कार्टून फिल्म इसी नाम से बनायी थी,जिसका अंत सुखद था. अब उसी कार्टून फिल्म को आधार बनाकर निर्देशक रॉब मार्शल फिल्म ‘‘द लिटिल मरमेड’’ लेकर आए हैं, जो कि पूरे विष्व में 26 मई को प्रदर्षित होगी. मूलतः यह फेरी टेल है,जिनका अपनाप एक अलग ही मजा होता है.

कहानीः

सात समुद्रों के राजा ट्राइटन (जेवियर बार्डेम) के सात बच्चों मंे से सबसे छोटी बेटी एरियल (हाले बेली) की अपनी अलग दुनिया है. एरियल को मत्स्यांगना या जलपरी की संज्ञा दी जा सकती है. वह बहुत संुदर गाती हैं. और उसकी तमन्ना जमीन पर रहने वालों की दुनिया को देखना है. जबकि एरियल के पिता राजा ट्ाइटन मानते हैं कि सभी मनुष्य नीच हैं. ट्ाइटन समृद्ध समुद्र के नीचे की दुनिया को नियंत्रित करते हैं,जिसमें कछुओं, डॉल्फिन और सभी प्रकार की मछलियों और प्रवाल जीव भी हैं. जी हाॅ! राजा ट्राइटन की सात बेटियों में सबसे छोटी एरियल (हाले बेली) एक सुंदर और उत्साही युवा जलपरी है, जिसमें रोमांस की प्यास है.  समुद्र से परे की दुनिया के बारे में और अधिक जानने की लालसा में एरियल सतह पर जाती है और डैशिंग प्रिंस एरिक के प्रेम में पड़ जाती है.  वास्तव में समुद्र से गुजर रहे एक जहाज से गिर जाने पर प्रिंस एरिक (जोनाह हाउर-किंग) डूबने वाले होते हैं,तभी एरियल उसे बचाकर सतह पर पहुॅचा देती और वह उसके प्यार में पड़ जाती है. प्रिंस एरिक उस वक्त बेहोष थे,इसलिए वह एरियल को देख नही पाते. लेकिन अब अपने राज्य में पहुॅचने के बाद अब एरिक उस महिला की तलाष में लग जाते हैं,जिसने उसे डूबने से बचाया था.  प्रिंस एरिक श्वेत इंसान हैं,जिन्हे काले रंग की रानी सेलिना (नोमा डूमेजवेनी) ने तब बचाकर गेद लिया था,जब वह बालक था. और अब उन्होने ही उसकी परवरिष की है.  उधर अपने दिल की सुनकर एरियल नया जीवन अनुभव लेने के लिए दुष्ट समुद्री चुड़ैल उर्सुला(मेलिसा मैक्कार्थी ) के साथ एक सौदा करती है. जिसके अनुसार तीन दिन के अंदर एरियल को प्रिंस एरिक को ‘किस’ करना है. ऐसा न करने पर उसे पुनः समुद्र मे ही आना होगा. इस सौदे के चलते एरियल के पैर आ जाते हैं,पंूॅछ चली जाती है. इसी के साथ उसके गले की मीठी आवाज भी गायब हो जाती है. अब मूक एरियल तीन दिन प्रिंस एरिक के साथ गुजारते हुए जीवन का पूरा आनंद लेती है और मूक एरियल से पिं्रस एरिक को प्यार हो जाता है. पर उर्सला अपनी चाल चलती है जिसके ेचलते ‘किस’ नही हो पाता. उर्सला अपनी ताकत से समुद्र के राजा ट्ाइटन को भी हराकर उसकी षक्ति हासिल कर ख्ुाद समुद्र की रानी बना जाती है.  पर यह परी कथा है और अंत तो सुखद ही होना है.

लेखन व निर्देशनः

रॉब मार्शल ने 1989 की कार्टून फिल्म की कहानी में ज्यादा बदलाव न करते हुए वैसा ही रखा है. मूल कहानी दो असमान लोगों की प्रेम कहानी है. जबकि राॅब मार्षल ने अपनी इस फिल्म में दो अलग अलग संसार के मिलन की बात है. एक संसार जमीन पर रहने वालांे का है. दूसरा संसार समुद्र के अंदर यानी कि पानी में रहने वालांे की. कुदरत ने जो रचा है,उसे देखते हुए वास्तविक जीवन में इनका एक होना असंभव है. लिटिल मेरीमेड में फेरीटेल है मतलब सुखद अंत.  जहां सभी विभाजित करने वाली रेखाओं को मिलाना होता है. एरिक की मां यानी कि रानी अंत में एकता का संदेष भी देती हैं. स्पेषल इफेक्ट्स वगैरह का उपयोग कर समुद्र के अंदर की दुनिया वास्तविकता का जामा पहनाने में सफल रहे हैं. फिर चाहे कछुआ हो,डाॅल्फिन हो या प्रवाल जीव हों. रॉब मार्शल ने फिल्म में हास्य की कोई कमी नहीं छोड़ी है. लेकिन मार्शल की फिल्म में कार्टून चरित्रों की मासूमियत कुछ हद तक खो गई है. फिल्मकार ने सात समुद्रों के राजा की बेटियो ंके नाम एरियल,इन्दिरा, माला, कैस्पिया, तमिका रखे हं,जो कि सात समुंद्रों की विविधता का परिचायक है. .

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अभिनयः

एरियल के किरदार में 23 वर्षीय हाले बेली अपने अभिनय से दर्षकों को अपने साथ तैरने के लिए मजबूर करती हैं. वह अपनी सुंदरता, मासूमियत, आवाज से प्रभावित करती हैं. उनकी चैड़ी आॅंखे संवादो की कमी को पूरा करते हुए बहुत कुछ कह जाती हैं. बेली ने सही मायनों में एरियल की जिज्ञासु,बच्चे जैसी भावना को आत्मसात करने में सफल रही हैं. बोलने की बजाय अपने गायन से वह मंत्रमुग्ध करती हैं. समुद्र की दुष्ट उर्सुला से समझौते के बाद एरियल अपनी आवाज गंवा देती है,उसके उत्साह में कमी नही आती. हाले बेली के पास एक बड़ी, क्रिस्टलीय आवाज है. लेकिन जब वह भूमि पर रहने की अपना लालसा को ेलेकर ‘पार्ट आफ योर वल्र्ड’ गाती हैं,तब वही शब्दों के नीचे के जुनून को शालीनता से पकड़ लेती है. प्रिंस एरिक के किरदार में जोनाह हाउर-किंग ने भी बेहतरीन अभिनय किया है. जिस महिला ने उन्हे डूबने से बचाया था,उसे न खोज पाने की हताषा को वह अपने चेहरे के भावों से व्यक्त करने में सफल रहे हैं. हाले बेली और जोनाह हाउर किंग के बीच जबरदस्त व आकर्षक केमिस्ट्ी है.  उर्सुला के किरदार में मेलिसा मैक्कार्थी भी अपनी छाप छोड़ जाती हैं. राजा ट्ाइटन के छोटे किरदार में जेवियर बार्डेम याद रह जाते हैं.

Gum Hai Kisi Ke Pyar Mein: शो से बाहर हुए हर्षद अरोड़ा

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ टीवी इंडस्ट्री के टॉप शो में से एक है. इन दिनों ‘गुम है किसी के प्यार में’ दर्शको की पहली पसंद में है. शो में सई, सत्या और विराट की कहानी लोगों को खूब पसंद आ रही है. शो में आए दिन नए मोड़ देखने को मिल रहे हैं, जिनसे अब दर्शक भी ऊब चुके हैं.  अब चाहे ‘गुम है किसी के प्यार में’ में  सई और सत्या की शादी हो चुकी है. लेकिन मेकर्स की अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे. इसी बीच बड़ी खबर सामने आई है शो को लेकर.   आपको बता दें, हर्षद अरोड़ा की ‘गुम है किसी के प्यार में’ से विदाई हो गई है. उन्होंने शो का आखिरी एपिसोड भी शूट कर लिया है. इस बात की जानकारी हर्षद अरोड़ा ने खुद दी है.

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो

हर्षद अरोड़ा  ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर रील वीडियो शेयर किया, जिसमें वह मिरर के सामने खड़े होकर पोज देते नजर आए आ रहे है.   लेकिन रील से ज्यादा हर्षद के कैप्शन पर लोगों का ध्यान खींचा, जिसमें साफ-साफ लिखा हुआ था ‘फेयरवेल.’ हर्षद की इस वीडियो को लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना आखिरी एपिसोड शूट कर लिया है और अब ‘गुम है किसी के प्यार में’ के सेट से उनकी विदाई भी हो चुकी है. किंतु हर्षद की इस बात से उनके फैंस का दिल टूट चुका है. हर्षद अरोड़ा की वीडियो पर उनके फैंस के काफी रिएक्शन आ रहे है. एक यूजर ने उनसे पूछा, “क्या आपका लास्ट एपिसड शूट हो चुका है? आप शो में हुए एक्सीडेंट में मारे गए हैं क्या?” वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, “यार सत्या ने ही ‘गुम है किसी के प्यार में’ को देखने लायक बनाया था. हम उम्मीद करते हैं कि आगे चलकर #Saiya ही हो.” एक यूजर ने हैरानी जताते हुए लिखा, “फेयरवेल वो भी इतनी जल्दी.”

काव्या की प्रेग्नेंसी का होगा खुलासा ,अनुज मांगेगा अनुपमा से माफ़ी

टीवी सीरियल अनुपमा जबसे स्टार प्लास पर टेलीकस्ट हुआ है तबसे धूम मचा रहा है. रुपाली गांगुली का धमाकेदार शो अनुपमा हमेशा सुर्खियों में रहता है. शो में आए दिन कोई न कोई ट्विस्ट  देखने को मिलता ही रहता है. लेकिन शो  में अनुज और अनुपमा के बीच बढ़ती दूरियों ने दर्शकों के दिमाग का दही बन गया है.

बीते दिन भी ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि माया जानबूझकर अनुज से अपने हाथ पर उसका नाम लिखवाती है. वहीं मेहंदी वाली गलती से अनुपमा के हाथ पर अनुज का नाम लिख देती है. हालांकि रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले  ट्विस्ट अभी खत्म नहीं होते हैं.

 

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अनुज के साथ डांस करेंगी माया

अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा संगीत सेरेमनी में माया जानबूझकर अनुज के करीब जाती है. यहां तक कि वह उसे डांस फ्लोर पर भी लेकर चली जाती है. इस मौके का फायदा उठाते हुए वनराज भी अनुपमा के साथ डांस करने के लिए कहता है. हालांकि परफॉर्मेंस के दौरान अनुज और अनुपमा एक-दूजे में खोए रहते हैं और एक-दूजे से बात करने का सोचते हैं.

काव्या की प्रेग्नेंसी पर उठेगा पर्दा

दर्शको को ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कव्या संगीत कार्यक्रम छोड़कर अपने कमरे में जाती है. उसके पीछे से अनुपमा भी जाती है, जहां उसकी हालत देखकर वह समझ जाती है कि काव्या प्रेग्नेंट है. उसके बाद शो में, काव्या खुशी से बताती है कि जिस दिन वह घर छोड़कर गई थी, यह बात उस दिन उसको पता चली. लेकिन अनुपमा, काव्या को सलाह देती है कि वह वनराज को यह बात बता दे, लेकिन काव्या इससे कतराती है.

अनुज मांगेगा अनुपमा से माफ़ी

शो में एंटरटेनमेंट यहीं पर खत्म नहीं होता है. इसके बाद शो में देखने को मिलेगा कि डांस परफॉर्मेंस के बीच ही अनुज अनुपमा को खींचकर दूर ले जाएगा.  आपको बता दें, शो के स्पॉइलर में भी देखने को मिला कि अनुज अनुपमा के पैरों में गिरकर माफी मांगता है और उससे बहुत कुछ कहता है. वहीं अनुपमा जवाब देती है कि मुझे आपका प्रेम भीख में नहीं चाहिए. आपका प्रेम मेरा अधिकार था, जो आपने किसी और को दे दिया है.

अगर गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे को डायबिटीज हो जाती है, तो उस के क्या लक्षण होते हैं?

सवाल

मैं गर्भावस्था के 7वें महीने में हूं. मैं ने सुना है की इस अवस्था में गैस्टेशनल डायबिटीज होने की बहुत संभावना होती है. मेरा सवाल यह है कि यदि गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे को डायबिटीज हो जाती है तो उस के क्या लक्षण होते हैं?

जवाब

हर व्यक्ति में डायबिटीज के अलगअलग लक्षण देखे जा सकते हैं. इस कारण हमें टाइप 2 डायबिटीज होने पर अलगअलग समस्या का सामना करना पड़ सकता है. अब अगर बात की जाए बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज की तो उस के कुछ सामान्य लक्षण हैं जैसे धुंधली नजर, का धुंधला होना, भूख बढ़ना, बारबार पेशाब आना, थकान, त्वचा का काला पड़ना, तेजी से वजन घटना आदि.

मेरे बच्चे की उम्र 5 साल है और उस का वजन अपनी उम्र से काफी ज्यादा है. अगर बच्चा मोटापे की समस्या से ग्रस्त है तो क्या उसे डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है और बच्चों में डायबिटीज की समस्या के निदान के लिए डाक्टर से परामर्श लेने का सही समय क्या है?

मोटापा टाइप 2 डायबिटीज के विकास के लिए प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है. इसलिए इसे नजरअंदाज बिलकुल न करें. साथ ही अगर आप का बच्चा अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होने के साथ युवावस्था में प्रवेश कर चुका है और उसे निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जैसे नजर का धुंधला होना, बारबार प्यास लगना, भूख बढ़ना, बारबार पेशाब आना, थकान, त्वचा का काला पड़ना, तेजी से वजन घटना आदि तो तुरंत डाक्टर से परामर्श करें.

सवाल

मेरा बच्चा मधुमेह की समस्या से ग्रस्त है. मैं जानना चाहती हूं कि अपने बच्चे का सही डाक्टरी इलाज कैसे करूं?

बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज होने पर उन्हें वह हारमोन दिया जाना चाहिए जिस की उन के शरीर में कमी है जैसेकि इंसुलिन. यह इंजैक्शन के रूप में दिया जा सकता है. यह इंजैक्शन बांहों के ऊपरी हिस्से, पेट की चरबीदार त्वचा और जांघों के सामने दिए जाते हैं. इसे इंसुलिन पंप के रूप में भी दिया जा सकता है.

. -डा. नवनीत अग्रवाल

चीफ क्लीनिकल औफिसर, बीटओ.

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सफल वैवाहिक जीवन के 5 सीक्रेट्स

सफल, खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए कुछ छोटीछोटी बातों को अपनाना जरूरी है. तो आइए जानते हैं उन छोटीछोटी बातों को जो रिश्ते को खूबसूरत, सफल और खुशहाल बनाती है.

एकदूसरे की भावनाओं को महत्त्व देना

एक वैवाहिक रिश्ते की मजबूत नींव इस बात पर टिकी रहती है कि आप एकदूसरे की भावनाओं का कितना आदर, सम्मान और महत्त्व देते हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि आप एकदूसरे की भावनाओं को बिना सम झे अपनी बात एकदूसरे पर जबरन थोपते हैं? यदि हां तो यह आदत बदल लीजिए और एकदूसरे की भावनाओं को महत्त्व देना शुरू कीजिए. तभी आप के रिश्ते की नींव मजबूत होगी.

काम में मदद करना

आजकल अधिकतर कपल वर्किंग होते हैं. यदि आप ऐसे में केवल अपने काम के विषय में सोचेंगे तो बात बिगड़ भी सकती है. इसलिए एकदूसरे के काम को समान महत्त्व दें. यदि किसी दिन आप के पार्टनर को जल्दी जाना है तो आप उस के काम में थोड़ा हाथ बटा दे यानी उस की काम में थोड़ी मदद कर दें ताकि काम जल्दी निबट जाए.

बिताएं एकदूसरे के साथ क्वालिटी समय

वर्किंग कपल्स के पास हमेशा समय की कमी बनी रहती है. कभीकभी उन के औफिस का समय भी अलगअलग होता है, इसलिए उन को एकदूसरे के साथ एक अच्छा यानी क्वालिटी समय बिताने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहिए.

इस के लिए छुट्टी के दिन सुबह जिम, मौर्निंग वाक के लिए जा कर अपनी सेहत बना सकते हैं और एकदूसरे के साथ किसी भी विषय पर बात कर सकते हैं तथा एकदूसरे की राय ले सकते हैं या फिर किचन में एकदूसरे के संग खाना बना सकते हैं अथवा कहीं बाहर घूमनेफिरने का प्रोग्राम बना कुछ यादगार पल एकदूसरे संग बिता कर अपने रिश्ते में मिठास घोल सकते हैं.

पैसे का सही प्रबंधन

शादी के बाद से ही कपल्स का एकदूसरे के लिए पैसे का सही प्रबंधन करना जरूरी होता है ताकि पैसा बुरे वक्त काम आ सके और आवश्यकता होने पर किसी तरह का तनाव न हो. इस के लिए एकदूसरे की राय से सही जगह पैसे का सही निवेश करें.

 टाइम का रखें खयाल

एकदूसरे के मी टाइम का खयाल रखें. कई बार कपल्स भी रोज दिनभर की भागदौड़ के बाद कुछ समय खुद के लिए निकालना चाहते हैं ताकि वे अपनी पसंद या हौबी के अनुसार कुछ काम जैसे किताब पढ़ने का शौक, गार्डनिंग का शौक या कुछ और जिसे मी टाइम में पूरा कर सकें. इस के लिए कपल्स को एकदूसरे के लिए मी टाइम जरूर दें.

सच कड़वा होता है

देश में औरतों के साथ दोगले और घटिया व्यवहार की एक वजह है कि समाज आमतौर पर पीडि़ता से इतने सवाल पूछता है कि उसे लगता है कि शायद वही गलत थी. राहुल गांधी को अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कई लड़कियां मिलीं, जिन्होंने यात्रा में चलतेचलते राहुल गांधी से उन के साथ हुए कुछ साल पहले बलात्कारों का जिक्र किया और यह भी कहा कि पारिवारिक रोक के कारण वे न तो जोर से इस बात को कह पाईं और न ही पुलिस तक जा पाईं.

यह जानकारी राहुल गांधी को शिकायत के तौर पर दर्ज नहीं की गई थी, यह एक सामाजिक जानकारी थी, जिस का जिक्र राहुल ने अपने कई भाषणों में किया तो नरेंद्र मोदी की सरकार तिलमिला गई और उस ने दिल्ली पुलिस को लगा दिया कि उन लड़कियों के नाम, मोबाइल, पते, घटना के वर्ष, दिन के बारे में बताए. वह पुलिस जो थाने में आए शिकायत करने वाले लोगों की एफआईआर नहीं लिखती दलबल के साथ राहुल गांधी के घर पहुंचने लगी कि पूरी जानकारी दो.

राहुल गांधी ने जो बताया वह तो आधाअधूरा होना ही था. अब पुलिस कह रही है कि राहुल ने सहयोग नहीं दिया. कोई बड़ी बात नहीं कि दिल्ली पुलिस राहुल गांधी पर अपराध की जानकारी होने पर भी सूचना न देने का आरोप मढ़ दे. इंडियन पीनल कोड में यह भी एक अपराध है.

हर पत्रिका, समाचारपत्र के पास ऐसे पत्र आते रहते हैं जिन में औरतें गुमनाम शिकायत करती हैं कि उन के साथ बचपन में कैसे रेप हुआ और कैसे घर वालों ने उन का मुंह बंद करा दिया कि बात करने से घर की बेइज्जती होगी और फिर शादी भी नहीं होगी. वर्षों बाद भी लड़कियां उस दर्द को नहीं भूलीं, शायद इसलिए कि समाज उन्हें ही पापिन मानता है और वे अपराधबोध से ग्रस्त रहती हैं.

दिल्ली पुलिस अब क्या किसी भी अखबार, पत्रिका के दफ्तर में घुस कर यह मांग कर सकती है कि या तो उस लड़की का नामपता बताओ वरना मुकदमा प्रकाशक, संपादक पर चलेगा कि या तो उन्होंने  झूठ बोला या फिर वे एक हुए अपराध को छिपाने के अपराधी हैं?

जब राहुल गांधी के घर 3-4 बार दिल्ली पुलिस दलबल के साथ पहुंची थी तो पीछेपीछे गोदी मीडिया के कैमरे वाले भी थे. पूरा मामला नाटकीय बनाया गया था. शायद यह साबित करना चाहा था कि इस दिव्य गुरु वाले देश में रेप तो होते ही नहीं हैं और विपक्ष में होने के कारण राहुल गांधी देश को देश में, विदेश में बदनाम कर रहे हैं.

इस देश की कानून व्यवस्था के साथ यह कोई नई बात नहीं है. यहां अकसर ऐसा होता है. औरतों और युवतियों को काबू में करने के लिए उन के शिकायत करने पर उन से इतने सवाल पूछे जाते हैं कि वे खुद को अपराधी मानने लगती हैं. यह बो झ उन्हें मरने तक रहता है कि उन्होंने कुछ गलत किया है जबकि रेप असल में अपराध है. जघन्य अपराध है पर इतना नहीं कि लड़कियां या औरतें इस पर फांसी पर  झूल जाएं, कुएं में कूद जाएं या खुद को अग्नि के हवाले कर दें.

सतीसावित्री का नाम दे कर सीता की अग्नि परीक्षा व भूमि में समा जाने का उदाहरण देदे कर कहा जाता है कि हर आरोप पर रेप की सफाई देना तो औरत का काम है, समाज का नहीं, रेपिस्ट का नहीं.

राहुल गांधी हों या कल को किसी पत्र के संपादक, दिल्ली पुलिस की राजनीतिक शहंशाहों के कहने पर की गई काररवाई असल में देश व समाज के लिए प्रतिष्ठा की नहीं, औरतों के अधिकार और ज्यादा छीनने वाली काररवाई है.

खैर, अब तो शायद यह पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाया जाएगा कि हर रेप की शिकायत पर पहले लड़की को आग में से गुजरना होगा ताकि साबित हो सके कि उस पर लगा आरोप या उस का लगाया आरोप कितना सही है.

भारत सरकार महाभारत व रामायण को पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा बना रही है जिन में मोहिनी अवतार बन कर विष्णु का दस्युओं को मोह कर अमृत छीनना या लक्ष्मण की रेखा औरत के चारों ओर खींचने का पाठ पढ़ाया जाएगा.

यह सब कल्याणकारी जगत्गुरु भारत का नाम ऊंचा करने के लिए होगा जिस पर राहुल गांधी ने उन रेपों के जिक्र से काले छींटे फेंके हैं जो जगत्गुरुओं के अनुसार कभी हुए ही नहीं थे. जब तक वे लड़कियां सामने आ कर अग्नि परीक्षा न दें, यह आरोप  झूठा है.

7 Tips: अगर आप भी बनने वाली हैं दुल्हन तो ट्राय करें ये ब्राइडल फिटनैस टिप्स

शादी एक लड़की के जीवन का बहुत महत्त्वपूर्ण मौका होता है. शादी के इस दिन के लिए वह महीनों से तैयारी करती है. उसे इस दिन सब से सुंदर दिखना होता है, स्टार की तरह चमकना होता है. इसी वजह से अपनी स्किन को चमकदार और बौडी को फिट ऐंड टोन्ड रखने के लिए तैयारियां करनी होती हैं.

फिटनैस का सब से जरूरी स्टैप है सही डाइट. आप को अपनी डाइट पर करीब 1 महीना पहले से ध्यान देना होगा ताकि आप की स्किन शादी के दिन ऐक्स्ट्रा ग्लो करे और लोग बस आप को ही देखते रहें.

अपने भोजन को ट्रैक करें

आप को इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप क्या खाते हैं. आप को 1,200 से 1,500 किलोग्राम कैलोरीज मैंटेन रखनी हैं. इस के लिए चीनी और कार्बोनेटेड पेय, ड्रिंक्स से बचें क्योंकि वे कैलोरी में उच्च होते हैं. नारियल पानी का विकल्प चुनें. प्रोटीन लें. पेट की चरबी कम करने के लिए संतुलित भोजन करें. मैदा, चीनी, नूडल्स, सफेद चावल आदि साधारण कार्बोहाइड्रेट से बचें और उन्हें साबूत अनाज, ब्राउन राइस, दलिया, जई जैसे हैल्दी कार्बोहाइड्रेट से बदलें.

भोजन की योजना बनाते समय आप कितना खा रही हैं यानी पोर्शन ध्यान में रखना महत्त्वपूर्ण है. कैलोरी की गिनती पर ध्यान फोकस करने के बजाय अपने शरीर की भूख के संकेतों को सुनने की कोशिश करें और जब आप भरा हुआ महसूस करें तो खाना बंद कर दें. यह अधिक खाने और अनावश्यक वजन बढ़ने से रोकने में मदद करेगा.

क्या हो आप का डाइट प्लान

इस संदर्भ में फिटनैस ऐक्सपर्ट और गुडवेज फिटनैस की फाउंडर डा. शक्ति कहती हैं कि सब से पहले अपनी डाइट से औयल, शुगर, मैदा, सफेद नमक जैसी चीजों को बिलकुल हटा दीजिए. इस से आप का वजन तो कम होगा ही साथ ही स्किन पर पिंपल्स भी कम हो जाएंगे जिस से स्किन ग्लो करेगी. डा. शक्ति होने वाली दुलहन के लिए एक डाइट प्लान बताती हैं-

नाश्ते से पहले

स्किन ग्लोइंग टी.

कुनकुना पानी.

1/2 चम्मच हल्दी के साथ या 1 नीबू और 1 इंच अदरक का रस या 1 चम्मच मोरिंगा या 1 नीबू, 1 चम्मच और्गेनिक हनी के साथ या 3 लहसुन की कलियां गरम पानी में उबाल कर लीजिए. साथ ही कोई भी ड्राई फू्रट या मिक्स ड्राई फ्रूट 1/2 मुट्ठी रात भर पानी में भिगो कर सुबह अपनी टी के साथ लीजिए.

नाश्ता

अपने नाश्ते की शुरुआत किसी भी तरह के मिलेट्स से कीजिए. मिलेट्स खाने में तो हैल्दी होते ही हैं साथ ही वजन को भी कम करते हैं  और इन के अंदर सभी फूड से ज्यादा फाइबर और विटामिंस होते हैं. इस से आप की आंतें और ओरगंस हैल्दी और साफ रहते हैं, जिस से स्किन कुछ ही दिनों में ग्लो करने लगती है. इस से आप ऐनर्जी में भी रहेंगी और आप का मैटाबोलिज्म भी हाई रहेगा जिस से आप की पूरे दिन कैलोरीज बर्न होती रहेंगी.

नाश्ते के 2 से 3 घंटे बाद

1 बड़ी प्लेट सभी तरह की सीजनल रौ वैजिटेबल्स और पत्तेदार सब्जियों का सलाद बनाइए जैसे खीरा, ककड़ी, टमाटर, चुकंदर, पत्तागोभी, लैट्यूस, पालक के पत्ते इत्यादि. नीबू का रस और सेंधा नमक स्वादानुसार डालिए. इस में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट्स आप की स्किन को टोन और नैचुरल ग्लो देने में मदद करते हैं. इसी तरह सीजनल फ्रूट्स सलाद का सेवन कीजिए. जिस में सभी तरह के खट्टे फल और बाकी सीजनल फ्रूट्स शामिल कीजिए और पेट भर खाइए.

लंच

घर का सादा खाना खाइए जैसे दही, फू्रट रायता, दाल, रोटी, सब्जी, ब्राउन राइस जो सरसों के तेल में बने हों और तेल की मात्रा भी कम हो. इस 1 महीने बाहर का पिज्जा, बर्गर, चौमिन, छोलेभठूरे, समोसे इत्यादि बिलकुल बंद कर दीजिए और जितनी भूख लगी हो उस से आधी मात्रा में ही खाइए. पेट को थोड़ा खाली ही छोडि़ए. इस से आप पूरा दिन शादी की शौपिंग पूरी ऐनर्जी से कर पाएंगी.

डिनर

शाम के 6 से 8 बजे तक अपना डिनर कर लीजिए. डिनर हलका कीजिए जैसे:

1 बेसन या ओट्स चीला, 1 छोटा बौल सामक के चावल की खिचड़ी, 1 छोटा बौल पोहा, 2 इडली, 1 बड़ी प्लेट वैजिटेबल सलाद,

1 बड़ा बौल वैजिटेबल सूप. रात में फल का सेवन मत कीजिए. इस के बाद कुछ मत खाइए. शादी का माहौल है लेकिन मिठाई या कोई भी जंक फूड सामने वाले का दिल रखने के लिए जरा सी मात्रा में कम से कम खाइए. अपने वजन को डेली ट्रैक करते रहिए. एक दिन ज्यादा खा लिया है तो अगले दिन सिर्फ फ्रूट्स ऐंड वैजिटेबल और लिक्विड डाइट ले कर कोपनसैट कीजिए.

ऐक्सरसाइज

ऐक्सरसाइज आप शादी से 1 से 3 महीने पहले से करना शुरू कीजिए और शादी के बाद भी अपनी फिटनैस को मैंटेन करने के लिए करती रहें. यदि शादी के बाद आप को लोग लगातार मिठाई खिला रहे हों, आप बहुत स्ट्रैस में हों या शादी की भागदौड़ में थक रही हों तब भी आप इन सभी ऐक्सरसाइज के रूटीन को कंटिन्यू रख सकती हैं. चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो.

इस तरह का रूटीन फौलो करने से आप के आसपास के लोग तो आप की तारीफ करेंगे ही साथ ही आप को भी फौलो करना शुरू कर देंगे. आप कभी भी बहुत जल्दी फैट की चपेट में नहीं आएंगी और बहुत सी बीमारियों से भी बचे रहेंगी.

घर पर बनाएं टेस्टी मसाला बैगन

घर में हाउसवाइफ यही सोचती रहती है आज खाने में क्या बनाएं, चिंता छोड़िये और घर में बनाएं मसाला बैगन. बच्चे से लेकर बड़ो तक सब चट कर जायेंगे ये मसाला बैगन

मसाला बैगन सामग्री

  1.  8-10 छोटे बैगन
  2.  3-4 टमाटर
  3.  2 प्याज
  4.  1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  5.  1/2 छोटा चम्मच लाल देगीमिर्च
  6.  1/2 छोटा चम्मच हलदी
  7.  1/2 छोटा चम्मच भुना व पिसा जीरा
  8.  1 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट
  9.  2-3 तेजपत्ते
  10.  1 छोटा टुकड़ा दालचीनी
  11.  2-3 लौंग
  12. 1-2 हरीमिर्चें
  13.  जरूरतानुसार तेल
  14.  थोड़ी सी धनियापत्ती कटी सजाने के लिए
  15.  नमक स्वादानुसार.

विधि

बैगनों को धो कर अच्छी तरह पोंछ कर लंबाई में 2 भाग कर लें. मिक्सी में टमाटर व हरीमिर्च पीस लें. एक कड़ाही में तेल गरम कर तेजपत्ते, दालचीनी और लौंग डालें. फिर प्याज के लच्छे डाल कर भूनें. देगीमिर्च, धनिया पाउडर, नमक, हलदी, जीरा और बाकी सारे मसाले डाल कर भूनें. अदरकलहसुन का पेस्ट डाल कर भूनें. पिसे टमाटर डालें और घी छूटने तक भूनें. इस में बैगन मिलाएं. 1/2 कप पानी डालें और ढक कर पानी सूखने व बैगन गलने तक पकाएं.

2 बेसन वाला करेला

सामग्री

  1. 250 ग्राम करेला द्य 2 बड़े चम्मच बेसन
  2.  1 कप लच्छों में कटा प्याज
  3. 1 छोटा चम्मच सरसों द्य 2-3 साबूत लालमिर्च
  4. 1 छोटा चम्मच गरममसाला
  5.  1 छोटा चम्मच हल्दी
  6.  1 छोटा चम्मच लालमिर्च कुटी
  7.  थोड़ा सा तेल तलने के लिए द्य 1-2 हरीमिर्चें
  8.  1 टमाटर द्य नमक स्वादानुसार.

विधि

करेलों को धो कर और छील कर लंबाई में टुकड़े कर लें. एक पैन में पानी डाल उस में थोड़ा सा नमक व हलदी डाल कर करेलों को भिगो दें. एक पैन में 2 चम्मच तेल गरम कर सरसों भूनें. फिर बेसन डाल कर सुनहरा होने तक भूनें. प्याज के लच्छे डालें और नर्म होने तक पकाएं. टमाटर के टुकड़े काट कर इस में मिला दें. जब टमाटर कुछ गल जाएं तो थोड़ा सा पानी डाल कर कुछ देर के लिए ढक कर पकाएं. एक पैन में तेल गरम कर करेलों को पानी से निकाल कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तलें. तले करेलों को बेसन में डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. सारे मसाले मिक्स करें और कुछ देर ढक कर पकाएं और फिर गरमगरम परोसें.

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