अपरिचित: जब छोटी सी गलतफहमी ने तबाह किया अर्चना का जीवन

अगर आप सलाद नहीं खाती हैं तो…

सलाद भोजन का एक अनिवार्य अंग है.लेकिन एक सर्वे में पाया गया है कि महिलाएँ अक्सर खुद की थाली में सलाद परोसने से कतराती हैं या आलस करती हैं. वो इसके पीछे तर्क देती हैं कि अरे,  हमें सलाद की आदत बिल्कुल भी नहीं है या  ऐसा कबती हैं कि चलो आज रहने दो कल जरूर  खा लूंगी बात यह है कि  आज जरा जल्दी खाना निपटा लूं.पर यह बहाना बहुत घातक है क्योंकि सलाद को टाल देने की यह आदत फिर हौले -हौले स्वभाव ही बन जाती है इस तरह सलाद खुराक से हट ही जाता है लेकिन सलाद न खाने से बहुत नुकसान होते हैं इसके अनगिनत फायदे हैं लीजिए यह जान लीजिये.

सामान्य प्याज, टमाटर वाले सलाद  में पाया जाने वाला पोषक तत्व फाइबर और विटामिन सी से भरपूर होता है.  ये साइट्रिक एसिड से युक्त होता है. इसमें विटामिन सी के साथ अन्य पोषक तत्व होते हैं. और ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को कम करता है.टमाटर, खीरा, प्याज, हरी मिर्च और नींबू के रस  वाला  खट्टा-मीठा रसीला सलाद बहुत लाभदायक होता है. ये भूख को जगाता है साथ ही  ये तमाम औषधीय गुणों से भी भरपूर है.  इसमें एंटी इन्फ्लैमेटरी, एंटी-हेल्मिंथिक, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल जैसे गुण होते हैं. और ये सलाद  पेट से जुड़ी समस्या जैसे अल्सर, गैस,कब्ज, एसिडीटी आदि से छुटकारा पाने में मदद करता है. मूली, गाजर, चुकंदर वाले सलाद के  तो क्या कहने ,ये केवल दिखने में ही काफी फैंसी नहीं होता जबकि  इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है.

इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. अध्ययनों के अनुसार ऐसा रंगीन सलाद हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और मेटाबोलिक रोग के जोखिम को कम कर सकता है. इसके अलावा इसमें फाइबर और कुदरती ग्लूकोज जैसे कई अन्य पोषक तत्व भी होते हैं..ये कैंसर, मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. महिलाओं मे इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. ये बुखार और पीलिया को भी ठीक करता है. सलाद की तासीर ठंडी होती है. कोई भी सलाद हो इसमें  टैनिन,फाइबर,फॉस्फोरस, प्रोटीन और आयरन जैसे तत्व तो होते ही हैं. एक प्लेट सलाद में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होते है. जो शरीर में वसा की मात्रा को बढ़ने नहीं देते है. इसके कारण शरीर का वजन नहीं बढ़ता है. जिनको अपना वजन कम करना है तो उनको एक बड़ी प्लेट रंग बिरंगे सलाद का सेवन रोजाना करना चाहिए.

सलाद  में कई तरह के विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट तत्व के गुण होते है. जो शरीर के रक्त चाप को नियंत्रण करने में सहायता करते है. रक्त चाप के मरीजों को दोनो समय आहार से पहले सलाद का चबाचबाकर  सेवन करना चाहिए.

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सलाद एक अच्छी औषधि है. इसके  के एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर की इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत रखने में सहायता करता है. जिसके कारण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत मिले यानि वह व्यक्ति जल्दी बीमार नहीं होता है.

आंखो के लिए  तो सलाद की प्लेट बहुत ही अनुकूल है. रंगीन सलाद बहुत गुणों से भरा हुआ रहता है. रोजाना इसका का सेवन करने आंखो की रौशनी और शक्ति भी  बढ़ती है. आंखो से जुडी समस्या को ठीक करने में सहायता करता है.  सलाद की  कच्ची सब्जियां मन को खुश रखती हैं. हर दिन सलाद खाना है यह शपथ लीजिए.

फैमिली को परोसें गरमागरम पंजाबी कढ़ी

दोपहर हो या रात अगर कढ़ी का नाम आए तो कोई भी खाने में नखरे नही करता. पंजाब में छोले के बाद कढ़ी का ही नाम आता है. कढ़ी बनाना तो आसान है, लेकिन उसे पंजाबी टेस्ट देना मुश्किल है. इसलिए आज हम आपको पंजाबी कढ़ी की रेसिपी के बारे में बताएंगे, जिसे आप अपनी फैमिली को चावल के साथ गरमागरम परोस सकते हैं.

हमें चाहिए

बेसन – 1 1/2 कप,

दही – 02 कप (खट्टा),

हरी मिर्च – 2-3 (बारीक कटी हुई),

मेथी के दाने – 1/2 छोटा चम्मच,

हल्दी पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच,

लाल मिर्च पाउडर – 1/4 छोटा चम्मच,

हरी धनिया – 01 बड़ा चम्मच (बारीक कटी),

लाल मिर्च – 02 नग (साबुत),

तेल – 1 1/2 बड़े चम्मच,

तेल – पकौड़ी तलने के लिये,

हींग – 01 चुटकी,

जीरा – 1/2 छोटा चम्मच,

नमक – स्वादानुसार

कढ़ी पत्ता- 4

बनाने का तरीका

– सबसे पहले बेसन को छान लें. इसके बाद बेसन में सही मात्रा में पानी डाल कर उसका पकौड़े बनाने वाला गाढ़ा घोल बना लें. घोल को अच्छी तरह से फेंट लें. फिर इस घोल को दो भागों में बांट लें, एक भाग पकौड़ी बनाने के लिये और एक भाग कढ़ी के घोल के लिये.

– अब कढा़ई में तेल गरम करके उसमें चम्मच से थोड़ा सा बेसन का घोल लेकर तेल में डालें. कढाई में जितनी पकौडियां आ सकें, उतनी डालें और फिर उन्हें सुनहरे रंग का होने तक तल लें. सारी पकौडियां तलने के बाद उन्हें अलग रख दें और गैस बंद कर दें.

– अब बचे हुए बेसन के घोल में दही को मथ कर डालें और फिर उसे अच्छी तरह से फेंट लें. फेंटने के बाद बेसन घोल में 1 लीटर से थोड़ा ज्यादा पानी मिला दें और उसे एक बार और फेंट लें.

– अब कड़ाही में एक बड़ा चम्मच तेल रख कर बाकी का सारा तेल निकाल दें. इसके बाद कढा़ई को गर्म करें. गरम तेल में कढ़ी पत्ता, हींग, मेथी और जीरा डालें और हल्का सा तल लें. इसके बाद तेल में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और हरी मिर्च डालें और हल्का सा तल लें.

– कढा़ई में बेसन का घोल डालें और इसे मीडियम आंच पर चलाते हुए पकायें. बेसन को तब तक चलाते हुए पकायें, जब तक वह गाढ़ा न हो जाये. जब घोल गाढ़ा हो जाएगा, उसमें उबाल आने लगेगा. उबाल आने पर घोल में पकौडियां डाल दें और चलाते हुए पकायें.

– पकाैड़ी डालने के बाद कढ़ी में फिर से जब उबाल आये, उसमें नमक डाल दें और आंच को धीमी कर दें. अब इसे 13-14 मिनट तक पकायें. साथ ही थोड़ी-थोड़ी देर पर कढ़ी को चलाते भी रहें. जब कढ़ी की ऊपरी सतह पर मलाई जैसी पर्त जमने लगे, तो समझ जायें कि कढ़ी तैयार हो गयी है. अब गैस को बंद कर दें और कटी हुई हरी धनिया डाल कर कढ़ी को एक बार और चला दें.

– अब एक फ्राई पैन में 1/2 बड़ा चम्मच तेल डाल कर गरम करें. तेल गर्म होने पर दो साबुत लाल मिर्च डाल कर तड़का लगायें और हल्का सा भून लें. इसके बाद गैस बंद कर दें और मिर्च के तड़के को कढ़ी में ऊपर से डाल दें. पकने के बाद चावल के साथ अपनी फैमिली को गरमागरम पंजाबी कढ़ी परोसें.

‘‘कई पो चे ’’ फेम अमित साध अब बने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट

इन दिनों हर फिल्मकार के बीच इनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस वालों को परदे पर लाने की होड़ सी मची हुई है.एक तरफ उत्तरप्रदेश में 150 इनकाउंटर कर चुके पुलिस अफसर अविनाश मिश्रा के जीवन व कृतित्व पर ‘जियो सिनेमा’ पर नीरज पाठक निर्देशित वेब सीरीज ‘‘इंस्पेक्टर अविनाश’’ स्ट्रीम हो रही है,तो वहीं ‘‘यूवी फिल्मस’’के बैनर तले इनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अफसर पर फिल्म ‘‘मैं’’ बन रही है.‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में इनकाउंटर स्पेशलिस्ट के किरदार में रणदीप हुड्डा हैं,तो वहीं फिल्म ‘‘मैं’’ में इनकाउंटर स्पेशलिस्ट का किरदार अभिनेता अमित साध निभा रहे हैं.

फिल्म ‘‘मैं’’ की कहानी एक ऐसे पुलिसवाले के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मुठभेड़ में माहिर है.इस फिल्म में ईशा देओल भी एक साहसी महिला के चुनौतीपूर्ण किरदार में नजर आने वाली हैं. अमित साध और ईशा देओल के अलावा इस रोमांचक सिनेमा में सीमा बिस्वास, तिग्मांशु धूलिया और मिलिंद गुणाजी भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं. फिल्म के लेखक व निर्देषक सचिन सराफ,क्रिएटिव प्रोड्यूसर और कैमरामैन अनिल अक्की तथा निर्माता प्रदीप रंगवानी हैं.

अमित साध कहते हैं-‘‘मैं तो कहानी व किरदार सुनकर लेखक की सोच का कायल हो गया था. इसीलिए मैने अपने किरदार पर काफी मेहनत की है. मैं इस फिल्म के लिए रचे गए चरित्र से अचंभित हुआ, एक ऐसा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट जो साइकोलॉजी पर अधिक फोकस करता है.जब मैं निर्देशक सचिन से मिला, और जब उन्होंने फिल्म का अपना नजरिया साझा किया, तो मुझे तुरंत लगा कि मुझे इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहिए.‘‘

अमित साध का लुक इस कॉप ड्रामा में काफी अलग है.घनी मूंछों और चुस्त बॉडी के साथ वह प्रभावी दिख रहे हैं. अमित साध ने खुद को इनकाउंटर स्पेषलिस्ट के लुक में ढालने के लिए एक महीना लंदन में गुजारा और मनचाहा शरीर हासिल करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर से ट्रेनिंग भी हासिल की.

यूवी फिल्मस के संस्थापक प्रदीप रंगवानी उर्फ पॉल इस फिल्म को लेकर काफी खुश और उत्साहित हैं.वह हमेशा बिग स्क्रीन पर अनूठी कहानियां पेश करना चाहते हैं, और मैं उनके प्रोडक्शन हाउस के तहत बन रही ऐसी ही एक शक्तिशाली फिल्म है.

अमित साध किसी परिचय के मोहताज नही है. वह ‘सुपर 30‘, ‘सुल्तान‘ और ‘काई पो चे‘ जैसी फिल्मों में भिन्न भिन्न प्रकार के किरदारों को बखूबी निभाया है. ‘ब्रीद‘ में एक अपरंपरागत अपराध शाखा अधिकारी के किरदार में वह दर्शकों का दिल जीत चुके हैं.

अनुपमा-अनुज को एकसाथ देख भड़की माया की तलाक की डिमांड

टीवी सीरियल अनुपमा लगातर नंबर वन पर छाया हुआ है. इस शो के मकर्स आए दिन शो को खास बनाने के लिए रोज नए-नए ट्विस्ट लेकर आते है. अब इसी वजह से अनुपमा सीरियल दर्शको के बीच काफी पॉपुलर है. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर “अनुपमा” इन दिनों काफी सुर्खियों में बने हुए हैं.

शो में एक तरफ जहां अनुपमा और अनुज मिलने का नाम नहीं ले रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर माया और वनराज का पागलपन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.

बीते दिन अनुपमा में देखा गया कि अनुपमा और अनुज एकसाथ समय बिताते है. वहीं शो में दिखाया गया कि अनुपमा और अनुज घर में नहीं है, इसको लेकर माया और वनराज आपस में लड़ने लगते है.

 

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शाह हाउस में अनुपमा-अनुज एक-दूजे का हाथ थामकर कदम रखेंगे

रुपाली गांगुली स्टारर अनुपमा में प्रतिदिन ट्विस्ट एवं टर्न्स देखने को मिलते ही रहते है. शो में वनराज और माया पागलों की तरह लड़ते हैं और अनुज व अनुपमा का इंतजार करते हैं.  तभी शाह हाउस में अनुज और अनुपमा एक-दूजे का हाथ थामकर कदम रखते हैं, जिसे देखकर सबके होश उड़ जाते है. जहां वनराज का गुस्सा में आग बबूला होता है तो वहीं माया पर पागलपन सवार हो जाता है.

अनुपमा- अनुज पर सवाल खड़े होगे

टीवी सीरियल अनुपमा अनुपमा में जल्द ही देखने को मिलेगा कि अनुपमा और अनुज को साथ देखकर वनराज सवाल खड़ा करेगा. वह अनुज से पूछता है कि रातभर तुम लोग फोन नहीं करोगे, जवाब नहीं दोगे तो हम परेशान नहीं होंगे क्या?

वहीं अनुपमा में दूसरी ओर माया का पागलपन हद पार करेगा. वह सबके सामने ‘मेरा अनुज’ की रट लगाएगी. इसके बाद, वह अनुज से पूछेग कि तुम्हारे बीच में चल क्या रहा है? तुम मेरे अनुज को हासिल करना चाहती हो. दोनों की बात को लेकर अनुपमा भड़क जाएगी.

जिंदगी का सफर: भाग 3- क्या शिवानी और राकेश की जिंदगी फिर से पटरी पर लौटी?

पहले अच्छे विद्यार्थियों में गिना जाने वाला मोहित अपनी शिक्षिकाओं के लिए अब समस्या बन गया था. वह चिड़चिड़ा और झगड़ालू हो गया था. पढ़ने और सीखने में उस की रुचि कम हो गई थी. अपने सहपाठियों की चीजें तोड़नेफोड़ने में उसे खूब मजा आता. उसे संभालना बहुत कठिन हो गया था.

‘‘मोहित की क्लासटीचर ने एक दिन उस से प्यार से बात करी तो मालूम पड़ा कि वह अपने पापा, दादादादी

नानानानी को बहुत याद करता है. उस का मन उन से मिलने को तड़पता है. अपनी टीचर से

बातें करते हुए वह भावुक हो कर कई बार रोया. मैं ने उस की बिगड़ी मानसिक स्थिति की चर्चा करने के लिए आप दोनों को बुलाया है. हम

सब की नासमझ और लापरवाही के कारण अगर उस मासूम का भविष्य खराब हो गया, तो हम सभी अफसोस करेंगे,’’ अनिता के इन शब्दों को सुन कर राकेश गंभीर व उदास सा और शिवानी उत्तेजित व भावुक नजर आने लगी.

प्रिंसिपल साहिबा के साथ उन की यह मुलाकात करीब 20 मिनट चली. इस दौरान शिवानी ने राकेश के ऊपर अपने साथ सहयोग न करने व अभद्र व्यवहार करने के आरोप को कई बार

ऊंची आवाज में दोहराया. तेज गुस्से के कारण उस की आवाज व शरीर दोनों कई बार कांपने लग जाते थे.

राकेश ने अनिता और शिवानी दोनों की बातें अधिकतर खामोश रह कर

सुनीं. उस ने न ज्यादा सफाई दी, और न ही शिवानी के खिलाफ बोला. जब भी मोहित के बिगड़े व्यवहार के बारे में प्रिंसिपल कोई जानकारी देती, उस की आंखों में दुख, चिंता और उदासी के मिलेजुले भाव और गहरा जाते.

उन दोनों को काफी समाझने के बाद अनिता ने अंत में कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि आप दोनों मोहित के सुखद भविष्य व समुचित विकास की खातिर साथसाथ रहना शुरू कर देंगे. अपने उत्तरदायित्वों को आपसी अहं के टकराव के कारण नजरअंदाज न करें. अपने बेटे को घर में हंसीखुशी का माहौल उपलब्ध कराना आप दोनों का ही फर्ज है.’’

प्रिंसिपल के कक्ष से बाहर आते ही राकेश ने अपना यह निर्णय शिवानी को सुनाया, ‘‘अतीत में जो भी हुआ है, उस का मुझे अफसोस है. मैं आज शाम ही तुम दोनों के पास रहने आ जाऊंगा.’’

राकेश ने अपना वचन निभाया. 2 सूटकेसों में अपना सामान भर कर उसी शाम फ्लैट में पहुंच गया. शिवानी ने उलझन भरी खुशी के साथ उस के निर्णय का स्वागत किया. मोहित तो इतना खुश हुआ कि पिता से लिपट गया.

राकेश के इस कदम से उन के आपसी संबंध सुधरने चाहिए थे, पर ऐसा नहीं हुआ. अतीत व भविष्य से जुड़ी अपनी सोचों को बदलना या रोकना इंसान के लिए आसान नहीं होता है.

पहले अपने अहं के टकराव के कारण दोनों लड़ते झगड़ते थे, पर अब अजीब सा खिंचाव दोनों के बीच बढ़ने लगा. एक ही छत के नीचे साथसाथ रहते हुए भी अजनबियों सा व्यवहार करते.

उन की आपस में बातचीत अधिकतर मोहित के बारे में होती. कभीकभी औपचारिक विषयों पर 2-4 वाक्य बोल लेते. दिल से दिल की बात कहनेसुनने का अवसर कभी आता भी, तो दोनों अजीब सी रुकावट महसूस करते हुए उस राह पर आगे बढ़ने की ताकत अपने अंदर नहीं पाते.

‘‘तुम इतना चुपचुप क्यों रहते हो?’’ कभीकभी शिवानी चिड़े से अंदाज में राकेश से पूछ भी लेती.

‘‘मैं ठीक हूं,’’ उदासीभरे अंदाज में कुछ ऐसा ही जवाब दे कर राकेश मोहित की तरफ ध्यान बंटा लेता था.

सच यह था कि दोनों रहने को सिर्फ साथ रहने लगे थे. उन की सोच व व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया था. मन की शिकायतों व नाराजगी के पूर्ववत बने रहने के कारण उन के आपसी संबंधों में सुधार नहीं हो रहा था.

राकेश अपने दिल की बात किसी से नहीं कहता था, पर शिवानी अपनी सहेली अंजलि से अपना सुखदुख बांट लेती थी.

‘‘शिवानी, तुम राकेश के बदलने का क्यों इंतजार कर रही हो. तुम खुद ही सहज हो कर उस से हंसनाबोलना क्यों नहीं शुरू देती हो?’’ अंजलि अकसर उस से कहती.

‘‘राकेश मुंह से कुछ न कहे, पर उस की आंखों में मैं अपने लिए लानतों, शिकायतों व नाराजगी के भावों को अब भी साफ पढ़ लेती हूं. तब मेरे अंदर कुछ भर सा जाता है, मन विद्रोह सा कर उठता है और मैं मीठा या अच्छा बोलने का अभिनय करने में खुद को पूरी तरह से असमर्थ पाती हूं,’’ ऐसा जवाब देते हुए शिवानी चिढ़ व गुस्से का शिकार बन जाती.

‘‘तुम दोनों शादी होने से पहले घंटों हंसबोल कर भी प्यासे से रह जाते थे. पता नहीं क्या हो गया तुम दोनों को,’’ दुख प्रकट करते हुए अंजलि की पलकें नम हो उठतीं.

अंजलि ने लाख कोशिश करी, पर वह शिवानी और राकेश को उन की

शादी की 7वी वर्षगांठ के मौके पर किसी पहाड़ी स्थल पर घूम आने को राजी नहीं कर पाई.

अंजलि के प्रयासों से ही उन के फ्लैट पर सालगिरह के दिन पार्टी का आयोजन हो पाया. शिवानी और राकेश दोनों ने इस पार्टी के प्रति जरा भी उत्साह नहीं दर्शाया.

वैसे पार्टी वाली शाम उन दोनों ने ही मेहमानों के सामने नकली मुसकान और खुशी जाहिर करने वाले मुखौटे ओढ़ लिए. उन्हें सब की खातिरदारी जोश के साथ करते देख कर कोई अनुमान नहीं लगा सकता था कि उन के बीच भारी मनमुटाव चल रहा है.

बनावटी व्यवहार इंसान के दिलोदिमाग को कहीं ज्यादा थका देता है. आखिरी मेहमान के विदा होने तक शिवानी का सिर दर्द से इतना फटने लगा कि उसे दर्दनिवारक गोली लेनी पड़ी. राकेश थकाहारा सा सोफे पर आंखें मूंद कर

लेट गया.

दोनों के मन में यह चाह मौजूद थी कि आज की विशेष रात वे एकदूसरे की बांहों में गुजारें, पर इस इच्छापूर्ति के लिए पहल करने से दोनों हिचकते रहे.

शिवानी घर संवारने लगी. राकेश मोहित से बातें करता रहा. दोनों के मन पर बेचैनी व तनाव का बोझ बढ़ता गया.

काम समाप्त कर शिवानी ने कपड़े बदले और डबल बैड पर लेट गई. राकेश आ

कर उसे प्यार से बातें करे इस की कामना करतेकरते उस की आंख ही लग गई.

बाहर ड्राइंगरूम में राकेश शिवानी के

अपने पास आ कर बैठने का इंतजार करते हुए नकारात्मक ऊर्जा से भरने लगा. आज की रात

भी अपनी पत्नी का घमंडी मन उसे बुरी तरह चुभने लगा.

मोहित कुछ देर बाद सो गया. उसे उठा कर राकेश बैडरूम में ले आया. वहां शिवानी को सोता देख कर उस को तेज धक्का लगा. उस के तनमन में दुख, पीड़ा व अकेलेपन का एहसास कराने वाली ऐसी तेज लहर उठी कि उस की आंखों में आंसू छलक आए.

मोहित को शिवानी के पास लिटा कर वह खुली खिड़की के पास आ खड़ा हुआ. आंखों में आंसू भरे होने के कारण उसे बाहर का दृश्य धुंधलाधुंधला सा नजर आ रहा था.

मोहित के हिलनेडुलने के कारण शिवानी की नींद उथली हो गई थी. फिर एक अजीब सी आवाज ने उस के कानों तक पहुंच कर उसे पूरी तरह जगा दिया.

वह आवाज राकेश के गले से निकली थी. शिवानी उठ कर उस के पास पहुंची तो अपने पति के गले से निकल रही सुबकियों की आवाज साफसाफ सुन ली.

‘‘राकेश. तुम हो रहे हो? क्यों?’’ घबराई शिवानी ने राकेश के कंधों को पकड़ कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया.

उस पल तक शिवानी ने राकेश को यों किसी बच्चे की तरह आंसू बहाते कभी नहीं देखा था. उस के उदास चेहरे पर बहते आंसुओं का देख कर वह स्तब्ध रह गई.

‘‘क्या बात है?’’ यह पूछते हुए शिवानी की खुद की आंखें भी भर आईं.

राकेश के होंठ कुछ कहने को फड़फड़ाए, पर गले से बोल नहीं निकले. बस आंसुओं के बहने की रफ्तार व सिसकियों की आवाज ज्यादा तेज हो गई.

‘‘नो… प्लीज डौंट क्राई,’’ शिवानी ने हाथ बढ़ा कर अपने पति के गालों पर बह रहे आंसुओं को पोंछ डाला.

दोनों की नजरें आपस में मिलीं. शिवानी का दिल ऐसा भावुक हुआ कि वह भी रो पड़ी. राकेश के हाथ अपनेआप फैले और शिवानी बिना सोचेसमझे उस की छाती से लिपट गई.

‘‘जिंदगी ने हमें यह किस मोड़ पर ला खड़ा किया है, शिवानी? हमारे बीच प्रेम की जगह यह शिकायतें, यह नफरत, ये अजनबीपन कहां से आ गया?’’ रो रहे राकेश की आवाज में गहरी उदासी और अफसोस के भाव शिवानी को अंदर तक हिला गए.

एक ऐसा तूफान शिवानी के मन में उठा जिस ने उस के मन में दबी सारी नकारात्मक भावनाओं को आंसुओं की राह से बहाना शुरू कर दिया.

‘‘मैं तुम से दूर हो कर नहीं जीना चाहती हूं. मेरी अकड़… मेरे घमंड ने हमारी खुशियां तबाह कर दीं. मुझे माफ कर दो, राकेश. मुझे पहले की तरह अपने दिल की रानी बना लो,’’ सुबकती शिवानी ने राकेश के आंसू पोंछते हुए अपने दिल की इच्छा बयां करी.

‘‘तुम से बड़ा कुसूरवार मैं हूं, शिवानी,’’ राकेश रुंधे गले से बोला, ‘‘मेरे अहं ने हमारे प्रेम की जड़ों को कमजोर कर दिया. मैं… मुझे तुम्हारी तरक्की और सफलता ही बुरी लगने लगी. हर कदम पर साथ देने के बजाय मैं तुम्हारा विरोधी क्यों हो गया.’’

एक बार दोनों ने अपनेअपने दिल की गहराइयों में दबीछिपी बातों को जबान

पर लाना शुरू किया, तो जैसे कोई बांध सा टूट गया. दोनों देर तक एकदूसरे से सटे अतीत की बहुत सी घटनाओं व यादों को शब्द दे कर बांटने लगे.

जब वे सोने के लिए पलंग पर लिपट कर लेटे, तब तक उन के दिलोदिमाग पर

लंबे समय से बना रहने वाला चिंता, तनाव शिकायतों व नाराजगी का बोझ पूरी तरह से

उतर चुका था.

राकेश ने शिवानी का माथा प्यार से चूम कर कहा, ‘‘तुम आज मुझे पहले मिलन की रात से ज्यादा सुंदर लग रही हो क्योंकि मैं बहुतबहुत खुश हूं.’’

‘‘आज मैं तुम से एक पक्का वादा कर रही हूं,’’ शिवानी उस की आंखों में प्यार से झंकते हुए मुसकराई.

‘‘करो,’’ राकेश उस की जुल्फों से खेलने लगा.

‘‘भविष्य में हमारा दिनभर चाहे कितना भी झगड़ा हो, पर सोने से पहले मैं सिर्फ तुम्हारे प्यार की गरमाहट अपने रोमरोम में महसूस करना चाहूंगी. एकदूसरे के दिल की बात कहनेसुनने का सिलसिला अब हम कभी टूटने नहीं देंगे.’’

‘‘हमारी खुशियों व मोहित के इज्ज्वल भविष्य की खातिर मैं तुम्हारे साथ पूरा सहयोग करूंगा.’’

‘‘जिंदगी के सफर में आने वाली चुनौतियां तभी समस्याएं बनती हैं जब हम उन का बोझ अतीत व भविष्य की चिंताएं बना कर मन में ढोने लगते हैं. ऐसी मूर्खता करने से हम बचेंगे.’’

‘‘बिल्कुल. आओ इस समझैते पर मैं प्यार की मुहर लगा दूं,’’ राकेश ने गरदन  झका कर शिवानी के होंठों पर प्यार भरा चुंबन अंकित किया, तो वह नई दुलहन की तरह से शर्मा उठी.

ट्रेड वाइफ साजिश या मजबूरी

आजकल ट्रेड वाइफ बनने का चलन सुर्खियों में है. ट्रेड वाइफ यानी वह ट्रैडिशनल या पारंपरिक बीवी जिसे घर की जिम्मेदारी संभालना पसंद हो. यह चलन पश्चिमी देशों से शुरू हुआ है. जिस तरह 50 के दशक की महिलाएं घर में रह कर अपनी किचन के काम करने, बच्चों को संभालना और पति को खुश रखने में अपनी खुशी समझती थी वही दौर अब फिर से दोहराया जाने लगा है.

लेकिन यदि कोई महिला अपना कैरियर भी साथ में संभालना चाहती है, मगर दोहरी जिंदगी का तनाव सहतेसहते थक जाती है तो मजबूरन उसे अपने कैरियर के साथ सम?ाता करना पड़ता है जो कतई सही नहीं है क्योंकि 21वीं सदी के इस दौर में आज भी जब हम बात करते हैं महिलाओं के कामकाजी या गृहिणी होने के बारे में तो अधिकतर पुरुषों का रु?ान गृहिणी होने पर अधिक होता है और यदि कामकाजी होना भी बेहतर माना जाता है तो उस के लिए अच्छी गृहिणी होने का गुण सर्वप्रथम माना जाता है.

तभी गृहिणी एक बेहतर स्त्री होने का सम्मान मिलता है वरना समाज की नजरों में यह सम्मान पाने का उस का सपना सपना ही रह जाता है. कई बार महिलाएं ऐसी सोच के चलते अपना अच्छाखासा कैरियर छोड़ कर घर में रहना ही पसंद करती हैं क्योंकि वे दोहरी जिंदगी जीतेजीते ऊब जाती हैं. कठपुतली नहीं है औरत

एक पढ़ीलिखी महिला होने के बावजूद अधिकतर महिलाओं को अपने पति या ससुराल वालों के हाथों की कठपुतली बनते आसानी से देखा जा सकता है क्योंकि शादी के बाद उन्हें कई चीजों के साथ सम?ाता करना पड़ता है और शादी के बाद उन का ध्यान खुद से हट कर अपनी गृहस्थी को संवारने में लग जाता है.

शादी से पहले जैसे खिलखिलाती चिरैया की तरह चहकते रहना उन्हें पसंद हुआ करता था वहीं अब वह हसीं सिर्फ मुसकराहट में बदल जाती है.

शादी के बाद कहीं भी आनेजाने से पहले सासससुर और पति की इजाजद लेना उन की मजबूरी बन जाती है. छोटी से छोटी बात में भी उन की मरजी जाननी पड़ती है. कोई भी निर्णय लेने के लिए वे उन सभी पर डिपैंड होने लगती हैं.

एक महिला अपना जैसे वजूद ही भूलने लगती है. यदि कोई महिला कामकाजी हो तो उस से उम्मीद की जाती है कि वह अपने काम के साथसाथ एक सफल गृहिणी का भी पूरा फर्ज अदा करे. यदि ऐसा करने में वह असफल हो जाए या वह पूरा समय अपने परिवार को न दे पाए तो उसे कई बार मानसिक तनाव से भी गुजरना पड़ता है.

दांव पर कैरियर

शादी के बाद लड़की की प्राथमिकता उस के पति, सास, ससुर और बच्चों की खुशी बनने लगती है. वह उन की पसंद का खयाल रखती है. वह खुद से पहले परिवार की चिंता करती है. यहां तक कि औफिस और घर के कामकाज में सारा दिन खटने के बाद भी वह कई बार घर वालों की आलोचनाओं का सामना करतेकरते थक जाती है और अंत में अपने कैरियर के साथ समझता कर परिवार की खुशी को अपनी खुशी मानने लगती है और खुद को ट्रेड वाइफ के टैग से नवाजने लगती है.

असल में यह एक महिला की खुद की पसंद है कि उसे घर के कामों मे व्यस्त रह कर खुश रहना है या वह अपने कैरियर को संवारते हुए अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करती है. मगर कई बार ट्रेड वाइफ बनना उस की मजबूरी बन जाती

है और मजबूरी अपने ग्रहस्थ जीवन को बेहतर बनाने की.

इसीलिए वह भी एक जिम्मेदारी निभा कर सुकून में रहना पसंद करने लगती है. उसे इस बात का कोई पछतावा भी नहीं होता क्योंकि वह इसी में खुश होती है. पहले जहां कैरियर को ले कर उत्सुकता बनी रहती थी वहीं अब उसे किट्टी पार्टियों या भजनकीर्तनों को समय देना रास आने लगता है.

अधिकतर घरों में आज भी शादी के बाद लड़कियों का यही हाल है. आज भी हमारे समाज में लड़कियों के लिए शादी समझौते का दूसरा नाम है.

आपको आत्मनिर्भर बनाने वाला GlowRoad App, जानें इसके फीचर

एक ऐसा ऐप जो न केवल पूरे देश को आर्थिक रूप से सक्षम बना रहा है, बल्कि काफी महिलाओं के लिए सुनहरा अवसर लेकर भी आया है. जाने इस ऐप ग्लोरोड ऐप  के बारे में:

भारत में आज महिलाएं हर क्षेत्र में जितना आगे बढ़ रही हैं और खासकर व्यवसाय (बिजनेस) में, उससे यह अंदाजा लगाना आसान है कि इस देश में महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर हो गई है. आज चाहे घर संभालना हो या फिर नौकरी करना, वे हर जगह अपनी काबिलीयत साबित कर रही हैं. गृहिणी होने के साथ ही काफी महिलाएं अपना खुद का व्यवसाय भी कर रही हैं, लेकिन अभी भी ऐसी काफी महिलाएं हैं जो कई कारणों की वजह से अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पाती हैं. ऐसी हर महिला के लिए आज एक ऐसा ऐप मौजूद है जिससे घर बैठ कर पैसे कमाना मुमकिन है, जिसका नाम है ग्लोरोड.

देश की काफी महिलाओं ने ग्लोरोड ऐप का उपयोग करके अपने सपनों को साकार किया है. जैसे छत्तीसगढ़ से नेहा तिवारी, जोकि एक सुशिक्षित महिला हैं और शादी के बाद अपना व्यवसाय करना चाहती थीं. वे कहती हैं, ‘‘बचपन से मेरा सपना था कि मेरा अपना व्यवसाय हो, लेकिन पैसे के अभाव के कारण मेरा यह सपना पूरा नहीं हो पाया. जब मैंने सोशल मीडिया में रीसेलिंग के बारे में पढ़ा तो मुझे लगा कि यह ऐसा माध्यम बन सकता है जो मेरे बचपन के सपने को पूरा कर सकता है।

जब मैंने अपने इस सपने के बारे में अपने पति से बात की तो उन्होंने मुझे चैलेंज दिया कि अगर मैं 6 महीने में 50 हजार तक कमा लूंगी तब मेरे पति मानेंगे कि रीसेलिंग एक अच्छा प्लेटफार्म है. मैंने 6 महीने से भी कम वक्त में 50 हजार तक कमा कर बता दिया। इस ऐप के द्वारा आज मैं अपना व्यवसाय खोल पाई हूं.

ग्लोरोड से जो मुझे आर्थिक मदद मिलती है, उससे मैं घर की किश्त  चुकाने में भी अपने पति की मदद करती हूं. मेरा मानना है कि जबसे ग्लोरोड का अमेजन से टाई-अप हुआ है तबसे इसमें और भी ग्लो आ गया है. साथ ही साथ समय-समय पर यहां प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं- जैसे कुछ वक्त पहले जो लीडरबोर्ड हुआ था उसमें मैंने 2,100 का प्राइज मनी जीता था. यहां ऐसे और भी कॉन्टेस्ट होते रहते हैं जिनकी वजह से रीसेलर यहां से प्राइस जीतते हैं और पैसे भी कमाते हैं. मैंने देखा था कि यहां रीसेलिंग करके एक रीसेलर ने अपनी कार खरीदी. अब मेरा अगला गोल यही है कि मैं भी अपने पैसे से एक कार खरीदूं. मैं पूरे यकीन से कह सकती हूं कि मेरे जैसी हर रीसेलर आपको यही कहेगी कि ग्लोरोड से अपना व्यवसाय शुरू करना उनका सबसे सही फैसला रहा है’’

ग्लोरोड में व्यवसाय करना काफी आसान है. यहां केवल आपको ऐप में जाकर प्रोडक्ट चुन के अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और जो भी आपके ग्राहक हो सकते हैं, उनको सोशल मीडिया ऐप जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम या टेलीग्राम पर प्रोडक्ट शेयर करना होता है. जब वे प्रोडक्ट को चुनकर आपको बता देते हैं कि उन्हें यही प्रोडक्ट चाहिए, तो उस प्रोडक्ट में अपना प्रौफिट अमाउंट जोड़कर ग्राहक के नाम से ग्लोरोड में ऑर्डर करना होता है. जब वह ग्राहक तक पहुंच जाता है तो जोड़ा हुआ प्रॉफिट अमाउंट आपके बैंक खाते (बैंक अकाउंट) में जमा कर दिया जाता है. इस ऐप की सबसे अच्छी बात यह है कि आप किसी भी जगह से प्रोडक्ट देश के किसी भी कोने में भेज सकते हैं. बनारस की साड़ी हो या लखनऊ का चिकनकारी कुर्ता, आपको सारे प्रोडक्ट कम दाम और अच्छी क्वालिटी में यहां मिल जाएंगे. घर बैठे आप पूरे भारत में अपना बिसनेस चला सकते हैं और ग्राहक बना सकते हैं.

 

फरीदाबाद की लीना जोकि अध्यापिका हैं और ग्लोरोड ऐप का पिछले 3-4 साल से इस्तेमाल कर रही हैं, उनका कहना है, ‘‘इस ऐप ने न केवल मुझे आर्थिक तौर पर सक्षम बनाया है बल्कि मेरे सोशल सर्कल को भी काफी बढ़ाया है. नए-नए लोग इस ऐप के द्वारा मुझे जुड़े हैं. मैंने और भी बिजनेस ऐप डाउनलोड करके देखे लेकिन ग्लोरोड जैसा ऐप मुझे नहीं मिला. यहां की रिटर्न पॉलिसी, टाइम से पहले डिलीवरी और कस्टमर केयर की सपोर्ट मुझे काफी अच्छी लगती है.’’

ॉ2017 में स्थापित ग्लोरोड 2,000 शहरों में 60 लाख से अधिक रीसेलर्स को जोड़ रहा है. बिना पैसे लगाए, हर दिन घर बैठकर, सुरक्षित रूप से पैसे कमाना शायद पहले सिर्फ एक हवा में की जाने वाली बात थी लेकिन आज एक सचाई के तौर पर हमारे सामने है. ग्लोरोड अपने नाम की तरह इस देश की महिलाओं के लिए एक ऐसा रास्ता लेकर आया है जिससे उनका जीवन उज्ज्वल और सफल बन रहा है। यह कहना अब गलत नहीं होगा कि हमारे देश में एक ऐसा ऐप है जो सही रूप से हर किसी की आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकता है और वह है ग्लोरोड.

जिस के साथ बौंडिंग उसी के साथ शौपिंग

कावेरी अपनी शादी पक्की होने के बाद से ही बहुत एक्साइटेड थी. इस दिन के लिए उस ने बहुत सारे सपने देखे थे. वह चाहती थी कि यह उस की जिंदगी का ऐसा दिन हो जो जिंदगी भर के लिए एक यादगार बन जाए.

कावेरी सब भाई बहनों में सब से छोटी और सब से लाडली है. उस के मातापिता ही नहीं बल्कि परिवार का हर सदस्य उस की शादी में खुल कर पैसे खर्च करने वाला था. आर्थिक रूप से उस का परिवार काफी संपन्न है. लिहाजा कावेरी की शादी की शौपिंग लिस्ट भी काफी लंबीचौड़ी बनी थी.

अपनी सहेलियों की और बड़ी बहनों की शादियों में कावेरी ने जैसे लकदख कपड़े, जेवर, मेकअप, सजावट, संगीत और रौनकें देखी थीं, अपनी शादी में वह उन सब से अच्छा, कुछ हट कर, कुछ यूनीक चाहती थी. शादी के लहंगे से ले कर मेंहदी और मेकअप आर्टिस्ट तक सैकड़ों चीजें उसे तय करनी थीं, लेकिन वह चाहती थी कि अपनी सारी शौपिंग किसी ऐसे के साथ करे, जिस से उस का मिजाज और चौइस मिलती हो.

जो उस के नजरिए को समझता हो, जो ट्रेडिशनल के साथसाथ लेटैस्ट फैशन की समझ रखता हो क्योंकि साडि़यों, लहंगों और कुछ भारी काम के सलवारसूट के अलावा कावेरी को वैस्टर्न स्टाइल और लेटैस्ट डिजाइन के आउटफिट्स भी लेने थे, जिन्हें वह हनीमून पर और फ्रैंड्स बगैरा के घर पर पार्टी आदि में पहन सके. अब हर जगह तो भारी सूट या साड़ी वह नहीं पहन सकती है.

शौपिंग में साथ की जरूरत

इस के साथ ही अपने कपड़ों से मिलतेजुलते सैंडल्स व बैग भी उसे लेने थे. फिर लेटैस्ट डिजाइन के अंडरगारमैंट्स, नाइटी, चूडि़यां, कौस्मैटिक्स की तो काफी लंबी लिस्ट थी. कावेरी इन तमाम चीजों की शौपिंग अपनी मां अथवा चाची या मामी के साथ नहीं बल्कि किसी हमउम्र के साथ करना चाहती थी.

कावेरी ने शौपिंग के लिए जो लिस्ट बनाई उस में आइटम्स के हिसाब से उस ने तीन कैटेगरी बनाई. शादी के लहंगे, कपड़े, लौंजरी, नाइटी, फुटवियर, बैग, कौस्मैटिक्स जैसी चीजों की खरीदारी के लिए उस ने अपनी बचपन की सहेली रत्ना को फोन किया.

दरअसल, कावेरी की आदत है कि वह एक चीज के लिए कई दुकानें देखती है. किसी एक जगह उसे चीज पसंद नहीं आती है. रत्ना और कावेरी स्कूल टाइम में खूब घूमती थीं. 1-1 चीज के लिए कईकई दुकानें देखती थीं. दुकानदार से खूब मोलभाव करती थीं. दोनों को एकदूसरे का साथ पसंद था. दोनों के बीच बढि़या ट्यूनिंग थी. दिनभर हाथ में हाथ डाले घूमतीं और थकान का नामोनिशान नहीं. कावेरी को उस वक्त किसी ऐसे का साथ चाहिए था जो दिनभर उस के साथ मार्केट में घूम सके.

ताकि कोई पछतावा न हो

शादी की शौपिंग करते वक्त ज्यादातर लड़कियां जो गलती करती हैं वह है शादी के बाद के लिए सारे हेवी आउटफिट्स खरीदने की. कावेरी की बहनों और कुछ सहेलियों ने अपनी शादी के वक्त काफी हैवी साडि़यां और सूट खरीदे मगर शादी के 1 महीने के बाद ही उन तमाम हैवी सूट्स और साडि़यों का कोई इस्तेमाल नहीं रहा.

वे आउट औफ फैशन हो गए. इसलिए अपनी शादी में कावेरी बहुत सारे हैवी आउटफिट्स खरीदने की जगह कुछ अलगअलग पैटर्न और डिजाइन के हैवी दुपट्टे और हैवी ब्लाउज भी लेना चाहती थी जो बाद में प्लेन सूट्स और साडि़यों के साथ मैच किए जा सकें, जिन्हें अलगअलग चीजों के साथ अलगअलग तरीकों से स्टाइल किया जा सके.

मगर कावेरी का यह पौइंट औफ व्यू उस की मम्मी या उन की उम्र की औरतें नहीं समझ सकेंगी, यह उसे पता था. इस के लिए उसे अपनी सहेली रत्ना पर भरोसा था.

शादी में दुलहन को पहनाए जाने वाले जेवर और दूल्हे को दी जाने वाली चेन, अंगूठी जैसी चीजें सब से ऐक्सपैंसिव आइटम्स होती है. इन्हें सहेली के साथ नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों के साथ ही खरीदा जाता है. कावेरी का परिवार सोने और हीरे के जेवर के लिए सिर्फ लाला जुगल किशोर ज्वैलर्स पर ही भरोसा करता है. शादी में क्व15-20 लाख के गहनों की खरीदारी होनी थी तो उस के लिए कावेरी को अपने मातापिता और बड़ी बहन के साथ जाना ठीक लगा. उन्हें गहनों की परख थी.

कावेरी से बड़ी दोनों बहनों और दोनों भाभियों के गहनों की खरीदारी उस के मातापिता ने ही की थी. उन की पसंद सभी को पसंद आई थी. सभी गहने नई डिजाइनों से बहुत आकर्षक थे.

भारतीय शादियों में दुलहन के घर वालों की पूरी कोशिश रहती है कि वे अपनी बेटी को अच्छी से अच्छी और हैवी से हैवी ज्वैलरी शादी में दें, जिस से उस की ससुराल में उस की तारीफ हो और समाज में उन के परिवार का स्टेटस बना रहे. मगर स्टेटस मैंटेन करने के चक्कर में अकसर प्रैक्टिकल होना भूल जाते हैं.

स्टेटस का चक्कर

कावेरी जानती थी कि शादी की हैवी ज्वैलरी को शादी के बाद दोबारा पहनने के बहुत ही कम मौके मिलते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए वह 1-2 हैवी सैट के साथ 4-5 हलके सैट या अलगअलग पीसेज लेना चाहती थी जिन्हें वह अलगअलग आउटफिट्स के साथ और कई तरीकों से स्टाइल कर सके. उस ने अपनी मां से कहा कि वे उस के लिए सिर्फ गोल्ड या डायमंड ज्वैलरी में इन्वैस्ट न करें बल्कि सिलवर और जंक ज्वैलरी भी लें.

हालांकि यह बात उस की मां को कुछ जमी नहीं, मगर बेटी की पसंद को देखते हुए उन्होंने कुछ हलके सैट के लिए हामी भर दी. कावेरी खुश थी कि उस की पसंद के अनुरूप ज्वैलरी की खरीदारी हो गई.

तीसरी कैटेगरी लकड़ी का फर्नीचर जैसे पलंग, गद्दे, चादरें, सोफा सैट, अलमारी, ड्रैसिंग टेबल और कावेरी की अपनी चीजें रख कर ले जाने के लिए सूटकेस और लगेज बैग की थी. इस के अलावा दूल्हे के कपड़े और दूल्हे के परिवार को दिए जाने वाले गिफ्ट भी खरीदे जाने थे.

ये सब भी कावेरी की पसंद से लिए जाने थे जिस के लिए उसे अपने दोनों बड़े भाइयों के साथ जाना ठीक लगा. उन्हें इस सामान की दुकानों की भी जानकारी थी और रेट्स की भी.

एक त्योहार की तरह

लड़कों के मुकाबले लड़कियों की शादी की शौपिंग एक बहुत ही हैक्टिक और स्ट्रैसफुल काम है.शादी की शौपिंग बहुत सोचसमझकर और सही प्लानिंग के साथ हो तो सारा पैसा वसूल हो जाता है वरना शादी के हफ्ते 2 हफ्ते बाद ही खरीदी गई चीजें बेकार महसूस होने लगती हैं और लगता है सारा पैसा व्यर्थ चला गया. इसलिए शादी के बाद के लिए एवरग्रीन और वर्सटाइल दिखने के साथसाथ कंफर्ट जैसी चीजों का विशेष ध्यान रखते हुए ही खरीदारी की जानी चाहिए.

नौकरीपेशा लड़कियां शादी के बाद हर वक्त क्रिसमस ट्री की तरह सजीधजी या जगमगाती नहीं दिखना चाहती हैं खासतौर से औफिस में. वे तो चंद रोज बाद ही हैवी गहने और भारी काम वाली साडि़यां पहनना छोड़ देती हैं. ये महंगी चीजें फिर हमेशा के लिए उन की अलमारी में ही बंद हो कर रह जाती हैं.

आज लड़कियां सोचती हैं कि शादी की खरीदारी ऐसी हो कि हैवी आउटफिट्स और चमचमाते गहनों के बिना भी न्यूली मैरिड लुक पाया जा सके. मगर घर के बुजुर्ग इन बातों को समझ नहीं पाते हैं इसलिए ‘गृहशोभा’ की राय तो यही है कि शादी की शौपिंग उस के साथ करें जिस के साथ आप की बढि़या ट्यूनिंग हो, जो आप की पसंद और आप की जरूरत को अच्छी तरह समझता हो. वह आप की सहेली भी हो सकती है और आप की बहन भी.               –

सोने के वरक के पीछे छिपा भेड़िया

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