जानें क्या हैं चिकन खाने के 5 फायदे

दुनिया भर में नॉन वेज खाने वाले लोगों के लिए चिकन एक प्रमुख भोजन है. चाहे आप चिकन ब्रेस्ट, चिकन सलाद, चिकन सूप, प्रोटीन पाउडर या लीन मीट में से कुछ भी खाना पसंद करते हों, यह सारे ही स्वादिष्ट व पोषण युक्त होते हैं. यह प्रोटीन, विटामिन्स व अन्य आवश्यक तत्त्वों का मुख्य स्रोत होता है. चलिए चिकन खाने के कुछ स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानते हैं.

1. प्रोटीन से भरपूर :

चिकन मीट लीन प्रोटीन का अच्छा स्रोत होता है. मीट में ढेर सारे लाभदायक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं. 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट में लगभग 31 ग्राम प्रोटीन होता है जो आप के लिए एक दिन में जितना प्रोटीन पर्याप्त होता है उससे दोगुना है. यह हमें एक रिलैक्सिंग फीलिंग भी उपलब्ध कराता है. इसमें मौजूद अमीनो एसिड आप के घाव भरने में भी मदद करते हैं. थरियोनाइन आप के कार्डियो वैस्कुलर सिस्टम को ठीक ढंग से काम करने में मदद करता है. हमारा इम्यून सिस्टम भी मजबूत बनता है.

2. कोलेस्ट्रॉल, कैलोरीज़ और फैट में कम :

100 ग्राम चिकन में केवल 165 कैलोरीज़ पाई जाती है. इसलिए यह उन लोगों के लिए एक दम परफेक्ट डायट है जो अपना वजन कम करना चाहते हैं. यह संतुलित आहार के लिए भी एक बहुत बेहतर ऑप्शन्स है. ओवन में रोस्ट की गई चिकन ब्रेस्ट में केवल 100 मिलीग्राम ही सोडियम व कोलेस्ट्रॉल होता है और एक ग्राम सैचुरेटेड फैट होता है.

3. मानसिक स्वास्थ्य के लिए बढ़िया :

चिकन खाने दे हमें मानसिक रूप से भी बहुत से लाभ मिलते हैं. यह विटामिन बी 5 व ट्राइप्टोफान का एक बहुत अच्छा स्रोत है जो स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है. यह मैग्नेशियम से भी भरपूर होता है जो आप की डायट में शामिल होने से आप के स्ट्रेस लेवल को कम करता है. एक अध्ययन में पता चला है कि जो लोग मीट नहीं खाते हैं उन्हें अधिक डिप्रेशन व चिंता आदि होती है. शाकाहारी लोग स्ट्रेस आदि की दवाइयां ज्यादा लेते हैं.

4. इम्यून सिस्टम के लिए बेहतर :

चिकन में विटामिन बी6 होता है जो आप के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है. इससे आप के शरीर में नई रेड व व्हाइट ब्लड सेल्स बनती है जो आप को रोगों से बचाने में सक्षम होती हैं. यह दोनो आप को सर्दी होने से भी बचाती हैं. यह आप की आंतो में डिफेंसिव पॉवर को बढ़ा देता है जिससे आप कम बीमार पड़ते हैं और इस प्रकार आप की इम्यूनिटी भी तेज होती है.

5. पचाने में आसान :

चिकन एक बहुत आसानी से पच जाने वाला भोजन होता है. अतः यदि आप को पाचन से सम्बन्धित कोई समस्या है तो उसके लिए आप को चिकन अपनी डाइट में अवश्य शामिल करना चाहिए. इसके स्वास्थ्य लाभों के साथ साथ यह आसानी से मिल भी जाता है. यह किसी भी ग्रोसरी स्टोर पर बहुत आसानी से मिल जाता है. इसको बनाना भी बहुत आसान होता है. आप इसे बहुत सारे तरीकों से खा सकते हैं जैसे आप चिकन सलाद खा सकते हैं या इसे फ्राई करके खा सकते हैं.

आदित्य वशिष्ठ, वेटफेज फरमैक्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के रीजनल सेल्स हैड से बात चीत पर आधारित.

Eid Special: बनाएं स्वाद से भरपूर मटन पाया

क्‍या आप मटन बिरयानी और मटन ग्रवी खा कर बोर हो चुकी हैं? अगर हां, तो अब कुछ नया ट्राई कीजिये जो आपके खाने में जायका भर दे. अगर आपको या फिर आपके परिवार में किसी को भी मटन भाता है तो आप उन्‍हें मटन पाया बना कर खिलाना ना भूलें.

मटन पाया बनाने में थोड़ा समय जरुर लगता है लेकिन अगर आप इसे एक बार खाएंगी तो आप इसका स्‍वाद कभी नहीं भूल पाएंगी. तरह-तरह के मसालों के साथ भुना हुआ मटन पाया, खाने में काफी जाकेदार लगता है. आइये जानते हैं टेस्‍टी मटन पाया बनाने की विधि.

सामग्री

  • 1/2 किलो मटन (लेग पीस/ पाया)
  • 1 बड़ा प्याज
  • 150 ग्राम छोटा प्याज
  • 3 टमाटर
  • 2 छोटे चम्मच अदरक लहसुन पेस्ट
  • 1/2 कप कद्दूकस नारयल
  • 3 हरी मिर्च बीच से स्लाइस कटी हुई
  • डेढ़ चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 चम्मच धनिया पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच गरम मसाल
  • 2 छोटे चम्मच सौंफ के दाने
  • 2 छोटे चम्मच पोस्ता दाना
  • मुट्ठीभर हरी धनिया पत्ती
  • नमक स्वाद अनुसार

विधि

मटन को अच्छे से धो लें और उसे 15 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें. फिर एक कुकर में मटन, कटा हुआ बड़ा प्याज, 1 कटा हुआ टमाटर, अदरक लहसुन पेस्ट, हल्दी, 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च, 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर, नमक और 2 कप पानी डाल दें.

कुकर का ढक्कन लगाकर मीडियम आंच में 10-15 सीटी लगाकर पका लें. जब तक मटन पक रहा है मिक्स जार में 1 छोटी चम्मच सौंफ, पोस्ता दाना और नारियल डालकर बारीक पेस्ट बना लें.

अब धीमी आंच में एक बर्तन डालकर गर्म होने के लिए रखें. जब तेल गर्म हो जाए तो इसमें 1 छोटा चम्मच सौंफ डाल लें. इसके बाद इसमें छोटे कटे हुए प्याज और हरी मिर्च मिलाकर इसे 2-3 मिनट तक चलाते हुए भूनें.

अब इसमें बचे हुए टमाटर को मिला दें और लगभग 5 मिनट तक चलाते रहें जिससे इसमें रोगन आ जाए. तय समय के बाद इसमें 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर और 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर डालकर अच्छे से भून लें.

अब इसमें नारियल का पेस्ट डालकर मसाले के साथ मिला लें. इसे उबलने के लिए छोड़ दें. अब बर्तन में मटन को तरी के साथ डाल दें. स्वादानुसार नमक मिला लें. ध्यान रखें इसमें पानी मिलाने की जरूरत नहीं है.

सभी मसाले मिलाने के बाद इसे 10 मिनट तक धीमी आंच पर उबलने के लिए छोड़ दें. तय समय पर मटन पाया आंच से उतारकर गर्मा गरम सर्व करें.

Summer Special: गरमी में बनिए खूबसूरत स्किन की मल्लिका

गरमी के मौसम में चेहरे पर पसीना, त्वचा का बेजान हो जाना, स्किन का टैन होना, हीट रैशेस आदि कई समस्याएं दिखाई पड़ती हैं. ऐसे में नियमित स्किन की देखभाल बहुत जरूरी है. कई बार सुबह शीशे के सामने खड़ी हो कर आप को लगता है कि आप ने अपनी त्वचा पर अधिक ध्यान नहीं दिया है और इस कारण चेहरे पर मुंहासे, ब्लैकहैड, टैनिंग आदि दिख रहे हैं.

आईटीसी चार्मिस की स्किन एक्सपर्ट  डा. अपर्णा संथानम कहती हैं, ‘‘त्वचा हमारे शरीर का सब से बड़ा और्गन है जिसे पूरे साल गरमी, मौनसून और ठंडे मौसम को सहना पड़ता है. ऐसे में स्किन की सही देखभाल, संतुलित भोजन, वर्कआउट आदि करने की जरूरत है. यह काम मुश्किल नहीं. इस के लिए पहले सही प्लानिंग करनी पड़ती है जिस में त्वचा के अनुसार ब्रैंडेड उत्पाद का चुनना, उस का स्किन पर असर को देखना और बजट का ध्यान रखना जरूरी होता है. कुछ सु झाव आप अपना सकते हैं :

रहें व्यवस्थित

त्वचा की जो भी समस्याएं है, उन की सूची बना लें. मसलन, पिग्मैंटेशन, डार्क स्पौट, एक्ने, स्किन टाइप आदि. इस के बाद अपनी स्किन को सम झना पड़ता है ताकि उस के हिसाब से प्रोडक्ट का प्रयोग किया जा सके. विटामिन सी युक्त प्रोडक्ट को चुनना अधिक सुरक्षित रहता है. ये प्रोडक्ट दागधब्बे और रूखेपन को दूर कर त्वचा को ईवन टोन बना देते हैं. साथ ही, ये बेजान त्वचा को नई चमक देते हैं.

सम झें स्किन की जरूरतें

त्वचा के प्रकार जानने के बाद सही उत्पाद को आप आसानी से खरीद सकते हैं. यह एक आसान तरीका है जिसे आप घर बैठे कर सकते हैं. सुबह सो कर उठने के बाद आप की स्किन को टच करने के बाद कैसा महसूस होता है, इसे पहचानें. हलके हाइड्रेट वाले उत्पाद, जो नौन स्टिकी हों, उन्हें इस मौसम में चुन सकती हैं. इन में सीरम एक बेहतर विकल्प है. जिन्हें एक्ने की समस्या है उन्हें सैलिसिलिक एसिड से युक्त प्रोडक्ट चुनने चाहिए. सूखी त्वचा के लिए हाइड्रोलिक एसिड युक्त उत्पाद फायदेमंद होता है.

चुनें मल्टीपर्पज प्रोडक्ट

कुछ उत्पाद केवल एक ही उद्देश्य को पूरा करते हैं, जबकि स्किन संबंधी प्रोडक्ट औलराउंडर होने चाहिए. मसलन, मौइस्चराइजर की जगह सीरम खरीदें. सीरम औलराउंडर उत्पाद है जो स्किन को हाइड्रेट और जवां बनाने के साथसाथ कोमल भी बनाता है. सीरम में मौजूद छोटे मौलिक्यूल्स त्वचा की गहराई में समा जाते हैं जहां तक कोई फेशियल क्रीम या मौस्चराइजर पहुंच नहीं सकता.

रखें ध्यान बजट का

जब आप त्वचा के लिए कोई प्रोडक्ट खरीदने जाती हैं तो हमेशा अपने बजट का ध्यान रखें. कम कीमत में अच्छा प्रोडक्ट अपनी स्किन के अनुसार खरीदें. इस के लिए आप औनलाइन सर्च कर भी पता लगा सकती हैं. प्रीमियम और प्रभावी स्किन केयर क्रीम इस मौसम में खरीदना जरूरी होता है.

रखें सकारात्मक सोच

त्वचा को अच्छा पोषण तभी मिलता है जब आप तनावमुक्त और खुश रहें. स्किन की बाहरी सुंदरता अंदर से आती है. इसलिए सकारात्मक सोच हमेशा बनाए रखें और संतुलित भोजन, जिस में मौसमी फल और सब्जियां खास हों, लें. पानी या तरल पदार्थ का सेवन गरमी में अधिक से अधिक करना जरूरी होता है क्योंकि गरमी में पसीने की वजह से शरीर का पानी बाहर निकल जाता है जबकि एयरकंडीशनर में अधिक समय तक रहने से ठंडी हवा शरीर की नमी को जल्दी सोख लेती है जिस से शरीर में पानी की मात्रा कम होने लगती है और त्वचा पर  झुर्रियां जल्दी आने लगती हैं.

घरेलू उपाय 

गरमी में स्किन केयर बाकी मौसम से काफी ज्यादा करना पड़ता है. इसलिए कुछ घरेलू उपाय निम्न हैं-

– ऐसा देखा गया है कि गरमी में जो फल या सब्जी आप खाते हैं उस का पैक हमारे चेहरे के लिए सब से अच्छा होता है. मसलन, पके पपीते का पैक, जिस में आधा कप पपीते के गूदे को मसल कर एक छोटा चम्मच नीबू का रस, एक छोटा चम्मच शहद और एक छोटा चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर मिला लें और उसे चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगा कर रखें, बाद में गुनगुने पानी से धो लें.

– टमाटर का पैक लगाना भी गरमी में काफी अच्छा होता है. टमाटर में फौलिक एसिड और विटामिन सी होने की वजह से त्वचा में निखार के अलावा एक्ने, दागधब्बे,  झुर्रियां आदि भी कम हो जाती है. इस पैक के लिए टमाटर के 2 टेबल स्पून गूदे, 2 टी स्पून दही और 2 छोटे चम्मच नीबू का रस मिला कर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर 20 मिनट तक लगाए रखें और बाद में धो लें. चेहरे की रंगत खिल उठेगी.

Summer Special: जलवायु परिवर्तन का दिल पर क्या है प्रभाव, जानें

ट्रेन की एसी कोच में बैठा 35 साल का राघव जब अपनी माँ से घर आने की ख़ुशी जाहिर कर रहा था, तभी उसे कार्डिएक अरेस्ट आता है और उसका फ़ोन हाथ से गिर जाता है, माँ हेलो-हेलो करती रहती है, लेकिन उसकी आवाज नहीं आती, पास का एक व्यक्ति उसके फ़ोन को उठाकर कहता है कि उसने देखा नहीं है कि कैसे क्या हुआ है, लेकिन उनके बेटे की तबियत अचानक ख़राब हुई है और वह देख रहा है कि उन्हें हुआ क्या है.उसने फ़ोन पर चिंता न करने की बात कही और फ़ोन रख दिया. उस व्यक्ति ने राघव को बेहोश देखा और चलती ट्रेन से इमेरजेंसी नंबर पर फ़ोन लगाया और अगले स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही एम्बुलेंस और डॉक्टर आये, लेकिन डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर अस्पताल भेज दिया. उस अनजान व्यक्ति ने उसके पेरेंट्स को ये दुखद समाचार दिया.

ये सही है कि आज बड़ी संख्या में युवा हार्ट अटैक के शिकार हो रहे है, विशेषज्ञों का कहना है कि पहले 60 वर्ष की उम्र के बाद लोग दिल की बीमारी के शिकार हुआ करते थे, लेकिन अब युवाओं में इसकी संख्या लगातार बढती जा रही है. कुछ स्ट्रेस और कुछ क्लाइमेट चेंज का शिकार हो रहे है. क्लाइमेट चेंज का प्रभाव केवल पर्यावरण पर ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर पर भी काफी पड़ा है, यही वजह है कि आज जो व्यक्ति चलफिरकर काम कर रहा है, कल अचानक उसके न रहने की सन्देश मिल जाती है, ये दुखद है.

रिपोर्ट को समझे

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें दिल की बीमारियों से होती हैं और जलवायु परिवर्तन से अधिक सर्दी और अधिक गर्मी पड़ने पर इसका सीधा असर इंसान के दिल पर पड़ता है. आंकड़ों पर गौर करें, तो स्ट्रोक, दिल, कैंसर और सांस की बीमारियों से दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों की हिस्सेदारी दो तिहाई है.

अधिक गर्मी को सहने की होती है क्षमता

इस बारें में नवी मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के कंसलटेंट कार्डियोलॉजी, डॉ महेश घोगरे कहते है कि हमारे शरीर में अपने तापमान को नियंत्रित करने की प्राकृतिक क्षमता होती है. इस प्रक्रिया को थर्मोरेग्यूलेशन कहा जाता है, जिसे हाइपोथैलेमस द्वारा नियंत्रित किया जाता है, मस्तिष्क का एक हिस्सा आंतरिक शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए थर्मोस्टेट के रूप में लगातार कार्य करता है. व्यायाम या गर्मी आदि के कारण जब शरीर का तापमान बढ़ जाता है, तब हाइपोथैलेमस, पसीना और वासोडिलेशन या रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके गर्मी को बाहर निकालता है और शरीर को ठंडा करता है. ठंड के मौसम में जब शरीर का तापमान गिर जाता है, हाइपोथैलेमस शरीर में गर्मी को बचाने और शरीर को गर्म करने के लिए शिवरिंग को ट्रिगर करता है और रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है. यह स्वचालित प्रक्रिया शरीर के एक स्थिर कोर तापमान को बनाए रखने में मदद करती है और यह सुनिश्चित करती है कि शरीर के अंग और प्रणालियां ठीक से काम करें.

तापमान का पड़ता है असर

डॉक्टर आगे कहते है कि तापमान में अचानक बदलाव ह्रदय पर दबाव डाल सकता है. अत्यधिक तापमान में शरीर ठंडा या गर्म करने के लिए रक्त प्रवाह को त्वचा की ओर मोड़ा जाता है. इससे रक्त वाहिकाएं फैल या सिकुड़ जाती हैं, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर, गर्म मौसम में, शरीर को ठंडा करने के लिए त्वचा में रक्त पंप करने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय की गति और रक्तचाप बढ़ता है.

इसके अलावा अत्यधिक गर्मी में थकावट और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही हृदय पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ता है. इससे दिल के दौरे, ह्रदय की धड़कन अनियमित होना या एरिथमिया और हार्ट फेलियर की संभावना बढ़ सकती है. इसी तरह ठंड के मौसम में ह्रदय को शरीर में गर्मी बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है

क्या कहते हैं आंकड़े

अध्ययनों में पता चला है कि बढ़ते तापमान और कार्डियोवैस्कुलर वजहों से होने वाली मौतों की जोखिम के बीच एक लिंक है. अधिकतम कार्डियोवैस्क्युलर मौतें 35 डिग्री सेल्सियस से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच के तापमान में होती हैं.   हाल ही के एक अध्ययन में पाया गया है कि हर 100 कार्डिओवैस्क्युलर मौतों में से एक मौत के केस में इस्केमिक हृदय रोग, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, या एरिथमिया का कारण अत्यधिक गर्मी या ठंड हो सकता है.डॉक्टर महेश का कहना है कि का जिन्हें कोरोनरी धमनी की बीमारी, हाइपरटेंशन या हार्ट फेलियर आदि बीमारियां पहले से हैं, उनके लिए तापमान में अचानक बदलाव होना काफी ज़्यादा खतरनाक हो सकता है. इससे हार्ट अटैक ट्रिगर हो सकता है या हार्ट फेलियर के लक्षण बढ़ सकते हैं. अत्यधिक गर्मी में पसीना ज़्यादा आने से शरीर में से फ्लूइड कम हो सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन और लो ब्लड प्रेशर हो सकता है. यह हृदय के लिए हानिकारक हो सकता है. बहुत ज़्यादा ठंड में, शरीर शॉक में जा सकता है, जिससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, हृदय और अन्य अंगों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है. कुछ सुझाव निम्न है, जिनके द्वारा हार्ट का ख्याल कुछ हद तक रखा जा सकता है.

मरीज़ों के लिए कुछ सुझाव

  • तापमान में अचानक बदलाव हो रहे हो, तो हृदय रोगियों को विशेष रूप से सतर्क रहना आवश्यक है.
  • गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें. शराब और अधिक कैफीन से बचें क्योंकि इनसे डिहाइड्रेशन हो सकता है.
  • गर्मी में हल्के रंग के, ढीले-ढाले कपड़े पहनें और ठंड के मौसम में हाथ-पैरों को अच्छी तरह से ढकने वाले गर्म कपड़े पहनें.
  • अत्यधिक तापमान की स्थिति में घर के भीतर ही रहें. बाहर जाना पड़ें तो ऐसा समय चुनें, जब तापमान उपयुक्त हो.
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां जारी रखें, अत्यधिक तापमान में भीहृदय रोगियों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेते रहना चाहिए.

सुबह-सुबह दिल का दौरा – सही या गलत

ज़्यादातर हार्ट अटैक सुबह के समय आते हैं, इस गलतफहमी के पीछे का सच जान लेन भी आवश्यक है. यह सच है कि, कुछ अध्ययनों के अनुसार सुबह के समय हार्ट अटैक का खतरा ज़्यादा होता है, लेकिन यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुआ है. कुछ रिसर्चर्स का मानना है कि यह शरीर की प्राकृतिक सर्कैडियन लय (यानि शारीरिक, मानसिक और व्यवहार के प्राकृतिक चक्र में परिवर्तन होना, जिससे शरीर 24 घंटे के चक्र में गुजरता है. सर्कैडियन लय ज्यादातर प्रकाश और अंधेरे से प्रभावित होते हैं और मस्तिष्क के मध्य में एक छोटे से क्षेत्र द्वारा नियंत्रित होते हैं.)के कारण होता है, जो रक्त के क्लॉट होने के तरीके को प्रभावित करता है. दूसरे कुछ रिसर्चर मानते हैं कि सुबह में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन का बढ़ना इसकी वजह हो सकती है.

हृदय रोगियों को रिस्कफैक्टर के बारे में पता होना चाहिए और सावधानी बरतनी चाहिए,

  • सुबह भागदौड़ करने से बचें,
  • खुद को दिन के लिए तैयार होने के लिए पर्याप्त समय दें,
  • दवाइयां भी निर्धारित समय के अनुसार लें,
  • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम सहित अपनी जीवन शैली को स्वस्थ बनाए रखने का प्रयास करें.

किसी भी संभावित रिस्क से बचने के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें. डॉक्टर की सलाह के बिना, अपने मन से दवाइयां न लें, इसके गंभीर और कई बार जानलेवा परिणाम भी हो सकते हैं.

Summer Special: गरमी में इन 4 स्किन प्रौब्लम्स को कहें बाय-बाय

गरमी का मौसम आते ही हमारे मनपसंद अलग-अलग डिजाइन के कपड़े निकल आते हैं और उन्हें पहन कर बाहर निकलने की खुशी के तो क्या कहने. लेकिन इस मौसम में कई सारी स्किन प्रौब्लम्स से दोचार होना पड़ता है. ये स्किन प्रौब्लम्स रैशेज, घमोरियां, ऐक्ने और सनबर्न होती हैं. ये इतनी गंभीर नहीं होतीं कि डाक्टर के पास जाना पड़े, परंतु इतनी छोटी भी नहीं कि इन्हें नजरअंदाज किया जाए. इस तरह की प्रौब्लम्स से कैसे बचें, जानिए…

1 सनबर्न

beauty tips

गरमी में अकसर घर से बाहर कड़ी धूप में निकलने से सनबर्न की समस्या हो जाती है. सूरज की हानिकारक किरणें जब स्किन से डायरैक्ट कौन्टैक्ट में आती हैं तो उस पर असर पड़ता है. स्किन रूखी, बेजान होने के साथ उस पर छाले भी हो जाते हैं. कभी-कभी स्किन लाल हो जाती है व छिल भी जाती है.

इन चीजों का करें इस्तेमाल…

– सनबर्न होने पर अहम यह है कि संक्रमित स्किन को अधिक से अधिक ठंडक दें. ठंडे पानी से नहाएं, ठंडे पानी की पट्टियां स्किन पर लगाएं व स्किन पर बर्फ धीरे-धीरे रगड़ें. आलू सनबर्न को कम करने और दर्द खत्म करने का कार्य करता है. आलू को काट कर या घिस कर सनबर्न से प्रभावित स्किन पर लगाएं. इस से आराम मिलेगा.

– पुदीने की पत्तियों का रस निकाल कर धूप से झुलसी स्किन पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है. इस के अलावा एलोवेरा जेल भी स्किन को ठंडक प्रदान करता है. एलोवेरा जेल को स्किन पर डायरैक्ट लगाएं.

– उड़द दाल को दही में मिला कर जली हुई स्किन पर लगाने से भी राहत मिलती है.

– दिल्ली स्थित विनायक स्किन ऐंड कौस्मेटोलौजी क्लिनिक के स्किन विशेषज्ञ डा. विजय कुमार गर्ग ने बताया, ‘विटामिन ई एंटीऔक्सिडैंट होता है जो संक्रमण को कम करता है. विटामिन ई को सनबर्न के समय भोजन में शामिल करना चाहिए, इससे आप की स्किन जल्दी ठीक होगी. विटामिन इ पालक, सोयाबीन, बादाम व मूंगफली में होता है.

– टी ट्री तत्वों से मुक्त पदार्थो का सनबर्न से प्रभावित स्किन पर उपयोग करें. साबुन का इस्तेमाल न कर के टी ट्री तत्त्वों वाले फेसवाश का इस्तेमाल करें. साथ ही, सनस्क्रीन क्रीम या लोशन का जरूर इस्तेमाल करें.

– यदि जलन और दर्द अत्यधिक हो और स्किन अधिक झुलसी हुई हो तो स्किन रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं.’’

2 प्रिकली हीट

प्रिकली हीट जिसे हम घमोरियां कहते हैं, गरमी में होने वाली एक सामान्य परेशानी है. यह किसी को भी हो सकती है. ये शरीर पर खुजली, दर्द और चिलमिलाहट पैदा करती हैं. स्किन पर छोटेछोटे बंप उभर आते हैं. जब ये फूटते हैं तो इन में से पसीना निकलता है और स्किन पर प्रिकली सैंसेशन होती है.

इन चीजों का करें इस्तेमाल

– घमोरियां होने पर यह आवश्यक है कि आप ढीले कपड़े पहनें और हो सके तो कौटन के कपड़े पहनें क्योंकि वे पसीना सोख लेते हैं और घमोरियों से बचाव करते हैं. टाइट कपड़े न पहनें और शरीर पर पसीना न जमने दें.

– बेकिंग सोडा लें और उस मे ठंडा पानी मिला लें. अब इस में एक साफ कपड़ा डुबोएं और उसे प्रिकली हीट प्रभावित स्किन पर 10 मिनट तक रहने दें. इस से दर्द व खुजली से आराम मिलेगा.

– हर 5 घंटे के अंतराल में स्किन पर बर्फ लगाएं. बर्फ को एक कपड़े में रखें और प्रभावित हिस्से पर लगाएं. ऐसा करने से घमोरियां फैलेंगी नहीं और दर्द में राहत मिलेगी.

– ठंडे पेय पदार्थों, जैसे छाछ, नीबू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन करें.

– ये अंदरूनी रूप से आप के शरीर को ठंडा रखते हैं.

– मुलतानी मिट्टी को सर्दियों से प्रिकली हीट का तोड़ माना जाता है, कारण स्पष्ट है कि यह ठंडक पहुंचाती है. मुल्तानी मिट्टी या चंदन पाउडर में गुलाबजल मिला कर पेस्ट बनाइए और इसे प्रिकली हीट पर लगाइए. सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लीजिए.

– दिन में 2 बार ऐसा करने से आप को आराम भी मिलेगा.

– डा. विजय कहते हैं, ‘‘प्रिकली हीट के लिए हाइड्रोफेशियल ट्रीटमैंट किया जाता है. यह 3-4 स्टैप में होता है. सब से

– पहले स्किन टाइटनिंग, फिर टौक्सिन रिमूवल, उस के बाद औक्सिजनाइजेशन और आखिर में विटामिन सी इंफ्यूज किया जाता है.

– यदि आप को घमोरियों से बचना है तो नहाने के बाद 10-15 मिनट तक पंखे के नीचे जरूर बैठें. ऐसा करने से घमोरियां नहीं होंगी. आमतौर पर एसी में रहने वाले व्यक्ति को घमोरियां नहीं होती हैं.’’

3 ऐक्ने प्रौब्लम

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जब पसीना स्किन पर तैलीय ग्रंथियों से मिलता है तो ऐक्ने का रूप ले लेता है. तैलीय ग्रंथियों के अत्यधिक रिसाव से स्किन के रोमछिद्र खुल जाते हैं और ऐक्ने व ब्लैकहैड्स जैसी समस्याएं होने लगती हैं.

इन चीजों का करें इस्तेमाल

– ऐक्ने के लिए हलदी एक कारगर उपाय है. 2 चम्मच चंदन में थोड़ी सी हलदी और बादाम का तेल मिला कर चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट के बाद हलके हाथ से रगड़ कर हटाएं और ठंडे पानी से धो लें.

– ऐक्ने के लिए खीरे का फेसपैक भी उपयोगी रहता है. खीरा, ओटमील और एक चम्मच दही को मिला कर पेस्ट बना लें. अब इसे ऐक्ने पर लगाएं और सूखने पर ठंडे पानी से धो लें. यह फेसपैक स्किन को रिजुवनेट करता है और ऐक्ने को कम करता है.

– शहद भी ऐक्ने पर कारगर साबित होता है. शहद में नीबू का रस मिला कर चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद कुनकुने पानी से चेहरे को धो लें.

– आजकल ऐक्ने के लिए विभिन्न प्रकार की क्रीम व फेसवाश आते हैं जिन के इस्तेमाल के लिए खुद डाक्टर भी कहते हैं. ऐक्ने को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए लेजर ट्रीटमैंट भी किया जाता है. सैलिसिलिक एसिड भी ऐक्ने हटाने के लिए अच्छा उपाय है तो सैलिसिलिक एसिड से बने फेसवाश व क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं.

4 बौडी ओडोर प्रौब्लम

बौडी ओडोर गरमी में होने वाली एक साधारण समस्या है जो पसीने के कारण होती है. हमारे शरीर से 2 तरह का पसीना निकलता है. पहला, एक्राइन जो साफ और बिना दुर्गंध का होता है व शरीर के तापमान को बनाए रखता है और दूसरा, ऐपोक्राइन जो मोटा पदार्थ होता है व कमर और कांख में ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है. एपोक्राइन भी बिना दुर्गंध का ही होता है परंतु बैक्टीरिया के संपर्क में आने से इस में से दुर्गंध आने लगती है. यदि आप भी बौडी ओडोर अर्थात शरीर की बदबू से परेशान हैं तो ये कुछ उपाए हैं जिन्हें आप अपना सकते हैं.

इन चीजों का करें इस्तेमाल

– ताजे नीबू को 2 भागों में काट कर अंडरआर्म्स में रगडि़ए. ये शरीर की दुर्गंध को हटाता है और बैक्टीरिया भी मारता है.

– आपको ओडोर से बचने के लिए डियोड्रैंट का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि आप के पास डियोड्रैंट नहीं है तो एक कप पानी लें और उस में हाइड्रोजन पैरोक्साइड मिलाएं. इस पानी में एक साफ कपड़े को डुबो कर अंडरआर्म्स में रगडि़ए. यह शरीर के बौडी ओडोर को दूर कर देगा.

– बेकिंग सोडा में एक नीबू निचोडि़ए और पेस्ट बना कर शरीर के जिन हिस्सों में अत्यधिक पसीना आता है वहां लगाइए. इसे रगडि़ए नहीं. कुछ देर बाद ठंडे पानी से धो लीजिए. कुछ हफ्ते इस विधि को अपनाने से बौडी ओडोर खत्म हो जाएगा.

– अत्यधिक डाक्टर बौडी ओडोर से बचने के लिए एंटीपर्सपिरैंट इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. इस में ऐल्युमिनियम क्लोराइड होता है, जो शरीर द्वारा उत्पन्न पसीने को कम करता है. बोटोक्स ट्रीटमैंट के द्वारा भी पसीने को कम किया जाता है.

Eid Special: मेहमानों के लिए बनाएं शाही पुलाव

त्योहारों के मौसम में मेहमानों का आना जाना लगा रहता है. और ऐसे वक्त पर आपको किचन से फुरसत नहीं मिलती. मेहमानों को खुश करने के लिए आप कई तरह की पकवान बनाने में लगी रहती हैं और खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं. ऐसे मौके पर आप किसी ग्रेवी वाली सब्जी के साथ शाही पुलाव बनाएं. यह झटपट बन भी जाएगा और आपके मेहमान भी खुश हो जाएंगे. तो चलिए हम आपको शाही पुलाव बनाने की रेसिपी बताते हैं.

सामग्री

  • 2 कप चावल
  • ½ कप उबला हुआ हरा मटर
  • 1 चम्‍मच अदरक पेस्‍ट
  • 3-4 कटी हुई हरी मिर्च
  • ½ कप टुकड़ो में कटी पनीर
  • 1-2 तेज पत्‍ता
  • 2 चम्‍मच काजू
  • 2 चम्‍मच किशमिश
  • 1 चम्‍मच जीरा
  • 1-2 दालचीनी
  • 3 लहसुन
  • 5-6 इलायची
  • 2 चुटकी केसर
  • 6 चम्‍मच घी
  • 1 चम्‍मच कटी हरी धनिया
  • नमक स्वादानुसार

विधि

सूखे चावल को साफ पानी से धो लें, उसके बाद इसे बड़े बर्तन में पका कर इसका पानी निकाल कर एक किनारे ठंडा होने के लिये रख दें.

अब एक पैन लें, उसमें 1 चम्‍मच घी गरम कर के काजू और किशमिश को 1 मिनट तक के लिये मध्‍यम आंच पर फ्राई कर लें और किनारे रख दें.

अब बचे हुए पैन में और घी डाल कर गरम करें और फिर उसमें तेज पत्‍ता, लहसुन, कटी हरी मिर्च, इलायची और जीरा डालें. अगर आप इसमें प्‍याज और अदरक को अभी डालना चाहती हैं तो डाल सकती हैं.

जब यह सभी सामग्रियां अच्‍छे से पक जाएं तब उसमें पनीर, चावल और हरी मिर्च डालें. इसको अच्‍छे से चलाएं जिससे चावल में घी अच्‍छी तरह से समा जाए. इसके बाद स्‍वादानुसार नमक डालें.

घी पड़ने की वजह से चावल चमकदार हो जाना चाहिये और अगर ऐसा नहीं होता है तो और घी डाल सकती हैं. अब अलग से एक गरम पानी की कटोरी में केसर भिगो दीजिये और जब वह लाल रंग का हो जाए तब उसे चावल के साथ मिला दीजिये.

दो मिनट तक चावल को चलाइये और फिर गैस की आंच को बंद कर दीजिये. अब पुलाव को काजू, किशमिश और कटी हुई धनिया को छिड़क कर परोसिये.

Eid Special: मुर्ग कंधारी कोफ्ता करी

अगर आप नॉन वेज खाने के शौकीन हैं तो आपको चिकन खाना बेहद पसंद होगा. क्‍या आपने कभी चिकन के कोफ्ते खाए हैं? आज हम जो डिश बनाना सिखाएंगे उसका नाम मुर्ग कंधारी कोफ्ता करी है, जो कि खाने में बड़ी ही टेस्‍टी लगती है.

चिकन काफी पौष्‍टिक होता है तो इसे बना कर बच्‍चों को खिलाना ना भूलें. इस रेसिपी में तेल का प्रयोग काफी ज्‍यादा किया गया है इसलिये अगर आप डायटिंग कर रही हैं तो, कोफ्तों को माइक्रोवेव में बेक कर सकती हैं. आइये जानते हैं इनको बनाने की विधि-

कितने- 4

तैयारी में समय- 30 मिनट

पकाने में समय- 20 मिनट

सामग्री

– पिसा चिकन (चिकन कीमा)- 400 ग्राम

– दालचीनी पावडर- 1/2 चम्‍मच

– नमक- स्‍वादअनुसार

– तेल- 3 चम्‍मच

– प्‍याज का पेस्‍ट,उबला हुआ- 3/4 कप

– अदरक लहसुन पेस्‍ट- 1 चम्‍मच

– लाल मिर्च पावडर- 1 चम्‍मच

– टमाटर की प्‍यूरी- 1/2 कप

– काजू पेस्‍ट- 1/4 कप

– गरम मसाला पावडर- 1/2 चम्‍मच

– ताजी क्रीम- 2 चम्‍मच

विधि

1. चिकन में दालचीनी पावडर और थोड़ा सा नमक मिला कर मसलें.

2. इस मिश्रण को 12 भागों में बांट लें और गोल कर लें. फिर इसे फ्रिज में लगभग 30 मिनट के लिये रख दें.

3. अब कढ़ाई में तेल चढाएं और उसमें इन कोफ्तों को अच्‍छे से तल लें.

4. एक पैन में तेल गरम करें, उमसें उबले प्‍याज का पेस्‍ट डाल कर गुलाबी होने तक पकाएं. फिर उसमें अदरक-लहसुन पेस्‍ट तथा लाल मिर्च पावडर डालें.

5. इसे धीमी आंच पर पकाएं. उसके बाद इसमें टमाटर की प्‍यूरी और काजू पेस्‍ट डाल कर हल्‍का सा पानी मिलाएं.

6. इसे 5 मिनट तक पकाएं, बीच बीच में चलाती रहें.

7. जब इसमें उबाल आ जाए तब इसमें चिकन के कोफ्ते डालें.

8. ऊपर से गरम मसाला पावडर और अनारदाना सीरप मिलाएं. इसे पांच मिनट के लिये धीमी आंच पर पकाएं और फिर गैस बंद करदें.

9. ऊपर से ताजी क्रीम डालें.

Summer Special: फेस पर आइस क्यूब लगाने के हैं ये 6 फायदे

आप बर्फ का इस्तेमाल तो खूब करते होंगे. कभी पानी पीने में या शर्बत या अन्य किसी चीज में लेकिन क्या आप जानते हैं कि बर्फ का इस्तेमाल आप खूबसूरती के लिए भी कर सकते हैं. आपको अपने सौंदर्य से संबंधित जितनी भी परेशानियां हैं, वह सब बर्फ का टुकड़ा सही कर सकता है.

बर्फ आपके चेहरे को तरोताजा रखने के साथ-साथ अपके चेहरे के डार्क सर्कल भी खत्म कर देता है. जिसके लिए आप बाजार से न जाने कौन-कौन से ब्यूटी प्रोडक्ट खरीदती हैं जिससे कि आपके चेहरे के निखार और दाग-धब्बें खत्म हो जाए.

इन प्रोडक्ट से दाग-धब्बे खत्म हो जाते हैं लेकिन कुछ समय बाद गंदगी की वजह से फिर से निकल आते हैं. इसके बजाए आप घर में रह कर बिना पैसे खर्च किए बर्फ का इस्तेमाल कर सकती हैं. जो आपको आंतरिक सुंदरता प्रदान करेगा. जानिए चेहरे पर बर्फ लगाने के फायदों के बारे में.

1. जब चेहरे पर हों दाग-धब्बे

बर्फ दाग-धब्बों को ठीक करने में बहुत सहायक है. इसके लिए एक कॉटन के कपड़े में बर्फ रख उसे अपने चेहरे और गर्दन में घुमांए, लेकिन ध्यान रहें कि बर्फ के एक जगह ही न लगाएं. इससे आपकी त्वचा लाल हो सकती है. बर्फ लगाने से आपके चेहरे के दाग-धब्बे जल्द ही खत्म हो जाएगें.

2. डार्क सर्कल

आपको शायद ही पता हो कि चेहरे पर बर्फ लगाने से डार्क सर्कल दूर हो जाते हैं और चेहरा हमेशा तरोताजा बना रहता है. अगर आपको बहुत अधिक मेकअप लगाना पसंद नहीं है तो आपको नियमित रूप से बर्फ का इस्तेमाल करना चाहिए. ऐसा करने से चेहरा हमेशा फ्रेश बना रहेगा.

3. मेकअप

अगर आप चाहती है कि अपका मेकअप ज्यादा वक्त तक रुका रहे तो इसके लिए मेकअप करने से पहले चेहरे में बर्फ लगाएं इसके बाद इसे साफ कॉटन के कपड़े से सुखा लें फिर मेकअप लगाएं.

4. टैनिंग की समस्या

अगर आप सनबर्न या टैनिंग की समस्या से परेशान है तो इसके लिए दिन में एक बार चेहरे में बर्फ के इस्तेमाल करें इससे आपके चेहरा सौम्य रहेगा साथ ही और आप अपने चेहरे में ठंडक महसूस करेगी.

5. आंखों की समस्या

आज कल कम्प्यूटर स्क्रीन के आगे बैठे रहनें से आंखों की समस्या काफी होने लगी है जिसके लिए हम रोज डॉक्टर के पास जाते हैं या घर पर ही कोई दवा का सेवन करते हैं. इस समस्या से आपको बर्फ निजात दिला सकती है और आपको ताजगी भी महसूस होगी. इसके लिए एक बर्फ के टुकड़े को एक मुलायम कपड़े में लपेटकर इसे आंखों के ऊपर थोड़ी देर के लिए रखिए. इससे आपको काफी राहत मिलेगी.

6. मांसपेशियों में दर्द से मिले राहत

अगर आप मांसपेशियों में दर्द से परेशान हैं तो इसके लिए आप बर्फ के इस्तेमाल करें आपको काफी फायदा मिलेगा. इसके लिए जिस जगह दर्द हो उस जगह कुछ देर बर्फ से सिकाई करें. इससे आपको काफी राहत मिलेगी.

संध्या: क्या एक और एक ग्यारह हो सकते हैं

‘‘बूआ ने रोजी के पापा को शादी के लिए मनाने की भरसक कोशिश की, मगर वे टस से मस नहीं हो रहे थे…’’

‘‘क्या रोजी डिसूजा क्रिश्चियन है? लल्ला तुम्हारा क्या दिमाग खराब हो गया है? क्या हमारी जाति में लड़कियों का अकाल पड़ गया है, जो हम विजातीय बहू घर लाएं? मैं दिवंगत भैयाभाभी को क्या मुंह दिखाऊंगी? मुझ उपेक्षित विधवा को दोनों ने मन से सहारा दिया था. उन की उम्मीदें पूरी करना मेरा फर्ज है… सारे समाज में हमारी खिल्ली उड़ेगी वह अलग,’’  सुमित्रा ने नाराज होते हुए कहा.

‘‘उफ, बूआ, आप नाहक परेशान हो रही हैं. आजकल अंतर्जातीय विवाह को सहर्ष स्वीकार किया जाता है… मांपापा जिंदा होते तो वे भी इनकार नहीं करते. आप पहले रोजी से मिल तो लो… बहुत सभ्य और संस्कारी लड़की है. आप को जरूर पसंद आएगी. बूआ हम दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं… जातिधर्म का क्या करना है… जीवन में प्यारविश्वास की अहमियत होती है,’’ मैं ने बूआ को समझाते हुए कहा.

‘‘मैं कह देती हूं लल्ला तुम अपनी पसंद की लड़की ला सकते हो, मुझे कोई एतराज नहीं होगा, किंतु विजातीय नहीं चलेगी,’’ बूआ ने भी अपना निर्णय सुना दिया.

बूआ अपनी शादी के 10 दिन बाद ही विधवा हो गई थीं. फूफाजी का रोड ऐक्सीडैंट में देहांत हो गया था. बूआ के ससुराल वालों ने उन से रिश्ता खत्म कर लिया. रोतीबिलखती बूआ की चीखपुकार ससुराल के दरवाजे न खुलवा सकी थी. उस दुखदाई घड़ी में मेरे मांपापा ने उन्हें सहारा देते हुए कहा था, ‘‘जीजी, हमारे रहते खुद को बेसहारा और अकेला न समझो,’’ और फिर बूआ हमारे साथ ही रहने लगीं.

मेरे विवाह के संबंध में बूआ का निर्णयमेरे लिए आदेश से कम न था. मैं उसे नकार नहीं सकता था. बूआ ही मेरी सबकुछ थीं. मैं 14 साल का था जब मेरे मांपापा का देहांत हुआ था. उस कच्ची उम्र में मेरी बूआ ने मुझे टूटनेबिखरने नहीं दिया. वे चट्टान बन मेरा संबल बनी रहीं.

पापा की छोटी सी किराने की दुकान थी. उन के देहांत के बाद बूआ और मैं ने मिल

कर उसे संभाला, बूआ मुझे पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित करती रहीं. परिणामस्वरूप मैं ने बीकौम तक पढ़ाई कर ली. फिर मुझे प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई. मैं और बूआ बेहद खुश हुए.

मेरे औफिस में मेरी जूनियर रोजी और मैं एकदूसरे से प्यार करने लगे, किंतु बूआ के इनकार के कारण अगले ही दिन मैं ने रोजी को बताते हुए कहा, ‘‘रोजी, बूआ हमारी शादी के लिए तैयार नहीं हैं? मुझे रत्तीभर भी अंदेशा न था कि बूआ जातिधर्म का सवाल खड़ा कर देंगी. वरना मैं आगे न बढ़ता. मुझे माफ कर देना. मैं ने नाहक तुम्हारा दिल दुखाया.’’

रोजी ने संयत स्वर में कहा, ‘‘रजत, हमें बूआ को सोचने हेतु पर्याप्त समय देना चाहिए. मुझे पूरा विश्वास है एक दिन बूआ जरूर मान जाएंगी.’’

‘‘रोजी, बूआ की बातों से तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि जातिधर्म की रूढि़वादिता उन के अंदर जड़ें जमाए है. मैं तुम्हें अन्यत्र शादी की सलाह देना चाहता हूं, शादीविवाह सही उम्र में ही अच्छे लगते हैं. मेरे लिए अपना जीवन बरबाद न करो,’’ मैं ने रोजी को समझाते हुए कहा.

‘‘यह मुझ से नहीं होगा रजत,’’ रोजी ने धीरे से कहा.

‘‘रोजी, तुम मेरी हमउम्र ही हो न यानी तुम भी बत्तीस वर्ष की हो रही है. अत: रिक्वैस्ट कर रहा हूं कि अन्यत्र विवाह पर विचार करो. रोजी हम बूआ की सहमति के बिना विवाह कर लेते हैं. मगर मैं बूआ को किसी भी कीमत पर नाराज नहीं कर सकता,’’ मैं ने रोजी को अन्यत्र शादी करने हेतु बात बनाते हुए कहा.

‘‘नहीं रजत हम बूआ को नाराज नहीं कर सकते. उन्होंने तुम्हें पालपोस कर इस योग्य बनाया कि आज तुम गर्व से दुनिया का सामना कर सकते हो. वे चाहतीं तो पुनर्विवाह कर अपनी गृहस्थी बसा सकती थीं, किंतु उन्होंने मांपापा बन कर तुम्हें पालापोसा, पढ़ायालिखाया,’’ रोजी ने कहा.

‘‘इसी समझदारी का तो मैं दीवाना हूं. इसीलिए तुम से हाथ जोड़ कर प्रार्थना करता हूं कि अन्यत्र विवाह हेतु सोचना शुरू कर दो.’’

रोजी मुसकराते हुए अपनी टेबल पर चली गई. लंचब्रेक खत्म हो चुका था.

10 दिनों के अंदर ही रोजी का ट्रांसफर कंपनी की दूसरी शाखा में कर दिया गया. मालूम हुआ इस हेतु रोजी ने अनुरोध किया था. मेरे दिल को ठेस लगी, किंतु मैं ने महसूस किया कि यह उचित ही है. दूर रहने से अन्यत्र विवाह हेतु मन बना सकेगी.

अब फोन से बातें कर संतोष करना पड़ता. मैं सदैव उसे अन्यत्र विवाह हेतु प्रोत्साहित

करता, मगर वह बात हंसी में टाल देती. मैं ने एक दिन कहा रोजी, ‘‘अपने विवाह में मुझे अवश्य बुलाना. भुला न देना.’’

उस ने खोखली हंसी के साथ कहा, ‘‘घबराओ नहीं, रजत पहला इन्विटेशन तुम्हें ही जाएगा… तुम्हारे बिना मेरी शादी संभव ही नहीं.’’

रोजी के बारे में जान लेने के बाद बूआ मेरी शादी के लिए विशेष सक्रिय हो गई थीं. मैं ने भी उन की आज्ञा का पालन करते हुए विज्ञापन दे दिया था. कई जगह रिश्ते की बात चली भी,किंतु कहीं मेरी साधारण कदकाठी, शक्लसूरत तो कहीं मेरी साधारण नौकरी तो कहीं मेरी सादगी और गंभीरता मेरे रिश्ते के लिए बाधक बन गई. कहींकहीं तो मेरी वृद्ध बूआ का मेरे साथ रहना और मेरा उन्हें सर्वस्व मान पूजना ही बाधक बन बैठा.

एक लड़की का कहना था, ‘‘मुझे तो सारे काम अपनी मनमरजी से करने की आदत है. तुम्हारे यहां तो तुम्हारी बूआ ही घर की सर्वेसर्वा हैं. मैं नहीं सह सकूंगी.’’

मेरी शादी की बात नहीं बन सकी.

मैं अब करीब 35 साल का हो चला था और बूआ 70 की. हम दोनों की बढ़ती उम्र ने बूआ को मेरी शादी हेतु चिंतित कर रखा था.

रविवार का दिन था. मैं समाचारपत्र पढ़ रहा था तभी बूआ मेरे पास बैठ कर मेरे बाल सहलाते हुए बोलीं, ‘‘लल्ला, एक बात कहूं, इनकार तो नहीं करेगा?’’

मैं ने आश्चर्य से कहा, ‘‘बूआ, कुछ कहने के लिए आप को मुझ से पूछने की आवश्यकता कब से महसूस होने लगी? मैं आप को इतना पराया कब से लगने लगा?’’

‘‘क्या बोलूं लल्ला, बात ही कुछ ऐसी है,’’ बूआ ने धीरे से कहा.

मैं ने आशंका से समाचारपत्र एक तरफ पटकते हुए कहा, ‘‘बूआ, जो भी मन में है बोल दो. आप का कथन मेरे लिए आदेश से कम नहीं है. इनकार करने का तो सवाल ही नहीं उठता.’’

‘‘लल्ला, तुम रोजी से शादी कर लो, तुम जैसे हो, जैसी तुम्हारी नौकरी और आमदनी है और तुम्हारी वृद्ध बूआ, सभी उसे यथास्थिति स्वीकार्य था न… वह तो तुम से अपनी इच्छा से शादी करना चाहती थी. मैं कम अक्ल अपनी रूढि़वादी सोच ले कर तुम दोनों के बीच आ खड़ी हुई,’’ बूआ ने अपनी बात रखी, ‘‘वह आज भी अविवाहित बैठी है लल्ला. मेरा दिल कहता है वह तुम्हारा इंतजार कर रही है. तुम उस से शादी कर लो,’’ भावावेश में बूआ की आंखें सजल हो उठी थीं.

मैं ने उन के आंसू पोंछते हुए कहा, ‘‘बूआ, स्वयं को दोषी नहीं समझो. सब विधि का विधान समझो. आप के इनकार के बाद हम व्यक्तिगत रूप से कभी मिले ही नहीं. हां, औफिशियल मीटिंग में कभीकभी भेंट हुई है. हम ने अपनी शादी के संबंध में तो कभी चर्चा ही नहीं की इस दौरान. मैं जरूर उसे फोन करता हूं और हमेशा उसे अन्यत्र विवाह हेतु प्रोत्साहित करता हूं…फिर अचानक स्वयं के साथ शादी… इस के अलावा बूआ मैं ने महसूस किया है कि रोजी मुझ से बात करने से कतराती भी है.’’

‘‘अचानक ही सही लल्ला तुम मुझे उस के घर ले चलो. मैं स्वयं उसे मांग लूंगी. लल्ला इनकार न करो,’’ बूआ ने मनुहार करते हुए कहा तो मैं टाल न सका, पहुंच गया बूआ को ले कर रोजी के घर. रोजी के घर में पहली बार आया था. हां, उसे कालोनी के मोड़ पर 2-4 बार ड्रौप जरूर किया था.

मुझे अचानक बूआ के साथ देख कर रोजी का आश्चर्यचकित होना स्वाभाविक था. उस ने अव्यवस्थित कुरसी को व्यवस्थित कर बैठने का आग्रह करते हुए बूआ के चरण स्पर्श किए.

रोजी का घर बेहतर साधारण था. एक पुरानी सी चौकी पर उस के वृद्ध कमजोर पापा ताश के पत्तों में लगे थे. उन की भावभंगिमाएं साफ प्रकट कर रही थीं कि उन्हें हमारा आना नापसंद है. एक कोने में खिड़की की तरफ बेहद वृद्ध दादी एक थाली में चावल लिए उन्हें चुनने की कोशिश में लगी थी. उन्हीं के पास रोजी की दीदी बच्चों जैसी हरकतें कर रही थी. वह मुंह में अंगूठा डाल चूसते हुए हंसते हुए बोल रही थी, ‘‘आप कौन हैं? ही…ही… आप यहां क्यों आए हैं…ही…ही…’’

मैं रोजी के घर के वातावरण से हैरान सा था. अब मैं समझ सकता था कि रोजी हमेशा क्यों कहती थी कि शादी का फाइनल करने के पहले मैं अपने परिवार के संबंध में तुम से

विस्तार से बात करना चाहती हूं. क्या बोलूं,क्या न बोलूं, समझ न आया तो शांत रहना ही उचित समझा.

बूआ हमारी शादी के लिए जैसे सोच कर आई थीं. अत: रोजी के पापा की बेरुखी के बावजूद मुसकराते हुए बोलीं, ‘‘नमस्ते भाई साहब, मैं रजत से रोजी के विवाह हेतु प्रस्ताव

ले कर आई हूं. दोनों बच्चे एकदूसरे से प्यार करते हैं. अत: दोनों का विवाह कर देना उचित होगा.’’

‘‘रोजी के विवाह के संबंध में सिर्फ और सिर्फ मैं निर्णय लूंगा,’’ उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा.

‘‘हांहां, यह उचित भी है. आप उस के ‘पापा’ हैं आप ही निर्णय करेंगे, मैं इस संबंध में आप की मंशा जानने आई हूं?’’ बूआ ने सहजता से कहा.

‘‘मुझे रोजी की शादी करनी ही नहीं है,’’ उन्होंने पूर्ववत सख्त लहजे में कहा.

रोजी के पापा की बात पर मैं और बूआ आश्चर्यचकित थे. बूआ ने स्वयं को शीघ्र ही संयत कर हंसते हुए कहा, ‘‘कैसी बातें कर रहे हैं भाईसाहब, लड़की को कोई घर थोड़े ही बैठाता है… वह तो दूसरे की अमानत होती है…’’

उन्होंने बीच में ही बूआ की बात काटते हुए अत्यधिक तिरस्कार से कहा, ‘‘मुझे रोजी की शादी नहीं करनी है, आप ने सुना नहीं?’’

मैं ने बूआ को शांत रहने और लौट चलने का इशारा किया. रोजी भी नजरों से यही प्रार्थना करती प्रतीत हुई.

अगले दिन मैं बुझे मन से घर लौटा, तो बूआ ने चिंतित स्वर में पूछा, ‘‘क्या बात है लल्ला, तबीयत तो ठीक है? एकदम लुटेपिटे से लग रहे हो.’’

मैं ने कहा, ‘‘बूआ, ऐसा ही समझ लो. दरअसल, मैं औफिस से लौटते हुए रोजी से मिल कर आया. हमारे विवाह हेतु उस के पापा के विचार जान कर मैं हैरान था. यह भी मालूम हुआ, मेरे और रोजी के संबंध के बारे में जान लेने के बाद उन्होंने डांटफटकार कर उसे ट्रांसफर हेतु मजबूर कर दिया था.’’

सारी बात सुन कर बूआ भी हैरान हो गईं, शीघ्र ही अति उत्साह से बोलीं, ‘‘लल्ला, जल्दी चाय खत्म कर मुझे रोजी के घर ले चलो.’’

‘‘क्या बूआ, आप को बेइज्जत होना बुरा नहीं लगता?’’ मैं ने इनकार करते हुए कहा.

‘‘इनकार न करो, मेरे पास रोजी के पापा के भय का निवारण है,’’ बूआ ने अधीरता से कहा.

हमें स्वयं के घर पर देख कर रोजी केपापा ने आग्नेय नेत्रों से देखते हुए तिरस्कृतशब्दों में कहा, ‘‘आप दोनों फिर आ धमके,क्या मेरी बात…’’

बूआ ने हाथ जोड़ कर अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘भाईसाहब, आप से प्रार्थना

करती हूं, आप नाराज न हों. आप मेरी पूरी बात सुन निर्णय करें. आप का निर्णय हमें शिरोधार्य होगा.’’

‘‘भाई साहब, आप अपने दिल से यह भय निकाल दीजिए कि विवाहोपरांत रोजी पर आप का अधिकार नहीं रहेगा वरन रोजी के साथसाथ रजत पर भी आप का पूरा अधिकार रहेगा. दोनों मिल कर परिवार की सारी जिम्मेदारियां पूरी करेंगे.’’

‘‘देखिए भाई साहब, दोनों एकदूसरे को चाहते हैं, विधि के विधान को भी दोनों का मेल स्वीकार्य है, मैं तो अपनी संकीर्ण रूढि़वादी सोच के कारण रोजी जैसी सभ्य, सुसंस्कृत लड़की को ठुकरा कर स्वजातीय विवाह हेतु प्रयासरत रही. किंतु मेरे लल्ला का रिश्ता कहीं भी नहीं हो सका. मेरी रूढि़वादी सोच ने खुद ही दम तोड़ दिया.’’

बूआ आज सब खुल कर बोल देना चाहती थीं, ‘‘भाई साहब, मैं अपनी संकीर्ण सोच त्याग कर आगे बढ़ना चाहती हूं. आप से भी प्रार्थना करती हूं, अपने शक अपने भय को त्याग कर प्यार करने वालों का संगम करवा दोनों को आशीर्वाद दीजिए. 2 प्यार करने वालों की राह में बाधा डालना उचित नहीं है.’’

वे बोलीं, ‘‘देखिए भाई साहब, समस्या से डरने या भागने से उस का समाधान असंभव है, किंतु अगर हम साहस के साथ सकारात्मक पहल करें तब अवश्य समस्या का समाधान निकाल लेंगे.’’

थोड़ी देर चुप रहने के बाद बूआ अतीत में जाते हुए बोलीं, ‘‘मैं उपेक्षित विधवा थी. जिन्होंने मुझे सहारा दिया कुछ समय बाद वे किशोर रजत को मेरे हवाले कर इस दुनिया से चल बसे. हम दोनों उदास और दुखी थे. मगर फिर साहस और सकारात्मक सोच के साथ जीवन पथ पर बढ़ चले. परिणाम आप के सामने है.’’

रोजी के पापा शांत भाव से बूआ की बातें सुन रहे थे. बूआ ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘मैं आप को आश्वासन देती हूं कि रोजी और रजत मिल कर एक और एक

2 नहीं, 11 बन कर घर की सारी जिम्मेदारियां संभाल लेंगे.’’

रोजी के पापा की आंखों से झरझर आंसू बह चले. जैसे भय और शक की जमी बर्फ बूआ के आश्वासन की ऊष्मा पा कर पिघल कर आंसू बन आंखों से बह चली. वे आंसू पोंछते हुए बोले, ‘‘सिस्टर, जीवन में बहुत छलकपट देखा है. मैं बैंक कर्मी था. ईमानदार, सख्त मिजाज, रूखे स्वभाव का, बस सहकर्मियों की आंखों की किरकिरी बना रहता था. एक फ्रौड में जबरदस्ती फंसा दिया गया, नौकरी चली गई, मेरी पत्नी मैगी साहसी महिला थी, उस ने मुझे टूटने नहीं दिया. उस ने स्कूल में नौकरी कर घर संभाल लिया, किंतु नियति के क्रूर प्रहार से वह रोड ऐक्सीडैंट में मारी गई, तो मैं टूट गया.’’

‘‘रोजी अपनी मां जैसी साहसी है, पढ़लिख कर नौकरी कर घर संभाल रही है, इसी की आमदनी से घर का खर्च चलता है. अब आप ही बताइए इसे विवाह कर दूसरे घर भेज दूं, तो अपनी वृद्ध मां, मंदबुद्धि दूसरी बेटी और हाराटूटा मैं किस के सहारे रहें? बस इसी स्वार्थी सोच के कारण मुझे रोजी के विवाह यहां तक कि विवाह की चर्चा से ही भय हो गया था.’’

कुछ चुप रहने के बाद वे पुन: बोले, ‘‘आज आप की बातों से पुन: विश्वास करने का दिल हो रहा है कि दुनिया में आज भी इंसानियत है. सच कहता हूं रोजी बेटी की खुशियों का दमन करते हुए मुझे दुख भी बहुत होता था. सच ही कहा गया है कि सारे रास्ते बंद नजर आने के बावजूद एक रास्ता अवश्य खुला रखता है. बस साहस और सकारात्मक पहल की आवश्यकता होती है.’’

फिर उन्होंने मुसकराते हुए मुझ से कहा, ‘‘बेटा रजत मैं ने तुम्हारा और तुम्हारी बूआ का बहुत अनादर किया. मुझे माफ करना’’ और उन्होंने हाथ जोड़ दिए.

मैं ने उन के हाथ अलग करते हुए कहा, ‘‘आप बड़े हैं. आप का हाथ माफी के लिए नहीं आशीर्वाद के लिए उठना चाहिए. आप माफी मांग कर मुझ शर्मिंदा न करें अंकल.’’

‘‘बेटा, तुम मुझे पापा कह सकते हो, तुम्हारे जैसा बेटा पा कर मैं धन्य हो गया,’’ कहते हुए उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

सभी की आंखें खुशी के आंसुओं से भर उठीं. मैं मन ही मन अपनी बूआ के साहस, दृढ़संकल्प एवं सकारात्मक पहल को सलाम कर रहा था.

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शाकुंतलम फिल्म रिव्यू: उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती सामंथा प्रभु की ये फिल्म

  • रेटिंग: पांच में से एक स्टार
  • निर्माता: दिल राजू
  • निर्देशक: गुना सेखर
  • कलाकार: सामंथा प्रभु,मोहन देव,मोहन बाबू,सचिन खेड़ेकर, अदिति बालन, अनन्या नागलिया, प्रकाश राज,मधू, गौतमी,कबीर बेदी,जिषु सेन गुप्ता, कबीर दुहान सिंह,अल्लू अरहा व अन्य.  
  • अवधिः दो घंटे 22 मिनट
  • प्रदर्षन की तारीख: 14 अप्रैल 2023

केजीएफ ,आर आर आर व कंतारा जैसी दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिंदी में सफल होने के बाद हर दक्षिण भाषी फिल्म को हिंदी में रिलीज करने की होड़ सी लग गयी है. मगर किसी को भी इस बात की परवाह नही है कि उनकी फिल्म हिंदी भाषी क्षेत्रों के अनुरूप है या नहीं.

दक्षिण भारत के वेलमाकुचा वेंकट रामन्ना रेड्डी जो कि फिल्म जगत में दिल राजू के नाम से मशहूर हैं,अब तक तेलगू भाषा में चालिस फिल्मों का निर्माण कर चुके दिल राजू कालीदास लिखित संस्कृत भाषा के नाटक ‘‘अभिज्ञान शाकुंतलम’’ पर आधारित फिल्म ‘‘शाकुंतलम’’ लेकर आए हैं.

गुना सेखर के निर्देशन में मूलतः तेगुलू भाषा में बनी इस फिल्म को हिंदी में डब कर ‘‘शाकुंतलम’’ के नाम से प्रदर्शित किया गया है. फिल्मकार ने फिल्म की शुरूआत में ही इसे धार्मिक फिल्म की संज्ञा दे दी है. एक राजा और एक ऋषि कन्या का प्रेम विवाह धार्मिक होता है? यह एक अलग विचारणीय प्रष्न है.

कुछ दिन पहले मुंबई में एक प्रेस काफ्रेंस में दिल राजू ने दावा किया था कि उन्होेने हौलीवुड स्टूडियो ‘डिज्नी’ को मात देने वाली फिल्म बनायी है. मगर इस फिल्म को देखने के बाद अहसास होता है कि उनका दावा ‘पानी का बताषा’ के अलावा कुछ नही है. इस फिल्म में आत्मा ही नही है.

इस फिल्म को देखना समय व पैसे की बर्बादी के अलावा कुछ नही है. वैसे ‘ द कष्मीर फाइल्स’ की ही तर्ज पर आर एस एस ने ‘‘शाकुंतलम’’ को सफल बनाने में जुट गया है. गुरुवार को आर एस एस के कई दिग्गज इस फिल्म को देखने आए. इतना ही नही प्रेस कांफ्रेंस में दिल राजू ने हिंदी बोलते हुए ऐलान किया था कि भाषाओं की विविधता के बावजूद ‘हम सब एक हैं.

 

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कहानीः

ऋषि विश्वामित्र अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तपस्या करना शुरू करते हैं,इससे इंद्र भगवान को अपना सिंहासन खोने का डर सताने लगता है. इसलिए वह देवलोक की अप्सरा मेनका को विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए पृथ्वी पर भेजते हैं. विश्वामित्र से संभोग के बाद ,जिसे वह देवलोक नहीं ले जा सकती, इसलिए पृथ्वी पर ही छोड़कर वापस लौट जाती हैं. ऋषि कण्व (सचिन खेडेकर)अपने आश्रम के पास पड़ी इस नवजात बच्ची को अ पना कर उसे शकुंतला (सामंथा) नाम देते हैं. और उसे अपनी बेटी के रूप में पालते हैं.

कई वर्षों के बाद जंगल में शकुंतला की मुलाकात राजा दुष्यंत (देव मोहन) से होती है और दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ जाते है. वह गंधर्व विवाह करते हैं. शकुंतला गर्भवती हो जाती है. दुष्यंत कुछ समय बाद आकर शकुंतला को अपने राज्य में ले जाने का वचन देते हैं. दुष्यंत के आने के इंतजार में खोयी शाकुंतला को ऋषि दुर्वासा (मोहन बाबू) के आने का पता नही चलता.

तब ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण दुष्यंत,शकुंतला को भूल जाता है. उसके बाद शाकुंतला के जीवन की कठिनाइयों, श्राप मुक्ति व दुष्यंत से संबंध जुड़ने की कहानी है.

लेखन व निर्देशन:

पौराणिक कथाओं को पारंपरिक स्वरूप में बताना एक साहसिक आह्वान है,जिस पर निर्देशक गुना सेखर व निर्माता दिल राजू खरे नहीं उतरे हैं. यह न प्रेम कहानी है और न ही अच्छाई पर बुराई की जीत उभर कर आती है. एक्शन दृष्य तो ऐसे हैं, जैसे कि बच्चे आपस में लड़ रहे हों.

फिल्मकार गुना सेखर का कहानी कहने और पात्रों को चित्रित करने का तरीका बिल्कुल भी प्रभावशाली नहीं है. शकंुतला और दुष्यंत की प्रेम कहानी में रोमांच के साथ पीड़ा भी है. मगर इस फिल्म में यह दोनों चीजें गायब हैं. ऐसा लगता है जैसे कि भगवान इंद्र स्वर्ग में अपना सिंहासन सुरक्षित रखने के लिए ही दुष्यंत व शाकुंतला के बीच प्रेम रचा. मतलब इंसानी भावनाओं और इंसान की प्रेम की अनुभूति का कोई औचित्य ही फिल्म में नजर नही आता.

जब दुष्यंत के बेटे की मां बनने जा रही शाकुंतला खुद को विस्मृत कर चुके राजा दुष्यंत से मिलने उनके राज दरबार में पहुंचती है, उस वक्त राज दरबार के मंत्री आदि जिस तरह के अपशब्दों का प्रयोग शाकुंतला का प्रयोग कर शकुंतला को दंड देने की मांग करते हैं, वह पांच हजार वर्ष या 700 वर्ष पहले अथवा वर्तमान सरकार के लिए भी शोभाजनक नही है. राजा के मंत्री के बात करने में शालीनता होती है, मगर राजा दुष्यंत का राज दरबार तो ‘मछली बाजार’ नजर आता है. मंत्री गण अनपढ़ गंवार से भी निचले स्तर पर उतर आते हैं.

इतना ही नही राज दरबार से बाहर जा रही गर्भवती शकुंतला पर राज दरबारी व आम जनता जिस तरह से पत्थर बरसाते हुए पीछा करते हैं, वह कतई शोभा नही देता. क्या वास्तव में यह दृष्य कालीदास लिखित ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’का हिस्सा हैं? क्या सिनेमाई स्वतंत्रता के नाम पर किसी को भी नारी जाति का इस स्तर पर अपमान करने का हक मिल जाता है? फिल्मकारो ने यह भी जिस तरह से ऋषि दुर्वासा को शाकुंतला को श्राप देते हुए दिखाया है, वह तरीका भी सही नही है. अमूमन पुराने वक्त में ऋषि श्राप देने के लिए पवित्र जल इंसान के शरीर पर फेकते हुए श्राप बोलते थे. यहां श्राप देन के बाद दुर्वासा जल फेकते हैं.

फिल्म का वीएफएक्स व स्पेशल इफेक्ट्स त्रुटिपूर्ण है. शाकुंतला का परिचय देने वाले दृष्य में जंगल में पेड़ों के नीचे खड़ी षाकंुतला की सुंदरता के चारों ओर तितली के झुंड दिखाए गए हैं,यह तितलियां कम कागज की फुलझड़ियाँ नजर आती हैं. वीएफएक्स का कमाल यह है कि स्क्रीन पर बाघ की बजाय एक डमी मूर्ति वाला बाघ नजर आता है. बर्फ से ढंके पर्वत पर हर चरित्र न के बराबर व साधारण कपड़ों में ही नजर आते हैं. इतना ही नही चारों ओर बर्फबारी हो रही है,लेकिन किसी भी किरदार के शरीर या उनकी वेशभूषा पर एक परत बर्फ नहीं गिरती है. . है न निर्देशक की सोच का कमाल. . .  गीत संगीत प्रभावित नही करता. एडीटर कई जगह मात खा गए हैं.

 

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फिल्म के संवाद भी अजीबो गरीब हैं. कहीं अति शुद्ध हिंदी है,तो कहीं आम तौर पर बोली जाने वाली हिंदी है. तो कही संस्कृतनिष्ठ हिंदी है. कहीं ‘क्षमा’ या ‘माफी’ के लिए ‘क्षम्य’ शब्द का उपयोग किया गया है. शायद प्राचीन काल में स्त्रियाँ अपने होठों को रंगने के लिए गेरु या गेरुए रंग का उपयोग करती थीं,पर इस फिल्म में षाकंुतला के किरदार में अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभू हर दृष्य में लाल रंग की सबसे चमकदार लिपस्टिक लगाए ही नजर आती हैं.

कास्ट्यूम डिजाइनर नीता लुल्ला ने हर किरदार की पोषाक गढ़ते वक्त उस काल को पेश करने का सटीक प्रयास किया है. ोखर वी जोसेफ की सिनेमैटोग्राफी काफी औसत है.

अभिनयः

पूरी फिल्म में सामंथा रूथ प्रभू और देव मोहन के बीच कोई वास्तविक केमिस्ट्री नजर नहीं आती. वास्तव में युवा अभिनेता हर दृष्य में अपनी सह कलाकार व दिग्गज अदाकारा सामंथ के ‘औरा’ तले दबे नजर आते हैं. शायद अभिनय करते समय वह भूल गए थे कि वह सामंथा के साथ अभिनय कर रहे हैं, न कि वह वह जिस अदाकारा के प्रशंसक हैं, उससे मिल रहे हैं. इसके लिए कहीं न कहीं निर्देशक भी दोषी हैं.

प्रेम में खोयी,राजा से गंधर्व विवाह,गर्भवती होने के बाद पति का उसे विस्मृत करने के साथ ही सभी के सामने अपमानित करने की पीड़ा, खुद व जन्म लेने वाली संतान के अनिश्चित भविष्य की जो पीड़ा है, उसे सामंथा प्रभू अपने अभिनय से चित्रित करने में पूरी तरह से विफल रही हैं.

तो वहीं राज दुष्यंत के किरदार में मोहन देव भी निराश करते हैं. यहां तक कि अनुभवी कलाकार मधु और गौतमी भी निराश करती हैं. दुर्वासा ऋषि के छोटे किरदार में अभिनेता मोहन बाबू अपनी छाप छोड़ जाते हैं. असुर राक्षस के किरदार में कबीर दूहन सिंह कोई करतब नही दिखा पाते.

सचिन खेडेकर,कबीर बेदी,सुब्बा राजू, जिशु सेनगुप्ता, अदिति बालन, गौतमी, और हरीश उथमन जैसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं के हिस्से करने को कुछ आया ही नहीं.

प्रियंवदा के किरदार में अदिति बालन अधिक आकर्षक लग रही थीं. दुष्यंत व शाकुंतला के बेटे सर्वदमन उर्फ भारत के किरदार में बाल कलाकार अल्लू अरहा (अभिनेता अलु अर्जन की बेटी) हर किसी का मन मोह लेती है. यदि सामंथा व मोहन देव ने इस बाल कलाकार से संवाद अदायगी सीख ली होती, तो कुछ इनका भला हो जाता.

 

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