होली वाले दिन सुबह से ही बच्चे धमाचौकड़ी मचाना प्रारम्भ कर देते हैं तो बड़े भी उत्साह से लबरेज नजर आते हैं, त्योहारों पर परिवार और दोस्तों के साथ पार्टी त्यौहार को और अधिक रंगीन बना देती हैं. कोई भी विशेष अवसर हो सबसे ज्यादा मुसीबत हम महिलाओं की होती है क्योंकि उनका तो अधिकांश समय किचिन में ही बीतता है जिससे वे पार्टी का आनन्द ही नहीं ले पातीं हैं परन्तु यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाये तो आप भी होली की पार्टी का भरपूर आनन्द उठा सकतीं हैं.
1-परिवार के सभी सदस्यों के होली पर पहनने वाले कपड़े पहले से ही धो प्रेस करके रख दें ताकि होली वाले के दिन आपको परेशान न होना पड़े.
2-रंग, गुलाल, अबीर, पिचकारी आदि को एक ही स्थान पर रखकर परिवार के सभी सदस्यों को बता दें ताकि आप उनके प्रश्नों से बची रहकर अन्य कामों पर ध्यान दे सकें.
3-पानी की व्यवस्था घर से बाहर करने के साथ साथ बच्चों को बार बार घर में न आने की सख्त हिदायत दें ताकि घर गंदा होने से बचा रहे.
4-घर के सोफों, दीवान आदि के कवर आदि हटा दें या पुराने कवर लगा दें ताकि ये रंगों से बचे रहें, हो सके तो मेहमानों के बैठने के लिए प्लास्टिक की कुर्सियों का प्रयोग करें.
5-घर में आने वाले मेहमानों के लिए नाश्ता एक ट्रे में लगाकर पेपर से ढक दें यदि सम्भव हो तो सर्व करने के लिए डिस्पोजल प्लेट्स और कटोरियों का प्रयोग करें.
6-ठंडाई, शरबत, लस्सी, छाछ या मॉकटेल जो भी ड्रिंक आप मेहमानों को सर्व करना चाहतीं हैं उन्हें पहले से ही बनाकर मेहमानों की संख्या के अनुसार डिस्पोजल ग्लासों में डालकर सिल्वर फॉयल या क्लिंग फिल्म से कवर करके फ्रिज में रख दें.
7-ताजे नाश्ते की जगह गुझिया, मठरी, शकरपारे, सेव, सूखी बेसन कचौरी, समोसे, दही बड़ा जैसे सूखे नाश्ते को प्राथमिकता दें ताकि मेहमानों के आने पर आपको परेशान न होना पड़े.
8-डेजर्ट में आप फ्लेवर्ड कुल्फी, आइसक्रीम, रबड़ी आदि को प्राथमिकता दें, साथ ही इन्हें सर्विंग बाउल में डालकर सिल्वर फॉयल से ढककर रखें ताकि पार्टी के बीच में आपको परेशान न होना पड़ें.
9-यदि आप मेहमानों पर अपना प्रभाव जमाना चाहतीं हैं तो चुकन्दर, पालक, हरे धनिया, आदि का प्रयोग करके आलू स्टफ्ड इडली, पनीर स्टफ्ड अप्पे या टमाटरी सेव आदि बनाएं इन्हें आप पहले से बनाकर भी रख सकतीं हैं.
10-कचौरी, समोसे, आलू बोंडा, पेटीज आदि को आप तेज आंच पर आप तलकर रख दें और मेहमानों के आने पर अच्छी तरह गर्म तेल में एक बार डालकर बटर पेपर पर निकाल दें इससे आपको किचिन में बहुत देर तक नहीं रहना पड़ेगा और मेहमानों को गर्म नाश्ता भी मिल सकेगा.
टीवी के मशहूर एक्टर सचिन श्रॉफ दूसरी बार शादी के बंधन में बंध चुके हैं. बीती रात यानी 25 फरवरी 2023 को मुंबई में सचिन ने अपनी लाइफ पार्टनर चांदनी के साथ सात फेरे लिए. पहली बार उन्होंने अपनी पत्नी के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने अपनी लेडीलव को सपोर्ट सिस्टम कहा.
मैरिड लाइफ पर बोले सचिन श्रॉफ
चांदनी से शादी करके सचिन श्रॉफ बहुत खुश हैं. उन्होंने बताया कि अब वह बहुत रिलैक्स फील कर रहे हैं. सचिन ने बॉम्बे टाइम्स संग बातचीत में कहा, “मैं बहुत कंफर्टेबल, रिलैक्स और हैप्पी स्पेस में हूं. मैरिड लाइफ बहुत अच्छा है, हालांकि मुझे अभी इसका अनुभव करना है. यह एक प्यारी फीलिंग है. इस जर्नी में चैलेंजेस आएंगे, लेकिन मैंने और चांदनी ने साथ में मिलकर इन चीजों पर काम करने का फैसला किया है. हम धन्य हैं, खासकर चांदनी को अपनी जिंदगी में पाकर मैं बहुत धन्य महसूस कर रहा हूं. वह मेरी सबसे बड़ी सपोर्ट सिस्टम हैं.”
सचिन श्रॉफ ने अपनी ग्रैंड वेडिंग में ऑरेंज कलर की शेरवानी पहनी थी, जिसमें वह हैंडसम लग रहे थे. वहीं, दुल्हन चांदनी ने ब्लू कलर का हैवी एंब्रॉयडर्ड लहंगा पहना था, जिसे ऑरेंज दुपट्टे से स्टाइल किया था. हैवी ज्वेलरी कैरी की थी. चोकर के साथ लॉन्ग नेकलेस, झुमके, मांग टीका और चूड़ी-कलीरों के साथ उनका ब्राइडल लुक परफेक्ट था. सचिन की शादी में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) की स्टार कास्ट भी शामिल हुई थी. इस वक्त वह इसी शो में तारक मेहता का किरदार निभा रहे हैं.
सचिन श्रॉफ की दूसरी पत्नी चांदनी हैं, जो लाइमलाइट से दूर रहती हैं. प्रोफेशन की बात करें तो एक्टिंग न सही, लेकिन चांदनी अपने काम में माहिर हैं. वह पेशे से एक इवेंट ऑर्गनाइजर और इंटीरियर डिजाइनर हैं. सचिन श्रॉफ की दूसरी पत्नी भी काफी खूबसूरत हैं. बता दें कि, सचिन की पहली पत्नी जूही परमार हैं, जो टीवी की जानी मानी एक्ट्रेस हैं. सचिन और जूही का 2018 में तलाक हुआ था. उनकी बेटी का नाम समायरा है.
भारत जैसे देश अपनी सरकारों की गलत नीतियों के कारण वर्ल्ड लेबर सप्लायर बनने जा रहे हैं. आज भारत के ही सब से अधपढ़े या अच्छे पढ़े युवा विदेशों में जा रहे हैं और हर देश इन के लिए दरवाजे खोल रहा है क्योंकि उन की अपनी जनता बढऩी बंद हो गई है, वहां बच्चे कम हो रहे हैं, लेबर फोर्स सिकुड़ कर रही है. भारत में इस बात को कई बार प्राइड से कहा जाता है, पर है शर्म की बात. भारत के युवाओं को विदेशों में लगभग दोगुने पैसे मिलते हैं. किसीकिसी देश में 3-4 गुना भी हो जाते हैं. ठीक है कि वहां खाना, ट्रांसपोर्ट महंगा है पर लाइफस्टाइल अच्छी है, महंगा किराया है पर कई ऐसी फैसिलिटीज हैं जो उन के सपनों में भी नहीं आतीं.
कनाडा ने अब स्टूडैंट्स को एक छूट दी है जिसे वरदान माना जा रहा है. अब तक स्टूडैंट वीसा पर आने वाले सप्ताह में 20 घंटे काम कर के पैसे का जुगाड़ कर सकते थे. अब 31 दिसंबर, 2023 तक छूट दी गई है कि वे जितना भी चाहें काम कर लें. इन-डायरैकक्टली समझें कि यूथ अपनी पढ़ाई का खर्च पार्टटाइम काम कर के निकाल सकते हैं. इन स्टूडैंट्स में ज्यादातर भारत के ही हैं.
यह वह टेलैंट है जिस का एक्सपोर्ट हम लगातार कर रहे हैं क्योंकि हमारे यहां का सोशल व एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर ही ऐसा है कि हर काम हर जना नहीं कर सकता. वहां स्टूडैंट्स अपना बैकग्राउंड भूल कर सैनिटरिंग, ???… लीडर…???,
डिलीवरी पर्सन का काम ऐक्सैप्ट कर रहे हैं. यहां भारत में उन के मांबाप नहीं जानते पर यदि वे वहां कहीं भूलेभटके चले जाएं तो मिलने वाले डौलरों की वजह से मुंह बंद कर लेते हैं.
ह्यूमन कैपिटल आज भी किसी देश की सब से बड़ी कैपिटल है पर हमारी सोसायटी पौपुलेशन को बोझ मानती है. कनाडा, अमेरिका, यूरोप, जापान और यहां तक कि चीन भी अब समझने लगे हैं कि लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए, जीडीपी ग्रोथ के लिए वर्कर चाहिए ही. भारत उन वर्कर्स का एक अच्छा सोर्स है क्योंकि अफ्रीका के बाद भारत ही ऐसा देश है जहां अनएंपलौयमैंट सब से ज्यादा है. वैसे भी, यूरोपियन व अमेरिकी रंगभेद की वजह से ब्लैक की जगह ब्राउन्स को प्रैफर किया जाता है. हमारा लौस, उन का गेन है. पर क्या करें? इस देश का यूथ इस देश में नारे तो लगाता है पर काम की अपौर्चुनिटी उस के पास नहीं है.
टीवी के टॉप सीरियल अनुपमा में रोजाना कुछ न कुछ ऐसा देखने को मिलता है, जिसे दर्शक शो से जुड़े रहते हैं और लगातार प्यार बरसाते रहते हैं. बीते एपिसोड में आपने देखा कि माया इमोशनल होकर अनुज से लिपट जाती है और फूट-फूटकर रोने लगती है. वो कहती है कि हाथ उठाने वाले मर्द बहुत देखे हैं लेकिन औरत पर उठने वाले हाथों को रोकने वाला पहली बार देखा है, वो अनुज को थैंक्स बोलती है लेकिन उससे लिपटी रहती है. इसी बीच वो अनुज को गालों पर किस करती है लेकिन अनुज उसे झटक देता है. माया कहती है कि ये सब गलती से हुआ है, प्लीज उसे गलत मत समझना.
आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा खुशी-खुशी अनुज और छोटी के आने का इंतजार कर रही है. वो दोनों के लिए अच्छा-अच्छा खाना बनाती है और खुद भी अच्छे से तैयार होकर अनुज के कपड़ों से बात करती हैं. उधर काव्या सबको हैरान करने वाली है क्योंकि उसने अपने एक्स पति अनिरुद्ध को घर पर बुला लिया है. काव्या उससे मिलते ही खुशी से झूम उठती है और बा और वनराज के तोते उड़ जाते हैं. काव्या बड़े प्यार से अनिरुद्ध से बात करती है और उसके लिए कॉफी भी बनाती है. काव्या अनिरुद्ध के बिजनेस की तारीफ करती है तो वनराज चिढ़ जाता है, और कहता है कि तुम्हें शर्म नहीं आई इसे घर बुलाने में. अनिरुद्ध बीच में टोक देता है और कहता है कि भले ही ये मेरी पत्नी नहीं है लेकिन दोस्त आज भी है. मेरी दोस्त से तुम ऐसे बात नहीं कर सकते हो.
वनराज काव्या से कहता है कि मां-बापूजी के सामने तुम अपने एक्स से बात करते हुए शर्म नहीं आ रही है, निकालो इसे मेरे घर से। काव्या कहती है कि ये सब तो अनुपमा भी करती है, तब कोई दिक्कत क्यों नहीं होती. वो वनराज से कहती है कि तुम अपनी मां पर गए हो, जो दोगली है और जिसे हर परेशानी में अनुपमा ही चाहिए, अपनी पत्नी नहीं. और जब वनराज अनुपमा से बात करके अपना मन हल्का कर सकता है तो मैं क्यों नहीं. आने वाले एपिसोड में काव्या को भनक लग जाएगी कि माया अनुज से प्यार करने लगी है और माया खुद भी ये बात कबूल कर लेगी. जिसके बाद वनराज उसके कैरेक्टर पर सवाल उठाएगा.
फिल्म ‘गुलमोहर’, जो आज की पारिवारिक परिवेश पर आधारित एक ऐसी ड्रामा फिल्म है, जिसमे एक परिवार के सभी सदस्य साथ रहते हुए भी अलग विचारधारा रखते है, लेकिन उनमे प्यार और आदर की कोई कमी नहीं है. परिवार की बड़ी बुजुर्ग जब एक निर्णय लेती है, तो पूरा परिवार उस निर्णय से हिल जाते है और 35 साल से रह रहे इस घर को छोड़ने के बारें में सोचने लगते है, जहाँ उनकी यादें और भावनाएं है, लेकिन उन्हें इस निर्णय को मानना है.
परिवार की बड़ी बुजुर्ग का ये निर्णय 4 दिन बाद होली की त्यौहार को साथ मनाने के बाद ख़त्म होने वाला है, लेकिन कैसे पूरा परिवार इस निर्णय के साथ उन चार दिनों को जी रहा है, कैसे सबकी सोच एक दूसरे से अलग है, कुछ इसी ताने-बाने के साथ फिल्म अंजाम तक पहुँचती है. ये फिल्म डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर 3 मार्च को रिलीज होने वाली है.
पद्मभूषण और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता लीजेंड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने इसमें बहुत ही महत्वपूर्ण और मुख्य भूमिका निभाई है. 12 साल की गैप के बाद उन्होंने इस फिल्म में बहुत ही उम्दा अभिनय किया है, जिसमे उन्होंने अपने अनुभव और निर्देशक राहुल चित्तेला के विजन को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है.
चाहत रही अच्छी कहानी की
बातचीत के दौरान शर्मिला कहती है कि मुझे एक अच्छी फिल्म में काम करने की इच्छा थी और वह निर्देशक राहुल लेकर आये और मैंने किया. इसमें रिश्ते और संबंधों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से पेश किया गया है. साथ ही एक बड़ी अच्छी स्टारकास्ट और टीम है. सभी की भूमिका एक सामान है. परिवार की कहानी है और दिल को छू लेने वाली कहानी है. बहुत ही मिठास है, ऐसी फिल्म में काम करना मेरे लिए बहुत ख़ुशी की बात है.
ये आज की कहानी है, आज लोगों के पास समय नहीं है, ऐसा सभी गलत कहते है और एक मकान में रहते हुए भी फ़ोन पर बात करते है. मेरे हिसाब से जब आप किसी से मिलते है और गले लगते है, तो अलग ही एहसास होता है. किसी से गले मिलना बात करना, इसमें प्लानिंग करनी पड़ती है और समय भी मिलता है, बस रिश्ते को फ्लरिश करने के लिए एक चाहत की जरुरत होती है.
रिलेटेबल है कहानी
रियल लाइफ में भी शर्मिला इस भूमिका से खुद को काफी रिलेट कर पाती है, उनका कहना है कि मेरे परिवार में भी कुछ लोग मेरी बात से असहमत होते है, ‘गिव एंड टेक’ का सिलसिला चलता रहता है. मैं उस पर अधिक ध्यान नहीं देती और किसी को हर्ट भी नहीं करती, लेकिन कभी-कभी एक दृढ़ निश्चय लेना पड़ता है और मैं उसे लेती हूँ. मैं सभी से बातचीत करना और दोस्ती रखना पसंद करती हूँ.
है अच्छा दौर
इस दौर को शर्मिला क्रिएटिविटी का सबसे अच्छा दौर मानती है, जहाँ सबको काम करने का मौका मिलता है. वह कहती है कि फिल्म और क्रिकेट का दौर हमेशा चलता रहता है. ये कभी बंद नहीं हो सकता, लेकिन फिल्मों में कोर को टच करना जरुरी होता है, तभी दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते है. इसके अलावा अभी फिल्मों में तकनीक काफी आ चुकी है, जो पहले नहीं थी. अगर कहानी से दर्शक खुद को नहीं जोड़ पाते है, तो आज के दर्शक रियेक्ट करते है. टेस्ट और आशाएं बदली है, इमोशनल चीजों को हटाया नहीं जा सकता. दर्शकों ने ही इसे महत्व दिया है, उन्हें वे हटा नहीं सकते. इस फिल्म की लोकेशन रियल है और पूरी विजन निर्देशक की है. जिसमे प्यार, आदर, भावनाएं आदि पूरी तरह से है, जो कहानी को सपोर्ट करती है.
जरुरी है परिवार का सहयोग
शर्मिला ने हमेशा उन टैबू को तोडा, जिसे समाज नहीं मानती थी. वह कहती है कि मैंने हमेशा उन टैबू को तोड़ा जिसे समाज मानता नहीं था, लेकिन लगता है आज ये गलत नहीं. प्रेशर बहुत होता है, इसमें मेरे पति और प्रसिद्ध क्रिकेटर टाइगर पटौदी का हमेशा साथ रहा है. मैंने शादी की, बच्चों की माँ बनी, लेकिन इस दौरान मेरे परिवार ने काम करने से मना भी किया, पर मैंने काम किया, क्योंकि मेरे साथ मेरे पति थे, उन्होंने कभी काम करने से मना नहीं किया. मैंने भी बच्चों को कभी नेगलेक्ट नहीं किया, उन्हें सिखाया है कि काम से मैं हैप्पी फील करती हूँ. अभी मेरी कुछ सोशल एक्सपेक्टेशन है, जिसे पूरा करना है. कई बार इसे सोचकर रिग्रेट होता है, लेकिन कम हो, इसकी कोशिश करनी है.
महिलाओं को आज भी हैसमस्या
पुरुषसत्तात्मक समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने में समस्याएं आज भी होती है, लेकिन शहरों में महिलाएं लकी है, उन्हें हर तरह की आज़ादी होती है, जबकि छोटे शहरों और गांव में महिलाएं अभी भी काफी समस्या का सामना करती है.
शर्मिला कहती है कि हम सभी लकी है और शहरों में रहते है. मेरे ग्रैंडमदर की शादी 5 साल की उम्र में हुई थी, पहला बच्चा 13 साल की उम्र में हुआ था. मेरी माँ को को-एड यूनिवर्सिटी में जाने की अनुमति नहीं थी. मुझे हमेशा ये पूछा गया कि शादी के बाद फिल्म में काम करने की अनुमति कैसे दी गई और मेरे बच्चे भी उसी फील्ड में है. हर साल हमारी आजादी बढ़ रही है, हमें धैर्य रखने की जरुरत है. महिलाओं के पक्ष में समाज पूरी तरह से बदल नहीं सकती, लेकिन ये भी समझना है कि महिलाएं आगे बढ़ रही है और एक महिला को दूसरी महिला को कभी क्षति न पहुंचाएं.
साथ में आयें, साथ रहे और एक दूसरे की सहायता करें. पुरुषों के बिना समाज नहीं चल सकता. समाज में महिला और पुरुष दोनों को साथ में काम करना है. महिलाये एक दूसरे को बहन की तरह देखें और किसी को जज न करें. महिलाएं कई बार दूसरी महिला या जेनरेशनके लिए बहुत अधिक जजिंग हो जाती है, ये ठीक नहीं. सभी को साथ में लेकर चलना ही हमारे लिए एक अच्छी बात है.
स्ट्रोंग महिला को होती है मुश्किलें
शर्मिला आगे कहती है कि स्ट्रोंग महिला की भूमिका फिल्म में हो या रियल लाइफ में निभाना बहुत मुश्किल होता है. परिवार का सहयोग इसमें सहायक होता है. मुझे मेरी पिता और पति का सहयोग मिला. हम तीन बहने है, मेरे पिता ने कभी लड़के की चाहत नहीं रखी. वे कहते रहे कि मेरी सभी लड़कियां बराबर है और मैं लड़के को कभी मिस नहीं करता. हम सभी वैसे ही बड़े हुए है. मेरे पति ने भी मुझे वैसे ही सहरा दिया है. मुझे उनके लिए कुछ पैक्ड नहीं था. डिनर के लिए उनका इंतजार करने जैसी स्टीरियोटाइप महिला मुझे नहीं बनना पड़ा. उन्होंने मुझे हमेशा उतनी आज़ादी दी, जितनी मुझे चाहिए थी.
कम होती है रिश्तों की अहमियत
शर्मिला आगे कहती है कि पहले बच्चा माँ के बिना नहीं रह सकता, बाद में माँ ग्रांटेड हो जाती है. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, जब मैंने शादी की तो मेरी पूरी नजर टाइगर पर था, बच्चे होने पर उनपर शिफ्ट हो गयी, अब ग्रैंड चिल्ड्रेन पर हो चुकी है. इस बीच माँ भी छूट जाती है. मैं अपनी दादी से बहुत प्रभावित रही. मेरे तीनों बच्चे हम दोनों से किसी न किसी रूप में मेल खाते है.
मेरी उम्र 38 साल है. मैं टीबी का मरीज हूं. 6 महीनों से मेरी पीठ के निचले हिस्से में बहुत तेज दर्द होता है. एक्सरे कराने पर आर्थ्राइटिस का पता चला, लेकिन दवाइयों के बाद भी बिलकुल राहत नहीं है. बैड पर लेटे हुए दर्द और तेज हो जाता है. बुखार भी जल्दीजल्दी आता है. कृपया कोई समाधान बताएं?
जवाब
आप ने जिस प्रकार अपनी समस्या का जिक्र किया है उस के वास्तविक कारण की पुष्टि केवल सीटी स्कैन या एमआरआई से ही संभव है. हालांकि आप के द्वारा बताए गए लक्षणों से यह साफ पता चलता है कि यह सिर्फ आर्थ्राइटिस तो नहीं है क्योंकि इस समस्या में सोते वक्त मरीज को दर्द में राहत मिलती है जबकि आप के साथ उलटा है. इस के अनुसार आप को रीढ़ की टीबी हो सकती है जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल कर उन्हें प्रभावित करती है संभवत: आप के साथ भी यही हुआ है. जल्द से जल्द एमआरआई करा के उचित इलाज लें.
होली मतलब रंगों का त्योहार. अपनों का साथ, मस्ती और धमाल. रंगों का ये त्योहार जितनी खुशियां लेकर आता है साथ में कुछ तकलीफें भी दे जाता है. होली के बाद लोगों को कई परेशानियों से दो चार होना पड़ता है. खासतौर पर स्किन और बालों से जुड़ी प्रॉब्लम्स तो आम बात हैं.
अगर आप होली के रंगों की खुशियों में रंगने के साथ अपनी खूबसूरती भी बरकरार रखना चाहती हैं, तो इसके लिए आपको पहले से ही तैयार होना पड़ेगा. होली में रंगों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स.
घर में तैयार करें स्क्रब
चने का आटा, शहद और दूध को मिक्स करके स्क्रब बना लें और इसे फेस और बॉडी पर स्क्रब करें. ये बॉडी से कलर हटाने में आपकी मदद करेगा. साथ ही स्किन को चमकदार और मुलायम भी बनाता है. एक्स्ट्रा पोषण के लिए मॉइस्चराइजिंग के पहले फ्रेश एलोवेरा जेल बॉडी पर लगाएं.
ऑइलिंग और मॉइस्चराइजर
रंगों के साइड इफेक्ट से अपनी स्किन को बचाने का सबसे आसान तरीका है कि आप रंग खेलने से पहले बॉडी पर ऑइलिंग करें. इसके बाद मॉइस्चराइजर का यूज करें. ये थोड़ा चिपचिपा जरूर होगा, लेकिन ये आपकी स्किन के लिए फायदेमंद साबित होगा. होली खेलने से पहले नहाएं जरूर और नहाने के बाद आइलिंग करना न भूलें.
बालों का रखें खास ख्याल
होली के बाद तुरंत बालों को अच्छे से कंडीशनिंग करें, लेकिन अगर उस दिन समय की कमी है तो दूसरे दिन भी आप ये कर सकती हैं. ये रंगों से बालों को डैमेज होने से बचाता है. दो बड़े चम्मच शहद में दो अंडे और एक बड़े चम्मच नारियल का तेल अच्छे से मिलाएं. इसे अपने बालों पर लगाएं और करीब एक घंटे तक रहने दें. इसे माइल्ड शैंपू और एक अच्छे कंडीशनर से धो लें. इस घरेलू कंडीशनिंग से आप अपने बालों को ज्यादा लाइव और खूबसूरत पाएंगी.
होली के दस दिन पहले से ही आपको अपने स्किन और बालों की केयर करनी चाहिए, ताकि नमी बरकरार रहे. होली वाला मौसम काफी ड्राई होता है. इसलिए पानी खूब पिएं और जमकर फल खाएं.
शैंपू और ऑइलिंग करें
होली के एक दिन पहले ही शाम को या होली खेलने के तुरंत पहले अपने बालों में आइलिंग जरूर करें. बहुत से लोग ये मानते हैं कि बालों को गंदा होना ही है, तो इसे शैंपू करने से क्या फायदा. लेकिन बालों में पहले से पड़ी गंदगी कलर के साथ मिलकर आपके बालों को और भी डैमेज कर सकती है. इसलिए पहले बालों को अच्छे से धो लें. इनमें कंडीशनिंग करें फिर सुखाने के बाद इसमें नारियल का तेल या ऑलिव ऑइल का इस्तेमाल करें. ये कलर को आपके स्कैल्प (बालों के जड़) तक पहुंचने से रोकता है.
नेलपेंट का डबलकोट लगाएं
होली के रंग सबसे ज्यादा हमारे नाखूनों को प्रभावित करते हैं. क्योंकि ये जल्दी छूटने का नाम ही नहीं लेता है और काफी दिनों तक हमारे नाखूनों को बदसूरत बनाए रखता है. इससे बचने के लिए नेलपेंट का डबलकोट अपने हाथों और पैरों के नाखूनों पर लगाएं. होली के बाद जब आप थिनर से अपना नेलपेंट हटायेंगे, तो आपके नाखून पहले जैसे ही खूबसूरत और बेदाग नजर आयेंगे.
चाय पीने का अपना ही एक अलग मजा होता है. चाहे वह दोस्तों के साथ हो या रिश्तेदारों के साथ. ऑफिस में बॉस के साथ चाय पीने का मौका मिले या किसी खास इंसान को होटल या अपने घर पर दिया गया चाय का इनविटेशन. चाय हर मौके के लिए परफेक्ट है.
कैंसर से बचाव में चाय के फायदे
कैंसर से बचाव में चाय कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकती है. दरअसल, चाय में पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं, जो ट्यूमर कोशिकाओं को फैलने से रोक सकते हैं. एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर इसी संबंध में कई शोध उपलब्ध हैं. इनके अनुसार, ग्रीन टी ग्लूटाथियोन एस-ट्रांसफरेज और क्विनोन रिडक्टेस जैसे डिटॉक्सिफिकेशन एंजाइम को सक्रिय करने का काम कर सकती है, जो ट्यूमर को बढ़ने से रोकने का काम कर सकते हैं. इसके अलावा, ग्रीन टी और ब्लैक टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्लेवनोइड्स (एपिकैटेचिन, एपिगैलोटेचिन, एपिकैटेचिन गैलेट) कीमोंप्रिवेंटिव (कैंसररोधी) प्रभाव दिखा सकते हैं.
हृदय के लिए फायदेमंद है चाय
संतुलित मात्रा में ग्रीन टी या ब्लैक टी का सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है. दरअसल, चाय का सेवन करने वाले लोगों में ब्लड प्रेशर, सीरम में लिपिड की मात्रा और डायबिटीज नियंत्रित रहती है. साथ ही कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है, जिससे शरीर को हृदय रोग होने की संभावना कम होती है. फिलहाल, हृदय स्वास्थ्य के मामले में चाय के बेहतर प्रभाव जानने के लिए अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है.
डायबिटीज कम करने में चाय के फायदे
एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में मधुमेह के लिए चाय के फायदे की बात कही गई है. शोध में बताया गया है कि चाय डायबिटीज के जोखिम और इससे जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मददगार हो सकती है. शोध के अनुसार, चाय इंसुलिन की सक्रियता को बढ़ाती है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. इस आधार पर कह सकते हैं कि चाय का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकता है. इस शोध में ग्रीन, ब्लैक और ओलोंग जैसी विभिन्न प्रकार की चायों को शामिल किया गया है.
(आलेख में किए गए दावों की पुष्टि हम नहीं करते, किसी भी सलाह पर अमल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें.)
अब आप सोच रहे होगें कि इतनी अलग अलग तरह की चाय हमें कहां मिल सकती है तो आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम आपको बताने वाले हैं एक ऐसे ब्रांड के बारे में जहां आपको चाय की कई वैरायइटीज मिल सकती हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में…
Sugandh Tea- 29 सालों से बेहतरीन चाय की पहचान
जी हां, सुगन्ध टी पिछले 29 सालों से चाय की कई बेहतरीन किस्में बना रही हैं जो न सिर्फ स्वाद में बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है. यहां आपको चाय की अलग अलग किस्में मिलेंगी, जिनके बारे में आप यहां क्लिकshopsugandh.comकरके डीटेल में जान सकते हैं.
इलाइची चाय –
अब आपको इलायची चाय बनाने के लिए अलग से इलायची पीसने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि सुगन्ध लाया है एक अनोखी इलायची चाय जिसमें चाय पत्ती के साथ असली इलायची कूट के डाली गई है ताकि आपके चाय पीने का अनुभव और भी खास हो जाए.
2. मसाला चाय-
बात करते हैं हमारी स्पेशल मसाला चाय के बारे में जो आपको ताजगी भी देगी और एक जबरदस्त स्वाद भी. इस चाय की खास बात ये है कि इसमें आपको अलग अलग मसालों का फ्लेवर एक ही चाय में मिल जाएगा. इसमें अदरक, लौंग, इलायची और काली मिर्च का ऐसा स्वाद है जिस वजह से आप इसे बार बार पीना चाहेंगे.
3. असम चाय-
उच्च गुणवत्ता वाली चाय की पत्तियों से बनी असम चाय एक अलग ही स्वाद और ताजगी का एहसास देती है. सुगन्ध अपनी गोल्ड चाय में कुछ ऐसी ही बेहतरीन और चुनिंदा बगानो से लायी गई चाय आपके लिए पेश करता है. ये चाय कम मात्रा में ही बनाई जाती है