औरत ही नहीं सहती तलाक की पीड़ा

बदलते सामाजिक मानदंडों के साथ ही आज वैवाहिक जीवन के पवित्र मूल्यों में भी कमी आई है. यही कारण है कि पिछले एक दशक में तलाकों की संख्या में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी हुई है.

कुछ दशकों पहले तलाक लेने की पहल व हिम्मत सिर्फ पुरुष वर्ग ही रखता था, परंतु आज के इस नारी क्रांति कहे जाने वाले युग में महिलाएं भी तलाक के लिए पहल करने की हिम्मत रखने लगी हैं. आज की आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, स्वतंत्र विचारों वाली, जागरूक नारी, पति की जायजनाजायज मांगों के आगे ?ाकने को कतई तैयार नहीं.

यही कारण है कि सड़ती हुई शादी और गलते हुए रिश्तों की बदबूदार घुटन से बाहर निकल कर खुले आसमान में सांस लेने की हिम्मत कर वह खुद ही अलग रहने का फैसला कर लेती है. आज की नारी अपने व्यक्तित्व को निखार कर अपना वजूद कायम करना चाहती है.

जिस तरह शादी के बंधन में बंध कर 2 शरीर, 2 जिंदगियों का मिलन हो जाता है और उन के सुख, दुख आपस में बंट जाते हैं, उसी प्रकार तलाकरूपी इस त्रासदी का कुप्रभाव भी दोनों पर बराबर ही पड़ता है.

आमतौर पर तलाकशुदा महिला के आंसुओं के चर्चे काफी दिनों तक लोगों की जबान पर रहते हैं, पर पुरुषों को भीतर ही भीतर सिसकते हुए शायद ही किसी ने देखा हो. महिला जहां चाहेगी वहां अपने ऊपर हुए अत्याचारों का जिक्र कर सहानभुति हासिल करने में कामयाब रहेगी, जबकि पुरुष इन आंसुओं को पीने की कोशिश में खुद को और अधिक समेट लेता है. उस के लिए यह स्वीकार करना आसान नहीं होता कि उस की पत्नी ने उसे नकार दिया है, न सिर्फ नकारा है बल्कि अपनी जिंदगी से बेदखल भी कर दिया है.

तलाक के बाद पहले 6 महीने

एक मनोवैज्ञानिक के अनुसार, ‘‘यदि पत्नी तलाक ले, ऐसे में पति के अंह को ठेस लगती है. चाहे पुरुष कितना ही दंभी तथा जिद्दी क्यों न हो, यदि वह जरा सा भी संवेदनशील है तो उस के लिए तलाक के बाद के पहले 6 महीने अत्यधिक कष्टकारी हो जाते हैं.’’

भारतीय परिवेश में पुरुष का पालन ही इस प्रकार होता है कि उसे बचपन से ही कमान अपने हाथ में रखने की आदत सी पड़ जाती है और इसी प्रकार उस के पौरुष को यह मानना बहुत मुश्किल हो जाता है कि जिस महिला को वे अधिकार अपने जीवन में लाया था, वह उस के स्वामित्व को ठोकर मार कर चली गई.

शारीरिक बनावट में पुरुष चाहे स्त्री से अधिक बलशाली होगा पर भावनात्मक रूप से वह बेहद कमजोर और एकाकी होता है. यही कारण है कि तलाक जैसा फैसला नारी को जहां अपने परिवार के करीब लाता है वहीं पुरुष अपने तलाक के बाद पारिवारिक रिश्तों से और दूर हो जाता है. रिश्तों पर से उस का विश्वास उठ जाता है.

टूट जाता है मनोबल

हर व्यक्ति के अंदर एक बच्चा होता है. यह बच्चा तलाकशुदा पुरुष को यह मानने नहीं देता कि उस की पत्नी ने उसे छोड़ दिया है. इस सच को नकारने के लिए वह बच्चों की ही तरह रूठोमनाना, गुस्सा, खुद पर जानलेवा हमला जैसे नखरे कर सभी को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है. समय के साथ जैसे ही उस का मन यह मानने लगता है कि उस की पत्नी ने उसे छोड़ दिया है तो उस का आक्रोश बढ़ता जाता है. यह आक्रोश कई बार उसे खुद को हानि पहुंचाने जैसे निर्णय लेने पर मजबूर कर देता है.

ऐसा पुरुष भविष्य के प्रति आशाहीन हो जाता है. सचाई का सामना करने से डरता है और खुद को ड्रग्स या शराब में डुबो देता है. घंटों कमरे में बंद रह कर आत्मग्लानि में डूबता है, दुनिया से भागना चाहता है. उन का मनोबल टूट जाता है और उस की कार्यक्षमता लगभग शून्य हो जाती है.

ऐसे कई केस होते हैं. जहां पुरुषों का इस मानसिक यातना के चलते नर्वस ब्रेकडाउन हो जाता है. वे आत्मघाती हो जीवन से निराश होने लगते हैं. अत: शुरू का कुछ समय उन्हें अकेलेपन से बच कर परिवार और रिश्तेदारों के बीच ही अपना अधिक समय बिताना चाहिए.

साल गुजरते

सम?ादार और आत्मस्वाभिमानी पुरुष अपने को इस मानसिक यातना से उबारने की कोशिश करते हैं. ऐसे में कई बार वे मनोवैज्ञानिकों के पास भी जाते हैं. अपने काम पर ध्यान लगा कर जीवन को सुचारु रूप से चलाने का भरपूर प्रयास करते हैं. परंतु जीवन के प्रति निराशाओं और आत्मविश्वास में कमी अभी भी बरकरार रहती है. ये हर रिश्ते को शक की निगाह से देखते हैं और महिलाओं के प्रति इन का आदरभाव कम हो जाता है.

तलाक के पलों को कड़वा स्वाद और शादी के दिनों के कुछ सुनहरे पल अभी मन के किसी कोने में जिंदा होते हैं जो कभीकभी एक टीस सी उठा जाते हैं. अभी भी वे किसी भी प्रकार के भावनात्मक लगाव से बचते हैं और इस अनचाहे तलाक से उन के मन में भविष्य में होने वाले रिश्तों के प्रति भी एक अजीब सा डर बैठ जाता है.

नए जीवन की शुरुआत

तलाकशुदा महिला को जितने प्रेम, सम्मान और देखभाल की आवश्यकता अपने मित्रों और रिश्तेदारों से होती है, पुरुषों को उस से कम नहीं होती. ऐसे नाजुक समय में यदि कोई मित्र या करीबी रिश्तेदार सच्चे मन से उस की मदद करें तो उसे इस मानसिक तनाव से उबरने में मदद मिल सकती है और वह पूरे आत्मविश्वास के साथ जीवन को एक नई दिशा दे सकेगा.

डिप्रैशन से पूरी तरह निकलने में करीब 11/2-2 साल लग ही जाते हैं. कई बार जागरूक पुरुष ट्रीटमैंट के लिए भी आते हैं. जैसेजैसे पुरुष का आत्मविश्वास वापस आता है, उस की कार्यक्षमता भी बढ़ने लगती है और जिंदगी के प्रति आशाएं फिर सिर उठाने लगती हैं.

ऐसे में सामाजिक और पारिवारिक मांगों के चलते पुरुष पुन: विवाह में बंधने को तैयार हो जाते हैं. परंतु एक तलाकशुदा पुरुष के लिए दोबारा घर बसाना बहुत कठिन होता है, चूंकि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षाकृत अधिक शक्की होती हैं. वे बिना पूरी छानबीन के तलाकशुदा पुरुष का दामन नहीं थामना चाहती.

जिंदगी खत्म भी नहीं हो जाती पुरुषों को चाहिए कि वे बीती ताही बिसार कर आगे की सुध लें कहावत पर अमल करें. परिवर्तन जीवन का प्राथमिक सत्य है. अत: अपनी कमियों को सुधार कर दोबारा इस संबंध में कदम रखें और दूसरा विवाह न भी करना चाहें तो अपने सत्कर्मों से जिंदगी को नए आयाम दें. आखिर और भी गम हैं जमाने में मुहब्बत के सिवा.

घरेलू हिंसा कानून जैसे कानून पतियों को और ज्यादा भयभीत रखते हैं और वे साधारण जीवन ही नहीं जी पाते. तलाकशुदा पुरुषों को तो पारिवारिक व मित्रों की पार्टियों में भी रस्मी निमंत्रण देते हैं. कोई 2 बार उन से आने को नहीं कहता. पुरुष की मांबहनें उसे दोष देने लगती हैं और पिता, भाई सारी समस्याओं से अपने को दूर कर लेते हैं.

ऐसे पुरुष कई बार दूसरी औरत ढूंढ़ने के चक्कर में औनलाइन सर्च करने लगते हैं और ?ां?ाटों में फंस सकते हैं. उन में से निकलना आसान नहीं होता.

तलाकशुदा पुरुष का विवाह हो भी जाए तो पत्नी बड़े ठसके से रहती है कि कितना बड़ा एहसान किया है. वह देती कम है, मांगती ज्यादा है. अभी भी समाज में तलाकशुदा औरतें इतनी नहीं कि कोई मनचाही आसानी से मिल जाए.

Holi 2023: ज्वालामुखी- रेनु को कैसे हुआ गलती का एहसास

‘‘विक्रम बेटा, खेलने बाद में जाना, पहले अस्पताल में टिफिन दे कर आओ,’’ मेनगेट की ओर जाते हुए विक्की को रेनू ने बेडरूम में से आवाज दी.

‘‘टिफिन तैयार है तो रुकता हूं, नहीं तो मैं आधे घंटे में आ कर ले जाता हूं,’’ विक्की को खेलने जाने की जल्दी थी.

‘‘तैयार है, बेटा, अभी ले कर जाओ,’’ तेज कदमों से चलती हुई रेनू किचन की तरफ बढ़ी और टिफिन अपने 14 वर्षीय बेटे के हाथ में थमा दिया.

अस्पताल में टिफिन देने का सिलसिला पिछले 10 दिनों से चला आ रहा है क्योंकि वहां पर 57 वर्षीय रेनू की सास सुमित्रा देवी दाखिल हैं. कुछ दिन पहले ही वह अपने आश्रम के स्नानगृह में फिसलन की वजह से गिर पड़ी थीं और उन के कूल्हे की हड्डी टूट गई थी. बहुत यातना से गुजर रही थीं बेचारी.

रेनू के पति राजीव प्रतिदिन सुबहशाम मां को देखने जाते थे और बेटा दोनों टाइम टिफिन पहुंचाता था और रात भर दादी के पास भी रहता था. अस्पताल घर के पिछवाड़े होने के बावजूद रेनू अभी तक सास को देखने नहीं गई थी. राजीव को इस व्यवहार से बेहद दुख पहुंचा था लेकिन सबकुछ उस के वश के बाहर था. वह रेनू के साथ जबरदस्ती कर के घर में किसी प्रकार की कलह नहीं चाहता था. यही वजह है कि 11 वर्ष पहले राजीव के पिताजी की मृत्यु के पश्चात 4 बेडरूम और हाल का फ्लैट होते हुए भी राजीव को अपनी मां को आश्रम में छोड़ना पड़ा क्योंकि वह नहीं चाहता था कि सासबहू दो अजनबियों की तरह एक छत के नीचे रहें. घुटन भरी जिंदगी न तो राजीव जीना चाहता था और न ही सुमित्रा देवी. हालांकि स्वयं सुमित्रा देवी ने ही वृद्धाश्रम में रहने का फैसला किया था लेकिन फिर भी घर छोड़ते वक्त उन्हें बेहद तकलीफ हुई थी.

बेटे के पास भी कोई चारा नहीं था क्योंकि सुमित्रा देवी का घर नागपुर में था जहां वह अपने पति के साथ रहती थीं और उन का इकलौता बेटा रहता था मुंबई में. बेटे के लिए रोजरोज आना मुश्किल था. वह मां को अकेले छोड़ नहीं सकता था. राजीव ने यही मुनासिब समझा कि मां जो कह रही हैं वही ठीक है. उस ने मां को मुंबई के ही ‘कोजी होम’ वृद्धाश्रम में भरती करवा दिया जहां वह पिछले 11 वर्षों से रह रही हैं और राजीव प्रत्येक रविवार का दिन अपनी मां के साथ गुजारता है. उन की जरूरत की चीजें पहुंचाता है, सुखदुख की बातें करता है और शाम को घर वापस चला आता है.

आज जब राजीव रात को अस्पताल से वापस आया तो उस ने रेनू से कोई बात नहीं की. स्नान किया और खाना खा कर चुपचाप अपने कमरे में जा कर लेट गया. उसे इस बात की बेहद तकलीफ हो रही थी कि 11 दिन से मां घर के पास वाले अस्पताल में हैं और उस की पत्नी औपचारिकतावश भी उन्हें देखने नहीं गई.

रेनू जब रसोई का काम निबटा कर शयनकक्ष में आई तो पति को दीवार की तरफ मुंह किए लेटे हुए पाया. यह आज की ही बात नहीं है यह तनाव पिछले 11 दिनों से घर में चल रहा है. रेनू भी दूसरी दीवार की तरफ मुंह घुमा कर लेट गई. नींद तो जैसे पंख लगा कर उड़ गई थी.

शादी के बाद के 5 बरस उस की आंखों के आगे से गुजरने लगे. शादी होते ही सासससुर की शिकायतें शुरू हो गई थीं हर छोटीबड़ी चीज को ले कर. न तो उन्हें रेनू के मायके से आई हुई कोई चीज पसंद थी न ही उस का बनाया हुआ खाना. रोज किसी न किसी चीज में नुक्स निकाल दिया जाता, यहां तक कि रेनू की आवाज में भी, कहते कि यह बोलती कैसे है.’

रेनू की आवाज बहुत ही बारीक और बच्चों जैसी सुनाई पड़ती थी. हालांकि यह सब किसी के वश की बात नहीं है लेकिन सासससुर को इस बात पर भी एतराज था, वे समझते थे कि रेनू बनावटी आवाज बना कर बात करती है.

रेनू की कोशिश रहती कि घर के सभी सदस्य खुश रहें मगर ऐसा हो न पाता. कभीकभी तंग आ कर पलट कर वह जवाब भी दे देती थी. जिस दिन जवाब देती उस से अगले ही दिन घर में अदालत लग जाती और उसे राजीव के दबाव में आ कर सासससुर से माफी मांगनी पड़ती. राजीव का कहना था कि अगर इस घर में रहना है तो इस घर की मिट्टी में मिल जाओ. रेनू के सुलगते हुए दिल में मुट्ठी भर राख और जमा हो जाती.

रेनू के पिताजी के खून में प्लेट- लेट्स काउंट बहुत कम हो गया था. उन की बीमारी बढ़ती ही जा रही थी. उस दिन जब फोन आया कि पिताजी की तबीयत बहुत खराब है, जल्दी आ जाओ तो रेनू ने अपने सासससुर से, अपने पिताजी से मिलने शिमला जाने की इजाजत मांगी तो ससुरजी ने हंसते हुए कहा, ‘बहू, यह कौन सी नई बात है, उन की तबीयत तो आएदिन खराब ही रहती है.’

‘पता नहीं क्या बीमारी है, बिस्तर पर एडि़यां रगड़ कर मरने से अच्छा है मृत्यु एक ही झटके में आ जाए,’ रेनू की सास सुमित्रा देवी बोली थीं.

यह बात उन्होंने अपने बारे में कही होती तो और बात थी मगर उन्होंने तो निशाना बनाया था रेनू के पिताजी को. सुन कर रेनू का दिमाग झन्ना उठा. उस ने वक्र दृष्टि से दोनों को निहारा.

सासससुर दोनों स्तब्ध रह गए. बैठक में बैठे राजीव ने भी सब देखासुना. किसी को भी जैसे काटो तो खून नहीं. कोई कुछ नहीं बोला.

2 दिन पश्चात रेनू के पिता की मृत्यु हो गई.

राजीव स्वयं रेनू को ले कर शिमला गया…लेकिन तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था. पिता की मृत्यु ने राख में दबे ज्वालामुखी को और तेज कर दिया था. रेनू अब जिंदगी भर सासससुर की शक्ल भी नहीं देखना चाहती थी.

सुबह उठी तो रेनू की आंखें रात भर नींद न आने की वजह से लाल थीं. बेटा अस्पताल से आ कर स्कूल के लिए तैयार होने लगा. रेनू रसोई में चली गई. राजीव चुपचाप दाढ़ी बना रहा था. सभी के घर में मौजूद होते हुए भी एक चुप्पी व्याप्त थी.

वक्त गुजरता गया. सुमित्रा देवी के साथ हुई दुर्घटना को 8 महीने गुजर गए.

आज रेनू जब सो कर उठी और जैसे ही पैरों पर शरीर का भार पड़ा, वह असहनीय पीड़ा से कराह उठी. वह चलने में लगभग असमर्थ थी. फिर शुरू हुआ डाक्टरों, परीक्षणों और दवाइयों का सिलसिला. एक सप्ताह गुजर गया और रेनू बिलकुल भी उठने के काबिल न रही. डाक्टर ने रिपोर्ट देख कर बताया कि रीढ़ की हड्डी में नीचे वाली बोन घिस कर छोटी हो गई है. दवाइयां और कमर पर बांधने के लिए बैल्ट रेनू को दे दी गई. पूरे दिन भागभाग कर काम करने वाली रेनू का सारा वक्त बिस्तर पर गुजरने लगा. राजीव प्रतिदिन सुबह खाना बनाता, अपना और बेटे का टिफिन भरता तथा रेनू के लिए हौट केस में भर कर रख जाता. रेनू पूरा दिन कुछ न कुछ सोचती रहती. अंदर ही अंदर वह बुरी तरह डर गई थी. उसे लगने लगा कि वह किसी काम की नहीं रही है, पति पर बोझ बन गई है. अगर यह बीमारी ठीक न हुई तो वह जीते जी मर जाएगी.

अचानक सास का चेहरा उस की नजरों के सामने कौंध जाता, ‘कितनी तकलीफ हुई होगी मेरी सास को, कितना कष्ट उस ने अकेले सहा, 11 वर्ष तक अकेलेपन का संताप झेला, बेटाबहू होते हुए भी, परिवार होते हुए भी तकलीफ से अकेली जूझती रही. मैं ने जिंदगी में…सिर्फ खोया ही खोया है. जिन्हें मैं ने इतनी तकलीफ दी क्या कभी उन के दिल से मेरे लिए दुआ निकली होगी.

‘मैं सबकुछ भुला कर उन्हें अपना बना सकती थी लेकिन मैं ने कोशिश ही नहीं की. अगर सासससुर सही नहीं थे तो मैं भी तो गलत थी. इनसान को कभीकभी दूसरों को माफ भी कर देना चाहिए. कितने वर्षों से नफरत के ज्वालामुखी को परत दर परत अपने अंदर जमा करती आ रही हूं. मैं आज तक नहीं जान पाई कि यह ज्वालामुखी मुझे ही झुलसा कर खत्म किए जा रहा है. अब और नहीं. मैं बिना किसी बोझ के निर्मल जीवन जीना चाहती हूं.’ रेनू ने मन ही मन एक दृढ़निश्चय किया कि वह राजीव के साथ स्वयं जाएगी मांजी को लेने. बस, थोड़ी सी ठीक हो जाए. वह अगर आने के लिए नहीं मानेंगी तो भी वह पैर पकड़ कर, खुशामद कर के उन्हें मना लेगी. इन खयालों ने ही रेनू को बहुत हलका बना डाला. वह जल्दी ठीक होने का इंतजार करने लगी.

शाम को राजीव जब आफिस से वापस आया तो रेनू के चमकते चेहरे को देख उसे बहुत संतोष हुआ. जब रेनू ने अपना इरादा बताया तो राजीव कृतज्ञ हो गया. उस के मन में आया कि दुनिया भर की खुशियां रेनू पर न्योछावर कर दे, प्रकट में वह कुछ बोला नहीं. बस, प्यार से उस के बालों को सहलाने लगा और झुक कर उस का माथा चूम लिया.

Holi 2023: होली से पहले यूं बदलें घर का इंटीरियर

होली पर हर इंसान कुछ नया करना चाहता है खासतौर पर गृहिणियां अपने घर की सजावट को ले कर बड़ी फिक्रमंद रहती हैं. होली में ऐसा क्या करें, क्या बदल दें कि घर के कोनेकोने में नएपन का एहसास जाग उठे? नए साल में क्या नया ले आएं कि देखते ही सब वाहवाह कर उठें? सब से खास होता है घर का ड्राइंगरूम, जिस में बाहर के लोग और पति के दोस्त आदि आ कर बैठते हैं.

वे ड्राइंगरूम के लुक से ही गृहिणी की पसंद, सलीका और क्रिएटिविटी का अंदाजा लगा लेते हैं. इसलिए अधिकतर महिलाएं नए साल में नया सोफा, नए परदे, नया कालीन खरीद कर ड्राइंगरूम का लुक बदलने को बेताब रहती हैं. इंटीरियर डैकोरेटर से भी खूब सलाहमशवरा करती हैं. इस सब में उन का काफी पैसा भी लग जाता है.

मगर इस बार नए साल में हम आप को घर में जो चेंज लाने की सलाह दे रहे हैं उस में न सिर्फ आप के पैसों की बचत होगी, बल्कि घर का लुक भी कुछ ऐसा बदल जाएगा कि लोग आप की सोच और कलात्मकता की तारीफ करते नहीं थकेंगे. इस के साथ ही आप के घर का यह नया लुक आप के अपनों के बीच संबंधों को भी प्रगाढ़ करेगा. आप एकदूसरे से गजब की नजदीकियां महसूस करेंगे. तो आइए जानें क्या है यह नया अंदाज:

कमरे की शोभा

आमतौर पर मध्यवर्गीय या उच्चवर्गीय घरों में प्रवेश करते ही सामने सुंदर फर्नीचर, परदे, शोपीस आदि से सुसज्जित ड्राइंगरूम नजर आता है. बंगले या कोठी में भी पहला बड़ा कमरा बैठक के रूप में अच्छे सोफासैट और सैंट्रल टेबल से सजा होता है. खिड़कीदरवाजों पर खूबसूरत परदे, साइड टेबल पर शोपीस, फ्लौवर पौट या इनडोर प्लांट्स कमरे की शोभा बढ़ाते हैं.

आजकल टू बीएचके और थ्री बीएचके फ्लैट में एक बड़े हौल में पार्टीशन कर के सामने की तरफ ड्राइंगरूम और पीछे की तरफ डाइनिंगरूम बनाया जाता है. कहींकहीं दोनों पोर्शन के बीच पतला परदा डाल कर अलग कर देते हैं, तो कहींकहीं इस की जरूरत महसूस नहीं होती है. ड्राइंगरूम और डाइनिंग एक ही हौल में होते हैं.

डाइनिंगरूम में डाइनिंग टेबल के साथ कुरसियां, लकड़ी के शोकेस में सजी क्रौकरी और दीवार में अलमारियां, अधिकांश घरों की रूपरेखा कुछ ऐसी ही होती है. बैडरूम भी महंगे बैड, ड्रैसिंग टेबल, साइड टेबल्स, अलमारियों आदि से सुसज्जित होता है. फिर बच्चों का स्टडीरूम, जिस में कंप्यूटर टेबल चेयर, किताबों की अलमारी, छोटी सेट्टी, बैड, स्टूल, बीन बैग जैसी बहुत सी चीजें भरी होती हैं.

एक नया घर खरीदें तो उस में फर्नीचर पर होने वाला खर्चा लाखों में आता है. अमीर व्यक्ति हों तो करोड़ों खर्च देते हैं फर्नीचर पर. लेकिन विभा ने अमीर होते हुए भी घर को सजाने में फर्नीचर को महत्त्व नहीं दिया. उन के घर में नाममात्र का फर्नीचर कहींकहीं ही दिखता है. विभा का पूरा घर जमीन पर सजा हुआ है. ड्राइंग से ले कर बैडरूम तक फर्श पर है.

कलात्मक और रईसी लुक

विभा के घर के फाटक में प्रवेश करते ही हरेभरे बगीचे के बीच बनी पत्थर की एक सड़क पोर्टिको तक जाती है. 3 छोटी सीढि़यों के दोनों सिरों पर एक के ऊपर एक रखे 3-3 कलात्मक कलश और उन पर रखे फूल आगंतुकों का स्वागत करते हैं. सीढि़यां चढ़ते ही बाईं साइड पर जूतेचप्पल उतारने की व्यवस्था है क्योंकि दरवाजे के पास से ही उन का पूरा ड्राइंगरूम खूबसूरत मखमली कारपेट से आच्छादित है.

सामने की दीवार से ले कर आधे कमरे तक ऊंचे गद्दों पर रंगीन चादर के ऊपर विभिन्न रंगों और डिजाइनों के अनेक गावतकिए किसी राजेमहाराजे के दरबार सा एहसास दिलाते हैं. बीचबीच में चायपानी आदि के कपगिलास रखने के लिए साधारण लकड़ी के जो छोटे स्टूल्स हैं उन के टौप पर विभा ने स्वयं औयल पेंट से खूबसूरत बेलबूटे उकेरे हैं, जो देखने में कलात्मक लगते हैं और रईसी लुक देते हैं.

ड्राइंगरूम के दूसरे कोने पर छोटे गद्दे पर मखमली चादर और गावतकिए लगा कर संगीत कौर्नर बनाया गया है जहां विभा ने तानपुरा और हारमोनियम रख रखा है. फुरसत के क्षणों में वे इस कोने में बैठ कर खुद रागरागनियों में डूब जाती हैं. कलात्मक नेचर की विभा के अधिकतर दोस्त गीतसंगीत में रुचि रखने वाले हैं.

वीकैंड पार्टी या किसी के जन्मदिन के अवसर पर आए मेहमानों के लिए मुख्य आकर्षण यह संगीत कौर्नर ही होता है. वाद्ययंत्र छेड़ते ही हरकोई गाने के लिए उत्सुक दिखने लगता है.

गावतकियों के सहारे फर्श पर सजी महफिल जो मजा देती है वह लुत्फ महंगे सोफों पर बैठ कर तो कतई नहीं उठाया जा सकता है. जमीन पर सब के साथ बैठने से अजनबियों के बीच भी घर जैसा वातावरण बन जाता है और बातचीत में आत्मीयता स्वयं ही उत्पन्न हो जाती है.

सुंदर दिखेगा कोनाकोना

ड्राइंगरूम की एक दीवार में बनी शैल्फ में प्रसिद्ध लेखकों की किताबें करीने से सजी हुई हैं, शैल्फ के नीचे 2 छोटे बीन बैग रखे हैं, जहां आराम से बैठ कर किताबें पढ़ने का आनंद लिया जा सकता है. कोनों में रखी तिपाइयों पर फ्लौवर पौट में ताजे फूल और सुंदर कैंडल स्टैंड में सुगंधित कैंडल्स लगी हैं. कुल मिला कर विभा का ड्राइंगरूम एक सुंदर आश्रम सा प्रतीत होता है.

घर के भीतर एक छोटे बरामदे के साथ ओपन किचन और डाइनिंग एकसाथ हैं. डाइनिंगहौल के फर्श पर भी कारपेट बिछा है. विभा ने प्राचीन पद्धति के अनुरूप 1 फुट की ऊंचाई वाले लंबे तख्त को डाइनिंग टेबल का रूप दे कर उसे कमरे के बीचोंबीच लगाया है. इस पर सफेद चादर बिछा कर बीच में एक छोटा फ्लौवर पौट ताजे फूलों का रखा है. इस नीची टेबल के चारों तरफ बैठने के लिए कारपेट पर चौकोर गद्दियां बिछाई गई हैं जिन पर खाने के लिए पुराने स्टाइल में आलथीपालथी मार कर बैठते हैं. फर्श से कम स्तर पर उठा हुआ यह मंच फर्श पर बैठने को अधिक आरामदायक और सुविधाजनक बनाता है खासकर वृद्ध लोगों के लिए.

विभा कहती हैं कि पुराने ग्रंथों में भोजन करने का यह तरीका बहुत उत्तम माना गया है. किचन से गरमगरम खाना और चपातियां आतीजाती हैं और घर के सभी सदस्य एकसाथ नीचे बैठ कर खाने का लुत्फ उठाते हैं. विभा के घर आने वाले मेहमानों को भोजन परोसने का यह तरीका बहुत लुभाता है.

पुराने समय की अलग बात

पुराने समय को याद करें तो भारतीय भोजन पद्धति में भी रसोईघर में चूल्हे के निकट ही आसन बिछा कर गृहिणी सब को भोजन परोसती थी और तवे से उतरी गरमगरम रोटी 1-1 कर सब की थाली में डालती जाती थी.

विभा अपने अधिकतर काम नीचे जमीन पर बैठ कर करती हैं. इस से उन के कूल्हों, पैरों और घुटनों की अच्छी ऐक्सरसाइज होती है. विभा के घर के किसी भी सदस्य को मोटापे और जोड़ों के दर्द की समस्या नहीं है और उस की वजह है रहनसहन का यह तरीका, जिस में सभी कार्य जमीन पर बैठ कर किए जाते हैं. यहां तक कि इस घर में सब के सोने की व्यवस्था भी जमीन पर ही की गई है.

घर के किसी कमरे में कोई पलंग नहीं है. इस की जगह कारपेट पर मोटे गद्दे और उन पर चादरतकिए की व्यवस्था है. प्रत्येक गद्दे के सिरहाने दोनों साइड पर रखे छोटे स्टूल पर टेबल लैंप लगा है, साथ ही आवश्यक सामान रखने की व्यवस्था है.

बाजार की चकाचौंध

पारंपरिक रूप से भी भारतीय घरों में लोग हमेशा फर्श पर कम ऊंचाई पर बैठने के तख्त रखते थे या फर्श पर ही बैठने का इंतजाम करते थे. इन दिनों सिमटते घरों के कारण फर्नीचर के बजाय एक बार फिर यही परंपरा लोकप्रिय हो रही है. ऐसा इसलिए है क्योंकि जगह घेरने वाले फर्नीचर को हटा देने से कमरे में अच्छीखासी जगह हो जाती है और अधिक लोगों को वहां संयोजित किया जा सकता है.

फर्श पर बैठने से भारी, महंगे फर्नीचर का खर्च भी बचता है और उस बचत को हम किसी अन्य जरूरी कार्य के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. हर चीज फर्श पर होने से छोटे बच्चो के ऊंचाई से गिरने और चोट लगने, फर्नीचर से गिर कर या उस से टकरा कर अपने को जख्मी कर लेने का खतरा भी नहीं रहता है. फर्श पर बैठक रखने से बच्चों की सुरक्षा की चिंता करने की जरूरत नहीं रहती है.

बाजार ने अपनी चकाचौंध से हमें आकर्षित किया और हम ने अपने घरों को अनावश्यक और महंगे फर्नीचर से भर लिया. बाजार हर पल किसी न किसी नई चीज से हमें लुभाने की कोशिशों में रहते हैं. पर क्या कभी हम ने इस बात पर ध्यान दिया है कि सोफे या ऊंची कुरसियों पर अलगअलग बैठ कर हम कितना संकुचित सा महसूस करते हैं, एकदूसरे से कैसे फौर्मल यानी औपचारिक से होते हैं, जबकि जमीन पर इकट्ठे बैठने से हमारे बीच आत्मीयता बढ़ती है. हम खुल कर हंसीमजाक करते हैं. हमारे बीच कोई बनावटीपन नहीं रहता.

याद करिए जब जाड़े की नर्म धूप में मां चटाई बिछा कर बैठती थीं तो कैसे सभी धीरेधीरे उस चटाई पर आ जमते थे. वहीं बैठ कर खाना खाते और गलबहियां करते दिन गुजारते थे. वैसी इंटिमेसी महंगे फर्नीचर पर बैठ कर तो कभी पैदा नहीं हो सकती है. तो आइए इस नए साल में प्रवेश करते हुए हम अपनों से नजदीकियां बढ़ाएं और घर को फर्नीचर से आजाद करें.

नाश्ते मे बनाएं रागी परांठा

फेस्टिव सीजन में अगर आप मीठा खाकर परेशान हो गए हैं तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं रागी परांठा की रेसिपी. इस रेसिपी को आप अपनी फैमिली और फ्रेंड्स को खिलाकर तारीफ पा सकते हैं.

सामग्री आटा बनाने की

-1 कप रागी का आटा

– थोड़ा सा घी

– नमक स्वादानुसार.

सामग्री स्टफिंग की

– पनीरअनारदानाधनियापत्ती कटी.

विधि

सब से पहले रागी में नमकघी व पानी डाल कर डो तैयार करें. उस के बाद पनीर को मैश कर के उस में सारी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं. फिर इस स्टफ को डो में भर कर रोल बनाएं और तवे पर सेक कर दही के साथ गरमगरम सर्व करें.

2- अल्फांसो ऐंड  काफिरलाइम रिसोटो

सामग्री

-120 ग्राम पके रिसोटो चावल

– 15 ग्राम औलिव औयल

– 10 ग्राम प्याज बारीक कटा

– 10 ग्राम अदरक बारीक कटी

– 5 ग्राम अजवाइन

– 10 ग्राम पार्सले कटी

– 15 ग्राम आम के टुकड़े

– 20 ग्राम मैंगो पल्प

-15 ग्राम काफिरलाइम कटा

– 5 ग्राम कालीमिर्च

-10 ग्राम परमेसन चीज

– नमक स्वादानुसार.

सामग्री गार्निशिंग की

– 5 ग्राम फ्राइड गिलास नूडल्स

– 5 ग्राम भुनी गाजर व मैंगो स्किन

-थोड़ी सी धनियापत्ती कटी.

विधि

पैन गरम कर के औलिव औयल डाल कर प्याजअदरक व अजवाइन डालें और अच्छी तरह चलाएं. फिर इस में मैंगों पल्पफ्रैश पार्सले और काफिरलाइम डालें. इसी दौरान इस में पके रिसोटो चावल और बाकी सारी चीजें डाल कर अच्छी तरह से मिक्स होने तक मिलाएं. फिर इस में आम के टुकड़े डाल कर थोड़ा और पकाएं. इस के बाद इस में नमककालीमिर्च पाउडर व परमेसन चीज डाल कर क्रीमी लुक आने तक पकने दें. फिर आंच से उतर कर गिलास नूडल्सगाजरमैंगो स्किन व धनियापत्ती से सजा कर सर्व करें.

3- नोंगु पाल

सामग्री

– 500 एमएल दूध

– 8 टुकड़े नोंगु (आइस ऐप्पल)

– 5 ग्राम बादाम कटे

– 40 ग्राम चीनी

– 2 ग्राम इलायची

– थोड़ा सा केसर.

विधि

दूध को अच्छी तरह उबाल कर ठंडा होने के लिए फ्रिज में रखें. फिर उस में केसर डालें. अब आइस ऐप्पल के छिलके उतार कर पकी प्यूरी तैयार करें. जब दूध ठंडा हो जाए तो इस में आइस ऐप्पल की प्यूरी डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. अब बचे आइस ऐप्पल के टुकड़ों को खीर में डालें और फिर केसर व बादाम के टुकड़ों से सजा कर सर्व करें.

तीसरी बार शादी के जोड़े में दिखीं Rakhi Sawant, फैंस बोले- खत्म करो ड्रामेबाजी

एक्स बिग बॉस कंटेस्टेंट और ड्रामा क्वीन के नाम से मशहूर अदाकारा राखी सावंत का हाल ही में एक लेटेस्ट वीडियो सामने आया. जिसमें अदाकारा ब्राइडल लुक में दिखीं.

राखी सावंत ने फिर पहना दुल्हन का जोड़ा

बॉलीवुड फिल्म स्टार राखी सावंत की लेटेस्ट तस्वीरें सोशल मीडिया पर धमाल मचा रही हैं. अदाकारा राखी सावंत एक बार फिर से दुल्हन के रूप में नजर आईं. अपने पति आदिल खान दुर्रानी के साथ घरेलू हिंसा मामले में कोर्ट के चक्कर काट रही अदाकारा राखी सावंत का ये लुक देख लोग भी दंग रह गए. अदाकारा राखी सावंत के इस लुक ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. राखी सावंत के दुल्हन लुक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. साथ ही लोग हैरान हैं कि आखिर अदाकारा दुल्हन के लिबास में क्यों हैं. क्या वो तीसरी शादी करने वाली हैं.

 

 

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तो क्या अदाकारा राखी सावंत फिर से शादी रचाने वाली हैं?

अदाकारा का ये रुप लोग भी कंफ्यूज हो गए हैं. कई लोगों के मन में सवाल उठा कि क्या अदाकारा फिर से शादी रचाने जा रही हैं

राखी सावंत ने खुद बताई वजह

हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हैं. अदाकारा ने खुद इस बात का खुलासा किया कि वो दोबारा शादी नहीं करने वाली हैं। ये महज उनका एक गेटअप है.

 

 

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फिर क्यों पहना है राखी सावंत ने दुल्हन का जोड़ा?

अदाकारा राखी सावंत ने बताया कि जल्दी ही उनका एक गाना रिलीज होने वाला है। जिसमें वो ब्राइडल लुक में नजर आने वाली हैं.

राखी सावंत ने पैप्स से को-स्टार को मिलवाया

अदाकारा राखी सावंत ने इस दौरान वहां मौजूद पैपराजी से फैंस को अपने अपकमिंग म्यूजिक वीडियो के को-स्टार से मिलवाया.

लंबे वक्त बाद लौटी राखी सावंत के चेहरे की हंसी

अदाकारा राखी सावंत की हंसी लंबे वक्त बाद लौटी है. वो ताजा तस्वीरों में पैप्स के साथ हंसते-मुस्कुराते बात करती दिखीं.

फैंस को भाया राखी सावंत का अंदाज

अदाकारा राखी सावंत का ये अंदाज उनके फैंस को काफी पसंद आया है. जिसके बाद अदाकारा के इस लुक की खूब तारीफ होने लगी.

अनुज को गले लगाएगी माया तो वनराज को खरी खोटी सुनाएगी अनुपमा

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ ने टीआरपी लिस्ट में नंबर वन पर जगह बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. साथ ही यह अपने ट्विस्ट और टर्न्स के कारण दर्शकों के दिल पर भी खूब राज कर रहा है. हालांकि इन दिनों ‘अनुपमा‘ में चल रहा माया का ट्रैक दर्शकों को खास पसंद नहीं आ रहा है. बीते दिन भी रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में दिखाया गया कि माया, अनुज के नजदीक जाने की कोशिश करती है, लेकिन तभी वहां पर माया को संपत मिल जाता है. दूसरी ओर वनराज शाह, अनुपमा से कहता है कि उसके आने से घर में खुशियां लौट आती हैं और वह चाहता है कि काश वह पुराना दिन वापिस आ जाए. लेकिन बता दें कि रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

 

वनराज को खरी-खोटी सुनाएगी अनुपमा

अनुपमा‘ में वनराज की हरकतों पर अनुपमा उसे खरी-खोटी सुनाती है. वह उसे बोलती है, “आप हमेशा पास्ट-पास्ट करते हैं ना तो अपना भविष्य लेकर गड्ढे में गिर जाएंगे. मैं नहीं चाहती कि मेरे बीते हुए कल का कोई भी साया उसपर पड़े. मेरी जिंदगी के दरवाजे पर बोर्ड लगा है, जिसपर लिखा है कि बुरी नजर वाले अनुपमा से सावधान.” दूसरी ओर वनराज की हरकतों पर काव्या आंसू बहाती है और किसी को फोन करके मिलने बुलाती है. इस चीज को लेकर माना जा रहा है कि काव्या अपने एक्स-पति से मुलाकात करेगी

 

खुद को माया का पति बताएगा संपत

‘अनुपमा’ में दिखाया जाएगा कि संपत को देखते ही माया के हाथ-पैर ढीले पड़ जाएंगे. वहीं वह माया से कहेगा कि तू इतने दिनों से थी कहां, तुझे पता है नहीं है कि कहां-कहां ढूंढा है मैंने तुझे? अनुज के पूछने पर संपत बताता है कि माया उसकी बीव है और वह माया पर आरोप लगाते हुए कहता है कि इसने कई लोगों को अपने जाल में फंसाया है और अब तुझे फंसा रहा है. दूसरी ओर अनुपमा बार-बार अनुज को फोन मिलाने की कोशिश करती है, लेकिन माया की हरकत के कारण वह उसका फोन नहीं उठा पाता.

 

अनुज को किस करेगी माया

रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में दिखाया जाएगा कि संपत माया की शॉल उसके शरीर से हटा देता है. यह देखकर अनुज का पारा चढ़ जाता है और वह औरत की बेज्जती करने के लिए संपत की धुलाई करता है और उसे माया से दूर रहने के लिए कहता है. वहीं अनुज का ऐसा व्यवहार देखकर वह उसके गले लग जाती है. इतना ही नहीं, वह उसे किस भी कर देती है. यह सब देखकर अनुज उसे पीछे की ओर धक्का दे देता है और उसे हद में रहने के लिए कहता है.

 

घर पर यूं बनाएं टेस्टी मैंगो आलू कुरकुरे

अगर आप कुछ हैल्दी और स्वादिष्ट खाना चाहाते है तो आसान तरीकों से बनाएं मैंगो आलू कुरकुरे. ये है कुछ टिप्स घर पर तैयार किए हुए मैंगो आलू कुरकुरे की डिश की रेसिपी.

सामग्री

– 50 ग्राम कच्चे काम के टुकड़े

-150 ग्राम उबले बेबी आलू

-10 एमएल औयल 

– 15 एमएल मैंगो पल्प

– 3 ग्राम सौंफ

– 3 ग्राम कलौंजी

– 5 ग्राम लहसुन का पेस्ट

-5 ग्राम हरी मिर्च का पेस्ट

– 15 ग्राम गुड़

-5 एमएल सिराचा सौस

– गार्निश के लिए 2 केले की पत्तियां

-10 ग्राम सेव गार्निश के लिए

– तलने के लिए तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

सब से पहले बेबी आलुओं के छिलके उतार कर उन्हें 70% तक पकाएं. पकने पर ठंडा होने दें. फिर आलुओं को हलके हाथों से दबा कर हलका सुनहरा होने तक डीप फ्राई कर लें. अब पैन में तेल गरम कर के उस में सौंफ और कलौंजी को

1 मिनट चटकाने के बाद उस में हरीमिर्च व लहसुन का पेस्ट डाल कर 5 मिनट तक हलकी आंच पर पकाएं. फिर इस में कटे आम के टुकड़ेसिराया सौसगुड़नमक और मैंगो पल्प डाल कर अच्छी तरह मिश्रण बनाएं. जब मिश्रण अच्छी तरह पक जाए तो इस में फ्राइड आलू डाल कर आराम से मिक्स करें. फिर प्लेट में केले की पत्तियों पर रख कर उन में परोस कर मिंटसेव से गार्निश करें.

2- ब्लैक ग्रेप गजपाचो

सामग्री

– 50 ग्राम काले अंगूर

– 5 कालीमिर्च

– 1 चम्मच नीबू का रस

– 11/2 कप व्हाइट अंगूरों का रस

– 20 एमएल रैड वाइन

– 10 ग्राम चीनी

– 10 ग्राम बादाम बारीक कटे

– 5 एमएल लालमिर्च की चटनी.

विधि

अंगूरों के जूस और बादाम का पेस्ट तैयार करें. फिर वाइन में अंगूरों का रस और चीनी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. अब इस मिक्स्चर को मलमल के कपड़े में छान कर नीबू का रस और कुटी कालीमिर्च डालें. फिर इस सूप को एक बाउल में डाल कर ठंडा कर लाल मिर्च की चटनी और नमक डाल कर सर्व करें.   

मेरे बाल बहुत गिर रहे है, मैंने पीआरपी ट्रीटमैंट के बारे में सुना है, क्या यह सही है?

सवाल

मेरे बाल बहुत गिर रहे हैं. मैं काफी इलाज कर चुकी हूं पर फायदा नहीं हो रहा है. मैंने पीआरपी ट्रीटमैंट के बारे में सुना है. क्या यह सही हैइस का कोई साइड इफैक्ट तो नहीं है?

जवाब

अगर आप के बाल गिर रहे हैं और सारे ट्रीटमैंट करने पर भी कुछ फायदा नहीं हो रहा तो पीआरपी ट्रीटमैंट के लिए आप जरूर जा सकती हैं. यह बहुत ही अच्छा ट्रीटमैंट है. इस में आप के ब्लड में से प्लेटलेट रिच प्लाजमा जो होता है उसे निकाल दिया जाता है और उस को ही इंजैक्शन के थू्र आप की स्कैल्प में डाल दिया जाता है.

आप ही का खून है इसलिए कोई साइड इफैक्ट होने का चांस ही नहीं है. यह बहुत ही अच्छा ट्रीटमैंट है. न्यूट्रिशन सीधा आप के स्कैल्प में चला जाता हैइसलिए आप के बाल जल्दी से ग्रो होने शुरू हो जाते हैं. बस ध्यान देने की बात यह है कि आप जहां से भी ट्रीटमैंट कराएं करने वाला ऐक्सपर्ट हो और हाइजीन का बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता हो क्योंकि इस में इंजैक्शन का इस्तेमाल किया जाता है.

परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप के सिर पर एक नमिंग क्रीम लगा दी जाती है और उस के बाद पेन नहीं होता. यह बहुत ही सेफ और कारगर है.

क्या भारतीय मीडिया बिका हुआ है?

अडानी समूह पर बहस में कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खडगे ने एक जगह  कह दिया कि सरकार ने सारे न्यूज चैनलों के एंकर खरीद लिए हैं. गोदी मीडिया, गोदी मीडिया सुनने वाले चैनल एंकर आमतौर पर इस तरह की सुनने की आदत हैं पर एक को पूछ लिया कि साबित कर के दिखाओ कि एक भी पाई ली हो. यह साबित करने की बात भी मजेदार है. एकरों को यह कहना पड़ रहा है कि दूसरा पक्ष साबित करें कि वे झूठ बोल रहा है, अपनेआप में स्वीकारों की है. जनता या नेता कोई ईडी, सीबीआई, एनआईए तो हैं नहीं जो आप को महिनों बंद कर के रखे कि आप की पाई को ढूंढना है. यह ताकत तो उन के पास है जो पाई दे सकते हैं.

गोदी मीडिया बिका हुआ है यह तो साफ दिखता है कि वे रातदिन ङ्क्षहदूमुसलिम करते हैं, सरकार का प्रचार करते है. प्रधानमंत्री की चुनावी रैलियों का सीधा प्रसारण घंटों तक करते हैं और उन के चैनल ही फ्री औफ कौस्ट सैटटौप वाक्यों से ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. किसी के बिकने के सुबूत इतना ही काफी है कि वह अमीरों, उद्योगपतियों, सब में बैठे लोगों की बातें रातदिन को और जो लोग उन की पोल खोले उन की बात को रिपोर्ट भी न करे.

अक्सर आलोचना करने वालों से पूछा जाता है कि आप दूसरा पक्ष भी क्यों नहीं देते. ‘सरिता’ को सैंकड़ों पत्र मिलते हैं हम दूसरी तरपु की बातें, यानी वे बातें जो सरकार ढिढ़ोरा पीट कर कह रही है और मंदिरों के प्रवचनों में रोजाना दोहराया जा रही हैं, हम भी क्यों नहीं कह रहे, नहीं कह रहे तो अवश्य किसी ने खरीद रखा है.

ये अजीबोगरीब तर्क है. जिस के पास पैसा वही तो खरीद सकता है. जब आप पैसे वालों की आलोचना कर रहे है, पोल खोल रहे हो, जनता को गुमराह होने से बचा रहे हो, पीडि़तों को उन के अधिकारों की बात कर रहे हो तो कौन आप को खरीदेगा. आप से तो हरेक को डर लगेगा कि अगर आज कुछ दे भी दिया तो कल ये उन के खिलाफ भी बोल सकी हैं.

कांग्रेस अपनेआप में पूरी तरह डिटरजैंक से धुली हो जरूरी नहीं. वह सत्ता में 50-60 साल रही. हर कांग्रेसी ठस के वाला है. हरेक छत गाडिय़ां बंगले हैं पर फिर भी यदि ये लोग आज भी कांग्रेस में हैं और भाग कर भारतीय जनता पार्टी के तले नहीं चले गए तो साबित करता है कि इन में कुछ अभी बाकी है जो लोकतंत्र, जवाबदेही, कमजोरों के अधिकारों की रक्षा कर रहा है.

जिस तरह से विपक्षी दलों और उन के नेताओं को बंद किया जा रहा है और करते समय जिस तरह एंकर सुॢखयों में समाचार प्रकाशित करते हैं, और जिस तरह से वे दिल्ली के उपराज्यपाल या अन्य राज्यपालों की दखलअंदाजियों की खबरें पचा जाते हैं, जिस तरह से वे औरतों पर हो रहे अत्याचारों की बात को 3 सैकंड में दिखा कर रफादफा कर देते हैं उस से काम साबित करना बचता है कि एंकर शुद्ध हरिद्वार जल से पाप रहित हो चुके हैं. भक्तिभाव में डूबे होना भी निकला है. हो सकता है कि चैनलों के मालिकों की श्रद्धा किसी नेता या किसी नेता में हो क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर किसी के अन्य पक्ष हों. यह भी बिकता है.

आज चाहे एक जने के अधिकार व आस्तित्म की रक्षा की बात हो या सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, अल्पसंख्यकों, औरतों, विचारकों, छोटे मजदूरों, किसानों की, यदि वे समाज में घुटन महसूस कर रहे हैं तो जो भी उन का मालिक या संचालक वह खुद टिका हुआ है या खरीद रहा है नुकसान उसका है जो दबा है.

सीजेरियन सेक्शन के बाद वेजाइनल प्रसव का प्रयास

अगर आप दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं और पहला प्रसव सीजेरियन सेक्शन से हुआ था, तो आप इस बार वेजाइना के रास्ते प्रसव चाह रही होंगी. अनेक स्त्रियाँ वेजाइना के रास्ते जन्म दे सकती हैं, लेकिन यह आपके लिए सबसे बढ़िया विकल्प हो सकता है या नहीं, यह तय करने के लिए प्रसव के पहले आपको और आपके डॉक्टर को कुछ चीजों पर विचार करना ज़रूरी है.

मदरहुड अस्पताल की डॉक्टर मंजू गुप्ता का कहना है-

सोचने की सबसे पहली बात आपकी और आपके शिशु की सुरक्षा के विषय में है. हर स्त्री सुरक्षा के साथ सी-सेक्शन के बाद वेजाइनल बर्थ (वीबीएसी) नहीं करा सकती. इससे आपके लिए और आपके बच्चे के लिए बड़ी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आपके साथ जटिलताओं का ज्यादा जोखिम है तब वेजाइना मार्ग से जन्म देने की कोशिश से पहले इस पर गंभीरता से विचार करना और भी ज़रूरी हो जाता है. बेहतर है कि आप वीबीएसी का विचार करने के पहले अपने डॉक्टर के साथ जोखिम के सम्बन्ध में चर्चा कर लें.

वीबीएसी के लिए आप सुरक्षित हो सकती हैं, बशर्ते कि :

1-          आपकी प्रेगनेंसी को कम जोखिम है.

2-           आप केवल एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने वाली हैं.

3-            आपका कम से कम एक वेजाइनल प्रसव हो चुका है.

4-           आपका केवल एक सी-सेक्शन हुआ है। बार-बार सीजेरियन प्रसव से गर्भाशय फटने का ख़तरा होता है.

5-           आपकी पहले वाली सीजेरियन सर्जरी के बाद आपको एक निम्न अनुप्रस्थ चीरा लागाया गया था. अगर आपके पिछले सीजेरियन में ऊँचा लम्बवत चीरा लगा था तो गर्भाशय फटने का ख़तरा रहता है.

6-           आप जननांग में हर्पीस, मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित नहीं हैं.

7-           आपको पहले से गर्भाशय की समस्या नहीं है या गर्भाशय की सर्जरी नहीं हुई है.

8-           आपने सीजेरियन सेक्शन के कम से कम २ से 3 वर्ष के बाद गर्भ धारण किया है.

आपके डॉक्टर आपकी और आपके शिशु के आकार की जाँच करेंगे कि आप सीजेरियन सेक्शन के बाद नार्मल डिलीवरी के लायक हैं या नहीं. अगर शिशु का आकार बड़ा है, तो गर्भाशय पर लगातार दबाव पड़ सकता है जिसके फलस्वरूप नार्मल डिलीवरी में समस्या होगी.

इसके अलावा दूसरे घटक हो सकते हैं जो डिलीवरी से सम्बंधित संभावित समस्याओं का संकेत करते हैं. वह नार्मल डिलीवरी को बेहद खतरनाक बना सकती हैं जिसमें पहले वाले सीजेरियन के खतरे शामिल हैं. आपको विकल्पों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए क्योंकि इससे डिलीवरी के पहले जोखिम के घटकों का पता लगान संभव होगा.

सीजेरियन सेक्शन के बाद स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने और वीबीएसी के खतरों को कम करने में सहायक

व्यायाम :

कुछ व्यायामों से सीजेरियन सेक्शन के बाद जल्दी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने में मदद मिल सकती है और संभवतः वीबीएसी के खतरे भी कम हो सकते हैं. आपके हॉस्पिटल में रहने के दौरान सीजेरियन सेक्शन के बाद स्वास्थ्य लाभ में मदद करने वाले व्यायामों के बारे में बताया जाएगा। आपको सलाह है कि जैसे ही आप बिस्तर से उठने के लायक हो जाएँ, जल्द से जल्द चलना-फिरना आरम्भ कर दें. सर्जरी के बाद सहजतापूर्वक टहलना फायदेमंद होता है. अगर गर्भावस्था या प्रसव के दौरान कोई जटिलता रही हो, या स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या थी, तो किसी प्रकार का व्यायाम आरम्भ करने के पहले आपको किसी फिजियोथेरेपिस्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय ले लेनी चाहिए.

पेट के लिए व्यायाम :

पेट की मांसपेशियों को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए कुछ प्रकार के व्यायाम हैं। इससे आपकी रीढ़ की हिफाजत होती है और आप एक सुडौल शारीरिक मुद्रा बनी रहती है.

पेडू (पेल्विक) के व्यायाम :

पेडू के निचले भाग के लिए कई व्यायाम हैं जो अनेक गर्भवती स्त्रियाँ करती हैं। आपके सीजेरियन सेक्शन के बाद जब कैथेटर निकाल दिया जाता है, और आप तैयार महसूस करने लगती हैं, तब तुरंत पेडू के निचली भाग के व्यायाम आरम्भ कर सकती हैं.

शारीरिक व्यायाम :

आपने गर्भवती होने के पहले जिस प्रकार के व्यायाम करती थीं, उन्हें आरम्भ करने के पहले प्रसव के बाद 6-8 हफ़्तों के बाद तक अपनी जाँच होने तक इन्तजार करें। आप जिम में कम प्रतिरोध और कम प्रभाव वाली व्यवस्था में व्यायाम कर सकती हैं.

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