Valentine’s Special: थैंक यू हाई हील्स- अश्विन को सोहा की कौन सी कमी खलती थी

अश्विन के तो मन में लड्डू फूट रहे थे. कैसी होगी वह, गोरी या गेहुआं रंग? फोटो में तो बहुत ही आकर्षक लग रही है. कितनी सुंदर मुसकान है. बाल भी एकदम काले. खैर, अब 2 घंटे ही तो बचे हैं इंतजार की घडि़यां खत्म होने में. दिल्ली से मुंबईर् मात्र 2 घंटे में ही तो पहुंच जाते हैं हवाईजहाज से.

अश्विन दिल्ली का निवासी है और 2 साल पहले ही उस ने अपना नया व्यवसाय शुरू किया है. उस की लगन व मेहनत से उस का काम आसमान की बुलंदियों को छूने लगा है.

अत: उस के मातपिता ने सोचा झट से सुंदर लड़की देख कर उस का विवाह कर दिया जाए और लड़की भी ऐसी, जो उस के कारोबार में हाथ बंटा सके. सो उन्होंने अखबार में इश्तिहार दे दिया- ‘‘आवश्यकता है सुंदर, पढ़ीलिखी, आकर्षक लड़की की.’’

बदले में जवाब आया सोहा के पिता का, जो अश्विन जैसा लड़का ही अपनी बेटी के लिए ढूंढ़ रहे थे. लड़का उन की बेटी की काबिलीयत को समझे और उस का परिवार भी खुले विचारों वाला हो. बड़े अरमानों से पाला था उन्होंने अपनी बेटी को. एमबीए करवाया था ताकि विवाह उपरांत वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके. इस के अलावा उस ने घुड़सवारी, तैराकी भी सीखी थी. एनसीसी में भी सी सर्टिफिकेट लिया था उस ने और ऐरो मौडलिंग में भी गोल्ड मैडल लिया था. सो सोहा के पिता ने अश्विन के पिता से अपनी बेटी के रिश्ते की बात चलाई और उस की शिक्षा व अन्य खूबियों की जानकारी अश्विन के पिता को दे दी.

अश्विन के पिता ने उसे सोहा के बारे में बताते हुए पूछा, ‘‘बेटा, यदि तुम्हें इस लड़की के गुण व शिक्षा पसंद हो तो आगे बात चलाऊं?’’

‘‘जी डैड, आप बात आगे बढ़ा सकते हैं,’’ अश्विन ने कहा.

अश्विन के पिता ने सोहा के पिता को फोन कर कहा, ‘‘विमलजी, मेरे बेटे को आप की बेटी की शिक्षा व खूबियां बड़ी पसंद आईं. अब आप जल्द से जल्द सोहा के और फोटो भेज दीजिए या फिर फेसबुक आईडी दे दीजिए ताकि एक बार दोनों एकदूसरे को देख लें और बात आगे बढ़ाई जा सके.’’

सोहा ने भी फेसबुक आईडी देना ही उचित समझा ताकि एकदूसरे से मिलने से पहले दोनों एकदूसरे को परख लें.

सोहा की फेसबुक आईडी पा कर अश्विन ने उसे फ्रैंड्स रिक्वैस्ट भेज दी. सोहा ने

भी उसे सहर्ष स्वीकार लिया.

जब अश्विन ने सोहा को फेसबुक पर देखा तो देखता ही रह गया. इतनी खूबसूरत और आकर्षक, उस का रहनसहन उस के पोस्ट देख कर तो वह उस पर लट्टू ही हो गया. दोनों ने 1-2 बार चैट किया. अश्विन तो उस की अंगरेजी लिखी पोस्ट पढ़ कर और भी ज्यादा प्रभावित हो गया. उत्तर भारतीय हो कर भी उस की अंगरेजी बहुत अच्छी थी. सो दोनों ने आपस में मिलने का फैसला किया और फिर अपनेअपने मातापिता को अपनाअपना फैसला सुना दिया.

उस के बाद दोनों के मातापिता ने दिन तय किया कि कब और कैसे मिलना है. आजकल पहले वाला जमाना तो रहा नहीं कि रिश्तेदारों को सूचना दो, परिवार के सब सदस्य इकट्ठे हों. अब तो सब से पहले घर के लोग व लड़कालड़की मिल लेते हैं. वह भी घर में नहीं होटल या रेस्तरां में ही देखनादिखाना हो जाता है. अब पहले जैसी औपचारिकता कौन निभाता है?

अब अश्विन और उस के मातापिता सोहा को देखने जयपुर जा रहे थे. अश्विन मन ही मन सोच रहा था यह देखनादिखाना तो मात्र एक औपचारिकता है. सोहा तो उस के मन में पूरी तरह बस गई है. तभी विमान परिचारिका की आवाज से उस के विचारों की शृंखला टूटी. वह कह रही थी, ‘‘आप क्या लेंगे सर शाकाहारी या मांसाहरी खाना?’’

जवाब में अश्विन ने कहा, ‘‘शाकाहारी ही लूंगा,’’ और फिर अश्विन ने तुरंत अपनी ट्रे टेबल खोली. परिचारिका ने अश्विन को शाकाहारी खाने की ट्रे देते हुए कहा, ‘‘सर, बाद में कौफी सर्व करती हूं.’’

अश्विन ने मुसकरा कर कहा, ‘‘जी, बहुतबहुत धन्यवाद.’’

खाना व कौफी पूरी होतहोते ही विमान परिचारिका ने घोषणा की, ‘‘हम छत्रपति शिवाजी इंटरनैशनल एअरपोर्ट पर उतरने वाले हैं. आप सभी से निवेदन है कि अपनीअपनी सीट बैल्ट  बांध लें.’’

एअरपोर्ट से अश्विन ने प्री पेड टैक्सी बुक की और पहुंच गए उस होटल में जहां दोनों परिवारों का मिलना तय हुआ था. वहां सोहा के पिता ने उन के लिए पहले से ही टेबलें बुक की हुई थीं.

वहां पहुंचते ही मैनेजर अश्विन से बोला, ‘‘सर आप की टेबलें वहां बुक हैं और वहां मेहमान आप का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.’’

अश्विन धीरे से बुदबुदाया, ‘‘इंतजार तो हम भी बेसब्री से कर रहे हैं.’’

तभी सोहा के पिता उन्हें लेने होटल लौबी में आ पहुंचे. दोनों परिवारों ने एकदूसरे का अभिनंदन किया.

अश्विन ने सोहा की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘हाय आई एम अश्विन.’’

सोहा ने भी वहीं खड़े हो कर कहा ‘‘हाय आई एम सोहा, नाइस टू मीट यू.’’

अश्विन ने सोहा को जितना सोचा था उस से भी ज्यादा आकर्षक पाया. उस की वह मनमोहक मुसकान, हलकी सी लजाई आंखें जिन में नीले रंग का आईलाइनर ऐसा लग रहा था मानो आसमान ने अपनी सुरमई छटा बिखेरी हो. फीरोजी रंग के टौप में वह बेहद सुंदर लग रही थी. हाथ में महंगी घड़ी थी सिल्वर चेन वाली और दूसरे हाथ में फीरोजी रंग का चौड़ा सा ब्रेसलेट. कानों में छोटेछोटे स्टड्स पहन रखे थे. फिर उस के काले एवं सीधे बाल कमर तक लहरा रहे थे. अश्विन की नजर तो उस के चेहरे पर टिक ही गई थी. जैसे ही सोहा उस की तरफ देखती वह मुसकरा देता. वेटर आ कर मौकटेल दे गया था. वह खत्म करते हुए अश्विन के पिता ने सोहा के मातापिता से कहा, ‘‘चलिए अब हम लौबी में चलते हैं ताकि ये दोनों भी अकेले में आपस में बातचीत कर सकें.’’

सभी लोग लौबी की तरफ चल दिए. तब अश्विन ने सोहा को अपने कारोबार के बारे में बताते हुए कहा, ‘‘यदि तुम्हें मैं शादी के लिए पसंद हूं तो बात आगे बढ़ाएं अन्यथा तुम इस रिश्ते को अस्वीकार भी कर सकती हो.’’

जब सोहा ने नजरें झुकाए मूक स्वीकृति दे दी तो अश्विन ने कहा ऐसे नहीं, तुम्हें मुंह से हां या न में जवाब देना होगा.

सोहा ने ‘‘हां’’ कह दिया. फिर क्या था जैसे ही दोनों के मातापिता वहां आए सोहा व अश्विन ने अपना फैसला उन्हें सुना दिया था. दोनों परिवारों ने एकदूसरे का मुंह मीठा करवाया. फिर चट मंगनी और पट ब्याह. 1 ही महीने में दोनों पतिपत्नी बन गए.

दिल्ली में बहू की मुंह दिखाई बड़ी शानोशौकत से हुई. सभी रिश्तेदार व मित्र अश्विन व सोहा को अपनेअपने घर आने का न्योता दे कर चले गए.

सोहा जब अश्विन के घर में रहने लगी तो अश्विन को उस में एक कमी नजर आई, जिस पर अश्विन का ध्यान ही नहीं पड़ा था. वह थी सोहा की ऊंचाई. सोहा करीब 5 फुट 2 इंच लंबी थी. जबकि अश्विन 6 फुट. जब सोहा अश्विन के पास खड़ी होती तो उस के कंधे तक भी न पहुंचती. अश्विन को मन ही मन लगने लगा कि सोहा इतनी ठिगनी है? उस का पहले क्यों नहीं ध्यान पड़ा सोहा की लंबाई पर? वह सोचने लगा कि लोग क्या कहेंगे कि उस ने क्यों इतनी ठिगनी लड़की से शादी की? कितनी बेमेल सी जोड़ी है देखने में. लेकिन वह समझ ही नहीं पाया कि यह सब कैसे हो गया?

उस ने सोहा से पूछा, ‘‘सोहा, तुम्हारी लंबाई कितनी है?’’

‘‘5 फुट डेढ़ इंच.’’

‘‘तो फिर तुम बाहर जाती हो तब तो इतनी ठिगनी नहीं लगती,’’ अश्विन ने कहा.

सोहा गाते हुए बोली, ‘‘यह हाई हील्स का जादू है मितवा,’’ और फिर मुसकरा कर अश्विन से लिपट गई. अश्विन ने भी उस के होंठों को चूमना चाहा. किंतु वह तो उस के कंधे से भी नीचे थी. सो अश्विन को ही झुकना पड़ा उस के होंठों का रसास्वादन करने के लिए.

लेकिन जब सोहा ने बदले में उचक कर उस के होंठों को चूमा तो अश्विन उस के प्रेम में डूब गया और 5 फुट डेढ़ इंच को भूल गया.

अग दिन अश्विन और सोहा को दोस्तों से मिलने जाना था. सभी ने मिल

कर एक होटल में डिस्को पार्टी रखी थी. अश्विन को लगता कि कहीं उस के दोस्त न सोचें कि अश्विन ने सोहा में बाकी सब देखा तो उस की लंबाई पर क्यों ध्यान नहीं दिया? लेकिन जब सोहा लाल रंग का ईवनिंग गाउन, पैरों में पैंसिल हील्स पहन कर अश्विन के साथ गाड़ी में आगे की सीट पर बैठी तो अश्विन उसे देखता ही रह गया. वह बारबार मन में सोचता कि सब कुछ है सोहा में यदि कुदरत थोड़ी लंबाई और दे देती तो सोने पर सुहागा हो जाता. पर फिर मन ही मन सोचता कि हाई हील्स हैं न. जैसे ही सोहा और अश्विन होटल पहुंचे अश्विन के दोस्तों और उन की पत्नियों को अपना इंतजार करते पाया. जब सोहा ने बड़े ही आकर्षक तरीके से सब के हालचाल पूछे और चटपटी बातें कीं तो वह सब के दिलों पर छा गई. डिस्को में जब सब एकदूसरे की बांहों में बांहें डाले नाच रहे थे तो अश्विन ने देखा सोहा तो हाई हील्स पहने ठीक उस के कान तक पहुंच गई है और उस ने भी डिस्को की मध्यम रोशनी में मौका पा कर उस के माथे को चूम लिया.

वापस जाते सभी कहने लगे, ‘‘अश्विन, सोहा को देख कर ऐसा लगता है कि तुम्हें गड़ा खजाना हाथ लगा है.’’

अश्विन मन में सोच रहा था कि वह कितना असहज हो रहा था, सोहा की लंबाई को ले कर, लेकिन आज की सोहा की पैंसिल हील्स ने तो सब समस्या ही खत्म कर दी.

हां, जब वह घर में होता तो उस का ध्यान जरूर सोहा की लंबाई पर जाता. एक दिन उस ने अपनी मां से कहा, ‘‘मम्मी, क्या तुम्हारी नजर नहीं गई थी सोहा की लंबाई पर? यह कितनी ठिगनी है.’’

उस की मां ने कहा, ‘‘अश्विन, लेकिन उस के दूसरे गुण भी तो देखो, सर्वगुणसंपन्न है मेरी बहू. इतनी पढ़ीलिखी हो कर भी कितना अच्छा व्यवहार है इस का.’’

‘‘हां, वह तो है,’’ अश्विन बोला.

‘‘तो फिर तुम इतना क्यों सोच रहे हो इस बारे में? आजकल तो इतनी अच्छी हाई हील्स मिलती हैं तो लंबाई कम होने की चिंता क्यों?’’ मम्मी ने कहा.

शादी को 1 महीना होने आया था. अब सोहा को दफ्तर का काम भी संभालना था. सो अश्विन की मामी ने फोन कर के कहा, ‘‘अश्विन बेटा, 1 बार तो ले आओ सोहा को हमारे घर. फिर दफ्तर जाने लगेगी तो कहां समय मिलेगा.’’

‘‘जी, मामीजी आते हैं हम दोनों,’’ अश्विन ने कहा.

अगले ही दिन मामीजी के घर जाने की तैयारी. सोहा ने काले रंग की क्रेप की साड़ी जिस पर सुनहरे रंग के धागों से बौर्डर पर कढ़ाई की थी पहन ली. साथ में पहनीं सुनहरी वेज हील्स.

जब सोहा गाड़ी तक जाने के लिए पैरों को संभालते हुए चल रही थी तो उस की कमर में जो बल पड़ रहा था, उसे देख अश्विन उसे छुए बिना न रह सका और फिर वह बोला, ‘‘वाह कमाल की हैं तुम्हारी हाई हील्स. जब इन्हें पहन कर चलती हो तो मोरनी सी लगती है तुम्हारी चाल.’’

सोहा बदले में बस मुसकरा दी. मामीजी के घर पहुंच कर सोहा ने पैर छू कर उन्हें प्रणाम किया और फिर मिठाई का डब्बा उन के हाथों में थमाते हुए बोली, ‘‘मामीजी, बहुत ही सुंदर है आप का घर और आप ने सजाया भी बहुत खूब है. कितना साफसुथरा है. कैसे कर लेती हैं आप इस उम्र में भी इतना मैंटेन?’’

मामीजी तारीफ सुन कर फूली न समाईं बोलीं, ‘‘तुम भी तो कितनी गुणी हो, कितनी होशियार…’’

एक बात तो अश्विन पूरी तरह समझ गया था कि सोहा को हर रिश्ते को निभाना बखूबी आता है. झट से किसी को भी शीशे में उतार लेती है वह. खैर, मामीजी के घर खापी कर दोनों जब रवाना होने लगे तो मामीजी बोलीं, ‘‘सोहा, तुम पर यह काली साड़ी बहुत फब रही है और तुम्हारी ये हाई हील्स भी मैचिंग की खूब जंच रही हैं… अलग ही निखार आ जाता है जब साड़ी के साथ हाई हील्स पहनो.. वैसे कहां से लेती हो तुम ये हील्स?’’

सोहा ने भी खूब खिलखिला कर जवाब दिया, ‘‘मामीजी, आजकल तो हर मार्केट में मिल जाती हैं.’’

मामीजी ने कहा, ‘‘मैं भी लाऊंगी अपनी बेटी के लिए.’’

‘‘अच्छा बाय मामीजी,’’ कह सोहा कार में बैठ गई.

उस की आंखों में देख कर अश्विन ने कहा, ‘‘तो चला ही दिया तुम ने अपनी हाई हील्स का जादू मामीजी पर भी.’’

खैर दोनों घर पहुंचे. अगले दिन से सोहा को दफ्तर जाने की तैयारी करनी थी. सोहा सुबहसुबह दफ्तर जाने के लिए तैयार होने लगी तो अश्विन ने कहा, ‘‘सोहा, आज दफ्तर में तुम्हारा पहला दिन है और मेरे नए क्लाइंट आने वाले हैं. तुम्हें मिलवाऊंगा उन से.’’

सोहा ने झट से हलके चौकलेटी रंग की पैंसिल स्कर्ट जिस में पीछे से स्लिट कटी थी पहना और उस के ऊपर कोटनुमा जैकेट पहन ली. बाल खुले छोड़े. न्यूड कलर की पीप टोज बैलीज पहनीं. उन में से उस के नेलपौलिश लगे अंगूठे और 1-1 उंगली झांकती सी नजर आ रही थी. हाथ में मैचिंग बैग ले कर खड़ी हो गई और बोली, ‘‘तो चलिए अश्विन, आज से आप के साथ मैं काम की शुरुआत करती हूं.’’

दोनों कार में बैठ कर दफ्तर चले गए. वहां जाते ही स्टाफ के लोग उन का ‘गुड  मौर्निंग मैम’, ‘गुड मौर्निंग सर’ कह कर अभिवादन कर रहे थे. दफ्तर के सब लोगों से परिचय के बाद अश्विन ने उसे उस का कैबिन दिखा दिया. थोड़ी ही देर में जब नए क्लाइंट आए तो जिस तरीके से सोहा ने उन से बात की अश्विन देखता ही रह गया. घर में साधारण इनसान की तरह रहने वाली सोहा का दफ्तर में तो रुतबा देखते ही बनता था. जब वह अमेरिकन तरीके से अंगरेजी बोलती तो उस के होंठ देखने लायक होते और उस के बोलने का लहजा सुन कर कोई भी नहीं कह सकता था कि यह 5 फुट डेढ़ इंच वाली सोहा बोल रही है.

अश्विन मन में सोचता ही रह गया कि सोहा को कुदरत ने खूब फुरसत में बनाया है. लंबाई के सिवा कोई कमी नजर ही नहीं आती. वैसे वह भी कोई कमी नहीं क्योंकि मैं पूरा 6 फुट का हूं इसलिए मुझे उस की लंबाई कम लगती है. लेकिन चिंता की क्या बात है? हाई हील्स हैं न.

उस दिन अश्विन ने अपनी मां से कहा, ‘‘मम्मी, सोहा बहुत इंप्रैसिव है. मैं फालतू में उस की लंबाई को ले कर चिंतित था. मैं ने जब सोहा को पहली बार देखा था यदि उस दिन मैं ने इस की लंबाई पर ध्यान दे कर इस से विवाह के लिए मना कर दिया होता तो क्या होता? शायद मैं ने एक हीरे को पाने का अवसर खो दिया होता. अच्छा ही हुआ कि उस दिन सोहा हाई हील्स पहन कर आई थी. मुझे तो उस की हील्स दिखाई भी नहीं दी थीं और लंबाई पर ध्यान नहीं गया था. हम ने यह रिश्ता पक्का कर दिया.’’

अश्विन कमरे में लेटी सोहा के पास जा कर उसे अपनी बांहों में भरते हुए बोला, ‘‘लव यू डार्लिंग…’’

सोहा उसे मुसकरा कर देखती रह गई.

Valentine’s Special: साथ तुम्हारा

मेन सड़क पार करने में सुमना की हालत बिगड़ जाती है. दूसरे लोग तो जल्दी से पार हो जाते हैं, पर वह जब सारी गाडि़यां निकल जाती हैं और दूर तक कोई गाड़ी आती नहीं दिखती, तभी झट से कुछ तेज चल कर आधी सड़क पार करती है. फिर दूसरी तरफ से गाडि़यां पार हो जाती हैं तब आधी सड़क पार करती है. पहले वह सड़क अकेले पार करती थी. पर अब उस के दोनों हाथ व्हीलचेयर पकड़े रहते हैं, जिस पर बैठे रहते हैं उस के पति सुहैल.

‘‘तुम सड़क पार करने में बहुत डरती हो,’’ सड़क पार होने के बाद सुहैल ने पीछे मुड़ कर कहा.

‘‘सच में बहुत डर लगता है. ऐसा लगता है जैसे गाड़ी मेरे शरीर पर ही चढ़ जाएगी और बड़ी गाडि़यों को देख तो मैं और डर जाती हूं. लेकिन आप साथ में रहते हैं तो हिम्मत बंधी रहती है कि चलो पार हो जाऊंगी.’’ दोनों बातें करतेकरते स्कूल गेट के पास आ गए. तभी सुमना के पर्स में रखा मोबाइल बजने लगा. कंधे से झूल रहे पर्स में से उस ने मोबाइल निकाला और स्क्रीन पर आ रहे नाम को देख काटते हुए बोली, ‘‘पापा का फोन है. आप को क्लास में पहुंचा कर उन से बात करूंगी.’’

‘‘तुम्हारे पापा तुम्हें अपने पास बुला रहे हैं न…?’’ सुहैल का चेहरा उतर गया.

‘‘नहीं तो,’’ सुमना साफ झूठ बोल गई, ‘‘यह आप से किस ने कह दिया? वे तो ऐसे ही हालचाल जानने के लिए फोन करते हैं. आप क्लास में चलिए.’’ सुमना व्हीलचेयर पकड़े सुहैल को 9वीं कक्षा में ले गई और खुद पढ़ने स्कूल के बगल में कालेज में चली गई. वह बी.ए. फर्स्ट ईयर में थी. एक पीरियड खत्म होने के बाद वह आई और सुहैल को 10वीं कक्षा में ले गई. फिर अपनी क्लास में आई. वहां 45 मिनट पूरे होने के बाद भी मैडम इतिहास पढ़ाती ही रहीं तो वह खड़ी हो कर बोली, ‘‘ऐक्सक्यूज मी मैम, सुहैलजी को 8वीं कक्षा में छोड़ने जाना है और उन की दवा का भी समय हो गया है. मैं जाऊं?’’

‘‘हां, जाओ.’’ 5-7 मिनट बाद वह लौट कर आई तो मैडम उसी के इंतजार में अभी तक क्लास में थीं. उसे कुछ नोट्स दे कर उन्होंने कहा, ‘‘सुमना, तुम बुहत संघर्ष कर रही हो. मुझे तुम पर गर्व है.’’

‘‘मैम, ऐसी कोई बात नहीं है,’’ वह हलके से मुसकराई.

‘‘विपरीत परिस्थितियों में हंस कर जीना कोई तुम से सीखे.’’ मैडम उस की पीठ थपथपा कर चली गईं और उन के पीछे सारे लड़केलड़कियां भी चले गए. अब क्लास में सिर्फ वही थी. वह नोट्स पढ़ने ही वाली थी कि तभी उस का मोबाइल बजा.

‘‘हां, पापा, बोलिए….’

‘‘बेटा, तुम ठीक हो न? अभी तो तुम कालेज में होगी और सुहैल को इस कक्षा से उस कक्षा में ले जा रही होगी?’’

‘‘जी…’’

‘‘बेटा, क्यों इतनी मेहनत कर रही हो? चली आओ हमारे पास. तुम्हें इतना संघर्ष करते देख मेरी आत्मा रोती है. ऐसा कब तक चलेगा? आजा बेटा, सब छोड़ कर हमारे पास. हम तुम्हारी दूसरी शादी करवा देंगे. भरत से तुम प्यार करती थीं न. वह तुम से शादी करने के लिए तैयार है.’’ सुमना ने बिना जवाब दिए फोन काट दिया. पर उस का दिल बहुत भारी हो गया था. तभी चौथे पीरियड की घंटी बजी. आंखों की कोर से आसूं पोंछ वह सुहैल को 7वीं कक्षा में पहुंचाने गई. उस की सूरत देख सुहैल ताड़ गए कि बात क्या हुई होगी तो बोले, ‘‘सुमना, तुम रो रही थीं न? अपने पापा की बात मान जाओ, चली जाओ उन के पास.’’ सुमना सुहैल की आंखों में देखती रह गई. उसे लगा कि कैसे इन्होंने मेरी चोरी पकड़ ली. पर वह कुछ बोली नहीं, चुपचाप उन्हें कक्षा में पहुंचा आई. उस के कालेज में हरेभरे मैदान में उस की सारी सहेलियां धूप में बैठी हंस, खिलखिला रही थीं. उन्होंने उसे पुकारा पर वह फीकी मुसकान के साथ हाथ हिला कर क्लास में आ गई. उस का मन कर रहा था कि वह खूब चीखचीख कर रोए लेकिन सुहैल ने उसे रोते देख लिया तो उन्हें कितना दुख होगा, यह सोच वह चुप रही. क्लास में अकेली वह खिड़की के पास बैठी थी. उस ने सिर को दीवार से टिका दिया और रोकतेरोकते भी उस की आंखों से आंसू गिरने लगे. आंसू गिर रहे थे और उस की पिछली जिंदगी के पन्ने फड़फड़ा रहे थे. पढ़ाई में कमजोर सुमना बस पापा की जिद की वजह से इंटर की देहरी लांघने के लिए कालेज जाती थी. लेकिन उस के ख्वाबों में बी.कौम में पढ़ने वाला हैडसम भरत ही घूमता रहता. आंखें बंद कर वह उस के साथ सपनों का महल सजातीसंवारती. भरत भी उस की खूबसूरती पर मर मिटा था.

एक दिन रास्ते में सुमना के पापा की मुलाकात उन के दोस्त की पत्नी और बेटे से हो गई. वे उन से 5-6 साल बाद मिल रहे थे. अभिवादन के बाद दोस्त की पत्नी को सादी साड़ी में देख अपने मास्टर दोस्त के हार्ट अटैक से गुजर जाने का उन्हें पता चला. उन्हें बहुत दुख हुआ. पर यह जान कर खुशी हुई कि अपने पापा की जगह पर उन के इकलौते बेटे सुहैल को नौकरी मिल गई. अब वह इसी शहर में नौकरी कर रहा है. सुहैल ने पैर छू कर उन का आशीर्वाद लिया और उन्हें उस में अपना भावी दामाद नजर आया. इसीलिए उन्होंने मांबेटे को अपने घर आमंत्रित किया. सुमना की मां को भी सुहैल पसंद आया और सुहैल तथा उस की मां को सुमना एक नजर में भा गई. लेकिन सुमना को सुहैल फूटी आंख भी पसंद नहीं आया. कहां वह रूपयौवन से भरपूर लंबी और तीखे नाकनक्श की लड़की और सुहैल थोड़े नाटे कद का और सांवला. ऊपर से उस के सिर के बीच के बाल उड़ गए थे और चांद दिख रहा था. सुमना पर तो जैसे वज्रपात हो गया. उस ने मां से कह सीधेसीधे शादी से इनकार कर दिया. मगर उस के पापा आपे से बाहर हो गए, ‘‘मैं ने तुम्हारी बहनों को जिस खूंटे से बांधा वे बंध गईं और तुम अपनी पसंद के लड़के से ब्याह रचाओगी. यह मेरे जीतेजी नहीं हो सकता. बाइक पर घुमाने वाले उस भरत के पास है ही क्या? बाप की दौलत पर मौज करता है. कल को उस का बाप उसे घर से निकाल देगा, तो वह कटोरा ले कर भीख मांगेगा. सुंदर चेहरे का क्या अचार डालना है? सुहैल मेरा देखासुना, अच्छा लड़का है. सरकारी नौकरी है उस की. घरद्वार सब है. ऊपर से इकलौता है. अब क्या चाहिए? इस घर का दामाद सुहैल बनेगा, नहीं तो तुम मेरा मरा हुआ मुंह देखोगी.’’ मांबहनों ने सुमना को खूब समझाया और उस की शादी सुहैल से हो गई.

सुहैल सुमना को जीजान से चाहता था, पर वह मन ही मन उस पर खफा रहती. उस के साथ रास्ते में चलते हुए उसे बड़ी शर्म आती. ‘हूर के साथ लंगूर’ कहकह सहेलियों ने उस की खूब खिल्ली उड़ाई. वह मन ही मन सुहैल को ‘चंडूल’ कहती. सुहैल अपना नया नामकरण जान कर भी  उस पर जान छिड़कता रहा. वह सुमना को आगे पढ़ाना चाहता था. जिस स्कूल में वह पढ़ाता था उस में कालेज भी था. उस ने उस का बी.ए. में ऐडमिशन करा दिया. वह पढ़ने में कमजोर थी, अत: उस की पढ़ाई में भरपूर मदद करता. सुमना के न चाहते हुए भी उस के पैर भारी हो गए. सास ने खूब धूमधाम से उस की गोदभराई करवाई. पर कुदरत से उन की ये खुशियां देखी नहीं गईं. एक रात 8-9 बजे सुहैल ट्यूशन पढ़ा कर बाइक से घर लौट रहा था कि अचानक बाइक की हैडलाइट खराब हो गई और अंधेरे में वह बिजली के एक खंभे से टकरा कर गिर गया. तभी तेज रफ्तार से सामने से आ रही जीप उस के दोनों पैरों पर चढ़ गई. उस के दोनों पैर कुचल गए और जीप वाला भाग खड़ा हुआ. डाक्टर ने सुहैल के दोनों पैर घुटने तक काट दिए. मां और सुमना पर तो दुखों का पहाड़ टूट गया. मां को जबरदस्त सदमा तो इस बात का लगा कि अब उन का बेटा अपने पैरों पर नहीं चल पाएगा. वह तो अपाहिज हो गया. अब दूसरे के रहमोकरम का मुहताज रहेगा. इसी सदमे के कारण वे खुद ही दुनिया छोड़ गईं. सुमना पर यह दूसरा पहाड़ टूटा. ममतामयी सास के चले जाने से उस का रोरो कर बुरा हाल हो गया. अपनी मां का इस तरह चले जाना सुहैल से भी बरदाश्त नहीं हो रहा था. बिस्तर पर पड़ेपड़े वह दिनरात आंसू बहाता. एक तरह से वह डिप्रैशन में डूबता जा रहा था. अपने लाचार पति को इस तरह रोतातड़पता देख सुमना को उस पर बड़ी दया आती. अब उस की स्थिति देख उस का कठोर हृदय मोम की तरह पिघलता जा रहा था. उसी समय उस के पापा ने एक विस्फोट किया कि वह सुहैल को छोड़ दे. सुमना पापा से पूछना चाहती थी कि वह किस के भरोसे अपने पति को छोड़ दे? सुहैल की जिंदगी में जबरदस्ती उन्होंने ही उसे भेजा. आज जब वह अपाहिज हो गया है तो उसे छोड़ने की सलाह दे रहे हैं. क्या मैं उन के हाथों की कठपुतली हूं? मेरा कोई अस्तित्व नहीं है? मुझ पर कब तक बस पापा की ही चलती रहेगी? मेरे पास क्या दिलदिमाग नहीं है? लेकिन ये सारी बातें उस के मन में ही सिमट कर रह गईं.

सुहैल को लगता था कि सुमना एक न एक दिन उसे छोड़ कर चली जाएगी. एक तो वह उसे पसंद नहीं करती फिर एक अपाहिज के साथ वह कैसे रहेगी? और वह अपाहिज शरीर से उस की देखभाल भी कैसे करेगा? हां, सुमना के पेट में उस का एक अंश पल रहा है, शायद अब वह उसे जन्म भी न दे. फिर तो उन दोनों का रिश्ता खत्म हो ही जाएगा. बस, एक नौकरी बची थी, लेकिन वह होगी कैसे? ये सारे सवाल सुहैल के सामने सुरसा की तरह मुंह बाए खड़े थे, जिन का वह समाधान ढूंढ़ता और उन में उलझ जाता. मात्र एक साल ही हुआ था इस शादी को. सुमना एक ऐसे सच का सामना कर रही थी, जिस की उस ने कल्पना भी नहीं की थी. सुहैल को टूट कर बिखरते देख वह उस की शक्ति बन ढाल बनी हुई थी. पहली बार उस ने सुहैल का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘जो हो गया उसे तो हम नहीं बदल सकते. अब आगे जो जिंदगी बची है उसे तो हम हंस कर जीएं. आप बच्चों को हिम्मत से लड़ने की बात सिखाते रहे हैं और आज खुद हिम्मत छोड़ कर बैठे हैं. आप कल से स्कूल पढ़ाने जाइए और मैं कालेज पढ़ने जाया करूंगी. हमें अपने आने वाले बच्चे को एक बेहतर समाज और एक सुनहरा भविष्य देना है. इस तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से कुछ नहीं होगा.’’

सुहैल नम आंखों से सुमना को देखे जा रहा था कि उसे नापसंद करने वाली आज उसे अपनी मां की तरह समझा रही है. ‘‘आप अगर मेरी बात नहीं मानेंगे तो फिर मैं आप को चंडूल महाराज बोलूंगी,’’ सुमना ने हंस कर कहा ताकि सुहैल को हंसी आ जाए. वह ठठा कर हंस दिया. फिर बोला, ‘‘मैं सोच रहा था कि इतने दिनों से कोई मुझे मेरे प्यारे नाम से बुलाता क्यों नहीं? हां, यह ठीक है. मैं एक नौकर रख लेता हूं. वह मुझे स्कूल ले जाएगा, लाएगा और तुम कालेज जाना. अरे हां, तुम पढ़ने के फेर में मेरे आने वाले बच्चे की देखभाल मत भूल जाना. वैसे अभी बच्चे के जन्म में तो समय है न?’’ ‘‘बहुत समय है. अभी तो साढ़े 3 महीने ही हुए हैं. 7वां महीना लगते ही मैं कालेज से छुट्टी ले लूंगी.’’

‘‘दीदी… सर आप को बुला रहे हैं,’’ एक छात्र ने आ कर कहा तो सुमना जैसे नींद से जागी.

‘‘तुम चलो मैं आती हूं,’’ कह कर वह आंसू पोंछ कर मैदान में आ गई. सुहैल व्हील चेयर पर बैठा उसी का इंतजार कर रहा था, लेकिन जब वह आई तब कुछ बोला नहीं. सुमना भी खामोशी से उसे घर ले कर आ गई. सुहैल ने फोन कर अपने नौकर को जल्दी से जल्दी आने को कहा. अपनी पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण वह गांव चला गया था. उस ने दूसरे दिन ही आने का वादा किया. सुमना आते ही रसोई में जुट गई. खाना बना कर उस ने सुहैल को दे दिया तो वह खाने लगा. सुमना को भी भूख लगी थी. वह खाने बैठी ही थी कि फिर पापा का फोन आ गया. वह दूसरे कमरे में जा कर उन से बातें करने लगी. इस बार फोन पर मां भी थीं. वे भी सुमना को सब छोड़छाड़ कर अपने पास बुला रही थीं. पापा ने एकदम खुल कर कहा, ‘‘एक अपाहिज के साथतुम इतनी बड़ी जिंदगी कैसे काटोगी? वह तुम्हें कोई सुख नहीं दे सकता, तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकता. तुम भरत से शादी कर लो. मैं ने एक डाक्टर से अबौर्शन करवाने की बात कर ली है. वह तैयार…’’

सुमना को लगा कि उस के कान में पिता की आवाज नहीं गरमगरम सीसा जा रहा है. अबौर्शन की बात पर उस का पूरा वजूद हिल गया. उस की ममता जाग उठी. अपने अजन्मे बच्चे की गरदन पर अपने पिता के खूनी हाथ की कल्पना कर उस का सर्वांग कांप उठा. उस का वात्सल्य प्रेम खौलते हुए खून के साथ चिंघाड़ उठा, ‘‘वाह पापा वाह. आप जैसा पिता तो मैं ने देखा ही नहीं. जब मैं भरत को चाहती थी तो आप ने जबरदस्ती सुहैल से मेरी शादी करवाई और आज जब वे अपाहिज हो गए हैं तो उन्हें छोड़ने के लिए रोजरोज मुझ पर दबाव डाल रहे हैं. आप जैसा स्वार्थी और मौकापरस्त इनसान मैं पहली बार देख रही हूं. भरत से मेरी शादी होते ही अगर उस का भी ऐक्सीडैंट हो गया या वह मर गया, तो आप मेरी तीसरी शादी करवाएंगे? जिस बच्चे के आने की खुशी में मैं और सुहैल जी रहे हैं उसे आप खत्म करवाने की सोच बैठे. आप ने मेरे मासूम बच्चे की हत्या करवाने की बात कैसे कह दी?’’ सुमना अपने अजन्मे बच्चे की याद में रो पड़ी. उस के पापा ने उस की सिसकी सुनी तो उन के मुंह पर ताला लग गया.

वह आगे बोली, ‘‘आप ने जिस उम्मीद के बलबूते पर मेरी शादी सुहैल से करवाई है, मैं उसी उम्मीद पर खरी उतरना चाहती हूं. अगर मेरी जिंदगी में संघर्ष है, तो मुझे यह संघर्ष और सुहैल के साथ जीवन जीना पसंद है. मैं उन्हें कभी नहीं छोड़ूंगी. मेरे सिवा उन का अब है ही कौन? आगे से इस विषय पर आप मुझ से कभी बात नहीं करेंगे,’’ कह कर सुमना ने मोबाइल का स्विच औफ कर दिया. तभी अचानक धड़ाम की आवाज आई तो वह दौड़ते हुए कमरे की तरफ गई. वहां देखा कि टेबल पर से पानी का गिलास लेने की कोशिश में सुहैल पलंग पर से नीचे गिर गया. ‘‘यह आप ने क्या किया? थोड़ा मेरा इंतजार नहीं कर सकते थे?’’ सुमना सुहैल को किसी तरह से उठाते हुए भर्राए गले से बोली.

‘‘अब तो सिर्फ नौकर का ही इंतजार करना पड़ेगा,’’ कहतेकहते सुहैल की आंखें छलछला आईं. ‘‘आप की जानकारी के लिए बता दूं कि मैं आप को छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगी. हमेशा आप की परछाईं बन कर रहूंगी. पापा को जो बोलना है बोलने दीजिए. यह मेरी जिंदगी है और मेरा फैसला है,’’ सुमना सुहैल को पलंग पर ठीक से बैठाते हुए बोलते जा रही थी. उस ने उस की भीगी पलकों को पोंछ दिया और बोली, ‘‘मर्दों को आंसू शोभा नहीं देते. मैं आप की धर्मपत्नी हूं, इसलिए अपना फर्ज निबाहूंगी. आज से मैं आप की मां की तरह आप को डांटूगी, समझाऊंगी, तो बहन की तरह दुलार और पत्नी की तरह प्यार करूंगी.’’ फिर उस ने सुहैल को गले से लगा लिया. ‘‘धन्यवाद सुमना, तुम्हारे साथ से मैं आबाद हो गया,’’ सुहैल भर्राए गले से बोला. उस को लगा कि सुमना ने उसे तीखी धूप से बचाते हुए उस पर अपनी शीतल छांव कर दी

Valentine’s Special: लाइफ कोच- क्या दोबारा मिल पाए नकुल और किरण

Valentine’s Special: ट्राय करें 18 साल की ‘Patiala Babes’ फेम अशनूर कौर के ये लुक्स

सोनी टीवी के सीरियल ‘पटियाला बेब्स’ (Patiala Babes) में  नजर आ चुकीं एक्ट्रेस अशनूर कौर (ashnoor kaur) अक्सर अपनी फोटोज को लेकर सुर्खियों में रहती हैं. वहीं 18 साल की अशनूर कौर का फैशन बड़े-बड़ों का मात देता है. ये वेलेंटाइन वीक चल रहा है, जिसके लिए हर कोई तैयारी कर रहा है औऱ अगर आप भी इस वेलेंटाइन वीक में खुद के मेकओवर के लिए ड्रेसेस के औप्शन ढूंढ रहे हैं तो आज हम आपको अशनूर कौर (ashnoor kaur) के कुछ लुक बताएंगे, जिसे आप ट्राय कर सकती है.

1. अशनूर की ये ड्रेस है परफेक्ट

अगर आप अपने आप को स्टाइलिश और खूबसूरत दिखाना चाहती हैं तो अशनूर की ये ब्लैक औफ शोल्डर ड्रेस ट्राय करना ना भूलें. इस सिंपल ड्रैस के साथ रैट्रो पैटर्न वाली कैप आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगी.

 

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Looking forward to 2020 like??‍♀️♥️ . #Positivity #Hope #Bye2019 #Welcome2020 #AshnoorStyleDiaries #smile

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2. शर्ट लुक करें ट्राय

 

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Rebel with a cause? #loveyourself #conveyYourThoughts #AshnoorStyleDiaries

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अगर आप अपने लुक को ट्रैंडी बनाना चाहते हैं तो शर्ट लुक ट्राय करें. शर्ट लुक आपके लुक को क्लासी दिखाने में मदद करेगा. इसके साथ आप लौंग इयरिंग्स की बजाय स्टड इयरिंग्स ट्राय करें.

3. लाइट कलर की ड्रैस है परफेक्ट

अगर आप अपने आप को सिंपल और क्यूट लुक देना चाहती हैं तो नेट पैटर्न वाली लाइट कलर की औफ शोल्डर ड्रैस ट्राय करें. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा. आप इस ड्रेस के साथ हील्स की बजाय शूज ट्राय कर सकती हैं.

4. चेक पैटर्न ड्रेस करें ट्राय

अगर आप पार्टी या आउटिंग के लिए ड्रेसेस के औप्शन ढूंढ रहे हैं तो अशनूर की ये चेक पैटर्न वाली ड्रैल ट्राय करना ना भूलें. इस ड्रैस के साथ आप वाइट शूज का कौम्बिनेशन भी ट्राय कर सकते हैं.

 

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5. डैनिम लुक करें ट्राय

 

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P.s. I love you❤️ . . #LoveYouAll #MyAshnoorians

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अगर आप ड्रैसेस की बजाय कुछ और ट्राय करना चाहती हैं तो डैनिम परफेक्ट औप्शन है. डैनिम जींस के साथ क्रौप टौप पैटर्न वाली स्वैट टी शर्ट आपके लुक को खूबसूरत दिखाने में मदद करेगा.

Valentine’s Special: हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद है ‘बुलेटप्रूफ कॉफी’

कई लोग चाय के साथ कॉफी पीना भी खूब पसंद करते हैं. अगर आप कॉफी के शौकीन है, तो आपने देखा होगा कि आजकल मार्केट में कॉफी की बहुत वैरायटी मिलने लगी हैं, जिसमें से चुनना काफी मुश्किल हो जाता है कि आखिर इनमें से कौन सी चुनें कौन सी नहीं. वैसे एक नई तरह की कॉफी की वैरायटी ट्रेंड में है, जिसे बुलेट प्रूफ कॉफी के नाम से जाना जाता है. यह एक हाई कैलोरी ड्रिंक है, जिसे कॉफी में बटर और एमसीटी ऑयल मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका मकसद आपके दिन की शुरूआत को बढ़ावा देना है. यह कॉफी लो कार्ब डाइट को फॉलो करने वालों के बीच बहुत जल्दी पॉपुलर हो गई है. इसे कीटो कॉफी या बटर कॉफी का नया रूप कहा जाए, तो गलत नहीं होगा. . यह आपके शरीर को स्वस्थ पोषक तत्वों और फैट की अच्छी डोज प्रदान करती है. इसे पीने के बाद आप एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव करेंगे . हेल्दी फैट और कॉफी के मिक्स के कारण आप काफी देर तक भरा हुआ महसूस कर सकते हैं. कुल मिलाकर यह एक ऐसी फैटी ड्रिंक है, जो वेटलॉस के लिए यह ज्यादा फेमस हो रही है.

बुलेटप्रूफ कॉफी क्यों पीना चाहिए-

टोस्ट और अनाज जैसे हाई कार्ब ब्रेकफास्ट जैसे ऑप्शन आपको एनर्जी तो देते हैं, लेकिन बाद में यह ब्लड शुगर लेवल के बढऩे का कारण भी बनते हैं. ऐसे में बुलेटप्रूफ कॉफी आपको अपना दिन की शुरूआत  करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा  देती है. इसे पीने के बाद आपको हाई कार्ब वाले ब्रेकफास्ट की जरूरत नहीं पड़ती.

क्या बुलेटप्रूफ कॉफी पीना सेहत के लिए फायदेमंद है-

यदि आप आमतौर पर हर दिन कैफीन का सेवन कर सकते हैं, तो आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है. इस ड्रिंक में मौजूद फैट आपके शरीर में कैफीन को संसाधित करने के तरीके को धीमा करने में मदद कर सकता है. हालांकि, अगर आपका शरीर कैफीन के प्रति संवेदनशील है, तो फैट को शामिल करने से इसका प्रभाव नहीं बदलता. अगर आप अच्छी गुणवत्ता वाले फैट और कॉफी बीन्स से बुलेटप्रूफ कॉफी बना रहे हैं, तो यह आपकी डाइट में अच्छा विकल्प है. लेकिन फिर भी इसे हर दिन बहुत ज्यादा ना पीएं. रेाजाना एक कप कॉफी आपकी सेहत को स्वस्थ रखने में पर्याप्त है.

बुलेटप्रूफ कॉफी के फायदे-

एनर्जी दे- 

बुलेटप्रूफ कॉफी पीने से व्यक्ति को कई घंटों तक लंबे समय तक और निरंतर ऊर्जा मिलती है. दरअसल, कॉफी में मौजूद फैट कैफीन के पाचन को धीमा कर देता है. जिससे शरीर इसे धीरे-धीरे अवशोषित कर देता है.

वजन घटाए- 

बुलेटप्रूफ कॉफी में एमसीटी तेल होता है, जो कीटोसिस को प्रेरित करने में मदद करता है. इसके अलावा कॉफी घी, मक्खन या नारियल तेल जैसी सामग्री के जरिए किटोसिस को बनाए रखने और इंसुलिन लेवल को कम रखने में मदद मिलती है.

पोषक तत्वों से भरपूर है- 

बुलेटप्रूफ कॉफी पोषक तत्वों से भरपूर है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, बीटा-कैरोटीन, ब्यूटायरेट और लिनोलिक एसिड के साथ विटामिन ई, डी, ए और के शामिल है. कॉफी में मौजूद ब्यूटारेट आंत के बेहतर स्वास्थ्य में मददगार है. कॉफी में मिलाया जाने वाला घी या मक्खन शरीर में पोषक तत्वों की आपूर्ति करने का बेहतरीन तरीका है.

कैसे बनाएं बुलेटप्रूफ कॉफी-

सामग्री-

1 कप-  हाई क्वालिटी वाली कॉफी

1-2 बड़ा चम्मच- एमसीटी तेल

1-2 बड़े चम्मच- ग्रास-फेड बटर

बुलेटप्रूफ कॉफी बनाने की विधि-

एक ब्लेंडर लें और उसमें यहां बताई गई सभी सामग्री डाल लें. अब 20-30 सैकंड के लिए इसे अच्छी तरह से ब्लेंडर में मिलाएं . कॉफी मिलाईदार और झागदार दिखनी चाहिए. आमतौर पर लोग और इस ड्रिंक का आनंद लें.

बुलेटप्रूफ कॉफी एक बहुत ही मजेदार विकल्प हो सकता है, लेकिन इससे पहले कि आप इसे अपने आहार में शामिल करें, अपनी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जांच जरूर कर लें. ध्यान रखें, आमतौर पर कैफीन का सेवन न करने वाले लोग इस कॉफी का सेवन नहीं कर सकते.

कृष्णा: कायरा क्यूं सब कुछ छोड़ कर चली गई- भाग 2

नंदिनी सकपका गई, कैसे बोलती कि वह आरव, जोकि उस का दामाद है, के प्रति खिंचाव महसूस कर रही है.  बस, प्रशांत से यह ही बोल पाई, ‘कुछ नहीं, आप भी चलते मेरे साथ तो मुझे तसल्ली रहती. वह यह बात प्रशांत को कैसे बता सकती थी कि वह अपनी बेटी के घर जाते हुए एक किशोरी की तरह महसूस कर रही है, उस का दिल तेज़ी से धड़क रहा है ठीक वैसे ही जैसे किशोरावस्था में धड़कता था.

जब नंदिनी एयरपोर्ट से बाहर निकली तो आरव बाहर ही खड़ा था. नांदिनी को देखते ही वह बोला, ‘आप को नहीं पता, मैं कितना खुश हूं कि अब आप मेरे साथ रहोगी. कितनी अच्छी लग रही हो आप इस पस्टेल कलर के सूट में. जरा मेरी बीवी को भी कुछ सिखा दीजिए.’

नांदिनी चुप रही, बस मुसकराती रही. रास्ते में आरव और वह एक नई किताब पर चर्चा करते रहे थे.

जब नंदिनी आरव के साथ घर पहुंची तो घर का और कायरा का हाल देख कर नंदिनी चकरा गई थी. नंदिनी को आरव का अपने प्रति झुकाव का कारण आज समझ आ गया था.  नहा कर जब नंदिनी बाहर आई तो देखा कायरा ने चाय बना ली थी. चाय एकदम बेस्वाद  बनी थी. नंदिनी को बहुत भूख लगी  हुई थी, इसलिए चाय के बाद उस ने कायरा से कहा- ‘कायरा, लाओ मैं नाश्ता बना देती हूं.’ रसोई का भी बुरा हाल था लेकिन फिर भी किसी तरह जुगाड़ कर के नंदिनी ने बेसनी परांठे और आलू की सब्जी बना दी. कायरा ने जल्दीजल्दी नाश्ता खाया लेकिन आरव की तो तारीफ़ ही ख़त्म नहीं हो रही थी.  कायरा नाश्ते के बाद अपने कमरे में बंद हो गई थी.  आरव और  नंदिनी  ‘माया मेमसाहब’ मूवी देख रहे थे.

अचानक से आरव बोला, ‘आप को पता है, बचपन से मुझे आंटी लोग बहुत अच्छी लगती थीं.   मेरी पड़ोस में रहने वाली नीरा आंटी मेरा क्रश थीं.  एक बात बोलूं, अगर आप बुरा न मानो?’

नंदिनी का दिल तेज़ी से धड़क रहा था पर फिर भी बोली हां बोलो.

‘जब मैं कायरा से मिलने आया था तो मुझे कायरा से ज्यादा आप पसंद आ गई थीं.’ नंदिनी पसीनापसीना हो गई थी.  आरव बिना रुके बोल रहा था, ‘आप के साथ मैं रिलेट कर पाता हूं पर कायरा के साथ मैं चाह कर भी इस तरह से नहीं कर पाता.’

नंदिनी को समझ नहीं आ रहा था कि वह इस बात का क्या जवाब दे. पर नंदिनी के रोमरोम में सिहरन हो रही थी. नंदिनी बिना कोई जवाब दिए बाहर बालकनी में आ कर बैठ गई थी.  उस ने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह कभी ऐसी दुविधा में फंसेगी.  आरव का साथ उसे अच्छा लगता था, उस से बात कर के वह तरोताज़ा महसूस करती थी पर फिर बीच में उस के और आरव के रिश्ते की मर्यादा आ खड़ी होती थी.

सुबह नंदिनी की आंखें हमेशा की तरह जल्दी खुल गई थीं.  जब वह फ्रैश हो कर बाहर निकली तो देखा, आरव रसोई में चाय बना रहा था. नंदिनी आरव को हटाते हुए बोली, ‘अरे, चलो, तुम हटो, मैं बना देती हूं.’ आरव बोला, ‘अरे, मैं तो तैयार हूं, आप जल्दी से ट्रैक सूट पहन लो, फिर जौगिंग करने चलेंगे.’

बाहर की ठंडी हवा में नंदिनी तरोताज़ा महसूस कर रही थी. जब आरव और नंदिनी घूम कर वापस आए तो कायरा बासी सा चेहरा लिए उन दोनों की प्रतीक्षा कर रही थी.  कायरा हंसती हुई बोली, ‘चलो, बेटी न सही तो मां ही सही. मम्मी, आप तो धीरेधीरे आरव की सारी शिकायतें दूर कर दोगी जो उसे मुझ से हैं.’

नंदिनी सकपकाती हुई बोली, ‘भला तुम क्यों नहीं जाती उस के साथ?’

कायरा बोली, ‘अरे, मुझे औफिस से समय मिले तो यह सब करूं न.’

आरव के औफिस जाने के बाद नंदिनी ने कायरा को आड़े हाथों लिया. ‘अगर तुम्हारा हाल यह ही रहा तो जल्द ही आरव किसी और की बांहों में झूल रहा होगा.’

कायरा हंसती हुई बोली, ‘अरे, आरव को तो आप से ही फ़ुरसत नहीं जो वह किसी और की तरफ देखे.’

नंदिनी गुस्से में बोली, ‘क्या मतलब?’

कायरा बोली, ‘अरे, मेरी भोली मम्मी, आप का दामाद तो बुद्धू हैं, आप चिंता न करो.’

नंदिनी किस मुंह से बोलती कि उस का बुद्धू पति अपनी सास को अपनी पत्नी से अधिक पसंद करता है. आरव अब रोज़ शाम को आ कर नंदिनी के साथ किसी न किसी साहित्यिक विचारविमर्श में व्यस्त रहता था और बाद में नंदिनी की रसोई में मदद करता था. नंदिनी को ये ही सब तो प्रशांत में चाहिए था.  10 दिन बीत गए थे पर जब भी नंदिनी जाने का नाम लेती तो कायरा मना कर देती थी.

एक रोज़ शाम को कायरा नंदिनी की गोद में लेटी हुई बोल रही थी, ‘मम्मी, आप जब से आई हो, आरव बदल गया है, वरना वह घर की तरफ रुख भी नहीं करता था. न जाने किस के साथ फ़ोन पर व्यस्त रहता था? मम्मी क्या सभी पति ऐसे ही होते हैं? तभी तो मेरा मन नही है कि आप वापस जाओ, घर घर जैसा लग रहा है.’

हार्दिक पंड्या-नताशा ने उदयपुर में क्रिश्चियन रीति-रिवाज से की शादी, देखें फोटोज

टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर हार्दिक पंड्या ने नताशा स्टेनकोविक के साथ फिर से शादी कर ली है. दोनों की शादी उदयपुर में संपन्न हुई. हार्दिक ने साल 2020 में नताशा के साथ कोर्ट मैरिज की थी. अब एकबार फिर दोनों ने सात जन्मों तक साथ रहने की कसमें खाई हैं. हार्दिक ने शादी की तस्वीरें भी शेयर की हैं. उस समय कोविड-19 की वजह से काफी कम लोग जुटे थे. अब हार्दिक पंड्या और सर्बियाई मॉडल नताशा ने तीन साल बाद वैलेंटाइन डे के मौके पर व्हाइट वेडिंग की है.

हार्दिक पंड्या ने इंस्टाग्राम पर दिखाया प्यार

हार्दिक ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘हमने तीन साल पहले ली गई प्रतिज्ञाओं को फिर से दोहराकर प्यार के इस द्वीप पर वैलेंटाइन डे मनाया. हम अपने प्यार का जश्न मनाने के दौरान अपने परिवार और दोस्तों को पाकर वास्तव में धन्य हैं.’

शादी में हार्दिक पंड्या ने काले रंग का टक्सीडो सूट पहना हुआ था. वहीं नतासा सफेद गाउन में काफी जंच रही थीं. शादी को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ है. वायरल हुए वीडियो क्लिप में हार्दिक बॉलीवुड गाने पर ट्यूनिंग जमा रहे है और उनके हाथों में शैम्पेन की बोतल भी है.

 

बेटे के साथ दिखे ये कपल

हार्दिक ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें आप कपल को बहुत खुश देख सकते हैं. दोनों ने कैमरे के सामने जमकर एक से बढ़कर एक पोज दिए. जहां ब्लैक सूट में हार्दिक बहुत हैंडसम नजर आए, वहीं नताशा व्हाइट ड्रेस में किसी राजकुमारी से कम नहीं लगीं. दोनों की शादी का थीम व्हाइट था. फोटोज को शेयर करते हुए हार्दिक लिखते हैं, “हमने तीन साल पहले ली गई प्रतिज्ञाओं को फिर से दोहराकर प्यार के इस द्वीप पर वैलेंटाइन्स डे सेलिब्रेट किया है. हम अपने प्यार का जश्न मनाने के लिए अपने परिवार और दोस्तों को अपने साथ पाकर वास्तव में बहुत धन्य हैं”

क्रिश्चियन रीति-रिवाज से की शादी

कपल ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें वे अपने दो साल के बेटे अगस्त्य के साथ भी नजर आए. एक फोटो में देख सकते हैं कि अगस्त्य को हार्दिक ने गोद में लिया हुआ है और वे अपनी मां के गालों को चूम रहे हैं. हार्दिक के इस पोस्ट पर फैन्स के साथ-साथ सेलेब्स भी प्यार बरसा रहे हैं. केएल राहुल, नेहा धूपिया जैसे सितारों ने कपल को बधाई दी है.

अनुज-अनुपमा की जिंदगी में तहस नहस करेगी माया, वनराज की वजह से बेइज्जत हुई काव्या

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा‘ को टीआरपी लिस्ट में नंबर वन बनाए रखने के लिए मेकर्स आए दिन ट्विस्ट पर ट्विस्ट ला रहे हैं. जहां पहले माया छोटी अनु को पाने के लिए अनुपमा की जिंदगी में आई थी तो अब वहीं वह अनुज के भी नजदीक जाने की कोशिश में है. दूसरी ओर पारितोष की बिगड़ती हालत के लिए शाह परिवार में बवाल मचा हुआ है. यहां तक कि वनराज को भी अनुपमा की अहमियत पता चल गई है कि कैसे वह पूरे घर को संभाल लेती थी. लेकिन रुपाली गांगुली स्टारर ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं पर खत्म नहीं होते हैं. शो में ऐसा बहुत कुछ होने वाला है जो लोगों को हैरान कर देगा.

 

 

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बा की बोलती बंद करेगी राखी दवे

‘अनुपमा’ में दिखाया जाएगा कि राखी बा को खरी-खोटी सुनाती है. वह कहती है कि अच्छा हुआ किंजल यहां नहीं थी, वरना तोषू के गिरने पर यह तो किंजल को जेल भेज देतीं. इसके साथ ही राखी ताना मारती है कि परी रो रही थी तो तुम अपनी बेटी को बुला लेतीं, लेकिन आपको अपनी बेटी की नींद खराब नहीं करनी, लेकिन बहू को सूली चढ़ा दो.

 

अनुपमा के कमरे में तांक-झांक करेगी माया

अनुपमा‘ में देखने को मिलेगा कि काव्या अनुपमा और माया के कमरे में तांक-झांक करेगी. लेकिन बरखा उसे ऐसा करते हुए देख लेगी और उसपर चिल्लाएगी. हालांकि माया अनुपमा और अनुज के सामने उसी को गलत साबित कर देगी. लेकिन बरखा दोनों को चेतावनी देगी कि आज उसके पास भले ही सबूत नहीं था, लेकिन ये माया भरोसे के लायक बिल्कुल नहीं है.

अनुपमा के हंसते-खेलते परिवार पर नजर गड़ाएगी माया

‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का डोज यहीं खत्म नहीं होता है. शो में जल्द ही दिखाया जाएगा कि माया अनुपमा की खुशी देखकर जलेगी. वह अपने मन ही मन सोचेगी कि मैं जिस चीज के लिए यहां आई हूं, उसे हासिल करके ही रहूंगी. यहां तक कि वह अनुपमा के कमरे में तांक-झांक करती है, जिसे बरखा देख लेती है और अनुपमा-अनुज को बता देती है. हालांकि माया उसे ही गलत साबित कर देती है, लेकिन बरखा अनुज व अनुपमा को चेतावनी देती है कि माया भरोसे लायक नहीं है.

वयनराज के कारण नौकरी से हाथ धोएगी काव्या

राखी दवे की बात सुनने के बाद वनराज काव्या के सेट पर चला जाता है और वहां ड्रामे करता है. उसकी ये हरकतें देख मोहित और वनराज भिड़ जाते हैं. गुस्से में मोहित काव्या को सेट से निकाल देता है और बोलता है, “तुम दोनों की परछाईं भी मेरे सेट पर नहीं पड़नी चाहिए” यह सब देख काव्या के आंसू नहीं रुकते.

 

अनुपमा से शाह हाउस में चलने के लिए कहेंगी बा

रुपाली गांगुली स्टारर ‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का तड़का यहीं खत्म नहीं होता है. शो में जल्द ही दिखाया जाएगा कि अनुज और अनुपमा साथ में क्वालिटी टाइम बिता ही रहे होंगे. तभी वहां बा आ धमकेंगी. वह रोते-गिड़गिड़ाते अनुपमा से शाह हाउस वापिस चलने के लिए कहेंगी. बा की बातों को सुनकर अनुपमा अनुज की ओर देखेगी और उसके चेहरे पर हताशा नजर आएगी. दूसरी तरफ माया इस बात से खुश होगी कि अनुपमा एक बार फिर से दूर जा रही है. हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि अनुपमा क्या फैसला करती है.

 

Holi 2023: सदमा- आखिर कैसा रिश्ता था नेहा और शलभ का? भाग 2

डाक्टर से पीयूष के बारे में जरूरी डिस्कशन कर वह बेटे को दवा की अगली खुराक देने लगी. पीयूष बेचैन था और रहरह कर रो रहा था. देर रात तक वह पीयूष का सिर गोद में लिए बैठी रही. फिर उसी की बगल में सो गई.

दरअसल, पीयूष नेहा का 10 साल का बेटा था. नेहा एक तलाकशुदा महिला थी. उस का पति विपुल हैदराबाद में मैनेजर था. विपुल से नेहा ने लव मैरिज की थी. दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे. घर वालों के खिलाफ जा कर नेहा ने यह शादी कर ली थी. दोनों ने एक खूबसूरत शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत भी की. उन के प्यार का प्रतीक जब नेहा के गर्भ में आया तो विपुल खुशी से पागल हो गया. उसे बच्चों से बहुत लगाव था. वह अपने भाई के बच्चों को भी हर समय गोद में लिए रहता. यही वजह थी कि जब नेहा के प्रैगनैंट होने की खबर मिली तो उस ने अपने पूरे औफिस में मिठाई बंटवाई.

निश्चित समय पर नेहा ने एक खूबसूरत बेटे को जन्म दिया. उस दिन विपुल ने अपने महल्ले में ढोलनगारे बजवाए. नाचगाने का प्रोग्राम करवाया. नेहा और बच्चे के स्वागत में पूरे घर को सजाया. खिलौनों से पूरा कमरा भर दिया. बहुत प्यार से दोनों ने बच्चे का नाम पीयूष रखा. पीयूष बड़ा होने लगा मगर जल्द ही दोनों को यह बात सम?ा आने लगी कि वह एक नौर्मल चाइल्ड नहीं है.

डाक्टर से चैकअप के बाद पता चला कि वह डाउन सिंड्रोम की समस्या से ग्रस्त है. डाक्टर ने यह भी बताया कि डाउन सिंड्रोम की समस्या जेनेटिक होती है. विपुल को याद आया कि नेहा के सगे चाचा को भी यह समस्या रही है. डाक्टर से मिलने और सब जान लेने के बाद विपुल का व्यवहार नेहा और उस के बच्चे से एकदम बदल गया. वह बहुत चिड़चिड़ा रहने लगा. उस ने फिर एक और डाक्टर से बात की. इस डाक्टर ने भी वही बातें बताईं.

विपुल को इस तरह परेशान देख कर नेहा उसे सम?ाने लगी, ‘‘देखो विपुल

बच्चे की बीमारी पर हमारा वश नहीं. हमें कुदरत ने जैसी भी संतान दी है उसे ही हम अपना सारा प्यार देंगे. बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है. इस सच को ऐक्सैप्ट कर लो विपुल तभी खुश रह पाओगे.’’

‘‘नहीं मैं न इस सच को ऐक्सैप्ट कर सकता हूं और न ही इस बच्चे को. यह मेरा फाइनल डिसिजन है.’’

‘‘यह क्या कह रहे हो? इसे ऐक्सैप्ट नहीं करोगे? क्या मतलब है तुम्हारा?’’ नेहा ने परेशान स्वर में पूछा.

‘‘यही मतलब है कि मु?ो यह बच्चा नहीं चाहिए,’’ मुंह फेरते हुए विपुल ने कहा.

‘‘नहीं चाहिए तो क्या जान से मारोगे इस नन्ही सी जान को? देखो कैसे मुसकरा रहा है. इस पर तुम्हें प्यार नहीं आता विपुल?’’

‘‘नहीं नेहा मु?ो इस पर प्यार नहीं आता. मैं इस की शक्ल भी देखना नहीं चाहता. मैं एक स्पैशल चाइल्ड का बाप कहलाना पसंद नहीं करता. हम इसे किसी अनाथालय में छोड़ आएंगे.’’

‘‘नहीं मैं ऐसा नहीं करने दूंगी. यह मेरा बच्चा है. मैं ने इसे 9 महीने कोख में रखा है. अपने खून से सींचा है.’’

‘‘तो ठीक है तुम इसे या मु?ो किसी एक को चुन लो. वैसे भी तुम इसी तरह के बीमार बच्चों को जन्म दोगी. तुम्हारे खानदान में ही दोष है. मैं तुम से अलग होना चाहता हूं.’’

विपुल के मुंह से इतने कड़वे शब्द सुनने और उस के प्यार की असलियत सम?ाने के बाद नेहा कुछ नहीं कह पाई. उस ने फैसला कर लिया. वह विपुल से अलग हो गई और बच्चे के साथ नई जिंदगी की शुरुआत की. कुछ ही दिनों में उस ने एक अच्छी कंपनी में जौब भी शुरू कर दी. वैसे भी वह एमबीए की पढ़ाई कर रही थी, इसलिए नौकरी मिलने में दिक्कत नहीं हुई.

इस बात को आज 8 साल बीत चुके थे. पीयूष पढ़ाई करने लगा था. नेहा उसे

समयसमय पर थेरैपी के लिए ले जाती. नेहा ने अपनी मेहनत और लगन से औफिस में भी

अच्छा रुतबा बना लिया था. उसे बहुत तेजी से तरक्की मिली थी और उस ने अपना 3 बीएचके का फ्लैट ले लिया था. पीयूष की देखभाल के लिए उस ने सूजी नाम की फुलटाइम मेड लगा रखी थी. वह पीयूष का पूरा खयाल रखती और घर के सदस्य की तरह रहती. यही वजह थी

कि नेहा को औफिस संभालने में दिक्कत नहीं आती थी.

हाल ही में कंपनी की तरफ से उसे तरक्की दे कर नई ब्रांच में भेजा गया था जहां उस की मुलाकात शलभ से हुई. कहीं न कहीं अब वह शलभ के साथ एक खूबसूरत जीवन की कल्पना करने लगी थी. मगर जिंदगी उसे कुछ और ही सच दिखाने वाली थी.

दरअसल, उस दिन औफिस से नेहा के जाते ही शलभ के दोस्त और कुलीग अरुण एवं शालिनी ने प्रवेश किया. उन्होंने शलभ के कमरे से नेहा को हड़बड़ाए हुए निकलते देख लिया था.

आते ही अरुण ने शलभ से पूछा, ‘‘क्या हुआ, नेहा इतनी जल्दी कहां चली गई?’’

‘‘पता नहीं यार. अचानक कोई फोन कौल आई और वह परेशान सी चली गई. कुछ बताया भी नहीं.’’

‘‘आई गैस, उस के बेटे की तबीयत खराब होगी.’’

‘‘बेटा?’’ शलभ ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘हां, एक दिन बताया था उस ने. उस दिन भी वह परेशान थी. मेरे पूछने पर कहने लगी कि बेटे की तबीयत ठीक नहीं और उसे मेड के भरोसे छोड़ कर आना पड़ा है.’’

‘‘क्यों घर में और कोई नहीं बच्चे को संभालने के लिए?’’ अरुण ने सवाल किया.

‘‘नहीं वह अकेली रहती है.’’

‘‘मगर उसे बेटा है, ऐसा कैसे? क्या वह शादीशुदा है?’’ शलभ को एक ?ाटका सा लगा.

‘‘फिलहाल उस का स्टेटस डिवोर्सी का है. उस ने पति से कई साल पहले तलाक ले लिया था. अकेली ही बच्चे को पाल रही है.’’

‘‘पर उस ने मु?ो तो कुछ नहीं बताया,’’ शलभ की आंखों में कई सवाल थे.

 

‘‘इस औफिस में ये सब बातें केवल मु?ो ही पता हैं. दरअसल मैं और नेहा पिछले

औफिस में भी साथ काम करते थे. वहां हमारी अच्छी दोस्ती हो गई थी. मैं तो उस के घर भी गई हूं. बहुत बड़ा और सुंदर घर है उस का.’’

‘‘और बच्चा? बच्चा कितना बड़ा है?’’ शलभ ने सवाल किया.

‘‘बच्चा वैसे तो 8-10 साल का होगा मगर वह स्पैशल चाइल्ड है न सो अब भी संभालना कठिन होता है उसे.’’

‘‘स्पैशल चाइल्ड?’’

‘‘हां. उस का बेबी जन्म से ही डाउन सिंड्रोम की समस्या से पीडि़त है. मैं तो उस की हिम्मत की दाद देती हूं. इतनी बड़ी जिम्मेदारी वह

अकेली उठा रही है. सुना है उस के पति ने भी इस बच्चे की वजह से ही उसे तलाक दिया था. वह इस बच्चे को किसी अनाथालय में छोड़ने को तैयार नहीं हुई और अकेले ही उसे पालने का फैसला लिया.’’

नेहा के बारे में ये सारी जानकारी पाने के बाद शलभ खुद को ठगा हुआ सा महसूस करने लगा. जिस लड़की को वह अपना पहला प्यार सम?ा रहा था वह तो शादीशुदा और एक बच्चे की मां निकली. बच्चा भी साधारण नहीं बल्कि एक स्पैशल चाइल्ड. वह पूरी रात सो नहीं सका. उसे इस बात का भी अफसोस था कि ये सारी बातें उसे दूसरों से पता चलीं. खुद नेहा ने उसे कुछ नहीं बताया. जिस रिश्ते को वह इतना सीरियसली लेने लगा था वह रिश्ता तो ?ाठ की बुनियाद पर टिका निकला. उसे नेहा से नफरत सी होने लगी. वैसे भी एक तलाकशुदा बीमार बच्चे की मां को वह अपना सारा जीवन नहीं सौंप सकता. बात ज्यादा बड़ी नहीं थी सो उस के लिए कदम पीछे करना आसान था. उस ने फैसला ले लिया था कि वह अब नेहा से दूरी बढ़ा लेगा.

नेहा 2 दिन औफिस नहीं आई. पहले अगर नेहा एक दिन भी औफिस नहीं आती थी तो शलभ 4 बार फोन कर डालता था. मगर इस बार उस ने हालचाल भी नहीं पूछा. यह बात नेहा को खटक रही थी.

व्हाइट गोल्ड और डायमंड के ये है फायदे

गहनों की अगर बात की जाए, तो हमारा ध्यान सोने, चांदी, हीरे, मोती और अन्य आर्टिफिशियल गहनों की ओर जाता है. उस में भी कुछ शौकीन लोगों का रुझान सोने और हीरों के गहने की ओर ज्यादा होता है. लेकिन सिर्फ सोने की अगर बात करें, तो चमचमाता सुनहरा पीला रंग आंखों के आगे आता है. जबकि मजेदार बात यह है कि सिर्फ सोने के गहनों की ही चाहत रखने वालों को मार्केट में सफेद सोना भी मिलता है.

जी हां, चमचमाते पीले सोने जैसे ही सफेद सोने के गहने भी आप को मार्केट में आसानी से मिल जाएंगे. सफेद सोना चांदी, निकल, पैलेडियम, प्लैटिनम, मैगनीज और रेडियम धातुओं के मिश्रण से बनाया जाता है और इन धातुओं के मिश्रण से पीले सोने का रंग सफेद नजर आने लगता है.

आइए जानते हैं कि सफेद सोने की कौनकौन सी चीजें बाजार में उपलब्ध हैं और हम कैसे उन का इस्तेमाल कर सकते हैं.

– आप सफेद कपड़ों पर सफेद सोने की डिजाइनर, प्लेन या हीरेजडि़त चूडि़यां और अंगूठी, चेन व डिजाइनर पेंडैंट पहन सकती हैं.

– सफेद सोने का नैकलैस, मंगलसूत्र, बिछुए, बाजूबंद और ब्रेसलेट भी आप बनवा सकती हैं.

– सोने के पीले और सफेद रंग के कौंबिनेशन वाले गहने भी मिल जाएंगे.

– आजकल तो व्हाइट गोल्ड प्लेटेड कार भी मार्केट में है.

– कुछ साइकिल निर्माताओं ने तो व्हाइट गोल्ड प्लेटेड और पीले व सफेद गोल्ड के कौंबिनेशन वाली गोल्ड प्लेटेड साइकिल भी बनाई है.

– कुछ शौकीनों ने तो जूते और चप्पलों पर भी व्हाइट गोल्ड का इस्तेमाल किया है.

– आप अगर व्हाइट गोल्ड की शौकीन हैं, तो आप व्हाइट गोल्ड की घड़ी भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

– आजकल तो व्हाइट गोल्ड कवर और बौर्डर वाले मोबाइल फोन भी उपलब्ध हैं.

– सफेद सोने के साथ चमचमाते सफेद हीरे भी आप फैशन के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं. यानी गहनों का सोना तो सफेद होगा ही, उस में जड़ा हीरा भी सफेद होगा.

– हीरे के गहनों में अंगूठी, कान के टौप्स, नैकलैस व चूडि़यों आदि की बहुत ज्यादा मांग होती है.

– घडि़यां भी हीरों से डिजाइन की जाती हैं.

– कुछ शौकीन लोग कपड़ों पर भी सफेद सोने के बारीक तार और हीरों की ऐंब्रौयडरी कराते हैं.

– व्हाइट गोल्ड की चेन, नैकलैस और मंगलसूत्र में भी आप हीरेजडि़त पेंडैंट इस्तेमाल कर सकती हैं.

– सफेद सोने की हीरेजडि़त पायल भी आप पहन सकती हैं.

ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल

ये तो हुई बाहरी सुंदरता बढ़ाने वाले गहनों की बात, लेकिन पीले सोने की तरह ही सफेद सोने और हीरे का भी ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है. आइए जानते हैं उन प्रोडक्ट्स में खूबियां कैसी होती हैं:

– सफेद सोना या हीरामिश्रित ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से त्वचा का रक्तसंचार बढ़ता है, जिस से त्वचा तरोताजा और चमकदार नजर आने लगती है.

– सफेद सोना और हीरामिश्रित क्रीम और मौइश्चराइजर लगाने से त्वचा की गुणवत्ता में सुधार आता है और त्वचा की इम्यूनिटी बढ़ती है.

सफेद सोने का फेशियल यानी व्हाइट गोल्ड

फेशियल और हीरे का फेशियल करने से त्वचा की रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है और त्वचा का बेजान व निस्तेज होना व कालापन दूर होता है. साथ ही रूखी, रफ और खराब त्वचा स्वस्थ होती है.

व्हाइट गोल्ड पैक और डायमंड पैक से मुंहासों और त्वचा के दाग दूर होते हैं, त्वचा में कसाव आता है और त्वचा पर आ गई महीन रेखाएं दूर होती हैं. त्वचा लोचदार और नम नजर आती है. ऐसा त्वचा का रूखापन दूर होने से होता है.

व्हाइट गोल्ड और डायमंड पैक से त्वचा पर स्थित ब्लैकहैड्स और व्हाइटहैड्स दूर होते हैं और त्वचा निखरीनिखरी, चमकदार और तरोताजा नजर आती है.

व्हाइट गोल्ड और डायमंड के ब्यूटी प्रोडक्ट्स ये हैं:

– डायमंड ऐंड व्हाइट गोल्ड पील औफ मास्क.

– बी बी क्रीम.

– नेलपौलिश.

– शैंपू.

– क्रीम, मौइश्चराइजर.

– स्किन स्क्रबर.

– डायमंड ग्लोइंग फेसपैक.

आप इन में से किसी भी ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर अपनी त्वचा की सुंदरता में निखार ला सकती हैं.

डिजाइनिंग का तरीका

– हीराजडि़त पेन में पेन के ऊपरी हिस्से पर हीरे का डिजाइनर टौप होता है.

– मोबाइल फोन के चारों ओर व्हाइट गोल्ड प्लेटेड बौर्डर होता है और उस पर हीरे जड़े होते हैं.

– व्हाइट गोल्ड और हीरे की घडि़यों में घड़ी व्हाइट गोल्ड की बनी होती है, जिस में 1 से 12 तक के अंकों की जगह हीरे जड़े होते हैं.

डायमंड फेशियल

इस के लिए सब से पहले डायमंड रिहाइड्रेटिंग क्लींजर लगा कर कौटन से त्वचा पोंछ लें. इस से त्वचा पर स्थित मृत त्वचा निकल जाती है. फिर उचित मात्रा में डायमंड मसाज जैल ले कर 20 मिनट तक चेहरे की मसाज करें. फिर डायमंड ग्लोइंग मास्क की मोटी परत चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट सूखने दें. फिर साफ पानी से चेहरा धो दें. उस के बाद उचित मात्रा में बौडी केयर 24 कैरेट डायमंड स्किन सीरम त्वचा पर लगाएं और कुछ मिनट बाद चेहरा पोंछ दें.

आप यह उपाय घर में कर सकती हैं, लेकिन इस में लगने वाले प्रोडक्ट्स को देखते हुए इस के लिए सौंदर्य विशेषज्ञ के पास जाना ही ज्यादा फायदेमंद साबित होगा.

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