अगर आप फिंटर में कुछ हैल्दी और स्वादिष्ट खाना चाहाते है तो आसान तरीकों से बनाएं बेसिल फाईड राइस. ये है कुछ टिप्स घर पर तैयार किए हुए फ्राईड राइस की डिश की रेसिपी.
सामग्री
1 बाउल चावल उबले
जरूरतानुसार हरी व लालमिर्च बारीक कटी
1 छोटा चम्मच ग्रीन पेपर कौर्न
4-5 कलियां लहसुन बारीक कटा
1-2 टुकड़े ब्रोकली
3-4 बेबी कौर्न
1 गाजर
रिफाइंड औयल जरूरतानुसार
1 पैकेट मैगी का मसाला
थोड़ी सी तुलसीपत्ती गार्निशिंग के लिए
नमक स्वादानुसार.
विधि
ब्रोकली, बेबी कौर्न और गाजर को छोटेछोटे टुकड़ों में काट कर ब्लांच कर लें. एक पैन में तेल गरम कर के हरी व लालमिर्च और लहसुन डाल कर सौटे करें. अब इस में चावल, ब्लांच्ड सब्जियां और ग्रीन पेपरकौर्न मिला कर पकाएं. मैगी का मसाला व नमक डाल कर थोड़ा और पकाएं. फिर तुलसीपत्ती से गार्निश कर परोसें.
अचानक ग्रीष्मा ने घड़ी पर नजर डाली. 8 बज रहे थे. वह एकदम उठ गई और बोली, ‘‘सर, अब मुझे चलना होगा. मांबाबूजी इंतजार कर रहे होंगे,’’ कह कर वह कौफी हाउस से बाहर आ स्कूटी स्टार्ट कर घर चल दी. घर आ कर ग्रीष्मा सीधे अपने कमरे में गई और खुद को फिर आईने में देख सोचने लगी कि क्या हो रहा है उसे? कहीं उसे प्यार तो नहीं हो गया… पर नहीं वह एक विधवा है… मांबाबूजी और कुणाल की जिम्मेदारी है उस पर…वह ये सब क्यों भूल गई…सोचतेसोचते उस का सिर दर्द करने लगा तो कपड़े बदल कर सो गई.
अगले दिन जैसे ही स्कूल पहुंची तो विनय सर सामने ही मिल गए. उसे देखते ही बोले, ‘‘मैम, फ्री हो कर मेरे कैबिन में आइएगा, आप से कुछ काम है.’’ ‘‘जी सर,’’ कह कर वह तेज कदमों से स्टाफरूम की ओर बढ़ गई.
जब वह सर के कैबिन में पहुंची तो विनय सर बोले, ‘‘मैडम कल शिक्षा विभाग की एक मीटिंग है, जिस में आप को मेरे साथ चलना होगा.’’ ‘‘सर मैं… मैं तो बहुत जूनियर हूं… और टीचर्स…’’ न जाने क्यों वह सर के साथ जाने से बचना चाहती थी.
‘‘यह तो मेरी इच्छा है कि मैं किसे ले जाऊं, आप को बस मेरे साथ चलना है.’’ ‘‘जी, सर,’’ कह कर वह स्टाफरूम में आ गई और सोचने लगी कि यह सब क्या हो रहा है… कहीं विनय सर को मुझ से… मुझे विनय सर से… तभी फ्री टाइम समाप्त होने की घंटी बजी और वह अपनी कक्षा में आ गई. आज उस का मन बच्चों को पढ़ाने में भी नहीं लगा. दिलदिमाग पर सर का जादू जो छाया था.
अगले दिन मीटिंग से वापस आते समय विनय सर ने गाड़ी फिर कौफी हाउस के बाहर रोक दी. बोले, ‘‘चलिए कौफी पी कर चलते हैं.’’ उन का ऐसा जादू था कि ग्रीष्मा चाह कर भी मना न कर सकी.
कौफी पीतपीते विनय सर उस की आंखों में आंखें डाल कर बोले, ‘‘ग्रीष्मा, आप ने अपने भविष्य के बारे में कुछ सोचा है?’’ ‘‘क्या मतलब सर… मैं कुछ समझी नहीं…’’ अचकचाते स्वर में समझ कर भी नासमझ बनते हुए उस ने कहा.
‘‘जो हो गया है उसे भूल कर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के बारे में सोचिए…मैं आप का हर कदम पर साथ देने को तैयार हूं. यदि आप को मेरा साथ पसंद हो तो…’’ सपाट स्वर में विनय सर ने अपनी बात ग्रीष्मा के सामने रख दी. कुछ देर तक विचार करने के बाद ग्रीष्मा बोली, ‘‘सर, बुरा न मानें तो एक बात पूंछू? आप ने अभी तक विवाह क्यों नहीं किया?’’
‘‘आप का प्रश्न एकदम सही है. मैडम ऐसा नहीं है कि मैं विवाह करना नहीं चाहता था, परंतु पहले तो मैं अपने कैरियर को बनाने में लगा रहा और फिर कोई लड़की अपने अनुकूल नहीं मिली. दरअसल, हमारे समाज में लड़कियों को उच्चशिक्षित नहीं किया जाता. अल्पायु में ही उन की शादी कर दी जाती है. मुझे शिक्षित लड़की ही चाहिए थी. बस इसी जद्दोजहद में मैं आज तक अविवाहित ही हूं. बस यही है मेरी कहानी.’’ सर की बातें सुन कर ग्रीष्मा सोचने लगी कि सर की जाति के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं. मांबाबूजी तो बड़े ही रूढि़वादी हैं. पर किया भी क्या जा सकता है…प्यार कोई जाति देख कर तो किया नहीं जा सकता. वह तो बस हो जाता है, क्योंकि प्यार में दिमाग नहीं दिल काम करता है.
ग्रीष्मा अपने विचारों में डूबी हुई थी कि अचानक विनय सर बोले, ‘‘अरे मैडम कहां खो गईं?’’
‘‘सर मैं आप की बात को समझ रही हूं और मानती भी हूं कि आप ने मेरे अंदर जीने की इच्छा जाग्रत कर दी है. आप ने मेरे खोए आत्मविश्वास को लौटाया है. जब आप के साथ होती हूं तो मुझे भी यह दुनिया बड़ी हसीन लगती है…मुझे आप का साथ भी पसंद है… पर मेरे साथ बहुत सारी मजबूरियां हैं… मैं अकेली नहीं हूं मेरा बेटा और सासससुर भी हैं, जिन का इस संसार में मेरे सिवा कोई नहीं है… उन का एकमात्र सहारा मैं ही हूं.’’ ‘‘तो उन का सहारा कौन छीन रहा है मैम? उन से अलग होने को कौन कह रहा है? मैं तो स्वयं ही अकेला हूं. आगेपीछे कोई नहीं है. मैं अभी अधिक तो कुछ नहीं कह सकता, परंतु हां यह वादा अवश्य करता हूं कि आप को और आप के परिवार के किसी भी सदस्य को कभी कोई कमी नहीं होने दूंगा.’’
‘‘जी, मैं इस बारे में सोचूंगी,’’ कह कर वह उठ खड़ी हुई. अगले दिन रविवार था. वह नाश्ता तैयार कर रही थी, तभी ससुर ने आवाज लगाई, ‘‘बहू देखो तुम से कोई मिलने आया है? हाथ पोंछते हुए जब ग्रीष्मा किचन से आई तो सामने विनय सर को देख एक बार को तो हड़बड़ा ही गई. फिर कुछ संयत हो सासससुर से बोली, ‘‘मांबाबूजी ये हमारे प्रिंसिपल हैं विनय सर और सर ये मेरे मातापिता.’’
विनय सर ने आगे बढ़ कर दोनों के पांव छू लिए. ससुरजी बोले, ‘‘अच्छा ये वही सर हैं जिन के बारे में तू अकसर चर्चा करती रहती है. अरे बेटा बहुत तारीफ करती है यह आप की.’’ विनय सर बिना कोई उत्तर दिए मुसकराते रहे.
ससुरजी बोले, ‘‘आज बिटिया ने नाश्ते में आलू के परांठे बनाए हैं. चलिए आप भी हमारे साथ नाश्ता करिए.’’ ‘‘जी बिलकुल मुझे खुशबू आ गई थी इसलिए मैं भी खाने आ गया,’’ कह ग्रीष्मा की ओर मुसकरा कर देखते हुए विनय सर सामने रखा नाश्ता करने लगे. कुछ देर बाद फिर बोले, ‘‘मैम कल एक जरूरी मीटिंग है. आप 2 दिन से नहीं आ रही थीं तो मैं ने सोचा आप का हालचाल भी पूछ लूं और सूचना भी दे दूं. अब मैं चलता हूं, और वे चले गए.’’
विनय सर के जाने के बाद सास बोलीं, ‘‘बड़े अच्छे, सौम्य और विनम्र हैं तुम्हारे सर.’’ ‘‘हां मां आप बिलकुल सही कह रही हैं. सर बहुत अच्छे और सुलझे हुए इंसान हैं. आप को पता है जब से सर आए हैं हमारे स्कूल का माहौल ही बदल गया है.’’
इस के बाद तो अकसर रविवार को विनय सर घर आने लगे थे. कुणाल भी अंकलअंकल कह कर उन से चिपक जाता. कई बार वे परिवार के सभी सदस्यों को अपनी गाड़ी में घुमाने भी ले जाते थे. लगभग 6 माह बाद एक दिन शाम को विनय सर घर आए और औपचारिक बातचीत के बाद ससुर से बोले, ‘‘अंकल, मैं आप से आप की बहू का हाथ मांगना चाहता हूं.’’
आगे पढें- विनय सर की बात सुन कर…
‘वैलेंटाइन डे’ जिसे हम प्यार का दिन कहा जाता है. प्यार करने वाले इस दिन का इंतजार पूरे साल करते हैं. अपने प्यार का इजहार करने के लिए ‘वैलेंटाइन डे’ बेहतर दूसरा कोई दिन हो ही नहीं सकता है. आज के दिन सभी प्यार करने वाले अपने पार्टनर के साथ मिलकर इस खूबसूरत डे को और खूबसूरत बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. ऐसे में आईए जानते हैं बॉलीवुड के उन कपल्स के बारे में जो शादी के बाद पहली बार ‘वैलेंटाइन डे’ मना रहे हैं.
बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा हाल ही में शादी के बंधन में बंधे हैं. दोनों ने 7 फरवरी, 2023 को सात फेरे लिए हैं. अभी भी उनकी शादी की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. कियारा और सिद्धार्थ शादी के बाद अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ मना रहे हैं.
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बॉलीवुड के क्यूट कपल रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के लिए इस साल ‘वैलेंटाइन डे’ काफी स्पेशल है. शादी के बाद दोनों अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ अपनी बेटी के साथ सेलिब्रेट करेंगे.
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बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी की बेटी एक्ट्रेस अथिया शेट्टी ने 23 जनवरी, 2023 को भारतीय क्रिकेटर केएल राहुल संग शादी की है. वहीं, शादी के बाद ये न्यूली वेड कपल भी अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ बड़े ही रोमांटिक अंदाज से सेलिब्रेट करेगा.
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एक्ट्रेस हंसिका मोटवानी ने 4 दिसंबर, 2022 को सोहेल कथूरिया संग शादी की है. सोहेल की ये दूसरी शादी है. दोनों ने जयपुर में शाही अंदाज से शादी की है. शादी के बाद हंसिका और सोहेल भी अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ मना रहे हैं.
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बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और ‘मिर्जापुर’ फेम अली फजल का भी शादी के बाद ये पहला ‘वैलेंटाइन डे’ है. लंबे इंतजार के बाद दोनों ने 4 अक्टूबर, 2022 को निकाह किया था. वहीं, अब दोनों इस साल अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ मनाएंगे.
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रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना के ‘अनुपमा’ में आए दिन ट्विस्ट पर ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में छोटी अनु और माया का ड्रामा तो एक तरफ चालू है ही, साथ ही इसमें पारितोष का एंगल भी जोड़ दिया गया है जिसने अनुपमा को और मनोरंजक बना दिया है. बीते दिन रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) के ‘अनुपमा’ में दिखाया गया कि पारितोष के लिए किंजल अपना आराम भूल जाती है और उसकी सेवा में लग जाती है. वहीं कपाड़िया हाउस में अनुपमा के पहुंचते ही छोटी अनु का चेहरा खिल जाता है. वह माया को छोड़कर अनुपमा के पास चली जाती है. दूसरी ओर अनुज भी अनुपमा के नाम का जाप करना शुरू कर देता है और यह बात माया को जरा भी पसंद नहीं आती है. लेकिन ‘अनुपमा‘ (Anupama) में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं खत्म नहीं होते हैं.
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‘अनुपमा‘ में दिखाया जाएगा कि किंजल राखी दवे के साथ मीटिंग के लिए ऑफिस चली जाती है और घर में पारितोष का ध्यान समर रखता है। लेकिन उसके वहां से हटते ही तोषू बेड से गिर जाता है। इस बात के लिए वनराज समर पर भड़कता है और कहता है कि जब जिम्मेदारी संभलती नहीं है तो मुझसे बोल दे। वहीं बा किंजल को ताना मारती हैं और उसके आते ही कहती हैं कि तू होती तो यह सब होता ही नहीं
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इस पर किंजल की मां राखी दवे जमकर को लताड़ेगी. राखी दवे लीला से कहेगी ‘मेरी बेटी कोई नौकरानी नहीं है जो आपके लिए सब कुछ करे भी और आपके सुने भी’. लीला घर की सिचूऐशन संभालने के लिए अनुपमा को बुलाने की बात कहेगी लेकिन वनराज बा को मना कर देगा. इस बीच उधर कपाड़िया हाउस में अलग ही ड्रामा चल रहा होगा.
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माया इस बात से परेशान है की छोटी अनु उसकी तरफ अट्रैक्ट होने की बजाए उलटा अनुज और अनुपमा की तरफ अट्रैक्ट हो रही है. माया को अनुज और अनुपमा के कमरे के बाहर खड़ी रहकर जासूसी करते देखकर भड़की बरखा. बरखा इस बात का खुलासा अनुज और अनुपमा के सामने करेगी लेकिन माया बात घुमा देगी.
मैं बड़े प्यार से उस का चेहरा निहार रहा था. मेरी आंखों के भाव पढ़ कर उस के गोरे गाल अचानक गुलाबी हो उठे.
मैं उसे चाहता हूं, यह बात उस दिन शिखा पूरी तरह से समझ गई. उस दिन से हमारे संबंध एक नए आयाम में प्रवेश कर गए.
जिस बीज को उस दिन मैं ने बोया था उसे मजबूत पौधा बनने में एक महीने से कुछ ज्यादा समय लगा.
‘‘हमारे लिए दोस्ती की सीमा लांघना गलत होगा, सर. संजीव को धोखा दे कर मैं गहरे अपराधबोध का शिकार बन जाऊंगी.’’
जब भी मैं उस से प्रेम का इजहार करने का प्रयास करता, उस का यही जवाब होता.
शिखा को मेरे प्रस्ताव में बिलकुल रुचि न होती तो वह आसानी से मुझ से कन्नी काट लेती. नाराज हो कर उस ने मुझ से मिलना बंद नहीं किया, तो उस का दिल जीतने की मेरी आशा दिनोदिन बलवती होती चली गई.
वह अपने घर की परिस्थितियों से खुश नहीं थी. संजीव का व्यवहार, आदतें व घर का खर्च चलाने में उस की असफलता उसे दुखी रखते. मैं उस की बातें बड़े धैर्य से सुनता. जब उस का मन हलका हो जाता, तभी मेरी हंसीमजाक व छेड़छाड़ शुरू होती.
उस के जन्मदिन से एक दिन पहले मैं ने जिद कर के उस से अपने घर चलने का प्रस्ताव रखा और कहा, ‘‘अपने हाथों से मैं ने तुम्हारे लिए खीर बनाई है, अगर तुम मेरे यहां चलने से इनकार करोगी तो मैं नाराज हो जाऊंगा.’’
मेरी प्यार भरी जिद के सामने थोड़ी नानुकुर करने के बाद शिखा को झुकना ही पड़ा.
मैं ने उस के जन्मदिन के मौके पर एक सुंदर साड़ी उपहार में दी और उसे पहली बार मैं ने अपनी बांहों में भरा तो वह घबराए लहजे में बोली, ‘‘नहीं, यह सब ठीक नहीं है. मुझे छोड़ दीजिए, प्लीज.’’
अपनी बांहों की कैद से मैं ने उसे मुक्त नहीं किया क्योंकि वह छूटने का प्रयास बडे़ बेमन से कर रही थी. उस के मादक जिस्म का नशा मुझ पर कुछ इस तरह हावी था कि मैं ने उस के कानों और गरदन को गरम सांसें छोड़ते हुए चूम लिया. उस ने झुरझुरी के साथ सिसकारी ली. मुंह से ‘ना, ना’ करती रही पर मेरे साथ और ज्यादा मजबूती से वह लिपट भी गई.
शिखा को गोद में उठा कर मैं बेडरूम में ले आया. वहां मेरे आगोश में बंधते ही उस ने सब तरह का विरोध समाप्त कर समर्पण कर दिया.
सांचे में ढले उस के जिस्म को छूने से पहले मैं ने जी भर कर निहारा. वह खामोश आंखें बंद किए लेटी रही. उस की तेज सांसें ही उस के अंदर की जबरदस्त हलचल को दर्शा रही थीं. हम दोनों के अंदर उठे उत्तेजना के तूफान के थमने के बाद भी हम देर तक निढाल हो एकदूसरे से लिपट कर लेटे रहे.
कुछ देर बाद शिखा के सिसकने की आवाज सुन कर मैं चौंका. उस की आंखों से आंसू बहते देख मैं प्यार से उस के चेहरे को चूमने लगा.
उस की सिसकियां कुछ देर बाद थमीं तो मैं ने कोमल स्वर में पूछा, ‘‘क्या तुम मुझ से नाराज हो?’’
जवाब में उस ने मेरे होंठों का चुंबन लिया और भावुक स्वर में बोली, ‘‘प्रेम का इतना आनंददायक रूप मुझे दिखाने के लिए धन्यवाद, राकेश.’’
हमारे संबंध एक और नए आयाम में प्रवेश कर गए. मैं अब तनावमुक्त व प्रसन्न रहता. शिखा ही नहीं बल्कि उस के घर के बाकी सदस्य भी मुझे अच्छे लगने लगे. मैं भी अपने को उन के घर का सदस्य समझने लगा.
मैं शिखा के घर वालों की जरूरतों का ध्यान रखता. कभी संजीव को रुपए की जरूरत होती तो शिखा से छिपा कर दे देता. मैं ने शिखा की सास के घुटनों के दर्द का इलाज अच्छे डाक्टर से कराया. उन्हें फायदा हुआ तो उन्होंने ढेरों आशीर्वाद मुझे दे डाले.
इन दिनों मैं अपने को बेहद स्वस्थ, युवा, प्रसन्न और भाग्यशाली महसूस करता. शिखा ने मेरी जिंदगी में खुशियां भर दीं.
एक रविवार की दोपहर शिखा मुझे शारीरिक सुख दे कर गई ही थी कि मेरे मातापिता मुझ से मिलने आ पहुंचे. मेरठ से मेरे लिए एक रिश्ता आया हुआ था. वह दोनों इसी सिलसिले में मुझ से बात करने आए थे.
‘‘वह लड़की तलाकशुदा है,’’ मां बोलीं, ‘‘तुम कब चलोगे उसे देखने?’’
‘‘किसी रविवार को चले चलेंगे,’’ मैं ने गोलमोल सा जवाब दिया.
‘‘अगले रविवार को चलें?’’
‘‘देखेंगे,’’ मैं ने फिर टालने की कोशिश की.
मेरे पिता अचानक गुस्से में बोले, ‘‘इस से तुम मेरठ चलने को ‘हां’ नहीं कहलवा सकोगी क्योंकि आजकल इस के सिर पर उस शिखा का जनून सवार है.’’
‘‘प्लीज पापा, बेकार की बातें न करें. शिखा से मेरा कोई गलत रिश्ता नहीं है,’’ मैं नाराज हो उठा.
‘‘अपने बाप से झूठ मत बोलो, राकेश. यहां क्या चल रहा है, इस की रिपोर्ट मुझ तक पहुंचती रहती है.’’
‘‘लोगों की गलत व झूठी बातों पर आप दोनों को ध्यान नहीं देना चाहिए.’’
मां ने पिताजी को चुप करा कर मुझे समझाया, ‘‘राकेश, सारी कालोनी शिखा और तुम्हारे बारे में उलटीसीधी बातें कर रही है. उस का यहां आनाजाना बंद करो, बेटे, नहीं तो तुम्हारा कहीं रिश्ता होने में बड़ा झंझट होगा.’’
‘‘मां, किसी से मिलनाजुलना गुनाह है क्या? मेरी जानपहचान और बोलचाल सिर्फ शिखा से ही नहीं है, मैं उस के पति और उस की सास से भी खूब हंसताबोलता हूं.’’
अपने झूठ पर खुद मुझे ऐसा विश्वास पैदा हुआ कि सचमुच ही मारे गुस्से के मेरा चेहरा लाल हो उठा.
मुझे कुछ देर और समझाने के बाद मां पिताजी को ले कर मेरठ चली गईं. उन के जाने के काफी समय बाद तक मैं बेचैन व परेशान रहा. फिर शाम को जब मैं ने शिखा से फोन पर बातें कीं तब मेरा मूड कुछ हद तक सुधरा.
शिखा को ले कर मेरे संबंध सिर्फ मांपिताजी से ही नहीं बिगड़े बल्कि छोटे भाई रवि और उस की पत्नी रेखा के चेहरे पर भी अपने लिए एक खिंचाव महसूस किया.
शिखा के मातापिता ने भी उस से मेरे बारे में चर्चा की थी. उन तक शिखा और मेरे घनिष्ठ संबंध की खबर मेरी समझ से रेखा ने पहुंचाई होगी, क्योंकि रेखा जब भी मायके जाती है तब वह शिखा के मातापिता से जरूर मिलती है. यह बात खुद शिखा ने मुझे बता रखी थी.
‘‘मम्मी, पापा, राकेशजी के ही कारण आज तुम्हारी बेटी इज्जत से अपनी घरगृहस्थी चला पा रही है. रोहित उन्हें बहुत प्यार करता है. संजीव उन की बेहद इज्जत करते हैं. मेरी सास उन्हें अपना बड़ा बेटा मानती हैं. हमारे बीच अवैध संबंध होते तो उन्हें मेरे घर में इतना मानसम्मान नहीं मिलता. आप दोनों अपनी बेटी की घरगृहस्थी की सुखशांति की फिक्र करो, न कि लोगों की बकवास की,’’ शिखा के ऐसे तीखे व भावुक जवाब ने उस के मातापिता की बोलती एक बार में ही बंद कर दी.
आगे पढ़ें- उदास से लहजे में शिखा ने…