Valentine’s Special: सुर बदले धड़कनों के

 

 

 

 

 

Valentine’s Special: इन टिप्स से खुशहाल बनाएं रिश्ता

आज पतिपत्नी का रिश्ता मित्रता, प्यार, सहभागिता का बन गया है, जिस में दोनों को एकदूसरे को समझाने के बजाय एकदूसरे को समझने की कोशिश करनी पड़ती है. ऐसा करने पर ही एक सुखी वैवाहिक जीवन की कल्पना की जा सकती है. उम्र के जिस पड़ाव पर पतिपत्नी शादी की दहलीज पार करते हैं वह एक अहम पड़ाव और दौर होता है. शुरू के कुछ वर्ष उन को खुद में बदलाव लाने के होते हैं. वैवाहिक संबंध की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:

2 अलगअलग व्यक्तित्व वाले शख्स दांपत्य सूत्र में बंध जाते हैं. दोनों को अपने अतीत को भूल कर एकदूसरे में समाना होता है. कुछ छोड़ना पड़ता है कुछ अपनाना पड़ता है.

पतिपत्नी दोनों विलक्षण और अद्भुत किस्म के व्यक्तित्व होते हैं, जिन में आवश्यक बदलाव धीमी गति से आवश्यकता के अनुसार ही संभव होता है. दोनों से तीव्र गति से बदलाव की अपेक्षा करना अव्यावहारिक है.

दोनों के काम करने के तरीके और दिनचर्या भिन्न होने के कारण उन्हें नए माहौल में ऐडजस्ट करने के लिए कुछ समय देना होता है. यह ससुराल पक्ष के लोगों के लिए परीक्षा की घड़ी होती है. धैर्यपूर्वक इस कसौटी पर खरा उतरने का परिणाम यह होता है कि रिश्ते स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं और सभी को रिश्तों में आनंद और सुकून मिलता है.

नए दांपत्य रिश्ते में 2 ऐसे लोग बंधते हैं जो अलगअलग पारिवारिक वातावरण, संस्कारों और परंपराओं की संस्कृति में पलेबढ़े होते हैं. ऐसे में पतिपत्नी के लिए आवश्यक बदलाव को स्वीकार करना नामुमकिन नहीं होता है, मुश्किल जरूर होता है. इस बदलाव को जिम्मेदारी और सूझबूझ से अपनी शख्सीयत में लाया जाए.

सूझबूझ है जरूरी

हां यह समझना बहुत जरूरी है कि जैसे ही नई दुलहन ससुराल में प्रवेश करती है सब उसे उस की जिम्मेदारी महसूस कराने लग जाते हैं जबकि उन्हें नई बहू के अधिकारों के प्रति सजग होने की जरूरत होती है. पतिपत्नी के अधिकारों का संरक्षण हर हाल में होना चाहिए ताकि उन्हें स्पेस और स्वतंत्रता महसूस हो सके. वह जमाना लद गया जब पत्नी को दासी या गुलाम समझा जाता था. आज की पत्नियां शिक्षित, परिपक्व और सकारात्मकता के गुणों से परिपूर्ण होती हैं. उन्हें ससुराल पक्ष के लोग किसी भी तरह हलके में नहीं ले सकते हैं. आज की नारी पढ़ीलिखी और सजग है.कहते हैं, व्यवहारकुशलता इस में है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. अधिकार छीन कर नहीं लिए जाते हैं. पत्नी अपने अधिकारों का संरक्षण सूझबूझ के साथ कर सकती है. पत्नी के कुछ अधिकार इस प्रकार हैं:विवाह के बाद उसे अधिकार है कि वह अपनी पसंद का पहनावा पहन सके. वह सास बहुत अच्छी मानी जाती है जो नई बहू को इस बात की स्वतंत्रता देती है.

मधु एक स्मार्ट लड़की थी. उस ने देखा कि उस के पति के पास उस की पसंद के अनुसार ड्रैस नहीं थी. अत: मधु ने नीतियुक्त तरीके से इस का हल ढूंढ़ निकाला. एक दिन जब वह शौपिंग के लिए गई तो अपने पति के लिए अपनी पसंद की शर्ट और पैंट खरीद लाई. सास के लिए भी एक साड़ी खरीद लाई. इस व्यवहारकुशलता का असर यह हुआ कि सास को साड़ी पसंद आई. पति को भी मधु द्वारा लाई गई ड्रैस अच्छी लगी. सास अच्छे मूड में थीं अत: मधु से बोलीं, ‘‘अगली बार शौपिंग के लिए जाओ तो अपनी पसंद के कुछ सूट और साडि़यां खरीद लाना. तुम पर दोनों ही ड्रैसेज अच्छी लगती हैं. पैसे मुझ से ले जाना.’’

विवाह के बाद भी पति को यह अधिकार होता है कि वह अपने मित्रों से पहले की तरह मिलताजुलता रहे. पत्नी निरर्थक टोकाटाकी न करे. अपने मित्रों से मिलतेजुलते रहने के लिए पति को प्रेरित करती रहे. बस पति को चाहिए कि पारिवारिक सीमाओं में रह कर कुछ समय पत्नी के साथ अवश्य बिताए.कामकाजी महिला की दिनचर्या बहुत व्यस्त होती है. सुबह बच्चों को तैयार करना, नाश्ता व खाना बनाना, पति का टिफिन तैयार करना फिर खुद तैयार हो कर दफ्तर के लिए निकलना. सारे दिन की व्यस्तता के बाद शाम को घर आ कर फिर खाना बनाना. इन सब कामों को बखूबी करने पर वह डिजर्व करती है कि उसे परिवार से सम्मान मिले. पति को इस बात का एहसास हो कि वह वर्किंग वूमन है. घर में उस का सम्मान हो, यह उस का अधिकार है. कामकाजी पत्नी को घर पर पूरा आराम मिलना चाहिए. स्त्री जिसे अपने अधिकारों की रक्षा करनी होती है वह डिजर्विंग होनी चाहिए. हमारे सामने 6 प्रकार के दोषों की चर्चा होती है- शराब पीना, दुष्टों का संग, पति से अलग रहना, अकेले घूमना, अधिक सोना तथा दूसरों के घर में निवास करना पत्नी के लिए दोष हैं. इन्हें उसे अपने जीवन से दूर रखना चाहिए. ऐसे में पत्नी कुलकुटुंब की भलीभांति सेवा करती हुई स्वयं भी सुरक्षित रहती है और पत्नी का कर्तव्य भी निभाती है.

ऐसे बैठाएं तालमेल

नेहा का जब विवाह हुआ तो उस ने सुन रखा था कि ससुराल में पहुंचने पर सास नई बहू के आभूषणों पर यह कह कर कब्जा कर लेती है कि इन्हें सुरक्षित रखना है. इस से पहले कि सास इस विषय में कुछ कहतीं, नेहा ने सास से कहा कि मम्मीजी मैं 2 सैट अपने पास रख लेती हूं, क्योंकि पति के साथ डिनर पार्टियों में जाना होगा. बाकी जेवर आप अपनी अलमारी में रख लें या बैंक के लौकर में रखवा दें. इस प्रकार उस के अपने अधिकार की भी रक्षा हो गई और सास भी ऐसा करने के लिए हंसीखुशी राजी हो गईं. जब हनीमून के लिए प्रस्ताव आया तो नेहा ने सास से कहा, ‘‘मम्मीजी, हम बाहर जा कर अंडरस्टैंडिंग बनाने के पक्ष में नहीं हैं. यहीं आप सब के पास रह कर आप सब के साथ अपने संबंध मधुर और स्थायी बनाएंगे. इस के बाद जब कभी नेहा रेस्तरां में डिनर के लिए अपने पति के साथ जाती थी, तो अपनी सास और ससुर के लिए खाना पैक करवा कर जरूर ले आती थी. सासससुर दोनों को यह बात बहुत अच्छी लगती. नववधू का यह अधिकार होता है कि जो आभूषण उस के मातापिता ने इतने चाव से बनवा कर उसे दिए हैं उन का इस्तेमाल करने की उसे स्वतंत्रता हो.

कामकाजी पत्नी का अपनी मासिक तनख्वाह पर पूरा हक होता है. सासससुर को यह अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए कि वह पूरी सैलरी उन के हाथ पर रखे. पति भी कमाता है और पत्नी भी परिश्रम से तनख्वाह अर्जित करती है. अच्छा होगा दोनों मिल कर घर चलाएं. उन के अधिकारों की सुरक्षा तभी होती है जब वे दोनों मिल कर घर के सदस्यों के साथ मधुर संबंध बनाए रखते हैं और समयसमय पर उन के लिए उपहार ला कर उन्हें उन की अहमियत का एहसास दिलाते हैं. उन के साथ अपनापन बनाए रखते हैं.

बनाएं बेहतर माहौल

चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस का मत है, ‘‘हम उसी चीज से घृणा करते हैं जो चीज हमें अति प्यारी होती है.’’ सास अपनी बहू पर शासन करने को अच्छा समझती है, लेकिन जब बहू उस पर शासन करने की प्रवृत्ति रखती है तो उसे अच्छा नहीं लगता है. अत: सुझाव है कि पतिपत्नी के अधिकारों की रक्षा सासससुर और ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों द्वारा ऐसे की जानी चाहिए कि ये अधिकार मांगने की नौबत ही न आए. ऐसा माहौल बनाया जाए जिस में पतिपत्नी को पर्याप्त स्पेस मिले और वैवाहिक संबंध को आनंदपूर्वक जीने की स्वतंत्रता मिलती रहे.

Winter Special: जानें कैसे आसान तरीकों से बनाएं बेसिल फ्राइड राइस

अगर आप फिंटर में कुछ हैल्दी और स्वादिष्ट खाना चाहाते है तो आसान तरीकों से बनाएं बेसिल फाईड राइस. ये है कुछ टिप्स घर पर तैयार किए हुए फ्राईड राइस की डिश की रेसिपी.

सामग्री

1 बाउल चावल उबले

जरूरतानुसार हरी व लालमिर्च बारीक कटी

1 छोटा चम्मच ग्रीन पेपर कौर्न

4-5 कलियां लहसुन बारीक कटा

1-2 टुकड़े ब्रोकली

3-4 बेबी कौर्न

1 गाजर

रिफाइंड औयल जरूरतानुसार

1 पैकेट मैगी का मसाला

थोड़ी सी तुलसीपत्ती गार्निशिंग के लिए

नमक स्वादानुसार.

विधि

ब्रोकली, बेबी कौर्न और गाजर को छोटेछोटे टुकड़ों में काट कर ब्लांच कर लें. एक पैन में तेल गरम कर के हरी व लालमिर्च और लहसुन डाल कर सौटे करें. अब इस में चावल, ब्लांच्ड सब्जियां और ग्रीन पेपरकौर्न मिला कर पकाएं. मैगी का मसाला व नमक डाल कर थोड़ा और पकाएं. फिर तुलसीपत्ती से गार्निश कर परोसें.

Serial Story: अंत भला तो सब भला – भाग 3

अचानक ग्रीष्मा ने घड़ी पर नजर डाली. 8 बज रहे थे. वह एकदम उठ गई और बोली, ‘‘सर, अब मुझे चलना होगा. मांबाबूजी इंतजार कर रहे होंगे,’’ कह कर वह कौफी हाउस से बाहर आ स्कूटी स्टार्ट कर घर चल दी. घर आ कर ग्रीष्मा सीधे अपने कमरे में गई और खुद को फिर आईने में देख सोचने लगी कि क्या हो रहा है उसे? कहीं उसे प्यार तो नहीं हो गया… पर नहीं वह एक विधवा है… मांबाबूजी और कुणाल की जिम्मेदारी है उस पर…वह ये सब क्यों भूल गई…सोचतेसोचते उस का सिर दर्द करने लगा तो कपड़े बदल कर सो गई.

अगले दिन जैसे ही स्कूल पहुंची तो विनय सर सामने ही मिल गए. उसे देखते ही बोले, ‘‘मैम, फ्री हो कर मेरे कैबिन में आइएगा, आप से कुछ काम है.’’ ‘‘जी सर,’’ कह कर वह तेज कदमों से स्टाफरूम की ओर बढ़ गई.

जब वह सर के कैबिन में पहुंची तो विनय सर बोले, ‘‘मैडम कल शिक्षा विभाग की एक मीटिंग है, जिस में आप को मेरे साथ चलना होगा.’’ ‘‘सर मैं… मैं तो बहुत जूनियर हूं… और टीचर्स…’’ न जाने क्यों वह सर के साथ जाने से बचना चाहती थी.

‘‘यह तो मेरी इच्छा है कि मैं किसे ले जाऊं, आप को बस मेरे साथ चलना है.’’ ‘‘जी, सर,’’ कह कर वह स्टाफरूम में आ गई और सोचने लगी कि यह सब क्या हो रहा है… कहीं विनय सर को मुझ से… मुझे विनय सर से… तभी फ्री टाइम समाप्त होने की घंटी बजी और वह अपनी कक्षा में आ गई. आज उस का मन बच्चों को पढ़ाने में भी नहीं लगा. दिलदिमाग पर सर का जादू जो छाया था.

अगले दिन मीटिंग से वापस आते समय विनय सर ने गाड़ी फिर कौफी हाउस के बाहर रोक दी. बोले, ‘‘चलिए कौफी पी कर चलते हैं.’’ उन का ऐसा जादू था कि ग्रीष्मा चाह कर भी मना न कर सकी.

कौफी पीतपीते विनय सर उस की आंखों में आंखें डाल कर बोले, ‘‘ग्रीष्मा, आप ने अपने भविष्य के बारे में कुछ सोचा है?’’ ‘‘क्या मतलब सर… मैं कुछ समझी नहीं…’’ अचकचाते स्वर में समझ कर भी नासमझ बनते हुए उस ने कहा.

‘‘जो हो गया है उसे भूल कर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के बारे में सोचिए…मैं आप का हर कदम पर साथ देने को तैयार हूं. यदि आप को मेरा साथ पसंद हो तो…’’ सपाट स्वर में विनय सर ने अपनी बात ग्रीष्मा के सामने रख दी. कुछ देर तक विचार करने के बाद ग्रीष्मा बोली, ‘‘सर, बुरा न मानें तो एक बात पूंछू? आप ने अभी तक विवाह क्यों नहीं किया?’’

‘‘आप का प्रश्न एकदम सही है. मैडम ऐसा नहीं है कि मैं विवाह करना नहीं चाहता था, परंतु पहले तो मैं अपने कैरियर को बनाने में लगा रहा और फिर कोई लड़की अपने अनुकूल नहीं मिली. दरअसल, हमारे समाज में लड़कियों को उच्चशिक्षित नहीं किया जाता. अल्पायु में ही उन की शादी कर दी जाती है. मुझे शिक्षित लड़की ही चाहिए थी. बस इसी जद्दोजहद में मैं आज तक अविवाहित ही हूं. बस यही है मेरी कहानी.’’ सर की बातें सुन कर ग्रीष्मा सोचने लगी कि सर की जाति के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं. मांबाबूजी तो बड़े ही रूढि़वादी हैं. पर किया भी क्या जा सकता है…प्यार कोई जाति देख कर तो किया नहीं जा सकता. वह तो बस हो जाता है, क्योंकि प्यार में दिमाग नहीं दिल काम करता है.

ग्रीष्मा अपने विचारों में डूबी हुई थी कि अचानक विनय सर बोले, ‘‘अरे मैडम कहां खो गईं?’’

‘‘सर मैं आप की बात को समझ रही हूं और मानती भी हूं कि आप ने मेरे अंदर जीने की इच्छा जाग्रत कर दी है. आप ने मेरे खोए आत्मविश्वास को लौटाया है. जब आप के साथ होती हूं तो मुझे भी यह दुनिया बड़ी हसीन लगती है…मुझे आप का साथ भी पसंद है… पर मेरे साथ बहुत सारी मजबूरियां हैं… मैं अकेली नहीं हूं मेरा बेटा और सासससुर भी हैं, जिन का इस संसार में मेरे सिवा कोई नहीं है… उन का एकमात्र सहारा मैं ही हूं.’’ ‘‘तो उन का सहारा कौन छीन रहा है मैम? उन से अलग होने को कौन कह रहा है? मैं तो स्वयं ही अकेला हूं. आगेपीछे कोई नहीं है. मैं अभी अधिक तो कुछ नहीं कह सकता, परंतु हां यह वादा अवश्य करता हूं कि आप को और आप के परिवार के किसी भी सदस्य को कभी कोई कमी नहीं होने दूंगा.’’

‘‘जी, मैं इस बारे में सोचूंगी,’’ कह कर वह उठ खड़ी हुई. अगले दिन रविवार था. वह नाश्ता तैयार कर रही थी, तभी ससुर ने आवाज लगाई, ‘‘बहू देखो तुम से कोई मिलने आया है? हाथ पोंछते हुए जब ग्रीष्मा किचन से आई तो सामने विनय सर को देख एक बार को तो हड़बड़ा ही गई. फिर कुछ संयत हो सासससुर से बोली, ‘‘मांबाबूजी ये हमारे प्रिंसिपल हैं विनय सर और सर ये मेरे मातापिता.’’

विनय सर ने आगे बढ़ कर दोनों के पांव छू लिए. ससुरजी बोले, ‘‘अच्छा ये वही सर हैं जिन के बारे में तू अकसर चर्चा करती रहती है. अरे बेटा बहुत तारीफ करती है यह आप की.’’ विनय सर बिना कोई उत्तर दिए मुसकराते रहे.

ससुरजी बोले, ‘‘आज बिटिया ने नाश्ते में आलू के परांठे बनाए हैं. चलिए आप भी हमारे साथ नाश्ता करिए.’’ ‘‘जी बिलकुल मुझे खुशबू आ गई थी इसलिए मैं भी खाने आ गया,’’ कह ग्रीष्मा की ओर मुसकरा कर देखते हुए विनय सर सामने रखा नाश्ता करने लगे. कुछ देर बाद फिर बोले, ‘‘मैम कल एक जरूरी मीटिंग है. आप 2 दिन से नहीं आ रही थीं तो मैं ने सोचा आप का हालचाल भी पूछ लूं और सूचना भी दे दूं. अब मैं चलता हूं, और वे चले गए.’’

विनय सर के जाने के बाद सास बोलीं, ‘‘बड़े अच्छे, सौम्य और विनम्र हैं तुम्हारे सर.’’ ‘‘हां मां आप बिलकुल सही कह रही हैं. सर बहुत अच्छे और सुलझे हुए इंसान हैं. आप को पता है जब से सर आए हैं हमारे स्कूल का माहौल ही बदल गया है.’’

इस के बाद तो अकसर रविवार को विनय सर घर आने लगे थे. कुणाल भी अंकलअंकल कह कर उन से चिपक जाता. कई बार वे परिवार के सभी सदस्यों को अपनी गाड़ी में घुमाने भी ले जाते थे. लगभग 6 माह बाद एक दिन शाम को विनय सर घर आए और औपचारिक बातचीत के बाद ससुर से बोले, ‘‘अंकल, मैं आप से आप की बहू का हाथ मांगना चाहता हूं.’’

आगे पढें- विनय सर की बात सुन कर…

Valentine’s Special: खास गिफ्ट से करें प्यार का इजहार

‘हमें तुम से प्यार कितना ये हम नहीं जानते, मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना,’ ‘मेरी रगरग में तुम हो और उसी होने के आनंद को जीती हूं मैं’, ‘तुम एक शब्द हो, जिस का अर्थ है खुशी’, ‘कह नहीं पाती तुम से पर यह सच है कि तुम मेरा आधार हो, जिस के भरोसे मेरा वजूद है…’

जैसे जैसे फरवरी माह करीब आने लगता है, जोड़े अपने साथी को वैलेंटाइन डे पर एक अच्छे से तोहफे पर कुछ ऐसी ही पंक्तियां लिख कर देने की फिराक में रहते हैं. क्योंकि उन के लिए तो यह दिन खुशियां, उम्मीदें और उमंग ले कर आता है. आएं आप भी थोड़ा रूमानी हो जाएं और जानें क्या है वैलेंटाइन डे, जिस ने भारत की जमीन पर दबे पांव कदम रखा था पर धीरेधीरे सभी युवाओं को अपना मुरीद बना लिया.

इस पर्व को मनाने के तौरतरीके और रीतिरिवाज बड़े अनोखे और रोचक रहे हैं. इतिहास के पन्ने पलटें तो वे कहते हैं कि एक ऐसे व्यक्ति के बलिदान का दिन है वैलेंटाइन डे, जिस ने प्यार किया और प्यार करने वालों को एक पवित्र बंधन में बांधने का प्रयास किया. उन के वक्त में रोम का शासक क्लोडियम था जो कि बहुत कू्रर और सख्त स्वभाव का था. उस ने अपने शासनकाल में सभी सिपाहियों पर प्रतिबंध लगा दिया था कि कोई भी न तो अपनी प्रेमिका से मिलेगा और न ही शादी करेगा. मगर वैलेंटाइन ने राजा की मरजी के खिलाफ प्रेमी जोड़ों की छिपछिप कर शादी करवाई और प्रेम करने वालों को एकदूसरे से मिला दिया. यों कहें कि वह प्रेम का फरिश्ता बन गया. क्लोडियम से यह सब बरदाश्त न हुआ और वैलेंटाइन को मृत्युदंड दिया गया. यह बात 14 फरवरी, 269 ई. की है.

वैलेंटाइन की एक दोस्त थी जो जेलर की बेटी थी. उसे मृत्युदंड से पहले वैलेंटाइन ने एक खत लिखा था. इस के बाद हर साल 14 फरवरी को वैलेंटाइन की याद के दिन के रूप में मनाया जाने लगा और इसे नाम दिया गया वैलेंटाइन डे. शुरू में लोग इस मौके पर प्रेम भरा खत लिखते थे, तो बाद में अपने प्रिय को खत के साथ उपहार देने का चलन चला और आज तो बाजार में इस से जुड़े उपहारों की भरमार है. आइए, जानते हैं कि उन में खास उपहार कौन से हैं और उन की अहमियत किसलिए है:

1. गुलाब

प्यार के इजहार के लिए सब से बेहतर तरीका है लाल गुलाब. लेकिन यह भी याद रहे कि प्रेमी या प्रेमिका को दिए जाने वाले गुलाबों की संख्या भी कुछ कहती है. जैसे प्यार के इजहार के लिए 1 गुलाब ही काफी है. अगर आभार प्रकट कर रहे हों तो 1, बधाई के लिए 25 और बिना शर्त के प्यार के लिए 50 गुलाबों का महकता गुलदस्ता उपयुक्त माना जाता है. बस शर्त यह है कि उसे लवर्स नौट में बांध कर दें.

2. दिल

वैलेंटाइन डे पर बाजार में लाल गुलाबों की भरमार के बाद दिल की शेप में बने विभिन्न प्रकार के कार्ड्स व गिफ्ट आइटम देखने को मिलते हैं. पहले कामदेव के तीर से बिंधा दिल रति के लिए प्रेम की अभिव्यक्ति का बेहद खूबसूरत जरीया था. प्यार करने वालों को वैलेंटाइन डे पर दिल शेप में बने हुए कार्ड्स, शोपीस, टैडी बियर, पाउच, इंयररिंग्स, रिंग्स, ज्वैलरी बौक्स, सिरैमिक कौफी मग, कुशन कवर, पिलो कवर तथा शोपीस मिल जाएंगे.

3. कबूतर का जोड़ा

‘तुम्हारे बिना मैं मर जाऊंगी’, ‘तुम से बिछुड़ने से पहले मुझे मौत आ जाए’, ये जुमले प्रेमी युगल एकदूसरे से अकसर कहते हैं. शायद हम में से बहुत कम इस बात से वाकिफ होंगे कि कबूतरकबूतरी ऐसे प्यार के पर्याय होते हैं कि यदि इन दोनों में से एक की मौत हो जाए तो फिर दूसरा नए साथी की तलाश नहीं करता. प्यार तो समर्पण है. प्यार व उस के प्रति पूर्ण आस्था को दर्शाने के लिए, शौपिंग मौल्स व गिफ्ट शौप्स में ऐसे कबूतरों की जोडि़यों की विभिन्न मुद्राओं में गिफ्ट आइटम देखने को मिलते हैं.

4. मैपल लीफ

कनाडा के राष्ट्रीय वृक्ष मैपल ट्री की पत्तियां आज भी जापानी और चीनी सभ्यता में प्रेम को प्रतिबिंबित करती हैं. इन पत्तियों में मिठास होती है. शायद इसीलिए ऐसी मान्यता है. अमेरीका में कई प्रेमी युगल सच्चा प्यार पाने के लिए बैड के नीचे फर्श पर मैपल की पत्तियां रखते हैं. वैलेंटाइन डे पर मैपल पत्ती वाले कार्ड खूब मिलते हैं. उन पर लिखे होते हैं कुछ रोमांटिक शेर या फिर तीर से बिंधा दिल बना होता है.

5. ट्यूलिप फ्लावर

कहींकहीं शादी की 11वीं सालगिरह का प्रतीक माना गया है ट्यूलिप फ्लावर. ट्यूलिप फ्लावर के बीचोंबीच काले मखमली भाग को प्रेमी का दिल माना गया है. प्रेमियों की पहली पसंद कहलाने वाला ट्यूलिप फूल दरअसल मशहूर प्रेमी युगल शीरीफरहाद के इश्क की उपज माना जाता है. कहते हैं, फरहाद जो तुर्की का रहने वाला था, शीरी से बेपनाह मुहब्बत करता था. जब फरहाद को पता चला कि शीरी अब इस दुनिया में नहीं रही, तो वह दीवानों की तरह पहाड़ की चोटी पर चढ़ गया और प्यार में पागल हो कर उस चोटी से कूद गया. फिर जहांजहां उस के खून की बूंदें गिरीं, वहींवहीं सुर्ख ट्यूलिप का फूल खिला. बस तभी से यह इश्क के मतवालों के प्यार का प्रतीक बन गया. वैलेंटाइन डे पर प्रेमी युगल प्यार में मर मिटने के लिए ट्यूलिप गिफ्ट करते हैं.

6. डायमंड

प्यार को दर्शाने के लिए डायमंड यानी हीरे से बढ़ कर तोहफा और क्या हो सकता है. प्यार शिलालेख सा अमिट है. इसे दर्शाने के लिए हीरा एक अनुपम उपहार है. ग्रीक सभ्यता में तो हीरों को देवताओं के टपके हुए आंसू माना गया है. रोमन सभ्यता में इस का गुणगान आसमान से टूटा तारा मान कर किया गया है. बाजार इन मान्यताओं को भुनाने में वक्त नहीं लगाता. वैलेंटाइन डे पर आभूषण की दुकानों पर उपहार में देने के लिए डायमंड लेने की होड़ सी लगी रहती है. यों भी तो कहा जाता है कि जो हीरा पहनता है उस के व्यवहार में एक ठहराव और संतुलन झलकता है. प्रेमिका को इंप्रैस करने का सही दिन है वैलेंटाइन डे और सही तोहफा डायमंड.

7. दिलनुमा शेप के तोहफे

प्यार का इजहार करने का एक अच्छा तरीका यह भी है कि ऐसा कोई भी तोहफा देना जिस पर दिल बना हो. दिल से कीजै दिल की बात. बाजार में रेशमी या फिर वैलवेट कपड़े से बने दिल आकार के छोटेबड़े गिफ्ट बौक्स या डिब्बियां मिल जाती हैं. बाजार से न लेना हो तो अपनी कल्पनाशीलता की उड़ान को पंख दें और मनाएं वैलेंटाइन डे.

Valentine’s 2023: सिड-कियारा के अलावा ये कपल सेलिब्रेट करेंगे अपना पहला वैलेंटाइन डे

‘वैलेंटाइन डे’ जिसे हम प्यार का दिन ​कहा जाता है. प्यार करने वाले इस दिन का इंतजार पूरे साल करते हैं. अपने प्यार का इजहार करने के लिए ‘वैलेंटाइन डे’ बेहतर दूसरा कोई दिन हो ही नहीं सकता है. आज के दिन सभी प्यार करने वाले अपने पार्टनर के साथ मिलकर इस खूबसूरत डे को और खूबसूरत बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. ऐसे में आईए जानते हैं बॉलीवुड के उन कपल्स के बारे में जो शादी के बाद पहली बार ‘वैलेंटाइन डे’ मना रहे हैं.

कियारा आडवाणी – सिद्धार्थ मल्होत्रा

बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा हाल ही में शादी के बंधन में बंधे हैं. दोनों ने 7 फरवरी, 2023 को सात फेरे लिए हैं. अभी भी उनकी शादी की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. कियारा और सिद्धार्थ शादी के बाद अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ मना रहे हैं.

 

 

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रणबीर कपूर – आलिया भट्ट

बॉलीवुड के क्यूट कपल रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के लिए इस साल ‘वैलेंटाइन डे’ काफी स्पेशल है. शादी के बाद दोनों अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ अपनी बेटी के साथ सेलिब्रेट करेंगे.

 

 

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अथिया शेट्टी – केएल राहुल

बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी की बेटी एक्ट्रेस अथिया शेट्टी ने 23 जनवरी, 2023 को भारतीय क्रिकेटर केएल राहुल संग शादी की है. वहीं, शादी के बाद ये न्यूली वेड कपल भी अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ बड़े ही रोमांटिक अंदाज से सेलिब्रेट करेगा.

 

 

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हंसिका मोटवानी – सोहेल कथूरिया

एक्ट्रेस हंसिका मोटवानी ने 4 दिसंबर, 2022 को सोहेल ​कथूरिया संग शादी की है. सोहेल की ये दूसरी शादी है. दोनों ने जयपुर में शाही अंदाज से शादी की है. शादी के बाद हंसिका और सोहेल भी अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ मना रहे हैं.

 

 

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अली फजल – ऋचा चड्ढा

बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और ‘मिर्जापुर’ फेम अली फजल का भी शादी के बाद ये पहला ‘वैलेंटाइन डे’ है. लंबे इंतजार के बाद दोनों ने 4 अक्टूबर, 2022 को निकाह किया था. वहीं, अब दोनों इस साल अपना पहला ‘वैलेंटाइन डे’ मनाएंगे.

 

अनुज-अनुपमा की जिंदगी में बुरी नजर डालेगी माया, बा को सबके सामने फटकार लगाई राखी दवे

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना के ‘अनुपमा’ में आए दिन ट्विस्ट पर ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में छोटी अनु और माया का ड्रामा तो एक तरफ चालू है ही, साथ ही इसमें पारितोष का एंगल भी जोड़ दिया गया है जिसने अनुपमा को और मनोरंजक बना दिया है. बीते दिन रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) के ‘अनुपमा’ में दिखाया गया कि पारितोष के लिए किंजल अपना आराम भूल जाती है और उसकी सेवा में लग जाती है. वहीं कपाड़िया हाउस में अनुपमा के पहुंचते ही छोटी अनु का चेहरा खिल जाता है. वह माया को छोड़कर अनुपमा के पास चली जाती है. दूसरी ओर अनुज भी अनुपमा के नाम का जाप करना शुरू कर देता है और यह बात माया को जरा भी पसंद नहीं आती है. लेकिन ‘अनुपमा‘ (Anupama) में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं खत्म नहीं होते हैं.

 

पारितोष के गिरने से शाह हाउस में मचेगा हंगामा

अनुपमा‘ में दिखाया जाएगा कि किंजल राखी दवे के साथ मीटिंग के लिए ऑफिस चली जाती है और घर में पारितोष का ध्यान समर रखता है। लेकिन उसके वहां से हटते ही तोषू बेड से गिर जाता है। इस बात के लिए वनराज समर पर भड़कता है और कहता है कि जब जिम्मेदारी संभलती नहीं है तो मुझसे बोल दे। वहीं बा किंजल को ताना मारती हैं और उसके आते ही कहती हैं कि तू होती तो यह सब होता ही नहीं

 

लीला की बोलती बंद करेगी राखी दवे

इस पर किंजल की मां राखी दवे जमकर को लताड़ेगी. राखी दवे लीला से कहेगी ‘मेरी बेटी कोई नौकरानी नहीं है जो आपके लिए सब कुछ करे भी और आपके सुने भी’. लीला घर की सिचूऐशन संभालने के लिए अनुपमा को बुलाने की बात कहेगी लेकिन वनराज बा को मना कर देगा. इस बीच उधर कपाड़िया हाउस में अलग ही ड्रामा चल रहा होगा.

 

बरखा खोली माया का काला सच लेकिन..

माया इस बात से परेशान है की छोटी अनु उसकी तरफ अट्रैक्ट होने की बजाए उलटा अनुज और अनुपमा की तरफ अट्रैक्ट हो रही है. माया को अनुज और अनुपमा के कमरे के बाहर खड़ी रहकर जासूसी करते देखकर भड़की बरखा.  बरखा इस बात का खुलासा अनुज और अनुपमा के सामने करेगी लेकिन माया बात घुमा देगी.

चोरी का फल: भाग 2- क्या राकेश वक्त रहते समझ पाया?

मैं बड़े प्यार से उस का चेहरा निहार रहा था. मेरी आंखों के भाव पढ़ कर उस के गोरे गाल अचानक गुलाबी हो उठे.

मैं उसे चाहता हूं, यह बात उस दिन शिखा पूरी तरह से समझ गई. उस दिन से हमारे संबंध एक नए आयाम में प्रवेश कर गए.

जिस बीज को उस दिन मैं ने बोया था उसे मजबूत पौधा बनने में एक महीने से कुछ ज्यादा समय लगा.

‘‘हमारे लिए दोस्ती की सीमा लांघना गलत होगा, सर. संजीव को धोखा दे कर मैं गहरे अपराधबोध का शिकार बन जाऊंगी.’’

जब भी मैं उस से प्रेम का इजहार करने का प्रयास करता, उस का यही जवाब होता.

शिखा को मेरे प्रस्ताव में बिलकुल रुचि न होती तो वह आसानी से मुझ से कन्नी काट लेती. नाराज हो कर उस ने मुझ से मिलना बंद नहीं किया, तो उस का दिल जीतने की मेरी आशा दिनोदिन बलवती होती चली गई.

वह अपने घर की परिस्थितियों से खुश नहीं थी. संजीव का व्यवहार, आदतें व घर का खर्च चलाने में उस की असफलता उसे दुखी रखते. मैं उस की बातें बड़े धैर्य से सुनता. जब उस का मन हलका हो जाता, तभी मेरी हंसीमजाक व छेड़छाड़ शुरू होती.

उस के जन्मदिन से एक दिन पहले मैं ने जिद कर के उस से अपने घर चलने का प्रस्ताव रखा और कहा, ‘‘अपने हाथों से मैं ने तुम्हारे लिए खीर बनाई है, अगर तुम मेरे यहां चलने से इनकार करोगी तो मैं नाराज हो जाऊंगा.’’

मेरी प्यार भरी जिद के सामने थोड़ी नानुकुर करने के बाद शिखा को झुकना ही पड़ा.

मैं ने उस के जन्मदिन के मौके पर एक सुंदर साड़ी उपहार में दी और उसे पहली बार मैं ने अपनी बांहों में भरा तो वह घबराए लहजे में बोली, ‘‘नहीं, यह सब ठीक नहीं है. मुझे छोड़ दीजिए, प्लीज.’’

अपनी बांहों की कैद से मैं ने उसे मुक्त नहीं किया क्योंकि वह छूटने का प्रयास बडे़ बेमन से कर रही थी. उस के मादक जिस्म का नशा मुझ पर कुछ इस तरह हावी था कि मैं ने उस के कानों और गरदन को गरम सांसें छोड़ते हुए चूम लिया. उस ने झुरझुरी के साथ सिसकारी ली. मुंह से ‘ना, ना’ करती रही पर मेरे साथ और ज्यादा मजबूती से वह लिपट भी गई.

शिखा को गोद में उठा कर मैं बेडरूम में ले आया. वहां मेरे आगोश में बंधते ही उस ने सब तरह का विरोध समाप्त कर समर्पण कर दिया.

सांचे में ढले उस के जिस्म को छूने से पहले मैं ने जी भर कर निहारा. वह खामोश आंखें बंद किए लेटी रही. उस की तेज सांसें ही उस के अंदर की जबरदस्त हलचल को दर्शा रही थीं. हम दोनों के अंदर उठे उत्तेजना के तूफान के थमने के बाद भी हम देर तक निढाल हो एकदूसरे से लिपट कर लेटे रहे.

कुछ देर बाद शिखा के सिसकने की आवाज सुन कर मैं चौंका. उस की आंखों से आंसू बहते देख मैं प्यार से उस के चेहरे को चूमने लगा.

उस की सिसकियां कुछ देर बाद थमीं तो मैं ने कोमल स्वर में पूछा, ‘‘क्या तुम मुझ से नाराज हो?’’

जवाब में उस ने मेरे होंठों का चुंबन लिया और भावुक स्वर में बोली, ‘‘प्रेम  का इतना आनंददायक रूप मुझे दिखाने के लिए धन्यवाद, राकेश.’’

हमारे संबंध एक और नए आयाम में प्रवेश कर गए. मैं अब तनावमुक्त व प्रसन्न रहता. शिखा ही नहीं बल्कि उस के घर के बाकी सदस्य भी मुझे अच्छे लगने लगे. मैं भी अपने को उन के घर का सदस्य समझने लगा.

मैं शिखा के घर वालों की जरूरतों का ध्यान रखता. कभी संजीव को रुपए की जरूरत होती तो शिखा से छिपा कर दे देता. मैं ने शिखा की सास के घुटनों के दर्द का इलाज अच्छे डाक्टर से कराया. उन्हें फायदा हुआ तो उन्होंने ढेरों आशीर्वाद मुझे दे डाले.

इन दिनों मैं अपने को बेहद स्वस्थ, युवा, प्रसन्न और भाग्यशाली महसूस करता. शिखा ने मेरी जिंदगी में खुशियां भर दीं.

एक रविवार की दोपहर शिखा मुझे शारीरिक सुख दे कर गई ही थी कि मेरे मातापिता मुझ से मिलने आ पहुंचे. मेरठ से मेरे लिए एक रिश्ता आया हुआ था. वह दोनों इसी सिलसिले में मुझ से बात करने आए थे.

‘‘वह लड़की तलाकशुदा है,’’ मां बोलीं, ‘‘तुम कब चलोगे उसे देखने?’’

‘‘किसी रविवार को चले चलेंगे,’’ मैं ने गोलमोल सा जवाब दिया.

‘‘अगले रविवार को चलें?’’

‘‘देखेंगे,’’ मैं ने फिर टालने की कोशिश की.

मेरे पिता अचानक गुस्से में बोले, ‘‘इस से तुम मेरठ चलने को ‘हां’ नहीं कहलवा सकोगी क्योंकि आजकल इस के सिर पर उस शिखा का जनून सवार है.’’

‘‘प्लीज पापा, बेकार की बातें न करें. शिखा से मेरा कोई गलत रिश्ता नहीं है,’’ मैं नाराज हो उठा.

‘‘अपने बाप से झूठ मत बोलो, राकेश. यहां क्या चल रहा है, इस की रिपोर्ट मुझ तक पहुंचती रहती है.’’

‘‘लोगों की गलत व झूठी बातों पर आप दोनों को ध्यान नहीं देना चाहिए.’’

मां ने पिताजी को चुप करा कर मुझे समझाया, ‘‘राकेश, सारी कालोनी शिखा और तुम्हारे बारे में उलटीसीधी बातें कर रही है. उस का यहां आनाजाना बंद करो, बेटे, नहीं तो तुम्हारा कहीं रिश्ता होने में बड़ा झंझट होगा.’’

‘‘मां, किसी से मिलनाजुलना गुनाह है क्या? मेरी जानपहचान और बोलचाल सिर्फ शिखा से ही नहीं है, मैं उस के पति और उस की सास से भी खूब हंसताबोलता हूं.’’

अपने झूठ पर खुद मुझे ऐसा विश्वास पैदा हुआ कि सचमुच ही मारे गुस्से के मेरा चेहरा लाल हो उठा.

मुझे कुछ देर और समझाने के बाद मां पिताजी को ले कर मेरठ चली गईं. उन के जाने के काफी समय बाद तक मैं बेचैन व परेशान रहा. फिर शाम को जब मैं ने शिखा से फोन पर बातें कीं तब मेरा मूड कुछ हद तक सुधरा.

शिखा को ले कर मेरे संबंध सिर्फ मांपिताजी से ही नहीं बिगड़े बल्कि छोटे भाई रवि और उस की पत्नी रेखा के चेहरे पर भी अपने लिए एक खिंचाव महसूस किया.

शिखा के मातापिता ने भी उस से मेरे बारे में चर्चा की थी. उन तक शिखा और मेरे घनिष्ठ संबंध की खबर मेरी समझ से रेखा ने पहुंचाई होगी, क्योंकि रेखा जब भी मायके जाती है तब वह शिखा के मातापिता से जरूर मिलती है. यह बात खुद शिखा ने मुझे बता रखी थी.

‘‘मम्मी, पापा, राकेशजी के ही कारण आज तुम्हारी बेटी इज्जत से अपनी घरगृहस्थी चला पा रही है. रोहित उन्हें बहुत प्यार करता है. संजीव उन की बेहद इज्जत करते हैं. मेरी सास उन्हें अपना बड़ा बेटा मानती हैं. हमारे बीच अवैध संबंध होते तो उन्हें मेरे घर में इतना मानसम्मान नहीं मिलता. आप दोनों अपनी बेटी की घरगृहस्थी की सुखशांति की फिक्र करो, न कि लोगों की बकवास की,’’ शिखा के ऐसे तीखे व भावुक जवाब ने उस के मातापिता की बोलती एक बार में ही बंद कर दी.

आगे पढ़ें- उदास से लहजे में शिखा ने…

Valentine’s Special: बसंत का नीलाभ आसमान- क्या पूरा हुआ नैना का प्यार

लेखक- geetanjali chy

अब यह मौसम का खुमार था या उसकी अल्हड़ उम्र का शूरुर  जो उसे दुनिया बेहिसाब खुबसूरत लग रही थी. जितने रंग फिजाओं में घुले थे उसकी गंध से नैना का हृदय सराबोर था. बसंत के  फूलों से मुकाबला करती नैना की खुबसूरती मौसम के मिज़ाज से भी छेड़खानी करती चलती थी. जब सारा जहाँ जाती हुई ठंड को रूसवा करने के डर से जैकेट डालकर सुबह सुबह घूमने निकलता तब नैना बगैर स्वेटर शाल के बसंती फिजाँ में इठलाती सारे जमाने को अपने जादू में बाँध लेती थी.

दो बहनों में  बड़ी नैना एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थी. माँ के सानिध्य से मरहूम नैना अपने पिता के साथ रहती थी.घर की बड़ी बेटी होने के बावजूद उसका बचपना नहीं गया था . बल्कि उसकी छोटी बहन ही कुछ अधिक शान्त, संयम, गम्भीर और बुजुर्ग बनी बैठी रहती. नैना के पिता एक प्रगतिशील व्यक्तित्व के स्वामी थे, जो नैना की हरकतों पर यदाकदा उसे स्नेह भरी फटकार लगा देते थे.

पर नैना भी कहाँ किसी से कम थी सारी डांट फटकार का लेखा जोखा तैयार रखती थी और फिर मौका मिलते ही कभी स्वास्थ्य के लिए उपदेश दे डालती, तो कभी पिता की राजनीति के प्रति दिवानगी को देख कर विद्रोहिनी हो जाती. राजनीति के नाम से नैना को इतनी चिढ़ थी कि वह अपनी सारी नजाकत, खुबसूरती, मासूमियत और शब्दों की मर्यादा को ताक पर रखकर इतनी ढीठ बन जाती कि उसका सारा विद्रोह, सारी झुँझलाहट, मिज़ाज का सारा तीखापन बाहर आ जाता था.

बाप बेटी की इस तकरार से आजिज रहने वाली नताशा अक्सर खिसियाकर कहती  – “राजनीति से इतना प्रेम और घृणा दोनों ही खतरनाक है. नैना तुम जो राजनीति के नाम पर दाँत पीस पीसकर लड़ती हो, तुम्हारी शादी जरूर किसी राजनैतिक परिवार में होगी. ”

इतना सुनने के साथ नैना नताशा पर भड़क जाती और पिता पुत्री का समझौता हो जाता. पर कहते हैं न कि वाणी में माँ सरस्वती का वास होता है. अल्हड़, पवित्र,निश्छल व्यक्तित्व की स्वामिनी नैना कब नैतिक को पसंद आ गयी, इसका अहसास उसे तब हुआ जब शहर के एमएलए नैतिक का रिश्ता नैना के लिए आया.

इस खबर ने जहाँ नैना की आत्मा का गला घोंट दिया था, तो वहीं उसके पिता रसूखदार राजनैतिक परिवार को रिश्ते के लिए मना करने का हौसला नहीं दिखा पाये.विवाह के प्रस्ताव को मना कर तलवार की धार पर चलने का सामर्थ उनमें न था. वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में प्रणय, विवाह और तृप्ति उन्हें ज्यादा प्रासंगिक नजर आ रही थी. वरना होने को तो कुछ भी हो सकता था.

अपने ही कुबोल से कुपित नताशा स्वयं को मुनि का अवतार समझ रही थी. उधर अपने अहर्निश अन्तर्द्वन्द्व में उलझी नैना रोयी, खीझी पर अपने परिवार की खैरियत के लिए एम एल ए से शादी करने को तैयार हो गई. वो अपने इनकार से पिता का दिल नहीं दुखाना चाहती थी. अपने कुढ़न और खीज से छोटी बहन का भविष्य खतरे में नहीं डालना चाहती थी.

नियत समय पर ब्याह सम्पन्न हुआ. एक तो पिता और बहन को छोड़ कर जाने का गम और फिर बेदिली का रिश्ता नैना चुप हो गयी थी. आँसू को छुपाने के लिए नसों के सहारे उन्हें हृदय में उतार देती, पर जब आँसूओं के सैलाब से हृदय डूबने लगता तो आँसू यकबयक पलकों पर उतर आते. मायके से बिदा होकर जब ससुराल आयी तो ऐसा लगा मानों स्वर्ग को किसी ने इन्द्रधनुषों के रंगों से भर दिया हो. पर जब वैभव और ऐश्वर्य के बादलों से झांककर वह नैतिक को देखती तो उसे लगता कि किस्मत ने उसे किसी पाप का दंड दिया है.

नैतिक बाबू गम्भीर और फिलासफर किस्म के इंसान थे. सुदर्शन पुरुष सा आभामंडल उनके यश का कारण था.काम और समाज सेवा की तमाम मसरूफियत के बीच कहीं कोई प्रेमी हृदय तो अवश्य था जिसमें नैना के जिंदादिल व्यक्तित्व ने अपना घर बना लिया था. नैना से विवाह के बाद वह अपनी भावना, प्रणय की कल्पनाओं को व्यक्त कर देना चाहता था, पर नैना के मौन को देख कर डर जाता . जब भी स्नेह भरे स्पर्श की चेष्टा करता, तब नैना की मौन तल्खी से सहसा कटुता और व्यंग्य से उबल उठता.

पहले पहल तो उसे लगा मानों नये परिवेश को आत्मसात नहीं कर पाने की वजह से नैना इस प्रकार का रवैया अपना रही है. परंतु शिघ्र ही नैतिक को नैना के हृदय में उग्र जहरीले काँटों का आभास हो गया. जुबान की तल्ख़ी की चुभन फिर कमजोर हो जाती है, पर नैना की निर्मम उपेक्षा नैतिक को कटुता के जहर से अभिषिक्त कर रही थी.

दो लोग एक साथ जीवन की एक ही समस्या के अंतर्विरोधों में उलझे हुए थे. मन में एक ठहराव आ गया था और वक्त ठहरने का नाम नहीं ले रहा था. नैना के हृदय ने मन से विद्रोह करना शुरू कर दिया था. अब वह जब भी नैतिक को देखती तो उसे वह सुकुमार और पवित्र लगता. नफरत पर भावुकता हावी होने लगी. हृदय और मन नैतिक का अलग अलग मुल्यांकन करता. हृदय को नैतिक देवदूत लगता तो दिमाग को पथभ्रष्ट देवदूत जिसे खरीदने को गुनाहगारों की सारी फौज खड़ी हो.

वहीं नैतिक नैना के तिरस्कार से ज्यादा उसके बदले हुए रूप से गमजदा था. जिस बिंदासपन, जिंदादिली और मस्तमौला अंदाज का वह कायल हो गया था. वही सबकुछ नैना का किसी ने छीन लिया था. उसका दिल और दिमाग बेबस हो रहा था. अपने ही प्यार का निबाह न कर पाने की कसक से वो नैना से दूर हो रहा था.

एक ही घर में दोनों अजनबियों की तरह जी रहे थे और एक ऐसी चाबी की तलाश कर रहे थे, जिसका कोई ताला ही नहीं था. नैना की भावनाएँ, उसका हृदय, उसकी आत्मा, उसके प्राण हार मान लेना चाहते थे, लेकिन उसका मन अब भी अपनी बात पर अड़ा हुआ था. हृदय में प्रेम की कोमल उपस्थिति को मन झल्लाहट और अन्तर्द्वन्द्व से अस्वीकार कर रहा था.

ताज्जुब है कि दिल और दिमाग की रस्साकशी में दिमाग का नियंत्रण खो गया नैना सीढ़ियों से नीचे गिर गई. दोनों टांग टूटने के दर्द से ज्यादा असुरक्षा और अस्वीकार कर दिए जाने की भावना से तड़प उठी. अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी पड़ी न जाने कौन कौन से बुरे ख्यालों से बिंधने लगी. कभी सपना देखती कि नैतिक उसे अपने से दूर कीचड़ में फेंक कर है. तो अगले ही पल पाँवों में तीखे दर्द से सारा बदन काँपने लगता.

सभी आ रहे थे और जल्दी ठीक होने का ढ़ाढ़स देकर चले जा रहे थे. फिर नताशा का भी आना हुआ और आने के साथ बोली ” अरे जीजा जी से सेवा ही करवाना था तो झूठ का बीमार हो जाती. टांगों को कुर्बान करने की क्या जरुरत थी. वैसे भी इतनी हट्टी कट्टी हो तुम्हें उठाना बैठाना कितना मुश्किल होगा बेचारे के लिए. ”

“अच्छा,  सच में.किसी को मेरी भी इतनी चिंता है”नैतिक बोला.

हादसे के बाद नैतिक ने नैना को पल भर भी अकेला नहीं छोड़ा. उसकी हर छोटी बड़ी जरूरत को पूरा करने के क्रम में जो विश्वास और प्रेम की अभिव्यक्ति नैतिक ने की, उसे शब्दों के जामे की जरूरत नहीं थी. नैतिक के मौन अभिव्यक्ति ने नैना के मष्तिष्क की मुर्छा को समाप्त कर दिया था.

और जिस दिन नैना का अस्पताल से डिसचार्ज होने का दिन आया तो नैतिक नैना के लिए गुलाब के फूलों गुलदस्ता ले आया. होंठों में मुसकान और आँखों में शरारत को छिपाते हुए एक गुलाब निकल कर नैतिक को देकर नैना बोली  “हैप्पी वेलेंटाइन डे. ”

और नैतिक हँस पड़ा.दोनों मुसकुरा रहे थे. चेहरे की आभा देखकर लगरहा था जैसे हवाओं में,फिजाओं में बसंत के मौसमी फूलों की खुबसूरती और गंध की बजाये,मोहब्बत के फूल खिलें हों और उसकी गंध से दोनों का तन मन पिघल रहा हो.महीने भर के सानिध्य और दोनों के संबंधों की गर्माहट भरे साथ में वे भी प्रेम के स्पर्श को महसूस कर थे. स्नेह और स्पर्श की ऊष्मा से उनका मन धुलकर ऐसे निखर गया जैसे बसंत का नीलाभ आसमान.

Valentine’s Special: वैलेंटाइन डे पर जीतें उन का दिल

वैलेंटाइन डे पर इस बार क्यों न कुछ अलग प्लान करें. अपने पार्टनर के साथ इस खास दिन को सैलिब्रेट करते वक्त अपने दिन को खुशी और प्यार से भर दें, रोमांस को हवाओं में बहने दें.

इस के लिए इस वैलेंटाइन डे पर अपनी पत्नी या प्रेमिका के लिए नाश्ता बनाने की कोशिश कीजिए और फिर देखिए उस की आंखों की चमक जो इस से पहले आप ने कभी नहीं देखी होगी. उस के सपनों का शहजादा उस की पसंदीदा डिशेज की ट्रे ले कर सामने खड़ा हो, उस में एक गुलाब का फूल भी हो तो बस खुशियों की इस से बढि़या रैसिपी आप के पास कोई हो ही नहीं सकती.

कुछ आसान डिशेज के जरीए अपने पार्टनर का पूरा दिन स्वादिष्ठ सरप्राइजेस से भरने का प्लान बनाएं और प्यार का जादू बिखरने दें.

चीजी लव बाइट

प्यार भरा नाश्ता बना कर अपनी पत्नी या प्रेमिका की सुबह की शुरुआत को शानदार बनाएं. बस फ्रोजन चीज शौट्स को पैन में फ्राई कर मेयो मस्टर्ड डिप के साथ गरमगरम परोसें और उस की सुबह की स्वादिष्ठ शुरुआत करें.

अपने पसंदीदा शैफ के हाथों का बना लजीज नाश्ता करने के बाद अगर 1 कप कौफी भी प्रेमिका या पत्नी को मिल जाए तो इस से ज्यादा खुशी नहीं हो सकती.

नाइट अंडर द स्टार्स

वैलेंटाइन डे पर सितारों की छांव में स्पैशल डिनर का इंतजाम करें, अपने घर की छत या लिविंगरूम में कैंडल जला कर.

पोटैटो वेजेस फ्राई कर के स्वादिष्ठ साइड डिश को तीखी थाई चिली सौस के साथ परोंसे. अपने स्वाद को थोड़ा स्पाइसी बना कर एक खास शाम अपने पार्टनर के साथ बिताएं.

औफिस लंच नोट्स

रिश्ते के शुरुआती दिनों में एकदूसरे को दिए गए सीक्रेट लव नोट्स का वह दौर याद कीजिएगा. फ्रोजन आलू टिक्की को प्यार के साथ फ्राई कर के रैप कर पैक करें, साथ ही पुदीना, नीबू व लहसुन चटनी पैक कर लंच को चटपटा बनाएं. हां, टूथपिक के साथ एक लव नोट लगाना न भूलें. आप की यह रोमांटिक कोशिश उन्हें शाम को जल्दी औफिस से घर खींच लाएगी.

द बैस्ट फार द लास्ट

कोई भी मेन्यू स्वादिष्ठ डैजर्ट के बिना पूरा नहीं होता. डैजर्ट ज्यादा समय लेने वाला पेचीदा काम हो सकता है, लेकिन इस वैलेंटाइन डे पर अपने मेन्यू को मीठे और नमकीन स्वाद से सराबोर होने दें. ये दोनों स्वाद एकदूसरे से बेहद अलग हैं पर इन्हें प्यार के स्वाद से एक कर दीजिए. कुछ फ्रोजन पोटैटो फ्रैंच फ्राइज को फ्राई कर अपने पसंदीदा सिरप में टौस करें. फिर चाहे वह चौकलेट हो, स्ट्रोबैरी हो, माप्ले हो या फिर तीनों का मिक्सचर. इसे और जायकेदार बनाने के लिए ऊपर से थोड़ी व्हिप क्रीम डाल कर एक अनोखे स्वाद वाले सरप्राइज का मजा लें.

 

– शैफ तुषार

 

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