BB 16: प्रियंका को हराकर विनर बने एम सी स्टेन, लोग बोले- ये तो धोखा है

19 हफ्तों के इंतजार के बाद देश के सबसे बड़े रियलिटी शो को उसका विनर मिल गया है. ‘बस्ती के हस्ती’ एमसी स्टैन ने बिग बॉस 16 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. फिनाले में शिव ठाकरे और प्रियंका चाहर चौधरी को हराकर एमसी स्टैन शो अपने नाम करेंगे, ऐसा दूर दूर तक किसी ने नहीं सोचा था. लेकिन सीजन 16 में बिग बॉस खेल गए. प्रियंका के विनर बनने का काफी बज था और रैपर ने बाजी मार ली. हमेशा की तरह शो के फिनाले के बाद आने लगे हैं पब्लिक रिएक्शंस, जहां कई लोग हैं जो स्टैन के विनर बनने से शॉक्ड हैं.

 

ट्रोल हो रहा बिग बॉस

प्रियंका के सपोर्टर उनके ट्रॉफी हारने से निराश हैं. एक्ट्रेस के फैंस का गुस्सा एमसी स्टैन और बिग बॉस मेकर्स पर फूट रहा है. हालांकि ऐसा करने वालों में सिर्फ प्रियंका के फैंस शामिल नहीं हैं. सोशल मीडिया पर बिग बॉस फैंस भी मेकर्स के फैसले के नाराज दिखे. यूजर्स ने बिग बॉस फिक्स्ड और स्क्रिप्टेड बताया है. एमसी स्टैन के विनर बनने से यूजर्स निराश हैं. लोगों का कहना है जिसने शो में कुछ नहीं किया, आखिर उसे कैसे शो का विनर बनने से खुश नहीं हैं. तभी तो फिनाले में दबंग खान ने प्रियंका की तारीफों के पुल बाधे. एक यूजर ने लिखा- अनडिजर्विंग विनर ऑफ द हिस्ट्री. यूजर ने लिखा चार महीने से कंटेंट देके क्या फायदा. शेम ऑन कलर्स टीवी.

 

एमसी स्टेन के विनर बनने से चौंके लोग

दरअसल, शो में एमसी स्टेन से ज्यादा एक्टिव शिव ठाकरे रहे. वो पूरी मंडली को संभालते दिखे. साथ ही हर मोर्चे पर बिग बॉस के गेम में सबसे आगे दिखे. ऐसे में कई लोगों को शिव ठाकरे की हार और एमसी स्टेन की जीत रास नहीं आ रही है. लोग उन्हें मोस्ट अनडिसर्विंग विनर बताने लगे हैं. एक इंटरनेट यूजर ने एमसी स्टेन को तो ‘खैरात का विनर’ तक बता दिया है.

शिव ठाकरे के फैंस के निकले आंसू

हालांकि बिग बॉस मराठी के विनर रहे शिव ठाकरे को इस शो का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था. जिसके बाद शिव ठाकरे के फैंस बुरी तरह से टूट गए हैं. शिव ठाकरे को बिग बॉस 16 के विनर के तौर पर देख रहे थे. मगर ऐन वक्त पर शिव ठाकरे के हाथ से मौका निकल गया. यही वजह है कि सामने आए रिजल्ट से बिग बॉस शो के फैंस हैरान रह गए हैं.

 

 

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स्टैन के फैंडम के आगे किसी की नहीं चली

बिग बॉस 16 में एमसी स्टैन की जीत को लेकर मिक्स्ड रिएक्शंस देखने को मिल रहे हैं. लेकिन कुछ भी हो, एक बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, वो है उनका फैनडम. एमसी स्टैन की तगड़ी फैन फॉलोइंग के आगे टीवी की बहुओं का स्टारडम भी फीका लगा. एमसी स्टैन जब भी नॉमिनेट हुए फैंस ने उन्हें भारी वोट्स देकर सुरक्षित किया. अब स्टैन को फैंस ने वोट्स देकर शो का विजेता बना दिया है. एक बात तो माननी पड़ेगी, फैनडम हो तो एमसी स्टैन जैसा… क्यों सही कहा ना?

सिड-कियारा की रीसेप्शन में छाई आलिया, दुल्हन पर भारी पड़ा लुक

राजस्थान के जैसलमेर में शादी के बंधन में बंधने के बाद से सिड-कियारा का वेडिंग सेलिब्रेशन जारी है. दिल्ली में रिस्पेशन के बाद न्यूली वेड कपल ने बीते दिन यानी संडे को बॉलीवुड के लिए रिसेप्शन पार्टी होस्ट की थी. स्टार कपल को शादी की बधाई देने के लिए बी टाउन के तमाम सितारे पहुंचे थे. सिड की एक्स आलिया भट्ट भी पार्टी में अपने दोस्त अयान मुखर्जी के साथ पहुंची थीं. वहीं जब नीतू कपूर भी रिसेप्शन पार्टी के लिए आईं तो आलिया ने जो खुशी दिखाई उसकी हर कोई तारीफ कर रहा है.

 

 

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आलिया ने दौड़कर सास को लगाया गले

सिड-कियारा की रिसेप्शन पार्टी में आलिया और उनकी सास नीतू सिंह में काफी अच्छी बॉन्डिंग नजर आई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही नीतू सिंह वेन्यू पर पहुंची वैसे ही आलिया दौड़कर अपनी सासू मां का वेलकम करती दिखीं. आलिया इस दौरान सास नीतू सिंह को गले लगाया और उनके गाल पर किस भी किया . वहीं सास-बहू की जोड़ी ने इस दौरान पैपराजी को भी जमकर पोज दिए.

 

 

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आलिया और नीतू सिंह लगी बेहद खूबसूरत

सिड-कियारा के रिसेप्शन पार्टी में आलिया शिमरी साड़ी पहनकर पहुंची थीं. एक्ट्रेस ने साड़ी के साथ मैचिंग का शिमरी स्लीवलेस ब्लाउज पेयर किया था. इस दौरान आलिया मिनिमल मेकअप में नजर आईं. उन्होंने अपने बालों को खुला छोड़ा था. सिड-कियारा के वेडिंग रिस्पेशन में ओवरऑल आलिया का लुक काफी अट्रैक्टिव लग रहा था.नीतू कपूर भी ग्रीन कलर के एथनिक सूट में बेहद खूबसूरत लग रही थीं. रेड कार्पेट पर वेटरन एक्ट्रेस ने अपनी बहू के साथ पोज दिए. हालांकि इस दौरान रणबीर कपूर की कमी भी खली.

सिड-कियारा ने 7 फरवरी को की थी शादी

बता दे कि शादी के बंधन में बंधने के बाद से सिड-कियापा अपनी वेडिंग का जश्न मनाने में बिजी हैं. जैसलमेर के सूर्यगढ़ किले में सात फेरे लेने के बाद कपल अगले दिन दिल्ली पहुंचा था. दिल्ली में सिड-कियारा का ग्रैंड वेलकम हुआ और कपल ने फैमिली और क्लोज फ्रेंड्स के लिए इंटीमेट रिसेप्शन भी होस्ट किया था. वहीं बीते दिन सिड-कियारा ने मुंबई में ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी होस्ट की थी जिसमें बॉलीवुड के तमाम सितारों ने शिरकत की थी.

वकीलनी: अमीरों को जाल में फंसाती श्यामा

Serial Story: अंत भला तो सब भला – भाग 2

उसे उतार कर विनय की गाड़ी तेजी से निकल गई. अपने कमरे में आ कर ग्रीष्मा सोचने लगी कि कितने सुलझे इंसान हैं सर. अपने बारे में उन की साफगोई ने उसे अंदर तक प्रभावित कर दिया था… और एक रवींद्र. उस के बारे में सोचते ही उस का मन वितृष्णा से भर उठा. न जाने विनय सर में ऐसा क्या था कि उन से बात करना, मिलना उसे अच्छा लगा था. विनय सर के बारे में सोचतेसोचते ही उस की आंख लग गई.

एक दिन जैसे ही ग्रीष्मा स्कूल पहुंची, चपरासी आ कर बोला, ‘‘मैम, आप को सर बुला रहे हैं.’’ जब वह प्रिंसिपल कक्ष में पहुंची तो विनय सर बोले, ‘‘मैम, बालिका शिक्षा पर कल एक सेमिनार में जाना है…आप जा सकेंगी.’’

‘‘जी सर,’’ उस ने सकुंचाते स्वर में कहा. ‘‘चिंता मत करिए मैं भी चलूंगा साथ में,’’ विनय सर ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा.

‘‘जी सर,’’ कह कर वह जैसे ही कक्ष से बाहर जाने लगी तो विनय सर फिर बोले, ‘‘कल सुबह 10 बजे यहीं से मेरे साथ चलिएगा.’’ ‘‘जी,’’ कह कर वह प्रिंसिपल के कक्ष से बाहर आ गई.

अपनी कक्षा में सीट पर आ कर बैठी तो उस का दिल जोरजोर से धड़क रहा था. विनय सर के साथ जाने की कल्पना मात्र से ही वह रोमांचित हो उठी थी. उसे लगने लगा जैसे उस के दिल और दिमाग में एकसाथ अनेक घंटियां बजने लगी हों. फिर अचानक वह तंद्रा से जागी और सोचने लगी कि वह यह नवयुवतियों जैसा क्यों सोच रही है. तभी लंच समाप्त होने की घंटी बज गई और क्लास में बच्चे आ जाने से उस के सोचने पर विराम लग गया. अगले दिन सुबह चंपई रंग की साड़ी पहन, माथे पर छोटी सी बिंदी लगा कर और बालों की ढीली सी चोटी बना कर वह जैसे ही स्कूल पहुंची तो विनय सर उसे बाहर ही मिल गए. उसे देखते ही एकदम बोल पड़े, ‘‘मैडम, आज तो आप बहुत स्मार्ट दिख रही हैं.’’

वह शर्म से लजा गई. सेमिनार के बाद घर पहुंच कर उस ने एक बार नहीं कई बार अपनेआप को आईने में निहारा. सर के एक वाक्य ने उस के दिलदिमाग में प्रेमरस का तूफान जो ला दिया था. अगले दिन सुबह कुणाल के स्कूल में पीटीएम थी. सो जैसे ही तैयार हो कर वह कमरे से बाहर आई तो उसे देखते ही कुणाल बोला, ‘‘मां, कितने दिनों बाद आज आप ने अच्छी साड़ी पहनी है. आप बहुत अच्छी लग रही हो.’’ ‘‘हां बेटा सच में तू आज अच्छी लग रही है,’’ सासूमां ने भी कहा तो उसे सहसा अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ और फिर सोचने लगी कि क्या सारे जमाने को विनय सर की हवा लग गई है जो सब को वह सुंदर लग रही है.

सासूमां की बात सुन कर वह दूसरी बार चौंकी और अंदर जा कर एक बार फिर आईने में खुद को देखा कि कहीं चेहरे पर तो ऐसा कुछ नहीं है जिस से सब को वह सुंदर नजर आ रही है पर अब न जाने क्यों सुबह स्कूल जाते समय अच्छे से तैयार होने का उस का मन करता. विनय सर और उन की बातों से उस के सुसुप्त मन में प्रेमरस की लहरें हिलोरे लेने लगी थीं. विवाह के बाद सजनेसंवरने और प्रेमरस में डूबे रहने की जो भावनाएं रवींद्र के शुष्क व्यवहार के कारण कभी जन्म ही नहीं ले पाई उन के अंकुर अब फूटने लगे थे. इधर वह नोटिस कर रही थी कि विनय सर भी किसी न किसी बहाने से उसे लगभग रोज अपने कैबिन में बुला ही लेते.

एक दिन जब ग्रीष्मा एक छात्र के सिलसिले में विनय सर से मिलने गई तो बोली, ‘‘सर, यह बच्चा पिछले माह से स्कूल नहीं आ रहा है? क्या करूं?’’

‘‘अरे मैडम उस की समस्या मैं हल कर दूंगा. उस के घर का फोन नंबर दीजिए पर यह बताइए आप हमेशा इतनी गुमसुम सी क्यों रहती हैं… जिंदगी एक बार मिलती है उसे खुश हो कर जीएं. जो हो गया है उसे भूल जाइए और आगे बढि़ए. चलिए आज शाम को मेरे साथ कौफी पीजिए. ‘‘मैं… नहींनहीं सर, ये सब ठीक नहीं है… मैं कैसे जा पाऊंगी? आप ही चले जाइएगा.’’

ग्रीष्मा को तो कुछ जवाब ही नहीं सूझ रहा था… जो मन में आया कह कर बाहर जाने के लिए कैबिन का दरवाजा खोला ही था कि विनय सर की आवाज उस के कानों में पड़ी, ‘‘मैं बगल वाले इंडियन कौफी हाउस में शाम 7 बजे आप का इंतजार करूंगा. आना न आना आप की मरजी?’’

इस अनापेक्षित प्रस्ताव से उस की सांसें तेजतेज चलने लगीं. वह तो अच्छा था कि गेम्स का पीरियड होने के कारण बच्चे खेलने गए थे वरना उस की हालत देख कर बच्चे क्या सोचते? बारबार विनय सर के शब्द उस के कानों में गूंज रहे थे. दूसरी ओर मन में अंतर्द्वंद भी था कि यह उसे क्या हो रहा है. जो भावना कभी रवींद्र के लिए भी नहीं जागी वह विनय सर के लिए… विनय सर शाम को इंतजार करेंगे. जाऊं या न जाऊं… वह इसी ऊहापोह में थी कि छुट्टी की घंटी बज गई.

घर आ कर सब को चाय बना कर पिलाई. घड़ी देखी तो 6 बज रहे थे. फिर वह सोचने लगी कि कैसे जाऊं…,मांबाबूजी से क्या कहूं…पर सर…ग्रीष्मा को सोच में बैठा देख कर ससुर बोले, ‘‘क्या बात है बहू क्या सोच रही है?’’ वह हड़बड़ा गई जैसे उस की चोरी पकड़ी गई हो. फिर कुछ संयत हो कर बोली. ‘‘कुछ नहीं पिताजी एक सहेली के बेटे का जन्मदिन है. वहां जाना था सो सोच रही थी कि जाऊं या नहीं, क्योंकि लौटतेलौटते देर हो जाएगी.’’

‘‘जा बेटा तेरा भी थोड़ा मन बहलेगा…बस, जल्दी आने की कोशिश करना.’’ ‘‘ठीक है, मैं जल्दी आ जाऊंगी,’’ कह कर उस ने अपना पर्स उठाया और फिर स्कूटी स्टार्ट कर चल दी. स्कूटी चलातेचलाते उसे खुद पर हंसी आने लगी कि कैसे कुंआरी लड़कियों की तरह वह भाग ली. विनय सर का जनून उस पर इस कदर हावी था कि आज पहली बार उस ने कितनी सफाई से ससुर से झूठ बोल दिया.

जैसे ही ग्रीष्मा ने कौफी हाउस में प्रवेश किया विनय सर सामने एक टेबल पर बैठे इंतजार करते मिले. उसे देखते ही बोले, ‘‘मुझे पता था कि आप जरूर आएंगी.’’ ‘‘कैसे?’’

‘‘बस पता था,’’ कुछ रोमांटिक अंदाज में विनय सर बोले, ‘‘बताइए क्या लेंगी कोल्ड या हौट.’’ ‘‘हौट ही ठीक रहेगा,’’ उस ने सकुचाते हुए कहा. ‘‘आप बिलकुल आराम से बैठिए यहां. भूल जाइए कि मैं आप का बौस हूं. यहां हम सिर्फ 2 इंसान हैं. वैसे आप आज भी बहुत सुंदर लग रही. आप इतनी खूबसूरत हैं, योग्य हैं और सब से बड़ी बात आप अपने पति के मातापिता को अपने मातापिता सा मान देती हैं. जो हो गया उसे भूल जाइए और खुल कर बिंदास हो कर जीना सीखिए.’’ ‘‘सर आप को पता नहीं है मेरे पति… और मेरा अतीत…’’ उस ने अपनी ओर से सफाई देनी चाही. ‘‘ग्रीष्मा प्रथम तो तुम्हारा अतीत मुझे पता है. स्टाफ ने मुझे सब बताया है. दूसरे मुझे उस से कोई फर्क नहीं पड़ता… कब तक आप अतीत को अपने से चिपका कर बैठी रहेंगी. अतीत की कड़वी यादों के साए से अपने वर्तमान को क्यों बिगाड़ रही हैं? जब वर्तमान में प्रसन्न रहेंगी तभी तो आप अपने भविष्य को भी बेहतर बना पाएंगी… मेरी बातों पर विचार करिए और अपने जीने के अंदाज को थोड़ा बदलने की कोशिश करिए.’’

विनय सर ने पहली बार उसे उस के नाम से पुकारा था. वह समझ नहीं पा रही थी कि सर उसे क्या कहने की कोशिश कर रहे हैं.

आगे पढें- अचानक ग्रीष्मा ने घड़ी पर नजर डाली…

Valentine’s Day: नया सवेरा- भाग 3

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‘‘तुम्हारे पिता ने हमारी आर्थिक रूप से बहुत मदद की. इस खातिर, मैं चुप हो गई. उस के बाद मेरे पापा को तो मौका मिल गया. तुम्हारे पिता दारू पीने के लिए उन्हें खूब पैसे देते. कितना स्वार्थी होता है न इंसान, प्रीति? अपने बच्चे का दर्द देख कर भी अनजान बन जाता है और सिर्फ अपने बारे में सोचता है.

‘‘खैर, धीरेधीरे यहां आ कर कुछ समय के पश्चात मैं ने सबकुछ भूल कर तुम्हारे पिता को दिल से अपनाना चाहा. परंतु उन्हें तो सिर्फ मेरी खूबसूरती से प्यार था. मात्र खिलौना भर थी मैं उन के लिए. बहुत कोशिश की प्रीति, पर निराशा ही हाथ लगी. जब उन का मन करता, वे मु झ से मिलते अन्यथा महीनों वे मु झ से बात तक नहीं करते. यदि मैं कुछ कहती तो वे मु झे अपनी औकात में रहने को कहते. मु झ से कहते कि मु झे तो उन का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उन्होंने मु झ से शादी की, मु झे इस बंगले में आश्रय दिया. चूंकि उन्होंने दीदी के इलाज के लिए पैसे दिए थे. मैं चुप हो जाती. उस के बाद मैं ने चुप रहना सीख लिया. तुम्हारे पिताजी जो चाहते थे, वह हो गया. सबकुछ उन के हिसाब से हो रहा था और यही तो वह चाहते थे.’’

वे आगे बोलीं, ‘‘फिर तुम भी मु झ से बात नहीं करना चाहती थीं और तब तक मैं इस कदर टूट चुकी थी कि तुम्हारे करीब जाने, तुम्हें सम झने की मैं ने कोशिश भी नहीं की. मु झे लगा कि न मेरे पिता अपने हुए, न मेरे पति अपने हुए तो तुम तो किसी और का खून हो, तुम कैसे मेरी अपनी हो सकती हो. फिर क्यों मैं यह बेकार की कोशिश करूं. क्यों हर बार अपना हमदर्द तलाशने की कोशिश करूं. मैं ने तुम में अपनी खुशी तलाशने के बजाय खुद को एक गहरे अंधकार में धकेल दिया. मु झे माफ कर देना, प्रीति.

‘‘तुम्हारे प्रति मेरी जिम्मेदारी थी जिसे मैं ने कभी पूरा नहीं किया. कभीकभी लगता है पापा की तरह मैं भी तो स्वार्थी ही थी जो अपने गमों में इस कदर खो गई कि तुम्हारे गमों को देख कर भी हमेशा मैं ने अनदेखा किया है. लेकिन देखो न, इतना कुछ होने के बावजूद जब पापा की मौत की खबर सुनी, मु झे बहुत रोना आया. मैं फूटफूट कर रोई. ऐसे क्यों होता है प्रीति? कहां से हम औरतों में इतना स्नेह आता है? और क्यों आता है? क्यों हम लोग बेरहम नहीं हो सकते?’’

यह कह कर छोटी मां रोने लगीं. मेरा भी गला भर आया. मैं वहीं बालकनी में फर्श पर बैठ गई. मैं ने छोटी मां का हाथ अपने हाथ में लिया और कहा, ‘‘मां, आप चिंता मत करिए. अब सब ठीक होने वाला है. हमारे जीवन में खुशियां लौटेंगी. कितना कीमती समय हम ने ऐसे ही जाया कर दिया, जबकि आप और मैं, हम दोनों उसी दर्द से गुजर रहे थे. फिर भी हम एकदूसरे के हमदर्द नहीं बन पाए. गलती सिर्फ आप की नहीं थी मां, गलती तो मेरी भी थी.

‘‘मैं ने भी तय कर लिया था कि कभी आप को मां के रूप में नहीं स्वीकारूंगी. मां, हमारा जीवन के प्रति दृष्टिकोण ही नकारात्मक था. यदि हम कोशिश करते तो एकदूसरे के दोस्त बन सकते थे. हम अपना दर्द बांट सकते थे. लेकिन हम ने ऐसा नहीं किया.’’

मां ने मु झ से सहमति जताई. मैं ने किचन से एक गिलास ठंडा पानी ले कर मां को दिया. आज हम एक अनोखे दोस्ती के रिश्ते से बंध रहे थे. सबकुछ कितना अच्छा और नया लग रहा था. मैं वहीं मां के पास नीचे बैठी. घड़ी ने सुबह के 4:30 बजा दिए. तभी मेरे मोबाइल पर रोहित का मैसेज आया. उस ने लिखा था, ‘कब तक इंतजार करवाओगी प्रीति? कब तक मेरे प्यार की परीक्षा लोगी? 2 साल से हम एकदूसरे को जानते हैं. अब वक्त आ गया है कि हम पतिपत्नी के बंधन में बंध कर सदा के लिए एक हो जाएं. तुम्हारी हां के इंतजार में, तुम्हारा और सदा तुम्हारा, रोहित.’ मेरे चेहरे की प्रसन्नता से मां सम झ गईं कि कुछ न कुछ बात जरूर है. मैं ने रोहित को मैसेज किया, ‘रोहित, तुम ने मेरा बहुत इंतजार किया है. एक दिन और कर लो. आज मु झे मां को ले कर उन के पिता के दाहसंस्कार में जाना है. मैं तुम से कल मिलती हूं.’

मां के पूछने पर मैं ने मां को रोहित के बारे में सबकुछ बता दिया कि हम लोग 2 साल से एक ही औफिस में काम करते हैं. एकदूसरे को पसंद भी करते हैं और रोहित चाहता है कि हम विवाह बंधन में बंध जाएं. मगर रिश्तों से डर लगने लगा है. तब मां ने मु झे प्यार से सम झाया, ‘‘मेरे हिसाब से यदि रोहित तुम से सच्चा प्यार नहीं करता तो तुम्हारा इंतजार भी नहीं करता. वह विवाह करना चाहता है तुम से. तुम्हें प्यार से अपनाना चाहता है. फिर भी मैं एक बार उस से मिलना चाहूंगी.’’ मां का यह कहना था कि मेरी खुशी की सीमा न रही. मैं ने मां से कहा, ‘‘मां, आप को पूरा अधिकार है और आप को यह अधिकार देते हुए मु झे अजीब सा सुकून महसूस हो रहा है. आज लग रहा है कि मेरी जिंदगी में भी अच्छेबुरे का निर्णय लेने वाला कोई है. कोई है जो अब मु झे गलत काम के लिए डांट सकता है,’’ कहतेकहते मेरा गला भर आया.

आज हम मांबेटी खूब रोए. अब सूरज की पहली लालिमा निकल रही थी. ऐसा लग रहा था कि प्रकृति भी आज प्रसन्न है. नया दिन आज आशा का नया सवेरा ला कर हमारी जिंदगी में आया था. मैं ने मां से जल्दी तैयार हो जाने को कहा. मां ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरा. कुछ ही देर बाद हमारी गाड़ी मां के मायके में आ कर रुकी. मां ने अपने पिताजी को अंतिम बार प्रणाम किया. वहां उन की बहनें पहले ही पहुंच चुकी थीं. मैं उन सब से मिली. मैं अगले दिन घर आ गई और मां कुछ दिन वहीं रुक गईं. फिर मैं रोहित से मिलने गई. रोहित मु झे देख बहुत खुश हो गया. फिर हम कौफी हाउस गए. वहां कौफी का और्डर दिया.

मैं ने रोहित से कहा, ‘‘रोहित, मैं बहुत खुश हूं. अब मु झे मेरे परिवार के रूप में छोटी मां का प्यार मिला है. मैं ने तुम से अपने परिवार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया था. लेकिन तुम्हें सबकुछ जानने का अधिकार है,’’ यह कह कर मैं ने रोहित को सारी बात बता दी. मैं ने रोहित से यह भी कहा कि शादी के बाद भी मां मेरे साथ ही रहेंगी. अब मैं उन को और अकेला नहीं छोड़ सकती. मैं ने एक मां का प्यार तो खो दिया, अब दूसरी मां का नहीं खोना चाहती. यह सब जान लेने के बाद ही वह मु झ से शादी करने का फैसला ले. कोई जल्दबाजी न करे.

‘‘मु झे तुम्हारे जवाब का इंतजार रहेगा, रोहित,’’ मैं यह कह कर उठने ही वाली थी कि रोहित ने मेरा हाथ थाम लिया. उस ने मु झ से कहा, ‘‘प्रीति, पहले मैं केवल तुम से प्यार करता था परंतु अब तुम्हारी इज्जत भी करता हूं. जहां तक मां का सवाल है, मां यदि अपने बच्चों के पास नहीं रहेंगी तो कहां रहेंगी? और यकीन मानो, हम लोग मां को ढेर सारी खुशियां देंगे, जिन की वे हकदार हैं.’’

रोहित का इतना कहना था कि मैं रोहित के गले लग गई. मां उम्र के हिसाब से मेरी बड़ी बहन जैसी थीं. अब हमें अपने साथ उन का भी भविष्य संवारना था. 2 दिनों बाद रोहित मां से मिला. मां को रोहित अच्छा लगा. उन की तरफ से हरी  झंडी मिलते ही हम नए जीवन की हसीन कल्पनाओं में खो गए.

‘‘अरे, अरे…अभी से सपनों में खो गए तुम दोनों, अभी बहुत काम है. मेरी बेटी की शादी है, मु झे बहुत सारी तैयारियां करनी हैं,’’ मां का यह कहना था कि हम सब खिलखिला कर हंस पड़े.

क्या प्रैग्नेंसी के दौरान सैक्स करना सेफ रहेगा?

सवाल-

मैं 2 महीने से प्रैगनैंट हूं. क्या इस समय सैक्स करना सेफ रहेगा?

जवाब-

प्रैगनैंसी के पहले 3 महीने या पहली तिमाही तक इंटरकोर्स या सैक्स करना सेफ नहीं होता है. इस से गर्भपात होने की संभावना रहती है. लेकिन दूसरी तिमाही में सैक्स कर सकते हैं. इंटरकोर्स करते समय इस बात का ध्यान रहे कि उस में प्यार और फोरप्ले का समावेश ज्यादा हो यानी पार्टनर से जबरदस्ती बिलकुल नहीं करनी चाहिए. सैक्स करने से दोनों पार्टनर एकदूसरे से ज्यादा कनैक्ट हो पाते हैं. दूसरी तिमाही के बाद सैक्स करने के बाद गर्भाशय में संकुचन महसूस होगा, औक्सीटोन नाम का लव हारमोन भी रिलीज होगा जो मातापिता और बच्चे के बीच के बंधन को मजबूत करता है. इसलिए सैक्स करने की बात को ले कर घबराएं नहीं. इस से नौर्मल डिलिवरी होने की संभावना और बढ़ जाती है. सैक्स करते वक्त बस हाइजीन मैंटेन करें और कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें. याद रखें, ऐंजौय सैक्स, सेफ सैक्स तो डिलिवरी भी सेफ होगी.

ये भा पढ़ें- 

बिना सैक्स के आदमी और औरत का संबंध अधूरा है.कुछ लोग चाहे जितना गुणगान कर लें कि सैक्स गंदा है, असल में आदमीऔरत में पूरा प्यार या लगाव सैक्स से ही होता है. यह बात दूसरी है कि कुछ मामलों में यह प्यार व लगाव कुछ मिनटों तक सिमट कर रह जाता है और शारीरिक प्रक्रिया पूरी होते ही दोनों अपनेअपने काम में व्यस्त हो जाते हैं. सैक्स के बराबर ही पेट भरना जरूरी है. शायद सैक्स से ज्यादा दूसरे मनोरंजन भी भारी पड़ते हैं.

एक संस्थान जो लगातार अमेरिकी लोगों पर शोध कर रही है ने पता किया है कि अमेरिकियों में भी सैक्स की चाहत कम हो रही है और वे सैक्स की जगह वीडियो गेम्स या अपने कैरियरों पर समय और शक्ति अधिक लगाने लगे हैं. युवा लड़कियों में 18% और युवा लड़कों में 23% ने कहा कि उन्हें पिछले 1 साल में एक बार भी सैक्स सुख नहीं मिला. 60 वर्ष की आयु से अधिक के 50% लोग सैक्स से दूर रहते हैं.

बिना सैक्स के जीवन की बहुत महिमा गाई जाती है पर यह है गलत. आदमी-औरत का संबंध प्राकृतिक है, चाहे प्रकृति ने इस में आनंद डाला था या नहीं, कहा नहीं जा सकता. सभ्य समाज सैक्स पर आधारित है, क्योंकि सुरक्षित सैक्स और पार्टनर की ग्रांटेड मौजूदगी ने ही विवाह संस्था को जन्म दिया है. विवाह है तो घर है, घर है तो गांव है, गांव है तो शहर है, शहर है तो देश है. बिना सैक्स के लोग अकेले पड़ जाएंगे और जीवन के प्रति उन का नजरिया ही बदल जाएगा.

अभिनेत्री हिमानी भाटिया, वेलेंटाइन डे, किसके साथ मनाने वाली है, पढ़े इंटरव्यू

सोशल मीडिया पर अक्सर बॉलीवुड अभिनेत्रियों, स्टार किड्स और फीमेल सेलिब्रिटी के ग्लैमरस लुक चर्चा में रहते हैं, लेकिन अभिनेत्री हिमानी भाटिया की बिकिनी लुक खूब सुर्खियां बटोरते हैं. उनके फैन फोलोवर्स वन मिलियन से अधिक है, जिनकी स्टाइल और ड्रेसेज सभी फोलो करते है.

शोर्ट फिल्म ‘ब्लिंक’ फेम  एक्ट्रेस हिमानी भाटिया ने ग्लोबल फेम अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता. उन्हें बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा धूपिया ने इस अवॉर्ड से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें दादा साहेब फाल्के अवार्ड, सत्यजीत रे आइकोन आवर्ड आदि कई पुरस्कार इस फिल्म को लेकर मिल चुके है, हिमानी भाटिया एक एक्ट्रेस होने के साथ ही निर्माता, लेखिका, होस्ट और मॉडल भी हैं. उनकी शोर्ट फिल्म ‘ब्लिंक’ एम एक्स प्लेयर पर रिलीज हो चुकी है. ये एक इमोशनल और थ्रिलर फिल्म है. शॉर्ट फिल्म को क्रिटिकल और कमर्शियल दोनों तरह से सफलता मिली है, लेकिन हिमानी के अभिनय की सबसे ज्यादा चर्चा इस फिल्म से मिली है. लोगों ने उनके प्रदर्शन को पसंद किया और उनकी अभिनय प्रतिभा की प्रशंसा की. इसकी खास बात यह है कि इस फिल्म को कोरोना महामारी के दौरान शूट किया गया था. इसलिए इस फिल्म की सफलता उनके लिए बड़ी बात थी. हिमानी अलग और उम्दा अभिनय के लिए जानी जाती है.

हिमानी को बचपन से ही अभिनय की इच्छा थी, उन्होंने इसके लिए बहुत संघर्ष भी किया है. अभिनय के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी को छोड़कर अभिनय में जुट गई. उन्होंने रूमेट्स, खत, लॉकडाउन बिरयानी, हवा की खिड़की, नेटफ्लिक्स और अन्य कई ओटीटी शोज के लिए काम कर चुकी हैं. इसके अलावा हिमानी को जानवरों से बहुत प्यार है, उनके लिए काम करना आवश्यक समझती है. बाद में वह एक संस्था खोलना चाहती है.

टर्निंग पॉइंट 

स्वभाव से चुलबुली और हंसमुख हिमानी ने अपनी जर्नी के बारें में बात की और उन्होंने बताया कि ब्लिंक, थ्रिलर शोर्ट फिल्म रिलीज हो चुकी है और इससे मुझे बहुत अधिक पॉपुलैरिटी मिली है. ये मेरे लाइफ का टर्निंग पॉइंट रहा. इस वेब के बाद मेरा नाम देसी गोन गर्ल नाम पद गया है. इसमें मेरी भूमिका ‘गजल’ की है, जो पहले बहुत ही सहमी हुई सी लड़की है, लेकिन उनका ट्रांसफार्मेशन होकर एक बोल्ड और स्ट्रोंग लड़की बन जाती है. इस भूमिका में मुझे बहुत कुछ करने का मौका था और मुझे करने में भी बहुत मज़ा आया था. इस शोर्ट फिल्म ने मेरी लाइफ को एक ऊँची मुकाम पर बैठा दिया है. ये एक मल्टी लेयर्ड चरित्र है.

मिली प्रेरणा

एक्टिंग की प्रेरणा के बारें में पूछने पर वह कहती है कि एक्टिंग और डांसिंग मुझे हमेशा से पसंद रहा है. स्कूल और कॉलेज में मैंने एक्टिंग और डांस परफोर्मेंस बहुत किये है. परिवार से कोई एक्टिंग में नहीं था. कॉलेज ख़त्म करने के बाद मुझे अच्छी नौकरी मिल गई थी, लेकिन एक्टिंग करने की इच्छा मेरे मन में हमेशा रही. इसलिए मैंने जॉब के साथ भी थिएटर भी करती रही. इसके अलावा शोर्ट फिल्म और वीडियो बनाकर यू ट्यूब पर डालती थी, एक मेरी फिल्म एक्ट नार्मल थी, जिसे मैंने यू ट्यूब पर खुद शूट कर डाली थी. इसे मैंने अपनी फ्रेंड के साथ मिलकर जीरो बजट की फिल्म बनाई थी. उस फिल्म को एक महीने के अंदर एक लाख से अधिक व्यूअर्स मिले. पूरे विश्व के लोगों ने इसे देखा और मुझे फ़ोन कॉल्स भी आने लगे थे. हिंदी सिनेमा के काफी फिल्म मेकर्स ने इसे अच्छा कहा और ऑडिशन के लिए बुलाया और मैंने दिल की सुनी और जॉब छोड़कर मुंबई आ गयी. 6 महीने रही और अपना एक बेस बनाया और इंडस्ट्री को समझ पाई. मेरे सारे काम कोविड के दिनों में ऑनलाइन से शुरू हुई.

किये संघर्ष 

संघर्ष तो था, लेकिन दिल्ली से ही मैंने ऑडिशन देना शुरू किया था, लेकिन मुंबई की तरह दिल्ली में काम नहीं है. मुंबई आने पर मैंने बड़ी कंपनियों के विज्ञापनों में काम करना शुरू कर दिया था, इससे लोग मुझे जानने लगे थे. बड़ा ब्रेक मुझे ब्लिंक से ही मिला. दूसरी बड़ी ब्रेक नेटफ्लिक्स के लिए था. शुरू में तो मुंबई में सरवाईव करना बहुत मुश्किल था, क्योंकि तब लॉक डाउन का दौर चल रहा था. पहले घर लिया, फिर छोड़ देना पड़ा. नए शहर में टिक कर रहना बहुत मुशिकल था, लेकिन एक बड़ी पब्लिकेशन की वेब सीरीज के बाद मुझे बहुत काम मिलने लगा.

 

 

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मिला सहयोग परिवार का

मैं पहले कभी घर से अलग नहीं रही थी, मुंबई आकर अकेले रहना सबकुछ एरेंज करना कठिन था. इसके अलावा यहाँ किसी को जानती नहीं थी. मैं सब छोड़कर मुंबई आ गई थी. मेरे पेरेंट्स को शॉक लगा, क्योंकि कंपनी में प्रोमोशन हुआ अच्छी सैलरी थी, लेकिन मैंने उन्हें बता दिया था कि सफलता न मिलने पर मैं वापस दिल्ली आकर जॉब कर लुंगी और दो साल का समय माँगा. उन्हें पता था कि मैं किसी चीज को अगर ठान लूँ तो उसमे सफलता अवश्य हासिल कर सकती हूँ. मुंबई आने के बाद मुझे किसी प्रकार की गलत चीजों का सामना नहीं करना पड़ा. यहाँ का अनुभव मेरे लिए अच्छा है. मैंने यहाँ पर काम की एक सूची बना ली थी. मैंने 3 महीने की ट्रेनिंग दिल्ली में ली है और नाटकों में अभिनय भी दिल्ली और मुंबई में किया है. थिएटर मेरे लिए सबसे अधिक अच्छा रहा.

मिला सहयोग सोशल मीडिया का

हिमानी आगे कहती है कि मुंबई में आने के बाद मैंने देखा कि काम के लिए यहाँ व्हाट्स एप ग्रुप होते है, जहाँ से ऑडिशन का पता चलता है और उसी से लोग ऑडिशन पर बुलाते है. एक बार मुझे किसी ने ऑडिशन के बाद कोम्प्रोमाईज़ करने की बात कही, मुझे समझ में नहीं आया, (हंसती हुई)  कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कोम्प्रोमाईज़ का अर्थ बजट लो करना होता है. मैंने पूछा कि आपने तो कोई बजट मुझे बताया नहीं, इसपर उन्होंने मुझे समझने की बात कही. फिर एक फ्रेंड ने मुझे इसका अर्थ बताया, इसे सुनते ही मुझे बहुत गुस्सा आया. मैंने उसका चित्र और मेसेज का स्क्रीन शॉट लेकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, इससे लोग मुझसे डरने  लगे थे और ऐसी हरकत फिर नहीं हुई. पेरेंट्स भी डर गए थे, पर मैंने गलत चीज को कभी सहना नहीं सीखा है. इससे काम छूट जाता है, लेकिन मैंने कम काम सही, लेकिन डिसेंट लोगों के साथ ही काम करना चाहती हूँ.

नहीं सहज इंटिमेट सीन्स करने में  

हिमानी कहती है कि इंटिमेट सीन्स के बारें में सभी एक्ट्रेस की अलग-अलग सोच है, लेकिन मैं इसे करने में सहज नहीं और जिसमे मैं सहज नहीं होती, उसमे मेरा परफोर्मेंस अच्छा नहीं हो सकता. आजतक के मेरे सभी काम में इंटिमेट सीन्स नहीं थे, मैंने कई प्रोजेक्ट को मना भी किया है. दिल से जो अच्छा लगे उसे करना चाहती हूँ.

खुद की प्रतिभा को समझना जरुरी

हिमानी जानती है कि उनकी प्रतिभा क्या है और उसके अनुसार ही ऑडिशन देती है, वह कहती है कि मैंने टीवी शोज के लिए खुद को कभी सही नहीं पाई, क्योंकि ओटीटी के लिए ऑडिशन जब भी दिया, उसमे चुन ली जाती रही, लेकिन टीवी में नहीं चुनी गई, इसलिए मैंने अपना फोकस टीवी से हटा लिया है. असल में मेरी शक्ल थोड़ी अलग है, मेरे कर्ली हेयर और लुक ओटीटी के लिए परफेक्ट है.

प्यार और सम्मान जरुरी

वेलेंटाइन डे का जीवन में महत्व और प्यार के बारें में पूछने पर उनका कहना है कि इस वेलेंटाइन डे पर मेरे दो बछड़े की बर्थडे है, जो हरिद्वार में रहते है मैं उनके पास जाना चाहती हूँ. मेरे हिसाब से वेलेंटाइन डे केवल बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के लिए नहीं होता. अगर मैं किसी से प्यार करती हूँ तो उस दिन को उसके साथ मनाना भी मेरे लिए वेलेंटाइन डे को मनाना हुआ. इसके अलावा मेरे पेरेंट्स के साथ बिताना चाहती हूँ. मेरे सपनों का राजकुमार अभी सपने में है, लेकिन मैं रियल, सपोर्टिव और प्यार करने वाला पर्सन चाहती हूँ, बनावटी नहीं. एक दूसरे के बीच रेस्पेक्ट रहे, क्योंकि आजकल प्यार के नाम पर मारपीट और गालियां देते है, वैसा व्यक्ति मुझे कभी पसंद नहीं. रियल प्यार और सम्मान देने वाला व्यक्ति ही मुझे चाहिए.

चोरी का फल: भाग 1- क्या राकेश वक्त रहते समझ पाया?

शिखा पर पहली नजर पड़ते ही मेरे मन ने कहा, क्या शानदार व्यक्तित्व है. उस के सुंदर चेहरे पर आंखों का विशेष स्थान था. उस की बड़ीबड़ी आंखों में ऐसी चमक थी कि सामने वाले के दिल को छू ले.

वह एक दिन रविवार की सुबह मेरे छोटे भाई की पत्नी रेखा के साथ मेरे घर आई. शनिवार को शिखा हमारी बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू दे कर आई थी. रेखा के पिता उस के पिता के अच्छे दोस्त थे. मेरी सिफारिश पर उसे नौकरी जरूर मिल जाएगी, ऐसा आश्वासन दे कर रेखा उसे मेरे पास लाई थी.

‘‘सर, मुझे नौकरी की सख्त जरूरत है. आप मेरी सहायता कीजिए, प्लीज,’’ यों प्रार्थना करते हुए उस की आंखों में एकाएक आंसू छलक आए.

अब तक शिखा ने मेरे दिल में अपनी खास जगह बना ली थी. मेरे मन ने कहा कि मैं भविष्य में उस से संपर्क बनाए रखूं.

‘‘मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आप का काम हो जाए. इस कागज पर आप जरूरी ब्योरा लिख दें,’’ मैं ने पैड और पेन उसे पकड़ा दिया.

करीब 10 मिनट बाद शिखा रेखा के साथ चली गई, लेकिन इन कुछ मिनटों में उस ने मेरा दिल जीत लिया था.

शिखा को क्लर्क की नौकरी दिलाना मेरे लिए कठिन काम नहीें था. करीब 10 दिन बाद मैं उस की नियुक्ति की अच्छी खबर ले कर शाम को उस के घर पहुंच गया.

वहां मेरी मुलाकात उस के पति संजीव, सास निर्मला व 4 वर्षीय बेटे रोहित से हुई. शिखा की नियुक्ति की खबर सुन घर का माहौल खुशी से भर गया.

शिखा के घर की हर चीज इस बात की तरफ इशारा कर रही थी कि वे लोग आर्थिक रूप से संपन्न नहीं थे. संजीव बातूनी किस्म का इनसान था. उस की बातों से यह भी मालूम हो गया कि उस की स्टौक मार्किट में बहुत दिलचस्पी थी.

कुछ देर बाद संजीव मुंह मीठा कराने के लिए बाजार मिठाई लेने चला गया. मैं ने तब आग्रह कर के शिखा को अपने सामने बैठा लिया.

अपनी सास की मौजूदगी में वह ज्यादा नहीं बोल रही थी. उस से पूछे गए मेरे अधिकतर सवालों के जवाब उस की सास ने ही दिए.

बातोंबातों में मुझे इस परिवार के बारें में काफी जानकारी मिली. संजीव एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट था. उस की पगार अच्छी थी, फिर भी वे लोग भारी कर्जे से दबे हुए थे. शेयर मार्किट में संजीव ने बारबार घाटा उठाया, पर बहुत अमीर बनने की धुन के चलते इस लत ने अब तक उस का पीछा नहीं छोड़ा था.

‘‘सर, आप की कृपा से मुझे नौकरी मिली है और मैं आप का यह एहसान कभी नहीं भूलूंगी. अब दो वक्त की रोटी और रोहित की पढ़ाई का खर्च मैं अपने बलबूते पर उठा सकूंगी,’’ शिखा की बड़ीबड़ी आंखों में मुझे अपने लिए सम्मान के भाव साफ नजर आए.

‘‘शिखा, तुम्हें नौकरी दिलाने वाली बात अब खत्म हुई. इस के बाद तुम ने मुझे ‘धन्यवाद’ कहा तो मैं फौरन उठ कर चला जाऊंगा,’’ अपनी आवाज को मैं ने नाटकीय रूप से सख्त किया, पर मेरे होंठों पर मुसकराहट बनी रही.

‘‘अब नहीं दूंगी धन्यवाद, सर,’’ वह मुसकराई और फिर उठ कर रसोई की ओर चली गई.

कुछ देर बाद बडे़ अच्छे माहौल में हम सब ने चायनाश्ता किया. फिर मैं उन से विदा लेना चाहता था, पर ऐसा संभव नहीं हुआ क्योंकि बेहद अपनेपन के साथ आग्रह कर के शिखा ने मुझे रात का खाना खा कर जाने के लिए रोक लिया.

उस शाम के बाद से मेरा उस घर में जाना नियमित सा हो गया. कुछ दिनों बाद रोहित के जन्मदिन की पार्टी में मैं शामिल हुआ. फिर एक त्योहार आया और शिखा ने मुझे घर खाने के लिए आमंत्रित किया. मैं छुट्टी वाले दिन उन के यहां कुछ न कुछ खानेपीने की चीज ले कर पहुंच जाता. एक बार मेरी कार में सब पिकनिक मना आए. धीरेधीरे इस परिवार के साथ मेरे संबंध गहरे होते चले गए.

चाय पीने के लिए मैं फोन कर के शिखा को अपने कक्ष में बुला लेता. ऐसा अकसर लंच के समय में होता. उस के साथ बिताया हुआ वह आधा घंटा मेरी रगरग में चुस्तीफुर्ती भर जाता.

शिखा जैसी खूबसूरत और खुशमिजाज युवती के साथ सिर्फ मैत्रीपूर्ण संबंध रखना अब मेरे लिए दिन पर दिन कठिन होने लगा था. अगर मैं किसी कार्य में व्यस्त न होता तो वह मेरे खयालों में छाई रहती. हमारे संबंध दोस्ती की सीमा को लांघ कर कुछ और खास हो जाएं, यह इच्छा मेरे मन में लगातार गहराती जा रही थी.

एक दिन अपने कक्ष में चाय पीते हुए मैं ने शिखा से पूछा, ‘‘तुम्हें पता है शिखा, मैं किस दिन को अपने लिए भाग्यशाली मानता हूं.’’

‘‘आप बताओगे नहीं तो मुझे कैसे पता चलेगा,’’ उस ने जवाब सुनने के लिए अपना ध्यान मेरे चेहरे पर केंद्रित कर लिया.

‘‘जिस दिन तुम मेरे घर नौकरी पाने के सिलसिले में आई थीं,’’ मैं ने कहा.

‘‘मेरे लिए तो वह यकीनन महत्त्वपूर्ण दिन था,’’ शिखा बोली, ‘‘पर आप क्योें उसे अपने लिए भाग्यशाली मानते हैं?’’

‘‘वह दिन मेरे जीवन में न आया होता तो आज मैं तुम्हारे जैसी अच्छी दोस्त कैसे पाता.’’

मेरे स्वर की भावुकता को पहचान कर शिखा नजरें झुका कर फर्श को निहारने लगी.

‘‘तुम मेरी अच्छी दोस्त हो न, शिखा?’’ यह सवाल पूछते हुए अपने गले में मैं ने कुछ अटकता सा महसूस किया.

उस ने मेरी तरफ देख कर एक बार सिर हिला कर ‘हां’ कहा और फिर से नीचे फर्श देखने लगी.

‘‘दुनिया वाले कुछ न कुछ गलत हमारे संबंध में देरसवेर जरूर कहेंगे, पर उस कारण तुम मुझ से दूर तो नहीं हो जाओगी?’’ मैं ने व्याकुल भाव से पूछा.

‘‘जब हमारे दिलों में पाप नहीं है तो लोगों की बकवास को हम क्यों अहमियत देंगे?’’ शिखा ने मजबूत स्वर में मुझ से उलटा सवाल पूछा, ‘‘बिलकुल नहीं देंगे.’’

मैं ने अपना दायां हाथ बढ़ा कर उस के हाथ पर रखा और उस की आंखों में आंखेें डाल कर बोला, ‘‘तुम मुझे अपना समझ कर हमेशा अपने दुखदर्द मेरे साथ बांट सकती हो.’’

‘‘थैंक्स,’’ उस के होंठों पर उभरी छोटी सी मुसकान मुझे अच्छी लगी.

उस के हाथ पर मेरी पकड़ थोड़ी मजबूत थी. उस ने अपना हाथ आजाद करने का प्रयत्न किया, पर असफल रही. कुछ घबराए से अंदाज में उस ने मेरे चेहरे पर खोजपूर्ण दृष्टि डाली.

आगे पढ़ें- शिखा को मेरे प्रस्ताव में…

Valentine’s Special: एक रिश्ता किताब का- क्या सोमेश के लिए शुभ्रा का फैसला सही था

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5 टिप्स से बनाएं वेलेंटाइन डे को खास

वेलेंटाइन डे (Valentines day) मतलब प्यार करने बांटने वालों का दिन.. सब इसे अलग तरीके से मनाने की योजना बनाते हैं.. वैसे तो मार्केट तरह तरह के महंगे गिफ्ट से भरी हुई है.. मगर ये महंगे गिफ्ट तो केवल कुछ पल की खुशी देते हैं.. इस बार कुछ ऐसा खास करें जो आपके वेलेंटाइन को हमेशा याद रह जाए..

आज हम आपको बताएंगे कि आप कैसे Valentine’s Day को खास और यादगार बना सकते हैं

1. खास कार्ड बनाएं

अगर आप थोड़े से भी क्रिएटिव है तो आप handmade कार्ड बना सकते हैं. अगर आपके पास कोई आइडिया नहीं आ रहा है तो आप यूट्यूब की मदद ले सकती है जहां कार्ड बनाने की ढेरों वीडियो मौजूद हैं. वीडियो सुनकर आप उसमें लगने वाले सामान नोट करके ले आए और फिर अच्छे से वीडियो समझ कर कार्ड बनाए और उसमें कहीं किसी कोने में अपने वेलेंटाइन की फोटो लगाना न भूले.

2. कमरें को सजाएं

इस समय वॉल स्टीकर ट्रेंड में हैं.. आप भी अपने वेलेंटाइन के रूम के कलर के हिसाब से कलर्ड या प्लेन पेपर ले जाए.. पेपर पर हार्ट शेप, फ्लावर, butterfly आदि की डिजाइन बना ले और पतली नोक की कैची लेकर काट कर वॉल के हिसाब से स्टीकर बनाए.. अगर आप हाथ से डिजाइन नहीं बना सकती तो नेट से डिजाइन का प्रिंट आउट लेकर उसे पेपर पर ट्रेस भी कर सकती है.

3. हैंड मेड चीजें बनाएं

अगर आपके पास ढेर सारे आपके साथी की फोटो है तो वॉल हैंगिग भी बना सकती है. इसके लिए वुड की क्लिप खरीद ले और साथ में लाइट वाली लडि़या भी.. ये सभी मार्केट में आसानी से मिल जाएंगी. अब लाइट की लड़ी में क्लिप से फोटो हैंग करके इसे वॉल पर लगा सकते हैं. इसे double sided टेप से वॉल पर चिपका सकते हैं और बाद में चाहे तो फोटो वापस निकाल कर रख ले. फोटो के बीच बीच में handmade या artifical flowers भी लगा सकते हैं.

4. बनाएं मनपसंद खाना

अगर आप बेहतरीन कुक है तो अपने पार्टनर का मनपसंद खाना बनाकर candel light डिनर के लिए टेबल सजा कर surprise दे सकते हैं.

5. घूमने का करें प्लान

कहीं बाहर घूमने का भी प्लान कर सकते हैं जहां आप एक दूसरे की पसंद के गाने गुनगुना सकते हैं या अगर आप लिखते हैं तो अपने loved ones के लिए कोई खूबसूरत कविता लिख सकते हैं पिछले सुहाने पल को समेट कर. जिसे सुनाकर surprise दिया जा सकता है. एक दिन की आउटिंग आपको तरो ताजा कर देगी मगर खाने पीने से लेकर हर चीज़ की तैयारी करके ले जाए. ये आउटिंग में आप उन दोस्तों का ग्रुप भी बना सकते हैं जिन्हें वेलेंटाइन celebrate करना हो.

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