बस अब और नहीं: अनिरुद्ध के व्यवहार में बदलाव की क्या थी वजह

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यों दें न्यू बौर्न को ममता का कोमल स्पर्श

बच्चा अगर छोटा है और रो रहा है तो मां के लिए यह समझ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि उसे क्या चाहिए. ऐसे में परेशान होने के बजाय मां को खुद ही यह समझना होता है कि उसे किस समय किस चीज की जरूरत होती है. आप को ही इन सब बातों के लिए पहले से ही कौन्फिडैंट होना चाहिए ताकि बच्चे की परवरिश अच्छी तरह से हो सके. बच्चे को ले कर कैसे कौन्फिडैंट बनें, आइए जानते हैं:

नहलाना

कई मांए बच्चे को पहली बार नहलाने से डरती हैं लेकिन सावधानी बरती जाए और नहलाने का सही तरीका पता हो तो यह इतना भी मुश्किल नहीं है. आइए जानें कि कैसे नहलाएं बच्चे को:

  • बच्चे को टब में नहलाना सही रहता है, बस इस के लिए ध्यान दें कि टब बहुत गहरा न हो.
  • बच्चे को हमेशा कुनकुने पानी से ही नहलाएं. पानी को चैक करने के लिए अपनी कुहनी को पानी में डालें. अगर आप को पानी गरम नहीं लगता तो बच्चे को उस से नहला सकती हैं.
  • सब से पहले पानी के छींटे डालें. एकदम उस पर पानी न डाल धीरेधीरे डालें.
  • बच्चे को खासतौर पर बनाए गए बच्चों के प्रोडक्ट्स से ही नहलाएं. ध्यान रखें कि उन में पैराबेंस, एसएलएस व एसएलईएस जैसे तत्व न हों.
  • इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चे के कानों या नाक में पानी न जाए.
  • बच्चे के सिर पर पानी की सीधी धार कभी न डालें वरना इस से उसे चोट लग सकती है.
  • नहलाने के बाद बच्चे को टौवेल में लपेट कर लोशन लगाएं.

बच्चे का अत्यधिक रोना

कई बार छोटे बच्चे जब रोना शुरू करते हैं तो चुप होने का नाम ही नहीं लेते. ऐसे में कई मांएं परेशान हो जाती हैं. इधरउधर अपने रिश्तेदारों से पूछती हैं कि क्या करें बच्चा रो रहा है. बच्चा अगर 3 महीने से छोटा है, तो कई बार वह बेवजह भी रो सकता है. ऐसे में उसे गोद में ले कर घूमने से वह अच्छा महसूस करता है और चुप हो जाता है. लेकिन अगर वह चुप नहीं हो रहा तो उसे भूख लगना, डाइपर गंदा होना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए उस की इन परेशानियों को दूर करें.

कई बार बच्चा भूखा होने पर रोता है. बच्चा खाना खाने के कुछ देर बाद फिर से रोने लगता है, क्योंकि उस का पेट बहुत छोटा होता है. उसे थोड़ीथोड़ी देर में भूख लग जाती है, इसलिए उस के खानेपीने का खास ध्यान रखें.

इस के अलावा इन बातों पर भी गौर करें:

  • बच्चे का डाइपर भर जाता है तो वह गीला हो जाता है. इस से बच्चे की नींद खुल जाती है और वह रोना शुरू कर देता है. गीले डाइपर में बच्चे को बहुत बेचैनी होती है, इसलिए बीचबीच में उस का डाइपर चैक कर बदलती रहें. इसे बदलने के बाद बच्चा शांत हो जाएगा.
  • कई बार गंदे डाइपर की वजह से बच्चे की त्वचा में रैशेज हो जाते हैं, जिन में दर्द होता है और इचिंग भी हो सकती है. इसलिए इसे भी चैक कर लें कि कहीं बच्चा इस वजह से तो नहीं रो रहा. बच्चे का डाइपर चैंज करने के बाद उसे जिंकआक्साइड युक्त नैपी क्रीम अवश्य लगाएं.
  • बच्चे की उम्र 6 से 8 महीने है तो वह दांत आने की समस्या से भी परेशान हो सकता है, इसलिए यह भी देख लें.
  • कई बार बच्चा थक जाता है और उसे मां की गोद की तलब लगती है. वह इसलिए भी रोने लगता है, ऐसे में बच्चे को प्यार से गोद में ले कर उस का सिर सहलाएं. वह आराम महसूस करेगा और चुप हो जाएगा.

बच्चे का रातभर जगना

नवजात अकसर दिन में सोते हैं और रात को जागते हैं. कई बार वे दिन में जागने के बावजूद रात में सोते नहीं हैं. ऐसे में मातापिता को उन के साथ जागना पड़ता है, जो बहुत परेशानी की बात होती है. बच्चे को कोई परेशानी होती है तो भी वह सो नहीं पाता है जैसे कि अगर बच्चा भूखा है या फिर उसे किसी चीज की जरूरत है तो भी उसे नींद नहीं आती.

ऐसे में इन बातों पर ध्यान दें

बच्चे को रात में उठ कर कई बार दूध पिलाना होता है, क्योंकि वह थोड़ाथोड़ा दूध ही पीता है इसलिए बच्चे को दूध पिलाती रहें. ब्रैस्टपंप की सहायता से अपना दूध निकाल कर रख लें व समयसमय पर बच्चे को पिलाती रहें ताकि आप को भी आराम मिले और बच्चा भी भूखा न रहे.

  • अगर बच्चे को किसी खास टौय या फिर चादर को ले कर सोने की आदत है, तो जब तक उसे वह चीज नहीं मिल जाती है वह जागता रहेगा. इसलिए इस बात का भी खयाल रखें.
  • बच्चे को रोजाना एक ही समय पर सुलाएं, अपने हिसाब से उस के सोने के टाइम को इधरउधर न करें वरना उसे नींद नहीं आएगी.
  • फीवर, सर्दी, पेट दर्द जैसी कोई समस्या होने पर भी वह सो नहीं पाता है, इसलिए ये सब भी चैक कर लें.

खिलौने भी हों खास

बच्चे के जन्म के बाद न सिर्फ मातापिता के द्वारा बच्चे के लिए बहुत से खिलौने खरीदे जाते हैं, बल्कि रिश्तेदारों के द्वारा भी बच्चे को उपहारस्वरूप बहुत से खिलौने दिए जाते हैं. बच्चे का पूरा कमरा खिलौनों से भर जाता है, जिस में से कुछ अच्छी क्वालिटी के होते हैं तो कुछ बेकार. लेकिन मां को पता होता है या फिर पता होना चाहिए कि उस के बच्चे के लिए कौन सा खिलौना सही है.

  • बच्चे के पालने में लटकाने वाले रैटल जिस में रंगबिरंगे भालू, हाथी, छोटेछोटे घोड़े लटके होते हैं वह अच्छा रहता है. इसे देख कर बच्चा खुश होता है. इस से बच्चा अपनी आंखों के जरीए ध्यान केंद्रित करना भी सीखता है. समझदार मांएं अपने बच्चे को वही देती हैं.
  • कई खिलौनों में घंटी लगी होती है और वह प्लास्टिक की रिंग के बीच होती है जोकि काफी नर्म भी होती है. जब यह घंटी हवा से हिलती है, तो इस में से मधुर संगीत आता है, जिसे सुन कर रोता बच्चा चुप हो जाता है.

इन के अलावा भी बहुत से खिलौने बच्चों की उम्र के हिसाब से मिलते हैं, लेकिन इस बात का खयाल रखना चाहिए कि जो भी खिलौना लें वह सौफ्ट हो, उस के कोने न निकले हों, वह मुलायम कपड़े का बना हो जिसे बच्चा ऐंजौय करे.

  • जो भी खिलौना बच्चे को दें उस से पहले एक बार उसे खुद इस्तेमाल कर के देखें. अगर सही लगे तभी बच्चे को दें.

बच्चों का खाना उगलना: जन्म के 3 महीने बाद तक बच्चों की लार निकलती रहती है. खास कर जब उन्हें कुछ खिलाया जाता है, तो वे तुरंत उलटी कर देते हैं. लेकिन इस के बाद मांओं का काम बढ़ जाता है और वे परेशान होने लगती हैं कि शिशु की इस आदत को कैसे बदलें.

इस के लिए शिशु की नहीं, बल्कि खुद की कुछ आदतों को बदलें जैसे कि दूध पिलाने के बाद एकदम से जो माएं बच्चे के साथ खेलना शुरू कर देती हैं, उन्हें गोद में ले कर उछालती है उन के बच्चे दूध ज्यादा उगलते हैं इसलिए दूध पिलाने के बाद बच्चे को पहले कंधे से लगा कर डकार दिलवाएं ताकि उस का दूध हजम हो जाए और वह उसे उगले नहीं.

  • कई बार ठंडा दूध पिलाने से भी बच्चा ऐसा करता है, क्योंकि उसे वह अच्छा नहीं लगता है.

जब बच्चे को हो जाएं घमौरियां:

गरमी के मौसम में अकसर बच्चों को घमौरियां हो जाती हैं, लेकिन अगर थोड़ी सावधानी बरती जाए तो इन से बचा जा सकता है जैसे कि:

  • इस मौसम में बच्चे को हलके लूज और सौफ्ट कौटन के कपड़े पहनाएं. चुभने वाला कोई कपड़ा बच्चे को न पहनाएं.
  • बच्चे को हर तरह का टैलकम पाउडर न लगाएं. सिर्फ राइस स्टार्च युक्त बेबी पाउडर ही लगाएं ताकि उसे रैशेज और दानों से बचाया जा सके.
  • घमौरियों वाली जगह को दिन में 2-3 बार साफ पानी से धोएं या स्पंज करें.
  • बच्चे को ज्यादा खुशबू वाले साबुन से न नहलाएं या फिर तेल न लगाएं, क्योंकि इन में कैमिकल होता है, जो बच्चे की नाजुक त्वचा के लिए सही नहीं है.

मसाज करने में हों कौन्फिडैंट:

कौन्फिडैंट मांएं बिना डरे अपने नाजुक से बच्चे की मालिश बिलकुल सही तरीके से स्टैपबाईस्टैप करती हैं जैसे कि:

  • मालिश की शुरुआत पैरों से करें. इस के लिए अपने हाथों पर तेल मल बच्चे की जांघों को मलते हुए नीचे पैरों तक आएं.
  • बच्चे की एडि़यों की भी मालिश करें. पैरों के अंगूठे को चक्राकार घुमाएं.
  • बच्चे के हाथों, छाती और पीठ की मालिश करें.
  • अगर मालिश के दौरान बच्चा रोने लगे तो उसे गले से लगा कर चुप कराएं.
  • बच्चे की मालिश दूध पीने के बाद या सोते वक्त न करें.

– चाइल्ड स्पैशलिस्ट शालू जैन से शिखा जैन द्वारा की गई बातचीत पर आधारित.

Winter Special: ठंड में अगर हाथ-पैर सुन्न पड़ जाए तो अपनाएं ये 7 उपाय

सर्दियों में कभी-कभी हमारे हाथ-पैर और उनकी उंगलियां के सुन्न पड़ जाती है. जिससे हमें किसी भी चीज को छूने का एहसास मालूम नहीं पड़ता. इसके साथ ही हो सकता है कि आपको प्रभावित स्‍थान पर दर्द, कमजोरी या ऐठन भी महसूस होती हो. इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहना, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक शराब का सेवन, थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्‍नीशियम की कमी आदि. ऐसे में प्रभावित जगह पर झनझनाहट, दर्द, कमजोरी और ऐंठन के लक्षण दिखाई देते हैं.

इस समस्या का प्रमुख कारण रक्त वाहिनियों का संकुचित होना है. दरअसल सर्दियों में दिल पर काफी जोर पड़ता है जिससे रक्त वाहिनियां संकुचित हो जाती हैं और शरीर के विभिन्न अंगों में आक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है. रक्त संचार पर असर पड़ने की वजह से शरीर के विभिन्न अंग सुन्न पड़ जाते हैं.

वैसे तो सर्दियों में हाथ-पैर का सुन्न होना या उनमें झनझनाहट होना एक आम समस्या है पर अगर यह समस्या आपके शरीर के किसी अंग में लम्बे समय तक बनी रहती है तो यह एक गम्भीर बिमारी का रूप भी ले सकती है ऐसे में इसका उपचार करना बेहद जरूरी है.

तो आइये जानते हैं कि आप कैसे इस तरह की समस्या से निजात पा सकती हैं

1. मसाज करें

जब भी हाथ पैर सुन्‍न हो जाएं तो हल्के हाथों से उस पर मसाज करें. इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है. मसाज करने के लिए जैतून, नारियल या फिर सरसो के तेल को गुनगुना कर प्रभावित अंगो पर लगाकर हल्के हाथों से मले. इसके अलावा आप प्रभावित जगह पर रक्त संचार बढ़ाने के लिए गर्म पानी से भी सेंक सकती हैं. इससे मांसपेशियों और नसों को काफी आराम मिलता है.

2. डाइट में शामिल करें विटामिन्स

अगर हाथ पैरों में झनझनाहट होती है तो उसे दूर करने के लिए अपने आहार में विटामिन बी, बी6 और बी12 शामिल करें. इसके अलावा ओटमील,दूध, पनीर, दही, मेवा, केला, बींस आदि को भी अपने आहार का हिस्सा बनाएं.

3. व्‍यायाम

व्‍यायाम करने से शरीर में ब्‍लड र्स्‍कुलेशन होता है और वहां पर आक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है. इसलिए रोजाना 15 मिनट व्‍यायाम करना चाहिये. इसके अलावा रोजाना 15 मिनट एरोबिक्‍स करें, जिससे आप हमेशा स्‍वस्‍थ बनी रहें.

4. हल्दी है फायदेमंद

हल्दी में रक्त संचार बढ़ाने वाले तत्व पाए जाते हैं. साथ ही यह सूजन और दर्द कम करने में भी लाभकारी होता है. हल्दी-दूध का सेवन करने से हाथों-पैरों की झनझनाहट दूर होती है. इसके अलावा हल्दी और पानी के पेस्ट से प्रभावित जगह की मसाज करने से भी यह समस्या दूर होती है.

5. दालचीनी

दालचीनी में कैमिकल और न्‍यूट्रियंट्स होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्‍लड फ्लो को बढ़ाते हैं. एक्‍सपर्ट बताते हैं रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है. इसको लेने का अच्‍छा तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्‍मच दालचीनी पाउडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें या फिर 1 चम्‍मच दालचीनी और थोड़ा शहद मिला कर सुबह के समय कुछ दिनों तक सेवन करें.

6. धूम्रपान से रहें दूर

हाथ-पैर के सुन्न पड़ने की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप लंबे समय तक ठंड में रहने से बचें. अचानक अगर हाथ व पैर सुन्न हो जाते हैं तो तुरंत रगड़कर रक्त संचार बढ़ाएं. इसके अलावा धूम्रपान से दूरी बनाए रखें. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पेरिफेरल आर्टरी डिसीज होता है और पैरों में रक्त का संचार ठीक तरीके से नहीं हो पाता.

7. प्रभावित हिस्‍से को ऊपर उठाएं

हाथ और पैरों के खराब ब्‍लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है. इसलिये उस प्रभावित हिस्‍से को ऊपर की ओर उठाइये जिससे वह नार्मल हो सके. इससे सुन्‍न वाला हिस्‍सा ठीक हो जाएगा. आप अपने प्रभावित हिस्‍से को तकिये पर ऊंचा कर के भी लेट सकती हैं.

इन 4 टिप्स से मैरिड लाइफ में हमेशा बनी रहेगी ताजगी

शादी के कई साल बाद भी एकदूसरे की बातें, स्पर्श और शरारतें उत्साहित करती रहें और साथ गुजारे पल की खूबसूरत यादें व रोमांटिक पल बासी न होने पाएं, इस के लिए आप को इन्हें सहेजना होगा ताकि रिश्तों में मिठास बनी रहे.

आप की शादी के कुछ साल हो गए. अब आप दिन में कितनी बार एकदूसरे का हाथ थामते हैं? आंखों से कितनी बार एकदूसरे को मौन निमंत्रण देते हैं? कितनी बार एकदूसरे को गले लगाते हैं? अगर आप का जवाब नकारात्मक है, तो संभल जाएं क्योंकि यह आप के रिश्तों की मिठास को कड़वाहट में बदलने की शुरुआत है. वैसे घबराने की कोई बात नहीं है, क्योंकि रिश्तों की ताजगी कहीं जाती नहीं. बस, भीड़ भरे रास्तों पर गुम हो जाती है. इसे ढूंढ़ने के लिए यहां दी गई बातों पर अमल करेंगे, तो बदलाव खुद ब खुद महसूस करेंगे.

1. करें कुछ नया

कहा जाता है कि प्यार एक एहसास है, लेकिन सच तो यह है कि शादी के बाद प्यार सिर्फ एक एहसास नहीं होता. बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में जिन बातों को अपनाने से हमारे जीवनसाथी को खुशी, संतुष्टि, नयापन मिलता हो, वही प्यार है. पति को गिफ्ट देना, मदद करना, लैटर लिखना आम बातें हैं. अब यह परिपाटी बहुत पुरानी हो चुकी है.

आप कुछ ऐसा अलग हट कर करें, जिस में नयापन हो. जैसे, विशेष अवसरों पर अपने पति को गिफ्ट तो सभी देते हैं, लेकिन शौपिंग कांपलैक्स में जब आप उन की पसंद की चीज उन्हें रोमांटिक अंदाज में देंगी, तो उपहार का मजा दोगुना हो जाएगा.

2. बीती बातों को याद करें

रोजरोज की जाने वाली एक जैसी बातों से अकसर बोरियत होने लगती है. ऐसे में कुछ अलग हट कर करें. जैसे, अगर आप की लव मैरिज है तो पति से सवाल करें कि अगर घर वाले आसानी से शादी के लिए न माने होते, तो? अगर हमारी शादी न हुई होती, तब तुम क्या करते? क्या तुम मेरे बिना रह पाते? ऐसे सवाल करने पर वे सोच में पड़ जाएंगे, पर बातों के जवाब अच्छे मिलेंगे, जो आप की बातचीत को एक नयापन देंगे. इसी तरह दोनों एकदूसरे को अपने कुछ अच्छे पलों को याद दिलाएं. यदि आप दोनों कामकाजी हैं, तो दफ्तर में फुरसत पाते ही मौका ढूंढ़ कर एकदूसरे को फोन करें. वह भी उसी शिद्दत के साथ, जैसे शादी के शुरुआती दिनों में आप किया करते थे.

हमेशा की तरह फाइव स्टार होटल में कैंडल लाइट डिनर करने के बजाय किसी छोटे से पुराने रेस्तरां में सरप्राइज डिनर पर जाएं, जहां आप शादी से पहले भी जाया करते थे. आप दोनों कालेज के उन पुराने दोस्तों को बुला कर, जिन्होंने आप का हर पल साथ दिया हो, छोटी सी पार्टी दें. ऐसा करने से आप की पुरानी यादें ताजा होंगी. कभीकभी पति के लिए भी तैयार हो जाएं. यकीन मानिए, वे खुश हो जाएंगे आप का यह रूप देख कर.

3. छेड़छाड़ का सहारा लें

इस के साथ ही आप छोटीमोटी चुहलबाजी और छेड़खानी करना शुरू कर दें. पति से फ्लर्ट करने पर जो मजा आएगा, वह कभी कालेज में लड़कों को छेड़ने पर भी नहीं आया होगा. पति को कोई अजनबी लड़का समझ छेड़ें और परेशान करें. कभी उन के औफिस बैग में बेनाम लव लैटर और कार्ड रख दें, तो कभी एक दिन में कई बार उन के फोन पर अननोन नंबर से मिस्ड कौल दें. फिर देखिएगा, यह पता लगते ही कि यह शरारत करने वाली आप थीं, वे कैसे आप से मिलने के लिए बेचैन हो उठते हैं.

4. सजना के लिए सजना

पार्टी या शादी में जाने के लिए तो सभी सजते हैं, लेकिन क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप अपने पति के लिए तैयार हुई हों. इसे बेकार की झंझट मत समझिए. जब आप बिना किसी मौके के उन के मनपसंद रंग में सज कर उन के पास जाएंगी, जो सिर्फ उन के लिए होगा, तो यकीनन उन की नजरें आप पर से हटेंगी नहीं.

इन्हें नजरअंदाज न करें

– वे जोड़े ज्यादा खुश रहते हैं, जो शाम को अपनी शिकायतों का पिटारा नहीं खोलते. शिकायत करने पर पतिपत्नी एकदूसरे से बचने के बहाने ढूंढ़ने लगते हैं.
– वे पतिपत्नी ज्यादा खुश रहते हैं जिन का कम से कम एक शौक आपस में मिलता हो. ऐसी रुचियां उन्हें आपस में बांधे रखती हैं तथा रिश्तों में प्रगाढ़ता लाती हैं.
– कुछ शब्दों को बारबार कहना और सुनना अच्छा लगता है. जैसे, ‘आई लव यू’, ‘आई एम औलवेज विद यू’ आदि. इस से पार्टनर को एहसास होता है कि आप कितने लविंग और केयरिंग हैं.
– कुछ शारीरिक स्पर्श ऐसे होते हैं, जो पार्टनर को आप की भावना समझने में मदद करते हैं. जैसे, जातेजाते कंधा टकराते जाना, पार्टनर का हाथ दबाना या छू लेना और खाना खाते समय टेबल के नीचे से पैरों का स्पर्श या हाथ पकड़ लेना.

Winter Special: फैमिली के लिए बनाएं स्प्रिंग रोल

वीकेंड पर अगर आप अपनी फैमिली के लिए स्नैक्स में कुछ परोसना चाहते हैं तो स्प्रिंग रोल में ये रेसिपी ट्राय करना ना भूलें.

सामग्री

11/2 कटोरी बेसन

1 छोटा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट

1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च

1/2 छोटा चम्मच अजवाइन

1/2 छोटा चम्मच चाटमसाला

3-4 अरवी के पत्ते द्य तलने के लिए तेल

नमक स्वादानुसार.

भरावन के लिए

1/2 कप उबले सफेद चने

1/4 कप उबले मटर

1/4 कप कसी गाजर

1 प्याज बारीक कटा

1/2 छोटा चम्मच नमक

1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च

1 बड़ा चम्मच इमली का रस.

विधि-

भरावन की सारी सामग्री को मिलाएं व हाथ से मसल कर दरदरा कर लें. अरवी के पत्तों को धो लें. उन के डंठल और मोटी नस निकाल कर उन्हें रूमाल जैसा काट लें. अब प्रत्येक पत्ते में बेसन के पतले घोल की एक परत लगाएं, ऊपर भरावन सामग्री रखें तथा पोटली की तरह बंद कर के टूथपिक लगा दें. फिर इन्हें कुछ देर स्टीम कर लें.बचे बेसन में तेल को छोड़ कर बाकी सारी सामग्री मिलाएं व पकौड़े के घोल जैसा बना लें. एक कड़ाही में तेल गरम करें तथा प्रत्येक पोटली को बेसन में डुबो कर तल लें. गरमगरम परोसें

कौल सैंटर: विवाहित महिलाओं का बढ़ता दबदबा

कौल सैंटर का जिक्र आते ही जेहन में कौंध जाते हैं हैडफोन लगाए, धाराप्रवाह अंगरेजी बोलते, खास शैली व अंदाज में ग्राहकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए, उन्हें उत्पाद की खूबियों का यकीन दिलाने में माहिर युवा लड़केलड़कियों के चेहरे.

कौल सैंटर को ले कर हमेशा मन में एक ही धारणा व्याप्त रहती है कि कालेज से निकले छात्रों को पैसा कमाने के लिए पार्टटाइम नौकरी करने की चाह यहां खींच लाती है. कौल सैंटरों में मिलने वाली सुविधाएं व पैसा दोनों उन्हें चकाचौंध करते हैं. यही वजह है कि नियमित काम के घंटे न होने पर भी युवाओं की एक बड़ी जमात को वहां काम करते देखा जा सकता है.

मगर अब कौल सैंटर का स्वरूप बदलने लगा है. किसी भी कौल सैंटर में अब आसानी से विवाहित महिलाओं को भी कंप्यूटर के आगे कान पर हैडफोन लगाए ग्राहकों से बातचीत करते देखा जा सकता है. विवाहित महिलाओं द्वारा कौल सैंटर में काम कराने का ट्रैंड मार्च, 2004 से शुरू हुआ था.

हालांकि पहले भी विवाहित महिलाएं काम कर रही थीं पर उन की तादाद ज्यादा नहीं थी. गृहिणियों को ले कर इस तरह का प्रयोग पहली बार विप्रो कंपनी ने किया. इस क्षेत्र में महिलाओं का दखल अभी सिर्फ 5 फीसदी तक ही है, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि इस में अप्रत्याशित वृद्धि होने की संभावना है.

एक अनोखा प्रयोग

अभी तक कौल सैंटर में कार्य करने वालों की उम्र 18 से 25 साल के बीच निर्धारित होती थी. विकसित उम्र के इस दौर में काम सीखने के बाद कंपनी बदलने का औसत इन के बीच पिछले वर्ष तक 33 फीसदी तय था. इस साल यह बढ़ कर 40 फीसदी पहुंच गया है. एक से दूसरी कंपनी में पलायन के बढ़ते इस औसत पर लगाम लगाने के लिए अब विवाहित महिलाओं को हैडफोन पहनाया जा रहा है खासकर 5 आईटी कंपनियों- विप्रो, आईगेट, सौफ्टवेयर पार्क, जी कैपिटल, और ई फंड्स ने एक और नया प्रयोग इस में किया है कि वे उन महिलाओं को अधिक प्रमुखता देंगे जिन के बच्चे स्कूल जाने लायक हों तथा उन का संयुक्त परिवार हो.

उत्पादन के तौर पर कौग्निजैंट कंपनी विवाहित महिलाओं को जो दिन या रात में कभी भी अपना समय दे सकती हैं नौकरी दे रही है जिस में बोलना आना ज्यादा जरूरी है. 12 से 15 हजार की सैलरी का वादा किया जा रहा है जो बाद में कार्यकुशलता को देख कर बढ़ाया जा सकता है.

विप्रो स्थित कौल सैंटर में कार्यरत केरल की 29 वर्षीय शशिकला कंपनी के इस नए रवैए से काफी खुश है क्योंकि शादी के बाद उसे एक अच्छी नौकरी मिली है. उस की एक 4 साल की बेटी है. वह कहती है कि कंपनियों द्वारा विवाहिताओं को नौकरी देने के चलन में 30 से 40 वर्ष के बीच की महिलाओं में कैरियर बनाने की आस दोबारा जगाई है. बेशक मेरे साथ मेरे सासससुर नहीं करते हैं, लेकिन कंपनी ने मु  झे सुविधानुसार जौब टाइमिंग दिया हुआ है. विवाह के बाद नौकरी करने का यह अद्भुत अनुभव है.

अद्भुत क्षमता

विवाहित महिलाओं की उम्र 27 से 40 वर्ष तय की गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस उम्र की कामकाजी विवाहित महिलाओं में इस रखाव की अद्भुत क्षमता होती है. वे हर काम जिम्मेदारी से निभाने में सक्षम होती हैं जबकि इस के विपरीत फ्रैशर्स में चाहत की लालसा अधिक होती है, इसलिए टिकते नहीं हैं. उन में अनुभव की कमी तो होती ही है, साथ ही काम के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी काम होती है. अधिक पैसा मिलते ही वे दूसरी कंपनियों में चले जाते हैं जिन में अधिक नुकसान के साथसाथ प्रशिक्षण के लिए कंपनियों को रोज नए कर्मियों को ढूंढ़ना पड़ता है.

काम के प्रति ज्यादा समर्पित

नोएडा स्थित एक कंपनी से कौल सैंटर में टीम लीडर के रूम में कार्यरत पुष्पांजलि का कहना है कि मैं 3 साल से इस कौल सैंटर में काम कर रही हूं. मु  झे कभी यहां काम करना इसलिए मुश्किल नहीं लगा क्योंकि मैं विवाहित हूं. पहले मैं यूएस शिफ्ट में काम करती थी जो रात की थी पर अब यूके शिफ्ट में हूं जो दिन के ढाई बजे से रात साढ़े बारह तक होती है. आराम से परिवार भी संभाल लेती हूं.

मु  झे लगता है कि युवाओं की अपेक्षा परिपक्व औरतें काम के प्रति ज्यादा समर्पित होती हैं क्योंकि वे एक जगह टिक कर काम करती हैं और प्रलोभन उन्हें लुभाते नहीं हैं. इतवार के अलावा सप्ताह में एक दिन और छुट्टी मिलती है, इसलिए परिवार में तालमेल बैठाने में भी कोई दिक्कत नहीं आती है.

मेरे पति बिजनैसमैन हैं और मु  झे पूरा सहयोग देते हैं. रात की शिफ्ट में काम करने वाला औरतों को ले कर जो नजरिया है, वह बदल रहा है. गंदगी फैलाने वाले हर जगह होते हैं.

इस से हर औरत खराब नहीं हो जाती.

यहां अच्छा वेतन है, ड्रौप और पिक की सुविधा है, खाना मिलता है और इस के अलावा अन्य इंसैटिव भी मिलते हैं. मु  झे लगता है कि कौल सैंटर में काम कर के कैरियर बनाने के

विवाहित महिलाओं के संभावनाओं के नए

द्वार खुल गए हैं.

भारत में आज विदेशी कंपनियां कौल सैंटर खोल रही हैं. इस के पीछे मुख्य वजह बेरोजगारी और वहां के हिसाब से कम वेतन में लोग मिल जाते हैं. विवाहित महिलाओं के लिए जिस उन्मुकता के साथ कौल सैंटरों ने दरवाजे खोले हैं, वे सराहनीय कदम तो है ही, साथ ही इस से काम में भी वृद्धि होगी.

कौल सैंटर में जरूरत होती है ऐसे लोगों की जिनकी आवाज तो अच्छी हो, लेकिन इस के साथ ही वे ग्राहकों के साथ संवाद स्थापित करने में भी कुशल हों, धाराप्रवाह और स्पष्ट अंगरेजी, सही दृष्टिकोण व सीखने की अद्भुत क्षमता का समन्वय भी आवश्यक होता है. यह कैरियर जो अब तक युवाओं के लिए सीमित था, गृहिणियों के लिए भी खुल गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि फ्लैक्सी टाइम होने की वजह से विवाहित महिलाएं अब कौल सैंटरों में काम करना पसंद करने लगी हैं.

अचानक कौल सैंटरों में गृहिणियों की

वृद्धि हुई है क्योंकि अब परिवार ज्यादा सुल  झे व खुले विचारों के हो गए हैं और रात को काम करना भी टैबू नहीं रहा है. अच्छा वेतन तथा पिक ऐंड ड्रौप की सुविधा ने काम करना आसान बना दिया है.

समस्याओं को सुलझाने की क्षमता

कौल सैंटर कंपनियां अब ऐसी औरतों को प्राथमिकता दे रही हैं जो परिपक्व व निष्ठावान हों, विवाहित महिलाएं परिपक्व होती हैं और

उन्हें निरंतर पारिवारिक दबावों से गुजरते रहना होता है. इस वजह से उन में घंटों के साथ समस्याओं को सुल  झाने की क्षमता अविवाहिताओं से बेहतर होती है.

कई लोगों का मानना है कि कौल सैंटर की नौकरी बहुत ही उबाऊ और बोरियत भरी होती है और इस में विकास के विकल्प कम होते हैं पर यह बात अब गलत साबित हो चुकी है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण नौकरी होती है.

5-10 वर्ष पहले कौल सैंटर उद्योग बिलकुल शिशु अवस्था में था. कालेज से निकले फ्रैशर इस की ओर आकर्षित होते थे. पढ़ने के साथसाथ वे अपना कैरियर बनाने को भी इच्छुक रहते थे, पर चूंकि वह उन की शुरुआत होती थी इसलिए उस के प्रति गंभीर नहीं रहते थे. इस से कंपनियों को उन के चले जाने से फिर नए सिरे से नए लोगों को प्रशिक्षण देना पड़ता था.

विश्वास व दूरदृष्टि

हालांकि काबिलीयत इस बात पर निर्भर नहीं करती कि महिला विवाहित है या अविवाहित पर यह जरूर है कि विवाहित महिलाएं एक जगह टिक कर काम करना पसंद करती हैं. ज्यादातर युवा औफिस के माहौल में कालेज का वातावरण उत्पन्न करने की कोशिश करते हैं, पर विवाहित महिलाएं निष्ठा, विश्वास व एक दूरदृष्टि रखते हुए काम करती हैं.

उन के लिए नौकरी पार्टटाइम नहीं होती वरन घर चलाने के लिए जरूरत होती है. एक सही कैरियर के साथ वे इस का चुनाव करती हैं. अनुभवी होने के कारण काम के दबाव को आसानी से बरदाश्त कर लेती हैं.

घर में चकलाबेलन चलाने वाले हाथ, अब दिनरात तेजी से कंप्यूटर पर ऊंगलियां चलाते हैं. पति, सासससुर व बच्चों की शिकायतें और मांगें सुनने वाले कान अब हैडफोन लगा ग्राहकों के अंदर उत्पाद के प्रति विश्वसनीयता पैदा करते हैं. नतीजा उत्पाद की बेहतर बिक्री के रूप में सामने आता है. गृहिणियां विदेशी बाजार की मार्केटिंग क्षमता का विस्तार करने में जुट गई हैं. वे जानती हैं कि उन के पास अपार क्षमता है और विभिन्न आईटी कंपनियों ने उन की क्षमताओं को पहचान भी लिया है.

वर्क फ्रौम होम और नई मोबाइल टैक्नोलौजी के कारण अब डिस्टैंड कौल सैंटर भी चल सकते हैं जिन में घरेलू महिलाएं घर बैठे कंप्यूटर और फोन की सहायता से काम कर रही हैं. कोविड-19 का एक लाभ यह हुआ है कि लोगों को अब फेस टू फेस काम कराने की आदत कम होने लगी है और वे घर बैठे काम करना चाहते हैं. जूम मीटिंगों की तरह दसियों तरह के प्लेटफौर्म इन औरतों को ट्रेन भी कर सकते हैं.

TV एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी का 46 साल की उम्र में निधन, वर्कआउट के दौरान आया हार्ट अटैक

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से आए दिन बुरी खबरें सामने आ रही हैं. जहां बीते दिनों भाभी जी घर पर हैं एक्टर का अचानक निधन हो गया था तो वहीं अब एक और पौपुलर टीवी एक्टर का कम उम्र में निधन हो गया है. दरअसल, खबरे हैं कि एक्टर सिद्धांत वीर सूर्यवंशी (Siddhaanth Vir Surryavanshi Died) का अचानक निधन हो गया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

जिम में आया हार्ट अटैक

खबरों की मानें तो कसौटी जिंदगी फेम एक्टर सिद्धांत (Siddhaanth Vir Surryavanshi Passed Away) का जिम में वर्कआउट के दौरान निधन हो गया है. बताया जा रहा है कि 46 साल के एक्टर को हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था. हालांकि डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उनका इलाज करने की कोशिश की. लेकिन आखिर में उन्हें बचा नहीं सके. खबर मिलने के बाद से फैंस हैरान हैं और सोशलमीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

इन सीरियल्स में कर चुके हैं काम

सिद्धांत ने हाल ही में अपना नाम बदला था. लेकिन वह कई हिट टीवी सीरियल्स में काम करके घर-घर में अपनी पहचान बना चुके हैं. ‘सूफियाना इश्क मेरा’ कसौटी जिंदगी के जैसे शोज में काम कर चुके एक्टर सिद्धांत को आखिरी बार ‘क्यू रिश्तों में कट्टी बत्ती’ में देखा गया था. हालांकि वह सीरियल में नजर आने के अलावा सोशलमीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते थे, जिसके चलते फैंस काफी हैरान हैं.

एक्ट्रेस सारिका के लिए क्या तकलीफदायक है? पढ़ें इंटरव्यू 

सारिका अपने समय की सबसे तरक्कीपसंद अभिनेत्रियों में रही हैं. उन्होंने कमल हासन के साथ करीब 16 साल बिताए. दोनों ने पहली बेटी श्रुति के जन्म के बाद साल 1988 में विवाह किया और उनकी दूसरी बेटी अक्षरा का जन्म वर्ष 1991 में हुआ, लेकिन 2004 में सारिका ने कमल हासन से अलग हो जाने का फैसला किया.

सारिका का बचपन कई समस्याओं से घिरा हुआ था, जब वह बहुत छोटी थी, तब उसके पिता ने परिवार छोड़ दिया था और इसलिए वह स्कूल नहीं जा पा रही थी, उसे परिवार का मुखिया और पैसा कमाने वाला सदस्य बनना था. यही वजह थी कि उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 4 साल की उम्र में एक बाल एक्ट्रेस के रूप में की थी.बाद में, उन्होंने राजश्री प्रोडक्शंस के साथ और प्रसिद्ध अभिनेता सचिन के साथ कई हिंदी और मराठी फिल्मों में अभिनय किया.जब वह करियर की ऊंचाई पर थी, तब उन्होंने शादी के बाद अभिनय करियर को छोड़कर अपने पति के साथ चेन्नई चली गईं

वर्ष 2000 में, उन्होंने फिल्म ‘हे राम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ ड्रेस डिजाइन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्म परजानिया में उनके प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्ट्रेस का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता. सारिका की खूबसूरती और अभिनय ने हर निर्माता निर्देशक को उनका पसंदीदा बनाया था.

इतनी सफल एक्ट्रेस के निजी जीवन में कई उतार-चढ़ाव आये, लेकिन उन्होंने इसे हिम्मत  से सामना किया. कोविड और कुछ अच्छी प्रोजेक्ट हाथ न लग पाने की वजह से उन्हें कई साल तक इंतज़ार करना पड़ा, लॉकडाउन के समय उनके पास पैसे की तंगी होने की वजह से उन्होंने थिएटर में काम किया और अपना घर चलाया, वह एक खुद्दार और हंसमुख स्वभाव की है. अब उनकी फिल्म ‘ऊंचाई’ रिलीज पर है, जिसे राजश्री प्रोडक्शन ने बनाया है. ये फिल्म अत्यंत भावुक और एक गहरी दोस्ती को बयान करती है. एक बार फिर से राजश्री के साथ जुड़ना उनके लिये अच्छी बात है, उन्होंने गृहशोभा के लिए खास बात की, आइये जाने उनकी कहानी उनकी जुबानी.

जुड़ना होता है आसान

राजश्री प्रोडक्शन के साथ सालों बाद फिर से जुड़ना सारिका के लिए एक अच्छी बात रही, वह कहती है कि पहले जब मैं काम करती थी, तो हर प्रोडक्शन हाउस के साथ एक जुड़ाव रहता था,लेकिन राजश्री से जुड़ना एक अलग अनुभव रहा. निर्देशक सूरज बडजात्या का निर्देशन और एक अच्छी कहानी में भाग लेना मेरे लिए सबसे ख़ुशी की बात है. इसमें मैं माला त्रिवेदी, जो एक स्वतंत्र महिला की भूमिका निभा रही हूं, जो परिवार के साथ व्यवसाय करती है और एक खास पल में दोस्तों से जुडती है.

सही कहानी सही इमोशन

इतनी ऊंचाई पर जाकर इतनी ठण्ड में शूट करना सारिका के लिए आसान नहीं था. फिल्म की शूटिंग नेपाल में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर शूट की गई है, जिसे करने में बहुत मजा आया. वह कहती है कि एक महीने का शिड्यूल था, जिसमे ऊपर-नीचे चलना, चलते-चलते काम करना, करीब 300 लोगों की यूनिट के साथ शारीरिक रूप से बहुत कठिन था, लेकिन दिल में ऐसा नहीं लगा कि जल्दी ख़त्म हो और घर जाएँ. ऐसी फीलिंग यहाँ नहीं आने की वजह मजे हुए कलाकार के साथ काम करना है, बदन थक जाता था, लेकिन इमोशन में कभी कमी नहीं आई.

नया काम नई चुनौती

सारिका आगे कहती है कि इतने सालों तक काम करने के बाद भी मुझे हमेशा नया कुछ करने की इच्छा रहती है. मैंने पहले जो काम किया है वो अब भूलकर हमेशा नया करने की इच्छा होती है. पुरानी चीजों को याद मैं कभी नहीं करना चाहती, क्योंकि इससे आप नए जेनरेशन के साथ जुड़ नहीं पाते, इसके लिए मुझे काम करते रहना है ताकि आज के नए बच्चे जाने, एक्ट्रेस सारिका भी एक अदाकारा है जो अच्छा अभिनय करती है और वही मेरी उपलब्धि है.

आजादी फिल्म मेकिंग में

इंडस्ट्री की परिवर्तन के बारें में एक्ट्रेस सारिका का कहना है कि परिवर्तन को देखे तो आज कहानी कहने का ढंग बहुत बदल गया है, अभी फिल्म मेकिंग में एक फ्रीडम आ गयी है, जो पहले नहीं था,स्ट्रक्चर में बदलाव आ गया है. फिल्म से लेकर वेबसीरीज, टीवी शो सभी में एक आज़ादी होने की वजह वर्ल्ड सिनेमा का एक्स्पोजर बहुत अधिक हो गया है. पहले कुछ निर्देशक बाहर जाकर विदेशी फिल्में फेस्टिवल में देखते थे, अब वो बात नहीं रही. वर्ल्ड सिनेमा से अब सभी परिचित है. फिल्ममेकर आज लगातार कोशिश कर रहे है कि अच्छी से अच्छी फिल्मे दर्शकों को दी जाय. समाज भी बहुत बदल चुका है. उसकी रिफ्लेक्शन भी फिल्मों में आती है. हालाँकि फिल्मे काल्पनिक होती है, लेकिन वह भी आसपास की सच्चाई से ही ली जाती है. उसकी क्रिएशन भी इन्ही के आधार पर की जाती है. इसके अलावा तकनीक का भी प्रयोग आज बहुत होने लगा है. क्रिएटिविटी बहुत बढ़ी है, सभी को एक ओपनिंग मिल गई है. सभी को अपनी हुनर दिखाने का चांस मिल रहा है. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ये सबसे बेहतर समय है.

प्रतिभावान कलाकार को मिला मौका

पुराने और लीजेंड एक्टर अभी पहले से अधिक अच्छा काम कर पा रहे है, क्योंकि ओटीटी ने इन्हें कुछ अलग करने या जो भूमिका वे आज तक नहीं निभा पाए थे, उन्हें निभाने का मौका मिला है. पुराने दिनों को याद करती हुई सारिका कहती है कि शुरू में जब कलर टीवी आई थी, तब सभी दर्शकों को कुछ अच्छा देखने की इच्छा था, जिसमे गोविन्द निहलानी की तमस, सत्यजित रे की फिल्म आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और टीवी किसी दूसरी दिशा में चला गया. ओटीटी आने के बाद बॉक्स ऑफिस कलेक्शन या थिएटर भरने का प्रेशर निर्माता,निर्देशक पर नहीं था. ऐसे में निर्माता, निर्देशक ने उन्ही कलाकारों को कास्ट किया, जो सही थे, दिल से काम निकला और बहुत सारें ऐसे कलाकार की कला बाहर निकली, जिन्हें कोई नहीं जानता था. अब सिनेमा की क्वालिटी में किसी भी प्रकार का कोई फर्क नहीं दिखता.

नए कलाकारों के साथ काम करना हुआ आसान

नए कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव के बारें में पूछने परसारिका हंसती हुई कहती है कि नये कलाकार के साथ काम करना अच्छा होता है, क्योंकि नई चीजें सीखने के साथ- साथ उनका रेस्पेक्ट बहुत मिलता है, क्योंकि कई बार पुराने कलाकारों के साथ काम करना तकलीफदायक होता है. असल में सच्चे आर्टिस्ट के साथ काम करना चाहिए, वो मुझे अच्छा लगता है, सामने अगर आर्टिस्ट काम कर रहा हो, तो काम का नशा ही कुछ और होता है. मेरी ट्रेकअमिताभ बच्चन, अनुपम खेर और बोमन ईरानी के साथ है, मुझे बहुत मजा आया. मुझे हमेशा अपने को स्टार के साथ इंटरेक्ट करने में बहुत अच्छा लगता है. सीन ठक-ठककर एक के बाद एक आती रहती है, ऐसी अभिनय मुझे बहुत पसंद है. ये तीनों बहुत ही मजेदार है.

फिटनेस मंत्र

खूबसूरत सारिका की डेली रूटीन में दो अच्छे लोगों से मुलाकात करना चाहती है, जिससे उनका मन खुश रहे. खान-पान पर खास ध्यान रखने के अलावा नियमित फिटनेस रिजीम का पालन करती है. बच्चों की अच्छी परवरिश के बारें में सारिका बताती  है कि बच्चे जब छोटे होते है, उन्हें उनके संस्कारों और सीख दिया जाता है, लेकिन जब वे बड़े होते है, तो उनकी अपनी शख्सियत निकलने लगती है. ये हर व्यक्ति की अलग होती है और ये हमारे जैसा होनी भी नहीं चाहिए. अगर आज मेरी दोनों बेटियां, श्रुति हसन और अक्षरा हसन अच्छा काम कर रही है, तो उनका क्रेडिट है. मेहनत करती है, स्ट्रोंग है. आगे भी वे अच्छा करें यही मैं चाहती हूं.

बेटी पाखी को धक्के मारकर घर से निकालेगी Anupama, देखें वीडियो

सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) की कहानी दिलचस्प मोड़ लेती नजर आ रही है. वहीं मेकर्स भी सीरियल में नए-नए ट्विस्ट लाने के लिए तैयार हैं. इसी बीच अनुपमा के रोल में नजर आने वाली एक्ट्रेस रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) ने शो से जुड़ा एक नया प्रोमो (Anupama New Promo) रिलीज कर दिया है, जिसमें वह पाखी को थप्पड़ मारती हुई नजर आ रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं शो के अपकमिंग प्रोमो की झलक…

पाखी को पड़ा जोरदार तमाचा

 

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हाल ही में लीड एक्ट्रेस रुपाली गांगुली द्वारा रिलीज किए गए प्रोमो में ‘अनुपमा’ (Anupama) भरी महफिल में पाखी को घर से निकालती दिख रही है. दरअसल, प्रोमो में पाखी के संगीत सेरेमनी में हर कोई डांस करता हुआ दिख रहा है. इस बीच मेहमान और परिवार के सामने अनुपमा जोर से पाखी का नाम चिल्लाती है और उसे जोरदार तमाचा जड़ देती है. वहीं अनुपमा तमाचा मारने के बाद वह कहती है कि “तूने किसी रिश्ते का मोल नहीं रखा तो आज से कोई रिश्ता तेरा मोल नहीं रखेगा.” लेकिन पाखी कहती दिखती है कि आज मेरा संगीत था, पर अनुपमा जवाब देती हुई कहती है, “था, तू अब इस घर में नहीं रहेगी और ये अधिक भी नहीं. इसी के साथ वह अधिक और पाखी कपाड़िया हाउस से निकलते हुए नजर आ रहे हैं.

फैंस हुए खुश

‘अनुपमा’ (Anupama) का लेटेस्ट प्रोमो देखने के बाद रुपाली गांगुली के फैंस काफी खुश हैं. दरअसल, इन दिनों पाखी के बिहेवियर से अनुपमा फैंस काफी नाराज थे. वहीं शो में उसे सबक सिखाने की बात कह रहे थे. लेकिन शो का नया वीडियो देखने के बाद फैंस को राहत मिली है, जिसे वह पोस्ट के कमेंट में जाहिर करते दिख रहे हैं.

सीरियल में हुई वेदिका की एंट्री

 

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सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो पाखी के लालच का फायदा उठाकर बरखा, अनुपमा को परेशान करती दिख रही है. हालांकि हाल ही में अनुपमा की दोस्त वेदिका ने आकर बरखा की चालों को नाकाम करना शुरु कर दिया है, जिसके चलते फैंस काफी खुश हैं.

जहां पर सवेरा हो-भाग 1 : उसे क्यों छोड़ना पड़ा अपना ही देश

रमनड्राइंग रूम में बैठा लेनिन की पुस्तक ‘राज्य और क्रांति’ पढ़ रहा था. तभी दरवाजे पर आहट हुई. उस ने सोचा कि शायद कानों को धोखा हुआ हो. सुबह के टाइम कौन हो सकता है. कोई और्डर भी नहीं दिया था. सभी फ्लैट्स आपस में हलकी सी दीवार से जुड़े हुए थे. वह पढ़ने में ही मग्न रहा.

दोबारा आहट हुई. बिजली इन दिनों बहुत आंखमिचौली खेल रही थी, इसलिए डोर बेल नहीं बज रही थी.

‘‘रमन, देखो कौन है. मैं बाथ लेने जा रही हूं. बड़ी चिपचिप हो रही है. इस लाइट ने भी बहुत परेशान कर दिया है,’’ बालकनी से कपड़े ले कर बाथरूम की ओर जाती हुई जयश्री बोली.

रमन पहले दरवाजा खोल कर जाली के अंदर से ही पूछता है, ‘‘कौन?’’

गले में गमछामफलर लपेटे 2 लड़के जाली के दरवाजे में मुंह घुसाए खड़े थे. मुंह में पान या  गुटका होने का अंदेशा. बोलने के साथ ही महक आ रही थी और कभीकभी छींटे भी. रमन को इन चीजों से बड़ी नफरत थी. हर साल 31 मई को कालेज की ओर से तंबाकू के खिलाफ अभियान छेड़ा जाता था, जिस का प्रतिनिधित्व रमन और उस के दोस्त ही करते.

‘‘आप लोग?’’

‘‘ले साले, बता भी दे अब अपने जीजा को कि हम कौन हैं,’’ पहला दूसरे से बोला.

‘‘अबे पहले अपना नाम बता दे. पता चला कि बिना बात के कोई दूसरा पिट गया,’’ दूसरा थोड़ी बेशर्मी से बोला.

रमन जाली का दरवाजा खोल कर बाहर चला गया. आसपास रहने वाले लोगों को सचेत करने के इरादे से थोड़ा जोर से बोला. हालांकि सभी फ्लैट्स के दरवाजे अंदर से बंद थे. शहर की संस्कृति यही थी. सब को अपनी प्राइवेसी प्यारी. दूसरों के मसले में दखल देना अच्छा भी नहीं माना जाता.

‘‘भाई आप लोग कौन हैं? यहां क्यों

आए हैं?’’

‘‘कहां छिपा कर रखा है उसे?’’

तभी जयश्री भी नहा कर बाहर आ गई.

‘‘रमन कहां हो? कौन आया है?’’ कहते हुए वह दरवाजे तक पहुंची.

‘‘जयश्री, तुम अंदर ही रुको. मैं अभी

आता हूं.’’

बाहर आए दोनों लोग जयश्री को देख भी लेते हैं और नाम से भी पहचान लेते हैं.

‘‘बस यार, अब कुछ नहीं पूछना. कन्फर्म है,’’ उन में से एक ने कहा.

फिर रमन की ओर देखते हुए बोले, ‘‘ठीक है फिर मिलते हैं.’’

रमन ने उन से आने का मकसद पूछना

चाहा पर वे कुछ नहीं बोले. रमन अंदर आ गया. वह थोड़ा परेशान सा लगा. सम झ नहीं पा रहा था कि ये कौन लोग थे और इस तरह धमकी देने

का क्या मकसद था. उसे जयश्री की चिंता भी सताने लगी.

‘‘रमन कौन थे ये लोग? कुछ तो बताओ?’’

‘‘अरे, मैं कुछ नहीं जानता. उन्होंने अपने बारे में कुछ भी नहीं बताया, न मेरे बारे में कुछ पूछा. हां, तुम्हें देख कर पूरी तरह कन्फर्म हो गया जरूर कहा और दोबारा आने की बात कही है.’’

शाम को मार्केट जाते समय उस ने सोसाइटी के एकमात्र गार्ड से इस बात को लेकर एतराज़ भी जताया कि बिना फोन किए किसी को भी ऊपर आने की अनुमति न दी जाए. लेकिन यह एक खुली सोसाइटी थी. लोगों ने मिलजुल कर एक गार्ड रखा था. वह काफी समय से पैसे बढ़ाने की मांग पर अड़ा हुआ था. मांग पूरी ना होने पर अकसर गायब रहता.

उस दिन सबकुछ सामान्य रहा. अगले दिन शाम को 3-4 नवयुवकों ने सोसाइटी में प्रवेश किया. उन्हें गेट के पास गार्ड मिला पर उसे अपनी बातों की चाशनी में लपेट लिया. बातों से जब वह काबू में नहीं आया तो उसे शराब औफर की. गार्ड को भला और क्या चाहिए था. उस ने उन्हें ऐंट्री दे दी और खुद गायब हो गया.

फ्लैट नंबर 2027 पर डोर बेल बजी. जयश्री दरवाजे पर पहुंची. पीप होल से बाहर

देख कर थोड़ा घबरा गई.

‘‘रमन, दरवाजे पर दस्तक हो रही है. देखो तो कुछ लोग खड़े हैं.’’

‘‘फिर से?’’ शायद रमन भी थोड़ा घबरा गया.

दरवाजे पर जा कर पूरी ताकत से चिल्लाया, ‘‘कौन हैं आप लोग? क्यों परेशान कर रहे हैं हमें?’’

‘‘दरवाजा खोलो.’’

रमन दरवाजा खोल घर बाहर चला गया.

‘‘क्या नाम है तेरा और यह जो लड़की साथ में रहती है कौन है?’’

‘‘रमन कुमार नाम है मेरा और यह मेरी मित्र है.’’

तभी रमन ने एक जोर का मुक्का अपनी छाती पर महसूस किया.

‘‘मित्र है… मित्रता का मतलब पता है तु झे? बड़ा आया लड़की को मित्र बताने वाला. अपनी जातऔकात पता है तु झे?’’

बाहर बहस बढ़ती जा रही थी और अंदर जयश्री बड़ी दुविधा और घबराहट महसूस कर रही थी. उस के एक हाथ में फोन था. वह कभी पुलिस का हैल्पलाइन नंबर सलैक्ट करती? फिर बैक कर देती. कैरियर बनाने के दिन हैं. अगर किसी कानूनी पचड़े में फंस गए तो म झधार में रहने वाली बात हो जाएगी. वह बाहर जाना चाहती थी, लेकिन रमन ने उसे इशारे से अंदर ही रहने को कहा.

रमन को 2-4 घूंसे और जड़ कर वे लोग धमकी देते हुए चले गए. जातेजाते उसे जातिसूचक शब्दों से भी संबोधित करते गए. रमन खुद को संभालता हुआ अंदर आ गया.

जयश्री ने उसे सहारा दे कर बैठाया.

‘‘कौन हो सकते हैं रमन ये लोग? तुम कहो तो मैं पुलिस में शिकायत करूं?’’

फिर सहसा उसे रमन की चोट का ध्यान आ गया, ‘‘तुम्हें ज्यादा चोट तो नहीं लगी? डाक्टर के पास चलें?’’

‘‘नहीं मैं ठीक हूं.’’

जयश्री ने घबरा कर दरवाजा अच्छी तरह बंद कर दिया. यहां तक कि पीप होल में भी एक टेप चिपका देती है. फिर रमन से बैडरूम में चलने का आग्रह किया. बाहर के कमरे में अब उसे डर सताने लगा था. फिर बैडरूम की बालकनी में जा कर देखा तो 3-4 लोग गेट के पास खड़े दिखाई दिए और गेटकीपर से हंसहंस कर बातें कर रहे थे. उस ने सारे परदे अच्छी तरह लगा दिए. अब उस का खाना बनाने का बिलकुल भी मन नहीं हो रहा था.

‘‘रमन क्या खाओगे? बाहर से और्डर कर रही हूं.’’

‘‘कुछ भी मंगा लो. कोई खास चौइस नहीं.’’

‘‘तो घर में ही रखा कुछ रैडीमेड खा लेते हैं? और्डर वाले को बुलाने में भी डर लग रहा है.’’

छाती पर लातघूंसे पड़ने से चोट तो रमन को जरूर लगी थी पर वह जयश्री का मन रखने के लिए खुद को ठीक बताने की कोशिश कर रहा था. अपमान की जो मार पड़ी थी उस ने तन से ज्यादा मन को आहत किया था.

जयश्री भी रातभर सोचती रही कि ये आतंक फैलाने वाले लोग कौन होंगे और इन्हें इन से क्या शिकायत होगी? बिलकुल अप्रत्याशित घटना थी यह. कालेज के दौरान भी किसी से उन का कोई  झगड़ा नहीं था.

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