जिजीविषा: अनु पर लगे चरित्रहीनता के आरोपों ने कैसे सीमा को हिला दिया- भाग 2

अंकल की तेरहवीं के दिन सभी मेहमानों के जाने के बाद आंटी अचानक गुस्से में उबल पड़ीं. मुझे पहले तो कुछ समझ ही न आया और जो समझ में आया वह मेरे होश उड़ाने के लिए काफी था. अनु प्रैग्नैंट है, यह जानकारी मेरे लिए किसी सदमे से कम न थी. अगर इस बात पर मैं इतनी चौंक पड़ी थी, तो अपनी बेटी को अपना सब से बड़ा गर्व मानने वाले अंकल पर यह जान कर क्या बीती होगी, मैं महसूस कर सकती थी. आंटी भी अंकल की बेवक्त हुई इस मौत के लिए उसे ही दोषी मान रही थीं.

मैं ने अनु से उस शख्स के बारे में जानने की बहुत कोशिश की, पर उस का मुंह न खुलवा सकी. मुझे उस पर बहुत क्रोध आ रहा था. गुस्से में मैं ने उसे बहुत बुराभला भी कहा. लेकिन सिर झुकाए वह मेरे सभी आरोपों को स्वीकारती रही. तब हार कर मैं ने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया.

इधर मेरी ससुराल वाले चाहते थे कि हमारी शादी नाना के घर लखनऊ से ही संपन्न हो. शादी के बाद मैं विदा हो कर सीधी अपनी ससुराल चली गई. वहां से जब पहली बार घर आई तो अनु को देखने, उस से मिलने की बहुत उत्सुकता हुई. पर मां ने मुझे डपट दिया कि खबरदार जो उस चरित्रहीन से मिलने की कोशिश भी की. अच्छा हुआ जो सही वक्त पर तेरी शादी कर दी वरना उस की संगत में तू भी न जाने क्या गुल खिलाती. मुझे मां पर बहुत गुस्सा आया, पर साथ ही उन की बातों में सचाई भी नजर आई. मैं भी अनु से नाराज तो थी. अत: मैं ने भी उस से मिलने की कोशिश नहीं की.

2 साल बीत चुके थे. मेरी गोद में अब स्नेहा आ चुकी थी. मेरे भैया की शादी भी बनारस से तय हो चुकी थी. शादी के काफी पहले ही मैं मायके आ गई. यहां आ कर मां से पता चला कि अनु ने भैया की शादी तय होने पर बहुत बवाल मचाया था. मगर क्यों? भैया से उस का क्या वास्ता?

मेरे सवाल करने पर मां भड़क उठीं कि अरे वह बंगालन है न, मेरे भैया पर काला जादू कर के उस से शादी करना चाहती थी. किसी और के पाप को तुम्हारे भैया के मत्थे मढ़ने की कोशिश कर रही थी. पर मैं ने भी वह खरीखोटी सुनाई है कि दोबारा पलट कर इधर देखने की हिम्मत भी नहीं करेंगी मांबेटी. पर अगर वह सही हुई तो क्या… मैं कहना चाहती थी, पर मेरी आवाज गले में ही घुट कर रह गई. लेकिन अब मैं अनु से किसी भी हालत में एक बार मिलना चाहती थी.

दोपहर का खाना खा कर स्नेहा को मैं ने मां के पास सुलाया और उस के डायपर लेने के लिए मैडिकल स्टोर जाने के बहाने मैं अनु के घर की तरफ चल दी. मुझे सामने देख अनु को अपनी आंखों पर जैसे भरोसा ही नहीं हुआ. कुछ देर अपलक मुझे निहारने के बाद वह कस कर मेरे गले लग गई. उस की चुप्पी अचानक ही सिसकियों में तबदील हो गई. मेरे समझने को अब कुछ भी बाकी न था. उस ने रोतेरोते अपने नैतिक पतन की पूरी कहानी शुरू से अंत तक मुझे सुनाई, जिस में साफतौर पर सिर्फ और सिर्फ मेरे भैया का ही दोष नजर आ रहा था.

कैसे भैया ने उस भोलीभाली लड़की को मीठीमीठी बातें कर के पहले अपने मोहपाश में बांधा और फिर कालेज के वार्षिकोत्सव वाले दिन रात को हम सभी के सोने के बाद शकुंतला के रूप में ही उस से प्रेम संबंध स्थापित किया. यही नहीं उस प्रेम का अंकुर जब अनु की कोख में आया तो भैया ने मेरी शादी अच्छी तरह हो जाने का वास्ता दे कर उसे मौन धारण करने को कहा.

वह पगली इस डर से कि उन के प्रेम संबंध के कारण कहीं मेरी शादी में कोई विघ्न न आ जाए. चुप्पी साध बैठी. इसीलिए मेरे इतना पूछने पर भी उस ने मुंह न खोला और इस का खमियाजा अकेले ही भुगतती रही. लोगों के व्यंग्य और अपमान सहती रही. और तो और इस कारण उसे अपने जीवन की बहुमूल्य धरोहर अपने पिता को भी खोना पड़ा.

आज अनु के भीतर का दर्द जान कर चिल्लाचिल्ला कर रोने को जी चाह रहा था. शायद वह इस से भी अधिक तकलीफ में होगी. यह सोच कर कि सहेली होने के नाते न सही पर इंसानियत की खातिर मुझे उस का साथ देना ही चाहिए, उसे इंसाफ दिलाने की खातिर मैं उस का हाथ थाम कर उठ खड़ी हुई. पर वह उसी तरह ठंडी बर्फ की मानिंद बैठी रही.

आखिर क्यों? मेरी आंखों में मौन प्रश्न पढ़ कर उस ने मुझे खींच कर अपने पास बैठा लिया. फिर बोली, ‘‘सीमा, इंसान शादी क्यों करना चाहता है, प्यार पाने के लिए ही न? लेकिन अगर तुम्हारे भैया को मुझ से वास्तविक प्यार होता, तो यह नौबत ही न आती. अब अगर तुम मेरी शादी उन से करवा कर मुझे इंसाफ दिला भी दोगी, तो भी मैं उन का सच्चा प्यार तो नहीं पा सकती हूं और फिर जिस रिश्ते में प्यार नहीं उस के भविष्य में टिकने की कोई संभावना नहीं होती.’’

‘‘लेकिन यह हो तो गलत ही रहा है न? तुझे मेरे भैया ने धोखा दिया है और इस की सजा उन्हें मिलनी ही चाहिए.’’

‘‘लेकिन उन्हें सजा दिलाने के चक्कर में मुझे जिंदगी भर इस रिश्ते की कड़वाहट झेलनी पड़ेगी, जो अब मुझे मंजूर नहीं है. प्लीज तू मेरे बारे में उन से कोई बात न करना. मैं बेचारगी का यह दंश अब और नहीं सहना चाहती.’’

उस की आवाज हलकी तलख थी. मुझ से अब कुछ भी कहते न बना. मन पर भाई की गलती का भारी बोझ लिए मैं वहां से चली आई.

घर पहुंची तो भैया आ चुके थे. मेरी आंखों में अपने लिए नाराजगी के भाव शायद उन्हें समझ आ गए थे, क्योंकि उन के मन में छिपा चोर अपनी सफाई मुझे देने को आतुर दिखा. रात के खाने के बाद टहलने के बहाने उन्होंने मुझे छत पर बुलाया.

‘‘क्यों भैया क्यों, तुम ने मेरी सहेली की जिंदगी बरबाद कर दी… वह बेचारी मेरी शादी के बाद अभी तक इस आशा में जीती रही कि तुम उस के अलावा किसी और से शादी नहीं करोगे… तुम्हारे कहने पर उस ने अबौर्शन भी करवा लिया. फिर भी तुम ने यह क्या कर दिया… एक मासूम को ऐसे क्यों छला?’’ मेरे शब्दों में आक्रोश था.

Bigg Boss 16 Promo: शिव ठाकरे के कारण घर से बाहर होंगी अर्चना! वीडियो वायरल

बौलीवुड एक्टर सलमान खान का रियलिटी शो ‘बिग बॉस 16’ (Bigg Boss 16) इन दिनों सोशलमीडिया पर छाया हुआ है. जहां एक के बाद एक कंटेस्टेंट फैंस का फेवरेट बन रहा है तो वहीं शो में लड़ाइयां देखकर फैंस का एंटरटेनमेंट भी हो रहा है. इसी बीच शो का नया प्रोमो सामने आया है, जिसमें शिव ठाकरे के कारण अर्चना गौतम के शो से बाहर होने की नौबत आ गई है. आइए आपको दिखाते हैं प्रोमो की झलक…

अर्चना-शिव की हुई लड़ाई

 

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हाल ही में ‘बिग बॉस 16’ (Bigg Boss 16) के मेकर्स ने अपकमिंग एपिसोड का प्रोमो रिलीज कर दिया है, जिसमें शिव ठाकरे से लड़ाई के बाद अर्चना गौतम रोते हुए नजर आ रही हैं. दरअशल, प्रोमो में अर्चना गौतम (Archana Gautam) घर के किसी सदस्य से बात करती दिखाई दे रही थीं, लेकिन शिव ठाकरे बीत में आकर उनसे बहस करने लगते हैं. हालांकि अर्चना गौतम गुस्से में शिव से न बात करने की बात कही, जिसपर शिव भी उल्टा जवाब देते दिख रहे हैं. वहीं इस बात से नाराज होकर अर्चना गौतम, शिव को थप्पड़ मारने की बात कहते हुए और गुस्से में शिव ठाकरे की गर्दन पकड़ती हुई नजर आ रही हैं. अर्चना के इस बिहेवियर से घर वाले उनके खिलाफ हो गए. जहां शो से बाहर करने की बात कर रहे हैं. वहीं अर्चना बिग बॉस से बात करते हुए रोती दिख रही हैं.

शो से बाहर होने की उड़ी खबर

बिग बॉस 16 (Bigg Boss 16) के प्रोमो के अलावा इन दिनों खबरें हैं कि शिव पर हाथ उठाने के कारण अर्चना गौतम (Archana Gautam) को शो से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. वहीं सोशलमीडिया पर बिग बॉस के फैसले पर फैंस पक्षपाती होने का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं कुछ लोग शिव ठाकरे के सपोर्ट में खड़े होते दिख रहे हैं.

बरखा की चालों का जवाब देगी Anupama की दोस्त वेदिका, पाखी को सिखाएगी सबक

रुपाली गांगुली स्टारर सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) की कहानी को देखकर इन दिनों फैंस का पाखी पर गुस्सा बढ़ता जा रहा है. जहां लोग अनुपमा को पाखी-अधिक को कपाड़िया हाउस से निकालने की सलाह दे रहे हैं तो वहीं मेकर्स अब फैंस का गुस्सा देखकर अनुपमा की मदद के लिए उसकी दोस्त की एंट्री करवाने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

पाखी को भड़काती है बरखा

अब तक आपने देखा कि पाखी कपाड़िया हाउस में एंट्री करने के बाद रईस होने के सपने देखने लगी है, जिसके चलते वह अनुपमा (Anupama) की बेइज्जती करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रही है. हालांकि अनुपमा उसे करारा जवाब देती दिख रही है. वहीं पाखी का फायदा उठाकर बरखा, मां-बेटी के रिश्ते में आग लगाने के लिए प्लानिंग करती दिख रही है.

अनुपमा से बद्तमीजी करेगी पाखी

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि बरखा, अनुपमा और पाखी की लड़ाई करवाने के लिए प्लान बनाएगी और पाखी को महंगे गहने देगी और उसे भड़काने की कोशिश करेगी. लेकिन अधिक उसे समझाता दिखेगी. हालांकि लालच के कारण पाखी, अधिक की बात को अनसुनी करके अनुपमा के पास पहुंच जाएगी और उसे जलन और भला बुरा कहती नजर आएगी. वहीं मां-बेटी की लड़ाई देखकर बरखा बेहद खुश होगी.

वेदिका लगाएगी बरखा की क्लास

इसके अलावा बरखा की चालों में फंसी अनुपमा की मदद करने के लिए देविका की एंट्री होगी. दरअसल, पहले भी अनुपमा के मुश्किल समय में वेदिका ने उसकी मदद की है. वहीं अब पाखी की अक्ल ठिकाने लगाने और बरखा को सबक सिखाने के लिए वेदिका की एंट्री होती दिखेगी, जिसका प्रोमो रिलीज किया गया है. प्रोमो में बरखा शाह हाउस पहुंचकर पाखी को 20 लाख का डिजाइनर लहंगा खरीदने का आइडिया देती है, लेकिन देविका एंट्री करते हुए उसे टोकते हुए बरखा को सबक सिखाती है

तेजाब: प्यार करना क्या चाहत है या सनक?

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डायबिटीज के चपेट में परिवार भी

भारत में हर व्यक्ति किसी न किसी ऐसे व्यक्ति को जानता होगा जिसे डायबिटीज की बीमारी होगी क्योंकि यहां 6.20 करोड़ लोग इस मर्ज से पीडि़त हैं. अनुमान है कि 2030 तक पीडि़तों की संख्या 10 करोड़ तक पहुंच जाएगी. अस्वस्थ खानपान, शारीरिक व्यायाम की कमी और तनाव डायबिटीज का मुख्य कारण बनते हैं.

इस बीमारी से भविष्य में मरीजों के साथसाथ उन के परिवारों और देश पर पड़ने वाले आर्थिक व मानसिक बोझ को देखते हुए इस से बचाव और समय पर इस का प्रबंधन बेहद जरूरी है. एक अध्ययन के मुताबिक, डायबिटीज और इस से जुड़ी बीमारियों के इलाज व मैनेजमैंट का खर्च भारत में 73 अरब रुपए है.

पेनक्रियाज जब आवश्यक इंसुलिन नहीं बनाती या शरीर जब बने हुए इनसुलिन का उचित प्रयोग नहीं कर पाता तो डायबिटीज होती है जो कि एक लंबी बीमारी है. इंसुलिन वह हार्मोन है जो ब्लडशुगर को नियंत्रित करता है. अनियंत्रित डायबिटीज की वजह से आमतौर पर ब्लडशुगर की समस्या हो जाती है. इस के चलते आगे चल कर शरीर के नाड़ी तंत्र और रक्त धमनियों सहित कई अहम अंगों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

रोग, रोगी और बचाव

डायबिटीज बचपन से ले कर बुढ़ापे तक किसी भी उम्र में हो सकती है. गोरों के मुकाबले भारतीयों में यह बीमारी 10-15 साल जल्दी हो जाती है. चूंकि इस का अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं है और नियमित इलाज पूरी उम्र चलता है, इसलिए बाद में दवा पर निर्भर होने से बेहतर है अभी से बचाव

कर लिया जाए. जीवनशैली में मामूली बदलाव कर के डायबिटीज होने के खतरे को कम किया जा सकता है, कुछ मामलों में तो शुरुआती दौर में इसे ठीक भी किया गया है.

परिवार पर मार

दूसरी बीमारियों के मुकाबले डायबिटीज एक पारिवारिक रोग सरीखा है. इस के प्रभाव एक व्यक्ति पर नहीं पड़ते. घर के किसी सदस्य के डायबिटीज से पीडि़त होने पर पूरे परिवार को अपने खानपान व जीवन के अन्य तरीके बदलने पड़ते हैं. रोग का परिवार के बजट पर भी गहरा असर पड़ता है.

पर्सन सैंटर्ड केयर इन द सैकंड डायबिटीज एटीट्यूड, विशेज ऐंड नीड्स: इंसपीरेशन फ्रौम इंडिया नामक एक मल्टीनैशनल स्टडी में पता चला कि डायबिटीज की वजह से शारीरिक, आर्थिक व भावनात्मक बोझ पूरे परिवार को उठाना पड़ता है. इस के तहत दुनियाभर के 34 प्रतिशत परिवार कहते हैं कि किसी परिवारजन को डायबिटीज होने से परिवार के आर्थिक हालात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जबकि भारत में ऐसे परिवारों की संख्या 93 से 97 प्रतिशत तक है.

दुनियाभर में 20 प्रतिशत पारिवारिक सदस्य मानते हैं कि डायबिटीज की वजह से लोग उन के अपनों से भेदभाव करते हैं. दरअसल, जिस समाज में वे रहते हैं उसे डायबिटीज पसंद नहीं है जबकि भारत में ऐसे 14-32 प्रतिशत परिवार ऐसा ही महसूस करते हैं.

वक्त पर इस का प्रबंधन करने के लिए डायबिटीज के रोगी के परिवार की भूमिका अहम होती है. यह साबित हो चुका है कि परिवार का सहयोग न मिलने पर रोगी अकसर अपनी दवा का नियमित सेवन और ग्लूकोज पर नियंत्रण नहीं रख पाता. इसलिए जरूरी है कि परिवार का एक सदस्य शुरुआत से ही इन सब बातों का ध्यान रखने में जुट जाए. डाक्टर के पास जाते वक्त साथ जा कर पारिवारिक सदस्य न सिर्फ काउंसलिंग सैशन का हिस्सा बन सकता है बल्कि यह भी समझ सकता है कि इस हालत को वे बेहतर तरीके से कैसे मैनेज कर सकते हैं.

कैसे करें शुगर प्रबंधन

डायबिटीज को मैनेज किया जा सकता है. अगर उचित कदम उठाए जाएं तो इस के रोगी लंबा व सामान्य जीवन गुजार सकते हैं. प्रबंधन के लिए कुछ कदम इस प्रकार हैं :

–  पेट के मोटापे पर नियंत्रण रख के इस से बचा जा सकता है क्योंकि इस का सीधा संबंध टाइप 2 डायबिटीज से है. पुरुष अपनी कमर का घेरा 40 इंच और महिलाएं 35 इंज तक रखें. सेहतमंद और संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम मोटापे पर काबू    पाने में मदद कर सकता है.

–  गुड कोलैस्ट्रौल 50 एमजी रखने से दिल के रोग और डायबिटीज से बचा जा सकता है.

–  ट्रिग्सीसाइड एक आहारीय फैट है जो मीट व दुग्ध उत्पादों में होता है जिसे शरीर ऊर्जा के लिए प्रयोग करता है और अकसर शरीर में जमा कर लेता है. इस का स्तर 150 एमजी या इस से ज्यादा होने पर यह डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है.

–  आप का सिस्टौलिक ब्लडप्रैशर 130 से कम और डायस्टौलिक ब्लडप्रैशर 85 से कम होना चाहिए. तनावमुक्त रह कर ऐसा किया जा सकता है.

–  खाली पेट ग्लूकोज 100 एमजी या ज्यादा होने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.

–  दिन में 10,000 कदम चलने की सलाह दी जाती है.

परिवार मिल कर सप्ताह में 6 दिन सेहतमंद खानपान और रविवार को चीट डे के रूप में अपना सकते हैं ताकि नियमितरूप से हाई ट्रांस फैट और मीठा खाने से बचा जा सके. रविवार को बाहर जा कर शारीरिक व्यायाम करने के लिए भी रखा जा सकता है. परिवार में तनावमुक्त जीवन जीने की प्रभावशाली तकनीक बता कर सेहतमंद व खुशहाल जीवन जीने के लिए उत्साहित कर के एकदूसरे की मदद की जा सकती है.

(लेखक एंडोक्राइनोलौजिस्ट हैं.)

Winter Special: सर्दियों में डैंड्रफ से हैं परेशान तो करें ये काम

बालों की समस्याएं खास सर्दी में कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं. आइए जानें कैसे बालों से जुड़ी परेशानियों से छुटकारा पाया जाए:

डैंड्रफ

डैंड्रफ यानी रूसी, बालों की एक ऐसी समस्या है जो सबसे आम है. दरअसल यह एक प्रकार की त्वचा से संबंधित बीमारी है. जो इंफेक्शन, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता और हेल्दी खान-पान के अभाव से होती है.

ठंड के मौसम में डैंड्रफ की समस्या और बढ़ जाती है. अगर बालों में लगातार डैंड्रफ रहे, तो उसका असर बालों की खूबसूरती और सेहत पर भी पड़ता है.

डैंड्रफ से बचने के उपाय

डॉक्टर के बिना सलाह के कोई साबुन, शैंपू, तेल और दवा न लें.

हल्के हाथों से मालिश व शैंपू करें.

बाल छोटे रखें.

बालों में सफाई का ध्यान रखें.

बालों में कलर व रंगीन मेहंदी आदि लगाने से बचें.

किसी दूसरे का हेलमेट और टोपी इस्तेमाल न करें.

झड़ते बाल

गिरते बालों की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि हेयर लॉस प्रोडक्ट का मार्केट सबसे तेजी से बढ़ रहा है. गंदे बाल, तनाव, बदलता मौसम, ऑपरेशन, इंफेक्शन और लंबे समय तक बीमार होने पर भी बाल गिरने लगते हैं. प्रेग्नेंसी या फिर बच्चे के जन्म के बाद भी कुछ महिलाओं में कमजोरी आ जाती है और कमजोरी के कारण भी बाल गिरने लगते हैं.

उपाय

बाल का साफ रहना बहुत जरूरी है. अपने बालों की केयर करते रहनी चाहिए और बालों को सप्ताह में दो-तीन बार जरूर धोना चाहिए.

बालों के लिए कोई भी प्रोडक्ट खरीदने से पहले अपने बालों के प्रकार को जानें और उससे मेल खाता प्रोडक्ट खरीदें.

जो शैंपू झाग देता है, उसमें डिटर्जेंट जरूर होता है. हर्बल शैंपू भी इसका अपवाद नहीं है. महज शिकाकाई या रीठा की कुछ बूंदें डालने से चीजें नहीं बदलतीं. डिटर्जेंट्स से बचना है तो रीठा, शिकाकाई और मेहंदी का मिक्सचर घर में बनाकर लगाएं.

बालों को मजबूत बनाने और टूटने से बचाने के लिए आपको सप्ताह में कम से कम दो बार बालों की जड़ों में आंवला, बादाम, ऑलिव ऑयल, नारियल का तेल, सरसों का तेल इत्यादि में से कोई एक लगाना चाहिए.

बालों को धूप से बचाएं. जब भी बाहर धूप में निकलें, साथ में छाता लेकर जाएं या फिर अपने बालों को कपड़े से पूरी तरह ढक लें.

प्रोटीन युक्त सीरम मार्केट में मिलते हैं. यह एक तरह से बालों के प्रोटीन खुराक की जरूरत को पूरी करता है.

बालों को दिन में कम से कम 2-3 बार कंघी करें, इससे आपके बाल कम से कम उलझेंगे और कम टूटेंगे.

शैम्पू के बाद कंडीशनर सिर की सतह यानी त्वचा में न लगाएं. इससे बालों को नुकसान पहुंचता है.

अपनी डाइट में प्रोटीन, आयरन, जिंक, सल्फर, विटामिन सी के अलावा विटामिन बी युक्त चीजों को भरपूर मात्रा में शामिल करें.

रूखे और बेजान बाल

बाल रूखे और बेजान हों, तो आकर्षक नहीं लगते. बेजान बालों में थोड़ी चमक और नजाकत भरें. हालांकि हेयर एक्सपर्ट्स को यह कहते कई बार सुना गया है कि बालों की क्वॉलिटी के लिए जीन और आनुवंशिक कारण जिम्मेदार होते हैं.

लेकिन धूप, धूल और प्रदूषण की वजह से भी बाल रूखे, बेजान और बीमार हो जाते हैं. कई बार बालों पर एक्सपेरिमेंट और ज्यादा केमिकल वाला शैम्पू लगाने से भी बाल खराब हो जाते हैं.

कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप अपने रूखे और बेजान बालों में फिर से जान भर सकती हैं.

उपाय

भीगे बालों से कभी कंघी ना करें. इससे बाल और भी रूखे हो जाएंगे, साथ ही टूटेंगे भी ज्यादा. बालों के सूखने तक इंतजार करें.

शैम्पू करने से पहले तेल लगाकर अपनी उंगलियों से कंघी करें. यकीन मानिये इससे आपके बाल लहराएंगे.

अपने खाने में दही भरपूर मात्रा में शामिल करें.

शैम्पू के बाद नियमित रूप से कंडीशनर लगाएं.

सप्ताह में एक बार बालों में अंडा लगाएं.

सप्ताह में कम से कम दो बार बालों की तेल से मालिश जरूर करें.

5 Tips: ऐसे रखें लकड़ी के फर्श को नए जैसा

आजकल घर में मार्बल या फ्लोरिंग की जगह लकड़ी के फर्श बनाने का चलन है. इसे काफी ट्रेंडी और स्‍टाइलिश भी माना जा रहा है. लेकिन इस फर्श पर होने वाले निशान और खरोंचों से लोग काफी परेशान होते नजर आ रहे हैं. अपनी फर्श की सुरक्षा और उसकी चिकनाहट बरकरार रखने के लिए पहियों वाली कुर्सियों, टेबलों और अन्य फर्नीचर से बचना चाहिए और रबर वाली पहियों की कुर्सियों का उपयोग करना चाहिए.

1. कुर्सियां

अगर घर में लकड़ी वाला फर्श डला हुआ है तो पहियों वाली कुर्सियों से बचना चाहिए, क्‍योंकि पहिये फर्श पर खरोंच करते हैं, जिससे वह बेहद गंदा और पुराना नजर आने लगता है. लकड़ी के फर्श के लिए रबर लगी पहियों वाली कुर्सियां का इस्तेमाल कर आप अपने फर्श की सुंदरता को बरकरार रख सकते हैं.

2. फुटवेयर

फर्श पर जूतों को पहनकर चलने से बचना चाहिए, क्योंकि छोटे-छोटे पत्थर और वस्तुएं जूते की तली में फंस जाते हैं और फर्श पर चलने के दौरान उनकी रगड़ से इनपर खरोंच पड़ सकती है. इसके अलावा घर में घुमते वक्‍त स्‍लीपर या जुते न पहने. इनमें लगी मिट्टी भी आपके फर्श पर निशान डाल सकती है.

3. फर्नीचर टैब्स

फर्नीचर के लिए बाजार में कई प्रकार के टैब्स (एक प्रकार का पैड) मौजूद होते हैं, जिन्हें कुर्सियों और टेबल के पहियों के तले में लगाया जाता है. इससे आप फर्श पर बगैर किसी डर के कुर्सियों और टेबलों को घुमा सकते हैं.

4. तेल और फिनिशिंग

तेल और फिनिशिंग कर फर्श के खरोंचों से छुटकारा पाया जा सकता है. बाजार में इसके लिए तेल सहित विभिन्न प्रकार की किट मौजूद हैं, जिससे धब्बों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि इस तरह के तेल और फिनिशर अच्छे ब्रांडों के ही होने चाहिए.

5. मुलायम तौलिया का उपयोग

फर्श पर पानी, धूल, कीचड़ होने या नमक आदि गिर जाने पर इसे मुलायम तौलिया से साफ करें. धूल, मिट्टी से बचाने के लिए रोजाना वैक्यूम क्लीनर या झाड़ू से साफ करें क्योंकि ऐसा नहीं करने से फर्श पर निशान पड़ सकते हैं और फर्श अपनी चमक भी खो सकता है. फर्श को साफ करने के लिए फ्लोर क्लीनर और चमक बनाए रखने के लिए अच्छी कंपनी का वैक्स पॉलिश का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

पति की एक आदत से मैं परेशान हो गई हूं, मैं क्या करुं?

सवाल-

मैं 27 वर्षीय विवाहिता और 2 बच्चों की मां हूं. मेरे पति हमेशा सहवास से पूर्व कुछ समय तक मुखमैथुन करते हैं. शुरूशुरू में मैं ने इस का विरोध नहीं किया, क्योंकि मुझे लगता था कि शायद यह सहवासपूर्व की एक जरूरी क्रिया होगी और सभी पति ऐसा करते होंगे. पर पिछले दिनों मैं अपनी एक अंतरंग सहेली से मिली और बातचीत के दौरान मैं ने उसे अपनी समस्या बताई. उस ने बताया कि ऐसा न तो उस ने कभी किया और न ही उस के पति ने कभी इस प्रकार की ओछी इच्छा जाहिर की. उस ने यह भी बताया कि इस से कोई बीमारी भी हो सकती है. मैं क्या करूं, मेरे पति तो मना करने पर नाराज हो जाते हैं.

जवाब-

सहवास के लिए कोई तयशुदा कायदेकानून नहीं हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं. कई दंपती सहवासपूर्व रति क्रीड़ा जैसे आलिंगन, चुंबन आदि करना पसंद करते हैं तो कई सीधेसीधे सहवास में प्रवृत्त हो जाते हैं. मुखमैथुन भी रतिपूर्व की क्रीड़ा है जिसे कुछ युवा करना पसंद करते हैं. यदि आप के पति भी ऐसा करते हैं तो आप को उन्हें सहयोग देना चाहिए. यौनांगों की स्वच्छता पर यदि पूरा ध्यान दिया जाए तो मुखमैथुन में कोई बुराई नहीं है. अत: सुनीसुनाई बातों पर न जाएं और न ही अपनी सैक्स लाइफ की निजी बातों को किसी के साथ शेयर करें. यह सिर्फ और सिर्फ पतिपत्नी का मामला है, जिसे गोपनीय ही रखना चाहिए.

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दिलीप ने जब रुही से यह कहा कि वह बिस्तर पर अब पहले जैसा साथ नहीं देती, तो वह यह सुन कर परेशान हो उठी. फिर रुही ने सैक्स ऐक्सपर्ट डा. चंद्रकिशोर कुंदरा से संपर्क किया.

डा. कुंदरा के मुताबिक, सैक्स सफल दांपत्य जीवन का महत्त्वपूर्ण आधार है. इस की कमी पतिपत्नी के रिश्ते को प्रभावित करती है. पतिपत्नी की एकदूसरे के प्रति चाहत, लगाव, आकर्षण खत्म होने के कई कारण होते हैं जैसे शारीरिक, मानसिक, लाइफस्टाइल. ये सैक्स ड्राइव को कमजोर बनाते हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- सैक्स लाइफ में इनकी नो ऐंट्री

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Winter Special: फैमिली के लिए बनाएं तंदूरी मसाला गोभी

शाम के नाश्ते में अगर आप नई और हेल्दी रेसिपी की तलाश कर रही हैं तो तंदूरी मसाला गोभी की ये रेसिपी ट्राय करना ना भूलें.

सामग्री

400 ग्राम गोभी 

1-2 छोटी चम्मच रिफाइंड तेल 

1/2 छोटा चम्मच जीरा 

2 बड़े चम्मच अदरक (लच्छे बनाए) 

2 बीच में से लंबी कटी हरीमिर्च 

1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च 

11/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर (दरदरा पिसा)

2 चम्मच कसूरी मेथी 

3 मध्यम आकार के टमाटर 

3/4 छोटा चम्मच अमूचर पाउडर

1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला 

थोड़ा सा जायफल पाउडर 

नमक स्वादानुसार.

विधि

सब से पहले गोभी को धो कर 11/2 इंच के टुकड़ों को कोट लें. कटी हुई गोभी पर चिकनाई लगाए स्प्रे बोतल से स्प्रे भी कर सकते हैं. माइक्रो तवे में रखे. माइक्रो में कनवेक्शन मोढ पर 250 पर हीट करें, गरम होने पर 10-15 मिनट तक सुनहरा होने तक भूनें. अदरक के लच्छों को थोड़ी चिकनाई लगा कर माइक्रो मोड पर डेढ़ मिनट के लिए रखें. भुन जाने पर निकाल दें. नानस्टिक कड़ाही में 1 छोटा चम्मच तेल डालें, जीरा डालें, भुन जाने पर धनिया पाउडर, हरीमिर्च, 1 लालमिर्च, हींग डालें. टमाटरों को पीस कर उस को कड़ाही में डालें. नमक, हलदी डाल मिलाएं और उस में भुने हुए गोभी के फूल भी डाल दें और 15-20 मिनट के लिए ढक्कन ढक कर रख दें. बीचबीच में सब्जी को चलाते रहें. सब्जी बन जाने पर इस में कसूरी मेथी, अमचूर पाउडर, गरम मसाला डालें. 1-2 मिनट सब्जी को भूनें और ढक दें. सब्जी भुन कर सुनहरी हो जाएगी. इस में जायफल छिड़कें. अदरक और धनिए की पत्ती से सजाएं और गरमगरम परोसें.

अंधविश्वास पर लोग क्यों करते हैं विश्वास

अंधविश्वास की हद किसे कहते हैं, इस का उदाहरण है यह विज्ञापन जिस के छलावे में अच्छेखासे पढ़ेलिखे लोग भी आ जाते हैं. ससुराल में किसी तकलीफ या कष्टों से मुक्ति पाने के लिए करें ये उपाय- ‘‘किसी सुहागिन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें. उपवास यानी एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें. भोजन में दाल, चावल, सब्जी रोटी न खाएं. दूधरोटी खा लें. शुक्ल पक्ष की तृतीया को, अमावस्या से पूनम तक शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उस को ऐसा उपवास रखें. अगर किसी बहन से यह व्रत पूरा साल नहीं हो सकता तो केवल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया, वैशाख शुक्ल तृतीया और भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया को करें. लाभ जरूर मिलेगा.

‘‘अगर किसी सुहागिन बहन को कोई तकलीफ है तो यह व्रत जरूर करें. उस दिन गाय को चंदन से तिलक करें. कुमकुम का तिलक ख़ुद को भी करें.  उस दिन गाय को भी रोटी गुड़ खिलाएं.’’

सोचने वाली बात है कि एक महिला को ससुराल में सम्मान और प्यार उस के अपने कर्मों से मिलेगा या फिर टोनेटोटकों से. अगर वह पूरे परिवार का खयाल रखती है, पति की भावनाओं को मान देती है, सास से ले कर दूसरे परिजनों से अच्छा रिश्ता कायम करती है और उन की सुविधाओं को अहमियत देती है तो जाहिर है ससुराल वाले भी उसे पूरा प्यार और स्नेह देंगे. ये रिश्ते तो परस्पर होते हैं. आप जितना प्यार दूसरों पर लुटाओगे दूसरे भी आप का उतना ही खयाल रखेंगे.

अब अगले विज्ञापन में तथाकथित महान धर्मगुरुओं और ज्योतिषियों से जानते हैं कि एक लड़की को ससुराल में तकलीफें होती क्यों हैं?

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति पक्ष में न होने पर लड़की को ससुराल में बारबार अपमानित होना पड़ता है. यहां जानिए उन ग्रहों के बारे में जो परेशानी की वजह बनते हैं, साथ ही उन के प्रभाव से बचने के तरीकों के बारे में भी जानिए:

मंगल: मंगल को क्रोधी ग्रह माना जाता है. क्लेश,   झगड़ा और गुस्से का कारक मंगल को ही माना जाता है. मंगल की अशुभ स्थिति जीवन में अमंगल की वजह बनती है. यदि किसी लड़की की कुंडली में मंगल की अशुभ स्थिति बनी हो तो उसे जीवन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

उपाय: मंगलवार की अशुभ स्थिति को शुभ बनाने के लिए आप मंगलवार के दिन हनुमान बाबा की पूजा करें. हनुमान चालीसा का पाठ करें. अगर संभव हो तो हर मंगल को सुंदरकांड का पाठ करें. लाल मसूर की दाल, गुड़ आदि का दान करें.

शनि: शनि अगर शुभ स्थिति में हो तो जीवन बना देता है. लेकिन शनि की अशुभ स्थिति जीवन को तहसनहस कर डालती है. अगर किसी लड़की की कुंडली में शनि की स्थिति ठीक न हो तो ससुराल में उस के साथ बरताव अच्छा नहीं होता. उसे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

उपाय: हर शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. शनिवार के दिन सरसों का तेल, काले तिल, काली दाल, काले वस्त्र आदि का दान करें. शनि चालीसा का पाठ करें.

राहु और केतु: राहु और केतु दोनों ग्रहों को पाप ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है. जब ये अशुभ होते हैं तो मानसिक तनाव की वजह बनते हैं. साथ ही कई बार व्यक्ति को बेवजह कलंकित होना पड़ता है. राहु को ससुराल का कारक भी माना गया है. ऐसे में किसी लड़की की कुंडली में राहु और केतु की अशुभ स्थिति शादी के बाद उस के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती है.

उपाय: राहु को शांत रखने के लिए माथे पर चंदन का तिलक लगाएं. महादेव का पूजन करें और घर में चांदी का ठोस हाथी रखें. वहीं केतु को शांत रखने के लिए भगवान गणेश की पूजा करें. चितकबरे कुत्ते या गाय को रोटी खिलाएं.

जरा सोचिए, अगर ग्रहनक्षत्र ही आप का जीवन चला रहे हैं तो फिर ग्रहों को शांत करने के सिवा जिंदगी में कुछ भी करने की जरूरत ही नहीं. आप हाथ पर हाथ धर कर बैठे रहो और ग्रहनक्षत्रों की स्थिति सही करने के उपाय करते रहो. क्या इस तरह जिंदगी चल सकती है? क्या अपने कर्तव्यों को निभाने की आवश्यकता खत्म हो जाती है?

बाबाओं के पास ससुराल की समस्याएं ही नहीं बल्कि जीवन से जुड़ी हर तरह की परेशानियों के हल करने के उपाय हैं. आइए, जानते हैं उन के द्वारा सु  झाए जाने वाले ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में:

तनाव मुक्ति के लिए

तनाव से मुक्ति पाने के लिए दूध और पानी को मिला कर किसी बरतन में भर लें व सोते समय उसे अपने सिरहाने रख लें और अगले दिन सुबह उठ कर उसे कीकर की जड़ में डाल दें. ऐसा करने से आप मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करेंगे व खुद को तनावमुक्त पाएंगे.

शनि दोषों को दूर करने के लिए

शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का डाल कर उस में अपनी परछाईं देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रख कर आ जाएं. यह उपाय आप कम से कम 5 शनिवार करेंगे तो आप की शनि की पीड़ा शांत हो जाएगी और शनि की कृपा शुरू हो जाएगी.

अचानक आए कष्ट दूर करने के लिए

एक पानी वाला नारियल ले कर उस व्यक्ति के ऊपर से 21 बार वारें जिस के ऊपर संकट हो. इस के बाद उसे किसी देवस्थान पर जा कर अग्नि में जला दें. ऐसा करने से उस सदस्य पर से संकट दूर हो जाता है. यह उपाय किसी मंगलवार या शनिवार को करना चाहिए. लगातार 5 शनिवार ऐसा करने से जीवन में अचानक आए कष्ट से मुक्ति मिलती है.

आज देश को आजाद हुए 75 साल बीत चुके हैं. विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है. हमारा लाइफस्टाइल बदल चुका है. मगर इन सब के बावजूद विडंबना यह है कि समाज में अंधविश्वास भी चरम पर है. देश के बहुत से हिस्सों में आज भी   झाड़फूंक, तंत्रमंत्र, भूतप्रेत, ओ  झातांत्रिक, ज्योतिष आदि पर लोग विश्वास करते हैं और इन सब का फायदा उठा कर ओ  झा, तांत्रिक, ज्योतिषी आदि की ठगी का धंधा फूलफल रहा है. आज भी बाबामाताजी,   झाड़फूंक व तंत्रमंत्र की मदद से किसी भी बीमारी या मानवीय समस्या का समाधान करने का दावा किया जाता है.

21वीं सदी के वर्तमान दौर में भी   झारखंड समेत देश के कई राज्यों में मौजूद डायन बिसाही प्रथा एवं डायन हत्या की घटनाएं चिंता पैदा करने वाली हैं. इस की जड़ें एक ओर ओ  झा, गुनी, तांत्रिक, ज्योतिष आदि तक जाती है वहीं समाज में मौजूद पुरुष वर्चस्व वाली मानसिकता भी इस से जुड़ी है. उस पर हाल यह है कि समाज में अंधविश्वास, कुरीति, लूट एवं पाखंड फैलाने और उसे बढ़ावा देने वाले लोग अकसर कानून के शिकंजे में फंसने से बच जाते हैं या पकड़ में आने के बाद भी आसानी से छूट जाते हैं.

कैसा है अंधविश्वास का संसार

जीवन को नकारात्मक दिशा में मोड़ता है: अकसर धर्मगुरु अपनी तथाकथित विद्या के माध्यम से लोगों को भयभीत करते हैं. लोगों का जीवन अकर्मण्यता और बिखराव का शिकार हो कर अपने मार्ग से भटक जाता है. इस भटकाव के कई पहलू हैं जिन में से एक पहलू यह है कि वह खुद से ज्यादा ज्योतिषी, तांत्रिक और बाबाओं पर विश्वास करता है. ग्रहनक्षत्रों से डर कर उन की भी पूजा या प्रार्थना करने लगता है. वह अपना हर कार्य लग्न, मुहूर्त या तिथि देख कर करता है और उस कार्य के होने या नहीं होने के प्रति संदेह से भरा रहता है.

जीवनभर टोनेटोटकों में उल  झा रहता है. ऐसे में उस का वर्तमान, वास्तविक जीवन और अवसर हाथों से छूट जाता है. व्यक्ति जिंदगी भर अनिर्णय की स्थिति में रहता है क्योंकि निर्णय लेने की शक्ति उस में होती है जो अपनी सोच से ज्ञान और जानकारी का उपयोग सही और गलत को सम  झने में कर सकता है.

मनुष्य को डरपोक बनाता है: अकसर बाबा, तांत्रिक और ज्योतिषी लोगों को सम  झाते हैं कि जीवन में कुछ भी हो रहा है वह सब ग्रहनक्षत्रों या अदृश्य शक्तियों का खेल है. उदाहरण भी दिया जाता है कि खुद राम तक ग्रहनक्षत्रों के फेर से बच नहीं पाए. राम को वनवास हुआ तो ग्रहों के कारण ही. दरअसल, ज्योतिष ग्रहनक्षत्रों के जरीए लोगों को डराने वाला ज्ञान है जिस की आज के तर्कशील समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए. इसी तरह टोनेटोटके और धार्मिक युक्तियां आप को दिग्भ्रमित करने और डरा कर रखने का एक जरीया हैं.

सदियों पहले अंधकार काल में व्यक्ति मौसम और प्रकृति से डरता था. बस इसी डर ने एक तरफ ज्योतिष को जन्म दिया तो दूसरी तरफ धर्म को. जिन लोगों ने बिजली के कड़कने या गिरने को बिजली देव माना वे धर्म को गढ़

रहे थे और जिन्होंने बिजली को बिजली ही माना वे ज्योतिष के एक भाग खगोल विज्ञान को गढ़ रहे थे.

आज इसे व्यापार का रूप दे कर धन कमाने का जरीया बना लिया गया है. धार्मिक और ज्योतिषीय विश्वास के नाम पर किए जाने वाले इस व्यापार से सब परिचित हैं. टीवी चैनलों में बहुत से ज्योतिषशास्त्री तरहतरह की बातें कर के समाज में भय और भ्रम उत्पन्न करते हैं. स्थानीय जनता अपने क्षेत्र में मौजूद बाबा या ओ  झा तांत्रिक आदि के प्रभाव में रहती है. दीवारों तक पर इन बाबाओं के इश्तहार लिखे होते हैं. मध्यवर्गीय परिवारों को पंडित और मौलवी अपने नियमों और संस्कारों में बांधे रखते हैं.

बड़ेबुजुर्ग अंधविश्वास मानने के लिए दबाव बनाते हैं. हर समाज अपनी अच्छाइयों के साथ बुराइयां, संस्कारों के साथ कुरीतियां और तर्क के साथ अंधविश्वास अपनी अगली पीढ़ी में हस्तांतरित करता है.

अंधविश्वास की कोई तर्कसंगत व्याख्या नहीं हो सकती और ये परिवार और समाज में बिना किसी ठोस आधार के भी सर्वमान्य बने रहते हैं. आज के तकनीकी युग में भी ये लोगों के दिमाग में जगह बनाए हुए हैं. शिक्षित और अशिक्षित दोनों तरह के परिवारों में अंधविश्वास के प्रति मान्यताएं पाई जाती हैं.

ढोंगी बाबाओं की दुकानें

इन मान्यताओं को बिना सवाल किए पालन करने की उम्मीद बच्चों से की जाती है और अगर वे सवाल करते हैं तो दबाव बना कर समाज और परिवार उन्हें इन मान्यताओं और विश्वासों को मानने की जबरदस्ती करते हैं. इन अंधविश्वासों और भय के साए में ढोंगी बाबाओं की दुकानें चलती हैं.

आज भी हमारे समाज में अंधविश्वास को अनेक लोग मानते हैं. बिल्ली द्वारा रास्ता काटने पर रुक जाना, छींकने पर काम का न बनना, उल्लू या कौए का घर की छत पर बैठने को अशुभ मानना, बाईं आंख फड़कने पर अशुभ सम  झना, नदी में सिक्का फेंकना ऐसी अनेक धारणाएं आज भी हमारे बीच मौजूद हैं. इस के शिकार अनपढ़ों के साथसाथ पढ़ेलिखे लोग भी हो जाते हैं.

32 साल की शिप्रा बताती है कि उस की एक सहेली निभा दिल्ली में रहती थी. उस ने कई वर्षों तक आईएएस की तैयारी की. जब कई दफा कोशिश करने के बावजूद सफलता नहीं मिली तो उस की मां ने किसी वास्तु के जानकार से सलाह ली. उस जानकार ने बताया कि आप की बेटी के स्टडीरूम की खिड़की सही दिशा में नहीं खुलती है इसलिए या तो खिड़की की जगह बदलो या उसे खोलना ही छोड़ दो.

निभा ने दूसरा उपाय अपनाया और खिड़की खोलनी छोड़ दी. फिर भी सफलता नहीं मिली तो किसी बाबा ने सलाह दी कि घर के सामने नीबू का पेड़ नहीं होना चाहिए. यह कांटेदार वृक्ष है सो इसे निकलवा देना चाहिए. निभा की मां ने वह पेड़ कटवा दिया. इस के बावजूद उसे सफलता नहीं मिली तो उस की मां उसे बाबा के पास ले गई. बाबा ने उस से कई तरह के व्रत और अनुष्ठान कराए, जिस का नतीजा यह हुआ कि जल्द ही वह बीमार पड़ गई.

इस तरह के हजारों उदाहरण हम रोजमर्रा की जिंदगी में देखते हैं. आश्चर्य यह है कि इस प्रकार के अंधविश्वासों को न केवल अनपढ़ व ग्रामीण लोग मानते हैं बल्कि पढ़ेलिखे शिक्षित युवा व शहरी लोग भी इन की चपेट में आ जाते हैं.

सुकून और पैसे की बरबादी

कुछ साल पहले दिल्ली में एक ही परिवार के 11 लोगों ने इसी अंधविश्वास के चलते बाबाओं के बहकावे में मोक्ष के लिए सामूहिक आत्महत्या कर ली थी. यह अकेला मामला नहीं था. ऐसे बहुत से उदाहरण आए दिन दिखते रहते हैं जब लोगों ने अंधविश्वास के बहकावे में आ कर अपने परिवार बरबाद कर लिए या प्रियजनों को खो दिया. अंधविश्वासों के चक्कर में पड़ कर बच्चों की बलि तक दे दी जाती है. आज भी लोग कष्ट पड़ने पर विज्ञान से ज्यादा अंधविश्वासों और बाबाओं पर विश्वास करते हैं और उन के जाल में फंस कर अपना बचाखुचा सुकून और पैसा भी गंवा देते हैं.

देश में कितने सारे ठग बाबा आएदिन पकड़े जाते हैं, कितनों के सच उजागर होते हैं इस के बावजूद बाबाओं और उन के भक्तों की संख्या में कमी न आना इस बात का प्रतीक है कि लोगों की मानसिकता के स्तर में बहुत फर्क नहीं पड़ता है. दरअसल, इन ढोंगियों को मीडिया का सहयोग हासिल है. अखबारों और चैनलों में तांत्रिकों, बाबाओं के विज्ञापन आते हैं. क्लेश दूर करने के ताबीज व लौकेट से ले कर घरेलू कलह दूर करने, ससुराल में सम्मान प्राप्ति बेटा पैदा करने, मनचाहा प्यार पाने और नौकरी दिलाने जैसे   झूठे दावे कर ये जालसाज लोगों को अपने जाल में फांस रहे हैं. दुनिया में किसी व्यक्ति के पास कोई भी समस्या हो उन के पास हर परेशानी का इलाज तैयार रखा होता है.

लोगों का विश्वास जीतने के लिए ये लोगों से पहली बार में ज्यादा रुपयों की मांग नहीं करते. पहले उन्हें तकलीफों से मुक्ति पाने का ख्वाब दिखाते हैं और जब इंसान अंधविश्वास में धीरेधीरे फंसने लगता है तब बहानेबहाने से बड़ी रकम ऐंठना शुरू की जाती है. तभी तो अंधविश्वास का यह कारोबार बिना कोई लागत लगाए दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है. धोखे और   झूठ की नींव पर रखी गई अंधविश्वास की दुकानों में आम जनता के मन में छिपे भय और खौफ का फायदा उठा कर खूब मुनाफा कमाया जा रहा है.

क्या कहता है कानून

चमत्कार से इलाज करना कानूनन अपराध है. भारतीय कानून में ताबीज, ग्रहनक्षत्र, तंत्रमंत्र,   झाड़फूंक, चमत्कार, दैवी औषधी आदि द्वारा किसी भी समस्या या बीमारी से छुटकारा दिलवाने का   झूठा दावा करना जुर्म है. तंत्रमंत्र, चमत्कार के नाम पर आम जनता को लूटने वाले ज्योतिषी, ओ  झा, तांत्रिक जैसे पाखंडियों को कानून की मदद से जेल की हवा तक खिलाई जा सकती है. विडंबना यह है कि आज भी अनेक लोगों को कानून के बारे में सही जानकारी नहीं है. कुछ जरूरी कानूनों की जानकारी पेश है:

औषध एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940: औषध एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 औषधियों तथा प्रसाधनों के निर्माण और बिक्री को नियंत्रित करता है. इस के अनुसार कोई भी व्यक्ति या फर्म राज्य सरकार द्वारा जारी उपयुक्त लाइसैंस के बिना औषधियों का स्टौक, बिक्री या वितरण नहीं कर सकता. ग्राहक को बेची गई प्रत्येक दवा का कैश मेमो देना अनिवार्य कानून है. बिना लाइसैंस के औषधि के निर्माण और बिक्री को जुर्म माना जाएगा.

औषधी एवं चमत्कारी (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954: औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत तंत्रमंत्र, गंडे, ताबीज आदि तरीकों के उपयोग, चमत्कारिक रूप से

रोगों के उपचार या निदान आदि का दावा करने वाले विज्ञापन निषेधित हैं. इस के अनुसार ऐसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भ्रमित करने वाले विज्ञापन दंडनीय अपराध हैं जिन के प्रकाशन के लिए विज्ञापन प्रकाशित व प्रसारित करने वाले व्यक्ति के अतिरिक्त समाचारपत्र या पत्रिका आदि का प्रकाशक व मुद्रक भी दोषी माना जाता है.

इस अधिनियम के अनुसार पहली बार ऐसा अपराध किए जाने पर 6 माह के कारावास अथवा जुरमाने या दोनों प्रकार से दंडित किए जाने का प्रावधान है जबकि इस की पुनरावृत्ति करने पर 1 वर्ष के कारावास अथवा जुरमाना या फिर दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कोई व्यक्ति जो अपने उपयोग के लिए कोई भी सामान अथवा सेवाएं खरीदता है वह उपभोक्ता यानी क्रेता है. जब आप किसी ज्योतिषी, तांत्रिक या बाबा से कोई गंडा, ताबीज, ग्रहनक्षत्र खरीदते हैं तो इस से यदि आप को कोई लाभ नहीं मिलता है तो आप एक उपभोक्ता के रूप में विक्रेता ज्योतिषी, तांत्रिक या बाबा के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में मामला दायर कर सकता है. इस के अलावा यदि किसी कानून का उल्लंघन करते हुए जीवन तथा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करने वाला सामान जनता को बेचा जा रहा है तो भी आप शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

भारतीय दंड संहिता की धारा 420: भारतीय दंड संहिता की धारा 420 में किसी भी व्यक्ति को कपट पूर्वक या बेईमानी से आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, संपत्ति या ख्याति संबंधी क्षति पहुंचाना शामिल है. यह एक

दंडनीय अपराध है. इस के तहत 7 साल तक के कारावास की सजा का प्रावधान है. धर्म, आस्था, ईश्वर के नाम पर अकसर कुछ पाखंडी अंधविश्वास के दलदल में डूबे लोगों को कपट से लूटते हैं.

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