काश, मेरी बेटी होती- भाग 1: शोभा की मां का क्या था फैसला

‘‘यार तू बड़ी खुशनसीब है, तेरी बेटी है,’’ शोभा बोली, ‘‘बेटियां मातापिता का दुखदर्द हृदय से महसूस करती हैं.’’‘‘नहीं यार, मत पूछ, आजकल की बेटियों के हाल. वे हमारे समय की बेटियां होती थीं जो मातापिता, विशेषकर मां, का दुखदर्द शिद्दत से महसूस करती थीं. आजकल की बेटियां तो मातापिता का सिरदर्द बन कर बेटों से होड़ लेती प्रतीत होती हैं. तेरी बेटी नहीं है न, इसलिए कह रही है ऐसा,’’ एक बेटी की मां जयंति बोली, ‘‘बेटी से अच्छी आजकल बहू होती है. बेटी तो हर बात पर मुंहतोड़ जवाब देती है, पर बहू दिल ही दिल में भले ही बड़बड़ाए, पर सामने फिर भी लिहाज करती है, कहना सुन लेती है.’’

‘‘आजकल की बहुओं से लिहाज की उम्मीद करना… तौबातौबा. मुंह से कुछ नहीं बोलेंगी, पर हावभाव व आंखों से बहुतकुछ जता देंगी, रक्षा ने जयंति का प्रतिवाद करते हुए कहा, ‘‘जिन बेटियों का तू अभीअभी गुणगान कर रही थी, आखिर वही तो बहुएं बनती हैं, ऊपर से थोड़े ही न उतर आती हैं. ऐसा नाकों चने चबवाती हैं आजकल की बहुएं, बस, अंदर ही अंदर दिल मसोस कर रह जाओ. बेटे पर ज्यादा हक नहीं जता सकते, वरना बहू उसे ‘मां का लाड़ला’ कहने से नहीं चूकेगी.’’

शोभा दोनों की बातें मुसकराती हुई सुन रही थी. एक लंबा निश्वास छोड़ती हुई बोली, ‘‘अब मैं क्या जानूं कि बेटियां कैसी होती हैं और बहू कैसी. न मेरी बेटी, न बहू. पता नहीं मेरा नखरेबाज बेटा कब शादी के लिए हां बोलेगा, कब मैं लड़की खोजूंगी, कब शादी होगी और कब मेरी बहू होगी. अभी तो कोई सूरत नजर नहीं आती मेरे सास बनने की.’’

‘‘जब तक नहीं आती तब तक मस्ती मार,’’ रक्षा और जयंति हंसती हुई बोलीं, ‘‘गोल्डन टाइम चल रहा है तेरा. सुना नहीं, पुरानी कहावत है, पहन ले जब तक बेटी नहीं हुई, खा ले जब तक बहू नहीं आई. इसलिए हमारा खानापहनना तो छूट गया. पर तेरा अभी समय है बेटा. डांस पर चांस मार ले, मस्ती कर, पति के साथ घूमने जा, पिक्चरें देख, कैंडिललाइट डिनर कर, वगैरहवगैरह. बाद में नातीपोते खिलाने पड़ेंगे और बच्चों से कहना पड़ेगा, ‘जाओ घूम आओ, हम तो बहुत घूमे अपने जमाने में’ तो दिल तो दुखेगा न,’’ कह कर तीनों सहेलियां व पड़ोसिनें खिलखिला कर हंस पड़ीं और शोभा के घर से उन की सभा बरखास्त हो गई.

रक्षा, जयंति व शोभा तीनों पड़ोसिनें व अभिन्न सहेलियां थीं. उम्र थोड़ाबहुत ऊपरनीचे होने पर भी तीनों का आपसी तारतम्य बहुत अच्छा था. हर सुखदुख में एकदूसरे के काम आतीं. होली पर गुजिया बनाने से ले कर दीवाली की खरीदारी तक तीनों साथ करतीं. तीनों एकदूसरे की राजदार भी थीं और लगभग 15 वर्षों पहले जब उन के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे थे. थोड़ा आगेपीछे तीनों के घर इस कालोनी में बने थे.

तीनों ही अच्छी शिक्षित महिलाएं थीं और इस समय अपने फिफ्टीज के दौर से गुजर रही थीं. जिस के पास जो था उस से असंतुष्ट और जो नहीं था उस के लिए मनभावन कल्पनाओं का पिटारा उन के दिमाग में अकसर खुला रहता.

लेकिन जो है उस से संतुष्ट रहने की तीनों ही नहीं सोचतीं. नहीं सोच पातीं जो उन्हें नियति ने दिया है कि उसे किस तरह से खूबसूरत बनाया जाए.

जयंति की एक बेटी थी जो कालेज के फाइनल ईयर में थी. रक्षा ने एक साल पहले बेटे का विवाह किया था और शोभा का बेटा इंजीनियर व प्रतिष्ठित कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत एक नखरेबाज युवा था. वह मां के मुंह से विवाह का नाम सुन कर नाकभौं सिकोड़ता और ऐसा दिखाता जैसे विवाह करना व बच्चे पैदा करना सब से निकृष्ठ कार्य एवं प्राचीन विचारधारा है और उस के जीवन के सब से आखिरी पायदान पर है. एक तरह से जब सब निबट जाएगा तो यह कार्य भी कर लेगा.

जयंति को अपनी युवा बेटी से ढेरों शिकायतें थीं, ‘घर के कामकाज को तो हाथ भी नहीं लगाती यह लड़की. कुछ बोलो तो काट खाने को दौड़ती है. कल को शादीब्याह होगा, तो क्या सास बना कर इसे खिलाएगी.’ जयंति पति के सामने बड़बड़ा रही होती. अपनी किताबों पर नजरें गड़ाए बेटी मां के ताने सुन कर बिफर जाती, ‘फिक्र मत करो, मु झे खाना बना कर कोई भी खिलाए. आप को तंग करने नहीं आऊंगी.’

बेटी तक आवाज पहुंच रही थी. बेवक्त  झगड़े की आशंका से जयंति हड़बड़ा कर चुप हो जाती. पर बेटी का पारा दिल ही दिल में आसमां छू जाता. वह जब टाइट जीन्स और टाइट टीशर्ट डाल कर कालेज या कोचिंग के लिए निकलती तो जयंति का दिल करता कि जीन्स के ऊपर भी उस के गले में दुपट्टा लपेट दे. पर मन मसोस कर रह जाती. घर में जब बेटी शौर्ट्स पहन कर पापा के सामने मजे से सोफे पर अधलेटी हो टीवी के चैनल बदलने लगती तो जयंति का दिमाग भन्ना जाता, ‘आग लगा दे इस लड़की के कपड़ों की अलमारी को’ और उस के दोस्त लड़के जब घर आते तो वह एकएक का चेहरा बड़े ध्यान से पढ़ती. न जाने इन में से कल कौन उस का दामाद बनने का दावा ठोक बैठे.

रोजरोज घर को सिर पर उठा मां से  झगड़ा करने वाली बेटी ने जब एक दिन प्यार से मां के गले में बांहें डालीं तो किसी अनहोनी की आशंका से जयंति का हृदय कांप गया. जरूर कोई कठिन मांग पूरी करने का वक्त आ गया है.

‘‘मम्मी, मेरे कुछ फ्रैंड्स कल लंच पर आना चाह रहे हैं. मैं ने उन्हें बताया है कि आप चाइनीज खाना कितना अच्छा बनाती हैं. बुला लूं न सब को?’’ वह मासूमियत से बोली. बेटी की भोलीभाली शक्ल देख कर जयंति का सारा लाड़दुलार छलक आया.

‘‘हांहां, बुला ले अपनी सहेलियों को. बना दूंगी मैं, कितनी हैं?’’‘‘मु झे मिला कर 8 दोस्त हो जाएंगे मम्मी. वे सारा दिन यहीं बिताने वाले हैं…’’ बेटी आने वालों के लिए गोलमाल जैंडर शब्द का इस्तेमाल करती हुई बोली. ‘‘ठीक है…’’

दूसरे दिन जयंति सुबह से बेटी की फरमाइश पूरी करने में लग गई. घर भी ठीक कर दिया. बेटी ने बाकी घर पर ध्यान भी नहीं दिया. सिर्फ अपना कमरा ठीक किया. ठीक 11 बजे घंटी बजी. दरवाजा खोला तो जयंति गिरतेगिरते बची. आगंतुकों में 4 लड़के थे और 3 लड़कियां. जिन लड़कों को वह थोड़ी देर भी नहीं पचा पाती थी, उन्हें उस दिन उस ने पूरा दिन  झेला और वह भी बेटी के कमरे में. आठों बच्चों ने वहीं खायापिया, वहीं हंगामा किया और खापी कर बरतन बाहर खिसका दिए. जयंति थक कर पस्त हो गई.

बेटी फोन पर जब खिलखिला कर चमकती आंखों से लंबीलंबी बातें करती तो जयंति का दिल करता उस के हाथ से फोन छीन कर जमीन पर पटक दे. फोन से तो उसे सख्त नफरत हो गई थी. मोबाइल फोन के आविष्कारक मार्टिन कूपर को तो वह सपने में न जाने कितनी बार गोली मार चुकी थी. सारे  झगड़े की जड़ है यह मोबाइल फोन.

बेटी कभी अपने दोस्तों के साथ पिकनिक पर जाती तो कभी लौंगड्राइव पर. हां, इन मस्तियों के साथ एक बात जो उन सभी युवाओं में वह स्पष्ट रूप से देखती, वह थी अपने भविष्य के प्रति सजगता. लड़के तो थे ही, पर लड़कियां उन से अधिक थीं. अपना कैरियर बनाने के लिए उन्मुख उन लड़कियों के सामने उन की मंजिल स्पष्ट थी और वे उस के लिए प्रयासरत थीं. घरगृहस्थी के काम, विवाह आदि के बारे में तो वे बात भी न करतीं, न उन्हें कोई दिलचस्पी थी.

REVIEW: जानें कैसी है Parineeti और Hardy की फिल्म Code Name Tiranga

रेटिंगः आधा स्टार

निर्माताः टीसीरीज और रिलायंस इंटरटेनमेंट

लेखक व निर्देशकः रिभु दासगुप्ता

कलाकारःपरिणीति चोपड़ा, हार्डी संधू, शरद केलकर, रजित कपूर, शेफाली शाह, दिव्येंदु भट्टाचार्य, शिशिर शर्मा, सव्यसाची चक्रवर्ती, दीश मरीवाला व अन्य.

अवधिः दो घंटे 17 मिनट

भारत की ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’’ अर्थात ‘रॉ’ के एजेंट पिछले एक दशक से भी अधिक समय से बौलीवुड के फिल्मकारों के लिए पसंदीदा विषय बने हुए हैं. ‘रॉ’ एजेंटो को लेकर अब तक कई फिल्में व वेब सीरीज बन चुकी हैं. अब ‘रॉ’ एजेंट के रूप में एक महिला जासूस दुर्गा सिंह को केंद्र में रखकर रिभु दासगुप्ता फिल्म ‘‘कोड नेम तिरंगा’’लेकर आए हैं, जो कि बतौर लेखक व निर्देशक रिभु दासगुप्ता की अति कमजोर फिल्म है. जिसमें न कहानी है और न ही देशभक्ति, न ही प्रेम कहानी ही है. मगर इस फिल्म को देखकर लोगो को 1975 में प्रदर्शित अशोक कुमार की फिल्म ‘‘चांरी मेरा काम’’ जरुर याद आ जाएगी.  इस फिल्म के कुछ दृश्यों को चुराकर फिल्मकार रिभु दासगुप्ता ने अपनी फिल्म ‘‘कोड नेम तिरंगा’’ का हिस्सा बना दिया है. रिभु दासगुप्ता कलकत्ता के फिल्मी परिवार से संबंध रखते हैं. 2011 में उन्होेने फिल्म ‘माइकल’ का निर्देशन कर शोहरत बटोरी थी. इस फिल्म को ‘शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में पुरस्कार के लिए नोमीनेट भी किया गया था. फिर 2014 में टीवी सीरियल‘युद्ध’ में उन्होने अमिताभ बच्चन को निर्देशित किया था. 2016 में रहस्य रोमांच से भरपूर फिल्म ‘तीन’ का लेखन व निर्देशन किया था. इस फिल्म में भी अमिताभ बच्चन थे. यह फिल्म बाक्स आफिस पर अपनी लागत भी नही वसूल पायी थी. 2019 में रिभु दासगुप्ता ने नेटफ्लिक्स के लिए वेब सीरीज ‘बार्ड आफ ब्लड’ का निर्देशन किया, जो काफी चर्चा में रही. इसके बाद 2020 में नेटफ्लिक्स के लिए ही परिणीति चोपड़ा को लेकर ही फिल्म ‘द गर्ल आॅन द ट्ेन’ निर्देशित की, जो कि घटिया फिल्म मानी गयी. और अब वह परिणीति चोपड़ा को ही ‘हीरो’ लेकर फिल्म ‘‘कोड नेम तिरंगा’’लेकर आए हैं. जो कि अति कमजोर, कहानी व निर्देशन विहीन फिल्म है. इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पारित कर दिया, यह भी आश्चर्य की बात है. क्योंकि यह फिल्म कहती है कि हमारे ‘रॉ’ के दूसरे नंबर के अधिकारी पाकिस्तान व आतंकवादियों के हाथों बिके हुए हैं.

कहानीः

फिल्म की कहानी टर्की से शुरू होती है. जहां ‘रॉ’ एजेंट दुर्गा सिंह कार्यरत है. वह एक दिन नाटकीय तरीके से एक टैक्सी में संयुक्त राष्ट् के लिए कार्यरत डाक्टर मिर्जा अली से मिलती है और उसे अपना परिचय इस्मत नामक भारतीय पत्रकार के रूप में देते हुए अपने प्रेम जाल में फांसती है. दुर्गा सिंह भारतीय संसद पर हमला कर चुके खालिद ओमार के खात्मे के मिशन पर है.  कहानी कई मोड़ों से गुजरती है. इसलिए डॉं. मिर्जा को प्रेम जाल में फांसती है. क्योंकि इलाके में होने वाली एक शादी में ओमार आने वाला है और डॉक्टर उस शादी के प्रीतिभोज के मेहमानों की सूची में शामिल है.  इसी प्रीतिभोज में रॉ एजेंट दुर्गा सिंह की असली पहचान खुलती है. डॉ. मिर्जा अली को पता चल जाता है कि वह इस्मत नहीं दुर्गा सिंह है. पर दोनो एक साथ मरने की कसमें खाते हैं. खालिद उमर के हाथों डॉ.  अली मिर्जा मारा जाता है. कहानी में कई मेाड़ आते हैं. अंततः दुर्गा, खालिद उमर को मौत के घाट उतार देती है और लोगों को बताती है कि जो भी गड़बड़ियां हो रही थीं, उसकी वजह ‘रॉ’ के दूसरे नबर के अधिकारी पाकिस्तान और खालिद ओमार के हाथों बिका होना था.

लेखन व निर्देशनः

महज नारी उत्थान के नामपर एक रॉ एजेंट को महिला के रूप में पेशकर बिन सिर पैर की कहानी गढ़ने के बाद विभु दासगुप्ता ने उसमें दूसरी फिल्मों के कुछ दृश्य चुराकर डालते हुए ‘कोड नेम तिरंगा’ के नाम से दर्शकांे को परोसते हुए सोच लिया कि दर्शक ‘तिरंगा’ के नाम पर उनकी फिल्म को सिर माथे पर बैठा लेगा. मगर वह यह भूल गए कि दर्शक को एक अच्छी कहानी चाहिए. मगर इस फिल्म में कहानी व निर्देशन दोनों का अभाव है. परिणीति चोपडा को दुर्गा सिंह के किरदार मंे लेना निर्देशक की सबसे बड़ी गलती रही. परिणीति चोपड़ा पर फिल्माए गए एक्शन दृश्य तो वीडियो गेम नजर आते हैं. इस फिल्म में न देश भक्ति है, न कोई प्रेम कहानी है. पता नही क्यों रिभु दासगुप्ता , परिणीति चोपड़ा को एक्शन स्टार बनाने के पीछे पड़ गए? क्या उन्होने  कंगना रानौट की फिल्म ‘धाकड़’ का हाल नही देखा है.

बतौर लेखक व निर्देशक रिभु दासगुप्ता परिणीति चोपड़ा व हार्डी संधू के बीच प्रेम कहानी को भी ठीक से विकसित नही कर पाए.

रिभु दासगुप्ता की परवरिश कलकत्ता में बंकिमचंद्र चटर्जी लिखित गीत  ‘‘वंदे मातरम’’ सुनते हुए हुई है. पर इस गीत को लेकर उनकी समझ यह है कि उन्होने ‘वंदे मातरम’ गीत को ‘युद्धगीत के रूप में अपनी फिल्म ‘‘कोड नेम तिरंगा’’ में पेश कर डाला.

अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है तो रॉ एजेंट दुर्गा सिंह के  किरदार में परिणीत चोपड़ा एक प्रतिशत भी खरी नही उतरती. फिल्म प्रचारक से अभिनेत्री बनने वाली और प्रियंका चोपड़ा की कजिन परिणीति चोपड़ा को अभिनय करना आता ही नही है. इस बात को वह अतीत में  ‘इशकजादे’, ‘शुद्ध देशी रोमांस’, ‘हंसी तो फंसी’, ‘दावते इश्क’, ‘किल दिल’, ‘नमस्ते इंग्लैंड’, ‘जबरिया जोड़ी’

व ‘संदीप ओर पिंकी फरार’ जैसी असफल फिल्मों में साबित कर चुकी हैं. इसके बावजूद उन्हे रॉ एजेंट के किरदार में लेना अपने आप में निर्देशक की सोच पर सवालिया निशान उठाता है. परिणीति चोपड़ा ने अपनी तरफ से इस किरदार के हिसाब से खुद को ढालने के लिए कोई मेहनत नहीं की. तनाव के दृश्यों में सिगरेट पीने भर से रॉ एजेंट स्मार्ट नहीं दिख जाता. इसके लिए एक एजेंट जैसी कद काठी,  शरीर सौष्ठव और फुर्ती भी जरूरी है. डॉ.  मिर्जा अली के छोटे किरदार में हार्डी संधू कमजोर कहानी व पटकथा के चलते अपनी अभिनय प्रतिभा को निखार न सके. सह कलाकारों में किसी का भी अभिनय प्रभावित नहीं करता.

52 साल की उम्र में दूल्हा बने Delnaaz Irani के एक्स हसबैंड राजीव, पढ़ें खबर

टीवी एक्ट्रेस डेलनाज ईरानी (Delnaaz Irani)  के एक्स हसबैंड राजीव पॉल (Rajev Paul) ने अचानक शादी की खबर दे दी है, जिसे सुनकर सेलेब्स और फैंस हैरान हो गए हैं. वहीं दोनों की फोटोज सोशलमीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. आइए आपको दिखाते हैं Rajev Paul की शादी की फोटोज…

एक्टर ने की दूसरी शादी

 

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हाल ही में एक्टर राजीव पॉल ने अपने फैंस के लिए इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर की है, जिसमें वह अपनी दुल्हन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. हालांकि फोटो में उनकी पत्नी का चेहरा नहीं नजर आ रहा है. लेकिन कैप्शन में उन्होंने अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करते हुए 52 साल की उम्र में दूसरी शादी होने की बात कही है. वहीं फोटो शेयर होते ही सेलेब्स और फैंस का रिएक्शन देखने को मिल रहा है. रश्मि देसाई से लेकर बाकी टीवी सितारे एक्टर को बधाई देते दिख रहे हैं.

डेलनाज भी बढ़ चुकी हैं आगे

 

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तलाक होने के बाद राजीव पॉल ही नहीं बल्कि एक्ट्रेस डेलनाज ईरानी भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गई हैं. वहीं हाल ही में एक्ट्रेस को उनके 50वें बर्थडे पर बॉयफ्रेंड ने प्रपोज भी किया था, जिसकी जानकारी एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट के जरिए फैंस को दी थी. वहीं फैंस उनकी शादी की फोटोज भी शेयर करने की बात करते हुए दिखे थे.

 

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बता दें कि टीवी की दुनिया के सेलिब्रिटी कपल में से एक राजीव पॉल और डेलनाज ईरानी की शादी सुर्खियों में रही थी. दरअसल, दोनों की शादी करीब 14 साल तक चलने के बाद दोनों ने तलाक लेने का फैसला किया था. वहीं नच बलिए में अपनी जोड़ी का दम दिखाने वाले एक्टर तलाक के बाद बिग बॉस के घर में लड़ाई करते हुए भी दिखे थे, जिसके बाद दोनों चर्चा में रहने लगे थे.

Diwali Special: खुशियों की रोशनी फैलाएं दुखों का अंधेरा नहीं

दीवाली खुशियों का त्योहार है. दीवाली पर सब एकदूसरे को गिफ्ट और मिठाइयां दे कर खुशियां मनाते हैं. लेकिन आधुनिक परिवेश में धन की अधिकता के चलते लोगों ने खुशियों के इस त्योहार में कैक्टस बोने शुरू कर दिए हैं. अंधकार में दीपक जला कर रोशनी की ओर बढ़ने के बजाय कुछ स्त्रीपुरुष जुए और शराब के नशे के अंधेरे रास्ते पर चलते हुए दीवाली पर अपने खुशियों भरे जीवन में कटुता घोल रहे हैं. दीवाली पर जुआ खेलने की परंपरा किसी अंधविश्वास से शुरू हुई थी. आधुनिक परिवेश में धन की अधिकता, भौतिक साधनों की सुविधा के कारण जुआ घरघर में खेला जाने लगा है. दीवाली पर जुए की अधिकता देखी जाती है. अब फाइवस्टार होटलों और बड़ेबड़े फार्महाउसों में भी जुए के आयोजन होने लगे हैं. कार्ड पार्टियों के नाम पर हजारोंलाखों नहीं, करोड़ों रुपयों का जुआ खेला जाने लगा है. दीवाली पर शराब में डूब कर जुआ खेला जाता है.

पहले जुए और शराब का चलन पुरुषों तक ही सीमित था, लेकिन अब स्त्रियां भी इस में शामिल होने लगी हैं. यही नहीं शराब की पार्टियों में भी स्त्रियां बढ़चढ़ कर भाग ले रही हैं. दीवाली पर जुए में जीतने वाला व्यक्ति वर्ष भर जीतता रहता है. इस अंधविश्वास के चलते सभी वर्ग के लोग जुआ खेलते हैं. स्त्रियां भी जुआ खेलने में किसी से पीछे नहीं रहती हैं. धनी वर्ग की ही नहीं मध्यवर्ग की स्त्रियां भी जुए में बढ़चढ़ कर भाग लेती हैं. धनी वर्ग के स्त्रीपुरुषों में तो जुआ स्टेटस सिंबल बन चुका है. दीवाली की रात को ही नहीं, दीवाली के कुछ दिन आगेपीछे भी खूब जुआ खेला जाता है. कैसिनो, फार्महाउसों और बड़ेबड़े होटलों में हौल बुक करा कर जुए के आयोजन किए जाते हैं. इन आयोजनों में बड़ेबड़े दांव लगाए जाते हैं. क्व20 से 30 हजार हार जाने वाले की ओर कोई देखता भी नहीं. क्व5-10 लाख हारने वाले का ही नाम सब की जबान पर होता है.

लाखोंकरोड़ों दांव पर

कैसिनो में 10-20 लाख के दांव से 2-3 करोड़ दांव पर लगाने वाले बिजनैसमैन भी अब आगे आने लगे हैं. स्त्रियां बड़ीबड़ी रकमें हारने पर दुख के बजाय खुश होती देखी जाती हैं. रुपए हारना भी स्टेटस सिंबल बनता है. दीवाली पर क्व2-3 लाख हारने वाली महिला किट्टी पार्टी में बड़े गर्व से जुए में हारने की बात बताती है. तब सभी स्त्रियां उस की प्रशंसा करती हैं. उसे आदरणीय नजरों से देखा जाता है. जुए की परंपरा अब किट्टी पार्टियों में भी देखी जा सकती है. वैसे तो महिलाओं को किट्टी पार्टियों में कभी भी जुआ खेलते देखा जा सकता है, लेकिन दीवाली के आसपास बहुत जोरशोर से खेला जाता है. दीवाली के आसपास किट्टी पार्टी का आयोजन जिस कोठी या फ्लैट में किया जाता है उस पार्टी का आयोजन करने वाली महिला उस में ताश खेलने का कार्यक्रम भी रखती है. ताश के माध्यम से जुआ खेला जाता है. पार्टी में स्त्रियां अलगअलग समूह बना कर जुआ खेलती हैं. दीवाली पर जुए के आयोजन अब होटलों से अधिक फार्महाउसों में होने लगे हैं, क्योंकि दीवाली के अवसर पर बड़ेबड़े होटलों में जगह नहीं मिलती. फिर अधिकांश स्त्रीपुरुष होटलों में नहीं जा पाते. ऐसे लोगों ने फार्म हाउसों में कार्ड पार्टियों के नाम पर जुए और शराब की पार्टियां आयोजित करनी शुरू कर दी हैं. आयोजक अपने परिचितों को आमंत्रित करते हैं. यही नहीं, फेसबुक पर सूचना दे कर दूसरे लोगों को भी आमंत्रित करते हैं. दूसरे लोग फोन पर सीट बुक करा कर पार्टी में शामिल होते हैं. दीवाली पर जुआ खेलने और दूसरी मौजमस्ती करने के लिए अब कार्ड पार्टियों का आयोजन भी होने लगा है. कार्ड पार्टियां फार्महाउसों में आयोजित की जाती हैं. फार्महाउसों के मालिक कार्ड पार्टियों का आयोजन करते हैं लेकिन आजकल दूसरे लोग भी फार्म हाउस किराए पर ले कर कार्ड पार्टियां आयोजित करते हैं.

शराब के छलकते जाम

कार्ड पार्टियों में जुआ खुलेआम चलता है और शराब के जाम भी खूब छलकते हैं. इन फार्महाउसों में पुलिस का हस्तक्षेप भी बहुत कम होता है, क्योंकि फार्महाउस नगर के बड़ेबड़े बिजनैसमैनों के होते हैं और उन लोगों को बड़ेबड़े नेताओं का संरक्षण मिला होता है. नेताओं के संरक्षण मिले फार्महाउसों में जुए के साथसाथ शराब और शबाब की रंगीन पार्टियां भी खूब मजे से चलती हैं. ताश के पत्तों से जुआ खेला जाता है. ताश के पत्तों का जुआ स्त्रीपुरुष मिल कर खेलते हैं. ताश के पत्तों से जोड़े मिलाए जाते हैं. इस तरह नएनए जोड़े बना कर स्त्रीपुरुष खूब मौजमस्ती करते हैं. जुए के तरीके भी अलगअलग फार्महाउसों और होटलों में परिवर्तित होते रहते हैं. पार्टियों में अधिकतर स्त्रीपुरुष भाग लेते हैं. ऐसी पार्टियों में भाग लेने वाली नवयुवतियां घर या औफिस में किसी को नहीं बतातीं, लेकिन चोरीछिपे अधिकांश नवयुवतियां कार्ड पार्टियों में शामिल होती हैं. एक नवयुवती ने कार्ड पार्टी में जाने की बात बताई. वह पहले बौयफ्रैंड के साथ ‘लिव इन रिलेशन’ में रहती थी. तब अपने बौयफ्रैंड के साथ कार्ड पार्टियों में खूब जाती थी. पिछले वर्ष वह दीवाली पर जिस कार्ड पार्टी में गई थी उस में टैडीबियर का खेल खेला गया.

उस पार्टी में स्त्रीपुरुष पतिपत्नी के साथ शामिल हुए थे. कुछ लोग अपनी गर्लफ्रैंड के साथ आए थे. पार्टी में एक बड़ी टेबल पर एक टैडीबियर रखा गया था. दूर खड़े युवकयुवतियां एक गोल छल्ले (रिंग) को उछाल कर उस टैडीबियर पर फेंकते थे. पहले एक नवयुवती ने छल्ला फेंका. छल्ला टैडीबियर पर गिरा. अब युवक की बारी थी. एक नवयुवक ने छल्ला फेका. टैडीबियर बच गया. दूसरे नवयुवक ने छल्ला फेंका. वह भी टैडीबियर से दूर जा गिरा. कई नवयुवकों ने छल्ले फेंके. आखिर एक नवयुवक का छल्ला टैडीबियर पर गिरा. सभी उपस्थित स्त्रीपुरुषों ने जोरजोर से तालियां बजाईं और वह नवयुवक पहले छल्ला फेंकने वाली नवयुवती को बांहों में भर कर पास के कैबिन में ले गया. उस के बाद फिर टैडीबियर पर छल्ला फेंकने के लिए पहले एक नवयुवती आगे आई. इस तरह छल्ला फेंकने का कार्यक्रम देर तक चलता रहा.

मौजमस्ती का जरीया

दीवाली पर जुआ खेलने वालों के किस्से सुन कर महाभारत के युधिष्ठिर के जुआ खेलने और राजपाट के साथ द्रौपदी के हार जाने की बात भी छोटी लगने लगती है. आधुनिक परिवेश में तरहतरह से जुआ खेला जाता है. जुए में पुरुष अपनी पत्नी को हारने पर बहुत खुश होते हैं. पुरुषों का जुए में पत्नी हार जाने पर किसी दूसरी स्त्री के साथ मौजमस्ती करने का मौका जो मिलता है. जुए के कुकृत्यों के साथ दूसरे अनेक कुकृत्य भी शामिल होते जा रहे हैं. दीवाली अंधेरे में दीप जला कर खुशियां मनाने का त्योहार है. लेकिन लोग जुए और शराब में डूब कर अपने जीवन में अंधेरा कर लेते हैं. जुआ खेलने वाला व्यक्ति जुए में हारे धन की भरपाई के लिए किसी से उधार ले कर फिर जुआ खेलता है. लेकिन जब उधार के रुपए भी जुए में हार जाता है तब परिवार पर संकट के बादल छा जाते हैं. जुए में अधिक धन हार जाने वाले जब कर्ज से मुक्त नहीं हो पाते हैं तो वे डिप्रैशन का शिकार हो जाते हैं या फिर आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

खुशियों का मोल समझे

जुए और शराब की मस्ती में डूबने वाले होश आने पर खुद को खाली हाथ ही पाते हैं. ऐसे में उन के पास पछताने के अलावा कोई और रास्ता नहीं होता. आजकल की व्यस्त जिंदगी में अपनों के साथ बिताने के लम्हें हैं ही कितने? इस दीवाली परिवार से नहीं, खुद से ये वादा करें कि जुए या नशे में पैसा और समय बरबाद करने की बजाए परिवार के साथ खुशियों के हलकेफुलके पल बिताएंगे. फिर देखिए कि किस तरह ये पल हमेशा के लिए यादगार बन जाएंगे.     

प्रश्नचिह्न: निविदा ने पिता को कैसे समझाया

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मौड्यूलर किचन के 7 टिप्स

किचन घर का वह कोना है, जहां महिलाएं अपना सब से ज्यादा समय व्यतीत करती हैं. ऐसे में किचन का व्यवस्थित व मौडर्न होना समय की डिमांड है. तभी तो आजकल मौडर्न किचन का चलन बढ़ता जा रहा है. ऐसे में जब भी आप अपने घर का इंटीरियर करवाएं तो किचन को अनदेखा न करें क्योंकि इस का न सिर्फ घर के लुक को बढ़ाने में अहम रोल होता है, बल्कि मौडर्न किचन काम को आसान बनाने में मदद करने के साथासाथ टाइम सेविंग भी है.

तो आइए जानते हैं जब आप अपनी किचन को मौड्यूलर बनवाएं, तो किन बातों का रखें ध्यान:

कैसी हो लकड़ी

हर किसी का सपना होता है कि उस का अपना घर हो और उस में किचन मौड्यूलर होने के साथसाथ वह हर फैसिलिटी से परिपूर्ण हो. लेकिन कई बार हम पैसे बचाने के चक्कर में किचन में सस्ता वुडेन वर्क करवा लेते हैं, जो जल्दी खराब होने के साथसाथ आप के पूरे बजट को भी बिगाड़ने का काम करता है.

ऐसे में जरूरी है कि जब भी किचन में लकड़ी का काम करवाएं तो देखें कि वह वाटरप्रूफ हो ताकि किचन में मौइस्चर का प्रभाव भी उस पर न पड़े और अगर आप का बजट है तो कोशिश करें कि टरमाइटपू्रफ लकड़ी का चयन करें ताकि दीमक आप की किचन को छू भी न पाए. हमेशा किचन में क्वालिटी प्लाईवुड का ही इस्तेमाल करें ताकि किचन सालोंसाल नई बनी रहे.

डबल प्रोटैक्शन

जब भी अपनी किचन को डबल प्रोटैक्शन देने के लिए लैमिनेट का चयन करें, तो इस बात का ध्यान रखें कि काउंटर के नीचे के स्टोरेज के लिए टैक्सचर लैमिनेट का चयन न करें क्योंकि इस में ज्यादा गंदगी फंसने के कारण इस के खराब होने का डर सब से ज्यादा बना रहता है.

इस की जगह आप प्लेन लैमिनेट का चयन कर सकते हैं. लैमिनेट एक ऐसा मैटीरियल है, जिसे क्लीन करना आसान होने के साथसाथ यह लंबे समय तक भी चलता है और अगर आप को किचन के ऊपरी स्टोरेज में लैमिनेट करवाना हो, तो आप लाइट टैक्सचर, हैवी टैक्सचर वाला लैमिनेट भी लगवा कर न सिर्फ अपनी किचन को सुरक्षित बना सकते हैं, बल्कि अपनी पसंद को भी पूरा कर सकते हैं.

इस बात का भी ध्यान रखें कि किचन में कम से कम कलर्स वाले लैमिनेट का इस्तेमाल करें क्योंकि इस से आप ट्रैंड को फौलो करने के साथसाथ आप की किचन अच्छी भी दिखेगी. अगर आप की किचन छोटी है तो ऊपर व नीचे एकजैसा कलर ही इस्तेमाल करें क्योंकि इस से किचन अच्छी लगने के साथसाथ उस का साइज भी इग्नोर हो जाता है.

अगर आप का काउंटर डार्क कलर का है और आप का नीचे के हिस्से में भी डार्क कलर का लैमिनेट यूज करने का मन है तो आप हैंडल्स की जगह प्रोफाइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो हैंडल्स का ही काम करते हैं. ये कलर के बीच बैलेंस बनाने का काम करेंगे और अगर आप को अपनी किचन के लिए वुडेन प्रिंट का लैमिनेट पसंद आया हो, तो आप इस बात का ध्यान रखें कि लकड़ी की डिजाइन को लंबाई में रखें. इस से आप की किचन बड़ी दिखेगी.

काउंटरटौप हो खास

किचन में काउंटरटौप, जिस का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है. तो जब भी इस का चयन करें तो देखें कि यह हीट रिजिस्टैंट, स्टैन रेसिस्टेंट जरूर हो ताकि उस पर हीट व दागधब्बों का कोई असर न पड़े और अगर दागधब्बे पड़ जाएं तो वे आसानी से साफ हो जाएं. किचन काउंटरटौप के लिए ढेरों औप्शंस हैं जैसे ग्रेनाइट स्लैब व टाइल, मार्बल, नैनो वाइट, सौलिड सरफेस, स्लैट, रीसाइकल्ड ग्लास स्लेब व टाइल इत्यादि, जिन्हें आप अपनी पसंद व जरूरत के हिसाब से लगवा कर अपने किचन काउंटर को लौंगलास्टिंग व खूबसूरत बना सकते हैं.

प्रोफाइल हैंडल्स

ये हैंडल्स की तरह ही वर्क करते हैं. लेकिन आजकल हैंडल्स की जगह मौड्यूलर किचन में प्रोफाइल हैंडल्स का ही इस्तेमाल किया जा रहा है, जो डोर को आसानी से खोलने में मदद करते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि आप पूरी किचन कैबिनेट्स में एक ही पैटर्न का इस्तेमाल करें जैसे अगर लोअर कैबिनेट्स में  प्रोफाइल हैंडल्स का इस्तेमाल किया गया है, तो ऊपर व बैक में भी एकजैसे पैटर्न को फौलो करें.

इसी तरह अगर नौर्मल हैंडल्स का इस्तेमाल किया गया है तो पूरी किचन में इसी तरह के हैंडल्स का इस्तेमाल करना उपयुक्त रहता है वरना न किचन लुक वाइज अच्छी दिखती है और साथ ही कंफर्ट भी नहीं देती है. इसलिए एकजैसे पैटर्न का खासतौर पर ध्यान रखें.

स्टोरेज बास्केट्स

जिस तरह से मौड्यूलर किचन लोगों में पौपुलर है, ठीक उसी तरह मौड्यूलर किचन में स्टोरेज बास्केट्स का भी बहुत ही अहम रोल होता है ताकि आप को सामान रखने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो. आप को मार्केट में हाई क्वालिटी की स्टेनलैस स्टील की विभिन शेप व आकार में स्टोरेज बास्केट्स मिल जाएंगी, जिन्हें आप बड़ी आसानी से अपनी किचन में फिट करवा सकते हैं जैसे आप अपनी चौइस के हिसाब से प्लेन वायर बास्केट, प्लेट बास्केट, कटलरी बास्केट, कप सौसर बास्केट, अंडर सिंक बास्केट, डिश ड्रेनिंग बास्केट, बिन बास्केट, बोतल बास्केट, कौर्नर यूनिट्स इत्यादि लगवा कर अपनी किचन को सुंदर बनाने के साथसाथ उस में चीजों को सलीके से रखने के लिए आप को काफी स्पेस भी मिल जाएगी.

कलर कौंबिनेशन

आप घर में कितना भी महंगा काम क्यों न करवा लें, लेकिन अगर कलर कौंबिनेशन का ध्यान न रखा जाए तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. इसलिए घर के हर कोने की तरह किचन कैबिनेट में भी कलर कौंबिनेशन का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए. ताकि न तो किचन ज्यादा डल लगे और न ही ज्यादा चमकीली. इस के लिए आप अपनी किचन की स्पेस  को भी ध्यान में रखें. वैसे आजकल ट्रैंड में चल रही किचन कैबिनेट डिजाइन में प्रमुख कलर्स हैं.

सी ऐंड स्काई, लीफ ग्रीन ऐंड वाइट, बोल्ड ब्लू ऐंड सौफ्ट ब्लू, चैरी कलर, कूल ग्रे ऐंड हौट औरेंज, डीप ऐक्वा ऐंड वाइट, कौर्नफ्लोर ऐंड यलो इस तरह के कौंबिनेशंस को आप अपनी किचन के लिए चुन सकते हैं.

होब

अगर आप अपनी किचन को खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो किचन में होब भी जरूर लगवाएं. इस में किचन के स्लैब को कट कर के उस में होब को इंस्टौल किया जाता है और फिर पाइप्स बगैरा को अच्छे से सैट किया जाता है ताकि बाहर कुछ भी नजर न आए. इस से भले ही बजट थोड़ा बढ़ जाता है, लेकिन यह मौड्यूलर किचन में जान डालने का काम करता है. लेकिन इस की प्लानिंग पहले से कर लें. सिंक के चयन में भी खास ध्यान रखें.

चिमनी

भले ही चिमनी आप को एक और्डर करने भर से आप के घर आ जाएगी या फिर आप घंटों में उस की डिलिवरी ले सकते हैं, लेकिन जब भी मौड्यूलर किचन बनवाने के बारे में सोचें तो स्पेस व नाप के हिसाब से पहले ही चिमनी खरीद लें ताकि बाद में उसे लगवाने में कोई दिक्कत न आए. यह धुएं को तो बाहर निकालने का काम करती ही है, साथ ही किचन को भी मौड बनाती है. तो अब जब भी मौड्यूलर किचन बनवाने के बारे में सोचें तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें.

Actresses Karwa Chauth: कटरीना से लेकर मौनी तक, ऐसा था एक्ट्रेसेस का करवाचौथ

बीते दिन महिलाओं ने करवाचौथ (Karwa Chauth) सेलिब्रेट किया. इनमें बौलीवुड और टीवी की एक्ट्रेसेस के नाम भी शामिल हैं. जहां कुछ एक्ट्रेसेस ने पहला करवाचौथ मनाया तो वहीं बाकी एक्ट्रेसेस ने धूमधाम से सेलिब्रेट किया. आइए आपको दिखाते हैं एक्ट्रेसेस के करवाचौथ सेलिब्रेशन की खास फोटोज…

कटरीना कैफ ने मनाया पहला करवाचौथ

 

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करवाचौथ सेलिब्रेशन के मौके पर कटरीना कैफ और विक्की कौशल (Katrina Kaif And Vicky Kaushal) ने अपने शादी के बाद पहले करवाचौथ की फोटोज फैंस के साथ शेयर की हैं. इन फोटोज में वह कपल अपने सास ससुर के साथ पोज देता नजर आ रहा है तो वहीं करवाचौथ की रस्में निभाते हुए कटरीना कैफ की फोटोज बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

मौनी रॉय ने दिखाई अपनी झलक

 

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कटरीना कैफ के अलावा ब्रह्मास्त्र एक्ट्रेस मौनी रॉय (Mouny Roy) ने भी अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर करवाचौथ सेलिब्रेशन की दो फोटोज शेयर की हैं, जिनमें वह  पति सूरज नांबियार एक दूसरे को किस कर रहे हैं. वहीं दूसरी फोटोज में एक्ट्रेस मौनी रॉय छननी में पति का चेहरा देखती नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस की इन फोटोज पर फैंस जमकर प्यार लुटा रहे हैं.

टीवी एक्ट्रेस भी नहीं रही पीछे

 

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बौलीवुड एक्ट्रेस के अलावा टीवी की हसीनाएं भी अपना पहला करवाचौथ धूमधाम से सेलिब्रेट करती दिखीं. कुंडली भाग्य एक्ट्रेस श्रद्धा आर्या (Shraddha Arya) ने अपने पहले करवाचौथ के सेलिब्रेशन की खास फोटोज फैंस के साथ शेयर की, जिनमें वह अपना लुक और मेहंदी को फ्लौंट करती नजर आईं. एक्ट्रेसस की इन फोटोज को फैंस काफी पसंद कर रही हैं.

 

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नेहा कक्कड़ ने भी किया सेलिब्रेट

इनके अलावा सिंगर और एक्ट्रेस नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) ने पति रोहनप्रीत सिंह के साथ करवाचौथ सेलिब्रेट किया, जिसका फोटोज उन्होंने फैंस के साथ शेयर की. फैंस को एक्ट्रेस की ये फोटोज काफी पसंद आ रही हैं.

Bigg Boss 16: Tina और Shalin पर बरसेंगे Sumbul के पिता, लगाएंगे क्लास

कलर्स का रियलिटी शो बिग बॉस 16 (Bigg Boss 16) इन दिनों सुर्खियों में है. जहां एक तरफ शो में लव ट्रैक शुरु होता जा रहा है तो वहीं घर के सदस्यों की लड़ाई भी बढ़ गई है. इसी बीच वीकेंड के वार में टीना दत्ता (Tina Dutta) और शालीन भनोट (Shalin Bhanot) की क्लास लगते हुए नजर आने वाली है, जो कि और कोई नहीं बल्कि इमली एक्ट्रेस सुंबुल खान के पिता (Sumbul Fathar) होंगे. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

सलमान ने खोली टीना की पोल

 

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हाल ही में शो का नया प्रोमो जारी हुआ है, जिसमें सलमान खान (Salman Khan) ने सुम्बुल तौकीर खान को टीना दत्ता की शालीन और उनके रिश्ते पर की गई बातें बताते दिख रहे हैं. दरअसल, हाल ही में टीना दत्ता ने सुंबुल के लिए शालीन से कहा था कि ‘सुम्बुल (Sumbul Touqeer Khan) तुमको पसंद करती है. प्यार, इश्क, जुनून सबको दिखता है. सिर्फ मुझ अकेली को नहीं.’ इसी के साथ ही वह घरवालों के पास जाकर सुंबुल के एकतरफा प्यार की बात भी कहती नजर आ चुकी हैं.

टीना दत्ता पर बरसे सुम्बुल के पिता

 

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सलमान के टीना की पोल खोलने के बाद स्टेज पर सुम्बुल के पिता अपनी बेटी को सच का सामना करवाते दिख रहे हैं. वहीं टीना को फटकार लगाते हुए कह रहे हैं कि मुझे लगा था कि आप एक बड़ी बहन की तरह उसको संभालोगी. लेकिन आपने क्या किया. आपने तो पहले शालीन को उकसाया. और फिर उस कहानी को लेकर पूरे घर में एक-एक बंदे को बताया. इसके बाद बेटी को नसीहत देते हुए कहा- सुम्बुल, देख लो दुनिया कैसी है बेटा. जो दिखता है, वो होता नहीं है. तुम जितनी साफ दिल की हो ना, उससे मैं डर गया हूं.

सलमान ने कही ये बात

 

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एक तरफ जहां सुबुंल के पिता ने शालीन (Shalin Bhanot) को भी फटकार लगाई तो वहीं सलमान खान ने शालीन और सुम्बुल के रिश्ते में प्यार और फिलिंग्स ना होने की बात कही. हालांकि अब देखना होगा कि सलमान के खुलासे पर सुंबुल, टीना और शालीन का रिश्ता कितना बदलता है.

बता दें, काफी दिनों से टीना दत्ता, शालीन भानोट को सुंबुल के दिल में उसके लिए प्यार होने की बात कहती दिख रही हैं. वहीं सभी घरवालों को भी यह बात बताती दिख रही हैं.

Diwali Special: इन 11 टिप्स से कम खर्चे में घर को दें नया लुक

दीवाली पर घर की साफ सफाई करके भांति भांति की सजावटी चीजों से सजाया जाता है परन्तु हर दीवाली पर नई नई चीजें खरीदना न तो हर किसी के वश में होता है और न ही खरीदने में बुद्धिमानी है. नया सामान खरीदने से बेहतर है कि घर मे उपलब्ध सामान से ही घर को सजाने का प्रयास किया जाए इससे आपका अनावश्यक खर्चा भी नहीं होगा और आपके घर को भी नया लुक मिल जाएगा. आज हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनकी मदद से आप कम से कम खर्चे में अपने थोड़े से प्रयास से ही अपने घर को आसानी से नया लुक दे पाएंगी-

1-यदि सम्भव है तो सर्वप्रथम अपने घर के फर्नीचर के स्थान को बदल लें मसलन डायनिंग टेबल और सोफे की दिशा को बदल दें इससे ही  आपके कमरे को नया लुक मिल जाएगा.

2-यदि आप सोफे पर अभी तक बड़े कुशन्स रखतीं आईं हैं और घर में छोटे कुशन्स हैं तो बड़े छोटे कुशन्स की मैचिंग करके रखें.

3-बेकार हो चुके कुशन्स को जोड़कर इसके किनारों पर किसी चमकीले दुपट्टे से पट्टियां काटकर लगाएं. इस शानदार कार्पेट को आप घर के किसी भी स्थान पर  डाल दें.

4-सुतली या गोटे को फेविकोल की मदद से चिपकाएं और इन्हें अपने ड्राइंग और डायनिंग रूम में रखें.

5-घर में प्रयोग न आने वाले कांच के ग्लासों के बीच में फेविकोल की मदद से चमकीली लेस लगाएं और इनमें दीवाली पर दिए रखकर घर में रखें.

6-प्लास्टिक की अनुपयोगी किसी भी आकार की डलिया या ट्रे पर साटन, बनारसी या कोई भी चमकीला कपड़ा चिपकाएं और फिर इसे मेहमानों को नाश्ता सर्व करने के लिए प्रयोग करें.

7-कांच के खाली जारों में रंग बिरंगी एल ई डी लाइट्स डाल दें और दीवाली वाले दिन इन्हें जलाएं.

8-घर की साफ सफाई के दौरान निकले बेकार कप्स, ग्लास और जारों को मनचाहे आयल पेंट से रंगे और फिर कन्ट्रास कलर से फूल पत्ती, पोल्का डॉट्स आदि से सजाकर मनी प्लांट, सिंगोनियम और कैक्टस जैसे कम पानी की आवश्यकता वाले पौधे लगाएं.

9-डायनिंग और सेंट्रल टेबल के पुराने कवर को काटकर अपनी कवर्ड और किचिन की ड्रॉअर का कवर बना लें.

10-डायनिंग टेबल पर नए कवर के स्थान पर घर मे उपलब्ध किसी खूबसूरत चादर को बिछाकर ऊपर से पारदर्शी कवर बिछाएं.

11-नए पर्दे खरीदने के स्थान पर अपनी अनुपयोगी साडियों को मिक्स एंड मैच करके पर्दे बनाएं. आप कमरों के पर्दों की अदला बदली करके भी अपने घर को नया लुक दे सकतीं हैं.

विधवा विदुर: किस कशमकश में थी दीप्ति

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