क्या लड़की का बाहर अकेले रहना गलत है? आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताएंगे जो घर से बाहर बहुत दूर दूसरे शहर में रहती है.जौब करती है, खुद के पैरों पर खड़ी है किसी के सामने हांथ नहीं फैलाना पड़ता है.उसका नाम है नेहा. हां नेहा ने जब पढ़ाई शुरु की थी और जब वो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी तो लोगों ने उससे सवाल किए की तुम आगे क्या करना चाहती हो.

उसने कहा मेरे सपने कुछ ज्यादा बड़े नहीं है बस मैं चाहती हूं कि लाइफ में अच्छी पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़ी हो जाउं और अच्छी जॉब करके पैरेंट्स की हेल्प भी करूं. लेकिन रिश्तेदार और समाज तो समाज ही होते हैं.जब एक लड़की के बाहर रह कर पढ़ाई या जौब करने की बात आती है तब उनके कई सवाल खड़े हो जाते हैं.

हे भगवान अकेली लड़की है बाहर कैसे रहेगी. और कहीं लड़की बाहर जाकर कुछ गलत न कर बैठे आजकल जमाना बड़ा खराब है.जरा सोचो तो औफिस जाएगी लड़की,फिर बड़े-बड़े शहरों में लोग पार्टी करते हैं वहां जाएगी तो कहीं कुछ गलत न हो जाए.कुछ ऐसे ही सवाल और डर थे नेहा के सामने.लेकिन उसने भी ठान लिया था वो अपनी जिंदगी अपने मर्जी से ही जीएगी.

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वो दिन था मार्च 2018 का जब नेहा को नौकरी मिली और उसे दिल्ली जाना था नौकरी के लिए.परिवार के आंखों में चिंता थी तो वहीं रिश्तेदारों के आंखों में शंका.अरे देखों तो उनकी बेटी दिल्ली जा रही है. कलयुग है कहीं ऐसा न हो कि मां-बाप की नाक कटा दें.जमाना बड़ा खराब है.

नेहा का परिवार ज्यादा धनी नहीं था,नेहा ने बहुत मेहनत की नौकरी के साथ-साथ वो अपने परिवार का ध्यान भी अच्छे से रखना जानती थी.देखते ही देखते नेहा के परिवार के हालात बहुत अच्छे हो गए और नेहा भी छुट्टियों में घर आती-जाती रहती थी.

एक बार नेहा घर आई हुई थी कि तभी उसके कुछ रिश्तेदार उसेक घर आए औऱ वही सवाल की अरे बेटा तू तो अकेले रहती है सब ठीक तो है न वहां कुछ गड़बड़ तो नहीं.इससे पहले कि वो कुछ और कहते नेहा समझ चुकी थी कि बस अब ये क्या कहने वाले हैं और क्या सोच रहें है.लेकिन नेहा ने सोच लिया कि आज तो उनको जवाब देना ही होगा.

नेहा ने कहा हां मैं एक लड़की हूं और मैं अकेले रहती हूं.हां मैं एक लड़की हूं मेरे मां-बाप को गर्व है मुझपर.हां मैं एक लड़की हूं.लेकिन अकेले रहने का ये मतलब नहीं की मैं बिगड़ गई या मैनें अपने परिवार की इज्जत डुबो दी.हां मैं एक लड़की हूं औऱ मैं भी एक लड़के की तरह अपने परिवार का ध्यान रख सकती हूं अकेले.मैं बाहर अकेले ही कब कुच हैंडल करती हूं.

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मुझे कोई दिक्कत नहीं होती है वहां.और वहां पर मेरे कई दोस्त भी हैं जो हमेशा मेरी मदद करते हैं जरूरत पड़ने पर.हां मैं पार्टी में भी जाती हूं लेकिन अपनी मर्यादा पता है मुझे.अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीती हूं इसलिए अकेले रहती हूं. अपनी शर्तों पर जीती हूं जिंदगी इसलिए अकेले रहती हूं और हां ये सब करने के लिए मेरा एक लड़का होना जरुरी नहीं है मैं खुश हूं कि मैं एक लड़की हूं औऱ  मैं बाहर अकेले रहती हूं.मैनें कोई गुनाह नहीं किया.

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