कभीकभी अतिमहत्त्वाकांक्षा, बेबाकी और बड़बोलापन खुद पर ही भारी पड़ जाता है. बौलीवुड क्वीन कंगना रनौत के साथ यही हो रहा है. ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध परिस्थितयों में हुई मौत की जांच के मामले में महाराष्ट्र सरकार से बैर मौल ले कर कंगना ने अपने लिए कई मुसीबतें खड़ी कर ली हैं. एक ओर जहां उन का फिल्म कैरियर दांव पर लगा है, इंडस्ट्री के ज्यादातर लोग उन से अलग हो चुके हैं, वहीं बौंबे म्यूनिसिपल कारपोरेशन (बीएमसी) उन के बांद्रा स्थित ‘मणिकर्णिका फिल्म’ के औफिस पर चढ़ बैठा है. बीएमसी ने कंगना के दफ्तर को अवैध निर्माण बता कर ढहा दिया है और मुंबई पुलिस ड्रग्स लेने के आरोप में उन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर के जांच शुरू कर चुकी है.

9 सितंबर को मुंबई पहुंचने पर एयरपोर्ट पर कंगना को शिवसैनिकों ने काले झंडे दिखाए. उन के समर्थकों और विरोधियों के बीच एयरपोर्ट पर भारी हंगामा हुआ और नौबत मारपीट तक पहुंच गई. कंगना को वीआईपी गेट के बजाय दूसरे गेट से बाहर निकालना पड़ा. वे एयरपोर्ट से सीधे खार स्थित अपने घर पहुंचीं, जहां 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी उन के घर के बाहर तैनात किए गए थे.

सोशल मीडिया का सहारा

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की तह तक पहुंचने में जहां देश की 3 बड़ी जांच एजेंसियां लगी हैं और 3 माह बीतने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची हैं, वहीं कंगना ने शुरू से ही सुशांत की मौत को हत्या करार दे कर सोशल मीडिया पर इस मामले में अपनी राय जाहिर करनी शुरू कर दी थी.

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