बढ़ती बेकारी का एक असर यह है कि लड़कियां जो पहले पढ़ाई के बाद कैरियर के नाम पर कुछ साल घरों से दूर निकल सकती थीं और अपने मनचाहे से प्रेम, सैक्स और विवाह कर सकती थीं, अब घरों में रह रही हैं और रोज शादी का दबाव झेल रही हैं. मातापिता चाहे कितने ही उदार और प्रगतिशील हों, वे तो समझते हैं कि अगर नौकरी पर नहीं हैं तो विवाह योग्य साथी नहीं मिलेगा और बिना साथी बेटी कुंठित रहेगी इसलिए उस की शादी कर देनी चाहिए.

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