आज का युग डिजिटल का है. हमें कुछ भी करना हो तो मिनटों में अपने कंप्यूटर, मोबाइल से कर लेते हैं. मार्केट जाने की जरूरत नहीं होती. जैसे औनलाइन पेमैंट, शौपिंग बगैरा. हम घर बैठे अपनी पसंद की ड्रैस, ऐक्सैसरी, गैजेट का मिनटों में और्डर कर देते हैं, जो सुविधाजनक होने के साथसाथ समय की बचत भी करता है. यह सही भी है कि जब इन सब की सुविधा है तो उस का भरपूर इस्तेमाल क्यों न किया जाए. मगर इस के साथ यह जानना भी जरूरी है कि जो प्रोडक्ट हम खरीद रहे हैं वह सही है या नहीं ताकि बाद में पछताना न पड़े. प्रोडक्ट के बारे में जानकारी आप रेटिंग व कमैंट्स से ले सकते हैं.

क्या है रेटिंग

रेटिंग भले ही बहुत सिंपल सा स्टैप हो, लेकिन इस का प्रभाव बहुत गहरा पड़ता है. यह वर्ड औफ माउथ मार्केटिंग को बढ़ावा देने व भुगतान किए विज्ञापनों के परिणामों में सुधार लाती है. सब से महत्त्वपूर्ण यह कि वह खरीद को प्रभावित करती है.

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कैसे दी जाती है रेटिंग

आप जब भी कुछ औनलाइन खरीदते हैं तो उस के बाद आप के पास उसे रेटिंग देने का औप्शन दिया जाता है, जिस में उस प्रोडक्ट के बारे में अपना ऐक्सपीरियंस बता सकते हैं. रेटिंग 1 से 5 के बीच में दी जाती है. जिस का मतलब है कि अगर आप उस प्रोडक्ट से असंतुष्ट हैं तो आप 1 स्टार दें, अच्छा लगा है तो 2 स्टार दें. अगर आप को प्रोडक्ट ठीकठीक लगा है तो 3 स्टार दें, उत्तम लगा है तो 4 स्टार और बहुत अच्छा लगा है तो 5 स्टार दे सकते हैं.

रेटिंग व कमैंट्स का प्रभाव

अगर हम कोई प्रोडक्ट औनलाइन खरीदना चाहते हैं तो हम सब से पहले उस प्रोडक्ट की रेटिंग व कमैंट्स पढ़ते हैं, जिस से हमें पता चलता है कि प्रोडक्ट खरीदने योग्य है या नहीं. रेटिंग व कमैंट्स देने के लिए यूजर्स स्तंभ होते हैं. वे अपने अनुभव के आधार पर उसे नैगेटिव व पौजिटिव कोई भी रेंकिंग दे सकते हैं. वे कमैंट्स में लिख कर भी बता सकते हैं कि उन्हें अमुक चीज पसंद नहीं आई है, इस में यह कमी है, इस में ये फीचर्स और होने चाहिए थे, कीमत के हिसाब से क्वालिटी कुछ ठीक नहीं है बगैराबगैरा. उन के कमैट्स अन्य लोगों के लिए काफी मददगार साबित होते हैं, साथ ही यूजर्स के कमैंट्स कंपनी को भी अपने प्रोडक्ट को इंप्रूव करने में मदद करते हैं.

पौजिटिव रेटिंग करती खरीदने को मजबूर

आप मोबाइल फोन खरीदने के बारे में सोच रहे हैं और यही सोच कर आप शौपिंग साइट खोल कर बैठे हैं, जिस पर आप की नजर ऐसे मोबाइल फोन पर जाती है, जो लुकवाइज तो अच्छा है ही, साथ ही यूजर्स के कमैंट्स व रेटिंग देख भी आप उसे खरीदे बिना नहीं रह पाएंगे.

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‘यह फोन की कीमत कम होने के साथसाथ इस के सभी फीचर्स भी महंगे फोन जैसे हैं और वेट में भी इतना लाइट है कि आप ने कभी सोचा भी नहीं होगा. इतनी कम कीमत पर इतने फीचर्स आप को किसी दूसरे फोन में नहीं मिलेंगे’, ‘इतने फीचर्स वाला और इतनी कम कीमत पर ऐसा फोन मिलना मुश्किल है’, ‘फोन का लुक काफी अच्छा है, जिसे कैरी कर आप काफी अच्छा फील करेंगे,’ ये सभी कमैंट्स आप को तुरंत फोन खरीदने को मजबूर कर देंगे.

गलत सामान आने के चांसेज कम

जब भी हम मार्केट से कोई सामान खरीदते हैं तो हमें गारंटी नहीं होती कि वह प्रोडक्ट सही है या नहीं, क्योंकि वहां सिर्फ हम दुकानदार की बात सुन कर ही सामान खरीदते हैं, जिस में ओपिनियन कम होता है. लेकिन जब हम औनलाइन शौपिंग करते हैं, तो एक प्रोडक्ट पर ढेरों लोगों के कमैंट्स हमारी काफी मदद करते हैं, जिस से गलत चीज आने के चांसेज कम रहते हैं. क्योंकि कमैंट्स करने वाले पहले ही उसे यूज जो कर चुके होते हैं.

रेटिंग अपनेआप में प्रोडक्ट का प्रमोशन

जहां कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए समाचारपत्र, टीवी, रेडियो आदि पर लाखों रुपए खर्च कर विज्ञापन देती हैं ताकि अधिक से अधिक लोग उन का प्रोडक्ट खरीदें, वहीं रेटिंग प्रोडक्ट के बारे में एक इमेज बना देती है, जिस से या तो प्रोडक्ट को खरीदते हैं या फिर नहीं.

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