पत्नी खाना बनाए और पति आराम फरमाए, यह आज की पत्नी को गवारा नहीं. पति को सुबह बेड टी चाहिए, वह देर से उठे, नहाए, नाश्ता करे, 1-2 बार रौब झाङे और औफिस के लिए निकल जाए, आज की पत्नी को यह भी पसंद नहीं.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा ही मजेदार वाकेआ सामने आया है, जिस में एक पत्नी को पति की अरामफरोशी से चिढ हो गई.

उधर पति समाज के बुने दकियानुसी तानेबाने का शिकार था और आम भारतीय पतियों की तरह ही था, जिसे घर के कामों से चिढ थी.

पत्नी ने इस का विरोध किया तो फिर ततू मैंमैं शुरू हो गई.

कामकाजी हैं पतिपत्नी

पतिपत्नी दोनों ही एक निजी कंपनी में ऐग्जीक्यूटिव के पद पर हैं. दोनों ही को औफिस समय पर पहुंचना होता था. पति औफिस से घर आता, सोफे पर पसर कर टीवी देख रहा होता और खाने की फरमाइश करता. उधर पत्नी बच्चों में लग जाती, किचन में खाना बना रही होती और फिर रात को बिस्तर पर जाने पर पति सैक्स की फरमाइश कर देता.

पति की इन्हीं आदतों को पत्नी के लिए रोज झेलना असहनीय हो गया. एक दिन उस ने कहा,”मुझ से यह सब रोजरोज नहीं होगा. आज तुम बरतन मांजो, खाना बनाओ और बच्चों को देखो.”

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इससे पहले कि शादी टूटती…

पत्नी अब पति की फरमाइशें पूरी करने में नानुकुर करने लगी. ऐसे में दोनों के बीच रोज ही खटरपटर शुरू हो गई. रोजरोज की चिकचिक जब बङी लङाई का रूप लेने लगी और बात तलाक तक जा पहुंचा तो दोनों ने मिल कर एक ऐसा फैसला लिया जिसे जान कर आप को हैरानी होगी.

दरअसल, दोनों ने इस मुद्दे को सुलझाने का अनोखा तरीका ढूंढ निकाला.

लिखित में समझौता

दोनों के बीच एक समझौता हुआ और इस के लिए मौखिक नहीं बल्कि लिखित में अपनीअपनी शर्तें रखीं. फिर उन्होंने 100 रूपए के स्टांप पेपर लिए और शर्तों को टाइप करा कर प्राधिकरण पहुंच गए.

प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश आशुतोष मिश्रा ने मीडिया को बताया,”अभी तक यही सुना था कि पतिपत्नी की लङाई में पति ने पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया. फिर पत्नी ने ससुराल वालों पर मुकदमा दर्ज करा दी, दहेज और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगा दिए मगर पहली बार इस तरह का अनोखा मामला सामने आया है, जहां 10 साल पुरानी शादी को एक दंपति ने आपसी समझदारी से सुलझा लिया है. उन्होंने आपस में एक शर्त पर समझौता करते हुए लिखित में दिया है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा ताकि कानूनी मुहर लग सके.”

क्या है समझौते में

  • शनिवाररविवार 2 दिन पति खाना बनाएगा और पत्नी आराम करेगी.
  • बच्चों का होमवर्क भी इस दिन पति कराएगा.
  • दोनों में से कोई भी बीमार पङेगा तो खाना बाहर से मंगवाया जाएगा.
  • स्कूल में पेरैंट्स मीटिंग पारी के हिसाब से करना होगा.
  • औफिस से कोई लेट आएगा तो फोन पर इस की सूचना देनी होगी.
  • घर का खर्च दोनों मिल कर उठाएंगे.
  • भविष्य के लिए बचत जरूरी होगा.
  • एकदूसरे के घर वालों की इज्जत करनी होगी और उन की देखभाल की जिम्मेदारी उठानी होगी.

खुद के लिए दंड का प्रावधान

पतिपत्नी ने समझौते में दंड का प्रावधान भी किया है-

इस के तहत अगर किसी एक ने नियम का पालन नहीं किया अथवा समझौते का उल्लंघन किया तो दूसरे को अलग रहने का अधिकार होगा.

नियम

दंपति के आपसी झगड़ों, तलाक, पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए प्राधिकरण दंपति के बीच समझौता कराने की पहल करता है. संबंधित व्यक्ति की काउंसिलिंग भी प्राधिकरण कराता है ताकि शादी टूटे नहीं.

यहां हुए समझौतों को चुनौती नहीं दी जा सकती और दोनों पक्षों के लिए मान्य होता है.

सराहनीय कदम

देश में बढते तलाक के मामले को देखते हुए पतिपत्नी का यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है. इस दंपति ने रोजरोज के झगङे का खुद पर और बच्चों पर आकलन किया. इन्हें तलाक ले कर अलग रहने में बुराई नजर आई.

तलाक के बाद बच्चों की भविष्य की चिंता भी हुई. इसलिए दोनों ने यह फैसला किया कि तलाक न ले कर साथ रहने में बुराई नहीं, भले ही जिंदगी शर्तों पर क्यों न जिए जाएं. इस से दोनों साथ भी रह सकेंगे और बच्चों का भविष्य भी बना सकेंगे.

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मालूम हो कि तलाक के बाद पतिपत्नी तो अपनीअपनी राह निकल पङते हैं पर बच्चों का भविष्य चौपट हो जाता है.

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