Unnecessary Involvement : पूजा और निशा बैस्ट फ्रैंड थी. दोनों का उठानाबैठना, खानापीना, मौजमस्ती सब साथ होता था. इसलिए जब निशा की शादी नजदीक आई तो पूजा ने उस की शादी की शौपिंग की सारी जिम्मेदारी उठा ली. पूजा की शादी हो चुकी थी इसलिए अपने ऐक्सपीरियंस के बेस पर उस ने निशा की शौपिंग की लिस्ट तैयार कर ली और हर खरीदारी में निशा के साथ जाती. मगर पूजा की मदद धीरेधीरे निशा के जी का जंजाल बन गई.
‘यह मत ले, यह दुकान नहीं वह दुकान, मेरी बात मान मु?ो ऐक्सपीरियंस है’, सुनसुन कर निशा के कान पक चुके थे. हद तो तब हुई जब पूजा निशा की वैडिंग ड्रैस से मिलतीजुलती ड्रैस ले आई. अब तो निशा के सब्र का बांध टूट गया और वह चिढ़ कर बोली, ‘‘बस कर पूजा. शादी मेरी है तेरी नहीं, इसलिए दुलहन मु?ो ही दिखने दे.’’
यारीदोस्ती के चक्कर में हम कभीकभी अपनापन जताने के चलते अपनी राय देने की जगह अपनी पसंद थोपने लगते हैं. हम यह भूल ही जाते कि हम मदद करने के लिए आगे बढ़े हैं न कि मनमानी करने के लिए. जैसे अकसर देखा जाता है कि शादीब्याह में खास सहेलियां एकदूसरे की शौपिंग साथ मिल कर करती हैं. दुलहन अपनी किसी न किसी खास सहेली के साथ खरीदारी करते दिखती है.
आखिर जब आम शौपिंग सहेली के साथ खास हो जाती है तो स्पैशल इवेंट की शौपिंग में सहेली का होना कितना खास होता होगा, इसलिए अपनी सहेली की खास शौपिंग में उस का जी भर के साथ दें लेकिन इन बातों का ध्यान भी रहे:
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