एक व्यक्ति सामाजिक जाल से बच कर नहीं जी सकता. हमारे अस्तित्व के लिए समाज के प्रति अपनेपन की भावना का होना आवश्यक है. जब किसी व्यक्ति का किसी एक सामाजिक समूह द्वारा जान बूझ कर बहिष्कार किया जाता है तो यह उसके दिमाग में स्ट्रेस का कारण बन सकता है. जिसके कारण न केवल डिप्रेशन बल्कि आत्महत्या की भी नौबत आ सकती है. इसलिए उसकी भागीदारी भी उसके मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य व सफलता के लिए आवश्यक होती है. इस कारण कोई भी इंसान नकारत्मक हो सकता है जिसकी वजह से उस के इम्यून सिस्टम पर भी प्रभाव पड़ सकता है. अतः अपनेपन की भावना को हम आत्मविश्वास से जोड़ सकते हैं.

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