विनीता सिंह

सीईओ, शुगर कौस्मैटिक्स

आज से 5 साल पहले हर इंडियन स्किन टाइप और टोन को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई शुगर कौस्मैटिक्स के ब्यूटी प्रोडक्ट्स ने पूरे भारत में ही नहीं पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इसे आगे लाने में उन की उम्दा रिसर्च टीम है, जो ग्राहकों की पसंद और चाह का बारीकी से अध्ययन कर बाजार में उत्पाद को लाती है, लेकिन इन सब के पीछे रहती हैं शुगर कौस्मैटिक्स की फाउंडर, सीईओ विनीता सिंह, जिन्होंने हमेशा अलग और यूनीक उत्पाद का ग्राहकों से परिचय करवाने की ठानी और इस मकसद में आज कामयाब हैं. हंसमुख, विनम्र और ऐनर्जेटिक विनीता से जानते हैं कैसे उन्होंने अपने उत्पाद को एक नया आयाम दिया:

शुगर कौस्मैटिक्स कंपनी को शुरू करने के पीछे आप की प्रेरणा क्या थी?

मैं ने हमेशा से सोचा है कि शुगर ऐसा ब्रैंड हो, जो हर यंग लड़की जो औनलाइन शौपिंग करती है उस के वैनिटी बैग हो. इसलिए नाम भी ऐसा हो ताकि वे अपनेआप को उस से जोड़ सकें और वह एक हाउसहोल्ड नाम हो, इसलिए मैं ने इस का नाम शुगर कौस्मैटिक्स रखा. यही मेरी प्रेरणा थी और मैं ने शुगर जैसा आसान नाम रखा, क्योंकि शुगर या मीठा खाने से आप को एक खुशी और कैलोरी मिलती है और यही मेरे ब्रैंड में भी है, जिस के इस्तेमाल से आप खुशी महसूस करती हैं.

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कैसे आगे बढ़ीं?

8 साल से हम एक ई कौमर्स कंपनी चला रहे हैं, जहां हर महीने अपने ग्राहकों को उन की चौइस के हिसाब से अलगअलग ब्रैंड के ब्यूटी प्रोडक्ट्स भेजते थे और यह मैं ने इंडिया में मार्केट ट्रैंड को देखते हुए शुरू किया था, क्योंकि अभी हमारे यहां ब्यूटी का मार्केट लगभग 6 बिलियन डौलर है, जो अगले 5 साल में

20 बिलियन डौलर हो जाएगा. बहुत तेजी से यह इंडस्ट्री बढ़ रही है, क्योंकि अब महिलाएं सुंदर और स्मार्ट दिखने के प्रति जागरूक हो रही हैं. ई कौमर्स के जरीए पता चला कि जो महिलाएं ऐसी औनलाइन शौपिंग करती हैं, उन की शिकायत थी कि उन के लिए सही उत्पाद जिस में खास कर लिपस्टिक्स उन के रंगरूप के हिसाब से नहीं मिलतीं. खासतौर पर सही न्यूड लिपस्टिक नहीं मिलती. इस के अलावा यहां की गरमी में जो प्रोडक्ट पूरे दिन होंठों पर टिका रहे ऐसा भी मिलना मुश्किल था. इन सब को फोकस करते हुए मिलेनियल के लिए कंपनी खोलने के बारे में सोचा, जो इंडियन स्किन टोन और मौसम के लिए एकदम परफैक्ट हो. साढ़े तीन सौ प्रोडक्ट्स में 100 लिपस्टिक्स ही हैं, जिन्हें किसी भी स्किन टोन की महिला लगा सकती है. लौंग लास्टिंग की गारंटी हम देते हैं.

किसी प्रोडक्ट को मार्केट तक लाने से पहले कितना रिसर्च वर्क होता है?

हमारी इन हाउस 10 से 15 लोगों की टीम है, जो प्रोडक्ट डैवलपमैंट पर काम करती है. इस के अलावा हमारे लैब जरमनी, कोरिया, इटली आदि देशों में हैं. यहां की टीम किसी फौर्मूला को भारत के हिसाब से विदेश की लैब में रिसर्च करती है. यहां टेस्टिंग की जाती है, जो भी परिवर्तन की जरूरत होती है उसे विदेश में ही किया जाता है और वहां करीब 100 लोग काम करते हैं. हमारी कंपनी की टैग लाइन है- ‘रूल द वर्ल्ड वन लुक ऐट ए टाइम’ और यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करती है, क्योंकि जब आप मेकअप करते हैं तो आप का कौन्फिडैंस बढ़ता है, जो किसी और चीज से नहीं मिल सकता, सिंपल सी एक लिपस्टिक लगाने से भी कौन्फिडैंस मिलता है और आप कुछ भी करने से पीछे नहीं हटतीं.

आज की महिलाएं औनलाइन शौपिंग करती हैं. ऐसे में आप के लिए क्या चुनौती है?

यह सही है कि काफी ब्रैंड बाजार में हैं और सब इंडियन स्किन टोन के हिसाब से उत्पाद बनाने की गारंटी भी देते हैं. ऐसे में हमारी टीम लगातार ग्राहकों के सु झावों को फौलो करती है. हर साल हमारी कंपनी 4 प्रोडक्ट्स लौंच करती है. इस के अलावा 15 लोगों की कस्टमर डिलाइट टीम भी है. वह दिनरात ग्राहकों के संपर्क में रह कर उन की फीड बैक को रिसर्च ऐंड डैवलपमैंट टीम तक पहुंचाती है, जिस का समाधान वे लगातार करते रहते हैं. मार्केट के कंपीटिशन को भूल कर परफैक्ट लिपस्टिक और आईलाइनर, जो कंपनी का खास उत्पाद है उस पर ध्यान देती हूं ताकि ग्राहक किसी और ब्रैंड के बारे में न सोच सकें. चुनौतियां बहुत थीं, मेरा मार्केटिंग बजट कम था. रिटेलर्स तक पहुंचने में समय लगा. मैं ने ऐसे ही प्रोडक्ट रिटेलर्स को दिया. वे खुद ट्राई कर फिर हम से जुड़े. मेरा सारा मार्केटिंग वर्क मेरे प्रोडक्ट ने खुद ही किया है, जो ‘वर्ड औफ माउथ’ से हुआ है. महिलाओं के अनुभवों ने ही मु झे सब से अधिक आगे बढ़ने में सहायता की है. सारी मेहनत हम प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए करते हैं.

सही मेकअप का चुनाव किसी भी महिला के लिए कितना जरूरी है?

यहां सालों से लाइट कलर के फाउंडेशन और हलके कलर की लिपस्टिक्स आ रही हैं. गोरी रंगत को ही अधिक महत्त्व दिया जाता है. ऐसे में सांवली रंगत वाली महिलाएं मेकअप करना नहीं चाहतीं. 70 से 80% महिलाएं ऐसा ही सोचती हैं. लेकिन आज की लड़कियां अपने हिसाब से मेकअप करती हैं. मैं ने कैंपेन कर भारत के लिए 22 फाउंडेशन कलर लौंच किए. बेस सही होना बहुत जरूरी है और मैं ने ऐसी ही सोच के साथ 22 फाउंडेशन से महिलाओं को परिचित करवाया जो सब के स्किन के लिए फिट हैं.

सब से अधिक मांग किस उत्पाद की है?

लिक्विड मैट लिपस्टिक्स, मैट आईलाइनर कलैक्शन, फाउंडेशन स्टिक विद ब्रश, जो बहुत चर्चित हैं. औनलाइन के अलावा शुगर कौस्मेटिक्स की वैबसाइट पर सारे कलैक्शन मिलते हैं. सारे प्रोडक्ट एफडीए अप्रूव्ड हैं. किसी भी प्रोडक्ट में लेड, मरक्युरी आदि जीरो है.

महिला सशक्तिकरण की दिशा में आप की कंपनी क्याक्या करती है?

कंपनी की टीम में 700 से अधिक महिलाएं काम करती हैं और वे परंपरागत परिवार से हैं, पर वे अब काम कर अपने पूरे परिवार को संभालती हैं.

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आगे की प्लानिंग क्या है?

मु झे अपना डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि 90% लोग औनलाइन शौपिंग करते हैं. इस के अलावा ईजी स्किन केयर प्रोडक्ट निकाल रहे हैं, जिन्हें यूथ ट्राई कर अपना अनुभव डिजिटल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं. इस के अलावा शुगर मेकअप स्टेशन भी कई मौल में है, जहां जा कर महिलाएं मुफ्त में मेकअप आर्टिस्ट से मेकअप करा सकती हैं. अमेरिका और रशिया में भी शुगर के प्रोडक्ट मिलते हैं.

परिवार का सहयोग कितना है?

मेरे पति कौशिक मुखर्जी कंपनी के कोफाउंडर हैं. उन का सहयोग हमेशा रहता है. इस के अलावा मेरा सपोर्ट सिस्टम बहुत अच्छा है. मेरी मां मु झे सहयोग देती हैं. जब भी समय मिलता है मैं परिवार के साथ रहती हूं.

खुद को अपडेट कैसे करती हैं?

मैं काफी समय ग्राहकों, सप्लायर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ बिताती हूं. इस से फीड बैक मिला है और बहुत कुछ सीखने को मिलता है.

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