नौकरी के पीछे युवा फौज का बढ़ता आंकड़ा भारतीय मानसिकता की इस बात की पुनर्स्थापना करता है कि पढ़लिख कर ब्राह्मण समान बन जाना ही शिक्षा का उद्देश्य है और पढ़ेलिखे हैं, तो हाथ का काम कैसे कर सकते हैं. पढ़ेलिखे हैं तो नौकरी होनी चाहिए, चाहे कैसी भी हो, हाथ से करने का काम न हो. बेरोजगारी के भयावह आंकड़े बताते हैं कि अनपढ़ युवकों में शहरों में रहने वाले केवल 2.1 फीसदी बेरोजगार हैं जबकि पढ़ेलिखे 9.2 फीसदी बेरोजगार हैं. शहरी लड़कियों में 0.8 फीसदी अनपढ़ लड़कियां बेरोजगार हैं तो 20 फीसदी शिक्षित लड़कियां बेरोजगार हैं.

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