सिलिकौन वैली में अपने आकर्षक कैरियर को बीच में छोड़ कर उपासना टाकू ने 2008 में भारत लौट अपने घर के ईकोसिस्टम में योगदान देने का फैसला लिया. 1 साल बाद उन्होंने ‘मोबिक्विक’ की सहस्थापना की.

कुछ कर्मचारियों से शुरुआत कर 300 लोगों की एक मजबूत टीम बनाने तक उपासना ने ‘मोबिक्विक’ में सभी चीजों को एकजुट करने में मुख्य जिम्मेदारी निभाई और अपनी टीम को भारत के सब से बड़े स्वतंत्र मोबाइल भुगतान नैटवर्क बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रखा.

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