Family Story in Hindi: अविनाश की शादी एक ग्रैंड वैडिंग तो नहीं बन पाई लेकिन एक यादगार वैडिंग जरूर बन गई. ऐसी वैडिंग जिस में वैडिंग हौल दोस्त का घर था, डैकोरेशन हैड एक स्कूल टीचर और एक प्रैगनैंट दुलहन.
पुणे के हिंजवाड़ी सैक्टर में आईटी कंपनियों की कतार सी लगी है और इसी कतार में लाखों कर्मचारी अपने भविष्य को बनाने की कतार में. इन्हीं में से एक अविनाश और एक सुरभि. जो एक ही बिल्डिंग के अलगअलग औफिस में काम करते हैं. अविनाश एक आईटी सैक्टर कंपनी में तीसरी मंजिल पर और सुरभि कौस्मैटिक कंपनी में 5वीं मंजिल पर. दोनों की काम करने की मंजिल भले अलग थी लेकिन जीवन मंजिल एक ही. शायद इसलिए दोनों एक दोपहर बिल्डिंग के ओपन टैरेस जो छठी मंजिल पर था वहां अचानक से टकरा गए.
‘‘आई एम सौरी मेरा ध्यान नहीं था,’’ अविनाश ने कहा.
‘‘नो ऐक्चुअली गलती मेरी थी. मैं ही फोन में बिजी थी,’’ सुरभि ने कहा.
अविनाश अपनी चाय ले छत के एक कोने में चला गया और सुरभि अपनी सिगरेट पकड़े दूसरे कोने में. दोनों खड़े भले अलगअलग कोने में थे लेकिन अपना ध्यान एकदूसरे के कोने में ही लगा रहा.
अगले दिन अविनाश ठीक उसी समय छत पर गया. कुछ देर वहां बैठा भी
लेकिन सुरभि नहीं आई न दिखी. अविनाश ने ज्यादा उम्मीद न लगाने की बात खुद से कही. और अगले 2 दिन छत पर नहीं गया. मगर एक दिन अचानक उस की उम्मीद खुद ही पूरी हो गई. उस दिन बहुत बारिश हो रही थी. अविनाश और उस के 2 कलीग बारिश का मजा लेने छत पर चले गए. छत पर बहुत से औफिसों के कर्मचारी थे. उन्हीं के बीच अपनी 2 सहेलियों के साथ थी सुरभि. सुरभि और अविनाश की आंखें मिलीं और फिर दिल. दोनों अब रोज छत पर मिला करते थे. अच्छी दोस्ती के रास्ते दोनों ने प्यार की शुरुआत की. दोनों के रोमांटिक अफेयर्स अब दोनों के कलीग भी जानने लगे. मूवी डेट, डिनर डेट और लौंग ड्राइव अब हर वीकैंड का प्लान था. प्यार के सुहाने सफर और मीठी नोक?ोंक में कब 2 साल निकल गए पता ही नहीं चला.
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