Hindi Kahaniyan : अलका 25 वर्षीय एक आम लड़की. उस ने पूरी मेहनत से अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर अब एक अच्छी प्राइवेट नौकरी कर रही है. दूसरी ओर है आम कदकाठी लिए सुनील, जो अलका को पिछले 7 सालों से जानता है. दोनों कालेज में साथ पढ़े, प्यार किया और अब शादी करने जा रहे हैं. सुनील भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है, लेकिन उस की सैलरी अलका से थोड़ी कम है. जिस का अफसोस सुनील के पापा को बहुत है. सुनील के पापा रहरह कर सुनील को ताना मारते हैं, ‘‘एक तो बिरादरी की बाहर की लड़की पसंद कर ली और ऊपर से ज्यादा कमाती भी है. देखना पूरी जिंदगी दबा के रखेगी तुझे.’’

वहीं कुछ अफसोस तो अलका के पापा को भी है कि वह उन के उच्च वैश्य समाज के बाहर के लड़के से शादी कर रही है. शादी के लिए अलका के पापा पहले तो तैयार नहीं थे, लेकिन अलका कहीं भाग कर शादी कर ले, इस डर से उन्होंने अलका की पसंद को अपनी पसंद बना ली.

अब घर वाले, बाहर वाले कोई कुछ भी कहे सुनील और अलका के लिए इतना काफी था कि दोनों की शादी हो रही है और अपनी इस शादी में दोनों अपने परिवार के साथ धूम मचाना चाहते हैं, उन के साथ भी जो अब परिवार का हिस्सा नहीं है.

अपनी शादी की खुशी में अलका अपने बरसों से रूठे मामा को मनाने का प्रयास करना चाहती थी. मामा जिसे अलका के पापा ने घर से निकल दिया था, आज भी अलका को वह बुरे दिन, वे वक्त याद हैं, ‘‘जा निकल मेरे घर से. शर्म नहीं आई. एक तो मेरी बहन का रिश्ता छोड़ कर प्रेमविवाह कर लिया और बेशर्मी के साथ इस लड़की को आशीर्वाद देने भी आ गया. बड़ा अफसर क्या बना बड़ों का लिहाज ही भूल गया.’’ अलका के पिता ने अपने साले मनु को फटकार मार घर से निकाल दिया. अलका पीछे से ‘‘मामा, मनु मामा…’’ पुकारती रही लेकिन मनु नई दुलहन के साथ दूर निकलता चला गया, इतना की कभी वापस नहीं आया.

आज 14 साल बाद भी अलका के मन में अपने मामा की याद बारबार बेचैनी पैदा करती है. बचपन में मामा के कंधे पर बैठ पार्क के पेड़ों पर लगे फूलों को तोड़ना, पापा से छिप कर मामा की प्रेमिका से मिलने जाना, हर संडे कोई न कोई तोफहा लेना. अपनी इन्हीं यादों से बाहर निकल अलका अपने पापा से मामा को बुलाने की विनती करती है.

‘‘क्या चाहती हो?’’ अलका के पापा गुस्से में बोले.

‘‘यही कि मामा की रस्में मनु मामा करें,’’ अलका ने उलटा प्रश्न किया.

‘‘हमारी अब उन से कोई बातचीत नहीं है. जो बुलाएं.’’

‘‘तो बातचीत कर लेते हैं. फिर तो बुला ही सकते हैं.’’

अलका के पापा नाराज हो अपनी बीवी से बोले, ‘‘देखो सम?ाओ इसे. जिस ने मेरा मान नहीं किया, मैं उसे क्यों न्यौता दूं. ज्यादा जिद करेगी तो मामा की कोई रस्म ही नहीं होगी शादी में. जिन के मामा नहीं होते शादी उन की भी होती है. इस की एक जिद मान ली न. कर रहे हैं न अपनी बिरादरी से बाहर इस की शादी. अब कोई दूसरी जिद न करे, नहीं तो पहली जिद पर मु?ो दोबारा सोचना पड़ जाएगा. इसलिए फालतू की बहस न करो और चलने की तैयारी पर ध्यान दो.’’

ठीक ऐसी ही डांट सुनील को लग रही थी. जब अपनी बुआ और उस के बेटे को अपनी शादी में बुलाने की सुनील की हर दलील खारिज होती जा रही थी. सुनील के अधिक दवाब देने पर उस के पापा ने भी वही धमकी दी, जो अलका के पापा ने अलका को दी थी, ‘‘तुम्हारी एक जिद मान ली न. लव मैरिज की. अब ज्यादा जिद मत करो, नहीं तो पहली वाली भी रद्द करनी पड़ेगी. शादी में कुछ दिन बाकी है, समझे दूल्हे राजा. वैसे हम उच्च ब्राह्मण वैश्य परिवार की लड़की ला रहे हैं, यह कम है क्या?’’

अपने पापा की धमकी सुन सुनील चुप हो गया. अगली सुबह 4 बजे अलका का सारा परिवार ट्रैवलिंग बस में बैठ उत्तराखंड की ओर निकल पड़ा. पूरे रास्ते बच्चे वीडियोगेम्स, लूडो और शतरंज के खेल खेलते जा रहे थे, परिवार की महिलाएं लोकगीत गा रही थीं, पुरुषमंडल शादी के हिसाबकिताब का गुनाभाग और बुजुर्ग अफसोस जता रहे थे, ‘‘लड़की को गैरसमाज में कितनी आसानी से भेज रहा है जितेंद्र (अलका के पापा) और वह भी बड़े खर्चे के साथ, डैस्टिनेशन वैडिंग कर और जब सालों पहले मनु गैरसमाज की बहू लाया था तो इस ने कितना तमाशा किया और उसे इस तरह घर से निकाला कि हमें भी उस से बातचीत बंद करनी पड़ी. अब आखिर बेटी के मोह में भूल गया न अपनी जात.’’

सुबह 6 बजे के निकला अलका का परिवार खातापीता, गाताबजाता शाम 5 बजे होटल पहुंचा. होटल की बनावट, लोकेशन और खुली पहाड़ की वादियां देख सब बहुत खुश नजर आ रहे थे. इस बीच अलका के फूफा, अलका के पापा से बोले, ‘‘वाह क्या बात है. बेटी की शादी की लोकेशन क्या शानदार चुनी है आप ने. शादी में जब यह रिसोर्ट सजेगा, तो शादी में और हमारी इज्जत में चार चांद लग जाएंगे.’’ अलका के पापा भी सीना चौड़ा कर बोले, ‘‘और क्या, आखिर उन्हें लड़के वालों को भी तो पता चले कि किस से रिश्ता जुड़ा है उन का.’’

एक तरफ अलका अपनी सैल्फी सुनील को भेज रही थीं कि वह वैडिंग रिसोर्ट पहुंच गई है और बेसब्री से उस का इंतजार कर रही है.

दूसरी तरफ सुनील अलका के मैसेज का रिप्लाई देने में असमर्थ था क्योंकि सुनील के चाचा ने ट्रैवलिंग एजेंट से तय किए बजट को कम करने पर बहस कर एजेंट के ड्राइवर को एक हाथ जड़ दिया था, जिस का एजेंट ने बहुत ही ठोस रूप से जवाब दिया. उन से शादी की सारी बुकिंग, सारी बस कैंसल तो की ही, साथ ही ऐडवांस लिया रुपया भी नहीं दिया. सुनील और उस के पापा ने बहुत कोशिश की एजेंट को सम?ाने की लेकिन वह नहीं माना. उस ने यही कहा कि कल रास्ते में तुम ड्राइवर से ?ागड़ पड़ो तो बदनाम तो हम लोग ही होंगे. थाने में तो हमारी गाड़ी और ड्राइवर जाएगा. न जी न हम अपना नाम नहीं खराब करेंगे. आज हाथ उठाया, कल रास्ते में बंदूक चला दो तुम लोग तो.

अब यहां लास्ट मोमेंट पर रिजर्वेशन कैंसल होने पर सुनील के पापा पुलिस में शिकायत भी नहीं कर सकते थे क्योंकि मारपीट तो उन के अपने भाई ने की थी. पुलिस आई तो पहले उन का लड़ाकू भाई ही थाने जाएगा. इसलिए वह हार मान सुनील के साथ वापस आ गए. घर आ सुनील और उस के घर वालों ने दूसरे ट्रैवल एजेंसी को बुक करना चाहा तो कुछ भी हाथ नहीं लगा. चाचा की हाथ उठाने वाली बात ट्रैवल एजेंसी के लोगों के बीच फैल चुकी थी. इसलिए अपनी एकता दिखाते हुए कुछ ने साफ मना कर दिया. कुछ ने लास्ट मोमेंट का हवाला दे दोगुने नहीं चारगुना रेट बोला और कुछ ने कहा कि हमारी बुकिंग फुल है. सुनील के पापा अपना माथा पीट कभी अपने भाई को गाली देते, तो कभी सुनील को सुनाते कि क्या जरूरत थी अलका के पापा को अपनी शानोशौकत दिखाने के लिए डैस्टिनेशन वैडिंग करना.

सुनील ने अपनी उल?ान अपने दोस्तों से बताई. उस के सारे दोस्त ट्रैवल बसों की तलाश में लग गए. लेकिन इतनी जल्दी अगली ही सुबह की 2 बसें मिलना, वे भी बाहर शहर को आसान नहीं था. बड़ी से मुश्किल एक दोस्त ने एक बस का इंतजाम करने की हामी भरी. लेकिन बाकी लोगों का क्या? अब यही फैसला हुआ कि बाकी लोग अपनी पर्सनल कार और कैब से आएंगे. लेकिन फिर भी कैब से इतने सारे लोग. अब कैब का खर्चा भी 4 गुना होगा. तो एक तरह से यह प्लान भी फेल ही था.

इसी बीच एक बुजुर्ग ने कहा कि शादी के लिए लड़के और उस के मातापिता का होना की काफी है. इसलिए सिर्फ वही लोग चले जाएं. अब यह बात तर्कपूर्ण तो थी लेकिन भावनात्मक नहीं. आखिर पूरा परिवार शादी में जाने के लिए ही इकट्ठा हुआ था. सुनील के पापा बैठेबैठे चकरा रहे थे, मां के आंसू और जबान चलती ही जा रही थी, ‘‘हाय, पता नहीं किस कलमुंहे की नजर लगी मेरे बेटे की शादी को. मेरा बच्चा क्या करेगा? लड़की वालों को पता चला तो कितनी बदनामी होगी.’’

रात के 10 बज गए, लेकिन परिवार एकमत पर नहीं आया कि आखिर अब करे क्या? चारगुना पैसा से बस बुक करे या सिर्फ दूल्हा और उस के मातापिता पिता शादी के लिए निकले. सुनील के पापा की इज्जत दांव पर थी और उन के पैसे भी. न चाहते हुए भी उन्हें पैसों को ही दांव पर लगाना पड़ा. सुनील के पापा दुखी मन से, ‘‘सुनील बस बुक करो. चारगुना पैसा दे इज्जत बचा लेते हैं. लेकिन हां तुम (यानि सुनील का चाचा) शादी में नहीं जाओगे. वहां लड़की वालों के साथ ऐसा कुछ कर दिया तो क्या करेंगे. सुनील कोई कुछ पूछेगा तो बोल देना चाचा की तबियत खराब थी.’’

सुनील के पापा ने फिर चाचा से कहा, ‘‘और हां, शादी से वापस आ गाड़ी का आधा भाड़ा तुम से वसूलेंगे. आखिर मेरी जेब में छेद तुम्हारी वजह से ही हो रहा है.’’

सुनील के पापा की बात से पूरे परिवार ने सहमति दिखाई. सुनील अपने पापा के फैसले को अमल में लाता कि उस से पहले एक मैसेज आया, जिस से उस के पापा के पैसे और इज्जत दोनों बच गई.

सुनील अपनी आंखों में आए आंसू रोक बोला, ‘‘पापा अब कोई जरूरत नहीं चारगुना कीमत देने की. बस का इंतजाम हो गया. सुबह

5 बजे आ जाएगी 2 बस. उसी पुराने वाले दाम में.’’

सुनील के पापा, ‘‘वाह चलो अच्छा है. सुनिल के दोस्त आखिर काबिल साबित हो ही गए.’’

अगली सुबह 5 बजे 2 बड़ी वौल्वो बस सुनील के परिवार को लिए अपने डैस्टिनेशन की ओर चल पड़ी. रास्तेभर सुनील की मां कुदरत को धन्यवाद और सुनील के दोस्तों को आशीर्वाद देती रहीं. सुनील के पापा भी आराम की सांस लेते और बारातियों से आग्रह करते रहे कि कोई भी कृपा कर के कोई तमाशा नहीं करना. एक तो घर की शादी है और ऊपर से इतनी दूरबाग, एकदूसरे शहर में. कोई बात हुई तो मदद करने कोई नहीं आएगा.

मगर बाराती कोई हुडदंग करते कि उस से पहले ही रायता फैल चुका था. पता चला कि शादी आम जनता के विरोध के चलते कैंसलेशन के रैड जोन में आ चुकी है. दरअसल 2 दिन पहले ही उस रिसोर्ट में एक डैस्टिनेशन वैडिंग हुई थी, जहां वैडिंग में आए लोगों ने पहाड़ों पर बहुत कचरा फैलाया और उस कचरे को वहीं छोड़ वापस चले गए, जिस से आम निवासी को बहुत तकलीफ हुई. आखिर यह पहाड़ वहां के मूल निवासियों के लिए कोई घूमनेफिरने की जगह नहीं बल्कि उन का अपना घर है. और कोई भी व्यक्ति अपने घर को दूषित होता देख कैसे चुप रहेगा.

अब रात को आए थके बरातियों को देख रिसोर्ट वाले ने पहले तो मूलनिवासियों के हाथ जोड़ कहा, ‘‘बहुत दूर से आए, इतनी रात को कहां बाहर निकाल दूं. इन्हें आज रात सो जाने दो. सुबह सब बैठ कर बात कर के सुलझ लेंगे.’’ आपस में बात कर लोगों ने रात को ठहरने पर हामी भर दी लेकिन यह भी कह दिया कि शादी तो नहीं होगी.

सुनील और अलका रिसोर्ट के हौल में अपनी सांसें थाम बैठ गए. उन्हें यों टूटा देख उन के मांबाप और कुछ बुजुर्ग भी वहीं रुक गए. बाकी सब को उन के कमरे में भेज दिया गया.

रिसोर्ट का मैनेजर, ‘‘माफ कीजिए. 2 रात पहले बाहर से आए लोगों ने पहाड़ों

पर हुड़दंग मचाया और खानेपीने की चीजें, प्लास्टिक कचरा और बियर की बोतलें फेंक

चले गए. यह देख पहाड़ी भाईबहनों को बहुत गुस्सा आया.

सुनील के पापा, ‘‘लेकिन भाई, हम ने तो वह कचरा नहीं किया न. तो तुम हमारे बच्चों की शादी का कचरा क्यों कर रहे हो?’’

अलका के पापा, ‘‘और नहीं तो क्या. मैं ने आप को पहले की ऐडवांस दे दिया था. आप ने जो पैसे बोले उस में कोई मोलभाव भी नहीं किया. सिर्फ बेटी की खुशी के लिए. लेकिन अब आप ऐसा कैसे कर सकते हो. बेटी की शादी यों रुकेगी तो कितनी बदनामी होगी, यह तो सोचो.’’

सुनील के पापा, अलका के पापा और मौजूदा बुजुर्ग मैनेजर को सम?ाने लगे कि इसी बीच खामोश बैठी अलका अचानक से दहाड़ें मार रो उठी. अलका का रोना सब की खामोशी बन गई. अलका को देख कर मां और सुनील की मां भी रोने लगीं और दोनों के पिता अपना माथा पकड़ कोने में बैठ गए.

कुछ देर सब के रोने के बाद मैनेजर ने कहा, ‘‘देखिए, बेटी की शादी की गंभीरता मैं अच्छे से सम?ाता हूं. लेकिन मैं क्या करूं. मैं कल लेबर से पहाड़ों की सफाई भी करा रहा हूं, माफी भी मांग रहा हूं. मगर फिर भी आज दोपहर ही यहां के लोगों ने मेरे ही रिसोर्ट की शिकायत कर दी. कल शायद यहां ताला भी लग जाए. यह तो वही बात हुई कि गुनाह करे कोई और, सजा पाए कोई और. मगर मैं कुछ बड़ेबुजुर्ग के साथ बात करने की कोशिश करता हूं. अगर वे मान जाएं तो सुबह अपनी फरियाद हम सब के सामने रख सकते हैं.

‘‘पहाड़ों में आज भी बड़ेबुजुर्ग की बात को मान दिया जाता है. अभी आप लोग खाना खाओ और सो जाओ.’’

सभी को मैनेजर की बात ठीक लगी और अपने कमरे की ओर बढ़ चले. चलतेचलते अलका के पापा बड़बड़ाए, ‘‘जिस की बेटी की शादी पर ग्रहण लगने का खतरा हो, उस बाप को नींद कैसे आएगी.’’

बच्चे तो खापी कर, सफर की थकान के मारे सो गए थे. लेकिन बड़ेबुजुर्ग को तो चिंता खा रही थी. सफर की थकान भी इस मुसीबत से आगे इतनी छोटी थी कि आंखों की नींद दूर भाग खड़ी हुई थी. एक ओर अलका के पापा अपनी पत्नी का हाथ थामे चिंता जता रहे थे, ‘‘क्याक्या सोचा था. बेटी की शादी एकदम ठाट से करूंगा. जीवन की इतनी सेविंग इसी शान के लिए लगा दी और आज उसी शान की फांस गले में आ फंसी है.’’

सुनील के पापा, ‘‘जरा तुम चुप करो. यहां पहले ही टैंशन है. जरा सोचने दो अगर कल ये नहीं माने तो क्या किया जाएगा.’’

सुनील की मां, ‘‘हायहाय शुभशुभ बोलो.’’

उधर अलका और सुनील भी घर वालों की लाजशर्म की बातें छोड़ एक ही कमरे में बैठे, एकदूसरे का हाथ थामे गहरी सोच में डूबे पड़े थे.

वह एक रात 10 रात की तरह लंबी होती जा रही थी. न चैन से सोने दे रही थी, न कोई हल सू?ा रही थी और न सुबह होने दे रही थी.

सुबह  एक झपकी के बाद जब अलका के पापा की आंख खुली, तो पता चला अलका, सुनील और घर के कुछ बच्चे पहाड़ों पर फैले कचरा साफ करने गए हैं. अलका के पापा यह सुन थोड़ा परेशान तो हुए लेकिन फिर उन्हें गर्व की अनुभूति भी हुई. उन्होंने भी बिना देर लगाए कहा, ‘‘चलो, हम भी बच्चों की मदद करें.’’

बच्चों के पास पहुंच अलका के पापा और सुनील की मम्मी बच्चों के साथ सफाई अभियान में लग गईं. वहीं एक कोने में अलका की मां पहाड़ों की एक बुजुर्ग महिला से बोलीं, ‘‘हाय देखो मेरी बच्ची. आज जिन हाथों में मेहंदी लगनी थी, उस में राख और मिट्टी लग रही है.’’

दूसरी तरफ सुनील के पापा मन ही मन अलका के पापा को कोस रहे थे कि अपने बेटे की शादी में मैं कचरा उठाऊं. सारे फसाद की जड़ यह अलका का बाप है, जिसे अपनी शान दिखानी थी डैस्टिनेशन वैडिंग कर के. न यहां आते, न मेरा बेटा दुल्हे से सफाई वाला बनता.

कुछ ही घंटों में स्टाफ और बच्चों ने मिल कर सारी सफाई कर दी. रिसोर्ट के वर्कर हाथ जोड़ लोकल भाषा में लोगों से विनती कर रहे थे कि देखिए, यह लोग अच्छे हैं, दूसरों का फैलाया गंद कितनी मेहनत से हमारे साथ साफ कर रहे हैं. प्लीज इन्हें यहां शादी करने दीजिए.

शिकायती दल में कानाफूसी शुरू हो गई और किसी ने पीछे से कहा, ‘‘हमलोग इन की बातों में अब नहीं फंसेगे. ये लोग यों ही मीठी बात कर, थोड़ी सी सफाई कर हमें झांसा नहीं दे सकते.’’ इस बात पर एक और मूल निवासी ने हामी भरी और कहा, ‘‘चले जाओ शाम होने से पहले.’’

बस फिर क्या, कुछ और लोग उन के साथ हो लिए. यह देख अलका और सुनील के घर वाले हाथ जोड़ कुछ विनती कर ही रहे थे कि अलका दौड़ कर रिसोर्ट भाग गई. अलका को यों भागता देख घर वाले भी उस के पीछे दौड़ पड़े. रिसोर्ट पहुंच अलका ने खुद को कमरे में बंद किया और रोती रही.

घर वालों ने बहुत मिन्नतें कीं लेकिन अलका ने दरवाजा नहीं खोला. थक कर सब अलका के पापा के कमरे में बैठ गए. अलका की मां, ‘‘कहीं कुछ ऊंचानीचा न कर ले मेरी बेटी.’’ अलका के पापा, ‘‘बेटी स्ट्रौंग है मेरी. कुछ गलत नहीं करेगी. बस दुखी हो गई है.’’

अलका की दादी बोली, ‘‘बेटी की शादी, इज्जत और इतना सारा रुपया जो लगा है सब मिट्टी हो जाएगा.’’

‘‘अगर यहां नहीं तो चलो बाहर कहीं फेरा डलवा दें. कम से कम शादी हो जाए.’’

सुनील के घर से भी एक बुजुर्ग बोले, ‘‘हां बात सही है. यहां रह क्या करेंगे. शादी तो होने देंगे नहीं. अब शाम से पहले न निकले तो क्या पता, यह मारपिटाई पर आ जाएं.’’ इस पर एक और रिश्तेदार बोला, ‘‘हां भाईसाहब, आप अपना पैसा वापस लो रिसोर्ट वाले से और चलो यहां से.’’

‘‘हाय मेरी बच्ची.’’ बोलबोल कर अलका की मां रोने लगी.

अलका के पापा बीवी को यों रोता देख बोले, ‘‘हम एक बार फिर यहां लोगों से विनती करते हैं.’’

इस पर सुनील के पापा का गुस्सा फूट

पड़ा, ‘‘अब यहां भी माफी मांगें. पहले बस

एजेंट से, अब गांव के लोगों से. हम शादी कर

रहे हैं या कोई माफीनामा लिख रहे हैं. बहुत

हुआ. ये लोग शिकायत कर शादी रोक रहे हैं

तो हम भी शिकायत करेंगे. चलो थाने, यहां के लोगों और रिसोर्ट के मैनेजर के खिलाफ एफआईआर लिखवाने.

‘‘कोई फायदा नहीं होगा पापा,’’ सुनील ने कहा, ‘‘गांव में आम लोगों की ही सुनी जाती है.’’

‘‘तो क्या सामान पैक करें?’’ सुनील की मां ने पूछा.

सुनिल के पापा ने उखड़ कर कहा, ‘‘सामान अनपैक ही कब हुआ था.’’

अपने  आंसू समेटे अलका की मां ने कहा,

‘‘कोई उस का (अलका) दरवाजा तो खुलवाओ. रात से कुछ नहीं खाया उस ने.’’ अलका के पापा ने एक नजर सुनील की ओर देखा. सुनील उठ कर अलका के कमरे के बाहर गया और दरवाजा खटखटाने लगा. मगर अलका ने दरवाजा नहीं खोला, कमरे से बस उस के रोने की आवाज आ रही थी.

अलका के दरवाजा न खोलने पर सुनील के पापा फिर उखड़ कर बोले, ‘‘क्या यह समय है रूठने मनाने का?’’

‘‘पहले ही कम मुसीबत है.’’

इस पर अलका की मां नाखुश हो बोलीं,

‘‘भाईसाहब, मेरी बेटी रूठी नहीं, दुखी है.’’

‘‘उस की शादी पर

बन आई और आप ऐसे बोल रही हैं.’’

अलका की मां को नाखुश देख सुनील की मां बात को संभालते हुए बोलीं, ‘‘नहींनहीं बहनजी, यह भी थोड़ा

परेशान है न इसलिए मुंह से निकल गया. आप बुरा मत मानो.’’

‘‘क्या मुंह से निकल गया?’’ सुनील के पापा अब थोड़े गरम थे. ‘‘पहले तो इतनी दूर ले आए, अब शादी भी कैंसल. मैं ने पहले ही बोला था, वहीं शहर में शादी करो. पैसा भी बचेगा आनेजाने का. लेकिन नहीं, दुलहन और दुलहन के पापा दोनों को यादगार शादी बनानी थी. लो हो गई अब यादगार.’’

अब अलका के पापा भी चुप नहीं बैठे, ‘‘आप तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे हम ने

सब जानते हुए यहां शादी प्लान की और भाईसाहब पैसे की बात तो आप मत करो. आप का तो बस आनेजाने का खर्चा हो रहा है. हम तो आनेजाने से ले कर शादी, मेहंदी, हलदी यहां तक की कमरों की बुकिंग का खर्चा उठा रहे हैं और यह सुन लीजिए, यहां शादी की सपना हम बापबेटी का नहीं था. आप के बेटे को ही डैस्टिनेशन वैडिंग करनी थी पहाड़ों में. लेकिन आप खर्चा की बात पर बाहर गांव शादी नहीं करोगे, इसलिए बोला सुनील ने. अरे मेरी अलका ने तो सिर्फ जगह पसंद की थी, वे भी आप के बेटे के सपने पूरा करने के लिए. बड़े आए हम बापबेटी को ताना कसने वाले.’’

सुनील के पापा शर्मिदा हो सुनील से बोले, ‘‘पैसा का हवाला कर तुम ने ससुर के आगे फरियाद की. हमारी बापदादा की इज्जत मिट्टी में मिला दी.’’

सुनील भड़का, ‘‘बापदादा की इज्जत की बात आप मत करो पापा. इज्जत तो आप की उसी दिन चली गई थी, जिस दिन बुआ ने अपना हक पाने के लिए केस किया. दादा ने जो जमीन बुआ को अपनी मरजी से दी थी. दादा के मरने के बाद आप लोगों ने उस पर हक जमाया. बेचारी बुआ को अदालत जा अपना हक लेना पड़ा. तो आप लोगों ने उन्हें चोरनी कह रिश्ता तोड़ लिया. हम भाईयों में दरार डाल दी और खुद अपनी बेटी की शादी में जीभर के पैसा लुटाया. नकद, गाड़ी और पता नहीं क्याक्या दिया. यहां तक कि मेरी शादी में भी सोने के ?ामके दिए दीदी को, जीजू को सोने की अंगूठी. 2 साल पहले उन के घर के लिए क्व5 लाख भी दिए. तब खर्चा नहीं दिखा आप को? तब दीदी को दिया पैसा डकैती नहीं बनी, लेकिन बुआ ने अपने बाप की दी चीज पर हक जताया तो वो डकैत, चोरनी हो गई. वाह.’’

सुनील की बातें उस के पापा को जगहंसाई सी लग रही थी. वह आंखें नीची कर सकुचाने लगे. मगर सुनील यहीं चुप नहीं रहा, ‘‘और जो आनेजाने की बात आप कर रहे हो, वे आनाजाना उन्हीं डकैतों की वजह से हुआ है. बुआ के बेटे यानी आशु भैया की ट्रैवल एजेंसी है. जब मैं ने उन से मदद मांगी तो उन्होंने आखिरी वक्त मदद की और वह भी फ्री में. बोला छोटे भाई की शादी है, पैसे थोड़ी लूंगा.’’

सुनील के पापा तो अब और शर्मिदा हो कमरे से चले गए और उन्हें संभालने पीछेपीछे सुनील की मां भी. कुछ मिनटों की चुप्पी के बाद गंभीर स्वर लिए सुनील फिर बोला, ‘‘आप एक बार मनु मामा से बात कर लो.’’

मनु  नाम सुनते ही अलका के पापा चौंक सुनील को देखने लगे. सुनील ने कहा, ‘‘मुझे अलका ने बताया था उन के बारे में.’’

अलका के पापा बोले, ‘‘जब बताया था उस का नाम क्यों ले रहे हो और भला वह क्या करेगा यहां.’’

तभी अलका एकदम से कमरे में आई और चिल्ला पड़ी, ‘‘शादी कराएंगे और क्या…’’ अलका को देख पहले सब चौंके, कोई कुछ कहतापूछता कि अलका की दुहाई शुरू हो गई, ‘‘वे यहां एसडीएम हैं. कल रात ही पता चला मुझे, यहां के गवर्नमेंट साइट से. कल रात से मैसेज कर रही हूं उन्हें, कौल कर रही हूं. लेकिन जवाब नहीं दे रहे.’’

इस पर अलका के पापा मुंह बना बोले, ‘‘भला जो मेरी बहन की शादी की बात से मुकर गया, उसे तुम्हारी शादी से क्या मतलब.’’

इस पर अलका बोली, ‘‘वे आप की वजह से मतलब नहीं रखना चाहते. मैं ने तो सगाई के वक्त ही शादी में आने की बात बोली थी, तो वे साफ मना कर गए कि जीजाजी को मेरा आना पसंद नहीं होगा, इसलिए नहीं आ सकता. अगर जीजाजी चाहेंगे

तो ही आऊंगा. लेकिन आप तो उन्हें बुलाने को राजी हुए नहीं. मगर कम से कम अब तो बुला लो. वे यहां के लोगों और प्रशासन को मना सकते हैं.

अलका के पापा झेंप कर बोले, ‘‘उसे मनाना होता, तो तेरे मैसेज देख कल रात ही सब काम कर देता. लेकिन सुबह तक न कोई खबर दी, न कोई जवाब दिया. अरे, मामा का प्यार तेरे दिल में है, लेकिन उस के नहीं.’’

‘‘प्यार है कि नहीं मुझे नहीं पता. लेकिन अगर एक बार आप कोशिश तो कर सकते हो. क्या पता आप के बुलावे पर वे सब ठीक कर दें.’’

‘‘मैं नहीं बुलाता उसे. अरे, वह तो यही चाहता है कि मैं उस के हाथ जोड़ूं. क्या पता उसी ने सब कांड किया हो.’’

‘‘क्या कह रहो पापा. मामा मेरी शादी कैंसल करेंगे?’’

‘‘अरे जो अपनी शादी कैंसल कर सकता है वह दूसरे की भी कर सकता है.’’

‘‘हां, उन्होंने अपनी शादी कैंसल की. लेकिन वह जबरदस्ती की शादी थी.’’ अलका की बात सुन पापा का मुंह बन गया.

‘‘मामा किसी और से प्यार करते थे, मगर आपलोग उन की शादी बुआ से करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने भाग कर लव मैरिज की, तो क्या गलत किया. अगर आप मेरी शादी को राजी नहीं होते तो मैं भी भाग जाती.’’

अलका की मां बोली, ‘‘क्या बकवास कर रही हो.’’

अलका  फिर बोली, ‘‘एक लड़का जो पहले से ही किसी और से प्यार करता है, वह शादी दूसरी लड़की से करता, तो क्या यह सही होता? यह दोनों लड़कियों के साथ धोखा नहीं होता पापा. मान लीजिए, सुनील भी ऐसा करता तो. प्यार मु?ा से करे और शादी किसी और से, इतना बोल अलका अपने कमरे जा सारा सामान समेटने लगी. उधर अलका की दादी ने मनु मामा से मदद मांगने की बात पर गौर करने को कहा.

‘‘बेटी की शादी से गुस्सा तो बड़ा नहीं की. बात कर लो. आप नहीं तो मैं कर लूं?’’ अलका की मां ने कहा.

अलका के पापा गंभीर हो बोले, ‘‘मुझे आज झांकने में कोई हरज नहीं. लेकिन देखना हमारी बेइज्जती का बदला वह आज लेगा. कोई मदद नहीं करेगा,’’ अलका के पापा ने भारी मन से मनु का नंबर अलका से लिया और उसे कौल किया. लेकिन किसी ने कौल नहीं उठाया. अब सब की आस खत्म हो चुकी थी. सब अपना सामान और एक कोने पड़े सिसक रहे थे. सुनील भी अलका को सांत्वना दे रहा था. बस भी चलने को तैयार थी. सामान बस में रखना शुरू हो गया था कि इसी बीच मैनेजर दौड़ते आया और बोला, ‘‘आप रुक जाओ. हम शाम को मेहंदी का तैयारी कर देते हैं, बस कुछ घंटों में.’’

‘‘क्या बोल रहा है…’’ हैरान हो सुनील की मां पूछी. इतने में अलका के पापा का फोन बज उठा. उन्होंने फोन उठाया तो उधर से आवाज आई, ‘‘जीजाजी, मैं मनु. माफ कीजिएगा आप सब को बहुत तकलीफ हुई. दरअसल, सरकारी काम से दूर गांव निकाला हूं. इसलिए नेटवर्क नहीं आ पा रहा था लेकिन सुबह ही अलका का मैसेज देख मैं ने सभी औफिसर को फोन घुमा दिया. अलका की मामी भी पहाड़ी है, उस ने भी सब को मनाने में बहुत मदद की. आसपास के लोग माने रहेंगे तो सब काम आसानी से हो जाता है. आखिर पहाड़ों का मान ही उन का मान होता है.

बस  इसी समझनेबुझने में देर हो गई. अब आप निश्चिंत हो शादी करें बिटिया की. मैं भी कल दोपहर वापस आ जाऊंगा, फिर मिलते हैं. वैसे आप की मदद के लिए 2 औफिसर और अलका की मामी आ गए होंगे.’’

अलका के पापा ने नजर घुमाई तो 2 औफिसर मैनेजर से बात कर रहे थे और एक महिला जो शायद मनु की पत्नी थी, अलका की मां से मिल रही थी. उस के साथ गांव की कुछ महिलाएं थीं. मनु की पत्नी उन का अलका की मां से परिचय करा रही थीं. यह सब देखसुन अलका के पापा इतने भावुक हुए कि जमीन पर बैठ रोने लगे. यह देख सब उन के पास दौड़े. अलका के पापा मनु की पत्नी को देख बोले, ‘‘तुम्हारा दिल कितना बड़ा है. मैं ने तुम्हें पहले दिन ही घर से निकाल दिया था और आज तुम मेरी बेटी का घर बसाने चली आई. वे भी सब के आगे हाथ जोड़ कर.’’

मनु की पत्नी करुणाभरे स्वर में बोली, ‘‘क्या भैया पुरानी बात, कौन इतने दिन दिल से लगाएगा और बेटी जितनी आप की है, उतनी मनु की भी तो है और हम पहाडि़यों में बेटियों की शादी में सब कंधे से कंधा मिला कर चलते हैं. क्यों बहनो.’’

मनु की पत्नी की बात पर मौजूद महिलाओं ने हामी भरी, जो कल रात और आज सुबह भी शादी के खिलाफ थीं.

सुनील की बातें उस के पापा को जगहंसाई सी लग रही थीं. वह आंखें नीची कर सकुचाने लगे. मगर सुनील यहीं चुप नहीं रहा…

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