सोम किसी और का पति था मगर मैं मिशी ने अपना पर्स खोला और चाबी निकाली. ताला खोल कर बुटीक के भीतर आ गई. एक दिन पहले ही गुजराती लहंगे सजीली ओढनी आदि बन कर तैयार हुए थे. उन की चमकदमक और एक अलग ही महक सारे कमरे में फैली हुई थी. मिशी ने फ्रिज से बोतल निकाली और एक गिलास पानी लिया.
मिशी का सिर चकरा रहा था. बालबाल बची थी वह. अगर बाथरूम में जा कर न छिप गई होती तो आज तो बानी ने रंगे हाथों पकड़ लिया था.
वह दृश्य याद कर के मिशी को घबराहट सी होने लगी. खैर, सोम ने सारा मामला संभाल लिया था. मिशी कान लगा कर सबकुछ सुन तो रही थी.
बानी पूछ रही थी, ‘‘मां फोन नहीं उठा रही हैं. घर पर ताला है. बुटीक में सपना कुछ बता नहीं रही कि वह कहां है. अभी मेरे घर के बाहर पोस्टमैन ने मु?ा से कहा कि वे कुछ देर पहले ही आप के घर की तरफ गई है. उस ने देखा था इसीलिए घर की रजिस्टर डाक को वह अपने बैग में लिए हुए था. मैं ने दस्तखत कर के ले ली है उन से और आप मना कर रहे हैं तो आखिर मां इस समय कहां चली गई होंगी?’’
तब सोम ने हकलाते हुए एक मनगढ़ंत कहानी बनाई, ‘‘हांहां, सहीसही, वह हमारे घर आना चाहती थीं. मगर मेरी पत्नी तो इन दिनों मुंबई गई हुई है न तो बुटीक से मेरी पत्नी सुमि के लिए कुछ ड्रैसेज की बात थी शायद. मगर वह उस के बाद कहां गई, किधर गई, यह मु?ो कुछ पता नहीं.’’
सोम विचलित मन से कुछ का कुछ बता रहा था कि तभी बानी का फोन आ गया. बानी फोन के जवाब में, ‘‘अरे, ओह, बस मैं पहुंच रही हूं, 10 मिनट…’’ कह कर बानी फट से निकल गई.
उस फोन करने वाले का धन्यवाद कर के सोम ने गहरी सांस ले कर तुरंत दरवाजा बंद कर लिया. बाथरूम से निकल कर मिशी वापस उस के शयनकक्ष में आ चुकी थी.
मगर अब सबकुछ बदल गया था. रोमांटिक मिशी का मूड भी बदल गया था और उस का वेश भी. अब एकएक कर के उस ने सारे कपड़े वापस पहन लिए थे. वह अपना पर्स ले कर जाने लगी थी. सोम ने करीब जा कर उस का हाथ थाम कर उसे बहुत रोकना चाहा. मगर वह रुकी नहीं. जातेजाते इतना जरूर कहती गई कि सोम जरा सोचो आज मुझ पर बिजली गिरतेगिरते बच गई. आज मैं कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहती. अब मुझे जाना होगा और फिर बाहर निकल गई.
सोम ने भी सिर पर हाथ रख लिया था. बहार आतेआते रह गई थी.
सपना शायद दोपहर का खाना खाने चली गई थी. इसलिए बुटीक पर ताला लगा था. पर चिंता की कोई बात नहीं थी. अगर कभी ताला भी होता तो स्थाई ग्राहक फोन कर ही देते हैं. निश्चिंत हो कर मिशी ने अब अपना फोन चैक किया. सपना ने संदेश भेजा था कि उस की मौसी आई हैं. उस का अभी जाना जरूरी है. उधर, बानी की भी 1-2 नहीं 10 मिस्ड कौल थीं और मैसेज था कि मां एक खुशखबरी देने घर आ रही हैं. आप बुटीक से जल्दी घर आ जाओ.
मिशी का दिल फिर से धकधक करने लगा. सम?ा ही नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या नहीं. फिर भी उस ने बानी को फोन कर लिया, ‘‘हैलो बनू बेबी आप के फोन पर फोन आ रहे थे. मैं सदर बाजार की भीड़भाड़ में यू नो ट्रैफिक का इतना शोर. अभी बुटीक लौटी हूं तो तसल्ली से फोन देखा’’.
‘‘ओह मां आप कितना काम करती हो. प्लीज जरा अपना खयाल भी रखा करो,’’ कह कर अनजान और मासूम बानी ने अपना भरपूर प्यार जताते हुए सम?ाया.
‘‘ठीक है बेबी, बताओ तो सब ठीक है न?’’
‘‘मां अब मैं प्रोजैक्ट मैनेजर बन गई हूं. आप के साथ मिल कर लंच करना था. खुशी मनानी थी, इसलिए लंच ब्रेक में आई थी. मगर एक जरूरी काम अटक गया. वापस लौटना पड़ गया. रात तक वापस घर आती हूं. फिर खुशी मनाते हैं. टेक केयर मां लव यू,’’ कह कर बानी ने फोन काट दिया.
मिशी ने एक गहरी सांस ली और अपने अतीत में खो गई…
मिशी और बानी ही अब दो जिस्म एक जान थे. बानी 2 साल से नौकरी कर रही थी. एक क्लाइंट सर्विस कंपनी में डिजाइन डिपार्टमैंट में उस का पद सहायक का था.
आज तो बानी की उपलब्धि का जश्न होगा यही सोचते हुए मिशी ने अपने मोबाइल पर राघव की तसवीर देखी. राघव और मिशी अब अलगअलग हो गए थे. यह अचानक ही हो गया था. यह तब हुआ था जब बानी 1 साल की थी. राघव तब एक ट्रैवल ऐजैंसी चलाता था. राघव और मिशी का जीवन ठीकठीक चल रहा था. फिर बानी गर्भ में आ गई. मिशी को बैड रैस्ट के लिए कहा था. मिशी लेटी रहती थी, घर पर एक सहायिका रख ली थी और राघव अपने काम में और डूब गया था.
उधर मिशी की परेशानी बढ़ती गई. बानी सर्जरी के बाद पैदा हुई थी. बानी के जन्म के बाद भी मिशी बीमार सी ही रही थी. राघव की एक महिला मित्र बन गई. रुचि नाम था उस का. मिशी को शक तो पहले से ही था. हौलेहौले रुचि का प्रभाव घर पर दिखाई देने लगा. एक दिन मिशी ने गुस्से में आ कर वह घर, वह शहर सब छोड़ दिया.
नई जगह नए शहर में हुनर काम आया. परिचित काम आए. पहले एक बुटीक में काम किया उस के बाद अपना एक बुटीक खोल लिया. सोम से मुलाकात हुई. मिशी को तो इतना भी पता नहीं था कि वह उस के पास के ही घर में रहता था. सोम से 1-2 मुलाकातों के बाद ही मिशी न जाने क्या हुआ कि उस के जादू में बंधती चली गई. कब दोनों ने सारी मर्यादा तोड़ दी और एक हो गए दोनों को ही पता न चला.
अब हाल यह था कि सोम की पत्नी अहमदाबाद रहती थी. सोम हर शनिवार और रविवार को अकेला होता था. बानी की कंपनी ऐसी थी कि शनिवार और रविवार को भी कोई न कोई इवेंट या काम निकल ही आता था. इस तरह मिशी को अपने साथ ले कर सोम कभी ऐंजिल होटल तो कभी सेरेमनी होटल कभी इधर तो कभी उधर. दोनों इतने डूब चले थे कि मिशी भी जैसे किसी नशे में थी और मानमर्यादा को भूल ही चली थी. मिशी पर जमी बर्फ सालों बाद पिघली थी.
आज अगर वे दोनों रंगे हाथों पकड़ लिए जाते तो मिशी कहीं की न रहती. मिशी की आंखों में बारबार एक फिल्म बन रही थी. बानी ने उन दोनों को ऐसे देखा और सुबकती हुई चली गई. ‘ओह बानी, मेरी बानी मैं गलत नहीं थी पर मैं जो कर रही थी वह कुछ ठीक भी नहीं,’ मिशी सोचने लगी.
‘मगर अब नहीं. आगे बिलकुल भी नहीं,’ यह सोच कर मिशी ने मन ही मन कुछ तय कर लिया. ऐसा नहीं कि वह सोम से उब गई थी. सोम से हर मुलाकात उस में एक नई ऐनर्जी ला देती थी. वह साथ बैठा हो या बैड पर हो, हंसताखिलखिलाता रहता था. अपनी रूखी सी पत्नी से वह कब का बोर हो चुका था. दोनों जानते थे कि उन का संबंध मिशी का तो नहीं सोम का घर तोड़ डालेगा. उम्र के इस पड़ाव पर वह रिस्क नहीं ले सकती कि जिस में किसी स्कैंडल में फंस जाए, एक गृहस्थी टूट जाए, उस के बंधेबंधाए ग्राहक छिटक जाएं और बेटी की नजरें उसे शर्मिंदा करने लगें.
रात को 8 बजे बानी लौटी तो मिशी ने ताजे फूलों के गुलदस्ते से उस का स्वागत किया. इतना ही नहीं मिशी ने घर पर ही बानी के लिए कैडल लाइट डिनर की सारी व्यवस्था कर दी थी.
बानी ने मिशी को अपनी प्रमोशन के बारे मे विस्तार से बताया. साथ ही यह भी कि 4 दिन बाद बानी को कंपनी के पूरे खर्च पर मैक्सिको जाना है और वह भी 21 दिन के लिए.
मिशी ने यह सुना तो वह खुशी से ?ाम उठी. बानी ने उस से पूछा कि अगर वह साथ चलना चाहे तो चले. कंपनी ने एक और के लिए मुफ्त टिकट तथा होटल की व्यवस्था की है.
मिशी ने फट सहमति दे दी. दोनों तैयारी में जुट गईं. इस बीच सोम के संदेश भी आते रहे. मिशी उसे टालती रही. 5 दिन बाद मिशी ने अपने सोशल मीडिया के स्टेटस में हवाईयात्रा का विवरण डाल दिया. सोम ने भी देखा. सोम ने उसे फिर से संदेश भेजा.
मिशी ने जवाब दिया कि सोम फिलहाल तो मेक्सिको मेहमान बन कर आई हूं. शायद यहीं सैटल भी हो जाऊं..
सुमिजी अगर इस वीकैंड में आएं तो आप दोनों बुटीक चले आना. उन की सारी ड्रैसेज तैयार हैं और हां तुम एक काम करना अपना खयाल रखना सोम. अलविदा.’’
