कुछ  चीजों की कीमत उन के न होने पर ही पता चलती है जैसे सूखे गले को पानी नहीं मिलना. ठीक इसी तरह रिश्तों में भी यही हिसाब चलता है. जब कोई इंसान दूर हो जाता है तभी उस की कीमत और उस रिश्ते की अहमियत समझ आती है.

कुछ ऐसी ही समझ आज अर्चना अपने 1बीएसके के फ्लैट में अकेले पलंग पर लेटे छत को निहारते हुए महसूस कर रही है.

26 साल की अर्चना देखने में तो काफी सुंदर है. पतली लंबी, गोरा रंगरूप, घुंघराले बाल, तीखी आंखें पर साथ ही कुछ तीखा और टेढ़ा मिजाज भी. अर्चना बचपन से ही थोड़ी आलसी और जिद्दी किस्म की लड़की रही है. वहीं रोहित बचपन से खुशमिजाज और जिज्ञासु लड़का. मांबाप का एकलौता बेटा जिस ने दुनियादारी के साथ घर को संभालाना और संवारना भी सीखा. रोहित मिडल क्लास परिवार में बड़ा हुआ, जहां मांबाप दोनों नौकरीपेशा थे.

इस तरह 13 साल की उम्र से ही रोहित घर पर स्कूल से आ काफी समय अकेले बिताता था. लेकिन इस समय को बेकार नहीं जाने देता था. किताबों में लिखे ऐक्सपैरिमैंट या विज्ञापन में आए घरेलू नुसखों या प्रोडक्ट्स को देख कुछ न कुछ ट्राई करता रहता. साथ ही मां की मदद के लिए डिनर की सब्जी पहले से काट लेता, दूध भी उबाल लिया करता, छत से कपड़े ला उन की तह भी लगा देता और पौधों में पानी भी देता. कभीकभी मां के साथ रसोई में खाना भी बनवाता.

रोहित की मां का साफ कहना था कि मेरे लिए तुम बेटा भी हो बेटी भी. तो जो काम लड़की करती आ रही है उन की थोड़ी समझ तुम्हें भी होनी चाहिए. वैसे भी हर जगह मां नहीं होगी साथ जो अच्छा खाना दे, साफ कपड़े भी दे. कल जब बड़े होंगे पढ़ने के लिए बाहर शहर जाना पड़ेगा तो होस्टल में रहना होगा. तब यही घर के सीखे काम बहुत काम आएंगे. अपनी रोटी, अपने कपड़े, साफसफाई के लिए किसी दूसरे की राह नहीं देखनी पड़ेगी.

मां की यह सीख रोहित के लिए हमेशा काम आई. जब हौस्टल में रहता था तब भी और आज जब वह एक इंजीनियर बन अर्चना के साथ रह रहा है तब भी.

अर्चना और रोहित 2 साल से डेट कर रहे हैं और अब 1 साल से लिव इन में रह रहे हैं, जिस का पता दोनों के परिवार को भी है.

पहले तो परिवार को बड़ी आपत्ति हुई लेकिन अब धीरेधीरे वे यह स्वीकार कर रहे हैं. अर्चना की मां जब रोहित से मिली और कुछ दिन उन के साथ रही तो उन्हें रोहित पसंद आया और अब फोन पर रोहित से बात कर कभीकभी यह भी कह देती है, अर्चना को बोलो घर के काम में दिलचस्पी दिखाए. उस का नखरे उठाना तुम्हें परेशान न कर दे.’’

इस 1 साल में अर्चना तो बिलकुल नहीं बदली लेकिन रोहित एक बौयफ्रैंड के साथ हाउसवाइफ जरूर बन गया है. घर भले अर्चना का हो लेकिन उस घर का हर कोना रोहित ने सजाया और साफ भी किया है. रसोई का हर बरतन, हर मसाला कहां रखा है रोहित को सब पता है. अर्चना उस में आ भी जाए तो सिर्फ चाय या कौफी उबाल कर आ जाती है बाकी आटे, तेल, सब्जी की उसे कोई खबर नहीं. उस के लिए रोहित से पहले ब्रेकफास्ट मैकडोनाल्ड में, लंच औफिस के कैफेटेरिया में और डिनर जोमैटो पर ही टिका था.

‘‘रोहित प्लीज मेरे लिए चाय बना दो. सिर दर्द कर रहा है.’’

‘‘रातभर फोन पर स्क्रोलिंग करोगी तो और क्या होगा.’’

‘‘यार अभी लैक्चर नहीं चाय चाहिए.’’

‘‘अच्छा बना रहा हूं. मगर अब उठ भी जाओ सुबह के 8 बज रहे हैं. औफिस के लिए लेट हो तुम.’’

कान में इतना पड़ते ही अर्चना दौड़ कर बाथरूम में गई और 15 मिनट में तैयार हो औफिस निकल गई. एक सिर्फ औफिस ही है जिस के लिए अर्चना आलस नहीं करती. जिस की 2 वजहें हैं- एक लेट होने पर पैसे कटना और दूसरा अच्छी एंप्लोई की इमेज.

अर्चना दिखने में काफी सुंदर थी और इस का घमंड उसे हमेशा रहता था. उसे

यही लगता था कि रोहित उस की खूबसूरती के पीछे ही उस का दीवाना बना फिरता. माना कि अर्चना आकर्षित थी मगर रोहित सिर्फ अर्चना के चेहरे या शरीर पर नहीं मरता था. वह अर्चना को पसंद करता था, उस से प्यार करता था. उसे लगता था कि साथसाथ रहते अर्चना में कुछ बदलाव तो हो ही जाएगा. भले वह घर या रोहित का खयाल रखने में पीछे रह जाए मगर अपने में सुधार कर ही लेगी. वह आधा नहीं तो थोड़ा हाथ बंटा लेगी, साथ दे देगी तो रोहित बाकी सब मैनेज कर लेगा. बस इसी उम्मीद में रोहित अर्चना के साथ बना रहा है.

एक संडे आंखों पर पड़ती सुबह की हलकी धूप अर्चना की गहरी नींद खराब कर रही थी.

‘‘रोहित आज संडे है. आज तो शांति से बैठ जाओ. सुबहसुबह सफाई में लग गए और ये परदे वापस लगाओ खिड़की पर. मुझे सोने दो प्लीज.’’

‘‘अब 9 बज गए. उठ भी जाओ तुम्हारी पसंद का ब्रेकफास्ट बनाया है,’’ यह बोल कर रोहित ने कौफी का मग बैड की साइड टेबल पर रख दिया. कौफी की खुशबू से अर्चना की नींद जाने लगी. उस ने उठ कर कौफी के 2 घूंट पी कहा, ‘‘क्यों सुबह से सफाई कर रहे हो?’’

‘‘ताकि सारे काम जल्दी निबट जाएं. टाइम मैनेजमैंट मैडम, काम आसान और आप को आराम देता है.’’

‘‘हां लेकिन यह टाइम मैनेजमैंट की मु?ा से उम्मीद मत करना. मेरे लिए संडे सिर्फ आराम, आराम और आराम है. साफसफाई मीना काम वाली दीदी भी कर देती है.’’

‘‘मीना ?ाड़ूपोंछा और बरतन करती है. अपने सामान, पर्सनल स्पेस, किचन की साफसफाई और डस्टिंग तो खुद करनी पड़ती है मैडम. हां लेकिन तुम यह करोगी इस की मु?ो कोई उम्मीद नहीं और हां संडे को आराम वाली मैडम, शायद तुम भूल गई हो.’’

शाम को अर्चना ने कुछ दोस्तों को घर पर बुलाया था, जिस की तैयारी रोहित ही कर रहा था जैसे फूड मेन्यू, म्यूजिक, ड्रिंक्स.

रोहित ने याद दिलाते हुए कहा, ‘‘दोस्तों को डिनर पर बुलाया है तो कुछ काम कर लो. डिनर के लिए सामान ही और्डर कर लो, बना तो मैं दूंगा ही.’’

डिनर में रोहित ने पास्ता और चिल्ली पोटैटो बनाया था और स्पैशल मौकटेल ड्रिंक भी, जिस की सब ने जम कर तारीफ की थी.

हिमेश ने अर्चना से पूछा, ‘‘कुछ सीखा भी है बनाना या सिर्फ खाती ही हो?’’

अर्चना ने भी इतरा कर कहा, ‘‘मुझे सीखने का कोई शौक नहीं.’’

रिया ने कहा, ‘‘यार रोहित तुम्हारा कोई भाई है तो मेरे लिए भी सोचना. मैं सिंगल ही हूं.’’

इसी बीच जहां सब रोहित के खाने और ड्रिंक की वाहवाही कर रहे थे वहीं अर्चना अपने ड्रिंक में बारबार कोई न कोई चेंज करवाने में लगी थी. रोहित उस के लिए 5 बार अलगअलग ड्रिंक बना चुका था.

यह देख हिमेश ने रिया के कान में कहा, ‘‘पार्टनर या नौकर. आखिर खराबी क्या है ड्रिंक में? इतने नखरे कौन उठाएगा?’’

इस पर रिया ने कहा, ‘‘यार वह हमें दिखा रही है कि रोहित कैसे उस का और्डर मानता है. मु?ो तो लगता है रोहित के मिलने से यह और आलसी और नखरेबाज बन गई है.’’

एक दिन अर्चना औफिस से आई तो कुछ टैंशन में दिख रही थी. रोहित ने उस का लटका चेहरा देख पूछा, ‘‘क्या हुआ मेरी जिद्दी गुडि़या को?’’

अर्चना नाखुश हो बोली, ‘‘कल एक फौर्मल मीट है और उस का ड्रैस कोड रखा है. वे चाहते हैं मैं साड़ी पहनूं. अरे मु?ो साड़ी पहननी नहीं आती और इतनी सुबह तो सैलून भी नहीं खुलेगा.’’

‘‘हां यह तो प्रौब्लम हो गई. मगर टैंशन मत लो साड़ी पहनाने की प्रौब्लम मैं सौल्व कर दूंगा. तुम बस जाओ अपनी साड़ी देखो.’’

अर्चना ने कमरे में जा कर पूरी अलमारी छान मारी और फिर साड़ी मिली तो पर बड़ी बेहाल सूरत में. एक गठरी की तरह उस की तह हो रखी थी.

‘‘सिल्क साड़ी की कोई कदर नहीं,’’ पीछे से रोहित बोला और साड़ी अपने हाथ में ले ली.

‘‘क्या खराब हो गई?’’ अर्चना ने पूछा.

‘‘नहीं लेकिन बेजान कर दिया तुम्हारी लापरवाही ने. ऐसे साडि़यां नहीं रखते. मम्मी की अलमारी कभी खोल कर देखी हो या किसी साड़ी की तह लगाई हो तब न पता चले,’’ रोहित नाखुश हो बोला.

अर्चना के पास सफाई नहीं थी लेकिन फिर भी बहस करना चाहती थी इसलिए उसे रोकते हुए रोहित ने कहा, ‘‘कुछ मत बोलो. पुलाव बन गया है. जाओ खा लो. मैं जा कर देखता हूं कोई प्रैस करने वाला है या नहीं,’’ और साड़ी ले रोहित बाहर चला गया.

अर्चना को खाना खा कर रोहित की राह देखते हुए आधा घंटा हो गया था. रोहित जब वापस आया तो अर्चना ने पूछा, ‘‘बहुत देर लगा दी. प्रैस हो गई साड़ी?’’

रोहित ने अंगड़ाई ले कहा, ‘‘नहीं पास के दोनों धोबी घर चले गए हैं.’’

अर्चना ने कहा, ‘‘अच्छा तो घर पर कर लेते हैं. मैं करूं?’’

रोहित ने अर्चना को देख कर मुसकान दी, ‘‘पिछले 1 साल से तुम्हारे कपड़े मैं प्रैस कर रहा हूं. उस से पहले धोबी करता था.’’

अर्चना ने अकड़ कर कहा, ‘‘तो क्या हुआ. इस का मतलब यह थोड़ी है मु?ो प्रैस करने नहीं आती. देखो मैं भी करती हूं,’’ और रोहित से साड़ी ली और प्रैस करने ले गई.

पीछेपीछे रोहित भी चल दिया. अर्चना ने साड़ी खोली और गरम प्रैस उस पर रखने ही जा रही थी कि रोहित ने उस का हाथ पकड़ लिया, ‘‘साड़ी जला दोगी. सिल्क पर ऐसे प्रैस नहीं होती है. पहले प्रैस का टैंमपरेचर तो देखो.’’

रोहित ने टैंपरेचर सैट किया, एक कौटन का दुप्पटा साड़ी पर शीट की तरह बिछा दिया और फिर साड़ी प्रैस करते कहा, ‘‘इस तरह होती है सिल्क पर प्रैस. न रंग खराब होगा और न जलेगी.’’

अर्चना खुश थी कि उस का काम रोहित कितनी आसानी से कर रहा है. फिर बोली, ‘‘तुम्हें सब आता है. खाना भी, सफाई भी और साड़ी प्रैस करना भी. तुम्हारी मम्मी ने तुम्हें परफैक्ट हाउसवाइफ बनाया है.’’

रोहित अर्चना को समझते हुए बोला,

‘‘नहीं मेरी मम्मी ने वह सब सिखाया जो उन्हें आता था. चाहे घर का काम हो या बाहर का.

हां लेकिन तुम्हारी मम्मी ने सिर्फ तुम्हें आलसी और बेफिक्रा बनाया है. तभी तो उन की प्रीमियम क्वालिटी की साड़ी को पोंछा बना कर रखा था तुम ने.’’

अर्चना मुंह बना कर बोली, ‘‘हां ठीक है. आगे से ध्यान रखूंगी. वैसे सुबह साड़ी पहनाने वाली को बोल देना टाइम से आने को. मैं सोने जा रही हूं.’’

अगली सुबह अलार्म के बजने से पहले रोहित ने ही अर्चना को जगा दिया.

आज अर्चना बिना किसी नखरे के उठ भी गई और जल्दी नहा भी ली.

‘‘वाह, रोज इतनी फुरती दिखाओ तो काम आसान हो जाए,’’ रोहित ने चुटकी ली.

‘‘रोज इतनी शराफत की उम्मीद मत रखो.’’

फिर दोनों ने साथ बैठ ब्रेकफास्ट किया हैं. ब्रेकफास्ट खत्म हुआ ही था कि मीना भी सफाई करना आ गई.

रोहित अपना और अर्चना का लंच पैक कर रहा था कि अर्चना ने पूछा, ‘‘रोहित साड़ी पहनाने कौन आ रहा है? देखो टाइम हो गया.’’

रोहित ने आसानी से कहा, ‘‘अरे यह क्या है तुम्हारे सामने.’’

‘‘मीना,’’ अर्चना ने चौंक कर कहा.

‘‘हां यह भी चलेगा. सिर्फ साड़ी तो

पहननी है.’’

इस पर मीना बोली, ‘‘मुझे साड़ी पहनानी, लेकिन किसे?’’

अर्चना मीना को समझते हुए बोली, ‘‘अरे मुझे. आज औफिस में साड़ी पहननी है. मु?ो आती नहीं इसलिए आप पहना देना.’’

मीना हां या न कहती उस से पहले ही रोहित बोला, ‘‘अरे मीना नहीं मैं पहनाऊंगा.’’

रोहित की बात सुन मीना जोरजोर से हंसने लगी. मगर रोहित उसे नजरअंदाज कर कमरे में चला गया और उस के पीछे अर्चना.

‘‘रोहित यह क्या मजाक है?’’ अर्चना रोहित से नाराज हो बोली.

रोहित अर्चना को तस्सली देते हुए बोला, ‘‘अरे यार तुम ब्लाउज और पेटीकोट पहने तो. देखना मैं कितनी जल्दी साड़ी पहनाता हूं. देखो तैयारी भी कर रखी है,’’ रोहित हाथ में साड़ी पिन दिखाते हुए बोला.

अर्चना ने एक लंबी सांस ली और साड़ी पहनने को तैयार हो गई. जब रोहित उसे साड़ी पहनाने लगा तो अर्चना हैरान हुई. रोहित हर एक प्लेट बहुत बढि़या तरीके से बना रहा था.

‘‘तुम ने साड़ी पहनाना भी सीखा है?’’

रोहित हंसते हुए बोला, ‘‘बचपन में मां जब किसी बड़े फंक्शन के लिए तैयार

होती थीं, तब उन की हैवी साड़ी की प्लेट बनाने और पल्लू सैट करने मैं और पापा थोड़ी मदद कर देते थे.

लेकिन असली साड़ी की कला कालेज के थिएटर ग्रुप से आई थी. एक प्ले में एक लड़की की तबीयत खराब हो गई तो उस का रोल किया था साड़ी पहन कर.’’

‘‘अच्छा क्या बने थे साड़ी पहन कर?’’

‘‘द्रौपदी.’’

यह सुन अर्चना खूब हंसी तो रोहित ने साड़ी में पिन लगाते हुए कहा, ‘‘ज्यादा मत हंसो. 2 बार यमराज भी बना हूं.’’

जब अर्चना ने खुद को आईने में देखा तो बहुत इतराई. उसे रोहित की मदद से ज्यादा खुद के लुक्स पर नाज हो रहा था. गुलाबी साड़ी पहन जब कमरे से निकली तो मीना ने उसे देख कर तारीफ करी और रोहित की चुटकी ले कहा, ‘‘भैया मु?ो भी एक शादी में जाना है.’’

रोहित हंस पड़ा और अर्चना ने कहा, ‘‘ओह मीता यह मेरा पर्सनल स्टाइलिस्ट है.’’ और फिर रोहित को एक थैंक यू बोल अर्चना औफिस के लिए निकल गई.

शाम को जब रोहित घर आया तो अर्चना पहले से आई थी. उस ने डिनर भी और्डर कर रखा था.

‘‘क्या बात है आज जल्दी आ गई?’’

‘‘हां 2 घंटे पहले ही आ गई थी और देखो डिनर भी मांगा लिया. स्पैशल डिनर तुम्हारे लिए. आज तुम ने मेरी इतनी मदद की.’’

‘‘बहुत शुक्रिया. मगर जल्द ही आई थी तो खुद ही कुछ बना लेती अपने हाथों से खास मेरे लिए.’’

‘‘यार आज ही तो जल्दी आई. आराम की जगह खाना बनाती. बड़े होटल से खाना मंगाया है तुम्हारे लिए फिर भी तुम शिकायत कर रहे हो.’’

रोहित ने सोचा कोई फायदा नहीं है बहस का इसलिए वह चुपचाप कमरे में चला गया. कमरे में जा उस ने देखा कि अर्चना ने साड़ी खोल यों ही कुरसी पर फेंक रखी है.

‘‘2 घंटे पहले आई फिर भी साड़ी ढंग से रखने का टाइम नहीं.’’

डिनर करने के बाद रोहित ने अर्चना से कहा, ‘‘साड़ी को सही से रख दो नहीं

तो फिर पोंछा दिखेगी.’’

अर्चना ने रोहित को बड़ी समाइल दे कहा, ‘‘हां बाबा. कल उसे ड्राईक्लीन के लिए दूंगी. अब चलो साथ में मूवी देखेंगे.’’

रोहित ने अर्चना का हाथ झटक कहा, ‘‘नहीं. मुझे कल सुबह जल्दी निकलना है चंडीगढ़ के लिए. मुझे पैकिंग करनी है,’’ और फिर रोहित ने अपनी पैकिंग कर जल्दी सो गया. मगर अर्चना देर रात तक फोन पर बिजी रही.

5 दिन रोहित और अर्चना फोन पर जुड़े रहे. फिर वापसी में रोहित अर्चना के लिए गुलाब का बुके ले कर आया. रोहित को देख अर्चना बहुत खुश हुई. अर्चना ने कहा, ‘‘आज मैं खुद खाना बना रही हूं तो नाराज होने का मौका नहीं मिलेगा. जाओ नहा कर जल्दी आ जाओ.’’

रोहित अर्चना को गुलाब दे मुसकराते हुए कमरे में गया और वहां का नजारा देख सोच में पड़ गया, ‘‘वाह साड़ी हटा कर बीते 5 दिनों के कपड़े रख दिए. यह लड़की भी न,’’ इतना बड़ाबड़ा रोहित नहाने चला गया.

डिनर के बाद दोनों ने देर रात तक बहुत बातें कीं, मस्ती की फिर सो गए. अगली सुबह उठ रोहित ने जो सब से पहला काम किया वह था कुरसी पर रखे कपड़ों को वाशिंगमशीन में धोने डालना. कपड़ों को उठाते वक्त उसे उन में साड़ी भी मिली. वही साड़ी जो अर्चना 5 दिन पहले ड्राईक्लीन में देने वाली थी. रोहित को अर्चना पर गुस्सा तो आया लेकिन उस ने एक लंबी सांस ले साड़ी वहीं कुरसी पर वापस रख दी. वह देखना चाहता कि अर्चना आखिर कब अपनी गलती सम?ोगी.

मगर अपनी गलती समझने के बजाय अर्चना रोहित से बोली, ‘‘अरे यार जब उन कपड़ों को हटाया था तो यह साड़ी भी हटा देते,’’ और मुंह बना साड़ी को उठा एक बैग में रख कहा है, ‘‘इसे ड्राईक्लीन को दे देना जब टाइम मिले तब.’’

इस पर रोहित झेप कर बोला, ‘‘हां तुम्हें पिछले 5 दिनों में टाइम तो मिला नहीं होगा.’’

अर्चना भी अकड़ कर बोली, ‘‘हां नहीं मिला. एक ड्राईक्लीन के लिए ही तो बोला है मैं ने. इस पर तुम इतना नाराज हो रहे हो जैसे कोई पहाड़ तोड़ना हो.’’

रोहित अर्चना से फिर बोला, ‘‘तुम्हें अपनी गलती कभी नजर आती ही नहीं.’’

अर्चना भी चिढ़ कर बोली, ‘‘मेरी कोई गलती नहीं. नौकरी पर जानाआना टाइम नहीं मिलता मु?ो यह सब याद रखने का.’’

रोहित गहरी सांस ले कर बोला, ‘‘नौकरी मैं भी करने जाता हूं और सब याद भी रखता हूं और काम भी करता हूं.’’

अर्चना इस पर और गुर्रा कर बोली, ‘‘देखा अब अपने काम गिनाओगे. मैं ने तुम्हें कभी कुछ नहीं कहा करने को. तुम अपनी मरजी से यह हाउसवाइफ वाले काम करते हो और चाहते हो मैं भी करूं तो सौरी.’’

रोहित सम?ा गया था कि इस रिश्ते में उस की कोशिशें, उस की भागीदारी एक हाउसवाइफ के काम जैसी है, जिस की अर्चना के सामने न कोई इज्जत है, न ही कोई कदर क्योंकि उस के लिए हाउसवाइफ शब्द ही एक गुलामी जैसा है. इसलिए मौन रह गया.

उसी शाम अर्चना और रोहित रिया के घर डिनर पार्टी पर गए. डिनर तो बाहर से

आया था लेकिन फिर भी रोहित के स्पैशल मौकटेल की काफी रिक्वैस्ट हुई इसलिए रोहित सब के लिए मौकटेल बनाने लगा.

‘‘अच्छा अगले महीने के ट्रिप के लिए सब रैडी हैं न? पहले बता दूं लास्ट मोमैंट में कोई चेंज नहीं होगा. न ही कोई किसी का सामान उठाएगा और न नखरे,’’ हिमेश ने कहा.

‘‘मुझे लगता है हिमेश का इशारा तुम्हारी तरफ है अर्चना,’’ रिया ने आंखें मटका कर कहा.

अर्चना इस पर कुछ कहती कि श्वेता बोली, ‘‘पता है रोहित जब पिछली बार हम ट्रैक पर गए थे तो क्या हुआ था?’’

रिया भी जोश में आ गई, ‘‘हां ट्रैक पर. हम ने कैंप भी लगाया था, जिस की एक रस्सी भी अर्चना ने अपने नाजुक हाथों से नहीं पकड़ी. सुबह 5 बजे ट्रैक शुरू होता था लेकिन मैडम 8 बजे तक सोती.’’

इस पर अर्चना चिढ़ कर बोली, ‘‘तो जब मुझे ट्रैकिंग करनी ही नहीं थी तो उठूं ही क्यों.

वैसे भी ट्रिप पर आराम करने गए थे.’’

हिमेश भी बोल पड़ा, ‘‘हां इतनी जरूरत आराम की मैडम को कि इंस्टैंट नूडल के लिए पानी उबालने को कहा तो वह भी जला दिया. भला पानी कौन जलाता है.’’

इस बात पर तो अर्चना के दोस्तों के साथ रोहित की हंसी भी छूट गई जो अर्चना को बिलकुल अच्छी नहीं लगी.

रिया ने अपनी हंसी रोकते हुए कहा, ‘‘वैसे इस बार अच्छा है. तुम साथ चलोगे तो तुम अर्चना का ध्यान रखना. हम हम रिलैक्स रहेंगे.’’

अर्चना ?ोंप कर बोली, ‘‘मैं कोई बच्ची हूं जिस का खयाल रखना पड़ेगा?’’

रोहित ने सब को ड्रिंक सर्व की. ड्रिंक का लुत्फ लेते हुए रिया ने कहा, ‘‘यार अर्चना तू बहुत लकी है. आजकल रोहित जैसे परफैक्ट लड़के कहां मिलते हैं, जिसे सब आता है और केयरिंग भी है.’’

इस पर हिमेश ने कहा, ‘‘हां यार. मेरे बस की तो नहीं है इतना केयरिंग, अंडरस्टैंडिंग और घर के काम में भी बैस्ट होना. सच में रोहित हम जैसे लड़कों से अलग है. तु?ो रोहित का थैंकफुल रहना चाहिए.’’

रोहित की तारीफ तक तो ठीक था लेकिन थैंकफुल होना अर्चना को चुभा और सुबह की भड़ास में वह बोली, ‘‘हां रोहित परफैक्ट है लेकिन मैं भी कुछ कम नहीं. मेरे जैसी स्लिम, ब्यूटीफुल लड़की मिलना भी आसान नहीं. इसलिए रोहित मेरा इतना खयाल रखता है कि कहीं मैं उस के हाथ से निकल न जाऊं.’’

इस पर श्वेता ने चुटकी लेते कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता. रोहित जितना अच्छा है उसे और भी सुंदर लड़की मिल जाएगी.’’

अर्चना को श्वेता की बात बुरी लगी. उस ने गुस्से में श्वेता से कहा, ‘‘तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे तुम्हें भी रोहित पसंद हो.’’

श्वेता ने फिर अर्चना की खिंचाई करते कहा, ‘‘रोहित किसे पसंद नहीं होगा यार. मैं क्या रिया को भी पसंद होगा ऐसा जैंटलमैन.’’

अर्चना ने रिया की ओर देखा. रिया समझ चुकी थी अर्चना को जलन हो रही है तो उस ने भी कहा, ‘‘अरे यार हिमेश भी लड़की होता तो उसे भी रोहित पसंद आ जाता. क्यों हिमेश?’’ हिमेश ने भी हामी भर दी.

अर्चना को अपने दोस्तों के मुंह से सिर्फ रोहित की तारीफ हजम नहीं हो

रही थी, जिसे रोहित भांप गया. इसलिए माहौल को हलका करते हुए उस ने कहा, ‘‘भाई मु?ो कोई भी पसंद कर लो लेकिन मैं तो अर्चना का ही रहूंगा.’’

इस पर सब हंस दिए लेकिन अर्चना मन ही मन खुंदस खाए बैठी थी और यह खुंदस उस ने घर आ निकाली. ‘‘मैं ही बुरी हूं, मु?ो कुछ नहीं आता. मगर तुम सब से अच्छे हो, तुम्हें तो सब आता है. सब तुम्हारे फैन हैं.’’

‘‘यार ऐसा नहीं है. तुम ज्यादा ही सोच रही हो. तुम्हारे दोस्तों ने यों ही कह दिया.’’

‘‘यही तो मेरे दोस्तों ने कहा. मेरे दोस्तों को सिर्फ तुम नजर आते हो अब. मैं तो जैसे हूं ही नहीं. सिर्फ तुम्हारी बड़ाई. मैं जैसे कुछ नहीं हूं उन के लिए. रोहित ऐसा, रोहित वैसा, रोहित बैस्ट, अर्चना तुम लकी हो. मेरी कोई बात ही नहीं. यार तुम को पसंद है ये सब मम्मी वाले काम तो मैं क्या करूं. मैं इस के लिए क्यों थैंकफुल रहूं.

‘‘तुम नहीं थे तब भी तो ये सब काम होते थे न. अरे बाई को 4 पैसे ज्यादा दूंगी तो यह सब हो जाएगा. लेकिन तुम्हें हमेशा अच्छा बनना है इसलिए तुम यह सब करते हो. मेरे लिए नहीं करते, अपनी तारीफ के लिए करते हो. लेकिन

उन बेवकूफों को दिखता ही नहीं. अरे जिस के पीछे आज भी लड़के दुम हिलाते रहते हैं वह लड़की तुम्हारी गर्लफ्रैंड है. एक ऐवरेज लूकिंग लड़के की.

‘‘गर्लफ्रैंड खूबसूरत हो और फ्री का सैक्स भी मिले तो कौन लड़का अच्छा बन कर नहीं रहेगा. उस के आगेपीछे नहीं घूमेगा. सीधी बात इतनी ही है कि तुम इतने अच्छे बने रहते हो ताकि मैं तुम्हारे हाथ से निकल न जाऊं.’’

रोहित को अर्चना की सम?ा पर बहुत गुस्सा और अपने ऊपर शर्म आई. उस के 2 साल के रिश्ते, उस के प्यार, ईमानदारी, संवेदना, चिंता,

हर भावना को एक 15 मिनट के सैक्स के सामने छोटा कर दिया. उस ने अर्चना को बड़ी आस देख पूछा, ‘‘तुम्हें सच में यही लगता है मैं सिर्फ तुम्हारी सुंदरता और फ्री सैक्स के लिए तुम्हारे साथ हूं?’’

अर्चना ने बड़े रूखे शब्द में कहा, ‘‘हां

तो और क्या? आखिर एक आदमी का और चाहिए क्या?’’

रोहित ने एक छोटी सी मुसकान में कहा, ‘‘शायद थोड़ी सी सैल्फ रिस्पैक्ट,’’ बस इतना कह वह खामोश हो गया.

मगर अर्चना बोलती रही, ‘‘अगर मैं तुम्हारी इज्जत नहीं करती तो मेरे साथ क्यों हो? मैं क्या तुम्हारे आगेपीछे घूमती रहूं जैसे कोई आम लड़की, कोई हाउसवाइफ घूमती है.’’

अर्चना कुछ देर और बोली फिर कमरे में चली गई लेकिन रोहित लिविंगरूम की कुरसी पर देर रात तक यों ही बैठा रहा. जब सुबह अर्चना उठी तो उसे रोहित घर में नहीं मिला. उस ने सोचा वह औफिस निकल गया. पूरा दिन न उस ने रोहित को काल की न रोहित की काल आई. लेकिन शाम को उस का घर और रिश्ता दोनों बदल चुका था. रोहित का सारा सामान गायब था और फिर पड़ोसी ने आ कर घर की ऐक्स्ट्रा चाबी लौटा दी जिसे रोहित दोपहर को उन्हें घर खाली करते वक्त दे गया था.

रोहित के खामोशी से चले जाने के बाद अर्चना का मन बेचैन हो उठा. उस ने कई बार रोहित को काल की लेकिन उस ने फोन उठाया ही नहीं. उस ने जब रोहित के जाने की बात अपने दोस्तों को बताई तो सब ने उसे दिलासा दिया. लेकिन उस दिलासे से अर्चना की बेचैनी तो नहीं जा रही थी. उसे तो बारबार यही लगता कि कपल के बीच ?ागड़े तो होते हैं ही तो फिर यों छोड़ जाना तो सही नहीं.

एक दिन जब श्वेता से वह फोन पर बात कर अपनी भड़ास निकाल रही थी, ‘‘देखा

तुम्हें रोहित हमेशा परफैक्ट लगता था न. अब देख क्या किया उस ने मेरे साथ? कहता था कि प्यार करता है इसलिए मेरे साथ है. प्यार करता तो जाता खामोशी से? भला प्यार से बड़ा भी कुछ होता है क्या?’’

अर्चना की भड़ास का श्वेता ने बहुत शांति से जवाब दिया, ‘‘हां होता है. सैल्फ रिस्पैक्ट बोलते हैं उसे. जिस रिश्ते में इज्जत नहीं मिलती, वहां प्यार भी ज्यादा दिन नहीं रहता.’’

श्वेता के जवाब ने अर्चना की बेचैनी, उस की भड़ास सब शांत कर दिया. उसे अब रोहित से वह आखिरी बहस याद रही, ‘‘हां तो और क्या. आखिर एक आदमी को और चाहिए क्या. शायद थोड़ी सी सैल्फ रिस्पैक्ट.’’

अर्चना को अपना हर ताना याद आता. उसे अब घर के हर कोने में रोहित कोई न कोई काम, सफाई, सजावट या हंसतागाता नजर आने लगा. जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, अर्चना को अपने किए बरताव का धीरेधीरे बहुत गहरा एहसास होने लगा था.

एक दिन उस की कलीग शीना ने एक निजी फंक्शन पर पहनने के लिए उस से वही साड़ी मांगी जो उस ने पिछली मीटिंग पर पहनी थी. अर्चना ने उसे देने का वादा भी कर लिया लेकिन जिस दिन देनी थी उसे वह साड़ी अलमारी में कहीं दिखी नहीं. फिर उस ने बहुत याद किया

तो पाया कि उसी ने कह कर एक बैग में रख दी थी कि इसे ड्राईक्लीन के लिए दे दूंगी. जब उस ने उस बैग को ढूंढ़ा तो उसे वह बैग के कोने में पड़ी मिल तो गई लेकिन साड़ी एक गठरी सी दिख रही थी. अर्चना को समझ नहीं आया कि ऐसे कैसे इस साड़ी को अपनी कलीग को दे और इतनी जल्दी तो कोई ड्राईक्लीन कर के भी नहीं देगा.

अर्चना ने साड़ी को उलटपलट कर देखा और कहा, ‘‘गंदी तो नहीं दिख रही तो क्यों न प्रैस कर के ही दे दूं.’’

अर्चना जैसे ही उसे प्रैस करने लगी साड़ी अपना रंग खोने लगी और जल्द ही जल भी गई. साड़ी के जलते ही उसे रोहित की बात याद आई, ‘‘सिल्क पर सीधी गरम प्रैस नहीं करते. तापमान सैट करो, साड़ी पर पहले कौटन शीट लगाओ फिर प्रैस करो.’’

अपनी जली साड़ी और रोहित की बात पर उस की आंखें भर आईं कि तभी उस के घर की घंटी बजी.

दरवाजा खोला तो शीना साड़ी लेने आई थी. अर्चना ने पहले शीना की थोड़ी खातिरदारी करनी चाहा लेकिन शीना ने कहा, ‘‘आज टाइम नहीं है इसलिए साड़ी ले कर वह जल्दी चली जाएगी.’’

अर्चना ने अपना दोष छिपाते हुए कहा, ‘‘यार मु?ो माफ करना. मैं ने अभी साड़ी खोल कर देखी तो पता चला कि वह जल गई है.

पता नहीं कैसे. शायद ड्राईक्लीन वाले की गलती होगी.’’

शीना अर्चना की बात सुन नाराज हुई और कहा, ‘‘भला यह क्या बात हुई अर्चना. मैं ने तुम से 4 दिन पहले साड़ी के लिए कहा था. तुम अगर पहले ही साड़ी चैक कर लेती तो क्या जाता. अब लास्ट मोमैंट पर मैं क्या करूंगी?’’ और फिर नाराज हो शीना चली गई.

शीना की नाराजगी पर चिंता के बजाय अर्चना झेंप कर बोली, ‘‘नाराज तो ऐसे हो रही है जैसे मेरी नहीं उस की साड़ी जली हो. इतना ही था तो दूसरों पर क्यों डिपैंड हुई. अपना इंतजाम खुद कर लेती,’’ लेकिन मन ही मन वह जानती थी कि यह सारी उस की ही गलती है.

अपना मूड ठीक करने के लिए अर्चना ने इंस्टाग्राम देखा तो पता चला कि दोस्त उसे छोड़ ट्रिप पर चले गए. वही ट्रिप जिस पर वह और रोहित भी जाने वाले थे और अर्चना से कुछ दिन पहले ही ट्रिप का जिक्र किया था.

जब अर्चना ने अपनी नाराजगी जताना चाही तो फोन पर हिमेश ने कहा, ‘‘यार तेरा अभी ब्रेकअप हुआ है. तो हमें लगा तू अभी ऐडवैंचर नहीं करना चाहेगी. तुझे अभी शांति चाहिए.’’

श्वेता ने थोड़े खरे शब्द बोले, ‘‘यार हम ऐडवैंचर करते या तुझे संभालते. वैसे

भी यह ट्रिप तेरे मतलब का था नहीं. इस में आराम कम और ऐक्टिविटीज ज्यादा हैं. तुम रिलैक्स नहीं कर पाती.’’

अर्चना ने उन की सफाई सुन फोन काट दिया. उसे सम?ा आ गया था कि उस के दोस्त उसे साथ ले जाना ही नहीं चाहते थे. उन्हें यही लगता है कि अर्चना उन्हीं पर डिपैंड रहती है. अर्चना उस शाम रोहित का नाम ले खूब चिल्लाई, उसे कोसा कि उस की वजह से उस के दोस्त भी उस से दूर हो गए.

रोहित के जाने के बाद अर्चना और जिद्दी और बेफिक्र हो गई. उसे दूसरों पर अब ज्यादा गुस्सा आने लगा था. वह साफसफाई को ले कर मीना से लड़ती. अपने खानेपीने पर भी ध्यान नहीं देती और कुछ भी और्डर कर खाती रहती. इस वजह से एक दिन उसे फूड पौइजनिंग भी हो गई. कुछ घंटे अस्पताल में रहने के बाद जब घर आई तो उस की राह देखने वाला उसे कोई नहीं मिला.

उस के दोस्तों ने भी फोन पर हालचाल जान लिया. अर्चना ने मीना को फोन कर बुला लिया और अब खाना बनाने का काम भी दे दिया और वह डाइट लिस्ट भी दे देगी जो डाक्टर ने उसे सजैस्ट की थी. जब मीना उस के लिए खाना बना कर लाई तो थाली में रखी खिचड़ी को देख उसे रोहित का बनाया पुलाव बहुत याद आया और वह खूब रोई.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...