राइटर- अंशुमान श्रीवास्तव
Kahaniyan : 27 नवंबर, 2023 शाम के 5 बजे हैं पर अंधेरे और धुंध की वजह से लग रहा है जैसे 7 बज चुके हैं. दिल्ली के मशहूर गोल्डन ग्लोब शौपिंग मौल में आज काफी भीड़ है. इसी मौल से लगा हुआ एक होटल भी है, जिस में ठहरने वाले लोग अकसर इस शौपिंग मौल में घूमते दिख जाते हैं. मौल के पीछे का रोड एक बड़ा इंग्लिश का एल अक्षर बनाता हुआ बाकी की 2 सड़कों को जोड़ता है. इस जगह को स्थानीय लोग मौल बैक साइड भी कहते हैं.
मौल बैक साइड कई सारे कौपोरेट औफिसों, रेस्तराओं और गाडि़यों के शोरूम्स का गढ़ है.
इस के पीछे कुछ किलोमीटर पर साकेत मैट्रो स्टेशन भी है. बीच में एक पुराना सा एक रिहायशी इलाका है, जिस में अंदर ही अंदर बहुत सारी गलियां हैं. इस महल्ले को कुंदन ऐक्सटैंशन के नाम से जाना जाता है. कुंदन ऐक्सटैंशन में बसे कई घर अब खाली पड़े हैं और जर्जर हो चुके हैं. यह पूरा महल्ला एक सरकारी विवादित जमीन पर बना है, जिस पर मुकदमा चल रहा है. इसीलिए यहां इक्कादुक्का लोग ही रहते हैं.
हमेशा की तरह शाम में आज भी एक धुंधलापन है. लगता है बारिश होने वाली है. एअर क्वालिटी इंडैक्स अकसर जैसे 4 सौ के आसपास होता है आज भी शायद उतना ही है.
धुंधली सी इस उदास शाम में मौल बैक साइड में स्थित जेड स्क्वायर नाम की औफिस बिल्डिंग के सामने की सर्विस लेन में टैक्सी और प्राइवेट कारों का आनाजाना लगा हुआ है. इन कारों में लोग लगातार चढ़ रहे हैं. सब के चेहरों पर कुछ जल्दबाजी और हड़बड़ाहट नजर आती है. सब को घर जाने की जल्दी है.
जेड स्क्वायर की मेन ऐंट्रैंस पर मोशन सैंसर शीशे के दरवाजे लगे हैं जो किसी के नजदीक आने पर खुद ही खुल जाते हैं. दरवाजे से अंदर आने पर बहुत बड़ा रिसैप्शन एरिया है. एक फाइव स्टार होटल की बड़े रिसैप्शन हाल से आप इस की तुलना कर सकते हैं. रिसैप्शन के दाहिनी
तरफ बड़ेबड़े लैदर फिनिश वाले सोफे रखे हैं और इन सोफों के बीच में संगमरमर पत्थर के टौप वाली छोटी राउंड टेबल रखी हुई है. इस तरह के सोफे और टेबल के कई सैट पूरे रिसैप्शन एरिया में लगे हैं.
सर्विस लेन में मची गहमागहमी के बीच मौसम कुछ बिगड़ना शुरू हो गया.
पहले तेज हवाओं के साथ कुछ बड़ीबड़ी बूंदें पड़ीं और फिर कुछ ही देर में छोटीछोटी बूंदों ने पूरा आसमान ढक लिया. औफिस बिल्डिंग के दूसरी तरफ बने कैफे में अलहदा बैठे एक प्रेमी जोड़े के लिए मौसम और भी रोमांटिक बन गया और वह एकदूसरे में पहले से ज्यादा मसरूफ दिखाई दिए.
आसपास होती इन तमाम घटनाओं के बीच अपनी डैस्क पर बैठी रिसैप्शनिस्ट कुछ परेशान सी दिखाई दे रही थी. उस की शिफ्ट खत्म होने में अभी 2 घंटे बाकी थे. उसे बारिश देख कर कुछ खास खुशी नहीं हो रही थी.
‘अफ, अब यह बारिश क्यों आ गई,’ उस ने अपनेआप से कहा.
उस की डैस्क से रोड की दूसरी तरफ कैफे में बैठा वह प्रेमी जोड़ा साफ दिख रहा था, रिसैप्शनिस्ट ने पहले लड़की पर गौर किया.
‘इस लड़की का वजन कितना ज्यादा है. पता नहीं इस ने इतना स्मार्ट लड़का कैसे पटा लिया. बस पैसे होने चाहिए और कोई भी पट जाता है. इस का ब्रेसलेट तो बहुत महंगा मालूम पड़ता है. बड़े मांबाप की औलाद होगी,’ वह मन ही मन बस उस लड़की की आलोचना करती गई, ‘पर कुछ भी हो, है बड़ी गोरी.’
ऐसा सोचते हुए उस ने अपने हाथों की तरफ देखा. ठंड की वजह से उसे अपने हाथ
कुछ रूखे महसूस हुए और उस ने तुरंत अपनी मेज के नीचे रखे हैंडबैग से एक छोटी मौइस्चराइजर की ट्यूब निकाली और उसे अपने हाथों पर लगाने लगी. अपनी कलाई के ठीक ऊपर क्रीम को रगड़ते हुए अपने हाथों के छोटेछोटे महीन बाल उसे महसूस हुए जो आखिरी बार पिछले महीने अपनी बैस्ट फ्रैंड की शादी में उस ने खुद ही वैक्स किए थे.
‘संडे को वैक्सिंग भी करनी है,’ उस ने अपने हाथों पर सफेद शर्ट की आस्तीन को फिर से चढ़ा दिया और अपने खयालों में खो गई.
1 घंटा बीत गया. बारिश अब थम चुकी थी. तभी एक बड़ी एसयूवी के हौर्न की आवाज से रिसैप्शनिस्ट का ध्यान सड़क की तरफ गया. मेन ऐंट्रैंस के सामने एक समुद्री हरे रंग की रेंज रोवर अभीअभी रुकी थी. उस की ड्राइविंग सीट पर एक क्लीन शेव्ड 34-35 साल का आदमी बैठा था. उस के लंबे बाल माथे की एक तरफ बेतरह ?ाल रहे थे. उस ने भूरा टर्टलनैक स्वैटर और एक चौड़े कौलर वाला लंबा ओवरकोट पहन रखा था. कार को रोड की साइड में लगा कर वह उतरा और एक हाथ से माथे पर आ रहे बालों को पीछे की तरफ धकेल कार के बैक व्यू शीशे में अपनी शक्ल देख कर संतुष्ट होने के बाद फुरती से औफिस के गेट की तरफ आता दिखा. रिसैप्शनिस्ट उसे आता देख कुछ सचेत हो गई और जल्दी से अपने बालों के हेयरबैंड को एक बार फिर से निकाल कर अपनी चोटी को दुरुस्त करते हुए एक मुसकान के साथ सामने की तरफ देखने लगी. वैसे किसी को भी गेट से आते वक्त देख कर मुसकराना उस के काम का हिस्सा था. कुछ ही पलों में यह आदमी उस की डैस्क के सामने खड़ा था.
‘‘हैलो सर. मैं आप की क्या सहायता कर सकती हूं?’’ रिसैप्शनिस्ट ने मुसकराते हुए कहा.
‘‘मैं प्राजक्ता को पिक करने आया हूं,’’ उस शख्स ने सधी आवाज में जवाब दिया.
‘‘प्राजक्ता… प्राजक्ता हां. वह मैडिसन हिल्स वाली? घुंघराले बालों वाली मैम?’’ रिसैप्शनिस्ट ने कुछ अंदाजा लगाते हुए पूछा.
‘‘हा.’’
‘‘आप का नाम?’’
‘‘आकाश.’’
रिसैप्शनिस्ट औफिस की घड़ी की तरफ देखते हुए कहा, ‘‘अरे, वैसे भी औफिस खत्म होने ही वाला है. आप उन्हें फोन कर लीजिए. वे 5-10 मिनट में आती ही होंगी.’’
इतने में बाहर एक सफेद रंग की पुलिस की जीप ठीक आकाश की रेंज रोवर के पीछे रुकी. उस में से एक लेडी इंस्पैक्टर बाहर निकली. उस के साथ एक हवलदार भी था, इंस्पैक्टर वीणा डे आज से 10 दिन हुए पहले एक मर्डर की छानबीन के सिलसिले में आज तीसरी बार यहां आई थी.
जेड स्क्वायर की दूसरी मंजिल पर ब्लू बर्ड इंडिया नाम की एक आईटी कंपनी में काम करने वाली 23 साल की रिया का औफिस से घर जाते वक्त खून हो गया था. उस की लाश औफिस के कंपाउंड से 3 सौ मीटर की दूरी पर कुंदन ऐक्सटैंशन की एक गली में मिली थी. किसी ने नुकीले हथियार से उस के गले पर एक गहरा सूराख कर दिया था. इस मर्डर की रिपोर्ट उस के मंगेतर शेखर ने की थी जो खुद भी एक आईटी कंपनी में काम करता था. वह खून की रात बस 1 किलोमीटर दूर मैट्रो स्टेशन पर रिया का वेट कर रहा था.
जब रिया औफिस से निकलने का मैसेज डाल कर 40 मिनट बाद भी मैट्रो स्टेशन नहीं
पहुंची तो उस ने औफिस पहुंच कर पूछताछ की और फिर पास के पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखाई. फिर देर रात पुलिस ने मोबाइल ट्रेस कर के रिया की लाश को खोज निकला. अगले दिन सुबह पुलिस ने औफिस वालों से भी पूछताछ की तो पता चला कि रिया ने कुछ महीने पहले ही ब्लू बर्ड इंडिया में काम करना शुरू किया था. औफिस में तो वह लोगों को ढंग से जानती भी नहीं थी. कत्ल वाली रात कुहरा काफी घना था जिस की वजह से किसी ने रिया को जाते नहीं देखा था. बाहर की सीसीटीवी फुटेज भी किसी काम के नहीं थे क्योंकि उस रात कैमरे के ऊपर ओस जम गई थी.
रिया के बारे में पुलिस को सब से ज्यादा शेखर से ही पता चला. शेखर अकसर उसे लेने आता था. वह हमेशा रिसैप्शन एरिया में रिया का इंतजार करता और इसी वजह से उस की रिसैप्शनिस्ट से भी अच्छी जानपहचान हो गई थी. रिया जब औफिस का काम खत्म कर लिफ्ट से नीचे आती तो शेखर को वहां बैठा देख कर बहुत खुश हो जाती.
एक बार शेखर एक बहुत बड़ा टैडी बियर ले कर औफिस जा पहुंचा जिसे रिया से छिपाने और सरप्राइज करने के लिए रिसैप्शनिस्ट ने उस की मदद की. जब रिया को टैडी बियर रिसैप्शन डैस्क के पीछे मिला तो वह चहक उठी और शेखर के गले लग गई.
शेखर ने उस के गाल पर एक किस देते हुए. ‘‘पर मेरा टैडी बियर तो तुम हो,’’ कहा और दोनों हंसतेखिलखिलाते बिल्डिंग से बाहर चले गए.
रिसैप्शनिस्ट दोनों को खुश देख कर अकसर मुसकराती. उन्हें साथ देख कर उस की आंखों में चमक आ जाती. शायद उसे भी ऐसे ही प्यार की तलाश थी. टैडी बियर वाली घटना के अगले दिन ही रिया की मौत हो गई. ये सारी बातें रिसैप्शनिस्ट ने भी पुलिस को पूरे विस्तार के साथ बताई थीं. हालांकि मर्डर वाली रात को वह थोड़ा पहले ही औफिस से चली गई थी. उस ने भी उस दिन रिया को औफिस से निकलते नहीं देखा था.
इंस्पैक्टर वीणा सीधी रिसैप्शन डैस्क पर पहुंची.
‘‘अमन औफिस में है?’’ उस ने रिसैप्शनिस्ट के कुछ बोलने से पहले ही सवाल किया.
अमन औफिस बिल्डिंग के एडमिन इंचार्ज हैं.
‘‘हां, मैम अपने औफिस में ही होंगे मैं अभी उन्हें बुलाती हूं. आप तब तक बैठिए.’’
‘‘नहीं, मैं ऐसे ही ठीक हूं.’’
वीणा ने बिल्डिंग की सीलिंग को अपनी आंखों से स्कैन करते हुए कहा. उस की आंखें कत्ल का कोई सुराग ढूंढ़ रही थीं.
कुछ ही मिनटों में अधेड़ उम्र के अमन भागते हुए रिसैप्शन एरिया पहुंचे. फ्रैंच कट दाढ़ी और काले रिम वाले चश्मे के साथ वे एक गंभीर आदमी नजर आते थे.
अमन ने रिसैप्शनिस्ट को कुछ डांटने के अंदाज में कहा. ‘‘अरे मैडम को यहां वेट क्यों करवा रही हो सीधे औफिस भेज देतीं? मैम प्लीज कम.’’
अमन, वीणा और हवलदार के अंदर जाने के साथ ही प्राजक्ता बाहर आई. उस ने आकाश को देख लिया था. वह मुसकराते हुए उस की तरफ बड़ा. दोनों एकदूसरे के गले मिले और एकदूसरे का हाथ पकड़े हुए बाहर निकल गए.
शाम के 7 बज चुके थे. रिसैप्शनिस्ट ने अपना बैग पैक किया. उस के जाने का टाइम हो चुका था.
‘‘तुम रोज इसी समय जाती हो?’’
रिसैप्शनिस्ट पीछे से आई आवाज की तरफ मुड़ी और उस की नजरें इंस्पैक्टर वीणा से मिलीं.
‘‘हं… हां… हां मैम,’’ कुछ हड़बड़ी में उस ने कहा.
घबराहट में डैस्क पर रखा बैग उस के एक हाथ से टकरा कर जमीन
पर गिर पड़ा और बैग का सामान इधरउधर बिखर गया, जिस में एक फेस क्रीम की ट्यूब, परफ्यूम और एक स्टील की कंघी थी. वह जल्दबाजी में जमीन पर फैला अपना सामान बटोरने लगी.
वीणा यह सब बड़े गौर से देख रही थी. हवलदार रिसैप्शनिस्ट की मदद के लिए आगे बढ़ा पर वीणा ने उसे अपनी जगह खड़े रहने का इशारा किया.
वीणा ने अपना अगला सवाल किया, ‘‘तुम कहां रहती हो और कैसे जाती हो घर?’’
रिसैप्शनिस्ट ने बैग बंद करते हुए कहा. ‘‘पीतमपुरा मैम. मैट्रो से जाती हूं.’’
‘‘ओह अच्छा आओ तुम्हें मैट्रो तक लिफ्ट दे देते हैं. क्या कहते हो शेरावत,’’ वीणा ने हवलदार की तरफ देखते हुए कहा.
हवलदार हां में सिर हिला कर मुसकराया.
‘‘मैं चली जाऊंगी मैम. आप बेवजह परेशान होंगी.’’
वीणा ने कुछ सोचते हुए कहा, ‘‘ठीक है, चलो शेरावत.’’
वीणा और हवलदार औफिस से बाहर निकल कर अपनी जीप में बैठ गए.
‘‘यह अमन तुम्हें कैसा आदमी लगा शेरावत?’’ वीणा ने पूछा.
शेरावत ने जीप स्टार्ट करते हुए कहा, ‘‘मु?ो तो मर्डर करने वाला नहीं लगता मैडमजी.’’
‘‘मर्डर करने वाली तो यह लड़की भी नहीं लगती,’’ वीणा ने रिसैप्शनिस्ट की ओर इशारा करते हुए कहा जो सामने ही एक औटो में बैठ रही थी. इसी के साथ पुलिस जीप तेज घरघराहट की आवाज करती हुई आगे बढ़ गई.
अगले दिन सुबह प्राजक्ता औफिस के
मेन दरवाजे से कुछ जल्दबाजी में
अंदर आई.
रिसैप्शनिस्ट ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘गुडमौर्निंग मैम.’’
‘‘मौर्निंग, कैसा जा रहा है आज का दिन?’’
‘‘बढि़या मैम. आप की गरदन पर यह निशान कैसा?’’
‘‘ओह, कैसा निशान. दिस इज आकाश बीइंग नौटी,’’ उस ने हंसते हुए कहा और अपनी शर्ट के कौलर को ऊपर करते हुए लव बाइट को छिपा लिया.
‘‘अच्छा हुआ तुम ने मुझे बता दिया वरना सब मीटिंग में इसी को देखते. ओह आज तो ट्रैफिक में काफी टाइम लग गया.’’
प्राजक्ता अपने औफिस की तरफ काफी हड़बड़ी में भागी. उस की मीटिंग शुरू होने वाली थी.
आज का दिन भी एक रोजमर्रा के दिन की तरह ही ढल गया. प्राजक्ता जब काम खत्म कर के वापस रिसैप्शन एरिया में आई तो उस की आंखें आकाश को खोज रही थीं पर आज शायद वह नहीं आया. उस ने बिल्डिंग से बाहर निकल कर एक सिगरेट सुलगाई. आज की शाम भी कुहरे से ढकी हुई थी. बिल्डिंग के आसपास लगे रजनीगंधा और रातरानी के फूलों की सुगंध कुहरे में मिल कर एक भीगी ठंड की खुशबू पैदा कर रही थी. स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी कुहरे में छन कर फैल रही थी. हर स्ट्रीट लाइट एक धुंधले देवदार के पेड़ जैसी लग रही थी.
तभी उस के मोबाइल पर एक टिंग की आवाज हुई और उस ने अपने मोबाइल
फोन पर एक मैसेज देखा जिस से उसे थोड़ी निराशा हुई.
‘‘क्या हुआ मैम, सब ठीक?’’ उस ने अपने पीछे रिसैप्शनिस्ट को मुसकराते हुए पाया जो अपना बैग ले कर अभीअभी दरवाजे से बाहर आई थी.
‘‘कुछ खास नहीं वह नियति जो आज मु?ो अपनी कार में लिफ्ट देने वाली थी, वह एक जरूरी मीटिंग में फंस गई है और अब वह 2 घंटे बाद निकलेगी,’’ प्राजक्ता ने एक लंबा कश लेते हुए कहा.
रिसैप्शनिस्ट ने बात जारी रखी, ‘‘तो आप कैब से घर जा रही हैं?’’
प्राजक्ता बोली, ‘‘यार, कैब की गंदी महक से मेरा सिर घूमता है और यहां कोई औटो वाला भी नहीं दिख रहा है. तुम घर कैसे जाती हो?’’
‘‘मैं तो मैट्रो से घर जाती हूं मैम. मैट्रो स्टेशन यहां से पास ही है. पैदल 10 मिनट बस.’’
‘‘लगता है मुझे भी आज मैट्रो से ही जाना पड़ेगा… यह ठंड की महक कितनी अच्छी है.’’
‘‘हां मैम. मुझे तो कुहरा बहुत पसंद है, आप मेरे साथ मैट्रो तक वौक करना चाहेंगी?’’ रिसैप्शनिस्ट बोली.
‘‘एक शर्त पर, तुम्हें मुझे मैम बुलाना बंद करना पड़ेगा.’’
और फिर दोनों बातें करते हुए मैट्रो स्टेशन की तरफ चल पड़े. कुछ दूर चलने के बाद रिसैप्शनिस्ट को एक पतली सी गली की तरफ मुड़ते देख प्राजक्ता ने कहा, ‘‘अरे, उधर कहां जा रही हो? मैट्रो का रास्ता तो इधर है न.’’
‘‘यह शौर्टकट है. वह गली के आखिर में आप को पीला सा शटर दिख रहा है न. बस वहीं से दाहिने हाथ पर मैट्रो स्टेशन का दूसरा गेट है. पर अगर आप को डर लग रहा है तो हम मेन रोड से ही चलते हैं.’’
‘‘डर. वे भी मु?ो… मु?ा से ज्यादा डर तो आकाश को लगता है. पता है मैं ने कितनी हौलीवुड की डरावनी फिल्में थिएटर में अकेले बैठ कर देखी हैं.’’
‘‘तो फिर आइए इधर से 2 मिनट में पहुंच जाएंगे.’’
‘‘चलो फिर.’’
गली में थोड़ा अंदर जा कर रोशनी और कम हो गई. 8 बज रहे थे पर अंधेरे की वजह से लगता था कि रात के 10 बज रहे हैं. रिसैप्शनिस्ट गली के बीचोंबीच पहुंच कर रुक गई.
‘‘पता है प्राजक्ता. हमारी औफिस बिल्डिंग में काम करने वाली रिया मैम का भी मर्डर यहीं हुआ था.’’
प्राजक्ता खिलखिलाते हुए बोली, ‘‘हा…हा… हा, अब मैं सम?ा, तुम मु?ो डराना चाहती हो. पर मैं इतनी आसानी से डरने वाली नहीं. वैसे तुम ने कहा रिया का भी. यहां और किस का मर्डर हुआ है भई?’’
रिसैप्शनिस्ट ने एक ठंडी आवाज में जवाब दिया, ‘‘आप का.’’
प्राजक्ता थोड़ा चिड़चिड़ा कर बोली, ‘‘मैं बिलकुल मजाक के मूड…’’ प्राजक्ता इस से ज्यादा न बोल सकी. उस के गले से आवाज ही नहीं निकली. अपने दाहिने कंधे से थोड़ा ऊपर गरदन के पास उसे एक ठंडी तेज चुभन महसूस हुई. उस ने गरदन पर हाथ लगा कर देखा तो उस की उंगलियां एक गाढ़े द्रव्य से गीली हो रही थीं.
‘‘खून…’’
एक बेहद नुकीली चीज उस की गरदन में घुस कर उस की सांस की नली तक
पहुंच चुकी थी. उसे अपनी गरदन में तेज दर्द महसूस हुआ. उस का दिमाग काम करना बंद कर रहा था. वह लड़खड़ाते हुए जमीन पर गिरने को हुई पर इसी समय उस के कंधों को किसी ने बड़े आराम से थाम लिया और गली की एक तरफ लगी लोहे की जाली से टिका कर बैठा दिया. अब वह रिसैप्शनिस्ट को देख सकती थी जिस के चेहरे पर कोई भाव नजर नहीं आ रहा था.
रिसैप्शनिस्ट उस के सामने घुटने के बल बैठ गई और एक हलकी सी मुसकान के साथ बोली.
‘‘ओह प्राजक्ता. कम से कम रिया मैम ने थोड़ी कोशिश तो की थी बचने की. आप तो बड़े आराम से…
‘‘पर डरिए मत. जब तक आप पूरी तरह रिलैक्स महसूस नहीं करती मैं यही हूं,’’ उस ने अपने एक हाथ को प्राजक्ता की गरदन के पास नचाते हुए कहा. ‘‘मैं कहीं आप को कोई साइको किलर तो नहीं लग रही न.’’
और इसी के साथ उस ने एक ?ाटके में प्राजक्ता की गरदन में घुसे हुए कंघी के पिछले सिरे को निकाला, जिस की तेज नोक से खून टपक कर जमीन पर बड़ीबड़ी बूंदें बना रहा था. प्राजक्ता की आंखों में खून के कतरे साफ दिखाई दे रहे थे. कंघी निकल जाने की वजह अब उस की गरदन पर बने सूराख से खून तेजी के साथ बहता हुआ उस के सीने के बीच इकट्ठा हो रहा था. उस का भूरा ब्लेजर खून से भीग कर धीमी रोशनी में काला दिखाई दे रहा था. उस ने एक हाथ से अपना फोन निकलने की कोशिश की पर रिसैप्शनिस्ट ने बड़े आराम से उस के हाथ से फोन छीन जमीन पर रख दिया और ठंडी आवाज में बोलना जारी रखा, ‘‘मु?ो पता है मैम आप क्या सोच रही हैं? देखिए, मेरी आप से कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है. पता है आप को. रिया का बौयफ्रैंड मेरा कितना अच्छा दोस्त बन गया था. पर वह उसे हमेशा मु?ा से दूर करने की कोशिश में लगी रहती थी. वह काफी जलनखोर औरत थी पर आप बहुत स्वीट हो इसलिए मैं आप को अपना एक सीक्रेट बताती हूं पर आप किसी को बोलना मत,’’ उस ने अपनी उंगली होंठों पर रख कर चुप रहने का इशारा किया.
‘‘5 साल पहले की बात है, मेरी एक दोस्त ने मेरा सबकुछ छीन लिया, मेरा प्यार, मेरा साथी और उस के बाद वह मु?ो एक दिन अपनी शादी का कार्ड देने आई. सोचो जरा, कितनी बेशर्म पर मैं ऐसा कैसे होने दे सकती थी. आखिरकार अपनी मदद हमें खुद ही करनी पड़ती है न तो फिर मैं ने क्या किया,’’ रिसैप्शनिस्ट की आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई, ‘‘मैं ने खुशीखुशी कार्ड ले लिया पर जब वह मेरे घर से निकली तो मैं ने उस का पीछा किया. उस दिन भी ऐसी ही कुहरे वाली रात थी. मैं ने उसे कितना सम?ाया पर वह नहीं मानी, क्या बताऊं कि मैं कितनी मुश्किल से उस को ठिकाने लगा पाई. यह कंघी कितने काम की है यह तो आप देख ही रही हो, इस का यह पीछे वाला सिरा इतना नुकीला है कि यह बड़े आराम से…’’
और उस ने कंघी में लगे खून को तसल्ली से प्राजक्ता के ब्लेजर से पोंछते हुए अपनी
बात जारी रखी, ‘‘मेरी दोस्त रिया, आप सब मुझे एहसास दिलाते हैं कि मुझ में ही कोई कमी है, किसी को देख कर जलन करना बुरी बात है न तो अब मैं जलन करने का विकल्प ही नहीं रखती, बाद की टैंशन कौन रखे, है न? मु?ो पता था आप समझ जाओगे,’’ उस ने प्राजक्ता की ओर देखते हुए कहा, जिस की आंखों में अब कोई हरकत बाकी नहीं थी.
अगले दिन सुबह 10 बजे. जेड स्क्वायर के बाहर धूप खिली हुई थी. आज कुहरा काफी कम था. औफिस में ढेर सारे लोगों का आना लगा हुआ था. इतने में करीब 22-23 साल की लड़की एक कार से उतर कर अंदर आई और सीधी रिसैप्शन डैस्क पर पहुंची.
‘‘मुझे रीगल फाइनैंस लिमिटेड के दास से मिलना है.’’
रिसैप्शनिस्ट ने अपनी चिरपरिचित मुसकान के साथ जवाब दिया, ‘‘वैलकम मैम मैं अभी औफिस में खबर करती हूं, आप प्लीज बैठिए, ये आप के साथ हैं?’’
जींस और टीशर्ट पहने एक स्मार्ट लड़के की तरफ देख कर उस ने पूछा जो अभीअभी एक लेडीज पर्स ले कर उस लड़की के पीछे आया था.
‘‘ओह हां. यह मेरा बौयफ्रैंड है. आज औफिस का पहला दिन है न तो मुझे ड्रौप करने के लिए आया है.’’
‘‘हाऊ क्यूट. आप दोनों साथ में कितने अच्छे लगते हैं,’’ रिसैप्शनिस्ट ने मुसकराते हुए कहा. उस की आंखों में एक अजीब सी चमक थी. उस की स्टील की कंघी रिसैप्शन डैस्क पर ही पड़ी थी.
बाहर पुलिस जीप का धीमा साइरन सुनाई दे रहा था जिस की आवाज हर गुजरते सैकंड के साथ तेज होती जा रही थी. वह जीप शायद पिछली गली की ओर जा रही थी. रिसैप्शनिस्ट ने आराम से अपने बाल ठीक किए और अगले आने वाले का इंतजार करने लगी.
