दुनिया में ऐसी कई जगह हैं, जिनकी तस्वीरे देखकर वो जगह हमें बहुत ही शांत नजर आती है. उन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि काश, हम भी इन जगहों पर जा सकते. अगर आपको भी किसी बाहरी जगह के बारे में ऐसा ही ख्याल आया है, तो आप किसी विदेश की जगह नहीं बल्कि भारत के खूबसूरत गांवों में घूमकर ही अपना सपना पूरा कर सकती हैं. आइए, जानते हैं भारत के ऐसे खूबसूरत गांवों के बारे में.

मावल्यान्नौंग, मेघालय

इस गांव को एशिया के सबसे साफ सुथरे गांव का तमगा मिल चुका है. इस इलाके में प्लास्टिक बैग पर पूरी तरह प्रतिबंध है और स्मोकिंग भी प्रतिबंधित है. यहां जगह-जगह बांस के डस्टबिन रखे हैं जिनमें सारा कूड़ा डाला जाता है यहां तक की पेड़ों से गिरने वाली पत्तियां और लकड़ी भी इसी में डाली जाती है. यहां नदियों के ऊपर पेड़ों की जड़ों से बने पुल हैं जिन्हे यूनेस्को विश्व विरासत का दर्जा दे चुका है.

क्या है खास

गांव की साफ-सफाई, प्राकृतिक नजारे

बिश्नोई विलेज सफारी (जोधपुर, राजस्थान)

अगर आप ट्राइबल सफारी के शौकीन हैं और बिश्नोई समाज को नजदीक से देखना चाहते हैं तो दक्षिण जोधपुर से मात्र 40 मिनट की दूरी पर बसे जनजातीय गांव विश्नोई विलेज में आपका स्वागत है. आदिम जीवन शैली और उनकी सांस्कृतिक विरासत को समझने का यह बढ़िया अवसर हो सकता है. खेजड़ी के पेड़ों से घिरे इस गांव में हिरन और चिंकारा देखे जा सकते है. गुडा झील यहां का प्रमुख आकर्षण है, कई तरह के पक्षियों का डेरा है.

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क्या है खास

कनकनी (ब्लौक प्रिंटरों का गांव), सलतास (बुनकरों का गांव), गुढ़ा (वन्यप्राणी और विश्नोई समाज), ओसियन मंदिर, डेजर्ट वाइल्ड लाइफ, 65 किलोमीटर की जीप सफारी.

गुनेह विलेज (कांगड़ा वैली, हिमाचल प्रदेश)

हिमालय के कुछ अनदेखे हिस्सों का दीदार करना हो तो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा वैली में बसे पहाड़ी गांव गुनेह का रुख कीजिए. कायनात की बेहिसाब खूबसूरती समेटे जनजातीय बहुल इस गांव में आपको वह सब मिलेगा जिसकी तलाश हर एक नेचर लवर्स को होती है. चरवाहों का यह छोटा-सा गांव, ग्रामीण परिवेश को एंजौय करने वालो के लिए मुफीद जगह है.

क्या है खास

मंदिर, पैराग्लाइडिंग, मौनेस्ट्री, चाइना पास, बारोट वैली, स्थानीय चित्रकारी और कला का दर्शन, विलेज वौक.

कल्प गांव (गढ़वाल, उत्तराखंड)

उत्तराखंड में समुद्र तल से 7500 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ों की गोद में बसा एक छोटा-सा गांव कल्प निहायत ही खूबसूरत और आकर्षक है. वाकई सुकून की तलाश यहां आकर खत्म होती है. खानाबदोश चरवाहों का यह गांव प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है और सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र भी. 500 की आबादी वाले इस गांव में ट्रेकिंग के ढेरों औप्शन उपलब्ध हैं.

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क्या है खास

फौरेस्ट ट्रेकिंग, पहाड़ी नदियां, झड़ने, स्थानीय स्वर्ण मंदिर और विलेज वौक.

श्याम गांव (जोरहाट, असम)

जोरहाट जिले में बौद्ध विरासत को समेटे यह छोटा-सा गांव बारहों मास सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है. यहां कई प्राचीन बौद्ध मंदिर हैं. ध्यान और अध्यात्म की आपकी तलाश यहां आकर पूरी हो सकती है. गांव से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर छारा फौरेस्ट एरिया और सिंगफन वाइल्ड लाइफ सैंचुरी का मजा उठाया जा सकता है.

क्या है खास

वाइल्ड लाइफ सैंचुरी, फौरेस्ट एरिया

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