Couple fitness : ‘‘अरे  शीना तू ने बताया नहीं तू मां बनने वाली है? बधाई हो. हां, बस पेट ऐक्सचेंज हो गए. तेरा बौयफ्रैंड कितने महीने का प्रैगनैंट है?’’

‘‘क्या? बस भी करो,’’ शीना अपनी सहेलियों की बात सुन तिलमिला गई क्योंकि यह कोई बधाई नहीं बल्कि एक खिल्ली थी जो उस की सहेलियों ने शीना के थुलथुल पेट वाले बौयफ्रैंड को देख कर उड़ाई थी.

आजकल हरकोई शीना से उस के बौयफ्रैंड के मोटापे को देखदेख कुछ न कुछ मजाक कर ही देता है, जिस से शीना बहुत परेशान हो रही है. उस ने कई बार अपने बौयफ्रैंड को समझाया भी कि अपनी बौडी पर ध्यान दे लेकिन वह सुनता ही नहीं और जो मरजी वह दिन भर खाता रहता है.

शीना को यह भी डर है कि आखिर 1 साल के अंदरअंदर उस के बौयफ्रैंड को हो क्या गया जो वह 60 किलोग्राम 80 किलोग्राम का तो हुआ ही, साथ ही एक पतीले जैसा पेट ले भी घूम रहा है. कहीं उसे कोई हारमोनल दिक्कत तो पैदा नहीं हो गई? न वह मेरी किसी बात को समझता है, न तो जंक  फूड खाना छोड़ता है, न कोई ऐक्सरसाइज करता है और न ही कोई मैडिकल टैस्ट करवा रहा है.

उलट कहता, ‘‘तो क्या हुआ मैं मोटा हो गया तो? बहुत लोग शादी के बाद मोटे होते हैं मैं पहले हो गया. वैसे भी लड़के यह बौडी वर्क, ऐब्स, बाइसैप्स सब सिर्फ लड़की पटाने के लिए बनाते हैं. मगर तुम मेरे पास पहले से हो तो फिर क्यों मेहनत करूं और तुम तो मेरे मन से दिल से प्यार करती हो न तो फिर मेरी बौडी दूसरों की तरह क्यों जज कर रही हो? क्या मुझे छोड़ना चाहती हो?’’

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‘‘हां,’’ यह शीना का मन चीखचीख कर कह रहा था, बस जबान नहीं कह पा रही थी. मगर क्यों शीना नहीं कह पा रही थी? जवाब है कि वह एक औरत है. जब औरत किसी को रंग, आकार, वजन आदि के आधार पर छोड़ दे तो पूरा समाज उस की बड़ी खिली उड़ाता है कि देखो आजकल की लड़कियों को मन नहीं बौडी से प्यार है तो इन का कैरेक्टर कैसा है, ये सिर्फ लुक्स पर मरती हैं.’’

मगर यदि लड़का किसी लड़की को इन्हीं आधारों पर छोड़े तो वह चुप रह जाएगी.

इस बात कि सचाई देखनी है तो 2011 का एक सर्वे ही देख लें.

आस्क मेन के 2011 ग्रेट मेल सर्वे में 80 हजार लोगों से पूछा गया कि डेटिंग, इंटिमेसी आदि में क्या उन्होंने अपने साथी को वजन ज्यादा होने की वजह से छोड़ा है? तो करीब 50% पुरुषों का जवाब हां था. तो आज के जैनरेशन की डिजिटल शोशा और केयर फ्री वाले लाइफस्टाइल में यह आंकड़ा तो और अधिक हो गया होगा.

आज की जैनरेशन के लिए बौयफ्रैंड जब मोटा हो जाए तो ‘मेरा भालू, माई टैडी बियर’ यह टैग लाइन बन जाती है लेकिन यह सबकुछ दिन ही प्यारे लगते हैं. मगर बाद में इन का वजन रोमांस दबा देता है.

संवेदनशील बातचीत: आप की सब से पहली पहल एक बातचीत से होनी चाहिए जिस में आप की संवेदना, फिक्र और प्यार नजर आए न कि बौयफ्रैंड के मोटापे पर कोई टिप्पणी. अगर आप की बातों में कोई रोष या खीज नजर आएगी तो वह आप की बातों का विरोध करेगा या खुद को एक विक्टिम यानी पीडि़त सम?ोगा. साथ ही वह इस बात का स्वयं ही निष्कर्ष निकाल लेगा कि आप को उस की भावनाओं से कोई प्यार नहीं सिर्फ शरीर का आकर्षण ही पसंद है.

परेशानी को जानें: बहुत बार वह आप की बातों को काटने लगता है या आप जब भी इस टौपिक पर बात करना चाहें तो वह हिचकने लगता है तो उस की हिचक की वजह को जानें. कई बार बौयफ्रैंड इस बात से डरते हैं कि आप उन्हें कुछ ऐसा न बोलें जिस से उन्हें शर्म आ जाए जैसे बौडी शेमिंग या उन में कोई आकर्षण नहीं बचा और कुछ को अपने मोटापे की वजह पता होती है लेकिन वे शेयर करना ही नहीं चाहते हों. अब वह वजह मैडिकल इशू भी हो सकती है जिसे उन्हें आप से शेयर करने में शर्म या घबराहट महसूस होती हो.

टीमवर्क अपनाएं: कई बार कोई कोशिश एक आफत या सजा की तरह महसूस होने लगती है जिस की वजह अकेला या लैफ्ट आउट फील करना होना है यानी आप का साथी अगर अकेले प्रयास करता है तो उसे छूटा हुआ महसूस होता है. इसलिए कुछ प्रयासों में उस का साथ दें. जैसे उस के साथ आप भी वर्कआउट कर लें, साइक्लिंग कर लें, आप भी अपने डाइट प्लान से जंक फूड निकाल लें.

इस तरह से उस के साथ कुछ ऐक्टिविटीज में शामिल होना उसे अकेलेपन या किसी सजा का अनुभव नहीं कराएगा. साथ ही आप का साथ उसे यह भी महसूस कराएगा कि वह आप के लिए खास है तभी तो आप भी उस के लिए इतना कुछ कर रही हैं. यह उसे अपने पर और काम करने को मोटीवेट करेगा.

डाइट कंट्रोल नहीं प्लान कर: कंट्रोल शब्द ही मन में नैगेटिव डैप्रैशन क्रिएट कर देता है. इसलिए अपने साथी को यह मत बोलें कि अपने खाने पर कंट्रोल करो क्योंकि यह सुनते ही उसे लगेगा कि आप उस के खाने पर ही पाबंदी लगाना चाहती हैं, उसे सिर्फ रूखासुखा खिलाना चाहती हैं. इस तरह वह और आप की बात नहीं सुनेगा. इसलिए बेहतर है कि उस के साथ प्यार से बात करें और डाइट प्लान करने को कहें.

आज दुनियाभर में न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटिशियन हैं जो आप के टेस्ट के हिसाब से अच्छा मील प्लान कर देते हैं, जिस में टेस्ट तो होता है लेकिन फैट और जंक नहीं होता. वह पोषण से पूर्ण रहता है, साथ ही आज तो डिजिटल वर्ल्ड से भी बहुत सारी हैल्थी टिप्स और कुकिंग रैसिपीज मिल जाती हैं.

परिवार और दोस्तों की मदद लें: अपने बौयफ्रैंड को इस बात की गंभीरता सम?ाने के लिए आप परिवार और दोस्तों का भी सहारा ले सकती हैं. अपनों की बात, उन की सलाह को कोई कितने दिन अनसुना करेगा, कभी न कभी तो वह आप की चिंता को देखते हुए अपने में सुधार करने की पहल पर गौर करेगा.

अच्छे रिश्ते के लिए अच्छे स्वास्थ्य का महत्त्व सम?ाएं: उसे समझाएं कि किसी भी रिश्ते को जीने के लिए, उस में खुश रहने के लिए, साथ निभाने के लिए एकदूसरे का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है. भला अगर एक बीमार हो जाए तो क्या उस रिश्ते को सही से जीया जा सकता है और इस तरह अपने मोटापे को गले से लगाए रखने से तो सिर्फ शारीरिक दिक्कतें और बीमारियों को ही आमंत्रण दिया जाता है.

सैल्फ केयर सेल्फ लव सम?ाएं: अपने बौयफ्रैंड को यह भी सम?ाएं कि जो इंसान खुद से प्यार नहीं करता वह दूसरे से भी प्यार नहीं करता और न ही दूसरे उस से प्यार करते हैं. अब यहां खुद से प्यार करने का मतलब सैल्फ सैंटर्ड या सैल्फिश होना नहीं है बल्कि सैल्फ केयर और सैल्फ लव से है, जिस में खुद की सेहत का ध्यान रखना, अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखरेख करना, उस के लिए निरंतर प्रयास करने से है. तो जो इंसान खुद की सेहत का ध्यान रखेगा या अपनी देखरेख कर सकेगा वही तो दूसरे के लिए प्रयास करेगा, उस की परेशानियों में मदद कर पाएगा नहीं तो वह अपनी सेहत की तरह दूसरों की सेहत भी खराब करेगा.

मैडिकल और प्रोफैशनल हैल्प लेने से पीछे हटें: आज के समय में वजन का बढ़ते रहना कोई आम बात नहीं बल्कि एक आम समस्या बन गई है क्योंकि आज का लाइफस्टाइल इतना खराब हो गया है कि मोटापा एक चलन की तरह दिखने लगा है. जैसे आज अधिकांश लड़कियां कम उम्र में ही पीसीओडी से परेशान हैं और इस का एक कारण जंक फूंड से मिला मोटापा ही है. उसी तरह लड़के में ओबैसिटी, थायराइड, हारमोनल इंबैलेंस, डायबिटीज आदि है. इसलिए समय पर डाक्टरी जांच या परामर्श जरूर लें.

आज की जैनरेशन में मोटापे, लाइफस्टाइल दिक्कतों और बीमारियों की सब से बड़ी वजह उस का एक जगह बैठे रहना है. अब बैठे रहने का मतलब औफिस में बैठ कर काम करने से या क्लासरूम में बैठ लैक्चर लेने से नहीं है बल्कि स्क्रीन से चिपके रहने से है. औफिस और क्लासरूम में बैठना तो काम, एक जिम्मेदारी है जहां से आप ज्ञान और कमाई पा रहे हों.

हां यह भी माना कि दिक्कतें तो यहां से भी आएंगी लेकिन इन कामों को टाला नहीं जा सकता और न ही यहां बैठना समय की बरबादी है. हमारा इशारा उस समय से है जहां युवा घंटों बैठ सिर्फ मोबाइल में स्क्रौलिंग करते रहते हैं. जहां से न तो उन्हें कोई ज्ञान मिलता है और न ही धन. मिलता है तो सिर्फ एक वजन बढ़ाने का रास्ता, अपनी बुद्धिविवेक को भ्रष्ट करने का रास्ता और अपना भविष्य अंधकार में धकेलने का रास्ता. अगर इस जैनरेशन ने इतना समय किताबों और पत्रिकाओं में दिया होता तो उसे अच्छी सेहत, ज्ञान, कैरियर, रिश्ते आदि की अच्छी सम?ा होती. वह इस बात पर संतुष्ट नहीं होता कि अब मु?ो अच्छी बौडी बनाने की क्या जरूरत मु?ो तो गर्लफ्रैंड पहले ही मिल चुकी है, अब आगे चाहे मैं और मोटा हो जाऊं.

यह न सोचें कि गूगल करने से आप के मोटापा कम करने के उपाय मिल जाएंगे. आप गूगल पर ढूंढ़ेंगे तो सैकड़ों जवाब मिलेंगे जिन्हें पढ़ना मुश्किल होगा. कौन सा सही व डाक्टर का है और कौन मुफ्त में सलाह दे रहा है, यह कभी पता चलेगा ही नहीं, साथ ही आप के ऐसा करते ही आप के दूसरे बिंडो पर सैकड़ों विज्ञापन मोटापा कम करने के आने लगेंगे. इन में से बहुत से पूजापाठी लोगों के होंगे जो कहेंगे कि मोटे हनुमान की पूजा करें या नंदी बैल के आगे सिर झुकाओ, दानदक्षिणा भी दो विद औनलाइन पेमैंट फैसिलिटी.

आस्क मेन के 2011 ग्रेट मेल सर्वे में 80 हजार लोगों से पूछा गया कि डेटिंग, इंटिमेसी आदि में क्या उन्होंने अपने साथी को वजन ज्यादा होने की वजह से छोड़ा है? तो करीब 50% पुरुषों का जवाब हां था. तो आज के जैनरेशन की डिजिटल शोशा और केयर फ्री वाले लाइफस्टाइल में यह आंकड़ा तो और अधिक हो गया होगा…

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