हर लड़की चाहती है कि उस की आईब्रोज काजोल की तरह खूब घनी हों ताकि वह खूबसूरत लग सकें क्योंकि आईब्रोज का चेहरे की सुंदरता में बहुत अहम रोल होता है. लेकिन पतली आईब्रोज वाली लड़कियां निराश हो जाती हैं. उन्हें लगता है कि वे चाह कर भी अपनी आईब्रोज को मोटा नहीं कर सकतीं. अगर आप भी ऐसा सोचती हैं तो आप गलत हैं.
जी हां, नैनोब्लैडिंग एक सेमी परमानैंट कौस्मैटिक टैटू तकनीक है जो पतली, हलकी या असमान आईब्रोज को बहुत ही प्राकृतिक और घने बालों जैसा आकार (नैचुरल हेयर लाइक स्ट्रोक्स) प्रदान करती है. इस के लिए बारीक नैनो सूई का उपयोग किया जाता है. इस सूई की मदद से भौंहों को मनचाही शेप दी जाती है.
अगर आप की आइब्रोज पतली या हलकी हैं तो इस कौस्मैटिक टैटू तकनीक से आप उन्हें गहरा और मोटा करवा सकती हैं. इस के लिए बारीक सूई और पिगमैंटेड इंक काम में ली जाती है. इस में टैटू को ऐसे स्ट्रोक दिए जाते हैं कि आईब्रोज काफी नैचुरल नजर आती हैं.
नैनोब्लैडिंग कैसे काम करती है
अल्ट्रा फाइन सूई: इस में एक बहुत ही पतली नैनो सूई वाली मशीन का इस्तेमाल किया जाता है. इस के जरीए त्वचा की ऊपरी परत में पिगमैंट (रंग) डाला जाता है.
आईब्रोज की मैपिंग
इस प्रक्रिया में आप की आईब्रोज का पूरा नक्शा तैयार किया जाता है. इस के लिए आप के चेहरे की बनावट, हड्डियों के स्ट्रक्चर और आप की पसंद के हिसाब से मैपिंग करते हैं. यहां ऐक्सपर्ट आप को एक आउटलाइन पंकिल से बना कर दिखाते हैं ताकि आप को पता चल सके कि आप के चेहरे की बनावट, हड्डियों के स्ट्रक्चर और आप की पसंद के हिसाब से फाइनल लुक देखने में कैसा लगेगा. इस के साथ ही आप की स्किन टोन और बालों के नैचुरल रंग से मैच करता हुआ रंग चुना जाता है.
सुन्न करने वाली क्रीम लगाना
प्रक्रिया के दौरान आप को दर्द या बेचैनी न हो, इस के लिए आइब्रोज वाले हिस्से पर एक टापिकल नंबिंग क्रीम लगाई जाती है. इसे लगभग 20-30 मिनट लगाए रखा जाता है ताकि त्वचा सुन्न हो जाए.
पिगमैंट डालना
इस प्रक्रिया में नैनो नीडल टूल की मदद से त्वचा की ऊपरी परत में बहुत ही हलके और बारीक कट्स लगाते हुए पिगमैंट भरते हैं. ये कट्स बिलकुल आइब्रोज के बालों की ग्रोथ की दिशा में बनाए जाते हैं, जिस से यह भ्रम पैदा होता है कि वहां सचमुच के बाल हैं.
हीलिंग और टचअप
ट्रीटमैंट के तुरंत बाद आइब्रोज का रंग थोड़ा गहरा दिख सकता है लेकिन 1-2 हफ्तों में त्वचा हील होने के बाद रंग बिलकुल नैचुरल हो जाता है. प्रक्रिया के लगभग 4 से 6 हफ्ते बाद एक टचअप सैशन की जरूरत होती है, जिस में छूटे हुए हिस्सों को ठीक किया जाता है और शेप को फाइनल टच दिया जाता है.
नैनोब्लैडिंग का फायदा
इस में नैचुरल लुक मिलता है. नैनोब्लैडिंग में सूई बहुत पतली होती है, जिस से जो स्ट्रोक्स बनाए जाते हैं, वे असली बालों जैसे बेहद बारीक और प्राकृतिक दिखाई देते हैं. यह हर एक बाल की नकल करती है, जिस से आप की आईब्रोज एकदम असली और भरीभरी दिखती हैं.
कितने समय तक रहता है
यह तकनीक औयली त्वचा पर भी अच्छी तरह काम करती है और आप के आईब्रोज का आकार सामान्य टचअप के साथ 1 से 3 साल तक आसानी से टिक सकता है.
कितना समय लगता है
इस प्रक्रिया को पूरा होने में डेढ़ से 2 घंटे का समय लग जाता है.
