Genz: काफी समय पहले एक गाना आया था, सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है. गाने की पंक्तियां आज के उन युवा वर्ग को पूरी तरह समर्पित है जिन्होंने सुकून और आराम की जिंदगी बिताने के लालच में, आधी से ज्यादा जिंदगी पैसा कमाने की दौड़ में कब गुजार दी ये खुद उनको ही नहीं पता चला.
भविष्य की चिंता में वर्तमान का सुकून खोते जा रहा युवा वर्ग, पैसा कमाने और कैरियर बनाने के पीछे इस कदर दौड़ रहा है कि सुबह से शाम कब होती है और शाम से रात कब होती है, दिन कब महीनों और सालों में बदल जाते है उनको खुद पता नहीं चलता.
अगर देखने जाएं तो पहले सहूलियतें कम थी, मौके कम थे लेकिन जीवन में सुकून था, घर परिवार दोस्तों से मिलने के लिए समय निकल ही आता था. लेकिन आज ऑफिस में काम का प्रेशर, ऑफिस तक पहुंचने के लिए घंटो का सफर, ट्रेन और बस में धक्के खाते हुए समय पर औफिस पहुंचने की मजबूरी ने इंसान को मशीन बना दिया है, मुंबई हो या दिल्ली, बंगलौर हो या कोलकाता, रास्ते पर भारी ट्रैफिक के चलते एक आम इंसान के लिए ट्रेन बसों में सफर करते हुए समय पर ऑफिस पहुंचना किसी जंग जीतने से कम नहीं है.
