लेखक-धीरज कुमार

आभा के पति मल्टीनैशनल कंपनी में काम करते थे. उस के पति का कार ऐक्सीडैंट हो गया. आननफानन में उन्हें हौस्पिटल पहुंचाया गया. हौस्पिटल में सब से पहले पैसे की जरूरत पड़ी. वह अपने पास कभी पैसे रखने की जहमत नहीं उठा पाई थी. कभी जरूरत ही नहीं पड़ी थी. सभी जरूरतों का सामना पति ही जुटाते थे. पैसा पति के अकाउंट में ही था. पति ही लेनदेन करते थे. पति के औपरेशन के लिए मोटी रकम की आवश्यकता पड़ी, तो अपने पास पैसा होते हुए भी कई संबंधियों के आगे हाथ फैलाने पड़ गए.

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