क्या आप भी अपना अधिकतम समय facebook ,netflix ,youtube और instagram पर व्यतीत  करते है? यदि हाँ तो ये लेख आपके लिए है . मेरे इस लेख को पूरा पढ़े क्योंकि आधा सच झूठ से भी बुरा होता है.

आप तो ये जानते ही है की सोशल मीडिया कितना पावरफुल है. सोशल मीडिया की पॉवर इतनी है कि दुनिया के किसी भी इंसान से आपको मिलवा सकती है  और सोशल मीडिया की पॉवर इतनी है की आपको आपके परिवार के साथ रहते हुए भी उनसे दूर कर सकती है .

इससे कोई नहीं बच पाया है आदमी से औरत तक,बच्चे से बूढ़े तक,हर जाति ,हर देश, इस मानव निर्मित दुनिया में खोते से जा रहे हैं.हम दिन में 100 से 200 बार phone उठा रहे है .उठते- बैठते ,खाते- पीते,आते -जाते ,सोते -जागते बस mobile ,mobile, सोशल मीडिया ,mobile .खुद के लिए तो हम टाइम निकालना ही भूल गएँ है. ,आज की तारीख में खाने से ज्यादा जरूरी हो गयी है इन्टरनेट कनेक्टिविटी.

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कोई मर रहा है तो video ,कोई किसी को मार रहा है तो video ,कोई गाडी चला रहा है तो वीडियो.  हम इस इन्टरनेट के चक्कर में कितने नकली से हो गये हैं . एक दिन को अगर internet बन्द हो जाता है तो लगता है की न जाने हमारा क्या खो   गया .कितने likes ,कितने share ,कितने comment बस इन्ही की गिनती कर रहे है हम .अपनी असली कीमत को तो हम भूलते ही जा रहे हैं.

एजुकेशन की जगह एंटरटेनमेंट का नशा हो गया है. क्या आप जानते हैं की सीखने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है ये इन्टरनेट और वहीँ टाइम पास करने वालों के लिए किसी शराब की लत से कम नहीं है इन्टरनेट.

गेम्स के राउंड पूरे करके लोग एक सफलता का अनुभव करते है पर मैं आपको बता दूं की वास्तविक जीवन के लक्ष्य पूरे करने पर जो सफलता मिलेगी उसका अनुभव अलग ही होगा .

इन्टरनेट एक अच्छा गुरु है इससे एक सवाल करो तो 1 सेकंड से कम में भी जवाब देता है. ये जो इन्टरनेट है ये चीज़ हमें सिखाने के लिए बनी है,हमें एक बेहतर इंसान बनाने के लिए ही बनी है ,किसी दूर बैठे को पास लाने के लिए बनी है,इस दुनिया में क्या हो रहा है ये बताने के लिए बनी है.

पर क्या करें हम है तो इंसान ही ना ,किसी अच्छी  चीज़ की हम इतनी अति कर देते हैं की वो चीज़ हमारे लिए बुरी हो जाती  है. वही हो रहा है इन्टरनेट के साथ ,वही हो रहा है mobile के साथ ,वही हो रहा है सोशल मीडिया के साथ .

हम हर वक़्त अपने mobile से चिपके रहते हैं .mobile के बिना हम घर से बाहर  कदम नहीं निकालते. एक भी मेसेज ,एक भी नोटीफिकेशन को जाया नहीं जाने देते हर वक़्त चेक एंड रिप्लाई चलता रहता है. हद तो तब हो जाती है जब हम खुद के साथ- साथ अपने बच्चो को भी इसकी चपेट में ले आते है. हम खुद में इतना ज्यादा मशरूफ हो जाते है है की हमारे पास अपने बच्चो  से बात करने तक का समय नहीं रहता और हम उन्हें mobile में इन्टरनेट कनेक्ट करके दे देते है ताकि वो हमें परेशान न करें .

बच्चों  को व्यस्त  रखने का ये तरीका कहीं आपके बच्चे को आपसे दूर न कर दे. हाल ही में किये गए एक शोध के मुताबिक डिजिटल उपकरणों के अधिक उपयोग से बड़ों से लेकर बच्चो तक में  आंखों की रोशनी कम होना , आंखें खराब होना , सिर दर्द, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षण पाए गए  है.

क्या आप जानते है की इन्टरनेट पर गेम खेलने की वजह से बच्चों  के अन्दर मनोवैज्ञानिक बीमारियाँ भी आ रही है .इन्टरनेट पर गेम खेलने से रोकने पर बच्चे घबराहट महसूस करते है.

अगर आपके  बच्चे में  बेवज़ह गुस्सा करना या चिडचिडाना ,ज्यादातर अकेले रहने की आदत  या हर वक़्त ऑनलाइन रहने की आदत है तो यह इन्टरनेट एडिक्शन की निशानी है. ज्यादातर बच्चे super- heroes को अपना ideal  मानते है और उनसे एक जुडाव महसूस करते हैं. super- heroes के साथ जुडी बच्चों की दीवानगी जानलेवा भी साबित हो सकती है.

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भारत ने इन्टरनेट इस्तेमाल करने के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है.एक अनुमान के हिसाब से सन 2021  में भारत में इन्टरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगभग 73 करोड़ होगी .ऐसे में इस देश के भविष्य (बच्चों)  को इस लत से बचाना होगा वरना इसका नतीजा बहुत भायानक होगा.

समझदार बनिए , इस इन्टरनेट के नौकर नहीं बल्कि मालिक बनिए  .ये आपको  use  न करे, आप  इसे use  करें .अपने परिवार के साथ ,अपने दोस्तों के साथ कीमती समय व्यतीत करें . Emoji के साथ- साथ लाइफ के real इमोशन भी फील करिए.फिर महसूस करिए की ये दुनिया कितनी खूबसूरत है.

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