GHKKPM: सई की नाराजगी भूल पाखी संग ठुमके लगाता दिखा विराट, देखें वीडियो

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी को मेकर्स नया मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके चलते फैंस का गुस्सा बढ़ रहा है. दरअसल, हाल ही में पाखी के सरोगेट मदर बनते ही सई को परेशान करने की साजिश करने से लेकर विराट का पाखी का साथ देना सई के फैंस को रास नहीं आ रहा है, जिसके चलते वह मेकर्स को ट्रोल कर रहे हैं. हालांकि ट्रोलिंग के बीच पाखी और विराट यानी एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा और उनके औफस्क्रीन पति यानी नील भट्ट मस्ती करते हुए दिख रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं वायरल वीडियो….

पति संग किया डांस

 

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हाल ही में पाखी यानी एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह विराट के रोल में नजर आने वाले अपने औफस्क्रीन पति यानी एक्टर नील भट्ट के साथ जमकर डांस करती हुई नजर आ रही है. एक्ट्रेस की वीडियो को देखकर जहां सई-विराट के फैंस को जलन हो रही है तो वहीं ऐश्वर्या शर्मा के फैंस कपल की तारीफ कर रहे हैं, जिसके चलते सोशलमीडिया पर वीडियो काफी वारयल हो रही है.

 

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सेट पर करती हैं मस्ती

 

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एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा भले ही सीरियल में विलेन के रोल में गुम हैं किसी के प्यार में फैंस को गुस्सा दिलाती हैं. लेकिन सोशलमीडिया पर अपनी फनी रील्स के जरिए हंसाती रहती हैं. कभी शिनचैन तो कभी मिमिक्री करके वह फैंस और सीरियल के सेट पर सभी को खुश करते हुए दिखती हैं. वहीं फैंस भी एक्ट्रेस की फनी वीडियो देखकर काफी खुश होते हैं.

 

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सरोगेसी ट्रैक से परेशान हुए फैंस

हाल ही में गुम हैं किसी के प्यार में के सरोगेसी ट्रैक के कारण फैंस परेशान हैं. जहां पाखी एक के बाद नई चालें चलकर विराट को अपने पास बुलाने की कोशिश कर रही है तो वहीं अपकमिंग एपिसोड में उसके सभी प्लान फेल होने वाले हैं. दरअसल, हाल ही के प्रोमो में सई के प्रैग्नेंट होने की खबर से जहां चौह्वाण परिवार हैरान नजर आया था तो वहीं पाखी का गुस्सा बढ़ गया था.

Anupama: अनुज के पैरालाइज होते ही फूटा फैंस का गुस्सा, मेकर्स की लगाई क्लास

सीरियल अनुपमा (Anupama) में हाल ही में अनुज यानी एक्टर गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) के शो छोड़ने की खबरों से फैंस परेशान थे. वहीं मेकर्स से इन खबरों के बीच नया प्रोमो शेयर किया, जिसमें अनुज पैरालाइज हो गया है. लेकिन #MaAn फैंस को मेकर्स का नया प्रोमो खास पसंद नहीं आ रहा है, जिसके चलते अब वह ट्रोलिंग के शिकार हो गए हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

अनुज के पैरालाइज होते ही फूटा फैंस का गुस्सा

हाल ही में मेकर्स द्वारा नया प्रोमो रिलीज किया गया था, जिसमें अनुपमा अपने पति अनुज की सेवा करती हुई दिख रही है. वहीं बरखा और अंकुश, अनुपमा पर इल्जाम लगाते दिख रहे हैं. इसी के साथ अनुपमा और छोटी अनु, अनुज के ठीक होने की बात करते हुए दिख रहे हैं. शो का ये प्रोमो देखते ही जहां कुछ फैंस अपकमिंग ट्विस्ट के लिए तैयार हैं तो वहीं कई फैंस का कहना है कि अनुपमा को ताकतवर दिखाने के लिए अनुज को कोमा या अपाहिज करने की जरुरत नहीं थी. वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि अनुज के होते हुए भी अनुपमा घर और औफिस संभाल सकती है फिर अनुज को पैरालाइज करने की क्या जरुरत है.

शाह परिवार से टूटेगा अनुज-अनुपमा का रिश्ता!

अब तक आपने देखा कि पाखी और शाह परिवार की बेइज्जती के बाद अनुज, अनुपमा से चलने के लिए कहता है. लेकिन अनुपमा, पाखी से बात करती है और उसकी मां होने पर माफी मांगती है. वहीं अपकमिंग एपिसोड में अनुपमा, वनराज से कहेगी कि वह शाह हाउस में कभी वापस नहीं आएगी. लेकिन वक्त किसी ने नहीं देखा. दूसरी तरफ, अनुज, बापूजी से कहेगा कि वह हर मुश्किल वक्त में अनुपमा से साथ खड़े नहीं होते और अब वह कभी इस परिवार से नहीं मिलेगी. हालांकि बापूजी सवाल करेंगे कि क्या वह उससे भी नहीं मिलेगी.

 

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नए समर की होगी एंट्री

 

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हाल ही में समर यानी पारस कलनावत के शो से निकाले जाने पर मेकर्स पर फैंस का गुस्सा देखने को मिला था. हालांकि अब मेकर्स ने नया समर ढूंढ लिया है और शूटिंग भी शुरु हो चुकी है. दरअसल, एक्टर सागर पारेख अनुपमा के छोटे बेटे का किरदार निभाते हुए नजर आने वाले हैं, जिसके चलते उन्होंने शूटिंग भी शुरु कर दी है. हालांकि देखना होगा कि अनुपमा फैंस एक्टर को समर के रोल में कितना पसंद करते हैं.

यौन बंधक बनने से बचें

कुछ समय पूर्व मायानगरी मुंबई में एक गिरोह पकड़ा गया, जिस के चंगुल से करीब दर्जन भर लड़कियां मुक्त कराई गईं. उन लड़कियों को बारगर्ल बना कर देह व्यापार के अनैतिक कार्य में लगा दिया गया था. उन में बस एक ही समानता थी. वह यह कि वे रूपवती थीं और मन में मौडल बनने या किसी फिल्म अथवा सीरियल में अभिनय करने की चाह पाले हुए थीं. तफतीश में जो ज्ञात हुआ वह सनसनीखेज था. गिरोह के सदस्यों ने विभिन्न अखबारों में विज्ञापन  छपवा कर देश के अलगअलग हिस्सों में इंटरव्यू के माध्यम से उन की भरती की थी. उन की छिपी आकांक्षाओं को उभारते हुए उन्हें जो सब्जबाग दिखाए गए थे, वे बेहद रोमांचक थे. उन में कोई भी महत्त्वाकांक्षी लड़की फंस सकती थी. उन से वादा किया गया था कि कुछ समय की टे्रनिंग के बाद उन्हें फिल्मों व सीरियलों में काम दिलवा दिया जाएगा. यदि वहां काम न मिला तो कम से कम मौडल तो अवश्य बनवा दिया जाएगा.

लेकिन हुआ क्या

इसी मृगतृष्णा में उन्हें मुंबई ला कर फूहड़ नाचगानों और शरीर उघाड़ू तौरतरीकों की टे्रनिंग दी गई. आधुनिका बनाने के लिए सोचीसमझी साजिश के तहत अभिनय के नाम पर यौन शोषण का शिकार बनाया गया. लगे हाथों फिल्मीकरण की आड़ में उन की पोर्न फिल्में बना ली गईं. अंतत: हश्र यह हुआ कि उन्हें होटलों में डांसर व बारगर्ल का काम दिलवा दिया गया. साथ ही उन्हें हाईप्रोफाइल कालगर्ल बना कर उन की कमान स्वयं के हाथों में रख ली ताकि देह के सौदों में से अधिकांश हिस्सा वे हड़प सकें. उन्हें जब मुक्त करवाया गया तब वे डरीसहमी हुई थीं और उन के खिलाफ एक भी शब्द बोलने को राजी न थीं, क्योंकि ब्लैकमेलिंग के भय से उन की यौन बंधुआ बनी हुई थीं.

अर्श से फर्श पर जिंदगी

अब दृष्टि दौड़ाइए यौन बंधक बनाए जाने के उच्चस्तरीय सनसनीखेज मामलों पर, जिन्होंने देश को झंझोड़ कर रख दिया था.

याद कीजिए हरियाणा के हिसार में घटित घटना जिस में गीतिका नाम की लड़की राजनेता गोपाल कांडा की शिकार बनी. वह भी ऐसा ही मामला था. गीतिका पहले गोवा के कैसीनो में काम करती थी. वहीं वह कांडा के संपर्क में आई तो उसे सुनहरे सपने दिखा कांडा ने उसे चक्कर में फंसा लिया. मछली को दाना डालने की भांति योजनाबद्ध तरीके से उस ने उसे अपनी एअरलाइंस में नौकरी दे कर यौन बंधक बना लिया. वहां उच्च पद पर बैठा कर शिकंजा और भी कस दिया.

स्थिति समझ आने पर छटपटाहट में गीतिका ने नौकरी छोड़ दी और एकदूसरे एअरलाइंस में काम तलाश लिया. पर कांडा ने पीछा नहीं छोड़ा. झूठे आरोप लगा, वहां से नौकरी छुड़वा कर वह उसे वापस अपनी एअरलाइंस में ले आया. इस के बाद यौन दुराचरण का ऐसा शिकार बनाया कि अंतत: गीतिका को आत्महत्या के लिए विवश होना पड़ा. लेकिन स्यूसाइड नोट में उस ने कांडा के कांडों का भांड़ा फोड़ दिया. तब जा कर यौन बंधक बनाने वाला मामला सामने आया वरना अब तक कांडा न जाने और कितने कांड कर चुका होता.

यौन बंधक बनाने या बनाने की कोशिश करने वालों की फेहरिस्त यों तो काफी लंबी है पर हाल ही में इस मामले का एक सनसनीखेज कांड एशिया के ताकतवर पत्रकारों में गिने जाने वाले तरुण तेजपाल के साथ जुड़ा है. तहलका नामक पत्रिका के प्रकाशक और प्रधान संपादक 51 वर्षीय तरुण तेजपाल पर गोवा के एक फाइव स्टार होटल में अपनी ही मातहत एक युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप है.

भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में गिरफ्तार तेजपाल पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक ऐसी युवती के साथ बलात्कार की कोशिश की जो उन्हें अपना संरक्षक मानती थी.

ले डूबी अतिमहत्त्वाकांक्षा

24 वर्षीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला व उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी कांड ने भी पूरे देश को झंझोड़ कर रख दिया. वर्षों चली इस प्रेमकहानी का अंत अंतत: मधुमिता की हत्या के रूप में सामने आया.

देश की अन्य जगहों पर भी सैक्स अपराध में कईयों की जानें गईं तो कई बदनाम भी हुए. भंवरी देवी व महिपाल मदेरना तो अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल कांडा व गीतिका के नाम ऐसे ही कांडों से शर्मसार करने वाले रहे व बहुत कुछ सोचने पर विवश करते हैं.

झूठे प्रलोभन

यौन बंधक जिस युवती को भी बनाया जाता है, उसे बंधक बनाने वाले के इशारों पर यौन शोषण का शिकार बनना पड़ता है. यौन बंधक बनाने वाला चाहे स्वयं उस का यौन शोषण करे अथवा अपने चाहे अनुसार वह उसे किसी और को परोस दे. हालांकि ऐसा करना और करवाया जाना, देह व्यापार जैसा अनैतिक कार्य है किंतु बंधक होने के कारण वह न चाहते हुए भी ऐसा करने हेतु विवश कर दी जाती है.

वैसे कोई भी लड़की जानबूझ कर यौन बंधक नहीं बनना चाहती. वह क्यों चाहेगी कि किसी अन्य के इशारों पर वह अपना शरीर किसी को दे. मगर देखने में आया है कि किसी षड्यंत्र के तहत इस का आरंभ स्वैच्छिक तरीके से होता है, जिस की भनक युवती को तनिक भी नहीं हो पाती.

प्रस्ताव स्वीकारने से पहले

बंधक बनाने के मंतव्य से दिखाए गए सब्जबाग प्राय: वास्तविकता से कोसों दूर होते हैं. योग्यता एवं औफर से वे तनिक भी मेल नहीं खाते. गीतिका के मामले में भी ऐसा ही हुआ. गोपाल कांडा ने आकर्षक प्रस्ताव देते हुए उसे अपनी कंपनी में डायरैक्टर बनाने का प्रस्ताव दे दिया. गीतिका ने पल भर भी नहीं सोचा कि एकाएक मुझ में क्या विशिष्ट योग्यता आ गई कि मैं एअरलाइंस कंपनी में डायरैक्टर बनने के योग्य मान ली गई? उस ने ऐसा सोचा होता तो शायद वह चक्कर में नहीं फंसती.

अत: ऐसे चमकदार प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले समुचित रूप से विचार करें कि प्रस्ताव तर्कपूर्ण है भी या नहीं? याद रखें कि वास्तविक योग्यता से बिलकुल परे ऐसा लुभा लेने वाला प्रस्ताव अंतत: फंसा लेने वाला जाल ही साबित होता है.

मुंबई प्रकरण में जो घटित हुआ वह सुनियोजित अपराध था. उस में युवतियों के घर वाले भी झांसे में आ गए क्योंकि उस में हुए चयन, विज्ञापन व इंटरव्यू में हुई प्रतिस्पर्द्धा के माध्यम से किए गए थे. सामान्यतया ऐसी प्रक्रिया संदेहपूर्ण नहीं मानी जाती. लेकिन जरूरी है कि विज्ञापनों की यथार्थता भली प्रकार परखी जाए. तभी तो प्राय: पत्रपत्रिकाएं विज्ञापन परिशिष्ट पर इस आशय का उल्लेख अवश्य करती हैं- विज्ञापन में किए गए दावे व प्रस्तुतीकरण की यथार्थता पाठक स्वविवेक से परखें. अगर कोई बिना परखे प्रलोभनों में फंसता है तो उस के लिए पत्रपत्रिकाएं जिम्मेदार नहीं मानी जा सकतीं.

समाजसेविका हर्षिता माहेश्वरी का कहना है कि प्राय: बुरी प्रवृत्ति के लोग ऐसी युवतियों को आसानी से शिकार बना लेते हैं, जो अतिमहत्त्वाकांक्षी होती हैं या मातापिता, पति या परिजनों से असंतुष्ट व रुष्ट रहती हैं. वे अपनी पीड़ा की बात अकसर मित्रों व सहेलियों से कहती रहती हैं. धीरेधीरे यह उन की आदत बन जाती है. दुश्चरित्र लोग ऐसी लड़कियों की ही तलाश में रहते हैं और वे अपने लुभाऊ व्यवहार, लच्छेदार बातों व हितचिंतन के ढोंग के जरीए शीघ्र ही उन के विश्वसनीय बन जाते हैं. वे उन्हें भावनात्मक रूप से जाल में फंसा लेने के बाद शिकंजा कसने के उद्देश्य से वे यौनाचार में लिप्त होने को प्राथमिकता देते हैं. उन की कोशिश होती है कि अंतरंग क्षणों को रिकौर्ड कर लिया जाए ताकि उन्हें आसानी से ‘यौन बंधक’ बनाया जा सके.

दुष्चक्र में फंस जाने पर

लड़कियों को जब भी लगे कि वे दुष्चक्र में फंस गई हैं और उन्हें ब्लैकमेल किया जाने लगा है, तो उन्हें बुद्धि व कौशल से निबटने का प्रयास करना चाहिए. सब से पहले तो जो होगा देखा जाएगा के निश्चय के साथ मन को दृढ़ कर, ब्लैकमेलर के इशारों पर नाचना बंद कर दें और चुनौतियों से निबटने के लिए तत्पर हो जाएं ताकि वह धमकियां देने से बाज आए. यह मान कर चलें कि ऐसे लोग अधिकतर धमकियां दे कर भयभीत करने का प्रयास करते हैं, लेकिन धमकियों को कार्यरूप में परिणित करने का उन में साहस नहीं होता.

ऐसे लोग पीडि़ता को बागी हुआ देख, मन ही मन तो डर जाते हैं किंतु ऊपर से कठोर बने रहने का अभिनय करते हुए बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं. उन का अपराधबोध उन्हें भयभीत करने लगता है और वे समझौता करने का दबाव बनाने लगते हैं.

अत: जब भी मुकाबले में उतरें ऐसे प्रस्तावों को कठोरता से नकार दें और पूर्व निश्चय पर दृढ़ता से बनी रहें कि जो होगा देखा जाएगा.

साथ ही उसी क्षण से जितना संभव हो यौन बंधक बनाने वालों व उन के शातिर मास्टर माइंड व्यक्तियों, स्थानों आदि की पहचान व उन के खिलाफ कानूनी सुबूत जुटाने का गुपचुप व सतर्क प्रयास शुरू कर देना चाहिए. घटनास्थल की स्थिति, समय व लिप्तजनों की जानकारी आदि का सिलसिलेवार विवरण स्मृति में संजो कर रखने का प्रयास करें ताकि बताए जाने पर पुलिस व कानूनी एजेंसियां उन बिंदुओं के आधार पर जांच कर सकें.

याद रखें कि कानून जानता है कि बंधक होने के नाते पीडि़त पक्ष द्वारा आदेश मानना परिस्थितिजन्य मजबूरी रही है.

मौका मिलते ही उपलब्ध साधन के माध्यम से पुलिस अथवा किसी नारी संगठन या समाजसेवी संस्थान को संपूर्ण विवरण सहायता याचना के साथ दें ताकि आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक सहायता मिल सके. जब तक पुलिस, घर वालों या संगठनों से वांछित सहायता उपलब्ध न हो, तब तक अपराधियों को किंचित भी संदेह न होने दें. अन्यथा वे सुबूतों को मिटाने का प्रयास करने लगेंगे. यह पीडि़ता की कुशलता पर निर्भर करता है कि वह किस तरह से स्थिति को युक्तिपूर्वक संभाले रखती है.

काम आते हैं अपने ही

हमेशा याद रखें कि कठिन समय में वे ही काम आते हैं, जो वाकई आप के अपने होते हैं. भला मातापिता व परिवारजनों से बढ़ कर अपना और कौन हो सकता है. अत: इस डर से मुक्त हो कर कि नादानियों के लिए वे भलाबुरा कहेंगे, डांटेंगे या नाराज होंगे, उन को सब कुछ सचसच बता दें.

ऐसे विभिन्न प्रकरणों की अनुसंधान अधिकारी रह चुकीं पुलिस अधिकारी स्मृति कुलश्रेष्ठ का कथन है कि ऐसे मामलों में बचाव में ही बचाव है. फंसने से बचना ज्यादा बेहतर है, जबकि फंसने के बाद बचना मुश्किल व बदनामी भरा मार्ग है. तब तक युवती का वर्तमान व भविष्य दांव पर लग चुका होता है. अत: जब कभी ऐसे प्रलोभन भरे प्रस्ताव मिलें या चकाचौंधपूर्ण स्थितियां बनें, बिना बताए अंधेरी गुफा में प्रवेश करने के बजाय घरपरिवार व शुभचिंतिकों की सलाह लें.

वे कहती हैं कि प्राय: लड़कियां समवयस्क सहेलियों से इसलिए सलाह नहीं लेतीं कि मुझे मिल रहा अवसर वे न हथिया लें. मांबाप व सगेसंबंधियों से उन्हें यह डर रहता है कि दकियानूसी सोच के कारण वे इतने अच्छे प्रस्ताव को ठुकरा देंगे. इस कारण वे बिना सोचेविचारे एकपक्षीय निर्णय ले लेती हैं, जो उन के लिए आत्मघाती साबित होता है.

कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि  सावधानी में ही समझदारी है, अन्यथा ऐसे प्रकरणों में सावधानी हटते ही दुर्घटना घटने की प्रबल संभावनाएं बनी रहती हैं.

पति को दोबारा ब्रेनस्ट्रोक आने का खतरा क्या ज्यादा है?

सवाल-

मेरे पति को पिछले महीने ब्रेन स्ट्रोक हुआ था. वे अभी पूरी तरह रिकवर नहीं हुए हैं. मैं ने सुना है दोबारा स्ट्रोक की चपेट में आने का खतरा काफी अधिक होता है?

जवाब-

यह सही है कि ब्रेन स्ट्रोक से रिकवर होने में काफी समय लगता है और अगर जरूरी सावधानियां न बरती जाएं तो दोबारा इस की चपेट में आने का खतरा काफी अधिक होता है. पहले सप्ताह में स्ट्रोक की पुन: चपेट में आने का खतरा 10-12% और पहले 3 महीनों में 20-25% होता है. डाक्टर के लगातार संपर्क में रहें और उन के द्वारा सुझई दवा नियत समय पर दें. उन्हें पूरी तरह बैड रैस्ट पर न रखें, बल्कि हलकीफुलकी ऐक्सरसाइज करने या टहलने के लिए कहें. उन के खानपान का ध्यान रखें. संतुलित, सुपाच्य और पोषक भोजन खिलाएं.

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पक्षाघात यानी ब्रेन स्ट्रोक दिमाग के किसी भाग में ब्लड सप्लाई बाधित होने या कम होने से होता है. दिमाग में औक्सीजन और पोषक तत्त्वों की कमी से ब्लड वैसेल्स यानी रक्त वाहिकाओं के बीच ब्लड क्लोटिंग की वजह से उस की क्रियाएं बाधित होने लगती है, इस कारण दिमाग की पेशियां नष्ट होने लगती है जिस से दिमाग अपना नियंत्रण खो देता है, जिसे स्ट्रोक सा पक्षाघात कहते हैं. यदि इस का इलाज समय पर नहीं कराया जाए तो दिमाग हमेशा के लिए डैमेज हो सकता है. व्यक्ति की मौत भी हो सकती है.

आज विश्व में करीब 80 मिलियन लोग स्ट्रोक से ग्रस्त हैं, 50 मिलियन से ज्यादा लोग स्थाई तौर पर विकलांग हो चुके हैं. ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के अनुसार 25% ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की उम्र 40 वर्ष है. इस बात को ध्यान में रखते हुए हर साल 29 अक्तूबर को ‘वर्ल्ड स्ट्रोक डे’ मनाया जाता है, जिस का उद्देश्य स्ट्रोक की रोकथाम, उपचार और सहयोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है.

मुंबई के अपैक्स सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल के वरिष्ठ मस्तिष्क रोग स्पैशलिस्ट एवं न्यूरोलौजिस्ट डा. मोहिनीश भटजीवाले बताते हैं कि दुनियाभर में ब्रेन स्ट्रोक को मौत का तीसरा बड़ा कारण माना जा रहा है. केवल भारत में हर 1 मिनट में 6 लोगों की मौत हो रही है, क्योंकि यहां ब्रेन स्ट्रोक जैसी मैडिकल इमरजैंसी की स्थिति में इस के लक्षणों, कारणों, रोकथाम और तत्काल उपायों के प्रति जनजागरूकता का बहुत अभाव है जबकि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को तत्काल उपचार से उन के अच्छे होने के चांसेस 50 से 70% तक बढ़ जाते हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- जानें क्या है ब्रेन स्ट्रोक और क्या है इसका इलाज

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Rakhi Special: रेडी टू गो पार्टी मेकअप टिप्स

अगर आपको एक बेहद खास पार्टी का हिस्सा बनना है और पार्लर बंद है. ऐसी स्थि‍ति में कोई भी परेशान हो सकता है. खासतौर पर वो महिलाएं जिन्हें मेकअप करना बिल्कुल भी नहीं आता है. पर अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है.

हर पार्टी के लिए पार्लर जा पाना तो संभव नहीं होता इसलिए पार्टी मेकअप के कुछ फटाफट टिप्‍स पता चल जाएं तो सारी उलझन मिनटों में सुलझ जाएगी. यहां हम आपको बता रहे हैं ऐसे टिप्‍स जो आपके लुक और इमेज को पार्टी में खराब नहीं होने देंगे.

नैचुरल लुक के लिए लगाएं कंसीलर

चेहरे को फ्रेश और नैचुरल लुक देने के लिए कंसीलर का इस्‍तेमाल करें. इसके लिए कंसीलर के दो शेड का इस्तेमाल करें. लाइट कंसीलर को आंखों के पास लगाएं और डार्क कंसीलर को चेहरे के बाकी हिस्‍सों पर एप्‍लाई करें. इसके बाद बाकी के मेकअप को एप्‍लाई करें.

फेस और होठों के मेकअप का रखें ध्‍यान

अगर चेहरे की खूबसूरती को निखराना चाहती हैं तो हमेशा ध्‍यान रखें कि लिप्‍स पर डार्क लिपस्टिक लगाएं और चेहरे का मेकअप हल्‍का रखें.

आंखों का मेकअप

आपकी आंखें आपके चेहरे की पहचान होती हैं इसलिए इनका मेकअप करते समय खास ख्‍याल रखें. सबसे पहले लाइट कलर के फाउंडेशन से बेस तैयार कर लें. इसके बाद हल्‍के ग्रे कलर की आईलाइनर पेंसिल से ऊपर से नीचे की ओर लाइनर लगाएं. बाद में इसे उंगलियों की सहायता से स्‍मज कर दें. इससे स्‍मोकी लुक आता जाता है. इसके बाद मस्‍कारा लगाएं.

लिप्‍स को बनाएं ड्रामाटिक

अपने लिप्‍स को सुंदर और बोल्‍ड दिखाने के लिए सबसे पहले लिप्‍स पर कंसीलर लगाएं. उसके बाद जिस कलर की लिपस्टिक आप लगाने जा रही हैं उसी कलर के लिपलाइनर से होठों की आउटलाइनिंग करें. ऐसा करने से आपके लिप्‍स बहुत आकर्षक लगेंगे और आपकी लिपस्टिक लंबे समय तक टिकी रहेगी.

ग्‍लॉसी लिप्‍स

अगर आपके होंठ पतले हैं तो उनकी वास्‍तविक शेप से हटकर लाईनिंग करें और होठों को भरा हुआ दिखाने के लिप ग्‍लॉस का इस्‍तेमाल करें. इससे लिप्‍स बड़े और सुंदर लगते हैं.

बालों के लिए

थोड़ी सी फेस क्रीम लगाने से बालो में चमक आ जाएगी और बाल फटाफट सेट हो जाएंगे. ऐसा करने से रूखे बाल भी सही दिखने लगते हैं. आप चाहें तो रूखे बालों के लिए सीरम या फिर जेल लगाकर भी बालों को सेट कर सकती हैं. कोई नई हेयर स्‍टाइल बनाने से अच्‍छा है कि आप बालों को खुला ही रहने दें.

सीख: क्या दूर हुई चिंता की मां लावण्या

हर शनिवार की तरह आज भी तान्या जब दिन में 12 बजे सो कर उठी तो लावण्या के चेहरे पर नाराजगी देख फौरन प्यार से बोली, ‘‘मम्मी, बहुत भूख लगी है, खाना तैयार है न? जल्दी लगा दो, मैं फ्रैश हो कर आई.’’

वहीं बैठे तुषार ने पत्नी का खराब मूड भांप कर समझाते हुए कहा, ‘‘लावण्या, क्यों दुखी हो रही हो? यह तो हर छुट्टी का रुटीन है उस का. चलो, हम भी उस के साथ लंच कर लेते हैं. इस बहाने उस के साथ थोड़ा समय बिता लेंगे.’’

लावण्या कुढ़ते हुए तीनों का खाना लगाने लगी. तान्या आई. डाइनिंग टेबल पर बैठते हुए बोली, ‘‘आप लोग भी खा रहे हैं मेरे साथ, लेकिन अभी तो 12 ही बजे हैं?’’

तुषार बोले, ‘‘इस बहाने ही तुम्हारी कंपनी मिल जाएगी.’’

‘‘यह बात तो ठीक है पापा, मैं खा कर अभी फिर सो जाऊंगी, आज पूरा दिन आराम करना है.’’

लावण्या कुछ नहीं बोली. तीनों खाना खाते रहे. तान्या ने खाना खत्म कर प्लेट उठाई, रसोई में रखी और बोली, ‘‘अच्छा पापा, थोड़ा और आराम करूंगी. और हां मम्मी, मुझे उठाना मत.’’

तान्या ने अपने रूम का दरवाजा बंद किया और फिर सोने चली गई. पतिपत्नी ने बस चुपचाप एकदूसरे को देखा, कहा कुछ नहीं. कहने लायक कुछ था भी नहीं. दोनों मन ही मन इकलौती, आलसी और लापरवाह बेटी के तौरतरीकों पर दुखी थे.

लंच खत्म कर तुषार टेबल साफ करने में लावण्या का हाथ बंटाने लगे. फिर बोले, ‘‘मेरी जरूरी मीटिंग है, कुछ तैयारी करनी है. तुम थोड़ा आराम कर लो.’’

लावण्या ‘हां’ में सिर हिला कर दुखी मन से अपने बैडरूम में जा कर लेट गई. वह सचमुच बहुत दुखी हो चुकी थी. बेटी के रंगढंग उसे बहुत चिंतित कर रहे थे.

तान्या का बीकौम हो चुका था. वह सीए कर रही थी. अब, उस की आर्टिकलशिप चल रही थी. तान्या सुबह साढ़े 9 बजे के आसपास निकलती थी, रात को 9 बजे तक ही आती थी. वह लोकल टे्रन से ही आतीजाती थी.

तान्या काफी थक जाती है, यह जानती है लावण्या. उसे तान्या की इस भागदौड़ से सहानुभूति भी है लेकिन वह हमेशा यही सोचती है कि यह मेहनत ही उस की बेटी का भविष्य बनाएगी.

लावण्या और तुषार ने मन ही मन अपनी बेटी को उच्च शिक्षित, आत्मनिर्भर बनते देखने का सपना संजोया है. वह उस से घर के किसी काम में हाथ बंटाने की उम्मीद भी नहीं करती. वह बस यही चाहती है कि वह पढ़ेलिखे. लेकिन तान्या को पता नहीं क्या हो गया है, वह झुंझलाते हुए बिना कोई बात किए औफिस निकल जाती है. आते ही बैग ड्राइंगरूम में ही पटकती है और टीवी देखने को बैठ जाती है, डिनर करती है और फिर सोने चली जाती है.

कई बार लावण्या ने सोचा कि कहीं उस की बेटी को औफिस में कोई परेशान तो नहीं कर रहा है, पता नहीं कितने अच्छेबुरे खयाल उस के दिल को परेशान करने लगे थे.

एक दिन रात को उस ने बड़े स्नेह से उसे दुलारते हुए पूछा था, ‘‘क्या बात है, बेटी? इतना चिढ़ते हुए औफिस क्यों जाती हो? अब तो 8 महीने ही बचे हैं सीए फाइनल की परीक्षा में, 4 महीने पहले से तुम्हें छुट्टियां भी मिल जाएंगी, बात क्या है?’’

तान्या ने चिढ़ते हुए कहा, ‘‘मम्मी, मुझे सोने दो, मैं थक गई हूं.’’

लावण्या ने फिर थोड़ी गंभीरता से पूछा, ‘‘सो जाना, पहले बताओ, इतने खराब मूड में क्यों रहती हो?’’

‘‘आप को पता नहीं मेरी बात समझ आएगी या नहीं.’’

‘‘मतलब? ऐसी क्या बात है?’’

तान्या उठ कर बैठ गई थी, ‘‘मम्मी, मेरा मन नहीं करता कुछ करने का.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मेरा मन करता है, घर में रहूं, आराम करूं, टीवी देखूं, बस.’’

लावण्या अवाक् सी बेटी का मुंह देखती रह गई थी, कहा, ‘‘यह क्या बात हुई, तान्या?’’

‘‘हां मम्मी, कोई शौक नहीं है मुझे पढ़ने का, औफिस जाने का.’’

‘‘क्या कह रही हो, तान्या? तुम पढ़ाई में तो अच्छी रही हो, तुम्हारा दिमाग भी तेज है और अब तो कम समय ही बचा है फाइनल का.’’

‘‘हां, पता है, पर मेरा मन नहीं करता कुछ करने का. बस, आराम करना अच्छा लगता है मुझे घर में.’’

लावण्या बेटी का आलसी, आरामपसंद स्वभाव जानती तो थी ही, कहने लगी, ‘‘तुम्हें तुम्हारे ही अच्छे भविष्य के लिए पढ़ायालिखाया जा रहा है और तुम ऐसी बातें कर रही हो, बहुत दुख हो रहा है मुझे.’’

‘‘आप को भी तो शौक नहीं रहा जौब करने का, मुझे भी नहीं है तो कौन सी बड़ी बात हो गई.’’

‘‘पर मेरा टाइम और था, तान्या. अब अपने पैरों पर खड़े होना बहुत जरूरी है, लड़कियां हर क्षेत्र में कितना आगे हैं, तुम्हारे पापा तुम्हें हर तरह से आत्मनिर्भर व सफल होते देखना चाहते हैं. हर सुखसुविधा है घर में तुम्हारे लिए, कुछ करोगी नहीं तो क्या करोगी?’’

‘‘वही जो आप कर रही हैं, आप को अपनी लाइफ में कोई कमी लगती है क्या? मैं भी हाउसवाइफ बन जाऊंगी, मुझे क्यों घर के बाहर धक्के खाने भेजना चाहते हो आप लोग?’’

लावण्या ने अपना सिर पकड़ लिया, बेटी की चलती जबान पर गुस्सा भी आया. फिर भी शांत, संयत स्वर में कहा, ‘‘तुम ने अब तक क्यों नहीं बताया कि तुम्हें पढ़ने का शौक नहीं है, कुछ करना नहीं है तुम्हें?’’

‘‘बता कर क्या होता? पापा मुझे ले कर इतने ऊंचे सपने देखते हैं, उन का मूड खराब हो जाता, आप ने आज पूछा तो मैं ने बता दिया.’’

इतने में तुषार ने आवाज दी थी और लावण्या तान्या के रूम से चली गई. तुषार ने लावण्या का उतरा चेहरा देखा, कारण पूछा. पहले तो लावण्या ने छिपाने की कोशिश की लेकिन फिर तान्या की सारी सोच तुषार के सामने स्पष्ट कर दी. दोनों सिर पकड़ कर बैठ गए थे. वे दोनों तो पता नहीं क्याक्या सपने देख रहे हैं और बेटी तो कुछ करना ही नहीं चाहती. तुषार ने इतना ही कहा, ‘‘बाद में प्यार से समझाएंगे, ऐसे ही औफिस के कामों से घबरा गई होगी.’’

फिर वह बाद आज तक नहीं आ पाया था. सोमवार से शुक्रवार तान्या बात के मूड में नहीं होती थी. शनिवार और रविवार पूरा दिन सोती थी. शाम को टीवी देखती थी. रविवार की शाम से ही उस का मूड अगले दिन औफिस जाने के नाम से खराब होना शुरू हो जाता था.

लावण्या मन ही मन आहत थी. मन तो होता था कि बेटी छुट्टियों में मांबाप के साथ हंसेबोले, बातें करे पर बेटी तो अपने आराम की दुनिया से बाहर निकलना ही नहीं चाहती थी. कई बार लावण्या ने फिर समझाया था, ‘‘और भी लड़कियां पूरा दिन काम करती हैं औफिस में, किसी का रुटीन यह नहीं रहता, घर वालों से बात तो ठीक से करती होंगी सब, कुछ घूमतीफिरती भी होंगी, बाहर जाती होंगी फैमिली के साथ, दोस्तों के साथ, तुम्हें तो दोस्तों से मिलने में भी आलस आता है.’’

‘‘मुझे बस आराम करने दिया करो, मम्मी. मुझे कुछ नहीं करना है.’’

‘‘22 साल की तो हो ही गई हो, शादी के बाद कैसे ऐडजस्ट करोगी?’’

‘‘मैं तो कुछ नहीं करूंगी, जल्दी ही जौब भी छोड़ दूंगी.’’

‘‘कैसे बीतेगी तुम्हारी लाइफ? इतना आराम, इतना आलस अच्छा नहीं है.’’

तान्या हंसते हुए बोली, ‘‘एक अच्छी पोस्ट वाला अमीर लड़का ढूंढ़ देना. बस, कट जाएगी लाइफ.’’

लावण्या उस का मुंह देखती रह गई थी. फिर वह परेशान रहने लगी थी बेटी की सोच से.

तुषार बैडरूम में आए. लावण्या को करवटें बदलते देख बोले, ‘‘अरे, तुम सोईं नहीं?’’

‘‘जब भी तान्या के बारे में सोचती हूं परेशान हो जाती हूं. क्यों इतना आराम चाहिए उसे लाइफ में?’’

‘‘अपना मूड मत खराब करो, समझ जाएगी धीरेधीरे.’’

ऐसे ही कुछ दिन और बीते, फिर महीने. मार्च का महीना चल रहा था, जुलाई से तान्या फाइनल के लिए छुट्टी पर रहने वाली थी. फाइनल की क्लास के लिए 60 हजार रुपए फीस भरी गई थी. लेकिन वह एक दिन भी नहीं गई थी.

एक दिन तुषार भी परेशान हो कर बोले, ‘‘तान्या, कैसे पास करोगी फाइनल? इतना टफ होता है, पैसे तो सब डूब ही गए?’’

‘‘अरे पापा, पहली बार फेल हो गई तो दूसरी बार दे दूंगी परीक्षाएं, क्या फर्क पड़ता है, कितनी बार भी दे सकते हैं परीक्षाएं, कोई चिंता नहीं है इस बात की.’’

तुषार को गुस्सा आ गया, ‘‘दिमाग खराब हो गया है? तुम्हें न समय की वैल्यू है न पैसे की, परेशान हो गए हैं हम.’’

तान्या पैर पटकते हुए अपने रूम में गई और लेट कर सो गई.

लावण्या की तो अब नींद ही उड़ने लगी थी. यही चिंता रहती कि आत्मनिर्भर नहीं भी हुई तो कम से कम आराम और आलस तो छोड़े. क्या होगा इस का.

1 महीना और बीता, एक रविवार को दिन में 12 बजे तान्या की आंख किसी के रोने की आवाजों से खुली. कोई जोरजोर से सिसकियां ले रहा था.

तान्या ने बिस्तर छोड़ा, ड्राइंगरूम में आई, वहां पूना में रहने वाली तुषार की चचेरी बहन नीता अपने पति विपिन और 25 वर्षीया बेटी रेनू के साथ बैठी थी. माहौल बहुत गंभीर था. तान्या सब को नमस्ते करते हुए एक कोने में बाल बांधती हुई बैठ गई. रेनू रोए जा रही थी.

नीता सिसकियां भरते हुए कह रही थी, ‘‘तुषार, तू ने मुझे कितना समझाया था. रेनू को अच्छी तरह पढ़ाऊंलिखाऊं, फिर इस का विवाह करूं लेकिन हम ने बेटी को बोझ समझते हुए इस की पढ़ाई छुड़वा कर जल्दी से जल्दी इस का विवाह करना ठीक समझा. अब इस का पति मनोज इसे कम पढ़ेलिखे होने का ताना मारता है. जरूरत के पैसे भी अपमान कर के देता है. अपने दोस्तों की पढ़ीलिखी पत्नियों के सामने इसे नीचा दिखाता है. कभीकभी हाथ भी उठा देता है. इस के ऊपर ही घर का सारा काम है. तू ने कितना समझाया था. मैं ने तेरी बात नहीं सुनी. मैं इसे वहां नहीं जाने दूंगी अब.’’

रेनू रोते हुए बोली, ‘‘मामाजी, मैं क्या करूं? मेरी मदद करो. मेरी वहां कोई इज्जत नहीं है. एकएक पैसे के लिए हाथ फैलाना पड़ता है. घर के बहुत सारे काम मुझे ही करने पड़ते हैं. मेरी जेठानी औफिस जाती हैं. सास भी टीचर हैं. सब कहते हैं तुम्हें घर में ही तो रहना है. घर के सब काम तो करने ही पड़ेंगे. पता नहीं क्या सोच कर उन्होंने मुझे अपनी बहू बनाया. मैं तो उन के जितनी पढ़ीलिखी नहीं, थक जाती हूं, मामाजी, क्या करूं अब?’’

तुषार ने कहा, ‘‘पहले आप लोग फ्रैश हो कर कुछ खाओ, फिर सोचते हैं क्या करना है.’’

लावण्या ने तान्या के भोले चेहरे पर पहली बार चिंता की लकीरें देखीं. फिर उसे बाथरूम में जाते देखा. लावण्या रसोई में व्यस्त हो गई. जब तक उस ने सब का खाना टेबल पर लगाया, नहाधो कर एकदम तैयार हाथ में बैग लिए तान्या को देख कर चौंकी. सब डाइनिंग टेबल पर बैठे थे. तुषार ने कहा, ‘‘बेटा, तैयार क्यों हो गई? कहीं जाना है क्या?’’

‘‘हां पापा, क्लास है मेरी, घाटकोपर जाना है.’’

लावण्या और तुषार चौंके, ‘‘क्या?’’

तान्या ने अपनी प्लेट में खाना रखते हुए कहा, ‘‘हां पापा, क्लास जा रही हूं, फाइनल में कम ही दिन बचे हैं,’’ बाकी मेहमानों की उपस्थिति का ध्यान रखते हुए उन पर नजर डालते हुए तान्या ने आगे कहा, ‘‘मम्मी, जल्दी निकलूंगी. स्नेहा से बाकी नोट्स भी लेने हैं. पहले ही बहुत देर हो गई है.’’

बाकी मेहमान तो नहीं समझे, लावण्या और तुषार बेटी का आशय समझ गए. तुषार मुसकराते हुए बस इतना ही बोले, ‘‘हां, देर तो हो गई है पर इतनी भी नहीं. अब भी समय है.’’

तुषार और लावण्या ने एकदूसरे को चमकती आंखों से देखा. उन की न सही, किसी और की ही सही, एक सीख से उन की बेटी ने कुछ करने की दिशा में आज एक कदम तो उठा ही लिया था.

REVIEW: जानें कैसी है जाह्नवी कपूर की ‘गुड लक जेरी’

रेटिंगः दो स्टार

निर्माताः सुभास्करन अल्लिराजाह, आनंद एल राय और महावीर जैन

लेखकः पंकज मट्टा

निर्देशकः सिद्धार्थ सेन गुप्ता

कलाकारः जाह्नवी कपूर,दीपक डोबरियाल, मीता वशिष्ठ, नीरज सूद,समता सुदिक्षा,जसवंत सिंह दलाल,साहिल मेहता,सौरभ सचदेव,मोहन कंभोज और सुशांत सिंह व अन्य.

अवधिः लगभग दो घंटे

ओटीटी प्लेटफार्मः हॉटस्टार डिजनी

एक लड़की के संघर्ष को दिखाने के लिए क्या उसका ड्ग्स के कारोबार से जुड़ा होना दिखाना आवश्यक है? क्या एक लड़की के संघर्ष को दिखाने के लिए उसका पंजाब में रहने वाली पंजाबी लड़की की बजाय मूलतः बिहार निवासी लड़की पंजाब में अपनी मां के इलाज के लिए ड्ग्स के कारोबार से जोड़ना उचित कहा जाएगा या इसे लेखक का दिमागी दिवालियापन कहा जाएगा. कुछ नया परोसने के नाम पर पर एक लड़की को ड्ग्स के कारोबार से जुड़ना दिखाना जरुरी तो नही कहा जाना चाहिए. भारत जैसे देश में हर लड़की को हर कदम पर कई तरह के संघर्ष से गुजरना पड़ता है. उन संघर्षों पर बात करने की जरुरत है. मगर ब्लैक कौमेडी अपराध कथा की श्रेणी वाली फिल्म ‘गुडलक जेरी’ के लेखक ने अपनी फिल्म में लड़की जेरी के संघर्ष को दिखाने के लिए उसे पंजाब में ड्ग्स के कारोबार से जुड़ा दिखा कर ख्ुाद को महान फिल्मकार साबित करने की कोशिश की है. मगर लेखक व निर्देशक फिल्म को संभाल नही पाए.

यॅूं तो यह मौलिक फिल्म नही है. बल्कि यह 17 अगस्त 2018 को सिनेमा घर में प्रदर्शित और इन दिनों ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘जी 5’’पर स्ट्रीम हो रही तमिल फिल्म ‘कोलामावू कोकिला’ की रीमेक है. हिंदी में इस फिल्म में कहानी के स्तर पर ज्यादा बदलाव नही किया गया है. सिर्फ बैकड्ाप को पंजाब करने के साथ ही किरदारों को थोड़ा सा हिंदी भाषी दर्शकों को ध्यान रखकर कुछ बदला गया है. इसके अलावा फिल्म का क्लायमेक्स बदल दिया गया है.

कहानीः

जेरी अपनी मां व छोटी बहन के साथ दरभ्ंागा,बिहार से पंजाब के लिए ट्रेन  पकड़कर पंजाब पहुॅचती है. पंजाब में जया कुमारी उर्फ जेरी (जान्हवी कपूर) एक मसाज पार्लर में नौकरी करती है,यह बात जेरी की मां शरबती (मीता वशिष्ठ ) को पसंद नही है.  जबकि जेरी की उसकी छोटी बहन छाया उर्फ चेरी(समता सुदिक्षा) पढ़ाई करती है. जेरी की मां मोमो बना व बेचकर परिवार चलाती है. घर में यह तीन महिलाएं हैं और इन्हें एकतरफा प्यार करने वाले प्रेमी भी मौजूद हैं. जेरी की मां सरबती से पड़ोसी (नीरज सूद) प्यार करते हैं और वह खुद को इस घर का सदस्य ही समझते हैं. जबकि जेरी को रिंकू (दीपक डोबरियाल) अपनी प्रेमिका मानकर चल रहा है और गाहे बगाहे घर में घुसता रहता है. तो वहीं छाया उर्फ चेरी से शादी रचाने का मन-मस्तिष्क में ख्याल लिए एक पगलैट प्रेमी अक्सर दूल्हे के कपड़े पहनकर घर के अंदर घुसता रहता है.

इसी बीच एक दिन पता चलता है कि जेरी की मां सरबती को सेकंड स्टेज लंग कैंसर है.  डॉक्टर उनके इलाज के लिए 20 लाख रुपए का खर्च बताते हैं. जेरी पहले मसाज पार्लर की मालकिन से मां के इलाज के बीस लाख रूपए उधार मांगती है. जो कि वह मना कर देती है.  अब जेरी व चेरी दोनों चिंता मग्न रहने लगते हैं. एक दिन जेरी व चेरी दोनों बहने शॉपिंग करने जाती है,जहां  एक ड्रग्स तस्कर का पीछा करते हुए पुलिस उस शॉपिंग कॉम्पलेक्स में पहुॅच जाती है. ड्ग्स तस्कर भागता है,जो कि अचानक एक दुकान से बाहर निकलने के लिए जेरी के दरवाजा खोलने से वह तस्कर दरवाजे से टकराकर गिर जाता है. पुलिस तस्कर को पकड़कर ले जाती है,लेकिन नाटकीय तरीके से जेरी ड्ग्स सप्लायर टिम्मी के संपर्क में आती है और मां को बचाने की मजबूरी में इस धंधे में शामिल हो जाती है. उसे मां का इलाज कराने के लिए पैसे मिल जाते हैं. इस बीच दो बार वह पुलिस के चंगुल से ख्ुाद को किसी तरह बचाने में कामयाब हो जाती है. मां का इलाज हो जाने के बाद हो जाने के बाद जेरी पुलिस के झंझटो से बचने के लिए खुद को ड्ग्स के ध्ंाधे से अलग करना चाहती है. तब कया होता है,यह जानने के लिए तो फिल्म देचानी पड़ेगी.

लेखन व निर्देशनः

कमजोर कहानी व पटकथा के चलते फिल्म दर्शकों को बांधकर नही रखती. ठोस कहानी न होने के चलते फिल्म में कई दृश्यों का दोहराव भी है. फिल्म की पटकथा के चलते दर्शक ख्ुाद को ही भ्ंावर में फंसा हुआ महसूस करने लगता है. फिल्म अचानक चलते चलते ठहर सी जाती है. कई किरदार ठीक से गढ़े ही नही गए. कहानी के अंदर हास्य दृश्य अपने आप में अच्छे हैं, मगर वह फिल्म के साथ फिट नही बैठते. जेरी,उसकी मां व बहन दरभ्ंागा, बिहार से पंजाब आकर क्यों रह रहे हैं,इस पर यह फिल्म कुछ नही कहती. फिल्म का क्लायमेक्स अति घटिया है. वैसे फिल्म में एक नही कई क्लायमेक्स हैं,शायद ख्ुाद लेखक व निर्देशक ही निर्णय नहीं कर पा रहे थे कि फिल्म को किस मोड़ पर खत्म किया जाए. लेखक व निर्देशक दर्शकांे को एक नई सीख देते है कि जेरी बिहार से है,इसलिए वह ‘मै’ की जगह ‘हम ’बोलती है. वाह क्या कहने ? इससे लेखक का भारत देश के बारे में कितना ज्ञान है,वह सामने आता है. दूसरी बात जेरी के परिवार को बिहारी रखने के पीछे क्या सोच रही,यह तो लेखक व निर्देशक ही बेहतर जानते होंगे. क्या पंजाबी लड़कियां कभी किसी गलत ध्ंाधे से नही जुड़ती? पूरी फिल्म में जेरी व शरबती महज चंद संवाद ही बिहारी लहजे मे बोलती है अन्यथा बिहारी लहजे की भाषा का बंटाधार ही किया गया है.

पंजाब में ड्ग्स तस्करी बहुत बडा मुद्दा है,मगर लेखक व निर्देशक इस पर बहुत उपर उपर से ही अपनी कहानी ले जाते हैं. उन्होने साफ साफ कुछ भी कहने से बचने की कोशिश की है. वह एक तरफ एक पुलिस वाले को ड्ग तस्कर से मिला हुआ दिखाते हैं,तो वहीं दूसरे पुलिस वाले को ड्ग्स तस्कारों का सफाया  करने पर आमादा दिखाते हैं. इस तरह की बातें तो तमाम फिल्मों में आ चुकी हैं.  बहुत ही उथली सी फिल्म है.

एडीटिंग टेबल पर फिल्म को कसा जाना चाहिए था.

अभिनयः

जेरी के किरदार में जान्हवी कपूर हैं,जो अपने समय की मशहूर व सशक्त अदाकारा स्व. श्रीदेवी की बेटी हैं. जान्हवी कपूर ने फिल्म ‘धड़क’ से बौलीवुड में कदम रखा था,पर इस फिल्म को खास सफलता नही मिली थी. इसके बाद वह ‘गंुजन सक्सेना’ और ‘रूही’ में नजर आयीं, मगर इन फिल्मों में भी उनके अभिनय में बहुत अच्छा निखार नहीं आया था. अब इस फिल्म में भी जान्हवी कपूर अपने अभिनय से बहुत ज्यादा असर नही डाल पाती. उन्हे अपने चेहरे के भावों को घटनाक्रम के अनुरूप तेजी से बदलना सीखना पड़ेगा. जेरी के किरदार के लिए जिस तरह से उन्हे सशक्त इरादे वाली नजर आनी चाहिए,वैसी वह नही है. वह जिस तरह की सीख अपनी बहन व मां को देती है,ठीक उसके विपरीत उसके चेहरे पर भाव रहतेहैं. रोने वाले दृश्य जरुर अच्छे बन पड़े हैं. पर लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए जान्हवी कपूर को अभी बहुत मेहनत करने की जरुरत है. रिंकू के किरदार में दीपक डोबरियाल जरुर अपने अभिनय की छाप छोड़ जाते हैं,मगर लेखक व निर्देशक ने उनके किरदार को कुछ अजीब सा क्यों बनाया,यह समझ से परे है. शरबती के किरदार में मीता वशिष्ठ का अभिनय शानदार है. पड़ोसी के किरदार में नीरज सूद का अभिनय ठीक ठाक ही कहा जाएगा,अफसोस उन्हे पटकथा से कोई मदद नही मिली.  चेरी के छोटे किरदार में समता सुदिक्षा अपने स्वाभाविक अभिनय के कारण याद रह जाती हैं. टिम्मी के किरदार में जसवंत सिंह दलाल ने बहुत स्वाभाविक अभिनय किया है. जिगर के किरदार मे साहिल मेहता भी अपनी छाप छोड़ जाते हैं. अन्य कलाकार ठीक ठाक हैं.

निर्माता ने फिल्म ‘‘गुडलक जेरी’’ को सिनेमाघरों की बजाय ओटीटी पर रिलीज करने का निर्णय कर अपने हक में फैसला किया है.

Bipasha Basu Pregnancy: शादी के 6 साल बाद माता-पिता बनेंगे बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर

बौलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में इन दिनों प्रैग्नेंसी की खुशखबरी सुनने को मिल रही हैं. जहां बीते दिनों एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने अपनी प्रैग्नेंसी की खबर से फैंस को खुश कर दिया था तो वहीं खबरे हैं कि एक्ट्रेस बिपाशा बसु शादी के 6 साल बाद मां बनने वाली हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शादी के 6 साल बाद बनेंगी मां!

 

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खबरों की मानें तो एक्ट्रेस बिपाशा बसु और एक्टर करण सिंह ग्रोवर जल्द ही पेरेंट्स बनने वाले हैं, जिसकी गुड न्यूज जल्द ही वह फैंस के साथ शेयर कर सकती हैं. हालांकि अभी तक एक्ट्रेस की ओर से कोई खबर नहीं आई है. लेकिन प्रैग्नेंसी की खबरें मिलते ही फैंस उन्हें बधाई देते नजर आ रहे हैं, जिसके चलते वह सोशलमीडिया पर छाई हुई हैं.

 

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बिपाशा-करण की जोड़ी है फेमस

 

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शादी के 6 साल बाद बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर के घर आने वाली खुशी की खबरों के बीच फैंस दोनों की जोड़ी की तारीफें करते दिख रहे हैं. ‘मंकी लव’ के नाम से फैंस के बीच बिपाशा-करण का प्यार किसी से छिपा नही है. दोनों अक्सर डेट और वेकेशन की फोटोज फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं. हॉरर फिल्म अलोन से पहली मुलाकात के बाद बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर ने 30 अप्रैल 2016 में शादी की थी. वहीं दोनों की ये जोड़ी फैंस के बीच पौपुलर कपल में से एक हैं.

बता दें, एक्टर करण सिंह ग्रोवर की एक्ट्रेस बिपाशा बसु से तीसरी शादी है. इससे पहले वह एक्ट्रेस श्रद्धा निगम (Shraddha Nigam) से 2008 में शादी कर चुके हैं. वहीं टीवी की पौपुलर एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट संग 2 साल की शादी के बाद 2014 में तलाक ले चुके हैं. वहीं ये करण सिंह ग्रोवर और बिपाशा बसु का पहला बच्चा होगा.

Anupama में आएगा ये बड़ा ट्विस्ट, अनुज होगा हादसे का शिकार!

सीरियल अनुपमा (Anupama) में इन दिनों फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ पाखी के कारण शाह हाउस में हंगामा हो रहा है तो वहीं अपकमिंग एपिसोड में अनुज और वनराज के बीच झगड़ा होते हुए दिखने वाला है. इसी हंगामे के बीच शो के मेकर्स ने नया प्रोमो रिलीज कर दिया है, जिसमें अनुज के हादसे का शिकार (Anuj Paralyzed In New Promo) होने के बाद अनुपमा की जिंदगी बदलती दिख रही है. आइए आपको दिखाते हैं क्या है प्रोमो में खास (Anupama New Promo)

हादसे का शिकार होगा अनुज

 

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सीरियल अनुपमा में शाह हाउस में हंगामे के बीच शो का नया प्रोमो मेकर्स ने रिलीज कर दिया है, जिसमें अनुज बेड पर जिंदा लाश की तरह पड़ा हुआ दिखाया जा रहा है. दरअसल, प्रोमो में अनुपमा, अनुज की देखभाल करते हुए दिख रही है. वहीं बरखा और अंकुश उसे ताना मारते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि पहले उसने अनुज को फंसाया और अब उसकी बेटी अधिक को फंसा रही है, जिसे सनकर अनुपमा को धक्का लगता है. वहीं शाह परिवार से नाता टूटने के बाद अनुपमा और छोटी अनु अकेले पड़ते हुए दिख रहे हैं. प्रोमो देखते ही जहां फैंस अपकमिंग ट्विस्ट का इंतजार कर रहे हैं तो वहीं मेकर्स को अनुज का ठीक करने की बात कर रहे हैं.

 

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शाह परिवार के कारण टूटी अनुपमा लेगी ये फैसला

 

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अब तक आपने देखा कि पाखी की बेइज्जती के बाद तोषू और वनराज भी अनुपमा को बुरा भला कहते हैं. वहीं बा, अनुपमा को शाह हाउस से जाने के लिए कहती है, जिसके कारण अनुपमा पूरी तरह टूट जाती है और किंजल-काव्या उसका साथ देते हैं. दूसरी तरफ अनुज, अनुपमा की बेइज्जती देखकर पाखी और तोषू को खरी खोटी सुनाता है और पाखी को चेतावनी देता है कि अब वह कपाड़िया हाउस में कदम नहीं रखेगी. वरना उसके साथ-साथ अधिक को भी सड़क पर ले आएगा, जिसे सुनकर वनराज गुस्से में दिखेगा.

अपकमिंग एपिसोड में वनराज-अनुज के बीच कहासुनी के बाद दोनों का गुस्सा बढ़ जाएगा और वह एक दूसरे पर हाथ उठा देंगे. हालांकि अनुपमा उन्हें रुकने के लिए कहेगी और पाखी से अपनी मां होने के लिए माफी मांगेगी. साथ ही पूरे परिवार को बताएगी कि वह शाह हाउस में अब कभी नहीं लौटेगी.

शादी के 5 साल बाद Deepika-Ranveer का पहला फोटोशूट

बीते दिनों अपने न्यूड फोटोशूट के कारण सुर्खियों में रहने वाले बौलीवुड एक्टर रणवीर सिंह (Ranveer Singh) हाल ही में अपनी वाइफ दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) संग एक फैशन शो में साथ पहुंचे, जिसकी फोटोज सोशलमीडिया पर छाई गई हैं. आइए आपको दिखाते हैं बौलीवुड के पावर कपल दीपिका-रणवीर की फोटोज…

शादी के बाद पहला फोटोशूट वायरल

 

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इंडस्ट्री के पावर कपल्स में से एक दीपिका और रणवीर की जोड़ी फैंस को बेहद पसंद है, जिसके चलते दोनों को साथ देखने के लिए फैन तरसते हैं. वहीं हाल ही में एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण पति रणवीर सिंह के साथ शादी के 5 साल बाद एक फैशनशो का हिस्सा बनती दिखीं, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं.

एक बार फिर दिखा रॉयल अंदाज

 

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शादी के बाद दीपिका के कई अवतार सामने आए हैं. हालांकि एक्ट्रेस के रॉयल अवतार की झलक के लिए आज भी फैंस तरसते हैं. वहीं हाल ही में फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा (Manish Malhotra) के मिजवान फैशन शो 2022 (The Mijwan Couture Show 2022) में दीपिका रॉयल अंदाज में पति संग रैंप वॉक करती नजर आईं.

 

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कुछ ऐसा था लुक

 

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‘दीपवीर’ के लुक की बात करें तो रणवीर सिंह जहां ब्लैक एंड व्हाइट कौम्बिनेशन वाली शेरवानी में दिखे तो वहीं दीपिका रॉयल लहंगा पहने नजर आईं. वहीं मीडिया के सामने दोनों रोमांटिक अंदाज में नजर आए. इसी के साथ फैशन शो के दौरान रणवीर सिंह अपनी मां अंजू भवनानी के पैर छूते हुए दिखे, जिसकी वीडियो सोशलमीडिया पर वायरल हो रही है.

बता दें, दीपिका-रणवीर के अलावा मनीष मल्होत्रा के फैशन शो में कई बौलीवुड सितारे नजर आए, जिनमें गौरी खान, सारा खान समेत कई सेलेब्स हिस्सा लेते हुए दिखे. वहीं दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह शोज टॉपर बनते हुए सुर्खियों में रहे. हालांकि बीते दिनों रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट के कारण वह चर्चा में बने हुए हैं. जहां सेलेब्स उनका सपोर्ट कर रहे हैं तो वहीं उन्हें खरी खोटी सुना रहे हैं.

photo and video credit-Viral Bhayani

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