रुपर्ट मर्डोक की चौथी शादी

बुढ़ापे में बूढ़ी से भी शादी फलेगी इस की कोई गारंटी नहीं है. कम से कम मीडिया टाइकून रुपर्ट मर्डोक के मामले में तो ऐसा रहा है. अब 91 वर्ष के मर्डोक ने 6 साल पहले तब 60 साल की गैरी हाल से लंदन में 3 शादियों और तलाकों के बाद चौथी शादी की थी. अब गैरी हाल तलाक और मर्डोक की अरबों की संपत्ति में से हिस्सा मांग रही है.

कट्टरपंथी फौक्स न्यूज का चर्च भक्त रुपर्ट मर्डोक 4 शादियां करे और निभा न पाए पर रातदिन अपने चैनलों से भक्ति के गुण गाए और बाइबल की संस्कृति के गुण गाए जो स्त्रीपुरुष का मिलन एक बार का मरने तक मानती है, अजीब नहीं है क्या?

मर्डोक के एंपायर में भारत के स्टार चैनल भी हैं जो अपने धारावाहियों से ङ्क्षहदू भक्तों को भगवान का ज्ञान देते हैं. अमेरिका में ऐसा ही फौक्स चैनल से होता है. फौक्स चैनल ने गर्भाघात संबंधित अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय पर खूब खुशियां मनाई थी पर उसी का मालिक उसी बाइबल जिस के आधार पर गर्भपात विरोधी 40 साल से हल्ला मचा रहे थे. 4 बार शादी कर के तलाक कर रहा है जबकि शादी बाइबल के अनुसार मृत्यु तक होती है और केवल एक ही मृत्यु के बाद दूसरा फिर शादी कर सकता है.

असल में धर्म का दोगलापन हमेशा आम लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. आदमी सदियों से अपनी सैक्स भूख शादी के बाद पूरी करते रहे हैं पर अपनी पत्नियों को नाखल दिखादिखा कर पति का भगवान मानने को मजबूर करते रहे हैं.

हमारा हिंदू धर्म इस मामले में साफ है. आदमी के पास 100 पत्नियों का हक है, औरतों के पास केवल एक पति का. अगर किसी ने 100 औरतों से बाजेगाजे, पंडितों के साथ मंत्र पढ़ कर शादियां की हैं तो 100 की 100 कानूनी हैं और उन में से एक भी पति से तलाक नहीं मांग सकती. पत्नी को बहुपत्नी वाले पति से छुटकारा पाता है तो कुंआ है, नदी है, जमीन का गड़ा है, फांसी का फंदा है, जहर है, अग्नि है, हजार तरीके हैं पति से छुटकारे पाने के.

यही कट्टर ईसाई औरत के साथ है कि वह वहशी, खूंखार, दूसरी औरतों के साथ सोने वाले पति के साथ निभाए जाए, निभाए जाए. यह तो पिछली कुछ सदियों में हुआ है कि आधुनिक कानून ईसाई देशों में बने और भारत में भी बने कि एक ही पतिपत्नी रहेंगे और अगर झिकझिक हो रही है तो तलाक ले सकते हैं. रुपर्ट मर्डोक जैसे चर्च, बाइबल, पादरियों का समर्थन भी करते हैं और आधुनिक कानूनों का सहारा ले कर शादी, तलाक शादी, तलाक, शादी, तलाक फिर शादी और अब तलाक कर रहे हैं.

पूरे पश्चिम में शिक्षा, तकनीक, तर्क, लौजिक, पर्सनल इंडीपैंडैंस के बावजूद चर्च रोजमर्रा के जीवन पर उसी तरह भारी है जैसे इस्लाम में मौलवी और ङ्क्षहदुओं पर पंडे, महंत. ये सब आधुनिक विज्ञान का लाभ उठाते हैं पर साथ ही हजारों साल पुराने नामों पर एकदूसरे को मारने दौड़ते हैं, लड़ाइयां करते हैं, अपने लोगों को जेलों में बंद करते हैं, मास मर्डर करते हैं.

रुपर्ट मर्डोक उन में से है जिस का मीडिया एंपयार दोगली बात कहता है. जो चर्च को भी बढ़ावा देता है ताकि बेवकूफ चर्च को दान दें, उस के चैनलों व अखबारों को पढ़ें और चर्च के आदेशों को मर्जी से उठापटक कर अपना सााम्राज्य बचाए. बुढ़ापे में 85 साल की आयु में शादी करना और 91 साल की आयु में तलाक लेना इसी तरह के दोगले लोग कर सकते हैं.

चार लड़कियों की अनूठी रोड ट्रिप फिल्म ‘‘मियामी से न्यूयॉर्क’’ मे नए रिश्तों का जाल

जब भी ‘रोड ट्पि’ फिल्मों की बात होती है,तो लोगांे के जेहन में ‘‘हाईवे’’ ,‘‘दिल चाहता है’’ और ‘‘जिंदगी मिलेगी ना दोबारा’’ जैसी खूबसूरत व सफल फिल्मों का ख्याल सहज ही आ जाता है. अब इसी कड़ी में पांच अगस्त को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘मियामी से न्यूयॉर्क’’ का नाम भी जुड़ने जा रहा है,जिसका निर्माण राकेश यू साकट ने किया है.

अनूठे किस्म की  रोड ट्पि वाली फिल्म ‘‘मियामी से न्यूयॉर्क’’ मेंें चार सहेलियों की कहानी है,जो एक दिन सड़क के रास्ते एक शहर (मियामी) से दूसरे शहर (न्यूयॉर्क) जाने का फैसला करती हैं. इसके लिए वह एक हैंडसम लड़के की मदद लेती हैं. इस रोड ट्पि फिल्म की खासियत यह है कि  इसमें एक खूबसूरत प्रेम कहानी को भी अनोखे अंदाज पिरोया गया है.

कॉमेडी व एडवेंचरस फिल्म में निहाना मिनाज (आंशु), निखर कृष्णानी (शायना), जैनेल लैक्ले (मिलि) और रोहिनी चंद्रा (आशा) यह चार सहेलियां जब एक दिन रोड ट्रिप पर निकलने के बारे में सोचती हैं तो वह सभी अपनी इस यात्रा के लिए अर्जुन आनंद (रवि) की मदद लेने का फैसला करती हैं. फिल्म की कहानी इन्हीं पांच मजेदार किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है. जैसे जैसे इनकी यात्रा सड़क के रास्ते तेजरफ्तार अंदाज में आगे बढ़ती है, फिल्म के सभी किरदारों के आपसी रिश्तों के विभिन्न पहलू सामने आने लगते हैं, जो इस फिल्म को एक अलग और रोमांचक मोड़ पर ले जाते हैं.

फिल्म ‘‘मियामी से न्यूयॉर्क’’ के निर्माता राकेश यू साकट ने कहा, ‘‘हालांकि इससे पहले भी रोड ट्रिप पर आधारित कुछ चुनिंदा फिल्में बन चुकी हैं, मगर हमारी फिल्म ‘मियामी से न्यूयॉर्क’ में रिश्तांे के ताने-बाने को एक अलग अंदाज में पेश करने की कोशिश की गयी है. हमें पूरी उम्मीद है कि नयी प्रतिभाओं के साथ बनाई गयी हमारी फिल्म की कहानी का नयापन और अंदाज-ए-बयां दोनों ही दर्शकों का खासा पसंद आएगा. ’’

‘‘प्रीशा फिल्म्स’’ के बैनर तले बनी फिल्म ‘‘मियामी से न्यूयॉर्क’’ का निर्देशन जाने-माने निर्देशन ‘‘तेरे मेरे सपने’ व ‘पागलपन’जैसी फिल्मों के निर्देशक जॉय अॉगस्टीन ने किया है. जबकि इसके कैमरामैन परीक्षित वॉरियर हैं.

30 साल से भी लम्बे समय से इंडस्ट्री से जुड़े रहे प्रतिष्ठित निर्देशक जॉय अॉगस्टीन की पहचान महज एक फिल्ममेकर के तौर पर नहीं होती, बल्कि उनकी पहचान एक निर्माता और एक अच्छे लेखक के तौर पर भी होती है. जॉय को बेहतरीन किस्म के विज्ञापन फिल्में बनाने के लिए भी जाना जाता है.

GHKKPM: पाखी की प्रैग्नेंसी का सच जानेगी सई! देखें वीडियो

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Mein) के मेकर्स जहां सरोगेसी ट्रैक के चलते बीते दिनों ट्रोल हुए थे तो वहीं अब नए ट्विस्ट को देखने के लिए फैंस काफी एक्साइटेड हैं. दरअसल, शो में सई (Ayesha Singh) के सामने पाखी (Aishwarya Sharma) की प्रैग्नेंसी की सच्चाई सामने आने वाली है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Ghum Hai Kisikey Pyaar Mein Written Update)…

विराट बचाएगा जान

अब तक आपने देखा कि कुछ गुंडे एक अस्पताल को हाइजैक कर लेते हैं. जहां पर सई के साथ-साथ पाखी और भवानी भी मौजूद होते हैं. वहीं इसमें जगताप की जान सई बचाती है, जिसके चलते वह सम्राट के खून के इल्जाम में जेल जाने के लिए राजी हो जाता है. इसी के साथ अपने परिवार और हाइजैक में फंसे लोगों को बचाने के लिए विराट अस्पताल में एंट्री करता है.

रिपोर्ट्स छिपाएगी पाखी


अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि विराट एक-एक करके गुंडों को खत्म करेगा और सई समेत सभी लोगों की जान बचाएगा. हालांकि पाखी इस बात से डरी होगी कि उसकी प्रैग्नेंसी का सच किसी को पता ना चल जाए. लेकिन सई के हाथ में पाखी की रिपोर्ट लग जाएगी, जिसे देखकर वह चौंक जाएगी.

सई कहेगी ये बात

 

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इसके अलावा आप देखेंगे कि कि प्रैग्नेंसी को लेकर परेशान पाखी (Pakhi Pregnancy) अपनी मां वैशाली से बात करेगी और अपनी प्रैग्नेंसी से जुड़ी परेशानियों के बारे में बताएगी और पूछेगी कि क्या उसे सई से यह बात छिपानी चाहिए? लेकिन वैशाली उसे चेतावनी देगी कि अगर बच्चे को कुछ हो जाएगा तो सई उसे नहीं छोड़ेंगे.वहीं पाखी की बात सई सुन लेगी और उससे रिपोर्ट्स के बारे में पूछते हुए गुस्से में कहेगी कि वह उसे जोर से थप्पड़ मारना चाहती है. साथ ही वह प्रैग्नेंसी की जटिलताओं के लिए उसे दोषी ठहराएगी.

Divya Agarwal ने पहली बार बताई Varun Sood से ब्रेकअप की वजह, पढ़ें खबर

कलर्स के रियलिटी शो बिग बॉस के ओटीटी सीजन की विनर रह चुकीं एक्ट्रेस दिव्या अग्रवाल (Divya Agarwal) की लव स्टोरी किसी से छिपी नहीं है. जहां उनके रोमांटिक फोटोज को फैंस देखना पसंद करते थे तो वहीं ब्रेकअप के चलते फैंस चौंक गए थे. हालांकि दोनों ने बॉयफ्रेंड वरुण सूद (Varun Sood) के साथ ब्रेकअप की वजह अभी तक सामने नही आई हैं. हालांकि हाल ही में एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने ब्रेकअप से जुडी बातें शेयर की है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

ब्रेकअप को लेकर कही ये बात

सोशलमीडिया के जरिए बॉयफ्रेंड वरुण सूद (Varun Sood) के साथ ब्रेकअप का ऐलान करने वाली एक्ट्रेस दिव्या अग्रवाल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि ‘ वरुण सूद के साथ मुझे अपना फ्यूचर नहीं दिख रहा था और जब चीजें ज्यादा खराब होने लगी तो मैंने और वरुण सूद ने अलग होने का फैसला किया. मैं अपने रिश्ते को एक अच्छे नोट पर खत्म करना चाहती थी इसीलिए ब्रेकअप करने का फैसला भी मेरा था. मैंने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी फैंस को दी. लेकिन उन्होंने मुझे ट्रोल करना शुरु कर दिया. दरअसल, मेरे लिए इनर पीस बहुत ज्यादा जरूरी है. इसीलिए जो ठीक लगा मैंने वही किया.

फैंस को नहीं हो रहा यकीन

ब्रेकअप की खबर के बावजूद आज भी फैंस यकीन करते हैं कि दोनों साथ है. इसीलिए वह दोनों को साथ देखने के लिए तरसते हैं और एक्टर्स से साथ में काम करने की बात कहते हैं. वहीं प्रौफेशनल करियर की बात करें तो एक्ट्रेस दिव्या अग्रवाल अपने एक्टिंग करियर पर फोकस करती दिख रही हैं. हाल ही में एक्ट्रेस का एक म्यूजिक वीडियो भी फैंस के साथ शेयर हुआ था.

बता दें, वरुण सूट से पहले एक्ट्रेस दिव्या, एक्टर प्रियांक शर्मा को डेट कर चुकी हैं. हालांकि कुछ ही वक्त बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया था, जो सुर्खियों में रहा था.

महिलाएं और धन प्रबंधन

आज महिलाएं हर क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण तथा प्रभावशाली पदों पर विद्यमान हैं. हर दिन ऐसी स्त्रियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जिन के पास अपने स्वयं के पैसे हैं और जिन्हें आधुनिक संसार में महत्त्वपूर्ण वित्तीय प्रदाताओं के रूप में जाना जाता है. इस के बावजूद ऐसी भी अनेक महिलाएं हैं, जिन्हें वित्तीय जगत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. निवेश के मामले में महिलाएं हिचक महसूस करती हैं और उन के द्वारा अपने पैसों का निवेश न करने के पीछे का प्रमुख कारण व्यक्तिगत वित्त के बारे में ज्ञान का अभाव है. बहुत से निवेशक मानते हैं कि निवेश की शुरुआत बहुत जटिल नहीं है. निवेश के लिए कुछ ऐसे अवसर भी हैं, जो पहली बार निवेश करने वालों के लिए आदर्श हैं. आप के द्वारा एक बार थोड़ा निवेश करने के बाद इस का ज्ञान तेजी से बढ़ने लगता है.

निवेश जगत में प्रवेश के अनेक मार्ग हैं, जिन में शामिल हैं बचत प्रमाणपत्र स्टौक्स, बौंड्स और म्यूचुअल फंड्स. बचत की शुरुआत करने के लिए बचत प्रमाणपत्र एक अच्छी किस्म का निवेश है और सीडी का एक फायदा यह है कि आप निवेश की अवधि चुन सकती हैं और फिर सीडी के परिपक्व होने तक ब्याज प्राप्त कर सकती हैं. महिलाओं के लिए एक दूसरा अच्छा विकल्प है मनी मार्केट फंड. बचत खातों की तरह ये छोटी अवधि के होते हैं. उन के लिए ये अच्छे विकल्प होते हैं, जो अपने पैसों को बचत प्रमाणपत्रों में बांध कर नहीं रखना चाहतीं.

निवेश योजना का मार्गदर्शन

पहली बार निवेश करने वालों के लिए जरूरी है कि वे सही निवेश योजना का चुनाव करें. एक भारतीय स्त्री के लिए बहुत कुछ उस के वित्तीय लक्ष्यों, रोजगार के स्तर, उम्र, अवधि तथा सब से महत्त्वपूर्ण जोखिम उठाने की उस की सामर्थ्य पर निर्भर होता है. एक निवेश योजना वह मार्गदर्शन भी प्रदान करती है, जिस से आप को अपनी ऊर्जा संगठित और निर्देशित करने में मदद मिल सकती है.

समयबद्ध सेवानिवृत्ति योजना के साथ इक्विटी में निवेश एक युवा सेवारत महिला के लिए उपयुक्त है, जबकि एक गृहिणी के लिए बीमा और आवर्ती आय पर ज्यादा जोर देते हुए परंपरागत होना चाहिए.

निवेश के मामले में छोटी या लंबी अवधि के जोखिम को टाला नहीं जा सकता. बौंड्स, मनी मार्केट और ट्रैजरी बिल्स जैसे कुछ निवेश सुरक्षित हैं, परंतु इन से मिलने वाला लाभ बहुत थोड़ा है, जबकि स्टौक्स जैसे दूसरे निवेशों में बड़ा जोखिम होता है, मगर वे बड़ा फायदा देते हैं.

आदर्श स्थिति

एक पेशेवर निवेश सलाहकार के परामर्श से आप अपना निवेश पोर्टफोलियो बनाने में प्रवीण हो सकती हैं तथा इस से आप को निवेश के जटिल मुद्दों को समझने में भी मदद मिलेगी. जानकार महिलाओं का निवेश क्लब में शामिल होना, एक आदर्श स्थिति बन सकती है. हालांकि एक समूह के रूप में विधिवत निवेश किस तरह किया जाए, यह जानने के लिए किसी वित्तीय परामर्शदाता से सलाह लेना उचित होगा. महिलाएं ज्यादा भावुक होती हैं और जब धन प्रबंधन की बात आती है, तो वे कम जोखिम लेना पसंद करती हैं. अत: जरूरी है कि वे नियमित आधार पर अपने निवेशों का अवलोकन करती रहें और यह जानकारी रखें कि निवेश के विभिन्न वित्तीय बाजारों में क्या चल रहा है.

सूझबूझ भरा कदम

महिलाओं को हमेशा एक नियमित, अनुशासनात्मक प्रयास के साथ एक अच्छी बचत करने वाला समझा जाता है. परंतु एक बचत करने वाले से निवेशक के रूप में अगला कदम उठाने के प्रति वे अनिच्छुक होती हैं. फिर भी यदि महिलाएं बुनियादी बातों को समझने के लिए थोड़ा सा समय निकालें तो निवेश करना बिलकुल भी जटिल नहीं रहेगा.

बच्चों के बदलते रंगढंग, पेरेंट्स हो रहे तंग

राहुल के पेरैंट्स को उस समय गहरा सदमा लगा जब उन्हें पता चला कि उन के बेटे का लिवर खराब हो चुका है. उन्होंने 2 साल पहले राहुल को इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए बेंगलुरु भेजा था. अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा वे अपने लाड़ले की पढ़ाई पर खर्च कर रहे थे. उन्हें भरोसा था कि पढ़लिख कर राहुल का कैरियर संवर जाएगा. बेटे से मिलने जब वे बेंगलुरु पहुंचे तो डाक्टरों ने बताया कि काफी ज्यादा नशा लेने की वजह से राहुल का लिवर खराब हो गया है. यह सुन कर उन्हें झटका लगा. पढ़ने के बजाय राहुल नशाखोरी करता रहा. सिर पीटने के अलावा उन के पास कोई चारा न था.  इस तरह के ढेरो वाकए हैं कि जब मातापिता बेटे को पढ़नेलिखने के लिए बाहर भेजते हैं और बेटा नशे के जाल में फंस कर अपनी जिंदगी व कैरियर चौपट कर लेता है.

पटना के एक बैंक अधिकारी हीरा सिन्हा के साथ कुछ ऐसा ही हादसा हुआ. 4 साल पहले उन्होंने बड़े ही जतन से अपने इकलौते बेटे रौशन को मैडिकल की कोचिंग के लिए दिल्ली भेजा था.  वे हर महीने बेटे के बैंक अकाउंट में 10 हजार रुपए डाल देते और निश्ंिचत थे कि उन का बेटा मैडिकल की जम कर तैयारी कर रहा है. एक दिन उन के पास पुलिस का फोन आया कि उन के बेटे ने खुदकुशी कर ली है. दिल्ली पहुंचे तो पता चला कि शुरुआत में एक महीना कोचिंग करने के बाद वह कभी कोचिंग करने गया ही नहीं. शराब और ड्रग्स की चपेट में फंस कर उस ने अपनी जिंदगी ही खत्म कर ली.

स्कूल, कालेज और कोचिंग क्लासेज करने वाले काफी ज्यादा बच्चे नशे के शिकार बन रहे हैं. जब नशे की वजह से किसी गंभीर और खतरनाक बीमारी की चपेट में आ जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि नशे ने उन का क्या बरबाद कर के रख दिया. ग्लानि और मातापिता के डर से कई खुदकुशी कर लेते हैं तो कईर् बीमारी का इलाज करातेकराते ही अपने जीवन का सुनहरा दौर खत्म कर लेते हैं.  रमेश कदम पटना में सैंकंड ईयर इंजीनियरिंग का स्टूडैंट है. पढ़ाई के दौरान ही उस की संगति नशेडि़यों से हो गई और शराब पीने की लत लग गई. उस की आंखें हमेशा लाल और चढ़ीचढ़ी रहने लगीं और वह बातबात पर चिड़चिड़ाने व झल्लाने लगा. घर वाले उसे डाक्टर के पास ले गए तो डाक्टर ने बताया कि रमेश नशे का आदी है. डाक्टर ने कहा कि नशामुक्ति केंद्र में डाल कर उस का इलाज कराएं.

बच्चे के रोज की दिनचर्या और उस की बदल रही गतिविधियों पर मातापिता को नजर रखनी चाहिए. बच्चे के रंगढंग में बदलाव दिखने पर सतर्क हो जाना चाहिए. नशा या किसी भी गलत काम करने वाला लड़का दिन या शाम में कोई खास समय पर घर से गायब होने लगता है. वह पढ़ाई करने, दोस्तों से नोट्स लेने, टीचर के पास जाने, दोस्तों द्वारा पार्टी देने आदि का बहाना बना कर रोज घर से निकलने लगेगा.  रोजरोज ऐसे बहाने बना कर बच्चा बाहर जाने की कोशिश करे तो शुरू में ही उसे समझाबुझा कर या हलकी डांटफटकार लगा कर पढ़ाई के लिए बैठने को कहें.  आखिर पढ़ाईलिखाई की उम्र में बच्चे कैसे और क्यों नशे के जाल में फंस जाते हैं? बच्चों के प्रति मातापिता और परिवार का ध्यान न देना इस की सब से बड़ी वजह है. ज्यादातर मातापिता बच्चों को किताब, कपड़े, मोबाइल, कंप्यूटर, रुपया दे कर अपनी जिम्मेदारी का खत्म होना समझ लेते हैं. जबकि उन्हें चाहिए कि रोज बच्चों के साथ बैठ कर पढ़ाई, टीचर, दोस्तों और उन के शौक के बारे में उन से बातें करें.

इस से बच्चा मातापिता और परिवार वालों से घुलामिला रहेगा. कभीकभार अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ मार्केटिंग, फिल्म देखने, डीवीडी लेने, पार्कों में घूमने भी जाएं, ताकि मनोरंजन के लिए उसे गलत रास्ता न अपनाना पड़े.  नशामुक्ति केंद्र में 6 माह तक इलाज करवा कर नशे से तोबा करने वाला रवि बताता है कि ग्रुप प्रैशर यानी दोस्तों के दबाव में उस ने शराब पीनी शुरू की. दोस्त उसे शराब पीने को कहते और वह मना करता तो उस की खिल्ली उड़ाई जाती. दूधपीता बच्चा, नामर्द, बबुआ और न जाने क्याक्या कहा जाता. इस से आजिज हो कर एक दिन शराब पी ली और फिर उस में ऐसा डूबा कि फिर निकलना मुश्किल हो गया.  मातापिता से आसानी से रुपया मिल जाना, कदमकदम पर आसानी से शराब, गुटखा, गांजा व नशे का अन्य सामान मिल जाना, पश्चिमी शैली की नकल, समाज में बढ़ता खुलापन, तनाव, अवसाद आदि वजहों से भी युवा नशे की गिरफ्त में फंसते हैं.

कम आयु में ही बच्चों को नशे की लत लगने से उन का जीवन, कैरियर, शरीर, परिवार और समाज पर काफी बुरा असर होता है. जिस आयु में उन्हें खुद को और परिवार व समाज को बनानेसंवारने का समय होता है, उस में नशाबाजी कर वे सब चौपट कर लेते हैं. सो, मातापिता को बच्चों के प्रति सतर्क होने की जरूरत है.

चेत जाएं मातापिता जब…

बच्चा बेसमय या किसी खास समय पर घर से रोज निकलने लगे.

अलमारी, दराज या आप के पौकेट से रुपए गायब होने लगें.

बच्चों की आंखें लाल और सूजी लगने लगें.

उलटी करें और नींद न आने की बात करें.

घर से कीमती सामान गायब होने लगें.

बाथरूम में ज्यादा समय गुजारें.

बच्चे सुबह देर से जगें.

परिवार के सदस्यों से दूरी बनाने लगें.

चिड़चिड़े और गुस्सैल हो जाएं.

खांसी का दौरा पड़ने लगे.

झूठ बोलने की आदत पड़ जाए.

इस ड्रैस के चलते ट्रोल हुईं ‘पुष्पा’ एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना, ट्रोलर्स ने पूछा ये सवाल

साउथ स्टार अलु अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ से सुर्खियां बटोरने वाली एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) की फैन फौलोइंग काफी बढ़ गई है. वहीं खबरें हैं कि वह साउथ के बाद बौलीवुड इंडस्ट्री में भी कदम रखने वाली हैं, जिसके चलते फैंस काफी एक्साइटेड नजर आए थे. हालांकि अपने डेब्यू से पहले ही एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना अपने फैशन के कारण ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई हैं. आइए आपको बताते हैं खबर…

बैकलेस ड्रेस बनीं वजह

फैशन के मामले में एलीगेंट और स्टाइलिश नजर आने वाली एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने हाल ही में एक इवेंट में सिजलिंग ड्रेस पहनकर एंट्री की थी. जहां फैंस ने उनके इस लुक की तारीफ की तो ट्रोलर्स ने उन्हें ट्रोल कर दिया. दरअसल, इवेंट में एक्ट्रेस बैकलेस रेड गाउन में पहनकर पहुंची. वहीं उन्हें अपने फैंस और मीडिया के साथ फोटो भी खिंचवाई. हालांकि इस दौरान वह ड्रैस में अनकंफर्टेबल नजर आईं, जिसके कारण वह ट्रोलिंग का शिकार हो गईं. इसी के साथ ट्रोलर्स एक्ट्रेस के लुक पर ताना मारते हुए कह रहे हैं कि जब असहज महसूस होता है तो ऐसे कपड़े पहनते क्यों हैं.

सिंपल हैं रश्मिका

फैशन के मामले में ट्रोलर्स के निशाने पर आईं एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना के फैशन की बात करें तो वह साउथ इंडियन से लेकर वेस्टर्न तक, हर लुक में बेहद खूबसूरत लगती हैं. वहीं अपने एक से बढ़कर एक लुक की फोटोज और वीडियोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं.

हाल ही में एक्ट्रेस ने रेड कलर की साडी और वाइट कलर के लहंगे में फोटोज शेयर की थीं, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया था. इसके अलावा एक्ट्रेस रश्मिका साउथ इंडियन लुक में भी बेहद खूबसूरत लगती हैं. वहीं फैंस उनकी सादगी की काफी तारीफ करते रहते हैं. इसके अलावा वह वेस्टर्न लुक में बौलीवुड की हसीनाओं को टक्कर देती नजर आती हैं.

Monsoon Special: किफायती और टेस्टी बेसन के लड्डू

लड्डू बेसन के हों या बूंदी के, सब से ज्यादा खाए और बेचे जाते हैं. इन्हें किसी भी छोटीबड़ी दुकान से खरीदा जा सकता है. मिठाई कारोबार में बेसन के लड्डुओं की बहुत ज्यादा अहमियत है. इन को कहीं ले जाने में किसी तरह से खराब होने की परेशानी नहीं होती है. खुशी के हर मौके पर लड्डुओं का साथ जरूरी होता है. बेसन और बूंदी से बनने वाले लड्डू सब से खास होते हैं. लड्डू बनाने के तौरतरीकों से इस की अलग पहचान बनती है. मोतीचूर का लड्डू छोटीछोटी बेसन की बूंदियों से तैयार किया जाता है. इस का रंग बेसन या बूंदी के लड्डू से अलग होता है. जहां साधारण लड्डू पीले रंग के होते हैं, वहीं मोतीचूर के लड्डू केसरिया रंग के होते हैं. देशी घी से बनने वाले मोतीचूर के लड्डू खाने में अलग स्वाद देते हैं. रिफाइंड और डालडा से बनने वाले लड्डुओं के मुकाबले देशी घी से तैयार लड्डू कीमत में महंगे जरूर होते हैं, पर इन का स्वाद निराला होता है.

कुछ समय पहले शादी में लड़की की विदाई के समय लड्डुओं को बड़ेबड़े टोकरों में भर कर दिया जाता था. इन टोकरों से लड़की वालों की हैसियत का अंदाजा भी लगाया जाता था. बदलते समय में विवाह की इस परंपरा में दूसरी मिठाइयां भी शामिल हो गई हैं, पर लड्डू की जगह अभी कायम है. शगुन के रूप में लड्डुओं को अभी भी खास माना जाता है. कुछ लोग अपनी खुशियों में 51 और 101 किलोग्राम के स्पेशल लड्डू भी बनवाते हैं.

लड्डू बनाने के कारीगर रमेश गुप्ता कहते हैं, ‘लड्डू बनाने के लिए बेसन, घी, चीनी, काजू, बादाम और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है. अगर बूंदी का लड्डू बनाना है, तो बेसन से पहले बूंदी बनाई जाती है, इस के बाद चाशनी में डाल कर उस से लड्डू तैयार किए जाते हैं.’

कैसे बनाते हैं लड्डू

रमेश गुप्ता कहते हैं, ‘बेसन के लड्डू बनाने के लिए 2 कप बेसन के साथ आधा कप घी, 1 कप पिसी चीनी, 5-6 काजूबादाम और इलायची की जरूरत होती है. काजू, बादाम और इलायची को दरादरा पीस लें. बेसन को छान लें. कड़ाही को गरम करें. उस में घी डालें. फिर बेसन और दरदरे पीसे काजू, बादाम व इलायची डाल कर मध्यम आंच पर भूनें. जब बेसन का रंग सुनहरा हो जाए तो उस में चीनी मिला दें. चीनी पिघल कर बेसन में ठीक से मिल जाती है. कड़ाही को आंच से उतार कर बेसन के मिश्रण को ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद थोड़ाथोड़ा मिश्रण हथेली के बीच में ले कर गोलगोल आकार के लड्डू बनाएं.’

बूंदी के लड्डू बनाने के लिए पहले बेसन से बूंदी बनाई जाती है. उस में खाने वाला रंग मिला कर बेसन से अलग रंग के लड्डू भी तैयार किए जा सकते हैं. बूंदी के आकार से ही लड्डू का स्वाद जुड़ा होता है. महीन बूंदी वाले लड्डू को मोतीचूर का लड्डू कहते हैं. तैयार बूंदी को चीनीपानी से तैयार चाशनी में मिलाया जाता है. कुछ ठंडा होने पर लड्डू बना कर तैयार किए जाते हैं. सजावट के लिए मेवों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

बेटा: क्या वक्त रहते समझ पाया सोम

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अब लंदन में संभावनाएं तलाश रहे हैं अक्षय कुमार?

अक्षय कुमार अभिनीत ‘लक्ष्मी’, ‘बच्चन पांडे’ और ‘सम्राट पृथ्वीराज ’ सहित लगभग छह फिल्मों के बाक्स आफिस पर बुरी तरह से असफल हो जाने के बाद उनके कैरियर पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. सूत्रांे पर यकीन किया जाए तो अक्षय कुमार की ‘गोरखा’ सहित पांच फिल्में बंद कर दी गयी हैं. इसलिए अब अक्षय कुमार की सारी उम्मीदंे 11 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली आनंद एल राय निर्देशित फिल्म ‘‘रक्षाबंधन’’ पर टिकी हुई हैं. अक्षय कुमार इस फिल्म के लिए विश्व स्तर पर संभावनाएं तलाश रहे हैं.

अक्षय कुमार इन दिनों लंदन में हैं,जहां वह वासु भगनानी की नई फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं. तो अक्षय कुमार ने फिल्म ‘‘रक्षाबंधन’’ का भी प्रमोशनल इवेंट करने का विचार कर योजना बना डाली. और अब 18 जुलाई को  लंदन के ‘सिनेवल्र्ड फेलथम’ में  शाम छह बजे फिल्म ‘‘रक्षाबंधन’’ का एक खास गाना रिलीज किया जाएगा. इसके पोस्टर लंदन में लग गए हैं. इस अवसर पर अक्षय कुमार,फिल्म की नायिका भूमि पेडणेकर और निर्देशक आनंद एल राय भी मौजूद रहेंगंें.

इस तरह लंदन में फिल्म ‘रक्षाबंधन’ का गाना रिलीज कर लंदन में रह रहे अप्रवासी भारतीयांंें को आकर्षित करना ही माना जा रहा है. वैसे भी लंदन के इस ‘सिनेवल्र्ड’ सिनेमाघर में ज्यादातर भारतीय फिल्में प्रदर्शित होती हैं. सूत्रों का दावा है कि अक्षय कुमार और आनंद एल राय अपनी फिल्म ‘रक्षाबंधन’’ को लंदन सहित विश्व के कई शहरांे में प्रदर्शित करने की योजना पर काम कर रहे हैं. वैसे भी फिल्म ‘‘रक्षाबंधन’’ की सफलता या असफलता का सबसे बड़ा असर अक्षय कुमार पर ही पड़ने वाला है. पहली बात तो इस वक्त उनका कैरियर खतरे में पड़ा हुआ है. पिछले कुछ समय में उनकी कई फिल्में असफल हुई हैं.  और उनके हाथ से कई फिल्में चली गयी हैं. दूसरी बात इस फिल्म के निर्माण से भी अक्षय कुामर जुड़े हुए हैं.

अक्षय कुमार और आनंद एल राय अब तक भारत में फिल्म ‘‘रक्षाबंधन’’ के दो प्रमोशनल इवेंट कर चुके हैं. फिल्म का ट्ेलर दिल्ली में लांच किया गया था. जबकि फिल्म का एक गाना ‘‘तेरे साथ हॅूं मैं’’ मंुबई में लांच किया गया था. मगर अभी तक इस फिल्म को लेकर चर्चाओं का दौर उतना गर्म नही हो पाया है,जितना कि होना चाहिए. शायद लंदन में गाने के लांच इवेंट से फिल्म को कुछ फायदा मिल जाए.

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