परदे पर हीरो, पढ़ाई में जीरो

एक इंटरव्यू में अभिनेत्री जाह्नवी कपूर से जब उन की शिक्षा के बारे में पूछा गया, तो पहले तो उन्होंने गर्व से कहा कि उन्होंने केवल 9वीं कक्षा तक पढ़ाई की है क्योंकि बचपन से उन्हें पढ़ाई पसंद नहीं थी और 5 साल की उम्र से वे अपनी मां और अभिनेत्री श्रीदेवी के साथ उन के शूटिंग सैट पर जाती रहती थी. उन्हें ये सब देखना पसंद था क्योंकि उन्हें भी अभिनेत्री बनना था. फिर अचानक कहती हैं कि क्या अभिनय के लिए शिक्षा जरुरी है? ऐसा मैं नहीं मानती. क्रिएटिविटी के लिए शिक्षा कहीं पर भी आवश्यक नहीं होती. पुराने कलाकर तो अधिकतर कम पढ़ेलिखे या बिलकुल भी शिक्षित नहीं थे. फिर भी सब ने अच्छा काम किया और सफल रहे.

यह सही है कि जाह्नवी जैसी कई आर्टिस्ट शिक्षा को अभिनय में जरूरी महसूस नहीं करते क्योंकि उन्हें पता होता है कि उन्हें अच्छा काम मिलने में कोई संघर्ष नहीं है क्योंकि वे सेलेब्स के बच्चे हैं और उन के पिता ही फिल्म के प्रोड्यूसर हैं. इन से अलग कुछ कलाकार ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर इंडस्ट्री में काम शुरू किया है.

एक इंटरव्यू में अभिनेता विकी कौशल से उन का इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अभिनय में उतरना क्या सही है, पूछने पर उन का कहना है कि पढ़ेलिखे होने पर चरित्र के ग्राफ को सम झने में आसानी होती है क्योंकि अभिनय में भी चरित्र का खाका बनाया जाता है, जिस के अनुसार यह पूरी फिल्म बनती है, साथ ही आज की तकनीक को सम झना भी बहुत जरूरी है.

समाज में शिक्षा और शिक्षितों का महत्त्व बहुत अधिक होता है, फिर चाहे वह बौलीवुड हो या आम इंसान. हर व्यक्ति के जीवन में शिक्षा की मुख्य भूमिका होती है. जैसा कहा जाता है कि शिक्षा के बिना जीवन का कोई महत्त्व नहीं होता क्योंकि इस के द्वारा ही व्यक्ति को सफलता की सीढ़ी चढ़ने से कोई नहीं रोक सकता.

शिक्षा केवल कैरियर के लिए ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के मार्गदर्शन, एक योजनाबद्ध और संवेदनशील के साथ आगे बढ़ने में सहायक होती है. कई बार कुछ कारणों से सेलेब्स की शिक्षा अधूरी रह जाती है, लेकिन इस का खमियाजा उन्हें आगे चल कर भुगतना पड़ता है.

करते हैं खुद को अपडेट

पुराने कई कलाकारों ने एक समय के बाद खुद को अपडेट करने के लिए अंगरेजी सीखी ताकि विदेश में उन्हें किसी प्रकार की समस्या न हो. इस के अलावा यह देखा गया है कि जिन सेलेब्स के बच्चों को आसानी से ऐक्टिंग फील्ड में आने का मौका मिलता है, वे खासकर कम पढ़ाई करते हैं. इस के अलावा उन की एक फिल्म सफल न होने पर भी उन्हें कई बार मौका मिलता है, जिस से वे आगे जा कर अभिनय सीख जाते हैं.

ऐसे में वे ग्लैमर से आकर्षित हो कर इंडस्ट्री में आ जाते हैं और खुद को स्थापित नहीं कर पाते, जबकि आउटसाइडर को बहुत मुश्किल से एक मौका मिलता है और उस में वह अगर सफल नहीं होता है, तो दूसरा औफर मिलना मुश्किल होता है. इसलिए उन का पढ़ालिखा होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि अभिनय में सफल न होने पर उन्हें दूसरे काम करने पड़ते हैं क्योंकि मुंबई जैसे शहर में बिना जौब के रहना कठिन होता है.

आज फिल्म मेकिंग में भी तकनीक का बहुत प्रयोग होता है. ऐसे में शिक्षित कलाकारों को किसी भी निर्देशन को फौलो करने में आसानी होती है. आइए, जानते हैं, वे सेलेब्स जो कालेज नहीं गए,

सोनम कपूर

सोनम कपूर ने 12वीं कक्षा तक पढ़ने के बाद पत्राचार के जरीए ग्रैजुएशन करने के लिए एडमिशन लिया, लेकिन बीच में पढ़ाई छोड़ अपने फिल्मी सफर की शुरुआत कर ली. एक इंटरव्यू में सोनम ने कहा, ‘‘मैं ने 12वीं कक्षा की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और अभिनेत्री बन गई क्योंकि मैं 4 साल तक इंतजार नहीं कर सकती थी, लेकिन आज शिक्षा का महत्त्व सम झती हूं. मेरे पिता अनिल कपूर ने मु झे कई बार पढ़ाई पूरी करने के लिए कहा, पर मेरा मन पढ़ाई से ऊब चुका था. आज के दौर मैं सभी का शिक्षित होना आवश्यक है.’’

काजोल

काजोल ने बौलीवुड में एक से बढ़ कर एक फिल्मों में काम किया है और आज भी वे बौलीवुड में पूरी तरह से सक्रिय हैं. काजोल ने 17 साल की उम्र में बौलीवुड में कदम रख लिया था जिस के चलते उन्होंने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी. एक इवेंट में काजोल ने कहा, ‘‘मैं ने कभी दिल लगा कर पढ़ाई नहीं की है. स्कूल की शिक्षा समाप्त कर मैं ने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन आज मैं शिक्षा के महत्त्व को जानती हूं. मु झे दुख इस बात का है कि मैं ने एक बहुत बड़ी गलती की है. आज मैं अपने बच्चों को पूरी शिक्षा देने की कोशिश कर रही हूं.’’

कंगना रनौत

अपने बयानों की वजह से अकसर सुर्खियों में रहने वाली कंगना 12वीं कक्षा में ही फेल हो गई थीं. इस हिसाब से वे 10वीं कक्षा पास ही हैं. वे कहती हैं, ‘‘मैं असल पढ़ाई तो नहीं कर पाई, पर इंडस्ट्री ने मु झे अच्छी तरह से पाठ पढ़ा दिया है. मैं जानती हूं कि बड़े शहरों में रहने वाली लड़कियों को अपनी शिक्षा पूरी करने का मौका मिलता है क्योंकि वे कौन्फिडैंट और चेतनाशील होती हैं, लेकिन छोटे शहरों में लोग लड़कियों के अधिक पढ़ने पर जोर नहीं देते, उन की इच्छा को दबा दिया जाता है और उन की शादी कर दी जाती है. महिलाओं को उन की आजादी के साथ रहने देना जरूरी है और उन से किसी भी प्रकार की आशा रखना ठीक नहीं जैसाकि शादी के बाद परिवार वाले करते हैं.’’

आलिया भट्ट

अपने हुस्न और अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीतने वाली एक्ट्रैस आलिया भट्ट भी केवल 12वीं कक्षा पास हैं. वे कहती हैं, ‘‘शिक्षा को ले कर मु झे किसी प्रकार का रिग्रैट नहीं है. मैं आगे पढ़ाई के लिए कभी कालेज जाना नहीं चाहती थी और न ही आगे पढ़ाई को फिर से जारी रखना चाहूंगी क्योंकि मैं 100% कैरियर इस क्षेत्र में ही बनाऊंगी.

अर्जुन कपूर

अभिनेता अर्जुन कपूर की पढ़ाई में कभी दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने मुंबई के एक स्कूल में 11वीं कक्षा तक पढ़ाई की है, पढ़ाई छोड़ने की वजह 11वीं कक्षा की परीक्षा क्लियर न कर पाना था, जिस के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. एक संस्था के उद्घाटन पर उन्होंने बताया, ‘‘शिक्षा सभी के लिए बहुत जरूरी है, जितना एक बच्चा पढ़ेगा उतना ही वह बच्चा भविष्य में देश के लिए अच्छा काम करेगा. एक ऐक्टर के तौर पर मैं अनुभव करता हूं कि मेरी शिक्षा, मेरा लालनपालन और मेरी लाइफ उस का ही अस्तित्व है, जिसे मैं शिक्षा के द्वारा अच्छा बना सकता था.’’

करिश्मा कपूर

90 के दशक की पौपुलर अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने टीनऐज में फिल्मों में कदम रखा था. ऐसा उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के खराब हो जाने पर किया था. उन्होंने पढाई छोड़ कैरियर पर अधिक बल दिया ताकि परिवार को आर्थिक रूप से कुछ सहायता मिले. करिश्मा कहती हैं, ‘‘मैं अपने कैरियर को ले कर आश्वस्त नहीं थी, लेकिन धीरेधीरे सब सही हुआ. मेरी मां ने हमेशा हम दोनों बहनों को ग्लैमर से दूर आम बच्चों की तरह पाला है. शिक्षा का महत्त्व हमेशा रहता है, जिसे मैं आज फील करती हूं.’’

टाइगर श्रौफ

जैकी श्रौफ के बेटे टाइगर ने भी 12वीं के बोर्ड एग्जाम के बाद पढ़ाई छोड़ दी और मार्शल आर्ट सीखने विदेश चले गए. वे कहते हैं, ‘‘मेरा आगे पढ़ने का मन नहीं था. अगर पहली फिल्म ‘हीरोपंती’ सफल नहीं होती, तो मु झे आगे पढ़ाई के लिए सोचना पड़ता. यह सही है कि आज शिक्षित होना सभी के लिए आवश्यक है.

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कर्तव्य पालन- भाग 3: क्या रामेंद्र को हुआ गलती का एहसास

श्वेता उन्हें राजेश व त्रिशाला से अधिक समझदार मालूम पड़ने लगी. काम पर आते वक्त अधिकतर महिला श्रमिक अपने साथ बच्चों को ले आती थीं जो इधरउधर घूम कर गंदगी फैलाते व लोगों की डांट खाते रहते थे. इस बाबत श्वेता ने सुझाव दिया, ‘‘क्यों न फैक्टरी के पीछे की खाली पड़ी जमीन पर एक टिनशेड डाल कर इन बच्चों के रहने, सोने, खेलने एवं थोड़ाबहुत पढ़नेलिखने की व्यवस्था कर दी जाए?’’ सुझाव सभी को पसंद आया. तत्काल टिनशेड की व्यवस्था कर दी गई. साथ ही, बच्चों की देखरेख के लिए एक आया व अक्षरज्ञान के लिए एक सेवानिवृत्त वृद्ध अध्यापिका की व्यवस्था कर दी गई. अपने बच्चों को प्रसन्न व साफसुथरा देख कर महिला श्रमिक दोगुने उत्साह से काम करने लगीं व सभी के मन में श्वेता के प्रति सम्मान के भाव उत्पन्न हो गए.

रामेंद्र ने श्वेता के कार्य से संतुष्ट हो कर उस का वेतन बढ़ा दिया, पर हृदय से वे उस को नापसंद ही करते रहे. उन के मन से यह कभी नहीं निकल पाया कि वह एक अवैध संतान है, जिस के पिता का कोई अतापता नहीं है. उन के मन में उस की मां के प्रति भी नफरत के भाव पनपते रहते, जिस ने अपने कुंआरे दामन पर कलंक लगा कर श्वेता को जन्म दिया था. श्वेता ने कई बार उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया पर रामेंद्र ने उन लोगों के प्रति पनपी वितृष्णा के कारण वहां जाना स्वीकार नहीं किया. वे श्वेता के मुंह से यह भी सुन चुके थे कि उस का सौतेला शराबी बाप उस की मां को मारतापीटता है, पर फिर भी उन्होंने उस के घर जाना उचित नहीं समझा.

ऐसे निम्नश्रेणी के लोगों के पचड़े में पड़ना उन्हें कतई स्वीकार नहीं था. एक दिन अलका व त्रिशाला घूमने के उद्देश्य से फैक्टरी में आईं तो श्वेता को घर आने का निमंत्रण दे गईं. छुट्टी के दिन कुछ संकोच के साथ श्वेता घर आई व औपचारिक बातचीत के पश्चात तुरंत जाने को उद्यत हुई मगर त्रिशाला ने जिद कर के उसे रोक लिया व उस के सामने मेज पर चाय के प्याले व भांतिभांति का नाश्ता लगा दिया. रामेंद्र मन मसोस कर देखते रहे कि घर के लोग किस प्रकार विशिष्ट अतिथि की भांति श्वेता को खिलापिला रहे हैं.

फिर तीनों लौन में जा कर बैडमिंटन खेलने लगे. श्वेता के लंबेलंबे हाथों में तैरता रैकेट हवा में उड़ता नजर आ रहा था. वह कभी राजेश के साथ तो कभी त्रिशाला के साथ देर तक खेलती रही. फिर राजेश रात हो जाने के कारण श्वेता को छोड़ने उस के साथ चला गया. उस के जाते ही रामेंद्र पत्नी पर बरस पड़े, ‘‘फैक्टरी की साधारण सी नौकर को घर में बुला कर आवश्यकता से अधिक मानसम्मान करना क्या उचित है?’’

‘‘वह त्रिशाला के साथ पढ़ी हुई, उस की सहेली भी तो है.’’

‘‘इस वक्त वह हमारी नौकर है. उस के साथ नौकरों जैसा ही व्यवहार करना चाहिए.’’

‘‘ठीक है, मैं त्रिशाला को समझा दूंगी.’’

‘‘इसी वक्त समझाओ. बुलाओ उसे,’’ रामेंद्र क्रोध से सुलग रहे थे.

अलका ने कमरे में आराम कर रही त्रिशाला को आवाज दे कर बुलाया. जब वह कमरे में आई तो रामेंद्र अलका के कहने से पूर्व ही उसे डांटने लगे कि उस ने श्वेता से फालतू की मित्रता क्यों कर रखी है. आइंदा कभी उस से बात करने की आवश्यकता नहीं है.

त्रिशाला ने सहम कर कहा, ‘‘ठीक है, मैं आगे से श्वेता से दूर रहूंगी.’’ राजेश वापस लौटा तो रामेंद्र ने उसे भी डांटा कि वह श्वेता को कार से छोड़ने क्यों गया? उस के लिए किराए का आटोरिकशा क्यों नहीं कर दिया.

जब सिर उठा कर राजेश ने अपनी गलती की माफी मांगी तभी रामेंद्र संतुष्ट हो पाए. पर शयनकक्ष में अलका ने उन्हें आड़े हाथों लिया, ‘‘यह तुम्हारे अंदर ऊंचनीच का भेदभाव कब से पनप उठा? तुम्हारी फैक्टरी की गाडि़यां भी तो श्रमिकों को लाने, ले जाने का काम करती हैं. कई बार तुम ने गाडि़यों से महिला श्रमिकों को उन के घर व अस्पताल पहुंचाया है.’’ कोई उत्तर न दे कर रामेंद्र विचारों के भंवरजाल में डूबतेउतराते रहे कि अलका कहां समझ पाएगी कि श्वेता में व अन्य महिला श्रमिकों में जमीनआसमान का अंतर है. श्वेता खूबसूरत है, उच्च शिक्षित है. उस में राजेश जैसे लड़कों को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता है. राजेश फैक्टरी में आने लगा, यह देख कर रामेंद्र संतुष्ट हुए कि वह काम में रुचि लेने लगा है. पर जब उन्होंने उसे चोरीछिपे श्वेता से बातें करते देखा तो उन का माथा ठनक गया. उन्हें दाल में काला नजर आया. वे शुरू से अब तक की कडि़यां जोड़ने लगे तो उन्हें ये सब राजेश की गहरी चाल नजर आई.

उन्हें लगा, वह फैक्टरी में श्वेता के कारण ही आता है. जरूर दोनों में गहरा प्यार है, जिसे दोनों अभी प्रकट नहीं करना चाहते. वक्त आने पर अवश्य प्रकट करेंगे. कहीं दोनों छिप कर ‘कोर्ट मैरिज’ न कर लें. कहीं ऐसा तो नहीं, श्वेता ही राजेश को अपने रूपजाल में फंसा रही हो. कोठी, कार, दौलत का लालच कम तो नहीं होता. मन का संदेह उन्होंने अलका के सामने प्रकट किया तो वह बिगड़ उठी, ‘‘अपनी युवावस्था में तुम जैसे रहे हो, बेटे को भी वैसा ही समझते हो. पता नहीं क्यों तुम्हारे मन में इकलौते बेटे के प्रति बुराइयां पनपती रहती हैं? तुम उसे गलत समझते हो, जबकि वह श्वेता को बहन के अतिरिक्त और कुछ नहीं समझता. तुम ऐसा करो कि श्वेता को नौकरी से ही निकाल दो. न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी,’’ कह कर वह मुंह फेर कर सो गई.

अलका के व्यवहार से रामेंद्र के मन को भारी ठेस लगी. यदि उन्होंने इरा से प्यार कर के गलती की तो क्या बेटे को भी वही गलती करने की छूट दे दें? मन रोंआसा हो कर फिर से इरा के इर्दगिर्द जा पहुंचा. वे फिर विचारों में खो गए कि पता नहीं कहां होगी इरा. उस की कोख में पलने वाले उन के खून का क्या हुआ. क्या मालूम जीवित भी है या नहीं. यदि राजेश फैक्टरी की जिम्मेदारी संभाल ले तो वे एक बार फिर से उस की खोज करने जाएंगे. अपने बच्चे का पता करेंगे. हो सका तो उसे अपनाने का प्रयास भी करेंगे ताकि इरा के मन से उन के प्रति वर्षों का जमा मैल निकल जाए. उस के सारे दुख, लांछन, सुख में बदल जाएं. वे उस वक्त अपने मातापिता व समाज से डरने वाले कायर युवक थे, पर अब एक जिम्मेदार पुरुष हैं. लाखों के मालिक हैं. इरा को अलग से एक मकान में रख कर उस का संपूर्ण खर्चा उठा सकते हैं अपने पुराने विचारों से निकल कर वे सोचने लगे कि राजेश अब विवाहयोग्य हो चुका है, उस का विवाह कर देना ही उचित रहेगा. पत्नी आ कर उस पर अंकुश रखेगी तो वह सही रास्ते पर आ जाएगा.

उधर, वे इस वक्त श्वेता को भी निकालने के लिए तैयार नहीं थे. कारण कि उस ने जिस खूबी से काम संभाला था वह हर किसी के वश का नहीं था. वे सोचने लगे कि हो सकता है राजेश व श्वेता के प्रति मैं भारी गलतफहमी का शिकार होऊं, अलका सही कह रही हो. अगले दिन उन्होंने अवसर पाते ही श्वेता के मन को टटोलना शुरू कर दिया, ‘‘तुम शादी क्यों नहीं कर लेतीं? तुम्हारी आयु की लड़कियां कभी का घर बसा चुकी हैं.’’ श्वेता के चेहरे पर भांतिभांति के भाव तैर उठे. वह आवेश से भर कर बोली, ‘‘अपनी मां की दुर्दशा देख कर भी क्या मैं विवाह के बारे में सोच सकती हूं? आप मर्द हैं, नारी मन को क्या समझ पाएंगे.

Pandya Store: धरा की सासूमां के साथ हुई छेड़छाड़, एक्ट्रेस ने शेयर किया वीडियो

महिलाओं के लिए छेड़छाड़ होना आम बात हो गई है. वहीं स्टार्स भी इनसे अछूते नहीं रह गए हैं. हाल ही में ‘पंड्या स्टोर’ (Pandya Store) सीरियल में धरा की सासूमा के रोल में नजर आ रहीं एक्ट्रेस कृतिका देसाई खान (Kruttika Desai) भी छेड़छाड़ का शिकार हुई हैं, जिसका वीडियो उन्होंने फैंस के साथ शेयर किया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

एक्ट्रेस के साथ हुई छेड़छाड़

 

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धरा की सास यानी कृतिका देसाई खान (Kruttika Desai) ने अपने सोशलमीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, मुझे यकीन नहीं हो रहा है. मैं शूटिंग खत्म करके अपने घर जा रही थी. तभी बाइक सवार तीन लोगों ने मुझे रास्ते में रोक लिया और मेरे ड्राइवर को रुकने के लिए कहा. इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि वो मेरी कार में ड्रग्स को सर्च करेंगे. इसीलिए मैंने उनसे आई मांगी और उन्होंने मुझे अपनी नकली आईडी दिखाई. उन लोगों ने मेरे साथ बादतमीजी करनी शुरू कर दी. मैंने उनसे लेडी कॉन्सटेबल को लाने के लिए कहा. जब इन लोगों ने मेरी नहीं सुनी तो मैंने इनकी वीडियो बना ली. ये घटना फिल्मसिटी के पास हुई थी. ये लोग मुझसे रुपए लूटना चाहते थे. जब मैंने हंगामा मचाना शुरू किया तो ये लोग भाग गए. मैं कल इन लोगों की शिकायत पुलिस थाने में करने वाली हूं. मैं आप सबसे कहना चाहती हूं कि इस तरह के फ्रॉड लोगों से सावधान रहें. ये लोग मुंबई की और जगहों पर भी लोगों को लूटने की कोशिश करेंगे.

वीडियो में नजर आए लोग

 

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एक्ट्रेस की शेयर की गई वीडियो में लीन लोग नजर आ रहे हैं, जो उनसे बहस कर रहे हैं. फैंस और स्टार्स ये वीडियो देखकर हैरान हो गए हैं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. बता दें, एक्ट्रेस कृतिका देसाई खान 54 साल की हैं और कई हिट सीरियल्स का हिस्सा रह चुकी हैं. वहीं सीरियल पांड्या स्टोर में भी उनकी एक्टिंग को काफी पसंद किया जाता है.

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Anupama के परिवार की बेइज्जती करेगी ‘अनुज की भाभी’, देखें वीडियो

सीरियल अनुपमा (Anupama) में अनुज (Gaurav Khanna) की फैमिली की एंट्री हो चुकी है, जिसके चलते सीरियल में कई नए ट्विस्ट आ रहे हैं. जहां धीरे धीरे अनुज की भाभी बरखा प्रौपर्टी अपने नाम करवाने का प्लान कर रही है तो वहीं अनुज को अनुपमा के खिलाफ भड़काने की भी कोशिश करती नजर आ रही है. इसी बीच अनुज की भाभी बरखा कुछ ऐसा काम करने वाली है, जिसके कारण अनुपमा को गुस्सा आने वाला है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शाह परिवार के बेइज्जती करेगी बरखा

 

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इसके अलावा आप देखेंगे कि मीडिया वाले अनुज को अपना नया घर दिखाने के लिए कहेंगे, जिसके चलते बरखा एक्साइटेड होकर हां कह देगी. हालांकि अनुज उसे रोककर परिवार के आने का इंतजार करने के लिए कहता है. लेकिन बरखा पता नहीं वे कब आएंगे कहकर रिपोर्टर्स को घर के अंदर ले जाएगी. वहीं सिक्योरिटी गार्ड शाह फैमिली को घर में घुसने से रोकंगे, जिसके बाद बरखा उनका अपमान करती दिखेगी. हालांकि अनुपमा आकर गुस्से में कहेगी कि ये उसके बापूजी हैं, जिसे सुनकर बरखा चौंक जाएगी.

बिजनेस छीनने का प्लान बनाएगी बरखा

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज शाह हाउस पहुंचेगा और नए घर में गृहप्रवेश के लिए परिवार को न्योता देगा. दूसरी तरफ बरखा, अंकुश से कहेगी कि वह अनुज के घर के साथ-साथ कपाड़िया बिजनेस में भी एंट्री करेंगे. वहीं अनुपमा, अनुज से शाह हाउस में अकेलापन महसूस करने की बात कहेगी. हालांकि अनुज उसे समझाएगा और एक प्यार सा तोहफा देगा.

अनुज से नाराज हुई बरखा

अब तक आपने देखा कि बरखा, अनुज से साइनिंग अथॉरिटी किसी और को भी देनी चाहिए. हालांकि अनुज इस बात से इंकार कर देता है, जिसके चलते बरखा गुस्से में नजर आती है. वहीं अनुज का भाई अंकुश उसे जल्दबाजी करने के लिए डांटता है. दूसरी तरफ अनुपमा शाह परिवार के साथ वक्त बिताती हुई नजर आती है.

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ममता: भाग 3- कैसी थी माधुरी की सास

‘क्या एक लड़की और लड़के में सिर्फ मित्रता नहीं हो सकती. यह शादीविवाह की बात बीच में कहां से आ गई?’ पल्लव ने तीखे स्वर में कहा था.‘मैं मान ही नहीं सकता. नर और मादा में बिना आकर्षण के मित्रता संभव ही नहीं है. भला प्रकृति के नियमों को तुम दोनों कैसे झुठला सकते हो? वह भी इस उम्र में,’ शांतनु ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा.शांतनु तो कह कर चला गया, किंतु नदी की शांत लहरों में पत्थर फेंक गया था. पिछली बातों पर ध्यान गया तो लगा कि शांतनु की बातों में दम है, जिस बात को वे दोनों नहीं समझ सके या समझ कर भी अनजान बने रहे, उस आकर्षण को उस की पारखी निगाहों ने भांप लिया था. गंभीरतापूर्वक सोचविचार कर आखिरकार माधुरी ने ही उचित अवसर पर एक दिन पल्लव से कहा, ‘यदि हम अपनी इस मित्रता को रिश्ते में नहीं बदल सकते तो इसे तोड़ देना ही उचित होगा, क्योंकि आज शांतनु ने संदेह किया है,

कल दूसरा करेगा तथा परसों तीसरा. हम किसकिस का मुंह बंद कर पाएंगे. आज हम खुद को कितना ही आधुनिक क्यों न कह लें किंतु कहीं न कहीं हम अपनी परंपराओं से बंधे हैं और ये परंपराएं एक सीमा तक ही उन्मुक्त आचरण की इजाजत देती हैं.’ पल्लव को भी लगा कि जिस को वह अभी तक मात्र मित्रता समझता रहा वह वास्तव में प्यार का ही एक रूप है, अत: उस ने अपने मातापिता को इस विवाह के लिए तैयार कर लिया. पल्लव के पिताजी बहुत बड़े व्यवसायी थे. वे खुले विचारों के थे इसलिए अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक उच्च मध्यवर्गीय परिवार में करने को तैयार हो गए. मम्मीजी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि जातिपांति पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि उन्हें लड़की पसंद आई तभी वे इस विवाह की इजाजत देंगी.माधुरी के मातापिता अतिव्यस्त अवश्य थे किंतु अपने संस्कारों तथा रीतिरिवाजों को नहीं छोड़ पाए थे इसलिए विजातीय पल्लव से विवाह की बात सुन कर पहले तो काफी क्रोधित हुए थे और विरोध भी किया था, लेकिन बेटी की दृढ़ता तथा निष्ठा देख कर आखिरकार तैयार हो गए थे तथा उस परिवार से मिलने की इच्छा जाहिर की थी.

दोनों परिवारों की इच्छा एवं सुविधानुसार होटल में मुलाकात का समय निर्धारित किया गया था. बातों का सूत्र भी मम्मीजी ने ही संभाल रखा था. पंकज और पल्लव तो मूकदर्शक ही थे. उन का जो भी निर्णय होता उसी पर उन्हें स्वीकृति की मुहर लगानी थी. यह बात जान कर माधुरी अत्यंत तनाव में थी तथा पल्लव भी मांजी की स्वीकृति का बेसब्री से इंतजार कर रहा था.बातोंबातों में मां ने झिझक कर कहा था, ‘बहनजी, माधुरी को हम ने लाड़प्यार से पाला है, इस की प्रत्येक इच्छा को पूरा करने का प्रयास किया है. इस के पापा ने तो इसे कभी रसोई में घुसने ही नहीं दिया.’‘रसोई में तो मैं भी कभी नहीं गई तो यह क्या जाएगी,’ बात को बीच में ही काट कर गर्वभरे स्वर के साथ मम्मीजी ने कहा. मम्मीजी के इस वाक्य ने अनिश्चितता के बादल हटा दिए थे तथा पल्लव और माधुरी को उस पल एकाएक ऐसा महसूस हुआ कि मानो सारा आकाश उन की मुट्ठियों में समा गया हो. उन के स्वप्न साकार होने को मचलने लगे थे तथा शीघ्र ही शहनाई की धुन ने 2 शरीरों को एक कर दिया था.पल्लव के परिवार तथा माधुरी के परिवार के रहनसहन में जमीनआसमान का अंतर था. समानता थी तो सिर्फ इस बात में कि मम्मीजी भी मां की तरह घर को नौकरों के हाथ में छोड़ कर समाजसेवा में व्यस्त रहती थीं.

अंतर इतना था कि वहां एक नौकर था तथा यहां 4, मां नौकरी करती थीं तो ससुराल में सास समाजसेवा से जुड़ी थीं.मम्मीजी नारी मुक्ति आंदोलन जैसी अनेक संस्थाओं से जुड़ी हुई थीं, जहां गरीब और सताई गई स्त्रियों को न्याय और संरक्षण दिया जाता था. उन्होंने शुरू में उसे भी अपने साथ चलने के लिए कहा और उन का मन रखने के लिए वह गई भी, किंतु उसे यह सब कभी अच्छा नहीं लगा था. उस का विश्वास था कि नारी मुक्ति आंदोलन के नाम पर गरीब महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है. एक महिला जिस पर अपने घरपरिवार का दायित्व रहता है, वह अपने घरपरिवार को छोड़ कर दूसरे के घरपरिवार के बारे में चिंतित रहे, यह कहां तक उचित है? कभीकभी तो ऐसी संस्थाएं अपने नाम और शोहरत के लिए भोलीभाली युवतियों को भड़का कर स्थिति को और भी भयावह बना देती हैं. उसे आज भी याद है कि उस की सहेली नीता का विवाह दिनेश के साथ हुआ था. एक दिन दिनेश अपने मित्रों के कहने पर शराब पी कर आया था तथा नीता के टोकने पर नशे में उस ने नीता को चांटा मार दिया. यद्यपि दूसरे दिन दिनेश ने माफी मांग ली थी तथा फिर से ऐसा न करने का वादा तक कर लिया था, किंतु नीता, जो महिला मुक्ति संस्था की सदस्य थी, ने इस बात को ऐसे पेश किया कि उस की ससुराल की इज्जत तो गई ही,

साथ ही तलाक की स्थिति भी आ गई और आज उस का फल उन के मासूम बच्चे भोग रहे हैं.ऐसा नहीं है कि ये संस्थाएं भलाई का कोई काम ही नहीं करतीं, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि किसी भी प्रतिष्ठान की अच्छाइयां छिप जाती हैं जबकि बुराइयां न चाहते हुए भी उभर कर सामने आ जाती हैं.वास्तव में स्त्रीपुरुष का संबंध अटूट विश्वास, प्यार और सहयोग पर आधारित होता है. जीवन एक समझौता है. जब 2 अजनबी सामाजिक दायित्वों के निर्वाह हेतु विवाह के बंधन में बंधते हैं तो उन्हें एकदूसरे की अच्छाइयों के साथसाथ बुराइयों को भी आत्मसात करने का प्रयत्न करना चाहिए. प्रेम और सद्भाव से उस की कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए, न कि लड़झगड़ कर अलग हो जाना चाहिए.मम्मीजी की आएदिन समाचारपत्रों में फोटो छपती. कभी वह किसी समारोह का उद्घाटन कर रही होतीं तो कभी विधवा विवाह पर अपने विचार प्रकट कर रही होतीं, कभी वह अनाथाश्रम जा कर अनाथों को कपड़े बांट रही होतीं तो कभी किसी गरीब को अपने हाथों से खाना खिलाती दिखतीं.

वह अत्यंत व्यस्त रहती थीं. वास्तव में वह एक सामाजिक शख्सियत बन चुकी थीं, उन का जीवन घरपरिवार तक सीमित न रह कर दूरदराज तक फैल गया था. वह खुद ऊंची, बहुत ऊंची उठ चुकी थीं, लेकिन घर उपेक्षित रह गया था, जिस का खमियाजा परिवार वालों को भुगतना पड़ा था. घर में कीमती चीजें मौजूद थीं किंतु उन का उपयोग नहीं हो पाता था.मम्मीजी ने समय गुजारने के लिए उसे किसी क्लब की सदस्यता लेने के लिए कहा था किंतु उस ने अनिच्छा जाहिर कर दी थी. उस के अनुसार घर की 24 घंटे की नौकरी किसी काम से कम तो नहीं है. जहां तक समय गुजारने की बात है उस के लिए घर में ही बहुत से साधन मौजूद थे. उसे पढ़नेलिखने का शौक था, उस के कुछ लेख पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हो चुके थे. वह घर में रहते हुए अपनी इन रुचियों को पूरा करना चाहती थी.यह बात अलग है कि घर के कामों में लगी रहने वाली महिलाओं को शायद वह इज्जत और शोहरत नहीं मिल पाती है जो बाहर काम करने वाली को मिलती है. घरेलू औरतों को हीनता की नजर से देखा जाता है लेकिन माधुरी ने स्वेच्छा से घर के कामों से अपने को जोड़ लिया था. घर के लोग, यहां तक कि पल्लव ने भी यह कह कर विरोध किया था कि नौकरों के रहते क्या उस का काम करना उचित लगेगा. तब उस ने कहा था कि ‘अपने घर का काम अपने हाथ से करने में क्या बुराई है, वह कोई निम्न स्तर का काम तो कर नहीं रही है. वह तो घर के लोगों को अपने हाथ का बना खाना खिलाना चाहती है. घर की सजावट में अपनी इच्छानुसार बदलाव लाना चाहती है और इस में भी वह नौकरों की सहायता लेगी, उन्हें गाइड करेगी.

पोर्टेबल टौयलेट: शर्म नहीं शान से चलिए

अकसर महिलाएं हैल्थ और हाइजीन में लापरवाही कर जाती हैं. ऊपरी साफसफाई के बावजूद उन के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है और इस की वजह है पब्लिक टौयलेट का इस्तेमाल जो आमतौर पर गंदे यानी अनहाइजीनिक होते हैं.

पब्लिक टौयलेट का साफ न होना बीमारियों का सब से बड़ा कारण है. अकसर जब औरतें और लड़कियों घर से बाहर जाती हैं तो पब्लिक टौयलेट का इस्तेमाल करना मजबूरी हो जाती है. पब्लिक टौयलेट सीट पर कईर् तरह के कीटाणु मौजूद रहते हैं, जिस से महिलाओं को वैजाइनल इन्फैक्शन और कई अन्य तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है.

पब्लिक टौयलेट में गंदगी के कारण महिलाएं पानी का सेवन भी कम से कम करती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए कतई सही नहीं होता है. घंटों यूरिन को रोकने और पानी का कम सेवन करने से किडनी पर नकारात्मक असर पड़ता है.

पब्लिक टौयलेट के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए महिलाएं अब पोर्टेबल टौयलेट का इस्तेमाल कर सकती हैं. महिलाओं की परेशानी को देखते हुए बाजार में पोर्टेबल टौयलेट की जरूरत महसूस की गई.

जानिए क्या हैं पोर्टेबल टौयलेट

आज अधिकतर पब्लिक टौयलेट में वैस्टर्न टौयलेट का इस्तेमाल ज्यादा किया जा रहा है. एक दिन में पब्लिक टौयलेट का कोईर् तरह के लोग इस्तेमाल करते हैं, जिन में से कईर् रोगी भी होते हैं. ऐसे में पब्लिक टौयलेट से हाइजीन की उम्मीद करना बेकार है. पोर्टेबल टौयलेट एक ऐसा प्रौडक्ट है जिस का इस्तेमाल महिलाएं स्कूल, कालेज अस्पतालों, हवाईजहाज और टे्रेन में टौयलेट में कर सकती हैं. इस को इस्तेमाल करना बहुत आसान है.

पोर्टेबल टौयलेट का इस्तेमाल करते वक्त टौयलेट सीट पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती. इस का इस्तेमाल महिलाएं खड़े हो कर भी आरामपूर्वक सकती हैं. यह प्रैगनैंट महिलाओं के लिए भी बेहद मददगार प्रौडक्ट है. प्रेग्नेंट महिलाओं को ज्यादा  झुकने के लिए मना किया जाता है. ऐसे में पोर्टेबल टौयलेट उन्हें ज्यादा  झुकने के लिए साथसाथ इन्फैक्शन से भी बचाता है.

हर किसी के लिए सहज

बुजुर्ग महिलाएं भी इस का इस्तेमाल आसानी से कर सकती हैं. दरअसल, अधिकतर बुजुर्ग महिलाएं घुटनों के दर्द से पीडि़त होती हैं. ऐसे में जब वे बाहर जाती हैं तो पोर्टेबल टौयलेट का इस्तेमाल कर सकती हैं. इस से उन्हें पब्लिक टौयलेट इस्तेमाल करने में आसानी होगी और वे बीमारियों से भी दूर रहेंगी.

मार्केट में कई तरह के पोर्टेबल टौयलेट मौजूद हैं. उन में पेशाब की जगह एक प्लास्टिक का फनल सा इक्विमैंट लगाया जाता है, जो खड़े हो कर पेशाब करने की सुविधा देता है. इस में एक पी बड़ी भी होती है. उस की मदद से महिलाएं पब्लिक टौयलेट को आसानी से इस्तेमाल कर सकती हैं. यह एक बेहतरीन फीमेल यूरिनेशन किट के रूप में मिलता है. इस किट की खास बात यह है कि इस में इंटिमेट वाइप्स भी है जो पूरी तरह से नौनअल्कोहलिक है.

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डिलीवरी के बाद क्या कौपर टी लगवाना सही है?

सवाल-

मैं 28 वर्ष की हूं. पिछले साल मेरी नौर्मल डिलिवरी हुई थी और डाक्टर ने मुझे कौपर टी लगवाने की सलाह दी थी. लेकिन उस के बाद मुझे बहुत ज्यादा पीरियड्स हो रहे हैं. क्या यह चिंता की बात है?

जवाब-

कौपर टी या कौपर आईयूडी एक गर्भनिरोधक उपकरण है जिसे गर्भाशय में डाला जाता है और इस में हारमोंस नहीं होते हैं. इसलिए इस में हारमोनल बर्थ कंट्रोल विधियों के कारण कभीकभी होने वाले जोखिम या साइड इफैक्ट्स नहीं होते हैं. लेकिन कौपर आईयूडी के कारण खून ज्यादा निकलता है और आप को माहवारी यानी पीरियड्स के दौरान विशेषकर पहले 3 से 6 महीनों के दौरान मरोड़ महसूस होता है. अन्य लक्षणों में पीरियड्स के बीच समय का अंतर होना, पीरियड्स का अनियमित होना या फिर काफी लंबे समय तक पीरियड्स रहने या भारी रक्तस्राव होना और पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ऐंठन होना शामिल हैं. लेकिन इन में से कई लक्षण समय के साथ कम होते जाते हैं. यह सब से बेहतरीन गर्भनिरोधक उपायों में से एक है और आप को दुर्घटनावश होने वाले गर्भधारण के जोखिम से सुरक्षित रखता है. इसलिए आप को थोड़ा इंतजार करना चाहिए. हां ज्यादा लंबे समय तक बहुत अधिक माहवारी की समस्या रहती है तो स्त्री रोग विशेषज्ञा के पास जाएं और इस के उपचार एवं गर्भनिरोध के दूसरे विकल्पों पर चर्चा करें.

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किसी भी युवती के लिए पहले सैक्स के दौरान उस की वर्जिनिटी सब से ज्यादा माने रखती है. युवती की योनि के ऊपरी हिस्से में पतली झिल्ली होती है जो उस के वर्जिन होने का प्रमाण देती है, लेकिन किसी भी युवती की योनि और उस के ऊपरी सिरे में स्थित हाइमन झिल्ली को देख कर यह पता लगाना कि वह वर्जिन है कि नहीं न तो संभव है न ही ठीक. सैक्स के दौरान अकसर पार्टनर द्वारा युवती की योनि से रक्तस्राव की उम्मीद की जाती है लेकिन ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि पहली बार सैक्स के दौरान युवती के वर्जिन होने के बावजूद उस की योनि से रक्तस्राव नहीं होता, फिर भी साथी  द्वारा यह मान लिया जाता है कि युवती पहले भी सैक्स कर चुकी है, जबकि पहली बार सैक्स के दौरान युवती की योनि से स्राव होने या न होने को उस के वर्जिन होने का सुबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि पहली बार में बहुत सी युवतियों को इसलिए रक्तस्राव नहीं होता, क्योंकि खेलकूद, साइकिल चलाना आदि की वजह से उन की योनि में स्थित झिल्ली कब फट जाती है उन्हें स्वयं नहीं पता चलता. इस का कारण हाइमन झिल्ली का बहुत पतला व लचीला होना है. कभीकभी युवती में जन्म के समय से ही यह झिल्ली मौजूद नहीं होती. ऐसे में पहले सैक्स के दौरान योनि से रक्तस्राव न होने के आधार पर युवती के चरित्र पर संदेह करना गलत होता है.

पहली बार सैक्स के दौरान युवक अपने साथी से उस के कुंआरी होने का सुबूत भी मांगते हैं, जबकि वह खुद के कुंआरे होने का सुबूत देना उचित नहीं समझते. इस वजह से पहला सैक्स जिसे हम वर्जिनिटी का नाम देते हैं, आगे चल कर सैक्स संबंधों में बाधा बन जाता है. युवती की वर्जिनिटी पर शक की वजह से कई तरह की गलतफहमियां जन्म लेती हैं. इस का प्रमुख कारण कुंआरेपन को ले कर लोगों से सुनीसुनाई बातें हैं.

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Summer Special: लंच में बनाएं ब्रेड बिरयानी

परिवार के लिए कुछ स्पेशल खाना बनाने की प्लानिंग कर रही हैं तो इस बार अपनी फैमिली के लिए बनाएं ब्रेड बिरयानी. यह फटाफट तैयार होने वाली बिरयानी है जो बासमती चावल के साथ ही ब्रेड को मिलाकर बनायी जाती है.

सामग्री

बासमती चावल- 1 कप

नारियल का दूध- डेढ़ कप

मटर- एक चौथाई कप

मूली- एक चौथाई कप (घिसी हुई)

गाजर- एक चौथाई कप (घिसा हुआ)

नारियल- एक चौथाई कप (घिसा हुआ)

प्याज- 2 (बारिक कटे)

ब्रेड स्लाइस- 4

काजू- 4-5

बादाम- 4-5 (भीगे हुए)

काली मिर्च- आधा छोटा चम्मच

जीरा पाउडर- आधा छोटा चम्मच

इलायची- 2 (हरी वाली)

लौंग- 1

दालचीनी- 1

अदरक का पेस्ट- आधा चम्मच

लहसुन का पेस्ट- आधा चम्मच

घी- 3 चम्मच

करी पत्ता- 5-6

धनिया पत्ता- बारीक कटा हुआ

नमक स्वादानुसार

विधि

इलायची, लौंग और दालचीनी को हल्का सा भूनकर अच्छी तरह से पीसकर सूखा पाउडर बना लें. एक पैन में घी गर्म करें और उसमें बासमती चावल को करीब 45 सेकंड तक अच्छी तरह से भून लें.

अब इसी पैन में थोड़ा और घी डालकर ब्रेड के टुकड़ों को भी क्रिस्प होने तक भून कर अलग रख लें. बादाम, काजू और नारियल को पीसकर स्मूथ पेस्ट बना लें.

अब एक प्रेशर कूकर में घी गर्म करें. इसमें इलायची-लौंग-दालचीनी का पाउडर, अदरक-लहसुन का पेस्ट, प्याज, नमक और करी पत्ता डालकर अच्छी तरह से मिलाएं.

2-3 मिनट तक अच्छी तरह से पकाएं. अब इसमें गाजर, मूली, हरी मटर और नारियल का पेस्ट मिलाएं. अच्छी तरह से मिलाने के बाद इसमें नारियल का दूध डाल दें.

जब एक उबाल आ जाए तो इसमें बासमती चावल डालकर कूकर का ढक्कन बंद कर दें और 2 सीटी आने तक पकाएं.

जब बिरयानी बन जाए तो उसमें जीरा पाउडर, काली मिर्च पाउडर, ब्रेड के टुकड़े और हरी धनिया डालकर गर्मा गर्म सर्व करें.

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पाप धोना हो तो संपत्ति लुटाएं

भारतीय जनता पार्टी की अधिकृत प्रवक्ता नूपुर शर्मा और एक दूसरे मीडिया प्रभारी नवीन कुमार एक टीवी डिबेट में इस्लाम पर कुछ ऐसी फब्तियां कस दी कि सारे मुसलमानों की ही नहीं, सारी दुनिया के मुसलिम देशों की भौंहें तन गईं. नूपुर शर्मा और नवीन कुमार ने जो भी कहा वह भारतीय जनता पार्टी समर्थक अपने व्हाट्सएप गु्रपों में अर्से से कहते रहे हैं और इस्लाम हिंदू विवाद में खुद को श्रेष्ठ दिखाने के लिए पैगंबर को अपमानित करने के लिए फौरवर्ड कर के अपने को हिंदू योद्धा मानते रहे हैं.

इस बार जोश में ज्ञानवापी मसजिद पर चल रही बहस में नूपुर जोश में आ गई और एंकर ने उसे टोका तक  नहीं. एंकर की सोच भी ऐसी ही है कि हिंदू ही सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि वही उसे टीआरपी दिला रहा है.

हर धर्म के अपने ग्रंथों में अपने ही आराध्यों के बारे में न जाने क्याक्या कहां गया है और हर धर्म के अपने सुधारक कई बार अपने धर्म के लोगों को असलियत बताते रहते हैं. लगभग सभी देशों में ईशिनदा, कानून बने हुए हैं ताकि लोग अपने धर्म की पोल न खोलें. दूसरे धर्म की पोलपट्टी मौका देख कर खोली जाती है जब अपने धर्म पर होते आक्रमण से बचाना हो चाहे. वह स्वाधर्मी का हो या विधर्मी का. भारतीय जनता पार्टी की सत्ता चूंकि धर्म पर टिकी है जिस की मुख्य घुटी 1000 साल का मुसलिम राज है, वे प्राइवेट में बहुत अनर्गल बोलते रहते हैं. इस बार टेलीविजन बहस में बोल दिया गया और वह भी औफिस बीयरर द्वारा, पटाखा फूट गया और कई मुसलिम देशों की सरकारों ने भारतीय दूत को बुला कर सफाई देनेको कहा.

नूपुर शर्मा और नवीन कुमार का दोष नहीं है क्योंकि अपनी 1000 वर्षों की गुलामी की खीज उतारने का उन के पास और कोई चारा नहीं है कि वे मुसलिम जमात को बदनाम करें. इस्लाम चाहे जैसा भी हो, उन के ग्रंथों में जो भी लिखा हो, यह तो स्पष्ट है न कि हिंदू राजा बारबार, सैंकड़ों बार, मुट्ठी भर इस्लामी हमलावरों के हाथों हारते रहे क्योंकि हमारा अपना धर्म हमें सब को बांट कर रखता है ताकि ब्राह्मïण शिरोमणि सब से ऊपर बन रहें और निरंतर दानदक्षिणा पाते रहें. आजकल दान में वोट भी जम कर ली जा रही है कि इस वोट के दान से हर घर में सोना बरसेगा, पैट्रोल, डीजल 35 रुपए लीटर होगा, 15 लाख रुपए हरेक के खाते में जाएंगे, पाकिस्तान से कश्मीर वापिस लिया जाएगा, चीन को कातिल आंखें दिखाई जाएंगी और आम हिंदू को धर्म काज करने के हर 4 कदम पर नया नवेला मंदिर मिलेगा जहां वह पाप धोने के लिए अपनी संपत्ति लुटा सके.

आज जब इतना मिल रहा हो और पुरानी कालिख धुल रही हो तो विरोधी के पुरखों को कोसने में क्या जाता है? 7 पीढिय़ों तक जाने की परंपरा हमारे यहां हर परिवार में है ही. ये शब्द व्हाट्सएप यूनिवॢसटी हर रोज औन लाइन क्लासों में पढ़ाती रहती है. बस वह डाला. पहले 2-3 दिन तो छोटीमोटी शिकायतें हुई तो नुपूर शर्मा ने कह डाला कि गृहमंत्री, प्रधानमंत्री, पार्टी के औफिसों को उस का पूरा समर्थन है. अब बचे पीछें दुपक रहे हैं.

यह विवाद बिलकुल निरर्थक है क्योंकि आज की विश्व की िचता रूस यूक्रेन युद्ध है, ग्लोबल वार्मिंग है. कोविड माहमारी है, खानेपीने की चीजों में हो रही कमी है, औरतों के साथ शिक्षा और आजादी के बावजूद न रुकता भेदभाव व हिंसक व्यवहार है. इन समस्याओं की जगह किस के अपराध ने कब क्या किया, यह बाल की खाल निकाल कर सिर्फ धर्म की दुकान चलवाना है.

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..तो आने वाला है हार्ट अटैक

हार्ट अटैक कभी भी अचानक आ सकता है, लेकिन कुछ लक्षण हैं, जो हार्ट अटैक के 1 महीने पहले नजर आने लगते हैं.  अगर आपको भी नजर आते हैं यह 6 लक्षण तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आप हार्ट अटैक के शि‍कार हो सकते हैं. अभी जानिए इन लक्षणों को, ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके.

1. सीने में असहजता

यह दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है. सीने में होने वाली किसी भी प्रकार की असहजता आपको दिल के दौरे का शि‍कार बना सकती है. खास तौर से सीने में दबाव या जलन महसूस होना. इसके अलावा भी अगर आपको सीने में कुछ परिवर्तन या असहजता का अनुभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से सलाह लें.

2. थकान

बगैर किसी मेहनत या काम के थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है. जब हृदय धमनियां कोलेस्ट्रॉल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधि‍क मेहनत करने की आवश्यकता होती है, जिससे जल्द ही थकान महसूस होने लगती है. ऐसी स्थि‍ति में कई बार रात में अच्छी खासी नींद लेने के बाद भी आप आलस और थकान का अनुभव करते हैं, और आपको दिन में भी नींद या आराम की जरुरत महसूस होती है.

3. सूजन

जब दिल को शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए अधि‍क मेहनत करनी पड़ती है, तो शि‍राएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है. इसका असर खास तौर से पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्से में सूजन के रूप में नजर आने लगता है. इसके कभी-कभी होंठों की सतह पर नीला होना भी इसमें शामिल है.

4. सर्दी का बना रहना

लंबे समय तक सर्दी या इससे संबंधि‍त लक्षणों का बना रहना भी दिल के दौरे की ओर इशारा करता है. जब दिल, शरीर के आंतरिक अंगों में रक्तसंचार के लिए ज्यादा मेहनत करता है, तब रक्त के फेफड़ों में स्त्रावित होने की संभावना बढ़ जाती है. सर्दी में कफ के साथ सफेद या गुलाबी रंग का बलगम, फेफड़ों में स्त्रावित होने वाले रक्त के कारण हो सकता है.

5. चक्कर आना

जब आपका दिल कमजोर हो जाता है, तो उसके द्वारा होने वाला रक्त का संचार भी सीमित हो जाता है. ऐसे में दिमाग तक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे निरंतर चक्कर आना या सिर हल्का होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं. यह हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार एक गंभीर लक्षण है, जिस पर आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए.

6. सांस लेने में दिक्कत

इनके अलावा सांस लेने में अगर आपको किसी प्रकार का परिवर्तन या कमी का एहसास होता है, तो यह भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है. जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जितनी आवश्यकता होती है. इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है. अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता है, तो बगैर देर किए डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

इन 6 लक्षणों में से किसी लक्षण के सामने आने या महसूस होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं या फिर यथासंभव सलाह लें.

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