मजबूरियां- भाग 3: प्रकाश को क्या मिला निशा का प्यार

‘‘अब आप उलटीसीधी बातें बोलना और सोचना बंद कर अपना मूड सही कर लीजिए,’’  कहते हुए ज्योति की आंखों में एकाएक आंसू छलक आए.

‘‘तुम से मेरा दुख, मेरी चिंता, मेरा परेशान होना बरदाश्त नहीं होता?’’

‘‘नहीं, आप को खुश और सुखी देखने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं. आप के होंठों की हंसी मेरी नजरों में मेरी जान से ज्यादा कीमती है, जनाब,’’ भावविभोर हो कर ज्योति ने प्रकाश की आंखों को चूम लिया.

‘‘और तुम मेरी जान हो, ज्योति,’’ कहते हुए प्रकाश ने ज्योति को सीने से लगा लिया. जैसी प्रकाश को आशंका थी, पार्टी में हंगामा हो गया.

‘‘निशा, आज तुम मेरी नजरों में पूरी तरह से गिर गई हो. जो तुम ने आज जन्मदिन की पार्टी में कहा और किया है उस के लिए मैं तुम्हें जिंदगीभर माफ नहीं करूंगा,’’ पार्टी के बाद प्रकाश की आवाज में बहुत दर्द समाया हुआ था.

‘‘मैं ने क्या कोई बात  झूठ कही आज?’’ निशा ने  झगड़ालू स्वर में जवाब दिया, ‘‘मेरे और तुम्हारे घर के लोग अब तक तुम्हें नेकदिल और चरित्रवान इंसान सम झते थे. आज मैं ने सब के सामने तुम्हारे नाजायज प्रेमसंबंध का भंडाफोड़ कर के तुम्हारी उस छवि को नष्ट कर दिया. इसी बात से पीड़ा हो रही है न तुम्हें?’’

‘‘मेरे लिए तुम ने जो जहर आज सब के सामने उगला है वह मेरे लिए अप्रत्याशित नहीं था. ज्योति के लिए तुम ने जिस गंदी भाषा और अपशब्दों का इस्तेमाल किया वह सर्वथा गलत और अनुचित था,’’ प्रकाश बोला.‘‘तुम बिलकुल गलत कह रहे हो. उस कलमुंही औरत के लिए मैं ने जो कहा, वह सब सच है और उस के लिए तुम से माफी मांगने का भविष्य में कभी सवाल ही नहीं उठेगा,’’ निशा ने मजबूती से कहा.

‘‘आज जितनी नफरत मैं ने तुम से कभी नहीं की,’’ प्रकाश ने कहा.‘‘और आज मेरे दिल को बहुत शांति महसूस हो रही है. अब मैं देखती हूं कि कैसे उस रखैल के घर की दहलीज लांघते हो.’’‘‘कौन रोकेगा मु झे ज्योति के पास जाने से?’’ प्रकाश ने माथे पर बल डाल कर पूछा.

‘‘मेरे और तुम्हारे घर वालों का दबाव तुम्हारे पैरों में बेडि़यां पहनाएगा. मेरी तो तुम ने कभी सुनी नहीं, पर अब दोनों तरफ के बड़ों का कहा अनसुना नहीं कर पाओगे,’’ कहते हुए निशा के होंठों पर कुटिल मुसकान उभरी.‘‘एक बात की चेतावनी तुम मेरी तरफ से सब को दे देना,’’ प्रकाश का स्वर एकाएक चट्टान सा कठोर हो गया, ‘‘अगर ज्योति से किसी ने कुछ कहा या उस के नाखून तक को किसी ने नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो मु झ से बुरा कोई न होगा.’’

 

‘‘वाह, एक बाजारू औरत की  इतनी चिंता.’’

‘‘निशा,’’  प्रकाश गुस्से से दहाड़ उठा.

‘‘चिल्लाओ मत और जिस से जो कहना हो, खुद कहना. मैं तो चली चैन की नींद सोने,’’ कह कर निशा बाथरूम की तरफ कपड़े बदलने चली गई और प्रकाश क्रोध व बेबसी का शिकार बना काफी देर तक छटपटाता रहा था.

प्रकाश को दोपहर का खाना खिलाने के बाद ही ज्योति ने उसे बड़े शांत स्वर में बताया, ‘‘आज सुबह आप की माताजी, बड़ी बहन और बड़ी साली मु झ से मिलने यहां आई थीं.’’

‘‘क्या कहा उन लोगों ने तुम से? देखो, मु झ से कुछ छिपाना मत. एकएक बात बताओ मु झे,’’ प्रकाश की आंखों में गुस्से के भाव जाग उठे.

‘‘आप से दूर हो जाने के लिए मु झे धमका रहे थे सब,’’ ज्योति का गला एकाएक भर आया, ‘‘मैं उन्हें कैसे सम झाती कि आप से दूर हो कर मेरे लिए जीना अब असंभव है. अपने  प्रेम के हाथों मैं मजबूर हूं और वे मेरी इस मजबूरी को सम झने को तैयार  नहीं थे.’’

‘‘तुम्हारी मनोदशा को वे तभी सम झ सकते थे जब उन के जीवन में प्रेम की एकाध किरण कभी उतरी होती. मैं उन तीनों को अच्छी तरह जानता हूं. ‘प्रेम’ शब्द का सही अर्थ सम झ पाना उन के लिए असंभव है,’’ प्रकाश ने खिन्न स्वर में अपनी बात कही.

‘‘वे तीनों बहुत गुस्से में थीं. मैं ने उन की बातों का जरा भी बुरा नहीं माना, पर अब वे सब आप के लिए जरूर परेशानियां खड़ी करेंगी, यह सोच कर मेरा दिल बहुत दुखी हो उठता है,’’ कहते हुए ज्योति की आंखों से आंसू बह निकले.

‘‘मैं उन से निबट लूंगा. तुम रोओ मत,’’ कहते हुए प्रकाश ने अपने होंठों के चुंबनों से उस के आंसुओं को पोंछ डाला.

‘‘आप मेरे लिए उन से लड़ना झगड़ना मत.’’

‘‘अच्छा, ठीक है, पर ऐसा इंतजाम मैं जरूर कर दूंगा कि आज के बाद उन  की तुम से मिलने आने की जरूरत  नहीं पड़ेगी.’’

‘‘मेरा दिल घबराने लगा है. हम इतने सुखी थे, पर अब दूसरों की दखलंदाजी मन में चिंताएं पैदा करने लगी है. पता नहीं क्या होने जा रहा है?’’ प्रकाश के सीने से लगने के बावजूद ज्योति का मन भय से कांप रहा था.

निशा बहुत परेशान और गुस्से में नजर आ रही थी, ‘‘मु झे विश्वास नहीं होता कि एक सम झदार, 45 साल की उम्र का इंसान किसी स्त्री के इश्क में ऐसा पागल हो सकता है कि अपनी

मां और बड़ी बहन को अपने घर में कदम रखने से मना कर दे. शर्म  आनी चाहिए आप को अपने ऐसे गंदे व्यवहार पर.’’

‘‘प्लीज, खामोश रहो, निशा. इस वक्त कुछ भी बोल कर मेरा दिमाग और न खराब करो,’’ प्रकाश बहुत तनावग्रस्त नजर आ रहा था.

‘‘हम सभी आप के हितैषी हैं. ज्योति से संबंध तोड़ लेने की हमारी सलाह आप मान लीजिए,’’  निशा ने उसे शांत लहजे में सम झाने का प्रयास किया.

‘‘उस से संबंध तोड़ लेना मेरे लिए संभव नहीं है,’’ प्रकाश बोला.

‘‘क्यों संभव नहीं है?’’ निशा ने पूछा.

‘‘क्योंकि उस ने बिना किसी स्वार्थ के मु झ से प्रेम किया है. उस से दूर होने का अर्थ उसे जबरदस्त धोखा देना होगा. वह उस सदमे को सहन नहीं कर सकेगी और अपनी जान दे देगी.’’

‘‘ऐसी फिल्मी बातें मत करिए मेरे सामने,’’ निशा चिढ़ कर बोली, ‘‘आप जब उस की आंखों से दूर रहने लगेंगे तो वह आप को भूलने लगेगी. कुछ दिन आंसू बहा कर बदली स्थिति को स्वीकार कर लेगी. उस जैसी तेज औरत की जिंदगी में दूसरा प्रेमी आने में ज्यादा देर भी नहीं लगेगी.’’

‘‘ज्योति को तुम सम झती नहीं हो. लिहाजा, उस के बारे में उलटेसीधे अंदाज मत लगाओ. मैं इस विषय पर और ज्यादा बातें नहीं करना चाहता हूं,’’ कहता हुआ प्रकाश ड्राइंगरूम से उठ कर बैडरूम की तरफ चल पड़ा.

‘‘अपनी रखैल से संबंध कायम रख के अगर तुम ने मु झे बेइज्जत करना जारी रखा तो मैं भी तुम्हारा जीवन बद से बदतर करने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी,’’ निशा की चेतावनी देर तक प्रकाश के कानों में गूंजती रही थी.

ज्योति ने प्रकाश का चेहरा अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘पिछले 3 महीनों में कितने कमजोर हो गए हैं आप.’’

‘‘हमारी खुशियां बरदाश्त नहीं हुईं लोगों से, ज्योति,’’ प्रकाश ज्योति से कह रहा था. उस के स्वर में निराशा और बेबसी के भाव थे, ‘‘मैं तंग आ गया हूं अपने परिवार वालों की दिनरात की  िझक िझक से. मालूम है कभीकभी मेरा दिल क्या करने को करता है?’’

‘‘क्या?’’

‘‘यही कि जो भी तुम्हारे खिलाफ जहर उगले उसे गोली मार दूं या अपना जीवन ही समाप्त कर लूं. मैं तुम से दूर हो कर नहीं रह सकता, यह क्यों नहीं सम झ पाते मां और निशा…’’ कहते हुए प्रकाश की पलकें गीली हो उठीं.

जहां से चले थे- भाग 3: पेरेंट्स की मौत के बाद क्या हुआ संध्या के साथ

वंदना मेरी तरफ देख कर बोली, ‘तब भी तुम में यही गरूर था जो आज है. आज तो फिर भी तुम्हारे पास 10-12 रिश्ते हैं, और देर करोगी तो 60-62 साल का वृद्ध ही मिलेगा, वह भी पेंशन होल्डर. जवानी का सारा सुख तो तुम ने दांव पर लगा दिया. मातृत्व सुख क्या होता है तुम्हें एहसास ही नहीं. जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहती थीं न…अब कोई जिम्मेदारी नहीं मिलेगी, सिवा इस के कि उस का हाथ पकड़ कर तुम सड़क पार कराओगी,’ चाय खत्म करते हुए वंदना ने कहना जारी रखा.

‘शायद इसीलिए पुराने लोग जल्द से जल्द बच्चों की शादी कर दिया करते थे. लड़की आसानी से उस परिवार में ढल जाती थी. एकदूसरे के साथ रहतेरहते, प्रेम, तकरार, संवेदनाओं और भावनाओं का एहसास होता रहता था. एक बार फिर से सोच लो तुम. यह जो कुछ तू ने कमा कर जोड़ा है न उस का सुख तब दूसरे ही भोगेंगे…पर इतना याद रखना, इस तपते रेगिस्तान में चलना तुम्हें अकेले ही पड़ेगा.’

बात कड़वी थी पर थी सच. मुझे वंदना की सरल भाषा में कही गई बातों ने सोचने पर मजबूर कर दिया. मैं अपने अंधेरे भविष्य को देख कर एकदम घबरा गई.

‘अच्छा, अब मैं चलती हूं. घर पर बच्चे इंतजार कर रहे होंगे. बस, इतना बता दो कि तुम शादी करना चाहती हो या नहीं, ताकि मैं इस बारे में आगे सोच सकूं. आंटी मुझे यह काम सौंप गई थीं, इसलिए मैं तुम्हें समझाने चली आई.’

मां की इच्छा और वंदना के तर्क के आगे मैं एकदम बौनी पड़ गई और मैं ने उस की बात मान ली.

जातेजाते वंदना बोल गई, ‘देखो, तुम दिन भर बैठ कर फिर से सारे पत्र पढ़ लो. समझ में आता है तो ठीक, नहीं तो नया विज्ञापन दे देती हूं. मैं शाम को आती हूं, फिर पता नहीं तुम्हें कब फुरसत मिले.’

शाम को वंदना के आने से पहले मैं ने सारे पत्र पढ़े. जैसा वर मुझे चाहिए था, उन में वैसा कोई न मिला. मैं विरोधाभास के समुद्र में तैरती रही. मांपापा की इच्छा का ध्यान रखते हुए मैं ने 2-3 बायोडाटा अलग रख लिए.

ठीक 6 बजे वंदना आ गई. अपने साथ आए एक व्यक्ति का परिचय करवाते हुए बोली, ‘यह विजय शर्मा हैं, यह मेरे परिचित भी हैं और मैरिज काउंसलर भी. मैं ने सोचा इन्हें साथ लेती चलूं ताकि तुम्हारे मन में कोई शंका हो तो निवारण कर लोगी.’

उन के लिए झट से शरबत बना कर मैं वहीं पास ही में बैठ गई.

‘संध्या, मैं ने इन को तुम्हारे बारे में सबकुछ बता दिया है, अब तुम बिना झिझक इन से बात कर सकती हो,’ वंदना मुझे देखते हुए बोली, ‘उन में से कोई तुम्हें पसंद आया क्या?’

मैं ने अपने चुने हुए पेपर उन के सामने रख दिए.

विजयजी ने पेपर्स देखते हुए पूछा, ‘मैम, क्या आप साफसाफ बता सकती हैं कि इस उम्र में शादी क्यों करना चाहती हैं?’

‘यह कैसा बेहूदा सवाल है?’ मैं ने चिढ़ कर कहा. मेरी आवाज में रोष स्पष्ट था.

‘यही तो अहम प्रश्न है, संध्या,’ उन की अनुभवी नजरों ने मुझे चीर कर रख दिया.

‘शायद इसलिए कि मां चाहती थीं या शायद समाज मुझे भेद भरी नजरों से न देखे इसलिए या शायद मुझे सहारे की जरूरत हो,’ मैं ने अपनेआप से प्रश्न किया. मैं मन ही मन उचित शब्दों को तलाशती रही फिर बोली, ‘मुझे लगता है मैं बहुत अकेली जी ली, अब कदम जिस उम्र की ओर बढ़ रहे हैं शायद मैं अकेली न चल सकूं,’ मैं ने 1-1 अक्षर पर जोर दे कर कहा.

‘तो वह व्यक्ति भी आप के स्टेटस का होना चाहिए?’ प्रश्न जितना सरल था समाधान उतना ही कठिन.

मैं ने वंदना की तरफ देख कर कहा, ‘मुझे लगता है यह अब संभव नहीं हो पाएगा. उम्र, जाति, बंधन, स्टेटस, धन, ऐश्वर्य की अब मुझे कोई चाहत नहीं है. व्यक्ति कैसा भी हो बस, मेरी भावनाओं को समझने वाला और सहारा देने वाला होना चाहिए. एक बार मैं ने शादी की उम्र में शादी क्या तोड़ दी, मुझे ग्रहण लग गया है. कभी पापा का सहारा तो कभी मां की गोद और एकएक कर के सभी संबंध टूटते चले गए. आज मैं बिलकुल अकेली खड़ी हूं,’ कह कर मैं सुबकने लगी. मेरा सारा दुख आंखों के रास्ते बाहर निकल गया. हमारे बीच एक गहरी चुप्पी छा गई.

‘संध्या,’ वंदना ने मेरे पास आ कर मेरे गाल थपथपाए और कहने लगी, ‘विजय वही व्यक्ति हैं जिस की शादी बरसों पहले तुम से हो रही थी. तुम्हारे झूठे लांछन की वजह से न इन की शादी हो पाई और न ही तुम ने की. मैं ने तुम से झूठ बोला कि यह मेरे जानने वाले हैं. विज्ञापन के उत्तर में इन का भी एक पत्र आया था, जो मैं ने संभाल कर रख लिया था. तुम से सबकुछ सुनने के बाद ही मैं ने इन से तुम्हारे बारे में बात की है. इन के मन में अब भी तुम्हारे प्रति रोष था किंतु मैं ने इन्हें सबकुछ बता दिया है. बाकी तुम दोनों बात कर लो.’

यह सुनते ही मेरी सांसें ठहर गईं. जैसे मैं सब के सामने निर्वसन हो गई हूं. मेरी जबान ने अब मेरा साथ छोड़ दिया. मैं बेहद परेशान हो गई थी. अपने पर काबू पाने में मुझे कुछ समय लगा, फिर मैं बोली, ‘मुझ में अब इतनी हिम्मत नहीं है कि इन से नजर भी मिला सकूं. पहले ही मैं ने इन का जीवन बरबाद कर दिया. मुझे जब तक इन के बारे में पता चला, बहुत देर ही चुकी थी. यदि यह मुझे स्वीकार कर लें तो इन का मुझ पर बड़ा एहसान होगा. मैं वादा करती हूं कि ताउम्र इन की दासी बन कर इन की सेवा करूंगी. बस, यह सिर्फ एक बार मुझे माफ कर दें.’

‘क्या तुम मेरे लिए नौकरी छोड़ सकती हो?’ विजयजी ने पूछा.

‘हां, आप की खुशी के लिए मैं अभी इस्तीफा भेज सकती हूं. बस, मुझे एक बार प्रायश्चित का अवसर दीजिए,’ कह कर मैं रोने लगी. मेरा कंठ एकदम अवरुद्ध हो गया और मैं उन के पैरों पर गिर पड़ी.

विजय ने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया और बोले, ‘मैं तुम्हें न तो नौकरी छोड़ने के लिए कहूंगा और न ही कुछ ऐसा कहूंगा जो तुम्हारी इच्छाओं के विरुद्ध हो. बस, पिछली बातों को ले कर मन में कोई अवसाद न रखना,’

मैं उन की ओर न देखने का बहाना करते भी चोरीचोरी उन्हें देखने लगी. पता नहीं कैसे मुझ में से 18 साल की किशोरी संध्या निकल कर बाहर आ गई और पुन: उन के सीने से जा लगी.

मुझे अपने चारों ओर बांहों के घेरे का एहसास हुआ तो मैं वापस वहीं पर पहुंच गई जहां से चली थी. कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी मुझे, यह बस, मैं ही जानती हूं.

जानें क्यों होता है गर्भाशय कैंसर

गर्भाशय का कैंसर भारत में तेजी से पांव पसार रहा है. दुनिया में इस मामले में भारत का पहला नंबर है. औरतों के इसे ले कर लापरवाही बरतने की वजह से यह तेजी से फैल रहा है. दक्षिणपूर्व एशिया, भारत और इंडोनेशिशा में कुल कैंसर मरीजों का एकतिहाई हिस्सा गर्भाशय के कैंसर से पीडि़त है. 30 से 45 साल की उम्र की औरतों में इस कैंसर का ज्यादा खतरा होता है, इसलिए इस आयु की औरतों को लापरवाही छोड़ कर सचेत होने की जरूरत है.

महिलाओं में बढ़ते गर्भाशय कैंसर के बारे में दिल्ली के एम्स के डाक्टर नीरज भटला ने पिछले दिनों पटना में महिला डाक्टरों के सम्मेलन में साफतौर पर कहा कि कैंसर को पूरी तरह डैवलप होने में 10 साल का समय लगता है. अगर पेशाब में इन्फैक्शन हो या पेशाब के साथ खून आए तो उसे नजरअंदाज न करें. अगर औरतें हर 2-3 साल पर नियमित जांच कराती रहें तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. गर्भाशय के कैंसर से बचाव के लिए हर 3 साल पर पैपस्मियर टैस्ट और स्तन कैंसर से बचाव के लिए हर 1 साल पर मैगोग्राफी करानी चाहिए. शुरुआती समय में इस का पता चलने पर आसानी से इलाज हो जाता है.

बच सकती है जिंदगी

गौरतलब है कि देश में हर साल सवा लाख महिलाओं को बच्चेदानी का कैंसर होता है और इन में से 62 हजार की मौत हो जाती है. सर्दीजुकाम होने पर एचपीवी (ह्यूमन पौपीलोमा वायरस) औरतों के शरीर में प्रवेश कर जाता है.

सही समय पर सही इलाज हो तो दवाओं से इस वायरस को खत्म किया जा सकता है. अगर इस की अनदेखी की जाए तो यह पेट में रह कर बच्चेदानी के कैंसर की वजह बनता है. इस बीमारी के होने पर भूख कम लगती है और हमेशा भारीपन महसूस होता है.

आमतौर पर औरतों में एचपीवी (ह्यूमन पौपीलोमा वायरस) के इन्फैक्शन की वजह से भारत में गर्भाशय का कैंसर ज्यादा होता है. समयसमय पर इस वायरस की जांच करा कर इस कैंसर का पता लगाया जा सकता है. फैडरेशन औफ औब्सटेट्रिक्स ऐंड गायनोकोलौजी सोसाइटी औफ इंडिया की सचिव डाक्टर मीना सामंत कहती हैं कि इस से बचाव का सब से बेहतर और आसान तरीका यही है कि 30 साल के बाद हर औरत को एचपीवी की जांच नियमित रूप से करवानी चाहिए. इस के अलावा कैंसर से बचाव के लिए बनाया गया टीका लगवाने से भी इस से काफी हद तक बचा जा सकता है.

समय रहते हो जाएं सचेत

गर्भाशय के कैंसर का पता अगर शुरुआती स्टेज में ही चल जाए तो औपरेशन कर इस का इलाज किया जा सकता है. डाक्टर प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि 12 से 14 साल की लड़कियों को डाक्टर की सलाह पर वैक्सिन की 3 डोज दे कर इस खतरे से बचाया जा सकता है.

कैंसर रोग स्पैशलिस्ट डाक्टर मनीषा सिंह बताती हैं कि महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर के मामले देश भर में तेजी से बढ़ रहे हैं. इस से बचने के लिए बच्चेदानी की नियमित जांच जरूरी है. अगर महिलाओं को शरीर के किसी भी हिस्से में किसी भी तरह के बदलाव का पता चले या कोई परेशानी बारबार होने लगे तो तुरंत डाक्टर से जांच करानी चाहिए.

कम उम्र में शादी नहीं

गर्भाशय का कैंसर होने की और भी कई वजहें हैं. कम उम्र में लड़कियों का विवाह कर देना इस बीमारी को न्योता देने जैसा है. कच्ची आयु की लड़कियों से जबरन यौन संबंध बनाना उन्हें गर्भाशय कैंसर के कुएं में धकेलने जैसा है. ज्यादा उम्र की औरतों के गर्भधारण से भी इस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. 35 से ज्यादा उम्र की औरतों का मां बनना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है.

कई लोगों से जिस्मानी रिश्ता बनाने और एचपीवी वायरस के इन्फैक्शन से भी गर्भाशय के कैंसर की चपेट में औरतों आ जाती हैं. जननांगों की साफसफाई के प्रति लापरवाही बरतने से भी इस बीमारी के चंगुल में फंसने का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है.

साफसफाई पर दें ध्यान

डाक्टर शांति राय कहती हैं कि ज्यादातर औरतें जननांगों की साफसफाई पर खास ध्यान नहीं देती हैं. डाक्टरों के बारबार सलाह देने के बाद भी वे साफसफाई को ले कर लापरवाह रहती हैं, जो उन के लिए जानलेवा साबित होता है.

गायनोकोलौजिस्ट डाक्टर अनिता सिंह बताती हैं कि गर्भाशय से असामान्य रूप से पानी या खून निकले या फिर जिस्मानी संबंध बनाने पर खून आए तो महिलाओं को सतर्क हो जाना चाहिए. ज्यादातर महिलाओं के साथ सब से बड़ी दिक्कत यह होती है कि वे अपनी हैल्थ को ले कर सचेत नहीं रहती हैं. काम के बोझ का बहाना बना कर डाक्टर के पास जाने को टालती हैं, जिस से उन की बीमारी खतरनाक रूप ले लेती है. पूरी दुनिया में हर साल जितनी महिलाएं इस की शिकार हो रही हैं उन में 25 फीसदी भारत की हैं. इस के बाद भी अगर महिलाएं अपनी हैल्थ को ले कर सचेत नहीं होती हैं तो गर्भाशय का कैंसर विकराल रूप ले सकता है.

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बॉलीवुड की दुल्हनों को पीछे छोड़ रहा है साउथ की Nayanthara का ब्राइडल लुक, देखें फोटोज

साउथ की पौपुलर एक्ट्रेसेस में से एक नयनतारा (Nayanthara) हाल ही में शादी के बंधन में बंध चुकी हैं, जिसकी फोटोज और वीडियो सोशलमीडिया पर वायरल हो रही हैं. वहीं उनके ब्राइडल लुक (Nayanthara Bridal Look) की फैंस तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. नयनतारा का लुक देखकर हर कोई बौलीवुड एक्ट्रेस के लुक को पानी कम बता रहा है. आइए आपको दिखाते हैं साउथ की एक्ट्रेस के ब्राइडल लुक की झलक…

ब्राइडल लुक के लिए चुना लाल रंग  

 

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बॉयफ्रेंड विग्नेश शिवन (Vignesh Shivan) से 9 जून को शादी करने वाली एक्ट्रेस नयनतारा की वेडिंग फोटोज बेहद खूबसूरत हैं. शादी के लिए एक्ट्रेस ने लाल रंग चुना था. लहंगे की जगह एक्ट्रेस लाल कलर की नेट वाली साड़ी और फुल स्लीव्ज ब्लाउज में नजर आई. वहीं ज्वैलरी की बात करें तो ग्रीन एमराल्ड ज्वैलरी और चोकर से उन्होंने अपना पूरा ब्राइडल लुक सजाया था. साउथ इंडियन स्टाइल की साड़ी छोड़ एक्ट्रेस ने नेट की साड़ी पहनकर बौलीवुड और साउथ की एक्ट्रेस के वेडिंग लुक से हटकर बनाया था.

 

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पति ने लिखा खास मैसेज

 

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एक्ट्रेस के पति विग्नेश शिवन ने अपनी वेडिंग फोटोज फैंस के साथ शेयर करते हुए लिखा नयन मैम से कादम्बरी तक… Thangamey से मेरी बेबी तक. फिर Uyir और मेरी कनमनी भी… अब मेरी पत्नी. विग्नेश का पोस्ट देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि नयनतारा से शादी करके वह कितने खुश हैं. वहीं शादी की रस्मों की इन फोटोज देखकर फैंस दोनों की तारीफ कर रहे हैं. हालांकि एक्ट्रेस के वेडिंग लुक की चर्चा इन दिनों सोशलमीडिया पर छाई हुई है.

 

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बता दें, एक्ट्रेस नयनतारा की शादी में कई बड़े सितारे पहुंचे थे, जिनमें कोरोना से ठीक हुए एक्टर शाहरुख खान का नाम भी शामिल हैं. वहीं साउथ और बौलीवुड इंडस्ट्री के कई नामी सितारे भी इस शादी में शिरकत करते हुए नजर आ चुके हैं.

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OTT को लेकर क्या कहती हैं एक्ट्रेस रुपाली सूरी, पढ़ें संघर्ष की कहानी

थिएटर से अभिनय की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री रुपाली सूरी ने इंटरनेशनल फीचर फिल्म ‘डैड होल्ड माय हैंड’ से की थी.  इस फिल्म में उन्हें रत्ना पाठक शाह के साथ काम करने का मौका मिला. निर्देशन के साथ-साथ विक्रम गोखले ने खुद ही इस फिल्म को एडिट और कम्पोज भी किया है. इसमें उन्होंने बड़ी ही खूबसूरती से लॉकडाउन की कहानी को शूट किया है. रुपाली अभी कुछ वेब सीरीज और फिल्मों में काम कर रही है. व्यस्त समय के बीच उन्होंने गृहशोभा के लिए खास बात की, आइये जाने उनकी कहानी.

सवाल –अभिनय की प्रेरणा कहाँ से मिली?

जवाब –मेरे परिवार में कोई भी इस इंडस्ट्री से नहीं है, लेकिन छोटी उम्र में मेरी फीचर मॉडल की तरह होने की वजह से कई फैशन शोज में भाग लिया. इसके अलावा उस दौरान घर में कुछ तंगी होने की वजह से माँ ने मुझे आये हुए प्रोजेक्ट को करने के लिए कहा, उस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही दूसरा प्रोजेक्ट आ गया, इस तरह से काम छूटा नहीं. काम करने बाद  मैं इस क्षेत्र में प्रेरित हुई और कॉलेज के बाद ही मैंने निश्चय कर लिया था किमुझे एक्टिंग करनी है, क्योंकि तब तक मैं काम सीख चुकी थी.

मॉडलिंग का काम मैंने दूसरी कक्षा से कर दी थी और स्कूल में काम कम था, लेकिन कॉलेज में इसकी रफ़्तार तेज हुई, मॉडलिंग के अलावा मैंने कई सीरियल्स में भी काम किये. फिर धीरे-धीरे वेब सीरीज, फिल्मे आदि मिलती गयी, क्योंकि अभिनय को समझने के लिए इफ्टामें ज्वाइन किया उनके साथ कई शोज किये. मेरा वह शुरूआती दौर था, जिसमे कला, अभिनय के साथ बहुत सारी बातों को सीखना था. मुझे ये समझना जरुरी था कि मैं खुद क्या और कितना काम कर सकती हूं. इसलिए मैंने थिएटर के मंच पर कई एक्सपेरिमेंटल शोज किये. वहां तालियों की गडगडाहट, दर्शकों का तुरंत रिएक्शन मिलता था. अभी भी मैं स्टेज की दुनिया को मिस करती हूं.मुझे कई बार ऐसा लगता है कि इंडस्ट्री ने मुझे चुन लिया है, मैंने नहीं चुना है.

सवाल – कितना संघर्ष रहा?

जवाब – संघर्ष का स्तर हमेशा अलग होता है, एक समय जब मैंने आर्थिक तंगी के कारण काम शुरू किया था, दूसरे स्तर के संघर्ष में मेरे पास बस, टैक्सी, ऑटो के पैसे नहीं थे. कैसे मैं आगे बढ़ी हूं, ये मैं जानती हूं. तीसरा संघर्ष फैशन शो में जाने के लिए मेरे पास जूते खरीदने के पैसे नहीं थे. ये सब मेरे लिए कोई संघर्ष नहीं कह सकती, क्योंकि ऐसा करते हुए आगे बढ़ने में मज़ा आया था. आज पीछे मुड़कर देखने पर मुझे महसूस होता है कि इतनी स्ट्रगल के बाद ही मुझमे आत्मविश्वास आ पाया और मैंने जो अपनी छोटी एक सफल दुनिया बनाई है वह बन नहीं पाती. मेरी बड़ी बहन भी अभिनय से जुडी है. दोनों के रास्ते एक है, लेकिन अप्रोच अलग-अलग है.

सवाल – क्या आपको बड़ी बहन का सहयोग मिला ?

जवाब – सहयोग से अधिक मैं उससे प्रेरित अवश्य हुई हूं. उन्होंने अपने जीवन में मेहनत कर एक जगह बनायीं है. उनके सही कदम और गलतियों से मैंने बहुत कुछ सीखा है. वह मेरे लिए ‘लाइव लेसन’ है. मैं साधारण परिवार से हूं, मेरे पिता गारमेंट के व्यवसाय में थे, अब रिटायर्ड है और मेरी माँ गुजर चुकी है. मेरी माँ बहुत कम उम्र में बिछड़ गई. इस वजह से हम दोनों बहने बहुत ही हम्बल बैकग्राउंड से है.

सवाल – इंडस्ट्री में गॉडफादर न होने पर काम मिलना मुश्किल होता है, क्या आपको काम मिलने में परेशानी हुई ?

जवाब – ये तो होता ही रहता है, क्योंकि पेरेंट्स के काम से उनके बच्चों कोलाभ मिलता है. ये केवल इंडस्ट्री के लिए नहीं हर जगह लागू होता है. पहला मौका उन्हें जल्दी मिलता है, लेकिन काम के ज़रिये उन्हें भी प्रूव करना पड़ता है कि वे इस इंडस्ट्री के लिए सही है.

सवाल – कई बार काम होते-होते कलाकार रिजेक्ट हो जाते है, क्या आपको रिजेक्शन का सामना करना पड़ा? उसे कैसे लिया?

जवाब – बहुत बार मुझे इन चीजो का सामना करना पड़ा, कई बार मैंने रात 10 बजे मैनेजर को जगाकर पूछती थी कि मैंने क्या गलत किया. कई बार तो साइनिंग अमाउंट मिलने के बाद भी रिजेक्ट हुई. कई बार सेट पर पहुँचने के बाद मुझे अगले दिन नहीं बुलाया गया. इसकी वजह समझना मुश्किल होता है, कभी कोई कहता है कि इस रोल के लिए मैं ठीक नहीं, तो कोई कुछ दूसरा बहाना बनाते है. सामने कोई कुछ अधिक नहीं कहता. एक बार मैं निर्देशक अनीस बज्मी की फिल्म में कास्ट हुई, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया था कि नए कलकार के साथ वे काम नहीं करते, उन्हें एक अनुभवी कलाकार चाहिए.

सवाल – स्ट्रेस होने पर रिलीज कैसे करती है?

जवाब – मैं आधी रात को मैनेजर से घंटों बात करती हूं और वह मुझे समझाती है. अगर वह नहीं है तो मैं कथक डांस कर सारा स्ट्रेस निकाल देती हूं. मैं एक कलाकार हूं और हर इमोशन को फील करती हूं, लेकिन एक बार उससे निकलने पर वापस मैं उसमे नहीं घुसती और आगे बढ़ जाती हूं.

सवाल – किस शो ने आपकी जिंदगी बदली?

जवाब – टीवी ने मुझे बहुत सहयोग दिया है, उसकी शोज से मुझे आज भी लोग याद करते है. मेरी वेब सीरीज, फिल्मों की अलग और टीवी की एक अलग पहचान है. शो ‘शाका लाका बूम-बूम’ में मेरे चरित्र, विज्ञापनों आदि को लोग आज भी याद रखते है, इस तरह बहुत सारे ऐसी टीवी शो है, जिससे मैं सबके घरों तक पहुँच पाई.

सवाल – ओटीटी आज बहुत अधिक दर्शकों के बीच में पोपुलर है, इसका फायदा नए कलाकारों को कितना मिल पाता है?

जवाब – ओटीटी आने से इंडस्ट्री में लोगों के काम और वेतन काफी बढ़ गयी है. जिस तरह टीवी ने आज से कुछ साल पहले कलाकारों को अभिनय करने का एक बड़ा मौका दिया था, वैसी ही ओटीटी के आने से काम बहुत बढ़ा है. काम और पैसे का बढ़ना ही इंडस्ट्री के लोगों के लिए निश्चित रूप से एक प्रोग्रेस है. इससे ये भी कलाकारों को पता चला है कि केवल फिल्म ही नहीं, आप ओटीटी पर अभिनय कर संतुष्ट हो सकते है. ये एक प्रोग्रेसिव दौर है.

सवाल – परिवार का सहयोग कितना रहा ?

जवाब – परिवार के सहयोग के बिना आप कुछ भी नहीं कर सकते. पहले दिन से मुझे ये आज़ादी मिली है, मुझे कभी कुछ रोका या टोका नहीं गया है. एक ट्रस्ट और कॉंफिडेंट दिया गया है, जो मेरे लिए जरुरी था.

सवाल – आपके ड्रीम क्या है?

जवाब – मेरी ड्रीम्स बहुत छोटी -छोटी है, मैं छोटी चीजों को पाकर खुश हो जाती हूं. ये छोटी चीजे मिलकर एक दिन बड़ी हो जाती है. मैं हमेशा प्रेजेंट में रहती हूं. डांस मेरा पैशन है, लेकिन कब ये जरुरत बन गयी पता नहीं चला. मैं अपनी सुविधा के लिए शो करती हूं, रियाज करती हूं, ये मुझे संतुलित रखती है. मेरे कथक गुरु राजेंद्र चतुर्वेदी है.

सवाल – खाना बनाने का शौक है?

जवाब – मुझे खाना बनाना पसंद है, माँ की रेसिपी को मैं हमेशा नए अंदाज में बनाती हूं.

सवाल – आपके जीवन जीने का अंदाज क्या है?

जवाब – आसपास के सबको खुश रखना और वर्तमान में जीना.

मेरी एक दादी है, जो हर मगज़ीन में मुझे खोजती है, उसे खरीदती रहती है और एक शेल्फ पर अलग से रख देती है. किसी को हाथ लगाने नहीं देती,

सवाल – क्या आप एनिमल लवर है?

जवाब – मुझे जानवरों से बहुत प्यार है. मेरे निर्देशक भरतदाभोलकर भी एक एनिमल लवर है. मेरा उनसे जुड़ाव भी जानवरों की वजह से हुआ है, मेरी डौगी डॉन सूरी भी 15 साल साथ रहने के बाद उसकी डेथ हो गयी. मुझे उसकी बहुत याद आती रहती है.

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नौर्मल डिलीवरी के लिए क्या करना चाहिए?

सवाल-

मेरी उम्र 35 साल है. मैं अभी भी अविवाहित हूं. यदि बाद में मैं गर्भधारण करती हूं तो क्या मेरी सामान्य डिलिवरी हो सकती है और एक सामान्य बच्चा हो सकता है?

जवाब-

जैसेजैसे उम्र बढ़ती है वैसेवैसे ओवेरियन रिजर्व कम हो जाता है, आरोपण दर कम हो जाती है और इसलिए आनुवंशिक रूप से असामान्य शिशुओं का जोखिम बढ़ जाता है. आज के समय में एग फ्रीजिंग एक बहुत ही अच्छा विकल्प है और दुनियाभर के लोग इस का लाभ ले रहे हैं. मेरी सलाह है कि अंडे को फ्रीज करें तब आप अपनी गर्भावस्था में देरी कर सकती हैं. सामान्य डिलिवरी संभव है, लेकिन उम्र के साथ जोखिम बढ़ता जाता है. इसलिए कुछ मामलों में सीसैक्शन डिलिवरी की सलाह दी जा सकती है.

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स्ट्रैंथनिंग

कमर के लिए : पैरों को एकसाथ मिला कर कमर के आगे की तरफ लाते हुए आसन पर बैठ जाएं, फिर घुटनों को धीरेधीरे जमीन से छुआने की कोशिश करें. इस क्रिया को भी कई बार करें.

गले के लिए : इसे करने के लिए सीधे बैठें, फिर एक हाथ को मोड़ कर सिर के पीछे की तरफ का हिस्सा पकड़ें और कुहनियों को ऊपर की ओर उठाएं. यही क्रिया दूसरे हाथ से भी दोहराएं. आसन पर बैठ कर दोनों हाथों को आगे की ओर ले जाएं. फिर धीमी गति से सांस लेते हुए हाथों को दोनों ओर फैलाएं. इस क्रिया को 10-12 बार दोहराएं.

 पीठ के लिए : पैरों को जमीन पर टिकाते हुए कुरसी पर सीधी बैठ जाएं. फिर दोनों हाथों से कमर को पकड़ें. आसन पर धीरे से हाथों और घुटनों के बल टेक लगाते हुए झुकें, फिर धीरेधीरे पीछे के मध्य भाग को ऊपर और नीचे की ओर ले जाएं.

गले की पीछे की पेशियों के लिए : इस क्रिया को करने के लिए घर की किसी दीवार के पास खड़ी हो जाएं. कंधों के बराबर दोनों हथेलियों को जोड़ कर रखें. दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बना कर रखें यानी पैर मिलें नहीं. फिर दीवार से 30 सैंटीमीटर की दूरी पर खड़े हो कर कुहनियों को मोड़ कर धीरेधीरे नाक से दीवार छूने की कोशिश करें. यह क्रिया फिर दोहराएं. यह व्यायाम प्रसव को भी आसान बनाता है.

जांघों की पेशियों के लिए : इसे करने के लिए सीधी लेट जाएं और फिर एक मोटे तकिए को बारीबारी से घुटनों के बीच 10 मिनट तक दबाए रखें. ऐसा कई बार करें.

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Summer Special: लंच में परोसें गट्टे का पुलाव

गट्टे की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी. लेकिन क्या आपने गट्टे का पुलाव ट्राय किया है. ये हैल्दी और आसानी से बनने वाली रेसिपी है, जो लंच में आप अपनी फैमिली को परोस सकते हैं.

सामग्री

2 कप बेसन 

 1/2 छोटा चम्मच अजवाइन

1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च 

 1 बड़ा चम्मच प्याज चौकोर कटा 

 2 प्याज पिसे द्य  4-5 कलियां लहसुन पिसी? 

 1 इंच टुकड़ा अदरक का कसा हुआ 

 4-5 बड़ी इलायची 

4-5 छोटी इलायची 

 2 छोटे टुकड़े दालचीनी 

 4-5 लौंग

5-6 साबुत कालीमिर्च 

 चुटकीभर हींग

2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर 

 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला 

 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर 

 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर 

 थोड़ी सी धनियापत्ती कटी 

 थोड़ी सी हरीमिर्च कटी हुई 

 घी या तेल आवश्यकतानुसार 

 1/4 कप घी

1 कप चावल 

 नमक स्वादानुसार.

विधि

बेसन को छान कर उस में नमक, लालमिर्च, अजवाइन और इच्छानुसार चौकोर कटी प्याज डाल कर पानी की मदद से बेसन का रोल बना कर भाप में पकाएं. पानी से निकाल कर अलग रखें व ठंडा होने पर गोलगोल कतले काटें. घी गरम करें व सुनहरा लाल होने तक तल कर अलग रखें. घी गरम करें व लालमिर्च व साबूत खड़ा गरममसाला डाल कर चटकाएं. दही में सारा पाउडर मसाला व नमक डालें. पिसी प्याज, लहसुन व अदरक डाल कर अच्छी तरह से भूनें. दही में मिला मसाला डाल कर अच्छी तरह भूनें. गट्टों वाला उबला पानी लगभग 21/2 प्याले डाल कर उबालें व गट्टे गलाएं. 1 बड़ा चम्मच तेल या घी गरम करें2-3 तेजपत्ते डाल कर करारे करें फिर चावल और गट्टे डाल कर ढक कर पुलाव तैयार करें. कटी हरीमिर्चों व धनियापत्ती से सजा कर परोसें.

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कथनी को मानें या करनी को

भारतीय जनता पार्टी आजकल जोरशोर से परिवारवादी पािटयों पर मोर्चा खोले हुए हैं. जहां उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई राज्यों में भाजपा का असर बना हुआ है, कई राज्यों में दूसरी तीसरी पीढ़ी के नेता जो पािटयां चला रहे हैं वे भाजपा की आंखों में किरकिरी बने हुए हैं.

भारतीय जनता पार्टी परिवार के विरुद्ध है या परिवारवादी पार्टियों के, पता नहीं चलता. अगर राजनीति में परिवार के लोगों का दखल खराब है. जनहित में नहीं तो फिर उद्योगों, व्यापारों में भी नहीं होगा. अगर परिवार का सदस्य होना किसी तरह की डिस्क्वालिफिकेशन है तो यह दूसरी पीढ़ी के टीचर, वकील, जज, आॢटस्ट, फिल्म स्टार, वक्ता, लेखक, संपादक प्रकाशक, महंताई, वैधवी, अफसरी सब पर लागू होना चाहिए.

यह भी समय नहीं आ रहा कि यदि पारिवार  का नाम लेना गलत है तो रामायण में दशरथ के पुत्रों को क्यों राज मिला, महाभारत में कुरूवंश क्यों कई पीढिय़ों से राज करता दिखाया गया था और क्यों भारतीय जनता पार्टी समर्थक उन्हीं को आदर्श क्यों मानती है?

भाजपा में कई पीढिय़ों के नेता हैं. यह भी सब को मालूम है. अब संशय है कि हम भाजपा के नेताओं की कथनी को मानें या करनी को. उन के भाषण सुनें या पुराणों की कहानियां, संयुक्त परिवार की महत्ता पर दादानाना का प्रवचन सुनें या राजनीति की बयानबाजी.

अगर राजनीति की तरह घरों में भी परिवारवाद न हो तो नई बहूओं को तो मजा ही आ जाएगा. इस का अर्थ होगा कि न सास की सेवा करना जरूरी है न ससुर की जी हजूरी. अगर हो सके तो अलग गृहस्थी बनाओ, अपने सुखदुख में रहो और भाजपा के मार्गदर्शकों को आदर्श मान कर परिवार को भूल जाओ क्योंकि उन के अनुसार तो परिवारवाद कोई कोरोना है जो देश के तंत्र को खा रहा है. भाईबहन को कहीं साथ काम नहीं करना चाहिए, यह मंचों पर खड़े हो कर जो कह रहे हैं वे उन बहनों को भरोसा दिला रहे हैं कि भाई से अपने हकों के लिए लड़ों, सरकार आप के साथ है.

इस ज्ञान के लिए धन्यवाद.

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व्यावहारिकता की खुशबू बिखेरते रिश्ते

नीता अपने मातापिता की इकलौती संतान है. नीता के पापा इस दुनिया में नहीं हैं, इसलिए अब उस की मां उसी के पास रहती हैं. नीता एक कामकाजी महिला है. उस का पति विकास भी नीता की मां की जिम्मेदारियां बखूबी निभाता है. वह यह जानता है कि अगर नीता की मां खुश रहेंगी तो बदले में उस के मातापिता को नीता से उचित सम्मान मिलेगा.

बदलते परिवेश में बदलते रिश्तों का यह स्वरूप वाकई तारीफ के काबिल है. अब जब संयुक्त परिवारों का तेजी से विघटन हो रहा है और एकल परिवार तेजी से अपने पांव जमा रहे हैं, तब ऐसे में लोगों की परिपक्व होती सोच हमारे समाज के लिए एक अच्छा संकेत है.

आज हम सभी इस बात को गहराई से महसूस कर रहे हैं कि जब तक हमारा जीवन है तब तक रिश्तों की अहमियत भी है. माना कि अब हमारे रिश्तों का दायरा सिकुड़ता जा रहा है पर बचे हुए रिश्तों को बचाने की पुरजोर कोशिश करना एक सुखद पहल है.

आयशा, जो एक मल्टीनैशनल कंपनी में उच्चपद पर कार्यरत है, किसी से खास मतलब नहीं रखती थी. पर जब वह बीमार पड़ी तब उसे महंगी चिकित्सा के साथसाथ प्यार के दो मीठे बोल सुनने की आवश्यकता भी महसूस हुई. बस, फिर तो ठीक होते ही उस ने अपने बिगड़े रिश्तों को जिस तरह संभाला, वह सभी के लिए अनुकरणीय बन गया.

रिश्तों को संजोना : 

रिश्तों में अहं की भावना की जगह अब जिम्मेदारी ने ले ली है. हर कोई अपनी परिपक्व सोच का परिचय देता हुआ रिश्तों की सारसंभाल में लगा है. अब जब सभी ही कामकाजी हैं और सभी के पास समय की कमी है, तब ऐसे में एकदूसरे के प्रति पनपती केयरिंग की भावना ने रिश्तों को एक नए कलेवर में ढाला है. इसलिए ही तो आज की सास अपनी कामकाजी बहू की परेशानियां भलीभांति समझने लगी है और शायद इसी के चलते वह अपनी सुबह की पूजा के आडंबरों को छोड़, किचन की अन्य जिम्मेदारियां भी बखूबी निभाने लगी है. और इसलिए ही सुबह की सैर से लौटते ससुरजी भी सब्जी व फलों की खरीदारी से गुरेज नहीं करते. इस तरह घर के कामों में हाथ बंटा कर दोनों ही मुख्यधारा से जुड़ने को प्रयासरत हैं.

अगर सासससुर बेहिचक घर की सारी जिम्मेदारियों में भागीदार बनते हैं तो बदले में उन के बेटेबहू भी उन्हें किसी चीज की कमी का एहसास नहीं होने देते. इसलिए ही तो इस बार जब नीरा को शिमला में कंपनी का गैस्टहाउस रहने को मिला तो वह अपने सासससुर को भी साथ ले गई. दिल्ली की उमसभरी गरमी से नजात पा कर उस के सासससुर को बहुत अच्छा लगा और साथ ही, नीरा की बदलती सोच के कारण उन लोगों की आपसी नजदीकियों में भी इजाफा हुआ. आपस में पनप रही छोटीमोटी गलतफहमियां भी दूर हो गईं.

बदलता नजरिया : 

रीमा ने इस बार राखी का गैटटुगैदर अपने यहां करने का मन बनाया था क्योंकि उस की भाभी भी वर्किंग हैं और कोई प्रोजैक्ट वर्क चलने के कारण वे इस बार राखी पर व्यस्त थीं. रीमा की इस पहल से उस के भाईभाभी खुश थे. पर, रीमा की सास उस के यहां रहने आई हुई थीं, इसलिए वह थोड़ी हिचक रही थी. पर जब रीमा की सास को यह सब पता चला तो न सिर्फ उन्होंने रीमा को प्यारभरी झिड़की दी बल्कि खुद आगे बढ़ कर सारे कामों में उस की मदद भी की. गैटटुगैदर के बाद जब सभी ने रीमा की सास की पाककला सराही तब रीमा का भी मन भर आया.

आज जब सभी पुरानी विचारधारा को छोड़ कर खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने की भावना से आगे बढ़ रहे हैं, तब ऐसे में सीमित होते रिश्तों को सहेजना ज्यादा आसान होता जा रहा है. शायद अब सभी इस बात को महसूस करने लगे हैं कि अच्छे लोगों का हमारी जिंदगी में आना अच्छा होता है. पर उन्हें संभाल कर रखना हमारा हुनर होता है.

पीछे छूटती परंपरागत सोच :

  आज इस तरह की पुरानी सोच कि, बेटी के घर का पानी पीना भी हराम है या भाईबहन के घर खाना अच्छा नहीं लगता, पर विराम लगा है. अब लोग अपनी सुविधा के अनुसार अपनी बेटी या बहन के घर जाने लगे हैं. आज अगर 1-2 बच्चों के साथ भी तथाकथित पुरानी सोच चलती रही तो हम डिप्रैशन का शिकार अवश्य ही हो जाएंगे क्योंकि सपनों का साथ व अपनों का प्यार हमें पगपग पर चाहिए और अब जब संयुक्त परिवार समाज के हाशिए पर सिमट कर रह गए हैं, तब ऐसे में ऐसी दकियानूसी सोच हमारे दिमाग का दिवालियापन ही घोषित करेगी.

काव्या की लवमैरिज है. अब चूंकि उस का मायका उस की ससुराल के पास ही है तब ऐसे में उस की मां अकसर ही उस की ससुराल आती रहती हैं क्योंकि काव्या अपने मातापिता की इकलौती संतान जो है. काव्या की शादी के बाद उस की मां अकेलेपन के कारण डिप्रैशन की शिकार हो गई थीं, इसलिए काव्या की सास खुद ही उन से मिलने चली जाती हैं या उन्हें अपने यहां बुला लेती हैं. कभीकभी तो दोनों साथसाथ लंच पर भी बाहर चली जाती हैं. 2 समधिनों को यों सहेलियों की तरह घूमते देख न सिर्फ सभी को अच्छा लगता है, बल्कि सभी की परंपरागत सोच में भी बदलाव लाता है.

आत्मकेंद्रित सोच पर लगता विराम: 

रिलेशनशिप ऐक्सपर्ट यह बात मानते हैं कि अब रिश्तों में निरंतर बढ़ रही आत्मकेंद्रित सोच पर विराम लगा है और शायद इसी वजह से रिश्तों का यह बदला हुआ स्वरूप उभरा है. अब हर कोईर् अपने ईगो को एकतरफ रख कर सामने वाले के बारे में सोच कर उस की सहायता करने लगा है, जो कि आज के बदलते परिवेश के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है. मालिनी और नेहा सगी बहनें हैं. उन का कोई भाई नहीं है. पिता की मृत्यु के बाद उन दोनों ने अपने घरों के पास अपनी मां को एक छोटा सा फ्लैट दिलवा दिया ताकि जरूरत पड़ने पर उन की मदद करने में उन्हें आसानी हो.

वैसे तो बड़ी होने के कारण मालिनी ही अपनी मां की ज्यादा सहायता करती थी पर इस बार जब उस की मां अचानक बीमार पड़ीं तब उस की छोटी बहन नेहा ने अपनी बीमार मां को संभाला. इस बार मालिनी मार्च माह की क्लोजिंग की वजह से अपने बैंक के कामों में बेहद बिजी थी. नेहा का खुद आगे बढ़ कर मां की सारी सारसंभाल देख मालिनी का दिल भर आया और जानेअनजाने ही उन दोनों की नजदीकियां भी बढ़ गईं.

रमेश इस बार सैलरी समय पर न मिलने पर अपने नए फ्लैट की ईएमआई नहीं भर पाया तो उस की छोटी बहन पारुल ने चुपचाप औनलाइन ईएमआई भर दी. जब रमेश को यह सब पता चला तो वह पारुल के प्रति कृतज्ञ हो उठा. बाद में जब रमेश ने पारुल को पैसे लौटाने चाहे तब पारुल गुस्सा हो गई और अपने से 8 साल बड़े भाई

रमेश से लगभग झिड़कती हुई बोली, ‘‘क्या भाई, क्या आप का घर मेरा घर नहीं है? और फिर, क्या घर की सारी जिम्मेदारियां निभाने का ठेका आप ने ही ले रखा है?’’

पारुल की इस प्यारभरी झिड़की से न सिर्फ रमेश को अच्छा लगा बल्कि उन के रिश्तों में भी एक नई ऊर्जा का संचार हुआ. आज के बदलते परिवेश में रिश्तों का यह बदला स्वरूप वाकई ही हमारे प्रगतिशील समाज की सही व सटीक तसवीर प्रस्तुत करता है. अब सभी का एकदूसरे की परेशानियों को समझते हुए आपस में सहायक बनना क्या रिश्तों में गर्मजोशी नहीं बढ़ाएगा?

समय चाहे कैसा हो, पर रिश्तों की मिठास ताउम्र बनी रहनी चाहिए क्योंकि रिश्तों के बिना हम अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकते. इसलिए रिश्तों को बचाने के लिए कुछ समझौते भी करने पड़ें तो पीछे न हटें. हमेशा समझौता करना सीखिए क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी रिश्ते को हमेशा के लिए छोड़ देने से बहुत बेहतर है. किसी ने क्या खूब कहा है :

जिंदगी में किसी का साथ काफी है,

कंधे पर किसी का हाथ काफी है,

दूर हो या पास फर्क नहीं पड़ता,

रिश्तों का बस एहसास काफी है.

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GHKKPM: पाखी के सफर को ऐश्वर्या शर्मा ने बताया Suffer, देखें वीडियो

सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisi Ke Pyaar Mein) कहानी इन दिनों दिलचस्प मोड़ लेते हुए नजर आ रही है. जहां सई सरोगेट मदर के जरिए विराट के बच्चे की मां बनने के बारे में सोच रही है तो वहीं पाखी, सई को बर्बाद करने का प्लान बना रही है. हालांकि रियल लाइफ में आयशा सिंह और ऐश्वर्या शर्मा मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं. कई बार ट्रोलिंग का शिकार हो चुकीं पाखी यानी ऐश्वर्या शर्मा भट्ट ने अपना रील शेयर किया है, जिसमें वह अपने सफर को बयां करती हुई दिख रही हैं.

पाखी का सफर किया बयां

 

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हाल ही में पाखी के सफर को बयां करते हुए एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह पाखी की कहानी को सफर से Suffer बताती नजर आ रही हैं. वहीं वीडियो में वह दूसरों को भी Suffer होने की बात कहती नजर आ रही हैं. ऐश्वर्या शर्मा की इस वीडियो पर जहां फैंस तारीफ कर रहे हैं तो वहीं ट्रोलर्स उन्हें ट्रोल करते दिख रहे हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं हैं, जो एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ट्रोल हुईं हैं. दरअसल, वह कई बार सीरियल गुम हैं किसी के प्यार में के ट्रैक और रोल के चलते ट्रोलिंग का शिकार हुई हैं.

 

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औनस्क्रीन मां संग मस्ती करती दिखीं ऐश्वर्या

 

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सम्राट की मौत और सई के मिसकैरिज के बाद अपनी मां संग रह रही पाखी जहां औनस्क्रीन प्लान बनाती नजर आ रही है तो वहीं औफस्क्रीन वह अपनी औनस्कीन मां मानसी संग मस्ती करती नजर आ रही हैं, जिसकी फोटोज एक्ट्रेस ने अपने सोशलमीडिया अकाउंट पर शेयर की है. दोनों की ये फोटोज देखकर मां-बेटी की बौंडिंग का अंदाजा लगाया जा सकता है.

दूसरी शादी करेगी पाखी!

 

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सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक की बात करें तो भवानी और सई सरोगेसी के लिए राजी हो गए हैं. हालांकि विराट इसके लिए तैयार नही है. लेकिन अपकमिंग एपिसोड में वह सरोगेसी के फैसले के लिए तैयार हो जाएगा. वहीं इसके लिए वह पाखी का सहारा लेते हुए नजर आएंगे. हालांकि सई-विराट को अलग करने के लिए पाखी भी सरोगेट मदर बनने के लिए राजी हो जाएगी और दोनों को अलग करने की कोशिश करती हुई नजर आएगी.

 

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