कटु सत्य: भाग 3- क्या हुआ था छवि के साथ

मंदिर पहुंचते ही फिर सती दादी का विचार मन पर हावी हो गया. जिन से वह कभी मिली नहीं थी,  देखा भी नहीं था, उन से कुछ ही दिनों में न जाने कैसा तारतम्य स्थापित हो गया था. बारबार उन का चेहरा उस के जेहन में आ कर उसे बेचैन कर रहा था. वह मंदिर के सामने खड़ी हो कर मंदिर में लगी उन की तसवीर को निहारने लगी. तसवीर में वे 20-22 वर्ष से ज्यादा नहीं होंगी, चेहरे पर छाई भोली मुसकान ने उस का मन मोह लिया. वह कल्पना ही नहीं कर पा रही थी कि जब वे जली होंगी तो उन का यही चेहरा कितना वीभत्स हो गया होगा.

‘‘बेटी, तुम कभी विवाह नहीं करना और अगर विवाह हो गया है तो कभी कन्या को जन्मने नहीं देना,’’ पीछे से आवाज आई. आवाज सुन कर उस ने पलट कर देखा तो पाया सफेद बाल तथा झुर्रियों वाला चेहरा उस की ओर निहार रहा था. छवि को अपनी ओर देख कर उस ने अपनी बात फिर दोहराई.

‘‘यह आप क्या कर रही हैं?’’

‘‘मैं सच कह रही हूं बेटी, बेटी के दुख से बड़ा कोई दुख इस दुनिया में नहीं है.’’

हताश निराश औरत की दुखभरी आवाज सुन कर छवि का मन विचलित हो उठा. ध्यान से देखा तो पाया वह लगभग 80 वर्ष की बुढि़या है. वह मंदिर की दीवार के सहारे टेक लगा कर बैठी थी तथा उसी की तरह मंदिर को निहारे जा रही थी. चेहरे पर दर्द की अजीब रेखाएं खिंच आई थीं. उसे एहसास हुआ कि यह अनजान वृद्धा भी उसी की भांति किसी बात से परेशान है. इस से बातें कर के शायद उस के मन का द्वंद्व शांत हो जाए. वह नहीं जानती थी कि वह वृद्धा उस की बात समझ भी पाएगी या नहीं. पर कहते हैं मन का गुबार किसी के सामने निकाल देने से मन शांत हो जाता है, यही सोच कर वह जा कर उस के पास बैठ गई तथा मन की बातें जबान पर आ ही गईं.

‘‘दादी, यह सती रानी का मंदिर है. कहते हैं ये अपने पति को बहुत प्यार करती थीं, उन के जाने का गम नहीं सह पाईं, इसलिए उन के साथ सती हो गईं. पर क्या एक औरत की अपने पति से अलग कोई दुनिया नहीं होती, यह तो आत्मदाह ही हुआ न? ’’ कहते हुए उस ने फोन पर यह सोच कर रिकौर्डिंग करनी प्रारंभ कर दी कि शायद इस घटना से संबंधित कोई सूत्र उसे मिल जाए.

वृद्धा कुछ क्षण के लिए उसे देखती रही, फिर कहा, ‘‘बेटी, तुम्हारा प्रश्न जायज है पर मर्द के लिए औरत सिर्फ औरत है. मर्द ही उसे कभी पत्नी बनाता है तो कभी मां, यहां तक कि सती भी. इस संसार की जननी होते हुए भी स्त्री सदा अपनों के हाथों ही छली गई है.’’

‘‘आप क्या कहना चाहती हैं, दादी?’’

‘‘मैं सच कह रही हूं बिटिया, लगता है तुम इस गांव में नई आई हो?’’

‘‘हां दादी, प्यार अलग बात है, पर मुझे विश्वास ही नहीं होता कि कोई औरत अपनी मरजी से अपनी जान दे सकती है.’’

‘‘तू ठीक कह रही है, बेटी. मैं तुझे सचाई बताऊंगी पर पता नहीं तू भी औरों की तरह बात पर विश्वास करेगी या नहीं. मेरी बात पर किसी ने भी विश्वास नहीं किया, बल्कि पगली कह कर लोग सदा मेरा तिरस्कार ही करते रहे. सती रानी और कोई नहीं, मेरी अपनी बेटी सीता है.’’

‘‘आप की बेटी सीता?’’आश्चर्य से छवि ने कहा.

‘‘हां बेटी, मेरी बेटी, सीता. पिछले 40 वर्षों से मैं इसे न्याय दिलवाने के लिए भटक रही हूं पर कोई मेरी बात पर विश्वास ही नहीं करता. इस के पति वीरेंद्र प्रताप सिंह की मृत्यु एक बीमारी में हो गई थी. उस समय यह पेट से थी. उस समय उस के जेठ को लगा भाई तो गया ही, अब दूसरे घर की यह लड़की उन की सारी संपत्ति में हिस्सा मांगेगी, इसलिए बलपूर्वक इसे अपने भाई की चिता के साथ जलने को मजबूर कर दिया. इस बात की खबर उस घर में काम करने वाली नौकरानी ने हमें दी थी. हम ने जब अपनी बात ठाकुर के सामने रखी तो वे आगबबूला हो गया. हम ने गांव वालों के सामने अपनी बात रखी तब ठाकुर के डर से किसी गांव वाले ने हमारा समर्थन नहीं किया. और तो और, नौकरानी भी अपनी बात से मुकर गई. जब मेरे पति और बेटे ने ठाकु र को देख लेने की धमकी दी तब ठाकुर ने न केवल मेरे पति बल्कि मेरे बेटे को भी अपने गुंडों के हाथों मरवा दिया. सबकुछ समाप्त हो गया बेटी.’’

‘‘दादी, वह दरिंदा कौन था?’’

‘‘ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह.’’

‘‘ठाकुर राघवेंद्र्र प्रताप सिंह?’’ सुन कर छवि स्तब्ध रह गई.

‘‘हां बेटी, वह दरिंदा ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह ही है जिस ने मेरी बेटी को मरने के लिए मजबूर किया. हमारे विरोध करने पर उस ने मेरे पूरे परिवार को मिटा डाला. मैं किसी तरह बच भागी तो मुझे पागल घोषित कर दिया.’’

‘‘दादाजी ने ऐसा किया, नहींनहीं. ऐसा नहीं हो सकता. मेरे दादाजी ऐसा नहीं कर सकते,’’ अचानक छवि के मुंह से निकला.

‘‘क्या तुम ठाकुर राघवेंद्र की पोती हो?’’ उस वृद्धा के चेहरे पर आश्चर्य झलका पर उस के उत्तर देने से पूर्र्व ही वह फिर कह उठी, ‘‘मैं जानती थी, तुम भी औरों की तरह मेरी बातों पर विश्वास नहीं करोगी. मुझ पर कोई विश्वास नहीं करता, सब मुझे पगली कहते हैं, पगली.’’

 

अट्टहास करती हुई वृद्धा उठी और टेढ़ेमेढे रास्तों में खो गई. वह वृद्धा सचमुच उसे पगली ही लगी. पर वह झूठ क्यों कहेगी. एक मां हो कर वह भला अपनी बेटी की छवि को धूमिल क्यों करेगी. किसी पर बेबुनियाद आरोप क्यों लगाएगी. यह नहीं हो सकता, अगर यह नहीं हो सकता तो आखिर सचाई क्या है? तभी पिछली सारी घटनाएं उस के मनमस्तिष्क में घूमघूम कर उस बुढि़या की बात की सत्यता का एहसास कराने लगीं.

नील भी यही कह रही थी कि सती दादी

हमारी छोटी दादी हैं तो क्या, दादाजी ने जायदाद के लिए अपने छोटे भाईर् की पत्नी को सती होने के लिए मजबूर किया. उन पर किसी को शक न हो, इसलिए उन्होंने सती दादी को इतना महिमामंडित कर दिया कि वहां हर वर्ष मेला लगने लगा. छवि का मन कल से भी ज्यादा अशांत हो गया था. दादाजी का एक वीभत्स चेहरा सामने आया था. एक दबंग और उस से भी अधिक लालची, जिस ने पैसों के लिए अपने ही छोटे भाई की गर्भवती पत्नी की जान ले ली. उस का मन किया कि जा कर सीधे दादाजी से पूछे पर उन से पूछने की हिम्मत नहीं थी. वे इतने रोबीले थे कि बच्चे, बड़े सभी उन से डरते थे. जमींदारी चली गई पर जमींदार होने का एहसास अभी भी बाकी था. वैसे भी, वे अपना गुनाह क्यों कुबूल करेंगे. जिस गुनाह को छिपाने के लिए उन्होंने छोटी दादी के घर वालों को मिटा डाला, गांव वालों का मुंह बंद कर दिया.

दादाजी से छवि का बात करना या बहस करना व्यर्थ था पर उस के जमीर ने उस का साथ नहीं दिया. वह अपने प्रश्नों का भंडार ले कर उन के कमरे की ओर गई. कमरे से आती आवाजों ने उसे चौकन्ना कर दिया. सुराग पाने की कोशिश में उस ने मोबाइल औन कर दिया- ‘‘ठाकुर साहब, संभालिए अपनी पोती को, आज जब वह गन्ने के खेत में थी तभी हम उस कम्मो को सताते हुए उधर से गुजरे. आप की बात मान कर हम ने कम्मो को लोगों की नजरों में डायन बना दिया है. कम्मो को मारते देख कर आप की पोती ने हमें मना किया. जब हम ने कहा कि वह डायन है तब उस ने कहा कि डायनवायन कोई नहीं होती, बच्चे उस की बुरी नजर के कारण नहीं बल्कि अन्य कारणों से मरे हैं. वह बड़ीबड़ी बातें कर रही थी. आज उसे मंदिर में उस बुढि़या से बातें करते भी देखा. अगर कुछ दिन और वह  यहां रही तो हमें डर है कि कहीं कम्मो का भेद न खुल जाए. आज तो कम्मो ने उस से बात नहीं की, कहीं…’’

‘‘नहींनहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा. ऐसा करो, कम्मो को समाप्त कर दो.’’

‘‘ आप क्या कह रहे हैं, ठाकुर साहब?’’

‘‘मैं ठीक कह रहा हूं. मैं नहीं चाहता कि उस की वजह से हमारे चरित्र पर कोई दाग लगे. बस, इतना ध्यान रखना कि उस की मृत्यु एक हादसा लगे. इतना अभी रखो, बाद में और दूंगा.’’ दादाजी ने उस के हाथ में नोट की गड्डी रखते हुए कहा.

तो क्या दादाजी और कम्मो…पहले उसे भोगा, फिर दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका. वह किसी को सचाई न बता पाए, इसलिए उसे डायन बना दिया. यह सुन कर वह अवाक रह गई. दरवाजा खुलने की आवाज ने उसे चैतन्य किया. वह ओट में खड़ी हो गई. दादाजी का एक अन्य घिनौना रूप उस के सामने था.

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Valentine’s Special: खामोश रह कर भी होता “इजहार ए प्यार”

‘आई लव यू’ कहनासुनना एक खूबसूरत एहसास है, जो 2 व्यक्तियों के मन में बसे प्रेम के भावों को अभिव्यक्त करने का सब से सरल माध्यम है. प्यार में बारबार इन 3 जादुई शब्दों को दोहराना प्रेमियों को एकदूसरे के करीब लाता है और साथ ही भावनात्मक सुरक्षा भी देता है. ‘आई लव यू’ सुनना हर स्त्री को प्रिय होता है. मगर अफसोस कि पुरुष जब तक प्रेमी रहता है, अपनी प्रेमिका को प्रसन्न करने के लिए दिनरात आई लव यू रटता रहता है, किंतु जैसे ही पति बन जाता है, इन शब्दों को बोलने में कंजूस हो जाता है.

विवाह के बाद नया पति बना पुरुष अपनी नईनवेली दुलहन के समक्ष कई बार भले ‘आई लव यू’ कह दे, किंतु जैसेजैसे समय बीतता जाता है उस की तरफ से इन शब्दों का प्रयोग कम होता जाता है. अंतरंग क्षणों में ये शब्द दोहरा भी दे, किंतु सत्य यही है कि दैनिक क्रियाकलापों के मध्य नियमित ये शब्द उच्चारित करना पतियों के स्वभाव में नहीं होता. पति अकसर भावनाओं को शब्दों में अभिव्यक्त करने में बड़े कंजूस होते हैं. पुरुष प्रवृत्ति होती ही ऐसी है. किंतु मन का अर्थ यह कतई नहीं है कि वे आप से प्रेम नहीं करते. बस होता यह है कि प्रेमी से पति बनते ही ये सब कहने व समझने की जिम्मेदारी पत्नी के कंधों पर आ जाती है. आप से अपेक्षा होती है कि आप उन की हर बात बिना कहे ही समझ लें. प्रेम की मौन भाषा भी.

हम यह नहीं कह रहे कि शब्दों का कोई मोल नहीं होता तथा विवाह के बाद एकदूसरे से ‘आई लव यू’ कहनासुनना अच्छा नहीं लगता, पर जान लें कि मौन संकेतों की भी एक बहुत प्रखर भाषा होती है, जिसे पढ़ना तथा समझना पत्नियों के लिए बेहद जरूरी हो जाता है. यदि आप के पति आप से सच्चा प्रेम करते हैं तो वह उन के व्यवहार व क्रियाकलापों से साफ झलक जाता है. हां, पत्नी को अपने पति की बौडी लैंग्वेज यानी देह की भाषा को पढ़नासमझना आना चाहिए. जैसे आप नवजात शिशु की शब्दहीन अभिव्यक्ति उस के दैहिक क्रियाकलापों द्वारा समझ जाती हैं, ठीक वैसे ही पति की देह भाषा में छिपे आंतरिक भावों, विचारों को भी समझने की जरूरत होती है.

समझें पति के मौन भाषा संकेत

अलिखित व्यवस्था है कि घर का कामकाज लड़कियां ही करेंगी. पत्नियों पर ही घर के सभी कार्यों का बोझ होता है, भले ही वे नौकरीपेशा क्यों न हों. ऐसी मानसिकता में पलाबढ़ा पति यदि दफ्तर से लौट कर अपनी पत्नी के घरेलू कार्यों में हाथ बंटाता है मसलन पत्नी किचन में खाना बना रही है और पति सलाद काट दे, टेबल लगा दे और फिर किचन समेटने में भी पत्नी की मदद करने पहुंच जाए तो समझ जाएं कि वह ‘आई लव यू’ कह रहा है. पुरुषों का अहं बहुत बड़ा होता है. अपनी कमजोरियों, निजी समस्याओं, दफ्तर की परेशानियों आदि को आमतौर पर वे अपनी पत्नी के साथ बांटना पसंद नहीं करते. यदि आप का पति आप से अपनी परेशानियां बताए और उन का हल ढूंढ़ने में सहायता मांगे तो स्वयं को सम्मानित महसूस करें. यह संकेत है कि आप का पति आप से प्रेम ही नहीं करता, अपितु आप पर विश्वास व आस्था भी रखता है. अत: अगली बार जब भी पति आप से कोई सलाह मांगे तो यह गिला मत दोहराना कि पति आप को कभी ‘आई लव यू’ नहीं कहता.

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पति अब जमीनजायदाद पत्नी के नाम से खरीदने लगे हैं. यह भले कानूनी व आर्थिक बचत के चलते हो, पर जरा सोचें कि लाखों रुपयों की संपत्ति क्या कोई बिना भरोसे यों ही किसी के नाम कर सकता है? जमीनजायदाद के तमाम कागज बेशक पति अपने कब्जे में रखें, किंतु आप के हस्ताक्षरों के बिना उसे न तो बेचा जा सकता है और न ही हस्तांतरित किया जा सकता है. इसलिए पत्नियां इसे एक साफ संकेत समझें कि पूरी दुनिया में आप का पति सब से अधिक भरोसा आप पर ही करता है. उसे आप के समर्पण व प्रेम पर पूरा यकीन है कि कल को आप जमीनजायदाद से ले कर भाग जाने वाली नहीं हैं. तो अब, जब भी आप का पति आप के नाम से कोई गाड़ी, मकान, दुकान, फैक्टरी या फ्लैट खरीदे तो समझ लें कि आप को ‘आई लव यू’ कहा गया है.

आप को शौपिंग आदि कराना माना कि एक पति के कर्तव्यों में शामिल है, किंतु भरे बाजार में यदि आप का पति आप के शौपिंग बैगों को स्वयं उठा कर चले तथा आप मात्र अपना पर्स थामे इतराती हुई इस दुकान से उस दुकान में घूमती रहें तो यह एक बड़ा संकेत है कि आप का पति आप से बहुत प्रेम करता है. सब से महत्त्वपूर्ण बात यह कि आप की अनापशनाप शौपिंग पर भी पति कोई ऐतराज न करे, तो इस से बड़ा सुबूत और क्या हो सकता है कि वह आप से ‘आई लव यू’ कह रहा है. पत्नियों के पास हमेशा शिकायतों के पुलिंदे रहते हैं, जिन्हें अकसर थकेमांदे घर लौटे पति के कानों में उड़ेलना शुरू कर देती हैं और आप का पति धैर्य से आप की नौनस्टौप बड़बड़ सुनता जाए तो यह आप के प्रति उन के प्रेम की इंतहा है.

जब पति आप को देख कर मुसकराए

माना कि मुसकराना बेहद सामान्य क्रिया है, पर यह बहुत कुछ कह जाती है. एक साधारण मुसकान आप के दिल की धड़कनों को तेज करने के लिए काफी है. याद करें जब आप पहली बार अपने पति से मिली थीं तो आप की तरफ स्नेह व प्रेम भरी दृष्टि से देखते हुए उन के चेहरे की मुसकराहट ने आप के दिल पर कैसी बिजलियां गिराई थीं. उस स्मृति को हमेशा ताजा रखें. जब भी आप का पति आप को देख कर मुसकराए, तो समझ लें कि उस ने आज तक जितने भी प्रेम में भीगे शब्द आप से कहें हैं. उन्होंने सभी की पति की यह मुसकराहट दोहरा रही है. जब भी पति आप के लिए कुछ ले कर आए, चाहे वह आप के काम का हो या न हो, पसंद आए या न आए, अपनी उसे नकारने की बात को मन से निकाल दें. पति का दिया तोहफा उस का अतिश्य प्रेम समझ कर कबूल करें. पति द्वारा आप की तारीफ करना, प्रेम भरी नजरों से देखना, तोहफा देना ये सबकुछ यही सिद्ध करता है कि पति आप से बहुत प्रेम करता है.

अब देर किस बात की. पति की आंखों में झांक कर देखें आप को ‘आई लव यू’ साफ लिखा नजर आएगा.

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समय सीमा: क्या हुआ था नमिता के साथ

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जानें Oats का इस्तेमाल करने के दिलचस्प ये 5 तरीके

लेखिका- दीप्ति गुप्ता

भारत में लोग ओट्स का सेवन एक  स्वस्थ नाश्ते के रूप में करते हैं. इसे खाने से शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. यह न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है  बल्कि यह कई पोषक तत्वों से भी भरपूर है. कुल मिलाकर शरीर को  पोषण देने के साथ यह कई बीमारियों से भी राहत दिलाता है.  अगर आप एक ऐसे सुपरफूड की तलाश में हैं जो पौष्टिक हो और मल्टीपर्पज भी. तो ओट्स से बेहतर कुछ नहीं है. यह एक ऐसा घटक है, जो आपके हर भोजन का हिस्सा हो सकता है. यह आपको लंबे समय तक स्वस्थ और तंदरूस्त रखने के लिए जरूरी जरूरी पोषक तत्व और फाइबर प्रदान करता है. ओट्स जैसे बहुमुखी भोजन का उपयोग कई व्यंजनों में एक घटक के रूप में किया जा सकता है. हालांकि, ओट्स खाने के फायदे कई गुना है, लेकिन इसके एक नहीं बल्कि कई उपयोग हैं. यहां हम आपको ओट्स को अपने दैनिक जीवन में उपयोग करने के दिलचस्प तरीके बता रहे हैं.

1. फेस मास्क-

मौसम में होने वाला बदलाव अक्सर आपकी त्वचा को खराब कर देता है. अगर आप केमिकल वाले उत्पादों से हटकर त्वचा को खूबसूरत बनाने के कुछ सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं, तो ओट्स का उपयोग नेचुरल क्लीनर के रूप में करें. ओट्स एंटीइंफ्लेमट्री और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो त्वचा से तेल को हटाते हैं, पोर्स को बंद करते हैं और त्वचा को एक्सफोलिएट करने में मदद करते हैं. ओट्स से बने फेस मास्क को सप्ताह में एक बार जरूर लगाना चाहिए.

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2. गंध को दूर करने के लिए-

अब तक आप किसी गंध को दूर करने के लिए टी बैग्स और बेकिंग सोड़ा का इस्तेमाल करते आए होंगे. लेकिन ओट्स भी गंध को दूर करने का बेहतरीन विकल्प है. ओट्स तरल, तेल और गंध को अवशोषित करता है, जो अक्सर दुर्गंध का कारण बनते हैं. इसके लिए आप बिना पके हुए ओट्स को खुले में रखें , जहां से इसकी महक आए.

3. खुजली से राहत के लिए-

प्राकृतिक और राहत देने वाले ओट्स में एक हल्का पीएच होता है. यह सूजन वाली त्वचा को बहुत जल्दी ठीक करता है. त्वचा विशेषज्ञ अक्सर एक्जिमा और अन्य त्वचा की स्थिति वाले लोगों के लिए ओट बेस क्रीम और बॉडीवॉश की सलाह देते हैं.

4. वजन घटाने के लिए-

सभी पोषक तत्वों के साथ ओट्स वजन घटाने में बहुत मदद करता है. एक कप ओटमील में 6 ग्राम प्रोटीन और 4 ग्राम फाइबर होता है, जिससे आप लंबे वक्त तक भरा हुआ महसूस करते हैं. ऐसे में वजन कम करने में बहुत मदद मिलती है.

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5. हीट पैक के रूप में-

पीठ में दर्द या शरीर के किसी अन्य हिस्से में दर्द से निपटना  निराशाजनक हो सकता है. यदि दर्द होने पर आपके पास हीट पैक नहीं है , तो चिंता करने की जरूरत नहीं है.  आप ओट्स का हीट पैक बना सकते हैं. इसके लिए एक कपड़े के बैग को ओट्स से भरें और बैग को बंद कर दें. एक बार जब बैग तैयार हो जाए, तो माइक्रोवेव में 30 सैकंड के अंतराल पर तब तक गर्म करें  जब तक की हीट पैक उतना गर्म न हो जाए , जितना आप चाहते हैं. हीट पैक को दर्द वाली जगह पर रखें  और आराम से लेट जाएं.

एक्सपर्ट के अनुसार कब की जाए सरोगेसी

भारत में कुछ सालों से बच्चे का सुख पाने के लिए पैरेंट्स सरोगेसी का सहारा ले रहे हैं. सरोगेसी बच्चा पैदा करने की एक आधुनिक तकनीक है. इसके जरिए कोई भी कपल या सिंगल पैरेंट बच्चा पैदा करने के लिए किसी महिला की कोख किराए पर ले सकता है. बॉलीवुड में इस तकनीक का फैशन बन गया है सेलेब्रिटीज इस तकनीक का खूब सहारा ले रही है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या होती है सरोगेसी और कब की जानी चाहिए . इस बारे में बता रहीं है,

Dr. Sonu Balhara Ahlawat, Head Unit I, Reproductive Medicine, Artemis Hospital, Gurugram.

क्या होती है सरोगेसी

सरोगेसी के जरिये कोई महिला अपने या फिर डोनर के एग्स के जरिये किसी दूसरे कपल के लिए प्रेगनेंट होती है. जो महिला अपनी कोख में दूसरे का बच्चा पालती है, वो सेरोगेट मदर कहलाती है.

सरोगेसी भी दो तरह की होती है. पहली है ट्रेडिशनल सरोगेसी तो दुसरी जेस्टेशनल सरोगेसी.

ट्रेडिशनल सरोगेसी में होने वाले पिता या डोनर का स्पर्म  सरोगेट महिला के एग्स से मैच कराया जाता है. इस सरोगेसी में सरोगेट मां ही बच्चे की बायोलॉजिकल मां होती है.

वहीं दूसरी तरफ जेस्टेशनल सेरोगेसी में सरोगेट मां का बच्चे से कोई जेनेटिक संबंध नहीं होता है. इस सरोगेसी में सरोगेट मां के एग्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और वो बच्चे को जन्म देती हैं. इसमें होने वाले माता पिता के स्पर्म और एग्स का मेल टेस्ट ट्यूब बेबी (ivf तकनीक) के जरिये कराने के बाद इसे सरोगेट मदर के यूट्रस में इम्प्लांट किया जाता है.

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सरोगेसी एग्रीमेंट

सरोगेसी में एक महिला और एक बच्चे की चाह रखने वाले कपल के बीच एक तरह का एग्रीमेंट किया जाता है. जिसमें सरोगेसी कराने वाला कपल ही कानूनी रूप से बच्चे के असली पैरेंट्स होते हैं. वहीं जो सरोगेट मां होती है, उसे सरोगेस  कराने वाले कपल की तरफ से प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ख्याल रखने और मेडिकल जरूरतों के लिए रुपये भी दिए जाते हैं.

कब की जाए सरोगेसी

सरोगेसी कई कारणों से की जाती है जैसे किसी महिला की बच्चेदानी है ही नहीं या तो जन्मजात या किसी कारण से जैसे कैंसर या किसी दुर्घटना की वजह से उसकी बच्चेदानी निकाल दी गई हो. यह एक कारण हो सकता है. इसके अलावा किसी संक्रमण की वजह से बच्चेदानी खराब हो गई हो.बच्चेदानी की दीवारों में कोई संक्रमण हो जैसे हमारे देश में टीवी की बीमारी बहुत ज्यादा होती है. यदि बच्चेदानी की दीवारें आपस में चिपक जाती हैं तो महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है. बच्चेदानी है ही नहीं या लगातार आईवीएफ असफल होता है या महिला किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जिससे उसकी जान पर खतरा है जिसमें वह गर्भधारण नहीं कर सकती है तो वैसी स्थिति में भी सरोगेसी का विकल्प चुनना पड़ता है.

इसके अलावा और भी कई स्वास्थ्य से जुड़ी जटिलताएं होती हैं जैसे कैंसर के इलाज में महिला की कीमोथेरेपी चल रही हो या अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं हों तो सरोगेसी करनी पड़ती है. इसके अलावा सिंगल मेल संतान चाहता है तो उसे भी सरोगेसी करनी पड़ती है.

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कातिल फिसलन: भाग 3- दारोगा राम सिंह के पास कौनसा आया था केस

सलोनी की बात सुनते ही पास खड़ी महिला सिपाही ने उसे मारने के लिए हाथ ऊपर किया, लेकिन राम सिंह ने उसे रोक दिया और सलोनी से पूछा, ‘‘तो तुम्हारी उंगलियों के निशान उस छड़ पर कैसे आए?’’

‘‘मुझे नहीं मालूम साहब… मुझे नहीं मालूम,’’ कहते हुए सलोनी फूटफूट कर रोने लगी. दारोगा राम सिंह बाहर निकला तो उस ने सुधीर को बच्चों के साथ थाने की बैंच पर बैठा पाया.

दारोगा राम सिंह ने सुधीर से कहा, ‘‘तुम अपने वकील से बात कर लो. अगर वकील रखने में पैसों की समस्या आ रही है तो कोर्ट में अर्जी दे देना. कोर्ट तुम को वकील मुहैया कराएगा.’’

दारोगा राम सिंह को उन लोगों से हमदर्दी होने लगी थी, क्योंकि उस ने सुखलाल का असली रूप वीडियो में देख लिया था, लेकिन सुधीर गुस्से में चिल्ला उठा, ‘‘मुझे कोई वकील नहीं करना साहब. मैं क्यों परेशान होऊं उस के लिए, जो उस सुखलाल के साथ गुलछर्रे उड़ाती थी और मुझे ही जेल भिजवा दिया था. हो गया होगा दोनों में पैसों को ले कर झगड़ा और यह खून हो गया.’’

‘‘ऐसा नहीं है सुधीर…’’ दारोगा राम सिंह ने उसे समझाया, ‘‘गैरकानूनी हथियार रखने के जुर्म में तुम्हारी जो गिरफ्तारी पहले हुई थी, वह सुखलाल ने केवल तुम्हारी बीवी को पाने के लिए साजिशन कराई थी. इस में तुम्हारी बीवी का कोई कुसूर नहीं था. वह बेचारी तो बस तुम्हारे लिए उस के आगे झुकती चली गई. वह तुम से और केवल तुम से ही प्यार करती है.’’

सुधीर हैरानी से दारोगा राम सिंह का मुंह ताकने लगा. राम सिंह ने सुखलाल के मोबाइल फोन में मिला वही वीडियो उस के आगे चला दिया.

‘‘नहींनहीं… बंद कीजिए इसे दारोगा बाबू,’’ वीडियो देखता हुआ सुधीर चिल्लाया. सलोनी के शरीर पर सुखलाल का हाथ लगने वाला सीन वह नहीं देख पाया और वहीं बैठ कर रोने लगा. सलोनी के प्रति उस का शक आंसुओं से बाहर निकल चुका था.

सुधीर बोला, ‘‘मैं तो उसी रात सुखलाल को मारने उस के कमरे में गया था साहब, जिस के अगले दिन उस की लाश मिली. उस समय वह सो रहा था, लेकिन कानूनी बंधन का डर मुझे रोकने में कामयाब हो गया और मैं घर से निकल कर पूरी रात तनाव में इधरउधर भटकता रहा.

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‘‘कल दोपहर को घर लौटने पर उस हैवान के मरने की खुशखबरी मिली. खैर, चाहे उसे मेरी सलोनी ने मारा हो या जिस ने भी, मैं उस का शुक्रगुजार हूं.’’

पिता को यों रोते देख साथ खड़े बच्चे और भी सहम गए. राम सिंह ने सुधीर को उठाया और लौकअप की ओर इशारा किया. उस का संकेत समझ कर सुधीर बेतहाशा सलोनी से मिलने भागा. सलोनी भी उसे देखते ही उस की ओर दौड़ी, लेकिन दीवार बनी सलाखों ने उस के पैर रोक दिए.

सुधीर उस का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘चिंता मत करना. चाहे जैसे भी हो, तुम को यहां से मैं छुड़ा कर ले जाऊंगा, वरना अपनी भी जान दे दूंगा,’’ इतना कह कर वह वहां से चल दिया.

कुछ दिन बीत गए. दारोगा राम सिंह का बचपन एक अनाथ के रूप में बीता था. मांबाप के बिना बच्चों की क्या हालत होती है, वह अच्छी तरह जानता था. सलोनी थाने में बंद थी और सुधीर वकील खोजने में. ऐसे में उस के बच्चे किस हाल में होंगे?

दारोगा राम सिंह को चिंता हुई तो वह अपनी पत्नी के साथ खानेपीने का कुछ सामान ले कर सुधीर के घर आया. उस का सोचना सही निकला और बच्चे बेसहारा जैसे घर में बैठे मिले.

दारोगा राम सिंह ने उन से पूछा, ‘‘पापा कहां हैं बेटा?’’

‘‘वे तो सुबह से बाहर गए हैं… हम को भूख लगी है, लेकिन पास वाली आंटी ने अभी तक खाना नहीं दिया,’’ बड़े वाले बेटे ने कहा.

दारोगा राम सिंह का कलेजा भर आया. उस ने अपनी बीवी की ओर देखा. राम सिंह की बीवी ने दोनों बच्चों को अपनी गोद में बिठाया और बोली, ‘‘मैं भी तो तुम्हारी आंटी हूं. देखो, मैं लाई हूं खाना.’’

वह उन को खाना खिलाने लगी. कुछ देर सकुचाने के बाद बच्चे उस से घुलनेमिलने लगे.

तभी छोटा वाला बेटा बोल पड़ा, ‘‘आंटीआंटी, मेरे भैया बहुत बहादुर हैं.’’

‘‘अच्छा, क्या किया है भैया ने?’’

‘‘भैया ने उस विलेन अंकल को नीचे गिरा दिया, जो मम्मी को आएदिन परेशान करता था.’’

दारोगा राम सिंह को उस की यह बात सुन कर झटका लगा. उस ने तुरंत उस की ओर देखा, लेकिन फिर समझदारी से काम लेते हुए बड़े वाले बेटे से पूछा, ‘‘बेटा, तुम ने ऐसा क्यों किया जो तुम्हारा यह प्यारा सा छोटा भाई बता रहा है?’’

बड़ा वाला बेटा मुसकरा कर बोला, ‘‘अंकल, मम्मी कहती हैं कि मच्छर मारने वाली दवा पीने से आदमी मर जाता है, इसलिए मैं ने वही दवा उस विलेन अंकल के जूस में मिला दी थी. छोटे भाई ने तो मेरा फोटो भी लिया था.’’

दारोगा राम सिंह के कानों में जैसे बम फूट रहे थे. बड़े वाले बेटे ने उसे मोबाइल फोन में अपना वह फोटो भी दिखाया, जिस में वह सुखलाल के शराब की बोतल को जूस की बोतल समझ के उस में लिक्विडेटर मिला रहा था.

दारोगा राम सिंह कुछ और पूछता, इस से पहले ही छोटा वाला बेटा बोला, ‘‘रात को हम ने चुपके से सीढ़ी पर कंचे रख दिए थे… विलेन अंकल रोज की तरह बाथरूम जाने के लिए बाहर आए और फिसल कर नीचे गिर गए. इस का मैं ने वीडियो भी बनाया है. मेरे भैया… बहुत बहादुर…’’ कह कर वह ताली बजाने लगा.

दारोगा राम सिंह ने वीडियो लिस्ट से जल्दी से वह वीडियो खोजा. सचमुच उस में बड़ा वाला बेटा सीढ़ी पर कंचे रखता दिख रहा था और उस के तुरंत बाद सुखलाल अपना पेट पकड़े वहां आया क्योंकि लिक्विडेटर मिली शराब पी कर सोने के बाद शायद उस की तबीयत बिगड़ रही थी. उस का पैर इसी जल्दी में कंचों पर पड़ा और वह नीचे गिर गया, जहां जमीन पर पड़ी छड़ पेट में धंस गई होगी और वह मर गया.

चूंकि छड़ों के वे टुकड़े सलोनी ने ही उधर फेंके थे, सो उन पर उस की उंगलियों के निशान भी मिल गए, इस घटना का समय बिलकुल वही था जो पोस्टमार्टम में सुखलाल की मौत का बताया गया था.

‘‘बेटा, तुम ने ऐसा क्यों किया?’’ दारोगा राम सिंह ने बड़े बेटे से पूछा.

वह लड़का बोला, ‘‘वे विलेन अंकल मम्मी को हमेशा परेशान करते थे. मैं ने बहुत बार छिप कर देखा था. उस दिन मम्मी के सिर में उन्होंने ही चोट लगा दी थी. जब मैं स्कूल से आया तो पता चला और मुझे बहुत गुस्सा आया.’’

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‘‘और यह मोबाइल फोन कहां से मिला तुम को?’’

‘‘यह नानाजी ने हम को दिया है वीडियो गेम खेलने के लिए,’’ बड़े बेटे के कहने के बाद वे दोनों बच्चे फिर खाना खाने लगे.

दारोगा राम सिंह ने अपनी पत्नी की ओर देखा. वह भी हैरान थी. उस ने पूछा, ‘‘बचपन को क्या सजा दी जाएगी?’’

‘‘बचपन किलकने के लिए होता है…’’ दारोगा राम सिंह का चेहरा अब तनाव मुक्त दिखने लगा था. वह हंसते हुए बोला, ‘‘यह केस कानून के लिए एक हादसा माना जाएगा. इन बच्चों की मां भी कुछ दिनों में घर आ जाएगी.’’

कातिल फिसलन: भाग 2- दारोगा राम सिंह के पास कौनसा आया था केस

तफतीश पूरी होने तक के लिए सुखलाल के कमरे को सील कर दारोगा राम सिंह वहां से चला गया.

दोपहर को अचानक सुधीर लौट आया. सलोनी भाग कर उस से लिपट गई और पूछा, ‘‘कहां चले गए थे आप अचानक आधी रात से?’’

‘‘दुकान के लिए निकलना है मुझे…’’ सुधीर ने बेरुखी से उसे खुद से अलग करते हुए कहा.

सलोनी उसे देखती रह गई. उस ने फिर बातों का सिलसिला शुरू करना चाहा, ‘‘अरे, पुलिस आई थी यहां. सुखलाल की मौत हो गई न आज…’’

‘‘हां, मुझे पता चला है पड़ोसियों से इस बारे में,’’ सुधीर ने उसे बीच में ही टोक दिया, ‘‘तुम को पैसे की तंगी हो जाएगी, फिर अब तो…’’

सलोनी उस की बात सुन कर सन्न रह गई. सुधीर तीखे लहजे में आगे बोला, ‘‘मेरे कहने का मतलब है कि हम को अब किराया नहीं मिल सकेगा न.’’

इतना कह कर सुधीर अपना थैला ले कर दुकान के लिए निकल गया. सलोनी उस के कहे का मतलब अच्छी तरह समझ रही थी. वह बच्चों को अपनी बांहों में भर कर उदास मन से फिर वहीं बैठ गई.

कुछ दिन ऐसे ही बीतते रहे. उधर सुखलाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी थी. दारोगा राम सिंह उसे पढ़ने में लगा था. सुखलाल की मौत की वजह पेट में लोहे की छड़ धंसना बताई गई थी. बाकी शरीर पर लगी चोटें जानलेवा नहीं थीं. इस के अलावा एक बात जिस ने राम सिंह को चौंका दिया, वह थी सुखलाल के शरीर में मिली जहरीली चीज की मात्रा. जहरीली चीज भी क्या थी, घरों में मच्छर भगाने के लिए काम में आने वाला लिक्विडेटर उस की शराब में मिलाया गया था.

दारोगा राम सिंह को समझ नहीं आ रहा था कि इस का क्या मतलब है? लिक्विडेटर इतना ज्यादा जहरीला नहीं होता कि कोई उस का इस्तेमाल किसी को जहर दे कर मारने के लिए करे. और सुखलाल खुद उसे पीएगा नहीं, फिर यह क्या चक्कर है? फोरैंसिक और फिंगर प्रिंट रिपोर्टें भी उस के सामने थीं. उन के मुताबिक जो छड़ सुखलाल के पेट में धंसी थी, उस पर सुखलाल के अलावा एक और आदमी की उंगलियों के निशान मिले थे.

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सुखलाल पर एकसाथ इतने सारे हमले कैसे हुए? पहले शराब में जहरीली चीज दी गई, उस के बाद पेट में छड़ घोंपी गई. मारने वाले को इतने से भी संतोष नहीं मिला तो उस ने उस को ऊपर से नीचे गिरा दिया और सुखलाल ने अपने बचाव के लिए किसी को कोई आवाज क्यों नहीं दी?

दारोगा राम सिंह को समझ आने लगा कि सुखलाल की मकान मालकिन सलोनी उस से झूठ बोल रही है. उस ने गुप्त रूप से उस के पड़ोसियों से पूछताछ शुरू कर दी. बाकियों ने तो कुछ खास बात नहीं बताई लेकिन सुखलाल के कमरे की खिड़की के ठीक सामने रहने वाले छात्र विवेक ने कहा, ‘‘सर, उस

रात मैं रोज की तरह जाग कर अपने कंपीटिशन के इम्तिहान की तैयारी में जुटा था तो मैं ने सुधीर भैया को सीढि़यों से ऊपर सुखलाल चाचा के कमरे में जाते देखा था, पर वे बाहर कब आए, इस का मुझे ध्यान नहीं.’’

‘‘अच्छा,’’ राम सिंह को ऐसी ही किसी बात का शक तो पहले से था. उस ने आगे पूछा, ‘‘सुखलाल और सुधीर

की कोई दुश्मनी? वह तो किराएदार था उस का.’’

‘‘सर… वह…’’ विवेक खुल कर कुछ बोलने से बचता दिखा. राम सिंह ने उसे भरोसा दिलाया कि केस में उस का नाम नहीं आएगा.

विवेक ने डरतेडरते कहा, ‘‘सर, सुधीर भैया को शक था सुखलाल चाचा और सलोनी भाभी को ले कर…’’

दारोगा राम सिंह मुसकरा उठा कि यहां भी वही चक्कर. वह वहां से चल पड़ा. गैरकानूनी हथियार रखने के केस में सुधीर के पहले भी गिरफ्तार होने की जानकारी तो उसे अपने थाने के रिकौर्ड से मिल ही चुकी थी. वह चाहता तो सुधीर को सीधे गिरफ्तार कर सकता था, मगर वह अपने महकमे के दूसरे पुलिस वालों सा नहीं था. किसी भी केस को बिना किसी पक्षपात के हल करना उस की पहचान थी.

दारोगा राम सिंह को अब सुखलाल के मोबाइल फोन की तलाश थी. उसे वह न तो सुखलाल के कमरे में मिला था और न ही उस के कपड़ों में. अचानक उस की छठी इंद्रिय ने उस से कुछ कहा और वह उसी जगह आया जहां सुखलाल की लाश पड़ी मिली थी.

दारोगा राम सिंह ने इधरउधर खोजना शुरू किया और आखिर एक पौधे के पीछे छिपा पड़ा सुखलाल का मोबाइल फोन उसे मिल गया.

थाने आ कर दारोगा राम सिंह उसे खंगालने लगा और जल्दी ही अपने

काम की चीज उसे नजर आ गई. उस में सुखलाल और सलोनी का एक वीडियो था जो शायद सुखलाल ने चोरीछिपे बनाया था. उस में सुखलाल अपने कपड़े उतारते हुए कह रहा था, ‘बस, मुझे खुश करो, तुम्हारा पति तुरंत थाने से बाहर आ जाएगा.’

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वहीं सलोनी उस के आगे गिड़गिड़ा रही थी, ‘मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं… मुझे ऐसा काम करने को मजबूर मत कीजिए.’

लेकिन सुखलाल ने उस की एक न सुनी और अपने दिल की कर के ही उसे बिस्तर पर लिटा दिया. वीडियो को आगे देखना राम सिंह को सही नहीं लगा. वह हर औरत की इज्जत करता था. उस ने ऐसे भी कई केस देखे थे जहां औरत

ने अपने साथ हुए इस तरह के जुल्मों

का बदला खुद लिया था. उस ने अपनी इसी सोच के साथ एक बार फिर सलोनी से मिलने का फैसला किया और उस के घर पहुंचा.

‘‘दारोगा बाबू, आप यहां,’’ सलोनी उसे देख कर ठिठक गई.

‘‘डरिए नहीं… बस, आप से कुछ जानकारियां चाहिए थीं,’’ दारोगा राम सिंह उसे सहज करने के लिए बोला और सामान्य तरीके से इसी केस के सिलसिले में बातें करने लगा.

इसी बीच दारोगा राम सिंह ने अपना मोबाइल फोन सलोनी के हाथ में दिया जिस से उस की उंगलियों के निशान उस पर आ जाएं और उन का मिलान छड़ पर मिले निशानों से हो सके.

सलोनी उस की यह चालाकी समझ नहीं सकी. राम सिंह ने वापस आ कर उन निशानों की जांच कराई और इस बार फिर उस का सोचना सही निकला. छड़ पर सुखलाल के अलावा सलोनी की

ही उंगलियों के निशान थे. उस ने तुरंत सलोनी को गिरफ्तार कर लिया.

लौकअप में सलोनी दारोगा राम सिंह के सामने रोरो कर कहने लगी, ‘‘दारोगा साहब, मैं ने किसी का खून नहीं किया है. जिंदगी तो मेरी उस सुखलाल ने बरबाद की थी. मैं अकेली उस भारीभरकम आदमी को कैसे मार सकती हूं? मैं ने तो अपने घर की साफसफाई में कुछ दिनों पहले ही लोहे की छड़ों के सारे टुकड़े पास की उसी खाली जमीन में फेंक दिए थे.’’

आगे पढ़ें- दारोगा राम सिंह ने सुधीर से…

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कातिल फिसलन: भाग 1- दारोगा राम सिंह के पास कौनसा आया था केस

‘‘देखिए… मैं अभी नहा कर आई हूं,’’ सुखलाल से खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए सलोनी किसी तरह बोली, लेकिन वह शराबी कहां मानने वाला था. वह बेशर्मी से बोला, ‘‘इसीलिए तो अभी खासतौर से तुम को प्यार करने आया हूं. तरोताजा फल का स्वाद ही अलग होता है.’’

इसी पकड़धकड़ में सलोनी का सिर टेबल के कोने से जा टकराया और उस की चीख निकल गई, ‘‘आह…’’

लेकिन सलोनी की कमजोरी तो जिस्मानी से ज्यादा दिमागी थी. वह कसमसा कर रह गई और सुखलाल उस के ऊपर छा गया.

तकरीबन 15 मिनट बाद सलोनी के जलते दिल पर अपने जहर की बरसात करने के बाद संतुष्टि की सांसें भरता सुखलाल उठा और कहने लगा, ‘‘बस, हो तो गया. कोई ज्यादा समय थोड़े ही लगता है हम को काम करने में. तुम्हीं बेकार में टैंशन ले लेती हो और हम को भी दे देती हो,’’ इस के बाद वह बाहर चला गया.

सलोनी ने भरी आंखों से घड़ी देखी तो बच्चों के स्कूल से लौटने का समय हो रहा था. बुझे मन से वह दोबारा नहाने चली गई. बाहर आ कर अपने माथे की चोट पर एंटीसैप्टिक क्रीम लगा ही रही थी कि दरवाजे की घंटी बज उठी.

सलोनी ने दरवाजा खोला. उस के दोनों बेटे स्कूल से आ चुके थे.

बड़े बेटे की नजर अपनी मां के माथे पर गई तो वह पूछ बैठा, ‘‘मम्मी, यह चोट कैसे लगी?’’

‘‘वह जरा टेबल से सिर टकरा गया. तुम दोनों फ्रैश हो लो. मैं आलू के परांठे बना रही हूं,’’ सलोनी ने जल्दी से उसे टाला और रसोईघर में चली गई.

सलोनी के साथ इस तरह की घटनाओं की भूमिका तो उसी दिन से शुरू हो गई थी जब तकरीबन 6 महीने पहले उस के पति सुधीर ने पैसे की तंगी कम करने के लिए सुखलाल को ऊपर का कमरा किराए पर दिया था. उन को तब पता नहीं था कि कि 50 साल का सुखलाल किस कदर काइयां आदमी है. उस के तार इलाके के कुछ बड़े दबंगों से जुड़े थे और पुलिस से भी.

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टीवीकूलरपंखे वगैरह की रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाला सुधीर सीधासादा आदमी था. सुखलाल की गंदी नजरें यहां आते ही खुद से 10 साल छोटी सलोनी पर टिक गई थीं. पहली मुलाकात में ही वह उस के हुस्न को देखता रह गया था, जब वह उस के लिए चाय ले कर आई थी. इस के बाद तो सुखलाल ने उस पर लगातार डोरे डालने शुरू कर दिए थे.

जब सलोनी ने सुखलाल की दाल नहीं गलने दी तो उस ने एक दिन अपना गैरकानूनी कट्टा चुपके से सुधीर की दुकान में रखवा कर इलाके के अपने परिचित दारोगा से उस को गिरफ्तार

करा दिया.

अपने पति को दिलोजान से चाहने वाली सलोनी ने हर मुमकिन कोशिश कर ली लेकिन सुधीर को छुड़ा नहीं पाई. तब एक रात इसी सुखलाल ने सलोनी को अपने कमरे में इस बारे में बात करने के लिए बुलाया और अपने मन की कर ली. सुबह उस ने अपने नशे में होने का बहाना बनाया और सुधीर की रिहाई का लालच दे कर उसे किसी से कुछ भी न बताने के लिए राजी कर लिया.

रोजरोज थाने में थर्ड डिगरी झेल रहा बेकुसूर सुधीर अगले दिन ही रिहा कर दिया गया. सलोनी उस की हालत देख कर रो पड़ी.

सुखलाल ने उस के इलाज के लिए कुछ पैसे दे कर सलोनी की रहीसही हिम्मत भी तोड़ दी. उस ने सोचा कि अपनेआप को एक बार दागदार कर के उस ने अपना घर और सुहाग बचा लिया है, लेकिन उस का यह सोचना गलत निकला.

सुखलाल पर सलोनी का स्वाद लग चुका था. अब वह अकसर उस को मौका पाते ही दबोच लेता था.

आज भी सलोनी के साथ वही हुआ. वह बारबार सोचती कि सुधीर को सबकुछ बता दे, लेकिन सुखलाल का डर उस की जबान सिल देता.

शाम को सुधीर दुकान से आया और सलोनी के माथे पर लगी चोट देख कर शंका भरी आवाज में सवाल करने लगा.

दरअसल, सुधीर को यह सारा मामला किसी और ही नजरिए से दिखने लगा था. वह सोचता था कि सलोनी और सुखलाल के बीच कुछ है और उस का खमियाजा पति होने के नाते थाने में गिरफ्तार हो कर उसे भुगतना पड़ा.

सलोनी ने सुधीर से भी अपनी चोट का वही बहाना बनाया जो उस ने अपने बच्चों से बनाया था. सुधीर उस का जवाब सुन कर चुपचाप वहां से चला तो गया, लेकिन आज उस की आंखों में सलोनी ने एक ऐसी आग की झलक देखी जो उस ने पहले कभी महसूस नहीं की थी.

अगली सुबह बाहर हो रहे शोर से सलोनी जागी तो उस ने सुधीर को अपने पास नहीं पाया. वह हड़बड़ी में अपने बाल बांधती बाहर भागी. उस के घर के बगल वाली खाली जमीन के सामने लोगों की भीड़ लगी थी. कोई आदमी कह रहा था, ‘‘जिंदा है कि मर गया?’’

ये शब्द सुनते ही सलोनी को बेहोशी आने लगी. कहीं सुधीर ने तनाव में आ कर खुदकुशी तो…

घबराहट में वह बेतहाशा लोगों को धकियाती आगे बढ़ी तो पाया कि सामने सुखलाल खून से लथपथ गिरा पड़ा था. उस के पेट में लोहे की एक छड़ धंसी थी और जिस्म शांत हो चुका था.

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इसी बीच पुलिस भी आ गई. नए दारोगा राम सिंह ने कुछ ही दिनों पहले इस इलाके का चार्ज लिया था और सुखलाल उस से भी मेलजोल बढ़ाने में लगा रहता था लेकिन राम सिंह की ईमानदारी के चलते वह कामयाब नहीं हो सका था.

सलोनी घर वापस आई और सुधीर को पूरे घर में तलाशा. उसे नहीं पा कर उस को फोन मिलाया. वह भी बंद मिला.

सलोनी सिर पकड़ कर रोने लगी कि आखिर वही हुआ जिस से बचने के लिए उस ने अपना सबकुछ लुटा दिया था… आखिरकार सुधीर कानून का मुजरिम बन ही गया.

सुखराम की लाश को कस्टडी में लेने के बाद दारोगा राम सिंह सलोनी

के घर आया क्योंकि सुखलाल उसी का किराएदार था. उस ने सुखलाल के कमरे की तलाशी ली. सीढ़ीघर के बाहर

की तरफ दीवार नहीं बनी थी जिस के चलते वहां से नीचे गिरने का खतरा बना रहता था.

दारोगा राम सिंह ने अंदाजा लगा लिया कि यहीं से सुखलाल भी नीचे गिरा है. उस के कमरे में रखी शराब की बोतलों को आगे की जांच के लिए जब्त कर उस ने सलोनी से सवाल किया, ‘‘आप के पति कहां हैं?’’

‘‘ज… जी, वे मेरे मायके गए हैं, कल रात को… मेरे चाचाजी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी तो उन को ही देखने,’’ सलोनी ने झूठ बोल दिया ताकि राम सिंह का शक सुधीर पर न जाए. अपनी बात की तसदीक तो वह अपने मायके वालों को समझा कर करा ही सकती थी.

आगे पढ़ें- दोपहर को अचानक सुधीर लौट आया…

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क्या ‘गोपी बहू’ ने औनस्क्रीन देवर संग कर ली है सगाई, जानें क्या है सच

कलर्स के रियलिटी शो Bigg Boss 15 का हिस्सा रह चुकीं एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) आए दिन सुर्खियों में रहती हैं. वहीं हाल ही में अपनी सर्जरी के बाद देवोलीना भट्टाचार्जी ने कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह अपनी सगाई की अंगूठी  (Devoleena Bhattacharjee Engagement) को फ्लौंट करती नजर आ रही हैं. वहीं इस फोटो में उन्हें प्रपोज करते हुए गोपी बहू यानी देवोलीना के औनस्क्रीन देवर विशाल सिंह (Vishal Singh) नजर आ रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

सगाई की फोटोज हुई वायरल

दरअसल, एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ फोटोज शेयर की थीं, जिनमें साथ निभाना साथिया के जिगर यानी एक्टर विशाल सिंह,  देवोलीना भट्टाचार्जी को घुटनों पर बैठकर प्रपोज करते नजर आ रहे थे. वहीं दूसरी फोटोज में विशाल सिंह के साथ हाथ में फूल और डायमंड रिंग फ्लौंट करते हुए देवोलीना नजर आ रही थीं. वहीं दोनों ने इन फोटोज के साथ कैप्शन में #IT’S OFFICIAL लिखा था, जिसके बाद फैंस और सेलेब्स दोनों को बधाई देते हुए दिखाई दिए थे.

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सगाई का ये था सच

 

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सगाई की फोटोज वायरल होने के बाद देवोलीना भट्टाचार्जी और विशाल सिंह ने अपनी एक वीडियो में अपनी सगाई का सच बताया. दरअसल, देवोलीना भट्टाचार्जी ने बताया कि वह जल्द ही इट्स ऑफिशियल नाम की एक म्यूजिक वीडियो में विशाल सिंह संग काम करने वाली हैं, जिसके चलते दोनों ने झूठी सगाई का नाटक किया था. वहीं सच जानने के बाद फैंस निराश नजर आए.

डेटिंग को लेकर सुर्खियों में रहता है कपल

 

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साथ निभाना साथिया में देवर भाभी के रोल में नजर आ चुके देवोलीना भट्टाचार्जी और विशाल सिंह अक्सर अपनी डेटिंग की खबरों के चलते सुर्खियों में रहते हैं. हालांकि दोनों ने कभी अपने रिलेशनशिप को लेकर कोई खुलासा नहीं किया है. लेकिन दोनों की सगाई की खबर से फैंस का खुश नजर आए थे.

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फ़िल्मी परिवेश में जन्मी और पली – बड़ी हुई 24 साल की यंग एक्ट्रेस अनन्या पांडे ने अपनी कोमलता और खूबसूरती से इंडस्ट्री में एक जगह बना ली है. उनमे हर नई किरदार को करने में एक जुनून है, जो उन्हें बाक़ी नई एक्ट्रेस से अलग बनाती है. सोशल मीडिया पर छाने वाली अनन्या के फोलोअर्स काफी है. चंकी पांडे और भावना पांडे की इस बेटी ने फिल्म स्टूडेंट ऑफ़ द इयर 2 से इंडस्ट्री में कदम रखी और एक के बाद एक अलग-अलग फिल्मों में नजर आ रही है. फिल्मों के अलावा अनन्या ने कई विज्ञापनों में भी काम किया है. इसकी वजह उनका सौम्य स्वभाव है.

अभिनय के साथ-साथ वह युनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ कैलिफोर्निया, लोस एन्जिलोस में फैशन डिजाईनिंग की कोर्स भी कर चुकी है. अनन्या का फैशन स्किल काफी अच्छा है और वह अपने हिसाब से पोशाक का चयन करती है. इसके अलावा अनन्या को घूमना और जिम जाना बहुत पसंद है, इसलिए वह कई बार पैपराज़ी फोटोग्राफर का शिकार हो जाती है.हिंदी सिनेमा जगत में अनन्या अपने बोल्ड लुक और हॉट पर्सनालिटी के लिए जानी जाती है. बॉलीवुड में इस एक्ट्रेस की एक्टिंग को काफी सराहनीय माना जाता है, जिसे अनन्या ने हर फिल्म में काफी मेहनत कर संभव बनाई. उनकी फिल्म ‘गहराइयाँ’ रिलीज पर है,उन्होंने कुछ बातें अपनी जर्नी की शेयर की, आइये उन बातों को जानते है.

जरुरी है रिलेशन को बनाए रखना

रिलेशनशिप के बारें में अनन्या बताती है कि प्यार मेरे लिए दोस्ती है, जिसे मैंने अपने पेरेंट्स से सीखा है. 24 साल की शादीशुदा जिंदगी बिता लेने के बाद भी वे अच्छे फ्रेंड्स है. उनमें आपस में झगड़े भी होते है, पर वे दोनों साथ में खुश रहते है. मेरे लिए वही व्यक्ति मेरा जीवनसाथी बन सकता है, जिसके साथ मैं कोम्युनिकेट अच्छी तरह से कर सकूँ और वह मुझे हमेशा हंसाए. उसे मेरे पिता की तरह होने की आवश्यकता है. रियल लाइफ में मेरा पेरेंट्स के साथ सबसे गहरा रिश्ता है.

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पसंद है चुनौतीपूर्ण फिल्में

गहराइयाँ फिल्म में अनन्या ने काफी चुनौती पूर्ण भूमिका निभाई है,जो उनकी उम्र से बड़ी भूमिका है. उनका कहना है कि मैं इसे बोल्ड चरित्र नहीं, बल्कि मैच्योर, इमोशनल चरित्र कहना पसंद करुँगी, जिसे करने सेपहले मैं घबराई हुई थी, लेकिन मुझे इसे करना भी था, क्योंकि ये मेरी विशलिस्ट के डायरेक्टर शकुन बत्रा की है. उन्होंने किसी फिल्म को फ़िल्मी से अधिक रियल दर्शाने की कोशिश की है. इसलिए निर्देशक शकुन बत्रा के साथ बैठकर मेरे किरदार को समझना पड़ा. केवल मैं ही नहीं बल्कि मेरे को स्टार सिद्दांत चतुर्वेदी को भी अपनी भूमिका के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. इस फिल्म से मैंने बहुत सारी बातें सीखी है, जिसमें अगर कोई दुखी है, तो भले ही वह जोर से रोये नहीं, उसके आंसू न बहे , लेकिन उसके अंदर उसका इमोशन तो है और उसे पर्दे पर सजीव करना आसान नहीं होता. वैसे ही अगर आप दुखी होने पर हँसते है, तो उसमे ख़ुशी नहीं, बल्कि उस दबी हुई दुःख का एहसास होता हो,ऐसे कई मुश्किल अभिनय मैंने दीपिका से सीखे है. ये भाग मेरे लिए बहुत कठिन था. इसके अलावा किसी भी रिश्ते की गहराई में जाने पर अगर आपको धोखा मिलता है, तो उसे बिना छुपाये बाहर निकाल देना और शेयर करना जरुरी होता है, क्योंकि अपने अंदर किसी स्ट्रेस को रखकर मैं कुछ अलग नहीं सोच सकती और ये सभी के लिए लागू होती है.भले ही कोई कुछ कहे पर मुझे अपने रिश्ते को सच्चाई से जीना पसंद है.

एन्जॉयड द शूट

अनन्या को इस चरित्र को निभाने के बाद में कुछ समस्या भी आई.अनन्या कहती है कि निर्देशक के अनुसार मैं टिया खन्ना की तरह हूँ, इसलिए मुझे अधिक मेहनत करने की जरुरत नहीं है, लेकिन रियल लाइफ में मैं वैसी लड़की नहीं. दर्शक मुझे अनन्या नाम से नहीं, बल्कि टिया के रूप में याद रखेंगे और मेरे लिए ये डरावनी बात थी, पर मैंने खुद को इस डर से निकाला और शूट को एन्जॉय किया, लेकिन ये सही है कि मैं इस

पॉजिटिव सोच है जरुरी

अनन्या हर फिल को खुद चुनती है और अगर कुछ गलत हुआ तो उसकी जिम्मेदारी खुद को ही समझती है. उनके पेरेंट्स अनन्या की इस मैच्योरिटी को पसंद करते है. वह हमेशा सकारात्मक सोच रखना पसंद करती है. इतना ही नहीं अनन्या ने साल 2019 में सो पॉजिटिवएक संस्था ‘डिजिटल सोशल रेस्पोंसिबिलिटी’ को ध्यान में रखकर की है. वह कहती है कि मैं एक सेफ कम्युनिटी डिजिटल पर बनाना चाहती थी. केवल मेरे साथ ही नहीं हर किसी के साथ ऐसा होने पर, खासकर इन्स्टाग्राम पर लोग एक दूसरे को नफरत की निगाह से देख रहे थे, पर हर इंसान चुप था, जबकि एक बातचीत शुरू होने की जरुरत थी, जिसके साथ भी ऐसा होता है, वह व्यक्ति कैसे और कहाँ कॉम्प्लेन करें. सो पॉजिटिवने एक स्ट्रीम लाइन और गाइडबुक बनाई है, जहाँ परेशान व्यक्ति कहाँ और कैसे शिकायत करें. पिछले साल कोविड की दूसरी लहर के समय मैंने एक सीरीज बनाई थी, जो सोशल मीडिया फॉर सोशल गुड के नाम से था. मैंने 10 यंग लोगों से उनके काम के बारें में बात किया तो पता चला कि वे सोशल मिडिया पर अच्छे काम के लिए जुड़े है, जिसमें बीमार को एम्बुलेंस मुहैय्या करवाना, जरुरतमंदों को ऑक्सिजन सिलिंडर दिलवाना, स्ट्रीट जानवरों को सुरक्षा देना आदि कई काम कर रहे है, लेकिन इस काम के पीछे कौन व्यक्ति एक्टिव है, उसे बताने की कोशिश की है. इसका अनुभव भी मेरे साथ अच्छा हुआ है. जब मैं दूसरे शहर में भी किसी यूथ से मिलती हूँ तो यूथ इस मुहीम की तारीफ़ करते है और इस मुहीम से जुड़ने के बाद वे खुद को कभी अकेला महसूस नहीं करते.

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पेरेंट्स का मिला सहयोग

अनन्या आगे कहती है कि मैं पिता के बहुत करीब हूँ. मेरे पिता परिवार की एक मजबूत इंसान है. उन्होंने हमेशा समझाया है कि जीवन में सफलता और असफलता से अधिक प्रभावित नहीं होना चाहिए, दोनों ही परिस्थिति में न्यूट्रल रहने की जरुरत है. असफलता से सफलता को हैंडल करना अधिक मुश्किल है. इसके अलावा मेरे पिता ने कभी मुझे किसी बात पर टोका नहीं, लेकिन जरुरत के समय हमेशा मेरे साथ रहे.

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