जब अजीब हो सैक्सुअल व्यवहार

ओसामा की पत्नी सैक्स की भूखी

अलकायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन की सब से बड़ी पत्नी ने दावा किया है कि ओसामा की सब से छोटी पत्नी चौबीसों घंटों सैक्स करना चाहती थी. द सन के अनुसार खैरियाह ने कहा कि अमल हमेशा ओसामा के साथ सोने के लिए झगड़ा करती थी. मुझे ओसामा के पास नहीं जाने देती थी.

क्या कहता है सर्वे

अमेरिका ने भी सैक्स की लत को 2012 में मानसिक विकृति करार दिया और इस काम को लास एंजिल्स की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अंजाम दिया है. भारत में यह समस्या अभी शुरुआती दौर में है. लेकिन एक ओर मीडिया और इंटरनैट पर मौजूद तमाम उत्तेजना फैलाने वाली सामग्री की मौजूदगी तो दूसरी ओर यौन जागरूकता और उपचार की कमी के चलते वह दिन दूर नहीं जब सैक्स की लत महामारी बन कर खड़ी होगी. क्याआप को फिल्म ‘सात खून माफ’ के इरफान खान का किरदार याद है या फिर फिल्म ‘मर्डर-2’ देखी है? फिल्म ‘सात खून माफ’ में इरफान ने ऐसे शायर का किरदार निभाया है, जो सैक्स के समय बहुत हिंसक हो जाता है. इसी तरह ‘मर्डर-2’ में फिल्म का खलनायक भी मानसिक रोग से पीडि़त होता है. फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ में भी नाना पाटेकर प्रौब्लमैटिक बिहेवियर से पीडि़त होता है. इसे न सिर्फ सैक्सुअल बीमारी के रूप में देखना चाहिए, बल्कि यह गंभीर मानसिक रोग भी हो सकता है.

सैक्सोलौजिस्ट डाक्टर बीर सिंह, डाक्टर एम.के. मजूमदार और मनोचिकित्सक डाक्टर स्मिता देशपांडे से बातचीत के आधार पर जानें कि सैक्सुअल मानसिक रोग कैसेकैसे होते हैं:

ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर

फैटिशिज्म: इस में व्यक्ति उन वस्तुओं के प्रति क्रेजी हो जाता है, जो उस की सैक्स इच्छा को पूरा करती हैं. इस बीमारी से पीडि़त व्यक्ति अपने पासपड़ोस की महिलाओं के अंडरगारमैंट्स चुरा कर रात को पहनता है. कभीकभी ऐसे लोग महिलाओं पर बेवजह हमला भी कर देते हैं या फिर उन्हें छिप कर देखते हैं.

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सैक्स फैरामोन: सैक्स फैरामोन यानी गंध कामुकता से पीडि़त व्यक्ति काफी खतरनाक होता है. ऐसा व्यक्ति स्त्री की डेट की गंध से उत्तेजित हो जाता है. ऐसे में कोई भी स्त्री, जिस की देह की गंध से वह उत्तेजित हुआ हो, उस का शिकार बन सकती है. वह उस स्त्री को हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकता है.

सैक्सुअली प्रौब्लमैटिक बिहेवियर: सैक्स से पहले पार्टनर को टौर्चर करने के मनोविकार को प्रौब्लमैटिक बिहेवियर भी कहते हैं, जिसे नाना पाटेकर की फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ में दिखाया गया है. महिला की आंखों पर पट्टी बांधना, उस के हाथपैर बांधना, उसे काटना, बैल्ट या चाबुक से मारना, दांत से काटना, सूई चुभोना, सिगरेट से जलाना, न्यूड घुमाना, चुंबन इतनी जोर से लेना कि दम घुटने लगे, हाथों को बांध कर पूरे शरीर को नियंत्रण में लेना और फिर जो जी चाहे करना. इस तरह के कई और हिंसात्मक तरीके होते हैं, जिन्हें ऐसे पुरुष यौन क्रिया से पहले पार्टनर के साथ करते हैं.

निम्फोमैनिया: निम्फोमैनिया काफी कौमन डिजीज है. इस की पेशैंट केवल फीमेल्स ही होती हैं. उन में डिसबैलेंस्ड हारमोंस की वजह से हाइपर सैक्सुअलिटी हो जाती है. फीमेल्स के सैक्सुअली ज्यादा ऐक्टिव हो जाने की वजह से उन्हें मेल्स का साथ ज्यादा अच्छा लगने लगता है. ऐसी लड़कियों में मेल्स को अपनी तरफ अट्रैक्ट करने की चाह काफी बढ़ जाती है. वे ऐसी हरकतें करने लगती हैं, जिन से लड़के उन की तरफ अट्रैक्ट हों. ऐसा न होने पर उन्हें डिप्रैशन की प्रौब्लम भी हो जाती है.

पीड़ा रति नामक काम विकृति: इस बीमारी में व्यक्ति संबंध बनाने से पहले महिला को बुरी तरह पीटता है. यौनांग को बुरी तरह नोचता है. पूरे शरीर में नाखूनों से घाव बना देता है. पीड़ा रति से ग्रस्त पुरुष अपने साथी को पीड़ा पहुंचा कर यौन संतुष्टि अनुभव करता है. ऐसी अनेक महिलाएं हैं, जिन्हें शादी के बाद पता चलता है कि उन के पति इस तरह के किसी ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर से पीडि़त हैं. ऐसी स्थिति में उन्हें जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक या सैक्सोलौजिस्ट के पास ले जाना जरूरी हो जाता है. अगर इलाज के बाद भी पुरुष सही न हो, तो किसी वकील से मिल कर आप परामर्श ले सकती हैं कि ऐसे व्यक्ति के साथ पूरी जिंदगी बिताना सही है या फिर इस रिश्ते को खत्म कर लेना.

वैवाहिक बलात्कार: सुनने में अटपटा सा लगता है कि क्या विवाह के बाद पति बलात्कार कर सकता है. लेकिन यह सच है कि कुछ महिलाओं को अपने जीवन में इस त्रासदी से गुजरना पड़ता है. इस प्रकार के पति हीनभावना के शिकार होते हैं. उन्हें सिर्फ अपनी सैक्स संतुष्टि से मतलब होता है. अपने साथी की भावनाएं उन के लिए कोई माने नहीं रखतीं. हमारे हिंदू विवाह अधिनियम के तहत इस तरह पत्नी की इच्छा व सहमति की परवाह किए बिना पति द्वारा जबरन यौन संबंध बनाना यौन शोषण व बलात्कार की श्रेणी में आता है.

आमतौर पर शराब के नशे में पति इस तरह के अपराध करते हैं. शराब के नशे में वे न केवल पत्नी का यौनशोषण करते हैं वरन उन से मारपीट भी करते हैं. यह कानूनन अपराध है. वैसे पति द्वारा पत्नी पर किए गए बलात्कार के लिए हमारे हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 375 और 379 के तहत पत्नियों को कई अधिकार प्राप्त हैं. वे कानूनी तौर पर पति से तलाक भी ले सकती हैं.

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पीडोफीलिया: पीडोफीलिया यानी बाल रति पीडोफीलिया से पीडि़त पुरुष छोटे बच्चे के साथ यौन संबंध बना कर काम संतुष्टि पाते हैं. वे बच्चों के साथ जबरदस्ती करने के बाद पहचान छिपाने के लिए बच्चे की हत्या तक कर डालते हैं. पीडोफीलिया से पीडि़त व्यक्ति में यह भ्रांति होती है कि बच्चे के साथ यौन संबंध बनाने पर उस की यौन शक्ति हमेशा बनी रहेगी. ऐसे व्यक्ति अधिकतर 14 साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं.

सैक्स मेनिया: इस से ग्रस्त व्यक्ति के मन में हर समय सैक्स करने की इच्छा रहती है. वह दिनरात उसी के बारे में सोचता है. फिर चाहे वह औफिस में काम कर रहा हो या फिर दोस्तों के साथ पार्टी में हो, उसे हर वक्त सैक्स का ही खयाल रहता है. वह अपने सामने से गुजरने वाली हर महिला को उसी नजर से देखता है. यह एक प्रकार का मानसिक रोग होता है, जिस में व्यक्ति के मन में सैक्स की इच्छा इस कदर प्रबल हो जाती है कि वह पहले अपनी पत्नी को बारबार सैक्स करने के लिए कहता है और फिर बाहर अन्य महिलाओं से भी संबंध बनाने की कोशिश करता है. एक पार्टनर से उस का काम नहीं चलता है. उसे अलगअलग पार्टनर के साथ सैक्स करने में आनंद आता है.

इस बीमारी से पीडि़त व्यक्ति का कौन्फिडैंस इस हद तक बढ़ जाता है कि उसे लगता है कि उस के लिए कुछ भी असंभव नहीं है. जो भी वह चाहता है उसे पा सकता है. अपने इसी जनून के चलते कई बार वह अपना अच्छाबुरा सोचनेसमझने की शक्ति भी खो देता है और फिर कोई अपराध कर बैठता है. उसे उस का पछतावा भी नहीं होता, क्योंकि ऐसा कर के उस के दिल और दिमाग को अजीब सी संतुष्टि मिलती है, जो उसे सुकून देती है.

सैक्स फोबिया: यह सैक्स से जुड़ी एक समस्या है. जिस तरह सैक्स मेनिया में व्यक्ति के मन में सैक्स को ले कर कुछ ज्यादा ही इच्छा होती है उसी तरह कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सैक्स में कोई रुचि नहीं होती. जब ऐसी अलगअलग प्रवृत्ति के 2 लोग आपस में वैवाहिक संबंध में बंधते हैं, तो सैक्स के बारे में अलगअलग नजरिया रखने के कारण सैक्स की प्रक्रिया और मर्यादा को ले कर उन में विवाद शुरू होता है और दोनों में से कोई भी इस बात को नहीं समझ पाता कि सैक्स मेनिया और सैक्स फोबिया, मानव मस्तिष्क में उठने वाली सैक्स को ले कर 2 अलगअलग प्रवृत्तियां हैं. दोनों के ही होने के कुछ कारण होते हैं और थोड़े से प्रयास और मनोचिकित्सक की सलाह के साथ इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है.

पीपिंग: पीपिंग का मतलब है चोरीछिपे संभोगरत जोड़ों को देखना और फिर उसी से यौन संतुष्टि प्राप्त करना. संभोगरत अवस्था में किसी को देखने से रोमांच की स्वाभाविक अनुभूति होती है. हेवलाक एलिस ने अपनी पुस्तक ‘साइकोलौजी औफ सैक्स’ में लिखा है कि संभ्रांत लोग अपनी जवानी के दिनों में दूसरी औरतों को सैक्स करते हुए देखने के लिए उन के कमरों में ताकाझांकी करते थे. यही नहीं सम्मानित मानी जाने वाली औरतें भी परपुरुष के शयनकक्षों में झांकने की कोशिश किया करती थीं. अगर आदत हद से ज्यादा बढ़ जाए तो एक गंभीर मानसिक रोग के रूप में सामने आती है.

ऐग्जिबिशनिज्म: इस डिसऔर्डर से पीडि़त व्यक्ति अपने गुप्तांग को किसी महिला या बच्चे को जबरदस्ती दिखाता है. इस से उसे खुशी और संतुष्टि मिलती है. ऐसे लोग दूसरों को अप्रत्यक्ष रूप से हानि पहुंचाना चाहते हैं. हमारे देश में किसी को इस तरह तंग करना कानूनन अपराध है. ऐसा करने वालों को निश्चित अवधि की कैद और जुर्माना देना पड़ सकता है.

फ्रोट्यूरिज्म: इस सैक्सुअल डिसऔर्डर से पीडि़त व्यक्ति किसी से भी संबंध बनाने से पहले अपने गुप्तांग को रगड़ता या दबाता है. यह डिसऔर्डर ज्यादातर नपुंसकों में पाया जाता है.

बेस्टियलिटि: इस में व्यक्ति के ऊपर सैक्स इतना हावी हो जाता है कि वह किसी के साथ भी सैक्स करने में नहीं झिझकता. ऐसे में वह ज्यादातर असहाय लोगों या जानवरों का उत्पीड़न करता है.

सैडीज्म ऐंड मैसेकिज्म: इस से पीडि़त व्यक्ति ज्यादातर समय फैंटेसी करता रहता है. ऐसे लोग सैक्स के समय अपने पार्टनर को नुकसान भी पहुंचाते हैं.

ऐक्सैसिव डिजायर: अगर किसी शादीशुदा पुरुष का मन अपनी पत्नी के अलावा अन्य महिलाओं के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने को करे तो वह एक डिसऔर्डर से पीडि़त होता है.

सैक्स ऐडिक्शन: सैक्स ऐडिक्शन एक प्रकार की लत है, जिस में पीडि़त व्यक्ति को हर जगह दिन और रात सैक्स ही सूझता है. ऐसे लोग अपना ज्यादातर समय सैक्स संबंधी प्रवृत्तियों में बिताने की कोशिश करते हैं. जैसे कि पोर्न वैबसाइट देखना, सैक्स चैट करना, पोर्न सीडी, अश्लील एमएमएस देखना. एक सैक्स ऐडिक्ट की सैक्स इच्छा बेकाबू होती है. उस की प्यास कभी पूरी तरह नहीं बुझती. ऐसे लोग समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. वे बच्चों, बुजुर्गों या जानवरों के साथ सैक्स कर सकते हैं.

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ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर के कारण

वैज्ञानिक, मनोचिकित्सक ऐबनौर्मल सैक्सुअल बिहेवियर के उत्पन्न होने के बारे में अभी तक सहीसही कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि मस्तिष्क में स्थित न्यूरोट्रांसमीटर में किसी प्रकार की खराबी, मस्तिष्क की रासायनिक कोशिकाओं में गड़बड़ी, जींस की विकृति आदि कारणों की वजह से व्यक्ति ऐबनौर्मल सैक्सुअल बिहेवियर से पीडि़त हो जाता है. अगर हम बात करें सैक्स ऐडिक्शन की तो कुछ वैज्ञानिक ऐसा भी मानते हैं कि 80% सैक्स ऐडिक्ट लोगों के मातापिता भी जीवन में अकसर सैक्स ऐडिक्ट रहे होंगे. ऐसा भी माना जाता है कि अकसर ऐसे लोगों में सैक्सुअल ऐब्यूज की हिस्ट्री होती है यानी ज्यादातर ऐसे लोगों का कभी न कभी यौन शोषण हो चुका होता है. इस के अलावा जिन परिवारों में मानसिक और भावनात्मक रूप से लोग बिखरे हुए हों, ऐसे परिवारों के लोगों के भी सैक्स ऐडिक्ट होने की आशंका रहती है.

इस तरह के डिसऔर्डर की कई वजहें हो सकती हैं. जिन लोगों की उम्र 60 साल से ज्यादा होती है वे भी इस का शिकार हो सकते हैं. दूषित वातावरण, गलत सोहबत, अश्लील पुस्तकों का अध्ययन, ब्लू फिल्में अधिक देखने आदि की वजह से व्यक्ति ऐसी काम विकृति से पीडि़त हो जाते हैं. विवाह के बाद जब पत्नी को अपने पति के काम विकृत स्वभाव के बारे में पता चलता है तब उस की स्थिति काफी परेशानी वाली हो जाती है.

डिसऔर्डर को दूर करने के उपाय

अगर शादी के बाद पत्नी को पता चले कि उस का पति किसी ऐसे ही रोग से पीडि़त है, तो उसे संयम से काम लेना चाहिए. ऐसे पति पर गुस्सा करने, उस के बारे में ऊलजलूल बकने, यौन इच्छा शांत न करने देने, ताना देने आदि से गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है. ऐसे पति तुरंत किसी तरह का गलत निर्णय भी ले सकते हैं. यहां तक कि हत्या या आत्महत्या का निर्णय भी ले लेते हैं.

काम विकृति से पीडि़त पति को प्यार से समझाएं. सामान्य संबंध बनाने को कहें. जब पति न माने तब अपनी भाभी या सास को इस की जानकारी दें.

ऐसे लोगों का मनोचिकित्सक से इलाज कराया जा सकता है. इन में सब से पहले मरीज की काउंसलिंग की जाती है, जिस से पता लगाया जाता है कि मरीज बीमारी से कितना ग्रस्त है. उस के बाद उसे दवा दी जाती है.

वक्त रहते डाक्टर से परामर्श किया जाए तो इस तरह के डिसऔर्डर ठीक हो जाते हैं. लेकिन यह परेशानी ठीक नहीं हो रही और पति मानसिक व शारीरिक पीड़ा पहुंचाता है तो ऐसे व्यक्ति से तलाक ले कर अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने के बारे में सोच सकती हैं.

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‘गहराइयां’ के ट्रेलर लांच पर इमोशनल हुईं Deepika Padukone, जानें वजह

अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘गहराइयाँ’ की ट्रेलर लांच होने के मौके पर दीपिका भावुक हो गयी, क्योंकि उन्होंने इस फिल्म में उनकी भूमिका अबतक की सभी फिल्मों से अलग बताया है, क्योंकि इसमें दिखाई गयी कहानी भारत में पहली बार होगी, ऐसी फिल्में विदेशों में बहुत सामान्य होती है. इसे करने के पीछे उनकी भावनाएं है,जिसे उन्होंने अपने रियल लाइफ में जिया है. इसलिए उन्होंने इस फिल्म को करने के बारें में जरा भी नहीं सोची. वह इस फिल्म में अलीशा की भूमिका निभा रही है. इसमें रिलेशनशिप और प्यार को एक अलग नजरिये से दिखाया गया है, जिसमें प्रेम लालसा और तड़प खास है,जिसे हमारे देश के लोग अँधेरे में रहकर निभाते है.

वह कहती है कि रिलेशनशिप या प्यार को कई तरीके से निभाया जा सकता है, ये केवल बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के लिए नहीं होती, बल्कि किसी दोस्त या रिश्ते में भी हो सकती है. मेरे लिए भी ये एक स्ट्रोंग और चुनौतीपूर्ण चरित्र है, जिसे निभाना आसान नहीं था. चरित्र का संघर्ष और उनका सफर एकदम असली, स्वाभाविक और आम लोगों के जीवन से जुड़ा है, इसलिए बहुत हद तक दर्शक इससे जुड़ सकेंगे. इस चरित्र को आसान बनाने में निर्देशक शकुन बत्रा का काफी हाथ रहा. उन्होंने मुझे पूरी भूमिका के ग्राफ को बता दिया था, जिससे काम करना आसान हो गया. इसके अलावा मैंने इस फिल्म में हर काम टीम के साथ-साथ किया है, जिसमें एक साथ खाना, एक साथ शूटिंग करना, एक साथ कही घूमने जाना आदि.इससे मेरे और टीम के बीच एक अच्छी बोन्डिंग स्थापित हुई जिससे अभिनय करना आसान हुआ.

 

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इसके आगे दीपिका कहती है कि बोल्ड अभिनय को लेकर कई भ्रांतियां है, बोल्ड के अर्थ को समझने के लिए कहानी में चरित्र को देखना पड़ेगा, क्योंकि बोल्ड का स्ट्रोंग के साथ-साथ  इंटिमेसी भी है, जिसे फिल्म में बहुत ही बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है. इस तरह की इंटेंस सीन्स, जिसमें संबंधों के कई लेयर्स को पर्दे पर लाने में निर्देशक का हाथ रहा,जिसने ऐसे सीन्स के लिए अलग से कोरियोग्राफ किया. इससे इस फिल्म की किसी भी अन्तरंग दृश्य को परफॉर्म करने में सोचना नहीं पड़ा. इसके अलावा फिल्म में सिंद्दान्त चतुर्वेदी, अनन्या पांडे और धैर्य करवा ने साथ मिलकर हर अभिनय को अधिक रियल बनाया है.

 

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बहरहाल इस तरह की इंटेंस इमोशन के खेल को लेकर बनी फिल्में हमारी दर्शक अधिक डाइजेस्ट नहीं कर पाती और फिल्म फ्लॉप हो जाती है, लेकिन गहराइयाँ के लिए निर्माता निर्देशक बहुत अधिक गहराई तक सोच चुके है, उन्हें उबरने में कितना समय लगेगा, ये तो फिल्म की रिलीज के बाद ही पता चल पाएगी. ‘गहराइयां’ अमेजन प्राइम वीडियो पर 11 फ़रवरी को स्‍ट्रीम की जाएगी.

 

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Imlie: आदित्य से अतीत का बदला लेगा आर्यन, मारेगा गोली

सीरियल इमली (Imlie) में इन दिनों आदित्य (Gashmeer Mahajani) मुसीबत में फंसा हुआ नजर आ रहा है. जहां पूरा त्रिपाठी परिवार आदित्य को बचाने की दुआ कर रहा है तो वहीं अनु और मालिनी (Mayuri Deshmukh), इमली (Sumbul Tauqeer Khan) की जान के पीछे पड़े हैं. हालांकि आर्यन (Fehman Khan) उसे बचाने की कोशिश करता नजर आ रहा है. लेकिन अपकमिंग एपिसोड  (Imlie Serial Update) में कुछ ऐसा होगा कि मालिनी का सुहाग यानी आदित्य की जान खतरे में पड़ने वाली है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

मालिनी पर बरसी अपर्णा

अब तक आपने देखा कि आदित्य की जान खतरे में होने के बावजूद मालिनी, इमली की बुराई करते नजर आती है. हालांकि अपर्णा, मालिनी से कहती है कि वह जानती है कि वह आदित्य के लिए परेशान है, लेकिन चिंता दिखाने का उसका तरीका बिल्कुल गलत है. लेकिन मालिनी पूछती है कि कौन आदित्य की मदद करेगा, वे इतनी ऊंची बात करते हैं. दूसरी तरफ, आर्यन, इमली पर गुस्सा करता है, जिसे देखकर आदिवासी हमला करने के लिए आर्यन की ओर बढते हैं. लेकिन इमली उसे बचा लेती है.

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आदित्य करेगा पुलिस की मदद

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि कान में बम लगाए आदित्य पुलिस के पास जाएगा और मदद करने के लिए कहेगा. साथ ही पुलिस को बताएगा कि आतंकी ने 30 मिनट में 100 करोड़ की मांग की. वरना वह एक निर्दोष महिला को जान से मार देंगे. हालांकि पुलिस उसकी बात मानने से इनकार कर देंगे. लेकिन आदित्य उन्हें बताएगा कि जब भी आतंकी उसे फोन करता था तो उन्हें रेलवे क्रॉसिंग की आवाज सुनाई देती है, इसलिए उन्हें वहां जांच करनी चाहिए, जिसके कारण पुलिस आदित्य की टीम को बचा लेगी.

आर्यन लेगा आदित्य की जान

 

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इसी के साथ आप देखेंगे कि अपर्णा का इमली के लिए प्यार देखकर मालिनी जलती हुई नजर आएगी. वहीं आर्यन, आदित्य पर बंदूक तान कर खड़ा हो जाएगा और उसे अरविंद की आग दुर्घटना याद आएगी. साथ ही वह आदित्य को चेतावनी देते हुए कहेगा कि उसे अपने सभी पापों की सजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए. वहीं इमली, आदित्य को बचाने के लिए भागेगी, लेकिन आर्यन उसके पहुंचने से पहले ही  गोली चला देगा.

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इन 20 Body Massage से रखें खुद को एनर्जेटिक

आपने मसाज तो कभी ना कभी करवाई होगी और मसाज के बारे में सुना भी बहुत होगा. लेकिन क्या आप जानती हैं मसाज कितने तरह की होती है. जी हां, आज हम आपको अलग अलग तरह के मसाज के बारे में बताने जा रहे हैं. जानिए, कौन सी मसाज किस समस्या के लिए करवाई जाती है और किस मसाज थेरेपी के क्या फायदे हैं.

1. स्वीडिश मसाज थेरेपी (Swedish Massage)

ये सबसे पॉपुलर मसाज है जिसे सिंपली मसाज थेरेपी के नाम से भी जाना जाता है. ये मसाज मसाज लोशन या ऑयल से होती है. ये बहुत ही कोमल और आरामदायक होती है. अगर आप पहली बार मसाज करवाने जा रही हैं तो स्वीडिश मसाज थेरेपी ले सकती हैं.

2. हॉट स्टोन मसाज (Hot Stone Massage)

टाइट मांसपेशियों को लूज करने, बॉडी को गर्म करने और बॉडी की एनर्जी बैलेंस करने के लिए हॉट स्टोन मसाज का इस्तेमाल होता है. इस मसाज के दौरान गर्म और चिकने पत्थर बॉडी के कुछ चुनिंदा हिस्सों में रखें जाते हैं. मसाज थेरेपिस्ट गर्म स्टोन को होल्ड‍ करके भी बॉडी के कई हिस्सों में प्रेशर बनाते हैं. हॉट स्टोन मसाज आमतौर पर उन लोगों के लिए बेस्ट है जिनको मसल्स टेंशन हैं.

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3. प्रेग्नेंसी मसाज (Pregnancy Massage)

इसे प्रीनेटल मसाज के नाम से भी जाना जाता है. ये प्रेग्नेंट महिलाओं में काफी पॉपुलर मसाज है. इस मसाज को कुछ खास एक्सपर्ट द्वारा ही किया जाता है. ये महिलाओं में तनाव को कम करने, स्वेलिंग कम करने, दर्द से राहत दिलाने, डिप्रेशन से बचाने और एंजाइटी दूर करने में मदद करती है. प्रेग्नेंसी मसाज को महिला की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज भी किया जा सकता है.

4. बैक मसाज (Back Massage)

बहुत से क्लीनिक और स्पा सेंटर 30 मिनट की बैक मसाज ऑफर करते हैं. जैसा की नाम से ही पता चल रहा है ये मसाज खासतौर पर कमर के लिए की जाती है. बैक पेन हो या शोल्डर पेन इस मसाज के जरिए दर्द में आराम मिलता है.

5. डीप टिश्यूस मसाज (Deep Tissue Massage)

ये मसाज मसल्स की डीप लेयर और कनेक्टिव टिश्यूज के लिए की जाती है. मसाज थेरेपिस्ट स्लोअर स्ट्रोक्स और फ्रिक्शन टेक्नीक से मसल्स की मसाज करते हैं. ये मसाज बेहद टाइट की जाती है. ताकि मसल्स से दर्द को दूर किया जा सके. इससे पहले हुए इंजरी को भी रिकवर किया जा सकता है.

6. अरोमाथेरेपी मसाज (Aromatherapy Massage)

अमरोमाथेरेपी मसाज में एक या इससे अधिक सेंट प्लांट्स का इस्तेमाल होता है जिसे एसेंशियल ऑयल कहा जाता है. इस मसाज में इस्तेमाल हुए ऑयल्स बॉडी को रिलैक्स करने के साथ-साथ एनर्जी देते हैं, स्ट्रेस कम करते हैं. अरोमाथेरेपी में सबसे ज्यादा जो एसेंशियल ऑयल इस्तेमाल होता है वो है लैवेंडर.

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7. शिआस्तु मसाज थेरेपी (Shiatsu Massage)

शिआस्तु एक जापानी मसाज थेरेपी है. इस थेरेपी में अंगूठे, उंगलियों और हथेलियों के साथ एक्यूप्रेशर के रूप में दबाव डाला जाता है. हर प्वॉइंट पर एनर्जी के साथ 2 से 8 सेकेंड तक प्रेशर डाला जाता है. इससे बॉडी का बैलेंस बनाने में मदद मिलती है. इस थेरेपी के बाद बॉडी में कोई सूजन नहीं आती और ना ही दर्द होता है.

8. रिफ्लैक्सोलॉजी मसाज (Reflexology Massage)

इस मसाज को फूट मसाज के नाम से भी जाना जाता है. ये सिंपल फूट मसाज से कहीं ज्यादा होती है. पैरों में अलग-अलग हिस्सों पर प्रेशर डाला जाता है. ये मसाज उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो दिनभर खड़े रहकर काम करते हैं या फिर बहुत टायर्ड रहते हैं या फिर जिनके पैरों में दर्द रहता है.

9. थाई मसाज (Thai Massage)

शिआस्तु थेरेपी की तरह ही थाई मसाज में भी कुछ खास हिस्सों पर एनर्जी के साथ प्रेशर से दबाव डाला जाता है. इसमें योगा की तरह बॉडी स्ट्रेच होती है. ये सबसे ज्यादा एनर्जेटिक होती है. ये तनाव कम करती है और बॉडी को फ्लैसिबल करती है.

10. स्पोर्ट्स मसाज (Sports Massage)

जो लोग फीजिकल एक्टिविटीज में रहते हैं स्पोर्ट्स मसाज उनके लिए फायदेमंद होती है. ये ना सिर्फ बॉडी को रिलैक्स करती है बल्कि स्पोर्ट्स के दौरान हुई इंजरी को भी ठीक करती है. साथ ही ये खिलाड़ी को परफॉर्मेंस को भी बेहतर करने में मदद करती है. बॉडी में लचीलापन बढ़ाने से लेकर ये मसाज मसल्स की स्टिफनेस को भी खत्म करती है.

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शाह परिवार में बवाल के बीच हौट लुक में नजर आई Anupama की Kinjal, देखें फोटोज

सीरियल अनुपमा (Anupama) में इन दिनों फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ-समर-नंदिनी का रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया है तो वहीं पाखी के कारण अनुपमा (Rupali Ganguly) और वनराज (Sudhanshu Panday) के बीच जंग शुरु हो गई है, जिसके कारण पूरा शाह परिवार परेशान हैं. इसी बीच शाह फैमिली की बड़ी बहू किंजल यानी एक्ट्रेस निधि शाह (Nidhi Shah) की बोल्ड फोटोज ने सोशलमीडिया पर तहलका मचा दिया है. आइए बताते हैं पूरी खबर…

बोल्ड लुक में दिखीं किंजल

 

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हाल ही में अनुपमा की किंजल यानी एक्ट्रेस निधि शाह ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम पेज (Nidhi Sha Instagram) पर फोटोज शेयर की है, जिसमें वह बोल्ड अंदाज में नजर आ रही हैं. दरअसल, निधि शाह एक फोटोशूट में क्रीम कलर का कोट पैंट पहना है, जिसके साथ ब्लैक कलर की ब्रालेट पेयर करते हुए निधि शाह कोट के बटन खोले नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस का हौट अवतार  (Nidhi Sha Bold Look) देखकर फैंस हैरान हैं. वहीं कमेंट्स के जरिए एक्ट्रेस के लुक की तारीफें करते नजर आ रहे हैं.

 

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किंजल के लुक में भी लगती हैं खूबसूरत

 

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एक्ट्रेस निधि शाह रियल लाइफ में जितनी खूबसूरत हैं उतनी ही सीरियल में भी अपने फैशन को फ्लौंट करती नजर आती हैं. इंडियन लुक के साथ वेस्टर्न अंदाज में वह दर्शकों का दिल जीतती हैं. वही सोशलमीडिया पर भी अक्सर सुर्खियां बटोरती हैं. दरअसल, बीते दिनों ब्राइडल और इंडियन लुक में एक्ट्रेस निधि शाह ने एक फोटोशूट करवाया था, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थीं.

 

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बता दें, सीरियल में इन दिनों किंजल अपने देवर समर को नंदिनी के साथ रिश्ता न तोड़ने के लिए समझाती नजर आ रही हैं. वहीं पाखी के विदेश में पढ़ाई को लेकर शाह हाउस में बवाल होता नजर आ रहा है.

 

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Top 10 Best Social Story in Hindi : टॉप 10 सोशल कहानियां हिंदी में

Social Story in Hindi: समाज से जुड़ी कुछ नीतियां और कुरीतियां सभी को माननी पड़ती हैं. लेकिन कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो इन नियमों को मानने की बजाय अपना रास्ता खुद बनाने का प्रयास करते हैं. हालांकि इस रास्ते पर उनकी जिंदगी में कई मुश्किलें आती है. लेकिन वह बिना हार माने अपनी जीत हासिल करते हैं. तो इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं गृहशोभा की Top 10 Social Story in Hindi 2022. समाज का एक पहलू दिखाती ये कहानियां आपकी लाइफ में गहरी छाप छोड़ेंगी. तो पढ़िए गृहशोभा की Top 10 Social Story in Hindi 2022.

1. आसमान छूते अरमान : चंद्रवती के अरमानों की कहानी

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चंद्रो बस से उतर कर अपनी सहेलियों के साथ जैसे ही गांव की ओर चली, उस के कानों में गांव में हो रही किसी मुनादी की आवाज सुनाई पड़ी.

‘गांव वालो, मेहरबानो, कद्रदानो, सुन लो इस बार जब होगा मंगल, गांव के अखाड़े में होगा दंगल. बड़ेबडे़ पहलवानों की खुलेगी पोल, तभी तो बजा रहा हूं जोर से ढोल. देखते हैं कि मंगलवार को लल्लू पहलवान की चुनौती को कौन स्वीकार करता है. खुद पटका जाता है कि लल्लू को पटकनी देता है. मंगलवार शाम4 बजे होगा अखाड़े में दंगल.’‘‘देख चंद्रो, इस बार तो तेरा लल्लू गांव में ही अखाड़ा जमाने आ गया,’’ एक सहेली बोली….

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2. उलझन: टूटती बिखरती आस्थाओं और आशाओं की कहानी

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बेटी की शादी की बधाई तथा उस के सुखमय भविष्य के लिए आशीषों की वर्षा की जगह हम पर झूठ, धोखेबाजी, दुरावछिपाव और न जाने किनकिन मिथ्या आरोपों की बौछार हो रही थी और हम इन आरोपों की बौछार तले सिर झुकाए बैठे थे…

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3. हुस्न का बदला: क्या हुआ था शीला के साथ

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शीला की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और क्या न करे. पिछले एक महीने से वह परेशान थी. कालेज बंद होने वाले थे. प्रदीप सैमेस्टर का इम्तिहान देने के बाद यह कह कर गया था, ‘मैं तुम्हें पैसों का इंतजाम कर के 1-2 दिन बाद दे दूंगा. तुम निश्चिंत रहो. घबराने की कोई बात नहीं.’

‘पर है कहां वह?’ यह सवाल शीला को परेशान कर रहा था. उस की और प्रदीप की पहचान को अभी सालभर भी नहीं हुआ था कि उस ने उस से शादी का वादा कर उस के साथ… ‘शीला, तुम आज भी मेरी हो, कल भी मेरी रहोगी. मुझ से डरने की क्या जरूरत है? क्या मुझ पर तुम्हें भरोसा नहीं है?’ प्रदीप ने ऐसा कहा था.

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4. गर्भपात: रमा क्या इस अनजाने भय से मुक्त हो पाई?

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रमा अपने बारबार होने वाले गर्भपात का कारण बचपन में घटी एक कटु घटना को मानती रही जिस ने उस के मन में एक अनजाने भय को उत्पन्न कर दिया था. जबकि वास्तविकता तो कुछ और थी. अंतर्द्वंद्व से जूझती रमा क्या इस अनजाने भय से मुक्त हो पाई?

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5. मसीहा: शांति के दुख क्या मेहनत से दूर हो पाए

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शांति का नाम आते ही मानसपटल पर अतीत का पन्ना खुल गया. छोटी सी उम्र में ही कितने दुख उठाने पड़े थे उसे. लेकिन अपनी हिम्मत और जिंदगी में कुछ करने की लगन ने उसे कहां से कहां पहुंचा दिया.

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6. सफर: फौजी पर कौन तरस खाता है

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रात के ठीक 10 बजे ‘झेलम ऐक्सप्रैस’ ट्रेन ने जम्मूतवी से रेंगना शुरू किया, तो पलभर में रफ्तार पकड़ ली. कंपार्टमैंट में सभी मुसाफिर अपना सामान रख आराम कर रहे थे.

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7. चीयर गर्ल: फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट करने के बाद क्या हुआ उसके साथ

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फेसबुक पर आई एक फ्रैंड रिक्वैस्ट को ऐक्सैप्ट करने के बाद उसे खुद ही पता नहीं था कि उस की शांत जिंदगी अचानक से बदल जाएगी…

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8. नीलोफर: क्या दोबारा जिंदगी जी पाई नीलू

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एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर खोने के बाद हताशा में जी रही नीलू को एक चिडि़या ने जीना सिखाया. आखिर कैसे…

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9. ब्लैक फंगस: क्या महुआ और उसके परिवार को मिल पाई मदद

अस्पताल में पति अमित जीवन और मौत से जूझ रहा था, मगर ऐसा कोई नहीं था जो महुआ की मदद को आगे आए. फिर एक दिन…

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10. फर्क: पल्लव के धोखे के बाद क्या था रवीना का खतरनाक कदम

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जिस पल्लव की वजह से रवीना अपने घर की देहरी लांघ आई थी, उसी पल्लव ने उस की पूरी जिंदगी ही तबाह कर दी. अब वह अकेली थी और इस अकेलेपन ने उसे खतरनाक कदम उठाने को विवश कर दिया…

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बरतनों की धुलाई : अपनाइए कुछ नया

भले ही आप पौष्टिक आहार ले रहे हों, पर जिन बरतनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, यदि वही स्वच्छ नहीं हैं तो आप की हैल्दी डाइट कोई माने नहीं रखता. पहले लोग राख से बरतन साफ करते थे. पर हैरानी की बात है कि जो खुद ही स्वच्छ नहीं, वह किसी चीज को साफ कैसे कर सकती है. फिर बाजार में साबुन की टिकिया आई जिसे लोग बरतन साफ करने के लिए इस्तेमाल करने लगे एक ही स्क्रबर से बारबार टिकिया को घिसने और बरतन साफ करने के कारण गंदगी स्क्रबर के बीच में ही घुसी रहती है.

टिकिया से बरतन साफ करने के बाद भी उस के कण बरतनों में चिपके रह जाते हैं. कुछ लोग डिटरजैंट पाउडर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह काफी दाग नहीं छुड़ता है. यदि बरतन पूरी तरह साफ न हुए हों तो उन में चिपके कीटाणु हमारे पेट में भी चले जाते हैं, जिस से पेट में इन्फैक्शन, डायरिया, कौलरा जैसी घातक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है.

अपनाइए कुछ नया

बरतनों को अच्छी तरह और कम मेहनत से धोने की इच्छा आज हर महिला की है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बाजार में आधुनिक तरीकों से बने लिक्विड क्लीनर पेश किए गए हैं. इन से बरतनों को साफ करना आसान बन गया है.

आधुनिक तकनीक

आमतौर पर सभी लिक्विड क्लीनर बैलेंस्ड पीएच फार्मूले से बने होते हैं. इन्हें बनाने के लिए लाइम और विनेगर का इस्तेमाल किया जाता है. ये बरतनों को पारंपरिक साधनों से बेहतर साफ कर सकते हैं. ऐंटीबैक्टीरियल होने के कारण ये बरतनों को जर्मफ्री बनाते हैं आमतौर पर लिक्विड क्लीनरों में टाक्ंिसस का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए ये पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं. जिद्दी दागों व तले से जलने के कारण बरतनों पर दागधब्बे पड़ जाते हैं, जो देखने में बहुत भद्दे लगते हैं लेकिन लिक्विड क्लीनर ऐसे कैमिकल्स से बनाए जाते हैं, जिन से जिद्दी दाग भी हट जाते हैं.

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हर क्राकरी के लिए उपयुक्त

लिक्विड क्लीनरों से सभी तरह के बरतन जैसे बोनचाइना, मैलामाइन, कांच व स्टील के बरतनों को आसानी से धोया जा सकता है. बार या पाउडर के प्रयोग से इन पर स्क्रबर के घिसने से निशान पड़ जाते हैं व इन्हें साफ करने के लिए काफी मेहनत भी करनी पड़ती है, लेकिन लिक्विड क्लीनरों से इन्हें घिसना नहीं पड़ता, जिस से डैलीकेट क्राकरी भी सुरक्षित तरीके से साफ की जा सकती है. आज बाजार में कई लिक्विड क्लिनर उपलब्ध हैं, जैसे प्रिल, डिशवाशिंग, निप इत्यादि. इन के दाम करीब 50 रुपए हैं. इन से बरतनों को साफ करने के लिए प्रत्येक बरतन के लिए 1-2 बूंदें ही काफी होती हैं.

स्किन फ्रैंडली

अन्य साधनों से बरतन साफ करने से हाथों की त्वचा रूखी हो कर फटने लगती है, लेकिन लिक्विड क्लीनर स्किन फ्रैंडली होते हैं. इन को बनाने के लिए हार्श कैमिकल्स का प्रयोग नहीं किया जाता. लिक्विड क्लीनर द्वारा बरतन धोने में स्क्रबर के स्थान पर स्टैंडिंग ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए. इस से बरतन साफ करना ज्यादा आसान हो जाता है, क्योंकि बिना टच किए ही बरतनों को आसानी से घिसा जा सकता है. बस 1 बूंद डालें और ब्रश से साफ करें.

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40 पार की तैयारी करने के 5 टिप्स

40 की उम्र निकलते ही महिलाओं में अकेलेपन की समस्या घर करने लगती है कामकाजी की अपेक्षा होममेकर महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है क्योंकि जब बच्चे छोटे होते हैं तो घर के कार्यों और बच्चों के पालन पोषण के कारण इन्हें सिर तक उठाने का अवसर नहीं मिलता परन्तु अब तक अधिकतर परिवारों में बच्चे पढने के लिए बाहर चले जाते हैं और यदि नहीं भी जाते हैं तो 18-20 की उम्र में उनकी अपनी ही दुनिया हो जाती है जिसमें वे व्यस्त रहते हैं. बच्चों की परवरिश में हरदम व्यस्त रहने वाली मां की उम्र भी अब तक 40 पार हो जाती है. पति अपने व्यवसाय या नौकरी में ही मसरूफ रहते हैं और बच्चे अपनी पढाई, दोस्तों और कैरियर में. वर्तमान समय में घरेलू कार्यों के लिए भी हर घर में मेड और मशीनें मौजूद हैं. जिससे घरेलू कार्यों में लगने वाला समय भी बहुत कम हो गया है. इन्हीं सब कारणों से जीवन के इस पड़ाव में महिलाओं के जीवन में रिक्तता आना प्रारंभ हो जाती है यदि समय रहते इस रिक्तता का इलाज नहीं किया जाता तो कई बार यह काफी गंभीर समस्या बन जाती है. घर में बच्चों के न होने से महिलाओं की व्यस्त दिनचर्या में अचानक विराम लग जाता है और कई बार तो वे स्वयं को घर का सबसे बेकार सदस्य समझने लगती हैं जिसकी किसी को भी आवश्यकता नहीं है. परंतु इस समस्या से निपटने का उपाय भी महिलाओं के स्वयं के हाथ में ही है. जैसे ही बच्चे कुछ बड़े होने लगें तो प्रत्येक महिला को यह कटु सत्य स्वीकार कर लेना चाहिए कि एक न एक दिन बच्चे अपनी दुनियां में व्यस्त हो जाएगें. जिस प्रकार कामकाजी महिलाओं को रिटायरमेंट के बाद सक्रिय रहने के लिए किसी गतिविधि में व्यस्त रहना आवश्यक है उसी प्रकार आज प्रत्येक महिला को चाहे वह कामकाजी हो या घरेलू, स्वयं को व्यस्त रखने के उपाय खोज लेने चाहिए ताकि बच्चों के बाद जीवन में आयी रिक्तता से स्वयं को दूर रखकर खुशहाल और स्वस्थ जीवन व्यतीत किया जा सके.

अक्सर महिलाओं को यह कहते सुना जाता है कि करना तो मैं भी कुछ चाहती हूं परंतु क्या करूं यह समझ नहीं आता. मेरी क्यूरी कहती हैं कि, ‘‘हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि हमारे अंदर भी कोई न कोई हुनर छुपा है जिसे खोजना अनिवार्य है.’’यह सही है कि छोटे बच्चों के पालन पोषण की व्यस्तता में स्वयं के लिए थोड़ा सा भी वक्त निकालना काफी चुनौतीभरा कार्य होता है परंतु जहां चाह वहां राह वाले सिद्धांत पर अमल करें और जब भी वक्त मिले अपनी जिजीविषा को कायम रखें और जब आवश्यकता हो तो अपने इस हुनर को बाहर लाएं. वर्तमान में परिवार का स्वरूप एक या दो बच्चों तक ही सीमित हो गया है इसलिए अपने बच्चों के लिए माताएं बहुत अधिक पजेसिव हैं. उनका प्रत्येक छोटा बड़ा कार्य करके वे उन्हें पंगु तो बनाती ही हैं स्वयं भी पूरे समय व्यस्त रहती हैं इसकी अपेक्षा बच्चों को प्रारंभ से ही आत्मनिर्भरता का पाठ पढाएं, परिवार में कार्यों का विभाजन करें, आवश्यकतानुसार हेल्पर रखें ताकि आप अपने लिए भी चंद लम्हे निकाल सकें. यह आवश्यक नहीं है कि आप कोई भी कार्य धनार्जन के लिए ही करें बल्कि वह करें जिसमें आप खुशी महसूस कर सकें, अपने जीवन को जीवंत बना सकें, जिससे आप अपने जीवन के इस दूसरे दौर को पहले दौर से भी अधिक रोचक और आनंदकारी बना सकें.

1. रुचियों को जीवंत रखें

आमतौर पर विवाहोपरांत अपने घर प्ररिवार में महिलाएं इतनी अधिक व्यस्त हो जाती हैं कि वे अपनी रुचियां तो क्या अपने अस्तित्व तक को विस्मृत कर देती हैं. जीवन का भले ही कोई भी दौर क्यों न हो, सिलाई, कढ़ाई, रीडिंग, लेखन या कुकिंग जैसी अपनी रुचियों का परित्याग कदापि न करें क्योंकि वही तो आपका अस्तित्व और वजूद है जो आपको दूसरों से पृथक करता है. जब भी समय मिले कुछ न कुछ अंशों में अपनी हॉबी को कायम अवश्य रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर आप उसमें स्वयं को व्यस्त रख सकें यदि आप अपनी हॉबी पर काम नहीं करेंगी तो जीवन के एक पड़ाव पर खुद को अकेलेपन से घेर लेंगी.

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2. सीखना जारी रखें

एक से ढर्रे पर चलते चलते जीवन में बोरियत सी आने लगती है. सीखने की कोई उम्र नहीं होती लियोनार्डो द विंची कहते हैं कि ‘‘सीखने की प्रवृत्ति से मस्तिष्क कभी थकता नही है तथा जीवन उत्साह से परिपूर्ण रहता है.’’ अपनी रूटीन दिनचर्या से कुछ समय अपने लिए निकालकर अपनी रूचि के कार्य को अपडेट करने और जीवन में जीवन्तता बनाये रखने के लिए हमेशा कुछ नया सीखती अवश्य रहें ताकि जीवन में सदैव उत्साहजनक तरंगों का संचार होता रहे.

3. पति की सहभागी बनें

पति की सहयोगी बनना आपके लिए व्यस्त रहने का सर्वोत्तम उपाय है. कई बार जब पति अपने व्यवसाय या नौकरी के बारे में पत्नी को बताना चाहते हैं तो पत्नियां ‘‘तुम्हारी तुम जानो’’ कहकर पति की आफिसियल या व्यवसायिक बातों से पल्ला झाड़ लेतीं हैं इसकी अपेक्षा आप प्रारंभ से ही उनके काम में हाथ बटाएं, उन्हें रुचिपूर्वक सुनें आवश्यकता पड़ने पर  अपनी राय भी दें इससे आप स्वयं तो अपडेट रहेंगी ही पति भी आपके महत्व से अवगत रहेंगे. साथ ही आगे चलकर जब आपके बच्चे बड़े हो जाएँ तो आप उनके कार्य में भी अपना भरपूर योगदान दे सकेंगीं.

4. सक्रिय और सकारात्मक रहें

एक निश्चित समय के बाद रहना अकेले ही है इस कटु सत्य को स्वीकार कर अपने को व्यस्त रखने के उपाय खोजने में ही बुद्धिमानी है. नकारात्मकता जहां आपके जीवन को निष्क्रिय कर देती है, जीवन को तनाव और अवसाद जैसी बीमारियों से ग्रस्त कर देती है वहीं सकारात्मकता जीवन में सक्रियता का संचार कर जीवन को उत्साह से सराबोर कर देती है इसलिए सदैव पाजिटिव और सक्रिय रहें.

5. स्वयं पर ध्यान दें

इस उम्र में अपने जीवन मे योगा, व्यायाम और टहलने को प्राथमिकता दें ताकि आप शरीर और मन से स्वस्थ रह सकें. जीवन की समस्यायों और अकेलेपन का रोना रोते रहने की अपेक्षा कुछ अपने मन का करें अपने व्यक्तित्व को निखारने का भी प्रयास करें. योग, व्यायाम और वाकिंग से स्वयं को फिट रखने के साथ साथ ब्यूटी पार्लर जाकर अपने सौन्दर्य में भी चार चांद लगाएं अब तक जो भी करने की इच्छा आपके मन में रह गयी है उस सबको पूरा करने का वक्त है यह, अतः अपनी समस्त इच्छाओं की पूर्ति करें.

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Winter Special: ओट्स से बनाएं ये हैल्दी डिशेज

ओट्स का वैज्ञानिक नाम एविना सैटिवा है , इसे जई के नाम से भी जाना जाता है. इसमें फायबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. आजकल बाजार में प्लेन के साथ साथ विभिन्न फ्लेवर के रेडीमेड ओट्स भी उपलब्ध हैं जिन्हें केवल गर्म पानी डालकर बनाया जा सकता है. ओट्स में चूंकि कैलोरी कम और फायबर अधिक होता है इसलिए इसे स्वास्थ्यप्रद माना जाता है. आज हम आपको ओट्स से बनने वाली दो हैल्दी डिशेज के बारे में बनाना बता रहे हैं तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

-ओट्स कैरेट केक

कितने लोगों के लिए            6

बनने में लगने वाला समय      30 मिनट

मील टाइप                          वेज

सामग्री

प्लेन ओट्स                      1 कप

मैदा                                1/2 कप

किसी गाजर                     1 कप

मिल्क पाउडर                  1 कप

गुड़ पाउडर                     1 कप

पानी                              1 कप

ऑलिव ऑइल                1/4 कप

बेकिंग पाउडर                1 टीस्पून

बेकिंग सोडा                  1/4 टीस्पून

नीबू का रस                   1/2 टीस्पून

वनीला एसेंस               1/4 टीस्पून

सामग्री(गार्निशिंग के लिए)

गाजर                          1

बटर                             1 टीस्पून

शकर                            1/2 टीस्पून

पिस्ता कतरन                 1 टेबलस्पून

विधि

ओट्स को मिक्सी में पाउडर फॉर्म में पीस लें. गुड़ को पानी में भिगोकर गैस पर गुनगुना कर लें. अब एक बाउल में छलनी से मैदा, ओट्स, मिल्क पाउडर, बेकिंग पाउडर और सोडा को छान लें. अब इस छने मिश्रण में तेल और गाजर डालकर गुड़ का पानी धीरे धीरे मिलाएं ताकि गुठली न पड़ें. अंत में नीबू का रस और वनीला एसेंस मिलाएं. मिश्रण की कंसिस्टेंसी फ्लोइंग होनी चाहिए. एक बेकिंग डिश में पोरचमेंट पेपर लगाकर ग्रीस करें और तैयार मिश्रण को डाल दें. 5 मिनट तक प्रीहीट किये गए ओवन में 30 से 40 मिनट तक 180 डिग्री पर बेक करें. 30 मिनट बाद साफ चाकू या टूथपिक बीच में डालकर देंखें यदि न चिपके तो समझें कि केक तैयार है.

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गार्निशिंग करने के लिए गाजर को चीज किसने वाली किसनी से बारीक किस लें. एक पैन में बटर गर्म करके किसी गाजर डालकर 2-3मिनट चलाते हुए धीमी आंच पर  भूनें. शकर डालकर 5 मिनट तक धीमी आंच पर भूनकर गैस बंद कर दें.

ठंडा होने पर केक को केक टिन से बाहर निकालें. सीधा करके तैयार गाजर और शकर के ग्लेज को केक पर पतली परत फैलाएं. चारों ओर पिस्ता कतरन से सजाकर मनचाहे टुकड़ों में काटें.

-ओट्स बथुआ ढोकला

कितने लोगों के लिए            6

बनने में लगने वाला समय     5 मिनट

मील टाइप                        वेज

सामग्री

प्लेन ओट्स                 1 कप

रवा या बारीक सूजी       1 कप

बारीक कटा बथुआ        1कप

अदरक, हरी मिर्च पेस्ट       1 टीस्पून

नमक                              1/2 टीस्पून

शकर                            1/4 टीस्पून

तेल                               1/2 टीस्पून

ईनो फ्रूट साल्ट             1 सैशे

पानी                            1/2 कप

सामग्री(बघार के लिए)

करी पत्ता                     8-10

राई के दाने                    1/4 टीस्पून

तेल                             1 टीस्पून

कटी हरी मिर्च               4

करी पत्ता                     8-10

कश्मीरी लाल मिर्च         1 टीस्पून

बारीक कटा हरा धनिया      1 टेबलस्पून

विधि

ओट्स को मिक्सी में पीस लें. अब एक बाउल में दही, पिसे ओट्स, रवा और पानी को अच्छी तरह मिलाकर ढककर 15 मिनट के लिए रख दें ताकि रवा और ओट्स फूल जाएं. 15 मिनट के बाद इसमें अदरक, हरी मिर्च पेस्ट, नमक, शकर, तेल, बथुआ और ईनो फ्रूट साल्ट मिलाकर अच्छी तरह चलाएं.

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तैयार मिश्रण को एक चौकोर बर्तन में डालें. एक कड़ाही में 1 लीटर पानी डालकर उसमें एक स्टैंड रखकर उस पर ढोकले वाला बर्तन रखकर लगभग 15 मिनट तक मध्यम आंच पर ढककर पकाएं.

बघार की समस्त सामग्री को गर्म तेल में डालें और तैयार ढोकले के ऊपर डालें. हरे धनिए से गार्निश करके चौकोर टुकड़ों में काटकर सर्व करें.

हर टैक्स औरत पर टैक्स है

महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह सरकार का आम आदमी पर टैक्स बढ़ाना है. सरकार को अब पैट्रोल, डीजल, गैस की शक्ल में अनूठे हथियार मिल गए हैं, जिन के सहारे मनमाना टैक्स वसूला जा सकता है.

सरकार जहां 2014 में मनमोहन सिंह के जमाने में जहां 1 लिटर पैट्रोल पर 9 रुपए 48 पैसे टैक्स वसूल रही थी वहीं अब मोदी सरकार 3 गुना ज्यादा यानी 27 रुपए 90 पैसे टैक्स वसूल रही है. गैस और डीजल पर भी ऐसा ही हाल है.

मोदी सरकार की मनमानी इतनी है कि जहां 2014 में राज्यों को पैट्रोल पर टैक्स से 38 पैसे मिलते थे वहीं अब 2021 में बढ़ कर सिर्फ 57 पैसे हुए हैं और भारतीय जनता पार्टी सारे देश में हल्ला मचा रही है कि विपक्षी राज्य सरकारें पैट्रोल व डीजल पर टैक्स कम नहीं कर रहीं.

2021 में मोदी सरकार ने पैट्रोलियम पदार्थों पर 3.72 लाख करोड़ रुपए जनता से वसूले जबकि 2020 में 2.23 लाख करोड़ रुपए मिले थे और बहाना बना दिया कि विश्व बाजारों में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं. अगर सिर्फ कच्चे तेल के बढ़े दाम जनता से वसूले जाते तो पैट्रोल, डीजल, गैस पर क्व5-5 प्रति लिटर या किलोग्राम बढ़ते.

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केंद्र सरकार जानती है कि इस देश की औरतों को जितना चाहे लूट लो, वे चूं नहीं करेंगी. उन्हें बचपन से ही यह पाठ पढ़ा दिया जाता है कि जो भी आफत आए उसे भगवान की मरजी मान लो और पूजापाठ कर के बचने की कोशिश करो. फिर भी कुछ न हो तो इसे अपने पिछले जन्मों के कर्मों का फल मान लो. आम जनता से भी कहा जाता है कि वह बस कर्म करे, फल की चिंता न करे. कृष्ण का पाठ बारबार यों ही नहीं दोहराया जाता. इस में हर युग में राजाओं और शासकों का मतलब छिपा रहा है.

लोकतंत्र में उम्मीद थी कि लोगों के टैक्स का पैसा उन कामों में इस्तेमाल होगा. जो अकेले घर नहीं बना सकते उन के लिए सामूहिक घर बनेंगे. स्कूल बनेंगे, सड़कें बनेंगी, बिजली के कारखाने लगेंगे, बाग बनेंगे, अस्पताल बनेंगे. ये पहले बने भी पर अब सब बनना कम हो गया है.

अब अगर सड़कें बन रही हैं तो वे जिन पर क्व25-30 लाख से महंगी गाडि़यां दौड़ सकें. बाग बन रहे हैं तो वहां जहां धन्ना सेठ रहते हैं या मंदिर हैं. स्कूल बनाने का काम जनता पर छोड़ दिया गया है. सरकारी मुफ्त स्कूल न के बराबर रह गए हैं और कहा जाता है कि वहां पढ़ाई नहीं हो रही या उन्हें सुधारने के लिए पैसा नहीं है.

जनता को टैक्स तो देना पड़ ही रहा है पर अब बदले में उसे न चिकित्सा मिल रही है, न सस्ती पढ़ाई मिल रही है, न मुफ्त सड़कें मिल रही हैं और न ही सुरक्षा मिल रही है. एक बड़ी रकम तो हर जगह चौकीदारों, सिक्युरिटी पर खर्च करनी पड़ रही है क्योंकि पुलिस को तो क्राउड मैनेजमैंट के लिए लगाना पड़ रहा है, उस क्राउड को पीटने के लिए जो टैक्स वसूलने वाली सरकार का विरोध करने जमा हो रही है.

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इस मोदी सरकार की आमदनी से कुछ सौ लोगों की चांदी ही चांदी हो रही है. शेयर बाजार ऊंचा जा रहा है, अडानीअंबानी जैसे उद्योगपति सरकार के साथ रहने की वजह से और अमीर हो रहे हैं. आम औरतें गरीब हो रही हैं.

आज देश की लाखों औरतों को घर चलाने के लिए मुथुठ जैसी कंपनियों के दरवाजों पर कर्ज के लिए सिर पटकना होता है जहां जेवर रख कर पैसे मिल जाते हैं. हर थोड़े दिनों बाद इन कंपनियों के बारीक शब्दों में पूरे पेज के विज्ञापन छपते हैं कि छपे नंबरों के खातेदारों का जमा सोना नीलाम किया जा रहा है. टैक्स वसूली के साथ कर्ज वसूली का धंधा भी जोरों से चमचमा रहा है.

औरतें जब तक अपने हकों के लिए असली गुनहगारों को नहीं पहचानेंगी, उन्हें तब तक लूटा जाएगा. घरों में मातापिता, भाई, पति, सासससुर लूटते हैं. सरकार उन्हें बचाने नहीं आती, उन के घर की कमाई को छीनने आती है. हर टैक्स औरत पर टैक्स है क्योंकि घर तो उसे ही चलाना होता है.

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