हमसफर: भाग 1- लालाजी की परेशानी वजह क्या थी ?

लेखक-रमाकांत मिश्र एवं रेखा मिश्र

मैं ध्यान से मामाजी की बातें सुन रहा था. वे जो कुछ बता रहे थे, सचमुच लाजवाब था. कोई आदमी इतना महान हो सकता है, मैं ने कभी सोचा भी नहीं था. लाला हनुमान प्रसाद सचमुच बेजोड़ थे. मामाजी ने बताया था कि लालाजी कभी खोटी चवन्नी भी भीख में नहीं देते थे, लेकिन समाजसेवा में पैसा जरूर खर्च कर देते थे. कितने लोगों को इज्जत से रोजी कमाने लायक बना दिया था और पढ़ाईलिखाई को बढ़ावा देने के लिए कितना पैसा व समय वे खर्च करते थे. लालाजी इन सब बातों का न तो खुद ढिंढोरा पीटते थे और न ही किसी लाभ उठाने वाले को ये बातें बताने की इजाजत देते थे. हालांकि मामाजी लालाजी से उम्र में लगभग 15 साल छोटे थे, लेकिन लालाजी के साथ मामाजी की गहरी दोस्ती थी. पर जिस बात ने लालाजी को मेरी नजर में महान बना दिया था वह कुछ और ही थी.

लालाजी का एक ही बेटा था. 3 साल पहले उस का विवाह हुआ था. उस की एक नन्ही सी बेटी भी थी. पिछले साल आतंकवादियों द्वारा किए गए एक बम विस्फोट में अनायास ही वह मारा गया था. लालाजी इस घटना से टूट से गए थे. लेकिन वे अपने गम को सीने में कहीं गहरे दफन कर मामाजी से यह कहने आए थे कि कहीं लायक लड़का देखें, जिस से वे अपनी विधवा बहू की शादी कर सकें.

मामाजी बता रहे थे कि लालाजी की बहू किसी भी हाल में शादी को तैयार नहीं थी, लेकिन लालाजी का कहना था कि लायक लड़का मिल जाए तो वे बहू को मना लेंगे.

‘‘मैं तो कहूंगा कि राजेश, तुम्हीं ममता से विवाह कर लो’’, मामाजी ने मेरे सामने प्रस्ताव रखा.

मैं चौंक पड़ा, ‘‘नहीं मामा, आप तो जानते ही हैं…’’

‘‘मैं जानता हूं कि तुम सुरुचि के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकते. तुम्हारी ही तरह ममता भी गोपाल की जगह किसी को अपनी जिंदगी में नहीं लाना चाहती. लेकिन मैं लालाजी की ही बात दोहराऊं तो जैसेजैसे तुम्हारी उम्र बढ़ेगी, तुम अकेले पड़ते जाओगे. फिर विपुल भी एक दिन अपना घर बसा लेगा. राजेश, तुम खुद को धोखा दे रहे हो.’’

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मैं चुप रहा. मैं जानता था कि हमारे प्यार को मामाजी भी महसूस करते थे. मामा यों तो मुझ से 12 साल बड़े थे, लेकिन हमारे बीच दोस्तों जैसा ही संबंध था. सुरुचि के जाने के बाद विपुल को मामाजी ने ही पाला था.

‘‘अगर मुझे ठीक न लगता तो मैं कभी न कहता, क्योंकि मैं ममता को भी जानता हूं और तुम को भी. तुम दोनों एकदूसरे का घाव भर सकोगे. साथ ही विपुल और नेहा को भी मांबाप का प्यार मिल सकेगा.’’

आज से पहले मामाजी ने कभी ऐसा प्रस्ताव नहीं रखा था. मेरे कई रिश्तेदार मेरी दोबारा शादी की असफल कोशिश कर नाराज हो चुके थे. लेकिन मामाजी ने कभी ऐसा जिक्र नहीं किया था. बल्कि मेरे साथ उन्हें भी बदनामी झेलनी पड़ रही थी कि वे मेरा अहित चाहते हैं. लेकिन मामाजी मेरे साथ बने रहे थे. आज मामाजी ने मुझे असमंजस में डाल दिया था. मैं ने इनकार तो किया, लेकिन लालाजी के व्यक्तित्व के प्रभाव से दबादबा सा महसूस कर रहा था.

आखिरकार, मामाजी ने मुझे तैयार कर ही लिया. फिर उन्होंने लालाजी से बात की. लालाजी ने मेरे बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद अपनी सहमति दी. इस के बाद मामाजी और लालाजी ने बैठ कर एक योजना बनाई, क्योंकि ममता शादी के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए योजना यह थी कि मैं लालाजी के घर में आनाजाना बढ़ाऊं और धीरेधीरे ममता का दिल जीतूं. हालांकि मुझे यह सब पसंद नहीं था, लेकिन मैं इन दोनों को मना न कर सका.

योजनानुसार अगले रविवार को मैं लखनऊ लालाजी की कोठी पर पहुंच गया. पहले से योजना थी, इसलिए लालाजी नदारद थे. नौकरानी ने मुझे एक बड़े से ड्राइंगरूम में बैठा दिया. मैं नर्वस हो रहा था. मेरे मन में एक अजीब सी कचोट थी. ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई बुरा काम करने जा रहा हूं. शर्म, खीझ, लाचारी और अनिच्छा की अजीब सी उथलपुथल मेरे मन को झकझोर रही थी.

‘‘नमस्कार,’’ मेरे कानों में एक मधुर स्त्रीस्वर पड़ा तो मैं ने सिर उठा कर देखा.

मेरे सामने एक 25-26 साल की सुंदर युवती खड़ी थी. उस के चेहरे पर वीरानी छाई हुई थी, लेकिन फिर भी एक सुंदरता थी. उस ने बहुत साधारण फीके से रंग की साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन वह भी उस पर भली लग रही थी. मैं समझ गया कि यही ममता है.

मैं उठ खड़ा हुआ और हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.

‘‘बैठिए’’, वह बोली, ‘‘मैं लालाजी की बहू हूं. वे तो अभी घर में नहीं हैं.’’

‘‘उन्होंने मुझे मिलने को कहा था. अगर आप को एतराज न हो तो मैं इंतजार कर लूं.’’

एक पल को ममता के चेहरे पर असमंजस का भाव झलका, लेकिन दूसरे ही क्षण वह सामान्य हो गई.

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‘‘आप का परिचय?’’

‘‘क्षमा कीजिएगा, मेरा नाम राजेश

है. मैं कानपुर में सैंडोज का एरिया

मैनेजर हूं.’’

‘‘लालाजी ने कभी आप का जिक्र नहीं किया.’’

‘‘दरअसल, लालाजी मेरे मामा के दोस्त हैं. उन का नाम राजेंद्र लाल है. शायद उन्हें आप जानती हों.’’

‘‘चाचाजी को अच्छी तरह जानती हूं’’, ममता एक क्षण को चुप हुई, फिर बोली, ‘‘आप विपुल के पिता तो नहीं?’’

‘‘जी…जी हां.’’

‘‘चाचाजी आप की बहुत तारीफ करते हैं.’’

‘‘वे मुझे बहुत प्यार करते हैं.’’

तभी एक सांवली सी लड़की एक ट्रे में कुछ मिठाई व पानी का गिलास और जग ले कर आई. ममता  ने मिठाई की प्लेट मेरी ओर बढ़ा दी. मैं ने चुपचाप एक टुकड़ा ले कर मुंह में डाल लिया.’’

‘‘और लीजिए.’’

‘‘बस’’, कह कर मैं ने पानी का गिलास उठा कर पानी पिया और गिलास मेज पर रख दिया.

‘‘कम्मो, चाय बना ले.’’

‘‘जी, बहूजी.’’

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मैं चाह कर भी चाय के लिए मना न कर सका. हमारे बीच चुप्पी बनी रही.

‘‘मैं आप को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता. आप अपना काम करें. मैं अकेले ही इंतजार कर लूंगा,’’ मैं ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा.

‘‘मुझे ऐसा कोई खास काम नहीं करना है,’’ ममता सहजता से बोली.

मैं चुप हो गया. मुझे अचानक ममता के साथ धोखा करने का गहरा अफसोस हुआ.

‘‘मैं आप के साथ हुए हादसे से वाकिफ हूं. आप तो जानती हैं कि मैं भी कमोबेश ऐसी ही परिस्थिति का शिकार हूं. यद्यपि यह मेरा बेवजह दखल ही है, इसलिए मैं कहूंगा कि आप का इतना अधिक दुख में डूबे रहना कि दुख आप के चेहरे पर झलकने लगे, आप के और आप की बेटी दोनों के लिए अच्छा नहीं है,’’ मैं ने बातचीत शुरू कर दी.

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रंग जीवन में नया आयो रे: भाग 1- क्यों परिवार की जिम्मेदारियों में उलझी थी टुलकी

लेखिका- विमला भंडारी

घंटी की आवाज से मैं एकदम चौंक उठी. सोचा, बेवक्त कौन आया है नींद में खलल डालने. उठ कर देखा तो डाकिया बंद दरवाजे के नीचे से एक लिफाफा खिसका गया था.

झुंझलाई सी मैं लिफाफा ले कर वहीं सोफे पर बैठ गई. जम्हाई लेते हुए मैं ने सरसरी नजर से देखा, ‘यह तो किसी के विवाह का कार्ड है. अरे, यह तो टुलकी की शादी का निमंत्रणपत्र है.’

सारा आलस, सारी नींद पता नहीं कहां फुर्र हो गई. टुलकी के विवाह के निमंत्रणपत्र के साथ उस का हस्तलिखित पत्र भी था. बड़े आग्रह से उस ने मुझे विवाह में बुलाया था. मेरे खयालों के घेरे में 12 वर्षीया टुलकी की छवि अंकित हो आई.

लगभग 8 वर्ष पूर्व मैं उदयपुर अस्पताल में कार्यरत थी. टुलकी मेरे मकानमालिक की 4 बेटियों में सब से बड़ी थी. छोटी सी टुलकी को घर के सारे काम करने पड़ते थे. भोर में उठ कर वह किसी सुघड़ गृहिणी की भांति घर के कामकाज में जुट जाती. वह पानी भरती, मां के लिए चाय बनाती. फिर आटा गूंधती और उस के अभ्यस्त नन्हेनन्हे हाथ दो परांठे सेंक देते. इस तरह टुलकी तैयार कर देती अपनी मां का भोजन.

टुलकी की मां पंचायत समिति में अध्यापिका थीं. चूंकि स्कूल शहर के पास एक गांव में था, इसलिए उस को साढ़े 6 बजे तक आटो स्टैंड पहुंचना होता था. जल्दबाजी में वह अकसर अपना टिफिन ले जाना भूल जाती. ऐसे में टुलकी सरपट दौड़ पड़ती आटो स्टैंड की ओर और मां को टिफिन थमा आती.

लगभग यही समय होता जब मैं अपनी रात की ड्यूटी पूरी कर घर लौट रही होती. आटो स्टैंड से ही टुलकी वापस मेरे साथ घर की ओर चल पड़ती.

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‘आज तुम्हारी मां फिर टिफिन भूल गईं क्या?’ मेरे पूछते ही टुलकी ‘हां’ में गरदन हिला देती. मैं देखती रह जाती उस के मासूम चेहरे को और सोचती, ‘दोनों में मां कौन है और बेटी कौन?’

घर पहुंचते ही टुलकी पूछती, ‘सिस्टर, आप के लिए चाय बना दूं?’

‘नहीं, रहने दे. अभी थोड़ी देर सोऊंगी. रातभर की थकी हूं,’ कहती हुई मैं अपने बालों को जूड़े के बंधन से मुक्त कर देती. मेरे काले घने, लंबे बालों को टुलकी अपलक देखती रह जाती. पर यह मैं ने तब महसूस किया जब एक दिन वह बर्फ लेने आई. उस के कटे बालों को देख मैं हैरानी से पूछ बैठी, ‘बाल क्यों कटवा लिए, टुलकी?’

उस की पहले से सजल मिचमिची आंखों से आंसू बहने लगे. मेरे पुचकारने पर उस के सब्र का बांध टूट गया. भावावेश में वह मेरे सीने से लिपट गई. मेरे अंदर कुछ पिघलने लगा. उस के रूखे बालों में हाथ घुमाते हुए मैं ने पुचकारा, ‘रो मत बेटी, रो मत. क्या हुआ, क्या बात हुई, मुझे बता?’

सिसकियों के बीच उभरते शब्दों से मैं ने जाना कि टुलकी के लंबे बालों में जुएं पड़ गई थीं. मां से सारसंभाल न हो पाई. इसलिए उस के बाल जबरदस्ती कटवा दिए गए.

‘सिस्टर, मुझे आप जैसे लंबे बाल…’ उस ने दुखी स्वर में मुझ से कहा, ‘देखो न सिस्टर, मैं सारे घर का काम करती हूं, मां का इतना ध्यान रखती हूं…क्या हुआ जो मेरे बालों में जुएं पड़ गईं. इस का मतलब यह तो नहीं कि मेरे बाल…’ और उस की रुलाई फिर से फूट पड़ी.

मैं उसे दिलासा देते हुए बोली, ‘चुप हो जा मेरी अच्छी गुडि़या. अरे, बालों का क्या है, ये तो फिर बढ़ जाएंगे, जब तू मेरे जितनी बड़ी हो जाएगी तब बढ़ा लेना इतने लंबे बाल.’

हमेशा चुप रहने वाली आज्ञाकारिणी टुलकी मेरी ममता की हलकी सी आंच मिलते ही पिघल गई थी. पहली बार मुझे महसूस हुआ कि इस अबोध बच्ची ने कितना लावा अपने अंदर छिपा रखा है.

टुलकी की मां उस को जोरजोर से आवाजें देती हुई कोसने लगी, ‘पता नहीं कहां मर गई यह लड़की. एक काम भी ठीक से नहीं करती. बर्फ क्या लेने गई, वहीं चिपक गई.’

मां की चिल्लाहट सुन कर बर्फ लिए वह दौड़ पड़ी. उस दिन के बाद वह हमेशा स्नेह की छाया पाने के लिए मेरे पास चली आती.

एक दिन जब टुलकी अपनी मां के सिर की मालिश कर रही थी तो मैं अपनेआप को रोक नहीं पाई, ‘क्या जिंदगी है, इस लड़की की. खानेखेलने की उम्र में पूरी गृहस्थिन बन गई है. इसे थोड़ा समय खेलने के लिए भी दिया करो, भाभी. तुम इस की सही मां हो, तुम्हें जरा खयाल नहीं आता कि…’

‘क्या करूं, सिस्टर, आज सिर में बहुत दर्द था,’ टुलकी की मां ने अपराधभाव से अपनी नजर नीची करते हुए कहा.

मैं ने टुलकी को उंगली से गुदगुदाते हुए उठने का इशारा किया तो उस ने हर्षमिश्रित आंखों से मुझे देखा और आंखों ही आंखों में कुछ कहा. फिर वह बाहर भाग गई. मुझे लगा, जैसे मैं ने किसी बंद पंछी को मुक्त कर दिया है.

‘आज आटो के इंतजार में सड़क पर 2 घंटे तक खड़ा रहना पड़ा. शायद तेज धूप के कारण सिर में दर्द होने लगा है. सोचा, थोड़ी मालिश करवा लूं, ठीक हो जाएगा,’ टुलकी की मां सफाई देती हुई बोलीं.

शायद कुछ दर्द के कारण या फिर अपनी बेबसी के कारण टुलकी की मां की आंखें नम हो आई थीं. यह देख मैं इस समय ग्लानि से भर गई.

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‘क्या करूं सिस्टर, एक लड़के की चाह में मैं ने पढ़ीलिखी, समझदार हो कर भी लड़कियों की लाइन लगा दी. पता नहीं क्याक्या देखना है जिंदगी में…’ कहती हुई वह अपनी बेबसी पर सिसक उठी.

सारा दोष ‘प्रकृति’ पर मढ़ कर वह अपनेआप को तसल्ली देने लगी. मैं सोचने लगी कि इन्होंने तो सारा दोष प्रकृति को दे कर मन को समझा दिया पर टुलकी बेचारी का क्या दोष जो असमय ही उस का बचपन छिन गया.

‘क्या उस का दोष यही है कि वह घर में सब से बड़ी बेटी है?’ मन में बारबार यही प्रश्न घुमड़ रहा था. टुलकी बारबार मेरे मानसपटल पर उभर कर पूछ रही थी, ‘मेरा कुसूर क्या है, सिस्टर?’

उस दिन भी मैं सो रही थी कि एकाएक मुझे लगा कि कोई है. आंखें खोल कर देखा तो टुलकी सामने खड़ी थी. पता नहीं कब आहिस्ता से दरवाजा खोल कर भीतर आ गई थी. वह एकटक मुझे देख रही थी. मैं ने आंखों ही आंखों में सवाल किया, ‘क्या है?’

आगे पढ़ें- मैं ने ‘हां’ में गरदन हिलाई और उस को…

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Bigg Boss 15: Simba Nagpal ने गुस्से में दिया Umar Riaz को स्वीमिंग पूल में धक्का, फैंस ने लगाई लताड़

कलर्स के रियलिटी शो बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) में इन दिनों प्यार और तकरार का सिलसिला जारी है. दीवाली के धमाकेदार वीक में कंटेस्टेंट्स का असली खेल देखने को मिल रहा है. बीते एपिसोड में सेलेब्स के वार ने शांत कंटेस्टेंट को जगा दिया है, जिसके चलते कंटेस्टेंट के बीच झगड़ा देखने को मिला है. दरअसल, हाल ही में सिम्बा नागपाल (Simba Nagpal) ने उमर रियाज (Umar Riaz) पर हाथ उठाया, जिसके बाद फैंस का गुस्सा उनपर टूट गया है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

उमर रियाज के बीच हुआ झगड़ा

 

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दरअसल, बीती रात शो में हुए एक टास्क में उमर रियाज, सिम्बा नागपाल की मां को गाली देने नजर आ रहे हैं, जिसके बाद शांत रहने वाले सिम्बा नागपाल को गुस्सा आ जाता है. इसी के चलते सिम्बा नागपाल ने उमर रियाज को धक्का मारकर स्वीमिंग पूल में गिरा देते हैं. जहां घरवाले सिम्बा नागपाल को पहली बार गुस्से से हैरान है. दूसरी तरफ सोशलमीडिया पर उमर रियाज के फैंस का गुस्सा देखने को मिला है.

 

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सिम्बा पर बरसा फैंस का गुस्सा

सिम्बा नागपाल पर उमर रियाज के फैंस लगातार सोशल मीडिया पर लताड़ लगा रहे हैं. फैंस लगातार  सिम्बा नागपाल को शो से बाहर करने की मांग कर रहे हैं. वहीं ट्रोलिंग का शिकार भी कर रहे हैं. एक फैन ने सिम्बा नागपाल की लताड़ लगाते हुए लिखा कि इस लड़के ने उमर रियाज पर हाथ उठाया है. मेकर्स को सिम्बा नागपाल के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना चाहिए. सिम्बा नागपाल को घर से बाहर करना जरूरी है. हालांकि कुछ सेलेब्स मेकर्स को बायस्ड होने की बात कर रहे हैं.

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मालिनी का खुला प्रैग्नेंसी का राज तो इमली-आदित्य के बीच होगी बहस, पढ़ें खबर

स्टार प्लस के टीवी सीरियल ‘इमली’ (Imlie) में आए दिन नए ट्विस्ट आ रहे हैं. जहां आदित्य (Gashmeer Mahajani) और इमली (Sumbul Touqeer Khan) ने अपने रिश्ते को एक और मौका दिया है तो वहीं मालिनी (Mayuri Deshmukh) के नए इरादे साथ में सामने आ रहे हैं. लेकिन आने वाले एपिसोड  (Imlie Upcoming Episode) में जहां आदित्य की जिंदगी में नए दुश्मन की एंट्री होगी तो वहीं मालिनी का नया प्लान इमली के सामने होगा. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

मालिनी बताएगी नया सच

 

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अब तक आपने देखा कि डांडिया नाइट में जहां मालिनी की मां अनु, इमली पर हमला करने की कोशिश करती है. तो वहीं मालिनी अपने राज का खुलासा करते हुए इमली को बताती है कि वो अपनी झूठी प्रेग्नेंसी के साथ आदित्य को वापस हासिल कर लेगी, जिसे सुनने के बाद इमली हैरान हो जाती है. दूसरी तरफ अपने प्लान को आगे बढ़ाते हुए मालिनी, आदित्य के सामने अच्छा बनने की कोशिश करती है और आदित्य से दूर जाकर तलाक लेने का फैसला करती है.

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इमली-आदित्य के बीच होगा झगड़ा

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि इमली, मालिनी के नए प्लान के बारे में जान जाएगी. इसी के चलते इमली, आदित्य को सलाह देगी कि मालिनी को उसके घर भेज देना चाहिए, जिसे सुनकर आदित्य उससे नाराज हो जाएगा और उससे कहेगा कि उसका प्यार इतना कमजोर नहीं है कि मालिनी की वजह से दोबारा दोनों अलग हो जाए. हालांकि मालिनी खुद को अच्छा दिखाने के चक्कर में त्रिपाठी हाउस से चली जाएगी, जिसके चलते आदित्य और इमली के बीच एकबार फिर बहस होगी और आदित्य को मालिनी की चिंता होगी, जिसके कारण इमली परेशान नजर आएगी.

आदित्य की लाइफ में होगी विलेन की एंट्री

दूसरी तरफ, आदित्य और इमली की लाइफ में एक नए विलेन की एंट्री होगी. खबरों की मानें तो जल्द ही टीवी एक्टर फहमान खान की एंट्री होने वाली है, जो सीरियल की कहानी में मजेदार ट्विस्ट देखने को मिलेंगे.

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छोटा घर कैसे बनाएं संबंध

बड़े शहरों में सब से बड़ी समस्या आवास की होती है. 2 कमरों के छोटे से फ्लैट में पतिपत्नी, बच्चे और सासससुर रहते हैं. ऐसे में पतिपत्नी एकांत का नितांत अभाव महसूस करते हैं. एकांत न मिल पाने के कारण वे सैक्स संबंध नहीं बना पाते या फिर उन का भरपूर आनंद नहीं उठा पाते क्योंकि यदि संबंध बनाने का मौका मिलता है तो भी सब कुछ जल्दीजल्दी में करना पड़ता है. संबंध बनाने से पूर्व जो तैयारी यानी फोरप्ले जरूरी होता है, वे उसे नहीं कर पाते. इस स्थिति में खासकर पत्नी चरमसुख की स्थिति में नहीं पहुंच पाती है. पतिपत्नी को डर लगा रहता है कि कहीं बच्चे न जाग जाएं, सासससुर न उठ जाएं. मैरिज काउंसलर दीप्ति सिन्हा का कहना है, ‘‘संबंध बनाने के लिए एकांत न मिलने के कारण महिलाएं चिड़चिड़ी, झगड़ालू और उदासीन हो जाती हैं और फिर धीरेधीरे दांपत्य जीवन में दरार पड़नी शुरू हो जाती है, यह दरार अनेक समस्याएं खड़ी कर देती है. कभीकभी तो नौबत हत्या या आत्महत्या तक की आ जाती है.’’

कहीअनकही

विकासपुरी की रहने वाली सीमा के विवाह को 5 वर्ष हो गए हैं. इस दौरान उस के 3 बच्चे हो गए. तीनों बच्चों की देखभाल, सासससुर की सेवाटहल और घर का काम करतेकरते शाम होतेहोते वह पूरी तरह थक जाती है. सीमा का कहना है कि उस के तीनों बच्चे पति के साथ ही बड़े बैड पर सोते हैं. सीमा पलंग के पास ही नीचे जमीन पर बिस्तर लगा कर सोती है. उसे हर वक्त यही डर लगा रहता है कि सैक्स करते समय कोई बच्चा उठ कर उन्हें देख न ले. परिणामस्वरूप वह सैक्स का पूर्ण आनंद नहीं उठा पाती. इस के असर से वह निराशा से घिरने लगी हैं. ढंग से कपड़े पहनने, सजनेसंवरने का उस का मन ही नहीं करता. फिर वह सजेसंवरे भी किसलिए? स्थिति यह हो गई है कि अब पतिपत्नी दोनों में मनमुटाव रहता है.

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खानपान का असर

मांसमछली, शराब आदि का सेवन करने वाले पतियों की सैक्स की अधिक इच्छा होती है और इसीलिए वे न समय देखते हैं और न माहौल, पत्नी पर भूखे भेडि़ए की तरह टूट पड़ते हैं. संबंध बनाने से पहले फोरप्ले की बात तो दूर, वे यह भी नहीं देखते हैं कि बच्चे सोए हैं या जाग रहे हैं अथवा मांबाप ने देख लिया तो वे क्या सोचेंगे. ऐसे में कई बार पत्नी को सासससुर के सामने शर्म महसूस होती है. मांबाप अपने बेटे को कुछ न कह कर बहू को ही सैक्स के लिए उतावली मान बैठते हैं.

संयुक्त परिवार का दबाव

हमारे समाज में विवाह 2 प्राणियों का ही संबंध नहीं, बल्कि 2 परिवारों का संबंध भी होता है. लेकिन मौजूदा हालत में पतिपत्नी अकेले ही अपने बच्चों के साथ रहना पसंद करते हैं. यह उन की मजबूरी भी है, लेकिन यदि पत्नी को परिस्थितिवश सासससुर के साथ छोटे से आशियाने में 2-3 बच्चों के साथ रहना पड़े तो वह कई बार मानसिक दबाव महसूस करती है. सासससुर से शर्म और बातबात पर उन की टोकाटोकी से परेशान बहू पति के लिए खुद को न तो तैयार कर पाती है और न ही एकांत ही ढूंढ़ पाती है. मनोरोगचिकित्सक डाक्टर दिनेश के अनुसार, ‘‘कई बार मेरे पास ऐसे केस आते हैं कि शादी के बाद बच्चे जल्दीजल्दी हो गए. पत्नी उन की देखभाल में लगी रहती है और पति के प्रति उदासीन हो जाती है. इस के चलते पति भी कटाकटा सा रहने लगता है.’’

समय निकालना जरूरी

सैक्स ऐक्स्पर्ट डा. अशोक के अनुसार, ‘‘वास्तव में सैक्स के लिए उम्र की सीमा निर्धारित नहीं होती है कि आप 35 या 40 साल के हो गए हैं. छोटा घर है, बच्चे हैं, सैक्स ऐंजौय नहीं कर सकते. घरगृहस्थी और बच्चों की देखभाल के बाद यदि पतिपत्नी अपने लिए समय निकाल कर शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे तो आगे चल कर उन्हें कई परेशानियां हो सकती हैं. ‘‘डिप्रैशन के अलावा हारमोंस का स्राव भी धीरेधीरे कम हो जाता है. ऐसी स्थिति में अचानक संबंध बनाने पर पत्नी को तकलीफ होती है. फिर निरंतर तनाव बने रहने पर कभीकभी ऐसी स्थिति बन जाती है कि पत्नी को हिस्टीरिया के दौरे तक पड़ने लगते हैं.’’

मन की बात

जनकपुरी की रहने वाली काजल और राजेश ने लव मैरिज की है. उन की शादी को 7 साल हुए हैं. इन 7 सालों में 3 बच्चे भी हो गए. पहला बच्चा 3 साल का है. उस के बाद 2 बेटियां डेढ़ साल और 7 महीने की हैं. काजल कहती हैं, ‘‘हम शादी के शुरुआती दिनों से ही बहुत झगड़ते आ रहे हैं. वजह है राजेश का प्लान कर के साथ नहीं चलना. राजेश ने कहा था कि वे अपने मातापिता के लिए पड़ोस में ही मकान खरीद लेंगे. छोटे से 2 कमरों के मकान में हम ढंग से नहीं रह पाते हैं. मैं राजेश से अपने मन की बात नहीं कर पाती.

‘‘बस, यही डर लगा रहता है कि कहीं सासूमां कुछ कह न दें. जबकि मन की बात करने का मौका पतिपत्नी दोनों को ही मिलना चाहिए.’’ अगर आप भी इस समस्या से गुजर रहे हैं तो निम्न उपाय अपना कर शारीरिक संबंधों का पूर्ण आनंद उठा सकते हैं-

बच्चों को चाचा, मामा के पास भेजें. उन के बच्चों के लिए कोई भेंट भेजें. ऐसा उस समय करें जब सासससुर कहीं शादीविवाह में बाहर गए हों.

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यदि मांबाप को फिल्म देखने या पिकनिक मनाने भेज रहे हों तो बच्चों को भी उन के साथ भेज दें.

अगर आप का कोई मित्र छुट्टी पर अपने घर जा रहा हो तो उस के घर की देखभाल के लिए रात में पतिपत्नी वहां रहें और सैक्स ऐंजौय करें. बदले में मित्र के घर लौटने से पहले घर को सजासंवार कर अच्छा सा खाना बना कर उन के लिए रखें.

संबंध बनाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि फोरप्ले ठीक सैक्स से पहले हो. उसे बारबार थोड़ेथोड़े समय में जब भी जहां भी समय मिले किया जा सकता है. इस से सैक्स के समय दोनों पूरी तरह तैयार होंगे.

सुबह जब बच्चे स्कूल जा चुके हों तब मातापिता को सुबह घूमने जाने के लिए प्रेरित करें.

सैक्स का समय बदलें. नयापन मिलेगा.

पत्नी के साथ हर 15 दिन बाद कहीं डेट पर जाएं. यानी गैस्टहाउस या होटल में जा कर रहें और सैक्स ऐंजौय करें.

गरमी का मौसम हो तो पत्नी को देर रात छत पर बने कमरे में ले जाएं.

बरसात की रात में भी पत्नी को छत पर बने कमरे में ले जा कर बरसात की फुहारों का आनंद लेते हुए सैक्स एंजौय करें.

सुबह बच्चों के स्कूल जाने के बाद, रात में छत पर और किसी दिन यदि आप औफिस से जल्दी घर आते हैं और बच्चे स्कूल से नहीं आए हैं, मातापिता पड़ोस में गए हैं, तब भी आप सैक्स ऐंजौय कर सकते हैं. हां, इस के लिए आप पत्नी को पहले से ही तैयार कर लें.

मदिरापान और मैरिड लाइफ से जुड़ी बातों के बारे में बताएं?

सवाल

मैं 32 वर्षीय पुरुष हूं. मैं ने सुना है कि मदिरापान से सैक्स क्षमता बढ़ जाती है. क्या यह बात सच है? क्या किसी हलकेफुलके नशे का कामोन्माद पर कोई असर पड़ता है?

जवाब

मदिरापान और यौन क्षमता के बीच के संबंध को न केवल समाज में, बल्कि पुराने चलचित्रों और नाटकों में भी तरह तरह से उकेरा गया है. शायद इसी के चलते समाज में यह धारणा भी बहुप्रचलित है कि मदिरा सेवन से यौन क्षमता बढ़ जाती है.

मदिरा थोड़ी लें या अधिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है. मदिरा से प्रेम के सुर झंकृत होते हों, ऐसा ठीक नहीं मालूम होता. मदिरा लेने के बाद संवेदनशीलता भी किसी सीमा तक कम हो जाती है.

60 मिलीलीटर से अधिक मात्रा में ली गई मदिरा यौन क्षमता को पक्के तौर पर घटाती है. सचाई से नाता टूटने के कारण तरह तरह के भ्रम भी जन्म ले सकते हैं. लंबे समय तक निरंतर मदिरा सेवन करते रहने से पुंसत्वहीनता भी उत्पन्न हो जाती है.

हलकेफुलके नशे से आप का तात्पर्य क्या है, यह समझ पाना मुश्किल है. पर गांजा, चरस और कोकीन का लंबे समय तक बराबर सेवन यौन सामर्थ्य समाप्त कर सकता है. दूसरे नशों और कुछ दवाओं के सेवन पर भी यही समस्या आम देखी जाती है.

इसी प्रकार प्रशांतक दवाएं जैसे डायजेपाम, लोराजेपाम, सिडेटिव दवाएं, अल्सररोधी दवा रैनिटिडाइन और ब्लडप्रैशर घटाने के लिए दी जाने वाली कुछ उच्च रक्तचापरोधक दवाएं भी पुरुष यौन सामर्थ्य के आड़े आ सकती हैं.

सैक्स का सुख पाने के लिए किसी भी प्रकार के नशे पर निर्भर रहने के बजाय आपसी प्रेम होना अधिक माने रखता है.

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अगर आप अपने जीवनसाथी के साथ पहले मिलन को यादगार बनाना चाहती हैं तो आप को न केवल कुछ तैयारी करनी होंगी, बल्कि साथ ही रखना होगा कुछ बातों का भी ध्यान. तभी आप का पहला मिलन आप के जीवन का यादगार लमहा बन पाएगा.

करें खास तैयारी: पहले मिलन पर एकदूसरे को पूरी तरह खुश करने की करें खास तैयारी ताकि एकदूसरे को इंप्रैस किया जा सके.

डैकोरेशन हो खास: वह जगह जहां आप पहली बार एकदूसरे से शारीरिक रूप से मिलने वाले हैं, वहां का माहौल ऐसा होना चाहिए कि आप अपने संबंध को पूरी तरह ऐंजौय कर सकें.

कमरे में विशेष प्रकार के रंग और खुशबू का प्रयोग कीजिए. आप चाहें तो कमरे में ऐरोमैटिक फ्लोरिंग कैंडल्स से रोमानी माहौल बना सकती हैं. इस के अलावा कमरे में दोनों की पसंद का संगीत और धीमी रोशनी भी माहौल को खुशगवार बनाने में मदद करेगी. कमरे को आप रैड हार्टशेप्ड बैलूंस और रैड हार्टशेप्ड कुशंस से सजाएं. चाहें तो कमरे में सैक्सी पैंटिंग भी लगा सकती हैं.

फूलों से भी कमरे को सजा सकती हैं. इस सारी तैयारी से सैक्स हारमोन के स्राव को बढ़ाने में मदद मिलेगी और आप का पहला मिलन हमेशा के लिए आप की यादों में बस जाएगा.

सैल्फ ग्रूमिंग: पहले मिलन का दिन निश्चित हो जाने के बाद आप खुद की ग्रूमिंग पर भी ध्यान दें. खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करें. इस से न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि आप स्ट्रैस फ्री हो कर बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगी. पहले मिलन से पहले पर्सनल हाइजीन को भी महत्त्व दें ताकि आप को संबंध बनाते समय झिझक न हो और आप पहले मिलन को पूरी तरह ऐंजौय कर सकें.

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Diwali 2021: डिनर में बनाए टेस्टी मसाला भिंडी

अगर आप डिनर में कुछ टेस्टी बनाना चाहते हैं तो मसाला भिंडी आपके लिए बेस्ट औप्शन है. ये आपके बच्चो और फैमिली के लिए आसानी से बनने वाली रेसिपी है.

हमें चाहिए

– भिंडी (250 ग्राम)

– पानी (एक छोटा बाउल)

– सरसों का तेल (7 से 8 टेबल स्पून)

– जीरा (1 टी स्पून)

–  सौंफ (1 टी स्पून)

– प्याज (एक छोटा बाउल)

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– अदरक (1 टी स्पून)

– हल्दी पाउडर (1/2 टी स्पून)

–  आमचूर पाउडर (1/2 टी स्पून)

– सौंफ पाउडर (1 टी स्पून)

– कालीमिर्च पाउडर (1/4 टी स्पून)

– चीनी (1/2 टी स्पून)

– नींबू का रस (1 टी स्पून)

मसाला भिंडी बनाने का तरीका

– सबसे पहले तेल गर्म करके इसमें सौंफ और जीरा डालकर इन्हें चटकने दें.

– अब इसमें प्याज डालकर हल्की ब्राउन होने दें.

– अब इसमें पानी और अदरक डालकर थोड़ी देर चलाएं.

– अब हल्दी पाउडर डालकर दोबारा चलाएं

–  अब इसमें भिंडी और बचा हुआ पानी डालकर लगातार चलाएं.

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– अब भिंडी को अच्छे से मिला लें और इसमें नमक डालें.

– फिर आमचूर और सौंफ डालें.

– फिर कालीमिर्च पाउडर दोबारा मिलाएं.

– अंत में नींबू का रस डालकर अच्छे से मिला लें और फिर सर्व करें.

HarperCollins के सब्सक्रिप्शन प्रोगाम संग अपने बच्चे को रखें एक कदम आगे

हमारे पिछले आर्टिकल में आपने पढ़ा कि बच्चों के विकास के लिए पढ़ना कितना जरूरी है, लेकिन बच्चों के लिए सही किताबों को चुनना आसान नहीं है वो भी तब, जब हर जगह कोरोना का कहर हो. ऐसे में कितना अच्छा हो कि हम घर बैठे ही ऑनलाइन किताबे खरीद ले और किताबे घर तक आ जाएं.

मौजूदा समय में पैरेंट्स की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए HarperCollins Publishers India लाया है एक अनोखा सब्सक्रिप्शन प्रोगाम. जहां आप अपनी जरूरतों और बजट के हिसाब से सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं.

आइए जानते हैं इसके बारे में…

कैसे काम करता है सब्सक्रिप्शन प्रोगाम?

1. सबसे पहले https://harpercollins.co.in/icanread/ पर लॉग इन करें और चेक करें कि आपके बच्चे के लिए कौन सा लेवल सही रहेगा.

2. आपके लिए हर लेवल के सैंपल चैप्टर उपलब्ध कराए गए है ताकि आप समझ सकें कि आपके बच्चे के मौजूदा रीडिंग लेवल के आधार पर कौन सा सबसे अच्छा काम करेगा. नीचे एक उदाहरण में आप इसे समझ सकते हैं…

SHOT

3. आप अपने बच्चे के लेवल के लिए उपलब्ध कुछ पुस्तकों को भी देख सकते हैं

4. एक बार जब आप लेवल सेलेक्ट कर लें तो अपनी पसंद का सब्सक्रिप्शन पैक चुन लें. हर लेवल के लिए 3 महीने, 6 महीने और 12 महीने का पैक उपलब्ध हैं. लेवल 3 का 3 महीने और 6 महीने का पैक है. आपके ट्रांजेक्शन को पूरा करने के लिए आपको पेमेंट पेज पर भेज दिया जाएगा.

सब्सक्रिप्शन के बाद आपको क्या मिलेगा?

1. पहला पैक जो हम आपको भेजेंगे उसमें आपके बच्चे के लिए नोटपैड, पेंसिल और एक्टिविटी शीट जैसे गिफ्ट्स होंगे. इसके साथ ही आपको मिलेगी 100 टिप्स वाली एक बुकलेट जिससे आप जान पाएंगे कि बच्चे में पढ़ने के लिए दिलचस्पी कैसे बरकरार रखें.

2. हर महीने हम आपको आपके चुने हुए लेवल के हिसाब से तीन किताबें भेजेंगे.

3. हर 6 महीने के पैक के साथ आपको मिलेगी 1000 रुपये की किताबें और हर 12 महीने के पैक के साथ मिलेगी 2500 रुपये की किताबें.

4. हर 12 माह वाला पैक ऑटोमैटिकली अगले लेवल को फ्री अपग्रेड करने की सुविधा के साथ आएगा जो आपके बच्चे के पढ़ने की क्षमता व गति को बनाए रखेगा.

हर लेवल के लिए सब्सक्रिप्शन पैक्स

3 months:
3 books per month and welcome kit @INR 1,418

6 months:
3 books per month, welcome kit and free books worth INR 1000 @INR 2678

12 months:
3 books per month, welcome kit and free books worth INR 2500 @INR 5040

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एक घड़ी औरत : भाग 3- क्यों एक घड़ी बनकर रह गई थी प्रिया की जिंदगी

शीलाजी उस दिन उस के सारे चित्र अपने साथ ले गईं. कुछ दिनों बाद औफिस में उन का फोन आया कि वे उन चित्रों की प्रदर्शनी अमृता शेरगिल और हुसैन जैसे नामी चित्रकारों के चित्रों के साथ लगाने जा रही हैं. सुन कर वह हैरान रह गई. प्रदर्शनी में वह अपनी सहेली और नरेश के साथ गई थी. तमाम दर्शकों, खरीदारों और पत्रकारों को देख कर वह पसोपेश में थी. पत्रकारों से बातचीत करने में उसे खासी कठिनाई हुई थी क्योंकि उन के सवालों के जवाब देने जैसी समझ और ज्ञान उस के पास नहीं था. जवाब शीलाजी ने ही दिए थे.

वापस लौटते वक्त शीलाजी ने नरेश से कहा, ‘आप बहुत सुखी हैं जो ऐसी हुनरमंद बीवी मिली है. देखना, एक दिन इन का देश में ही नहीं, विदेशों में भी नाम होगा. आप इन की अन्य कार्यों में मदद किया करो ताकि ये ज्यादा से ज्यादा समय चित्रकारिता के लिए दे सकें. साथ ही, यदि ये मेरे यहां आतीजाती रहें तो मैं इन्हें आधुनिक चित्रकारिता की बारीकियां बता दूंगी. किसी भी कला को निखारने के लिए उस के इतिहास की जानकारी ही काफी नहीं होती, बल्कि आधुनिक तेवर और रुझान भी जानने की जरूरत पड़ती है.’

नरेश के साथ उस दिन लौटते समय प्रिया कहीं खोई हुई थी. नरेश ही बोले, ‘तुम तो सचमुच छिपी रुस्तम निकलीं, प्रिया. मुझे तुम्हारा यह रूप ज्ञात ही न था. मैं तो तुम्हें सिर्फ एक कुशल डिजाइनर समझता था, पर तुम तो मनुष्य के मन को भी अपनी कल्पना के रंग में रंग कर सज्जित कर देती हो.’

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व्यस्तता बहुत बढ़ गई थी. आमदनी का छोटा ही सही, पर एक जरिया प्रिया को नजर आने लगा तो वह पूरे उत्साह से रंग, कूचियां और कैनवस व स्टैंड आदि खरीद लाई. पर समस्या यह थी कि वह क्याक्या करे? कंपनी में ड्रैस डिजाइन करने जाए या घर संभाले, बच्चों की देखरेख करे या पति का मन रखे? अपने स्वास्थ्य की तरफ ध्यान दे या रोज की जरूरतों के लिए बेतहाशा दौड़ में दौड़ती रहे?

प्रिया की दौड़, जो उस दिन से शुरू हुई, आज तक चल रही थी. घर और बाहर की व्यस्तता में उसे अपनी सुध नहीं रही थी.

‘‘अब हमें एक कार ले लेनी चाहिए,’’ एक दिन नरेश ने कहा.

प्रिया सुन कर चीख पड़ी, ‘‘नहीं, बिलकुल नहीं.’’

‘‘क्यों भई, क्यों?’’ नरेश ने हैरानी से पूछा.

‘‘फ्लैट के कर्ज से जैसेतैसे इतने सालों में अब कहीं जा कर हम मुक्त हो पाए हैं,’’ प्रिया बोली, ‘‘कुछ दिन तो चैन की सांस लेने दो. अब बच्चे भी बड़े हो रहे हैं, उन की मांगें भी बढ़ती जा रही हैं. पहले होमवर्क मैं करा दिया करती थी पर अब उन के गणित व विज्ञान…बाप रे बाप… क्याक्या पढ़ाया जाने लगा है. मैं तो बच्चों के लिए ट्यूटर की बात सोच कर ही घबरा रही हूं कि इतने पैसे कहां से आएंगे. पर आप को अब कार लेने की सनक सवार हो गई.’’

‘‘अरे भई, आखिरकार इतनी बड़ी कलाकार का पति हूं. शीलाजी की कलादीर्घा में आताजाता हूं तुम्हें ले कर. लोग देखते हैं कि बड़ा फटीचर पति मिला है बेचारी को, स्कूटर पर घुमाता है. कार तक नहीं ले कर दे सका. नाक तो मेरी कटती है न,’’ नरेश ने हंसते हुए कहा.

‘‘हां मां, पापा ठीक कहते हैं,’’ बच्चों ने भी नरेश के स्वर में स्वर मिलाया, ‘‘अपनी कालोनी में सालभर पहले कुल 30 कारें थीं. आज गिनिए, 200 से ऊपर हैं. अब कार एक जरूरत की चीज बन गई है, जैसे टीवी, फ्रिज, गैस का चूल्हा आदि. आजकल हर किसी के पास ये सब चीजें हैं, मां.’’

‘‘पागल हुए हो तुम लोग क्या,’’ प्रिया बोली, ‘‘कहां है हर किसी के पास ये सब चीजें? क्या हमारे पास वाश्ंिग मशीन और बरतन मांजने की मशीन है? कार ख्वाब की चीज है. टीवी, कुकर, स्टील के बरतन और गैस हैं ही हमारे पास. किसी तरह तुम लोगों के सिर छिपाने के लिए हम यह निजी फ्लैट खरीद सके हैं. घर की नौकरानी रोज छुट्टी कर जाती है, काम का मुझे वक्त नहीं मिलता, पर करती हूं, यह सोच कर कि और कौन है जो करेगा. जरूरी क्या है, तुम्हीं बताओ, कार या अन्य जरूरत की चीजें?’’

‘‘तुम कुछ भी कहो,’’ नरेश हंसे, ‘‘घर की और चीजें आएं या न आएं, बंदा रोजरोज शीलाजी या अन्य किसी के घर इस खटारा स्कूटर पर अपनी इतनी बड़ी कलाकार बीवी को ले कर नहीं जा सकता. आखिर हमारी भी कोईर् इज्जत है या नहीं?’’

उस दिन प्रिया जीवन में पहली बार नरेश पर गुस्सा हुई जब एक शाम वे लौटरी के टिकट खरीद लाए, ‘‘यह क्या तमाशा है, नरेश?’’ उस का स्वर एकदम सख्त हो गया.

‘‘लौटरी के टिकट,’’ नरेश बोले, ‘‘मुझे कार खरीदनी है, और कहीं से पैसे की कोई गुंजाइश निकलती दिखाईर् नहीं देती, इसलिए सोचता हूं…’’

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‘‘अगर मुझे खोना चाहते हो तभी आज के बाद इन टिकटों को फिर खरीद कर लाना. मैं गरीबी में खुश हूं. मैं दिनरात घड़ी की तरह काम कर सकती हूं. मरखप सकती हूं, भागदौड़ करती हुई पूरी तरह खत्म हो सकती हूं, पर यह जुआ नहीं खेलने दूंगी तुम्हें इस घर में. इस से हमें कुछ भी हासिल नहीं होगा, सिवा बरबादी के.’’

प्रिया का कड़ा रुख देख कर उस दिन के बाद नरेश कभी लौटरी के टिकट नहीं लाए. पर प्रिया की मुसीबतें कम नहीं हुईं. बढ़ती महंगाई, बढ़ते खर्च और जरूरतों में सामंजस्य बैठाने में प्रिया बुरी तरह थकने लगी थी. नरेश में भी अब पहले वाला उत्साह नहीं रह गया था. प्रिया के सिर में भारीपन और दर्र्द रहने लगा था. वह नरेश से अपनी थकान व दर्द की चर्चा अकसर करती पर डाक्टर को ठीक से दिखाने का समय तक दोनों में से कोई नहीं निकाल पाता था.

प्रिया को अब अकसर शीलाजी व अन्य कलापे्रमियों के पास आनाजाना पड़ता, पर वह नरेश के साथ स्कूटर पर या फिर बस से ही जाती. जल्दी होने पर वे आटोरिक्शा ले लेते. और तब वह नरेश की कसमसाहट देखती, उन की नजरें देखती जो अगलबगल से हर गुजरने वाली कार को गौर से देखती रहतीं. वह सब समझती पर चुप रहती. क्या कहे? कैसे कहे? गुंजाइश कहां से निकाले?

‘‘औफिस से डेढ़ लाख रुपए तक का हमें कर्ज मिल सकता है, प्रिया,’’ नरेश ने एक रात उस से कहा, ‘‘शेष रकम हम किसी से फाइनैंस करा लेंगे.’’

‘‘और उसे ब्याज सहित हम कहां से चुकाएंगे?’’ प्रिया ने कटुता से पूछा.

‘‘फाइनैंसर की रकम तुम चुकाना और अपने दफ्तर का कर्ज मैं चुकाऊंगा पर कार ले लेने दो.’’

नरेश जिस अनुनयभरे स्वर में बोले वह प्रिया को अच्छा भी लगा पर वह भीतर ही भीतर कसमसाई भी कि खर्च तो दोनों की तनख्वाह से पूरे नहीं पड़ते, काररूपी यह सफेद हाथी और बांध लिया जाए…पर वह उस वक्त चुप रही, ठीक उस शुतुरमुर्ग की तरह जो आसन्न संकट के बावजूद अपनी सुरक्षा की गलतफहमी में बालू में सिर छिपा लेता है.

पति के जाने के बाद प्रिया जल्दीजल्दी तैयार हो कर अपने दफ्तर चल दी. लेकिन आज वह निकली पूरे 5 मिनट देरी से थी. उस ने अपने कदम तेज किए कि कहीं बस न निकल जाए, बस स्टौप तक आतीआती वह बुरी तरह हांफने लगी थी.

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