सुनीता आहूजा और Govinda की मीठी लवस्टोरी, जिसे जानकर आप हो जाएंगे हैरान

अभिनेता गोविंदा यानि गोविन्द अरुण आहूजा आज भी कॉमेडी के किंग के अलावा एक शानदार डांसर, एक अभिनेता, जो अपने अभिनय की बारीकियों से कभी हँसा, तो कभी रुला देते है. पूरा देश उन्हें एक लिजेंड्री एक्टर मानता है, लेकिन उनकी पत्नी सुनीता अहुजा के लिए वे एक लविंग हस्बैंड है. गोविंदा का निक नेम ची-ची है. गोविंदा और सुनीता ने टिन एज में प्यार किया और उसे ही शादी के रूप में अंजाम दिया. कैरियर की वजह से उन दोनों नेकई सालों तक अपनी शादी को छुपाकर रखा था और शादी की 25वीं वर्षगाठ पर दोनों ने गोविंदा की माँ निर्मला देवी के कहने पर पूरी रीति-रिवाज से विवाहिता सुनीता से शादी की.

गोविंदा और सुनीता के वैवाहिक जीवन में कई उतर-चढ़ाव आये,उनकी एक बेटी केवल 4 महीने रहकर गुजर गयी थी, क्योंकि वह प्रीमच्योर बेबी थी. इसके अलावा दोनों ने हमेशा अपनी रिलेशनशिप को बनाये रखने की कोशिश की. जब गोविंदा कामयाबी की शिखर पर थे, तब उनका नाम कई हीरोइनों के साथ जोड़ा गया, जो उस समय की सुर्खिया थी, लेकिन इन दोनों ने इसकी परवाह किये बिना अपने रिश्ते को अधिक मजबूती दी. आज गोविंदा फिल्मों में कम दिखने की वजह स्क्रिप्ट का पसंद न होना है. दोनों एक अच्छी मैरिड लाइफ बीता रहे है और दोनों बच्चो टीना और यशवर्धन के साथ खुश है. गोविंदा, सुनीता और बच्चे हर साल दीपावली को साथ मिलकर मनाने की कोशिश करते है. इस साल भी वैसे ही मनाने वाले है. इसके अलावा घर पर बनी मिठाइयोंका स्वाद और दीपक से पूरे घर को सजाने वाले है. खूबसूरत और हंसमुख सुनीता ने खास गृहशोभा के लिए बात की,आइये जानते है, उनकी रोमांटिक और स्वीट लव स्टोरी.

सवाल- आप दोनों की लव स्टोरी में कितनी चुनौती रही, सुनीता?

जवाब – हम दोनों ने कम उम्र में प्यार किया था, मैं उस समय 15 साल की थी. मेरी शादी 18 वर्ष में हो गयी और 19 वर्ष में टीना पैदा हो गयी. प्यार जब होता है, तो किसी प्रकार की चुनौती दिखाई नहीं पड़ती. बचपन का प्यार अंधा होता है(हंसती हुई).

सवाल – सुनीता, प्यार हुआ कैसे ? किसने पहले प्रपोज किया?

जवाब – मेरे बहन की शादी गोविंदा के मामा निर्देशक आनंद सिंह से हुई थी. स्ट्रगलिंग टाइम में गोविंदा, जीजा यानि मेरे दीदी के पास 3 साल तक रुके थे. पहली फिल्म ‘तन-बदन’ के लिए मेरे जीजाजी ने साईन करवाया था. पिक्चर की मुहूरत पर मैं, मेरी बहन , भाई और गोविंदा गाड़ी में आ रहे थे. गोविंदा ने मेरे पीठ के पीछे अपना हाथ रखे थे, मैंने उनके हाथ को पकड लिया और आज तक नहीं छोड़ा. 3 साल तक हमने डेटिंग की उसके बाद शादी की.

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(हंसती हुई) असल में मेरी एक लव लैटर को मेरे जीजाजी ने देखलियाऔर हमारे लव के बारें में उनको पता चला, उन्होंने मेरा कान पकड कर पूछा, क्या ये सच है? मैंने हाँ कह दी. इसके बाद गोविंदा ने ही मुझे 2 से 3 साल सेटल्ड होने के लिए समय माँगा था,मैं राजी हो गयी. पहले सान्ताक्रुज़ में केवल वन रूम और किचन था, जब जुहू में उन्होंने वन बेडरूम, हॉल और किचन लिया, तब मेरी सास ने बेटे को शादी करने के लिए कहा, फिर शादी हुई.शादी के बाद मैं प्रेग्नेंट हो गयी, लेकिन गोविंदा ने शादी को डिसक्लोज नहीं किया था, क्योंकि उस समय शादी हो जाने पर एक्टर की फैन फोलोइंग लड़कियों की कम हो जाती थी. तब मैंने एक साल एक रूम में गुजारी थी, क्योंकि घर में प्रेस के लोग आते रहते थे, लेकिन किसी को पता नहीं चला कि गोविंदा की शादी हो गयी है. टीना की पहली सालगिरह पर गोविंदा की शादी की बात सबको पता लगा था.

सवाल – एक कामयाब हीरो की पत्नी होना कितना कठिन रहा?

जवाब–एक एक्टर की पत्नी होना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि हमेशा कुछ न कुछ अखबारों और मैगज़ीन में छपते रहते थे. असल में मैं बिंदास स्वभाव की हूँ, कोई कुछ बोले मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. लोग कई बार कहते थे कि गोविंदा कभी किसी के साथ तो कभी किसी के साथ उन्होंने देखा है. मैं उस व्यक्ति को डांटती और कहती थी कि हीरो है, उसे करने दो, क्योंकि काम नहीं करेंगे तो इंसान पैसा कैसे कमाएगा. अगर मैं गोविंदा से इधर-या उधर जाने से मना करूँ, तो ये कैसे काम करेंगे. मुझे तो पहले से ही पता था कि ये हीरो है. इसके अलावा मेरी और गोविंदा के बीच एक मधुर रिश्ता और विश्वास था, जिसकी वजह से हमारा प्यार हमेशा कायम रहा.

सवाल – वैवाहिक जीवन के 3 दशक बीत जाने के बाद भी आपदोनों के रिश्ते में कभी कडवाहट नहीं आई, इसकी वजह क्या रही, सुनीता?

जवाब– यंग एज को हम दोनों ने कभी स्वाभाविक रूप से नहीं बिताया, क्योंकि गोविंदा बहुत बिजी रहते थे, कही घूमने जाना, रेस्तरां में खाना, थिएटर हॉल में पिक्चर देखना आदि साधारण लोगों की तरह मैं कभी कर नहीं पाई. कही अगर जाएँ भी तो लोग उनके साथ पिक्चर्स या औटोग्राफ लेना शुरू कर देते थे, ये अच्छी बात है कि उनकी पॉपुलैरिटी इन्हीं सब से होता है, लेकिन प्राइवेसी कभी नहीं मिली, ऐसी कई चीजो को मुझे समझना पड़ा.

सवाल– क्या परदे पर सबको हंसाने वाले गोविंदा का घर पर भी वैसा ही स्वभाव रहता है?

जवाब–घर पर भी वैसे ही हँसते रहते है, वे मेरे बिना कभी आउटडोर नहीं जाते थे, क्योंकि घर में मैं ही हंसने खेलने वाली हूँ. अभी भी गोविंदा मुझमें बचपना ही देखते है और कहते है कि मैंने तुम्हे शादी नहीं गोद लिया हुआ है, क्योंकि तुम बड़ी नहीं होती. अभी मैंने 50 साल पूरा किया है और आगे 100 साल तक ऐसी ही रहूंगी. उम्र होगया है, पर मैं अपने स्वभाव को नहीं बदल सकती. शादी के इतने दिन हो गए है, लेकिन अभी भी नोक-झोंक चलती रहती है. गोविंदा बहुत शांत प्रकृति के है, लेकिन मुझे गुस्सा बहुत तेज़ आता है.

सवाल– ऐसा सुनने में आता है कि गोविंदा एक दिन में कई फिल्मों की शूटिंग करते थे, ऐसे में उनसे कुछ बात कहनी हो, तो कैसे कह लेती थी?

जवाब–किसी बात को उन्हें कहना कभी भी मुश्किल नहीं रही, वे एक शांत और हंसमुख व्यक्तित्व के इन्सान है, व्यस्तता के बीच में उन्होंने परिवार का ध्यान हमेशा रखा है. इसके अलावा शादी के बाद टीना पैदा हुई और मैं उसमें व्यस्त हो गयी, ऐसे में बच्चों को सही पालन-पोषण देना ही मेरा मुख्य उद्देश्य रहा, अब बच्चों के बड़े हो जाने पर मैं उनका सब काम सम्हालती हूँ और उनके साथ ट्रेवल भी करती हूँ.

सवाल– आपसी मनमुटाव होने पर कौन किसे पहले मनाता है?

जवाब– गोविंदा ही मनाते है और खुश करने के लिए ज्वेलरी दिला देते है या फिर शोपिंग पर जाने के लिए कहते है. मैं बहुत हठी हूँ और जल्दी मानती नहीं.

सवाल – गोविंदा का नाम अभिनेत्री नीलम कोठारी के साथ बहुत बार उछाला जाता रहा है,उन दोनों की जोड़ी को दर्शक पसंद करते थे, इसलिए दोनों ने साथ-साथ बहुत सारी हिट फिल्में दी, ऐसे में आपके रिएक्शन क्या थे? पति और पिता के रूप में गोविंदा कैसे है?

जवाब – मैं प्रेस वालों की बात तब तक विश्वास नहीं करती, जब तक मैं अपनी आँखों से देख न लूँ. गोविंदा कहीं भी चले जाए, घूम फिरकर पत्नी के पास ही उन्हें आना है. (ठहाके लगाकर हंसती हुई) बाहर का खाना कब तक किसी को हजम होता है, घर का खाना ही सबको हजम होता है.

पति के रूप में वे अच्छे है, लेकिन मैं अगले जनम में उन्हें बेटे के रूप में पाना चाहती हूँ, क्योंकि मैंने जैसा पति चाहा, वैसे गोविंदा नहीं है. मुझे घूमना, फिरना, बाहर खाना आदि पसंद है, लेकिन गोविंदा को काम करना और अपने भाई, बहन के साथ रहना ही सबसे अधिक पसंद है.

पिता के रूप में गोविंदा अपने बच्चों के साथ बहुत ही फ्रेंडली है, लेकिन बच्चों को डर माँ से लगता है.

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सवाल– गोविंदा के जीवन में आये उतार-चढ़ाव को आपने कैसे लिया?

जवाब– मैं हमेशा उनके साथ खड़ी रही. मैं उन्हें समझाती थी कि 80 और 90 की दशक में जब आप काम कर रहे थे, तो बाकी कलाकार के पास काम कम था. पूरी जिंदगी किसी की भी समस्या में नहीं गुजरती, सकारात्मक सोच रखने पर एक समय के बाद सब सही हो जाता है. मुझे ख़ुशी है कि गोविंदा ने 170 फिल्में की थी. वे खुद में एक स्कूल है और बच्चों को बाहर जाकर एक्टिंग सीखने की जरुरत नहीं. मैं अपने बच्चों को पिता से एक्टिंग की सारी बारीकियों को सीखने के लिए कहती हूँ.

मुझे याद आता है संघर्ष के दिनों में जब गोविंदा विरार से आते थे, उनका जूता फटा हुआ रहता था, वे बस से कही आते-जाते थे. साथ में VCR और कैसेट लेकर हर प्रोडक्शन हाउस में जाकर अपनी परफोर्मेंस को दिखाते थे, लेकिन सब रिजेक्ट करते थे, क्योंकि इंडस्ट्री में तब भी गॉडफादर न होने पर कोई काम नहीं देते थे. गोविंदा ने इस नियम को तोड़ा और बिना गॉडफादर के कामयाब हुए. उन्होंने बहुत अधिक संघर्ष किया है. मैंने हमेशा सपोर्ट किया है. जब हमारा अफेयर हुआ, गोविंदा बी,कॉम फाइनल कर रहे थे और मैं उस समय 10वीं में पढ़ रही थी.

सवाल- अभिनय को छोड़ गोविंदा राजनीति में गए, उसका अनुभव आपके लिए कैसा था?

जवाब– मुझे तो राजनीति पसंद नहीं थी, क्योंकि बहुत सारी रोक-टोक और सुरक्षा के अनुसार कुछ भी करना पड़ता था. बच्चों की आज़ादी छीन गयी थी, उनके लिए सुरक्षा का इंतजाम करना पड़ा और मुझे दो इंसान का मेरे साथ बंदूक लेकर चलना ज़रा भी पसंद नहीं था. मैंने कभी सिक्यूरिटी नहीं ली, क्योंकि मेरी सुरक्षा मैं खुद कर सकती थी. गोविंदा को भी ये बात समझ में आई और कुछ दिनों बाद राजनीति से हट गये.

सवाल– क्या आपने कभी किसी फिल्म के लिए गोविंदा को सलाह दिया है?

जवाब–साउथ के निर्देशक मणिरत्नम मुझे बहुत पसंद थे, मैंने ‘रावण’ फिल्म में अभिषेक बच्चन के साथ और आदित्य चोपड़ा की फिल्म ‘किलबिल’ में एक्टिंग करने की सलाह दी थी.

सवाल– कोई मेसेज जो आप सभी कलाकारों को देना चाहती है?

जवाब–गृहशोभा के ज़रिये मैं सभी कलाकारों, लेखको और निर्देशकों को अच्छी और हंसने खेलने की पिक्चर बनाने की सलाह देती हूँ.आज की दुनिया बहुत ही तनाव पूर्ण है, ऐसे में मारधाड़ और हिंसा पर बनी फिल्में दर्शको को अधिक स्ट्रेस और डिप्रेशन में ले जा रही है.

गोविंदा से जुडी कुछ अनसुनी बातें,

  • गोविंदा की कमजोरी और स्ट्रेंथ – माँ निर्मला देवी,
  • सुनीता के हाथ की बनी पसंदीदा व्यंजन – तुअर दाल, मटन, फ्रूट सलाद,
  • गोविंदा की पसंदीदा फिल्म – स्वर्ग,
  • गोविंदा का कम काम की वजह – मनपसंद स्क्रिप्ट न मिलना और किसी फ़िल्मी ग्रुप में शामिल न होना.

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जादुई झप्पी के 11 फायदे

जादू की मीठी झप्पी सचमुच कितनी जादुई है, इस को वही महसूस कर सकता है, जो अपने प्यार को एक नर्म, सुंदर स्पर्श से अभिव्यक्त करना जानता है. चिकित्सक भी मानते हैं कि कुछ सैकंड के झप्पी या आलिंगन दवा सा प्रभाव दिखाता है.

यों पूरी दुनिया में गले लगा कर झप्पी देनेलेने के तरीके सिखाने वाले क्लब तक बने हुए हैं और आलिंगन से जुड़े अनेक उत्सव पूरी दुनिया में मनाए जा रहे हैं, फिर भी अचानक या किसी बधाई के रूप में एकदूजे को दिया जाने वाला आलिंगन तो अपनेआप में अनूठा है ही.

सार्वजनिक रूप से शुरुआत

सब से पहले सार्वजनिक रूप से आलिंगन को अमेरिका में विधिवत रूप से किया जाना शुरू किया गया था. हालांकि कुछ स्रोतों का कहना है कि जब से दुनिया शुरू हुई प्रेमीप्रेमिका या मित्र आलिंगन करते हैं.

हां, यह बात जरूर है कि सीने से लगाने की यह भावना चोरीछिपे पूरी की जाती होगी और मारे शर्म से कोई इस का लाभ ही नहीं ले पाता होगा, तब किसी जागरूक व्यक्ति ने इस को खूब फैलाया होगा.

फिर भी यह माना जाता है कि लगभग 50 साल पहले यह प्रथा कुछ यूरोपीय छात्रों द्वारा आविष्कृत की गई थी. उस समय बोझिल लैक्चरों से उकता कर कुछ छात्रों द्वारा यह तरीका खोजा गया था.

यूरोप के छात्रों को तकनीकी विषयों ने लगातार सुस्त और निराश कर दिया तो यह उपाय खोजा गया. उन्होंने पठनपाठन के दौरान उदास करने वाले और ऊब पैदा करने वाले सत्र के अवसाद के बाद जम्हाई लेते सहपाठियों को प्यार से हग कर के सत्र खत्म होने का जश्न मनाने का फैसला किया. इस के परिणाम बेहद शानदार रहे थे. हौलेहौले ही सही, यह हग किसी स्वार्थ और विशेष कारण के बिना भी गले लगाने का एक बहाना बनता चला गया.

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पूरे संसार का समर्थन

अब आलिंगन की संस्कृति को पूरे संसार में समर्थन मिल गया है और आज अगर कोई अपने विपरीतलिंगी को भी सब के सामने गले लगा ले तो यह गलत या अनैतिक नहीं माना जाता.

हग करना स्नेह की गरमाहट और प्रेम का आदानप्रदान है. चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने प्रेमी के लिए न केवल गले लगाने के रोमांच, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी पर्याप्त शोध किया है. तो फिर आइए, जानते हैं आलिंगन के लाभ :

मजबूत होता है आत्मविश्वास :

जादू की यह झप्पी सच्चे साथी के रूप में पूर्ण सुरक्षा की भावना अंकुरित करती है. युगल साफ कहते हैं कि जब प्रेमी ने स्नेह से गले लगाया, तो कोई और डर या परेशानी नहीं थी. आलिंगन से आत्मविश्वास मजबूत होता है और आपसी जुड़ाव में भी तीव्र बढ़ोत्तरी होती है.

गले लगाते हुए प्रेमी सुकून और आराम महसूस करते हैं. कई अध्ययनों से पता चला है कि अकसर गले लगाना मानसिक और रचनात्मक विकास को आगे ले जाता है.

थकावट को दूर भगाता है :

अगर आप बहुत ज्यादा थके हुए हैं, तो आप के लिए भी आलिंगन बहुत जरूरी है. आलिंगन में यह माद्दा है कि यह चुटकी में थकान को दूर भगाता है. आलिंगन से दिमाग शांत होता है. आप का ध्यान उस चीज से हटता है जिसे ले कर आप परेशान हैं.

ऐनर्जी बूस्ट करता है :

अगर आप अकेलेपन और आलस्य के शिकार हैं, तो आलिंगन आप के लिए फायदेमंद हो सकता है. खून में बढ़ी औक्सीटोसिन की मात्रा मोरल बूस्टअप करती है. इसलिए आलिंगन के बाद लोग तरोताजा महसूस करने लगते हैं और अकेलेपन का एहसास भी दूर हो जाता है.

स्ट्रेस बूस्टर भी है :

जब कोई अपने बहुत करीबी साथी को गले लगाता है, तो उस के अंदर का सारा तनाव पलक झपकते दूर हो जाता है. यह खून में बढ़ते औक्सीटोसिन का कमाल है. इसलिए कई विशेषज्ञ तनावग्रस्त लोगों को अपने प्रियतम से आलिंगन की सलाह देते हैं.

दिल के लिए लाभप्रद :

अपने किसी खास का नियमित रूप से आलिंगन से दिल की धड़कन नियंत्रित रहती है, जो औक्सीटोसिन और मेटाबौलिज्म का निर्माण करता है. दिल के मरीजों को अपने जीवनसाथी या प्रेमीप्रेमिका को नियमित रूप से हग करना चाहिए.

अनिद्रा का दुश्मन :

आलिंगन को अनिद्रा का दुश्मन माना जाता है. जिन्हें रात में नींद न आती हो या कम नींद आती हो उन्हें अपने प्रिय से प्यार की झप्पी लेनी चाहिए. इस से उन्हें खूब नींद आएगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि आलिंगन के बाद बहुत अच्छी नींद आती है और जो लोग खूब हग करते हैं, वे जम कर सोते हैं.

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बढ़ती है मैमोरी पावर :

रिसर्च में यह भी पता चला है कि नियमित रूप से आलिंगन सुख लेने वाले स्त्रीपुरुष की स्मरणशक्ति बहुत लंबे समय तक दुरुस्त रहती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि आलिंगन न करने वालों की तुमना में नियमित आलिंगन करने वाले स्त्रीपुरुष की स्मरण शक्ति भी बेहतर होती है.

लंबी उम्र में फायदेमंद :

औक्सीटोसिन के रिसाव से शारीरिक दमखम बढ़ता है. इसलिए नियमित रूप से आलिंगन करना एक औषधि साबित होता है. इस से दिल की धड़कनें नियंत्रित रहती हैं, जिस से औक्सीटोसिन के साथसाथ मेटाबौलिज्म भी बेहतर होता है.

आलिंगन के बाद बहुत अच्छी नींद आती है. वैज्ञानिक दावा करते हैं कि नियमित आलिंगन से उम्र बढ़ती है. इतना ही नहीं, आलिंगन मानसिक स्वास्थ्य भी सही रखता है. अगर कोई उदास है और उस का कोई साथी आ कर उसे हग कर ले तो अच्छा लगता है और उदासी दूर हो जाती है.

सकारात्मक सोच :

आलिंगन से हर किसी की सोच सकारात्मक हो जाती है, क्योंकि इस से दिमाग में सकारात्मक प्रतिक्रिया होती है. इस आधार पर कह सकते हैं कि आलिंगन इंसान की जिंदगी को सकारात्मकता से भर देती है और नियमित आलिंगन करने वाले के स्वभाव से नकारात्मकता दूर हो जाती है.

बेचैनी होती है दूर :

खून में औक्सीटोसिन नाम के हारमोन का जितना ज्यादा रिसाव होगा, कोई भी व्यक्ति उतना ही ज्यादा हैल्दी होगा. यह हारमोन इंसान की बेचैनी को भी खत्म करता है यानी आप अगर बेचैनी महसूस कर रहे हैं तो अपने प्रिय को गले लगा लीजिए, आप की बेचैनी खत्म हो जाएगी.

मेहनती बनाता है :

इटली की एक लोककथा में बताया गया है कि एक कमजोर शरीर वाले युवक को उस की प्रेमिका सीने से लगा कर ऊर्जा देती थी और वह मजदूरी करता था. हौलेहौले उस युवक का शरीर मजबूत हो गया और वह खूब मन लगा कर मेहनत करने लगा. उस के बाद उस युवक ने यह रहस्य अपने दोस्तों से साझा किया और उन्होंने भी अपनी प्रेमिका को हर रोज सीने से लगाने का संकल्प लिया.

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DIWALI 2021: फेस्टिवल में बनाएं टेस्टी गाजर का हलवा

अगर आप फेस्टिवल में कुछ टेस्टी और हेल्दी ट्राय करना चाहती हैं तो आज हम आपके गाजर का हलवा की टेस्टी रेसिपी बताएंगे. गाजर का हलवे की इस रेसिपी को आप अपनी फैमिली के लिए बनाकर तारीफें बटोर सकती हैं. आइए आपको बताते हैं गाजर का हलवे की खास रेसिपी…

हमें चाहिए

8-10 मीडियम गाजर, कद्दू सा हुआ

3 टेबल स्पून देशी घी

2 कप बिना मलाई वाला दूध

¼ टेबलस्पूनहरी इलायची पाउडर

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10-15 सुल्ताना

⅓ कपशुगरफ्री नेचुरा

¼ कप कद्दू स हुआ खोया

10-12 पिस्ते

बनाने का तरीका:

देसी घी को नौन स्टिक कढ़ाई में गर्म करें. कद्दू की हुई गाजर को डालें और लगभग पांच मिनट तक हल्का तलें. बिना मलाई का दूध डालें और पकायें.

हरी इलायची पाउडर, सुल्ताना, शुगरफ्री नेचुरा एक साथ मिलायें. लगभग दस से पंद्रह मिनट तक पकायें. खोवा डालकर मिलायें. मिश्रण को लगभग सूखने तक पकायें. पिस्ता से सजायें फिर गर्म या ठंडा परोसें.

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लोन लेने से पहले जान लें ये 8 बातें

हर जरूरत को पूरा करने के लिए आपके पास पर्याप्त पैसे होते तो क्या बात होती! पर ऐसा दुनिया में कुछ ही लोगों के पास है. असल जिन्दगी में हममें से कई लोगों को अपनी कुछ खास जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है. बैंक आपको सस्ते लोन के ऐड, फोन कॉल्स से लुभाते हैं.

बैंक के प्रतिनिधि तर‍ह-तरह के आकर्षक ऑफर का लालच देकर आपको लोन लेने के लिए आकर्षित करते हैं. लोन मिलना जितना आसान है, उसे चुकाना उतना ही महंगा पड़ जाता है. हर चीज की तरह लोन लेने के भी कुछ फायदे हैं और कुछ नुकसान.

इसलिए कर्ज लेने से पहले आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, ताकि लोन चुकाते वक्त आपको कम से कम परेशानियां हो.

1. जितना चुका से लें उतना ही लोन

तैते पांव पसारिए जैते लांबी सौर, जितनी लंबी चादर हो उतने ही पांव पसारने चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि लोन चुकाने के लिए आपकी मासिक किश्त आपकी आय के 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए. लोन लेना आसान है केवल इसलिए लोन न लें.

2. लोन चुकाने की मियाद कम रखें

लोन चुकाने की मियाद कम रखने में ही समझदारी है. जितना लंबी मियाद, ईएमआई उतनी ही कम. इससे आप 25-30 साल के लिए लोन लेने के बारे में सोच सकती हैं. हालांकि लोन की मियाद जितनी कम होगी, आपके लिए उतना ही अच्छा है. उधार की किश्त ज्यादा होगी, पर उधार जल्दी चुक जाएगा.

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3. नियमित किश्त चुकाने की आदत डालें

जितना जल्दी आप कर्ज चुका देंगी उतना अच्छा है. चाहे क्रेडिट कार्ड बिल जैसा शॉर्ट टर्म कर्ज हो या होम लोन जैसा लॉन्ग टर्म कर्ज, पेमेंट नियमित तौर पर करना चाहिए. ईएमआई चुकाने में चूक या पेमेंट में देरी से आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर निगेटिव असर पड़ सकता है.

4. खर्च करने के लिए न लें लोन

यह इनवेस्टमेंट का बेसिक रूल है. कभी भी पैसा उधार लेकर इनवेस्ट नहीं करनी चाहिए. फिक्स्ड डिपॉजिट और बॉन्ड्स जैसे बेहतर सुरक्षित इनवेस्टमेंट से उतना रिटर्न नहीं मिलता, जितना आपको लोन की किश्त होती है. डिस्क्रिशनरी एक्सपेंडिचर के लिए भी लोन नहीं लेना चाहिए.

5. जब लोन हो बड़ा, इंश्योरेंस है जरूरी

अगर आप बड़ा होम या कार लोन ले रही हैं तो इसके लिए इंश्योरेंस कवर लेना न भूलें. लोन की रकम के बराबर रकम का टर्म प्लैन लीजिए ताकि अगर आपको कुछ हो जाए तो परिवार पर इसका बोझ न पड़े.

6. जब लिए हों एक साथ कई लोन

अगर आपने कई लोन एक साथ ले रखें हैं तो उन सबको एक सस्ते लोन में बदलना चाहिए. जो सबसे महंगा लोन है उसे सबसे पहले चुकायें. इसके बाद सस्ते लोन भी धीरे-धीरे चुकायें.

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7. अलग रखें रिटायरमेंट फंड  

हम सब की कुछ फाइनेंशियल प्रायोरिटी होती हैं. जहां बात बच्चों की आए हम कोई समझौता नहीं करते, जो कि सही है. पर बचेचों के भविष्य के साथ साथ आपको अपने भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए. अपने बच्चों के भविष्य के लिए रिटायरमेंट फंड से समझौता करना समझदारी नहीं है. कोई भी फाइनेंशियल डिसीजन भावनाओं में बह कर न लें.

8. घर के लोगों को हो लोन की जानकारी

लोन लेने से पहले इस बारे में अपने पति और परिवारवालों से राय लें. आपके किसी भी निर्णय से आपके परिवार वालों के फाइनेंशियल पोजिशन पर असर पड़ता है. अगर आप अपने पति से फाइनेंशियल मैटर्स छुपायेंगी तो इसका असर आपके रिलेशन पर भी पड़ सकता है.

डेंगू से बचाएंगी आपके किचन में मौजूद ये 7 चीजें

डेंगू और चिकनगुनिया इस समय सबसे तेजी से फैल रही बीमारी में से हैं. डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों में तेज दर्द के साथ ही सिर में भी दर्द होता है. यह बीमारी बड़ों के मुकाबले बच्चों में ज्यादा तेजी से फैलती है.डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरता है जिसके कारण शरीर में कमजोरी हो जाती है और जोड़ों में दर्द कई महीनों तक बना रहता है.

डेंगू बुखार के लिए एक और बुहत प्रभावशाली दवा है बकरी का दूध जो बहुत कम हो चुकी प्लेटलेट्स को भी तुरंत बढ़ाने की क्षमता रखता है. लेकिन अगर बकरी का दूध आसानी से न मिले तो आपके घर या बगीचे में मौजूद कुछ हर्ब्स के जरिए भी इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है.

1. तुलसी के पत्ते

तुलसी के पत्तों को गरम पानी में उबालकर छानकर, रोगी को पीने को दें. तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बहुत आराम पहुंचाती है. यह चाय दिनभर में तीन से चार बार पी जा सकती है. तुलसी के पत्तों को उबालकर शहद के साथ पिएं, इससे भी इम्‍यून सिस्‍टम बेहतर बनता है.

2. पपीते की पत्तियां

पपीते की पत्तियां, डेंगू के बुखार के लिए सबसे असरकारी दवा मानी जाती हैं. पपीते की पत्तियों में मौजूद पपेन एंजाइम शरीर की पाचन शक्ति को ठीक करता है. डेंगू के उपचार के लिए पपीते की पत्तियों का जूस निकाल कर रोगी को पिलाने से प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है.

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3. नारियल पानी है असरदार

अगर आपको या फिर घर में किसी को भी डेंगू का बुखार है तो ऐसे में नारियल पानी पीना बहुत फायदेमंद रहता है. इसमें एलेक्‍ट्रोलाइट्स, मिनरल और अन्‍य जरुरी पोषक तत्‍व होते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं.

4. मेथी के पत्ते

डेंगू के बुखार में मेथी के पत्तों को पानी में उबालकर हर्बल चाय के रूप में इसका पयोग किया जा सकता है. मेथी से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे डेंगू के वायरस भी खत्म हो जाते हैं.

5. एंटीबॉयोटिक है हल्दी

खाने में हल्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें. इसे सुबह आधा चम्मच पानी के साथ या रात को दूध के साथ लिया जा सकता है. अगर बुखार से पीड़ित रोगी को जुकाम हो तो दूध का प्रयोग न करें.

6. गिलोय है असरदार दवा

गिलोय का आयुर्वेद में बहुत महत्व है. यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने के साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है. इसके तनों को उबालकर हर्बल ड्रिंक की तरह सर्व किया जा सकता है. इसमें तुलसी के पत्ते भी डाले जा सकते हैं.

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7. काली मिर्च करे कमाल

तुलसी के पत्तों और दो ग्राम काली मिर्च को पानी में उबालकर पीना सेहत के लिए अच्छा रहता है. यह ड्रिंक आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल के रूप में काम करती है.

Anik Ghee के साथ बनाएं चोको पंपकीन बरफी

सीताफल यानी पंपकीन से बनी सब्जी अक्सर लोगों ने खाई है. लेकिन क्या आपने कभी पंपकीन से बनी बरफी ट्राय की है. आज हम आपको Anik Ghee से बनीं चोको पंपकीन बरफी की रेसिपी बताएंगे, जिसे आप आसानी से बनाकर दीवाली में अपनी फैमिली को खिला सकते हैं.

सामग्री

500 किलोग्राम कद्दू

6 छोटे चम्मच चीनी

1/4 कप खोया

1 1/2 छोटे चम्मच अनिक घी

1/2  छोटा चम्मच कोको पाउडर,

1 1/2 छोटा चम्मच क्रीम

गार्निशिंग के लिए थोड़े से बादाम

1-2 बूंदे

1-2 बूंद वैनिला एसेंस

बनाने का तरीका

कद्दू को धो कर छिल्का व बीज अलग करें. फिर भारी तले की कड़ाही में अनिक घी गरम कर कद्दू के छोटे टुकड़े काट कर डालें. ढ़क कर धीमी आंच पर पकाएं, 10-15 मिनट पकाने के बाद चीनी डाल कर फिर तब तक पकाएं जब तक कि सारा पानी सूख न जाए. अब ग्रेट कर खोया डालें व 4-5 मिनट तक पकाएं, एक ग्रीस की हुई थाली में निकाल कर जमा दें. एक कड़ाही में कोको पाउडर, चीनी और खोया डालें. अब इस में क्रीम मिला कर चीनी के पिघलने तक पकाएं. फिर इसमें वैनिला एसेंस डाले व जमी हुई बरफी पर परत लगाएं और बादाम से सजाएं.

सुजाता: भाग 3- क्यों अतुल ने पत्नी से मांगा तलाक?

देखतेदेखते 5 साल गुजर गए थे. उस ने अपनी थीसिस सबमिट कर दी थी जिस में सौरमंडल के ग्रहों के बारे में अतिरिक्त दुर्लभ जानकारियां थीं. उस की थीसिस को अमेरिका के अतिरिक्त अन्य कई देशों की साइंस मैगजींस में प्रकाशित किया गया था. सब ने इस थीसिस की सराहना की थी.

सुजाता एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी डिग्री प्राप्त कर अब डा. सुजाता थी. स्टैनफोर्ड में भी उस ने अपना वर्चस्व कायम कर रखा था. पढ़ाई के अतिरिक्त वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भारतीय व अमेरिकी उत्सवों में भाग लेती थी. दीक्षांत समारोह के अवसर पर सुजाता ने अपने पिता को भी अमेरिका बुलाया था. वे भी अपनी बिटिया की संघर्षमय सफलता पर प्रसन्न थे.

इस दौरान एक भारतीय विधुर ने सुजाता को प्रोपोज किया था. उस ने अपने पिता से पूछा भी था. रेणु से भी चर्चा की थी. दोनों को कोई आपत्ति न थी. पिता को तो खुशी होती अगर सुजाता का घर फिर बस जाता.

वह एक बार उस विधुर के साथ डेट्स पर भी गई थी, परंतु यह एक औपचारिकताभर थी उस व्यक्ति का स्वभाव और विचार परखने के लिए. सुजाता को यह प्रपोजल स्वीकार नहीं था. उस को लगा कि यह व्यक्ति रेणु का सौतेला पिता बनने के योग्य नहीं था. इस के बाद उस के पास फिर कभी शादी की बात सोचने की फुरसत भी नहीं थी.

पीएचडी करने के दौरान ही सुजाता को नासा से एस्ट्रोफिजिसिस्ट साइंटिस्ट का औफर मिल चुका था. उसे मोफेट कील्ड, कैलिफोर्निया में स्थित नासा के रिसर्च सैंटर में पोस्ट किया गया था. सुजाता को उस की विशिष्ट उपलब्धियों के आधार पर ग्रीन कार्ड आसानी से मिल गया था. अब वह अमेरिका की स्थाई निवासी थी.

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इस बीच, उस के पूर्व पति अतुल को भी अपनी पूर्र्व पत्नी की उपलब्धियों की जानकारी मिल चुकी थी. अमेरिकन लड़की से शादी के बाद उसे भी ग्रीन कार्ड मिल गया था. एक दिन उस ने सुजाता को फोन किया था. परंतु सुजाता ने उस को कोई तवज्जुह नहीं दी थी. उस ने मात्र इतना ही कहा, ‘‘हम मांबेटी दोनों बहुत खुश हैं, अब आगे हमारी जिंदगी में दखल न देना.’’ और फोन काट दिया था.

इधर अतुल की अपनी नई अमेरिकन बीवी के साथ निभ नहीं रही थी. उस की बीवी ने ही तलाक की अर्जी कोर्ट में दे रखी थी जो 6 मास होतेहोते मंजूर भी हो गई थी. अतुल को आधी संपत्ति उस अमेरिकन को देनी पड़ी थी.

सुजाता की बेटी रेणु करीब 15 साल की हो चली थी. वह भी कैलिफोर्निया की जूनियर चैस चैंपियन थी. एक बार फिर अतुल ने सुजाता से फोन कर मिलने की इच्छा व्यक्त की थी. पहले तो वह नहीं मान रही थी, पर उस के बारबार के आग्रह पर रविवार को सुबह मिलने को कहा. सुजाता ने रेणु को भी सारी सचाई बता दी थी, हालांकि, अतीत की कुछ बातें रेणु को अभी भी याद थीं.

डा. सुजाता ने सैन होजे में बड़ा घर खरीद लिया था. अतुल रविवार को सुजाता से मिलने पहुंचा था. रेणु ने स्नैक्स और जूस ला कर सामने टेबल पर रखा था.

रेणु को सामने देख कर अतुल बहुत खुश हुआ और बोला, ‘‘इधर आओ बेटी, मैं तुम्हारा पिता हूं.’’

सुजाता ने उस की बात काटते हुए कहा, ‘‘गलत. बिलकुल गलत. तुम उस के पिता थे. अब नहीं रहे.’’

अतुल बोला, ‘‘सौरी. पर क्या हम फिर से एक नहीं हो सकते? जब जागो तभी सवेरा.’’

सुजाता बोली, ‘‘याद करो, परदेश में तुम ने मुझे बेसहारा समझ सड़क पर ला कर खड़ा कर दिया था. मैं तो कभी सोई ही नहीं. हमेशा जगी और सचेत थी. हां, तुम जाग कर भी सोए हुए थे. जगे हुए को जगाया नहीं जाता है.’’

अतुल बोला, ‘‘मुझे तुम से तलाक लेने का अफसोस है. पर क्या फिर हम मिल नहीं सकते?’’

सुजाता ने कहा, ‘‘तुम अभी तक 2 बीवियों से तो निभा नहीं सके हो. तुम पर कोई मूर्ख लड़की भी भरोसा नहीं करेगी, मेरा तो सवाल ही नहीं उठता.’’

अतुल बोला, ‘‘एक बार फिर से सोच लो. आखिर, रेणु को भी पिता का संरक्षण मिल जाएगा.’’

सुजाता बोली, ‘‘अब तुम इतने दिनों

से अमेरिका में रह कर भी

बेवकूफी वाली बात कर रहे हो. यहां लड़कियां और औरतें बहुत सुरक्षित हैं. तुम तो कंप्यूटर इंजीनियर हो. तुम्हें पता होना चाहिए कि मैं जहां भी रहूं, सैलफोन में ऐप्स के द्वारा रेणु और घर पर बराबर नजर रख सकती हूं. वैसे, हम दोनों अपने बल पर अपनी रक्षा कर सकते हैं. तुम्हारे जैसे कमजोर मर्द क्या सुरक्षा देंगे? तुम अपनी फिक्र करो. हो सकता है, तुम्हें किसी औरत का संरक्षण चाहिए.’’

अतुल बोला, ‘‘एक बार रेणु से भी पूछ लो, उसे पिता नहीं चाहिए?’’

सुजाता ने रेणु से पूछा, ‘‘क्यों बेटे, मिस्टर अतुल को क्या जवाब दूं?’’

रेणु बोली, ‘‘मेरी मम्मीपापा दोनों आप हो मौम. हम दोनों में इतनी

शक्ति और क्षमता है कि किसी तीसरे की कोई गुंजाइश नहीं है हमारे बीच. मिस्टर अतुल से कह दो, कृपया चले जाएं.’’

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सुजाता अतुल की तरफ देख कर बोली, ‘‘तुम्हें जवाब चाहिए था, मिल गया न. नाऊ, यू कैन गो. और कभी नारी को अबला समझने की भूल भविष्य में न करना.’’

अतुल बिना कुछ बोले सुजाता के घर से निकल पड़ा था.  द्य

ऐसा भी

होता है

बात पुरानी है. हमें हिमाचल प्रदेश के किसी गांव में किसी शादी में जाना था और वह गांव मुख्य सड़क से काफी अंदर जा कर था.  बस से हम शाम ढले उस जगह पहुंचे जहां से हमें मुख्य सड़क से गांव की ओर पैदल जाना था लेकिन जब बस से उतरे तब बाहर बहुत तेज वर्षा हो रही थी.

अब गांव जाएं तो कैसे जाएं, यही सोचतेसोचते हम परिवार समेत सड़क किनारे स्थित एक छप्परनुमा दुकान की छत के नीचे खड़े हो गए.

दुकान में बैठे एक बुजुर्ग शायद हमारी समस्या को भांप गए थे. उन्होंने हमें बड़ी विनम्रता से छप्पर के अंदर आने को कहा सो हम अंदर चले गए और वहां पर बने एक चबूतरेनुमा बैंच पर बैठ गए.

उन दिनों मोबाइल भी नहीं होते थे इसलिए गांव में सूचना देना भी संभव नहीं था. उधर वर्षा रुकने का नाम नहीं ले रही थी.

बातों ही बातों में रात हो गई और सब भूख से बेहाल होने लगे. हमारी स्थिति भांप कर वही बुजुर्ग बोले, ‘‘मैं तुम्हारे सब के लिए खाना बना देता हूं, खाना खा कर तुम सब इसी छप्पर के नीचे सो जाना क्योंकि बारिश तो बहुत तेज हो रही है. थमने का नाम नहीं ले रही. लगता है  सुबह तक होती रहेगी. ऐसे में तुम्हारा निकलना संभव नहीं. उन्होंने शायद हमारे मन की बात कह दी थी सो सब ने यह सोच कर चुपचाप उन की बात मान ली कि सुबह चलते समय हम उन को खाने का और ठहरने का दाम दे देंगे. इतना कुछ हमारे लिए कर रहे हैं तो हमारा फर्ज बनता है कि उन की पैसे से मदद करें.

हम ने भरपेट खाना खाया और थकावट के कारण हमें झट से नींद आ गई. सुबह सो कर उठे तो देखा बारिश भी रुक गई थी तो हम ने सामान उठाया और उन बुजुर्ग को पूरी व्यवस्था के दाम पूछे.

पलट कर बुजुर्ग बोले, ‘‘बेटा यह सब व्यवस्था मैं ने पैसे के लिए नहीं की थी बल्कि इंसानियत के नाते की थी. इस दाने पर तुम्हारा नाम था सो तुम ने खाया.’’

यह सुनते ही मैं ने बुजुर्ग के चरण पकड़ लिए. मैं ने उन्हें कुछ तो पैसे लेने को कहा लेकिन उन्होंने एक पैसा नहीं लिया और यह सोचता चला आया कि दुनिया में इंसानियत अभी जिंदा है,

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सुजाता: भाग 2- क्यों अतुल ने पत्नी से मांगा तलाक?

सुजाता बोली, ‘‘तब, मुझे क्या करना चाहिए?’’

अतुल बोला, ‘‘मैं सारे पेपर्स तैयार करवा लेता हूं. इस के अतिरिक्त एक एग्रीमैंट भी तैयार कर लेता हूं. मेरा जितना भी बैंक बैलेंस और शेयर्स हैं उस का आधा तुम्हें दे रहा हूं. रेणु की कस्टडी भी तुम्हें दे रहा हूं क्योंकि बेटी मां के पास ज्यादा खुश रहेगी. तुम सारे पेपर्स पर साइन कर दो. जितना जल्दी हो जाए, अच्छा है क्योंकि जितनी बार हम वकील के यहां या कोर्ट जाएंगे, महंगा पड़ेगा. यहां वकील की फीस बहुत ज्यादा होती है. पेपर्स साइन कर तुम इंडिया जा सकती हो क्योंकि तब तक तुम्हारा वीजा वैलिड रहेगा. बाकी, सब मैं यहां देख लूंगा.’’

सुजाता बोली, ‘‘ठीक है, मुझे सबकुछ मंजूर है जिस में तुम्हारी खुशी है. तुम पर प्यार न तो थोपूंगी और न ही इस के लिए तुम से भीख मांगूगी.’’

अतुल बोला, ‘‘तो मैं वकील से मिल कर पेपर्स तैयार करा लेता हूं.’’

सुजाता बोली, ‘‘हां, करा लो. मगर मुझे तुम्हारा एक पैसा भी नहीं चाहिए. इंडिया जाने का अपना और रेणु का टिकट मैं खुद कटाऊंगी. मुझे या रेणु को जो कैश गिफ्ट मिलते थे, उन में से कुछ पैसे बचाए हैं. इस के अतिरिक्त पापा का दिया क्रैडिट कार्ड भी है. उस से मेरा काम हो जाएगा. हां, रेणु मेरी बेटी मेरे ही साथ रहेगी.’’

अतुल बोला, ‘‘मगर रेणु के लिए मैं कुछ देना चाहूंगा.’’

‘‘वे पैसे हमारी तरफ से अपनी नई अमेरिकन बीवी को गिफ्ट कर देना,’’ सुजाता ने कहा.

2 दिनों बाद अतुल ने सुजाता को तलाक से संबंधित पेपर्स दिए थे. सुजाता ने उन पेपर्स पर साइन कर अतुल को लौटा दिए थे. कुछ ही दिनों के बाद सुजाता को कोर्ट से भी एक नोटिस मिला था, जिसे उस ने तलाक पर अपनी सहमति के साथ वापस भेज दिया था.

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2 सप्ताह के अंदर सुजाता अपनी बेटी रेणु के साथ इंडिया आ गईर् थी. 40 वर्ष की उम्र के आसपास अब वह एक बेटी की सिंगल पेरैंट थी. उधर, अतुल अपनी अमेरिकन प्रेमिका के साथ रहने लगा था. चंद महीनों के अंदर अतुल और सुजाता का तलाक भी हो गया था. फिर अतुल ने अमेरिकन से शादी कर ली थी.

इधर, सुजाता अपने पापा के साथ बनारस में थी. उस के पापा ने कहा, ‘‘बेटी, तू डरना नहीं. तेरा बाप जिंदा है. तुझे किसी प्रकार का कष्ट नहीं होने देगा.’’

सुजाता ने कहा, ‘‘मुझे आप के रहते किसी बात की चिंता नहीं है. पर मुझे अपना और रेणु का भविष्य सुनिश्चित तो करना ही होगा. हम पूरी जिंदगी किसी के सहारे तो नहीं काट सकते हैं.’’

इंडिया आने के कुछ ही महीने बाद उस ने बीएचयू में एमएससी (फिजिक्स) में ऐडमिशन लिया था. अपने फ्री समय में घर से कंप्यूटर पर स्काइप द्वारा अमेरिका के अपने कुछ पुराने बच्चों को चैस की कोचिंग देने लगी थी. इस में अच्छी आमदनी भी थी. एक बच्चे से एक घंटे कोचिंग के लिए 500 रुपए तो आसानी से मिल जाते थे क्योंकि अमेरिका में यही बच्चे एक घंटे के लिए सौ डौलर तक देते हैं.

इस के अतिरिक्त सुजाता को पियानो बजाना भी आता था. बनारस में उसे कोई पियानो सीखने वाला विद्यार्थी तो नहीं मिला क्योंकि वहां पियानो दूर तक किसी के पास नहीं था. पर कुछ बच्चे कीबोर्ड सीखने वाले मिल गए थे. पिता के रहते उसे पैसे की कोई कमी नहीं थी, फिर भी वह आर्थिकरूप से अब आत्मनिर्भर थी. उस ने रेणु का ऐडमिशन भी एक प्रसिद्ध इंटरनैशनल स्कूल में करा दिया था.

छुट्टियों में वह रेणु के साथ किसी न किसी हिल स्टेशन पर जाती थी. इस से बनारस की गरमी से भी बच जाती थी और मनोरंजन भी हो जाता था. उस ने कम उम्र में ही रेणु को भी चैस की कोचिंग देना शुरू कर दिया था. उस ने एक एनजीओ भी जौइन कर लिया था जो अमेरिका में पीडि़त भारतीय महिलाओं की मदद करता था.

एक बार सुजाता के घर उस की मौसी आई थी. सुजाता कहीं घूमने के लिए बाहर निकल रही थी. वह जींस और टौप पहने थी.

उस की ड्रैस पर मौसी ने कहा, ‘‘यह क्या पहनावा है. बेटियों को ठीक से तो रहना चाहिए. इतनी उम्र हो गई इतना भी नहीं सीखा?’’

सुजाता ने कहा, ‘‘मौसी, आप ने तो ऐसा ब्लाउज पहन रखा है कि आधी छाती और आधी पीठ नजर आ रही है और साड़ी भी नाभि के नीचे बांध रखी है. मेरे पहनावे से तो मेरा कोई अंगप्रदर्शन नहीं हो रहा है. तब मेरी ड्रैस बुरी कैसे हुई?’’

मौसी तिलमिला कर रह गई थीं. सुजाता दिनपरदिन पहले से ज्यादा ही स्मार्ट लगने लगी थी, मेकअप तो नाममात्र का करती थी पर अपने पसंदीदा ब्रैंडेड कपड़े और रंगीन चश्मा पहन कर जब

भी निकलती थी, उसे देख कर कोई भी 30 साल से ज्यादा की नहीं सोचता था.

सुजाता ने फाइनल ईयर में पहुंचतेपहुंचते जीआरई और टोएफेल टैस्ट्स में अच्छे स्कोर्स हासिल कर लिए थे. ये दोनों टेस्ट्स अमेरिका में आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी होते हैं. उस ने अमेरिका की कुछ प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज में पीएचडी के लिए अप्लाई भी कर दिया था.

अब सुजाता ने एमएससी पूरी कर ली थी. अपनी पढ़ाई और अन्य सामाजिक कार्यों से उस ने यूनिवर्सिटी और बनारस शहर में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली थी.

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अमेरिका की अच्छी यूनिवर्सिटीज से स्कौलरशिप के साथ पीएचडी का औफर भी मिल गया था, जिन में कैलिफोर्निया की बर्कले और स्टैनफोर्ड भी थीं. उस ने स्टैनफोर्ड जाने का फैसला लिया था. उसे एफ-1 स्टूडैंट वीजा भी मिल गया था. बेटी रेणु तो अमेरिकन नागरिक थी ही, उसे अमेरिका जाने के लिए किसी वीजा की जरूरत नहीं थी.

सुजाता के पिता ने अमेरिका जाने के पहले उस से कहा, ‘‘बेटी, एक बार फिर से सोच लो. तुम अमेरिका में अकेले रह सकोगी? मुझे तुम्हारी और रेणु की सुरक्षा की चिंता है.’’

वह बोली, ‘‘पापा, आप को शायद मालूम नहीं है, महिलाओं के लिए अमेरिका बहुत ही सुरक्षित देश है. और अब तो रेणु भी समझदार हो गई है. अमेरिका में तो हजारों सिंगल मदर्स मिलेंगी. उन्हें कोई हेयदृष्टि से नहीं देखता. आप यहां चैन से रहिए. आप की बेटी अब इस काबिल हो गई है कि अपनी और रेणु की देखभाल भलीभांति कर सकती है.’’

अगस्त के अंतिम सप्ताह में सुजाता और रेणु अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के सैन फ्रांसिस्को हवाई अड्डे पर उतरी थीं. वहां से टैक्सी ले कर पालो आल्टो पहुंच गई थीं. वहीं पर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी है. वहां आने के पहले सुजाता ने एक रूम का अपार्टमैंट इंडिया से ही बुक कर लिया था. उस ने प्रसिद्ध एस्ट्रोफिजिसिस्ट के मार्गदर्शन में अपना शोध शुरू किया. उस के गाइड उस की प्रगति पर बहुत खुश थे.

बेटी रेणु भी स्कूल जाने लगी थी. सुबह यूनिवर्सिटी जाते समय उसे स्कूल में छोड़ देती थी और लौटते समय ले लेती थी. कभी लौटने में देर होने की संभावना होती तो उसे स्कूल में ही 2-3 घंटे एंक्सटैंडेड औवर्स में छोड़ देती थी. अमेरिका में ज्यादातर पतिपत्नी दोनों ही नौकरी करते हैं, तो उन के छोटे बच्चों के लिए स्कूल में अकसर यह सुविधा होती है.

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सुजाता: भाग 1- क्यों अतुल ने पत्नी से मांगा तलाक?

अतुल ने सुजाता से तलाक मांगा, उस ने दे दिया. सुजाता को पति के प्यार की भीख नहीं चाहिए थी. अतुल ने सुजाता को अबला समझा था, लेकिन वह कमजोर नहीं थी…

मुकेश कुमार बनारस के नामी  वकील थे. दयालबाग में उन का बड़ा सा बंगला था. आज उन के घर की रौनक देखने लायक थी. हजारों रंगीन बल्ब जगमगा रहे थे. दर्जनों हैलोजन बल्ब्स सामने की रोड पर भी लगे थे. पूरी रोड को कवर कर बड़ा सा पंडाल सजाया गया था. पंडाल के अंदर भी काफी सजावट थी. और बिस्मिल्लाह खान की शहनाई बज रही थी. बरात के शानदार स्वागत की पूरी तैयारी थी. क्यों न हो, उन की इकलौती बेटी सुजाता की शादी जो थी.

सुजाता ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बीएससी करने के बाद कंप्यूटर के कुछ कोर्स किए थे. वह राज्य की चैस चैंपियन थी. इस के अतिरिक्त, उस ने संगीत में प्राथमिक शिक्षा भी ली थी. देखने में सुंदर भी थी. उस का भावी पति अतुल लखनऊ का रहने वाला था. उस ने

भी बीएचयू से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटैक किया था. बेंगलुरु में एक अमेरिकन कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर था. मुकेश साहब बेटी की शादी अच्छे सजातीय लड़के से कर निश्ंिचत हो गए थे. अरेंज्ड मैरिज थी. बेटी को जरूरत की सब चीजें दिल खोल कर दी थीं. शादी के एक सप्ताह बाद ही सुजाता पति के साथ बेंगलुरु आ गई थी.

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अतुल और सुजाता दोनों बहुत खुश थे. सुजाता तो शाकाहारी थी पर अतुल मांसाहारी था. पर सुजाता को इस में कोई आपत्ति नहीं थी. दोनों ने प्लानिंग की थी कि 5 साल के बाद ही कोई बच्चा हो. इस बीच, दोनों ने खूब मौजमस्ती की. देशविदेश की सैर भी की. शादी के 6 साल बाद सुजाता मां बनने वाली थी. तभी अतुल को लंबे समय के लिए अमेरिका जाना पड़ा था. कंपनी ने उस के लिए एच 1 बी जौब वीजा लिया था. सुजाता को एच 4 वीसा, जो आश्रितों के लिए होता है, मिला था.

दोनों अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में आ गए थे. कुछ महीने बाद उन को एक प्यारी सी बेटी हुई थी, रेणु. अमेरिका में जन्म होने के कारण उसे अमेरिकी नागरिकता मिल गई थी. साथ में अतुल ने उस के लिए भारतीय कौंसुलेट से ओवरसीज सिटीजन औफ इंडिया कार्ड भी बनवा लिया था.

सुजाता अपने वीजा पर अमेरिका में कोई काम नहीं कर सकती थी. और वैसे भी, उस की डिगरी पर कोई नौकरी नहीं मिल सकती थी. पर वह घर पर ही कुछ भारतीय बच्चों को चैस सिखलाया करती थी.

इस से उस का समय कट जाता था. अमेरिका में बच्चों में पढ़ाई के अतिरिक्त कुछ न कुछ सीखने का शौक होता है. वह इस के बदले में कोई फीस तो नहीं लेती थी क्योंकि औपचारिक तौर पर वह यह काम नहीं कर सकती थी. पर जब कभी रेणु के जन्मदिन पर और अपनी एनिवर्सरी पर उन बच्चों व उन के मातापिता को बुलाती थी तो वे जानबूझ कर कैश ही गिफ्ट करते थे. सुजाता ने अमेरिका में पियानो बजाना भी सीख लिया था.

शुरू के 4-5 साल तो ठीक से बीत गए थे. दोनों पतिपत्नी बहुत खुश थे. रेणु अब अमेरिका में स्कूल जाने लगी थी. कुछ दिनों बाद पति व पत्नी में अकसर नोकझोंक होने लगी थी क्योंकि अतुल अकसर वीकैंड में देररात घर लौटता था. इस के चलते कभीकभी तो लड़ाईझगड़े भी होते थे. अतुल का उसी की कंपनी में कार्यरत एक अमेरिकन लड़की से अफेयर चल रहा था. यह बात अब सुजाता से छिपी नहीं थी. सुजाता इस का कड़े शब्दों में विरोध करती थी. आएदिन घर में तनाव रहता था.

एक दिन अचानक अतुल ने सुजाता से कहा, ‘‘बेहतर है, अब हम अलग हो जाएं.’’

सुजाता बोली, ‘‘तनाव तो तुम ने पैदा किया है हमारे बीच उस अमेरिकन लड़की को ला कर. उसे अपनी जिंदगी से निकाल फेंको, सबकुछ अपनेआप ठीक हो जाएगा.’’

अतुल बोला, ‘‘तुम जैसा सोच रही हो, वह नहीं होगा. हमारे बीच की खाई पाटना अब मुमकिन नहीं है. क्यों न हम तलाक ले लें?’’सुजाता को इस की उम्मीद नहीं थी. उस ने अपने को संभालते हुए

कहा, ‘‘बेहतर है, तलाक की बात तुम ने शुरू की. मैं भी बंटा हुआ पति नहीं चाहती हूं.’’थोड़ी देर रुक कर, फिर सुजाता ने आगे कहा, ‘‘क्यों न हम एक बार इंडिया में अपनेअपने घर बात कर उन्हें यह सब बता दें? इस के बाद जैसा तुम कहोगे, वैसा होगा.’’

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अतुल इस के लिए तैयार नहीं था. उस के मन में चालाकी सूझी थी. उसे अमेरिका आए 5 साल से ज्यादा हो गया था. उस का एच 1 बी वीजा 8 महीने बाद खत्म हो रहा था. यह वीजा 6 साल से ज्यादा नहीं मिलता है. उस का मन अमेरिका छोड़ने का नहीं था. वहां की लाइफस्टाइल उसे बेहद पसंद थी. उस ने मन में अमेरिकन लड़की से शादी करने की ठान ली थी. इस से उसे ग्रीन कार्ड आसानी से मिल जाता. फिर अमेरिका में जितने दिन चाहता, रह सकता था. उस को भय था कि यह बात सुजाता के पिता को अच्छी नहीं लगेगी और वे खुद एक वकील हैं, आसानी से तलाक नहीं होने देंगे और मामला लंबे समय तक लटका रहेगा.

सुजाता ने आगे कहा, ‘‘तब सीरियसली बताओ, मुझे क्या करना चाहिए?’’अतुल बोला, ‘‘मैं यहां डाइवोर्स सूट फाइल करूंगा. और तुम्हें बता दूं कि कैलिफोर्निया में ‘नो फाल्ट’ तलाक का नियम है. यदि पति या पत्नी में से कोई भी यहां की कोर्ट में तलाक की अर्जी देता है किसी वजह से भी तो उसे कोर्ट में वजह साबित करने की जरूरत नहीं होती है. हां, ज्यादा से ज्यादा प्रौपर्टी के बंटवारे और बच्चे की कस्टडी के लिए आपस में समझौता कर लेना होता है या फिर कोर्ट के फैसले का इंतजार करना पड़ता है.’’

सुजाता बोली, ‘‘जब तुम ने फैसला कर ही लिया है, तो मैं तुम से जबरदस्ती बंध कर नहीं रह सकती.

हूं. ठीक है, अब देररात

हो चुकी है, आगे कल

बात होगी.’’

रात में सुजाता ने अपने पापा को सारी बातें विस्तार से बताई थीं. उस के पिता ने कहा भी था कि वे अतुल के पूरे परिवार को इंडिया में कोर्ट केस में बुरी तरह ऐसा फंसा देंगे कि पूरी जिंदगी कोर्ट के चक्कर लगाते रहेंगे.

सुजाता ने कहा, ‘‘नहीं पापा, इस में अतुल के परिवार का कोई दोष नहीं है. उन को बेवजह क्यों तंग करना है, और जब अतुल को मुझ से प्यार ही नहीं रहा, तो मैं क्या उन से प्यार की भीख मांगूं?’’

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अगले दिन सुजाता ने अतुल से कहा, ‘‘तुम अपने पेपर्स तैयार करा लो, मैं साइन कर दूंगी.’’

अतुल बोला, ‘‘इस में एक बाधा है जो तुम्हारे हित में नहीं है.’’

वह बोली, ‘‘अब भी तुम मेरा हित सोच रहे हो?’’

अतुल बोला, ‘‘बात ठीक से समझो. जिस दिन कोर्ट से तलाक मिल जाता है, उसी दिन से तुम्हारा अमेरिका में रहना, गैरकानूनी हो जाएगा क्योंकि तब तुम मुझ पर आश्रित नहीं रहोगी और तुम्हारा वीजा  रद्द हो जाएगा. तुम भारी मुसीबत में फंस जाओगी.’’

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एक घड़ी औरत : भाग 1- क्यों एक घड़ी बनकर रह गई थी प्रिया की जिंदगी

आतंकित और हड़बड़ाई प्रिया ने तकिए के नीचे से टौर्च निकाल कर सामने की दीवार पर रोशनी फेंकी. दीवार की इलैक्ट्रौनिक घड़ी में रेडियम नहीं था, इसलिए आंख खुलने पर पता नहीं चलता था कि कितने बज गए हैं. अलार्म घड़ी खराब हो गई थी, इसलिए उसे दीवार घड़ी का ही सहारा लेना पड़ता था. ‘फुरसत मिलते ही वह सब से पहले अलार्म घड़ी की मरम्मत करवाएगी. उस के बिना उस का काम नहीं चलने का,’ उस ने मन ही मन सोचा. एक क्षण को उसे लगा कि वह औरत नहीं रह गई है, घड़ी बन गई है. हर वक्त घड़ी की सूई की तरह टिकटिक चलने वाली औरत. उस ने कभी यह कल्पना तक नहीं की थी कि जिंदगी ऐसे जीनी पड़ेगी. पर मजबूरी थी. वह जी रही थी. न जिए तो क्या करे? कहां जाए? किस से शिकायत करे? इस जीवन का चुनाव भी तो खुद उसी ने किया था.

उस ने अपने आप से कहा कि 6 बज चुके हैं, अब उठ जाना चाहिए. शरीर में थकान वैसी ही थी, सिर में अभी भी वैसा ही तनाव और हलका दर्द मौजूद था, जैसा सोते समय था. वह टौर्च ज्यादा देर नहीं जलाती थी. पति के जाग जाने का डर रहता था. पलंग से उठती और उतरती भी बहुत सावधानी से थी ताकि नरेश की नींद में खलल न पड़े. बच्चे बगल के कमरे में सोए हुए होते थे.

जब से अलार्म घड़ी बिगड़ी थी, वह रोज रात को आतंकित ही सोती थी. उसे यह डर सहज नहीं होने देता था कि कहीं सुबह आंख देर से न खुले, बच्चों को स्कूल के लिए देर न हो जाए. स्कूल की बस सड़क के मोड़ पर सुबह 7 बजे आ जाती थी. उस से पहले उसे बच्चों को तैयार कर वहां पहुंचाना पड़ता था. फिर आ कर वह जल्दीजल्दी पानी भरती थी.

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अगर पानी 5 मिनट भी ज्यादा देर से आता था तो वह जल्दी से नहा लेती ताकि बरतनों का पानी उसे अपने ऊपर न खर्च करना पड़े. सुबह वह दैनिक क्रियाओं से भी निश्ंिचत हो कर नहीं निबट पाती. बच्चों को जल्दीजल्दी टिफिन तैयार कर के देने पड़ते. कभी वे आलू के भरवां परांठों की मांग करते तो कभी पूरियों के साथ तली हुई आलू की सब्जी की. कभी उसे ब्रैड के मसालाभरे रोल बना कर देने पड़ते तो कभी समय कम होने पर टमाटर व दूसरी चीजें भर कर सैंडविच. हाथ बिलकुल मशीन की तरह काम करते. उसे अपनी सुधबुध तक नहीं रहती थी.

एक दिन में शायद प्रिया रोज दसियों बार झल्ला कर अपनेआप से कहती कि इस शहर में सबकुछ मिल सकता है पर एक ढंग की नौकरानी नहीं मिल सकती. हर दूसरे दिन रानीजी छुट्टी पर चली जाती हैं. कुछ कहो तो काम छोड़ देने की धमकी कि किसी और से करा लीजिए बहूजी अपने काम.

उस की तनख्वाह में से एक पैसा काट नहीं सकते, काटा नहीं कि दूसरे दिन से काम पर न आना तय. सो, कौन कहता है देश में गरीबी है? शोषण है? शोषण तो ये लोग हम मजबूर लोगों का करते हैं. गरीब और विवश तो हम हैं. ये सब तो मस्त लोग हैं.

‘कल भी नहीं आई थी वह. आज भी अभी तक नहीं आई है. पता नहीं अब आएगी भी या मुझे खुद ही झाड़ूपोंछा करना पड़ेगा. इन रानी साहिबाओं पर रुपए लुटाओ, खानेपीने की चीजें देते रहो, जो मांगें वह बिना बहस के उन्हें दे दो. ऊपर से हर दूसरे दिन नागा, क्या मुसीबत है मेरी जान को…’ प्रिया झल्ला कर सोचती जा रही थी और जल्दीजल्दी काम निबटाने में लगी हुई थी.

‘अब महाशय को जगा देना चाहिए,’ सोच कर प्रिया रसोई से कमरे में आई और फिर सोए पति को जगाया, ‘‘उठिए, औफिस को देर करेंगे आप. 9 बजे की बस न मिली तो पूरे 45 मिनट देर हो जाएगी आप को.’’

‘‘अखबार आ गया?’’

‘महाशय उठेंगे बाद में, पहले अखबार चाहिए,’ बड़बड़ाती प्रिया बालकनी की तरफ चल दी जहां रबरबैंड में बंधा अखबार पड़ा होता है क्योंकि अखबार वाले के पास भी इतना समय नहीं होता कि वह सीढि़यां चढ़, दरवाजे के नीचे पेपर खिसकाए.

ट्रे में 2 कप चाय लिए प्रिया पति के पास आ कर बैठ गई. फिर उस ने एक कप उन की ओर बढ़ाते हुए पूछा, ‘‘अखबार में ऐसा क्या होता है जो आप…’’

‘‘दुनिया…’’ नरेश मुसकराए, ‘‘अखबार से हर रोज एक नई दुनिया हमारे सामने खुल जाती है…’’

चाय समाप्त कर प्रिया जल्दीजल्दी बिस्तर ठीक करने लगी. फिर मैले कपड़े ढूंढ़ कर एकत्र कर उन्हें दरवाजे के पीछे टंगे झोले में यह सोच कर डाला कि समय मिलने पर इन्हें धोएगी, पर समय, वह ही तो नहीं है उस के पास.

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हफ्तेभर कपड़े धोना टलता रहता कि शायद इतवार को वक्त मिले और पानी कुछ ज्यादा देर तक आए तो वह उन्हें धो डालेगी पर इतवार तो रोज से भी ज्यादा व्यस्त दिन…बच्चे टीवी से चिपके रहेंगे, पति महाशय आराम से लेटेलेटे टैलीविजन पर रंगोली देखते रहेंगे.

‘‘इस मरी रंगोली में आप को क्या मजा आता है?’’ प्रिया झल्ला कर कभीकभी पूछ लेती.

‘‘बंदरिया क्या जाने अदरक का स्वाद? जो गीतसंगीत पुरानी फिल्मों के गानों में सुनने को मिलता है, वह भला आजकल के ड्रिल और पीटी करते कमर, गरदन व टांगे तोड़ने वाले गानों में कहां जनाब.’’

प्रिया का मन किया कि कहे, बंदरिया तो अदरक का स्वाद खूब जान ले अगर उस के पास आप की तरह फुरसत हो. सब को आटेदाल का भाव पता चल जाए अगर वह घड़ी की सूई की तरह एक पांव पर नाचती हुई काम न करे. 2 महीने पहले वह बरसात में भीग गई थी. वायरल बुखार आ गया था तो घरभर जैसे मुसीबत में फंस गया था. पति महाशय ही नहीं झल्लाने लगे थे बल्कि बच्चे भी परेशान हो उठे थे कि आप कब ठीक होंगी, मां. हमारा बहुत नुकसान हो रहा है आप के बीमार होने से.

‘‘सुनिए, आज इतवार है और मुझे सिलाई के कारीगरों के पास जाना है. तैयार हो कर जल्दी से स्कूटर निकालिए, जल्दी काम निबट जाएगा, बच्चे घर पर ही रहेंगे.’’

‘‘फिर शाम को कहोगी, हमें आर्ट गैलरी पहुंचाइए, शीलाजी से बात करनी है.’’

सुन कर सचमुच प्रिया चौंकी, ‘‘बाप रे, अच्छी याद दिलाई. मैं तो भूल ही गई थी यह.’’

नरेश से प्रिया की मुलाकात अचानक ही हुई थी. नगर के प्रसिद्ध फैशन डिजाइनिंग इंस्टिट्यूट से प्रिया को डिगरी मिलते ही एक कंपनी में नौकरी मिल गई. दिल लगा कर काम करने के कारण वह विदेश जाने वाले सिलेसिलाए कपड़ों की मुख्य डिजाइनर बन गई.

नरेश अपनी किसी एक्सपोर्टइंपोर्ट की कंपनी का प्रतिनिधि बन कर उस कंपनी में एक बड़ा और्डर देने आए तो मैनेजर ने उन्हें प्रिया के पास भेज दिया. नरेश से प्रिया की वह पहली मुलाकात थी. देर तक दोनों उपयुक्त नमूनों आदि पर बातचीत करते रहे. अंत में सौदा तय हो गया तो वह नरेश को ले कर मैनेजर के कक्ष में गई.

फिर जब वह नरेश को बाहर तक छोड़ने आईर् तो नरेश बोले, ‘आप बहुत होशियार हैं, एक प्रकार से यह पूरी कंपनी आप ही चला रही हैं.’

‘धन्यवाद जनाब,’ प्रिया ने जवाब दिया. प्रशंसा से भला कौन खुश नहीं होता.

आगे पढ़ें- प्रिया समझ गई थी कि नरेश…

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