Raksha Bandhan 2020: टिप्स फोर सैक्सी लैग्स

समर सीजन हो और हॉट सी ड्रैसेस न पहने ऐसा हो ही नहीं सकता. लेकिन सारे लुक पर तब पानी फिर जाता है जब आपका फेस तो अट्रैक्टिव लगता है लेकिन शोर्ट आउटफिट्स के साथ आपकी लैग्स कुछ सूट नहीं करतीं. क्योंकि आप सारी मेहनत अपने चेहरे पर करके अपने पैरों की खूबसूरती को निखारने पर ध्यान जो नहीं देतीं . जिससे पैर रफ़, बेजान, एडिया फटी हुई नजर आती हैं. ऐसे में आपको जरूरत है कि आप अपने पैरों को खूबसूरत बनाकर अपनी ओवरआल ब्यूटी को निखारने का काम करें.

कैसे अपने पैरों को खूबसूरत बनाएं

1. ब्रश से करें डेड स्किन रिमूव

पैरों पर डेड स्किन के सबसे ज्यादा होने के चांसेस होते हैं , क्योंकि उनकी केयर जो नहीं हो पाती है. ऐसे में आप जब भी बाथ लें तो सबसे पहले हलके हाथों से अपने पैरों की एड़ियों पर ब्रश की मदद से मसाज करें , इससे डेड स्किन ही रिमूव नहीं होती बल्कि ब्लड का सर्कुलेशन भी इम्प्रूव होगा. फिर बोडी स्मूदिंग शावर जैल से बाथ लेना न भूलें. क्योंकि ये आपकी स्किन को मोइस्चर प्रदान करने का काम करेगा, जिससे आपकी बोडी पर एक अलग ही निखार नजर आने लगेगा.

2. स्क्रब योर लेग्स

सिर्फ चेहरे को ही नहीं बल्कि शरीर के बाकी हिस्सों को भी स्क्रब की जरूरत होती है, ताकि डेड स्किन निकल सके. इसके लिए आप बाउल में थोड़ी सी चीनी लेकर उसमें थोड़ा सा ओलिव आयल मिलाएं. फिर इसमें नीम्बू की कुछ बूंदे डालकर इसका स्मूद पेस्ट तैयार करें. जब पेस्ट बन जाए तब इसे अपने पैरों पर अप्लाई करके इससे अच्छे से स्क्रब करें. फिर धो लें. इससे स्किन क्लीन होने के साथसाथ ग्लो करने लगेगी. क्योंकि चीनी डेड स्किन को रिमूव करने का काम करती है वहीं नीम्बू स्किन को मॉइस्चरिजे करने के साथसाथ शाइन लाने का भी काम करता है.

ये भी पढ़ें- Raksha Bandhan 2020: डस्की स्किन मेकअप टिप्स

3. सन प्रोटेक्शन जरूरी

सिर्फ चेहरे को ही नहीं बल्कि पैरों को भी सनस्क्रीन की जरूरत होती है. ताकि सूर्य की यूवी किरणों से स्किन की प्रोटेक्शन हो सके. ऐसे में जब भी आप बाथ लें तो उसके बाद मॉइस्चरिजे युक्त सनस्क्रीन स्किन पर जरूर अप्लाई करें. इस बात का ध्यान रखें कि बाहर जाने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन अप्लाई करें ताकि वो स्किन के अंदर अपना असर दिखा सके. इसे अप्लाई करने से आप पिगमेंटेशन, एजिंग से बच पाएंगी और स्किन भी काफी यंग नजर आएगी.

4. हेयर रिमूव करें

ड्रेस सैक्सी सी पहन ली लेकिन पैरों पर लम्बे लंबे हेयर्स आपकी सारी सुंदरता को बिगाड़ने का काम करेंगे. ऐसे में महीने में 1 बार पैरों के हेयर्स को जरूर रिमूव करें , इससे आपको ड्रेस पहनने में भी मजा आएगा साथ ही आपके पैर भी काफी सॉफ्ट , स्मूद बनेंगे. जब भी पैरों पर वैक्सिंग करवाएं तो कोशिश करें कि टैनिंग को रिमूव करने वाली वैक्सिंग ही करवाएं. जिससे पैरों से हेयर्स भी रिमूव हो जाएं और त्वचा भी निखरी हुई दिखे.

5. पैरों पर हाइलाइटर

फेस पर हाइलाइटर के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आपने कभी पैरों को हाईलाइट करने के बारे में सुना है. जी, है पैरों की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए भी हाइलाइटर का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए मार्किट में ढेरों प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं , जिन्हें आप आपने स्किन टोन के हिसाब से खरीद कर अपने पैरों को शाइनी और खूबसूरत बना सकती हैं.

ये भी पढ़ें- Raksha Bandhan 2020: फेस्टिवल में ऐसा हो मेकअप जो निखारे आपका लुक

6. पेडिक्योर – पैरों का ब्यूटी ट्रीटमेंट

सिर्फ चेहरा ही नहीं बल्कि आपके पैर भी ऐसे होने चाहिए , जिन्हें देख कर हर कोई बस देखता ही रह जाए. इसके लिए पेडिक्योर काफी जरूरी होता है.ये पंजों , पैरों और नाखुनों का ब्यूटी ट्रीटमेंट होता है. इसकी मदद से डेड स्किन निकल जाती है और नई स्किन सेल्स के निर्माण में मदद मिलती है. आखिर में स्क्रब के बाद नैलपोलिश से नाखूनो को फाइनल टच दिया जाता है.पेडिक्योर को आप घर पर बड़ी आसानी से कर सकती हैं. इसके लिए आप एक बाल्टी में हल्का गरम पानी लेकर उसमें साबुन वाला पानी डालकर कुछ बूंदे नीम्बू के रस की ऐड करें. फिर इस पानी में कम से कम 15 मिनट तक अपने पैरों को डाल कर रखें. आखिर में पैरों को बाहर निकल कर अच्छे से मसाज करें, इससे डेड स्किन निकल जाएगी और कुछ ही मिनटों में आपके पैर बिलकुल साफ दिखने लगेंगे.

अब घर बैठे खरीदें कार, Hyundai ने शुरू की ‘Click to Buy’ सर्विस

कार कंपनी हुंडई हमेशा अपने ग्राहकों की सुविधा का ख्याल रखती है, इसलिए समय-समय पर एक से बढ़कर एक नई सर्विस शुरू करती रहती है. तभी तो लोगों के बीच हुंडई एक भरोसेमंद कार निर्माता कंपनी है. इस कोराना काल में ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हुंडई ने ‘क्लिक टू बाय’ ऑप्शन की शुरुआत की है. जिससे ग्राहक घर बैठे ही अपनी मन पसंद कार खरीद सकेंगे.

ये भी पढ़ें Hyundai Grand i10 Nios: वारंटी

बता दें कि, हुंडई ग्रैंड i10 Nios तीन इंटीरियर डिजाइन कलर्स और छह अलग-अलग पावरट्रेन ऑप्शन्स में मौजूद है. तो अब कहीं और क्यों जाना, यकीनन आपकी परफेक्ट कार यहां मिल जाएगी. जो आपकी जरूरत के अनुसार एकदम फिट बैठती हो. यही नहीं जब आपको मनपसंदीदा कार मिल जाए तो उसे आप ‘Click to Buy’ सर्विस से ऑनलाइन ही खरीद सकते हैं. तो फिर देर किस बात की, हुंडई के ऑनलाइन पोर्टल पर जाइए और अपनी फेवरेट रंग की कार चुनिए. क्योंकि जब बात गाड़ी खरीदने की आती है तो हुंडई #MakesYouFeelAlive का एहसास करवाती है.

 नायरा और कार्तिक के घर फिर से आएगा नन्हा मेहमान! Photos Viral

लौकडाउन के बाद से सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है में नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं, जिसके बाद फैंस भी सीरियल के अपकमिंग ट्विस्ट के बारे में जानने के  लिए बेताब हैं. वहीं अब नायरा यानी शिवांगी जोशी की एक फोटो ने फैंस के बीच तहलका मचा दिया है. आइए आपको दिखाते हैं नायरा की वायरल फोटोज…

बेबी बंप दिखाते हुए नजर आईं शिवांगी

दरअसल, नायरा यानी शिवांगी जोशी की बेबी बंप में एक फोटो तेजी से वायरल, जिसमें बेबी पिंक रंग की की एक खूबसूरत सी ड्रेस में नजर आ रही हैं. साथ ही टियारा लगाए हुए भी नजर आ रही हैं, जिसे देखकर फैंस ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) के अगले ट्रैक का अनुमान लगाने लगे हैं. जहां कई लोग शिवांगी जोशी की तस्वीर की जमकर तारीफ कर रहे हैं. वहीं लोगों को लगने लगा है कि ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के नायरा और कार्तिक के घर में एक बार फिर से नन्हा मेहमान आने वाला है.

ये भी पढ़ें- एक्स बॉयफ्रेंड मोहसिन खान संग शिवांगी जोशी ने शेयर की फोटो तो फैंस ने दिया ये रिएक्शन, पढ़ें खबर

प्रोमो में दिखा ट्विस्ट

नायरा की इस फोटो के वायरल होने के बाद शो के मेकर्स ने हाल ही में एक प्रोमो भी जारी कर दिया  है, जिसमें नायरा का एक फैसले ने कार्तिक को हैरान कर दिया है. वहीं इस प्रोमो को देखने के बाद साफ नजर आ रहा है कि नायरा कार्तिक एक बार फिर जुदा होने वाले हैं, जिसके बाद फैंस बहुत दुखी हैं.


बता दें, इससे पहले ये रिश्ता क्या कहलाता है सीरियल की सीनियर मैनेजर ने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें कार्तिक नायरा से दूर भागते हुए नजर आ रहा है, जिसे देखकर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के फैंस हैरान रह गए थे.

ये भी पढ़ें- कोरोना के बीच साउथ स्टार नितिन ने की धूमधाम से शादी, Photos Viral

प्रियंका चोपड़ा बनीं चाची, जेठ-जेठानी के घर आई नन्ही परी

बौलीवुडऔर हौलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra)  के ससुराल में नन्ही परी ने कदम रखा है. हॉलीवुड एक्ट्रेस और गेम्स ऑफ थ्रोन्स फेम एक्ट्रेस सोफी टर्नर और उनके पार्टनर प्रियंका के जेठ जो जोनास एक बेबी गर्ल के माता-पिता बन गए हैं. वहीं बच्ची के नाम का भी खुलासा किया हो गया है. आइए आपको बताते क्या है बच्ची का नाम…

ये रखा है नाम

मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें तो प्रियंका चोपड़ा के जेठ जो और सोफी माता-पिता बन गए हैं. वहीं सोफी और जो ने अपनी पहली बच्ची का नाम भी रख दिया है. दोनों ने उसे विला नाम लिया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सोफी ने बच्ची को जन्म बीते बुधवार को लॉस एंजेलेस के एक अस्पताल में दिया.

 

View this post on Instagram

 

Awkward….

A post shared by Sophie Turner (@sophiet) on

ये भी पढ़ें- कोरोना वायरस आउटब्रेक के बीच मां बनीं कुसुम फेम एक्ट्रेस रुचा गुजराती

2016 में डेट करना किया था शुरू

 

View this post on Instagram

 

Happiness begins with you, bub 🌹

A post shared by Sophie Turner (@sophiet) on

सोफी और उनके म्यूजिशियन पति ने साल 2016 में एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया था. इसके दो सालों बाद, दोनों 2018 में रेड कार्पेट पर भी साथ नजर आए. एक इंटरव्यू में सोफी ने बताया था कि जो ने ही पहले एक्ट्रेस को प्रपोज किया था.

प्रियंका सोफी को लेकर निक ने कही थी ये बात

 

View this post on Instagram

 

It’s #thejonai comin atchya!

A post shared by Priyanka Chopra Jonas (@priyankachopra) on

एक इंटरव्यू में वाइफ प्रियंका और सोफी टर्नर के रिलेशनशिप को लेकर निक  जोनस ने कहा था कि मुझे ये सपना लगता है जहां मेरी बीवी और मंगेतर साथ में हो. साथ ही  तीनों महिलाओं का एक बड़ा समर्थन रहा है क्योंकि उन्होंने जोनास ब्रदर्स को दोबारा लौंच करने के बारे में कहा था.

 

View this post on Instagram

 

Good luck @sophiet you are a boss babe. And are very loved.. #jsister #gameofthrones tonight

A post shared by Priyanka Chopra Jonas (@priyankachopra) on

ये  भी पढ़ें- सुशांत के पिता के पास पहुंचा उनका डॉगी फज, बहन ने शेयर की फोटो तो इमोशनल हुए फैंस

बता दें, प्रियंका चोपड़ा और सोफी टर्नर देवरानी जेठानी का रिश्ता होने के साथ-साथ अच्छे दोस्त भी हैं. दोनों अक्सर एक दूसरे को प्रमोट करते और साथ में वक्त बिताते नजर आते हैं, जिसकी फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है.

सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस: पुलिस ने की 2 घंटे तक महेश भट्ट से पूछताछ, पढ़ें खबर

सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को अपने मुंबई के घर पर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी. मगर पुलिस को उनका कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. मुंबई पुलिस की अपराध शाखा पहले दिन से ही इस कांड की जांच कर रही है .कंगना रानौत पहले दिन से मुखर होकर इसके लिए बॉलीवुड के माफिया गैंग ,नेपोटिज्म, करण जौहर, महेश भट्ट,फिल्म समीक्षक राजीव मसंद आदि को कठघरे में खड़ी करती आयी है.और वह अभी भी हर दिन मुंबई पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है . उधर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने साफ कर दिया है कि सी बी आई जांच की जरूरत नहीं है .उन्होंने कहा है -“पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. महेश भट्ट सहित लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं .करण जोहर के मैनेजर और धर्मा प्रोडक्शन के सीईओ अपूर्व मेहता को बुलाया गया है. इसके बाद जरूरत पड़ी तो करण जौहर को बुलाया जाएगा.”

महेश भट्ट : सुशांत को ‘सड़क 2’ऑफर नहीं की

मुंबई पुलिस ने 27 जुलाई , सोमवार को सांताक्रुज पुलिस स्टेशन में मशहूर फिल्म निर्देशक महेश भट्ट से ढाई घंटे तक पूछताछ की. सूत्रों के अनुसार इस पूछताछ में महेश भट्ट ने स्वीकार किया कि सुशांत सिंह राजपूत से सिर्फ दो बार मुलाकात हुई. पहली मुलाकात 2018 में हुई थी .दूसरी बार फरवरी 2020 में महेश भट्ट स्वयं सुशांत से मिलने उनके घर गए थे .उस वक्त महेश भट्ट ने पाया था कि सुशांत की तबीयत ठीक नहीं है . महेश ने पुलिस को बताया कि इस मुलाकात में सुशांत ने अपने यूट्यूब चैनल के अलावा महेश की लिखी किताबे पर चर्चा की थी.

 

View this post on Instagram

 

#maheshbhatt at Santacruz police station after he was questioned today morning for #SushantSingRajput case #viralbhayani @viralbhayani

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) on

सुशांत को फिल्म ‘सड़क २’ से निकाले जाने के पुलिस के सवाल पर महेश भट्ट ने कहा -“सुशांत को फिल्म ऑफर नहीं की थी.  फिल्म  ‘सड़क’ में मेनलीड संजय दत्त ने निभाया था.अब उसके सीक्वल ‘सड़क २’ में भी मेनलीड में संजय दत्त हैं. सुशांत से काम को लेकर कभी कोई बात नहीं हुई.”

‘धर्मा प्रोडक्शन’ के सीईओ अपूर्वा मेहता की पेशी

आज, 28 जुलाई, मंगलवार को मुंबई पुलिस ने ‘धर्मा प्रोडक्शन’ के सीईओ और करण जौहर के मैनेजर अपूर्वा मेहता को बयान दर्ज करवाने के लिए बुलाया है . कंगना ने आरोप लगाया है कि करण जौहर ने फिल्म ‘ड्राइव’ को सिनेमाघरों की बजाय ओटीटी प्लेटफॉर्म रिलीज कर सुशांत सिंह राजपूत के कैरियर को नुकसान पहुंचाया .इसी वजह से पुलिस ने ‘धर्मा प्रोडक्शन’ से फिल्म ‘ड्राइव’ को लेकर सुशांत सिंह राजपूत के साथ हुए ‘करारनामा’ की कॉपी भी मांगी है.

कंगना ने करण जौहर को लेकर पुलिस पर उठाए सवाल
 
इसी बीच एक चैनल पर कंगना रानौत ने अब तक करण जौहर से पूछताछ ना करने पर पुलिस पर सवाल उठाया है. कंगना ने कहा-” महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे और महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के करण जोहर करीबी दोस्त हैं. इसी वजह से पुलिस करण जोहर से पूछताछ कर साहब को नाराज नहीं करना चाहती.”

मनोज तिवारी का आरोप

भाजपा नेता, सांसद और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी ने एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग की है .एक टीवी चैनल पर मनोज तिवारी ने सवाल उठाया कि पुलिस ने अभी तक एफ आई आर दर्ज नहीं की है. तो फिर वह जांच किस बात की कर रही है.

पार्थ पवार ने की सीबीआई जांच की मांग

महाराष्ट्र एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख से आज मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

बॉलीवुड के साथ खड़े हुए बाबुल सुप्रीयो

मशहूर गायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने आज एक टीवी चैनल पर सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या के लिए बॉलीवुड को कटघरे में खड़ा करने का विरोध किया. बाबुल सुप्रियो ने विस्तार से बॉलीवुड की कार्यशैली का जिक्र करते हुए बॉलीवुड का बचाव किया. उन्होंने सुशांत की आत्महत्या की जांच करने को गलत नहीं ठहराया, पर उनकी राय में यह हर इंसान पर निर्भर करता है कि वह किनके  साथ काम करें, किनके साथ ना करें .उन्होंने साफ कर दिया कि नेपोटिज्म हर क्षेत्र में है. इसमें कोई बुराई नहीं. हां इनसाइड और आउटसाइडर की चर्चा चलने पर बाबुल सुप्रियो ने कहा -“यदि सुशांत के परिवार के लोग इस इंडस्ट्री से जुड़े होते ,तो  शायद वह उसे सही सलाह देते कि उसे दूसरा मौका मिलेगा. और उन्हें डिप्रेशन में जाने से बचा लेते. जैसा कि आम फिल्म वालों के साथ होता है.”

ये भी पढ़ें- परवीन बॉबी से सुशांत सिंह राजपूत की तुलना पर भड़की कंगना रनौत, किए कई खुलासे

विसरा रिपोर्ट में कुछ नहीं मिला

आज ही सुशांत सिंह राजपूत की विसरा रिपोर्ट भी आ गयी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विसरा में किसी भी प्रकार का जहर या केमिकल नहीं पाया गया.

मुंबई हाई कोर्ट में पीआईएल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता अमित ठक्कर ने सोमवार को ‘मुंबई हाईकोर्ट ‘ में सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में पीआईएल दायर की है. जिसकी बॉबे हाईकोर्ट  आज, मंगलवार को सुनवाई करेगा.याचिकाकर्ता ने पीआईएल में सुशांत की आत्महत्या में करण जौहर और उनकी कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शन’ की भूमिका की जांच के साथ ही मुंबई पुलिस पर भी सवाल उठाए  हैं.

Serial Story: संयोग (भाग-2)

पूर्व कथा

सूरजकुंड मेले में उदय शंकर अपने परिवार के साथ घूमने गए तो संयोगवश वहां रूपा बूआ और उन के मुंहबोले जेठ शंभु दयाल का परिवार मिल गया. बातोंबातों में उदयशंकर की बेटी निक्की ने अपनी बहन अर्पिता की शादी का प्रस्ताव शंभु दयाल के लेक्चरर बेटे ओमी के साथ करवाने का प्रस्ताव रख दिया. बात सब को जंच गई और आननफानन में अगले दिन ओमी और अर्पिता का रिश्ता पक्का हो गया क्योंकि उन्हें उसी रात 3 माह के लिए लंदन जाना था. एक दिन अर्पिता अपने सहकर्मी प्रणय के साथ घर आई और सब को कुछ बताने लगी…

अब आगे पढि़ए.

‘‘ड्राइंगरूम में नौकरों के सामने मैं बताना नहीं चाहती थी कि मैं ने और प्रणय ने आज कोर्ट में शादी कर ली है,’’ अर्पिता ने मैरिज सर्टिफिकेट पिता की ओर बढ़ाया.?

अनीता ने हैरानी से बेटी की सूनी मांग को देखा. निक्की भी भौचक्की सी खड़ी थी लेकिन उदय शंकर ने संयत स्वर में कहा, ‘‘चुपचाप कोर्ट मैरिज की क्या जरूरत थी बेटी? हम से कहतीं तो हम धूमधाम से तुम्हारी शादी प्रणय से कर देते…’’

‘‘अगर ओमी वाला ड्रामा होने से पहले कहती तो,’’ अर्पिता ने बात काटी, ‘‘मैं और प्रणय शादी इसलिए टाल रहे थे कि इस का असर हमारे कैरियर पर पड़ेगा. जब सरला ने, जो स्वयं एक सफल सौफ्टवेयर इंजीनियर है और एक बच्चे की मां भी है, बताया कि यदि पतिपत्नी के बीच सही तालमेल हो तो कुछ भी असंभव नहीं है. वह बच्चे को सास और पति के पास छोड़ कर यहां आई हुई थी, तो मुझे बात समझ में आई और फिर यह डर था कि कहीं आप लोग निक्की के शोशे को गंभीरता से न ले लो. सो, मैं ने रात को प्रणय को सब बताया. इस ने कहा कि कल मिलने पर बात करेंगे लेकिन इस से मिलने के पहले ही ‘रोका’ हो गया.’’

‘‘दीदी, यह बात आप को ‘रोके’ की रस्म होने से पहले सब को बता देनी चाहिए थी,’’ निक्की बोली.

‘‘प्रणय से बगैर पूछे मैं कैसे कुछ वादा करती और फिर मौका भी नहीं मिला. ‘रोके’ को रोकने को जोे भी हम कहते थे उसे वे लोग काट देते थे. खैर, मुझे यही सही लगा कि इस बात को गुप्त रखने को कहूं और फिर खारिज करवा दूं. लेकिन आप सब जिस तरह ओमी पर लट्टू हो मुझे नहीं लगा कि आप यह रिश्ता तोड़ना मानोगे, सो हम ने कोर्ट मैरिज कर ली…’’

‘‘सिर्फ कागजी कार्यवाही,’’ अब तक चुप प्रणय बोला, ‘‘सिवा हमारे उन दोस्तों के जिन्हें गवाह बनाना जरूरी था, किसी को इस शादी के बारे में पता नहीं है. आप जब और जिस विधि से शादी करवाना चाहेंगे, हम शादी कर लेंगे और तब तक अर्पिता आप के पास ही रहेगी. बस, आप कहीं और इस की शादी नहीं कर सकेंगे.’’

‘‘उस का तो खैर सवाल ही नहीं उठता,’’ अनीता ने कहा, ‘‘लेकिन तुम्हारे घरवालों की रजामंदी, प्रणय?’’

‘‘मेरे परिवार में तो सिर्फ भाईभाभी हैं, उन्हें अर्पिता पसंद है. आप जब कहेंगे उन लोगों को बुला लूंगा,’’ प्रणय ने कहा.

‘‘तुम दोनों अपनी छुट्टियों का हिसाबकिताब बताओ उसी के मुताबिक हम तैयारी करेंगे,’’ उदय शंकर ने कहा.

‘‘छुट्टी तो कभी भी एक हफ्ते की नोटिस पर मिल जाएगी.’’

ये भी पढ़ें- Serial Story: अपनी मंजिल- अमिता पर मातापिता के अलगाव का कैसे पड़ा

‘‘तो ठीक है, अपने भाई का फोन नंबर दो, उन से बात करता हूं,’’ उदय शंकर ने कहा. इतनी शांति से सब होता देख कर अर्पिता द्रवित हो उठी.

‘‘लेकिन शंभु दयाल अंकल से कैसे निबटेंगे, पापा. और रूपा बूआ भी बहुत नाराज होंगी.’’

‘‘होती रहें, जब रूपा ने बात छेड़ी थी, मैं ने तभी कह दिया था कि मैं अर्पिता से बात करने के बाद ही बात आगे बढ़ाऊंगा. मेरे लिए सिर्फ मेरी बेटी की खुशी माने रखती है. रिश्तेदारों की नाराजगी नहीं,’’ उदय शंकर ने दृढ़ स्वर में कहा.

शादी धूमधाम से हो गई. रूपा को ‘रोके’ के बारे में कुछ पता नहीं था, सो उस ने इतना ही कहा कि अचानक अर्पिता की शादी तय हो जाने से ऐसा लगता है कि ओमी के जीवन में शादी लिखी ही नहीं है.

‘‘बेचारा,’’ निक्की के मुंह से अचानक ही निकला.

 

शंभु दयाल के विदेश से लौटने से पहले ही अर्पिता और प्रणय हनीमून पर जा चुके थे. उदय शंकर ने शंभु दयाल को पत्र लिख कर रिश्ते का अंत कर दिया था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. एक रविवार की सुबह शंभु दयाल और सुभद्रा को देख कर उदय और अनीता बुरी तरह सकपका गए. शंभु दयाल दंपती ने बड़ी शालीनता से अर्पिता की शादी के लिए उन्हें मुबारकबाद दी, जिस से वे लोग और भी संकुचित हो गए. वातावरण को सहज करने के लिए निक्की उन से उन के लंदन प्रवास के बारे में पूछने लगी. उन्होंने वहां क्या अच्छा लगा और क्या नहीं, विस्तार से बताया, फिर उस की रिसर्च के बारे में बात करतेकरते अचानक पूछा, ‘‘तुझे भी कोई पसंद है शादी के लिए तो अभी से उदय को बता दे.’’

‘‘नहीं, अंकल, इस रिसर्च के चक्कर में कपड़े तक तो पसंद करने का समय नहीं मिलता. थीसिस पूरी कर लूं, फिर आस- पास देखूंगी और कोई पसंद आया तो आप को बता दूंगी.’’

‘‘पक्का…अभी कोई पसंद नहीं है?’’

‘‘शतप्रतिशत, अंकल.’’

‘‘अगर इसे कोई पसंद होता न तो यह कब का ढिंढोरा पीट चुकी होती भाई साहब,’’ अनीता ने कहा, ‘‘यह अर्पिता की तरह धीरगंभीर नहीं है. सच मानिए, प्रणय को हम बरसों से जानते हैं मगर कभी खयाल ही नहीं आया कि उस से रिश्ता जुड़ सकता है वरना हम आप को परेशान नहीं करते.’’

‘‘परेशानी तो अब होगी अनीताजी, जब लंदन वाले सगाई व शादी की तारीख पूछेंगे. क्या बताएंगे उन्हें कि जिस लड़की से रिश्ता कर के हम ने उन के सुझाए रिश्तों को नकारा था, उस की तो कहीं और शादी हो गई,’’ सुभद्रा ने कहा, ‘‘आप चाहें तो हमें इस परेशानी से नजात मिल सकती है. निक्की का रिश्ता ओमी से कर दीजिए.’’

निक्की सिहर उठी. अपने से 9 साल बड़े ओमी से शादी. उस ने तुरंत फैसला किया कि वह अर्पिता की तरह चुप नहीं रहेगी. यह उस की जिंदगी है और वह इस के बारे में शंभु अंकल से खुद बात करेगी.

‘‘आप को शायद मेरी उम्र मालूम नहीं है? मेरी और ओमीजी की उम्र में 9 साल का फर्क है, ऐसी बेमेल जोड़ी बनाने की बात तो सोची भी नहीं जा सकती,’’ निक्की मम्मीपापा के बोलने से पहले ही बोल पड़ी.

‘‘वर्षों के अंतराल को तो नकारा नहीं जा सकता बेटी,’’ शंभु दयाल ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘लेकिन न तो ओमी 33 वर्ष का लगता है और न ही कुंआरा होने की वजह से उस की सोच भी उम्र के मुताबिक धीरगंभीर है. वह खुशमिजाज और शौकीन है. तुम भी छिछोरी नहीं हो और तुम दोनों का विषय भी एक ही है. सो, खुश रहोगे एकदूसरे के साथ. यह हमारा नहीं ओमी का कहना है.’’

‘‘क्या मतलब? यह प्रस्ताव ओमी का है?’’ अनीता ने चौंक कर पूछा.

‘‘सुझाव कहना बेहतर होगा. असल में मैं यह सोच कर परेशान हो रहा था कि मैं अपने रिश्तेदारों को किस मुंह से रिश्ता तोड़ने की बात बताऊं तो ओमी ने सुझाया कि हम निक्की का हाथ मांग लें, रिश्तेदारों को यह तो नहीं बताया था कि उदय अंकल की बड़ी बेटी से रिश्ता तय किया है या छोटी से. वैसे भी निकिता मुझे पसंद है और फिर हम दोनों पढ़ाते भी एक ही विषय हैं, सो एकदूसरे को सहयोग भी दिया करेंगे यानी खुश रहेंगे एकदूसरे के साथ,’’ शंभु दयाल ने कहा, ‘‘मुझे उस का यह कहना गलत नहीं लगा.’’

‘‘ओमी का कहना बिलकुल सही है,’’ उदय शंकर कहे बिना न रह सके.

‘‘फिर भी इस बार हम आप पर कोई जोरजबरदस्ती नहीं करेंगे. आप लोग आपस में विचारविमर्श कर के हमें बता दीजिएगा,’’ कह कर शंभु दयाल उठ खड़े हुए.

‘‘अरे, ऐसे कैसे बिना चायपानी पीए चले जाएंगे,’’ अनीता ने प्रतिवाद किया.

‘‘आप बैठिए मम्मी, मैं अभी चाय भिजवाती हूं,’’ निकिता ने उठते हुए कहा और नौकर से चाय बनाने को कह कर अपने कमरे में आ गई. मम्मीपापा के रवैए से तो लग रहा था कि वे उसे आसानी से ओमी के सुझाव को नकारने नहीं देंगे. जिस सहृदयता से अर्पिता की खुशी की खातिर उन्होंने रिश्तेदारी की परवा नहीं की थी, उसी रिश्तेदारी के लिए उसे अपने से कहीं बड़े पुरुष से विवाह कर के अपने अरमानों का बलिदान करने को कहा जाएगा.

उस ने अर्पिता को फोन किया, पर उस के शुष्क जवाब ने उस का इरादा दृढ़ कर दिया कि यह उस की निजी समस्या है और उसे अकेले ही सुलझानी होगी. वह ओमी से मिलेगी, अपनी रिसर्च के बारे में उस से जितनी मदद मिल सकेगी, बटोर लेगी और फिर ऐसी बचकानी हरकतें करेगी कि ओमी खुद ही उस से शादी करने को मना कर देगा.

ये  भी पढ़े- Raksha Bandhan 2020: भैया- 4 बहनों को मिला जब 1 भाई

उदय शंकर और अनीता के पूछने पर उस ने कहा कि कुछ फैसला करने से पहले वह ओमी से मिलना चाहेगी और फिर मुलाकातों और फोन पर बातें करने का सिलसिला शुरू हो गया. उसे लगने लगा कि केवल उन के विषय ही नहीं, शौक और पसंद भी प्राय: एक सी थीं. ओमी परिपक्व था, सो शालीनता व मनोरंजन के बीच सामंजस्य बनाना जानता था. उस के कहने से पहले ही उस की पसंद जान जाता था. उसे वह अच्छा लगने लगा था मगर इतना अच्छा भी नहीं कि उम्र भर के बंधन में बंध जाए.

‘‘तू ने क्या सोचा, निक्की?’’ एक रोज अनीता ने पूछा, ‘‘ओमी को तो तू बहुत पसंद है, वह कहता है कि कमाल की जोड़ी बननी थी, सो उस रोज संयोग से हम दूरदराज रहने वाले लोग सूरजकुंड मेले में चले गए. मुझे भी उस की बातें सही लगती हैं. वरना क्यों तू रूपा को उस के और अर्पिता के बारे में सुझाती और अर्पिता कोर्ट मैरिज करने की हिम्मत करती?’’

‘‘यह तो है मम्मी, है तो सब संयोग ही,’’ निकिता ने स्वीकार किया.

‘‘और इसे नकारना बेवकूफी होगी जो मेरी समझदार बेटी कभी नहीं करेगी,’’ उदय शंकर ने अंदर आते हुए कहा.

निकिता ने शरमा कर सिर झुका लिया. मम्मीपापा उस से बलिदान नहीं मांग रहे थे बल्कि उसे वरदान दे रहे थे.

 ऑनलाइन पढ़ाई कितना सही कितना गलत 

कोरोना काल में बच्चों की पढाई एक समस्या बन चुकी है. पिछले कुछ महीनों से बच्चे एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में जाना भूल चुके है. स्कूल और कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज जारी है और माता-पिता पूरा दिन बच्चों की पढाई को लेकर व्यस्त है, ताकि स्कूल या कॉलेज खुलने के बाद बच्चा बाकी बच्चों की तरह ही अपने पाठयक्रम को लेकर तैयार रहे. ये सोचना शायद आसान है, पर इसका असर बच्चों पर क्या पड़ रहा है, इसे समझना जरुरी है. दिन भर घर में बैठकर पढना शायद बच्चों के लिए भी परेशानी और चिढ़चिढ़ेपन का सबब बन रही है, जिसे न तो माता-पिता और न ही स्कूल अथॉरिटी समझ पा रहे है.

1. ट्रेडिशनल क्लासेज की कमी

बच्चों पर इसके असर के बारें में पूछे जाने पर पुणे के मदरहुड हॉस्पिटल के पेडियेट्रिकस एंड नियोनेटोलोजिस्ट डॉ.तुषार पारिख कहते है कि अभी दो तरह के क्लासेज हो रहे है, जिसमें टीचर रिकॉर्ड कर उसे भेज रहे है और बच्चे अपनी सुविधानुसार पढ़ रहे है. इसके अलावा कुछ इंटरेक्टिव क्लासेस भी चल रहे है, जिसमें बच्चे एक साथ होने पर टीचर क्लासेज ले रहे है. ये ट्रेडिशन क्लासेज से काफी अलग है और इसमें बच्चों के साथ अध्यापक का जितना इंटरेक्शन होता है, वह अब नहीं हो पा रहा है. इसमें बच्चा कितना अटेंटिव है, वह देखना अब मुश्किल है. रिकार्डेड मैटर में कितना सही वे समझ रहे है, वह  भी पता नहीं. अभी ये शुरुआत है. इसलिए तकनीक की जानकारी उन्हें कम थी. टाइपिंग भी जरुरी नहीं. इसमें सही समय पर उठाना, नियम से स्कूल जाकर पढाई करना आदि सारे जो एक अनुशासन के दायरे में होता है वह अब नहीं हो रहा है. इसमें उनकी हैण्ड राइटिंग, राइटिंग स्किल सबमें कमी आ रही है. इसे देखने की जरुरत है. छात्र और बच्चों का कम्युनिकेशन इतना अच्छा नहीं है. समय के साथ-साथ बच्चे और टीचर भी सीख पाएंगे. कई स्कूल भी इस समस्या का सामना कर रहे है, क्योंकि टीचर भी इस तरीके की सॉफ्टवेयर से परिचित नहीं है. उन्हें भी सीखना पड़ रहा है. कई माता-पिता को भी इसमें समस्या आ रही है, क्योंकि कुछ बच्चे लैपटॉप तो कुछ टैब पर काम कर रहे है. 

2. स्क्रीन लिमिट होना जरुरी  

इसके आगे डॉक्टर कहते है कि छोटे बच्चों को कितना समय कंप्यूटर के आगे बिताना सही होता है, पूछे जाने पर डॉक्टर तुषार कहते है कि बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम लिमिट में होने की जरुरत होती है. स्क्रीन से निकलने वाला ब्लू लाइट उनके आँखों के लिए हानिकारक होता है. मसलन, आँखों के ब्लिंक कम करने की वजह से आँखों का ड्राई हो जाना, आँखों में इरीटेशन होना, सिरदर्द आदि की शिकायत होती है. आँखों का पॉवर भी बढ़ सकता है. अभीतक इस पर किसी का ध्यान नहीं गया है, लेकिन 30 से  45 मिनट एक साथ करवाना ठीक रहता है. इसके बाद थोडा आराम आँखों को देने की जरुरत है. इसके लिए दूर की चीजो को देखना चाहिए. इसके अलावा उनकी पोस्चर ठीक होनी चाहिए. कही भी बैठकर या लेटकर पढाई नहीं करनी चाहिए. इससे बैक पैन और नेक पैन की समस्या होती है.

3. डाइट पर रखे ध्यान 

डाइट की भी खास ध्यान रखने की जरुरत है, क्योंकि इन दिनों बच्चों की मूवमेंट कम होने की वजह से वे आलसी और मोटापे के शिकार हो रहे है, क्योंकि उन्हें बाहर जाकर खेलने का अवसर नहीं मिल पा रहा है. वे अभी घरों में बंद है. विटामिन डी की कमी उनमें हो सकती है. माता-पिता को इसमें खास ध्यान देने की आवश्यकता है. उन्हें अधिक फैट युक्त भोजन देने से बचना चाहिए. ऑयली और मीठी चीजों को भी देने से बचना चाहिए. संतुलित भोजन देने की जरुरत है. जिससे उनकी इम्युनिटी बनी रहे. शारीरिक अभ्यास में स्किपिंग, सोसाइटी के आसपास खेलना, बैडमिन्टन खेलना आदि करने के लिए उन्हें प्रेरित करें. इसके अलावा उनसे बातें करना, घर की वातावरण को हल्का करते रहना है. 

4. कम हुई कुछ बीमारियाँ 

कोरोना में अच्छी बात ये हुई है कि घर पर रहने और बच्चों की सही देखभाल करने की वजह से बच्चों में रेगुलर फ्लू और पेट की बीमारियाँ कम देखी जा रही है. इससे भविष्य में पेरेंट्स बच्चे की सही देखभाल आगे चलकर करने में समर्थ हो सकेंगे. पेरेंट्स को समझना है कि कोरोना के साथ सबकों जीना पड़ेगा, इसलिए रूटीन वैक्सीनेशन बच्चों का अवश्य करवा लें, ताकि दूसरी बीमारी से बच्चों को बचाया जा सकें. कोरोना का असर बच्चों में अधिक नहीं है, लेकिन सावधान रहने की जरुरत बच्चों को भी है. 

 बड़े बच्चों के लिए डॉ. तुषार का कहना है कि 40 से 50 मिनट ऑनलाइन काम करने के बाद थोडा आराम करें. अपनी दृष्टि को दूर तक को ले जाएँ, इससे आँखों को आराम मिलेगा. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए किसी दवा का प्रयोग न करें. अच्छा भोजन लें, नींद पूरी करें, सही मात्रा में पानी का सेवन करें. हर 4 घंटे में पानी पियें. हरी सब्जियां, फ्रेश फल, अंडे, दाल आदि सभी नियमित और संतुलित मात्रा में लें. थोडा व्यायाम करें और खुश रहे.

5. शारीरिक संरचना पर पड़ता है प्रभाव 

ऑनलाइन पढ़ाई और मनोरंजन के लिए बच्चे आजकल 8 से 10 घंटे कम्प्यूटर के आगे बैठ रहे है, जिसका परिणाम आज भले ही न दिखे कुछ दिनों बाद देखने को मिलेगा. दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के ओर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अश्वानी मायचंद का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन एक्टिविटी की वजह से दो मुख्य हार्मफुल फैक्टर हो रहा है. स्कूल में सभी बच्चे कुर्सियों पर बैठते है, लेकिन घर पर वे कही भी किसी भी पोस्चर में बैठ जाते है, इससे बैक मसल्स और पैर के मसल्स पर असर पड़ता है. कभी दर्द तो कभी मसल्स में खिचाव आ जता है, जिसके लिए वे पैन किलर लेते है या फिर जेल लगाते है. बहुत सारे बच्चे जो कॉम्पिटीशन के एग्जाम इस साल देने वाले है. कोरोना की वजह से उनकी परीक्षाएं टलती जा रही है, इससे उनका एग्जामिनेशन पीरियड ख़त्म नहीं हो रहा है. इसके अलावा लॉक डाउन की वजह से किसी प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी बच्चों की नही हो पा रही है, जिससे उन्हें विटामिन डी नहीं मिल पा रहा है और दर्द की शिकायत होती रहती है. माता-पिता को ऐसे में लगता है कि उबके बच्चों को आर्थराइटिस हो गया है और वे उसका टेस्ट करवाना चाहते है. मेरे हिसाब से बड़े बच्चों को एक साथ में 2 से ढाई घंटे तक स्क्रीन के आगे बैठना सही होता है. आउटडोर एक्टिविटी करवाने की कोशिश सनलाइट  में करवाने की जरुरत है. बीच-बीच में ब्रेक देना, थोड़ी स्ट्रेचअप करना, हल्का फुल्का व्यायाम करने की अभी बहुत जरुरत है. साथ ही आँखों को इनफिनिटी दिशा में देखने के लिए प्रेरित करें, ताकि आँखों को रिलैक्ससेशन मिले. 

6. प्रतियोगी परीक्षाओं का भार 

डॉक्टर अश्वानी का आगे कहना है कि असल में बच्चे एग्जाम के सिर्फ दो महीने पहले ही अधिक मेहनत करते है. इस समय कोरोना की वजह से ये पीक समय तीसरी बार प्रतियोगी परीक्षाओं का आ चुका है. जब भी पीक आता है तो शरीर का कोर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है, जो हार्ट और आर्टरी को प्रभावित करता है. इन 6 महीने में बच्चों को 3 बार स्ट्रेस दे रहे है. इसके लिए किसी को दोषी नही माना जा सकता, पर जरुरत है कि उन्हें इस तनाव से जितना हो सके दूर रखने की कोशिश की जाय जो उनके भविष्य के लिए भी अच्छा रहेगा. खासकर जो बच्चे एक साल ड्राप कर एग्जाम देने वाले है. उनके लिए सुझाव ये है कि जो भी लोग कोचिंग ऑनलाइन क्लास ले रहे है, उनमें योग या मैडिटेशन के क्लास भी शामिल होने चाहिए, ताकि वे रिलैक्स होकर अपने आप को शांत रख सकें.

7. शरीर के रिदम को जाने 

सबको सावधान करते हुए डॉक्टर कहते है कि शरीर का एक रिदम होता है. उसके विरुद्ध जाने पर आपको कई बिमारियों का सामना करना पड़ता है. लोगों को इसके बारे में जागरूकता कम है. शरीर का ध्यान सबसे पहले रखना है, इसे बहुत कम लोग समझते है. परफोर्मेंस पर अधिक ध्यान देते है, जो गलत है. आजकल के माता-पिता बच्चों को लेकर बहुत अधिक एम्बीसियस हो चुके है. वे चाहते है कि उनका बच्चा छोटी उम्र में ही सब जान लें और सबसे अव्वल हो जाय , जो गलत है. इससे बच्चे के मानसिक अवस्था पर दबाव पड़ता है. पेरेंट्स के लिए सुझाव ये है कि इस समय बच्चों पर पढाई का दबाव अधिक न बढाएं, उनके साथ रहें, उन्हें रिलैक्स रहने दें, खुश रखें, ये समय अच्छा है, जिसमें पूरा परिवार साथ रह रहा है. खाने के लिए बच्चों को मीठा अधिक न दें. उन्हें फल, फ्रेश सब्जियां अधिक भोजन में दें, जिसमें पोषक तत्व अधिक हो और बच्चे आसानी से पचा सकें.  

सोने से पहले करें गुड़ का सेवन, होगा जबरदस्त फायदा

कई पकवानों में भी इस का इस्तेमाल होता है. इसे हर व्यक्ति को नियमित रूप से खाना चाहिए, क्योंकि यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. हालांकि डायबिटीज के मरीजों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए उन्हें इस का सेवन नहीं करना चाहिए. गुड़ खाने के वैसे तो कई फायदे हैं. लेकिन आज हम आप को गुड़ के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अगर आप अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आप सेहतमंद बने रह सकते हैं.

गुड़ : वजन घटाने में है सहायक

वजन कम करने में गुड़ काफी सहायक है, अगर आप मोटापे की समस्या से परेशान हैं तो गुड़ के पानी का नियमित सेवन करें. यह आप के वजन को प्रभावी हद तक घटा देगा. अधिकतर स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस की सलाह देते हैं.

ये  भी पढ़ें- काढ़े का अधिक सेवन भी है नुकसानदायक, अगर दिखे ये लक्षण तो बंद कर दे काढ़ा पीना

गुड़ : पाचन क्रिया को करता है ठीक 

यदि आप को खाना पचाने में दिक्कत होती है यानी आप की पाचन क्रिया सही नहीं है तो आप गुड़ का सेवन करें, क्योंकि इस में फाइबर जैसा पोषक तत्व पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत सहायक है.

गुड़ : खून की कमी को करता है दूर 

गुड़ में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, इसलिए इस का सेवन खून की कमी को दूर करता है. खास कर गर्भवती महिलाओं के लिए, लेकिन उन्हें इस का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, नहीं तो उन्हें इसके नुकसान भी झेलने पड़ सकते हैं.

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है गुड़

गुड़ इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी सिस्टम को भी मजबूत करता है और इसे बढ़ाने का मतलब है कि कई तरह की संक्रामक और जानलेवा बीमारियों से बचा जा सकता है. तभी तो लोग सुबहसुबह चने के साथ गुड़ का भी सेवन करते हैं.

ये भी पढ़ें- आंखों से नहीं फैलता कोरोना – डॉ. हिमांशु मेहता

गुड़ : लिवर साफ रखता है

लिवर को साफ रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस से अल्सर और इंफेक्शन जैसी समस्या हो सकती है और अगर संक्रमण ज्यादा बढ़ गया तो यह कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी पैदा कर सकता है. ऐसे में गुड़ का सेवन काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इस में मौजूद डिटॉक्सिक गुण टॉक्सिक पदार्थों को लिवर से बाहर निकालने का काम करते हैं. रात में सोने से पहले हल्के गरम पानी में उबाल कर इस का सेवन करें. यह लिवर को साफ रखेगा.

हर घंटे हाथ धोने या सैनिटाइज करने से मेरी त्वचा ड्राई और बेजान हो रही है?

सवाल-

कोरोना वायरस से दूर रहना है तो हाथों को नियमित धोना और उन्हें लगातार सैनिटाइज करना बेहद जरूरी है, लेकिन हर घंटे हाथ धोने या सैनिटाइज करने से मेरी त्वचा ड्राई और बेजान हो रही है. मैं अपने हाथों की देखभाल कैसे करूं?

जवाब-

आप अपने हाथों की केयर के लिए मौइस्चराइजिंग वाले साबुन से हाथ धोएं या जैल युक्त सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकती हैं. हर बार हाथ धोने के बाद सामान्य मौइस्चराइजर या वैसलीन का इस्तेमाल करें. रूखी त्वचा और दरारों को ठीक करने के लिए हाथों पर बारबार नारियल तेल का इस्तेमाल करें. झाड़ूपोंछा, बरतन, कपड़े धोते समय जब आप डिटर्जैंट या डिस्इनफैक्टैंट का इस्तेमाल करती हैं तो ग्लब्स पहन कर रखें. अगर आप की त्वचा पर कट या हाथों पर ड्राई पैच बन गए हैं और मौइस्चराइजर के उपयोग से ठीक नहीं हो रहे हैं तो जल्दी अपने डर्मैटोलौजिस्ट से जल्दी संपर्क करें.

ये भी पढ़ें

लौकडाउन के दौरान घर का काम करते हुए हाथों और पैरों का इस्तेमाल सब से ज्यादा होता है. आजकल हमें ऐसे कई तरह के काम करने पड़ रहे हैं जो हाथों की त्वचा को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं. जैसे कपड़े धोते समय तरहतरह के डिटर्जेंट का उपयोग करना पड़ता है. उन में केमिकल्स कंपोनेंट काफी हाई होता है. यही नहीं कपड़े धोते समय कभी गर्म तो कभी ठंडे पानी का इस्तेमाल होता है. यह सब हमारे हाथों के लिए काफी परेशानी पैदा करते हैं. त्वचा पर रैशेज या फिर इरिटेशन हो जाती है.

इसी तरह बर्तन धोते समय भी हम कई बार जूना, हार्ड स्पंज वाले स्क्रबर या ब्रश का प्रयोग करते हैं. बर्तन की सफाई के लिए लिक्विड सोप या गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं. इस से नाखूनों के साथसाथ हथेलियों की आगे और पीछे की त्वचा पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है.

झाड़ूपोछा लगाते समय भी कई मसल्स ऐसे होते हैं जिन पर खास जोर पड़ता है. कुछ खास मूवमेंट्स ऐसे होते हैं जिन से हाथों की पर त्वचा ज्यादा प्रभावित हो सकती है. सब्जियां काटते समय जैसे, मूली कद्दूकस करने के बाद कुछ लोगों को हाथों में इरिटेशन जलन या खुजली की समस्या हो सकती है. इसी तरह किसी को प्याज काटने से तो किसी को करैला या कटहल काटने से भी प्रॉब्लम होती है.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- कोरोना काल में कैसे करें हाथों की देखभाल

Serial Story: संयोग (भाग-1)

‘‘सब तेरा ही कियाधरा तो है निक्की, सो तुझे ही भुगतना भी पड़ेगा,’’ अर्पिता ने रुखाई से कह कर फोन रख दिया.

वैसे अर्पिता का कहना था भी सही. निक्की तो उस रोज जिद कर के सब को सूरजकुंड मेला दिखाने ले गई थी. मेले में घूमते हुए अचानक पापा की ममेरी बहन रूपा बूआ मिल गईं. कई वर्ष पहले एक सरकारी आवासीय कालोनी में वे पड़ोस में ही रहती थीं. रातदिन का आनाजाना था. लेखाकार फूफाजी अर्पिता और निक्की को गणित पढ़ाते थे. फिर पापा ने नोएडा में फ्लैट खरीद लिया और फूफाजी ने द्वारका में, धीरेधीरे संपर्क खत्म हो गए. आज मिल कर सब बहुत खुश हुए और गपशप करने के लिए एक रेस्तरां में जा कर बैठ गए.

‘‘अर्पिता तो सौफ्टवेयर इंजीनियर बन गई, तू क्या बनेगी निक्की?’’ फूफाजी ने पूछा.

‘‘आप की दी शिक्षा को सार्थक कर रही हूं फूफाजी, कौमर्स कालेज में लेक्चरर हूं और पीएच.डी. की तैयारी भी कर रही हूं.’’

‘‘बड़ी खुशी हुई यह सुन कर,’’ रूपा बोलीं, ‘‘लेकिन इन के शादीब्याह के बारे में क्या कर रहे हो उदय भैया?’’

‘‘अभी तो कुछ सोचा नहीं. दोनों ही अपनेअपने कैरियर को बनाने में व्यस्त हैं,’’ उदय शंकर ने कहा.

‘‘कैरियर तो उम्र भर बनता रहेगा, लेकिन शादी की एक खास उम्र होती है और अच्छे लड़केलड़कियों के रिश्ते इसी उम्र में हो जाते हैं. अर्पिता 27 साल की हो रही है, जल्दी से इस के लिए लड़का तलाश करो वरना तुम्हें भी शंभु दयालजी वाली परेशानी होगी,’’ रूपा बोलीं.

‘‘शंभु दयाल कौन? वही पंडारा रोड वाले आप के मुंहबोले जेठ?’’ मम्मी ने पूछा, ‘‘कहां हैं वे आजकल?’’

‘‘उन का बेटा ओमी रामजस कालेज में व्याख्याता है न, कालेज के पास ही राजेंद्र नगर में रहते हैं,’’ रूपा बोलीं.

‘‘और उन की परेशानी क्या है?’’ उदय शंकर ने पूछा.

‘‘लड़कियों की शादी को ले कर परेशान होंगे,’’ मम्मी बोलीं, ‘‘4 लड़कियां थीं न उन की.’’

‘‘लड़कियां तो सब ब्याह गईं अनीता भाभी,’’ रूपा उसांस ले कर बोलीं, ‘‘बहनों को ब्याहने और डिगरियां लेने के चक्कर में ओमी कुंआरा रह गया है. सर्वगुण संपन्न लड़का है लेकिन 33 साल की उम्र की वजह से अच्छी लड़की ही नहीं मिल रही. बहुत परेशान हैं सब.’’

‘‘तो आप सब की परेशानी हल कर दो न रूपा बूआ,’’ निक्की ने चुटकी ली, ‘‘27 साल की अर्पिता दीदी और 33 साल के ओमी भाई की शादी करवा कर.’’

‘‘अरे, क्या कमाल का आइडिया दिया है री छोरी तू ने,’’ रूपा बूआ फड़क कर बोलीं.

‘‘और संयोग से वे सब भी यहां आए हुए हैं,’’ फूफाजी चहके, ‘‘शंभु से मोबाइल पर बात करवाता हूं…यह लो… उधर देखो, वह रहे वे लोग, अपनी टेबल पर बुला लेते हैं,’’ फूफाजी के साथ उदय शंकर, अनीता और रूपा भी लपक लीं.

ये भी पढ़ें- Serial Story: अपनी मंजिल- अमिता पर मातापिता के अलगाव का कैसे पड़ा

‘‘यह क्या बदतमीजी है, निक्की?’’ अर्पिता ने आंखें तरेरीं, ‘‘पहले तो खरीदारी के बहाने यहां ला कर शाम खराब की और अब यह शादी का शोशा छोड़ दिया.’’

इस से पहले कि निक्की कुछ बोलती, अर्पिता की नजर अपनी सहेली ओमी की छोटी बहन सरला पर पड़ी और वह लपक कर उस से मिलने चली गई.

2-3 मेजों को जोड़ कर एक लंबी मेज बनाई गई और चायनाश्ते का और्डर कर सब बातों में तल्लीन हो गए. केवल ओमी और निकिता उर्फ निक्की चुप थे. उम्र में फर्क जरूर था लेकिन बचपन की जान- पहचान तो थी ही, सो ओमी ने अपनी कुरसी निकिता के पास सरका ली.

यह सुन कर कि निकिता भी उसी के विषय की लेक्चरर है, ओमी बड़ा प्रभावित लगा. उस ने बातोंबातों में यह बताया कि वह अगले दिन लंदन स्कूल औफ इकोनोमिक्स में हो रहे सेमिनार में भाग लेने जा रहा है. निकिता को इस सेमिनार के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ओमी ने उसे उन वैबसाइटों के बारे में बताया जिन पर इस तरह की जानकारियां मिलती थीं और ज्ञान को अपडेट किया जा सकता था. निकिता बड़ी दिलचस्पी से ओमी की बातें सुन रही थी और भी बहुत कुछ पूछना चाहती थी लेकिन अर्पिता और सरला उसे अपने साथ शौपिंग के लिए ले गईं, बाकी सब लोग वहीं बैठे रहे.

उन की खरीदारी अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि सरला को ओमी का फोन आ गया कि सब लोग जाने के लिए मेले के गेट के पास उन का इंतजार कर रहे हैं. उन के वहां पहुंचते ही सब ने जल्दीजल्दी विदा ली, निकिता चाह कर भी ओमी से बात नहीं कर सकी. उसे यह तो यकीन था कि पापा ने शंभु अंकल से फोन नंबर लिया होगा लेकिन उस ने पूछना मुनासिब नहीं समझा.

सरला से मिलने के बाद अर्पिता का सुधरा मूड ओमी का नाम सुन कर फिर बिगड़ सकता था. वैसे भी जब अर्पिता गाड़ी चलाती थी तो मम्मीपापा काफी तनाव में रहते थे और आज तो ट्रैफिक भी और दिनों के मुकाबले अधिक था, सो रास्ते भर सब चुप रहे. घर आते ही निक्की तो कंप्यूटर पर ओमी की बताई वैबसाइट देखने में व्यस्त हो गई और अर्पिता मोबाइल पर बात करने में. मम्मीपापा टीवी देखने लगे और मेले में मिले लोगों के बारे में कोई बात नहीं हुई.

रविवार था, इसलिए अगली सुबह सभी रोज के मुकाबले देर से उठे और नाश्ता भी देर से बना.

‘‘तुम दोनों का आज क्या प्रोग्राम है?’’ मां ने नाश्ते के दौरान पूछा.

‘‘मुझे तो लंच के बाद कुछ देर को बाहर जाना है,’’ अर्पिता बोली, ‘‘निक्की तो कंप्यूटर से चिपकी रहेगी शायद.’’

निक्की ने राहत की सांस ली. अर्पिता के जाने के बाद वह पापा से नंबर ले कर ओमी से बात करेगी. उसे अपनी कुछ शंकाओं का निवारण करना था. लेकिन इस से पहले कि वह कुछ बोलती, दरवाजे की घंटी बजी. नौकर ने दरवाजा खोला. सामने शंभु दयाल सपरिवार खड़े थे.

‘‘माफ करना उदय भाई, इस तरह बिना बताए आ धमकने को, लेकिन मजबूरी है. सरला को दोपहर की गाड़ी से लखनऊ वापस जाना है और हम तीनों को लंदन, सो जो बात कल शुरू की थी उसे जाने से पहले पूरी करना चाह रहे हैं,’’ शंभु दयाल सांस लेने को रुके, ‘‘ओमी की रजामंदी तो मैं ने ले ली है, तुम ने अर्पिता से बात कर ली होगी?’’

हतप्रभ से खड़े उदय शंकर ने इनकार में सिर हिलाया, ‘‘अभी तो नहीं…’’

‘‘कोई बात नहीं,’’ शंभु दयाल ने आराम से सोफे पर बैठते हुए कहा, ‘‘अब कर लेंगे. वैसे अर्पिता सरला को बता चुकी है कि शादी तो वह भी करना चाह रही है लेकिन यही सोच कर डरती है कि कहीं  शादी के बाद इतनी मेहनत से बनाए कैरियर का बंटाधार न हो जाए. ओमी से शादी कर के ऐसा नहीं होगा.’’

‘‘मैं इस बात की गारंटी देने को तैयार हूं,’’ ओमी हंसा, ‘‘क्योंकि न तो मैं अवार्ड विनिंग किताबें लिखने का मोह छोड़ सकता हूं और न मम्मी अपनी गृहस्थी की बागडोर का. सो हमें तो अपने कैरियर को सर्वोपरि मानने वाली लड़की ही चाहिए.’’

‘‘इस के बाद कहनेसुनने को कुछ रह ही नहीं जाता,’’ सरला बोली, ‘‘ओमी भैया और परिवार के बारे में तो तुम अच्छी तरह से जानती हो अर्पिता, फिर भी कुछ पूछना है तो पूछ लो. ओमी भैया से यहीं या अकेले में.’’

‘‘यहीं पूछूंगी सब के सामने कि शादी के बाद राजेंद्र नगर से रोज सुबह 9 बजे नोएडा आफिस पहुंचने के लिए कितने बजे घर से निकलना होगा और शाम को 7-8 बजे छूटने के बाद घर कब पहुंचा करूंगी?’’ अर्पिता ने चुनौती के स्वर में पूछा.

‘‘सवाल तो वाजिब है लेकिन उस के जवाब में उलझने के बजाय मैं यह बताना चाहूंगा कि लंदन से लौटने के बाद मैं यह नौकरी छोड़ रहा हूं,’’ ओमी ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘मुझे नोएडा में एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान में बेहतर नौकरी मिल चुकी है और मेरे पास 3 महीने का जौइनिंग टाइम है. मैं अपनी अर्जित छुट्टियों का सदुपयोग मांपापा को लंदन दिखाने में करना चाहता हूं, सो लौटने के बाद रामजस कालेज की नौकरी छोड़ूंगा.’’

ये भी पढ़ें- Short Story: वचन- चिकचिक और शोरशराबे से जब परेशान हुई निशा

‘‘और कोई शंका तो नहीं रही अब?’’ शंभु दयाल ने सब की ओर देखा, ‘‘सो समय व्यर्थ मत करो सुभद्रा, पकड़ाओ बहू को शगुन और पक्का करो रिश्ता.’’

‘‘ठहरिए, भाई साहब,’’ अनीता पहली बार बोलीं, ‘‘ऐसे थोड़े ही रिश्ते पक्के होते हैं, आप तो शगुन ले कर आ गए, मगर हमारे पास तो कोई तैयारी नहीं है.’’

‘‘तो हमारे पास ही कौन सी तैयारी है?’’ सुभद्रा बोलीं, ‘‘हम भी नकद दे रहे हैं, आप भी नकद दे दो. नकद नहीं है तो चैक पकड़ा दो, 2 महीने बाद आ कर कैश करवा लेगा.’’

‘‘तो यह शगुन भी 2 महीने बाद ही कर लें…’’

‘‘नहीं, भाई उदय शंकर,’’ शंभु दयाल ने बात काटी, ‘‘शगुन यानी बात पक्की तो हम अभी कर के ही जाएंगे. अब तुम से क्या छिपाना, तुम्हें तो पता ही है कि मेरे भाई व बहनोई इंगलैंड में रहते हैं, वे जबतब ओमी को वहां बसाने के लिए, उस के लिए वहां की लड़कियों के रिश्ते सुझाते रहते हैं, जो हम नहीं चाहते. अब जब वहां जाने से पहले संयोग से ओमी के उपयुक्त लड़की भी मिल गई है तो क्यों न बात पक्की कर के जाऊं और इस से पहले कि वे कोई लड़की सुझाएं, मैं उन्हें यह खुशखबरी दे दूं कि तुम्हारी बेटी मेरी बहू बन रही है.’’

‘‘यह बात तो सोलह आने सही है,’’ उदय शंकर ने अर्पिता की ओर देखा, ‘‘तू क्या कहती है बेटी?’’

‘‘मैं क्या कहूं पापा?’’ अर्पिता ने असहाय भाव से कहा, ‘‘मेरी बस एक विनती है कि यहां शादी की बात अभी किसी को न बताई जाए.’’

‘‘हमारे पास तो किसी को बताने का समय है नहीं क्योंकि हम तो आज रात को ही लंदन जा रहे हैं,’’ सुभद्रा बोलीं, ‘‘तुम्हारे घर वाले क्या करते हैं, यह तुम जानो.’’

‘‘मम्मी का कैश तो तैयार पड़ा है, आंटीजी. आप को भी जो देना है जल्दी से लाओ ताकि ‘रोके’ की  रस्म करें. मिठाईविठाई के चक्कर में मत पडि़ए, मेज पर अंगूर रखे हैं उन से मुंह मीठा करवा दीजिए सब का,’’ सरला ने कहा, ‘‘चल अर्पि, इधर बैठ सोफे पर, आप भी इधर आ जाओ ओमी भैया.’’

‘‘दीदी को कपड़े तो बदलने दीजिए,’’ निकिता हंसी.

‘‘रहने दे, इस के कपड़े बदलने के चक्कर में मेरी ट्रेन छूट जाएगी. सोच क्या रही हो मम्मी, खोलो अपना बटुआ,’’ सरला ने जल्दी मचाई.

उस के बाद घर में जो था वही जल्दीजल्दी खा कर, 2 महीने बाद मिलने का वादा कर के सब लोग चले गए.

‘‘यह सरला भी न…बिलकुल नहीं बदली, किसी को कुछ सोचने का मौका ही नहीं देती,’’ अनीता ने लंबी सांस ले कर कहा, ‘‘तू क्या कहती है अर्पि, जो हुआ ठीक ही हुआ न?’’

‘‘यह मैं कैसे कह सकती हूं मम्मी, क्योंकि मैं इस परिवार में किसी को इतना नहीं जानती कि उन्हें तुरंत नकार या स्वीकार कर सकूं,’’ अर्पिता के स्वर में तल्खी थी.

‘‘घरवर के अच्छे होने के बारे में तो खैर कोई शक ही नहीं है लेकिन अर्पि जो कह रही है वह भी ठीक है. फिक्र मत कर बेटी, हम अगला फैसला करने से पहले तुझे और ओमी को एकदूसरे को जानने का मौका देंगे,’’ उदय शंकर ने आश्वासन दिया.

‘‘और इस दौरान हम इस बारे में कोई बात नहीं करेंगे,’’ अर्पिता ने धीरे से कहा.

लंच के बाद अर्पिता को बाहर जाते देख कर अनीता ने शंकित स्वर में पूछा, ‘‘कहां जा रही है?’’

‘‘आप को बताया तो था मम्मी कि दोपहर को कुछ देर के लिए बाहर जाऊंगी,’’ कह कर अर्पिता चली गई और जब वह लौट कर आई तो बिलकुल सामान्य लग रही थी.

‘‘घर में जो फल थे मम्मी, वे तो आप के बिनबुलाए मेहमान खा गए. सो मैं फल ले आई हूं,’’ उस ने लिफाफे मेज पर रखते हुए कहा.

‘‘बड़ा अच्छा किया अर्पि, मैं सोच रही थी कि बापबेटियों में से किस से कहूं कि मुझे बाजार ले चलो.’’

‘‘आप को बाजार जाना है तो अभी चलिए, तू भी चल निक्की, कल जो कपड़े लाए हैं, वे टेलर को भी तो देने हैं.’’

इस के बाद जीवन पुरानी गति से चलने लगा. केवल पतिपत्नी अकेले में कितना और क्या खर्च करेंगे, इस पर बातचीत करते थे. शंभु दयाल के परिवार के लौटने से कुछ सप्ताह पहले एक शाम अर्पिता अपने सहकर्मी प्रणय के साथ आई. प्रणय अकेला रहता था, सो अकसर अनीता उसे खाने पर बुला लिया करती थी, उदय शंकर को भी उस के साथ शतरंज खेलना पसंद था.

‘‘पापा आ गए हैं मम्मी?’’ अर्पिता ने उतावली से पूछा.

ये भी पढ़ें- Short Story: विश्वास की जड़ें- जब टूटा रमन और राधा का वैवाहिक रिश्ता

‘‘हां, अपनी स्टडी में हैं, बुलाती हूं.’’

‘‘नहीं मम्मी, हम सब वहीं चलते हैं, निक्की आ गई हो तो उसे भी बुला लीजिए, मुझे आप सब को कुछ बताना है,’’ अर्पिता ने पापा के कमरे में जाते हुए कहा.

‘‘ऐसा क्या है जो उन के कमरे में ही बताएगी?’’

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें