प्रोफेशनल रेसलिंग में जो थ्रिल है वह कहीं भी नहीं है- बैकी लिंच

रेबेका नौक्स उर्फ बैकी लिंच वर्तमान समय में डब्ल्यूडब्ल्यूई की सब से बेहतरीन महिला रेसलर्स में से एक हैं और उन्हें दबंग अंदाज के लिए जाना जाता है. वह एक पेशेवर आयरिश महिला पहलवान हैं. 5 फुट 6 इंच लंबी, रंगे हुए लाल बालों और मस्कुलर बदन वाली बैकी लिंच सेक्सी भी कम नहीं हैं. उन के लाल रंग के बाल, जानदार मुस्कान और अदायगी फैंस को काफी लुभाती है. जनवरी 1987 में डब्लिन, आयरलैंड में जन्मी बैकी की पर्सनैलिटी काफी आकर्षक है. बेकी लिंच एक्टिंग में भी हाथ आजमा चुकी हैं. टीवी सीरीज ‘वाइकिंग’ में उन्होंने एक छोटा किरदार निभाया था.

हालांकि बेकी लिंच का रेसलिंग करियर चोटों से बहुत प्रभावित रहा है. 2006 में गंभीर हेड इंजूरी की वजह से उन्हें कई सालों के लिए प्रोफेशनल रेसलिंग से दूर रहना पड़ा.  2012 में उन्होंने रेसलर के रूप में वापसी की और डबल्यू डबल्यू ई ज्वाइन किया.

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वर्ल्ड रेसलिंग एनटरटेनमेन्ट यानी डबल्यू डबल्यू ई सार्वजनिक तौर पर व्यवसाय करने वाली, निजी नियंत्रण वाली खेल मनोरंजन कंपनी है जो खासतौर पर प्रोफेशनल रेसलिंग यानी पेशेवर कुश्ती उद्योग में है. कंपनी के राजस्व का बड़ा भाग फ़िल्मों,संगीत उत्पादों की लाईसेंसिंग तथा उत्पादों की सीधी बिक्री से आता है. विन्स मैकमोहन कंपनी के सब से बडे हिस्से के मालिक और चेयरमैन हैं. इस के दफ्तर लॉस एंजिल्स और न्यूयौर्क सिटी में हैं.

डबल्यू डबल्यू ई के बिज़नस का फोकस पेशेवर रेसलिंग पर है. यह एक बनावटी खेल और प्रदर्शन कला है जो थियेटर में होने वाली कुश्ती के साथ मिल कर पूर्ण होती है. इस में मैच फिक्सिंग या बैटिंग वगैरह  नहीं होता. मौजूदा समय में यह दुनिया की सब से बड़ी पेशेवर रेसलिंग प्रोमोशन कंपनी है. डबल्यू डबल्यू ई के 3 ब्रांड हैं: रौ, स्मैक डाउन और ई सी डबल्यू.

खुद को ‘द मैन’ कहने वाली लिंच किसी भी स्थिति में झुकने का नाम नहीं लेती हैं. वह किसी से भी भिड़ जाने का दम रखती हैं. बैकी लिंच ने रैसलमेनिया 35 में 2019 रॉयल रंबल मैच जीत कर एक बार फिर से अपनी पहचान बनाई है. पेश है उन से की गई बातचीत के मुख्य अंश ;

सवाल- जीवन के इस मुकाम तक पहुंचने के क्रम में किन संघर्षों का सामना करना पड़ा ?

मैं अपने भाई के साथ अक्सर कुश्ती देखा करती थी. कुश्ती देखना मुझे बहुत पसंद था. मगर यदि आप रेसलर बनना चाहते हैं तो आप को इंग्लैंड, अमेरिका जैसी जगहों पर जा कर ट्रेनिंग लेनी जाना पड़ती है. मुझे आयरलैंड के प्रोफेशनल रेसलर फिन बैलर के स्कूल में सीखने का मौका मिला. संत एंड्रियूज नेशनल स्कूल में छोटे से हौल के फ्लोर पर सिर्फ 6 ब्लू मैट्स पर हम ने 3 माह तक रेसलिंग की. हम वहां हर संडे जाते और ट्रेनिंग लेते. इंग्लैंड जा कर समर कैंप करते जहां जिम में 8 से 9 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती.

सच कहूं तो शुरुआत में मेरा परफौर्मेंस बहुत बेकार रहता था. रेसलिंग मेरे लिए बहुत कठिन था. मैं एक एथलीट थी. मगर स्वभाव से मैं बहुत टफ थी. रेसलिंग भले ही मेरे लिए नया था मगर मैं इस में चैंपियन बनना चाहती थी. मुझे याद है एक ऐसा समय भी आया था जब रोते हुए मैं ने फिन बेलर से कहा था कि मैं लड़कों जैसा रेसलिंग करना चाहती हूँ. उन्होंने कहा कि वे मुझे ऐसा ही बनाने का प्रयास कर रहे हैं. रेसलमेनिया के बाद मैं वैकेशन पर भी नहीं गई. मुझे रेसलिंग का बिजनेस पसंद है और मैं चाहती हूं कि लोग भी इसी तरह पसंद करें.

सवाल- आप की स्ट्रांग पर्सनैलिटी का राज क्या है ?

मैं हमेशा से ही बहुत बोलने वाली और अपनी बात रखने वाली लड़की रही हूं. मैं कुछ भी बोलने से हिचकती नहीं थी. पापा ने भी मुझे कभी रोका नहीं. मैं बचपन से ही टफ रही हूँ. शायद यही वजह है कि मेरी पर्सनैलिटी ऐसी है. इस खूबी के कारण ही मुझे द मैन का तमगा मिला और मैं ने इसे भरपूर जीने का प्रयास किया है.

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सवाल- जीवन का कोई पल जिसे आप दोबारा जीना चाहती हैं?

मेरा पसंदीदा मैच शेर्लोट फ्लेयर के साथ लास्ट वुमन स्टैंडिंग मैच एट आल वुमंस इवोलुशन पे पर व्यू   इसे मैं दोबारा जीना चाहूंगी.

सवाल- जो लड़कियां आप के नक्शेकदम पर चलना चाहती हैं उन के लिए टिप्स क्या देना चाहेंगी?

कड़ी मेहनत करें और अपना काम बखूबी करते रहे. यह हर तरह से आप को बेहतर बनाएगा. अपनी फिटनेस, बोलने की क्षमता, रिंग के अंदर और बाहर भी दूसरों से कनेक्ट होने की क्षमता आदि पर काम करना कभी भी न छोड़े. आप को ट्रैवल करना चाहिए और इस से जितना हो सके उतना अनुभव जुटाने का प्रयास करना चाहिए. जितना संभव हो उतने रेसलिंग मैचेस देखे. इस गेम के बारे में पढ़ें. दूसरे एथलीटस की जिंदगी के बारे में जाने. मेरे बारे में जाने. समझने का प्रयास करें कि हम सब ने कैसे सफलता पाई. खुद पर विश्वास करना भी कभी न छोड़े.

सवाल- आप की भविष्य की योजनाएं क्या है?

इस बदलती दुनिया में जैसेजैसे चीजें मेरे सामने आती हैं वैसे ही मैं उन्हें स्वीकार कर लेती हूं और आगे भी ऐसा ही करूंगी. फिलहाल मैं अपने करियर पर फोकस करूंगी और अपने डब्ल्यूडब्ल्यूई के प्रोफेशनल रेसलिंग को और बेहतर बनाने का प्रयास करूंगी.

सवाल- घर वालों का कितना सपोर्ट मिलता है ? घर में और कौनकौन है ?

मेरी माँ को यह गेम उतना पसंद नहीं. वह थोड़ी कंजरवेटिव नेचर की है और शायद उन्हें मेरा यह सब करना उतना पसंद नहीं आता. मगर जैसेजैसे वह मुझे इस मुकाम तक पहुंचते हुए देख रही है तो उन्हें एहसास हो रहा है इस गेम ने मेरा जीवन कितना बदल दिया है. मेरे पापा ज्यादा कुछ नहीं कहते मगर मुझे प्रोत्साहित करते हैं. वे मेरे सोशल मीडिया एक्टिविटीज पर ज्यादा ध्यान नहीं देते.

सवाल- आप को मोटिवेशन किस से मिलता है ?

कितने लोग ऐसे हैं जिन्होंने मुझे उस वक्त मदद की जब मैं खुद पर ही विश्वास नहीं कर पा रही थी. जैसे कि सेठ रोलिंस ने मेरी बहुत मदद की. एक समय था जब मैं लगातार एक स्टार बिल्डर यानी ऐसा व्यक्ति थी जिसे किसी और को अच्छा दिखाने के लिए उपयोग में लाया जाता है. उस दौरान मेरी उपस्थिति के कोई मायने नहीं थे. पर मुझे खुशी और गर्व है कि मैं ने बहुत से लोगों को गलत साबित कर दिया.

सवाल- अपनी ट्रेनिंग के बारे में डिटेल में बताइए.

मैं किसी भी इवेंट पर जाने से पहले खुद को एकाग्र करती हूं. संभव होता है तो सुबह में इस के लिए योगा करती हूं. फिर यह लिखने का प्रयास करती हूं कि मैं उस मैच को कैसे होता हुआ देखना चाहती हूं और फिर उसे विजुलाइज भी करती हूं. सामान्यतया यह सब मैं मैच से पहले वाली रात में करती हूं. जहां तक बात एक्सरसाइज की है तो मैं सप्ताह में 5-6 बार क्रौसफिट और जब मौका मिले तब योगा करती हूं. रिंग के अंदर और बाहर दोनों ही तरह की ट्रेनिंग जरूरी है.

सवाल- आप ने एक्ट्रेस के रूप में भी काम किया है. उस प्रोफेशन को छोड़ कर रेसलर बनने की वजह क्या थी?

भले ही मैं ने फिल्मों में काम किया हो मगर रेसलिंग हमेशा से मेरे जीवन का हिस्सा रहा है. मैं चाहती थी कि डब्ल्यूडब्ल्यूई से वापस आ कर अपने साथी रेसलर्स के साथ कम्पीट करूं. प्रोफेशनल रेसलिंग में जो थ्रिल है वह कहीं भी नहीं है. लाखों लोगों के सामने हर  वीक जा कर आप खुद को फिजिकली और मेंटली टेस्ट करते हैं. मुझे लगता है यह सब से कठिन इंडस्ट्री है.

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एक माह के लिए मै सिर्फ 3 घंटे की नींद पर रह चुकी हूं. टूर करते हुए अपीयरेंस के लिए तैयार रहना, टीवी पर आना ,हमेशा अपना जबरदस्त परफौरमेंस दिखाना वरना आप पीछे रह जाओगे, यह सब आसान नहीं. मगर यही तो इस गेम का फन है. यह एक खूबसूरत आर्टफौर्म है.

सवाल- एक पल जिस ने आप की जिंदगी/ करियर को बदल दिया ?

मुझे लगता है यह रैसलमेनिया 35 जीतना और इस साल डबल चैंपियन का खिताब अपने नाम करना ही था. मैं बता नहीं सकती कि उस दिन मैं क्या महसूस कर रही थी और कितनी खुश थी. मैं ने पूरी जिंदगी इस का सपना देखा था.

बेवफा पति: जब रंगे हाथ पकड़े पत्नी

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. इस वीडियो में एक महिला अपने पति को रंगे हाथों दूसरी के साथ पकड़ लेती है और फिर उस का जो रिएक्शन होता है वह देखने लायक है.

दरअसल उस महिला को शक था कि उस के पति का किसी के साथ अफेयर चल रहा है. इस वजह से उस ने अपने पति की गाड़ी का पीछा किया और मुंबई के पेडर रोड पर पति की रेंज रोवर गाड़ी को रोक दिया. गाड़ी में पति के साथ उस की प्रेमिका बैठी हुई थी. यह दृश्य देख कर महिला आपे से बाहर हो गई. अपनी गाड़ी पति की कार के आगे लगा कर वह पागलों की तरह चीखनेचिल्लाने लगी. गाड़ी के शीशे पीटने लगी. वह कार के बोनट पर चढ़ गई और जूते से कार के शीशे पर मारने लगी.

उस की इन हरकतों का अंजाम यह हुआ कि सड़क पर अच्छाखासा जाम लग गया. महिला का पति जब बाहर निकला तो महिला ने उस पर हमला कर दिया. मारपीट की नौबत आ गई. सड़क पर तमाशा बनता देख वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिस ने चालान काटा और गाड़ी के साथ उन तीनों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया. शांति भंग करने के लिए महिला को तलब किया गया.

इस सारी वारदात में गलती किस की है? पति को इस तरह तमाशा बन कर क्या मिला और उस महिला को भी बाद में अपनी इस वीडियो को देख कर क्या शर्म नहीं आ रही होगी?

सच तो यह है कि पति और पत्नी का रिश्ता बहुत ही निजी और कोमल होता है. आप अपने संबंधों की हकीकत सड़क पर लाएंगे तो तमाशा आप का ही बनेगा. सच यह भी है कि कोई भी महिला अपने पति को दूसरी औरत के साथ देखना बर्दाश्त नहीं कर सकती.

सालोंसाल जिस रिश्ते को उस ने अपना सब कुछ दिया, जो पति रोज उस के पास आता है, हमबिस्तर होता है और प्यार की बातें करता है, जिस पति और बच्चों के लिए उस महिला ने अपने शरीर और सुंदरता की चिंता छोड़ दी, जिस घर को सजाने में वह दिनरात लगी रहती है. यदि अचानक वही पति बेवफा निकले, घर छूटता हुआ और रिश्ता टूटता हुआ दिखे तो महिला की मानसिक स्थिति कैसी होगी इस की कल्पना कोई भी कर सकता है.

क्या बीतता है महिला के मन पर

सोशल वर्कर और साइकोलॉजिस्ट अनुजा कपूर कहती हैं कि जब स्त्री अपने पति को रंगे हाथों पकड़ती है तो सब से पहले तो एक अधूरापन उस के दिलोदिमाग पर हावी हो जाता है. वह सोचती है कि आखिर ऐसी क्या कमी रह गई थी जो पति को दूसरी की जरूरत पड़ गई.

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पति के साथ गुजारे हुए पुराने लम्हे उस के जेहन में उभरने लगते हैं. उसे याद आते हैं वे पल जब वह पति की बाहों में समा कर दुनिया जान भूल जाया करती थी. अब उसी पति की यादें उसे डंक की तरह चुभने लगती है.

महिला को भविष्य की चिंता भी सताने लगती है. घर टूटता हुआ दिखता है. बच्चे का भविष्य डगमगाता नजर आता है. उसे महसूस होता है जैसे वह पति के लिए महत्वपूर्ण नहीं रह गई. एक दूसरी औरत बन गई है. उस का आत्मविश्वास टूटने लगता है. असुरक्षा की भावना घर करने लगती है.

वह आगे की बात भी सोचती है कि उसे क्या फैसला लेना चाहिए. क्या वह तलाक लेगी? क्या अब उसे भी लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौर से गुजरना पड़ेगा? उस की आर्थिक जरूरतें कैसे पूरी होंगी? यदि उस ने तलाक नहीं लिया तो क्या वह घरेलू हिंसा का शिकार बन जाएगी?

क्यों आती है यह परिस्थिति

कभी कभी महिला इस स्थिति के लिए खुद ही जिम्मेदार होती है. वह पति को जीवनसाथी कम और ड्राइवर, पैसे कमाने की मशीन या सेक्स ऑब्जेक्ट अधिक समझने लगती है. कई बार स्त्री की कुछ कमियां जैसे अधिक बोलना, गंदा रहना या फिर बेवकूफी वाली हरकतें करना और चौकेचूल्हे में सिमटे रहने की आदत पति के मन में विरक्ति पैदा करती है. ऐसे में दूसरी औरतों की तरफ उस का रुझान बढ़ जाता है.

यही नहीं पुरुषों को जब अपनी पत्नी में सेक्स अपील, खूबसूरती या कंफर्ट जोन की कमी दिखती है तो वे दूसरी औरतों की तरफ आकर्षित होते हैं. वे दूसरी औरत में अपनी महबूबा, हमराज या दोस्त तलाशते हैं.

नतीजा सुखद नहीं होता

दूसरी औरत की तरफ आगे बढ़ने वाले पुरुषों को खतरनाक परिणाम भुगतने पड़ते हैं. कभी न कभी असलियत पत्नी और परिवार वालों के आगे खुल ही जाती है. इस तरह पुरुष अपने ही घर में आग लगा लेते हैं. अपनी गृहस्थी जला बैठते हैं. मांबाप, रिश्तेदार और दोस्तों के आगे एक तरह से नंगे हो जाते हैं. अपने ही बच्चों की नजरों में गिर जाते हैं. दूसरी स्त्री उसे संभाल लेगी इस बात की कोई गारंटी नहीं होती. वे कानूनी प्रक्रिया के मकड़जाल में उलझ कर रह जाते हैं. मैंटेनेंस और कंपनसेशन के तौर पर एक लंबीचौड़ी रकम से हाथ धो बैठते हैं.

एक पुरुष जब पत्नी की कमी दूसरी औरतों से पूरा करने का प्रयास करता है तो दूसरी औरत के साथ बेशर्मी और नंगापन भी विरासत या दहेज़ के रूप में उस के जीवन में प्रवेश करते हैं. जब कोई पुरुष अपनी लक्ष्मण रेखा पार करता है तो एक तूफान आता है और हमेशा के लिए उस की जिंदगी में सन्नाटा पसर जाता है. उसे इस अवैध रिश्ते को खुद के आगे, मांबाप के आगे, जज और बच्चों के आगे जस्टिफाई करना पड़ता है.

स्पाइस ऑफ मैरिड लाइफ

दरअसल पुरुष की जिंदगी में दूसरी औरत तब आती है जब उस की जिंदगी से मैरिड लाइफ में मौजूद स्पाइस खत्म हो जाता है. यानी पतिपत्नी के रिश्ते के बीच में आकर्षण और चार्म नहीं रह जाता. पुरुष इसी स्पाइस को बाहर ढूंढने लगता है और जब वह इस कोशिश में अपनी लक्ष्मण रेखा लांघता है तो फिर दोबारा लौट कर नहीं आ पाता. एक बार बेवफाई साबित हो जाने पर स्त्री दोबारा पति पर विश्वास नहीं कर पाती. रिश्ते में जो दरार आती है वह दोबारा भर नहीं पाती.

स्त्री को लगता है कि जिस पुरुष के लिए उस ने इतना कुछ किया, अपना शरीर, जवानी ,करियर, वक्त सबकुछ दांव पर लगा दिया वही पति अब खूबसूरती और जवानी की तलाश में दूसरों के पास जा रहा है. यह जो थप्पड़ महिला के मुंह पर पड़ता है वह उसे बर्दाश्त नहीं कर पाती और डिप्रेशन में चली जाती है. सुसाइड तक करने की नौबत आ जाती है.

कुछ भी हासिल नहीं होता

ऐसी घटनाओं के बाद घर टूट जाते हैं. दुनिया में तमाशा बन जाता है. पतिपत्नी दोनों के ही जीवन से सुख, शांति और सुकून पूरी तरह गायब हो जाते हैं. बच्चों का भविष्य अधर में लटक कर रह जाता है.

बुढ़ापे में अकेलापन

बेवफाई का असली खामियाजा बाहर मुंह मारने वाले साथी को साठ साल की उम्र के बाद झेलना पड़ सकता है. इस उम्र में इंसान का शरीर थकने लगता है. ऐसे में पैसे या शारीरिक सुख के आधार पर बनाए गए रिश्ते काम नहीं आते. इस वक्त इंसान को सच्चे साथी और हमदर्द की जरूरत होती है और सच्चा साथी पत्नी से बढ़ कर कोई नहीं हो सकता. मगर बेवफा पुरुष के पास पत्नी नहीं होती. बच्चे भी मुंह मोड़ चुके होते हैं. इस वक्त कोई उस के साथ नहीं होता और उसे अकेलापन सालने लगता है. पश्चाताप की भावना मुखर हो उठती है. ऐसे में उस के ऊपर यह कहावत सटीक बैठती है , अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत..

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समय रहते करें चिंतन

ऐसे हालात लाने से बेहतर है कि पुरुष यह समझे कि यदि यही काम उस की पत्नी करती तो क्या वह उसे बर्दाश्त कर पाता?पुरुष को चाहिए कि यदि उसे पत्नी में कोई कमी दिख रही है तो ऐसी बात सीधा अपनी पत्नी से कहे. परिवार वालों से सलाह ले. मैरिज काउंसलर के पास जाए. न कि उस कमी की पूर्ति बाहर करने का प्रयास करें.

समस्या कोई भी हो पहले उसे सुलझाने का प्रयास करना चाहिए

पुरुषों को यह समझना पड़ेगा कि बेवफाई का रास्ता बहुत गंदा और नंगा है जिस पर चल कर कुछ हासिल नहीं होता. इसी तरह स्त्री को भी ध्यान में रखना चाहिए कि वह बच्चों, चौकाचूल्हा और गृहस्थी में इतनी व्यस्त न हो जाए कि पति को भुला बैठे.

पति की जरूरतों का भी ख़याल रखें. खुद को हमेशा फिट और स्मार्ट बनाएरखने का प्रयास करें. पति की महबूबा बनें न कि मजबूरी. साफ़ सुथरी, स्मार्ट महिलाएं सब को पसंद आती हैं. लटकीझटकी बहनजी टाइप की महिला न बनें. अपने ऊपर भी ध्यान दें और अपनी रोमांटिक लाइफ पर भी काम करती रहें.

Raksha Bandhan 2020: प्रैगनैंसी में मेकअप के साइड इफैक्ट्स

खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप करना जरूरी है, मगर प्रैगनैंसी यानी गर्भावस्था के दौरान मेकअप करने में कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि इस समय आप को अपना सब से ज्यादा खयाल रखने की जरूरत होती है. इस समय आप किसी भी तरह का रिस्क नहीं ले सकती हैं. इस का कारण यह है कि ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने में कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, जो आप की त्वचा से अंदर जा कर आप के पेट में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

प्रैगनैंसी के दौरान इन सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करने से बचना चाहिए:

डियो या परफ्यूम: प्रैगनैंसी के दौरान ज्यादा खुशबू वाले प्रोडक्ट्स जैसेकि डियो, परफ्यूम, रूम फ्रैशनर आदि का इस्तेमाल कम करें या फिर करें ही नहीं. मार्केट में मौजूद ज्यादातर डियो में हानिकारक कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा के अंदर प्रवेश कर आप या आप के होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन से शिशु के हारमोंस में गड़बड़ी पैदा हो सकती है.

लिपस्टिक: इस का इस्तेमाल अमूमन हर महिला और युवती करती है. लेकिन प्रैगनैंट महिला को लिपस्टिक लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए बेहतर होगा. लिपस्टिक में लेड होता है, जो खानेपीने के दौरान शरीर के अंदर चला जाता है. शरीर में लेड भ्रूण के विकास में बाधा बन सकता है या उस में और कई परेशानियां पैदा कर सकता है. अत: इस के प्रयोग से बचें.

टैटू: टैटू आजकल युवा लड़केलड़कियों में काफी ट्रैंडी है. प्रैगनैंसी के समय या उस की प्लानिंग कर रही हैं, तो टैटू न गुदवाएं वरना वह आप के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि टैटू कई बार इन्फैक्शन का कारण भी बनता है. टैटू बनाने में प्रयोग किए जाने वाले कैमिकल्स भी त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते हैं. इसलिए इस दौरान टैटू बनवाने से परहेज करें.

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सनस्क्रीन मौइश्चराइजर: अमूमन महिलाएं सनस्क्रीन लगाए बिना बाहर नहीं निकलतीं, मगर प्रैगनैंट महिला इस का प्रयोग कम करे या हो सके तो बाहर निकलना कम कर दे.  ज्यादातर सनस्क्रीन में रैटिनील पामिटेट या विटामिन पामिटेट होता है. ये तत्त्व धूप के संपर्क में आने पर त्वचा से रिएक्शन करते हैं. लंबे समय तक इस्तेमाल करने से कैंसर का कारण भी बनते हैं. इसलिए गर्भावस्था के दौरान सनस्क्रीन के इस्तेमाल से पहले चैक कर लें कि आप जो सनस्क्रीन इस्तेमाल करने जा रही हैं उस में ये दोनों तत्त्व मौजूद तो नहीं हैं.

हेयर रिमूवर क्रीम: ऐसे तो अभी तक यह सिद्ध नहीं हुआ है कि प्रैगनैंसी के समय हेयर रिमूवर क्रीम इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए, पर यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस में थियोग्लाइकोलिक ऐसिड पाया जाता है, जो गर्भावस्था में हानिकारक साबित हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के हारमोंस परिवर्तन होते हैं, जिन के कारण कैमिकल युक्त हेयर रिमूविंग क्रीम का इस्तेमाल करने से त्वचा में ऐलर्जी भी हो सकती है और होने वाले बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए खुद की और होने वाले बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस का इस्तेमाल न करें. इस की जगह किसी नैचुरल हेयर रिमूवर क्रीम का इस्तेमाल कर सकती हैं.

नेल केयर: प्रैगनैंसी के दौरान नेल प्रोडक्ट्स का प्रयोग भी न करें, क्योंकि इन के अंदर मौजूद जहरीले पदार्थ आप के होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं. एक शोध में पाया गया है कि नेल केयर प्रोडक्ट्स के निर्माण से जुड़ी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा. कई महिलाओं का भू्रण विकास धीमा रहा तो कुछ में जन्म के बाद भी बच्चे के विकास में धीमी गति पाई गई.

फेयरनैस क्रीम: अगर आप किसी भी फेयरनैस क्रीम का प्रयोग करती हैं, तो इस दौैरान इस के प्रयोग से बचें, क्योंकि इस का प्रयोग आप और होने वाले बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है. इस में हाइड्रोक्यूनोन नाम का एक कैमिकल मिलाया जाता है जो जन्म से पहले शिशु के ऊपर गलत प्रभाव डाल सकता है, इसलिए गोरा करने वाली क्रीम प्रैगनैंसी के दौरान बिलकुल यूज न करें.

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एक शोध के मुताबिक जो महिलाएं प्रैगनैंसी के दौरान बहुत अधिक मेकअप का इस्तेमाल करती हैं, उन में समय से पहले प्रसव होने की आशंका बढ़ जाती है यानी प्रीमैच्योर बेबी. इस के अलावा इस से शिशु के वजन और आकार पर भी असर पड़ता है.

पैरामेडिकल में करियर: एक सुनहरा भविष्य

अगर आपकी रुचि मेडिकल क्षेत्र में है और लोगों की सेवा करने से खुशी मिलती है तो पैरामेडिकल एक बेहतर विकल्फ हो सकता है. पैरामेडिकल स्टॉफ, इलाज में डॉक्टर्स की मदद करते हैं. साथ ही मरीजों के रोगों की पहचान करने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए सरकारी/प्राइवेट हॉस्पिटल से लेकर नर्सिंग होम, क्लीनिक, लैब्स और चिकित्सा विज्ञान के दूसरे तमाम क्षेत्रों में इनकी डिमांड बढ़ती जा रही है. इसके अलावा पैरामेडिकल स्टॉफ इमरजेंसी मेडिकल केयर प्रोवाइडर के रूप में भी काम करते हैं.
इस क्षेत्र में ये हैं प्रमुख करियर संभावनाएं

लैब टेक्नोलॉजी

इस क्षेत्र में लैब टेक्नोलॉजी यानी क्लीनिकल लेबोरेटरी साइंस का नाम सबसे पहले नंबर पर आता है. इसमें टेक्नीशियन और टेक्नोलॉजिस्ट दो तरह के प्रोफेशनल होते हैं. मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट का काम ब्लड बैंकिंग, क्लीनिकल टेक्नोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, हेमैटोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित काम करना है. जबकि मेडिकल टेक्नीशियन लैब में रूटीन टेस्ट का काम देखते हैं.

रेडियोग्राफी

रेडियोग्राफी भी पैरामेडिकल से जुड़ा है. इसमें रेडिएशन के सहारे उन छिपे हुए अंगों की तस्वीरें ली जाती हैं जो दिखती नहीं है और कई शारीरिक विकारों को सामने लाया जाता है. अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि इसी क्षेत्र से संबंधित है. पैरामेडिकल कोर्स करने के बाद आप भी रेडियोग्राफर बन सकते हैं.

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ऑप्टोमेट्री

इस प्रोफेशन में आंखों का परीक्षण और उनकी देखभाल की जाती है. जैसे- आंखों के प्रारंभिक प्रॉबलम्स के लक्षण, लेंस का समुचित प्रयोग आदि.

माइक्रोबायोलॉजी

पैरामेडिकल क्षेत्र में माइक्रोबायोलॉजी टेक्नोलॉजी को बेहद महत्तवपूर्ण माना जाता है. इसमें टेक्नोलॉजिस्ट की मदद से सही तरीके से रोग की पहचान और दवाओं के जरिए बीमारी का इलाज किया जाता है.

फिजियोथेरेपी

बदलती लाइफस्टाइल की वजह से आज इस क्षेत्र की मांग बढ़ती जा रही है. फिजियोथेरेपी में व्यायाम या उपकरणों के जरिए रोगों का इलाज किया जाता है. वहीं आर्थराइटिस व न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होने पर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद ली जाती है. जिसमें हीट रेडिएशन, वाटर थेरेपी और मसाज आदि को शामिल किया जाता है.

ऑक्युपेशनल थेरेपी

इसमें न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर, स्पाइनल कार्ड इंजुरी का इलाज किया जाता है. इसके अलावा कई तरीके के शारीरिक व्यायाम कराए जाते हैं.

स्पीच थेरेपी

इस थेरेपी में हकलाना, तुतलाना और सुनने की क्षमता जैसी अन्य कई समस्याओं का इलाज किया जाता है.

कैसे लें एडमिशन

बारहवीं करने के बाद आप इस क्षेत्र में दाखिला ले सकते हैं. इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी व अंग्रेजी में अच्छे अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा पास करनी होगी. पैरामेडिकल के कुछ कोर्स में एडमिशन के लिए 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य होते हैं. हालांकि कुछ कोर्सेज में 10वीं के बाद भी एडमिशन होता है. वहीं मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन के लिए बायोलॉजी से ग्रेजुएट होना जरूरी है.

भारत में सभी मेडिकल कॉलेज मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किए जाते हैं. पैरामेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए छात्र CPNET यानी संयुक्त पैरामेडिकल एंड नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में भाग ले सकते हैं. यह फॉर्म हर साल अप्रैल-मई में निकलता है. इसके अलावा आप जिपमर (JIPMER), नीट-पीजी (NEET-PG), एमएचटी सीईटी (MHT-CET), नीट-यूजी (NEET-UG) और प्राइवेट व सरकारी कॉलेजों में भी डायरेक्ट एडमिशन ले सकते हैं.

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कहां लें एडमिशन (प्रमुख संस्थान)

-ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली www.aiims.edu
-ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फिजिकल मेडिसिन ऐंड रिहैबिलिटेशन, मुंबई www.aiipmr.gov.in
-राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, बेंगलुरु www.rguhs.ac.in
-हिप्पोक्रेट्स इंस्टीट्यूट्स ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज ऐंड रिसर्च www.hipsr.in
-बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (फैकल्टी ऑफ साइंस), वाराणसी www.bhu.ac.in

कहां मिलेगी नौकरी

जॉब की बात करें तो पैरामेडिकल क्षेत्र में कोर्स करने के बाद फिजियोथेरेपी, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे जैसे काम किए जाते हैं. वहीं इमरजेंसी सेंटर, ब्लड डोनेशन सेंटर, डायग्नोसिस सेंटर, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, मेडिसिन लैब, क्लीनिक जैसी जगहों पर काम किया जा सकता है. इसके अलावा विदेश में भी काफी मौके हैं.

कितनी मिलेगी सैलरी

शुरूआती पैकेज दो से पांच लाख सलाना हो सकता है. धीरे-धीरे अनुभव और योग्यता के हिसाब से यह बढ़ता जाता है. इसके अलावा प्राइवेट लैब/ पैथोलॉजी भी खोल सकते हैं.

मेडिकल क्षेत्र में व्यवसाय

अगर आप आर्थिक रूप से सम्पन हैं तो मेडिकल क्षेत्र में महज 3 से 5 लाख रुपए के खर्च कर फ्रेंचाइजी बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं. फ्रेंचाइजी लेने के लिए आपको पहले उस कंपनी के आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. आप उक्त कंपनी को मेल भी कर सकते हैं.

कैसे मिलेगा लाइसेंस

कोर्स पूरा करने के बाद अगर आप इस क्षेत्र में बिजनेस शुरू करान चाहते हैं तो शुरुआत में Proprietorship इकाई के तौर पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के साथ रजिस्टर करवा सकते हैं. इसके अलावा प्राइवेट क्लीनिक/ लैब को स्थानीय नियमों के मुताबिक भी रजिस्टर करवाना पड़ता है, जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकते हैं.

इस बिजनेस को Shops and Establishment Act and Clinical Establishment के तहत रजिस्टर करवाना भी जरूरी होता है. इसके अलावा इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए राज्य के Director of Health Services और Local Biomedical Waste Disposal Body में भी रजिस्टर करने की जरूरत हो सकती है. वहीं राज्य के प्रदूषण नियंत्रण विभाग से स्वीकृति, नगर पालिका और नगर परिषद से No objection certificate की भी जरूरत हो सकती है.

इसके अलावा आप चाहें तो गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अपनी पैथॉलॉजी लैब को National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories (NABL) से मान्यता दिला सकते हैं. इसके अलावा कुछ रजिस्ट्रेशन ऐसे भी होते हैं जो लैब में उपयोग होने वाले मेडिकल मशीनरी एंव उपकरणों को ध्यान में रखते हुए करवाने पड़ते हैं.

नोट: ज्यादा जानकारी के लिए गवर्मेंट की वेबसाइट http://paramedicalcouncilofindia.org  पर जा सकते हैं.

डॉक्टर से जानें कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

किसी भी तरह की बीमारी से बचने के लिए अपने अंदर की शक्ति को बढ़ाना जरूरी है. शरीर को बाहरी संक्रमण से बचाकर रखने के लिए हमारे अंदर एक रक्षा प्रणाली होती है, जिसे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक शक्ति) कहते हैं. इम्यूनिटी स्ट्रांग होने पर एक तो हमें कोई बीमारी नहीं होगी और अगर हो भी गई तो जल्दी ठीक हो जाएगी. इसी विषय पर हमसे हुई बातचीत में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा गुप्ता ने बताया कि कैसे इम्युनिटी को बढ़ाया जा सकता है.

सही लाइफस्टाइल

डॉ. नेहा गुप्ता का कहना है कि इम्यूनिटी स्ट्रांग होने के लिए सबसे पहले हमारी लाइफस्टाइल यानी दिनचर्या अच्छी होनी चाहिए. टाइममैनेजमेंट और अपने मेंटल हेल्थ का खासकर ध्यान रखें. इसलिए स्ट्रेस कम लें, रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी जगने की आदत डालें और कम से कम आठ घंटे की अच्छी नींद जरूर लें. वहीं भोजन करने के बाद आधा घंटा टहलना सेहत और पाचन दोनों के लिए बहुत अच्छा होता है.

इसके अलावा कम से कम आधे घंटे सुबह और शाम को व्यायाम और योग करें. प्राणायाम में कपालभाति, अनुलोम-विलोम और अग्निसार इम्यूनिटी को काफी इंप्रूव करते हैं, क्योंकि ये हमारी फेफड़े की कैपेसिटी को बढ़ाते हैं. साथ ही हमारे अंदर स्ट्रेस हार्मोन भी कम करते हैं यही नहीं डाइजेशन में हेल्प मिलने की वजह से हम मोटापे का शिकार भी नहीं होते. यानी प्राणायाम से स्टेमिना भी बढ़ती है और रोग प्रतिरोधम क्षमता भी.

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अगर आप वर्क फ्रॉम होम पर हैं तो भी हर एक घंटे में पांच मिनट का ब्रेक जरूर लें. अपने काम करने की जगह से उठकर थोड़ा चलें इससे वर्किंग प्रेशर कम होगा और बैकपेन की भी शिकायत नहीं होगी. कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते समय बीच-बीच में आंखों को आराम दें, इसके लिए आप आंखों की एक्सरसाइज भी कर सकते हैं. शारीरिक स्वच्छता के साथ ही आस-पास की सफाई पर भी ध्यान दें

कैसी हो डाइट

आप घर में हैं तो भी आपकी टोटल कैलोरी 12 सौ के आस-पास ही होनी चाहिए. आप ऐसा कर सकते हैं कि, सुबह अच्छे से ब्रेकफास्ट कर लें फिर दोपहर में लंच और कोशिश करें कि जितना जल्दी हो सके रात में हल्का डिनर लें. यानी आपका आखिरी भोजन रात 8 बजे से पहले हो जाना चाहिए. नशीले पदार्थों जैसे शराब, सिरगरेट का सेवन न करें. सलाद को खाने में शामिल करें और खूब पानी पीएं लेकिन ठंडा नहीं गर्म पानी. योग में भी बाला गया है कि विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने के लिए गर्म पानी फायदेमंद है.

हम सभी के घरों में तुलसी, लौंग, कालीमिर्च लगभग होती ही है. इनका इस्तेमाल आप अपनी इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं. गोल्डेन मिल्क यानी हल्दी वाला दूध कम से कम रात के समय अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. इसके अलावा च्यवनप्राश, मल्टी विटामिन , विटामिन डी, विटामिन सी, कैल्शियम और विटमिन बी12 के इस्तेमाल से भी इम्यूनिटी में इंप्रूवमेंट होगा. इसलिए टमाटर, संतरा, नीबू, आंवला, मौसमी, लहसुन, पालक, मशरूम, बादाम, मौसमी सब्जियां और फलों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें.

हेल्दी रिलेशनशिप

अगर फैमिल साथ रहती है तो अच्छा है इससे आप अकेलापन महसूस नहीं करते, क्योंकि कोई भी टीवी या मोबाइल कितनी देर तक देख सकता है. इसलिए फैमिली, बच्चे, पैरेंट्स या दोस्तों के साथ हेल्दी रिलेशनशिप का हमारी इम्यूनिटी पर पॉजिटिव इफैक्ट पड़ता है. साथ ही बाकी लोगों से हमारी बॉडिंग कैसी है इसका भी असर पर पड़ता है, क्योंकि हमारी लाइफ में लोगों से रिलेशन अच्छे हैं तो स्ट्रेस नहीं होता और इम्यूनिटी बेहतर होती है.

इम्यूनिटी कम होने के लक्षण

बार-बार बीमार पड़ना

मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम

सुस्ती महसूस होना

तबियत का जल्दी ठीक न होना

थोड़ा काम करने पर थक जाना

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अबरार मुल्तानी के पांच टिप्स

1- सेब का सिरका और लहसुन दोनों ही इम्यूनोमॉड्यूलेटर होते हैं. इसिलए सेब के सिरके में भीगी हुई लहसुन की दो कलियां एक दिन छोड़कर लें.

2- आधा चम्मच हल्दी पाउडर में शहद मिलाकर रोजाना सोते समय दूध के साथ लें. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है. शहद भी इम्यूनोमॉड्यूलेटर है, यह एक आसान उपाय इम्यूनिटी के लिए वरदान है.

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3- आधा चम्मच आंवला पाउडर में शहद मिलाकर रोज सुबह लें. आंवला विटामिन सी का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है और विटामिन सी इम्यूनिटी को बढ़ाता है.

4- धूप से बेहतरीन और फ्री का इम्यूनिटी बूस्टर कोई और नहीं है. यह विटामिन डी का स्रोत है जो इम्यूनिटी के लिए जिम्मेदार विटामिंस में से एक है. रोज कम से कम 30 मिनट धूप में बिताएं, यह आपको शक्ति और ऊर्जा से भर देगा.

5- ध्यान करें, जब मन शांत और भय मुक्त रहता है तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत बढ़ जाती है.

immunity

Raksha Bandhan 2020: घर पर बनाएं हनी चिली ढोकला

ढ़ोकला गुजरात का फेमस फूड है. यह ट्स्टी के साथ-साथ हेल्दी भी है. वहीं इसे नया रूप देकर टेस्टी हनी चिली ढोकला के रूप में बना सकते हैं. यह आसान के साथ-साथ टेस्टी रेसिपी है, जिसे आप स्नैक्स या डिनर कभी भी खा सकते हैं.

हमें चाहिए

1 कप बेसन

2 बड़े चम्मच सूजी

1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

1 बड़ा चम्मच अदरक व हरीमिर्च पेस्ट

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1 बड़ा चम्मच शहद

1 बड़ा चम्मच रिफाइंड औयल

2 छोटे चम्मच नीबू का रस

1/2 छोटा चम्मच बेकिंग सोडा

नमक स्वादानुसार.

तड़के के लिए

1 बड़ा चम्मच रिफाइंड औयल

1/2 छोटा चम्मच राई

3 मोटी हरीमिर्च छोटे टुकड़ों में कटी

4-5 करीपत्ते

1 बड़ा चम्मच शहद

2 छोटे चम्मच नीबू का रस

2 बड़े चम्मच ताजा नारियल कद्दूकस किया सजाने के लिए.

बनाने का तरीका

बेसन में बेकिंग सोडा डाल कर सभी सामग्री मिला लें. कुनकुने पानी से पकौड़े लायक गाढ़ा घोल तैयार करें. एक चिकनाई लगे कंटेनर में मिश्रण पलटें.

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भाप में तेज आंच पर 10 मिनट पकाएं, चाकू से चैक कर लें कि ढोकला कच्चा तो नहीं है. तेल गरम कर के उस में राई, करीपत्ते व हरीमिर्च का तड़का तैयार करें. उस में 1 कप पानी डालें.

जब पानी उबलने लगे तब शहद और नीबू का रस डाल दें. आंच बंद करें और तड़के को ढोकले पर फैला दें. ढोकले के टुकड़े काट उन पर नारियल बुरक दें.

Serial Story: पक्की सहेलियां (भाग-3)

इस तरह आपस में हायहैलो होते हुए भी एक अदृश्य सी दीवार खिंच गई थी दोनों में.

2 नारियां, पढ़ीलिखी, लगभग समान उम्र की पर बिलकुल विपरीत सोच और संस्कारों वाली. एक के लिए पति, बच्चा और घरगृहस्थी ही पूरी दुनिया थी तो दूसरी के लिए घर सिर्फ रहने और सोने का स्थान भर.

एक बार विनिता ने पंखुड़ी को पिछले 24 घंटों से कहीं आतेजाते नहीं देखा. पहले

सोचा कि उसे क्या, वह क्यों चिंता करे पंखुड़ी की? उस की चिंता करने वाले तो कई लोग होंगे या फिर आज कहीं जाने के मूड में नहीं होगी स्मार्ट मैडम. पर जब दिल नहीं माना तो बहाना कर के विहान को भेज दिया यह कह कर कि जाओ पंखुड़ी आंटी के साथ थोड़ी देर खेल आओ. मगर कुछ ही देर में विहान दौड़ता हुआ आया और बोला, ‘‘मम्मी… मम्मी… मैं कैसे खेल सकता हूं आंटी के साथ, उन्हें तो बुखार है.’’

बुखार का नाम सुनते ही विनिता तुरंत पंखुड़ी के घर पहुंच गई. घंटी बजाई तो अंदर से धीमी आवाज आई, ‘‘दरवाजा खुला है. अंदर आ जाइए.’’

अंदर दाखिल होने पर विनिता ने देखा कि पंखुड़ी कंबल ओढ़े बिस्तर पर बेसुध पड़ी है. छू कर देखा तो तेज बुखार से बदन तप रहा था. चारों तरफ निगाहें दौड़ाईं, सारा घर अस्तव्यस्त दिख रहा था. एक भी सामान अपनी जगह नहीं. तुरंत भाग कर अपने घर आई, थर्मामीटर और ठंडे पानी से भरा कटोरा लिया और वापस पहुंची पंखुड़ी के पास. बुखार नापा, सिर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखनी शुरू कीं. थोड़ी देर बाद बुखार कम हुआ और जब पंखुड़ी ने आंखें खोलीं तो विनिता ने पूछा, ‘‘दवाई ली है या नहीं?’’

पंखुड़ी ने न कहा और फिर इशारे से बताया कि दवा कहां रखी है? विनिता ने उसे बिस्कुट खिला दवा खिलाई और फिर देर तक उस का सिर दबाती रही. जब पंखुड़ी को थोड़ा आराम हुआ तो विनिता अपने घर लौट गई. आधे घंटे बाद वह ब्रैड और गरमगरम सूप ले कर पंखुड़ी के पास लौटी. उस के मना करने पर भी उसे बड़े प्यार से खिलाया. इस तरह पंखुड़ी के ठीक होने तक विनिता ने उस का हर तरह से खयाल रखा.

पंखुड़ी विनिता की नि:स्वार्थ सेवा देख शर्मिंदा थी. उसे अपनी इस सोच पर अफसोस हो रहा था कि विनिता जैसी हाउसवाइफ के पास कोई काम नहीं होता सिवा जासूसी करने और खाना पकाने के. अगर विनिता ने समय पर उस का हाल नहीं लिया होता तो पता नहीं उसे कितने दिनों तक बिस्तर पर रहना पड़ता.

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खैर, इस के बाद विनिता के प्रति पंखुड़ी का नजरिया बदल गया. अब जब भी विनिता के घर आती तो निशांत, विहान के साथसाथ विनिता से भी बातें करती. विनिता की संगति में रह कर अब उस ने अपने घर को भी सुव्यवस्थित रखना शुरू कर दिया था.

आजकल निशांत पहले से भी ज्यादा व्यस्त रहने लगा था. फिर एक दिन चहकता हुआ घर आया. चाय पीते हुए निशांत बता रहा था कि उस के काम से खुश हो कंपनी की तरफ से उसे फ्रांस भेजा जा रहा है प्रशिक्षण लेने के लिए. अगर वह अपने प्रशिक्षण में अच्छा करेगा तो अनुभव हासिल करने के लिए परिवार सहित 2 साल तक उसे फ्रांस में रहने का मौका भी मिल सकता है.

पति की इस उपलब्धि पर विनिता बहुत खुश हुई, लेकिन यह सुन कर कि प्रशिक्षण के दौरान निशांत को अकेले ही जाना है, उस का कोमल मन घबरा उठा. निशांत के बिना अकेले कैसे रह पाएगी वह विहान को ले कर? घर में भी कोई ऐसा फ्री नहीं है, जिसे 3 महीनों के लिए बुला सके. विनिता ने निशांत को बधाई दी फिर धीरे से कहा, ‘‘अगर फ्रांस जाना है तो हम दोनों को भी अपने साथ ले चलो वरना मैं तुम्हें अकेले नहीं जाने दूंगी, क्या तुम ने तनिक सोचा है कि तुम्हारे जाने के बाद यहां मैं अकेले विहान के साथ कैसे रह पाऊंगी 3 महीने?’’

भविष्य के सुनहरे ख्वाब देखने में डूबे निशांत को विनिता की यह बात जरा भी नहीं भाई. झल्लाते हुए कहा, ‘‘यह तुम्हारी समस्या है मेरी नहीं. कितनी बार कहा कि समय के साथ खुद को बदलो, नईनई जानकारी हासिल करो. बाहर का काम

निबटाना सीखो पर तुम ने तो इन कामों को भी औरतों और मर्दों के नाम पर बांट रखा है.

‘‘अब दिनरात मेहनत करने के बाद यह अवसर हाथ आया है तो क्या तुम्हारी इन बेवकूफियों के चक्कर में मैं इसे हाथ से गंवा दूं? हरगिज नहीं. अगर तुम अकेली नहीं रह सकती तो अभी चली जाओ विहान को ले कर अपनी मां या मेरी मां के घर. मेरी तो जिंदगी ही बरबाद हो गई ऐसी पिछड़ी मानसिकता वाली बीवी पा कर,’’ और फिर फ्रैश होने चला गया.

विनिता का दिल धक से रह गया. पति के इस कटु व्यवहार से उस की आंखों से आंसू बहने लगे. लगा उस की तो बसीबसाई गृहस्थी उजड़ जाएगी. साथ ही यह भी महसूस होने लगा कि निशांत भी क्या करे बेचारा, उस के कैरियर का सवाल है. दिल ने कहा इस स्थिति की जिम्मेदार भी काफी हद तक वह खुद ही है.

अब यह बात उस की समझ में आ चुकी थी कि वर्तमान समय में हाउसवाइफ को सिर्फ घर के अंदर वाले काम ही नहीं, बल्कि बाहर वाले जरूरी काम भी आने चाहिए. आज पढ़ीलिखी होने के बावजूद अपने को असफल, हीन और असहाय समझ रही थी. कारण घर के बाहर का कोई काम वह करने के लायक नहीं थी. इतनी बड़ी खुशी मिलने पर भी पतिपत्नी में तनाव उत्पन्न हो गया था.

अगले दिन चाय पीते समय पंखुड़ी भी वहां पहुंच गई. आते ही जोश के साथ निशांत को बधाई दी और पार्टी की मांग करने लगी.

निशांत का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था. उस ने कहा, ‘‘अरे कैसी बधाई और कैसी पार्टी पंखुड़ी? मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा इस जिंदगी में कभी.’’

पंखुड़ी को निशांत की बात कुछ समझ नहीं आई. विनिता ने बात छिपानी चाही कि इस बिंदास लड़की से बताने का क्या फायदा, उलटे कहीं इस ने जान लिया तो खूब हंसी उड़ाएगी मेरी, पर गुस्से में निशांत ने अपनी सारी परेशानी पंखुड़ी को सुना

डाली.

विनिता तो मानो शर्म के मारे धरती के अंदर धंसी जा रही थी. मगर सारी बात ध्यान से सुनने के बाद पंखुड़ी हंसने लगी और फिर हंसतेहंसते ही बोली, ‘‘डौंट वरी निशांत, यह भी कोई परेशानी है भला? इस का समाधान तो कुछ दिनों में ही हो जाएगा. आप अपनी पैकिंग और मेरी पार्टी की तैयारी शुरू कर दीजिए.’’

निशांत हैरान सा पंखुड़ी का मुंह देखने लगा. विनिता की तरफ मुखातिब होते हुए पंखुड़ी ने कहा, ‘‘घबराने की कोई बात नहीं विनिता. अगर कुछ सीखने का पक्का निर्णय कर लिया हो तो आज से ही मैं तुम्हें इंटरनैट का काम सिखाना शुरू कर सकती हूं और निशांत के जाने के पहले धीरेधीरे बाहर के सारे काम भी मैं सिखा दूंगी,’’ और फिर अपना लैपटौप लेने अपने घर चली गई.

विनिता सन्न थी अपनी संकीर्ण सोच पर. जिस पंखुड़ी को वह तेजतर्रार और दूसरों का घर तोड़ने वाली लड़की समझती थी, वह इतनी जिम्मेदार और उसे ले कर इतनी संवेदनशील होगी, इस की तो कल्पना भी विनिता ने नहीं की थी.

मिनटों में पंखुड़ी वापस आ गई. अपना लैपटौप औन करते हुए बोली, ‘‘विनिता मैं तुम्हारी गुरु तो बनूंगी, पर एक शर्त है तुम्हें भी गुरु बनना पड़ेगा मेरी.’’

विनिता के मुंह से निकला, ‘‘भला वह क्यो?’’

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पंखुड़ी ने कहा, ‘‘देखो, तुम्हें देख कर मैं ने भी अपना घर बसाने का फैसला कर लिया है, पर घरगृहस्थी के काम में मैं बिलकुल जीरो हूं. मैं ने महसूस किया है अगर आज के जमाने में हाउसवाइफ के लिए बाहर का काम सीखना जरूरी होता है तो उसी तरह सफल और शांतिपूर्ण घरगृहस्थी चलाने के लिए वर्किंग लेडी को भी घर और किचन का थोड़ाबहुत काम जरूर आना चाहिए. अगर तुम चाहो तो अब हम

दोनों एकदूसरे की टीचर और स्टूडैंट बन कर सीखनेसिखाने का काम कर सकती हैं. मैं तुम्हें बाहर का काम करना सिखाऊंगी और तुम मुझे किचन और घर संभालना.’’

‘‘हांहां, क्यों नहीं. यह भी कोई पूछने की बात है?’’ खुश हो कर विनिता ने पंखुड़ी का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, ‘‘पर मेरी भी एक शर्त है कि यह सीखनेसिखाने का काम हम दोनों स्टूडैंटटीचर की तरह नहीं, बल्कि पक्की सहेलियां बन कर करेंगी.’’

‘‘मंजूर है,’’ पंखुड़ी बोली.

फिर एक जोरदार ठहाका लगा, जिस में इन दोनों के अलावा निशांत की आवाज भी शामिल थी. माहौल खुशनुमा बन चुका था.

Serial Story: पक्की सहेलियां (भाग-2)

अंकल से बात करते समय विनिता ने सुना कि पंखुड़ी एक मल्टी नैशनल कंपनी में ऐग्जीक्यूटिव पद पर है. वह अंकल से कह रही थी, ‘‘देखिए मेरे वर्किंग आवर्स फिक्स नहीं हैं, शिफ्टों में ड्यूटी करनी पड़ती है. मेरे आनेजाने का समय भी कोई निश्चित नहीं है, कभी देर रात आती हूं तो कभी मुंह अंधेरे निकल जाती हूं. कभीकभी तो टूअर पर भी जाना पड़ता है 2-3 दिनों के लिए. आप को कोई आपत्ति तो नहीं?

‘मैं इस बात को पहले ही पूछ लेना चाहती हूं, क्योंकि अभी जहां मैं रह रही हूं उन्हें इस बात पर आपत्ति है… लोग लड़की के देर रात घर आने को सीधे उस के करैक्टर से जोड़ कर देखते हैं… एकदम घटिया सोच,’’ कह कर वह चुप हो गई.

इस के बाद क्या हुआ, यह पता नहीं. विनिता वहां से अपने घर चली आई. उसे वह लड़की बहुत तेजतर्रार और बिंदास लगी.

उस शाम निशांत काफी देर से घर लौटा. खापी कर तुरंत सो गया. पंखुड़ी के बारे में पूछने का मौका ही नहीं मिला विनिता को. अगले शनिवार की शाम जब देर रात विनिता परिवार सहित शौपिंग कर के लौटी तो देखा खाली पड़े फ्लैट की लाइट जल रही है. शायद कोई नया किराएदार आ गया है. नीचे सीढ़ी का दरवाजा बंद कर के विनिता हैलो करने की नीयत से मिलने गई तो देखा ताला लगा था.

रात करीब 12 बजे घंटी की आवाज से विनिता की नींद खुली. उस ने निशांत को

उठाया और नीचे यह सोच कर भेजा कि अंकलआंटी को कुछ जरूरत तो नहीं?

थोड़ी देर में निशांत वापस आया और सोने लगा तो विनिता ने पूछा, ‘‘कौन था?’’

निशांत ने कहा, ‘‘अंकल की नई किराएदार पंखुड़ी.’’

विनिता ने तुरंत कहा, ‘‘निशांत, तुम कोई घरेलू, समझदार, किराएदार नहीं ढूंढ़ सकते थे अंकल के लिए? वक्तबेवक्त आ जा कर हमें डिस्टर्ब करती रहेगी. अंकल तो चले जाएंगे अपने बच्चों के पास, पर साथ रहना तो हम दोनों को ही है.’’

नींद से भरा निशांत उस समय बात करने के मूड में नहीं था. गुस्से से बोला, ‘‘अरे वह पढ़ीलिखी नौकरी करने वाली लड़की है. वह कब जाए या कब आए इस से हमें क्या फर्क पड़ेगा भला? आज पहला दिन है, अपने साथ सीढ़ी के दरवाजे की चाबी ले जाना भूल गई थी वह,’’ कह कर वह गहरी नींद में सो गया.

विनिता को निशांत का इस तरह बोलना बहुत बुरा लगा. उस दिन पंखुड़ी पर और भी गुस्सा आया. मृदुभाषी और समझदार स्वभाव की विनिता पति की व्यस्तता को समझती थी. उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं रहती कि निशांत देर से घर क्यों आता है, बल्कि पति के आने पर मुसकराते हुए वह उसे गरमगरम चाय पिलाती ताकि उस की थकान मिट जाए.

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अगली सुबह सब थोड़ी देर से उठे. चाय बनाने लगी तो विनिता को पंखुड़ी का ध्यान आया. उस ने निशांत से पूछे बगैर उस के लिए भी चाय बना दी और दरवाजा खटखटा कर चाय पहुंचा आई. उनींदी आंखों से पंखुड़ी ने दरवाजा खोल कप ले कर थैंक्स कह झट दरवाजा बंद कर लिया.

विनिता सकपका गई. कोई तमीज नहीं कि 2 मिनट बात ही कर लेती. शायद नींद डिस्टर्ब हो गई थी उस की. सारा दिन घर बंद रहा. सो रही होगी, शाम को सजधज

कर पंखुड़ी चाय का कप वापस करने विनिता के पास आई. वैसे तो वह विनिता से मिलने आई थी, पर सारा समय निशांत और विहान से ही इधरउधर की बातें करती रही.

विनिता के पूछने पर कि चाय बनाऊं तुम्हारे लिए पंखुड़ी ने कहा, ‘‘थैंक्स, मैं चाय नहीं पीती.’’ ‘चाय की जगह जरूर यह कुछ और पीती होगी यानी बोतल वाली चाय’ विनिता ने सोचा. फिर यह पूछने पर कि किचन में खाना बनाना अभी शुरू किया या नहीं. पंखुड़ी तपाक से बोली, ‘‘अरे, किचन का झमेला मैं नहीं रखती. कौन कुकिंग करे? समय की बरबादी है. बाहर ही खाती हूं या पैक्ड खाना मंगवा लेती हूं.’’

थोड़ी देर बाद उस ने अपनी कार निकाली और चली दी कहीं घूमने. जाते वक्त हंसते हुए कहा, ‘‘डौंट वरी निशांत आज मैं चाबी साथ लिए जा रही हूं.’’ इस बात पर निशांत और पंखुड़ी ने एक जोरदार ठहाका लगाया, पर पता नहीं हंसमुख स्वभाव वाली विनिता को हंसी क्यों नहीं आई.

रात को सोते समय विनिता ने निशांत से कहा, ‘‘हाय, कैसी है यह पंखुड़ी… लड़कियों वाले तो लक्षण ही नहीं हैं इस में. सारे काम मर्दों वाले करती है, शादी कर के कैसे घर बसाएगी यह? ऐसी ही लड़कियों की ससुराल और पति से नहीं बनती है. पति दुखी रहता है या तलाक हो जाता है. एक मैं थी कालेज पहुंचतेपहुंचते सिलाईकढ़ाई के अलावा घरगृहस्थी का भी सारा काम सीख लिया था?’’

निशांत ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘वह खाना बनाना नहीं जानती है, यह कौन सी बुराई हुई उस की? देखती नहीं कितनी स्मार्ट, मेहनती, आत्मनिर्भर और औफिस के कामों में दक्ष है वह… दुखी सिर्फ इस जैसी लड़की के पति ही क्यों, दुखी तो उन

घरेलू पत्नियों के पति भी हो सकते हैं, जो इस आधुनिक जमाने में भी खुद को बस घर की चारदीवारी में ही कैद रखना पसंद करती हैं. छोटेमोटे कामों के लिए भी पूर्णतया पिता, पति, भाई या बेटे पर निर्भर… बदलते समय के साथ ये खुद नहीं बदलती हैं उलटे जो बदल रहा है उस में भी कुछ न कुछ खोट निकालती रहती हैं.’’

विनिता ने निशांत का इशारा समझ लिया था कि पूर्णतया निर्भर होने वाली बात किसे इंगित कर के कही जा रही है. इस के अलावा निशांत द्वारा पंखुड़ी की इतनी तारीफ करना उसे जरा भी नहीं सुहाया. दिल ने हौले से कहा कि सावधान विनिता. ऐसी ही लड़कियां दूसरों का घर तोड़ती हैं. आजकल जब देखो निशांत पंखुड़ी की तारीफ करता रहता है.

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कुछ दिनों बाद आंटीअंकल विदेश चले गए. पंखुड़ी अपनी दुनिया में मस्त और विनिता अपनी गृहस्थी में. मगर जानेअनजाने विनिता पंखुड़ी की हर गतिविधि पर ध्यान देने लगी थी कि कब वह आतीजाती है या कौन उसे ले जाने या छोड़ने आता है. ऐसा नहीं था कि पंखुड़ी को इस बात का पता नहीं था. वह सब समझती थी पर जानबूझ कर उसे इगनोर करती, क्योंकि उस के दिमाग में था कि विनिता जैसी हाउसवाइफ के पास कोई काम नहीं होता दिन भर सिवा खाना बनाने और लोगों की जासूसी करने के.

आगे पढ़ें- इस तरह आपस में हायहैलो होते हुए भी एक…

Serial Story: पक्की सहेलियां (भाग-1)

पति निशांत की प्रमोशन और स्थानांतरण के बाद विनिता अपने 5 वर्षीय बेटे विहान को ले कर हजारीबाग से रांची आ गई. महत्त्वाकांक्षी निशांत को वहां की पौश कालोनी अशोक नगर में कपंनी द्वारा किराए का मकान मिला था, जिस में रांची पहुंचते ही वे शिफ्ट हो गए. मकान बड़ा, हवादार और दोमंजिला था. नीचे मकानमालिक रहते थे और ऊपर विनिता का परिवार.

मकान के पार्श्व में बने बड़े गैरेज के ऊपर भी एक बैडरूम वाला छोटा सा फ्लैट बना था, जो खाली पड़ा था. उस फ्लैट को ऊपरी मंजिल से इस तरह जोड़ा गया था कि दोनों फ्लैटों में रहने वाले आनेजाने के लिए कौमन सीढि़यों का उपयोग कर सकें.

रांची आते ही निशांत ने विहान का ऐडमिशन एक अच्छे स्कूल में करवा कर

औफिस जौइन कर लिया. स्कूल ज्यादा दूर नहीं था पर विनिता को स्कूटी चलाना न आने के कारण निशांत को अपनी कार से औफिस जाते समय विहान को स्कूल छोड़ना और लंच टाइम में आते वक्त उसे वापस लाना पड़ता था. कुछ दिनों तक तो ठीक चला पर नई जगह, नया पद और जिम्मेदारियां, इन सब ने निशांत को धीरेधीरे काफी व्यस्त कर दिया. अब निशांत सुबह 9 बजे निकल जाता और शाम के 7-8 बजे तक ही लौट पाता था, वह भी बिलकुल थका हुआ.

एक दिन निशांत ने विनिता से कहा, ‘‘तुम स्कूटी चलाना क्यों नहीं सीख लेतीं? कम से कम विहान को स्कूल पहुंचाने व लाने का तथा दूसरे छोटेमोटे काम तो कर ही सकती हो.’’

‘‘अरे मुझे क्या जरूरत है स्कूटी सीखने या बाहर के काम करने की. ये काम तो मर्दों के होते हैं, मैं तो घर में ही भली,’’ विनिता बोली.

मजबूरन विहान के लिए निशांत ने औटोरिकशा लगवा दिया. उस के बाद निशांत ने इस संबंध में कोई बात नहीं की. घरेलू और मिलनसार स्वभाव की विनिता खुद को घरगृहस्थी के कामों में ही व्यस्त रखती थी. लगभग डेढ़दो महीने उसे अपने घर को सुव्यवस्थित करने में लग गए. मकानमालकिन की मदद से अच्छी बाई मिल गई, तो विनिता ने चैन की सांस ली. विहान के स्कूल से आने के बाद अब वह उसी के साथ व्यस्त रहती.

घर सैट हो गया तो विनिता ने पासपड़ोस में अपनी पहचान बनानी शुरू करनी चाही पर छोटी जगह से आई विनिता को यह पता नहीं था कि ज्यादातर पौश कालोनी में रहने वाले पड़ोसियों का संबंध सिर्फ हायहैलो और स्माइल तक ही सीमित रहता है. कारण, वे सभी अपनेआप में हर तरह की सुविधा से आत्मनिर्भर होते हैं. 1-2 लोगों के साथ दोस्ती भी हुई पर सिर्फ औपचारिक तौर पर. अत: घर का काम खत्म होने पर जब कभी उसे खाली समय मिलता तो या तो वह टीवी देखती या फिर दिल बहलाने के लिए नीचे मकानमालिक के घर चली जाती.

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मकानमालिक बुजुर्ग दंपती थे, जिन के बच्चे विदेश में बसे थे. वे साल में 6 महीने विदेश में ही रहते थे अपने बच्चों के पास. गृहकार्य में दक्ष विनिता कभी कुछ विशेष खाना बनाती तो नीचे जरूर भेजती. नए किराएदार निशांत और विनीता के व्यवहार से बुजुर्ग दंपती बहुत संतुष्ट थे. उन तीनों को अपने बच्चों की तरह प्यार करने लगे थे. ये दोनों भी उन्हें आंटीअंकल कह कर बुलाने लगे. ज्यादातर संडे को छुट्टी होने के कारण चारों कभी ऊपर तो कभी नीचे एकसाथ चाय पी लिया करते थे.

ऐसे ही एक संडे की शाम को निशांत और विनिता नीचे आंटीअंकल के साथ चाय पी रहे थे. तभी अंकल ने पूछा, ‘‘बेटा, आप दोनों को अभी छुट्टी ले कर घर तो नहीं जाना है?’’

निशांत ने कहा, ‘‘नहीं अंकल, अभी अगले 6-7 महीने तो सोच भी नहीं सकता, क्योंकि औफिस का बहुत सारा काम पूरा करना है मुझे.’’

विनिता से रहा नहीं गया तो उस ने पूछ लिया, ‘‘मगर अंकल आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?’’

‘‘वह इसलिए कि हम दोनों निश्चिंत हो कर कुछ महीनों के लिए अपने बच्चों से मिलने विदेश उन के पास जा सकें,’’ आंटी ने कहा तो विनिता मन ही मन घबरा गई.

घर आ कर भी विनिता सोचती रही कि इन दोनों के जाने के बाद तो घर सूना हो जाएगा, वह बिलकुल अकेली हो जाएगी. भले ही वह रोज नहीं मिलती उन से, पर कम से कम उन की आवाजें तो आती रहती हैं उस के कानों में.

सोते समय निशांत ने विनिता को सीरियस देखा तो पूछ लिया, ‘‘क्या बात है,

आंटीअंकल के जाने से तुम परेशान क्यों हो रही हो?’’

विनिता ने अपने दिल की बात बताई तो निशांत को भी एहसास हुआ कि वाकई इतने बड़े घर में विनिता अकेली हो जाएगी.

थोड़ी देर बाद विनिता ने कहा, ‘‘निशांत, क्यों न आंटीअंकल को गैरेज वाले फ्लैट में एक किराएदार रखने की सलाह दी जाए, जिस से उन को इनकम हो जाएगी और हम लोगों का सूनापन दूर हो जाएगा.’’

निशांत को विनिता की बात जंच गई. अगले दिन औफिस जाते वक्त निशांत ने जब अंकल से इस बात की चर्चा की तो उन्होंने न केवल किराएदार रखने वाली उन की बात का स्वागत किया, बल्कि नया किराएदार ढूंढ़ने का जिम्मा भी निशांत को ही सौंप दिया.

3-4 दिनों के बाद शाम के समय विनिता नीचे आंटीअंकल के पास बैठी हुई निशांत का इंतजार कर रही थी. तभी चुस्त कपड़े, हाई हील पहने और बड़ा सा बैग कंधे से लटकाए एक आधुनिक सी दिखने वाली लड़की कार से उतर गेट खोल कर अंदर दाखिल हुई. आते ही उस ने बड़ी संजीदगी से पूछा, ‘‘माफ कीजिएगा, क्या उमेशजी का यही घर है?’’

‘‘जी हां, बताइए क्या काम है? मैं ही हूं उमेश,’’ अंकल बोले.

‘‘गुड ईवनिंग सर, मैं पंखुड़ी,’’ कह कर उस ने अंकल से हाथ मिलाया. फिर कहने लगी, ‘‘आज निशांत से पता चला कि आप के घर में एक फ्लैट खाली है किराए के लिए. मैं उसी सिलसिले में आई हूं.’’

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‘अच्छा तो यह फैशनेबल सी लड़की किराएदार बनने आई है,’ सोच संकोची स्वभाव की विनिता उठ कर ऊपर जाने लगी. तभी अंकल ने अपनी पत्नी और विनिता से उस का परिचय करवाया. पंखुड़ी ने दोनों की तरफ मुखातिब होते हुए ‘हैलो’ कहा. फिर अंकल से बातचीत करने और फ्लैट देखने चली गई. बड़ा अटपटा लगा विनिता को कि उम्र में इतनी छोटी होने पर भी कितने आराम से उस ने सिर्फ हैलो कहा. कम से कम वह उसे न सही आंटी को नमस्ते तो कह सकती थी, उन की उम्र का लिहाज कर के. खैर, उसे क्या. उस ने मन ही मन सोचा.

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सुशांत के पिता के बाद कंगना रनौत ने भी साधा रिया चक्रवर्ती पर निशाना, लीक की व्हॉट्सएप चैट

बौलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड केस में नए-नए मोड़ सामने आ रहे हैं. हाल ही में मुंबई पुलिस की जांच से नाखुश सुशांत के पिता ने उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है, जिसके तहत सुशांत के पिता का आरोप है कि रिया ने एक्टर को सुसाइड के लिए उकसाया है. इसी बीच एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह की ओर से की गई एफआईआर में लिखवाईं गई बातों को वायरल कर दिया है. आइए को बताते हैं पूरा मामला…

रिया को लेकर कही ये बात

कंगना रनौत ने व्हाट्स ऐप चैट को लीक करते हुए लिखा है, ‘ये स्टेटमेंट सुशांत सिंह राजपूत के पिता का है. तो माफिया ने उसे पागल घोषित किया और रिया उन्हें ब्लैकमेल करती रही. सोचिए वो अभी भी क्या साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें पागल और उनकी मौत का फायदा उठाने की कोशिश में हैं.’ कंगना रनौत की ओर से शेयर की गई ये व्हॉट्स ऐप चैट्स आप नीचे देख सकते हैं.


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फिल्मों को लेकर किया खुलासा

इतना ही नहीं कंगना ने लिखा, ‘पूरे साल 2019 में सुशांत ने कोई फिल्म शूट नहीं की. उन्हें मूवी माफिया ने फिल्मों से बायकॉट कर दिया. उनके पिता ने ये बात लिखी है कि वो फिल्में छोड़कर ऑर्गेनिक फार्मिंग करना चाहते थे, एक पावर हाउस एक्ट फार्मिंग क्यों करना चाहेगा. जिसने अपना शानदार साइंस का करियर एक्टिंग के लिए छोड़ दिया हो. आखिर क्यों?’

मूवी माफिया को लेकर कही ये बात

कंगना रनौत ने अपने इस ट्वीट में आगे लिखा है, ‘उसने मूवी माफिया के बुली (प्रताड़ित) होने और बैन से बचने के लिए अपने डर का इस्तेमाल किया. बेहद खतरनाक स्ट्रग्ल के चलते मानसिक दबाव होना आम बात है. हॉलीवुड में तो लोग इसे फ्लॉन्ट करते हैं. आखिर उसने इन कैंपेन का सामना करने से बेहतर मरना क्यों पसंद किया था?’ कंगना रनौत के ये ट्वीट्स आप नीचे देख सकते हैं.

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15 करोड़ को लेकर उठाए ये सवाल

कंगना ने सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘सुशांत सिंह राजपूत के एकाउंट से 15 करोड़ रुपये गायब हैं और महेश भट्ट ने अपने स्टेटमेंट में कहा है कि रिया चक्रवर्ती उन्हें अपना गुरू मानती थी. कंगना ने लिखा है कि इसमें हैरानी की बात नहीं है फ्रॉडगिरी सीखी नहीं जाती ट्रांसमिट की जाती है.’

बता दें, कंगना इससे पहले भी सुशांत के सुसाइड को लेकर कई राज खोल चुकी हैं और सीबीआई जांच की मांग कर रही हैं, जिसके चलते अब केस में नए-नए मोड़ आ रहे हैं.

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