Raksha Bandhan 2020: ग्लोइंग स्किन के लिए घर पर ऐसे करें स्क्रब

सौफ्ट और ब्यूटीफुल स्किन हर किसी को आकर्षित करती है और सभी इसे पाना चाहते हैं. लेकिन हमारा चेहरा मौसम, प्रदूषण, धूल-मिट्टी, थकान सभी कुछ  झेलता है और इस का प्रभाव सब से ज्यादा चेहरे की स्किन पर नजर आता है. थकी, ग्लो के बिना स्किन,  झांइयां और आंखों के नीचे डार्क सर्कल फेस की शाइन कम कर देते हैं. ऐसे में फेस स्क्रबिंग करना एक ऐसा जादुई तरीका है, जो मिनटों में आप की स्किन को नरम, मुलायम और चमकदार बना सकता है. स्क्रबिंग से स्किन दोबारा चमकदार व जवान लगने लगती है. इसे एक्सफोलिएशन भी कहा जाता है व इसे अपने नियमित स्किन केयर रूटीन में शामिल करना चाहिए. फेस स्क्रब से आप मेकअप के उन छिपे कणों को भी हटा सकती हैं, जो पोर्स में घुस जाते हैं और सामान्य तौर पर क्लींजर या पानी से साफ करने से नहीं हटते. कुछ फेस स्क्रब्स में मास्चराइजर भी होता है, जिस से स्किन को पोषण भी मिलता है.

ऐसे करें स्क्रबिंग

स्क्रब्स में कुछ ऐसे खुरदरे पदार्थ होते हैं, जिन्हें स्किन पर रगड़ने से डेड स्किन की ऊपरी परत हट जाती है. स्क्रब को हाथों में लेकर उंगलियों की सहायता से भी आप लगा सकती हैं और कास्मेटिक पैड की सहायता से भी. इसे आप चाहे कैसे भी लगाएं, पर एक बात का ध्यान रखें कि स्क्रब को चेहरे पर गोलाकार घुमाते हुए हलके हाथों से लगाएं, साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लें कि यह पूरे चेहरे और गरदन पर अच्छी तरह से लग जाए. स्क्रब करने के बाद चेहरे को पानी से धो कर मास्चराइज कर लें. फेस स्क्रब में बहुत सी चीजें शामिल की जा सकती हैं जैसे बैंबू फाइबर्स, ओटमील, चोकर, चीनी, फलों का गूदा, मूंगफली के छिलके, अखरोट आदि. नमक, मिट्टी जैसी चीजें स्क्रब्स में इस्तेमाल नहीं की जातीं. एक अच्छे स्क्रब में कोई क्रीम, अच्छी क्वालिटी की खुशबू, एसेंशियल आयल, मास्चराइजर आदि भी होते हैं.

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स्क्रब करने से पहले करें ये काम

चेहरे पर स्क्रब लगाने से पहले उस का पैच टेस्ट जरूर कर लें. इस के लिए थोड़ा सा स्क्रब ले कर कलाई की अंदरूनी तरफ लगाएं. कलाई पर स्क्रब लगा कर थोड़ी देर रुकें और फिर साफ पानी से धो लें. यदि किसी तरह की इचिंग, जलन न हो तभी इसे चेहरे पर लगाएं. स्क्रब की हमेशा थोड़ी मात्रा ही लें. इसे फेस पैक की तरह न लगाएं. यदि आप के चेहरे पर पिंपल्स हैं तो स्क्रबिंग न करें. रगड़ने व स्क्रब में मौजूद खुरदरी चीजों से आप के पिंपल्स फूट सकते हैं. हमेशा ऐसे स्क्रब्स ही इस्तेमाल करें, जिन में मौजूद स्क्रबिंग एजेंट नमिल जाएं, वरना वे पोर्स में फंस कर उन्हें बंद कर सकते हैं.

1 आयली स्किन के लिए स्क्रब करें ट्राई

1/2 कप हरे चने मैश कर लें. उस में 1 बड़ा चम्मच दही व पानी मिला कर पेस्ट बना लें. इस से हलके हाथों से चेहरे को स्क्रब करें. ठंडे पानी से धो लें. साबुन न लगाएं.

1/2 कप चावल के आटे में 1/2 कप कच्चा पपीता मैश कर के मिला लें और इस में आधे नीबू का रस भी मिला लें. चेहरे को हलका गीला कर के इस पेस्ट से स्क्रब करें.

2 ड्राई स्किन के लिए स्क्रब करें ट्राई

विटामिन ई आयल में 1 बूंद नीबू का रस और 1 बूंद ग्लिसरीन मिला लें. इस से चेहरे की मसाज कर के ठंडे पानी से धो लें.

1/2 चम्मच बादाम के चूरे में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच गुलाबजल मिला कर लगा लें और फिर गीले कौटन पैड से साफ कर लें.

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3 नौर्मल स्किन के लिए स्क्रब करें ट्राई

आटे का चोकर या बारीक दलिया लें. उसमें 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच दूध मिलाएं और चेहरे पर लगाएं. कुछ देर बाद हलके हाथों से रगड़ कर छुड़ा लें.

4 जेंटल फेस स्क्रब करें ट्राई

3 चम्मच पिसे बादाम में 3 चम्मच ओटमील, 3 चम्मच मिल्क पाउडर, 2 चम्मच सूखी गुलाब की पत्तियां और बादाम का तेल मिला लें. इस मिश्रण को कांच के जार में भर कर रख लें और सप्ताह में 1 बार इस्तेमाल करें.

बाजार से रेडीमेड स्क्रब खरीदते समय ध्यान रखें कि स्क्रब अच्छी कंपनी का ही हो और उस में किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायन न हों. चाहे स्क्रब घरेलू हो या रेडीमेड, सप्ताह में 1 बार इस का प्रयोग अवश्य करें.

Edited by Rosy

Serial Story: अहिल्या (भाग-3)

अब तुहिना को वाकई इधरउधर डोलने के सिवा कोई काम नहीं था. सो, वह अब हर कमरे को खोलखोल कर देखने लगी. हवेली के पिछवाड़े में खलिहान था, जहां शायद फसल कटने पर रखी जाती थी. अनाज की कोठरियां थीं और बड़ा सा गौशाला भी, जहां कई मजदूर लोग थे, जो वहां मौजूद दसियों गायों की देखभाल करते थे.

तुहिना ने सब पता किया, दूध हर दिन विशेष गाड़ी से पटना स्थित एक डेरी फार्म में जाता था और अनाज की बोरियां भी ट्रकों में भर मंडियों मे बिकने जाती थीं. अब तक थैली में दूध खरीदने वाली आश्चर्य से अपनी मिल्कीयत देख रही थी.

एक बात उसे अजीब लगती कि उस की सास अपने पति यानी उस के ससुर से परदा करती थी, जबकि तुहिना को कुछ भी मनाही नहीं थी.

एक दिन तुहिना ने सुबहसुबह देखा था, आंगन में ससुरजी कुरसी पर बैठे थे और सास एक बहीनुमा खाते को खोल कर कुछ बता रही थीं. वह ऊपर तले की मुंडेर से नीचे झांक रही थी, पूरे वक्त उस की सास कुछ समझाने का प्रयास कर रही थीं.

उस ने यह भी देखा कि उन्होंने बहुत सारे रुपए एक पोटली में जो बंधे हुए थे, उन के हाथ में दिए. ससुरजी ने न उसे गिना या ठीक से देखा, उसे फिर से बांध सास के ही हाथ में थमा दिए. वे बिलकुल वैसे ही कर रहे थे, जैसे अंकुर से कुछ जबरदस्ती करवाओ तो करता है. वह हावभाव से समझ रही थी ऊपर से.

दीवाली का दिन था. अंकुर दोपहर में खाना खा कर फिर सो गया था. उस के ससुरजी नीचे पूजा वाले कमरे में थे और तुहिना रसोई के बगल वाले स्टोर रूम में घुस कर संदूकों और बक्सों को खोलखोल कर देख रही थी. बहुत पुरानेपुराने कपड़े थे, कई बक्सों में तो सिर्फ साड़ियां भरी हुई थीं. भारीभारी बनारसी साड़ियां थीं ज्यादातर.

एक लकड़ी की सुंदर सी अलमारी थी, उस में बहुत सारी ब्लैक ऐंड व्हाइट तसवीरें थीं. एक संदूक था, जिसे खोलना तुहिना को आ ही नहीं रहा था. वह दीवाल में लगा हुआ था और उस के दरवाजे पर अंदर घुसा कर खोलने वाले ताले थे.

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चर्रमर्र की आवाज से मम्मी भी वहां आ कर खड़ी हो गई थीं. पहले तो तुहिना को भान ही नहीं हुआ, फिर जब देखा कि वे उसे ही मूक हो देख रही हैं, तो तुहिना थोड़ी झेंप सी गई. क्या सोच रही होंगी वे कि कैसी लड़की है सबकुछ मानो देख ही लेगी. तुहिना झट से हाथ में पकड़ी तसवीर को अलमारी में रखने लगी.

“रुको बहू, मैं खुद तुम्हें इस कमरे में लाना चाह रही थी, पर तुम्हारे ससुरजी राजी नहीं हो रहे थे,“ सासू मां ने कहा, तो वह थम गई.

उस के बाद देर तक वे उसे अलमारी के फोटो दिखाती रहीं, बताती रहीं, सुनाती रहीं. संदूक खोल कर उसे दिखाया, जिस में सोनेचांदी, हीरेमोती के गहने भरे पड़े थे.

एक लाल बनारसी साड़ी उस में से निकाल कर उसे पहना दी और गहनों से लाद दिया ऊपर से नीचे तक.

तुहिना किंकर्तव्यविमूढ़ हो सब करती रही. शाम हो चली थी. उसे ले कर वे पूजाघर में पहुंचा आईं और खुद बाहर जा कर बैठ दीयाबाती की तैयारी करने लगीं.

अंकुर भी कुरतापाजामा में सजीला बन पूजाघर में आ बैठा, पापाजी तो थे ही. देर रात तक पूजा चली, फिर सब ने मां के हाथ के पकवानों को चाव से खाया, मम्मी बारबार आंखें पोंछ रही थीं.

दूसरे दिन सुबह तीनों पटना के लिए निकल पड़े. अंकुर मां के गले लग कर रोने वाला इस बार अकेला नहीं था, तुहिना भी उसी व्यग्रता से रो रही थी.

पापाजी कार में पहले ही जा बैठे थे. लौटते वक्त रास्तेभर शायद ही किसी ने आपस में बातें की होंगी मानो सब गमगीन हों. पर तुहिना अब तक सुन रही थी, गुन रही थी, जो उस दोपहरी मम्मी ने उसे बताया था, “दुलहन ई सब संभाल लो, अब मुझ से नहीं होता है. न… न, ई फोटो को नहीं रखो अंदर. पहले इन्हें ध्यान से देखो, प्रणाम करो इन को. ये ही तुम्हारी सास हैं ‘राधा’, अंकुर को जन्म देने वाली. मैं तो राधा दीदी के मायके से आई अनाथ हूं, जो राधा के संग उस के ब्याह के साथ ही आई थी उस की देखभाल करने. क्या जानती थी कि ऐसा हो जाएगा कि सब चले जाएंगे और मैं ही रह जाऊंगी देखभाल करती हुई सबकुछ. सबकुछ है इस घर में, बस रहने वाले आदमी ही नहीं हैं. अंकुर के पिता भी अकेले थे, उस के दादा भी अकेली संतान ही थे.“

फिर उन्होंने तुहिना को वह बात बताई, जिस से अंकुर भी अनजान है, “अंकुर को जन्म देने के बाद से ही राधा दीदी बीमार रहने लगी थीं. अंकुर के 6 महीने का होतेहोते वे चल बसीं. अब इत्ते बड़े घर में रह गए अंकुर के पापा और दादाजी और नन्हा सा अंकुर. मैं कहां जाती. मैं बच्चे को सीने से लगा कर पालने लगी, जब तक अंकुर के दादाजी रहे, वे कोशिश करते रहे कि मेरी शादी हो जाए, पर न मेरी शादी हुई और न अंकुर के पापा ने दूसरी शादी की.

“हम अंकुर के मांबाप जरूर थे, पर पतिपत्नी नहीं. बचपन में अंकुर यहीं गांव के स्कूल में पढ़ता रहा, फिर कुछ बड़ा होने पर ठाकुर साहब पटना में बैंक की नौकरी करने लगे. कारण, यहां गांव में लोग तरहतरह की बातें करने लगे थे हम दोनों को ले कर.

“फिर अंकुर को आगे अच्छी तालीम भी तो देनी थी, इतना बड़ा आदमी अपना सबकुछ मुझ दाई के हाथों सौंप कर एक छोटी सी नौकरी करने लगा. अंकुर की मां बन मैं यहीं इस घर में रह गई, राधा की अमानत समझ संभालती रही. सुनती भी रही जमाने के जहरीले बोल, ठाकुर साहब तो मुझ से हिसाब भी न पूछते, पर मैं कैसे कुछ गलत करती. आखिर सब मेरे बेटे अंकुर का ही तो है. पर अब अकेलापन हावी होने लगा है, ये सब धनदौलत तुम लोगों का ही है, दुलहन अब संभालो अपनी अमानत.

“अंकुर मुझे मां समझता है, बस यही भरम मेरे जीने के लिए बहुत है. उम्मीद है दुलहन, तुम हमेशा उस की मां को जिंदा रखोगी कम से कम जब तक मैं जिंदा हूं. मत तोड़ना ये भरम,” मम्मी हाथ जोड़ कर कहने लगी थीं.

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कार पटना एयरपोर्ट पहुंचने को थी, तुहिना को अपना कहा याद आ रहा था, जिसे उसे जल्दी ही पूरा करना भी है, “मां, अब आप अकेली नहीं हैं. आप यहां जितना होता है समेट दें. बहुत काम कर लिया, अब आप अपने बेटेबहू के संग रहेंगी, बस अगले महीने मैं फिर आ कर आप को ले जाऊंगी.”

तुहिना सोच रही थी कि अचानक ध्यान आया कि मम्मी का नाम तो उस ने पूछा ही नहीं, अवश्य उन का नाम ‘अहिल्या’ ही होगा.

Serial Story: अहिल्या (भाग-2)

अंकुर बीचबीच में अपनी मां को बता रहा था कि वे लोग कहां तक पहुंचे या कितनी देर में पहुंच जाएंगे.

रास्ते में पहली बार तुहिना अपने ससुरजी से भी इतनी घुलमिल कर बातें करती जा रही थी. उस के ससुरजी काफी लंबे बलिष्ठ कदकाठी के व्यक्ति थे, जिन पर उम्र अपनी छाप नहीं लगा पाई थी अब तक.

जब कार लंबीचैड़ी बाउंड्री वाल को पार करती हुई एक दरवाजे के सामने जा कर रुकी तो तुहिना हैरान रह गई उस दरवाजे को देख कर.

अर्धगोलकार बड़े से उस नक्काशीदार लकड़ी के दरवाजे के ऊपर महीन काष्ठकारी की हुई थी, दरवाजा तो इतना बड़ा था मानो उस में से हाथी निकल जाए. अवश्य इन दरवाजों का प्रयोग हाथी घुसाने के लिए किया जाता होगा, वह अब तक मुंहबाएं दरवाजे को ही देख रही थी कि अंकुर ने कुहनी मारी. सामने उस की सासू मां खड़ी थीं, आरती का थाल ले कर.

गोल सा चेहरा, गेंहुआ रंगत, मझोला कदकाठी, उलटे पल्ले की गुलाबी रेशमी साड़ी पहनी उस की सासू मां ने उसे सिंदूर का टीका लगाया, बेटेबहू दोनों की आरती उतारी और लुटिया में भरे जल को 3 बार उन के ऊपर वार कर अक्षत के साथ ढेर सारे सिक्के हवा में उछाल दिए.

गांव की मुहानी से कार के पीछेपीछे दुलहन देखने को उत्सुक दौड़ते बच्चे झट उन्हें लूटने लगे. यह तो अच्छा हुआ था कि तुहिना ने आज सलवारकुरती और दुपट्टा पहना हुआ था, वरना बड़ी शर्म आती कि सासू मां सिर पर पल्लू लिए हुए हों और बहू जींसटौप में.

अंकुर ने कुछ भी नहीं बताया था, वह पूछती रह गई थी कि वह क्या पहने, कैसे कपड़े ले कर वह गांव चले.

उस की सासू मां उस से सब नई दुलहन वाले नेग करवा रही थी. जब उस ने अंदर प्रवेश किया तो वह चकित रह गई कि घर कितना बड़ा है. उसे घर नहीं हवेली, कोठी या महल ही कहना चाहिए.

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सारी जिंदगी फ्लैट में रहने वाली तुहिना ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उस की ससुराल का घर इतना विशाल होगा. मुख्य दरवाजे को पार कर बड़ा सा दालान था, उस के बाद एक बहुत बड़ा सा आंगन था. आंगन बीचोंबीच था और उस के चारों तरफ कमरे दिखाई दे रहे थे. आंगन और फिर दालान पार कर दो कोनों पर सीढ़ियां दिखाई दे रही थीं, वहीं तीसरे कोने में एक मंदिर था. एक तरफ जहां उसे सिर नवाने के लिए ले जाया गया, वहां उस ने देखा कि सासू मां बाहर ही रुक गईं और ससुर उन दोनों को देवताघर में ले गए.

घर के अंदर इतना सुंदर सा मंदिर, वहां एक पंडितजी भी बैठे हुए थे, जिन्होंने इन दोनों से कुछ पूजा, कुछ रस्म करवाई. फिर सासू मां तुहिना का हाथ पकड़ सीढ़ियों से ऊपर ले जाने लगीं, अंकुर को भी दुलारते हुए वे ले चलीं. तीसरे तले तक पहुंचतेपहुंचते तुहिना हांफ गई थी.

“दुलहन, ये तुम्हारा कमरा है. अब तुम आराम करो.“

कोई उस का सामान वहां पहले ही पहुंचा चुका था. वह कमरा कहने को था, था तो पूरा हाल. शायद महानगरों के बहुमंजिले इमारतों का एक ‘2 बेडरूम फ्लैट’ इस में समा जाए. कमरे से निकली बालकनी, जिस की रेलिंग पर बहुत सुंदर नक्काशीदार काम था. झरोखेनुमा खिड़कियां अलग मन मोह रही थीं.

तुहिना कमरे का मुआयना कर ही रही थी कि उस ने देखा अंकुर मां की गोदी में सिर रख लेट चुका था. मां उस का सिर सहलाते हुए कह रही थीं, “ये घर आज घर लग रहा है, वरना मैं अकेले एक कोने मे पड़ी रहती हूं. वर्षों से रंगरोगन नहीं हुआ था और न ही मरम्मत. जब शादी की खबर मिली, तो मैं ने झट मरम्मत का काम शुरू करवाया, पर इतना बड़ा घर, काम पूरा ही नहीं हुआ.

“मेरी इच्छा थी कि तेरी बहू को मैं साफसुथरे घर में ही उतारूंगी. उस भूतिया हो चुके घर में नहीं. अभी 2 दिन पहले ही तो मजदूरों ने अपने बांसबल्लियां यहां से हटाए हैं. बहू के आने से आज घर में मानो रौनक आ गई.”

“अच्छा तो ये राज है उस अचानक हनीमून पैकेज का,” तुहिना ने मुसकराते हुए सोचा.
फिर अंकुर की मां ने तुहिना को पास बुला कर चाबियों का गुच्छा थमाते हुए कहा, “लो संभालो अपनी जिम्मेदारी, अब मैं थक चुकी हूं. मैं ने वर्षों इंतजार किया कि कब अंकुर की बहू आएगी, जो ये सब घरगृहस्थी संभालेगी.“

उन के ऐसे बोलते ही तुहिना को मानो बिच्छू ने काट लिया. उस ने बेबसी से अंकुर की तरफ देखा. अंकुर ने उस के भाव समझते हुए कहा, “मां, ये बस आप ही संभाल सकती हैं. तुहिना नौकरी करती है, उसे छोड़ वह कहां इन सब झमेलों में रहने आएगी,” अंकुर ने मां को गुच्छा लौटाते हुए कहा.

“अच्छा, जब तक है तब तक तो संभाले, सबकुछ देखेसमझे,” कहती हुई वे चाबियां वहीं छोड़ कर चली गईं.

उस दिन तो थकान उतारने में ही बीत गया. अगले दिन तुहिना हवेली में घूमघूम कर देखने लगी सबकुछ. कौतूहलवश हर झरोखे से झांकती, हर खंबे के पास खड़ी हो सेल्फी लेती, तो कभी बंद दरवाजे की ही खूबसूरती को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करती. चाबी के गुच्छे को भी वह हैरानी से देखती. वैसे तालाचाबी तो अब दिखते भी नहीं. कम से कम तुहिना ने तो नहीं ही देखा था. हर कमरे पर बड़ा सा ताला लटका हुआ था. उस बड़े से ताले को देख उसे किसी लटके चेहरे वाले बूढ़े की याद आ रही थी. दीवाली में अभी 2 दिन और थे, पर घर तो उसी दिन से सजा हुआ था, जिस दिन से वे सब आए थे.

अंकुर देर तक सोता रहता और तुहिना को समझ आ रहा था कि अंकुर घर सिर्फ सोने और खाने ही आता है. शायद उसे भी सभी कमरों की कोई जानकारी नहीं थी.

“अंकुर उठो न… मैं बोर हो रही हूं, सुबह के 11 बजने को आए और तुम अभी भी उठ नहीं रहे,” तुहिना ने अंकुर को हिलाने का असफल प्रयास किया. हार कर वह चौके के दरवाजे को पकड़ कर खड़ी हो गई. वहां मम्मी खाना बनाने में बिजी थीं, सब की पसंद के पकवान बन रहे थे.

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“जब सब घर आते हैं तभी इस रसोई के भाग जागते हैं, वरना मैं उधर अपने कमरे में ही कुछ पका लेती हूं. अब सीढ़ियां भी तो चढ़ी नहीं जाती हैं. न… न बिटिया, तुम रहने दो, अपने घर पर तो करती ही होंगी, कुछ दिन यहां मेरे हाथ के खाने का स्वाद लो.

“जा बिटिया घूमोफिरो, अपने घर को देखोसमझो… अंकुर तो कभी देखता ही नहीं और न ही उस के बाबा. तुम संभाल लो तो मेरी जिम्मेदारी खतम हो,” तुहिना को हाथ बंटाने के लिए आते देख उन्होंने टोक दिया.

“बेटी, तुम किस्मत वाली हो, जो ऐसे सासससुर मिले तुम्हें,” तुहिना की मां फोन पर उसे बोलती.

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Serial Story: अहिल्या (भाग-1)

आज अरमानों के पूरे होने के दिन थे, स्वप्निल गुलाबी पंखड़ियों सा नरम, खूबसूरत और चमकीला भी, तुहिना और अंकुर की शादी का दिन.

ब्यूटीपार्लर में दुलहन बनती तुहिना बीते वक्त को यादों के गलियारों से गुजरती पार करने लगी.

वे दोनों इंजीनियरिंग फाइनल ईयर में दोस्त बने थे, जब उन दोनों की एक ही कंपनी में नौकरी लगी थी कैंपस प्लेसमैंट में. फिर बातें होनी शुरू हुईं, नई जगह जाना, घर खोजना और एक ही औफिस में जौइन करना. दोनों ने ही औफिस के पास ही पीजी खोजा और फिर जीवन की नई पारी शुरू की.

फिर हर दिन मिलना, औफिस की बातें करना, बौस की शिकायत करना वगैरह. कभीकभी शाम को साथ में नाश्ता करना या सड़क पर घूमना.

धीरेधीरे दोस्ती का स्वरूप बदलने लगा था. अब घरपरिवार की पर्सनल बातें भी शेयर होने लगी थीं. दोनों ही अपने परिवार में इकलौते बच्चे थे और दोनों के ही पिता नौकरीपेशा.

हां, तुहिना की मम्मी भी जहां एक कालेज में पढ़ाती थीं, वहीं अंकुर की मम्मी गांव की सीधी, सरल महिला थीं और वे गांव में ही रहती थीं. अंकुर के पिताजी शहर में अकेले ही रहते थे और अंकुर की छुट्टियां होने पर दोनों साथ ही गांव जाते थे. दोनों 4-5 दिनों के लिए ही जाते और फिर शहर लौट आते.

“तुम्हारी मम्मी साथ क्यों नहीं रहतीं?” तुहिना ने एक मासूम सा सवाल पूछा था.

“दरअसल, गांव में हमारी बहुत प्रोपर्टी है. सैकड़ों एकड़ खेत, खलिहान और गौशाला इत्यादि भी. फिर घर भी बहुत बड़ा है, जैसे पीजी में मैं अभी रह रहा हूं, वैसी तो हमारी गौशाला भी नहीं है. मां वहां रह कर सब की देखभाल करती हैं. सालभर तो एक न एक फसल काटने और रोपने की जिम्मेदारी रहती है. उन सब को कौन देखेगा, यदि मां शहर में आ जाएंगी. हमारे घर आने का तो वे बेसब्री से इंतजार करती हैं. आज भी वे छोटे बच्चे की ही तरह मुझे दुलारती हैं,“ अंकुर ने बताया था.

“अच्छा तो तुम खेतिहर बैक ग्राउंड से हो? मैं ने तो कभी गांव देखा नहीं. हां, मैं ने गांव फिल्मों में जरूर देखा है. दादादादी या नानानानी सब शहर में ही रहे हैं और मेरी अब तक की जिंदगी फ्लैट में ही कटी है,” तुहिना ने विस्फारित नयनों से कहा.

“अच्छा, शादी होने दो तो तुम भी गांव देख लेना, वो भी अपना वाला,” अंकुर ने हंसते हुए कहा, तो तुहिना चौंक गई, “शादी…? क्या तुम मुझे प्रपोज कर रहे हो? इस तरह भला कोई पूछता है?”

तुहिना ने आश्चर्यमिश्रित खुशी से चीखते हुए पूछा.

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“अब मैं ठहरा गांव का गंवई आदमी, मुझे इन बातों की ज्यादा समझ नहीं. पर, मैं बाकी जिंदगी तुम्हारे साथ ही रहना चाहूंगा, क्या हम शादी कर लें?” अंकुर ने तुहिना की हथेली को अपने हाथों में लेते हुए कहा.

ब्यूटीपार्लर में बैठी तुहिना के दिमाग में रील की तरह ये सब घूम रहा था. कितनी आननफानन में फिर सारी बातें तय हो गईं. नौकरी के एक साल होतेहोते दोनों शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं, यह सोच कर तुहिना रोमांचित हो रही थी. दोनों के ही घर वालों को कोई आपत्ति नहीं हुई थी.

तुहिना के मम्मीपापा तो यह सुन कर खुश ही हुए थे कि अंकुर की पृष्ठभूमि इतनी मजबूत है. अंकुर के पिताजी जो पटना में एक बैंक में काम करते थे, तुहिना से मिलने बैंगलुरु चले गए और तुहिना के मातापिता भी उसी वक्त बैंगलुरु जा कर उन लोगों से मिल लिए.

ऐसा लगा मानो सबकुछ पहले से तय हो, बस औपचारिकता पूरी करनी रह गई थी. अब बरात दिल्ली, तुहिना के घर कब आएगी, ये सब तय होना था.

तुहिना के मम्मीपापा जहां डरे हुए थे कि न जाने अंकुर के पिता की क्या मांग हो, कितनी दहेज की इच्छा जाहिर करेंगे, पर हुआ इस के ठीक उलट ही. उन्होंने ऐसी कोई भी मांग या विशेष इच्छा जाहिर नहीं की, बल्कि दो महंगे सेट भारीभरकम जड़ाऊ वाले तुहिना को आशीर्वाद में दिए.

तुहिना का मेकअप अब समाप्तप्रायः ही था, तुहिना ने जल्दी से अपना मोबाइल निकाला और 4-5 सेल्फी ली. बरात में गिनेचुने लोग ही आए थे और शादी में अधिक मेहमान तो तुहिना की ही तरफ के थे. महिलाएं तो एक भी नहीं आई थीं, क्योंकि अंकुर के गांव में महिलाएं बरात में नहीं जाती हैं, ऐसा ही कुछ उस के पिताजी ने बताया था.

शादी खूब अच्छी तरह से संपन्न हुई. विदा हो कर तुहिना उसी होटल में गई, जहां अंकुर के पापा ठहरे हुए थे. मोबाइल पर वीडियो काल पर अंकुर ने अपनी मां से उसे मिलवाया. सचमुच बेहद स्नेहिल दिख रही थीं उस की मां, बारबार उन की आंखें छलक रही थीं.

“मां, अब बस… हम तुम्हारे पास ही तो आ रहे हैं, तुम रोओ मत,“ अंकुर ने उन्हें भावविभोर होते देख कर कहा, तभी उस के पापा आ गए और काल समाप्त हो गई.

अंकुर के पापा बेहद खुश दिख रहे थे. उन्होंने बच्चों के सिर पर हाथ फेरा और एक लिफाफा पकड़ाया.

“लो बच्चो, ये तुम दोनों को मेरी तरफ से शादी का गिफ्ट, यूरोप का 15 दिनों का हनीमून पैकेज. कल सुबह ही निकलना है यहीं दिल्ली से, सो तैयारी कर लो.”

तुहिना और अंकुर आश्चर्यचकित रह गए,

“पर पापा, फिर मां से मिलना कैसे होगा? हम घूमने बाद में भी तो जा सकते हैं,” अंकुर ने आनाकानी करते हुए कहा.

“घूम कर सीधे गांव ही आ जाना. अभी शादी एंजौय करो. गांव में तुम लोग बोर हो जाओगे,” अंकुर के पापा बोले.

इस तरह अंकुर और तुहिना फिर यूरोप टूर पर निकल गए. 15 दिन कैसे गुजर गए, दोनों को पता ही नहीं चला, सबकुछ एक स्वप्न की तरह मानो चल रहा हो. लौट कर दोनों सीधे बैंगलुरु ही चले गए. इस तरह तुहिना अपनी सासू मां से नहीं मिल पाई. तय हुआ कि 2 महीने बाद दीवाली के वक्त गांव चल जाएंगे दोनों.

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2 महीने बाद जब तुहिना पहली बार गांव जा रही थी तो उसे अंदर ही अंदर बहुत घबराहट हो रही थी. जाने कैसी होंगी अंकुर की मां, वहां लोग कैसे होंगे या फिर गांव का घर कैसा होगा. बैंगलुरु से वे लोग पटना पहुंचे और वहां से अंकुर के पापा के साथ वे लोग सड़क मार्ग से गांव की ओर चल दिए. कोई तीन साढ़े तीन घंटों में वे लोग गांव पहुंच गए. रास्ते की हरियाली उस का मन मोह रही थी, बरसात बीत चुकी थी. पेड़पौधे, खेत सब चमकदार हरे परिधान पहन नई दुलहन का मानो स्वागत कर रहे थे.

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12 साल पूरे होते ही ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की इस एक्ट्रेस ने शो को कहा अलविदा, पढ़ें खबर

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच जहां कई सीरियल्स की शूटिंग शुरु हो चुकी है तो वहीं कुछ सीरियल्स बंद हो चुके हैं और कुछ सीरियल्स की कहानी में बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं. इसी बीच सब टीवी के पौपुलर शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ भी इन दिनों जमकर सुर्खियां बटोर रहा है. दरअसल दयाबेन यानी दिशा वकानी के बाद एक और एक्ट्रेस ने रातोंरात शो को अलविदा कह दिया है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

अंजली भाभी ने कहा शो को अलविदा

सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में नजर आने वाली अंजली भाभी यानी नेहा मेहता ने भी इस शो को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है. दरअसल, नेहा मेहता अब सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में नहीं नजर आएंगी. खबरों की मानें तो शूटिंग के शुरु होने के बाद से ही नेहा मेहता सेट पर नजर नहीं आई हैं. अब तक इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि नेहा मेहता ने अचानक सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का साथ क्यों छोड़ा है. लेकिन उनके शो छोड़ने से फैंस को बेहद झटका लगने वाला है.

 

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12 साल से हैं शो का हिस्सा

12 साल से सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का नेहा मेहता हिस्सा है, जिसमें वह शो के मेन किरदार तारक मेहता की पत्नी अंजली भाभी का किरदार निभा रही थीं. वहीं हाल ही में सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के सेट पर 12 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया था.

बता दें, इससे पहले दयाबेन यानी दिशा वकानी भी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को बीच छोड़ चुकी हैं, जिसके बाद फैंस को काफी दुख हुआ था. हालांकि  ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के मेकर्स कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें शो में वापस लाया जा सके.

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रिया चक्रवर्ती पर FIR के बाद बिहार पुलिस के सामने सुशांत की Ex अंकिता लोखंडे ने किया खुलासा, पढ़ें खबर

बौलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में नए-नए खुलासे होते जा रहे  हैं. जहां मुंबई पुलिस नेपोटिज्म का केस मानकर निर्माताओं से पूछताछ में  जुटी है. तो वहीं सुशांत के पिता की रिया चक्रवर्ती के खिलाफ एफआईआर कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है. लेकिन अब सुशांत सिंह राजपूत की एक्सगर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे के एक खुलासे ने इस केस के पत्ते खोलना शुरू कर दिया है. आइए आपको बताते हैं कि क्या कहना है अंकिता का सुशांत के सुसाइड को लेकर कहना…

रिया को लेकर किया खुलासा

सुशांत सिंह राजपूत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे ने बिहार पुलिस को रिया चक्रवर्ती से जुड़ी अहम बातें बताई है. खबरों की मानें तो अंकिता लोखंडे ने बिहार पुलिस के सामने खुलासा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत रिया चक्रवर्ती के साथ रिश्ते में खुश नहीं थे. वो इस रिश्ते से बाहर निकलना चाहते थे क्योंकि रिया उन्हें प्रताड़ित कर रही थी. दरअसल, अंकिता लोखंडे ने बताया कि उनकी डेब्यू फिल्म के वक्त सुशांत सिंह राजपूत ने उन्हें बधाई देने के लिए मैसेज किया था. इसी दौरान दोनों की बातचीत हुई थी और सुशांत सिंह राजपूत इमोशनल हो गए थे, जिसके चलते अंकिता के पूछने पर उन्होंने ये बातें कही थी.

 

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यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ, ज़िंदगी हम तिरे हाथों से न मारे जाएँ अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह, आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ वो जो मौजूद नहीं उस की मदद चाहते हैं, वो जो सुनता ही नहीं उस को पुकारे जाएँ हम कि नादान जुआरी हैं सभी जानते हैं, दिल की बाज़ी हो तो जी जान से हारे जाएँ… ~ अहमद फ़राज़ ❤️

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अंकिता लोखंडे ने किया ये पोस्ट

 

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सुशांत सिंह राजपूत ने रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाते हुए अदाकारा पर कई गंभीर आरोप लगाए है. जिसके बाद पटना पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है. इस बीच जैसे ही बिहार पुलिस रिया चक्रवर्ती को अरेस्ट करने के लिए पहुंची तो ‘जलेबी’ स्टार वहां से गायब मिली थी, जिसके बाद पुलिस रिया चक्रवर्ती की तलाश कर रही है. वहीं अंकिता लोखंडे ने एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, ‘सच जीतता है.’

बता दें, सुशांत के पिता के एफआईआर करने के बाद से रिया चक्रवर्ती परेशान हैं.  वहीं रिया चक्रवर्ती ने सबसे महंगे वकील सतीश मानशिंदे को भी हायर कर लिया है, जो एक दिन के लिए 10 लाख रूपए चार्ज करते हैं, जिसके बाद सुशांत के फैंस के मन में कई सवाल उठ रहे हैं.

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प्रोफेशनल रेसलिंग में जो थ्रिल है वह कहीं भी नहीं है- बैकी लिंच

रेबेका नौक्स उर्फ बैकी लिंच वर्तमान समय में डब्ल्यूडब्ल्यूई की सब से बेहतरीन महिला रेसलर्स में से एक हैं और उन्हें दबंग अंदाज के लिए जाना जाता है. वह एक पेशेवर आयरिश महिला पहलवान हैं. 5 फुट 6 इंच लंबी, रंगे हुए लाल बालों और मस्कुलर बदन वाली बैकी लिंच सेक्सी भी कम नहीं हैं. उन के लाल रंग के बाल, जानदार मुस्कान और अदायगी फैंस को काफी लुभाती है. जनवरी 1987 में डब्लिन, आयरलैंड में जन्मी बैकी की पर्सनैलिटी काफी आकर्षक है. बेकी लिंच एक्टिंग में भी हाथ आजमा चुकी हैं. टीवी सीरीज ‘वाइकिंग’ में उन्होंने एक छोटा किरदार निभाया था.

हालांकि बेकी लिंच का रेसलिंग करियर चोटों से बहुत प्रभावित रहा है. 2006 में गंभीर हेड इंजूरी की वजह से उन्हें कई सालों के लिए प्रोफेशनल रेसलिंग से दूर रहना पड़ा.  2012 में उन्होंने रेसलर के रूप में वापसी की और डबल्यू डबल्यू ई ज्वाइन किया.

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वर्ल्ड रेसलिंग एनटरटेनमेन्ट यानी डबल्यू डबल्यू ई सार्वजनिक तौर पर व्यवसाय करने वाली, निजी नियंत्रण वाली खेल मनोरंजन कंपनी है जो खासतौर पर प्रोफेशनल रेसलिंग यानी पेशेवर कुश्ती उद्योग में है. कंपनी के राजस्व का बड़ा भाग फ़िल्मों,संगीत उत्पादों की लाईसेंसिंग तथा उत्पादों की सीधी बिक्री से आता है. विन्स मैकमोहन कंपनी के सब से बडे हिस्से के मालिक और चेयरमैन हैं. इस के दफ्तर लॉस एंजिल्स और न्यूयौर्क सिटी में हैं.

डबल्यू डबल्यू ई के बिज़नस का फोकस पेशेवर रेसलिंग पर है. यह एक बनावटी खेल और प्रदर्शन कला है जो थियेटर में होने वाली कुश्ती के साथ मिल कर पूर्ण होती है. इस में मैच फिक्सिंग या बैटिंग वगैरह  नहीं होता. मौजूदा समय में यह दुनिया की सब से बड़ी पेशेवर रेसलिंग प्रोमोशन कंपनी है. डबल्यू डबल्यू ई के 3 ब्रांड हैं: रौ, स्मैक डाउन और ई सी डबल्यू.

खुद को ‘द मैन’ कहने वाली लिंच किसी भी स्थिति में झुकने का नाम नहीं लेती हैं. वह किसी से भी भिड़ जाने का दम रखती हैं. बैकी लिंच ने रैसलमेनिया 35 में 2019 रॉयल रंबल मैच जीत कर एक बार फिर से अपनी पहचान बनाई है. पेश है उन से की गई बातचीत के मुख्य अंश ;

सवाल- जीवन के इस मुकाम तक पहुंचने के क्रम में किन संघर्षों का सामना करना पड़ा ?

मैं अपने भाई के साथ अक्सर कुश्ती देखा करती थी. कुश्ती देखना मुझे बहुत पसंद था. मगर यदि आप रेसलर बनना चाहते हैं तो आप को इंग्लैंड, अमेरिका जैसी जगहों पर जा कर ट्रेनिंग लेनी जाना पड़ती है. मुझे आयरलैंड के प्रोफेशनल रेसलर फिन बैलर के स्कूल में सीखने का मौका मिला. संत एंड्रियूज नेशनल स्कूल में छोटे से हौल के फ्लोर पर सिर्फ 6 ब्लू मैट्स पर हम ने 3 माह तक रेसलिंग की. हम वहां हर संडे जाते और ट्रेनिंग लेते. इंग्लैंड जा कर समर कैंप करते जहां जिम में 8 से 9 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती.

सच कहूं तो शुरुआत में मेरा परफौर्मेंस बहुत बेकार रहता था. रेसलिंग मेरे लिए बहुत कठिन था. मैं एक एथलीट थी. मगर स्वभाव से मैं बहुत टफ थी. रेसलिंग भले ही मेरे लिए नया था मगर मैं इस में चैंपियन बनना चाहती थी. मुझे याद है एक ऐसा समय भी आया था जब रोते हुए मैं ने फिन बेलर से कहा था कि मैं लड़कों जैसा रेसलिंग करना चाहती हूँ. उन्होंने कहा कि वे मुझे ऐसा ही बनाने का प्रयास कर रहे हैं. रेसलमेनिया के बाद मैं वैकेशन पर भी नहीं गई. मुझे रेसलिंग का बिजनेस पसंद है और मैं चाहती हूं कि लोग भी इसी तरह पसंद करें.

सवाल- आप की स्ट्रांग पर्सनैलिटी का राज क्या है ?

मैं हमेशा से ही बहुत बोलने वाली और अपनी बात रखने वाली लड़की रही हूं. मैं कुछ भी बोलने से हिचकती नहीं थी. पापा ने भी मुझे कभी रोका नहीं. मैं बचपन से ही टफ रही हूँ. शायद यही वजह है कि मेरी पर्सनैलिटी ऐसी है. इस खूबी के कारण ही मुझे द मैन का तमगा मिला और मैं ने इसे भरपूर जीने का प्रयास किया है.

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सवाल- जीवन का कोई पल जिसे आप दोबारा जीना चाहती हैं?

मेरा पसंदीदा मैच शेर्लोट फ्लेयर के साथ लास्ट वुमन स्टैंडिंग मैच एट आल वुमंस इवोलुशन पे पर व्यू   इसे मैं दोबारा जीना चाहूंगी.

सवाल- जो लड़कियां आप के नक्शेकदम पर चलना चाहती हैं उन के लिए टिप्स क्या देना चाहेंगी?

कड़ी मेहनत करें और अपना काम बखूबी करते रहे. यह हर तरह से आप को बेहतर बनाएगा. अपनी फिटनेस, बोलने की क्षमता, रिंग के अंदर और बाहर भी दूसरों से कनेक्ट होने की क्षमता आदि पर काम करना कभी भी न छोड़े. आप को ट्रैवल करना चाहिए और इस से जितना हो सके उतना अनुभव जुटाने का प्रयास करना चाहिए. जितना संभव हो उतने रेसलिंग मैचेस देखे. इस गेम के बारे में पढ़ें. दूसरे एथलीटस की जिंदगी के बारे में जाने. मेरे बारे में जाने. समझने का प्रयास करें कि हम सब ने कैसे सफलता पाई. खुद पर विश्वास करना भी कभी न छोड़े.

सवाल- आप की भविष्य की योजनाएं क्या है?

इस बदलती दुनिया में जैसेजैसे चीजें मेरे सामने आती हैं वैसे ही मैं उन्हें स्वीकार कर लेती हूं और आगे भी ऐसा ही करूंगी. फिलहाल मैं अपने करियर पर फोकस करूंगी और अपने डब्ल्यूडब्ल्यूई के प्रोफेशनल रेसलिंग को और बेहतर बनाने का प्रयास करूंगी.

सवाल- घर वालों का कितना सपोर्ट मिलता है ? घर में और कौनकौन है ?

मेरी माँ को यह गेम उतना पसंद नहीं. वह थोड़ी कंजरवेटिव नेचर की है और शायद उन्हें मेरा यह सब करना उतना पसंद नहीं आता. मगर जैसेजैसे वह मुझे इस मुकाम तक पहुंचते हुए देख रही है तो उन्हें एहसास हो रहा है इस गेम ने मेरा जीवन कितना बदल दिया है. मेरे पापा ज्यादा कुछ नहीं कहते मगर मुझे प्रोत्साहित करते हैं. वे मेरे सोशल मीडिया एक्टिविटीज पर ज्यादा ध्यान नहीं देते.

सवाल- आप को मोटिवेशन किस से मिलता है ?

कितने लोग ऐसे हैं जिन्होंने मुझे उस वक्त मदद की जब मैं खुद पर ही विश्वास नहीं कर पा रही थी. जैसे कि सेठ रोलिंस ने मेरी बहुत मदद की. एक समय था जब मैं लगातार एक स्टार बिल्डर यानी ऐसा व्यक्ति थी जिसे किसी और को अच्छा दिखाने के लिए उपयोग में लाया जाता है. उस दौरान मेरी उपस्थिति के कोई मायने नहीं थे. पर मुझे खुशी और गर्व है कि मैं ने बहुत से लोगों को गलत साबित कर दिया.

सवाल- अपनी ट्रेनिंग के बारे में डिटेल में बताइए.

मैं किसी भी इवेंट पर जाने से पहले खुद को एकाग्र करती हूं. संभव होता है तो सुबह में इस के लिए योगा करती हूं. फिर यह लिखने का प्रयास करती हूं कि मैं उस मैच को कैसे होता हुआ देखना चाहती हूं और फिर उसे विजुलाइज भी करती हूं. सामान्यतया यह सब मैं मैच से पहले वाली रात में करती हूं. जहां तक बात एक्सरसाइज की है तो मैं सप्ताह में 5-6 बार क्रौसफिट और जब मौका मिले तब योगा करती हूं. रिंग के अंदर और बाहर दोनों ही तरह की ट्रेनिंग जरूरी है.

सवाल- आप ने एक्ट्रेस के रूप में भी काम किया है. उस प्रोफेशन को छोड़ कर रेसलर बनने की वजह क्या थी?

भले ही मैं ने फिल्मों में काम किया हो मगर रेसलिंग हमेशा से मेरे जीवन का हिस्सा रहा है. मैं चाहती थी कि डब्ल्यूडब्ल्यूई से वापस आ कर अपने साथी रेसलर्स के साथ कम्पीट करूं. प्रोफेशनल रेसलिंग में जो थ्रिल है वह कहीं भी नहीं है. लाखों लोगों के सामने हर  वीक जा कर आप खुद को फिजिकली और मेंटली टेस्ट करते हैं. मुझे लगता है यह सब से कठिन इंडस्ट्री है.

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एक माह के लिए मै सिर्फ 3 घंटे की नींद पर रह चुकी हूं. टूर करते हुए अपीयरेंस के लिए तैयार रहना, टीवी पर आना ,हमेशा अपना जबरदस्त परफौरमेंस दिखाना वरना आप पीछे रह जाओगे, यह सब आसान नहीं. मगर यही तो इस गेम का फन है. यह एक खूबसूरत आर्टफौर्म है.

सवाल- एक पल जिस ने आप की जिंदगी/ करियर को बदल दिया ?

मुझे लगता है यह रैसलमेनिया 35 जीतना और इस साल डबल चैंपियन का खिताब अपने नाम करना ही था. मैं बता नहीं सकती कि उस दिन मैं क्या महसूस कर रही थी और कितनी खुश थी. मैं ने पूरी जिंदगी इस का सपना देखा था.

बेवफा पति: जब रंगे हाथ पकड़े पत्नी

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. इस वीडियो में एक महिला अपने पति को रंगे हाथों दूसरी के साथ पकड़ लेती है और फिर उस का जो रिएक्शन होता है वह देखने लायक है.

दरअसल उस महिला को शक था कि उस के पति का किसी के साथ अफेयर चल रहा है. इस वजह से उस ने अपने पति की गाड़ी का पीछा किया और मुंबई के पेडर रोड पर पति की रेंज रोवर गाड़ी को रोक दिया. गाड़ी में पति के साथ उस की प्रेमिका बैठी हुई थी. यह दृश्य देख कर महिला आपे से बाहर हो गई. अपनी गाड़ी पति की कार के आगे लगा कर वह पागलों की तरह चीखनेचिल्लाने लगी. गाड़ी के शीशे पीटने लगी. वह कार के बोनट पर चढ़ गई और जूते से कार के शीशे पर मारने लगी.

उस की इन हरकतों का अंजाम यह हुआ कि सड़क पर अच्छाखासा जाम लग गया. महिला का पति जब बाहर निकला तो महिला ने उस पर हमला कर दिया. मारपीट की नौबत आ गई. सड़क पर तमाशा बनता देख वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिस ने चालान काटा और गाड़ी के साथ उन तीनों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया. शांति भंग करने के लिए महिला को तलब किया गया.

इस सारी वारदात में गलती किस की है? पति को इस तरह तमाशा बन कर क्या मिला और उस महिला को भी बाद में अपनी इस वीडियो को देख कर क्या शर्म नहीं आ रही होगी?

सच तो यह है कि पति और पत्नी का रिश्ता बहुत ही निजी और कोमल होता है. आप अपने संबंधों की हकीकत सड़क पर लाएंगे तो तमाशा आप का ही बनेगा. सच यह भी है कि कोई भी महिला अपने पति को दूसरी औरत के साथ देखना बर्दाश्त नहीं कर सकती.

सालोंसाल जिस रिश्ते को उस ने अपना सब कुछ दिया, जो पति रोज उस के पास आता है, हमबिस्तर होता है और प्यार की बातें करता है, जिस पति और बच्चों के लिए उस महिला ने अपने शरीर और सुंदरता की चिंता छोड़ दी, जिस घर को सजाने में वह दिनरात लगी रहती है. यदि अचानक वही पति बेवफा निकले, घर छूटता हुआ और रिश्ता टूटता हुआ दिखे तो महिला की मानसिक स्थिति कैसी होगी इस की कल्पना कोई भी कर सकता है.

क्या बीतता है महिला के मन पर

सोशल वर्कर और साइकोलॉजिस्ट अनुजा कपूर कहती हैं कि जब स्त्री अपने पति को रंगे हाथों पकड़ती है तो सब से पहले तो एक अधूरापन उस के दिलोदिमाग पर हावी हो जाता है. वह सोचती है कि आखिर ऐसी क्या कमी रह गई थी जो पति को दूसरी की जरूरत पड़ गई.

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पति के साथ गुजारे हुए पुराने लम्हे उस के जेहन में उभरने लगते हैं. उसे याद आते हैं वे पल जब वह पति की बाहों में समा कर दुनिया जान भूल जाया करती थी. अब उसी पति की यादें उसे डंक की तरह चुभने लगती है.

महिला को भविष्य की चिंता भी सताने लगती है. घर टूटता हुआ दिखता है. बच्चे का भविष्य डगमगाता नजर आता है. उसे महसूस होता है जैसे वह पति के लिए महत्वपूर्ण नहीं रह गई. एक दूसरी औरत बन गई है. उस का आत्मविश्वास टूटने लगता है. असुरक्षा की भावना घर करने लगती है.

वह आगे की बात भी सोचती है कि उसे क्या फैसला लेना चाहिए. क्या वह तलाक लेगी? क्या अब उसे भी लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौर से गुजरना पड़ेगा? उस की आर्थिक जरूरतें कैसे पूरी होंगी? यदि उस ने तलाक नहीं लिया तो क्या वह घरेलू हिंसा का शिकार बन जाएगी?

क्यों आती है यह परिस्थिति

कभी कभी महिला इस स्थिति के लिए खुद ही जिम्मेदार होती है. वह पति को जीवनसाथी कम और ड्राइवर, पैसे कमाने की मशीन या सेक्स ऑब्जेक्ट अधिक समझने लगती है. कई बार स्त्री की कुछ कमियां जैसे अधिक बोलना, गंदा रहना या फिर बेवकूफी वाली हरकतें करना और चौकेचूल्हे में सिमटे रहने की आदत पति के मन में विरक्ति पैदा करती है. ऐसे में दूसरी औरतों की तरफ उस का रुझान बढ़ जाता है.

यही नहीं पुरुषों को जब अपनी पत्नी में सेक्स अपील, खूबसूरती या कंफर्ट जोन की कमी दिखती है तो वे दूसरी औरतों की तरफ आकर्षित होते हैं. वे दूसरी औरत में अपनी महबूबा, हमराज या दोस्त तलाशते हैं.

नतीजा सुखद नहीं होता

दूसरी औरत की तरफ आगे बढ़ने वाले पुरुषों को खतरनाक परिणाम भुगतने पड़ते हैं. कभी न कभी असलियत पत्नी और परिवार वालों के आगे खुल ही जाती है. इस तरह पुरुष अपने ही घर में आग लगा लेते हैं. अपनी गृहस्थी जला बैठते हैं. मांबाप, रिश्तेदार और दोस्तों के आगे एक तरह से नंगे हो जाते हैं. अपने ही बच्चों की नजरों में गिर जाते हैं. दूसरी स्त्री उसे संभाल लेगी इस बात की कोई गारंटी नहीं होती. वे कानूनी प्रक्रिया के मकड़जाल में उलझ कर रह जाते हैं. मैंटेनेंस और कंपनसेशन के तौर पर एक लंबीचौड़ी रकम से हाथ धो बैठते हैं.

एक पुरुष जब पत्नी की कमी दूसरी औरतों से पूरा करने का प्रयास करता है तो दूसरी औरत के साथ बेशर्मी और नंगापन भी विरासत या दहेज़ के रूप में उस के जीवन में प्रवेश करते हैं. जब कोई पुरुष अपनी लक्ष्मण रेखा पार करता है तो एक तूफान आता है और हमेशा के लिए उस की जिंदगी में सन्नाटा पसर जाता है. उसे इस अवैध रिश्ते को खुद के आगे, मांबाप के आगे, जज और बच्चों के आगे जस्टिफाई करना पड़ता है.

स्पाइस ऑफ मैरिड लाइफ

दरअसल पुरुष की जिंदगी में दूसरी औरत तब आती है जब उस की जिंदगी से मैरिड लाइफ में मौजूद स्पाइस खत्म हो जाता है. यानी पतिपत्नी के रिश्ते के बीच में आकर्षण और चार्म नहीं रह जाता. पुरुष इसी स्पाइस को बाहर ढूंढने लगता है और जब वह इस कोशिश में अपनी लक्ष्मण रेखा लांघता है तो फिर दोबारा लौट कर नहीं आ पाता. एक बार बेवफाई साबित हो जाने पर स्त्री दोबारा पति पर विश्वास नहीं कर पाती. रिश्ते में जो दरार आती है वह दोबारा भर नहीं पाती.

स्त्री को लगता है कि जिस पुरुष के लिए उस ने इतना कुछ किया, अपना शरीर, जवानी ,करियर, वक्त सबकुछ दांव पर लगा दिया वही पति अब खूबसूरती और जवानी की तलाश में दूसरों के पास जा रहा है. यह जो थप्पड़ महिला के मुंह पर पड़ता है वह उसे बर्दाश्त नहीं कर पाती और डिप्रेशन में चली जाती है. सुसाइड तक करने की नौबत आ जाती है.

कुछ भी हासिल नहीं होता

ऐसी घटनाओं के बाद घर टूट जाते हैं. दुनिया में तमाशा बन जाता है. पतिपत्नी दोनों के ही जीवन से सुख, शांति और सुकून पूरी तरह गायब हो जाते हैं. बच्चों का भविष्य अधर में लटक कर रह जाता है.

बुढ़ापे में अकेलापन

बेवफाई का असली खामियाजा बाहर मुंह मारने वाले साथी को साठ साल की उम्र के बाद झेलना पड़ सकता है. इस उम्र में इंसान का शरीर थकने लगता है. ऐसे में पैसे या शारीरिक सुख के आधार पर बनाए गए रिश्ते काम नहीं आते. इस वक्त इंसान को सच्चे साथी और हमदर्द की जरूरत होती है और सच्चा साथी पत्नी से बढ़ कर कोई नहीं हो सकता. मगर बेवफा पुरुष के पास पत्नी नहीं होती. बच्चे भी मुंह मोड़ चुके होते हैं. इस वक्त कोई उस के साथ नहीं होता और उसे अकेलापन सालने लगता है. पश्चाताप की भावना मुखर हो उठती है. ऐसे में उस के ऊपर यह कहावत सटीक बैठती है , अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत..

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समय रहते करें चिंतन

ऐसे हालात लाने से बेहतर है कि पुरुष यह समझे कि यदि यही काम उस की पत्नी करती तो क्या वह उसे बर्दाश्त कर पाता?पुरुष को चाहिए कि यदि उसे पत्नी में कोई कमी दिख रही है तो ऐसी बात सीधा अपनी पत्नी से कहे. परिवार वालों से सलाह ले. मैरिज काउंसलर के पास जाए. न कि उस कमी की पूर्ति बाहर करने का प्रयास करें.

समस्या कोई भी हो पहले उसे सुलझाने का प्रयास करना चाहिए

पुरुषों को यह समझना पड़ेगा कि बेवफाई का रास्ता बहुत गंदा और नंगा है जिस पर चल कर कुछ हासिल नहीं होता. इसी तरह स्त्री को भी ध्यान में रखना चाहिए कि वह बच्चों, चौकाचूल्हा और गृहस्थी में इतनी व्यस्त न हो जाए कि पति को भुला बैठे.

पति की जरूरतों का भी ख़याल रखें. खुद को हमेशा फिट और स्मार्ट बनाएरखने का प्रयास करें. पति की महबूबा बनें न कि मजबूरी. साफ़ सुथरी, स्मार्ट महिलाएं सब को पसंद आती हैं. लटकीझटकी बहनजी टाइप की महिला न बनें. अपने ऊपर भी ध्यान दें और अपनी रोमांटिक लाइफ पर भी काम करती रहें.

Raksha Bandhan 2020: प्रैगनैंसी में मेकअप के साइड इफैक्ट्स

खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप करना जरूरी है, मगर प्रैगनैंसी यानी गर्भावस्था के दौरान मेकअप करने में कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि इस समय आप को अपना सब से ज्यादा खयाल रखने की जरूरत होती है. इस समय आप किसी भी तरह का रिस्क नहीं ले सकती हैं. इस का कारण यह है कि ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने में कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, जो आप की त्वचा से अंदर जा कर आप के पेट में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

प्रैगनैंसी के दौरान इन सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करने से बचना चाहिए:

डियो या परफ्यूम: प्रैगनैंसी के दौरान ज्यादा खुशबू वाले प्रोडक्ट्स जैसेकि डियो, परफ्यूम, रूम फ्रैशनर आदि का इस्तेमाल कम करें या फिर करें ही नहीं. मार्केट में मौजूद ज्यादातर डियो में हानिकारक कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा के अंदर प्रवेश कर आप या आप के होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन से शिशु के हारमोंस में गड़बड़ी पैदा हो सकती है.

लिपस्टिक: इस का इस्तेमाल अमूमन हर महिला और युवती करती है. लेकिन प्रैगनैंट महिला को लिपस्टिक लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए बेहतर होगा. लिपस्टिक में लेड होता है, जो खानेपीने के दौरान शरीर के अंदर चला जाता है. शरीर में लेड भ्रूण के विकास में बाधा बन सकता है या उस में और कई परेशानियां पैदा कर सकता है. अत: इस के प्रयोग से बचें.

टैटू: टैटू आजकल युवा लड़केलड़कियों में काफी ट्रैंडी है. प्रैगनैंसी के समय या उस की प्लानिंग कर रही हैं, तो टैटू न गुदवाएं वरना वह आप के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि टैटू कई बार इन्फैक्शन का कारण भी बनता है. टैटू बनाने में प्रयोग किए जाने वाले कैमिकल्स भी त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते हैं. इसलिए इस दौरान टैटू बनवाने से परहेज करें.

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सनस्क्रीन मौइश्चराइजर: अमूमन महिलाएं सनस्क्रीन लगाए बिना बाहर नहीं निकलतीं, मगर प्रैगनैंट महिला इस का प्रयोग कम करे या हो सके तो बाहर निकलना कम कर दे.  ज्यादातर सनस्क्रीन में रैटिनील पामिटेट या विटामिन पामिटेट होता है. ये तत्त्व धूप के संपर्क में आने पर त्वचा से रिएक्शन करते हैं. लंबे समय तक इस्तेमाल करने से कैंसर का कारण भी बनते हैं. इसलिए गर्भावस्था के दौरान सनस्क्रीन के इस्तेमाल से पहले चैक कर लें कि आप जो सनस्क्रीन इस्तेमाल करने जा रही हैं उस में ये दोनों तत्त्व मौजूद तो नहीं हैं.

हेयर रिमूवर क्रीम: ऐसे तो अभी तक यह सिद्ध नहीं हुआ है कि प्रैगनैंसी के समय हेयर रिमूवर क्रीम इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए, पर यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस में थियोग्लाइकोलिक ऐसिड पाया जाता है, जो गर्भावस्था में हानिकारक साबित हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के हारमोंस परिवर्तन होते हैं, जिन के कारण कैमिकल युक्त हेयर रिमूविंग क्रीम का इस्तेमाल करने से त्वचा में ऐलर्जी भी हो सकती है और होने वाले बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए खुद की और होने वाले बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस का इस्तेमाल न करें. इस की जगह किसी नैचुरल हेयर रिमूवर क्रीम का इस्तेमाल कर सकती हैं.

नेल केयर: प्रैगनैंसी के दौरान नेल प्रोडक्ट्स का प्रयोग भी न करें, क्योंकि इन के अंदर मौजूद जहरीले पदार्थ आप के होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं. एक शोध में पाया गया है कि नेल केयर प्रोडक्ट्स के निर्माण से जुड़ी कंपनियों में काम करने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा. कई महिलाओं का भू्रण विकास धीमा रहा तो कुछ में जन्म के बाद भी बच्चे के विकास में धीमी गति पाई गई.

फेयरनैस क्रीम: अगर आप किसी भी फेयरनैस क्रीम का प्रयोग करती हैं, तो इस दौैरान इस के प्रयोग से बचें, क्योंकि इस का प्रयोग आप और होने वाले बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है. इस में हाइड्रोक्यूनोन नाम का एक कैमिकल मिलाया जाता है जो जन्म से पहले शिशु के ऊपर गलत प्रभाव डाल सकता है, इसलिए गोरा करने वाली क्रीम प्रैगनैंसी के दौरान बिलकुल यूज न करें.

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एक शोध के मुताबिक जो महिलाएं प्रैगनैंसी के दौरान बहुत अधिक मेकअप का इस्तेमाल करती हैं, उन में समय से पहले प्रसव होने की आशंका बढ़ जाती है यानी प्रीमैच्योर बेबी. इस के अलावा इस से शिशु के वजन और आकार पर भी असर पड़ता है.

पैरामेडिकल में करियर: एक सुनहरा भविष्य

अगर आपकी रुचि मेडिकल क्षेत्र में है और लोगों की सेवा करने से खुशी मिलती है तो पैरामेडिकल एक बेहतर विकल्फ हो सकता है. पैरामेडिकल स्टॉफ, इलाज में डॉक्टर्स की मदद करते हैं. साथ ही मरीजों के रोगों की पहचान करने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए सरकारी/प्राइवेट हॉस्पिटल से लेकर नर्सिंग होम, क्लीनिक, लैब्स और चिकित्सा विज्ञान के दूसरे तमाम क्षेत्रों में इनकी डिमांड बढ़ती जा रही है. इसके अलावा पैरामेडिकल स्टॉफ इमरजेंसी मेडिकल केयर प्रोवाइडर के रूप में भी काम करते हैं.
इस क्षेत्र में ये हैं प्रमुख करियर संभावनाएं

लैब टेक्नोलॉजी

इस क्षेत्र में लैब टेक्नोलॉजी यानी क्लीनिकल लेबोरेटरी साइंस का नाम सबसे पहले नंबर पर आता है. इसमें टेक्नीशियन और टेक्नोलॉजिस्ट दो तरह के प्रोफेशनल होते हैं. मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट का काम ब्लड बैंकिंग, क्लीनिकल टेक्नोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, हेमैटोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित काम करना है. जबकि मेडिकल टेक्नीशियन लैब में रूटीन टेस्ट का काम देखते हैं.

रेडियोग्राफी

रेडियोग्राफी भी पैरामेडिकल से जुड़ा है. इसमें रेडिएशन के सहारे उन छिपे हुए अंगों की तस्वीरें ली जाती हैं जो दिखती नहीं है और कई शारीरिक विकारों को सामने लाया जाता है. अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि इसी क्षेत्र से संबंधित है. पैरामेडिकल कोर्स करने के बाद आप भी रेडियोग्राफर बन सकते हैं.

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ऑप्टोमेट्री

इस प्रोफेशन में आंखों का परीक्षण और उनकी देखभाल की जाती है. जैसे- आंखों के प्रारंभिक प्रॉबलम्स के लक्षण, लेंस का समुचित प्रयोग आदि.

माइक्रोबायोलॉजी

पैरामेडिकल क्षेत्र में माइक्रोबायोलॉजी टेक्नोलॉजी को बेहद महत्तवपूर्ण माना जाता है. इसमें टेक्नोलॉजिस्ट की मदद से सही तरीके से रोग की पहचान और दवाओं के जरिए बीमारी का इलाज किया जाता है.

फिजियोथेरेपी

बदलती लाइफस्टाइल की वजह से आज इस क्षेत्र की मांग बढ़ती जा रही है. फिजियोथेरेपी में व्यायाम या उपकरणों के जरिए रोगों का इलाज किया जाता है. वहीं आर्थराइटिस व न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होने पर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद ली जाती है. जिसमें हीट रेडिएशन, वाटर थेरेपी और मसाज आदि को शामिल किया जाता है.

ऑक्युपेशनल थेरेपी

इसमें न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर, स्पाइनल कार्ड इंजुरी का इलाज किया जाता है. इसके अलावा कई तरीके के शारीरिक व्यायाम कराए जाते हैं.

स्पीच थेरेपी

इस थेरेपी में हकलाना, तुतलाना और सुनने की क्षमता जैसी अन्य कई समस्याओं का इलाज किया जाता है.

कैसे लें एडमिशन

बारहवीं करने के बाद आप इस क्षेत्र में दाखिला ले सकते हैं. इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी व अंग्रेजी में अच्छे अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा पास करनी होगी. पैरामेडिकल के कुछ कोर्स में एडमिशन के लिए 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य होते हैं. हालांकि कुछ कोर्सेज में 10वीं के बाद भी एडमिशन होता है. वहीं मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन के लिए बायोलॉजी से ग्रेजुएट होना जरूरी है.

भारत में सभी मेडिकल कॉलेज मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किए जाते हैं. पैरामेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए छात्र CPNET यानी संयुक्त पैरामेडिकल एंड नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में भाग ले सकते हैं. यह फॉर्म हर साल अप्रैल-मई में निकलता है. इसके अलावा आप जिपमर (JIPMER), नीट-पीजी (NEET-PG), एमएचटी सीईटी (MHT-CET), नीट-यूजी (NEET-UG) और प्राइवेट व सरकारी कॉलेजों में भी डायरेक्ट एडमिशन ले सकते हैं.

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कहां लें एडमिशन (प्रमुख संस्थान)

-ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली www.aiims.edu
-ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फिजिकल मेडिसिन ऐंड रिहैबिलिटेशन, मुंबई www.aiipmr.gov.in
-राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, बेंगलुरु www.rguhs.ac.in
-हिप्पोक्रेट्स इंस्टीट्यूट्स ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज ऐंड रिसर्च www.hipsr.in
-बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (फैकल्टी ऑफ साइंस), वाराणसी www.bhu.ac.in

कहां मिलेगी नौकरी

जॉब की बात करें तो पैरामेडिकल क्षेत्र में कोर्स करने के बाद फिजियोथेरेपी, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे जैसे काम किए जाते हैं. वहीं इमरजेंसी सेंटर, ब्लड डोनेशन सेंटर, डायग्नोसिस सेंटर, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, मेडिसिन लैब, क्लीनिक जैसी जगहों पर काम किया जा सकता है. इसके अलावा विदेश में भी काफी मौके हैं.

कितनी मिलेगी सैलरी

शुरूआती पैकेज दो से पांच लाख सलाना हो सकता है. धीरे-धीरे अनुभव और योग्यता के हिसाब से यह बढ़ता जाता है. इसके अलावा प्राइवेट लैब/ पैथोलॉजी भी खोल सकते हैं.

मेडिकल क्षेत्र में व्यवसाय

अगर आप आर्थिक रूप से सम्पन हैं तो मेडिकल क्षेत्र में महज 3 से 5 लाख रुपए के खर्च कर फ्रेंचाइजी बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं. फ्रेंचाइजी लेने के लिए आपको पहले उस कंपनी के आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. आप उक्त कंपनी को मेल भी कर सकते हैं.

कैसे मिलेगा लाइसेंस

कोर्स पूरा करने के बाद अगर आप इस क्षेत्र में बिजनेस शुरू करान चाहते हैं तो शुरुआत में Proprietorship इकाई के तौर पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के साथ रजिस्टर करवा सकते हैं. इसके अलावा प्राइवेट क्लीनिक/ लैब को स्थानीय नियमों के मुताबिक भी रजिस्टर करवाना पड़ता है, जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकते हैं.

इस बिजनेस को Shops and Establishment Act and Clinical Establishment के तहत रजिस्टर करवाना भी जरूरी होता है. इसके अलावा इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए राज्य के Director of Health Services और Local Biomedical Waste Disposal Body में भी रजिस्टर करने की जरूरत हो सकती है. वहीं राज्य के प्रदूषण नियंत्रण विभाग से स्वीकृति, नगर पालिका और नगर परिषद से No objection certificate की भी जरूरत हो सकती है.

इसके अलावा आप चाहें तो गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अपनी पैथॉलॉजी लैब को National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories (NABL) से मान्यता दिला सकते हैं. इसके अलावा कुछ रजिस्ट्रेशन ऐसे भी होते हैं जो लैब में उपयोग होने वाले मेडिकल मशीनरी एंव उपकरणों को ध्यान में रखते हुए करवाने पड़ते हैं.

नोट: ज्यादा जानकारी के लिए गवर्मेंट की वेबसाइट http://paramedicalcouncilofindia.org  पर जा सकते हैं.

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