डोनेशन की राशि का सही उपयोग होना जरुरी – बानी दास

कोविड 19 की वजह से लॉकडाउन का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है, पर इसे लागू करने के बाद दूर दराज से आने वाले मरीज और उनके परिजनों को काफी समस्या आ रही है. भारत में लगातार कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे है और उनके इलाज के लिए सरकार काम कर रही है, लेकिन कोरोना वायरस से पीड़ित रोगी को छोड़कर बाकी लोग जो कैंसर या अन्य बीमारी से पीड़ित है, जिनके परिजन अस्पतालों में या तो इलाज करवा रहे है या फिर इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है, पर लॉकडाउन होने की वजह से वे घर नहीं जा पाए है. ये साधारण लोग अस्पताल के बाहर सोने, नहाने, बिना पानी और भोजन के रहने के लिए विवश है, ऐसे ही परिजनों की सेवा में लगी एनजीओ क्रांति की को फाउंडर बानी दास बताती है कि क्रांति पिछले 10 सालों से सेक्स वर्कर की लड़कियों को शिक्षा देने और उन्हें सहयोग देने की दिशा में काम कर रही है. लॉक डाउन होने से उनके पास सारी लड़कियां जो अलग-अलग राज्यों में पढाई कर रही थी, सभी मुंबई संस्था में आ गयी. अख़बारों और न्यूज़ में लगातार कोविड 19 के समाचार आ रहे रहे थे, ऐसे में मुझे मुंबई की वर्ली स्थित टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की याद आई, क्योंकि पिछले साल मेरी एक रिश्तेदार को लेकर टाटा हॉस्पिटल इलाज़ करवाने गयी थी, वहां साधारण परिवार के लोग अपने मरीज के साथ दूसरे शहर या राज्य से आते है और हॉस्पिटल के बाहर खाना खाते है और छोटे कमरे में रहते है, लेकिन लॉक डाउन के चलते ये सुविधाएं बंद है. जवान और कम उम्र की महिलाएं और लड़कियां अस्पताल के बाहर कोरिडोर पर रातें गुजार रही है. जो लोग अस्पताल के अंदर एडमिट है उनके लिए सब व्यवस्था है, लेकिन जो परिजन उनके साथ आये है, उनके लिए कोई व्यवस्था प्रसाशन या किसी संस्था के द्वारा नहीं किया गया है. केवल एक बार कुछ समय के लिए उन्हें मरीज के साथ मिलने दिया जाता है. मैंने एक दिन केवल 3 लड़कों ने थोडा खाना देते हुए देखा बाद में मैंने किसी को नहीं देखा.

ये भी पढ़ें- प्रैग्नेंसी के बाद नौकरी पर तलवार

बानी आगे कहती है कि असल में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल जहां पूरे देश से हजारों की संख्या में मरीज कैंसर का इलाज करवाने आते है और 70 प्रतिशत मरीज़ ठीक होकर फोलोअप के लिए आते रहते है, ऐसे में ऐसी लॉक डाउन से उनके परिवार जन को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. उनके लिए प्रसाशन की तरफ से कोई सुविधा नहीं है. मैं जब वहाँ उनका हालचाल देखने गयी तो पता चला कि लोगों को कुछ दिनों से भरपेट खाना और पानी नहीं मिला है. उनके पास पैसे है ,पर दुकाने बंद है. नहाने और टॉयलेट के लिए उन्हें रोज 20 रुपये देने पड़ते है, जिसमें उन्हें साबुन भी नहीं मिलता और दुकाने भी खुली नहीं है कि वे उसे खरीद सकें. हाईजिन के नाम पर कुछ भी नहीं है. ये सारे लोग दूसरे शहरों के है, इसलिए उन्हें कुछ अधिक पता भी नहीं है. अस्पताल परिसर भी उनको अंदर जाने नहीं देती. ट्रेन नहीं है कि वे अपने घर जा सकें,ऐसे में मैंने उन्हें भोजन देने का निश्चय किया. भोजन लेकर जब मैं वहां गयी तो वहां दो महिला ने खाना लेने से मना किया और पानी की मांग की, क्योंकि वहां एक पेट्रोल पम्प में दिन में एक बार पानी दिया जाता है. अगर किसी कारणवश वे पानी नहीं भर पाती है, तो उन्हें पानी के बिना ही रहना पड़ता है. तीन चार परिवार पटना और तीन चार परिवार कोलकाता के है, कुछ लोग ठीक तो हुए पर उनके मुंह में छाले है, इसलिए वे कुछ तेल मसालेदार खाना नहीं खा पा रहे थे. मैने उनके लिए दूध की व्यवस्था की, जो बहुत मुश्किल था, क्योंकि वह एरिया हॉट स्पॉट होने की वजह से लॉकडाउन का बहुत सख्ती से पालन हो रहा है. ये सभी लोग ट्रेन बंद होने की वजह से मुंबई में फंसे है और यहाँ से निकलने की कोशिश कर रहे है. खाना वितरित करने के लिए मैंने पुलिस की परमिशन लिया, जो बहुत मुश्किल और लंबा प्रोसेस है, जिसे मैंने एक जानकार पुलिस की सहायता से किया और उनतक खाना पहुंचा पायी. करीब 200 खाने का डिब्बा बनाती हूँ, जिसमें कोशिश करती हूँ कि खाना अच्छा और पौष्टिक हो, ताकि उनके सेहत सही रहे. खाने के अलावा मैंने साबुन, सर्फ, शैम्पू, सेनिटरी पैड भी मैंने उनके लिए बांटे है, क्योंकि वाकहं कई महिलाएं भी है. मैं पिछले कई दिनों से ये काम कर रही हूँ पर वित्तीय कमी की वजह से कितना कर पाउंगी पता नहीं.

वित्तीय सहायता के बारें में पूछे जाने पर बानी कहती है कि मेरी संस्था में करीब 15 लड़कियां है. संस्था के डोनर भी अभी मुश्किल में है और वे भी पैसा देने से कतरा रहे है. मेरे यहाँ रहने वाली सभी लड़कियों के खाने पीने की व्यवस्था मुझे करनी पड़ रही है. डोनर के पैसे का सही इस्तेमाल हो इसके लिए मैंने ऑनलाइन योगा और वर्कआउट की क्लासेज भी क्रांतिकारी लड़कियों के द्वारा शुरू किया है. कुछ लोग ऐसे भी है जो इस अवस्था का फायदा उठा रहे है, फेक आई डी बनाकर पैसे इकट्ठा किये और थोड़े सामान जरुरत मंदों को देकर पूरा पैसा हथिया लिये, जो गलत है. क्रांति कभी भी सरकार के डोनेशन नहीं लेती.

ये भी पढ़ें- #coronavirus: क्या 15 अप्रैल से खुलेगा Lockdown?

बानी का आगे कहना है कि मुंबई की पीला हाउस, कमाठीपुरा, आदि स्थानों पर जहाँ सेक्स वर्कर करीब 5 हज़ार की संख्या में रहते है. हर दिन की कमाई पर उनका दिन गुजरता है. उनकी दशा भी सोचनीय हो चुकी है. मेरे यहां रहने वाली लड़कियों की अधिकतर माएं वहां रहती है और बदतर जिंदगी जी रही है. इन जगहों पर एक साथ बहुत सारी महिलाएं रहती है, ऐसे में अगर किसी को भी करोना पॉजिटिव निकला तो दृश्य बहुत भयंकर होगा. ऐसी महिलाओं के पास खाने पीने के सामान की बहुत किल्लत है, क्योंकि दुकाने बंद है. उन्हें थोड़ी-थोड़ी खिचड़ी सुबह शाम मिलती है, उन्ही में वे गुजारा कर रही है. मैंने उन्हें कुछ राशन के सामान दिए है पर वह बहुत कम है.

बानी सबसे यही कहना चाहती है कि ऐसे सभी नागरिकों के लिए जो भी जितना कर सकें, अच्छा होगा,क्योंकि लोग मुश्किल में है, कही काम नहीं है और इतने बड़े देश में सबको सम्हालना और दो वक़्त का खाना देना आज मुश्किल हो चुका है. क्रांति की वेबसाइट के जरिये मैं डोनेशन जुटाने की कोशिश कर रही हूँ , ताकि खाना बांटने का मेरा काम न रुके.

इंटरसिटी एक्सप्रैस: भाग-2

प्रेम जीजान लगा कर खेत में काम करने लगा. फिर खेत सोना क्यों न उगलता. अब मां कहतीं, ‘‘प्रेम, ब्याह कर ले,’’ तो वह कहता, ‘‘मां, अब मुझे बस तुम्हारी सेवा करनी है.’’ मां अपने लाल को गले लगा लेतीं. अपनी बहू की आस को यह सोच कर दबा देतीं कि कम से कम श्रवण कुमार जैसा बेटा तो साथ है. मांबेटा अपनी दुनिया में बहुत खुश थे.

कभीकभी किसी शाम को इंटरसिटी ऐक्सप्रैस की आवाज प्रेम को अंदर तक हिला जाती. वह अपना सिर पकड़ कर बैठ जाता. पुराने जख्म हरे हो जाते. मां सब समझती थीं, इसलिए वे बेटे को दुलारतीं, उसे अपने बचपन के किस्से सुनातीं, तो वह संभल जाता. एक दिन महल्ले में शोर सुन कर लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई. प्रेम भी शोर सुन कर वहां पहुंचा तो अवाक रह गया. मधु के चाचा और चाची ने मधु का सामान घर के बाहर फेंक दिया था. मधु को देख कर तो वह अवाक रह गया. समय की गर्द ने जैसे उस की आभा ही छीन ली थी. वह अपनी उम्र से काफी बड़ी लग रही थी. उस की चाची जोरजोर से कह रही थीं, ‘‘कुलच्छिनी को पति ने छोड़ दिया तो आ गई हमारी छाती पर मूंग दलने. हम से नहीं होगा कि हम मुफ्त की रोटी तोड़ने वाले को अपने घर में रखें.’’ चाचाचाची ने घर का दरवाजा बंद कर लिया. घर के आसपास लगी भीड़ धीरेधीरे छंट गई. घर के बाहर केवल मधु और मधु का हाथ पकड़े नन्ही बिटिया ही रह गई. प्रेम ने महल्ले वालों से सुना था कि मधु के पति ने मधु को तलाक दे दिया है. एकदो बार मां ने भी प्रेम से इस बारे में बात की थी. परंतु आज की घटना बहुत अप्रत्याशित थी. मधु सालों बाद उसे इस हाल में दिखाई देगी, उस ने यह सपने में भी नहीं सोचा था. प्रेम दूर खड़ा मांबेटी को रोता हुआ देखता रहा. उन का रोना उस के दिल को छू रहा था, लेकिन वह पता नहीं कैसे अपने को रोके हुआ था. फिर अचानक वह आगे बढ़ा और लपक कर मधु की बिटिया को गोद में उठा लिया. रोरो कर जारजार हुई मधु ने चौंक कर नजरें उठाईं तो प्रेम को देख कर उस की आंखें और भी नम हो गईं. प्रेम मधु की बिटिया को ले कर तेज चाल से अपने घर की ओर चल दिया. अपनी बिटिया का रोना सुन कर मधु भी प्रेम के पीछेपीछे भाग चली, बिलकुल वैसे ही जैसे बछड़े के पीछे गाय भागती है.

ये भी पढ़ें- #lockdown: माय डैडी बेस्ट कुक

प्रेम ने धड़ाक से घर का दरवाजा खोला. गेहूं बीनती प्रेम की मां उस की गोद में एक बच्ची को देख कर चौंक गईं. ‘‘किस की बिटिया है, प्रेम?’’ उन्होंने प्रेम से पूछा, तभी पीछेपीछे आई मधु दरवाजे पर आ कर रुक गई. अवाक खड़ी मां कभी मधु, कभी प्रेम तो कभी प्रेम की गोद में झूलती बच्ची को देखती रहीं. फिर उन्होंने मधु का हाथ पकड़ा और उस के सिर पर हाथ फेर कर कहा, ‘‘मधु, अब यह ही तेरा घर है, अब तुझे ही संभालना है हम सब को.’’ मां की इस बात पर मधु के गालों पर अश्रुधारा बहती गई, तो मां ने मधु और मधु की बिटिया दोनों को गले लगा लिया. मां ने अगले दिन ही एक वकील को घर बुलाया और 2 दिनों के भीतर ही मधु और प्रेम का विवाह करवा दिया. पासपड़ोस के लोगों ने लाख नाकमुंह सिकोड़े, लेकिन मां ने ऐसी किसी बात पर ध्यान नहीं दिया. मधु की बिटिया अनुभा अब घर की बिटिया हो गई.

समय गुजरता गया. मां नहीं रहीं. अनुभा और प्रेम का नाता पितापुत्री से बढ़ कर एक सखा और सखी का हो गया. शुरू में मधु को अनुभा की चिंता रहती थी क्योंकि बहुत कुछ सुन रखा था उस ने सौतेले पिताओं की करतूतों के बारे में. लेकिन प्रेम ने मधु की सारी शंकाओं को दूर कर दिया था. प्रेम, अनुभा को अपने कंधे पर बैठा स्कूल ले जाता और रोज शाम को रेलवे स्टेशन पर इंटरसिटी ऐक्सप्रैस दिखाने ले जाता. प्रेम के कंधे पर बैठी नन्ही अनुभा खुशी में चिल्ला कर हाथ हिलाती, प्रत्युत्तर में इंटरसिटी का ड्राइवर अपना हाथ हिलाता. अनुभा और प्रेम को देख कर कौन कह सकता था कि दोनों में खून का रिश्ता नहीं है. अगर अनुभा बीमार पड़ती तो रातरात भर जाग कर प्रेम उस की तीमारदारी करता. प्रेम को तकलीफ होती तो अनुभा बीमार पड़ जाती. मधु का पूर्व पति दीपक एकदो बार मधु के घर आया पर मधु की फटकार ने उस के रास्ते घर के लिए बंद कर दिए. दीपक का आना प्रेम की घबराहट बढ़ा देता है, यह बात मधु खूब जानती थी. ऐसा ही मधु ने अपने चाचाचाची के लिए भी किया. दरअसल, वह अपने हर अतीत को पूरी तरह भुलाना चाहती थी.

प्रेम की मां की इच्छा थी कि अनुभा डाक्टर बने और अनुभा ने अपनी दादी से किया गया यह वादा भी खूब निभाया. अनुभा कब कसबे के स्कूल से शहर के मैडिकल कालेज में डाक्टरी पढ़ने लगी, पता ही नहीं चला. आज अनुभा के कालेज में दीक्षांत समारोह था. मुख्य अतिथि से अपनी बिटिया को डिग्री लेते देख प्रेम और मधु गर्व से दोहरे हो गए. समारोह के बाद अनुभा ने एक सुधीर नाम के लड़के और उस के मातापिता से दोनों को मिलवाया. सुधीर, अनुभा के साथ ही डाक्टरी पढ़ रहा था. प्रेम और मधु एकदूसरे का मुंह ताकने लगे. सुधीर के पिता दोनों की असमंजस को समझ गए. वे प्रेम का हाथ थाम कर बोले, ‘‘अरे भई, संबंध बनाने हैं आप लोगों से.’’ सुधीर के मातापिता ने उन दोनों को अगली सुबह नाश्ते पर आमंत्रित किया, तो उन दोनों के पास इनकार करने की कोई वजह ही नहीं थी. अगला दिन एक नई परिभाषा ही ले कर आया. सुधीर के मातापिता ने अनुभा को बहू बनाने की इच्छा व्यक्त कर दी. इतना अच्छा लड़का, वह भी इकलौता, उस पर इतना अच्छा परिवार, न की गुंजाइश ही कहां थी प्रेम और मधु के लिए? सुधीर के मातापिता ने जिद कर के प्रेम, मधु और अनुभा को अपने घर के गैस्ट हाउस में ही रोक लिया. फिर पूरे 2 दिन तक दोनों परिवार सैरसपाटे और पिकनिक में व्यस्त रहे. दोनों परिवार इतना घुलमिल गए, जैसे बहुत पुरानी जानपहचान हो.

आगे पढ़ें- प्रेम की प्यारी बिटिया अनुभा का ब्याह जो था. पूरा घर…

ये भी पढ़ें- मर्यादा

#lockdown: कोरोना संकट और अकेली वर्किंग वूमन्स

कोरोना के खिलाफ यह जंग लंबी चलेगी ऐसा लग रहा है.  जो लोग परिवार के साथ घरों में हैं वे इस संकट का मुकाबला मिलकर कर रहे हैं. लेकिन वो कामकाजी महिलाएं जो इस मुश्किल समय में अकेली हैं. उनके लिए यह समय और परिस्थितियां किस तरह के अनुभव, दिक्कतें लेकर आई हैं? कोरोना महामारी के बीच वे अकेले अपने दम पर किस तरह हालात का सामना कर रही हैं? कहीं उनके हौंसले पस्त तो नहीं हुए? कोरोना से खुद को सुरक्षित रखने और इस डर पर अपनी जीत दर्ज कराने की उनकी क्या तैयारी है? आजकल दिनचर्या कैसी है? यही सब जानने के लिए हमने कुछ महिलाओं से बातचीत की. आइए जानें क्या कहा इन्होंने –

किश्वर जहां – जागरूक रहें, डरें नहीं

कस्बा गंगो, जिला साहनपुर, यूपी के सरकारी प्राथमिक स्कूल में प्रधानाचार्य किश्वर जहां के माता-पिता नहीं हैं. उन्होंने शादी नहीं की. अकेली रहती हैं और एकल जीवन जीने की आदि हैं. कोरोना की वजह से स्कूल में छुटि्टयां हैं इसलिए आजकल घर पर हैं.

जिस तेजी से कोरोना फैल रहा है किश्वर की सबसे बड़ी चिंता क्या है? “मैं कोरोना पीड़ितों की बढ़ती संख्या से चिंतित हूं. मैं पहले से समाचारों के माध्यम से दुनिया में फैली इस बीमारी के प्रकोप से परिचित थीं. यह कैसे फैलता है? इससे कैसे बचा जा सकता है. इन बातों की जानकारी मुझे थी. जब भारत में कोरोना मरीज सामने आए तो मैं सर्तक हो गईं. क्योंकि मैं जानती हूं कि यह तेजी से एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है. मैं आस-पड़ोस के लोगों को जागरूक करने लगी. कैसे सोशल डिस्टेंस मेनेटेन करना है. क्यों मास्क लगाना जरूरी है. घर से बाहर नहीं निकलना आदि. कोरोना से मैं सतर्क हूं भयभीत नहीं. क्योंकि इससे बचाने की मेरी पूरी तैयारी है. मैं सभी सावधानियों का पालन कर रही हूं.”

ये भी पढ़ें- #coronavirus: Lockdown के दौरान महिला सुरक्षा

किश्वर अपने आसपास के लोगों को ही अपना परिवार मानती हैं. वे बताती हैं, “जब 22 मार्च को जनता कर्फ्यू गया तभी से यह संभावना थी कि यह आगे बढ़ेगा. टीवी व अखबारों के माध्यम से मैंने बाकी देशों की स्थिति का जायजा लिया था कि किस प्रकार कोरोना रोकने के लिए कई शहरों को लॉक डाउन किया गया है. इस बात को ध्यान में रखते हुए मैंने लगभग महीने-डेढ़ महीने का राशन लाकर पहले ही रख लिया ताकि बार-बार बाजार न जाना पड़े. ”

किश्वर कहती हैं, ‘मुझे मौत का डर नहीं. मौत बरहक है वो आनी है. चिंता यह है कि अगर मुझे यह बीमारी होती है तो क्या चिकित्सीय सुविधाएं मिल पाएंगी या नहीं?”

इन दिनों किश्वर का रुटीन थोड़ा बदल गया है. अब वे शारीरिक व मानसिक मजबूती व शांति के लिए सुबह योग व ध्यान लगाती हैं. पौष्टिक हल्का सुपाच्य खाना खाती हैं. किताबें पढ़ती हैं. दिन के समय फोन पर दोस्तों व भाई-बहनों से बात करती हैं. अब ज्यादा टीवी नहीं देखती क्योंकि कई बार हर तरफ से महामारी के बढ़ते आंकड़े किश्वर को परेशान कर देते हैं. इसलिए बस मुख्य समाचार देखती हैं. पुराने गाने सुनती हैं. घर की साफ सफाई के साथ ही बागवानी करती हैं. यूट्ब्यू पर कुकरी शो देखती हैं और आशा करती हैं कि जब सब ठीक हो जाएगा तो वे यह सभी रेसिपी बनाकर अपने आसपास के लोगों को खिलाएंगी.

राखी रानी देब मन में डर है पर कोरोना को हराना है

जानिए कुछ  राखी रानी देब के बारे में. राखी असम की रहने वाली हैं. परिवार असम में रहता है. राखी दिल्ली में एक पीआर एजेंसी में काम करती हैं और काफी समय से अकेली रह रही हैं. राखी बताती हैं, “पहले और अब लॉकडाउन के बाद की जिंदगी में काफी अंतर आ चुका है. पहले मैं सुबह ऑफिस जाती थीं और वहां काम व ऑफिस के लोगों के बीच कब समय बीत जाता था पता नहीं चलता था. कभी दोस्तों के साथ बाहर डिनर करना. घर में रहने का मौका बहुत कम मिलता था. ऐसा लगता था जैसे रात को सोने के लिए घर आती हूं और सुबह फिर से ऑफिस और देर तक ऑफिस का काम. लेकिन अब चौबीसों घंटे घर पर हूं”

राखी बताती हैं कि ऐसे समय में लगातार खबरों को जानना भी जरूरी है दूसरी तरफ कोरोना जिस तेजी से बढ़ रहा है ऐसे में अकेले रहते हुए यह खबरें नकारात्मक विचारों को जन्म देती हैं. मैं परिवार से दूर हूं और इस समय मेरे पास खाली समय भी है कहते हैं खाली दिमाग शौतान का घर. ऐसे में कई बार नकारात्मक चीज़ें सोचने लगती हूं. कई बार यह भी सोचती हूं कि अगर मुझे कुछ हो गया तो क्या करूंगी? दिल्ली या उसके आसपास मेरा कोई रिश्तेदार भी नहीं जो मेरी मदद करे. मुझे नहीं पता उस समय मुझे खुद को कैसे मैनेज करना होगा. यही सब नेगेटिव बातें सोचकर कई बार बहुत डर जाती हूं. फिर यही डर मुझे यह भी सोचने के लिए बोलता है कि कैसे खुद को कोरोना से बचाया जाए.

जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो राखी ने क्या तैयारी की थी? “सच कहूं तो मैंने अपने लिए कुछ भी खानेपीने का सामान नहीं रखा था. वही जो थोड़ा बहुत राशन रहता है घर पर, वही मेरे पास था. जैसे ही 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई. मैंने अपनी बालकनी से बाहर देखा, लोग अपनी गाड़ी और बाइक लेकर बाजार जा रहे थे. तब मुझे घबराहट हुई कि मेरे पास तो खानेपीने का सामान बहुत कम है. लेकिन उस दिन मैं बाजार नहीं गई. अगले दिन सब जगह बंद था. सबसे बड़ी मुश्किल तब आई जब लॉकडाउन के पहले ही दिन मेरी रसोई गैस खत्म हो गई. मैं सोच में पड़ गई, अब क्या करूं? आसपास गैस सप्लाई करने वाले जितने लोग थे सबको फोन किया सबका एक ही जवाब था कि दुकान बंद है. उस रात मैंने कुछ नहीं खाया. अगले दिन कई गुप्स में मैसेज किया तो एक व्यक्ति ने घर आकर गैस का सिलेंडर दिया और मैंने राहत की सांस ली. ऑनलाइन सामान की सप्लाई भी बंद हो चुकी थी. कुछ जो सामान मेरे पास था उसी से मैंने काम चलाना शुरु किया. फिर दो दिन बाद जब हमारे मार्किट की दो-तीन दुकाने खुली तो मैं राशन लेकर आई. ”

दो सप्ताह से ज्यादा समय लॉकडाउन को हो चुका है. कोरोना के केस रोज बढ़ते जा रहे हैं ऐसे में राखी की मनस्थिति कैसी है? राखी बताती हैं, “अमेरिका, इटली, फ्रांस में जो हालात हैं उसे देखकर डर समा गया है कि कहीं भारत में भी स्थिति बिगड़ न जाए. मुझे कोरोना न हो जाए. कई बार बहुत नकारात्मक विचार आते हैं.”

नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखने के लिए क्या करती हैं? “कोरोना का डर व नकारात्मक विचार मुझसे दूर रहें इसके लिए मैं रोज अपने परिवार से फोन पर बात करती हूं. दोस्तों से बात करती हूं. चैटिंग करती हैं. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हूं ताकि ध्यान बंटा रहे और मैं पॉजिटिव सोचूं. घर के अंदर रहती हूं बाहर नहीं निकलती. यही एक मात्र उपाय है खुद को सेफ रखने का.”

राखी अपने परिवार को बहुत मिस करती हैं. वे मानती हैं अगर परिवार साथ होता तो इस समय को फेस करना आसान हो जाता. मम्मी चाहती हैं जैसे ही हवाई सेवा शुरु हो मैं तुरंत घर लौट आऊं.

राखी कोरोना से इतनी डरी हुई हैं तो उससे लड़ेगी कैसे? राखी कहती हैं, “मैं लड़ रही हूं. मैं घर से बाहर नहीं निकलती. बार-बार हाथ धोती हूं. सामान लेने जाती हूं तो मास्क पहनकर पूरी सावधानी के साथ. वापस लौटकर अपने हाथ धोना. मैं जानती हूं कि ऐसे कठिन समय में मुझे अपना ख्याल खुद रखना है.”

राखी का रुटीन पहले जैसा ही है. पहले वे छह बजे उठती थीं अब सात बजे. पहले की तरह सुबह उठकर योग करती हैं. फिर फ्रैश होकर अपने लिए नाश्ता बनाती हैं. उसके बाद ऑफिस का काम शुरु हो जाता है. इन दिनों वे वर्क फ्रॉम होम कर रही हैं. एक नई चीज़ जो राखी के शेड्यूल में शामिल हुई है वो है किताबें. राखी रोज श्याम को किताबें पढ़ती हैं. परिवार व दोस्तों से फोन पर बातचीत. समाचार सुनना और 11 बजे तक सो जाना. इस उम्मीद के साथ कि जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा.

निकिता वर्मा अपनी डाइट का ख्याल रखें

पेशे से इंजीनियर और फैशन, लाइफस्टाइल ब्लॉगर निकिता वर्मा  अपने काम के सिलसिले में परिवार से दूर नोएडा, यूपी में रहती हैं. निकिता मानती हैं, “कोरोना वायरस ने हम सभी को बहुत डरा दिया है. ऐसे समय में अकेले रहते हुए मुझे परिवार की बहुत याद आती है. एकता में शक्ति होती है जो आपको कठिन समय में भी हारने नहीं देती. अगर इस समय परिवार मेरे पास होता तो इस कठिन समय का सामना करना मेरे लिए आसान हो जाता. वैसे मैं रोज विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए परिवार के संपर्क में हूं. पहले भी अकेली रहती थी लेकिन जब से कोरोना फैला है और लॉकडाउन हुआ है इसने सभी की जिंदगी को हिलाकर रख दिया है.

“कोरोना को खत्म करने में हर नागरिक की अपनी भागीदारी है. इस समय हम नागरिक होने का फर्ज इसी तरह निभा सकते हैं कि हम घर पर रहें. बाहर न निकलें. ऐसा करके हम अपनी जान तो बचाएंगे ही साथ ही समाज के लिए भी खतरा नहीं बनेंगे. अब तो नोएड़ा के कई इलाके सील कर दिए गए हैं. इससे और घबराहट बढ़ गई है.”

निकिता ने काफी पहले ही अपनी मेड को आने से मना कर दिया था. अपने घरेलू काम वे खुद कर रही हैं. 22 तारीख के बाद से ही लंबे लॉकडाउन की आशंका थी इसलिए निकिता ने खानेपीने का जरूरी सामान पहले ही ऑनलाइन मंगा लिया था ताकि बाजार जाने की जरूरत न पड़े.

निकिता बताती हैं, “कोरोना से लड़ने के लिए मेरी तैयारी यह है कि मैं अपनी और घर की सफाई का ख्याल रखूं. बार-बार हाथ धोने के साथ ही हाइजीन का बहुत ख्याल रखती हूं. शारीरिक व मानसिक फिटनेट के लिए सुबह-श्याम योग करती हूं. एक्सरसाइज करती हूं. ऐसी डाइट ले रही हूं जो मेरे इम्यूनिटी सिस्टम को सही रखे. विटामिन सी, सूखे मेवे और हरी सब्जियां इन दिनों मेरी डाइट में ज्यादा हैं. रोज एक गिलास दूध पी रही हूं.”

लक्ष्मी सकारात्मकता व सावधानी से हारेगा कोरोना

बिहार की रहने वाली लक्ष्मी की जो  पत्रकार हैं, दिल्ली में अकेली रहती हैं. लक्ष्मी कहती हैं, भले ही इस समय देश व दुनिया में लॉकडाउन है लेकिन इस बुरे समय में भी मैं अच्छा देखने की कोशिश करती हूं. और महसूस करती हूं कि कोरोना की वजह से कई सकारात्मक परिवर्तन हम सबकी जिंदगी में आ गए हैं. कोरोना के भय ने हमारी जिंदगी को अनुसाशन में ला दिया है. अब हमें साफ सफाई की अहमियत ज्यादा समझ में आ गई है. कई अच्छी आदतें जीवन में शुमार हो चुकी हैं. अपनी फिटनेस और डाइट पर हमने गंभीरता से सोचना शुरु किया. सीमित साधनों में कैसे सब कुछ मैनेज करना है यह सीख लिया. अब हम उतना ही खाना बना रहे हैं जितने की जरूरत है. बस इन अच्छी आदतों को हमें आगे भी बनाए रखना है.

कोरोना से मुकाबला कैसे करेंगी? लक्ष्मी कहती हैं, मैं केवल सकारात्मक सोचती हैं. कोरोना से भयभीत नहीं हूं. कुछ लोग टीवी देखकर कोरोना की खबरों से भी डर रहे हैं. इसमें डर की कोई बात नहीं है. खबरों का मक्सद हमें जानकारी देना है. जानकारी ही नहीं होगी तो हम समस्या का सामना कैसे करेंगे? हेल्थ मिनिस्ट्री जो गाइड लाइन जारी कर रही है मैं उसका पालन करती हूं. लक्ष्मी सहारा अखबार में काम करती हैं. सामान्य दिनों की तरह ऑफिस जा रही हैं. इस दौरान पूरी सावधानी का ख्याल रखती हैं.

इस मुश्किल समय में लक्ष्मी सकारात्मक सोच विचार बनाए रखने को सबसे जरूरी मानती हैं. साथ ही अपने आसपास के माहौल को भी सकारात्मक बनाए रखने की अपील करती हैं. लक्ष्मी मजबूत लड़की हैं. उनके माता-पिता बिहार में रहते हैं. लक्ष्मी का कहना है कि हम जहां रहते हैं वहीं हमारा एक परिवार बन जाता है. माता-पिता ने हमें समाज में कैसे मिलजुल कर रहना है यह सिखाया है. यही वजह है कि इस संकट की घड़ी में सभी लोग अलग-अलग रूपों में एक दूसरे की मदद कर रहे हैं. पूरा देश एक परिवार बन गया है. इसलिए मैं बेशक अपने माता-पिता से दूर हूं लेकिन मैं उन्हें मिस नहीं कर रही. मेरे आसपास के लोग ही परिवार की तरह मेरे साथ हैं.

लॉकडाउन की घोषणा हुई तो लक्ष्मी की क्या तैयारी थी? वे कहती हैं, लोगों ने काफी राशन घरों में भर लिया था लेकिन मैंने नहीं भरा. न मैं यह सोचती हूं कि हमें आने वाले दिनों में खाना नहीं मिलेगा. इस समय तो हमें उन लोगों की मदद करनी चाहिए जो गरीब मजदूर हैं. उन्हें खाना खिलाने के बारे में सोचना चाहिए.

कोरोना से जंग जीतने की क्या तैयारी है? बस इतनी तैयारी है कि मैं स्वच्छता का ख्याल रखती हूं. मास्क लगाकर बाहर निकलती हूं. जो बिना मास्क लगाए दिखते हैं उन्हें टोकती हूं. ऑफिस से लौटते वक्त एक बारी में ही सारा जरूरी सामान ले आती हूं. विश्व स्वास्थ संगठन व भारत सरकार की ओर से जो निर्देश सामने आ रहे हैं उनका पालन करती हूं. इस मुश्किल समय में सकारात्मक सोचती हूं सतर्क रहती हूं इसलिए मन में कोरोना का भय नहीं है. कुछ लोगों के मन में कोरोना का डर इस कदर भर चुका है कि सामान्य खांसी होने पर भी सोच रहे हैं कहीं कोरोना तो नहीं हो गया. नकारात्मक बातें मुश्किल घड़ी में इंसान को परेशान कर देती हैं. इस समय हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए नकारात्मकता आउट, सकारात्मकता इन.

ये भी पढ़ें- #lockdown: कोरोना ने बढ़ाया डिस्टेंस एजुकेशन का महत्व

कोरोना की वजह से लक्ष्मी की दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं आया. पहले की तरह सुबह योग करती हैं. फिर नहा कर नाश्ता और फिर ऑफिस के लिए रवाना. श्याम को घर आकर साफ सफाई और अपने लिए डिनर बनाती हैं.

पंखुड़ी परिवार पास होता तो अच्छा था 

अब बात करते हैं पंखुड़ी की. पंखुड़ी एक पीआर प्रोफेशनल हैं. भोपाल, मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. परिवार भोपाल में ही रहता है. पंखुड़ी दिल्ली के सुखदेव विहार में रहती हैं. पंखुड़ी के लिए सबसे बड़ा डर यही है कि इस समय वे परिवार से दूर हैं. जिस तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और लॉकडाउन आगे बढ़ा दिया गया है. ऐसे में अगर चीज़ें समय रहते ठीक न हुईं और महामारी ज्यादा फैल जाए तो वे अकेली क्या करेंगी.

लॉकडाउन की घोषणा होने से कुछ समय पहले ही पंखुड़ी महीने डेढ़ महीने का राशन ला चुकी थी. लॉकडाउन के बाद मन में यह ख्याल जरूर आया कि अगर थोड़ा और राशन ले आती तो ठीक रहता.

पंखुड़ी कहती हैं लॉकडाउन से पहले भी मैं अकेले रहती थी लेकिन अब वर्क फ्रॉम होम कर रही हूं. कोशिश करती हूं कि किसी न किसी काम में खुद को व्यस्त रखूं. ऑफिस वर्क के अलावा घर की साफ-सफाई. कुछ शौक जो लंबे समय से पूरे नहीं हो पा रहे थे वो पूरे कर रही हूं जैसे – ड्रॉईंग, कुकिंग, रीडिंग. बाहर बहुत कम निकलती हूं बस दूध सब्जी फल लेने. वह भी ज्यादा ले आती हूं ताकि 2-3 दिन फिर बाहर न निकलूं.

पंखुड़ी को लगता है कि इस समय अगर वे परिवार के साथ होती तो उन्हें इतनी चिंता न होती. जैसे-जैसे समय बीत रहा है वैसे-वैसे पंखुड़ी को परिवार की याद आ रही है. पंखुड़ी बताती हैं कि लॉकडाउन के पहले सप्ताह तक तो फिर भी सब ठीक रहा लेकिन अब महसूस कर रही हूं कि मन बहुत उदास हो गया है. भीतर से बेवजह की खीज, चिड़चिड़ापन, अकेलापन महसूस हो रहा है.

कोरोना की अपडेट व देश दुनिया का हाल जानने के लिए पंखुड़ी समाचार सुनती हैं. कोरोना मरीज़ों की बढ़ती संख्या पंखुड़ी को डराती है. लेकिन यही डर पंखुड़ी को सीख भी दे रहा है कि कोरोना से बचना है तो घर पर रहो. यही एक मात्र उपाय है.

पंखुड़ी फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, ट्वीटर पर एक्टिव रहती हैं. फोन पर परिवार व दोस्तों से बातें करती हैं. पंखुड़ी बताती हैं कि लॉकडाउन के बाद से मेरी दिनचर्या में बहुत बदलाव आ गया है. जैसे अब रोज दिन की शुरुआत योग से होती है. फिर नहाकर नाश्ता बनाती हूं. लंच और डिनर भी कर रही हूं जोकि पहले मेरा ज्यादातर छूट जाता था. अब खाने का एक निश्चित समय तय हो गया है जोकि सेहत के लिए बहुत जरूरी था. श्याम को मैं घर के अंदर, बालकोनी या छत पर टहलती हूं. अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए रोज हल्दी वाला दूध पीती हूं.

पूजा मेहरोत्रा मजबूत हूं जागरूक हूं सतर्क हूं

अब मिलाती हूं एक मजबूत, जागरुक लड़की पूजा मेहरोत्रा से. पूजा पत्रकार हैं द प्रिंट में काम करती हैं और फिलहाल एक महीने से घर से ही काम कर रही हैं. पूजा बिहार की रहने वाली हैं. लगभग बीस साल से दिल्ली में अकेली रह रही हैं. पूजा सिंगल हैं इसलिए अपना ख्याल खुद रखना जानती हैं.

कोरोना वायरस के भय के बीच पूजा की सबसे बड़ी चिंता अपने माता-पिता को लेकर है. दोनों बिहार में हैं और बुर्जुग हैं. बढ़ती उम्र की कई तकलीफें भी फेस कर रहे हैं. पूजा के लिए उसके माता-पिता का ठीक रहना बहुत जरूरी है. इसलिए वे उन्हें फोन पर बताती रहती हैं कि आजकल उन्हें कैसे रहना है. कैसा खानपान और साफ सफाई का ख्याल रखना है. किस प्रकार बार-बार हाथ धोना है. सेनेटाइज़र कैसे यूज़ करना है.

खुद पूजा की तैयारी कैसी है? मैं सारे प्रिकॉशन्स ले रही हूं. काफी पहले से ही मास्क लगाकर घर से निकलती थी. दुनिया में जब कोरोना फैल रहा था तभी से इस बात को लेकर अवेयर थी कि अगर भारत में यह संक्रमण फैलता है तो हमें क्या सावधानी बरतनी होंगी. मैंने अपनी कामवाली बाई को भी पहले ही कोरोना और उसके परिणामों के बारे में बता दिया था. मेरा घर पूरी तरह सैनेटाइज़ है.

बेशक पूजा कई सालों से अकेली रह रही हैं लेकिन क्या इस समय परिवार को मिस कर रही हैं? पूजा कहती हैं, परिवार का साथ होना हमेशा सपोर्ट देता है. अगर फैमली साथ होती तो एक दूसरे की केयर कर पाते. मुझे अपने माता-पिता की इतनी चिंता नहीं होती जितनी अब दूर रहकर हो रही है. जिंदगी थोड़ा आसान हो जाती.

लॉकडाउन की वजह से क्या पूजा ने भी अपना राशन घर पर रख दिया था? नहीं, बिल्कुल नहीं. बल्कि मैंने लोगों को समझाया कि बहुत ज्यादा राशन मत भरो. लॉकडाउन हो या कर्फ्यू जरूरी सामान की सप्लाई बंद नहीं होती. इसलिए मैंने उतना ही खरीदा जितने की जरूरत थी. दो सप्ताह से ज्यादा समय हो चुका है मुझे इस दौरान राशन फल सब्जी की कोई दिक्कत नहीं हुई. हां, क्योंकि मैं सिंगल हूं इसलिए कुछ जरूरी दवाएं डॉक्टर की सलाह पर मैंने रखी हैं ताकि जरूरत पड़ने पर दिक्कत न हो.

पूजा रोज योग व प्राणायाम करती हैं. काम के बीच में पांच-दस मिनट का ब्रेक लेती हैं. श्याम को थोड़ा टहलती हैं. पूजा बताती हैं कि जब बहुत ज्यादा कोरोना कोरोना हो जाता है तो मन दुखी होता है यह देखकर कि दुनिया में कितने लोग मर रहे हैं. समाज कहां जा रहा है? इतना होने के बाद भी कुछ लोग लॉकडाउन की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं तो बहुत गुस्सा भी आता है.

पूजा ने अपने घर की सफाई के साथ-साथ अपनी बिल्डिंग की सारी रेलिंग्स साफ कीं. स्विचबोर्ड साफ किए. रोज डिटॉल के पानी से दरवाजे के हैंडिल साफ करती हैं. पूजा बताती हैं कि इतना होने के बाद भी जब कुछ लोग डॉक्टर्स, नर्स, हेल्थ सेक्टर से जुड़ा स्टाफ, आशा वर्कर, आंगनवाणी, पुलिस स्टाफ को सहयोग नहीं करते तो बहुत दुख होता है.

शुचि सहाय सबसे पहले अपनी सुरक्षा

अब एक सिंगल मदर शुचि सहाय के बारे में बात करते हैं. शुचि जी की एक बेटी है जो अमरीका में पढ़ती हैं. यहां वे वैशाली गाजियाबाद में लंबे समय से अकेली रह रही हैं. शुचि मेडिकल ट्रांसक्रप्शन के क्षेत्र में क्वालिटी एनालिस्ट हैं. शुचि जी वर्क फ्रॉम होम ही करती रही हैं इसलिए लॉकडाउन का असर उनके काम पर नहीं पड़ा. लेकिन कोरोना की वजह से एक अनजान सा भय वे जरूर महसूस करती हैं. कोरोना का खतरा जैसे ही भारत पर मंडराया शुचि जी ने तय किया कि सबसे पहले उन्हें अपना ख्याल रखना है. खुद को सुरक्षित रखना है.

लॉकडाउन के दौरान के लिए उनकी तैयारी कैसी थी? इस पर वे बताती हैं कि बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन थोड़ी बहुत तैयारी मैंने भी की. महीने डेढ़ महीने का सामान मैंने भी घर पर लाकर रखा.

वैसे तो शुचि जी लंबे समय से अकेली ही रहती हैं लेकिन मानती हैं कि इस संकट काल में अगर परिवार साथ होता तो समय कैसे कट जाता है पता नहीं चलता.

देश-दुनिया में कोरोना मरीज़ों की बढ़ती संख्या शुचि जी को भी डराती है. वे कहती हैं- जब अमेरिका की बिगड़ती स्थिति देखती हूं तो बहुत डर लगता है मेरी बेटी वहां पर है. रोज उससे फोन पर बात करती हूं. कभी विडियो कॉल करती हूं. हिदायतें भी देती हूं. जब वो बताती है कि वो घर पर सुरक्षित है. बाहर नहीं निकलती, उसने राशन रखा हुआ है. इम्यूनिटी का ख्याल रखते हुए डाइट ले रही है तो मन को तसल्ली होती है.

शुचि बताती हैं कि इस समय एक नागरिक होने के नाते मेरा यह फर्ज है कि जो भी सरकार की ओर से, मीडिया के माध्यम से. डॉक्टरों द्वारा दी जा रही सेहत संबंधी सलाह हैं उनको माना जाए. शुचि जी सफाई का खास ख्याल रखती हैं. वैसे तो घर पर रहती हैं. अगर दूध सब्जी खरीदने बाजार जाना पड़े तो सामाजिक दूरी का ख्याल रखती हैं, मास्क पहनती हैं. वे मानती हैं कि अगर हर इंसान इन बातों का ख्याल रखे तो हम कोरोना को फैलने से रोक सकते हैं.

ये भी पढ़ें- प्रैग्नेंसी के बाद नौकरी पर तलवार

शुचि के लिए लॉकडाउन का शुरुआती सप्ताह बहुत ज्यादा परेशान करने वाला था. बड़े-बड़े देशों की कोरोना की वजह से क्या हालात हो गई है. यह सब देखकर बहुत घबराहट होती थी. फिर शुचि ने तय किया कि इस विषय पर ज्यादा नहीं सोचना. घर पर रहो. ऑफिस का काम करो. अपनी नींद पूरी लो. अपनी डाइट सही रखो बस.

शुचि की दिनचर्या पहले की तरह योग व प्राणायाम से शुरु होती है. योग से उन्हें शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. पॉजिटिव एनर्जी मिलती है. फिर वे अपने रोज के काम करती हैं. श्याम को कुछ किताबें पढ़ती हैं. परिवार व दोस्तों से बातें करती हैं. सबसे महत्वपूर्ण वे सकारात्मक रहने की कोशिश करती हैं.

#lockdown: क्या अलग-अलग कमरों में सो रहे हैं दिव्यांका त्रिपाठी और पति विवेक

कोरोनावायरस के चलते पूरा देश लौकडाउन की मार झेल रहा है. वहीं वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दी जा रही है, जिसका पालन आम आदमी से लेकर बौलीवुड और टीवी सितारे भी फौलो कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच ये है मौहब्बतें ( Ye Hai Mohabbatein) की इशिता यानी दिव्यांका त्रिपाठी (Divyanka Tripathi) की पति विवेक दहिया (Vivek Dahiya) के साथ फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसमें उनके बीच दूरियां नजर आ रही हैं. आइए आपको बताते हैं क्या विवेक दहिया और दिव्यांका त्रिपाठी के बीच दूरियों की वजह…

कैप्शन के साथ दिव्यांका ने शेयर किया फोटो

हाल ही में दिव्यांका त्रिपाठी (Divyanka Tripathi) ने अपने फैंस के लिए एक फोटो शेयर किया, जिसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘अब तुम्हें ज्यादा मिस कर रही हूं क्योंकि हम दोनों अलग रूम में हैं. इस फीलिंग का कोई एंड नहीं है. ‘ हालांकि अभी तक इस बारे में दिव्यांका ने कोई खुलासा नहीं किया है कि वह अलग कमरे में क्यों रह रही हैं.

ये भी पढ़ें- दोबारा मां बनी Bigg boss fame राहुल महाजन की ex वाइफ Dimpy गांगुली, इस वजह से हुआ था तलाक

दिव्यांका के साथ दोबारा काम करना चाहते हैं विवेक

 

View this post on Instagram

 

Late mornings 🥱

A post shared by Divyanka Tripathi Dahiya (@divyankatripathidahiya) on

विवेक (Vivek Dahiya) ने कहा था, ‘मैं जानता हूं कि मुझे और दिव्यांका को पर्दे पर साथ देखने का इंतजार हमारे प्रशंसक काफी लंबे समय से कर रहे हैं. मैं भी उनके साथ दोबारा काम करना चाहता हूं. मुझे बस एक बेहतर परियोजना का इंतजार है. अगर प्रोजेक्ट सही रहा और स्क्रिप्ट भी मजेदार रही, तो हम बिल्कुल इसे करेंगे.’

एक ही शो के सेट पर हुई थी मुलाकात

 

View this post on Instagram

 

Today’s uber quick 10 minutes yummy Paneer bhurji!! #EnjoyingChefMode

A post shared by Divyanka Tripathi Dahiya (@divyankatripathidahiya) on

टीवी शो ये है मोहब्बतें (Ye Hai Mohabbatein)  के सेट पर दिव्यांका (Divyanka Tripathi) और विवेक (Vivek Dahiya) पहली बार मिले थे, जिसके बाद एक-दूसरे को कुछ महीने तक डेट करने के बाद इस मशहूर जोड़े ने साल 2016 में शादी की थी. वहीं प्रौफेशनल लाइफ की बात करें तो दिव्यांका जहां शो खत्म होने के बाद घर पर आराम कर रही हैं तो वहीं विवेक हाल ही में वेब सीरीज ‘स्टेट ऑफ सीज: 26/11’ में नजर आए थे.

ये भी पढ़ें- Bollywood Singers की हालत पर Neha Kakkar ने खोली जुबान, कही ये बात

इंटरसिटी एक्सप्रैस: भाग-1

तुममुझ से क्या चाहते हो प्रेम?’’ मधु ने प्रेम से पूछा.

‘‘तुम्हारा साथ और क्या.’’

मधु ने आशंका भरी निगाहों से प्रेम को देखा, ‘‘तुम्हारी मां मुझे स्वीकार लेंगी?’’

‘‘तुम मेरी मां को नहीं जानतीं, मेरी खुशी में ही मेरी मां की खुशी है. लेकिन तुम मेरा साथ दोगी न?’’ प्रेम ने मधु को आशंका भरी निगाहों से देखा.

‘‘मरते दम तक.’’

मधु के इस उत्तर ने प्रेम के हृदय से असमंजस के कुहरे को हटा दिया. तभी दूर से गुजरती इंटरसिटी ऐक्सप्रैस की आवाज ने दोनों की तंद्रा को भंग कर दिया. आमगांव एक छोटा सा कसबा था. वहीं इन दोनों का घर आसपास ही था. परंतु दोनों के परिवारों में ज्यादा बोलचाल नहीं थी, क्योंकि दोनों परिवारों के रहनसहन और परिवेश में अंतर था. मधु अपने चाचा के पास रहती थी. चाचाचाची ने उसे अपनी बेटी की तरह पाला था. प्रेम के पिता नहीं थे. बूढ़ी मां थी. पुरखों का बनाया हुआ एक घर था और साथ में लगा हुआ एक छोटा सा खेत. पढ़ाई पूरी करते ही प्रेम को कसबे के अन्य लड़कों की तरह पास के शहर में जौब करने का चसका लग गया था. मां ने लाख कहा कि बेटे अपने खेत में हाथ बंटाओ, घर में सोना बरसेगा पर प्रेम को तो शहर की हवा लग गई थी.

प्रेम सुबह की शटल से शहर निकल जाता और शाम की इंटरसिटी ऐक्सप्रैस से घर आता. साफसुथरे कपड़ों में बेटे को शहर जाने को तैयार होता देख मां संतोष कर लेतीं कि चलो लड़का अपने पैरों पर खड़ा हो गया है. लेकिन अपने सूने खेत को देख कर उन की आंखें भर आतीं. एक दिन सुबह पड़ोस की मधु को रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ा देख कर प्रेम को सुखद आश्चर्य हुआ. पर उस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि मधु से कुछ पूछे. फिर भी उस से रहा नहीं गया तो उस ने पूछ ही लिया, ‘‘जाना कहां है आप को?’’ जवाब में मधु का ठहरा हुआ उत्तर सुन कर प्रेम ने कहा, ‘‘फिर तो आप गलत साइड में खड़ी हैं, जहां आप को जाना है वहां के लिए आप को औटो रोड के दूसरी तरफ से मिलेगा.’’ एक दिन लौटते वक्त प्रेम कुछ ज्यादा ही लेट हो गया था. इंटरसिटी ऐक्सप्रैस का अनाउंसमैंट काफी दूर से ही सुनाई दे रहा था. प्रेम हड़बड़ाहट में बस से उतरा और टिकट काउंटर की ओर दौड़ा. वहां मधु को देखते ही उस के पैर रुक गए. मधु ने बताया कि उस ने दोनों के टिकट ले लिए हैं. ट्रेन ने हलकी स्पीड पकड़ ली थी, लेकिन दोनों हिम्मत कर के ट्रेन में चढ़ गए. गेट के पास खड़े दोनों के लिए यह एक नया अनुभव था. मधु ने बताया कि वह शहर के कालेज में पढ़ाई कर रही है.

फिर तो जैसे रोज का क्रम बन गया. कभी सुबह की शटल का टिकट मधु लेती, तो किसी दिन शाम की इंटरसिटी का टिकट प्रेम लेता. समय गुजरता गया. मधु और प्रेम की दोस्ती में प्रगाढ़ता बढ़ती गई. जब कभी दोनों जल्दी ही फ्री हो जाते, तो शहर में खूब घूमते. एक दिन मधु ने प्रेम को बताया कि उसे लड़के वाले देखने आने वाले हैं. वातावरण में निस्तब्धता छा गई. मधु ने देखा कि प्रेम की आंखों में आंसू आ गए हैं. मधु ने प्रेम का हाथ थाम लिया और बोली, ‘‘प्रेम, मेरे चाचा से बात करो न.’’ प्रेम ने सोचा कि मां को बता दूं. फिर जाने क्या सोच कर वह चुप रह गया. लेकिन अगले रविवार की शाम वह मधु के घर जा पहुंचा. वहां मधु के चाचा मिले तो उन्होंने प्रेम के अभिवादन का उत्तर दे कर प्रेम को बैठने का इशारा किया. प्रेम पास की ही एक कुरसी पर बैठ गया और अपने शब्दों को जुटाने का प्रयत्न करने लगा. चाय का एक घूंट लेते हुए मधु के चाचा ने कहा, ‘‘काफी समय से हम लोगों को सोनेचांदी का व्यवसाय है. दूरदूर तक हमारे यहां के जेवर प्रसिद्ध हैं.’’

ये भी पढ़ें- फिर से नहीं

फिर उन्होंने एक पुराना अलबम दिखाया जिस में एक महारानी जैसी महिला की आभूषणों से लदी हुई तसवीर थी. उन्होंने बताया कि वह किसी राजघराने की महिला थी और उस के सारे जेवरातों का निर्माण उन के वंशजों ने किया था. प्रेम जैसे जमीन में गड़ गया था. उन्होंने प्रेम की ओर मठरी की प्लेट बढ़ाई और बोले, ‘‘मधु की शादी तय हो गई है, तुम महल्ले के लड़के हो शादी के कामों में हाथ तो बंटाना ही पड़ेगा.’’ प्रेम के कानों में जैसे सीसा घुल गया. उस की आंखों के आगे धुंधलका छा गया. उस ने सिर नीचा किए ही मधु के चाचा को प्रणाम किया और तेजी से मधु के घर से बाहर निकल आया. धीरेधीरे सुस्त कदमों से चल कर वह घर पहुंचा तो उस की मां ने उस से कहा, ‘‘बेटा, छुट्टी के दिन तो घर में रहा कर, मैं तरस जाती हूं, तेरा मुख देखने को.’’ मां की कही बात का कोई उत्तर कहां था प्रेम के पास? वह बोझिल मन से पलंग पर लेट गया. मां ने माथा छू कर कहा, ‘‘तुझे तो बुखार है बेटा, मैं अभी काढ़ा देती हूं.’’ थोड़ी देर में प्रेम को होश ही नहीं रहा.

सुबह नींद खुलने पर मां को पैरों के पास, जमीन पर लेटा देख कर प्रेम का कलेजा मुंह को आ गया. उसे लगा कि वह तो जिंदगी को घर के बाहर ढूंढ़ रहा था पर उस की जिंदगी, उस का सब कुछ तो घर के अंदर है. उस की आंखें फिर गीली हो गईं. उस की आंखों में बीते दिन का सारा घटनाक्रम एक फिल्म की तरह घूम गया. मां जब जागीं तो प्रेम को पास न पा कर चौंक गईं. घबराहट में उन्होंने प्रेम को आवाज लगाई तो दूर से ही प्रेम की आवाज आई, ‘‘मां, खेत में हूं.’’ बेटे को खेत में काम करता देख मां की आंखें भर आईं. मधु की शादी की चकाचौंध. प्रेम कानों में हाथ लगा कर शादी का हुल्लड़ न सुनने की असफल कोशिश करता रहा. फिर मधु उस घर और उस कसबे को हमेशाहमेशा के लिए छोड़ कर चली गई. प्रेम न तो उस ओर झांका, न उस ओर पलटा ही.

आगे पढ़ें- प्रेम जीजान लगा कर खेत में काम करने लगा. फिर…

शादी का बंधन बना रहे अटूट, इसलिए इन बातों को रखें ध्यान

शादी बड़ी धूमधाम से की जाती है. सभी बड़ेबुजुर्ग, शुभचिंतक, रिश्तेदार नए जोड़े को आशीर्वाद देते हैं कि उन का वैवाहिक जीवन सफल हो. खुद पतिपत्नी भी इसी उम्मीद से अपने रिश्ते को आगे बढ़ाते हैं कि हाथों से हाथ न छूटे, यह साथ न छूटे. फिर क्यों कई बार नौबत तलाक तक पहुंच जाती है या क्यों ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बनते हैं? आंकड़े बताते हैं कि आज के बदलते समाज में ये बातें कुछ आम सी होती जा रही हैं. लेकिन जो पतिपत्नी अपने रिश्ते को ले कर सजग हैं, वे छोटीछोटी बातों का भी ध्यान रखते हुए अपने दांपत्य जीवन को हंसतेखेलते बिताना जानते हैं.

न छूटे बातचीत का दामन

शादीशुदा जीवन के लिए आपसी बातचीत का होना अनिवार्य है. शादी चाहे नई हो या फिर उसे हुए कितने ही साल क्यों न बीत गए हों, पतिपत्नी को एकदूसरे से बात करनी और एकदूसरे की सुननी चाहिए.

देहरादून के एक विश्वविद्यालय में कार्यरत पवन कहते हैं, ‘‘हमारे दिल में जो आता है उसे हम एकदूसरे को बताने से कभी नहीं हिचकिचाते. हां, मगर ऐसा हम प्यार से करते हैं.’’

सालों से साथ रहने के कारण पतिपत्नी न सिर्फ कही गई बातें ही सुनते हैं, बल्कि अनकही बातों को भी भांप लेते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो शादी के बंधन से सुख पाने वाले पतिपत्नी अपने साथी के उन विचारों और भावनाओं को भी समझ लेते हैं, जिन्हें उन का साथी शायद जबान पर न ला पाए. बातचीत का तारतम्य टूटने से पतिपत्नी के रिश्ते में दरार आ जाना स्वाभाविक है, जबकि बातचीत से पतिपत्नी दोनों को फायदा होता है.

ये भी पढ़ें- जब डेटिंग किसी से और शादी किसी और से

माफी मांगने में शर्म कैसी

अपने रिश्ते में विश्वास की मजबूती बनाए रखने के लिए कई बार अपनी गलती के लिए अपने साथी से माफी मांगना आवश्यक हो जाता है. जब हम सच्चे मन से माफी मांगते हैं तो हमारे साथी के मन में हमारे लिए और भी प्यार व सम्मान जाग उठता है. इलिनोइस विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की प्रोफैसर डा. जेनिफर रोबेनोल्ट के अनुसार, सच्चे मन से मांगी गई माफी से टूटे रिश्ते के भी जुड़ने के आसार बन जाते हैं. कई बार तो बिना गलती किए भी रिश्ते में आ गई खटास मिटाने के लिए अपने साथी से माफी मांगनी पड़ जाती है.

बड़प्पन इसी में है कि हम अपनी गलती को स्वीकारने में झिझकें नहीं. माफी की ताकत न केवल रिश्ते बचाती है, अपितु हमें बेहतर इंसान भी बनाती है.

दूसरों के समक्ष एकदूसरे के प्रति शालीनता

कई बार देखने में आता है कि दूसरों के समक्ष पतिपत्नी एकदूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में लग जाते हैं. फिर चाहे बात पत्नी द्वारा बनाई चीजों या पकवानों में कमी निकालने की हो या फिर पति द्वारा लिए गए किसी गलत निर्णय को सब के सामने दोहराने की. इस से रिश्ते के विश्वास में तो दरार आएगी ही, साथ ही एकदूसरे के आत्मविश्वास को भी ठेस पहुंचेगी. होशियार पतिपत्नी वे होते हैं, जो अपने जीवनसाथी की तारीफ करने के लिए जाने जाएं न कि उस की नुक्ताचीनी करने के लिए. सब के सामने साथी का मजाक बना कर हम अपने साथी के साथसाथ अपने रिश्ते का भी अपमान कर बैठते हैं.

ध्यान दें

छोटीछोटी बातों से ही रिश्ते मजबूत होते हैं. इसलिए निम्नलिखित सुझावों पर ध्यान दे कर आप अपने दांपत्य जीवन को मजबूती दे सकते हैं:

एकदूसरे की प्रशंसा करने में झिझकें नहीं.

अपने साथी से अपनी दिनचर्या के बारे में बात करें.

यदि आप को अपना साथी कुछ चुपचुप सा या आप के प्रति उदासीन लगे तो कारण जानने का प्रयास करें.

जब भी कोई काम कहना हो तो बिना ताने मारे कहें जैसे ‘मैं चाय बना लाती हूं, तब तक आप बिस्तर ठीक कर लें.’

अपनी प्यारी सी इच्छा भी जरूर साझा करें जैसे हम दोनों फलां फिल्म देखने चलें.

लड़ाईझगड़े के उपरांत

नौर्थवैस्टर्न विश्वविद्यालय में हुए शोध से एक बहुत रोचक बात सामने आई है कि यदि लड़ाईझगड़े के उपरांत पतिपत्नी किसी तीसरे की नजर से झगड़े के कारण व वजहों को लिखें तो झगड़ा बहुत जल्दी सुलझ जाता है. इस का श्रेय जाता है लिखने से पनपे तटस्थ दृष्टिकोण को. अगली बार जब आप दोनों में झगड़ा हो तो आप भी कारणों को लिख कर पढि़एगा. आप पाएंगी कि गुस्से की वजह से आप से कहां चूक हो गई.

संग चलें

ब्लैखेम कहते हैं कि एक ही दिशा में संग चलने से आपसी तालमेल तथा एकजुट होने की भावना का विकास होता है. एकदूसरे के आमनेसामने होने से अधिक एकदूसरे के साथ होने से पतिपत्नी में एकरसता बढ़ती है. इसी तरह जब बाहर खाना खाने जाएं तो एकसाथ बैठें. आमनेसामने तो विरोधी बैठते हैं या फिर इंटरव्यू देने गया व्यक्ति.

अच्छा रिपोर्ट कार्ड

‘‘मैं ने कहीं पढ़ा था कि सुखद बातें पत्थर पर लिखो और दुखद बातें पानी पर. मुझे यह बात इतनी अच्छी लगी कि शादी के बाद मैं ने घर की एक दीवार पर रिपोर्ट कार्ड लिख दिया. जब कभी मेरे पति कुछ सुखद करते हैं, चाहे मेरे बिना मांगे मेरी पसंद की आइसक्रीम लाना या फिर मेरे पसंदीदा हीरो की फिल्म मुझे दिखाना अथवा मेरे मायके का टिकट बुक करवा देना, मैं उस दीवार पर उस के लिए एक सितारा बनाती हूं और जब 5 सितारे इकट्ठे हो जाते हैं तब मैं उन की पसंद का कोई गिफ्ट उन्हें उपहारस्वरूप देती हूं.’’

जब बाकी के सभी रिश्ते जीवन की आपाधापी या उम्र की मार के आगे बिछुड़ जाते हैं तब पतिपत्नी का रिश्ता ही साथ निभाता है. हरकोई इसी उम्मीद में एक जीवनसाथी को चुनता तथा अपनाता है. लेकिन जब यह रिश्ता गलतफहमी, ईगो या प्रयास की कमी के कारण टूटता है तो दुख केवल 2 लोगों को ही नहीं, अपितु इस का असर पूरे समाज पर दिखता है. तो क्यों न जरा सी समझदारी दिखाते हुए अपने इस सुनहरे रिश्ते में थोड़ी और चमक घोल दी जाए.

जानिए कितना सुखमय है आप का दांपत्य

क्लीनिकल सैक्सोलौजिस्ट वैन वर्क, जो पुस्तक ‘द मैरिड सैक्स सौल्यूशन’ के लेखक भी हैं, कहते हैं, ‘‘एक जोड़े को आपसी प्यार बढ़ाने के लिए बढि़या सैक्स से अधिक ज्यादा सैक्स पर ध्यान देना चाहिए. यदि रोज सैक्स करना मुमकिन नहीं है, तो कम से कम रोज 10 मिनट आलिंगन, चुंबन या संग नहाने भर से अच्छा सैक्स होने के चांस बढ़ जाते हैं.’’

ये भी पढ़ें- दांपत्य की तकरार, बिगाड़े बच्चों के संस्कार

इस क्विज से जानिए अपने शादीशुदा रिश्ते की मजबूती. उत्तर सही या गलत में दें:

प्र. 1: हम दोनों की यौनक्रिया लाइफ आज भी नई जैसी है

-सही या गलत

प्र. 2: हमारी सैक्स जल्दबाजी भरी होती है, जिस में फोरप्ले की गुंजाइश बहुत कम होती है.

-सही या गलत

प्र. 3: हम दोनों के रिश्ते में सैक्स का महत्त्व कम है.

  • सही या गलत

प्र. 4: जब भी हम में लड़ाई होती है तो हम कईकई दिनों तक एकदूसरे से मुंह फुलाए रहते हैं.

-सही या गलत

प्र. 5: हमारे बीच हाथ पकड़ना, गले मिलना, सट कर बैठना काफी कम होता जा रहा है.

-सही या गलत

प्र. 6: हम दोनों कभी फिल्म देखने या खाना खाने बाहर नहीं जाते हैं. जब भी जाते हैं परिवार साथ होता है

-सही या गलत

प्र. 7: सैक्स की शुरुआत करने से मुझे डर लगता है कि कहीं मेरा साथी मुझे दुत्कार न दे.

-सही या गलत

प्र. 8: अपनी कोई भी समस्या अपने साथी से बांटने में मुझे कोई संकोच नहीं होता है.

-सही या गलत

प्र. 9: मेरा अपने साथी से भावनात्मक रूप से जुड़ाव है.

-सही या गलत

प्र. 10: मैं/मेरा साथी आजकल काम के कारण परेशान है.

-सही या गलत

यदि आप के अधिकतर उत्तर ‘सही’ में हैं तो आप को अपने रिश्ते की मजबूती की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है.

#coronavirus: रोजाना इस्तेमाल की चीजों को संक्रमित होने से बचाएं ऐसे

कोरोना वायरस के संक्रमण अब जबकि पूरे देश में फैल चुका है तो बेहद ही एतिहात की जरूरत है. लॉकडाउन के चलते हम बाहर जा ही नहीं रहे हैं. ऑफिस या तो बंद है या तो वर्क फ्राम होम है. और अगर हम बाहर किसी काम से जा रहे हैं तो खुद को तो विसंक्रमित कर लेते हैं लेकिन जो भी खाने पीने की वस्तुएं हम लाए हैं या जो भी फल, सब्जी हमने ली है उसे ठीक से विसंक्रमित नहीं कर पाते हैं. और पहने हुए कपड़े या तो हम तो बदलते ही नहीं है और बदल रहे हैं तो बाकी कपड़ों के साथ ही रख देते हैं. कुछ लोग पैकेट आदि पर तो सैनेटाइजर डालकर साफ कर रहे हैं लेकिन ये सही तरीका नहीं है. अगर सैनेटाइजर में इस्तेमाल होने वाले केमिकल शरीर में गए तो स्वास्थ्य संबंधी समस्या खासकर स्किन समस्या हो सकती है. साथ ही बाजार में सैनेटाइजर की इतनी उपलब्धता भी नहीं है कि हम सभी जगह इसे इस्तेमाल करें. तो आइये जानते हैं कि क्या करें कि हम खुद को सुरक्षित रख पाए.

न्यूज पेपर

सबसे पहले बात करते हैं न्यूज पेपर की जो हमारे घरों में रोज आता है. काफी लोगों ने कोरोना संक्रमण के चलते लेना बंद भी कर दिया है लेकिन घरों में बुजुर्गों को पेपर ही पढ़ने की आदत होती है. वो किसी डिजिटल प्लेटफार्म से नहीं पढ़ना चाहते हैं और वायरस दो चार दिनों में जाने वाला नहीं तो ऐसे में हम प्रतिबंध भी नहीं लगा सकते हैं. इस वक्त की सबसे बढ़िया बात ये है कि धूप तेज होने लगी है जिसका निशुल्क इस्तेमाल हम वायरस से बचने के लिए कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- #coronavirus: जानिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के बारे में रोचक जानकारी

बस करना ये है कि सुबह न्यूज पेपर के आते ही धूप में फैला कर रख देना है और साथ ही इसे किसी चीज़ से दबा कर रखना है ताकि उड़े नहीं. धूप सुबह 5:30 – 6:00 तक आ जाती है और न्यूज पेपर आने का भी यही वक़्त होता है. आते ही धूप में रखे और दो तीन घंटे बाद उसे उठा ले और फिर आराम से पढ़े. बिना संक्रमण के खतरे के. किसी दिन धूप नहीं है तो कोई बात नहीं. हम खुले में भी रख सकते हैं.

अमरीकन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने अपनी रिसर्च में ये दावा किया है कि ये वायरस खुली जगह पर 3-4 घंटे ही जीवित रह सकते हैं लेकिन ये किसी धातु या सतह पर गिरे तो 48 घंटे से लेकर दो तीन दिन तक एक्टिव रह सकते हैं.

इसलिए अगर मैटल या किसी सरफेस को छूते हैं तो हाथों को साबुन से धोए या सैनेटाइज करें l

फल या सब्जी

फल या सब्जी लाने के लिए घर से ही कपड़ों का थैला ले जाए. प्लास्टिक पोलीथीन में सब्जी या फल बिल्कुल न ले. प्लास्टिक पर वायरस देर तक जीवित रह सकता है. फल और सब्जियों को दो – तीन घंटे खुले में रखे. धूप में थोड़ी देर रख कर हटा ले और ऐसे ही खुली जगह पर रख दे. उसके बाद धोकर फ्रिज कर सकते हैं. कोई भी फल या सब्जी लेकर तुरंत न इस्तेमाल करें. कहीं कहीं माइल्ड सोप से सब्जी और फल धोने की सलाह दी जा रही है मगर स्वास्थ्य की दृष्टि से ये ठीक नहीं है. क्यू कि भले ही डिटर्जेंट/सोप माइल्ड हो मगर फिर भी कास्टिक सोडा की कुछ मात्रा तो होती है जो शरीर में चली गई तो नुकसान करेगी. साग या पत्ते वाली सब्जी जैसे धनिया पुदीने को कुछ देर के लिए हल्के गर्म में डाल दे. फिर अच्छे से ठंडे पानी से धोकर इस्तेमाल करें या फ्रिजड कर ले.

पहने हुए कपड़े

इसी तरह अगर आप बाहर जा रहे हैं और कुछ देर की खरीदारी के बाद वापस आने वाले हैं तो सर और मुंह को अच्छे से ढक ले. वापस आकर आप धोकर ही मुंह खोले और पहने हुए सारे कपड़े चेंज कर ले. कुछ देर के पहने हुए कपड़े अगर तुरंत धोना संभव नहीं है तो उसे धूप में खुले में घर से बाहर टांग दे और उसे अगले दिन फिर से पहन सकते हैं. हाँ बाहर के पहने हुए कपड़े बाकी धुले कपड़ों के साथ न रखें. खुले में टांगने से अगर वायरस कपड़े पर आए भी हैं तो अपने आप ही नष्ट हो जाएंगे लेकिन अगर आप कपड़े तह करके रख देती है तो उनके जीवित होने की संभावना बढ़ जाती है.

ये सारी छोटी छोटी बातें हैं जिनके ध्यान में रखकर आप खुद को और परिवार को कोरोना वायरस से बचा सकती हैं.

ये भी पढ़ें- जानें क्या है सर्वाइकल कैंसर और इसके लक्षण

हल है न: भाग-1

दीप्ति ने भरे मन से फोन उठाया. उधर से चहकती आवाज आई, ‘‘हाय दीप्ति… मेरी जान… मेरी बीरबल… सौरी यार डेढ़ साल बाद तुझ से कौंटैक्ट करने के लिए.’’

‘‘शुचि कैसी है तू? अब तक कहां थी?’’ प्रश्न तो और भी कई थे पर दीप्ति की आवाज में उत्साह नहीं था.

शुचि यह ताड़ गई. बोली, ‘‘क्या हुआ दीप्ति? इतना लो साउंड क्यों कर रही है? सौरी तो बोल दिया यार… माना कि मेरी गलती है… इतने दिनों बाद जो तुझे फोन कर रही हूं पर क्या बताऊं… पता है मैं ने हर पल तुझे याद किया… तू ने मेरे प्यार से मुझे जो मिलाया. तेरी ही वजह से मेरी मलय से शादी हो सकी. तेरे हल की वजह से मांपापा राजी हुए जो तू ने मोहसिन को मलय बनवाया. इस बार भी तू ने हल ढूंढ़ ही निकाला. यार मलय से शादी के बाद तुरंत उस के साथ विदेश जाना पड़ा. डेढ़ साल का कौंट्रैक्ट था. आननफानन में भागादौड़ी कर वीजा, पासपोर्ट सारे पेपर्स की तैयारी की और चली गई वरना मलय को अकेले जाना पड़ता तो सोच दोनों का क्या हाल होता.

‘‘हड़बड़ी में मेरा मोबाइल भी कहीं स्लिप हो गया. तुझ से आ कर मिलने का टाइम भी नहीं था. कल ही आई हूं. सब से पहले तेरा ही नंबर ढूंढ़ कर निकाला है. सौरी यार. अब माफ भी कर दे… अब तो लौट ही आई हूं. किसी भी दिन आ धमकूंगी. चल बता, घर में सब कैसे हैं? आंटीअंकल, नवल भैया और उज्ज्वल?’’ एक सांस में सब बोलने के बाद दीप्ति ने कोई प्रतिक्रिया न दी तो वह फिर बोली, ‘‘अरे, मैं ही तब से बोले जा रही हूं, तू कुछ नहीं कह रही… क्या हुआ? सब ठीक तो है न?’’ शुचि की आवाज में थोड़ी हैरानीपरेशानी थी.

ये भी पढ़ें- 19 दिन 19 कहानियां: जिंदगी के रंग-क्या चतुर्वेदी परिवार को पता चला कमला का सच ?

‘‘बहुत कुछ बदल गया है. शुचि इन डेढ़ सालों में… पापा चल बसे, मां को पैरालिसिस, नवल भैया को दिनरात शराब पीने की लत लग गई. उन से परेशान हो भाभी नन्ही पारिजात को ले कर मायके चली गईं…’’

‘‘और उज्ज्वल?’’

‘‘हां, बस उज्ज्वल ही ठीक है. 8वीं कक्षा में पहुंच गया है. पर आगे न जाने उस का भी क्या हो,’’ आखिर दीप्ति के आंसुओं का बांध टूट ही गया.

‘‘अरे, तू रो मत दीप्ति… बी ब्रेव दीप्ति… कालेज में बीरबल पुकारी जाने वाली, सब की समस्याओं का हल निकालने वाली, दीप्ति के पास अपनी समस्या का कोई हल नहीं है, ऐसा नहीं हो सकता… कम औन यार. यह तेरी ही लाइन हुआ करती थी कभी अब मैं बोलती हूं कि हल है न. चल, मैं अगले हफ्ते आती हूं. तू बिलकुल चिंता न कर सब ठीक हो जाएगा,’’ और फोन कट गया.

डोर बैल बजी थी. दीप्ति ने दुपट्टे से आंसू पोंछे और दरवाजा खोला. रोज का वही चिरपरिचित शराब और परफ्यूम का मिलाजुला भभका उस की नाकनथुनों में घुसने के साथ ही पूरे कमरे में फैल गया. नशे में धुत्त नवल को लादफांद कर उस के 4 दोस्त उसे पहुंचाने आए थे. कुछ कम तो कुछ ज्यादा नशे में डगमगाते हुए अजीब निगाहों से दीप्ति को निहार रहे थे. नवल को सहारा देती दीप्ति उन्हें अनदेखा करते हुए अपनी निगाहें झुकाए उसे ऐसे थामने की कोशिश करती कि कहीं उन से छू न जाए. पर वे कभी जानबूझ कर उस के हाथ पर हाथ रख देते तो किसी की गरम सांसें उसे अपनी गरदन पर महसूस होतीं. कोई उस का कंधा या कमर पकड़ने की कोशिश करता. पर उस के नवल भैया को तो होश ही नहीं रहता, प्रतिरोध कहां से करते. घुट कर रह जाती वह.

पिता के मरने के बाद पिता का सारा बिजनैस, पैसा संभालना नवल के हाथों में आ गया. अपनी बैंक की नौकरी छोड़ वह बिजनैस में ही लग गया. बिजनैस बढ़ता गया. पैसों की बरसात में वह हवा में उड़ने लगा. महंगी गाडि़यां, महंगे शौक, विदेशी शराब के दौर यारदोस्तों के साथ रोज चलने लगे. मां जयंती पति के निधन से टूट चुकी थी. नवल की लगभग तय शादी भी इसी कारण रोक दी गई थी. लड़की लतिका के पिता वागीश्वर बाबू भी बेटी के लिए चिंतित थे. सब ने जयंती को खूब समझाया कि कब तक अपने पति नरेंद्रबिहारी का शोक मनाती रहेंगी. अब नवल की शादी कर दो. घर का माहौल बदलेगा तो नवल भी धीरेधीरे सुधर जाएगा. उसे संभालने वाली आ जाएगी.

सोचसमझ कर निर्णय ले लिया गया. पर शादी के दिन नवल ने खूब तमाशा किया. अचानक हुई बारिश से लड़की वालों को खुले से हटा कर सारी व्यवस्था दोबारा दूसरी जगह करनी पड़ी, जिस से थोड़ा अफरातफरी हो गई. नवल और उस के साथियों ने पी कर हंगामा शुरू कर दिया. नवल ने तो हद ही कर दी. शराब की बोतल तोड़ कर पौकेट में हथियार बना कर घुसेड़ ली और बदइंतजामी के लिए चिल्लाता गालियां निकालता जा रहा था, ‘‘बताता हूं सालों को अभी… वह तो बाबूजी ने वचन दे रखा था वरना तुम लोग तो हमारे स्टैंडर्ड के लायक ही नहीं थे.’’

मां जयंती शर्मिंदा हो कर कभी उसे चुप रहने को कहतीं तो कभी वागीश्वर बाबू से क्षमा मांगती जा रही थीं.

दुलहन बनी लतिका ने आ कर मां जयंती के जोड़े हाथ पकड़ लिए, ‘‘आंटी, आप यह क्या कर रही हैं? ऐसे आदमी के लिए आप क्यों माफी मांग रही हैं? इन का स्तर कुछ ज्यादा ही ऊंचा हो गया है. मैं ही शादी से इनकार करती हूं.’’

ये भी पढ़ें- धागा प्रेम का: रंभा और आशुतोष का वैवाहिक जीवन ये कहां पहुंच गया

बहुत समझाबुझा कर स्थिति संभाली गई और लतिका बहू बन कर घर आ गई. पर वह नवल की आदतें न सुधार सकी. बेटी हो गई. फिर भी कोई फर्क न पड़ा. 2 सालों में स्थिति और बिगड़ गई. शराब की वजह से रोजरोज हो रही किचकिच से तंग आ कर लतिका अपनी 1 साल की बेटी पारिजात उर्फ परी को ले कर मायके चली गई. इधर मां जयंती को पैरालिसिस का अटैक पड़ा और वे बिस्तर पर आंसू बहाने के सिवा कुछ न कर सकीं.

होश में रहता नवल तो अपनी गलती का उसे एहसास होता. वह मां, दीप्ति, उज्ज्वल सभी से माफी मांगता. पर शाम को न जाने उसे क्या हो जाता. वह दोस्तों के साथ पी कर ही घर लौटता.

आगे पढ़ें- घर में जवान बहन दीप्ति है. उस की शादी नहीं करनी क्या?…

रणवीर सिंह के फैशन से इंस्पायर्ड हुए मोनिश चंदन, कराया लेटेस्ट फोटोशूट

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर मोनिश चंदन अपने स्टाइल स्टेटमेंट और अमेजिंग फैशन सेंस के लिए जाने जाते हैं. मोनिश कभी बिजनेसमेन के रूप में, कभी कैजुअल अटायर में तो कभी कुर्ते में पोज देते दिखाई देते हैं. इस से हट कर अपने लैटेस्ट फोटोशूट में मोनिश एक अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं. इस फोटोशूट में मनीष इंडो-वेस्टर्न लुक में हैं जिस की इंसपिरेशन वे बौलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को बताते हैं. मोनिश के अनुसार उन के इस शूट का आइडिया उन्हें रणवीर सिंह के वार्डरोब से आया है.

रणवीर सिंह अपनी सुपरहिट फिल्मों और दमदार एक्टिंग के अलावा अपनी बोल्ड फैशन चौइसेस और यूनिक ड्रेसिंग सेंस के लिए जाने जाते हैं. अन्य अभिनेताओं से हट कर वे ऐसी ड्रेसेस चुनते हैं जिन्हें पहनने से अधिकतर पुरुष घबराते हैं या कहें कभी पहन ही नहीं सकते. लेकिन रणवीर कभी शर्ट के नीचे घाघरा तो कभी फौर्मल्स के नीचे फंकी शूज पहन वे साबित कर चुके हैं कि लोग चाहे कुछ भी कहें उन के लिए यही उन का फैशन है.

इसी से इंस्पायर्ड मोनिश अपने फोटोशूट में बोल्ड और क्वर्की वाइब्स दे रहे हैं. एक तस्वीर में वे एंकल बूट्स व पेंसिल स्कर्ट के साथ टक्सीडो में नजर आ रहे हैं तो दूसरी में इंडोएथनिक बंदगला कुर्ता व स्कर्ट में जिस के साथ उन्होंने बैंगल्स और नथ पहनी है. यकीनन इस लुक को इतने ग्रेस और कौंफिडेंस के साथ कैरी करना हर किसी के बस की बात नहीं है.

ये भी पढ़ें- Lockdown पर मानवी गागरू का गिल्ट फ्री ब्रेक, बोलीं- कोई दूसरा औप्शन नहीं है

मोनिश कहते हैं, “मैं हमेशा से ही रणवीर सिंह का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं. जब फैशन की बात आती है तो यह बिलकुल आसान नहीं है कि आप बाहर जा कर ऐसे आउटफिट्स पहनें जो सामान्य से बेहद अलग हों, असाधारण हों. लेकिन, रणवीर एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्हें किसी के विचारों से फर्क नहीं पड़ता. इतनी ट्रोल्लिंग के बावजूद वे अपने लुक्स के साथ एक्सपैरिमेंट करना नहीं छोड़ते. यही कारण है कि आज हम सभी उन्हें फैशन इंफ्लुएंसर के रूप में जानते हैं. वे मेरे लैटेस्ट फोटोशूट के पीछे की प्रेरणा हैं.”

monish

अपने लुक को डिस्क्राइब करते हुए मोनिश बताते हैं, “मैं ने चमकदार, चटख रंगों को अपने अटायर में चुना जोकि इस विचारधारा को नकारते हैं कि पुरुषों को केवल हल्के रंग के कपड़े ही पहनने चाहिए. साथ ही, इस शूट में मैं कपड़े पहनने की पारंपरिक शैली से आगे निकला हूं.”

यकीनन, मोनिश चंदन हमेशा से चली आ रही पहनावे की पित्रसत्तात्मक सोच पर वार करते हैं, लेकिन वह फैशन ही क्या जो व्यक्ति को भीड़ से अलग न बनाता हो.

ये भी पढ़ें- Bollywood Singers की हालत पर Neha Kakkar ने खोली जुबान, कही ये बात

दोबारा मां बनी Bigg boss fame राहुल महाजन की ex वाइफ Dimpy गांगुली, इस वजह से हुआ था तलाक

बिग बौस फेम राहुल महाजन (Rahul Mahajan) की एक्स वाइफ डिंपी गांगुली (Dimpy Ganguly) दूसरी बार मां बनी हैं. हाल ही में डिंपी गांगुली (Dimpy Ganguly) ने अपने दूसरे बेटे के जन्म की जानकारी देते हुए एक फोटो शेयर की है, जिसके बाद जहां एक तरफ सेलेब्स उन्हें बधाई दे रहे हैं तो वहीं फैंस उनकी फोटोज को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल कर रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं डिंपी  गांगुली का वायरल पोस्ट….

बेटे की फोटो के साथ नाम का किया खुलासा

डिंपी गांगुली ने एक फोटो शेयर करते हुए बेटे की फोटो शेयर की है. साथ ही डिंपी गांगुली ने इंस्टाग्राम पर बच्चे की फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, ‘ईस्टर इव पर जन्मा बन्नी ब्लू…आर्यन रॉय.’

 

View this post on Instagram

 

Born on the eve of Easter..my little Bunny Blue is here! 🐰 Aryaan Roy 11.04.2020.

A post shared by Dimpy (@dimpy_g) on

ये भी पढ़ें- Bollywood Singers की हालत पर Neha Kakkar ने खोली जुबान, कही ये बात

‘राहुल की दुल्हनिया’ में हुई थी शादी

डिंपी गांगुली (Dimpy Ganguly) सलमान खान के शो बिग बॉस 8 में नजर आ चुकी हैं. वहीं इससे पहले टीवी रियलिटी शो ‘राहुल की दुल्हनिया’ में राहुल महाजन ने डिंपी गांगुली को अपनी दुल्हन बनाया था. दोनों की शादी साल 2010 में हुई, लेकिन राहुल महाजन और डिंपी गांगुली का रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चला और साल 2015 में दोनों ने तलाक ले लिया था, जिसका कारण राहुल महाजन का मारपीट करना बताया गया था.

बिजनेसमैन से की दूसरी शादी

 

View this post on Instagram

 

My world ❤️ #blessed

A post shared by Dimpy (@dimpy_g) on

तलाक होने के बाद डिंपी गांगुली (Dimpy Ganguly) ने दुबई बेस्ड बिजनसमैन रोहित रॉय से शादी की थी. डिंपी गांगुली और उनके पति रोहित रॉय पश्चिम बंगाल में एक ही शहर के रहने वाले हैं. डिंपी और रोहित की तीन साल की बेटी है जिसका नाम रियाना है. पिछले साल दिसंबर में डिंपी ने प्रेग्नेंसी के बारे में बताते हुए बेबी बंप की फोटोज भी शेयर की थी.

बता दें, डिंपी गांगुली (Dimpy Ganguly) और राहुल महाजन (Rahul Mahajan) की शादी काफी सुर्खियों में रही थी, जिसके बाद डिंपी (Dimpy Ganguly) की फैन फौलोइंग भी काफी बढ़ गई थी. वहीं उनकी दूसरी शादी भी इसी कारण काफी चर्चाओं में आ गई थी.

ये भी पढ़ें- coronavirus: लॉकडाउन खत्म होने के बाद सबसे पहले ये काम करेगी ‘कार्तिक’ की ‘नायरा

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें