ज़िंदगी-एक पहेली: भाग-12

निधि के पास मोबाइल तो था नहीं इसलिए निधि की अविरल से बात तभी हो पाती थी जब वह रेनु के घर जाती थी. पर ये भी हमेशा मुमकिन नहीं था.

वहीं दूसरी तरफ अविरल को अपनी पॉकेट मनी के लिए जितने भी पैसे अपने पापा से मिलते थे , वह सारा पैसा फोन पर ही खर्च कर देता था. वह घंटों रेनु  से बातें करता जिससे किसी तरह वह निधि के बारे में  बात कर पाये लेकिन रेनु  हमेशा ही निधि की बात करने से बचने लगी. लेकिन अविरल के पास और कोई भी जरिया नहीं था निधि के बारे में पता करने का, तो वह न चाहते हुए भी रेनु  से बात करता रहा.

1 दिन अविरल अपनी मौसी के घर आया हुआ था तब उसने दीप्ति को बात करते हुए सुना कि निधि की बर्थ-डे आ रही है और उसके मामा ने जन्मदिन के पहले ही गिफ्ट में मोबाइल फोन दिया है. अविरल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि अभी तक उसने निधि को अपना नंबर तक नहीं बताया और रेनु  निधि का नंबर देगी नहीं.

अविरल से रहा नहीं गया . उसने एक दिन रेनु  को फोन करके बोला , “रेनु  निधि की बर्थडे है और मुझे उसे विश करना है”. पहले तो रेनु  ने नंबर देने से मना कर दिया और बोली कि निधि ने नंबर देने से मना किया है.

अविरल ने बोला कि,” मुझे केवल 1 बार विश करना है. नंबर तो मैं निकाल ही लूँगा भाभी के मोबाइल से लेकिन फिर मेरा तुम्हारा साथ खत्म. उसके बाद रेनु  ने उसे नंबर दे दिया और कॉल करने का समय बताते हुए बोला “1 बार ही कॉल करना”.

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अगले दिन  निधि का जन्मदिन था  तो अविरल सारी रात कागजों पर लिखता रहा कि उसे निधि से क्या बोलना है और पेजों को फाड़ता रहा. अविरल से अब समय कट नहीं रहा था. जैसे- तैसे सुबह हुई . बड़ी मुश्किल से 8 बजा. 8 बजते ही अविरल ने फोन किया तो निधि ने ही फोन उठाया. थोड़ी देर तक दोनों शांत रहे फिर अविरल ने उसे बर्थड़े विश किया. अविरल के मुंह से 1 भी शब्द नहीं निकला जबकि उसने पूरी रात बोलने कि तैयारी की थी. अविरल ने फिर निधि से कहा “निधि अब मैं रेनु  को फोन नहीं करूंगा” तो निधि ने कहा कि “ऐसा मत करना, अगर रेनु  और दीप्ति तुमसे गुस्सा हो गईं तो मुझे भी भूल जाना”. अविरल को कुछ समझ नहीं आया. थोड़ी देर बाद दोनों ने bye बोला और फोन रख दिया.

अविरल आज बहुत खुश था उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वह जब चाहे निधि से बात कर सकता है.

2 दिनों बाद अविरल ने रेनु  को फोन किया और नॉर्मल बात करने लगा.  तब रेनु  ने बताया कि,” निधि बहुत ही हल्के दिमाग कि लड़की है और तुरंत ही किसी को भी पसंद कर लेती है. अभी कुछ दिन पहले ही 1 कज़िन  कि शादी में 1 लड़के के साथ खूब डांस कर रही थी. निधि के पापा ने भी उसे इस बात के लिए बहुत डांटा था”.

अविरल को बहुत बुरा लगा. उसने बात क्लियर करने के लिए निधि को फोन किया. फोन निधि कि मम्मी ने उठाया. अविरल ने फोन काट दिया. उसने कई बार फोन किया लेकिन फोन उसकी मम्मी ने ही उठाया. अविरल ने गुस्से में अपना हाथ ज़ोर से मेज़ पर मारा.

मेज़ पर 1 कील निकली हुई थी जिससे उसे खून बहने लगा. अविरल ने फिर फोन किया और फोन फिर से निधि कि मम्मी ने उठाया. अविरल बोला “नमस्ते चाची जी, मैं अविरल बोल रहा हूँ. थोड़ा निधि से बात करा दीजिये” तो उन्होने निधि को बुला दिया.

अविरल ने सारी बात निधि को बताई तो निधि बोली “अविरल सब झूठ है, तुम तो मुझे सिर्फ 7-8 महीने से पसंद करते हो लेकिन मैं तो तुम्हें दीप्ति दीदी की शादी से ही पसंद करने लगी थी लेकिन सोचती थी कि मैं गरीब हूँ, मुझे ऊंचे ख्वाब नहीं देखने चाहिए”. अविरल और निधि दोनों कि आँखों में आँसू आ गए.

तब निधि ने अविरल को बताया कि “मेरी मम्मी को सब कुछ पता है. वह ही मेरी अकेली दोस्त हैं और मैं उनसे कुछ नहीं छुपाती”.

अब अविरल की अक्सर ही निधि से बात होती रहती जिसका रेनु  और दीप्ति को कुछ पता नहीं था. बातों बातों में अविरल को पता चला कि रेनु  के मम्मी पापा निधि कि शादी में हेल्प करेंगे इसी वजह से निधि उन लोगों से अलग नहीं हो पा रही.

अब अविरल बहुत अच्छी तरह 1 बात जन चुका था कि अगर निधि कि फॅमिली राजी नहीं हुई तो निधि कभी मुझसे शादी नहीं करेगी चाहे जो कुछ भी हो जाए.

कुछ समय बाद अविरल का IIT pre का एक्जाम भी हो गया जो कि बहुत अच्छा गया. अविरल के दिन भी मिले जुले जाने लगे. निधि जब भी रेनु  के घर जाती तो अविरल के दिन केवल फोन देखते ही बीतते क्यूँ कि निधि इतनी ज्यादा पारिवारिक थी कि वह फोन करने से भी डरती थी.

अब अविरल का रिज़ल्ट भी आ चुका था. उसकी रैंक बहुत अच्छी आई थी. अविरल के पापा का सर आज फिर ऊंचा हो गया था. लेकिन अभी IIT का mains बाकी था जिसकी डेट भी आ चुकी थी. अविरल ज़ोरशोर से उसकी तैयारी में लग गया.

परीक्षा कि डेट आ चुकी थी. अविरल दिल्ली जाने कि तैयारी करने लगा. शाम को कुछ काम से वह बाइक लेकर मार्केट गया जहां उसका एक्सिडेंट हो गया और उसका दाहिना हाथ और पैर टूट गया. जब उसे होश आया तो वह फ्लाइट कि जगह हॉस्पिटल में था. अविरल ज़ोर ज़ोर से चिल्लाकर रोने लगा और एक्जाम देने कि जिद करने लगा, लेकिन कहते हैं न होनी को कौन टाल सकता है. अविरल का एक्जाम छूट गया. 2 महीने बाद अविरल ठीक होकर घर आया तो उसे लगा जैसे कि उसकी दुनिया लुट गई हो .

अविरल के पहले ही 3 साल बर्बाद हो चुके थे तो अब उसने एक इंजीन्यरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया जो दिल्ली के आउटर में ही था. अविरल ने दाखिला ले तो लिया था लेकिन वह बहुत उदास रहता था. कॉलेज में जाते साथ ही रैगिंग स्टार्ट हो गयी जिससे वह और परेशान रहने लगा लेकिन निधि से बात करके वह अपनी सारी परेशानी झट से भूल जाता. अविरल और निधि पूरी रात एक – दूसरे से बातें करते रहते.

अगर निधि कहीं चली जाती और कुछ दिन फोन नहीं करती तो अविरल पागल सा होने लगता. उसे निधि की लत सी लग गयी थी.

रेनु  भी अक्सर अविरल को फोन करती रहती. एक दिन अविरल ने दीप्ति से निधि के बारे में  बोला तो दीप्ति बोली “अवि ऐसा नहीं हो सकता”. अविरल ने कहा “भाभी मुझमे क्या कमी है” तो दीप्ति ने बताया कि “निधि तुम्हारे लायक नहीं है. अभी उसकी शादी की बात एक डॉक्टर से चल रही है निधि ने खुद मुझसे बोला था कि दीदी उससे मेरी शादी करा दो. अगर वो तुम्हें चाहती तो उससे शादी के बारे में न बोलती.तुम निधि को छोड़ो और कहो तो रेनु  से तुम्हारी शादी करा दूँ. वह तुम्हें पसंद भी करती है”.

अविरल ने तुरंत बोला ,“भाभी मैं ये तो नहीं जानता कि मेरी निधि से शादी हो पाएगी या नहीं लेकिन यह जरूर जनता हूँ कि अगर मेरी शादी होगी तो वह निधि से ही होगी”

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अब अविरल को समझ में आया कि रेनु  और दीप्ति क्यूँ उसे और निधि को अलग करना चाहती थी. अविरल ने सारी बात निधि को बताई तो निधि बोली कोई बात नहीं तुम किसी को पता मत होने देना कि हमारी बातें होती हैं. और ऐसे ही अंजान बनकर सभी से बातें करते रहना. निधि भी अपने आपको बहुत ही दबा हुआ महसूस करने लगी कि वह चाहकर भी रेनु  का घर नहीं छोड़ पा रहीं थी.

अगले भाग  में हम जानेंगे कि अविरल के साफ साफ मना करने पर रेनु  अविरल को पाने के लिए क्या करती है और अविरल कैसे सारी चीजों को हैंडल करके अपनी मंजिल को पाता है….

अगर रहना हैं 40 की उम्र में फिट, तो फौलो करें ये 20 टिप्स

महिलाएं पति और बच्चों का तो खूब ख्याल रखती हैं पर खुद को इग्नोर करती हैं. युवावस्था तो सब झेल जाती है, पर 40 की दहलीज पर पहुंचने पर समझदारी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. इस उम्र में फिट रहने के 20 टिप्स हम आपको बता रहे हैं. इन में से कुछ तो आप जानती होंगी पर कुछ आप के लिए बिलकुल नए होंगे. अगर आप इन्हें धीरेधीरे अपने लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लें तो बहुत सी परेशानियों से आप दूर रहेंगी.

1.कैल्शियम और आयरन हासिल करें: हिंदुस्तानी महिलाओं में आयरन और कैल्सियम की कमी आमतौर पर पाई जाती है. एक बार इन दोनों के टैस्ट करा लें और खानपान में ऐसी चीजें शामिल करें, जिन में इन की मात्रा अधिक हो. इन की गोलियां लेने से परहेज न करें.

2.एक प्याला सेहत का: कौफी हमारी दोस्त होती है. इस में मौजूद कैफीन फैट को एनर्जी में बदलने के लिए उकसाता है. यह काम ग्रीन टी भी बखूबी करती है. इसलिए दोनों को अपना दोस्त मानें.

3.वेट ट्रेनिंग करें: आप ने पहले कभी जिम जौइन की हो ये नहीं फर्क नहीं पड़ता. अब मसल्स कमजोर पड़ रहे हैं. वेट ट्रेनिंग उन्हें मजबूती देती है. हिंदुस्तानी महिलाएं वेट ट्रेनिंग से परहेज करती हैं पर इस के कई फायदे हैं. जिम नहीं जा सकतीं तो घर पर इस की व्यवस्था कर लें.

4.शैड्यूल चेंज करें: अगर आप योग करती हैं या सैर पर जाती हैं और लंबे समय से यह करती आ रही हैं तो इस शैड्यूल में थोड़ा बदलाव करें. हैल्थ स्पैशलिस्ट से सलाह ले कर कुछ और चीजें शामिल करें तो कुछ चीजों को बंद करें. सैर का टाइम भी बदल सकें तो बदलें.

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5.सप्लीमैंट्स का इस्तेमाल: इस उम्र में आप को सब से ज्यादा फिक्र अपने जोड़ों और हड्डियों की होनी चाहिए. कैल्सियम के बारे में हम बात कर चुके हैं. आप विटामिन डी, सी और ई का खयाल रखें. विटामिन सी और ई को एकसाथ लें. एक्सरसाइज करती हैं तो उस से 1 घंटा पहले डाक्टर से बात कर सप्लीमैंट का चुनाव करें.

6.पोस्चर पर ध्यान दें: पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को कंधों, गरदन और कमर दर्द की शिकायत ज्यादा होती है. इस की प्रमुख वजह बैठने और सोने के तरीके में गड़बड़ी है. अब जरा इस पर ध्यान दें. फिजियोथेरैपिस्ट से बात करें, कैसे बैठें, कैसे सोएं वगैरह जानें.

7.दिमाग से तैयार हों: खुद को बदलाव के लिए तैयार करें. लेख पढ़ने और मन में सोचने से कुछ नहीं होगा. अगर स्वस्थ रहना चाहती हैं तो इसे ठान लें. शुरू में लोग टोकेंगे भी मगर उसे आप को संभालना है. ‘मैं करूंगी’, ‘मैं करना चाहती हूं’ की जगह ‘मैं कर रही हूं’, ‘मैं जा रही हूं’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें.

8.स्पोर्ट्स शूज खरीदें: हो सकता है आप को आदत न हो, मगर टहलने के लिए स्पोर्ट्स शूज अच्छे होते हैं. अपनी पसंद के शूज खरीदें और उसी में टहलने या जिम जाएं.

9.गलती से घबराएं नहीं: अगर कुछ नतीजे सामने नहीं आए तो परेशान होने की जरूरत नहीं. दोबारा नई तकनीक के साथ चीजें शुरू करें. ऐक्सपर्ट की मदद लेने में कोई बुराई नहीं.

10.सब को बताएं: आप जो कुछ कर रही हैं और जो कुछ करना चाहती हैं उस के बारे में खुद से जुड़े लोगों को जरूर बताएं. ताकि वे लोग आप की सफलता पर आप को बधाई दें और टोकते भी रहें, ‘आज जिम नहीं जा रहीं…’

11.खानासोना ऐसे हो: रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले खा लें. खाने के बाद कम से कम 100 कदम टहलें, लेकिन खाने के तुरंत बाद नहीं थोड़ा रुक कर.

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12.स्पा और मसाज: हफ्ते में एक बार अगर जेब आप को मंजूरी देती हो तो मसाज और स्पा का लुत्फ उठाएं. नहीं तो घर में किसी से कहें वह आप की मालिश कर दे. प्यारमुहब्बत से सब काम हो जाते हैं.

13.बाथरूम पर ध्यान दें: घर का सब से खतरनाक इलाका बाथरूम होता है. घर के बड़े अकसर वहीं फिसल कर चोट खाते हैं. घर में आदेश जारी कर दें कि कोई भी बाथरूम को गीला नहीं छोड़ेगा. इस्तेमाल के बाद तुरंत वाइपर से पानी पोंछ दें. बाथरूम में कभी जल्दी में न घुसें.

14.शुरुआत फल के साथ: दिन की शुरुआत किसी फल से करें. सेब अच्छा फल है, नहीं तो जो भी मौसमी फल मिले उसे खाएं. सेहत के लिए जितना अच्छा अनार है उतना ही अमरूद भी है.

15.आंवला कैंडी, बेल का मुरब्बा: पेट को दुरुस्त रखने में बेल का कोई जवाब नहीं. इस का फल तो आता ही है, मुरब्बा, पाउडर और सिरप भी आता है. आंवले की कैंडी इस्तेमाल करें.

16.दिन में 2 बार: अगर कंफर्टेबल फील करना चाहती हैं तो दिन में 2 बार पेट साफ करें. शरीर में हलकापन रहेगा.

17.पिएं और पीती रहें: अरे रे, शराब मत समझ लेना. हम पानी की बात कर रहे हैं. पानी किसी टौनिक से कम नहीं है. हमेशा साथ रखें और सिप कर के पीती रहें.

18.प्रोटीन से प्यार: प्रोटीन आप के कमजोर होते मसल्स में नई जान फूंक देगा. इस की मात्रा बढ़ाएं. यह मेटाबौलिज्म को तेज करते हुए फैट बर्न करने में भी मदद करता है.

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19.चैकअप कराएं: डाक्टर से सलाह ले कर शुगर, कोलैस्ट्रौल, थाइराइड और एचबी की जांच करवाती रहें. जहां भी गड़बड़ी हो डाइट प्लान उसी हिसाब से करें.

20.नाराज होना बंद करें: यह बात बहुत जरूरी है. क्या जल गया, क्या खल गया इन सब का ध्यान रखना आप का काम है, मगर पैनिक होने की जरूरत नहीं. बच्चों को खुद सीखने दें. खुश रहना 100 बीमारियों का इलाज है.

Mohena Kumari Singh के ये 4 लुक हैं #SaareeChallenge के लिए परफेक्ट, आप भी कर सकती हैं ट्राय

लौकडाउन के चलते घर बैठे-बैठे लोग कई तरीके निकाल रहे हैं अपनी बोरियत को कम करने के लिए. इसी के चलते सोशल मीडिया पर नया ट्रैंड साड़ी चैलेंज शुरू हो गया है, जो काफी वायरल हो रहा है. वहीं जहां आम लड़किया अपनी साड़ियों में फोटो शेयर कर रही हैं तो टीवी एक्ट्रेसेस भी इस मामले में कम नही हैं. आज हम #SaareeChallenge में ये रिश्ता क्या कहलाता है (Ye Rishta Kya Kehlata Hai) फेम एक्ट्रेस मोहेना कुमारी सिंह (Mohena Kumari Singh) के कुछ लुक दिखाएंगे, जिसे आप भी ट्राय कर सकती हैं.

1. मोहेना की यैलो साड़ी है परफेक्ट

अगर आप किसी वेडिंग फंक्शन में सिंपल लेकिन ट्रैंडी साड़ी ट्राय करना चाहती हैं तो मोहेना कुमारी सिंह की ये यैलो साड़ी परफेक्ट लुक है. लाइट डिजाइन पैटर्न वाली बनारसी साड़ी आपके लुक को फैशनेबल दिखाने में मदद करेगा.

 

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Have a caption for this one ? Picture credit – Photographer husband @suyeshrawat

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2. लाइट कलर है परफेक्ट 

अगर आप लाइट कलर वाली साड़ी की शौकीन हैं तो मोहेना की ये सिंपल साड़ी आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन है. हैवी कढ़ाई के साथ लाइट कलर एकदम परफेक्ट औप्शन है.

3. राजस्थानी पैटर्न करें ट्राय

अगर आप राजस्थानी पैटर्न वाली साड़ी की शौकीन हैं तो मोहेना की ये साड़ी आपके लिए परफेक्ट है. आप इस साड़ी को घर पर या बाहर आउटिंग के लिए ट्राय कर सकती हैं. ये कलर आपके लुक को ब्राइट दिखाने में मदद करेगा.

4. फ्लावर पैटर्न करें ट्राय

 

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The Wedding Attendees @suyeshrawat #vscoredagol Wedding

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अगर आप लाइट कलर की साड़ी के साथ कोई ट्रैंडी पैटर्न ट्राय करना चाहती हैं तो मोहेना की ये फ्लावर पैटर्न वाली साड़ी आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. इसके साथ आप हैवी ज्वैलरी भी ट्राय कर सकती हैं. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट रहेगा.

 

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Saas Bahu Saga 💛💚❤️

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बता दें, हाल ही में लौकडाउन के बीच महिलाएं एक-दूसरे को #SaareeChallenge दे रही हैं, जिसमें सभी महिलाएं साड़ी पहने हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं. साथ ही वह अपनी दोस्त और रिलेटिव्स को ये चैलेंज दे रही हैं.

#coronavirus: नए तरह के विश्व युद्ध का जन्म, क्या होगा दुनिया का भविष्य ?

कोरोना फेमिली का नया कोविड-19 वायरस दुनियाभर में जैसेजैसे खूंखार होता जा रहा है वैसेवैसे इस संकट के नएनए आयाम सामने आ रहे हैं. इसने दुनिया में एक नए तरह के विश्व युद्ध को जन्म दे दिया है. इस बार दुनियाभर के देश चिकित्सा उपकरणों के लिए एकदूसरे से भिड़ सकते हैं.

दरअसल, पूरी दुनिया को हथियार बेचने वाले अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में कोरोना फैलने के बाद दवाओं, मास्कों और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी हो गई है जिसके बाद ये देश, विशेषकर अमेरिका, गुंडागर्दी और ताकत के बल पर इन सामानों पर क़ब्ज़ा जमा रहे हैं जिससे एक नया संकट पैदा हो सकता है. इस लूटमार में सब से पहले अमेरिका और फिर इस्राईल का नाम सामने आ रहा है.

इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजने का अनुरोध किया है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने देश से वेंटिलेटर और अन्य उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसका पहला शिकार कनाडा हुआ. वहां भेजी जाने वाली चिकित्सा उपकरणों की खेप अमेरिका में रोक ली गई, जिसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री ने जवाबी कार्यवाही की धमकी दी है.

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उधर, अमेरिका ने बैंकाक से जरमनी जाने वाली फेसमास्कों की एक बड़ी खेप पर बैंकाक हवाई अड्डे पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करके उसे अमेरिका भेज दिया. इसी तरह अमेरिका ने जरमनी द्वारा चीन से खरीदे गए मास्कों की एक बड़ी खेप पर क़ब्ज़ा कर लिया और फिर उसे भी अमेरिका भेज दिया. जबकि, जरमनी ने इन मास्कों की क़ीमत भी अदा कर दी थी.

इसी तरह चीन से मास्कों की एक खेप इटली जा रही थी मगर बीच में चेक गणराज्य ने उसे ज़ब्त कर लिया. कीनिया में भी इसी प्रकार की घटना घटी है. यहां भी जरमनी भेजे जाने वाले 60 लाख मास्कों की एक खेप रास्ते में ही कहीं गायब हो गई.

लेकिन, इन सब में इस्राईल सब से आगे है. जब कोरोना ने इस्राईल में दस्तक दी तो उसे पता था कि चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी की वजह से वह कोरोना से लड़ने की ताक़त नहीं रखता. यही वजह है कि इस्राईलियों ने कोरोना को एक स्वास्थ्य समस्या के बजाय सुरक्षा समस्या समझा और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की ज़िम्मेदारी अपनी खुफिया एजेन्सी ‘मोसाद’ के हवाले कर दी.

इस्राईल में लगभग 3 हज़ार ही वेंटिलेटर मशीने हैं. ऐसे में संक्रमण फैला तो उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. सो, खुफिया एजेन्सी मोसाद ने कोरोना से लड़ने के लिए ज़रूरी सामान आयात किए हैं, लेकिन यह किसी को नहीं मालूम कि मोसाद ने यह सामान किस राह से इस्राईल पहुंचाए हैं या कहां से खरीदा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि मोसाद ने कुछ सामानों की व्यवस्था समुद्री जहाज़ों को लूट कर की है जबकि कुछ उपकरण एक देश से आयात किया है लेकिन उस देश का नाम बताने को वह तैयार नहीं है.

एक औनलाइन पोर्टल से बात करते हुए इस्राईल मामलों के विशेषज्ञ इस्माईल अलजूरानी ने बताया है कि मोसाद ने भूमध्य सागर में कई जहाज़ों पर हमला करके भारी मात्रा में कोरोना से बचाव के सामान लूटे हैं.  उन्होंने कहा कि कोरोना से मुक़ाबले के लिए आवश्यक चीज़ों की आपूर्ति की ज़िम्मेदारी मोसाद को दिए जाने से पता चलता है कि इस्राईल कितने गहरे संकट में फंस चुका है और अगर संक्रमण बढ़ा तो इस्राईल कोरोना के सामने चारों खाने चित हो जाएगा.

इस्माईल अलजूरानी ने बताया कि मोसाद ने कई देशों, विशेषकर कुछ अरब देशों, में अपने एजेन्ट तैनात कर दिए हैं जो कोरोना से मुक़ाबले के लिए ज़रूरी चिकित्सा उपकरणों के गोदामों और खेपों का पता लगाते हैं, जिसके बाद मोसाद उनकी चोरी की योजना बनाता है और फिर उसे इस्राईल भेज दिया जाता है.

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एक अन्य विशेषज्ञ रासिम अबीदात  ने भी उसी औनलाइन पोर्टल को बताया है कि इस्राईली कोरोना से मुकाबले में बहुत कमज़ोर है, इसीलिए ज़रूरी सामान की आपूर्ति मोसाद के हवाले की गई है जो पूरी दुनिया से चिकित्सा सामान चुरा या ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करके या जहाज़ों को लूट कर ये सामान इस्राईल पहुंचा रही है.

अमेरिका और इस्राईल जिस तरह से पूरी दुनिया में कोरोना से मुक़ाबले के लिए ज़रूरी सामान की चोरी कर रहे हैं या उन पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर रहे हैं वह निश्चितरूप से अन्य देशों के आक्रोश को भड़का रहा है. यदि कोरोना का संकट जारी रहा तो निश्चितरूप से अमेरिका व इस्राईल की लूटमार भी बढ़ेगी, जिससे देशों में टकराव बढ़ सकता है जो एक नए तरह के विश्व युद्ध का रूप ले सकता है.

#lockdown: Quarantine में पति-पत्नी कैसे बिठाएं सामंजस्य

कोरोना के चलते सभी अपने घरों में बंद हैं. लोगों को अपने पार्टनर्स के साथ जाहिरतौर पर समय चाहिए था परंतु इतना नहीं कि वे एकदूसरे से ही बोर होने लगें और वक्तबेवक्त लड़ाइयों में उलझे रहें. शादीशुदा कपल जिन के बीच कम्यूनिकेशन की कमी हो उन के लिए यह वक्त अनेक मुश्किलें पैदा कर सकता है. सुबह से शाम तक वैसे भी कोई काम में नहीं लगा रहता लेकिन इतना समय खाली साथ होने के कारण पतिपत्नी के बीच का स्पार्क खो सकता है जिस से वे एकसाथ उबाऊ भी महसूस कर सकते हैं.

क्वारंटीन में पतिपत्नी के बीच झगड़े और मनमुटाव के कई कारण हो सकते हैं. ‘मुझे ये नाटक देखना है, तुम जाओ अपने फोन में लगो,’ ‘तुम्हारे पास दूसरों की चुगली के अलावा कोई बात नहीं है क्या करने के लिए,’ ‘तुम्हें बस एक ही चीज चाहिए मुझ से, कभी बैठ कर दो बात नहीं कर सकते,’ ‘तुम्हें हर बात का बतंगड़ ही बनाना आता है,’ आदि आदि. इस तरह अनचाहे ही पार्टनर्स अपना मूड तो खराब करते ही हैं साथ ही यदि घर में बच्चे या मांबाप रहते हों तो उन्हें भी अपने व्यवहार से परेशान कर देते हैं. ऐसे में घर का माहौल हर समय चिड़चिड़ा और तनावपूर्ण लगता है और लगने लगता है कि कब यह लौकडाउन खत्म हो और मैं बाहर निकलूं. इस परिस्थिति से निकलने के लिए जरूरी है कि आप अपने रिश्ते में मिठास घोलने की कोशिश करें न कि कड़वाहट.

1. बैठ कर गड़ेमुर्दे न उखाड़ें

कई रिसर्चों के अनुसार किसी नकारात्मक घटना को याद करने जैसे कि कोई पुरानी लड़ाई का असर किसी सकारात्मक घटना को याद करने से कही ज्यादा होता है. यह वह समय नहीं है जब आप सालों पुरानी बुरी या नकारात्मक इवेंट्स को याद कर अपने वर्तमान को बिगाड़ें. साथ बैठ कर कुछ याद करना ही है तो अच्छी चीजें याद करें, जैसे एकदूसरे से पहली बार मिलना या पहली बार साथ घूमने जाना, कोई मजेदार ट्रिप या किस्सा आदि.

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2. समझने की कोशिश करें

घर बैठे ऊब जाना और अपने दोस्तों की याद आना लाजिमी है. कई बात पतिपत्नी एकदूसरे की इस तरह की बातों का जवाब कुछ यों देते हैं, ‘हां तुम्हें मेरे साथ समय बिता कर खुशी कहां मिल रही होगी.’ ऐसा न करें और समझने की कोशिश करें. सभी का अपनी आम दिनचर्या को याद करना और एकबार फिर उसी तरह रहने का मन करना लाजिमी है, इस में इस तरह की बातें कहना गलत है. किसी और को याद कर लेने से आप की इंपोर्टेन्स कम नहीं हो जाती.

3. बात साफ शब्दों में कहें

अगर पत्नी कह रही है कि उस के साथ बैठ कर बातें कर लो तो इस पर बहाने बनाना या टालने से बेहतर आप साफ शब्दों में कह दीजिए कि इस समय आप का मूड नहीं है या आप बात करने जैसा महसूस नहीं कर रहे. इस से आप की पत्नी को ऐसा नहीं लगेगा कि आप के पास उस के लिए अभी भी समय नहीं बल्कि वह आप के मूड को समझने की कोशिश करेगी. यही बात पत्नियों पर भी लागू होती है जब उन के पति हर समय उन से सैक्स के लिए कहें तो वे साफ शब्दों में अपने मूड के बारे में बताएं बजाए बहाना बनाने के.

4. तानाकाशी की आदत छोड़ दें

बातबात पर ताने देना सही आदत नहीं है, इस से व्यक्ति न केवल खीझ उठता है बल्कि उसे कोई साधारण बात कहना भी व्यर्थ लगने लगता है. हर बात का ताना देने की कोई जरूरत नहीं है. कुछ चीजों पर बहस हो सकती है लेकिन उस बहस पर महीनों पहले की किसी बात का ताना दे कर बहस खत्म करने की कोशिश सही नहीं है. यह वह समय नहीं है जब आप अपने पति  को उन के द्वारा बेची गई प्रोपर्टी की याद दिला कर नीचा दिखाने की कोशिश करें या उन्हें कुछ कहने लायक न छोड़ें. यह समय एकदूसरे को समझने और समझाने का है न कि नासमझियों से रिश्ते बिगाड़ने का.

5. गुस्से को नजरंदाज न करें

हो सकता है आप को अपने पार्टनर का गुस्सा बेतुका लग रहा हो और आप उसे ड्रामा समझ रहे हों, परंतु याद रखिए कि जो बात आप के लिए बहुत छोटी है वह दूसरे व्यक्ति के लिए बड़ी हो सकती है. अपनी गलती सुधार कर माफी मांग लीजिए. अपने पार्टनर को गुस्से में छोड़ आप ये दिन अपने लिए और मुश्किल बना लेंगे, अहंकार को हवा मत दीजिए.

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इस महामारी से या तो कपल्स एकसाथ बाहर निकलेंगे या एकदूसरे से अलग. आप की कोशिश अपने रिश्ते में ग्रो करने की होनी चाहिए न कि ग्रो अपार्ट होने की. राई का पहाड़ बनाने की बजाए बड़ी प्रौब्लम्स को छोटा करने की कोशिश कीजिए.

पितृद्वय: भाग-1

प्रत्यक्षत:सब सामान्य सा लगता था पर मुंबई की रातदिन की चहलपहल भी सुहास के मन का अकेलापन खत्म नहीं कर पाती थी. उसे गांव से यहां नौकरी के लिए आए 2 साल हो गए थे पर मन नहीं लग रहा था. वह था भी अंतर्मुखी. वीकैंड की किसी पार्टी में सहयोगियों के साथ गया भी, तो बोर हो गया. सब बैचलर्स अपनीअपनी गर्लफ्रैंड के साथ आते थे और खूब मस्ती करते थे पर उस का मन कुछ और ही चाहता था. शांत, सहृदय, इंटैलिजैंट सुहास को लोग पसंद भी करते थे. लड़कियां उसे पसंद करती थीं, उस का सम्मान करती थीं. वह था भी गुडलुकिंग, बहुत स्मार्ट, पर उस का मन स्वयं को बहुत अकेला पाता था. गांव में उस के मातापिता उस का अकेलापन देखते हुए उस के पीछे भी पड़े थे पर सुहास को किसी लड़की की चाह नहीं थी. लड़कियों के लिए उस के दिल में कभी वैसी भावनाएं जगी ही नहीं थीं कि वह विवाह के लिए तैयार होता.

सोसायटी के गार्डन में डिनर के बाद सुहास टहलने जरूर जाता था. वहां खेलते बच्चे उसे बहुत अच्छे लगते थे. वहीं एक दिन घूमतेटहलते किसी और बिल्डिंग में रहने वाले नितिन से उस की मुलाकात हो गई. नितिन बैंगलुरु से आया था और अपनी विवाहित बहन के घर रहता था. दोनों को ही एकदूसरे की कंपनी खूब भाई. महीनेभर के अंदर ही दोनों अच्छे दोस्त बन गए. दोनों को ही स्पष्ट समझ आ गया कि दोनों को ही शारीरिक और मानसिकरूप से एकदूसरे के जैसा ही साथी चाहिए था.

इस बार सुहास गांव गया तो उसे खुश देख कर उस के मातापिता बहुत खुश हुए. पूछ लिया, ‘‘बेटा, कोई लड़की पसंद आ गई क्या?’’

‘‘नहीं मां, एक दोस्त मिला है नितिन… मुझे वैसा ही साथी चाहिए था. मैं उस के साथ बहुत खुश हूं,’’ फिर झिझकते हुए सुहास ने आगे कहा, ‘‘किसी लड़की से शादी कर ही नहीं सकता मैं. मैं और नितिन एकदूसरे के साथ बहुत खुश हैं.’’

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सुहास के मातापिता को बहुत बड़ा झटका लगा कि यह क्या कह रहा है उन का बेटा. कहां वे हर लड़की को देख कर बहू के सपने देख रहे हैं, कहां बेटे को तो लड़की चाहिए ही नहीं. कोई लड़का ही उस का साथी है. यह क्या हो रहा है? सुहास के मातापिता गांव में जरूर रहते थे पर सेमसैक्स रिलेशन से अनजान नहीं थे. तीव्र क्रोध और गहन निराशा में वे सिर पकड़ कर बैठ गए. लोग क्या कहेंगे? उन का कितना मजाक उड़ेगा? एक ही बेटा है, वंश कैसे चलेगा?

सुहास को अपने मातापिता की मनोदशा पर दुख तो हुआ पर वह क्या कर सकता था? नितिन से रिश्ता उसे सुख देता है तो वह क्या करे? सुहास के मातापिता उस से इतने नाराज हुए कि उस के जाने तक उस से बात ही नहीं की. वह उदास सा मुंबई वापस चला आया. सुहास ने नितिन को अपने और उस के रिश्ते पर अपने मातापिता की प्रतिक्रिया बताई तो नितिन को दुख तो बहुत हुआ पर अब दोनों के हाथ में जैसे कुछ न था. वे आपस में खुश थे और ऐसे ही खुश रहना चाहते थे.

समय अपनी रफ्तार से चल रहा था. नितिन की बहन नीला को सुहास और नितिन के रिश्ते के बारे में पता चल चुका था. उसे अच्छा तो नहीं लगा पर उस ने कुछ कहा भी नहीं. उस ने अपने मातापिता को बैंगलुरु फोन कर के बताया तो वे काफी नाराज हुए. नीला के पति सुजय ने भी सुन कर मजाक बनाया, ताने कसे.

एक दिन सुहास को औफिस से लौटने पर हरारत महसूस हो रही थी. नितिन के जोर देने पर वह डाक्टर को दिखाने गया. सोसायटी के शौपिंग कौंप्लैक्स में ही डाक्टर शैलेंद्र का क्लीनिक था. शैलेंद्र से उस की जानपहचान पहले से थी. उन्होंने दवा दी. एक फोन आने पर वे कुछ जल्दी में लगे तो शैलेंद्र से कारण पूछने पर उन्होंने सोरी बोलते हुए कहा, ‘‘बालनिकेतन जाना है. वहां 8 महीने का बच्चा 3-4 दिन से परेशान है. वहां मैं अपनी सेवाएं देता हूं. बच्चे के मातापिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. कुछ लोग उसे अनाथालय छोड़ गए हैं.’’

शैलेंद्र अपनी इस समाजसेवा के लिए बहुत प्रसिद्ध थे. सुहास घर वापस आ गया. 3 दिन बाद शैलेंद्र से उस की अचानक भेंट हुई. सुहास ने बच्चे के बारे में पूछा तो वे बोले, ‘‘छोटी सी जान संभल ही नहीं पा रही है.’’

सुहास के मन में बड़ी दया जगी. पूछा, ‘‘मैं उस के लिए कुछ कर सकता हूं? उस से मिल सकता हूं?’’

‘‘क्यों नहीं, वहां चले जाना… मैं वहां फोन कर दूंगा.’’

अगले दिन सुहास औफिस से सीधे ‘बालनिकेतन’ पहुंच गया. शैलेंद्र वहां फोन कर चुके थे. सुहास ने वहां के मैनेजर राघव से मिल कर बच्चे को देखने की इच्छा प्रकट की. कहा, ‘‘मुझे बच्चे बहुत अच्छे लगते हैं. इस बच्चे के बारे में पता चला तो यों ही देखने चला आया.’’

राघव उसे एक कमरे में ले गया. एक कोने में एक बैड पर बच्चा सो रहा था.

गोल सा गोरा, मासूम, चेहरा लाल था. देखते ही सुहास के दिल में स्नेह सा उमड़ा. जरा सा बच्चा, कैसे जीएगा… सुहास ने इधरउधर नजर दौड़ाई. बाकी बच्चों के साथ वहां के कर्मचारी महिलापुरुष कुछ न कुछ कर रहे थे. सब से छोटा बच्चा यही था. सुहास ने उस के माथे को हलका सा छूते हुए कहा, ‘‘इसे अभी भी बुखार है?’’

राघव ने ‘हां’ में सिर हिलाया. बच्चा जाग कर कुनमुनाने लगा. रोना शुरू किया तो सुहास ने उसे गोद में उठा लिया. सरल हृदय सुहास उसे कंधे से लगा कर थपथपाने लगा. बच्चा चुप हो गया. ममता और स्नेह से मन भर गया सुहास का. थोड़ी देर बच्चे को सीने से लगाए खड़ा कुछ सोचता रहा. लिटाया तो बच्चा फिर रोने लगा.

राघव ने किसी को आवाज दी, ‘‘अरे मोहन, बच्चे को देखो, मैं अभी आता हूं.’’

राघव सुहास को ले कर अपने औफिस में आ गया. थोड़ी देर बाद सुहास घर लौट आया, पर उस का मन वहीं उस बच्चे में अटक कर रह गया था.

नितिन उस से मिलने आया तो उसे गंभीर, उदास देख कारण पूछा.

तब सुहास ने बताया, ‘‘बालनिकेतन से आ रहा हूं.’’

‘‘क्यों?’’ नितिन चौंका तो सुहास ने उसे पूरी बात बताई. फिर दोनों काफी देर तक इस विषय पर बात करते रहे. नितिन को भी बच्चे के बारे में सुन कर दुख हुआ.

अगले दिन भी सुहास शाम को बालनिकेतन चला गया. राघव उस से प्रसन्नतापूर्वक मिला. सुहास ने पूछा, ‘‘वह बच्चा कैसा है?’’

‘‘आज बुखार हलका था.’’

‘‘राघवजी एक जरूरी बात करने आया हूं.’’

‘‘हां, कहिए न.’’

‘‘मैं उसे गोद लेना चाहता हूं.’’

राघव बुरी तरह चौंका, ‘‘क्या?’’

‘‘जी, बताइए मुझे क्या करना होगा?’’

‘‘पर आप तो अनमैरिड हैं न?’’

‘‘हां, उस से क्या फर्क पड़ता है?’’

‘‘पर जब आप किसी लड़की से शादी करेंगे…’’

सुहास बीच में ही बोल पड़ा, ‘‘नहीं, राघवजी. मैं किसी लड़की से शादी नहीं करूंगा.’’

‘‘मतलब?’’

‘‘मेरा साथी मेरे ही जैसा है नितिन.’’

‘‘ओह,’’ सारी बात समझते हुए राघव गंभीर हो गया, पूछा, ‘‘आप के घर में कौनकौन हैं?’’

‘‘मैं यहां अकेला रहता हूं… पेरैंट्स गांव में रहते हैं.’’

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‘‘यह इतना आसान नहीं होता है… आप जब औफिस जाएंगे, तो बच्चे की देखभाल कौन करेगा?’’

‘‘मैं भरोसे की आया ढूंढ़ लूंगा. आप और डाक्टर शैलेंद्र, जब चाहें आ कर देख सकते हैं कि बच्चे की देखभाल ठीक से हो रही है या नहीं.’’

‘‘पर कानूनन बहुत कुछ करना होगा. इस केस में काफी मुद्दे होंगे.’’

‘‘मैं सब देख लूंगा. बस, आप मुझे बता दें क्याक्या करना है. मेरे कुलीग के भाई वकील हैं. मैं उन से सलाह ले लूंगा.’’

‘‘आप अच्छी तरह सोच लें कुछ दिन.’’

‘‘मैं आप से वीकैंड. मिलने आऊंगा. एक बार उस बच्चे को देख लूं?’’

राघव मुसकरा दिया, ‘‘हां, जरूर.’’

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महायोग: धारावाहिक उपन्यास, भाग-16

 अब तक की कथा :

ईश्वरानंद से मिल कर दिया को अच्छा नहीं लगा था. वह समझ नहीं पा रही थी कि धर्मानंद क्यों ईश्वरानंद का आदेश टाल नहीं पाता. ईश्वरानंद कोई सामूहिक गृहशांति यज्ञ करवा रहे थे. उसे फिर धर्मानंद के साथ उस यज्ञ में शामिल होने का आदेश मिलता है. बिना कोई विरोध किए दिया वहां चली गई. उस पूजापाठ के बनावटी माहौल में दिया का मन घुट रहा था परंतु धर्मानंद ने उसे बताया कि प्रसाद ग्रहण किए बिना वहां से निकलना संभव नहीं. वह दिया की मनोस्थिति समझ रहा था. अब आगे…

दिया बेचैन हुई जा रही थी.  जैसेतैसे कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा हुई और भीड़ महाप्रसाद लेने के लिए दूसरी ओर लौन में सजी मेजों की ओर बढ़ने लगी. अचानक एक स्त्री ने आ कर धीरे से धर्मानंद के कान में कुछ कहा.

धर्मानंद अनमने से हो गए, ‘‘देर हो रही है.’’

‘‘लेकिन गुरुजी ने आप को अभी बुलाया है. आप के साथ में कोई दिया है, उसे भी बुलाया है.’’

एक प्रकार से आदेश दे कर वह स्त्री वहां से खिसक गई. दिया ने भी सब बातें सुन ली थीं. कहांकहां फंस जाती है वह. नहीं, उसे नहीं जाना.

‘‘आप हो कर आइए. मैं खाना खाती हूं.’’

‘‘दिया, प्लीज अभी तो चलिए. नहीं तो गड़बड़ हो जाएगी.’’

‘‘मैं कोई बंदी हूं उन की जो उन का और्डर मानना जरूरी है?’’ दिया की आवाज तीखी होने लगी तो धर्मानंद ने उसे समझाने की चेष्टा की.

‘‘मैं जानता हूं तुम उन की बंदी नहीं हो पर तुम नील और उस की मां की कैदी हो. वैसे मैं भी यहां एक तरह से कैद ही हूं. इस समय मैं जैसा कह रहा हूं वैसा करो दिया, प्लीज. हम दोनों ही मिल कर इस समस्या का हल ढूंढ़ेंगे.’’

धर्मानंद दिया का हाथ पकड़ कर पंडाल के अंदर ही अंदर 2-3 लौन क्रौस कर के दिया धर्मानंद के साथ गैराजनुमा हाल में पहुंची.

धर्मानंद ने एक दीवार पर लगी हुई एक बड़ी सी पेंटिंग के पास एक हाथ से उस सुनहरी सी बड़ी कील को घुमाया जिस पर पेंटिंग लगी हुई थी. अचानक बिना किसी आवाज के पेंटिंग दरवाजे में तबदील हो गई और धर्मानंद उस का हाथ पकड़े हुए उस दरवाजे में कैद हो गया. अंदर घुसते ही पेंटिंग बिना कुछ किए बिना आवाज के अपनेआप फिर से पहली पोजीशन पर चिपक सी गई. सामने ही ईश्वरानंदजी का विशाल विश्रामकक्ष था. ईश्वरानंदजी गाव तकिए के सहारे सुंदर से दीवान पर लेटे हुए थे, उन के सिरहाने एक स्त्री बैठी थी जो उन का सिर दबा रही थी तो एक उन के पैरों की ओर बैठी पैरों की मालिश कर रही थी.

‘‘आओ, धर्मानंद, आओ दिया, क्या बात है, आज देर कैसे हो गई? काफी देर से पहुंचे आप लोग? और हम से क्या मिले बिना जाने का प्रोग्राम था?’’दिया ने देखा दोनों स्त्रियां किसी मशीन की भांति चुपचाप माथे और पैरों की मालिश कर रही थीं.

‘‘अरे भई, जरा धर्मानंद और दिया को एकएक पैग तो बना कर दो. अभी तक खड़े हो दोनों, बैठो.’’

चुपचाप दोनों सामने वाले सोफे पर बैठ गए. दिया का दिल धकधक करने लगा. अब क्या प्रसाद के नाम पर पैग भी. नहीं, उस ने धर्मानंद का हाथ फिर से कस कर दबा दिया.अचानक न जाने किधर से उस दिन वाली अंगरेज स्त्री आ कर खड़ी हो गई और मुसकराते हुए पैग तैयार करने लगी.

‘‘हैलो धर्मानंद, हाय दिया,’’ उस ने दोनों को विश किया.

‘‘प्लीज रहने दें, हम तो बस महाप्रसाद लेने ही जा रहे थे,’’ धर्मानंद ने मना किया.

‘‘ऐसे कैसे चलेगा, धर्म, तुम्हें होता क्या जा रहा है? एकएक पैग लो यार. सिर फटा जा रहा है. सुबह से ये सब विधि करवाते हुए पूरे बदन में दर्द हो रहा है. दो, दिया को भी दो, धर्म को भी,’’ ईश्वरानंद ने फिर आदेश दिया.

‘‘गुरुजी, इस समय रहने दें और दिया तो लेती ही नहीं है.’’

‘‘अरे, लेती नहीं है तो क्या, आज ले लेगी, गुरुजी के साथ.’’

‘‘यहां आओ, दिया. उस दिन भी तुम से कुछ बात नहीं हो सकी,’’ ईश्वरानंद ने उसे अपने पास दीवान पर बैठने का इशारा किया.

दिया मानो सोफे के अंदर धंस जाएगी, इस प्रकार चिपक कर बैठी रही.

‘‘मैं किसी को खा नहीं जाता, दिया. देखो ये सब, कितने सालों से मेरे साथ हैं. आज तक तो किसी को कुछ नुकसान पहुंचाया नहीं है. डरती क्यों हो?’’

‘‘लाओ, बनाओ एकएक पैग और जाओ तुम लोग भी प्रसाद ले लो, फिर यहां आ जाना.’’

गुरुजी के आदेश पर दोनों स्त्रियां ऐसे उठ खड़ी हुईं मानो किसी ने उन का कोई स्विच दबा दिया हो, रोबोट की तरह. हाय, क्या है ये सब? मानो किसी ने हिप्नोटाइज कर रखा हो. दिया ने सुना हुआ था कि ऐसे लोग भी होते हैं जो आंखों में आंखेंडाल कर अपने वश में कर लेते थे. सो, दिया ईश्वरानंद से आंखें नहीं मिला रही थी. सब के सामने पैग घूम गए. सब से पहले ईश्वरानंद ने लिया, चीयर्स कह कर गिलास ऊपर की ओर उठाया, एक लंबा सा घूंट भर लिया और धर्मानंद को लेने का इशारा किया.

‘‘प्लीज, नो,’’ दिया जोर से बोली.

धर्मानंद का उठा हुआ हाथ वहीं पर रुक गया और ईश्वरानंद भी चौंक कर दिया को देखने लगे.

‘‘प्लीज, चलो धर्मानंद, आय एम वैरी मच अनकंफर्टेबल,’’ उस के मुंह से अचानक निकल गया.

‘‘क्यों घबरा रही हो, दिया? एक पैग लो तो सही, सब डर निकल जाएगा. लो,’’ ईश्वरानंद अपने स्थान से उठ कर दिया की ओर बढ़े तो दिया धर्मानंद के पीछे छिप गई.

‘‘गुरुदेव, दिया के लिए यह सब बिलकुल अलग है, नया. प्लीज, अभी रहने दें. बाद में जब यह कंफर्टेबल हो जाएगी…’’ धर्मानंद ने ईश्वरानंद की ओर अपनी एक आंख दबा दी.

ईश्वरानंद उस का इशारा समझ कर फिर से जा कर धप्प से अपने स्थान पर विराजमान हो गए. उन के चेहरे से लग रहा था कि वे दिया व धर्म के व्यवहार से क्षुब्ध हो उठे हैं. परंतु लाचारी थी. जबरदस्ती करने से बात बिगड़ सकती थी और वे बात बिगाड़ना नहीं चाहते थे.

‘‘दिया इतनी होशियार है, मैं तो कहता हूं कि यह अगर अपना हुलिया थोड़ा सा बदलने के लिए तैयार हो तो मैं इसे अच्छी तरह से ट्रेंड कर दूंगा और फिर देखना लोगों की लाइन लग जाएगी, इस के प्रवचन सुनने और इस के दर्शनों के लिए.

‘‘दिया, तुम्हारी पर्सनैलिटी में तो जादू है जो तुम नहीं जानतीं, मैं समझता हूं. तुम्हारे लिए सबकुछ नया है पर शुरू में तो सब के लिए नया ही होता है न?’’ ईश्वरानंद प्रयत्न करना नहीं छोड़ रहा था.

‘‘गुरुजी, आज दिया को जरा घुमा लाता हूं. बेचारी घर के अंदर रह कर बोर हो जाती है. आज आप भी थके हुए हैं. मैं फिर कभी इसेले कर आऊंगा.’’

‘‘ठीक है पर प्रसाद जरूर ले कर जाना. उस के साथ आने वाले दिनों के कार्यक्रम की लिस्ट भी मिलेगी.’’

बाहर जाने वाले लोगों के हाथ पर एक मुहर लगाई जा रही थी. उन लोगों के हाथों पर भी मुहर लगाई गई. जब वे अपना जमा किया हुआ सामान लेने पहुंचे तो उन्हें उन का सामान तभी दिया गया जब उन्होंने अपने हाथ दरबानों को दिखाए. साथही एक लिस्ट भी दी गई जिस पर ईश्वरानंदजी द्वारा संयोजित होने वाले कार्यक्रमों का विवरण था और ‘परमानंद सहज अनुभूति’ के सदस्यों का उन कार्यक्रमों में उपस्थित होना अनिवार्य था.शाम के 3:30 बजे थे. धर्मानंद ने गाड़ी निकाली और बाहर निकल कर दिया चारों ओर देख कर लंबीलंबी सांसें ले रही थी. घुटन से निकल मुक्त वातावरण में वह अपने फेफड़ों के भीतर पवित्र, शुद्ध, सात्विक सांसें भर लेना चाहती थी.  गार्डन पहुंच कर दोनों गाड़ी से उतरे. लौन पर बैठते ही सब से पहले दिया ने अपना पर्स  खोला. मोबाइल देखा, कितने सारे मिसकौल्स थे.

‘‘देखिए धर्म, इस में नील की मां के भी कई मिसकौल्स हैं,’’ दिया ने धर्मानंद की ओर मोबाइल बढ़ा दिया.

‘‘अरे, मैं भूल गया दियाजी, उन्होंने कहा था न कि पूजा खत्म होते ही मुझे रिंग दे देना. मैं अभी उन्हें कौल करता हूं.’’

‘‘क्या जरूरत है, धर्म?’’

‘‘जरूरत है, दिया. इन लोगों से ऐसे छुटकारा नहीं मिल सकता. इन्हें शीशे में उतारने के बाद ही कुछ हो सकेगा.’’

आगे पढ़ें- उस ने नील की मां को फोन किया और…

पितृद्वय: भाग-2

सुहास बच्चे के पास चला गया. इस समय बच्चा बैठा हुआ किसी खिलौने में उलझा था. सुहास ने मुंह से सीटी बजाई तो बच्चे ने उसे देखा और फिर मुसकरा दिया. सुहास ने सीटी बजाते हुए बच्चे को गोद में उठा लिया. सुहास के होंठों पर हाथ रख कर बच्चा मुंह से आवाजें निकालने लगा. साफ समझ आ रहा था कि सुहास को सीटी बजाने के लिए कह रहा है. सुहास ने सीटी बजाई तो बच्चा खिलखिलाने लगा.

यह मजेदार क्रम शुरू हो गया. जैसे ही सुहास रुकता बच्चा उस से सीटी बजाने के लिए उस के होंठों पर हाथ रख देता. राघव और वहां मौजूद कर्मचारी इस खेल पर हंस रहे थे. थोड़ी देर बाद सुहास ने बच्चे को वहां खड़ी एक महिला को दिया तो बच्चा रोने लगा.

सुहास को उस पर बड़ी ममता उमड़ी. राघव से कहा, ‘‘मैं इसे जल्दी ले जाऊंगा. मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे यह मेरा ही अंश है. अरे हां, मैं इस का नाम अंश ही रखूंगा.’’

राघव मुसकरा दिया. राघव ने वहां से निकलते ही अपने सहयोगी प्रकाश को फोन पर पूरी बात बताई. प्रकाश ने अपने बड़े भाई वकील आलोक का फोन नंबर देते हुए कहा, ‘‘औल द बैस्ट. अंश को संभाल पाओगे?’’

‘‘हां, मैं सब मैनेज कर लूंगा.’’

नितिन सारी बात सुन कर बहुत खुश हुआ. पूछ लिया, ‘‘सुहास, मैं तुम्हारे साथ ही शिफ्ट हो जाऊं? हम सब शेयर करते रहेंगे.’’

‘‘हां, बिलकुल, अपना सामान ले आओ.’’

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वीकैंड तक नितिन अपना सामान ले कर सुहास के पास ही आ गया. आतेजाते अपने फ्लैट के नीचे वाले फ्लैट में रहने वाले दंपती राजीव और सुमन से सुहास की अच्छी जानपहचान हो गई थी. सुहास ने शाम को उन्हीं की डोरबैल  बजा दी. फिर एक अच्छी मेड के बारे में पूछताछ की. बात तय हो गई. सुहास ने उन्हीं के यहां काम करने वाली मंजू को कुछ समय बाद काम पर आने के लिए कह दिया. फिर उस ने आलोक से बात कर के मिलने का समय मांगा. मिलने पर आलोक ने कई कानूनी मशवरे देते हुए उस की इस इच्छा में पूर्णतया सहयोग का वादा किया.

सिंगल पेरैंट के रूप में बच्चा गोद लेने में बहुत समय लगने वाला था पर आलोक की सलाह पर जल्दी इस केस में पेपर्स तैयार होने शुरू हो गए. सुहास जल्दीजल्दी बालनिकेतन के चक्कर काटता रहता था. अंश के साथ समय बिता कर उस के दिल को बड़ा चैन मिलता. कुछ दिनों पहले मन में बसा अकेलापन खत्म हो चुका था. अब नितिन का साथ था, अंश की बातें थीं… जीवन को जैसे एक उद्देश्य मिल गया था.

सुहास और नितिन फोन पर अपने घर वालों के संपर्क में थे. कभीकभी अपनेअपने घर भी जाते. हर बार उन के व्यंग्यबाणों से आहत हो कर लौटते. धीरेधीरे उन का घर जाना कम होता जा रहा था.

दोनों ही अपनेअपने परिवार को घर के खर्चों के लिए अच्छीखासी रकम भी भेजते

पर अपने हर कर्तव्य को पूरा करने वाले 2 दोस्तों को अपनी मरजी से, अपनी इच्छा से जीने का हक नहीं था. अपनी पर्सनल लाइफ अपनों के द्वारा ही नकारे जाने का उन दोनों के दिलों में बड़ा दुख था.

सुहास राघव के लगातार संपर्क में था. पेपर्स की प्रोग्रैस से उसे अवगत कराता रहता था. सब औपचारिकताएं पूरी होने में कुछ समय तो लगा ही. सुहास और नितिन जिस दिन अंश को अपने घर लाए उन्होंने राघव, प्रकाश, आलोक, राजीव और सुमन वे कुछ खास सहयोगियों को एक छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. नीला नाराज थी. नहीं आई. अंश प्यारा बच्चा था. देखने वाले के दिल में उसे देखते ही उस के लिए स्नेह उमड़ता था.

आया मंजू ने भी काम पर आना शुरू कर दिया था. जितनी देर सुहास और नितिन औफिस में रहते, मंजू अंश का बहुत अच्छी तरह ध्यान रखती. सुहास, नितिन और अंश जैसे एकदूसरे के लिए ही बने थे. तीनों की एक अलग दुनिया थी. सुहास घर में जैसे ही सीटी बजाते हुए घुसता, उस की गोद में आने के लिए अंश की बेचैनी देख सब हंसते. अंश का कमरा बच्चे के हिसाब से तैयार किया जाता था. कभी उस के साथ सुहास सोता, तो कभी नितिन.

पर जैसाकि समाज है, लोग उन की पीठ पीछे उन का खूब मजाक उड़ाते. औफिस में कुछ लोग नितिन और सुहास की जोड़ी पर कहते, ‘‘इस में बुरा क्या है, सब को अपनी इच्छा से जीने का हक है. किसी लड़की को नहीं छेड़ रहे, किसी को कुछ नहीं कह रहे हैं… एक अनाथ बच्चे का जीवन भी संवार दिया. उन्हें अपनी दुनिया में खुश रहने दो, भाइयो.’’

वहीं कुछ लोग बहुत मजाक उड़ाते. ऐसा नहीं था कि सुहास और नितिन तक ये बातें नहीं पहुंचती थीं. कुछ लड़कियां उन दोनों की बहुत अच्छी दोस्त थीं, हर समय उन के किसी भी काम आने के लिए तैयार.

अंश के बारे में सुन कर दोनों के परिवार वाले बहुत नाराज हुए थे. सुहास के पिता ने कहा, ‘‘खूब मजाक उड़वाओ. हमारा भी, अपना भी… हमारी इज्जत मिट्टी में मिला दी है. तुम पर शर्म आती है.’’

सुहास की मां भी सिर पकड़ कर बैठ गईं बोलीं, ‘‘सुहास, तुम ने तो हमें कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा. लोगों को क्या कहें कि हमारी बहू लड़का है, छि:… छि:…’’

नितिन के घर वालों की भी यही प्रतिक्रिया थी.

दोनों दोस्त सामाजिक प्रताड़ना सहते हुए अंश के साथ जीए जा रहे थे. मंजू स्नेहिल स्वभाव की महिला थी. उसे इन दोनों लड़कों का निश्छल स्वभाव, व्यवहार खूब पसंद था. वह भी दोनों का रिश्ता अच्छी तरह समझती थी. अल्पशिक्षिता होते हुए भी 2 लड़कों का एक अनाथ बच्चे को गोद लेना, उसे प्यार देना, उस के लिए बहुत बड़ी बात थी. ऐसा तो उस ने कहीं देखा ही नहीं था. वह तो सोसायटी के उच्चवर्ग के कई परिवारों में काम कर चुकी थी जहां उस ने पतिपत्नी के दिनरात के झगड़े भी देखे थे, उन के बच्चों को खूब गलत रास्ते पर जाते हुए भी देखा था. वहीं ये 2 लड़के एक बच्चे की अच्छी परवरिश करने में अपना समय बिता रहे थे.

जैसेजैसे अंश बड़ा हो रहा था, दोनों की चिंताएं अलग रूप में सामने आ

रही थीं. एक दिन सुहास ने नितिन को गंभीर देख कारण पूछा तो ठंडी सांस लेते हुए नितिन ने कहा, ‘‘यार, अभी अंश स्कूल जाएगा, वहां उस की मां के बारे में पूछा जाएगा. बच्चे 100 तरह की बात करेंगे, कहीं उसे बुली न किया जाए. 2 गे लोगों ने उसे पालापोसा है, कहीं लोगों का मजाक उस का दिल न दुखाए. आजकल मुझे इस बात की बड़ी चिंता रहती है.’’

सुहास का भी चेहरा उतर गया, ‘‘हां, ये सब बातें मेरे दिल में भी आती हैं. अंश तो हमारी जान है, हम उसे कभी दुखी नहीं देख पाएंगे. कहीं उसे कभी हम से चिढ़ न हो जाए,’’ कहतेकहते सुहास का गला भर्रा गया.

अंश स्कूल जाने लगा. खूब अच्छी आदतें, प्यारी बातें, कोमल, हंसमुख सा चेहरा, बरबस ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेता. पहली पेरैंट्सटीचर्स मीटिंग में दोनों ही अंश को ले कर अतिउत्साहित से पहुंचे. टीचर गीता को सुहास ने सब स्पष्ट बता दिया. आधुनिक सोच की गीता दोनों से मिल कर बहुत खुश हुई. उस ने अंश की पढ़ाई में अपना पूरा सहयोग देने का वादा किया.

अंश जब तक बच्चा था, कई बातों से अनजान था पर जैसेजैसे बड़ा हो रहा था, मां, नानानानी, दादादादी के बारे में बहुत सवाल पूछता. उस की बातों के जवाब देने में दोनों को कभी हंसी आ जाती, तो कभी पसीना छूट जाता. अनुभवी मंजू जब अंश का ध्यान किसी और बात में लगा कर उन दोनों की जान छुड़ाती तो तीनों हंस पड़ते. अंश की हैल्थ का ध्यान पूरी तरह से रखा जाता. अब वह बच्चों के साथ खेलने भी जाने लगा था.

सुहास और नितिन अपने मातापिता से फोन पर बात करते थे पर दोनों को ही अब तक डांट पड़ती थी. फोन रखते हुए दोनों ही कहते, ‘‘अब तक सब नाराज हैं, क्या इंसान को अपनी पसंद से जीने का हक भी नहीं? हम किसी के साथ क्या बुरा कर रहे हैं?’’

जैसेजैसे अंश बड़ा हो रहा था, उस का व्यक्तित्व भी निखरता जा रहा था. कौन्फिडैंट था, अपने कई काम खुद करने लगा था. समाज ने ही उसे समझा दिया था कि सुहास और नितिन की क्या स्थिति है, क्या रिश्ता है.

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नितिन और सुहास की प्रमोशन हो गई तो दोनों ने उसी बिल्डिंग में एक फ्लैट खरीद लिया. अंश अब 8वीं क्लास में था. अंश का जीवन सब सुविधाओं से युक्त था. अब घर की एक चाबी अंश के पास भी रहने लगी थी. अब मंजू सुबहशाम ही आती थी. अंश दोनों को ही पापा कहता था, नितिन पापा, सुहास पापा. कई लोग इस बात पर कभीकभी उन का खूब मजाक उड़ाते थे. कुछ संवेदनशील थे, दोनों की लाइफ का सम्मान करते थे. वैसे भी हमारे समाज में एकदूसरे को नीचा दिखाने के लिए प्रयासरत कुछ लोग खुली सोच रख भी कहां पाते हैं? इन लोगों का उद्देश्य ही होता है, दूसरों के जीवन की शांति भंग करना. ऐसे ही कुछ लोग एक पार्टी में थे जहां सुहास, नितिन और अंश गए हुए थे. राजीव और सुमन के विवाह की 25वीं वर्षगांठ की पार्टी थी. इन दोनों को ही इन तीनों से विशेष स्नेह था.

पार्टी में एक महिला ने पूछ लिया, ‘‘क्यों, अंश, कैसा लगता है अपने घर में? मम्मी तो है नहीं कोई तुम्हारी.’’

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महायोग: धारावाहिक उपन्यास, भाग-17

उस ने नील की मां को फोन किया और स्पीकर का बटन दबा दिया जिस से दिया भी सुन सके.

‘‘रुचिजी, पूजा हो गई है और हम वहां से निकल रहे हैं.’’

‘‘कैसी हुई पूजा, धर्मानंदजी? आप साथ ही में थे न? दिया ने कुछ गड़बड़ी तो नहीं की?’’

‘‘कैसी बात कर रही हैं आप? मेरे साथ थी वह, क्या कर सकती थी?’’

‘‘आप के पास नहीं है क्या दिया?’’

‘‘अगर होती तो आप से ऐसे खुल कर बात कैसे कर सकता था?’’

‘‘कहां गई है?’’

‘‘जरा वाशरूम तक. मैं ने ही कहा जरा हाथमुंह धो कर आएगी तो फ्रैश फील करेगी. वहां तो उस का दम घुट रहा था.’’

‘‘यही तो धर्मानंदजी, क्या करूं, मैं तो बड़ी आफत में पड़ गई हूं. उधर…आप के पास तो फोन आया होगा नील का?’’ वे कुछ घबराए स्वर में बोल रही थीं. जब नील से फोन पर बात होती थी तब भी वे इसी स्वर में बोलने लगती थीं.

‘‘नहीं, रुचिजी, क्या हुआ? नील का तो कोई फोन नहीं आया मेरे पास. सब ठीक तो है?’’ धर्म ने भी घबराने का नाटक किया.

‘‘अरे वह नैन्सी प्रैगनैंट हो गई है. बच्चे को गिराना भी नहीं चाहती.’’

‘‘तो पाल लेगी अपनेआप, सिंगल मदर तो होती ही हैं यहां.’’

‘‘नहीं, पर वह चाहती है कि मैं पालूं बच्चे को. अगर मैं बच्चा पालती हूं तो वह नील से शादी कर लेगी वरना…’’

‘‘तो इस में आप को क्या मिलेगा?’’

‘‘मिलने की बात तो छोडि़ए, धर्मजी. मुझे तो इस लड़के ने कहीं का नहीं रखा. दिया का क्या करूं मैं?’’

‘‘हां, यह तो सोचना पड़ेगा. मैं तो समझता हूं कि रुचिजी, अब बहुत हो गया, अब तो इस के घर वालों को खबर कर ही देनी चाहिए.’’

‘‘मरवाओगे क्या? वे तो वैसे ही यहां आने के लिए तैयार बैठे हैं…और आप को पता है उन की परिस्थिति क्या चल रही है? वे तो हमें फाड़ ही खाएंगे…’’

‘‘दिया आ रही है, रुचिजी. मैं बाद में आप से बात करूंगा.’’

‘‘अरे कहीं मौलवौल में घुमाओ. बियाबान में क्या करेगी? कुछ खरीदना चाहे तो दिलवा देना. आज उसे पैसे नहीं दिए. वैसे पहले के भी होंगे ही उस के पर्स में, पूछ लेना…’’ नील की मां की नाटकीय आवाज सुनाई दी.

‘‘हां जी, देर हो जाए तो चिंता मत करिएगा.’’

‘‘चिंताविंता काहे की, मेरी तो मुसीबत बन गई है. समझ में नहीं आता और क्या पूजापाठ करवाऊं? ईश्वरानंदजी से भी मशवरा कर लेना.’’

‘‘हां जी-हां जी, जरूर. अभी रखता हूं, नमस्ते.’’

मोबाइल बंद कर के दिया की आंखों में आंखें डाल कर धर्मानंद बोला, ‘‘आई बात कुछ समझ में?’’

‘‘आई भी और नहीं भी आई, धर्मजी. जीवन कैसे मेरे प्रति इतना क्रूर हो सकता है? मेरा क्या कुसूर है? मैं कांप जाती हूं यह सोच कर कि मेरे घर वालों की क्या दशा होगी लेकिन मैं उन्हें सचाई बताने से भी डरती हूं. क्या करूं?’’

‘‘दिया, दरअसल मैं खुद यहां से निकल भागना चाहता हूं. मगर मैं यहां एक जगह फंसा हुआ हूं,’’ वह चुप हो गया.

दिया का दिल फिर धकधक करने लगा. कहीं कुछ उलटासीधा तो कर के नहीं बैठे हैं ये.

‘‘नहीं, मैं ने कुछ गलत नहीं किया है. मैं दरअसल यहां एमबीए कर रहा हूं और सैटल होना चाहता हूं पर अगर ईश्वरानंद को पता चल जाएगा तो वे मेरा पत्ता साफ करवा देंगे.’’

‘‘क्यों? उन्हें क्या तकलीफ है?’’ दिया ईश्वरानंद के नाम से चिढ़ी बैठी थी.

‘‘तकलीफ यह है कि मैं उन के बहुत सारे रहस्यों से वाकिफ हूं और अगर मैं ने उन का साथ छोड़ दिया तो उन्हें डर है कि मैं कहीं उन की पोलपट्टी न खोल दूं…’’

‘‘क्या आप को यह नहीं लगता कि ये सब गलत है?’’

‘‘हां, खूब लगता है.’’

‘‘फिर भी आप इन लोगों के साथी बने हुए हैं?’’

‘‘बस, इस में से निकलने का रास्ता ढूंढ़ रहा हूं.’’

‘‘सच बताइए, धर्म, मेरा पासपोर्ट आप के पास है न?’’

दिया ने धर्म पर अचानक ही अटैक कर दिया. धर्म का चेहरा उतर गया पर फिर संभल कर बोला, ‘‘हां, मेरे पास है पर आप को कैसे पता चला?’’

‘‘मैं ने आप की और नील की मां की सारी बात सुन ली थी उस दिन मंदिर में,’’ दिया ने सब सचसच कह दिया.

‘‘और…आप उस दिन से मुझे बरदाश्त कर रही हैं?’’

‘‘मैं तो नील और उस की मां को भी बरदाश्त कर रही हूं, धर्म. मैं इन सब दांवपेचों को न तो जानती थी और न ही समझती थी परंतु मेरी परिस्थिति ने मुझे जबरदस्ती इन सब पचड़ों में डाल दिया.’’

‘‘बहुत शर्मिंदा हूं मैं, दिया. पर मैं भी आप की तरह ही हूं. मुझे भी उछाला जा रहा है. एक फुटबाल सा बन गया हूं मैं. सच में ऊब गया हूं.’’

धर्म की आंखों में आंसू भरे हुए थे. दिया को लगा वह सच कह रहा था.

‘‘मैं नील के घर से भागना चाहती हूं, धर्म,’’ दिया ने अपने मन की व्यथा धर्म के समक्ष रख दी.

‘‘कहां जाओगी भाग कर?’’

‘‘नहीं मालूम, कुछ नहीं पता मुझे. वहां मेरा दम घुटता है. मैं इंडिया वापस जाना चाहती हूं,’’ दिया बिलखबिलख कर रोने लगी, ‘‘आप नहीं जानते, धर्म, मैं किस फैमिली से बिलौंग करती हूं. और मेरी ही वजह से मेरे पापा का क्या हाल हुआ है?’’

‘‘मैं सब जानता हूं, दिया. इनफैक्ट, मुझे आप के घर में हुई एकएक दुर्घटना का पता है, यह भी कि नील व उस की मां भी ये सब जानते हैं.’’

‘‘क्या? क्या जानते हैं ये लोग? क्या इन्हें मालूम है कि मेरे पापा की…’’ दिया चकरा गई.

‘‘हां, इन्हें सब पता है और इन्हें यह सब भी पता है जो आप को नहीं मालूम,’’ धर्म ने सपाट स्वर में कहा.

‘‘क्या, क्या नहीं पता है मुझे?’’ दिया अधीर हो उठी थी.

‘‘अब मैं आप से कुछ नहीं छिपा पाऊंगा, दिया. मेरा मन वैसे ही मुझे कचोट रहा है. मैं भी तो इस पाप में भागीदार हूं.’’

‘‘पर आप तो उस दिन नील की मां से कह रहे थे कि आप यहां थे नहीं, तब किसी रवि ने मेरी जन्मपत्री मिलाई थी.’’

‘‘ठीक कह रहा था, दिया. पर सब से ऊपर तो ईश्वरानंद बौस हैं न?’’

‘‘मतलब?’’

‘‘मतलब यह कि जब तक उस की मुहर नहीं लग जाती तब तक बात आगे कहां बढ़ती है. रवि भी तो इन का ही मोहरा है. उस ने भी जो किया या बताया होगा, ईश्वरानंदजी के आदेश पर ही न.’’

‘‘पर आप तो उस दिन नील की मां से कह रहे थे कि रवि आप का चेला है. आप उसे यह विद्या सिखा रहे हैं?’’

दिया चाहती थी कि जितनी जल्दी हो सके उसे ऐसा रास्ता दिखाई दे जाए जिस से वह इस अंधेरी खाई से निकल सके.

‘‘अच्छा, एक बात बताइए, धर्म. कहते हैं कि मेरे ग्रह नील पर बहुत भारी हैं और यदि वह मुझ से संबंध बनाता है तो बरबाद हो जाएगा. पर नैन्सी से उस के शारीरिक संबंध ग्रह देखने के बाद बने हैं क्या?’’

‘‘क्या बच्चों जैसी बात करती हैं? उस जरमन लड़की से वह ग्रह देखने के बाद संबंध स्थापित करता क्या?’’

‘‘तो उसे कैसे परमिशन दे दी उस की मां ने? बच्चों जैसी बात नहीं, धर्म, मूर्खों जैसी बात है. जिस लड़की को पूरी तरह ठोकपीट कर ढोलनगाड़े बजा कर लाए उस के ग्रहों के डर से अपने बेटे को बचा कर रखा जा रहा है और जिस लड़की के शायद बाप का भी पता न हो, वह नील की सर्वस्व है. क्या तमाशा है, धर्म?’’

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#coronavirus: वायरल होते कोरोना डांस उर्फ त्रासदी की ब्लैक Comedy

इन पंक्तियों के लिखते समय तक दुनिया में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 13 लाख के पास पहुंच गयी है (6 अप्रैल 2020 दोपहर 3 बजे भारतीय समय) करीब 70,000 लोग इससे दम तोड़ चुके हैं और हर गुजरते घंटे के साथ इस महामारी से संक्रमित होने वालों की संख्या में 10,000 नए लोगों का इजाफा हो रहा है. जबकि करीब 450 से ज्यादा लोग हर घंटे दम तोड़ रहे हैं. ये इस कोरोना त्रासदी के वे आंकड़े हैं,जिनकी शायद एक महीने पहले कल्पना तक भी नहीं की गयी थी और आज पूरी दुनिया इस भयावह हकीकत की चपेट में है. लेकिन डर और दहशत की भी एक सीमा होती है. गुस्से में तना कोई मुक्का हमेशा हमेशा के लिए तना नहीं रह सकता. यह इंसान की नियति है कि वह एक स्थिति के बाद किसी भी स्थिति के साथ तालमेल बना ही लेता है.

यही वजह है कोरोना को लेकर दुनिया का भयावह खौफ और घोर निराशा अब धीरे-धीरे एक ब्लैक कॉमेडी या त्रासद मनोरंजन का जरिया भी बनती जा रही है. शुरू में जहां लोगों ने कोरोना की दहशत में त्रासदी में नाचना गाना तो छोडिये सही से एक दूसरे से बोलना भी छोड़ दिया था, वहीं अब धीरे धीरे इस दहशत के आदी हो जाने के कारण लोगों ने न केवल इस पर खुलकर बोलना शुरू कर दिया है बल्कि व्हाट्सअप और दूसरे सोशल मीडिया माध्यमों में जमकर एक दूसरे के साथ कोरोना जोक्स शेयर कर रहे हैं. चीन, वियतनाम, कोरिया, अमरीका, भारत और कई दूसरे देशों में इन दिनों तमाम कोरोना डांस भी वायरल हो रहे हैं. दुनियाभर की मीडिया में ये खबरें भी आ रही हैं कि कोरोना लॉकडाउन के चलते बाजार से गायब हुई चीजों में कंडोम पहली पांच चीजों में से एक हैं.

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कुल मिलाकर कहना चाहिए कि लोगों ने इस त्रासदी के साथ अब जीना सीख लिया है. इंसान की शायद यही जिजीविषा है जिसके सामने कुदरत भी हार जाती है. कोरोना के साथ इंसान की इस ब्लैक कॉमेडी की शुरुआत वियतनाम के एक डांसर क्वांग डांग ने की जिसने सोशल मीडिया में कोरोना से जुड़ा एक चैलेंज शुरू किया. ‘कोविड-19 टिक टौक डांस चैलेंज टू फाइट कोरोना वायरस स्प्रेड’ शीर्षक से सोशल मीडिया में 6 मार्च 2020 को यह डांस पहली बार डाला गया था और इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय यू-ट्यूब में इसके दर्शक 10,75,078 हो गये थे. 8.6 हजार लोगों ने इसे पसंद किया था और 628 लोगों ने इसे नपसंद किया था. वास्तव में यह डांस शुरुआत में इतनी रफ्तार से अपने दर्शक नहीं बटोर रहा था, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना का खौफ बढ़ने लगा, एक स्थिति यह आयी कि लोग इसके खौफ से निकलने के लिए इस तरह की ब्लैक काॅमेडी इंज्वाॅय करने लगे.

गौरतलब है कि वियतनामी डांसर क्वांग डांग सोशल मीडिया में पहले से ही काफी लोकप्रिय हैं. फेसबुक, यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम पर उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है. उनके मुताबिक शुरु में तो वह खुद भी कोरोना से बहुत डरे और कई दिनों तक अकेले घर में बिताया. फिर उन्हें लगा कि ऐसे में तो वे इमोशनल ब्लैक हाॅल में पहुंच जाएंगे. उन्होंने सोचा क्यों न कोरोना से संघर्ष करने वाले लोगों के साथ मिलकर वह भी इस जद्दोजहद में अपनी कोई भूमिका अदा करें. अब चूंकि उन्हें सबसे बढ़िया काम डांस करना ही आता है इसलिए उन्होंने सोचा क्यों न डांस के जरिये ही वे अपनी कोई भूमिका तलाशें. जल्द ही उन्हें आइडिया आ गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के लोगों को कोरोना वायरस से निपटने के लिए स्वास्थ्य संबंधी जो सहूलियतें बरतने के लिए कही है, क्यों न वे उन्हें डांस के जरिये एक मनोरंजन शैली में लोगों तक पहुंचाएं.
इसके लिए उन्होंने वियतनाम के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट औफ आक्यूपेशन एंड एन्वार्यनमेंटल हेल्थ’ से संपर्क किया और इस संस्थान ने उन्हें खुशी खुशी इसकी इजाजत दे दी बल्कि कई मीडिया रिपोर्टों में यह कहा गया कि खुद इस संस्थान ने क्वांग डांग से इसके लिए पहल की थी. बहरहाल जो भी हो इस पूरी थीम को व्यक्त करने के लिए एक गाना लिखा गया जो वास्तव में हाथ धोने के सही तरीके को फोकस करता है. फिर इस गाने को क्वांग डांग ने अपने बेहद मोहक डांस स्टेप से इस कदर बांध दिया कि लोग उसे बस देखते ही रह गये. आज सोशल मीडिया के तमाम अलग अलग मंचों के जरिये यह गीत एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों तक पहुंच चुका है. यह कोरोना गीत विशेषकर युवाओं को खूब पसंद आ रहा है. शुरू में इस पर प्रतिक्रियाएं धीमी रहीं लेकिन जल्द ही वैसी ही तेजी पकड़ लिया जैसी तेजी किकी चैलेंज के वक्त दिखी थी.

आज की तारीख में लोग जहां हैं, वहीं अपने दोस्तों के साथ इस गाने पर थिरक रहे हैं. यूं तो यह गाना एक मकसद को लेकर बनाया गया है कि लोग सही तरीके से हाथ धोना सीखें. लेकिन यह इतना प्यारा बन गया है कि लोग इसे किसी लेसन की तरह लेने की बजाय इसमें भावनाओं के साथ डूब उतार रहे हैं. इस गाने ने दुनियाभर में ऐसे ही कोरोना गीतों और डांस स्टेप के लिए प्रेरित किया है. यही वजह है कि आज की तारीख में सोशल मीडिया में दर्जनों कोरोना डांस स्टेप आ चुके हैं और ऐसे की प्यारे-प्यारे गीत भी बन चुके हैं. हम हिंदुस्तानी भी इसमें पीछे नहीं हैं. ऐसा ही एक डांस स्टेप भारत में पंजाब पुलिस का वायरल हुआ है, जिसमें कई पुलिस वाले ‘बारी बरसी खटन गया सी’ जैसे बोलों पर एक मस्ती भरा भागड़ा किया है जिसका उद्देश्य आम लोगों में कोरोना वायरस के प्रति चेतना जगानी है.

यह डांस स्टेप 21 मार्च 2020 को तब पूरे देश में वायरल हो गया जब पंजाब पुलिस के डायरेक्ट दिनकर गुप्ता ने अपने ट्वीटर हैंडल से इसकी एक क्लिप ट्विट की. इस भांगड़ा डांस का भी मकसद आम लोगों को गाने के सरल बोलो के जरिये यह समझाना है कि कोरोना जैसी भयानक बीमारी से सिर्फ सावधान रहने पर ही बचा जा सकता है. हालांकि एक डांस पहले वायरल नहीं हुआ था, मगर बाद के तमाम डांस स्टेप के वायरल होने पर यह भी लोगों द्वारा खूब देखा गया. यह 26 फरवरी 2020 को चीनी पैरा मेडिकल स्टाफ द्वारा 6 मरीजों के सही होने पर किया गया डांस था, जो कि बैले की शैली में है. जब वियतनामी डांस बहुत मशहूर हुआ तो लोगों ने इसे भी दुनिया के अलग अलग हिस्सों में यू-ट्यूब में देखना शुरु किया और देखते देखते यह भी दुनिया के मशहूर कोरोना वायरल डांस में से एक हो गया.

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इस चीनी डांस में तो नहीं लेकिन दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में जो लोगों को आगाह करने के लिए या उन्हें सजग करने के वास्ते कोरोना डांस मशहूर हुए हैं, उनमें आमतौर पर कोरोना से बचने के लिए क्या उपाय अपनाएं इन्हीं का विस्तार से वर्णन किया गया है मसलन- पहले वायरल कोरोना डांस का मुख्य उद्देश्य डांस के जरिये आम लोगों को यह बताना है कि वे साबुन या एंटीसेप्टिक सल्यूशन से हाथ धोएं, आंख, नाक और मुंह को बार बार न छुएं, पर्सनल हाइजीन मेंटेन करें, घर को साफ सुथरा रखें, सार्वजनिक जगहों पर जाते समय या बीमारी होने पर मास्क का इस्तेमाल करें और अपनी तथा अपने परिवार व अपने समुदाय की सेहत की रक्षा करें. शायद इसलिए भी यह ब्लैक काॅमेडी लोगों को पसंद आ रही है.

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