कनाडा में बिताएं कुछ दिन

तकनीक, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के तालमेल से बने कनाडा को आज भी पर्यटन की सब से उम्दा जगह माना जाता है. यही आकर्षण पर्यटकों को यहां आने पर मजबूर कर देता है.

कनाडा दुनिया के चुनिंदा देशों में से एक है जहां विभिन्न संस्कृतियों का सुंदर मेल दिखाई देता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी कहा था कि कनाडा सभी संस्कृतियों को साथ ले कर शांति से आगे बढ़ने वाला एकमात्र देश है. जहां तक खूबसूरत नजारों और आकर्षक पर्यटन स्थलों वाले कनाडा के आकार की बात है तो रूस के बाद कनाडा का ही नंबर आता है. दुनियाभर में मशहूर प्रेयरीज के मैदानों से ले कर दूर तक फैले इस के अनछुए नजारे और तकनीक का सुंदर इस्तेमाल देखने के लिए पर्यटक दूरदूर से आते हैं.

कनाडा जितना प्राकृतिक खूबसूरती में आगे है उतना ही अर्थव्यवस्था और तकनीक के क्षेत्र में भी. विश्व के सब से अमीर देशों की सूची में शुमार कनाडा आर्थिक रूप से काफी संपन्न है.

भौगोलिक नजरिए से अगर बात करें तो कनाडा दुनिया के सब से मजबूत देश अमेरिका से सटा हुआ है लेकिन कनाडा की संस्कृति में अमेरिकी झलक कम ही दिखाई पड़ती है. कनाडा में अभी भी इंग्लैंड का प्रभाव काफी ज्यादा है और इसे कोई भी पर्यटक महसूस कर सकता है. अंग्रेजी और फ्रैंच भाषा वाला कनाडा 1931 में यूनाइटेड किंगडम से पूरी तरह से आजाद हो गया था. उस के बाद से ही कनाडा लगातार विश्वभर में अपनी अलग राजनीतिक और सांस्कृतिक साख के लिए जाना जाता रहा है.

कनाडा में वैसे तो बहुत से शहर हैं जहां हर एक चीज अपनेआप में बेहद खूबसूरत है लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जहां जाए बिना कनाडा का सफर पूरा नहीं होता.

ओटावा

कनाडा की राजधानी ओटावा वहां का चौथा सब से बड़ा शहर है. यह पूरा शहर ओटावा नदी के किनारे बसा है. गरमियों में बेहद गर्म और सर्दियों में बर्फ से ढका रहने वाला यह शहर दुनिया के कुछ सब से साफ शहरों में शुमार किया जाता है. ओटावा में देखने के लिए काफी ऐसी जगहें हैं जहां कनाडा की असली झलक मिलती है.

रिडियू कैनाल : इसे ‘रिडियू वाटर वे’ के नाम से भी जाना जाता है. यह नहर आपस में कई जगहों को जोड़ती है. रिडियू फ्रैंच शब्द है जिस का मतलब है ‘परदा’. यह नाम इसे इस के परदे जैसे झरनों की वजह से मिला है जो इसे ओटावा नदी से जोड़ते हैं. 2001 में यूनैस्को ने इसे वर्ल्ड हैरिटेज साइट का दरजा दिया है. इस में बोटिंग का लुत्फ उठाया जा सकता है.

नैशनल गैलरी औफ कनाडा : शीशे और ग्रेनाइट से बनी यह गैलरी बेहद आकर्षक लगती है. इस के निर्माण की देखरेख के लिए खासतौर पर कनाडाई प्रधानमंत्री द्वारा लोग नियुक्त किए गए थे. यहां देखने के लिहाज से काफी कुछ मौजूद है, जो कनाडा की संस्कृति को दर्शाता है.

लोअर टाउन : यह ओटावा का केंद्रीय हिस्सा है. यह रिडियू कैनाल, रिडियू नदी और ओटावा नदी से घिरा है. लोअर टाउन में बेवार्ड मार्केट है जो यहां की कमर्शियल मार्केट है. यहां का बाकी हिस्सा रिहायशी इलाके में आता है. कनाडा का आम रहनसहन यहां महसूस किया जा सकता है.

वेंकूवर

वेंकूवर को कनाडा के सैंट कोलंबिया का दिल माना जाता है. यह कनाडा का सुंदर शहर है. वेंकूवर को पर्यटक इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि यहां आप हर चीज का मजा ले सकते हैं. पहाड़ों के खूबसूरत नजारों से ले कर समुद्र की लहरों तक का पूरा आकर्षण यहां मौजूद है. आप चाहें तो समुद्र के किनारे दिन बिताएं या यहां के मशहूर स्टैनले पार्क में साइकिलिंग करें. सुबह आप पहाड़ों की बर्फ पर स्कीइंग करने का मजा ले सकते हैं या फिर शाम को समुद्र में लहरों के साथ डिनर कर सकते हैं. ‘कनाडा प्लेस’ यहां का सब से ज्यादा फोटोग्राफी वाला स्पौट है. इस के अलावा आईमैक्स थिएटर, क्रूज शिप टर्मिनल वगैरह यहां के मुख्य आकर्षण हैं.

स्टैनले पार्क : इस पार्क  की सब से बड़ी खासीयत है कि यह एक द्वीप जैसा दिखाई देता है. यहां साइकिलिंग, स्केटिंग वगैरह रोजाना होती हैं. हर साल लगभग 8 लाख पर्यटक इस पार्क में आते हैं. पर्यटन के लिहाज से यह बेहद आकर्षक है.

टोरंटो

कनाडा का सब से बड़ा और खास शहर है, टोरंटो. यह कनाडा की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी भी है. टोरंटो अपने कुछ खास पर्यटन स्थलों के लिए बेहद मशहूर है. यही पर्यटन स्थल इसे दुनिया के नक्शे में खास स्थान दिलाते हैं. टोरंटो में न्यूयार्क सिटी और लंदन के बाद दुनिया का सब से बड़ा लाइव थिएटर मार्केट है जो अपनेआप में खास है. इस के अलावा जो जगहें टोरंटो को खास बनाती हैं, वे हैं :

सीएन टावर : लगभग 1800 फुट ऊंचा यह टावर 1976 में बन कर तैयार हुआ था. उस वक्त से ले कर लगभग 34 सालों तक यह दुनिया का सब से ऊंचा टावर था. यह टावर टोरंटो की शान है. कनाडा आने वाला हर पर्यटक यहां आ कर इसे जरूर देखना चाहता है.

रौयल औंटारियो म्यूजियम : यह कनाडा का सब से बड़ा म्यूजियम है. विश्व संस्कृति और प्राकृतिक इतिहास इस म्यूजियम की खासीयतें हैं. यह म्यूजियम टोरंटो यूनिवर्सिटी के क्वींस पार्क में बना है. पर्यटकों की अच्छीखासी तादाद रोजाना यहां मौजूद कुछ बेहद खास चीजों को देखने आती है, जिन्हें इस म्यूजियम में सहेज कर रखा गया है.

आर्ट गैलरी औफ औंटारियो : यह एक आर्ट म्यूजियम है जो टोरंटो के डाउनटाउन के ग्रेंज पार्क में बना है. पहली शताब्दी से ले कर मौडर्न आर्ट तक  के 80 हजार से भी ज्यादा का कला संग्रह यहां मौजूद है.

4 लाख 80 हजार वर्ग फुट में फैली यह गैलरी उत्तरी अमेरिका की सब से बड़ी गैलरी है. ये सभी जगहें मिल कर टोरंटो को कनाडा का एक खास पर्यटन स्थल बनाती हैं.

कनाडा का खानपान

कनाडा के खानपान का भी कोई जवाब नहीं. यहां आप की प्लेट में सी फूड से ले कर जंगली सालमन मछली जैसे कई पकवान मिलेंगे. वाइन के अलग स्वाद भी आप को यहां काफी लुभाएंगे.

कनाडा का मौसम

विश्व मानचित्र पर कनाडा ऐसी जगह पर है जहां सर्दी और गरमी दोनों का ही मजा भरपूर लिया जा सकता है. कनाडा के मौसम की बात करें तो यहां गरमियों में तापमान लगभग 35 डिग्री से भी पार जा सकता है, वहीं सर्दियों में यहां के कुछ इलाकों में तापमान 40 डिग्री तक भी पहुंच जाता है. इस लिहाज से अगर आप कनाडा घूमने का प्लान बनाते हैं तो साल के किसी भी वक्त आप वहां जा सकते हैं. इस की पहली शर्त यही है कि मौसम का चुनाव आप को खुद करना होगा.

कनाडा के कुछ खास शहर और भी हैं जो पर्यटन के लिहाज से काफी आकर्षक हैं, जैसे कैलगरी, मौंट्रियल, क्यूबेक सिटी वगैरह. अगर आप इन छुट्टियों में किसी विदेशी जगह पर घूमने का मन बना रहे हैं तो कनाडा आप के और आप के परिवार के लिए बेहद आकर्षक पर्यटन स्थल साबित हो सकता है.

रात में मेकअप लगाकर सोना है खतरनाक

सुबह से रात तक अगर आप मेकअप में रहती हैं तो, स्किन पर मेकअप का बुरा असर भी हो सकता है इसलिए कोशिश यही करना चाहिए कि रात को सोते समय चेहरे को अच्छे तरीके से साफ कर लें ताकि  मेकअप आपके चेहरे पर रात भर न रहे. रात भर अगर आप मेकअप को चेहरे पर लगा छोड़ देंगी तो इसका बुरा प्रभाव आपकी त्वचा पर पड़ सकता है.

आजकल की लाइफ में तो, अब चाहे वह आपका दफ्तर हो या घर, हर जगह आपकी पर्सनैलिटी आपके लिए भविष्य की सफलता की विभिन्न राहें खोल सकती हैं. आज के समय में कौन नहीं चाहता कि वो भीड़ में सबसे अलग दिखे. सुंदरता को और अधिक बढ़ाने में मेकअप की खास भूमिका होती है.

आजकल के समय में खूबसूरत व्यक्तित्व का धनी होना ही बस काफी नहीं है. इसके साथ साथ आपका ड्रेसिंग सेन्स और मेकअप को लेकर आपकी समझ, ये दोनें होना भी बहुत महत्वपूर्ण हो गया है. अब ऐसे में मेकअप के लगातार इस्तेमाल से आपकी स्किन की नैचुरल चमक जैसे कहीं खो सी जाती है. इसलिए त्वचा की देखभाल बहुत जरूरी है.

ध्यान रहे कि कभी भी मेकअप लगाकर आप सोएं न. रात भर मेकअप में सोने से आपके चेहरे को काफी नुकसान होता है. चेहरा काला पड़ने लगता है और हल्के हल्के दाग भी चेहरे पर नजर आने लगते हैं.

मेकअप से आपकी त्वचा को जो नुकसान पहुंचता है उससे बचने के लिए मॉइस्चराइजर काफी मददगार हो सकता है. अगर आप अच्छे से त्वचा को साफ करेंगे तो स्किन नेचुरल दिखेगी.

इसके अलावा रात को सोते समय फेस वाश करना न भूलें, दिन भर की थकान और भागम भाग और दौड़ धूप के बाद अक्सर हम इस चीज को इग्नोर कर देते हैं लेकिन इससे हमारी त्वचा को बहुत नुकसान होता है.

चेहरे और शरीर की त्वचा को नमी देने और मौजूद नमी को बरकरार रखने में फेस आयल बहुत सहायक होते हैं. इन ऑयल्स से जरूरी नमी बनी रहती है और तवचा सूखने से बचती है.

मेकअप के अलावा, डे और नाइट दोनों अलग अलग क्रीम आपके चेहरे की नैचुरल चमक और प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने में सहायक होती है. इससे आपकी उम्र के पहले आने वाले रिंकल्स और डार्क सर्कल्स से भी काफी हद तक बचा जा सकता है.

अनार से निखारें खूबसूरती

अनार सेहत का खजाना है यह तो आप जानते ही होंगी लेकिन क्या आप यह जानती हैं अनार के इस्तेमाल से आप गोरी-निखरी और बेदाग त्वचा भी पा सकती हैं? अनार विटमिन, लवण और ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर फल है, जो अपने आप में एक कंप्लीट ब्यूटी प्रोडक्ट है. इसका ऐंटी-एजिंग फॉर्मूला बढ़ती उम्र के लक्षणों को जल्दी आने से रोकता है.

अनार के ये मास्क लगाना रहेगा आपके लिए फायदेमंद.

ग्रीन टी के साथ अनार का मास्क

निखरी त्वचा के लिए अनार और ग्रीन टी का मास्क बहुत फायदेमंद रहेगा. यह दोनों ही ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर है, जिससे त्वचा लंबे समय तक फ्रेश बनी रहती है.

नींबू के साथ अनार का पैक

नींबू, विटमिन सी का खजाना है, वहीं अनार ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स का. इन दोनों का मिश्रण त्वचा पर निखार लाने का काम करता है.

अनार और शहद का मास्क

अनार के बीजों से एक पेस्ट तैयार कर लें. इस पेस्ट में एक चम्मच शहद मिला लें. इस पेस्ट को पूरे चेहरे और गले पर अच्छी तरह लगा लें और सूखने पर गुनगुने पानी से चेहरा साफ कर लें.

दही के साथ मिलाकर

बेदाग त्वचा के लिए आप यह पैक लगा सकते हैं. अनार के बीजों को अच्छी तरह पीस लें और उसमें दही मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इस पैक को चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें. जब पैक सूख जाए तो चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धो लें.

​​​​​​​हाईवे की शराब

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी सड़कों पर से शराब के ठेके हटाने का हुक्म तो दे दिया है, पर यह आधाअधूरा है. इस देश में पीने का पानी चाहे 4-5 किलोमीटर तक न मिले, उन सड़कों पर जो शहरों को जोड़ती हैं, हर कदम पर ‘ठेका देशी शराब’, ‘शराब की दुकान’ के बोर्ड मिल जाएंगे, जो हर ड्राइवर को दावत देते हैं, आओ, पीओ और चलाओ और मरो. एक तो यहां की सड़कें खराब, दूसरे यहां के लोगों को न चलाना आता है, न चलना और ऊपर से शराब पी कर चलाने की दावत. हादसे नहीं होंगे, तो क्या होगा. हर साल देश में सवा लाख मौतों की जिम्मेदार शराब है.

शराब के ठेके सड़कों के किनारे खोले इसलिए जाते हैं कि वहां मोटी कमाई होती है. राज्य सरकारों को टैक्स मिलता है. शराब कंपनियों की बिक्री होती है. अफसरों को टैक्स चोरी करने की छूट दे कर जेबें भरने का मौका मिलता है और कहीं कोई हादसा हो जाए, तो पुलिस वालों को मरने व मारने वाले दोनों को लूटने का मौका मिलता है.

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा तो है कि सड़क से 5 सौ मीटर तक शराब की दुकान न होगी, पर जिसे सैकड़ों किलोमीटर जाना हो, उस के लिए 5 सौ मीटर क्या हैं  और फिर 5 सौ मीटर की नपाई करेगा कौन  पुलिस वाला ही न  वह तो कह देगा और लोग एक बैंच लगा कर सड़क के किनारे बोतलें रख कर ऐसे शराब बेचने लगेंगे, जैसे फलसब्जियां और खाने की चीजें मिलती हैं.

शराब की लत प्रकृति ने नहीं दी है. यह आदत तो डलवाई जाती है. पक्का है कि सदियों से राजा और धर्म शराब को बहुत आसरा देते थे, क्योंकि एक तो इस के नाम पर टैक्स मिलता था और दूसरे इस से पैदा होने वाली घरेलू लड़ाइयों में पंडोंमुल्लों, पादरियों को लाभ होता था. इसलाम में तो ‘शराब हराम’ इसीलिए कहा गया, क्योंकि वहां समझ लिया गया कि यह वैसे नुकसानदेय है, पर न तो मुसलमानों ने इसे पूरी तरह अपनाया, न राजाओं व मुल्लाओं ने थोपा. धर्म या धर्मगुरु के खिलाफ कुछ सच बोल दो तो तलवारतमंचे निकल आएंगे, पर शराब को पिला दो तो कुछ नहीं.

गाड़ी और शराब दुनिया का सब से बड़ा कहर है, सब से बड़ी बीमारी है, गरीब को लूटने का सब से बड़ा तरीका है, पर इस के खिलाफ न राजा बोला, न अफसर, न नेता, न पुजारी और न लेखकपत्रकार. सब को शराबी बना कर खरीदा जा चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने डेढ़ लाख मौतों का हवाला दे कर दुकानें खिसकवाई भले ही हों, पर बंद नहीं करवा पाया. शराब की दुकानें ही क्यों, लोग अपनी शराब बना सकते हैं, तो बनाएं और पीएं. और नहीं बना सकते तो बिना पीए रह जाएं. मर नहीं जाएंगे बिना शराब पीए. शराब पी कर मरना आसान है.

पानी पीने के हैं फायदे और नुकसान

पानी को लेकर कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं. शरीर को रोगमुक्त और स्वस्थ रखने के लिए पानी पीना बेहद ज़रूरी है. वहीं कई स्वास्थ्य सलाहकार ये भी मानते हैं कि पानी से शरीर को कई नुकसान भी होते हैं. आप रोज़ तरल पदार्थों के रूप में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं, इसमें सभी में कैफीन की होता है. शरीर में कैफीन की मात्रा अधिक होने पर ब्लड की मात्रा कम होने लगती है. ब्लड में कैफीन की मात्रा कम करने के लिए पानी बेहद ज़रूरी है. अगर आप दिन में 4 कप चाय या कॉफी पीते हैं तो कम से कम 8 गिलास पानी ज़रूर पिएं. इससे शरीर का डायजेस्टिव सिस्टम सही रहता है. आपकी स्किन और बालों को भी हेल्दी रखने में पानी बहुत मदद करता है.

पर अगर पानी पीने के फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं.

पहले यहां हम आपको इसके फायदों के बारे में बताते हैं. ताकि इन कुछ सुझावों की मदद से आपको, पानी की कमी से होने वाली बीमारियां न घेरें.

पानी पीने के फायदे :

कुछ बातों का ख़ास ध्य़ान रखें..

1. सुबह उठते ही सबसे पहले एक गिलास पानी पीना अच्छा होता है. इसके अलावा गरम या गुनगुने पानी में शहद और नींबू डालकर पीना भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसे अपनी नियमित आदतों में शुमार करें. ऐंसा करने से आपका पेट साफ रहेगा इम्यून सिस्टम सही होगा और स्किन में होने वाला रूखापन नहीं रहेगा.

2. जब भी आपका सॉफ्ट ड्रिंक पीने का मन करे, तो आप उसकी जगह गुनगुना पानी या नींबू पानी पी लेना चाहिए. ऐसा करने से आपका एनर्जी लेवल भी बढ़ता रहता है.

3. वजन कम करने के लिए ठंडे पानी की जगह गुनगुना गर्म पानी पीना फायदेमंद होता है.

4. ये बात तो हम सभी जानते हैं कि हमारा दिमाग 90 प्रतिशत पानी से बना है, जब हम पानी नहीं पीते तब हमारे सिर में भी दर्द होने लगता है.

5. पानी जोड़ों का दर्द भी कम करता है. क्योंकि पानी जोड़ों को चिकना बनाता है और कठोरता कम होने पर उनमें अपने आप दर्द कम होने लगता है.

6. हमारे शरीर में उपस्थित लगभग हर मांसपेशी का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है. पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है.

7. पानी की कमी होने पर बीमारियां होने की ज्यादा संभावनाऐं होती हैं. पानी आपको बीमारियों से भी दूर रखता है पानी.

8. पानी पीने से एसिडिटी खत्म हो जाती है, क्योंकि पानी पेट को साफ रखता है और साफ जगह गंदगी हफैलने की संभावना कम होता है.

पानी पीने के नुकसान :

1. जरूरत और क्षमता से ज़्यादा पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. कई बार शरीर के सेल्स डैमेज होने का खतरा भी हो सकता है.

2. हेल्थ विशेषज्ञों और सलाहकारों के अनुसार, खाने के बाद ठंडा पानी पीने से आपको नुकसान पहुंचता है. दरअसल, जब गर्म खाने के बाद आप आप तुरंत ठंडा पानी पीते हैं तो शरीर में मौजूद, खाया हुआ ऑयली खाना जमने लगता है. इससे आपकी पाचन शक्ति कम होना शुरु हो जाती है और बाद में यह फैट में भी तबदील होने लगती है. इसलिए खाना खाने के बाद गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है.

3. जिन लोगों की बाय-पास सर्जरी हुई होती है, उनमें से कुछ खास मामलों में डॉक्टर्स पानी कम पीने की सलाह देते हैं.

4. जरूरत से ज्यादा पानी पीने से हमारे शरीर में मौजूद पाचन रस काम करना बंद कर देता है, जिससे खाना पचता है. इस वजह से खाना देर से पचने लगता है और कई बार तो खाना पूरी तरह से डाइजेस्ट भी नहीं हो पाता.

पानी से संबंधित कुछ ज़रूरी जानकारियां :

हमारे शरीर का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना हुआ है. प्रतिदिन शरीर को 6 से 8 गिलास पानी की आवश्यकता होती है. इस आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा खाद्य पदार्थों के साथ शरीर ग्रहण कर लेता है और बाकी बचा हुआ हम पानी पीते हैं.

पानी शरीर के अतिरिक्त और अनावश्यक तत्वों को पसीने और मल-मूत्र के रूप में बाहर निकालने में मदद करता है.

एक वयस्क स्त्री शरीर में, शरीर के कुल भार का लगभग 52 प्रतिशत तक का हिस्सा पानी के रूप में होता है और एक वयस्क पुरुष के शरीर में पानी उसके शरीर के कुल भार का लगभग 65 प्रतिशत.

पानी पीने से संबंधित कुछ ज़रूरी टिप्स :

1. धूप से घर आकर तुरंत पानी न पिएं. यह खतरनाक हो सकता है.

2. कई बार खाली पेट पानी पीने से सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां हो जाती हैं.

3. खाने के तुरंत बाद पानी पीने से फैट बढ़ता है और आप आलसी महसूस करते हैं.

4. चिकनाई वाले खाने या खरबूजा, खीरा के तुरंत बाद पानी पीने से खांसी, जुकाम हो सकता है.

5. अपनी क्षमता से अधिक पानी पी लेना भी आपको नुकसान पहुंचा सकता है.

राजनीति के एजेंट

अफसोस की बात है कि देश की गैरभाजपा पार्टियों ने जनता की तकलीफों पर आंख मूंद ली है और वे बस इस ताक में बैठी हैं कि भाजपा का घड़ा अपनेआप फूटे और उन्हें बैठेबिठाए राजपाट मिल जाए. भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह सत्ता में आने के लिए 70 साल बड़ी मेहनत की थी. उस ने सैकड़ों तरह के काम किए. गौरक्षा का नाम ले कर 1960-70 में हल्ला मचाया. पंजाब में हिंदी को थोपने की कोशिश की. गलीगली में मंदिर बनवाए. तीर्थों को टूरिज्म का हिस्सा बनवाया. अछूतों, दलितों, पिछड़ों को अपने छोटे देवता दिए, आदिवासियों के इलाके में स्कूल भी खोले, उन के अपने देवीदेवताओं के मंदिर बनवा डाले.

भाजपा ने जहां गलीगली में अपने एजेंट बना डाले. आजादी की लड़ाई में तैयार हुए आजादी के सिपाहियों को कांग्रेस ने 100-200 की पैंशन दे कर भुला दिया. कम्यूनिस्टों ने मजदूरों की फौज तैयार की, पर जिस देश में कारखाने ही मुट्ठीभर हों, वहां मजदूरों की गिनती कहां होगी. उन्होंने कारखाने ही बंद करवा दिए और उन का वोट जमा करने वाला धीरेधीरे छिटक गया.

पिछड़ी जातियों ने आरक्षण की मांग ले कर भीड़ जमा की, पर जैसे ही पिछड़ी जातियों को विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग से जगह दी, उन की फूंक खिसक सी गई और उन्होंने अपना झंडा उठाने वालों को निकम्मा बना डाला. आज इन सब दलों में जो काम कर रहे हैं, वे सब बस रुपए की चाशनी चाहते हैं. वे किसी मकसद के लिए काम नहीं कर रहे हैं और इसीलिए भारतीय जनता पर्टी के खिलाफ मोरचा खोलने में पिछड़ रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के सुब्रह्मण्यम स्वामी सही कहते हैं कि सत्ता में आ जाने के बाद सड़कें, बांध, स्कूल, पुल, कारखाने, अस्पताल बना देने से वोट नहीं मिलते. उन्हें पक्का भरोसा है कि भाजपा को कोई हिला नहीं सकता, क्योंकि भाजपा का धार्मिक एजेंडा अनूठा है. विरोधी दलों के पास इस की काट है कि इसी धर्म के सहारे गरीबों को गरीब रखा जा रहा है, इसी से जाति की खाइयां खुदी हैं, इसी से घरघर में क्लेश पैदा होता है, जब अलग जातियों के लड़केलड़कियों में प्यार हो जाए और वे शादी करना चाहें.

ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, प्रकाश करात, नवीन पटनायक, करुणानिधि के बेटे स्टालिन, अन्ना द्रमुक में जयललिता के बाद आई शशिकला की नजरें सिर्फ कुरसी पर हैं, पर वे कुरसी के लिए न अपना अलग डिजाइन बना रहे हैं, न लकड़ी, जबकि भाजपा 70 साल से यही कर रही थी. नोटबंदी ने सुनहरा मौका दिया, जब गरीबों को 50 दिन तक कतारों में खड़ा कर दिया गया था. अफसोस, उन्होंने इसे सतलुज, यमुना, गंगा, नर्मदा, कावेरी में बहा दिया.

भारतीय क्लासिक परंपरा के गायक पंडित जोशी

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी कर्नाटक के भारतीय क्लासिक परंपरा के एक भारतीय गायक थे. वे गायिकी के ख्याल प्रकार के लिए प्रसिद्ध है, और साथ ही वे अपने प्रसिद्ध भक्तिमय भजनों और अभंगो के लिए भी जाने जाते है.

प्रारंभिक जीवन

भीमसेन गुरुराज जोशी का जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक के धारवाड़ (गडग) जिले के रोन ग्राम में हुआ था. इनके पिता का नाम गुरुराज जोशी थे जो कन्नड़-इंग्लिश शब्दकोष के लेखक थे और मां का नाम गोदावरीदेवी था जो एक गृहिणी थी. अपने 16 भाई-बहनों में भीमसेन सबसे बड़े थे. युवावस्था में ही उन्होंने अपनी माता को खो दिया था और बाद में उन्हें उनकी सौतेली मां ने बड़ा किया था. बचपन से ही भीमसेन में संगीत के प्रति प्रेम और रूचि थी और इसके साथ ही संगीत के वाद्य जैसे हार्मोनियम और तानपुरा बजाना भी उन्हें काफी पसंद था. वे दिन-रात संगीत का अभ्यास करते रहते और कभी-कभी तो अभ्यास करते-करते ही उनकी नींद लग जाती.

भीमसेन गुरुराज जोशी का कैरियर

1941 में 19 साल की आयु में उन्होंने अपना पहला लाइव परफॉरमेंस दिया था. उनके पहले एल्बम में मराठी और हिंदी भाषा के कुछ भक्ति गीत और भजन थे, इसे 1942 में HMV ने रिलीज किया था. 1943 में  भीमसेन गुरुराज जोशी मुंबई चले गए और वहाँ रेडियो आर्टिस्ट के रूप में काम करने लगे. 1946 में गुरु सवाई गंधर्व के 60 वे जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उनके परफॉरमेंस की दर्शको के साथ ही उनके गुरु ने भी काफी प्रशंसा की थी.

भीमसेन गुरुराज जोशी का व्यक्तिगत जीवन

भीमसेन ने दो शादियां की. उनकी पहली पत्नी उनके अंकल की बेटी सुनंदा कट्टी थी, उनकी पहली शादी 1944 में हुई थी. सुनंदा से उन्हें चार बच्चे हुए, राघवेन्द्र, उषा, सुमंगला और आनंद. 1951 में उन्होंने कन्नड़ नाटक भाग्य-श्री में उनकी सह-कलाकारा वत्सला मुधोलकर से शादी कर ली. उस समय बॉम्बे प्रांतों में हिन्दुओ में दूसरी शादी करना क़ानूनी तौर पर अमान्य था इसीलिए वे नागपुर रहने के लिए चले गए, जहाँ दूसरी शादी करना मान्य था. लेकिन अपनी पहली पत्नी को ना ही उन्होंने तलाक दिया था और ना ही वे अलग हुए थे. वत्सला से भी उन्हें तीन बच्चे हुए, जयंत, शुभदा और श्रीनिवास जोशी. समय के साथ-साथ कुछ समय बाद उनकी दोनों पत्नियां एक साथ रहने लगी और दोनों परिवार भी एक हो गए, लेकिन जब उन्हें लगा की यह ठीक नही है तो उनकी पहली पत्नी अलग हो गयी और लिमएवाडी, सदाशिव पेठ, पुणे में किराये के मकान में रहने लगी.

 

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी की उपलब्धियां

• 1972 – पद्म श्री
• 1976 – संगीत नाटक अकादमी अवार्ड
• 1985 – पद्म भुषण
• 1985 – बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड
• 1986 – “पहली प्लैटिनम डिस्क”
• 1999 – पद्म विभूषण
• 2000 – “आदित्य विक्रम बिरला कलाशिखर पुरस्कार”
• 2002 – महाराष्ट्र भुषण
• 2003 – केरला सरकार द्वारा “स्वाथि संगीता पुरस्कारम”
• 2005 – कर्नाटक सरकार द्वारा कर्नाटक रत्न का पुरस्कार
• 2009 – भारत रत्न
• 2008 – “स्वामी हरिदास अवार्ड”
• 2009 – दिल्ली सरकार द्वारा “लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड”

• 2010 – रमा सेवा मंडली, बंगलौर द्वारा “एस व्ही नारायणस्वामी राव नेशनल अवार्ड”

पंडित भीमसेन जोशी को “मिले सुर मेरा तुम्हारा” के लिए भी याद किया जाता है, जिसमें उनके साथ बालमुरली कृष्णा और लता मंगेशकर ने जुगलबंदी की थी. तभी से वे “मिले सुर मेरा तुम्हारा” के जरिये घर-घर में पहचाने जाने लगे। तब से लेकर आज भी इस गाने के बोल और धुन पंडित भीमसेन जी की पहचान बने हुए है.

देहांत

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी का देहांत 24 जनवरी 2011 को हुआ.

बर्थडे स्पेशल: रामू की पहली पसंद रंगीला गर्ल

बतौर बाल कलाकार फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली उर्मिला मातोंडकर अपनी खूबसूरती से लोगों के दिलों पर राज करती हैं.

उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने बाल कलाकार के रूप में मराठी फिल्म ‘जाकोल’ (1980) से फिल्मी दुनिया में कदम रखा. बतौर बाल कलाकार उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘कलयुग’ (1981) थीं. उन्हें फिल्म ‘मासूम’ से पहचान मिली.

बतौर अभिनत्री उर्मिला की पहली बॉलीवुड फिल्म ‘नरसिम्हा’ (1991) थी. इस फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया और उनके काम को नोटिस किया जाने लगा. ‘चमत्कार’ में उन्होंने शाहरुख के साथ किया जिसने औसत प्रदर्शन किया.

उर्मिला राम गोपाल वर्मा की पंसदीदा अभिनेत्री रही हैं. दोनों के प्रेम संबंधों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन उनका प्यार आखिरी मंजिल, यानी शादी तक नहीं पहुंच सका और दोनों के रिश्तों में दरार आ गई.

राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘रंगीला’ की सफलता ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया. इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर ने मशहूर अभिनेत्री बनने का सपना पूरी करने वाली युवती का किरदार निभाया. फिल्म में उर्मिला की शोख, चंचल अदाओं को सबने खूब पसंद किया.

फिल्म ‘जुदाई’ में श्रीदेवी जैसी अदाकारा को उर्मिला मातोंडकर ने बखूबी टक्कर दी. राम गोपाल वर्मा की ‘सत्या’ में अपने संजीदा अभिनय से उन्होंने एक अलग ही छाप छोड़ी. फिल्म ‘चाइना गेट’ का आइटम सांग ‘छम्मा-छम्मा’ ने उर्मिला को ‘छम्मा-छम्मा गर्ल’ के रूप में लोकप्रिय कर दिया.

फिल्म ‘भूत’ के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर क्रिटिक्स अवार्ड जीता. अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘पिंजर’ में उन्होंने गंभीर साहसी महिला का किरदार निभा कर फिर से अपने गहरे अभिनय की छाप छोड़ी तो ‘प्यार तूने क्या किया’ में प्यार में किसी भी हद तक गुजर जाने वाली युवती का किरदार निभाया. उन्हें इस फिल्म में निभाए गए नकारात्मक किरदार में भी पसंद किया गया. ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ में भी उनके काम की सबने तारीफ की. इस फिल्म को समीक्षकों ने खूब सराहा.

तीन मार्च 2016 को एक समारोह में उर्मिला, उम्र में नौ साल छोटे व्यवसायी मोहसिन अख्तर मीर के साथ विवाह बंधन में बंध गईं.

उर्मिला ने छोटे पर्दे पर ‘कथा सागर’, ‘इंद्रधनुष’, ‘चक धूम-धूम’, ‘डांस महाराष्ट्र डांस’ जैसे टीवी शोज में काम किया है. उनके करियर की बेहतरीन फिल्मों में ‘चमत्कार’, ‘सत्या’, ‘पिंजर’, ‘खूबसूरत’, ‘प्यार तूने क्या किया’, ‘एक हसीना थी’ आदि शामिल हैं.

जागरुकता ही है कैंसर का इलाज

विश्वभर में कैंसर की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. हर साल इस बीमारी के चपेट में लाखों लोग आ रहे हैं. इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने के लिये विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा हर वर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया. जिसमें लोगों को कैंसर के मुख्य कारण और बचाव के विषय में जागरुक किया जा रहा है.

कैंसर की जानकारी के अभाव में लोगों को आमतौर पर सही समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता है, जिसकी वजह से डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स भी उनकी मदद नहीं कर पाते हैं. विश्व कैंसर दिवस का मकसद कैंसर के नफा नुकसान को बताना नहीं है, बल्कि इसके प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति इससे प्रभावित ना हो.

डॉक्टर्स की माने तो कैंसर होने के कई मुख्य कारण हैं जिनमें उम्र का बढ़ना,  किसी भी प्रकार का इरिटेशन, तम्बाकू का सेवन, विकिरणों का प्रभाव, आनुवांशिकता, शराब का सेवन, इन्फेक्शन, मोटापा जैसी वजहें शामिल है, जिसे लोग नज़र अंदाज कर देते हैं.

लोगों के बीच कैंसर मृत्यु का पर्यायवाची शब्द बन गया है. वैदिकग्राम के डॉ. पियूष जुनेजा का कहना है कि, “कैंसर एक बड़ी बीमारी है परन्तु अगर कैंसर के लक्षणों को समय रहते पकड़ लिया जाये तो इलाज में काफ़ी मदद मिलती है. आयुर्वेद में गिलोइ तथा गौमूत्र को कैंसर के इलाजमें प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा ताम्बे के बर्तन में रखा रात का पानी सुबह खाली पेट में सेवन करने से कैंसर के इलाज़ में काफ़ी मदद मिलती है. हर्बल तरीकों का भी प्रयोग कर हम कैंसर से बच सकते हैं,जिसमें ग्रीन टी के रोजाना सेवन से लीवर, मुंह, स्किन, गले, पेट, सर्वाइकल तथा ब्रेस्ट कैंसर को रोका जा सकता है.”

स्वामी विवेकानन्द आयुर्वेदिक पंचकर्मा हॉस्पिटल के डॉ सत्या एन. दोरनाल ने बताया कि, “हमारे शरीर में रोजाना कई सौ सेल्स खराब होते हैं और नए सेल्स बनते हैं, पर कैंसर का रोग होने पर सफ़ेद एवं लाल रक्त कोशिकाओं का संतुलन बिगड़ने लगता है और सेल्स की बढ़ोतरी नियन्त्रण से बाहर हो जाती है. कैंसर के सेल्स शरीर में मौजूद अच्छे सेल्स के काम में रुकावट डालते हैं और हमारा शरीर इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है .”

इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो शरीर के अलग अलग अंग के कैंसरों को हम उनके लक्षणों से पहचान सकते हैं.

माउथ कैंसर को ओरल कैंसर भी कहा जाता है. माउथ कैंसर में सबसे पहले मुंह में छाले होने शुरू हो जाते हैं और साथ ही मुंह के अन्दर सुजन की समस्या होने लगती है जो की आम छाला या सुजन की तरह जल्दी ठीक नहीं होता. मुंह के भीतरी हिस्से में जहाँ तहां छोटे-छोटे गांठ बनने लगते हैं और थूक घोटने में या फिर खाना-पानी निगलते समय गले में तकलीफ होने लगती है.

फेफड़े में कैंसर आमतौर पर उनमें पाया जाता है जो लोग ज्यादा धुम्रपान करते है या फिर ज्यादा से ज्यादा धूल व प्रदूषण से प्रभावित होते हैं. मरीज के फेफड़ों में जब ट्यूमर फैलने लगता है तो मरीज को ह्रदय में अक्सर दर्द की शिकायत रहती है. मरीज़ को सांस लेने में तकलीफ, घुटन महसूस होना और साथ ही खांसते समय मुंह से खून निकले तो यह लंग्स कैंसर का लक्षण होता है.

स्तन कैंसर आमतौर पर महिलाओं में पाया जाता है जो की सही समय पर ना पता चले तो बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है. स्तन में दर्द व सूजन, स्तन में गांठ का हो जाना, स्तन में किसी भी तरह का परिवर्तन होना या फिर स्तन के अगले भाग से खून आना स्तन कैंसर का लक्षण हो सकता है.

स्किन कैंसर किसी को भी हो सकता है. ज्यादातर ये बीमारी उन लोगों को होने की संभावना होती है जो लोग धूप में ज्यादा रहते हैं. यह तीन तरह के होते है पहला बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और तीसरा मेलानोमा जिसमें स्किनपर छोटे-छोटे गांठ पर जाते है, साथ ही लाल रंग के धब्बे दिखाई देते है. स्किन का रंग बदलना, बहुत खुजली होना, स्किन पर अनावश्यक मस्से का निकलना आदि स्किन कैंसर के लक्षण होते है.

ब्लड कैंसर तीन प्रकार के होते हैं. पहला लयूकेमिया, दूसरा लिंफोमा,और तीसरा मायलोमा. इस बीमारी में अक्सर लोग एनीमिया से प्रभावित होते है और कमजोरी तथा थकान महसूस होती है. सांस लेने में तकलीफ होना और किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन होने पर जल्दी ठीक ना होना आदि ब्लड कैंसर के लक्षण होते है.

ब्रेन कैंसर के मरीज को दिमाग में ट्यूमर हो जाता हो जो की धीरे धीरे बढ़ते जाता है. परिवार में एक भी सदस्य को अगर ब्रेनट्यूमर है तो वो किसी और को भी हो सकता है. इसमें हमेशा सर में दर्द व उल्टी होने की शिकायत रहती है. बार बार चक्कर आना, धुंधला दिखना दिमाग में गांठ होना साथ ही यादास्त कमजोर होना आदि इसके लक्षण माने जाते है.

गर्भाशय कैंसर के वजह से भारत में कई महिलाओं को हर वर्ष अपनी जान गवानी पड़ती है. इस बीमारी के होने की कई वजह होती है जैसे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में किसी भी तरह का घाव हो जाने से और वो जल्दी ठीक ना हो रहा हो. ज्यादातर ये समस्या 40 से 45 उम्र के बाद ही होने की संभावना रहती है. पैरों व कमर में अक्सर दर्द रहना इसके लक्षण माने जाते हैं.

अगर हमें कैंसर से जीतना है तो हमें उसके विषय में जागरुक होना होगा ताकि न सिर्फ हम समय रहते इसके लक्षणों को समझ कर इलाज़ करवा सके बल्कि कैंसर मुक्त विश्व बनाने की ओर बढ़े.

सितारों सी चमक क्रिस्टल से

मैट्रो सिटीज में जगह की कमी, सभी के लिए एक बड़ी समस्या है. ऐसे में कम जगह के घर को अपनी पसंद के अनुसार सजाना बहुत मुश्किल होता है. केवल रंगबिरंगी दीवारों से ही घर खूबसूरत नहीं बनता बल्कि घर में रखे साजोसामान से घर की खूबसूरती निखरती है. यदि आप अपने घर को न्यूलुक देना चाहते हैं तो एक बार क्रिस्टल से बने आइटम्स से घर सजा कर देखें. यह घर की सजावट में नई जान डाल देते हैं. आज के समय में क्रिस्टल से घर सजाना ट्रैंड में है.

क्या है क्रिस्टल : क्रिस्टल एक चमकदार और ट्रांसपैरैंट ग्लास होता है. इस से सजा हुआ आप का छोटा सा घर भी बंगले सा अहसास देता है. क्रिस्टल कई रंगों में मौजूद होने के कारण इस से की गई सजावट काफी अट्रैक्टिव लगती है. मार्केट में क्रिस्टल की एक बड़ी रेंज मोजूद है. आजकल लोग घर को सजाने के लिए बहुत सारी चीजों का प्रयोग करने के बजाए. कम सामान रखना पसंद करते हैं. जिस में क्रिस्टल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हर कोई अपनी पसंद और बजट के अनुसार किस्टल से बनी चीजें ही खरीदता है.

क्रिस्टल का जलवा : क्रिस्टल को सजावट की दुनिया का ट्रैंड सैंटर कहा जा सकता है. करीने से तैयार किए गए प्रिज्म और आकर्षक डिजाइन लोगों के लिद में अपनी खास जगह बनाते जा रहे हैं. क्रिस्टल से छन का आती हुई रोशनी जमीं पर सितारों की चमक बिखेर देती है. आप के घर को सितारों सा सजाने के लिए न सिर्फ क्रिस्टल के गुलदान मौजूद हैं बल्कि क्रिस्टल की आकृतियों और कलात्मक वस्तुओं को भी काफी पसंद किया जाता है. विभिन्न रूपों में हाथ से तराशे गए शीशे वाले क्रिस्टल लोगों के, ड्राइंगरूम, गेस्टरूम और यहां तक कि बेडरूम में भी अपनी जगह बना रहे हैं. आप के घर के दरवाजे से ले कर कमरे को विभाजित करने वाले पिलर, स्टैंड तक क्रिस्टल के होते हैं.

क्रिस्टल के डिफरैंट आइटम्स : क्रिस्टल की बढ़ती मांग को देखते हुए मार्केट में इस के कई औप्शन मौजूद हैं. छोटेबड़े कई तरह के आइटम कम कीमत से ले कर ऊंची कीमत में मौजूद हैं. जहां आप अपनी जेब और पसंद के अनुसार खरीद सकते हैं औप्शन की कमी नहीं है क्रिस्ट के कैंडल, स्टैंड, द्ब्राूमर, शोपीस फ्लावर, फ्लावर पौट आदि कई वैराइटी मौजूद है.

क्रिस्टल का बदलता ट्रैंड : पहले क्रिस्टल के व्हिस्की, बीयर ग्लासेज का चलन ज्यादा था. धीरेधीरे कांच के अन्य प्रोडक्ट जैसे फ्लावर वासेज, कैंडल स्टैंड, मूॢतयां, सेंडिलियर्स, बाउल्स व डेकोरेटिव पीसेज को इंटीरियर डेकोरेशन के तौर पर खरीदा जाने लगा.

क्रिस्टल से औफिस को सजाएं : जब औफिस को एक नया रूप देना होता है तो इस कार्य के लिए क्रिस्टल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे भी घर सजाने से कहीं अधिक होता है औफिस को सजाना. औफिस को सजाने का मूलमंत्र है सजावट को मूलआर्ट एवं डिजाइन के ंग से भरते हुए ग्लोबल या ट्रैंउी लुक देना, क्रिस्टल आप के औफिस की सुंदरता में चार चांद लगा देता है. इस मार्डन जमाने में यह आर्ट का प्रतीक बन गया है. इस की चमकदार और ट्रांसपरेंट उपस्थिति औफिस को नया लुक देती है.

क्रिस्टल से सजे औफिस का सामान : क्रिस्टल से औफिस में चमकते कई सामान आप के वर्क स्टेश्शन को सजा करते है जैसे क्रिस्टल से गढ़ा पेन, क्रिस्टल से चमकती टेबल क्लौक, क्रिस्टल का पेपर वेअ, पैन स्टैंड, कोस्टर के अलावा स्टेशनरी से जुड़े और भी कई सामानों को क्रिस्टल से जोड़ा जा सकता है. इस के अलावा औफिस की दीवारों पर सजी तस्वीरों के फ्रेम पर अगर क्रिस्टल लगा हो तो वो कई नजरों को खींच सकती है. आप के औफिस को कोई कोना या टेबल क्रिस्टल के किसी जानवर या इंसान की स्टेच्यू या कला के शानदार नमूने से निखर सकता है. अगर आप कुछ अलग करना चाहते हैं तो रंगबिरंगे द्ब्राूमर को भी अपने औफिस में जगह दे सकते हैं. कई खूबसूरत रंग देता हुआ यह द्ब्राूमर अन औफिसों में ज्यादा अच्छा लगेगा. जहां कैजुवल ऐटमौस्फियर हो, इस से औफिस की सजावट में चार चांद लग जाएंगे.

क्रिस्टल आइटम्स की कीमत : क्रिस्टल के आइटम्स प्राय: यूरोपीयन देशों जैसे बेल्जियम, इटली, फ्रांस और आस्ट्रेलिया से आयात किए जाते हैं. इसलिए ये काफी महंगे होते हैं. यह 1000 रुपए से 5000 रुपए तक की रेंज में मिल जाते हैं. आप अपने बजट और जरूरत के मुताबिक खरीद सकते हैं. वहीं छोटे क्रिस्टल पीस 500 से 900 रुपए की रेंज में भी उपलब्ध हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें