पानी पीने के हैं फायदे और नुकसान

पानी को लेकर कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं. शरीर को रोगमुक्त और स्वस्थ रखने के लिए पानी पीना बेहद ज़रूरी है. वहीं कई स्वास्थ्य सलाहकार ये भी मानते हैं कि पानी से शरीर को कई नुकसान भी होते हैं. आप रोज़ तरल पदार्थों के रूप में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं, इसमें सभी में कैफीन की होता है. शरीर में कैफीन की मात्रा अधिक होने पर ब्लड की मात्रा कम होने लगती है. ब्लड में कैफीन की मात्रा कम करने के लिए पानी बेहद ज़रूरी है. अगर आप दिन में 4 कप चाय या कॉफी पीते हैं तो कम से कम 8 गिलास पानी ज़रूर पिएं. इससे शरीर का डायजेस्टिव सिस्टम सही रहता है. आपकी स्किन और बालों को भी हेल्दी रखने में पानी बहुत मदद करता है.

पर अगर पानी पीने के फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं.

पहले यहां हम आपको इसके फायदों के बारे में बताते हैं. ताकि इन कुछ सुझावों की मदद से आपको, पानी की कमी से होने वाली बीमारियां न घेरें.

पानी पीने के फायदे :

कुछ बातों का ख़ास ध्य़ान रखें..

1. सुबह उठते ही सबसे पहले एक गिलास पानी पीना अच्छा होता है. इसके अलावा गरम या गुनगुने पानी में शहद और नींबू डालकर पीना भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसे अपनी नियमित आदतों में शुमार करें. ऐंसा करने से आपका पेट साफ रहेगा इम्यून सिस्टम सही होगा और स्किन में होने वाला रूखापन नहीं रहेगा.

2. जब भी आपका सॉफ्ट ड्रिंक पीने का मन करे, तो आप उसकी जगह गुनगुना पानी या नींबू पानी पी लेना चाहिए. ऐसा करने से आपका एनर्जी लेवल भी बढ़ता रहता है.

3. वजन कम करने के लिए ठंडे पानी की जगह गुनगुना गर्म पानी पीना फायदेमंद होता है.

4. ये बात तो हम सभी जानते हैं कि हमारा दिमाग 90 प्रतिशत पानी से बना है, जब हम पानी नहीं पीते तब हमारे सिर में भी दर्द होने लगता है.

5. पानी जोड़ों का दर्द भी कम करता है. क्योंकि पानी जोड़ों को चिकना बनाता है और कठोरता कम होने पर उनमें अपने आप दर्द कम होने लगता है.

6. हमारे शरीर में उपस्थित लगभग हर मांसपेशी का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है. पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है.

7. पानी की कमी होने पर बीमारियां होने की ज्यादा संभावनाऐं होती हैं. पानी आपको बीमारियों से भी दूर रखता है पानी.

8. पानी पीने से एसिडिटी खत्म हो जाती है, क्योंकि पानी पेट को साफ रखता है और साफ जगह गंदगी हफैलने की संभावना कम होता है.

पानी पीने के नुकसान :

1. जरूरत और क्षमता से ज़्यादा पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. कई बार शरीर के सेल्स डैमेज होने का खतरा भी हो सकता है.

2. हेल्थ विशेषज्ञों और सलाहकारों के अनुसार, खाने के बाद ठंडा पानी पीने से आपको नुकसान पहुंचता है. दरअसल, जब गर्म खाने के बाद आप आप तुरंत ठंडा पानी पीते हैं तो शरीर में मौजूद, खाया हुआ ऑयली खाना जमने लगता है. इससे आपकी पाचन शक्ति कम होना शुरु हो जाती है और बाद में यह फैट में भी तबदील होने लगती है. इसलिए खाना खाने के बाद गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है.

3. जिन लोगों की बाय-पास सर्जरी हुई होती है, उनमें से कुछ खास मामलों में डॉक्टर्स पानी कम पीने की सलाह देते हैं.

4. जरूरत से ज्यादा पानी पीने से हमारे शरीर में मौजूद पाचन रस काम करना बंद कर देता है, जिससे खाना पचता है. इस वजह से खाना देर से पचने लगता है और कई बार तो खाना पूरी तरह से डाइजेस्ट भी नहीं हो पाता.

पानी से संबंधित कुछ ज़रूरी जानकारियां :

हमारे शरीर का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना हुआ है. प्रतिदिन शरीर को 6 से 8 गिलास पानी की आवश्यकता होती है. इस आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा खाद्य पदार्थों के साथ शरीर ग्रहण कर लेता है और बाकी बचा हुआ हम पानी पीते हैं.

पानी शरीर के अतिरिक्त और अनावश्यक तत्वों को पसीने और मल-मूत्र के रूप में बाहर निकालने में मदद करता है.

एक वयस्क स्त्री शरीर में, शरीर के कुल भार का लगभग 52 प्रतिशत तक का हिस्सा पानी के रूप में होता है और एक वयस्क पुरुष के शरीर में पानी उसके शरीर के कुल भार का लगभग 65 प्रतिशत.

पानी पीने से संबंधित कुछ ज़रूरी टिप्स :

1. धूप से घर आकर तुरंत पानी न पिएं. यह खतरनाक हो सकता है.

2. कई बार खाली पेट पानी पीने से सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां हो जाती हैं.

3. खाने के तुरंत बाद पानी पीने से फैट बढ़ता है और आप आलसी महसूस करते हैं.

4. चिकनाई वाले खाने या खरबूजा, खीरा के तुरंत बाद पानी पीने से खांसी, जुकाम हो सकता है.

5. अपनी क्षमता से अधिक पानी पी लेना भी आपको नुकसान पहुंचा सकता है.

राजनीति के एजेंट

अफसोस की बात है कि देश की गैरभाजपा पार्टियों ने जनता की तकलीफों पर आंख मूंद ली है और वे बस इस ताक में बैठी हैं कि भाजपा का घड़ा अपनेआप फूटे और उन्हें बैठेबिठाए राजपाट मिल जाए. भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह सत्ता में आने के लिए 70 साल बड़ी मेहनत की थी. उस ने सैकड़ों तरह के काम किए. गौरक्षा का नाम ले कर 1960-70 में हल्ला मचाया. पंजाब में हिंदी को थोपने की कोशिश की. गलीगली में मंदिर बनवाए. तीर्थों को टूरिज्म का हिस्सा बनवाया. अछूतों, दलितों, पिछड़ों को अपने छोटे देवता दिए, आदिवासियों के इलाके में स्कूल भी खोले, उन के अपने देवीदेवताओं के मंदिर बनवा डाले.

भाजपा ने जहां गलीगली में अपने एजेंट बना डाले. आजादी की लड़ाई में तैयार हुए आजादी के सिपाहियों को कांग्रेस ने 100-200 की पैंशन दे कर भुला दिया. कम्यूनिस्टों ने मजदूरों की फौज तैयार की, पर जिस देश में कारखाने ही मुट्ठीभर हों, वहां मजदूरों की गिनती कहां होगी. उन्होंने कारखाने ही बंद करवा दिए और उन का वोट जमा करने वाला धीरेधीरे छिटक गया.

पिछड़ी जातियों ने आरक्षण की मांग ले कर भीड़ जमा की, पर जैसे ही पिछड़ी जातियों को विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग से जगह दी, उन की फूंक खिसक सी गई और उन्होंने अपना झंडा उठाने वालों को निकम्मा बना डाला. आज इन सब दलों में जो काम कर रहे हैं, वे सब बस रुपए की चाशनी चाहते हैं. वे किसी मकसद के लिए काम नहीं कर रहे हैं और इसीलिए भारतीय जनता पर्टी के खिलाफ मोरचा खोलने में पिछड़ रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के सुब्रह्मण्यम स्वामी सही कहते हैं कि सत्ता में आ जाने के बाद सड़कें, बांध, स्कूल, पुल, कारखाने, अस्पताल बना देने से वोट नहीं मिलते. उन्हें पक्का भरोसा है कि भाजपा को कोई हिला नहीं सकता, क्योंकि भाजपा का धार्मिक एजेंडा अनूठा है. विरोधी दलों के पास इस की काट है कि इसी धर्म के सहारे गरीबों को गरीब रखा जा रहा है, इसी से जाति की खाइयां खुदी हैं, इसी से घरघर में क्लेश पैदा होता है, जब अलग जातियों के लड़केलड़कियों में प्यार हो जाए और वे शादी करना चाहें.

ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, प्रकाश करात, नवीन पटनायक, करुणानिधि के बेटे स्टालिन, अन्ना द्रमुक में जयललिता के बाद आई शशिकला की नजरें सिर्फ कुरसी पर हैं, पर वे कुरसी के लिए न अपना अलग डिजाइन बना रहे हैं, न लकड़ी, जबकि भाजपा 70 साल से यही कर रही थी. नोटबंदी ने सुनहरा मौका दिया, जब गरीबों को 50 दिन तक कतारों में खड़ा कर दिया गया था. अफसोस, उन्होंने इसे सतलुज, यमुना, गंगा, नर्मदा, कावेरी में बहा दिया.

भारतीय क्लासिक परंपरा के गायक पंडित जोशी

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी कर्नाटक के भारतीय क्लासिक परंपरा के एक भारतीय गायक थे. वे गायिकी के ख्याल प्रकार के लिए प्रसिद्ध है, और साथ ही वे अपने प्रसिद्ध भक्तिमय भजनों और अभंगो के लिए भी जाने जाते है.

प्रारंभिक जीवन

भीमसेन गुरुराज जोशी का जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक के धारवाड़ (गडग) जिले के रोन ग्राम में हुआ था. इनके पिता का नाम गुरुराज जोशी थे जो कन्नड़-इंग्लिश शब्दकोष के लेखक थे और मां का नाम गोदावरीदेवी था जो एक गृहिणी थी. अपने 16 भाई-बहनों में भीमसेन सबसे बड़े थे. युवावस्था में ही उन्होंने अपनी माता को खो दिया था और बाद में उन्हें उनकी सौतेली मां ने बड़ा किया था. बचपन से ही भीमसेन में संगीत के प्रति प्रेम और रूचि थी और इसके साथ ही संगीत के वाद्य जैसे हार्मोनियम और तानपुरा बजाना भी उन्हें काफी पसंद था. वे दिन-रात संगीत का अभ्यास करते रहते और कभी-कभी तो अभ्यास करते-करते ही उनकी नींद लग जाती.

भीमसेन गुरुराज जोशी का कैरियर

1941 में 19 साल की आयु में उन्होंने अपना पहला लाइव परफॉरमेंस दिया था. उनके पहले एल्बम में मराठी और हिंदी भाषा के कुछ भक्ति गीत और भजन थे, इसे 1942 में HMV ने रिलीज किया था. 1943 में  भीमसेन गुरुराज जोशी मुंबई चले गए और वहाँ रेडियो आर्टिस्ट के रूप में काम करने लगे. 1946 में गुरु सवाई गंधर्व के 60 वे जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उनके परफॉरमेंस की दर्शको के साथ ही उनके गुरु ने भी काफी प्रशंसा की थी.

भीमसेन गुरुराज जोशी का व्यक्तिगत जीवन

भीमसेन ने दो शादियां की. उनकी पहली पत्नी उनके अंकल की बेटी सुनंदा कट्टी थी, उनकी पहली शादी 1944 में हुई थी. सुनंदा से उन्हें चार बच्चे हुए, राघवेन्द्र, उषा, सुमंगला और आनंद. 1951 में उन्होंने कन्नड़ नाटक भाग्य-श्री में उनकी सह-कलाकारा वत्सला मुधोलकर से शादी कर ली. उस समय बॉम्बे प्रांतों में हिन्दुओ में दूसरी शादी करना क़ानूनी तौर पर अमान्य था इसीलिए वे नागपुर रहने के लिए चले गए, जहाँ दूसरी शादी करना मान्य था. लेकिन अपनी पहली पत्नी को ना ही उन्होंने तलाक दिया था और ना ही वे अलग हुए थे. वत्सला से भी उन्हें तीन बच्चे हुए, जयंत, शुभदा और श्रीनिवास जोशी. समय के साथ-साथ कुछ समय बाद उनकी दोनों पत्नियां एक साथ रहने लगी और दोनों परिवार भी एक हो गए, लेकिन जब उन्हें लगा की यह ठीक नही है तो उनकी पहली पत्नी अलग हो गयी और लिमएवाडी, सदाशिव पेठ, पुणे में किराये के मकान में रहने लगी.

 

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी की उपलब्धियां

• 1972 – पद्म श्री
• 1976 – संगीत नाटक अकादमी अवार्ड
• 1985 – पद्म भुषण
• 1985 – बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड
• 1986 – “पहली प्लैटिनम डिस्क”
• 1999 – पद्म विभूषण
• 2000 – “आदित्य विक्रम बिरला कलाशिखर पुरस्कार”
• 2002 – महाराष्ट्र भुषण
• 2003 – केरला सरकार द्वारा “स्वाथि संगीता पुरस्कारम”
• 2005 – कर्नाटक सरकार द्वारा कर्नाटक रत्न का पुरस्कार
• 2009 – भारत रत्न
• 2008 – “स्वामी हरिदास अवार्ड”
• 2009 – दिल्ली सरकार द्वारा “लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड”

• 2010 – रमा सेवा मंडली, बंगलौर द्वारा “एस व्ही नारायणस्वामी राव नेशनल अवार्ड”

पंडित भीमसेन जोशी को “मिले सुर मेरा तुम्हारा” के लिए भी याद किया जाता है, जिसमें उनके साथ बालमुरली कृष्णा और लता मंगेशकर ने जुगलबंदी की थी. तभी से वे “मिले सुर मेरा तुम्हारा” के जरिये घर-घर में पहचाने जाने लगे। तब से लेकर आज भी इस गाने के बोल और धुन पंडित भीमसेन जी की पहचान बने हुए है.

देहांत

पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी का देहांत 24 जनवरी 2011 को हुआ.

बर्थडे स्पेशल: रामू की पहली पसंद रंगीला गर्ल

बतौर बाल कलाकार फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली उर्मिला मातोंडकर अपनी खूबसूरती से लोगों के दिलों पर राज करती हैं.

उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने बाल कलाकार के रूप में मराठी फिल्म ‘जाकोल’ (1980) से फिल्मी दुनिया में कदम रखा. बतौर बाल कलाकार उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘कलयुग’ (1981) थीं. उन्हें फिल्म ‘मासूम’ से पहचान मिली.

बतौर अभिनत्री उर्मिला की पहली बॉलीवुड फिल्म ‘नरसिम्हा’ (1991) थी. इस फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया और उनके काम को नोटिस किया जाने लगा. ‘चमत्कार’ में उन्होंने शाहरुख के साथ किया जिसने औसत प्रदर्शन किया.

उर्मिला राम गोपाल वर्मा की पंसदीदा अभिनेत्री रही हैं. दोनों के प्रेम संबंधों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन उनका प्यार आखिरी मंजिल, यानी शादी तक नहीं पहुंच सका और दोनों के रिश्तों में दरार आ गई.

राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘रंगीला’ की सफलता ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया. इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर ने मशहूर अभिनेत्री बनने का सपना पूरी करने वाली युवती का किरदार निभाया. फिल्म में उर्मिला की शोख, चंचल अदाओं को सबने खूब पसंद किया.

फिल्म ‘जुदाई’ में श्रीदेवी जैसी अदाकारा को उर्मिला मातोंडकर ने बखूबी टक्कर दी. राम गोपाल वर्मा की ‘सत्या’ में अपने संजीदा अभिनय से उन्होंने एक अलग ही छाप छोड़ी. फिल्म ‘चाइना गेट’ का आइटम सांग ‘छम्मा-छम्मा’ ने उर्मिला को ‘छम्मा-छम्मा गर्ल’ के रूप में लोकप्रिय कर दिया.

फिल्म ‘भूत’ के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर क्रिटिक्स अवार्ड जीता. अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘पिंजर’ में उन्होंने गंभीर साहसी महिला का किरदार निभा कर फिर से अपने गहरे अभिनय की छाप छोड़ी तो ‘प्यार तूने क्या किया’ में प्यार में किसी भी हद तक गुजर जाने वाली युवती का किरदार निभाया. उन्हें इस फिल्म में निभाए गए नकारात्मक किरदार में भी पसंद किया गया. ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ में भी उनके काम की सबने तारीफ की. इस फिल्म को समीक्षकों ने खूब सराहा.

तीन मार्च 2016 को एक समारोह में उर्मिला, उम्र में नौ साल छोटे व्यवसायी मोहसिन अख्तर मीर के साथ विवाह बंधन में बंध गईं.

उर्मिला ने छोटे पर्दे पर ‘कथा सागर’, ‘इंद्रधनुष’, ‘चक धूम-धूम’, ‘डांस महाराष्ट्र डांस’ जैसे टीवी शोज में काम किया है. उनके करियर की बेहतरीन फिल्मों में ‘चमत्कार’, ‘सत्या’, ‘पिंजर’, ‘खूबसूरत’, ‘प्यार तूने क्या किया’, ‘एक हसीना थी’ आदि शामिल हैं.

जागरुकता ही है कैंसर का इलाज

विश्वभर में कैंसर की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. हर साल इस बीमारी के चपेट में लाखों लोग आ रहे हैं. इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने के लिये विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा हर वर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया. जिसमें लोगों को कैंसर के मुख्य कारण और बचाव के विषय में जागरुक किया जा रहा है.

कैंसर की जानकारी के अभाव में लोगों को आमतौर पर सही समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता है, जिसकी वजह से डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स भी उनकी मदद नहीं कर पाते हैं. विश्व कैंसर दिवस का मकसद कैंसर के नफा नुकसान को बताना नहीं है, बल्कि इसके प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति इससे प्रभावित ना हो.

डॉक्टर्स की माने तो कैंसर होने के कई मुख्य कारण हैं जिनमें उम्र का बढ़ना,  किसी भी प्रकार का इरिटेशन, तम्बाकू का सेवन, विकिरणों का प्रभाव, आनुवांशिकता, शराब का सेवन, इन्फेक्शन, मोटापा जैसी वजहें शामिल है, जिसे लोग नज़र अंदाज कर देते हैं.

लोगों के बीच कैंसर मृत्यु का पर्यायवाची शब्द बन गया है. वैदिकग्राम के डॉ. पियूष जुनेजा का कहना है कि, “कैंसर एक बड़ी बीमारी है परन्तु अगर कैंसर के लक्षणों को समय रहते पकड़ लिया जाये तो इलाज में काफ़ी मदद मिलती है. आयुर्वेद में गिलोइ तथा गौमूत्र को कैंसर के इलाजमें प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा ताम्बे के बर्तन में रखा रात का पानी सुबह खाली पेट में सेवन करने से कैंसर के इलाज़ में काफ़ी मदद मिलती है. हर्बल तरीकों का भी प्रयोग कर हम कैंसर से बच सकते हैं,जिसमें ग्रीन टी के रोजाना सेवन से लीवर, मुंह, स्किन, गले, पेट, सर्वाइकल तथा ब्रेस्ट कैंसर को रोका जा सकता है.”

स्वामी विवेकानन्द आयुर्वेदिक पंचकर्मा हॉस्पिटल के डॉ सत्या एन. दोरनाल ने बताया कि, “हमारे शरीर में रोजाना कई सौ सेल्स खराब होते हैं और नए सेल्स बनते हैं, पर कैंसर का रोग होने पर सफ़ेद एवं लाल रक्त कोशिकाओं का संतुलन बिगड़ने लगता है और सेल्स की बढ़ोतरी नियन्त्रण से बाहर हो जाती है. कैंसर के सेल्स शरीर में मौजूद अच्छे सेल्स के काम में रुकावट डालते हैं और हमारा शरीर इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है .”

इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो शरीर के अलग अलग अंग के कैंसरों को हम उनके लक्षणों से पहचान सकते हैं.

माउथ कैंसर को ओरल कैंसर भी कहा जाता है. माउथ कैंसर में सबसे पहले मुंह में छाले होने शुरू हो जाते हैं और साथ ही मुंह के अन्दर सुजन की समस्या होने लगती है जो की आम छाला या सुजन की तरह जल्दी ठीक नहीं होता. मुंह के भीतरी हिस्से में जहाँ तहां छोटे-छोटे गांठ बनने लगते हैं और थूक घोटने में या फिर खाना-पानी निगलते समय गले में तकलीफ होने लगती है.

फेफड़े में कैंसर आमतौर पर उनमें पाया जाता है जो लोग ज्यादा धुम्रपान करते है या फिर ज्यादा से ज्यादा धूल व प्रदूषण से प्रभावित होते हैं. मरीज के फेफड़ों में जब ट्यूमर फैलने लगता है तो मरीज को ह्रदय में अक्सर दर्द की शिकायत रहती है. मरीज़ को सांस लेने में तकलीफ, घुटन महसूस होना और साथ ही खांसते समय मुंह से खून निकले तो यह लंग्स कैंसर का लक्षण होता है.

स्तन कैंसर आमतौर पर महिलाओं में पाया जाता है जो की सही समय पर ना पता चले तो बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है. स्तन में दर्द व सूजन, स्तन में गांठ का हो जाना, स्तन में किसी भी तरह का परिवर्तन होना या फिर स्तन के अगले भाग से खून आना स्तन कैंसर का लक्षण हो सकता है.

स्किन कैंसर किसी को भी हो सकता है. ज्यादातर ये बीमारी उन लोगों को होने की संभावना होती है जो लोग धूप में ज्यादा रहते हैं. यह तीन तरह के होते है पहला बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और तीसरा मेलानोमा जिसमें स्किनपर छोटे-छोटे गांठ पर जाते है, साथ ही लाल रंग के धब्बे दिखाई देते है. स्किन का रंग बदलना, बहुत खुजली होना, स्किन पर अनावश्यक मस्से का निकलना आदि स्किन कैंसर के लक्षण होते है.

ब्लड कैंसर तीन प्रकार के होते हैं. पहला लयूकेमिया, दूसरा लिंफोमा,और तीसरा मायलोमा. इस बीमारी में अक्सर लोग एनीमिया से प्रभावित होते है और कमजोरी तथा थकान महसूस होती है. सांस लेने में तकलीफ होना और किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन होने पर जल्दी ठीक ना होना आदि ब्लड कैंसर के लक्षण होते है.

ब्रेन कैंसर के मरीज को दिमाग में ट्यूमर हो जाता हो जो की धीरे धीरे बढ़ते जाता है. परिवार में एक भी सदस्य को अगर ब्रेनट्यूमर है तो वो किसी और को भी हो सकता है. इसमें हमेशा सर में दर्द व उल्टी होने की शिकायत रहती है. बार बार चक्कर आना, धुंधला दिखना दिमाग में गांठ होना साथ ही यादास्त कमजोर होना आदि इसके लक्षण माने जाते है.

गर्भाशय कैंसर के वजह से भारत में कई महिलाओं को हर वर्ष अपनी जान गवानी पड़ती है. इस बीमारी के होने की कई वजह होती है जैसे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में किसी भी तरह का घाव हो जाने से और वो जल्दी ठीक ना हो रहा हो. ज्यादातर ये समस्या 40 से 45 उम्र के बाद ही होने की संभावना रहती है. पैरों व कमर में अक्सर दर्द रहना इसके लक्षण माने जाते हैं.

अगर हमें कैंसर से जीतना है तो हमें उसके विषय में जागरुक होना होगा ताकि न सिर्फ हम समय रहते इसके लक्षणों को समझ कर इलाज़ करवा सके बल्कि कैंसर मुक्त विश्व बनाने की ओर बढ़े.

सितारों सी चमक क्रिस्टल से

मैट्रो सिटीज में जगह की कमी, सभी के लिए एक बड़ी समस्या है. ऐसे में कम जगह के घर को अपनी पसंद के अनुसार सजाना बहुत मुश्किल होता है. केवल रंगबिरंगी दीवारों से ही घर खूबसूरत नहीं बनता बल्कि घर में रखे साजोसामान से घर की खूबसूरती निखरती है. यदि आप अपने घर को न्यूलुक देना चाहते हैं तो एक बार क्रिस्टल से बने आइटम्स से घर सजा कर देखें. यह घर की सजावट में नई जान डाल देते हैं. आज के समय में क्रिस्टल से घर सजाना ट्रैंड में है.

क्या है क्रिस्टल : क्रिस्टल एक चमकदार और ट्रांसपैरैंट ग्लास होता है. इस से सजा हुआ आप का छोटा सा घर भी बंगले सा अहसास देता है. क्रिस्टल कई रंगों में मौजूद होने के कारण इस से की गई सजावट काफी अट्रैक्टिव लगती है. मार्केट में क्रिस्टल की एक बड़ी रेंज मोजूद है. आजकल लोग घर को सजाने के लिए बहुत सारी चीजों का प्रयोग करने के बजाए. कम सामान रखना पसंद करते हैं. जिस में क्रिस्टल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. हर कोई अपनी पसंद और बजट के अनुसार किस्टल से बनी चीजें ही खरीदता है.

क्रिस्टल का जलवा : क्रिस्टल को सजावट की दुनिया का ट्रैंड सैंटर कहा जा सकता है. करीने से तैयार किए गए प्रिज्म और आकर्षक डिजाइन लोगों के लिद में अपनी खास जगह बनाते जा रहे हैं. क्रिस्टल से छन का आती हुई रोशनी जमीं पर सितारों की चमक बिखेर देती है. आप के घर को सितारों सा सजाने के लिए न सिर्फ क्रिस्टल के गुलदान मौजूद हैं बल्कि क्रिस्टल की आकृतियों और कलात्मक वस्तुओं को भी काफी पसंद किया जाता है. विभिन्न रूपों में हाथ से तराशे गए शीशे वाले क्रिस्टल लोगों के, ड्राइंगरूम, गेस्टरूम और यहां तक कि बेडरूम में भी अपनी जगह बना रहे हैं. आप के घर के दरवाजे से ले कर कमरे को विभाजित करने वाले पिलर, स्टैंड तक क्रिस्टल के होते हैं.

क्रिस्टल के डिफरैंट आइटम्स : क्रिस्टल की बढ़ती मांग को देखते हुए मार्केट में इस के कई औप्शन मौजूद हैं. छोटेबड़े कई तरह के आइटम कम कीमत से ले कर ऊंची कीमत में मौजूद हैं. जहां आप अपनी जेब और पसंद के अनुसार खरीद सकते हैं औप्शन की कमी नहीं है क्रिस्ट के कैंडल, स्टैंड, द्ब्राूमर, शोपीस फ्लावर, फ्लावर पौट आदि कई वैराइटी मौजूद है.

क्रिस्टल का बदलता ट्रैंड : पहले क्रिस्टल के व्हिस्की, बीयर ग्लासेज का चलन ज्यादा था. धीरेधीरे कांच के अन्य प्रोडक्ट जैसे फ्लावर वासेज, कैंडल स्टैंड, मूॢतयां, सेंडिलियर्स, बाउल्स व डेकोरेटिव पीसेज को इंटीरियर डेकोरेशन के तौर पर खरीदा जाने लगा.

क्रिस्टल से औफिस को सजाएं : जब औफिस को एक नया रूप देना होता है तो इस कार्य के लिए क्रिस्टल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे भी घर सजाने से कहीं अधिक होता है औफिस को सजाना. औफिस को सजाने का मूलमंत्र है सजावट को मूलआर्ट एवं डिजाइन के ंग से भरते हुए ग्लोबल या ट्रैंउी लुक देना, क्रिस्टल आप के औफिस की सुंदरता में चार चांद लगा देता है. इस मार्डन जमाने में यह आर्ट का प्रतीक बन गया है. इस की चमकदार और ट्रांसपरेंट उपस्थिति औफिस को नया लुक देती है.

क्रिस्टल से सजे औफिस का सामान : क्रिस्टल से औफिस में चमकते कई सामान आप के वर्क स्टेश्शन को सजा करते है जैसे क्रिस्टल से गढ़ा पेन, क्रिस्टल से चमकती टेबल क्लौक, क्रिस्टल का पेपर वेअ, पैन स्टैंड, कोस्टर के अलावा स्टेशनरी से जुड़े और भी कई सामानों को क्रिस्टल से जोड़ा जा सकता है. इस के अलावा औफिस की दीवारों पर सजी तस्वीरों के फ्रेम पर अगर क्रिस्टल लगा हो तो वो कई नजरों को खींच सकती है. आप के औफिस को कोई कोना या टेबल क्रिस्टल के किसी जानवर या इंसान की स्टेच्यू या कला के शानदार नमूने से निखर सकता है. अगर आप कुछ अलग करना चाहते हैं तो रंगबिरंगे द्ब्राूमर को भी अपने औफिस में जगह दे सकते हैं. कई खूबसूरत रंग देता हुआ यह द्ब्राूमर अन औफिसों में ज्यादा अच्छा लगेगा. जहां कैजुवल ऐटमौस्फियर हो, इस से औफिस की सजावट में चार चांद लग जाएंगे.

क्रिस्टल आइटम्स की कीमत : क्रिस्टल के आइटम्स प्राय: यूरोपीयन देशों जैसे बेल्जियम, इटली, फ्रांस और आस्ट्रेलिया से आयात किए जाते हैं. इसलिए ये काफी महंगे होते हैं. यह 1000 रुपए से 5000 रुपए तक की रेंज में मिल जाते हैं. आप अपने बजट और जरूरत के मुताबिक खरीद सकते हैं. वहीं छोटे क्रिस्टल पीस 500 से 900 रुपए की रेंज में भी उपलब्ध हैं.

संस्कृति के अनेक रंग सिंगापुर में

विश्वभर में अपनी खूबियों के लिए मशहूर सिंगापुर अनेक सभ्यताओं और परंपराओं का सम्मिश्रण होते हुए भी आधुनिक है. बड़ी बड़ी इमारतों वाले चकाचौंध भरे सिंगापुर में पर्यटन करना एक यादगार अनुभव है. बैंकौक से सिंगापुर की हमारी यात्रा डेढ़ घंटे की थी. वहां हमारा भ्रमण 2 हिस्सों में बंटा हुआ था. प्रथम 4 दिन, 3 रातें क्रूज पर और बाकी 2 दिन सिंगापुर शहर के दर्शन के लिए. सिंगापुर की धरती पर हम ने कदम रखे. बंदरगाह पर हमारा विशालकाय जहाज ‘सुपर स्टार वर्गो’ बंधा हुआ था. भीतर लंबी लंबी कतारें थीं. जांच प्रक्रिया से गुजरने के बाद हमें जहाज के अंदर जाने की अनुमति मिली.

हमें 9वीं मंजिल पर स्थित केबिन आवंटित किए गए. हमें बोडिंग पास दिए गए थे जो हमारी पहचान थी. इस जहाज पर कुल 13 मंजिलें थीं. हमारे केबिन में उस दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पढ़ने पर मालूम हुआ कि यहां हर मंजिल पर अलगअलग शोज होते हैं. डांस, गाने, मैजिक शो आदि. हमारे पैकेज में 3 रेस्तरां थे जिन में से किसी में भी हम भोजन ले सकते थे.

रात्रि 11 बजे वाले शो का आनंद उठाने मैं, मेरे पति ननद व ननदोई अपनेअपने केबिन से निकल कर हौल में पहुंचे. लोगों की अच्छी खासी भीड़ वहां थी. उस शो में मंच पर अलग अलग देशों से आए 5 युवक सामने आए. उन्हें सैक्सी नृत्य द्वारा अपनी पार्टनर को रिझाना था. सब ने अपनेअपने ढंग से उत्तेजक भावभंगिमाओं द्वारा अपनी-अपनी पार्टनर को रिझाने का प्रयास किया. इन पांचों में से बाजी मारी आस्ट्रेलियाई युवक ने. अनेक भारतीय जोड़े यहां हनीमून मनाने आए हुए थे. ज्यादातर लोग गुजरात, पंजाब और दिल्ली से थे.

अगले दिन जहाज को कुआलालंपुर बंदरगाह पर रुकना था. उस दिन हम आराम करना चाहते थे इसलिए हम ने टिकटें नहीं खरीदीं. हम ने पूरा दिन जहाज का जायजा लिया. 13वीं मंजिल पर स्विमिंग पूल, जकूजी बाथ आदि सुविधाएं उपलब्ध थीं. आस्ट्रेलियाई और चीनी वहां जलविहार का आनंद उठा रहे थे और भारतीय खानेपीने के स्टालों पर भीड़ लगाए थे.

डेक पर खड़े हो कर दूर तक फैली अथाह जलराशि का नजारा तृप्ति प्रदान करने वाला था. उस रात 11 बजे का शो गत रात्रि के शो से अलग था. आयोजकों ने क्रूज के कुछ लड़कों को मंच पर बुलाया. उस के बाद दर्शकों में से लड़कियों को मंच पर आमंत्रित किया. लड़कियों को एक क्रूजबौय की छाती पर नीबू का रस मल कर नमक लगाना था और फिर जीभ से चाटना था. कोई भी भारतीय लड़की आगे नहीं आई. एक एक कर के आस्ट्रेलियाई, चीनी और स्वीडिश लड़कियां आगे आईं. अपने अपने ढंग से उन्होंने उस उत्तेजक खेल में हिस्सा लिया. हौल तालियों और सीटियों से गूंज उठा.

क्रूज में कैसिनो भी था. जो भी हो, यहां अलग ही दुनिया थी और दुनिया के नजारे अलग थे. कुछ लोग यहां से मलयेशिया जाने वाले थे. अगले दिन हम ने फुकेट के टूर का चुनाव किया. यह थाईलैंड में आता है लेकिन हम उस स्पौट पर वाया सिंगापुर गए. सुबह 11 बजे हम पोर्ट पर उतर गए. वहां रेत पर चलते हुए हम बस तक पहुंचे. बस द्वारा हम फुकेट पहुंचे. फुकेट वही शहर है जो कुछ वर्ष पूर्व सूनामी लहरों की चपेट में आ कर तबाह हो गया था. इसे देख कर कोई कह नहीं सकता कि यह लहरों की प्रचंडता का कभी शिकार भी हुआ था.

हम नाव से थोड़ी दूरी पर पहुंचे. हम नाव से उतर कर केले के आकार की छोटी कश्ती ‘बनाना बोट’ में बैठे. हम नाव द्वारा गुफा में प्रविष्ट हुए. वहां समंदर के बीचोंबीच 3 गुफाएं थीं. समंदर की ऊंची लहरों के कारण हमें 2 गुफाओं में ही जाने की अनुमति मिली. जब हम पहली गुफा में प्रविष्ट हुए तो भीतर अंधेरा था. हमारी नाव पर सवार नाविक ने टौर्च जला कर हमें गुफा की छत पर उलटे लटके चमगादड़ दिखाए. चमगादड़ों की अंधेरे में चमकती आंखें डरावना एहसास करा रही थीं.

इस के बाद हम दूसरी गुफा में प्रविष्ट हुए. कुछ सैलानी समंदर में उतर कर तैराकी का मजा लेने लगे. हम ‘बनाना बोट’ से उतर कर अपनी बड़ी नाव में बैठ गए. अब जोरों से भूख लग रही थी. दोपहर का भोजन तैयार था. हम भोजन पर टूट पड़े. हम लोग काफी थक चुके थे.

हमारा जहाज जल में झाग बनाता अपने गंतव्य की ओर दौड़ता जा रहा था और लहरें पीछे रपटती जा रही थीं. यहीं से सिंगापुर के लिए हमारी वापसी थी. हम डेक से उतर कर वापस अपने केबिन में आ गए. रात्रि भोज के बाद 11 बजे ‘कैसेनोवा शो’ की टिकट खरीदी थी. वहां मौजूद अधिकतर दंपतियों ने इस शो की टिकटें खरीदी थीं.

ठीक 11 बजे कैसेनोवा शो शुरू हुआ. कैसेनोवा नामक लवर बौय परंपरागत परिधान में सुसज्जित रस्सी से झूलता हुआ मंच पर उपस्थित हुआ. पृष्ठभूमि में गीतसंगीत लहरियां मनोरंजक वातावरण उत्पन्न कर रही थीं. दर्शक मंत्रमुग्ध हो रहे थे. धीरेधीरे 8 रूसी लड़कियां टौपलैस हो मंच पर आईं. फिर उर्वशी, रंभा, मेनका बन कर अपनी नृत्यकला का प्रदर्शन करने लगीं. शो की समाप्ति पर स्टेडियम तालियों और सीटियों की आवाज से गूंज उठा. सुबह हम देर से जागे. आज हमें पैकिंग करनी थी.

हम तैयार हो कर नाश्ते के लिए रेस्तरां पहुंचे. आज क्रूज के 7 नंबर डेक पर एक फिल्म की शूटिंग होनी थी. पूरे दिन शूटिंग देखी. जहाज रात्रि 8 बजे सिंगापुर पहुंचने वाला था. हमारी यात्रा यहीं समाप्त होनी थी. सामान पैक कर के हम ने अपने अपने केबिन के बाहर रख दिया. सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लगभग 8 बज कर 5 मिनट पर हम क्रूज से बाहर आ गए.

लौयन सिटी

बाहर बारिश हो रही थी. हमारा टैक्सी ड्राइवर काफी देर से हमारी प्रतीक्षा कर रहा था. वह नाराज लग रहा था. हम खामोशी से टैक्सी में बैठ गए. लगभग पौने घंटे बाद हम पूर्व आरक्षित होटल पहुंच गए. टैक्सी चालक ने हमें सूचित किया कि वह अगले दिन सुबह 9 बजे हमें लेने आएगा. दिन के प्रथम भाग में हमें सिटी टूर कराएगा और द्वितीय भाग में सैंतोसा आईलैंड पर बसे सैंतोसा पार्क में छोड़ देगा. फिर रात्रि साढ़े 8 बजे हमें वहां से लेगा.

अगले दिन हम घूमने निकले. सिंगापुर बड़ी बड़ी इमारतों वाला देश है. विश्वभर में अपनी खूबियों के लिए मशहूर यह देश विभिन्न सभ्यताओं, परंपराओं और धर्मों का सम्मिश्रण होते हुए भी आधुनिक है. यह एक स्वतंत्र गणतंत्र देश है. यहां बहुतायत में चीनी हैं, बाकी भारतीय, अंग्रेज, तमिल, बौद्ध, मुसलिम और ईसाई हैं.

हम ने मुस्तफा मौल की बहुत तारीफ सुनी थी. हम टैक्सी ले कर मुस्तफा मौल पहुंचे. यहां का एक सिंगापुरी डौलर भारत के 35 रुपए के बराबर था. मुस्तफा बहुत बड़ा मौल है. यहां चप्पलें, टीशर्ट, जैकेट, परफ्यूम आदि बहुत महंगे थे. हम लोग काफी थक चुके थे. रात भी हो गई थी. वापस होटल में आ कर सो गए.

सुबह उठ कर हम फटाफट तैयार हुए और नाश्ता कर के रेस्तरां से बाहर निकले. टैक्सी हमारी प्रतीक्षा में बाहर खड़ी थी. गाइड ने बताया कि सिंगापुर छोटा सा देश है और यही राजधानी भी है और यही शहर भी है. यहां चीनी, मले और तमिल लोग रहते हैं. अंग्रेजी, मंडारिन, मले और तमिल भाषा का प्रयोग किया जाता है.

रास्ते में उस ने कई पार्क दिखाए. एक पार्क में हम लोग रुके. वहां स्थापित जलसिंह यानी मरलौयन की विशालकाय मूर्ति दिखाते हुए गाइड ने कहा कि यह सिंगापुर का राष्ट्रीय चिह्न है. मर यानी जल और लौयन यानी सिंह. इसी सिंह के कारण इस देश का नाम सिंगापुर पड़ा. उस ने बताया कि भले ही चीनी यहां अधिक संख्या में हैं लेकिन वे अन्य जातियों से मिलजुल कर रहते हैं.

थोड़ी देर बाद हम सैंतोसा पार्क पहुंचे. इस विशाल पार्क की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती थी. विशालकाय मछलीगृह में लगभग 250 प्रकार की विभिन्न प्रजातियों की मछलियां तैर रही थीं. वहां से बाहर निकल कर डौल्फिन शो देखने के लिए आगे बढ़े. डौल्फिन बहुत प्रशिक्षित थी. उस के अलावा सी लौयन ने भी संगीत पर थिरक थिरक कर अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को रोमांचित किया.

वहां से हम लोग बाहर आए और आगे ‘इमेजिज औफ सिंगापुर’ में प्रविष्ट हुए. अंदर अद्भुत दृश्य देखने को मिले. सिंगापुर कैसे बना, इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को श्रव्यदृश्य प्रभावों के माध्यम से समाया गया था. प्रवेशद्वार पर टंगे तैलचित्रों का होंठ और आंखों की पुतलियों को हिला कर बोलना, धुएं की बोलती आकृति काफी सजीव जान पड़ती थी. सिंगापुर के रीतिरिवाजों की जानकारी बोलते पुतलों के माध्यम से दी गई थी. सबकुछ अद्भुत था. चायनीज, मले और तमिल लोगों की एकता का प्रतीक यह संग्रहालय यादगार था.

शाम साढ़े 7 बजे होने वाले ‘सौंग औफ सी’ शो देखने के लिए आगे समुद्र किनारे की ओर प्रस्थान करना था. ठीक साढ़े 7 बजे तेज संगीत की आवाज बंद हो गई और शुरू हुआ ‘सौंग औफ सी’. कार्टून कैरेक्टर पानी की बौछारों से बने परदे पर बोलने लगे. आग के गोले तेज आवाज के साथ फटने लगे. सीधी भाषा में बात करें तो लाइट ऐंड साउंड इफैक्ट का ऐसा संगम पहले कभी नहीं देखा.

आह से आहा तक

अगले दिन यूनिवर्सल स्टूडियो जाने का कार्यक्रम निश्चित था. सुबह ड्राइवर हमें लेने फिर हाजिर हुआ. उस ने हमें स्टूडियो में होने वाले कार्यक्रमों की छपी रूपरेखा थमाई जिस पर कुछ गोल निशान बने थे. अब हमें स्टूडियो में सिर्फ वही स्थान देखने थे जो उस के द्वारा चिह्नित थे.

हम ‘लौस्ट वर्ल्ड’ में प्रविष्ट हुए. यहां जुरासिक पार्क रैपिड स्क्वायर है यानी रिवर राफ्ट राइड है. इसी तरह कैनोपी फ्लायर है. यह झूला 3 सैकंड में तेज रफ्तार से झाड़ियों के बीच जिगजैग हो कर चलता है. इसी तरह ‘वाटर वर्ल्ड’ में ‘लाइव वाटर शो’ का प्रसारण हुआ.

इस के बाद ‘फौर फौर अवे’ में श्रैक नामक फोर डी ऐडवैंचर ऐनिमेशन फिल्म अत्यंत दिलचस्प थी. दर्शकों को चश्मे दिए गए थे. हमारी सीट में से पानी की फुहारें निकल कर मुंह पर आ रही थीं. फिल्म में घोड़े पर सवार हीरो दिखाई दे रहा था और घोड़े की तगड़तगड़ की आवाज के साथ हमारी सीटें भी तेजतेज हिलने लगीं. ऐसा लग रहा था मानो हम घोड़े पर सवार हों. मकडि़यां, तितलियां आदि फिल्म में दिखाई जा रही थीं लेकिन वे हमें अपनी आंखों के सामने लटकती महसूस हो रही थीं.

इस के बाद हम ‘ऐंशन इजिप्ट’ यानी प्राचीन मिस्र नामक हौल में ‘रिवेंज औफ मसीज’ में प्रविष्ट हुए. भीतर माहौल काफी भयानक लग रहा था. प्रवेशद्वार पर 2 भीमकाय पहरेदारों की मूर्तियां स्थापित थीं. अंदर से भयानक आवाजें आ रही थीं. रोशनी मद्धम थी.

आगे चल कर हमें एक ट्रेन झूले में बैठा दिया गया. वह झूला धीमी गति के साथ आगे बढ़ा. देखते ही देखते उस की गति बढ़ती चली गई. तेज, तेज, और तेज. धड़ाक, एक दीवार के सामने आ कर वह झटके से रुक गया. इस के साथ ही ‘कड़च’ की आवाज हुई और टूटी दीवार की दरारों में से कीड़ेकौकरोच दोनों ओर दीवारों पर रेंगते प्रतीत हुए. अभी हम समझ ही रहे थे कि यह क्या हुआ, हमारा झूला खुद ही वापस मुड़ा और तेज रफ्तार से हमें अंधेरी गुफा में ले गया. हम उत्तेजना से चीख रहे थे, चिल्ला रहे थे. चीखने से डर कम होता है, ऐसा मेरा मानना था. हमारी समझ में नहीं आ रहा था कि हम कहां हैं और कहां जा रहे हैं. हम अंधेरे के भंवर में थे. थोड़ी ही देर में हमें रोशनी दिखाई दी और इसी के साथ झूला रुक गया.

‘आह से आहा तक’. हम ने चैन की सांस ली. वह अद्भुत झूला हमसे आज भी भुलाए नहीं भूलता.

इस के बाद हम ‘न्यूयार्क’ में प्रविष्ट हुए जहां हौलीवुड स्टाइल में एक से एक दृश्य देखने को मिले. इसी प्रकार ‘हौलीवुड’ में भी शो दिखाया गया.

इस रोमांचक दिन के विषय में कुछ महत्त्वपूर्ण बातें मैं अवश्य बताना चाहूंगी. यहां फोटोग्राफर बिना पूछे पर्यटकों की फोटो खींच लेते हैं, फिर ऊंचे दामों पर बेचते हैं. स्टूडियो में खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ साथ ले जाना प्रतिबंधित था. अंदर कार्टून कैरेक्टर बने बहुरुपियों के साथ बच्चे खुशीखुशी फोटो खिंचवा रहे थे. अंदर कैसीनो भी थे और विश्वस्तरीय होटल भी. बूढ़े, बीमार लोगों के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध थीं. 7 बजे हमें टैक्सी ड्राइवर लेने आया. हम ने चैन की सांस ली. कल इस चकाचौंध भरे देश से हमारी वापसी होनी थी. हम रास्ते में मार्केट में उतर गए और ड्राइवर ने बच्चों को होटल में छोड़ दिया. 8 जनवरी को हमें वापस भारत लौटना था. नाश्ता कर के हम टैक्सी में बैठे और ड्राइवर ने हमें एअरपोर्ट छोड़ दिया.

डेढ़ घंटे की फ्लाइट के बाद हम बैंकौक एअरपोर्ट पहुंचे. यहां ढाई घंटे का विश्राम था. बैंकौक से दिल्ली साढ़े 3 घंटे का सफर था. यह यात्रा हमारे लिए यादगार साबित हुई.

विधवा बहू से ग्लैमरस है सास

समाज में निचले तबके और उपरी तबके में विधवा विवाह को लेकर सोंच भले ही बदल रही हो पर मध्यम वर्ग अभी भी इसको लेकर दकियानूसी सोंच रखता है. एंड टीवी के सीरियल एक विवाह ऐसा भीमें विधवा विवाह की कहानी को समाजिकता के साथ दिखाने की कोशिश हो रही है.

सीरियल में सास की भूमिका निभाने वाली तस्नीम शेख कहती हैं, समाज की सोंच को बदलने का काम टीवी की कहानियों और मीडिया के जरीये हो सकता है. जरूरत इस बात की है कि इस पहल को लगातार जनता के बीच रखा जाये तभी विधवा विवाह को लेकर समाज की सोंच बदल सकती है.

तस्नीम शेख सीरियल मे सिंधूरा मित्तल का किरदार निभा रही हैं. बहू का किरदार सोनाली निकम और बेटे की भूमिका अभिषेक मलिक निभा रहे हैं. करीब 8 साल के बाद वह टीवी सीरियलों में अपनी वापसी कर रही हैं.

मुम्बई की रहने वाली तस्नीम ने कई सीरियलों में अपने अभिनय का जादू दिखाया इसके बाद मर्चेंट नेवी में जौब करने वाले समीर नेरूलकर के साथ शादी कर ली. दोनों का प्रेमविवाह था. शादी के बाद तस्नीम की बेटी टिया का जन्म हुआ. बेटी के जन्म से पहले ही तस्नीम ने टीवी सीरियलों की दुनियां को छोड़ दिया और पूरी तरह से अपनी गृहस्थी में रचबस गई. बेटी टिया 7 साल की हो गई स्कूल जाने लगी और खुद को संभालने के लायक हो गई तो तस्नीम ने एक्टिंग की दुनिया में आने का फैसला किया.

तस्नीम कहती हैं, एक्टिंग के ऑफर तो बहुत पहले से मिल रहे थे. मैं रोनेधोन वाले सास बहू के किरदार से दूर कुछ अच्छी कहानी करना चाहती थी. ऐसे में जब एक विवाह ऐसा भीकी कहानी सुनी तो मुझे लगा कि यह रोल करना चाहिये. इसकी कहानी विधवा विवाह के आसपास घूमती है. सीरियल में मेरी बहू केवल विधवा ही नहीं है वह एक बेटे की मां है वह शादी के बाद अपने बेटे और पहले की सास के साथ आती है. अपने में यह अलग ही कहानी है. ऐसे मामले सामान्य रूप से कम है. पर समाज में ऐसी कहानियां है.

रियल लाइफ में एक बेटी की मां बनने के बाद सीरियल में बेहद ग्लैमरस सास की भूमिका निभाने के लिये क्या उपाय किये ?

तस्नीम शेख कहती हैं कि मैंने मां बनने के बाद से ही अपना वजन कम करना शुरू कर दिया था. अपनी डाइट और एक्सरसाइज करके मनचाहा फीगर हासिल किया. यह बात सच है कि सीरियल में मैं अपनी बहू से अधिक ग्लैमरस दिखती हूं. मुझे सास का रोल करने में कोई हिचक नहीं हुई. क्योंकि यह कहानी पंसद है.

आपने अलग धर्म में शादी की है.आज भी आप अपने नाम से पहचानी जाती है कभी कोई परेशानी नहीं हुई ?

तस्नीम कहती हैं, मैंने और समीर ने जब शादी की तो बहुत कुछ सोंच कर फैसला किया था. हमारे परिवार बहुत खुले विचारों के हैं. मेरी मां गुजराती हिन्दू और पापा इलाहाबाद के मुसलिम परिवार से हैं. ऐसे में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई. हमारी बेटी का नाम टिया है. उसकी चाहत का ध्यान रखकर ही मैं वापस एक्टिंग की दुनियां में आई हूं. मेरा मानना है कि अगर पति-पत्नी के बीच की रिलेशनशिप अच्छी है तो जाति और धर्म कोई मतलब नहीं रखते’.

तस्नीम को पेंटिंग का शौक है. जब वह एक्टिंग से दूर थी तो पेटिंग बनाना सीखा और फिर अपनी बनाई पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाई और उसको बेचा. तस्नीम की बनाई कई पेंटिंग 1 से 2 लाख तक में बिकी. तस्नीम कहती हैं,  पेंटिंग मेरे लिये हौबी है. मैं एक्टिंग करते हुये समय मिलने पर अपनी हौबी को करना चाहती हूं. तस्नीम कहती हैं, मेरा मानना है कि अगर महिलाओं को समाज में बराबरी का हक देना है तो विधवा विवाह और शादी की आजादी जैसे मुद्दो पर अपनी सोंच बदलनी होगी. तभी सही बदलाव हो सकेगा.

सेहत बनाए फूलगोभी पिज्जा

आपने फूलगोभी पिज्जा खाया है! अगर नहीं तो जरूर ट्राई करें सेहतमंद फूलगोभी पिज्जा.

सामग्री

1 कप मैदा

1/2 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

1/2 कप फूलगोभी कसी हुई

6 बड़े चम्मच चीज

1 छोटा चम्मच मक्खन

3 बड़े चम्मच पिज्जा सौस 

नमक स्वादानुसार

विधि

मैदे को छान कर उस में नमक, बेकिंग पाउडर, 2 बड़े चम्मच चीज, फूलगोभी व मक्खन मिला कर पानी से गूंध लें. गुंधे आटे को 2 भागों में बांट कर बेल लें. एक परत पर 2 बड़े चम्मच चीज डालें व दूसरी परत लगा कर गरम ओवन में 180 डिग्री पर 9-10 मिनट बेक करें. इस पर पिज्जा सौस व चीज डालें और फिर चीज के पिघलने तक बेक करें. गरमगरम सर्व करें.

व्यंजन सहयोग: अनुपमा गुप्ता

2017 मेकअप मंत्रा

औल टाइम हौट, गौर्जियस और फैब्यूलस लुक पाना चाहती हैं, तो जरूरत है फैशन ब्यूटी के बदलते ट्रैंड को जान कर, समझ कर और उसे अपना कर अपनी पर्सनैलिटी में निखार लाने की. मेकअप ट्रैंड को फौलो कर के आप अपनी खूबसूरती में निखार ला कर पा सकती हैं टैन औन टैन ब्यूटी लुक.

क्रिस्टल क्लीयर मेकअप

नए साल में क्रिस्टल क्लीयर मेकअप का चलन रहेगा, जो ट्रांसपैरेंट मेकअप का ही ऐडवांस रूप है और पहले से कहीं बेहतर. इसलिए अगर आप फ्रैश, नैचुरल व क्लीयर सौफ्ट लुक पाना चाहती हैं, तो क्रिस्टल क्लीयर मेकअप आप के लिए बैस्ट औप्शन है. इसलिए अब मेकअप प्रोडक्ट्स खरीदते समय यह ध्यान रखें कि कलर शेड्स ज्यादा लाउडी न हों.

क्रिस्टल क्लीयर मेकअप में अपनी स्किनटोन के अनुसार नौर्मल फाउंडेशन का चुनाव न कर के स्किन ल्यूमिनाइजर फाउंडेशन का चुनाव करें. इस में मौजूद नैचुरल पिगमैंट्स आप की स्किन को सौफ्ट लुक देने में ज्यादा असरदार होते हैं. यह फाउंडेशन अनईवन स्किनटोन को विजुलाइज हुए बिना ईवन टोन देता है.

आईशैडो में नैचुरल पेस्टल शेड्स, एचडी वौल्यूमाइजिंग मसकारा व जैल लाइनर, चीक्सबोन पर लाइट ब्लशर स्ट्रोक्स हाईलाइटर के साथ, आर्टिफिशियल लैशेज, लौंग लास्टिंग हाईग्लौस या लिपस्टिक से अपने लुक को कंप्लीट करें. ओवर मेकअप की हैबिट को बायबाय कहें. क्रिस्टल क्लीयर मेकअप प्रोडक्ट के लिए बौबी ब्राउन, लोरियल आदि बेहतरीन विकल्प हैं.

ग्राफिक आई मेकअप

इस बार ब्यूटी सीजन में पिछले साल के मुकाबले स्मोकी आईज के साथ ग्राफिक लाइनर का चलन रहेगा. जहां एक ओर स्मोकी आईज इफैक्ट के लिए अपर और लोअर लिड पर लाइनर व काजल को आईशेड के साथ स्मज कर के स्मोकी लुक क्रिएट किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर ग्राफिक लाइनर में बिना स्मज इफैक्ट के आंखों को लाइनर से स्पष्ट व मौडर्न लुक का चलन रहेगा. आईशेड्स में वाईब्रेंट, मिक्स फैमिली कलर शेड्स, फाइन पार्टिकल शिमर, निओन व डस्टी कलर शेड्स का चलन रहेगा.

हाई शाइन

इस सीजन में लिप्स की ब्यूटी को ऐनहांस करने के लिए लिपस्टिक के बोल्ड शेड्स को हाई शाइन ग्लौस के साथ डिफाइन करें. एक तरफ क्रिस्टल क्लीयर मेकअप का चलन रहेगा तो दूसरी तरफ लिप्स की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए ब्लड रैड, बरगंडी, मैरून, प्लम, पेस्टल, ब्राइट पिंक और न्यूड नैचुरल कलर का क्रेज देखने को मिलेगा. मेबलिन, कलरबार, क्रायलोन, लैक्मे आदि विकल्प हैं.

आर्च आईब्रोज विद ब्रोज मेकअप

बिना किसी मेकअप के भी केवल परफैक्ट आईब्रोज आप के चेहरे की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा सकती हैं. स्पैशियली आर्च शेप विद लौंग लैंथ आईब्रोज का चलन रहेगा. इस के साथ लास्ट कलर आईब्रोज को आप कलर आईब्रोज मेकअप पेलेट की मदद से आइडियल लुक दे सकती हैं. हलकी आंखों पर रोज रात को जैतून के तेल में आईब्रो पैंसिल डुबो कर लगाएं व ट्रांसपैरेंट मसकारे से उन्हें सैट करें.

ब्लांड हेयर

बालों की खूबसूरती को निखारने के लिए कलर ब्लांड लोलाइट व हाईलाइट का अलग ही क्रेज देखने को मिलेगा. इस के साथ मल्टीकलर हेयर टैक्स्चर टैंपरेरी, थिन हाईलाइट, चंकी हाईलाइट, ओंब्रे हाईलाइट, टैक्स्चर वौल्यूम हाईलाइट और फौइल हाईलाइट आदि के बेहतरीन औप्शन आप ट्राई कर सकती हैं.

कलर लैशेज

यह सीजन फनलविंग व ऐक्सपैरिमैंट का रहेगा. पलकों की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल लैशेज का चलन जोरों पर रहेगा. आर्टिफिशियल लैशेज में नैचुरल लुकिंग लैशेज के स्थान पर रनवे लैशेज, डबलअप लैशेज, ऐजी लैशेज, कलर लैशेज, ज्वैल, कोर्सेट, कर्ली, स्पार्की आदि बेहतर विकल्प रहेंगे.

3डी नेल आर्ट

मेकअप मंत्रा में अगला नंबर नेल आर्ट व नेल पेंट्स का है. स्पैशियली हौट नेल जैल कलर, न्यूड, मैटेलिक गोल्ड, मैग्नेटिक कलर, ब्रौंज, डीप वाइन, निओन, वाइब्रेट कलर आदि के अलावा नेल आर्ट में 3 डी, फैंटेसी, हाफ मून, स्टोन व फ्लौवर नेल आर्ट, ऐक्वा नेल आर्ट, थीम बेस नेल आर्ट्र, फ्रैंच विद स्टोन नेल आर्ट, टू ऐंड थ्री कलर नेल आर्ट, पेपर नेल आर्ट, मारबल नेल आर्ट, डौट, प्रिंटेड नेल आर्ट का चलन रहेगा. इस के अलावा नेल आर्ट किट व नेल स्टीकर की मदद से आप खुद भी चंद मिनटों में नेल डिजाइन बना सकती हैं.

डिजाइनर ड्रैस

आखिरी ब्यूटी फैशन मंत्रा है डिजाइनर ड्रैस, जिस में अनारकली ड्रैस, लहंगाचोली, डिजाइनर ब्लाउज विद लाइट वर्क साड़ी, डिजाइनर साड़ी विद कंट्रास्ट कलर, स्टाइलिश गाउन, स्टाइलिश कुरती, डिजिटल प्रिंट साड़ी, ड्रैपिंग साड़ी, ऐथनिक डिजाइन साड़ी, हैंडवर्क साड़ी, नैट साड़ी, वन मिनट ड्रैप साड़ी, स्लिम लुक

साड़ी आदि.

फैब्रिक कलर की बात करें, तो पेस्टल के साथ बोल्ड कलर का मिक्समैच कौंबिनेशन काफी पौपुलर रहेगा. इस के अलावा निओन, मल्टी कलर, क्रीम विद डार्क मैरून ब्लू कलर कौंबिनेशन, पिंक विद औक्सीडाइज कलर, गोल्ड और ऐक्वा फ्यूशिया कलर औन डिमांड का चलन रहेगा.                             

हेयरस्टाइल

केशों को रिंगलैट्स, शाइन, स्ट्रेटनिंग, क्रिपिंग, हौट रोलर, फिंगर वेव आदि से न्यू लुक दिया जाएगा. साथ ही कर्ली फंकी पोनी, कर्ल विद फ्रिंज, साइड बन, फ्रैंच पोनीबन, फिशटेल लूज पोनी व बन, रैट्रो बन, हाई बन, डबल ऐंड ट्रिपल ट्विस्ट नौट, नीडिल कर्ल, फंकी बोल्ड बन आदि स्टाइल का क्रेज रहेगा, जिसे विभिन्न प्रकार की ऐक्सैसरीज से कंप्लीट कर के फाइनल टच दिया जाएगा.

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